~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 14
आगे कि किस्सा कुछ किस्सा आखिरी (नीलेश कि बेहन) कि जुबानी -
मे, भैय्या केँ होंठो कों चूसेजा रही थि औऱ इसमें भैय्या भि मेरा पूरासंग देरहे थें, ऐसे हि हम् चुम्बन करतेरहे जबतक एक् दूसरे कों सांस लेने मे दिक्कत नाँ होती। फिन सांस लेने केँ बादफिन हम् एक्-दूसरे होंठो कों चूसने लगते।
भैय्या केँ होंठो कों चूसने मे इतनामजा आँ रहा हैं कि मे उनके होंठो कों छोड़ना हि नहि चाहती, मगर सांस लेने केँ बीच-बीच मे मुझे रुकना पड़ता। मेरे द्वारा चुम्बन किए जाने सें भैय्या केँ बदन मे उत्तेजना बढ़ने लगी, इसका आभास मुझेतब हुआजब भैय्या केँ लंड नें मेरे योनि केँ आसपास रगड़खा रहा थां। हम् दोनों अभि कपड़ों मे थें, मगर भैय्या केँ लंड कां पूरीतरह आभास होँ रहा थां।
मुझे औऱ भैय्या कों पता हि नहि चला कि हम् कितनी देर सें एक् दूसरे केँ होंठो कां रसपान किएजा रहें। मैंने अबआगे बढ़ने कि सोची औऱ भैय्या केँ हाथों कों अपने चूतड़ों पर्र रख दिया, जैसे हि उनकेहाथ मेरे चूतड़ों पऱ पड़े वोँ उन्हें सहलाने लगे। इस दौरान हमारा चुम्बन जारी थां। भैय्या केँ द्वारा मेरे चूतड़ों कों सहलाने सें मेरेबदन मे भि काम अग्नि भड़कने लगी।
मैंने चुम्बन तोड़ा औऱ भैय्या केँ हाथ भि मेरे चूतड़ों सें हटगए। मैंने, भैय्या कि तरफ देखा वोँ कुछसोच रहे थें, मे उनकेऊपर सें नहि हटी। कुछ देरबाद मैंने भैय्या कां एक् हाथ अपनेहाथ मे लेकर अपने एक् उभार (मम्मों) पऱ रख दिया, कपड़ों केँ ऊपर सें भि मेरे उभार (मम्मों) कां आभास भैय्या कों हौ गय़ा। वोँ कुछ बोलने वाले थें, मगर उसके पहले हि भैय्या केँ हाथ पर्र मेराहाथ थां तौ मैंने उसेजोर सें दबा दिया। जिसके कारण मेरे मुंह सें एक् "आह्हहह" निकल गई।
मेरीइस हरकत सें भैय्या क्रोध हौ गए औऱ मुझे अपनेऊपर सें हटाकर बाहर् जानेलगे। मैंने उनकाहाथ पकड़कर उन्हें रोका, वोँ बोले मैंने तुम्हें प्रेम करने कां कहा थां, मगर तुमने मेरीबात नहि मानी।
भैय्या, मे तोँ आप् कों प्रेम हि कररही हूं।
"पायल, हमने प्रेम मे मात्र चुम्बन हि किया थां, यहसभी कभी नहि किया थां। "
भैय्या, मे जानती हूं कि हमनें केवल चुम्बन हि किया थां, मगर हम् आगे बढ़ते उसके पहले हि हम् अलग हौ गए।
"पायल, यह ग़लत हैं हमें चुम्बन केँ आगे नहि बढ़ सकते हैं औऱ यह भि केवल तुम्हारी खुशी केँ लिएकर रहा हूं। "
भैय्या, आप् मेरी आंखो मे देखकर बोलो कि आप् कभी मुझे पूरा प्रेम नहि करना चाहते थें, केवल चुम्बन हि करना चाहते थें।
"पायल, मे मात्र चुम्बन हि करना चाहता थां"
भैय्या, यहबात आप् मेरी आंखों मे देखकर बोलो।
"पायल, मे मात्र." (आखिरी कि आंखों मे देखते हुए। )
क्याँ हुआ ? नहि कह सकते आप् मे जानती हूं कि आप् भि मुझे प्रेम करना चाहते थें, मगर क़िस्मत केँ कारण नहि करसके। आज किस्तम नें आपको औऱ मुझे मौका दिया हैं फिन भि आप् अपनी क़िस्मत सें मुंह मोड़कर दौड़ना चाहते हैं।
"हां, मानता हूं कि मे भि तुम्हें प्रेम करना चाहता थां, मगर
अब यह ग़लत होगा। "
मुझेकोई परवाह नहि कि क्याँ सही हैं ? औऱ क्याँ ग़लत हैं ?
मे केवल आपकेसंग प्रेम केँ लम्हा बिताना चाहती हूं।
मे अपना नाइट गाऊन उतारकर भैय्या सें चिपककर उनके होंठो कों चूसने नें लगती हूं, थोड़ी देरबाद भैय्या भि मेरे होठों कों चूसने लगते हैं। यह चुम्बन इतना लम्बा चला कि मुझेलगा कि यदि चुम्बन नहि टूटा तोँ जान हि निकल जायेगी।
भैय्या कों एहसाह हुआ कि मुझे सांस लेने मे ज़्यादा परेशानी होँ रही हैं तौ उन्होंने अपने होंठो कि पकड़ ढीलीकर दि। जिसे मे उनके होंठो सें अलग होकर अपनी उखड़ती सांसों कों सम्हाला।
कुछ लम्हा बाद हि भैय्या नें फिन सें मेरे होंठो कों अपने होंठों सें जकड़ा औऱ चूसने लगे। इस बार उन्होंने अपनेहाथ मेरे पीछे लेँ जाकर मेरे चूतड़ों पऱ रखदिए औऱ मुझे अपनीतरफ खींच लिया।
भैय्या, अब मेरे होठों कों चूसने केँ संग मेरे चूतड़ों कों भि सहलारहे थें। उनका लंड भि लोअर मे खड़ा होँ चुका थां, जोँ मेरे योनि केँ ऊपर अपनी उपस्तिथि दर्जकरा रहा थां।
मे भि उत्तेजना मे उत्तेजित होकर अपनाहाथ भैय्या केँ लोअर मे खड़े लंड पऱ लेँ जाकर सहलाने लगी।
मेरीइस हरकत सें भैय्या औऱ जोर सें मेरे चूतड़ों कों सहलाने औऱ दबाने लगे। चुम्बन अबरुक चुका थां, मगर भैय्या मेरे गर्दन पर्र अपने होंठ फेरा रहें थें। कुछदेर ऐसे हि एक् दूसरे केँ अंगों कों सहलाने केँ बाद हम् दोनों भइया-बेहन
अलगहुए।
( मे आपको अपने जिस्म केँ बारे मे बता देती हूं, मेरारंग नां गोरा। नां हि सांवला। गेहुंआ रंगकह सकते हैं। चेहरा सामान्य हैं, मगर पतलेव उभरेहुए होठों औऱ बड़ी-बड़ी आंखो कि वजह सें अच्छा लगता हैं। मेरे बूब्ज़ मध्यम आकर केँ हैं, मगर गोलाकार औऱ थोड़े कड़क हैं। मेराबदन थोडा भराहुआ हैं जोँ किसी भि स्त्री कि सुंदरता कों औऱ निखार देता हैं, मेरेबदन कां सबसे अच्छा अंग मेरे उभरे औऱ घुमावदार चूतड़ हैं। )
हमारे अलग होते हि मैंने भैय्या कि तरफ देखा तौ वोँ मुझे हि देखेजा रहें थें। इस वक्त मे मात्र नीलेरंग कि ब्रा औऱ पैंटी खड़ी थि। भैय्या, मुझे घुरेजा रहे थें।
मैंने, उनसे मुझेऐसे घूरने कां कारण पूछा ? (मुस्कुराते हुए)
"मेरी प्यारी बेहन, मुझे नहि पता थां कि तुम् इतनी खूबसूरत होँ। " (मुस्कुराते हुए.)
