~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
bhay aaj hi apki kahani padi sari अब tak jitni likhi h, bhay ji sacch mai lazwaab likhi h,,,, और hindi mai likhi h too उसका अपना hi alag mja h??
or bhay story mai joo palak kaa character hain, क्या बात hain, mja aa gya palak की cid wali baate padkar ??
Neelesh और उसकी beti palak के beech joo कुछ update mai bonding dikhaya hain, chamatkari hain bhay??
Umeed hain age bi kahani ayese hi chalti rahe,,, waiting for next update
आजरात कों याँ कल सुभह तक एपसोड देता हूं औऱ इसबार Kapil Bajaj आपकी ख़्वाहिश भि पूरी होँ जाएगी।
~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 12
तीनों लोग हॉस्पिटल पहुंच जाते हैं औऱ डॉक्टर कां इंतजार करते हैं। लगभगआधे घंटेबाद डॉक्टर आता हैं औऱ अनिता कों देखता हैं, देखने केँ बाद वोँ नर्स सें बात करता हैं उसेकुछ समझता हैं।
फिन वोँ बाहर् जाने लगता हैं।
नीलेश : डॉक्टर साहब!, नमस्कार!
डॉक्टर : नमस्कार!, जी कहिए।
नीलेश : यह जोँ मरीज हैं। वोँ मेरी सलहज (साले कि पत्नि) हैं औऱ इनकी पत्नि हैं। ( निखिल कि तरफ इशारा करतेहुए। )
डॉक्टर : आप् लोगों कों पता हि होगा कि वोँ अभि कोमा मे हैं।
नीलेश : जी, मैंने यह जानना चाहता हूं कि अनिता कब तक ठीक होँ सकती हैं ?
डॉक्टर : यह तौ कहना मुश्किल हैं कि कब तक ठीक होंगी, क्योंकि कोमा सें शख्स एक् मिनट मे बाहर् आँ सकता हैं याँ फिनकई सालों भि लग सकते हैं।
नीलेश : इन्हें यहांकब तक रहना पड़ेगा ?
डॉक्टर : अभि हमेंकुछ जांच औऱ करनी हैं, इसलिये कम सें
कमदसदिन इन्हें यहां रहना पड़ेगा। उसकेबाद हि हम् इन्हें छुट्टी देगें। यदि आप् इन्हें औऱ किसी हॉस्पिटल मे लेँ जानां चाहते हैं तौ अभि भि लेँ जा सकते हैं।
नीलेश : ऐसीकोई बात नहि, बस वोँ जानना थां कि यहां कितने दिन रुकना हैं, इसलिये आप् सें पूछा। हमें यहांकोई दिक्कत नहि हैं।
डॉक्टर : ठीक हैं, मुझे दूसरे मरीज भि देख्ना हैं।
नीलेश : जी।
डॉक्टर रूम सें चला जाता हैं औऱ नर्स भि उसके पीछेचली जाती हैं।
निखिल : जीजाजी, अब दिदी कों केसे समझाएंगे ?
नीलेश : पहलेउसे यहां तोँ लेकरआते हैं, फिन देखते हैं क्याँ होता हैं ?
निखिल : जी।
नीलेश : मे जाकर सपना कों लें आता हूं। साम तक वापस आँ भि जाऊंगा।
निखिल : जीजाजी, दिदी कों मे लेँ आता हूं।
नीलेश : नहि, तुम् यहींरहो।
आखिरी : मे चलूं क्याँ आपकेसंग भैय्या ?
नीलेश : नहि, तुम् भि यहीरहो।
नीलेश : अच्छा, मे जारहा हूं, कुछकाम हौ तौ मोबाइल कर देना।
फिन नीलेश अपनी वाहन सें इंदौर लिए निकल जाता हैं। लगभग एक् डेढ़ घंटेबाद आखिरी औऱ निखिल भि घऱ केँ लिए निकल जाते हैं।
कुछदेर बाद.
आखिरी औऱ निखिल घऱ पहुंच जाते हैं। सकीना आकर द्वार (दरवाज़ा) खोलती हैं, सबलोग हॉल मे आँ जाते हैं।
आखिरी : अवनी कहां हैं ? (सकीना सें पूछती हैं। )
सकीना (नौकरानी) : वोँ साहबजी केँ संग बाहर् गई हैं।
आखिरी : ठीक हैं, मेरा औऱ निखिल जी कां खानां लगादो।
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
फिन आखिरी अपने पति कों मोबाइल करती हैं, कुछदेर मे मोबाइल रिसीव हौ जाता हैं।
आखिरी : हैलो.।
वैभव : कहो.मेरी जान।
आखिरी : आप् अवनी कों कहां लें गए ?
वैभव : वोँ माॅल मे कुछ खरीदने आँ रहा थां तौ सोचा कि अवनी कों भि लेँ जाता हूं, वोँ भि घूम लेगी।
आखिरी : ठीक हैं, कब तक वापस आँ रहे हें ?
वैभव : बस, एक् घंटे मे आँ जाऊंगा।
आखिरी : ठीक हैं, बाय.।
वैभव : बाय.मेरी जान। (मोबाइल कट जाता हैं। )
निखिल औऱ आखिरी हॉल मे बैठकर बात करने लगते हैं। थोड़ी देरबाद सकीना हॉल मे आती हैं औऱ आखिरी सें बोलती हैं।
सकीना (नौकरानी) : मालकिन, खानां सजधजकर हैं।
आखिरी : ठीक हैं।
आखिरी : निखिल, चलो खानां खालो।
फिन दोनों डायनिंग टेबल पऱ बैठकर खानां खाते हैं। फिन दोनों खानां खाकर अपनेकाम मे लग जाते हें, निखिल
वापसहॉल मे बैठकर टेलीविज़न देखने लगता हैं औऱ आखिरी अपनेरूम मे कुछकाम कररही थि।
एक् सें डेढ़ घंटेबाद वैभव औऱ अवनी भि आँ जाते हैं। अवनीआते हि पिताजी केँ पासचली जाती हैं औऱ वैभव भि निखिल केँ पासबैठ जाता हैं।
अवनी : पिताजी, आज अंकल मुझे बाहर् घुमाने लेँ गए थें औऱ वहां बहोत सि अच्छी-अच्छी चीजें भि खिलाई। (ख़ुशी सें.)
निखिल : अच्छा!, आपने अंकल कों धन्यवाद! कहा याँ नहि ?
