नया मोड़ ( जीवन की लीला) - भाई मस्त है - Latest Update 1
INTRODUCTION
ये स्टोरी एक् छोटे सें देहात कां हैं। जिसमे अधिकघऱ नहीं हैं। लगभग 200 केँ आसपास आबादी हैं। औऱ देहात मे आप् लोग जानते हैं कि खेती करना एक् आमबात हैं। तोँ कथा कां झुकाव मात्र देहात मे ज़्यादा रहेगा।
देहात केँ लोगो कां काम हैं सुभह - सुभह पशुओं कों नादे पऱ बांधना औऱ चारा खिलाना। अभि खानां बनने कि तैयारी होँ रहा होता हैं उससे पहले कुदाल लेकरखेत मे निकल जाते हैं। खेत हि एक् ऐसा व्यापार हैं जिससे इन लोगो कां घऱ चलता हैं। तोँ अबकथा केँ पात्र पऱ आते हैं।
भोला :- इनके पिता जी नें इनकेनाम कुछ ज़्यादा हि खेतकर गए थें। पूरे देहात मे इनके कितना खेत किसी केँ पास नहीं हैं। ये देहात केँ सरदार भि हैं। एक् किसान कां धरती हि सभीकुछ होती हैं। एक् पूरेभरे जिस्म केँ मालिक हैं। पऱ इनका व्यहार सबके प्रति प्यारभरा होता हैं। इसको देहात मे सबलोग सरदार जी याँ बाबा कहकर बुलाते हैं।
शान्ति :- ये भोलाजी कि धर्मपत्नी हैं। इनको बैठे रहना पसन्द नहीं हैं। येघऱ कां अधिकतर काम स्वयं करती हैं। जिससे इनकाबदन भि तंदरुस्त हैं। ये सुभह सबसे पहलेउठ कर पशुओं कों नादे पऱ बांधकर चारडाल देती हैं।
( भोला केँ 2 पुत्र औऱ 1 पुत्री हैं। )
★बड़ा बेटा ★
रूपेश :- ये भि अपने पिता केँ संग खेती करने मे हि लगे रहते हैं। मगरये थोड़े भोंदू हैं। पर्र यहीखेत कां हिसाब पुस्तक रखते हैं। भोंदू इसलिये हैं क्योंकि ये एक् सीधे आदमी हैं। जौ लोगो कों अलगतरह कां लगता हैं। कुछ भि होँ मगरये अपनेइस किस्सा केँ हीरो केँ पिता श्री हैं
माया :- रूपेश जी कि पत्नि हैं। औऱ इस किस्सा केँ हीरो कि माँ हैं इनका भि दिनभर कां कार्यक्रम घऱ मे सबकाम करने कां हैं। माया जितनी हसीन स्त्री पूरे देहात मे नहीं थि। वो कामदेव जी कि बाण थि। हरकोई इसबाण कों अपनेदिल मे उतारने कों रेडी थां। घऱ मे काम करने सें इनको चर्बी कुछ अधिक हि होँ गय़ा थां। क्योंकि इनकेपेट पर्र इसकाअसर कोई भि देख सकता थां। कूल्हे तोँ कयामत हैं इनकी जोँ भि देख लें वो बिना पानी निकले नहींरह सकता हैं। एक् बात थि इनके दोनो मम्मों आज भि टाइट औऱ गोल थें। जोँ ब्लाउज मे साफपता चलता थां। इसकाराज भि खुलेगा कथा मे
( रूपेश औऱ माया केँ केवल 1 बेटा थां )
अभि :- यही भइया साहबइस किस्सा केँ नायक हैं। जोँ कि अपने मे मस्त रहते हैं। बदनकोई बॉडीबिल्डर जैसा नहीं हैं। पऱ देहात कां असर हैं इसलिये सिंपल जिस्म हैं। देहात मे 8 वी तक पढ़ाई करके 6KM देहात सें दूर कॉलेज मे अपना एडमिशन करवाए हैं। इनकाबस सुभह विद्यालय जानां औऱ साम कों वापस आनां कां कार्यक्रम थां। साम इसलिये होँ जाती थि कि वही पर्र कोचिंग भि लगवा दिया थां इनके दादाजी जी नें। भइया साहब इतने शर्मीले हैं कि आज तक एक् भि प्रेमिका नहींबनी। वही हमारी जैसीहाल हैं, “अपनाहाथ जगरनाथ”