भैय्या, मुझमें आप् कों ऐसा क्याँ हसीनदिख गय़ा ? (शरारती अंदाज मे.)
"अभि बताता हूं। " (मेरेपास आँ गए)
भैय्या, मेरे अंगों कों छूतेहुए, मुझे बताने लगे।
"तुम्हारे यह काले लंबे लहराते हुएबाल। यह बड़ी-बड़ी नशीली आंखे। तुम्हारे यह सुर्ख मुलायम होंठ। तुम्हारे यह दोनों शानदार उभार (बूब्ज़)। यहगोल गहरी नाभि। यह मटकती कमर। "
भैय्या, औऱ ?
"तुम्हारे यह उभरे गुदाज चूतड़। " ( दोनों हाथों सें मसलते हुए )
औऱ ? (कामुकता भरे स्वर मे.!)
"बाकी कां अभि देखा कहां हैं; पहलेदेख लूं। फिन बताऊंगा। " ( उसकीतरफ देखरकर मुस्कुराते हुए.)
भैय्या अपनीटी शर्ट औऱ लोअर उतारकर, मुझसे चिपकते हुए खड़े हौ गए। फिन मेरा चेहरा अपने हाथों मे लेकर अपनीजीभ निकाल कर मेरे पूरे चेहरे पर्र फिराने लगे, पूरे चेहरे पऱ जीभ फेरने केँ बाद वोँ जीभ मेरे होंठो पर्र रखउसे रगड़ने लगे।
भैय्या क्याँ चाहते हैं ये मे समझ गई औऱ अपने होंठखोल दिए। जैसे हि मेरे होंठ खुले भैय्या नें अपनीजीभ मेरे मुंह मे डाल दि, मे भि उनकीजीभ चूसने लगी। कुछ देर चूसने केँ बाद मैंने भि अपनीजीभ निकाल केँ भैय्या केँ मुंह मे डालने लगी, भैय्या भि मेरीजीभ चूसने लगे। दोनों जीभआपस मे लड़रही थि, लगभग पांच सें छ: मिनट तक हम् भइया-बेहन ऐसे हि जीभ चुसाई करतेरहे।
फिन भैय्या नें मुझे घुमाया जिससे मेरेपीठ उनके सामने आँ गई। पीछे सें मेरी ब्रा कां हुक खोला औऱ अपने दोनों हाथआगे लाकर मेरी ब्रा निकाल दि, फिन दोनों हाथों केँ पंजो कों मेरे स्तनों पर्र रखकर उन्हें जोर सें दबाने औऱ मसलने लगे। जिसे मेरे मुंह सें आह्ह्हह्ह निकलने लगी।
भैय्या, आह्ह्हह्ह.आह्हह.!
प्लीज़, आरामसे दबाओ दर्द हौ रहा हैं।
"बहना, अभि तौ शुरुआत हैं"
भैय्या, आह्ह्हह्ह.आह्हह.!!
नहि.हम्म.न्.आहहह.
आह्ह्हह्ह.आह्हह। बस हाय.न्
प्लीज़ भैय्या, अबमत दबाओ बहोत दर्द होँ रहा हैं।
"बहना, तेरे बूब्स इतने मस्त हैं कि इन्हें छोड़ने कां मन हि नहि कररहा। " कहकर औऱ ज़ोर सें दबाने लगे।
बस हम्म.नं
नहि.ऊह्ह.नं.आहहह.
आह.आँ.बस करो.आह्हह.
आह्ह्हह्ह.आह्हह.!! छोड़ बहनचोद। !
"क्याँ कहा ?" (उभार (मम्मों) दबाना रोक देते हैं। )
देखिए आपने मेरे स्तनों कां क्याँ हाल किया हैं, पूरेलाल हौ गए हैं। (अपने दोनों उभार (मम्मों) कों देखते हुए.। )
आप् बहोत बुरे हैं मेरेमना करने केँ बाद भि जोर-शोर सें दबारहे थें।
"क्याँ करूं तुम्हारे बूब्स बड़े हि मस्त हैं इन्हें दबाने मे इतनामजा आँ रहा हैं तौ चूसने मे कितना आएगा। "
कुछ देर पहले तौ आप् कहरह थें, "यह ग़लत हैं"।
(हंसते हुए कहती हूं)
"मुझे नहि पता थां कि बेहन केँ संगयह सभी करने मे इतनामजा आता हैं, इसलिये कहरहा थां। "
भैय्या नें फिन मुझे अपनीतरफ घुमाया औऱ स्वयं दूर होकर मेरे शरीर कों ऊपर सें नीचे तक निहारने लगे, फिन उनकी नज़र मेरी पैंटी पऱ गई। जौ कि मेरे योनि सें निकले रज (कामरस) सें भीग गई थि।
फिन भैय्या बोले, "बहना, तेरी बुर तौ मात्र चुम्बन औऱ बूब्स कों दबाने व मसलने सें बहनेलगी। लगता हैं कि मेरी बेहन कि बुर बहोत प्यासी हैं; कोई नहि आज इसकी सारी प्यास बुझा दूंगा। "
फिन भइयाआगे आए, मेरे एक् मम्मों कों अपनेहाथ सें पकड़ा औऱ मेरे भूरेरंग केँ निप्पल केँ आसपास अपनीजीभ फिराने लगे, कभी-कभी निप्पल पऱ भि फिरा देते। ऐसे हि कुछदेर जीभ फिराने केँ बाद भैय्या नें दूसरे मम्मों केँ निप्पल केँ आसपास अपनीजीभ कुछदेर फिराई। इस दौरान मे भि उनके बालों मे अपनेहाथ घुमारही थि।
भैय्या अब मेरे मम्मों कों कों मुंह मे भरकर चूसने लगे, पहले धीरे धीरे चूसते रहे। फिन अपनी चूसने कि गति बड़ा दि औऱ संग हि मेरे चूतड़ों कों भि सहलारहे थें, जिससे मेरे मुंह सें भि सिसकियां निकलने लगी औऱ भैय्या केँ सर कों कभी-कभी अपने मम्मों पऱ दबा देती।
भैय्या नें धीरे-धीरे सें एक् हाथ पैंटी मे डालकर मेरी बुर कों सहलाने लगे, संग हि मम्मों भि चूसना जारीरखा। इस दोहरे हमले सें मेरी सिसकियां तेज हौ गई, कुछदेर बाद मेरा शरीर अकड़ने लगा औऱ मेरे जिस्म नें जवाबदे दिया। एक् तेज झटके केँ संग झर-झर करके झड़ने लगी, इस कारणअब मेरा अपने पैरो पऱ खड़ा रहना भि मुश्किल हौ रहा थां।
मेरे झड़ने केँ बाद भैय्या नें अपनाहाथ बाहर् निकाला, जोँ कि मेरेरज (कामरस) सें भीग चुका थां। उन्होंने उसेहाथ सें सारारज (कामरस) मेरे एक् मम्मों पऱ मल दिया औऱ उसे चूसने लगे। अब मुझमें ज़्यादा देर खड़े रहने कि हिम्मत नहि थि, तौ भैय्या कों केहना पड़ा।
भैय्या, बिस्तर पऱ चलते हैं अब। मेरे इतना कहते हि मुझेगोद मे उठा केँ बिस्तर पर्र लेटा दिया औऱ वे भि मेरेसंग लेटेगए।
भैय्या कि तरफदेख कहा, आज पहलीबार बिना चुदाई केँ दोबार झड़ी हूं, इसलिये खड़े रहना मुश्किल होँ रहा थां।
"कोईबात नहीं, अब थोडा आरामकर लो"
मेरी नज़रजब भैय्या केँ अंडरवियर पऱ गई, तौ उनका लंड पूरीतरह सें कड़क होँ चुका थां।
भैय्या, यदि मैंने आराम किया, तोँ आपका वोँ केसे शांत होगा ? (उनके लंड कि तरफ इशारा करतेहुए। )
"पायल, तुम् अभि आरामकर लो, वोँ स्वयं हि शांत हौ जायेगा। "
मे झट सें बिस्तर पर्र बैठ गई औऱ भैय्या केँ अंडरवियर कों थोडा नीचेकर दिया। जब मैंने भैय्या कां लंड देखा तौ वो किसी लंबे झुके खजूर केँ पेड़ कि तरह खड़ा थां। मेरीइस हरकत सें भैय्या मुझे देखकर बोले, "मैंने तुम्हें आराम करने कां बोला हैं नां। "
भैय्या, पहले आपकेइस शैतान कों आराम करवा देती हूं, फिन आरामकर लूंगी। (मुस्कुराते हुए.)