अवनी : नहि। (मासूमियत सें कहा। )
निखिल : बेटा, यह ग़लतबात हैं। अंकल नें आपको घुमाया औऱ बहोत सि चीजें भि खिलाई फिन भि आप् नें अंकल कों धन्यवाद! नहि कहा।
अवनी : बापू, सॉरी।
निखिल : बेटा, अब जल्द सें अंकल कों धन्यवाद! बोलो।
अवनी : धन्यवाद! अंकल। (वैभव कि ओर देखकर। )
वैभव : अवनी, तुमने अपने बापू कों वोँ वालीबात तौ बताई हि नहि।
अवनी : कौनसी बात ? (औऱ सोचने लगी। )
वैभव : जोँ तुमने मुझसे कही थि।
अवनी : हां, याद आया।
अवनी : बापू, मैंने वहां माँ कों भि देखा थां।
निखिल : क्याँ ? (अवनी कि बातसुन निखिल आश्चर्य! मे पड़ जाता हैं। )
वैभव : मुझे भि आश्चर्य! हुआ, जब अवनी नें कहा, "उसने अभि माँ कों देखा हैं। "
निखिल : अवनी, तुमने किसी औऱ कों देखा होगा।
अवनी : बापू, वोँ माँ हि थि।
वैभव : मुझे भि यही लगता हैं कि अवनी नें किसी औऱ कों देखा होगा याँ होँ सकता हैं कि वोँ अनिता जी जैसी दिखती होँ।
निखिल : हां, यह होँ सकता हैं।
निखिल : इसने आपको अधिक परेशान तोँ नहि किया ?
वैभव : नहि, अवनी नें मुझे बिल्कुल भि परेशान नहि किया।
अवनी : पिताजी, अंकल बहोत अच्छे हें।
वैभव : अच्छा, तौ जल्द सें हमें एक् प्यारी सि पप्पी दो।
अवनी उठकर वैभव केँ पासआती हैं औऱ उनकेगाल पे एक् पप्पी देती हैं औऱ वैभव भि उसके दोनों गालों पर्र पप्पी देता हैं।
निखिल : अवनी, अपने बापू कों पप्पी नहि दोगी।
अवनी अपने पिताजी कों भि पप्पी कर देती हैं औऱ निखिल भि उसेकर देता हैं। इधरयह लोग अपने बातों मे व्यस्त थें, आखिरी भि कुछदेर बाद अपनेरूम सें बाहर् हॉल मे आँ जाती हैं।
आखिरी : क्याँ बातें होँ रही हैं ?
वैभव : कुछ नहि बसऐसे हि थोड़ी बातचीत कररहे थें, आओ बैठो।
आखिरी : अवनी, मजा आया अंकल केँ संग बाहर् जाकर याँ नहि ?
अवनी : आंटी, बहोत मजाआया अंकल नें मुझे बहोत सि चीजें भि खिलाई।
आखिरी : अच्छा, फिन क्याँ-क्याँ खाया पिया वहां पऱ आपने ?
अवनी : फ्रेंच फ्राइज, बर्गर, कोल्डड्रिंक औऱ आइसक्रीम भि खाई।
आखिरी : हमारे लिए आप् कुछ नहि लाए ? (मुस्कुराते हुए.)
अवनी : मुझे तौ अंकल नें खिलाया थां, आप् उनसे कहिएवे आपको भि खिला देगे।
अवनी कि बातसुन सब केँ चेहरे पर्र मुस्कान बिखर जाती हैं।
आखिरी : सकीना.सकीना। (आवाज़ लगाती हैं। )
कुछदेर बाद.
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
आखिरी : सब केँ लिए पानी लें आओ औऱ जूस भि बना देना।
सकीना : जी मालकिन।
सकीना रसोई मे जाती हैं औऱ सब केँ लिए पानी लाती हैं, फिनसब कों पानी देकरजूस बनाने केँ लिएचली जाती हैं।
निखिल : मे जीजाजी कों मोबाइल करपूछ लेता हूं कि वोँ पहुंचे याँ नहि।
आखिरी : मैंने भि आपसेयही बात बोलने वाली थि।
फिन निखिल अपने जीजाजी सें बात करता हैं। बात होने केँ बाद आखिरी पूछती हैं।
आखिरी : क्याँ कहा भैय्या नें पहुंचे याँ नहि ?
निखिल : जीजाजी पहुंच गए हैं औऱ थोड़ी देर मे वापस यहां केँ लिए निकल जाएंगे।
तभीघऱ केँ दरवाज़े कि घंटी बजती हैं। घंटी कि आवाज़ सुनकर सकीना दरवाजा खोलने आँ जाती हैं। दक्ष अंदरआते हि माँ सें कहता हैं।
दक्ष : मां, जोरों कि भूखलगी हैं।
आखिरी : बेटा, रूम मे जाकर जल्द सें अपनी विद्यालय ड्रेस बदललो, तब तक मे खानां लगाती हूं।
दक्ष : जी मां।
इधर सपना केँ घऱ पर्र नीलेश औऱ सपना अपनेरूम मे बातकर रहे थें।
सपना : मे आपसेकब सें पूछरही हूं, मगर आप् कोई जवाब नहि देरहे।
नीलेश : अरे, मैंने तुमसे पहले भि कहा, वहां जाकरसभी पताचल जाएगा। अब जल्द रेडी होँ जाओ, तब तक मे पायल औऱ पलक कों देखकर आता हूं।
नीलेश अपनेरूम सें निकलकर पायल औऱ पलक केँ रूम केँ बाहर् सें बोलता हैं।
नीलेश : तुम् दोनों सजधजकर हुए याँ नहि।
पायल : पिताजी, बसदो मिनट मे आँ रहे हैं।
नीलेश हॉल मे सोफे पऱ बैठ जाता हैं। कुछदेर बाद पायल औऱ पलक भि आँ जाते हैं औऱ थोड़ी देरबाद सपना भि आँ जाती हैं। फिनघऱ लॉक करकेसब लोग वाहन मे बैठकर घऱ सें निकल जाते हैं।
इधर आखिरी केँ घऱ पर्र आखिरी अपने बेटे कों खानां खिलारही थि औऱ निखिल, वैभव औऱ अवनी टेलीविज़न देखरहे थें।
कुछदेर बाद निखिल कां मोबाइल बजता हैं औऱ वोँ मोबाइल पर्र बात करने लगता हैं। थोड़ी देरबाद आखिरी औऱ दक्ष भि हॉल मे आकरबैठ जाते हैं।
आखिरी : निखिल जी, भैय्या कां कॉलआई थां ?
निखिल : जी।
आखिरी : क्याँ बोलरहे थें ?
निखिल : वोँ दिदी औऱ बच्चों केँ संग आँ रहे हें।
आखिरी : यह तौ अच्छी बात हैं, इसी बहाने मे पायल औऱ पलक सें भि मिल लूंगी।
अवनी : पिताजी, पायल औऱ पलक दिदी आँ रहे हैं ?
निखिल : हां।
आखिरी : सकीना.।
सकीना (नौकरानी) : अाई मालकिन।
थोड़ी देरबाद.