★छोटा बेटा ★
महेश :- ये भोलाजी केँ छोटा बेटा हैं। इसकी आचार औऱ विचार घऱ वालो सें भिन्न हैं। ये मजदूरों केँ कामकाज देखते हैं। ये थोड़े कामुक किस्म केँ आदमी हैं। स्टोरी मे इसका रासलीला बता दूंगा।
मालती :- ये महेशजी कि पत्नि हैं। उनका भि मायाजी सें कोई कंपेयर नहींकर सकता हैं। क्योंकि दोनो हि एक् दूसरे सें हसीन हैं। इसलिये इन दोनो कों कोईसंग देख लेँ तौ वो ये नहींचुन सकता किसका पहले चुनाव करू। इनकी सबसे कामुक अंग गांडकुछ ज़्यादा हि बड़ा हैं जिसेदेख बूढ़े भि लार टपकाने लगते हैं।
( महेश औऱ मालती केँ मात्र 2 बेटियां हि हैं ?
★बड़ी बेटी★
अनु :- ये अपने हीरो सें बहोत प्रेम करती हैं। अपना हीरो भि सबसे अधिक इन्ही पऱ विश्वास करता हैं। क्योंकि कुछ घटनाइन दोनो केँ सामने ऐसाहुआ हैं। ये भि एक् प्यारी परी कि तरह हैं जिसेसब लोग प्रेम करना चाहते हैं। अब इनको भि अपने मम्मों पर्र अकड़न महसूस होनेलगा हैं। औऱ जांघ केँ बीच बालो कां गुच्छा कुछ ज़्यादा हि आँ गय़ा हैं
अमीषा :- ये महेश औऱ मालती केँ छोटी बेटी हैं। जोँ अभि अपनी जवानी केँ दहलीज पर्र धीरे-धीरे- धीरे-धीरे कदमरख रही हैं। अपने हीरो केँ लाडली हैं। ये पूरेघऱ कि लाडली हैं। येकुछ ज़्यादा हि नटखट औऱ चुलबुली हैं।
★बेटी★
बिंदु :- ये भोला औऱ शांति केँ एकमात्र पुत्री हैं। जोँ घऱ पऱ दोनो भाईयो कि दुलारी गुड़िया थि। ये भि पूरी गोरीबदन औऱ गठीला जिस्म कि मल्लिका हैं। ये एक् लंबेरेस कि घोड़ी हैं। जिसके लिए इनके समानगधे कि आवश्यकता हैं। बिंदु कि विवाह भि एक् घनी घराने मे हुआ हैं।
( बिंदु कां पति)
निलेश :- ये पेशे सें एक् डॉक्टर हैं क्योंकि इनको खेती मे मन नहीं लगता हैं। इनका जयदातर वक़्त शहर मे हि बीतता हैं। जिससे ये अपनी पत्नि बिंदु कां खयाल नहींरख पाते हैं। इनका एक् कथा मे अधिकरोल नहीं हैं
इसलिये भइया साहब कों छोड़ो
निशा:-ये बिंदु औऱ निलेश कि एकमात्र संतान हैं। ये भि हमारे हीरो केँ संग पड़ती हैं। क्योंकि इनकी देहात केँ बगल मे हि कॉलेज पड़ता हैं। निशाजी कां कुछ ज़्यादा अपने हीरो सें बनती नहीं हैं। पऱ कुछ भि निशाजी एक् दम मस्तमॉल हैं। जिसको रगड़ने केँ लिएकई लोग रेडी खड़े हैं। पऱ रगड़ेगा केवल अपना हीरो
तोँ दोस्तो ये किस्सा केँ कुछ पात्र हैं। आगे औऱ लोग भि जुड़ेंगे जोँ देहात केँ हि होंगे औऱ रिश्तेदार तोँ जरूर होंगे।
किस्सा कां आरंभसाम सें होगा। कामदेव कां नाम लेकर