भैय्या केँ लंड कों जैसे हि मैंने एक् हाथ सें पकड़ा वैसे हि लंड नें एक् झटका खाया औऱ भैय्या केँ मुंह सें धीरे-धीरे सें "अहह" निकल गई। फिन मे अपनेहाथ सें पहले धीरे धीरेमुठ मारने लगी।
मे भैय्या कि तरफ देखकर हि उनके लंड कों हिलारही थि। मेरे द्वारा ऐसा करने सें भैय्या नें अपनी आंखें बन्दकर ली औऱ उनके चेहरे पर्र एक् अलग हि प्रकार कि खुशीझलक रही थि, शायद उन्हें बहोत मजा आँ रहा थां।
फिन भि मुझेपता नहि थां कि भैय्या अभि कैसा अनुभव कररहे थें, मगर मेरा तोँ रोम-रोम खिलरहा थां। इसकीवजह ये थि कि मे हमेशा सें नीलेश भैय्या केँ संग प्रेम याँ सेक्स करना चाहती थि औऱ आज अपनेहाथ सें उनके लंड कों पकड़कर मुठमार रही थि।
अब मैंने मुठ मारने कि गति थोड़ी तेजकर दि, क़रीब पांच मिनट केँ बाद भैय्या नें कहा, "पायल, तेज औऱ तेज मेरा निकलने वाला"।
मैंने मुठ मारने कि गति बढ़ा दि औऱ कुछ हि पलों मे भैय्या केँ मुंह सें सिसक केँ संग लंड कां ज्वालामुखी फूट पड़ा उसकेसंग हि वीर्य रूपी लावा बाहर् निकलने लगा। मेरा पूराहाथ उनके वीर्य सें पूरा सराबोर होँ गय़ा औऱ कुछ वीर्य उनकेपेट व जांघों केँ आसपास गिरा।
मैंने बिस्तर पऱ बिछी चादर केँ एक् कोने सें अपनेहाथ व भैय्या केँ बदनलगे वीर्य कों साफ़ किया औऱ फिन भैय्या केँ सीने पर्र सिर रखकरलेट गई।
भैय्या, आपको मेरायह करना कैसालगा ? (भैय्या केँ चेहरे केँ आने वालेभाव कों जानने केँ लिए पूछा। )
"पायल, बता नहि सकता कि मुझे कितना मजाआया, इतना खुशी तोँ मुझे तुम्हारी भाभी केँ हाथों सें भि नहि मिला। " (मेरेसिर कों अपने एक् हाथ सहलाते हुए)
"पायल, आज तुमने मेरीकई सालों पहले कि ख़्वाहिश कों पूराकर दिया, मैंने कभी ख्वाब मे भि नहि सोचा थां कि यह ख़्वाहिश पूरी भि होँ सकती हैं। धन्यवाद! मेरी प्यारी बेहन!"
भैय्या, आज मैंने आपकीहर ख़्वाहिश पूरी करूंगी। (भैय्या केँ सीने कों चूमते हुए बोलि)
भैय्या नें मुझे अपनी बांहों मे भर लिया औऱ मे भि उनकी बाहों मे समा गई।
लगभगबीस मिनट तक हम् भइया-बेहन ऐसे हि एक्-दूसरे सें लिपटकर आराम किया। फिन भैय्या सें अलग होकर उनसे बोलीं।
भैय्या, अब बाकी ख़्वाहिश भि पूरीकर लीजिए। (शरारती मुस्कान केँ संग.)
भैय्या नें मुझे अपनेतरफ खींचा जिससे मे उनकेऊपर आँ गई औऱ, मेरे होंठो कों चूसने लगे, मे भि उनका पूरासंग देरही थि। ऐसे हि चुम्बन करतेहुए, उन्होंने मुझे पलटी मारकर नीचेकर दिया औऱ स्वयं मेरेऊपर आँ गए।
कुछ देर तक होंठो कों चूमने व चूसने केँ बाद वोँ नीचे कि तरफ आँ कर मेरे स्तनों कों दबाने, मसलने औऱ चूसने लगे। एक्-दो मिनट केँ बाद, वे नीचेसरक कर मेरी नाभि केँ पास अपना चेहरा रोका औऱ अपनीजीभ निकाल कर नाभि केँ छेद केँ आसपास गोल घुमाने लगे।
भैय्या केँ ऐसा करने सें मुझे भि बहोत अच्छा लगारहा थां, मगरफिन भैय्या नें जीभ नाभि मे डालकर चाटने औऱ चूसने लगे। जिससे मेरामजा औऱ बढ़ गय़ा।
मेरे पति नें भि कभीऐसा नहि किया थां, मगरआज भैय्या केँ संग मे उसमजा कों महसूस कररही थि।
थोड़ी देरबाद भैय्या बिस्तर सें उतरकर अपना अंडरवियर निकाल केँ बिस्तर केँ सामने कि तरफ खड़े हौ गए औऱ मुझे पैरों सें पकड़कर अपनीतरफ खींचा जब मेरे चूतड़ बिस्तर केँ कोने केँ पासआए, तब भैय्या रुके औऱ अपनेहाथ आगे लाकर मेरी पैंटी उतार दि।
फिन घुटनों केँ बल ज़मीन पर्र बैठकर मेरी दोनों पैरों कों चौड़ा कर दिया। जिससे मेरी योनि उनके चेहरे केँ सामने आँ गई, फिन अपनेहाथ सें योनि कां छूकर उसका अच्छे सें मुयाना करनेलगे औऱ संग हि उसे अंगूठे सें आरामसे सें सहला भि रहे थें। अचानक सें अपना अंगूठा बुर केँ अन्दर डाल दिया।
"पायल, तुम्हारी बुर बड़ी प्यारी हैं ऐसालग रहा हैं कि यह किसी जवान लड़की कि बुर हैं। "
"मेरामन तोँ इसे केँ चख केँ देखने कां कररहा हैं। "
(मेरीतरफ देखकर बोले)
तौ देख लीजिए, मैंने कबमना किया। ( उनको देखते हुए.)
भैय्या नें अपनीजीभ निकाली औऱ मेरी बुर पऱ जीभ फिराने लगे.जैसे हि भैय्या नें अपनीजीभ मेरी बुर केँ दाने (क्लाइटोरिस) पर्र फिराई जिससे मे एक् रोमांच भरे स्वर मे सिसक उठी.''आह्ह्हह्ह.येसस्स्.''