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
आखिरी : सकीना ऊपर केँ दोरूम कि अच्छे सें सफाईकर दो।
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
फिनसब थोड़ी देर बातचीत करते हैं, फिन आखिरी औऱ वैभव अपने-अपने काम मे व्यस्त हौ जाते हैं औऱ निखिल, दक्ष औऱ अवनी टेलीविज़न देखने मे व्यस्त होँ जाते हैं। ऐसे हि साम होँ जाती हैं।
सबलोग हॉल मे बैठकर नीलेश केँ आने कां इंतजार कररहे हैं।
आखिरी : भैय्या कों अभि तक आँ जानां चाहिए थां।
निखिल : होँ सकता हैं कि रास्ते मे ट्रैफिक अधिक होँ, इसलिये वक़्त लगरहा हैं।
वैभव : निखिल जी, सही कहरहे हैं। आजकल रास्तों पऱ ट्रैफिक बहोत होता हैं।
आखिरी : हां, मे जानती हूं, मगरफिन भि उन्हें अभि तक आँ जानां चाहिए थां। (चिंतित स्वर मे.)
वैभव : तुम् अधिक फ़िक्र मतकरो, वेलोग आते हि होंगे।
तभी निखिल कां मोबाइल बजता हैं, निखिल अपनेजेब सें फोन निकाला केँ देखता हैं औऱ फिनबात करता हैं।
निखिल : कहो राजेश।
राजेश : "."
निखिल : कहां हौ तुम् अभि ?
राजेश : "."
निखिल : अच्छा, तुम् ऐसाकरो कि रूम नंबर 305 मे चलेजाओ। हम् लोग भि थोड़ी देर मे वहां आँ रहे हें।
राजेश : "."
निखिल : ठीक हैं। (मोबाइल कट जाता हैं। )
थोड़ी देरबाद घऱ केँ दरवाज़े कि घंटी बजती हैं। आखिरी उठकर द्वार (दरवाज़ा) खोलती हैं, नीलेश औऱ बाकी लोगों कों देखकर खुश होँ जाती हैं। फिनसब लोगों अंदरहॉल मे आँ जाते हैं। सपना निखिल, अवनी औऱ बाकीलोग कों देखखुश होती हैं, मगरयह खुशी ज़्यादा देर नहि रह पाती हैं। इसकीवजह ये थि कि निखिल औऱ अवनी वहीं थें, लेकिन उसे अनिता नहि दिखी तोँ वोँ नीलेश कि ओर देखकर उसेकुछ बोलती उसके पहले हि नीलेश बोल देता हैं।
नीलेश : पहले तुम् बैठो तौ सही।
आखिरी : हां, भाभी आप् बैठिए, बच्चों तुम् भि बैठो।
आखिरी केँ मुंह सें भाभी सुनकर सपना कों आश्चर्य! होता हैं। फिनसब लोगबैठ जाते हें। पलक अपने बापू केँ पास बैठती हैं।
सपना औऱ पायल दोनों वैभव, आखिरी औऱ दक्ष कों देख थोड़े उलझन मे थें औऱ संग हि उन्हें अनिता कि चिंता भि हौ रही थि। सपना बहोत कुछ पूछना चाहती थि, मगरपूछ नहि पा रहीं थि।
तभी सकीना सब केँ लिए पानी लाती हैं औऱ सबलोग पानी पीते हैं।
आखिरी : सकीना, जल्द सें सब केँ लिएगरम चाय भि बनालो।
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
निखिल : आखिरी जी, हमें वहां भि चलना हैं।
आखिरी : बस, गरम चाय पीकर चलते हैं।
फिनसभी शांति सें बैठे रहते हैं, क्योंकि अभि कोईबात करना उचित नहि समझरहा थां।
कुछ मिनटबाद हि शांत बैठीपलक अपने बापू सें बोलती हैं।
पलक : पिताजी, यह किसका घऱ हैं ?
नीलेश : बेटा, यहघऱ इनका हैं। (आखिरी कि ओर इशारा करके)
पलक : पिताजी, यह आंटीकौन हैं ?
(नीलेश कुछ बोलता उसके पहले हि आखिरी बोल देती हैं। )
आखिरी : बेटा, मे आपकी फूफी हूं। (मुस्कुराते हुए.)
(आखिरी केँ मुंह सें फूफी सुनकर सपनाफिन सें आश्चर्य! मे पड़ जाती हें औऱ संग मे पायल कों भि आश्चर्य! होता हैं। )
पलक : आंटी, मगर.।
(पलक कि बात पूरी होने सें पहले नीलेश बोल देता। )
नीलेश : बेटा, अब बाकी केँ प्रश्न बाद मे पूछ लेना।
पलक : जी पिताजी।
सपना भि कुछ बोलने वाली होती हैं, तभी सकीना सब केँ लिएगरम चाय लें आती हैं। फिनसब गरमचाय पीते हैं औऱ कुछदेर मे सबगरम चायपी लेते हैं।
निखिल : जीजाजी, अब हमें चलना चाहिए, राजेश भि वहां हमारा इंतजार कररहा हैं।
नीलेश : ठीक हैं।
सपना : यह निखिल कहां चलने कां बोलरहा हैं ? (नीलेश सें)
नीलेश : सपना, जिसके लिए हम् यहांआए हैं।
सपना : तौ जल्द सें चलिए।
आखिरी : सकीना।
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
आखिरी : हम् लोग बाहर् जारहे हैं, तुम् बच्चों औऱ घऱ ख्याल रखना।
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन।
सकीना (नौकरानी) : मालकिन, खाने मे क्याँ बनाना हैं ?
आखिरी : बस, बच्चों केँ लिएबना लेना औऱ बच्चों कों खिला भि देना। जब तक हम् वापस नहि आँ जाते हैं, बच्चों कां ध्यान रखना।
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन, मगर आप् लोगों केँ खाने कां क्याँ करना हैं ?
आखिरी : तुम् उसकी चिंता मतकरो।
फिन निखिल, नीलेश, वैभव, आखिरी, सपना औऱ पायल जाने कों रेडी होते हैं औऱ जाने लगते हैं तभीपलक बोलती हैं।
पलक : बापू, आप् लोग कहां जारहे हैं ?
नीलेश : बेटा, हम् कुछकाम सें जारहे हैं।
पलक : मे भि चलूंगी।
नीलेश : बेटा, आप् अभि अवनी औऱ दक्ष भैय्या केँ संग यहीं टेलीविज़न देखो। हम् थोड़ी देर मे आँ जायेंगे।
पलक : नहि, मे भि चलूंगी। (जिद्द करतेहुए। )
सपना : पलक,.। (नीलेश उसे बोलने सें रोक देता हैं। )
नीलेश : बेटा, अपने बापू कि बात भि नहि मानोगी ? आप् यहीं रहिए, हम् जल्द आँ जायेंगे।
पलक : ठीक हैं, बापू।
नीलेश : मेरा अच्छा बेटा!