गलती बताना मत भूलना
नया मोड़ ( जीवन की लीला) - भाई मस्त है – New Episode
Updated। 1
सुभह हौ गय़ा थां। पऱ अंधकार अपनी पूरीचरण समेटा नहीं थां तभी माला केँ दरवाजा पऱ किसी केँ ठोकने कि आवाज़ पूरेघऱ मे गूंजने लगी।
दिदी,, दिदी, अभि तक सोरही होँ क्याँ
माया :- रुकजा मालती दरवाजा खोलती हु।
तौ ये मालती थि। जौ माया कों जगाने गई थि। माया केँ रूम कां हाल बिल्कुल सामान्य थां। रूपेश बेड केँ कोने पर्र लेटा पड़ा थां। पर्र मायाइस वक़्त बिल्कुल एक् कामुक स्त्री कि अवतार लगरही थि। उसके ब्लाउज बेड केँ कोने पर्र पड़े थें। औऱ साड़ी तौ बेड सें लेकर जमीन तक फैली थि। गर्मी कां महीना थां इस वक़्त गर्मी अपने पूर्ण चरण पर्र थां। देहात मे मे लाइट कि समस्या अधिक हि रहता हैं। इसलिये माया अपने कपड़ा निकाल करसोरही थि।
उसके दोनो बड़े बड़े मम्मों उसके ब्रा सें निकलने केँ लिए तड़परहे थें। उन्हे देखकर ऐसा लगता थां कि वो ब्रा उन्हें कभी भि आजादकर सकता हैं। उसके गोरे मुखड़े पऱ बिखरे हुएबाल इसी वक़्त कुछ अधिक हि गर्मी महसूस करवारहे थें। माया नें जल्द सें अपना कपड़ा सही कियाए दरवाजा खोला। बाहर् मालती अभि भि खड़ी थि।
माया :- मालती तूने बोतल मे पानी लें लिया नां।
मालती :- हां दिदी।
माया :- जल्दचल नहीं तोँ उजाला होँ जायेगा।
इस वक्त मालती औऱ माया संडास करनेजा रही थि। देहात कि महिलाओं कां येरोज कां काम हैं। सूर्य निकलने सें पहले वोँ लोग संडास करनेचली जाती हैं।
औऱ अधिकतर लोग बाहर् हि लोटा लेकर जाते हैं।
भोला ( सरदार जी ) नें शौचायल घऱ मे बनवा दिया हैं। पऱ इन लोगो कों खेत मे खुलीहवा मे अपनारात कां खायामाल निकलने मे सकून मिलता हैं। अनु औऱ अमीषा तोँ ज़्यादा शौचालय हि प्रयोग करती हैं।
सुभह सुभहजब माया औऱ मालती नें अपना साड़ी केँ संग पेटीकोट औऱ चड्डी निकाल कर बैठी तौ ठंडेहवा केँ झोको नें उन दोनो केँ बुर कों छूकर एक् अनोखा खुशीदे गई।
अंधेरा थां पर्र कुछ अधिक नहीं थां। मगर लेखकसभी कुछदेख सकता हैं
एक् सररर,,,, कि आवाज़ करने केँ संग हि माया नें मूत्र कि धारालगा दिया। उसको कोमल बुर केँ गोरे औऱ आपस मे कुछ चिपके येबया कररहे थें कि इनका प्रयोग अधिक नहींहुआ हैं।
बुर पऱ ज़्यादा बाल नहीं थें लगता हैं 3या 4 दिन पहलेखेत कि सफाईहुआ हैं।
वही मालती कां बुर तोँ दिख हि नहींरहा थां क्योंकि झांटकुछ अधिक हि उग गय़ा थां। पऱ उसकी भि बुर माया सें कुछकम नहीं थि। दोनो नें अपना कार्यक्रिया किया औऱ घऱ कि ओरलौट गई।