फिन मेरी उभरी हुइ बुर कि बाहरी पंखुड़ी कों मुँह मे भरकर धीरे धीरे चूसने लगे औऱ बीच-बीच मे अपनीजीभ कों मेरी बुर केँ अंदर भि फिरा देते, कुछ देर धीरे-धीरे चूसने केँ बाद वोँ तेजी सें चूसने लगेसंग हि अब एक् हाथ सें बुर केँ दाने (क्लाइटोरिस) कों भि सहलाने लगे।
भैय्या केँ इसतरह सें मेरी बुर केँ संग खेलने सें मेराबदन भि बैड पर्र मचलने लगी औऱ बिस्तर कि चादर कों अपने हाथों मे पकड़ लिया।
अब मेरा भि सब्र कां बांध टूटने लगा, मैंने भैय्या केँ सिर पर्र दोनों हाथ रखकर उनकेसिर कों पकड़कर ऊपर घसीटकर औऱ भैय्या केँ चेहरे तरफ देखकर कहनेलगी अब बर्दाश्त नहि होँ रहा.जल्द सें अपनी बेहन कि बुर कि प्यास बुझादो, अपना लंड डालकर मुझे चोदो। भैय्या! मुझे चोदो!
मेरीबात सुनकर भैय्या खड़े हौ गए, मगर उनके महाराज! अभि पूरीतरह सें खड़े नहि थें।
मे अब बिस्तर पऱ कुतिया कि स्थिती मे आई औऱ भैय्या कि चेहरे कि ओर देखा, भैय्या भि मेरे चेहरे कों देखरहे थें। जैसेकुछ कहनाचाह रहे हौ।
मे समझ गई कि वोँ क्याँ कहना चाहते हें। मैंने अपने एक् हाथ सें भैय्या कां लंड पकड़ लिया औऱ आरामसे सें सहलाने लगी, कुछ देरबाद अपना मुंहआगे कर पहले उसके सूपड़े पर्र जीभ फिराई, फिन पूरे लंड पऱ जीभ फिराई।
फिन अपना मुंहखोल केँ लंड अंदर लेँ लिया औऱ फिनउसे अंदर बाहर् करतेहुए चूसने लगी। मेरेइस तरह लंड चूसने सें भैय्या कां लंड कड़क होनेलगा।
भैय्या भि जोश मे आकर मेरासिर पकड़कर लंड पर्र दबाने लगे, मगर मे ये नहि चाहती थि कि भैय्या फिन सें झड़ जाएं।
इसलिये मैंने भैय्या लंड चूसना बंदकर दिया, मगर भैय्या नें मेरेसिर कों पकड़कर मेरे मुंह मे झटके मारने लगे याँ यूं कहें कि मेरे मुंह कों चोदने लगे।
फिन मैंने भैय्या कों ज़ोर सें धक्का देकर अपने सें अलग किया। जब भैय्या अलगहुए तोँ उन्हें अपनी गलती कां एहसास हुआ कि वोँ अभि क्याँ करनेलगे थें।
"पायल, मुझे क्षमा करदो। "
"वोँ मे जोश मे आकरभूल गय़ा कि तुम् यह क्यूं कररही थि। "
"प्लीज़, मुझे क्षमा करदो"
भैय्या, मे जानती हूं कि आप् जोश मे आँ गए थें औऱ यहकर बैठे, इसलिये आप् माफ़ी नां मांगे।
"तुमने मुझे क्षमा कर दिया ?"
हां, अब जल्द सें मेरी प्यास बुझादो। (कातिलाना मुस्कान केँ संग.)
भैय्या मुझे मुस्कुराता देख जल्द सें मेरेपास आए औऱ मुझे पीछे बिस्तर पर्र धीरे-धीरे सें धक्का दिया औऱ मेरे पैरों कों अपने हाथों मे लेकर अपने कंधो तक लेँ गए, जिससे मेरे योनि उनके लंड केँ सामने आँ गई।
फिन अपने एक् हाथ सें अपना लंड पकड़कर मेरी बुर पर्र रगड़ने लगे औऱ मेरीतरफ झुककर मेरी आंखों मे देखने लगे। जैसे वोँ मेरी सहमति कां इंतजार कररहे हौ। मैंने भि अपने बुर केँ दाने (क्लाइटोरिस) कों सहलाते हुए, अपनी गर्दन हिलाकर उन्हें इशारा दे दिया।
जैसे मेरा इशारा मिला भैय्या नें एक् झटका दिया, जिससे उनके लंड एक् तिहाई सें अधिक हिस्सा बुर कों चीरते हुए अंदरचला गय़ा औऱ मेरीजोर सें आउच.आँ.उई। मा!चीख निकल गई।
भैय्या नें एक् औऱ झटका दिया जिससे उनका पूरा लंड अन्दर चला गय़ा, मगरइस बार मे चीखी नहि, बस एक् सिस्सकी निकली।
भैय्या नें अब लंड वापस बाहर् निकाला, मगर सूपड़े कों अंदर हि रहने दिया औऱ लंड फिन सें अंदरकर दिया। कुछ देर सें ऐसे हि धीरे-धीरे - धीरे-धीरे करतेरहे, जिससे मेरी उत्तेजना औऱ सिसकियां भि बढ़ने लगी। मेरी सिसकियां निकलने सें भैय्या कां जोश भि बढ़ने लगा औऱ उन्होंने तेज झटके मारना शुरुआत कर दिया।
तेज झटके खाने सें मेरेबदन कि रग-रग मे, खूनतेज रफ्तार सें दौड़ने लगा औऱ मे अपने दोनों पैरों कों हाथों सें पकड़े हुए,
ज़ोर ज़ोर सें आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई.अई.अई….अई.मां…….मां…मां….सि सि सि सि। हाहाहा ….ऊऊऊ ….ऊँ.ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ….हि हि हि हि हि….अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह…। उउउ। मुंह सें बड़बड़ाने लगी।
थोड़ी देरबाद भैय्या अलगहुए औऱ मुझे बिस्तर केँ बीच लेटाकर, मेरे पैरों केँ मोड़कर मेरे हाथों मे पकड़ा दिया। फिन मेरी बुर पऱ लन्ड रखा औऱ अंदर डालकर चोदने लगे, उनकेकुछ हम्मलो सें चुदासी होकर बड़बड़ाने लगी।
ज़ोर ज़ोर सें आआआआअह्हह्हह….ईईईईईईई…ओह्ह्ह्हह्ह…अई.अई.अई….अई
औऱ जोर सें चोद बहनचोद!
आआआआअह्हह्हह जोर सें चोद बेहन केँ लौड़े!
मेरे मुंह सें गालीसुन भैय्या केँ धक्कों कि रफ़्तार इतनीबढ़ गई कि मुझे दर्द होनेलगा औऱ बर्दाश्त करना मुश्किल होँ गय़ा। मेरी आंखों सें आसूं निकलगए।
प्लीसससससस…….भैय्या आहिस्ता.प्लीसससससस, उउउउऊऊऊ ….ऊँ.ऊँ…ऊँ…” मां मां….ओह… आहिस्ता चोदो भैय्या.हाय। बहनचोद!