पलक : औऱ प्यारा भि। (अपने चिरपरिचित अंदाज मे)
फिनसब लोग हॉस्पिटल केँ लिए निकल जाते हैं। नीलेश कि गाड़ी मे नीलेश, सपना, निखिल औऱ पायल। वहीं आखिरी कि वाहन मे वैभव औऱ आखिरी।
रास्ते मे आखिरी कि वाहन मे वैभव सें आखिरी बोलती हैं।
आखिरी : आप् आते वक्त किसी अच्छे होटल सें हम् सब केँ लिए खानां पैक करवा लेना।
वैभव : तुमने सकीना कों खानां बनाने सें मना क्यूं किया ?
आखिरी : वोँ अकेली इतने लोगों कां खानां केसे बनाती औऱ दिनभर भि वोँ रूम कि सफाई करतीरही, इसलिये मैंने उसेमना कर दिया।
वैभव : ठीक हैं।
फिन लगभगआधे घण्टे मे वोँ सब हॉस्पिटल पहुंच जाते हें।
जैसे हि नीलेश कि वाहन हॉस्पिटल केँ पार्किंग केँ बाहर् रुकती हैं, सपना घबरा जाती हैं औऱ नीलेश सें बोलती हैं।
सपना : आपने गाड़ी यहां क्यूं रोकी ? अनिता कों कुछहुआ तोँ नहि हैं नां ? (घबराते हुए.)
नीलेश : तुम् चलो तोँ सही।
सपना : आप् लोग मुझसे कुछ छुपारहे हैं, जरूर अनिता कों कुछहुआ हैं ?
(सपना कि बातसुन पायल भि घबरा जाती हैं। )
पायल : पिताजी, मामीजी जीठीक हैं नां ?
नीलेश : बेटा, वोँ अभि हॉस्पिटल मे भर्ती हैं।
सपना : क्याँ हुआ हैं अनिता कों ?
नीलेश : तुम् स्वयं चलकरदेख लो।
सपना : चलिए, जल्द सें मुझे अनिता सें मिलना हैं।
निखिल : जीजाजी, आप् दिदी औऱ पायल कों लेके जाएं। मे गाड़ी पार्किंग मे लगा केँ आता हूं।
फिन नीलेश, सपना औऱ पायल उतरते हैं वहींपास मे वैभव औऱ आखिरी खड़ेहुए थें। फिनसब हॉस्पिटल केँ अंदरचले जाते हैं। नीलेश अनिता केँ रूम कां दरवाजा नॉक करता हैं, राजेश दरवाजा खोलता हैं औऱ सब अंदर जाते हैं।
~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 13
जैसे हि सपना अंदर जाती हैं, वोँ सीधे बिस्तर केँ तरफ जाती हैं औऱ अनिता कों देखते हि ज़ोर सें अनिता कहती हैं।
पायल भि वहां जाकर देखती हैं, वोँ भि अनिता कों ऐसेदेख रोने लगती हैं।
सपना : अनिता कों क्याँ हुआ हैं, वोँ कुछबोल क्यूं नहि रही हैं ?
नीलेश : सपना, वोँ अभि कोमा मे हैं।
सपना : नहि, यहसच नहि होँ सकता; आप् झूठबोल रहे हैं।
निखिल : दिदी, यहसच हैं।
सपना : तुम् चुप हि रहो। (बहोत गुस्से सें औऱ जोर सें कहती हैं। )
जिसेसुन बाकीलोग भि हक्के-बक्के रह जाते हैं।
नीलेश : सपना, शांति सें हॉस्पिटल हैं, दूसरे लोगों कों तकलीफ़ होगी।
सपना : आप् इसेकह दो, यह अभि कि अभि यहां सें चले जाएं। यह सभी इसकीवजह सें हुआ हैं, कहीं मेरे हाथों सें इसकाखून नां होँ जाएं।
नीलेश : ठीक हैं।
फिन नीलेश अपनेपास मे खड़े वैभव कों इशारा करता हैं। वैभव भि इशारा समझ केँ निखिल कों बाहर् लेँ जाता हैं। उनकेसंग राजेश भि चला जाता हैं।
नीलेश : सपना, मैंने उसेभेज दिया हैं अब तुम् शांति सें यहांबैठ जाओ।
आखिरी : भाभी, आप् धीरे-धीरे बैठ जाइए।
सपना : तुम् मुझे बार-बार भाभी क्यूं बोलरही होँ ? (थोडा गुस्से सें चिल्लाकर.)
नीलेश : तुम् पायल पर्र क्रोध क्यूं होँ रही होँ ?
सपना : मैंने तौ पायल कों कुछकहा हि नहि। (हैरानी! सें)
नीलेश : मे अपनी पायल कि बात नहि कररहा हूं, मे इनकीबात कररहा हूं। (आखिरी कि ओर इशारा करके)
सपना : वोँ मुझे बार-बार भाभीकह रही हैं इसलिये क्रोध आँ गय़ा।
नीलेश : तुम् उसकी भाभी हौ, इसलिये वोँ तुम्हें भाभीकह रही हैं।
सपना : मे कुछ समझी! नहि ?
नीलेश : पहले तुम् बैठो तौ सहीफिन तुम्हें समझता हूं।
सपना : ठीक हैं, मगर पहलेयह बताइए कि वोँ महिला कहां हैं जिसने अवनी औऱ अनिता कि खबर दि थि।
नीलेश : वोँ भि बता दूंगा, पहले तुम् आहिस्ता बैठो। पायल बेटा, तुम् भि बैठो।
फिन सपना औऱ पायल सोफे पऱ बैठ जाती हैं। आखिरी उन्हें पानी देती हैं औऱ उनकेपास हि बैठ जाती हैं।
सपना : माफ करना, मैंने तुम्हें गुस्से मे वोँ कह दिया थां।
आखिरी : कोईबात नहि, वैसे भि भाभी कों अपनी ननदी पऱ क्रोध करने कां पूराहक हैं। (मुस्कुरा केँ.)
सपना : डॉक्टर नें कुछ बताया, अनीता कब तक ठीक हौ जायेगी ?
नीलेश : अभि उन्हें कुछ ज़्यादा नहि बताया। केवल इतनाकहा हैं कि इन्हें यहांकुछ दिन औऱ रहना पड़ेगा, क्योंकि कुछ औऱ जांच करनी हैं।
सपना : ठीक हैं, मगर अनीता अच्छी हौ जायेगी नाँ ?
नीलेश : हां, हमें भि उम्मीद हैं कि अनीता बहोत जल्दठीक हौ जाएगी।
सपना : बस, मे यही चाहती हूं कि अनीता जल्द सें अच्छी हौ जाए।
आखिरी : भाभी, हम् सभी भि यही चाहते हें।
सपना : आप् बताएंगे, यह मुझे भाभी क्यूं बुलारही हैं ?