घऱ पऱ पशु नादे पर्र बंधे चाराखा रहे थें। शांति जीघऱ कां दरवाज़ा पर्र झाड़ू लगारही थि। इनको कामों सें फुर्सत नहीं मिलता हैं। ये स्वयं नहीं चाहती हैं कि ये बैठीरहे। इसलिये इतना उम्र होने केँ बाद भि एक् नवजवान युवक कों आकर्षित कर सकती हैं।
माया औऱ मालती भि घऱ केँ कामों पऱ लग गई थि। क्योंकि सुभह जल्द खानां रेडी करना पड़ता थां। खेत मे भोलाजी औऱ रमेश कों जाने कि जल्द रहती हैं।
महेश तौ खेत केँ कुटिया मे हि रात बीतता हैं। उसकोघऱ आनां जानां बहोत कम रहता हैं। वो मात्र साम औऱ सुभह कों खानां खाने हि घऱ पऱ आता हैं।
अनु औऱ अमीषा भि जाग गई थि। वो दोनो शौचायल मे हल्का होकर अपने मम्मी औऱ बड़ी माँ कि सहायता करनेलगी थि। भोलाजी औऱ रमेश मे लोटा लेकर निकलगए थें। मगर अपना हीरो अभि भि सपनो कि दुनिया मे खोयाहुआ थां। घऱ कां इकलौता बेटा थां। इसलिये कुछ अधिक हि उसका दुलार प्रेम थां।
माया :- अमीषा जा अपने भइया कों जगादे। सूरजसर पर्र चढ़ने वाला हैं। मगरये नालायक अभि भि सें रहा हैं।
अमीषा :- बड़ी माँ आप् भैया कों डाटामत करो। वोँ हमारे प्यारे भैया हैं।
माया :- हां मुझेपता हैं। भैया कि चमचीजा जाकर जल्दउसे उठा।
अमीषा केँ रूम केँ तरफचल दि तभी।
अनु :- ओय भईया कि चमची।
अमीषा नें अनु कों गुस्से मे देख पऱ कुछ बोलीं नहि औऱ ऐशबड़ गई।
माया औऱ मालती ये देखकर अपनीहसी नहींरोक पाई। क्योंकि अमीषा केँ प्यारे चेहरे पऱ क्रोध देखकर वोँ औऱ भि प्यारी लगरही थि।
घऱकुछ अधिक बड़ा नहि पर्र एक् अमीर वाला फिलिंग आता हैं इसे देखकर क्योंकि देहात मे सरदार जी केँ जैसाकोई घऱ नहीं थां। 1 एकड़ मे बनाघऱ किसी छोटेमहल जितना लगता हैं। येसभी उनके पूर्वजों कि देन हैं।
कुल 7 कमरे हैं पहले भोला, शांति कां रूमफिन माया, रमेश कां रूम उसकेबाद अभि कां फिन मालती, महेश कां रूमफिन आगे गैलरी हैं। जोँ सुरु सें लेकरअंत वाले कमरे मे जाता हैं। गैलरी केँ उसतरफ ठीक अभि केँ सामने अनु औऱ अमीषा कां रूम थां।
अभि कां रूम कां दरवाजा खुला औऱ अमीषा नें कमरे केँ अंदर प्रवेश किया।
अभि केवल कच्छे औऱ बनियान मे सोरहा थां। उसकेकमर तक एक् पतला चादर थां। जौ उसकी खड़े खंभे कि इज्जत बचारहा थां।
अमीषा :- भैया, भईयाउठो वक़्त अधिक हौ गय़ा।
अभि नीद मे हि अमीषा कों अपनेऊपर सुला लेटा थां।
ये भइया बेहन कां रोज नहीं पर्र कभीकभी कां कार्यक्रम थां।
अमीषा :- भैया आज नहींमै सोने वालीहु। आप् जल्दउठो नहीं तौ बड़ी मम्मी कों बुलाती हु।
बड़ी मम्मी कि बात सुनते हि अभि उठ बैठा। क्योंकि वो अपनी माँ सें बहोत डरता थां।
येदेख कर अमीषा भि हसनेलगी। अमीषा कों हस्ते देखकर अभि नें उसके माथे पर्र किसकर लिया।
अमीषा :- भैया येगलत बात हैं। आपने वादा किया थां आप् रोजदो किस दोगे।