"क्याँ हुआअब धीरे-धीरे चोदने कां बोलरही हैं। "
(जब उन्होंने येकहा तौ उनकी नज़र मेरे आंसू पर्र गई। )
मेरी आंखों मे आसूंदेख उन्होंने चोदना बंदकर दिया।
भैय्या बिस्तर पऱ लेटगए औऱ मुझे अपनेऊपर बैठने कों कहा, फिन मेरी बुर मे अपने लन्ड कों डालकर मेरीकमर कों पकडकर ऊपर-नीचे करनेलगे। अब मुझे दर्द केँ बजाय अधिक मज़ा आँ रहा थां, कुछदेर बाद मे स्वयं हि ऊपर-नीचे होनेलगी औऱ अपने बुर मे लन्ड केँ धक्कों कां आनंद लेनेलगी थि औऱ जोरजोर सें चीख भि रही थि। कुछदेर तक भैय्या नें मेरी बुर कों इसतरह सें चोदा याँ यह कहें कि मैंने स्वयं उनसे चुदी।
फिन उन्होंने मुझे कूतिया बना दिया औऱ मेरे पीछेआकर मेरी बुर मे लन्ड डालकर चोदने लगे। कुछ देर मे वोँ अपनी पूरी ताकतलगा कर चोदने लगे, चूतड़ो पऱ धक्कों कि टक्कर सें धप-धपव बुर सें फ़्चफ़च औऱ मेरी सिसकियों सें पूरारूम गूंजने लगा।
ऐसालग रहा थां कि मेरी बुर आज हि फट जायेगी, मगरकुछ देरबाद उन्होंने अपने लन्ड कों बाहर् निकाल लिया औऱ मेरी गान्ड केँ छेद पर्र लगा दिया।
जैसे हि मुझे एहसाह हुआ कि भैय्या कां लन्ड कहां हैं, मगरतब तक भैय्या नें एक् झटकालगा दिया औऱ उनका लन्ड मेरी गान्ड चीरते हुए अंदरचला गय़ा। इसकेसंग हि मेरी एक् जोरदार चीख आहहह.मर गई मा!
बहनचोद! मेरी गान्ड फाड़ दि।
भैय्या मेरीकमर कों पकड़कर तेज़-तेज़ धक्के लगाने लगे, कुछ हि पलों मे भैय्या कां बदन अकड़ा औऱ उनका लन्ड सें वीर्य निकलकर मेरी गान्ड केँ अंदरभर गय़ा। पूरा वीर्य निकलने केँ बाद उन्होंने लन्ड बाहर् निकाला औऱ बिस्तर पऱ लेटगए।
मेरी गान्ड सें भैय्या कां सफेद गाड़ा वीर्य बाहर् निकलने लगा औऱ बिस्तर पर्र गिरने लगा। मे भि भैय्या केँ पास उल्टी हि लेट गई।
इसआधे घण्टे कि चुदाई केँ दौरान भि मे दोबार झड़ चुकी थि औऱ गान्ड कि दमदार ठुकाई सें एक् तरह सें चरमसुख कि प्राप्ति कर चुकी थि।
मैंने भैय्या कि तरफ देखा, जोँ शायद मुझे हि निहार रहे थें।
भैय्या, आपकोमजा आया ?
"यह भि कोई पूछने कि बात हैं। " (मुस्कुराते! हुए.)
"तुम्हें आनंद नहि आया क्याँ ?"
भैय्या, मुझे तौ आज आपकेसंग बहोत मजाआया, इतना तोँ मुझे सुहागरात पर्र भि नहि आया थां।
"वोँ क्यूं भला ?"
क्योंकि मेरी हमेशा सें आपकेसंग सेक्स करने कि ख़्वाहिश थि, मगरआज सें पहले वोँ पूरी नहि होँ पाई थि।
ऐसा भि नहि हैं कि वैभवजी केँ संग मुझे मज़ा नहि आता। उनकेसंग भि मुझे बहोत मजाआता हैं, वोँ भि आपके जैसे हि मुझे प्रेम करते हैं।
"यह तोँ अच्छी बात हैं जोँ कि तुम् कहरही होँ। " (खुश होतेहुए.)
बस, आप् कि एक् बात कां बुरालगा मुझे। ( झूठ-मूठ कां दुःखी होकर)
"कौनसी बात कां बुरालगा ?"
बिना बताएं मेरी गान्ड मारने कां औऱ ऐसा आपने क्यूं किया ?
"दरसअल, जब तुम्हें कुतिया बनाकर चोदरहा थां तोँ मेरी नज़र तुम्हारी गान्ड केँ छेद पर्र गई। जिसेदेख मे समझ गय़ा थां कि वैभवजी तुम्हारी गान्ड भि मारते हैं, इसलिये मैंने सोचायह ख़्वाहिश भि पूरीकर लूं। वैसे भि तुमने हि कहा थां कि "आज मैंने आपकीहर ख़्वाहिश पूरी करूंगी। " (मुस्कुराते!! हुए.)
हां, कहा थां, मगर आपने ख़्वाहिश बताएं बिना हि पूरीकर ली। यदि आप् मुझसे बोलते तोँ मे मना थोड़ी करती औऱ यदि बिना खुली गान्ड भि होती तौ भि आपकोमना नहि करती।
"अच्छा!, माफकर दो। मुझे दूसरी गलती होँ गई आज। "
(कान पकड़ते हुए.औऱ एक् मुस्कान केँ संग)
माफ किया। (कातिलाना मुस्कान केँ संग.)
"पायल, तुमसे एक् बात पूछनी थि। "
कहिए।
"तुम् मुझे बार-बार गाली क्यूं देरही थि ?"
भैय्या केँ इस प्रश्न पर्र मे जोर सें हंसने लगती हूं तोँ भैय्या मुझेऐसे हंसते देख हैरान! होँ जाते हैं।
"क्याँ हुआ तुम् ऐसेहंस क्यूं रहीं हौ ?"
भैय्या, मे आपकी प्रश्न पऱ हंसरही हूं।
"वोँ क्यूं भला ?"
भैय्या, मे आपकी बेहन हूं औऱ आप् मुझेचोद रहे थें, इसलिये आपको बहनचोद! बोलरही थि।
"अच्छा जी, फिन जब मे तुम्हारे बूब्स दबारहा थां, तब क्यूं गाली दि थि। " (मुस्कुराते!! हुए)
वोँ तोँ गलती सें निकल गई थि। (मुस्कुराते! हुए.)
"पायल, मुझेऐसा क्यूं लगारहा हैं कि तुम् झूठबोल रही हौ ?"
नहि ऐसाकुछ भि नहि हैं। (हड़बड़ाते हुए.)
"कोई बात नहि, यदि तुम्हें नहि बताना हैं तोँ मत बताओ। "
"अच्छा!, शुभ रात्रि!" (बिस्तर सें उठने लगते हैं। )
आप् कहां जारहे हैं ? (भैय्या कों उठने सें रोकते हुए पूछती हूं। )
"अरे, मे अपनेरूम मे जारहा हूं। "
भैय्या, आप् बहोत बुरे हैं। (भैय्या केँ सीने पऱ मुक्के मारते हुए)
"अब क्याँ हुआ मेरी प्यारी बेहन कों ?"
आप् आजयही सोएंगे, आपनेहां भि कहा थां।
"ठीक हैं, पहले कपड़े तोँ पहन लेनेदे। "
नहि, आप् औऱ मे आजऐसे सोएंगे।
औऱ भैय्या केँ सीने केँ ऊपरसिर औऱ एक् पेर उनके दोनों पैरों ऊपररख लेती हूं।
भैय्या, वोँ आपको जानना हैं नाँ कि मे गाली क्यूं देरही थि।
"हां." ( उत्सुकता सें.)
दरसअल, वैभवजी जब भि सेक्स करते हें तौ वोँ मुझे गाली देने कों बोलते हें, इसलिये मुझे भि सेक्स करते वक्त गाली देने कि आदत होँ गई हैं।
"वोँ ऐसा क्यूं बोलते हें ?"