नीलेश : तुम्हें याद हैं, एक् बार तुमने मुझे सें पायल कां नाम पायल रखने कि वजह पूछी थि।
(सपना सोचने लगी। )
सपना : हां, याद आया।
नीलेश : यहवही हैं।
सपना : आपका मतलब हैं कि यहवही पायल हैं; आपके ताऊजी कि लड़की हैं।
नीलेश : हां।
सपना : मगर आपनेकहा थां कि "मुझे नहि पता हैं कि मेरी प्यारी बेहन कहां हैं। "
नीलेश : हां, कहा थां।
सपना : आपनेकभी मुझे बताया हि नहि कि आपकी बेहन आपकोमिल गई हैं औऱ कब मिली ?
नीलेश : कल हि मिली हैं औऱ वोँ भि इत्तेफ़ाक़ सें। (खुश! होतेहुए.)
सपना : मतलब ?
नीलेश : जिसने निखिल कों मोबाइल किया थां औऱ हमें यहां बुलाया वोँ पायल हि थि।
सपना : पायल, धन्यवाद! तुम्हारा यह अहसान मे जीवनभर नहि भूलूंगी। तुम्हें कुछ भि चाहिए, तोँ अपनी भाभी सें बोल देना।
आखिरी : भाभी, इसमें अहसान कि कैसीबात, मैंने जौ भि किया इंसानियत केँ नाते हि किया थां औऱ रहीबात मांगे कि तोँ वक्तआने पर्र मांग लूंगी। (मुस्कान केँ संग)
सपनाआगे बढ़कर आखिरी कों गलेलगा लेती हैं औऱ उसके माथे कों चूम लेती हैं। दोनों ननदी भाभी भावुक होँ जाती हैं।
थोड़ी देरबाद.
सपना : जब आपकोकल हि पताचल गय़ा थां, आपकी बेहनमिल गई हैं। फिन भि आपने मुझेकल मोबाइल पऱ यहबात नहि बताई ?
नीलेश : मे बता हि रहा थां कि तुमने बोलने हि नहि दिया।
सपना : ठीक हैं, मगर तुमने अनीता केँ बारे मे भि नहि बताया थां।
नीलेश : वोँ तुम्हारे गुस्से केँ कारण नहि बताया थां।
आखिरी : भाभी, अभि आपका क्रोध देखकर तोँ मे डर हि गई थि।
(आखिरी कि बात सुनके नीलेश मंद-मंद हंसने लगता हैं। जिसे सपनादेख लेती हैं। )
सपना : पायल, ऐसी कोईबात नहि हैं, तुम्हारे भैय्या कों मेरे गुस्से केँ बारे मे सभीपता हैं। फिन भि इन्होंने नहि बताया।
नीलेश : अच्छा, तौ फिन मे निखिल कों अंदर बुलालूं ?
सपना : बुलालो, मगर मे जबतक अनीता ठीक नहि हौ जाती हैं, उसेबात नहि करूंगी।
नीलेश : ठीक हैं, जैसी तुम्हारी मर्ज़ी।
नीलेश बाहर् जाता हैं, मगरउसे कोई भि वहां नहि दिखता हैं। वोँ निखिल कों मोबाइल करता हैं औऱ बात करता हैं। बात होने केँ बाद नीलेश वापसरूम मे आँ जाता हैं।
सपना : कहां हैं निखिल ?
नीलेश : वेलोग कैंटीन मे हैं, आँ रहे हैं।
पायल : बापू, फूफी जी कों मामीजी जी कहां मिली औऱ केसे ?
नीलेश : बेटी, जिसदिन आपकी मामीजी जब लापता हुई थि, उसीदिन आपकी फूफी कों वोँ एक् मार्ग किनारे बेहोश मिली थि औऱ उनकेपास हि अवनीरो रही थि। फिन आपकी फूफी उन्हें अपनेसंग लें आई।
सपना : मगर अनीता बेहोश केसे हुइ ?
नीलेश : वोँ तौ अनीता हि बता सकती हैं।
सपना : पायल, तुमने अनीता औऱ अवनी कि बुरे वक्त मे मदद कि औऱ उनकीजान भि बचाई। मेरीयही दुआ हैं कि तुम् हमेशा खुशरहो औऱ तुम्हारी सारी मनोकामनाएं पूरी हौ।
आखिरी : भाभी, मुझे मेरे भैय्या औऱ आप् सबमिल गए। इसे बड़ी खुशी! कि बात मेरेलिए क्याँ हौ सकती हैं।
सपनाउसे फिन सें गलेलगा लेती हैं औऱ कहती हैं कि तुम् मेरी ननदी हि नहि बल्कि मेरी प्यारी बेहन भि हौ।
इतने मे वैभव, निखिल औऱ राजेश भि आँ जाते हैं।
नीलेश : सपना, यह वैभवजी हैं। पायल केँ पति। (वैभवजी कि ओर इशारा करके)
वैभव : भाभीजी, नमस्कार!
सपना : नमस्कार!
राजेश : नमस्कार! दिदी।
सपना : नमस्कार!, केसे हौ राजेश ?
राजेश : बढ़िया हूं, दिदी।
नीलेश : बढ़िया तौ होंगे, कुंवारे जोँ ठहरे। (हंसते हुए.)
कुछ देर तक सबलोग बातें करते हैं। फिन नर्स आँ जाती हैं। आखिरी सब कों घऱ चलने कां कहती हैं। राजेश कों भि कहती हैं, मगर राजेश उसेये कह देता हैं कि वोँ यहीं दिदी केँ पासरुक जायेगा। फिन आखिरी निखिल सें कहती हैं कि वोँ राजेश कों समझाए, निखिल भि राजेश कों समझाता हैं, मगर वोँ नहि मानता हैं। आखिर सपना केँ कहने पर्र वोँ राजी होँ जाता हैं क्योंकि वोँ उन्हें अनीता दिदी जैसा हि मानता हैं।
सबलोग हॉस्पिटल सें निकल जाते हैं, रास्ते मे सबलोग एक् फैमिली रेसटोरेंट्स मे खानां खाते हैं। (खानां पैक करवाने केँ बजायवे लोग वहीं खानां खानेरुक जाते हैं। ) खानां खाने कि बादसब घऱ आँ जाते हैं।
सबलोग आकरहॉल मे बैठते हें, जहांसब बच्चे टेलीविज़न देखरहे थें। सब बच्चे उन्हें देख अपने माँ-पिताजी केँ पास आँ जाते हैं। निखिल केँ पास अवनीबैठ जाती हैं औऱ दक्ष अपनी माँ केँ पासबैठ जाता हैं। पलक भि नीलेश केँ पासआकर बैठ जाती हैं।
सकीना (नौकरानी) : मालकिन, सब बच्चों कों खानां खिला दिया हैं। अब मे घऱजारही हूं।
आखिरी : अरे, इतनीरात कों केसे जाओगी ? आज यहींरुक जाओ।
सकीना (नौकरानी) : मालकिन, मे रिक्शा सें चली जाऊंगी।
आखिरी : ठीक हैं, पैसे हैं तुम्हारे पास ?