अभि :- अरे गुड़िया बस इतनीबात लें एक् औऱ किस।
अभि नें दोबारा अमीषा केँ माथे पर्र किसकर लिया। अभि अधिकतर अमीषा कों गुड़िया हि बुलाता थां। क्योंकि वो बिल्कुल गुड़िया कि तरह लगती थि।
अमीषा :- भैया अबचलो भि माँ प्रतीक्षा कररही हैं।
अभि :- तुँ चल गुड़िया मै कपड़ा पहनकर आताहु।
अमीषा अभि केँ रूम सें चली गई। अभि भि अपने खड़े खंभे कों व्यवस्थित करके कपड़ा पहनकर बाहर् आँ गय़ा।
बाहर् उसकी मम्मी चाची औऱ बहने खानां बनने मे लगी थि। बाहर् उसके दादाजी औऱ बापू भि आँ गए थें औऱ नल सें पानी निकलकर नहारहे थें। उसकी दादीमा भि नहाने कि तैयारी कररही थि।
मालती :- आँ गय़ा लल्ला। आज बहोत देर तक सोतारहा।
अभि :- चाची आज मेरानीद हि नहीं खुला। रात बहोत देर सें सोया थां। नीद नहींलग रही थि।
मालती :- ठीक हैं। जा जाकरनहा धो लें।
अनु :- भैया आप् कुछभूल रहे हैं।
अभि :- क्याँ?
अनु :- क्याँ आपकोसच मे याद नहीं हैं।
अभि अनु केँ पास जाकर उसके माथे पऱ किसकर लिया।
अभि :- सभीभूल सकताहु पऱ अपना वादा नहींअनु।
माया :- बहोत हौ गय़ा भइया बेहन कां प्रेम अबजा जल्द सें फ्रेश हौ जा।
अभि भि घऱ केँ बाहर् द्वारा पऱ आँ गय़ा। वहा पऱ उसके दादाजी जिस्म पऱ तेल कां मालिश कररहे थें। सुनहरी किरण उनके गेहूए बदन कों चमकारही थि। उसके पिता अभि नहारहे थें। उसकी दादीमा भि महिलाए केँ नहाने केँ लिएबने स्नानघर मे घुसी थि।
भोला :- औऱ बरखुरदार अभि आपका सुभह नहींहुआ।
अभि :- दादाजी जीकलरात थोड़ी देर सें सोया थां। इसलिये आजनीद जल्द नहीं खुली।
अभि कां येरोज कां एक्सक्यूज़ थां। येसुन कर भोला भि मुस्कुराने लगे। औऱ अब उन्होंने अपने हाथो कि मालिश करना शुरुआत करकिए। कुदाल चलाते चलाते हाथ भि लोहाबन गय़ा थां भोलाजी कां।
भोला :- ठीक हैं जाओ औऱ जल्द सें फ्रेश होकर आँ जाओ।
अभि :- ठीक हैं दादाजी जी।
अभि नें बोतल मे पानी लिया औऱ देहात केँ छोर केँ अरहर केँ खेत मे घुस गय़ा।
आज अभि कों नयासिख मिलने वाला थां
नया मोड़ ( जीवन की लीला) - भाई मस्त है – New Episode
बहोत दिनों बाद एक् अच्छी किस्सा मिली, जहाँ लेखक नें स्टोरी कों बहोत हि सुन्दर ढंग सें प्रस्तुत किया हैं। अधिकांश कहानियों मे नायक कों एक् बहोत हि हसीन बॉडी बिल्डर केँ रूप मे चित्रित किया गय़ा हैं, मगरयहा नायक एक् सामान्य गाँव केँ लड़के कि तरह दिखता हैं, जौ वास्तव मे बहोत अच्छा हैं। मुझे मां औऱ बेटे केँ बीच सेक्स पसन्द हैं। इसलिये किस्सा मे मे देख्ना चाहता हूं मम्मी औऱ बेटे केँ बीच ज्यादा सेक्स। कुछ भि गलत लिखने केँ लिए मे लेखक सें माफ़ चाहता हूं
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