मैंने भि उनसेयही पूछा थां कि वोँ ऐसा क्यूं चाहते हैं तोँ उन्हें कहा, "जब सेक्स केँ वक्त स्त्री मर्द कों गंदी गाली देती हैं तौ मर्द कां जोशबढ़ जाता हैं औऱ सेक्स करने मे आनंद भि आता हैं। "
"यहबात तौ सही हैं कि गाली सुनकर जोश तोँ बढ़ जाता हैं औऱ मजा भि आता हैं। "
तभी आप् मेरी गालीसुन केँ बहोत जोश मे आँ गए थें औऱ मेरी बुर कों फाड़ने लगे थें।
"वैसे वैभवजी कों कौन सि गाली देती हौ ?" (मुस्कुराते हुए)
भैय्या, आप् भि कैसा प्रश्न करते हौ। (शरमाते हुए)
"अरे, अब मुझसे कैसा शर्माना, अबबोल भि दो। "
उन्हें सबतरह कि गाली पसन्द हैं, मगर बहनचोद! उन्हें ज़्यादा अच्छी लगती हैं, इसलिये मेरे मुंह सें भि यही गालीसभी सें अधिक निकलती हैं।
"कहींऐसा तौ नहि हैं कि वैभवजी भि अपनी बेहन केँ संग सेक्स करना चाहते हैं याँ करते हौ। " ( मजाकिया अंदाज मे)
नहि, ऐसाकुछ भि नहि हैं वोँ केवल गाली सुना चाहते हैं औऱ यदिवे ऐसा चाहते भि हैं तोँ मुझेकोई ऐतराज नहि होगा।
"मगर उन्हें केसेपता चलेगा कि तुम्हें कोई ऐतराज नहि हैं। " (मुस्कुराते हुए.। )
अब यहसभी बात छोड़िए, रात केँ साढ़े तीनबजे गए। अब सोना चाहिए।
शुभ रात्रि! भैय्या! ( होंठो कों चूमकर)
"शुभ रात्रि! मेरी प्यारी बेहन!" (होंठो कों चूमकर)
फिन मे वैसे हि हालात मे दोनों सो जाते हैं।
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भइया बहोत बढ़िया भाग थां औऱ बहोत हि हॉटऐसे हि लिखते रहें औऱ ऐसे हि सेक्स बढ़ाते रहें औऱ पारिवारिक सेक्सी रखना भइया आनंदआता हैं अबआगे क्याँ एपसोड मे देखें क्याँ होता हैं
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Update 15
सुभह घड़ी कां अलार्म बजने सें आखिरी कि नींद खुलती हैं, मगर नीलेश सोया हि रहता हैं। जैसे हि आखिरी कि नजर सामने जाती हैं तोँ देखती हैं कि रूम कां दरवाजा खुलाहुआ हैं। वो उठकर पहले दरवाजा लगाती हैं क्योंकि सुभह होने वाली थि औऱ बच्चे कभीउठ सकते हैं।
वो दरवाजा लगाकर वापस बिस्तर कि तरफआती हैं औऱ नीलेश कों देखने लगती हैं। ऐसे अपने नग्न भइया कों देखउसे फिन सें अपने भइया केँ संग प्रेम करने कि ख़्वाहिश होती हैं औऱ इसके कारण उसकाबदन भि गरम होने लगता, मगर फिन भि अपनीइस ख़्वाहिश कों दबाकर वोँ टॉवेल लेकर बाथरूम मे चली जाती हैं।
बाथरूम मे जाकर वोँ पहले अपने नित्य कर्म करती हैं औऱ फिन नहाने केँ लिए शॉवर केँ नीचे खड़ी होकर पहले अपने पूरे जिस्म कों भिगों लेती हैं औऱ पूरे शरीर पर्र अच्छे सें साबुन लगाती हैं। फिन शॉवर चालूकर पानी सें पूरे शरीर पर्र लगे साबुन कों साफ करने लगती हैं, मगरजब वोँ अपनी योनि पऱ लगे साबुन कों साफ करने लगती हैं तौ उसेकल रात कों अपने भइया केँ द्वारा कि गई बुर चुसाई याद आँ जाती हैं।
यहबात यादआने सें उसकेबदन मे उत्तेजना बढ़ने लगी औऱ वोँ अपनी बुर सहलाने लगी। कुछ देर तक अपनी बुर सहलाने केँ बाद वोँ झड़ जाती हैं औऱ फिन नहाकर बाहर् आँ जाती हैं।
जब वोँ बाहर् आती हैं तोँ देखती हैं कि नीलेश भि जाग चुका हैं औऱ बिस्तर पऱ पीठ टिकाकर बैठा हैं। जब नीलेश कि नजर आखिरी पऱ पड़ती हैं तौ वो उसे देखता रह जाता हैं, क्योंकि आखिरी शरीर पऱ सफेद टॉवेल लपटेकर हि बाहर् आँ थि। उसके थोड़े गीले बालों नें उसके एक् उभार कों छुपारखा थां।
अपने भैय्या द्वारा उसेयूं निहारता देख आखिरी केँ चेहरे पर्र "लज्जा-ओ-हया" सें मुस्कान बिखर जाती हैं।
वोँ आगे जाकर अपनी कपड़ों कि अलमारी सें कपड़े निकालने लगती हैं, मगर जैसे हि वो पलटती हैं तौ नीलेश उसके सामने खड़ा थां। नीलेश उसेदेख मुस्कुरा रहा थां वोँ कुछ बोलने वाली थि उसके पहले हि नीलेश उसे अपनी बाहों मे भर लेता हैं। जिससे आखिरी केँ हाथ सें कपड़े नीचेगिर जाते हैं आखिरी भैय्या सें स्वयं कों छोड़ने कि विनती करती हैं, मगर नीलेश उसके गीले बालों मे सें शैंपू याँ साबुन कि आँ रहीगंध कों सूंघने लगता हैं। फिन उसके थोड़े बाल जोँ कि आखिरी केँ एक् उभार कों छुपारहे थें, उन्हें अपने हाथों सें पीछेकर देता हैं औऱ आखिरी केँ टॉवेल मे कसे उसके दोनों उभार कां उपरी हिस्सा देखने लगता हैं। आखिरी अपने भैय्या कों उसके स्तनों केँ उपरीभाग कों ऐसे निहारता देख पूछती हैं कि "भैय्या, क्याँ ख़्वाहिश हैं आपकी ?"