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन, अब मे चलती हूं।
आखिरी : ठीक हैं।
सकीना केँ जाते हि पलक अपने पिताजी सें बोलती हैं।
पलक : पिताजी, कब सें मे आपका प्रतीक्षा कररही थि ?
नीलेश : बेटा, वोँ थोड़ी देर हौ गई वापसआने मे माफकर दो।
पलक : बापू, आप् सब कहां गए थें ?
नीलेश : बेटा, काम सें गए थें।
सपना : पलक, इधर मेरेपास आओ। (प्रेम सें बोलती हैं। )
पलक उठकर सपना केँ पासचली जाती हैं।
आखिरी उसे अपने पर्स सें एक् चॉकलेट निकाल केँ देती हैं।
पलक : धन्यवाद! आंटी।
आखिरी : बेटा, आप् मुझे आंटी नहि; फूफी कहाकरो।
पलक : जी।
सपना : बेटा, यह आपकी फूफी हैं औऱ वोँ आपके फूफाजी हैं। (वैभव कि तरफ इशारा करके)
सपना : बेटा, जल्द सें अपनी फूफी औऱ फूफाजी केँ पांवछुओ।
पलक : जी।
फिन पलक अपनी फूफी (आखिरी) औऱ फूफाजी (वैभव) केँ पेर छूती हैं।
आखिरी : दक्ष, तुम् भि अपनी मामीजी जी केँ चरण स्पर्श करो।
दक्ष भि अपनी मामीजी (सपना) केँ चरण स्पर्श करता हैं।
फिन थोड़ी देरसब लोग बातचीत करते हें, उसकेबाद सब सोनेचले जाते हैं।
(आखिरी कां घऱ बहोत हि खूबसूरत औऱ बड़ा हैं। इसदो मंजिला घऱ मे पांच बेडरूम, रसोई, हॉल, डायनिंग रूम औऱ एक् छोटा सां स्टोर रूम हैं। सब बेडरूम अटैचलेट बाथरूम हैं औऱ सब मे डबलबेड लगे हैं। आखिरी कां घऱ इतना बड़ा इसलिये हैं कि वैभव कां परिवार बड़ा औऱ धनवान थां। पहलेसब भइयाइसी घऱ मे रहते थें, मगरकुछ साल पहलेसब भइया अलग-अलग होँ गए औऱ वैभव केँ हिस्से मे यहघऱआया। )
अवनी औऱ दक्ष अपनेरूम मे सो जाते हैं। निखिल औऱ राजेश ऊपर केँ एक् रूम मे औऱ उसकेपास वालेरूम मे पायल औऱ पलकसो जाते हैं। नीलेश औऱ सपना नीचे केँ एक् रूम मे औऱ आखिरी औऱ वैभव अपनेरूम मे सो जाते हैं।
अगली सुभह सबसे पहले आखिरी उठ जाती हैं औऱ दक्ष केँ रूम मे जाती हैं। दक्ष कों उठाकर उसे कहती हैं।
आखिरी : बेटा, जल्द सें आप् रेडी हौ जाओ। तब तक आपकेलिए लञ्च बॉक्स रेडी करती हूं।
दक्ष : जी माँ।
आखिरी रसोई मे चली जाती हैं औऱ दक्ष अपने बाथरूम मे नहाने चला जाता हैं।
कुछदेर बाद बाकीलोग भि उठकर अपने नित्य कर्म करकेहॉल मे आँ जाते हैं। मात्र अवनी औऱ पलक कों छोड़कर, क्योंकि दोनों अभि भि सोरहे हैं।
तब तक आखिरी भि दक्ष कां लञ्च बॉक्स रेडीकर देती हैं औऱ फिनसब केँ लिएगरम चाय बनाकर लाती हैं औऱ सबलोग गरमचाय पीते हैं। नीलेश गरमचाय कि चुस्की लेतेहुए निखिल सें बोलता हैं।
नीलेश : निखिल, तुम् अनीता कि देखभाल केँ लिए यहींरुक जाओ।
निखिल : ठीक हैं।
आखिरी : भैय्या, आप् कहां जारहे हैं ?
नीलेश : हम् सभीघऱ जारहे हैं, अनीता केँ डिस्चार्ज होने केँ वक़्त आँ जाएंगे।
आखिरी : भैय्या, हम् लोग कितने सालों बाद मिले औऱ आप् जाने कि बातकर रहे हैं। आप् सब यहींरुक जाइए।
नीलेश : हम् सभी यहां नहि रुक सकते हें।
आखिरी : क्याँ यहघऱ आपका नहि हें ?
नीलेश : ऐसीकोई बात नहि हें।
आखिरी : तोँ फिन आप् लोग क्यूं नहि रुक सकते हैं ?
सपना : पायल, मे स्वयं यहां रुकना चाहती हूं, मगर पायल औऱ पलक कि पढ़ाई कि वजह सें हमें जानां होगा। इतने दिनों कि विद्यालय कि छुट्टी सें उनकी पढ़ाई छूट जायेगी।
आखिरी : भैय्या, आप् तौ रुक हि सकते हैं।
नीलेश : पायल, मुझे भि अपने दफ़्तर केँ कुछकाम निपटाने हैं, इसलिये मे भि नहि रुक सकता हूं।
आखिरी : ठीक हैं, तौ मे आपकेसंग चलती हूं।
नीलेश : यह क्याँ पागलों जैसीबात कररही होँ। तुम् यदि हमारे संग जाओगी तौ यहां दक्ष कि देखभाल कौन करेगा ?
वैभव : भैय्या, मैंने आपको पहले हि कहा थां कि आपकी बेहन आपकेलिए पागल हैं।
नीलेश : वैभवजी, फिन भि हम् नहि रुक सकते हैं।
आखिरी : प्लीज़.भैय्या!, आप् मेरीबात मान जाइए।
निखिल : जीजाजी, एक् तरीके सें यहबात हल हौ सकती हैं।
नीलेश : क्याँ कहना चाहते होँ तुम् ?