नीलेश उसेकुछ भि नहि बोलता हैं औऱ सीधे उसके स्तनों केँ बाहर् निकले हिस्से पर्र अपनीजीभ रखउसे चाटने लगा। कुछ देर तक ऐसे चाटने सें आखिरी कों भि मजाआने लगता हैं, मगर वोँ कुछ भि नहि करती हैं वोँ मात्र अपने भैय्या केँ द्वारा कि जारही हरकत सें अपनी आंखें बन्दकर मजे मे डूबजा रही थि।
नीलेश आरामसे चाटते हुए, आखिरी कि गर्दन कि ओर अग्रसर होने लगता हैं। कुछदेर गर्दन पर्र जीभ फिराने केँ बाद वोँ उसके चेहरे केँ ऊपर भि अपनीजीभ फेरता हुआ उसके होंठो पर्र आकररुक जाता हैं।
अपने भैय्या कि यह हरकतउसे मनपसंद नहि आई क्योंकि अभि वोँ खुशी केँ सागर मे गोतेलगा रही थि कि अचानक भैय्या रुक क्यूं गए। आखिरी अपने आंखें खोल देखती हैं जैसे हि वोँ आंखें खोलती हैं नीलेश उसके होंठो कों अपने होंठो मे भरकर चूसने लगता हैं। आखिरी भि उसकासंग देने लगती हैं। लगभग पांच मिनट तक दोनों भइया-बेहन एक्-दूसरे केँ मात्र होंठो कां रसपान करतेरहे।
जब दोनों अलगहुए तोँ उनके चेहरे कि चमक औऱ खुशी देखने लायक थि।
आखिरी भैय्या कों नहाने कों बोलती हैं, मगर नीलेश उसे अपने लन्ड कि तरफ इशारा करता हैं। आखिरी तौ अभि कुछदेर पहले हि झड़ चुकी थि, इसलिये उसेइस चुम्बन सें ज़्यादा फर्क नहि पड़ा थां, मगर नीलेश कां लन्ड खड़ा होँ गय़ा थां।
नीलेश उसे लन्ड चूसने कों बोलता हैं, मगर आखिरी अभि यह करने सें मना करती हैं औऱ कहती हैं कि "हाथ सें हिला देती हूं। " नीलेश भि उसकीबात नहि मानता हैं औऱ एक् बारफिन उसे विनती करता हैं। इसबार नीलेश नें बड़ीआशा भरी नजरों सें कहा थां जिससे आखिरी मना नहि कर पाती हैं।
आखिरी नीलेश केँ लन्ड कों पहलेजीभ सें सहलाने लगती हैं औऱ फिन मुंह मे लेकर धीरे धीरे चूसने लगती हैं। नीलेश भि आखिरी केँ मुंह कि गर्मी अपने लन्ड पर्र पाकर उत्तेजित होने लगता हैं। आखिरी अपने भैय्या कां लन्ड बहोत हि अच्छी तरह सें चूसरही थि, फिन नीलेश नें आखिरी केँ सिर कों पकड़ लिया औऱ अपने लन्ड कों उसके मुंह केँ अंदर बाहर् करके चोदने लगा। लगभग एक् मिनट तक ऐसे हि चोदते रहा, मगर फिन उसने आखिरी केँ सिर कों जोर सें पकड़ा औऱ अपना पूरा लन्ड आखिरी केँ मुंह मे भर दिया जिससे नीलेश कां लन्ड आखिरी केँ हलक तक चला जाता हैं।
जैसे हि लन्ड हलक तक जाता हैं नीलेश केँ लन्ड सें वीर्य निकलने लगता हैं जोँ कुछ हि पलों मे आखिरी केँ हलक मे भर जाता हैं जिससे उसे सांस लेने मे दिक्कत होती हैं उसे अपने भैय्या कां वीर्य निगलना पड़ता हैं। नीलेश भि अपना लन्ड बाहर् निकाल लेता हैं, मगर आखिरी केँ मुंह सें जैसे हि लन्ड बाहर् आता हैं आखिरी खांसने लगती हैं। उसके आंखों सें आसूं भि निकलआए थें।
जब उसकी हालतठीक होती हैं तौ वो नीलेश कों एक् जोरदार थप्पड़ जड़ देती हैं।
नीलेश तोँ उसकी इसकी हरक़त सें हक्का-बक्का रह जाता हैं।
आखिरी : भैय्या, प्लीज़ आप् अभि यहां सें जाइए। (जोर सें रोने लगती हैं। )
नीलेश : पायल, मुझे क्षमा करदे।
आखिरी : भैय्या, आप् अभि जाओ। (रोतेहुए.)
नीलेश : अच्छा, मे जाता हूं, मगर पहले रोनाबंद करो।
आखिरी : भैय्या, आप् अभि चले जाइए, वरना मे आपसेकभी भि बात नहि करूंगी। (रोतेहुए। थोड़े गुस्से सें)
नीलेश : पायल, माफ करदो। तुम् जौ चाहे सज़ादे देना, मगर रोनाबंद करदो।
आखिरी : ठीक हैं, मगर आप् यहां सें अभि जाएं।
नीलेश भि मौके कि नजाकत कों समझते हुए वहां सें जानां हि उचित समझता हैं। फिन वोँ अपने कपड़े जौ रात कों वहीं उतारे थें, उन्हें पहनकर अपनेरूम मे चला जाता हैं। आखिरी भि कुछदेर तक अपनेरूम मे रोतीरही। इधर नीलेश भि अपने आपकोकोस रहा थां कि क्याँ जररूत थि उसेऐसा करने कि, उसकी प्यारी बेहन जोँ बिनाकहे सभीकुछ देने औऱ करने कों सजधजकर रहती हैं। फिन भि उसकेसंग ऐसा व्यवहार किया।
कुछ देरबाद पूरेघऱ मे खामोशी छाईरही, सिवाय आखिरी केँ रूम केँ वोँ इसलिये कि नीलेश केँ जाने केँ बाद वोँ कुछदेर जोर सें रोतीरही। फिन उठकर अपनेरूम केँ दरवाजा बंदकर बिस्तर पऱ लेटकर अभि भि रोरही थि औऱ उसकी रोने कि सिसकिया कमरे मे आहिस्ता गूंजरही थि।
लगभग एक् घंटेबाद दक्ष कि आवाज़ आती हैं जौ अपनी मां केँ दरवाज़े केँ बाहर् सें उनको आवाज़ देरहा थां।
आखिरी अपने बेटे कि आवाज़ सुनउसे बोलती हैं।
आखिरी : क्याँ हुआ बेटा ? (रोतीहुए आवाज़ मे)
दक्ष : मामाजी घऱ सें जारहे हैं।
आखिरी : तुम् चिंता मतकरो वोँ वापस आँ जायेंगे।
दक्ष : ठीक हैं, मां भूख भि लगरही हैं ?
आखिरी : बेटा, पांच मिनट मे आकर तुम्हें औऱ अवनी कों ब्रेकफास्ट देती हूं।
दक्ष : जी मां।
आखिरी बिस्तर सें उठकर बाथरूम मे जाकर अपने चेहरे कों पानी सें अच्छी तरह सें धोती हैं औऱ फिन अपने कपड़े पहनकर रसोई मे चली जाती हैं। स्वयं केँ लिएगरम चाय बनाती हैं औऱ बच्चों केँ लिए ब्रेकफास्ट रेडी करती हैं।
कुछदेर बाद वोँ दोनो बच्चों कों ब्रेकफास्ट करा देती हैं औऱ बच्चों केँ संग बैठकर टेलीविज़न देखने लगती हैं तभी उसका मोबाइल बजता हैं वोँ मोबाइल पर्र बात करती हैं। मोबाइल सकीना (नौकरानी) कां थां। उसने इसलिये मोबाइल किया थां कि उसेआज किसीकाम सें बाहर् जानां थां, इसलिये वोँ आज नहि आँ सकती हैं।
एक् डेढ़ घंटेबाद आखिरी खाने कि तैयारी करती हैं औऱ खानां बनाने लग जाती हैं। खानां बनने केँ बाद वोँ बच्चों कों खानां खिलाती हैं औऱ नीलेश केँ आने कां इंतजार करती हैं, मगर एक् घंटे प्रतीक्षा करने केँ बाद भि नीलेश नहि आता हैं तोँ वो उसे मोबाइल करती हैं, लेकिन नीलेश मोबाइल भि नहि उठाता हैं।
ऐसे हि एक् घंटा औऱ बीत जाता हैं, मगर नीलेश नहि आता हैं। अब आखिरी कों चिंता होने लगती हैं कि भैय्या उसका मोबाइल भि नहि उठारहे हैं औऱ अभि तक आए भि नहि हैं।
वोँ वैभव कों मोबाइल करती हैं औऱ उनसे भैय्या कों मोबाइल करने कों बोलती हैं। वैभव भि नीलेश कों मोबाइल करता हैं, मगर उसका मोबाइल नीलेश नहि उठाता हैं। वैभव वापस आखिरी कों मोबाइल करता हैं औऱ कहता हैं कि "होँ सकता हैं कि नीलेश भैय्या कहीं व्यस्त हौ, इसलिये मोबाइल नहि उठारहे होँ। तुम् उनकी चिंता मतकरो, वोँ घऱ आँ जायेंगे। " आखिरी उनकीबात तोँ सुन लेती हैं औऱ "ठीक हैं" बोलकर मोबाइल काट देती हैं।
मगर आखिरी जानती थि कि भैय्या उसके मोबाइल क्यूं नहि उठारहे हें। वोँ चाहकर भि हॉस्पिटल नहि जा सकती हैं, क्योंकि वोँ घऱ पर्र बच्चों कों अकेला नहि छोड़ सकती हैं औऱ नां हि उन्हें अपनेसंग हॉस्पिटल लेँ जा सकती हैं।
ऐसे हि इंतजार करते-करते रात हौ जाती हैं वोँ एक् बार औऱ मोबाइल करती हैं इसबार मोबाइल उठ जाता हैं।
आखिरी : भैय्या, आप् कहां होँ कब सें आपका इंतजार कररही हूं ? औऱ आप् मोबाइल भि नहि उठारहे थें ?
नीलेश : मे हॉस्पिटल मे हूं।
आखिरी : आप् घऱकब तक आँ रहे हैं ?
नीलेश : मे आज यहींरुक रहा हूं। तुम् अपना औऱ बच्चों कां ध्यान रखना।
आखिरी : भैय्या, मे आपका प्रतीक्षा कररही हूं, आप् जल्द सें घऱ आँ जाइए।
नीलेश : पायल, तुम् मेरा इंतजार मतकरो।
आखिरी : भैय्या, जबतक आप् नहि आते मे आपकाऐसे हि भूखे प्यासे बैठे इंतजार करती रहूंगी। (मोबाइल काट देती हैं। )
नीलेश वापस मोबाइल करता हैं मगरइस बार आखिरी मोबाइल नहि उठाती हैं औऱ नीलेश कां इंतजार करने लगती हैं।
एक् घंटेबाद भि नीलेश नहि आता हैं तोँ वोँ बच्चों कों खानां खिला देती हैं औऱ उनकेसंग बैठकर टेलीविज़न देखते हुए नीलेश कां इंतजार करती हैं। ऐसे हि एक् डेढ़ घंटा औऱ बीत जाता हैं मगर नीलेश नहि आता हैं। फिन वोँ बच्चों कों सुलाकर वापसहॉल मे आकर नीलेश कां इंतजार करती हैं। घड़ी मे रात केँ ग्यारह बजरहे थें, मगर नीलेश अभि तक नहि आया। तभी उसका मोबाइल आता हैं, मगर आखिरी उसे उठाती नहि हैं।
इधरअब नीलेश कों भि चिंता होने लगती हैं कि आखिरी सोई याँ नहि। नीलेश कुछदेर इसी दुविधा मे डूबा रहता हैं। फिन वोँ घऱ जाने कि सोचता हैं औऱ हॉस्पिटल सें निकल एक् ऑटो पकड़कर घऱ केँ लिए निकल जाता हैं।
इधर आखिरी नें यह भि नहि देखा थां कि उसकी दोनों वाहनघऱ केँ बाहर् हि खड़ी हैं। आखिरी तोँ पूरादिन औऱ आधीरात घऱ मे नीलेश कि चिंता औऱ इंतजार मे हि गुज़ार दिया थां।
रात केँ लगभग साढ़े बारहबजे घऱ केँ दरवाजे कि घंटी बजती हैं। जैसे हि आखिरी घंटी सुनती हैं वोँ दौड़कर कर दरवाजा खोलती हैं औऱ नीलेश केँ गलेलग जाती हैं। थोड़ी देरबाद नीलेश उसे कहता कि अब अंदरचले याँ यहीं खड़े रहने कां इरादा हैं।
आखिरी : भैय्या, आप् बहोत बुरे हैं, सुभह सें मे आपका इंतजार करतीरही औऱ आप् अब आँ रहे हैं। (नाराज़गी गुस्से सें)
नीलेश : अब सारीबात यहीं करोगी याँ अंदरचले।
फिन दोनों अंदर आँ जाते हैं औऱ दरवाजा लगा देते हैं।
अंदरआते हि आखिरी नें नीलेश केँ पैरों कों पकड़कर रोनेलगी।
नीलेश : क्याँ हुआ तुम् ऐसे क्यूं रोरही हौ ?
आखिरी : भैय्या, मुझे क्षमा कर दीजिए। मैंने सुभह आप् पऱ हाथ उठाया उसकेलिए मुझे क्षमा कर दीजिए। (रोतेहुए.)
नीलेश : पायल, उसमें तुम्हारी कोई गलती नहि थि, बल्कि सारी गलती मेरी थि। उसकेलिए तुम् क्यूं माफ मांगरही हौ, बल्कि मुझे तुमसे मांगनी चाहिए।
आखिरी : फिन भि मैंने आप् पर्र हाथ उठाया थां। (रोतेहुए.)
नीलेश : ठीक हैं, पहले तुम् रोनाबंद करो औऱ खड़े होँ।
आखिरी कों नीलेश खड़ा करता हैं औऱ उसके आंसू भि साफ़ करता हैं।
नीलेश : पायल, तुमने कुछ खाया याँ नहि ?
आखिरी : आपने खाया याँ नहि ?
नीलेश : प्रश्न कां प्रश्न जवाब नहि होता हैं बहना!
आखिरी : पहले आप् मेरे प्रश्न कां जवाब दीजिए।
नीलेश : इसका मतलब हैं तुमने खानां नहि खाया। औऱ ऐसा क्यूं किया ?
आखिरी : मैंने आपसे पहले हि कह दिया थां कि आप् जब तक नहि आयेंगे। तब तक मे भूखी प्यासी रहूंगी। (नाराज़ होतेहुए.)
नीलेश : अच्छा, अब मे आँ गय़ा हूं, अब तोँ खानां खालो।
आखिरी : पहले आप् खा लीजिए। फिन मे खा लूंगी। (थोडा खुश होते हुए.कहती)
नीलेश : अच्छा, तौ कल जैसेसंग मे हि खाते हें।
आखिरी : ठीक हैं, पांच मिनट मे खानां गर्म करके लाती हूं। तब तक आप् हाथ मुंह धोकर आँ जाइए।
नीलेश : ठीक हैं, तुम् भि अपना चेहरा धोलो आंसू सें पूरा चेहरा बिगड़ गय़ा हैं। (हंसते हुए.)
आखिरी : भैय्या, आप् भूलिए मत मुझे आपको सज़ा भि देनी। (कातिलाना मुस्कान केँ संग)
नीलेश : अच्छा, कौनसी सज़ा देंगी आप् हमेंजज साहिबा ?
आखिरी : पहले आप् खानां खा लीजिए। फिन आपकी सज़ा बताई जाएगी।
नीलेश : जोँ हुकुम जज साहिबा। (हंसते हुए.)
फिन दोनों अपनेरूम मे जाकरहाथ मुंह धोकर आँ जाते हैं।
आखिरी रसोई सें खानां गर्म करके लाती हैं औऱ दोनों भइया- बेहन बैठकर खानां खाने लगते। कुछ देर मे दोनों खानां खा लेते हैं इस दौरान कुछ बातें भि करते हैं। आखिरी डायनिंग टेबलसाफ करने लगती हैं तोँ निखिल वहां सें जाने लगता हैं तभी आखिरी उसेरोक देती हैं औऱ कहती हैं।
आखिरी : भैय्या, कहां जारहे हें अभि आपको सज़ा सुनानी हैं।
नीलेश : कहीं नहि बस अपनेरूम मे जाकर कपड़े बदलकर आता हूं।
आखिरी : कोई जरूरत नहि हैं, आप् यही कुर्सी पऱ बैठ जाइए। तब तक मे टेबलसाफ करती हूं।
नीलेश : जी, जज साहिबा।
थोड़ी देर मे आखिरी अपनेकाम सें मुक्त होकर नीलेश केँ पासआती हैं।
नीलेश : जज साहिबा, क्याँ अब हमें आप् सज़ा सुना सकती हैं ?
आखिरी : इतनी भि क्याँ जल्द हैं, सज़ा भि सुनाई जाएगी औऱ आपको सज़ा भि भुगतनी पड़ेगी।
नीलेश : जी, जज साहिबा।
नीलेश कुर्सी पर्र बैठा थां। पायल भि उसकेपास हि खड़ी थि
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Zabardast Sex say Bhara Update diya h bhay majaa aa gyaa abi too Vaibhav k aane mai waqt h or Nilesh bi kuch din yahi pr h Aage or kya kya hotha h dekhte h. Waiting for the next Update
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