निखिल : मेरी स्थान आप् यहांरुक जाइए औऱ मे दिदी केँ संगचला जाता हूं।
नीलेश : मगर मुझे दफ़्तर केँ काम भि निपटाने हैं।
निखिल : वोँ मे निपटा दूंगा औऱ कुछ समस्या होगी तोँ आपको मोबाइल कर लूंगा। इसे आप् आखिरी जी केँ संगकुछ दिन यहांरह लेंगे, जिससे आखिरी जी कि ख़्वाहिश भि पूरी होँ जायेगी। इनकेलिए हम् इतना तौ कर हि सकते हैं।
वैभव : भैय्या, मुझे निखिल कि बात मे दमलगा। यह हौ सकता हैं।
आखिरी : भैय्या, निखिल जी कि बातमान जाइए।
नीलेश : सपना, तुम् क्याँ कहती हौ ?
सपना : मुझेकोई दिक्कत नहि हैं।
नीलेश : तोँ ठीक हैं, हम् ऐसा हि करते हैं।
आखिरी : धन्यवाद! भैय्या।
आखिरी : निखिल जी, आपका भि धन्यवाद! आपके सुझाव केँ कारण भैय्या यहां रुकने कों मानगए।
इनकी बातों केँ चक्कर कुछ लोगों कि गरमचाय हि ठंडी होँ जाती हैं। सपनाफिन सें गरमचाय बनाकर लाती हैं।
कुछदेर बाद दक्ष कि विद्यालय बस आँ जाती हैं औऱ वोँ विद्यालय चला जाता हैं।
सपना औऱ आखिरी सब केँ लिए रसोई मे ब्रेकफास्ट बनाने लगती हैं। लगभगआधे घण्टे बादपलक औऱ अवनी भि जाग जाते हैं। फिनसब डायनिंग टेबल पर्र ब्रेकफास्ट करते हैं।
कुछ घंटो केँ बादसब लोग खानां खा लेते हैं औऱ फिन जाने कि तैयारी करते हैं, मगरजब अवनी औऱ पलक कों घऱ जाने कां बोलते हैं तौ दोनों जिद्द करती हैं।
पलक अपने पिताजी केँ संग रहना चाहती थि औऱ अवनी भि आखिरी केँ संग रहना चाहती थि।
नीलेश अपने तरीके सें पलक कों समझा देता हैं औऱ वोँ घऱ जाने कों रेडी हौ जाती हैं औऱ आखिरी केँ कहने पर्र अवनी कों आखिरी केँ पास हि रहने दिया जाता हैं।
फिन निखिल, सपना, पायल, राजेश औऱ पलकसब इंदौर जाने केँ लिए वाहन सें निकल जाते हैं।
इनके जाने केँ बाद नीलेश औऱ आखिरी भि हॉस्पिटल चले जाते हैं। वैभव भि अपने दफ़्तर चला जाता हैं। घऱ पऱ केवल सकीना (नौकरानी) रह जाती हैं। वोँ भि अपने कामों मे व्यस्त हौ जाती हैं।
ऐसे हि आज कां दिन निकल जाता हैं, रात कों सबलोग खानां खाते हैं औऱ कुछदेर बातें औऱ टेलीविज़न देखते हैं फिनसब लोग अपनेरूम मे जाकरसो जाते हैं।
ऐसे हि तीनदिन औऱ गुजर जाते हैं, इस दौरान वैभव, नीलेश, आखिरी, दक्ष औऱ अवनी एक्-दो बार बाहर् घूमने औऱ शॉपिंग करने भि चले जाते हैं।
आज सुभह सें आखिरी रसोई मे काम करनेलग जाती हैं, पहले वोँ दक्ष कों सजधजकर कर विद्यालय भेज देती हैं। फिन वापस रसोई मे काम करने लगती हैं।
आज आखिरी इतनी व्यस्त इसलिये हैं क्योंकि आज वैभव अपने दफ़्तर केँ किसीकाम केँ सिलसिले मे दो दिनों केँ लिए दिल्ली जारहा हैं।
वोँ जल्द सें ब्रेकफास्ट रेडी करती हें औऱ वैभव औऱ नीलेश कों खिलाकर उनके जाने कि तैयारी करती हैं। थोड़ी देरबाद नीलेश औऱ वैभव एयरपोर्ट केँ लिए निकल जाते हैं।
वैभव केँ जाने केँ बाद नीलेश वहां सें निकलकर सीधे हॉस्पिटल चला जाता हैं, वहां एक्-दो घंटे रुकने केँ बादघऱ आँ जाता हैं।
घऱ पहुंचने केँ बाद आखिरी, नीलेश औऱ अवनी खानां खाते हैं। एक्-दो घंटेऐसे हि गुजर जाते हैं, दक्ष भि विद्यालय सें आँ जाता हैं। आखिरी उसे खानां खिलाकर अपनेकाम मे व्यस्त हौ जाती हैं औऱ नीलेश, दक्ष औऱ अवनी टेलीविज़न देखने व्यस्त हौ जाते हैं।
साम कों दक्ष अपनेरूम मे पढ़ाई करनेचला जाता हैं औऱ आखिरी भि अवनी कों अपनेसंग बाजार लेँ जाती हैं। नीलेश सोचता हैं कि एक् बार हॉस्पिटल होँ आता हूं, वोँ भि सकीना कों बोलकर हॉस्पिटल निकल जाता हैं।
ऐसे हि रात केँ आठबजे जाते हैं, आखिरी एक् बार वैभव कों मोबाइल करके उनकी खैर-खबर लें लेती हैं औऱ भैय्या कां इंतजार करने लगती हैं।
नीलेश जब घड़ी देखता हैं तौ वोँ भि हॉस्पिटल सें निकल सीधेघऱ आँ जाता हैं। दोनों बैठकर थोड़ी बात करते हैं, कुछदेर ऐसे हि बात करने केँ बाद नीलेश बच्चों कां पूछता हैं तौ आखिरी बोलती हैं कि बच्चों कों तोँ खानां खिलाकर सुला दिया। भैय्या, आप् भि हाथ मुंह धोकर आँ जाइए, तब तक मे आपकेलिए खानां लगाती हूं। नीलेश फ्रेश होकर आँ जाता हैं औऱ डायनिंग टेबल पर्र बैठ जाता हैं। आखिरी कि तरफदेख नीलेश उसे बोलता हैं।
नीलेश : तुमने खानां खाया कि नहि ?
आखिरी : नहि।
नीलेश : क्यूं नहि खाया ?
आखिरी : बस, आपका इंतजार कररही थि।
नीलेश : अच्छा!, कोईबात नहि, अब दोनों मिलकर संग खाएंगे।
आखिरी : भैय्या, आप् खा लीजिए। फिन मे खा लूंगी।
नीलेश : नहि, संग मे हि खानां पड़ेगा। वरना मे खानां नहि खाऊंगा। (थोडा नाराज़गी जातेहुए.)
आखिरी : ठीक हैं।
फिन दोनों खानां खाते हैं, कुछ हि देर मे उनका खानां हौ जाता हैं। दोनों हॉल मे आकरकुछ देर टेलीविज़न देखते हैं। फिन नीलेश उठकर अपनेरूम मे जाने लगता हैं तोँ आखिरी बोलती हैं।
आखिरी : भैय्या, रूकिये।
नीलेश : क्याँ हुआ ? ( रुककर उसे पूछता हैं। )
आखिरी : भैय्या, इतनेदिन होँ गए। आपसेढंग सें बात हि नहि होँ पाई, इसलिये अभि बातें करते हें, वैसे भि अभि मुझे नींद नहि आँ रही हैं।
नीलेश : अच्छा!, दो मिनटरुक मे यह कपड़े चेंजकर आता हूं, फिन धीरे-धीरे बैठकर बातें करेंगे।
आखिरी : ठीक हैं।
नीलेश अपनेरूम मे जाकर लोअर, टी शर्टपहन कर बाहर् आँ जाता हैं, मगर आखिरी उसे वहां नहि दिखाई देती हैं तोँ वोँ आवाज़ लगता हैं।
नीलेश : पायल.पायल.।
आखिरी : भैय्या, दो मिनट आँ रही हूं।
नीलेश : ठीक हैं।
नीलेश सोफे पर्र बैठकर आखिरी कां इंतजार करता हैं, मगर पांच मिनटबाद भि आखिरी नहि आई, तौ नीलेश फिन सें आवाज़ लगाने वाला होता हैं कि फिन सोचता हैं रूम मे जाकर बुला लेता हूं। रूम मे जाकर देखता हैं, मगर वहां भि आखिरी नहि देखती हैं। तभी आखिरी कि आवाज़ आती हैं जोँ कि बाथरूम सें निकलरही थि।
आखिरी : भैय्या।
नीलेश : अरे, कहां रुक गई थि, तुम्हें बातें नहि करनी ? ( आखिरी कि तरफ देखकर )
आखिरी : आप् चेंज करनेगए तौ मैंने सोचा मे भि चेंजकर लेती हूं।
नीलेश : ठीक हैं, चलो बाहर् बैठकर बातें करते हैं।
आखिरी : अब आप् यहां आँ गए हैं तौ यहीं बैठकर बातकर लेते हैं।
नीलेश : ठीक हैं।
फिन दोनों बिस्तर पर्र बैठ जाते हैं औऱ दोनों केँ बीच बातें शुरुआत हौ जाती हैं। कुछदेर बाद दोनों बिस्तर सें टेका लेकरपेर लंबेकर लेटेकर बातें करने लगते हैं, एक् सें दो घंटे बातें करते-करते आखिरी भावकु हौ जाती हैं औऱ रोने भि लगती हैं। नीलेश उसे सीने सें लगता लेता हैं औऱ चुप कराने लगता हैं।
नीलेश : अरे, ऐसे रोते नहि हैं जल्द सें अपने आसूंसाफ करो।
आखिरी : भैय्या, मुझे पुराने दिन बहोत याद आँ रहे हें। (रोतेहुए.। )
नीलेश : ऐसे रोते नहि हैं, मेरी प्यारी बेहन।
आखिरी : कितने सालों बाद, मैंने आज आपके मुंह सें "मेरी प्यारी बेहन" सुना।
नीलेश : चलो, अब अपने आसूं पूछो।
( फिन अपने हाथों सें उसके आसूंपोछ देता हैं। )
नीलेश : चल, अब मे अपनेरूम मे जाता हूं।
आखिरी : भैय्या, आज यहींरुक जाओ। प्लीज़.। (नीलेश कि ओरआशा भरी नजरों सें.)
नीलेश : ठीक हैं।
आखिरी जैसे हि "ठीक हैं। " सुनती हैं, नीलेश केँ चेहरे पऱ चुम्बन कि बरसात कर देती हैं औऱ अंतिम चुम्बन नीलेश केँ होंठो पऱ कर देती हैं।
आखिरी : मेरे प्यारे भैय्या। ( मुस्कराते हुए.)
नीलेश : यह क्याँ थां ?
आखिरी : मेरे भैय्या कों मेरीबात माने केँ लिए धन्यवाद! किया।
नीलेश : मेरे मतलब थां कि तुमने मेरे। होठं कों क्यूं चूमा ? ( झिझकते हुए.। )
आखिरी : भैय्या, मे तौ पहले भि कईबार उन्हें चूमा हैं। (शरारती मुस्कान केँ संग)
नीलेश : मगरअब ये ग़लत हैं। तुम्हें मुझेऐसे चूमना नहि चाहिए।
आखिरी : क्यूं ?
नीलेश : तुम् जानती हौ मैंने क्याँ कहना चाहता हूं।
आखिरी : अच्छा!, अब मे अपने भैय्या कों प्रेम भि नहि कर सकती। ( रूठते हुए नीलेश सें दूरहट जाती हैं। )
नीलेश : अरे, मैंने तुम्हें प्रेम करने सें कबमना किया। (उसे वापस अपनेपास बुलाता हैं। )
आखिरी : यहकोई तरीक़ा हैं कि पहलेदूर करो;फिन वापस बुलालो। (नीलेश कि तरफ झूठे गुस्से सें)
नीलेश : मे कब तुम्हें दूर किया, तुम् स्वयं हि दूर हौ गई। (प्रेम सें उसकीतरफ देखते हुए। )
(आखिरी यह सुनकर नीलेश केँ पास वापस आँ जाती हैं। )
आखिरी : अच्छा! औऱ प्रेम करने सें किसने मना किया ?
नीलेश : मैंने कबमना किया।
(नीलेश कि बातसुन वोँ नीलेश कि आंखों मे देखती हैं औऱ अपनी बाहों कों उसकेगले मे डालकर उसे पूछती हैं। )
आखिरी : मतलब मे प्रेम कर सकती हूं। (आंखो मे देखते हुए.)
नीलेश : हां। (उसने सोचा भि नहि कि उसकीहां केँ बाद आखिरी क्याँ करेगी। )
अचानक आखिरी नें अपने होंठो कों नीलेश केँ होंठो सें मिल दिया औऱ उसके होठों कों चूसने लगी, संग मे अपना एक् हाथ उसकेसर मे फिराने लगी। नीलेश तौ उसकीइस हरक़त सें भौचक्का!! रह गय़ा, मगरकुछ 10 सें 15 सेकेंड केँ बाद वोँ आखिरी कों दूरकर देता हैं।
नीलेश : यह क्याँ बदतमीजी हैं ? मैंने कहा नाँ कि यह ग़लत हैं।
आखिरी : आपने हि कहा कि मे प्रेम कर सकती हूं।
नीलेश : मैंने, यह वाले प्रेम केँ लिए नहि कहा थां।
आखिरी : मगर हम् पहले भि कईबार यह प्रेम कर चुके हैं।
नीलेश : वोँ सभी नादानी मे औऱ जवानी केँ कारण हौ गय़ा थां, मगरअब तुम् औऱ मे शादीशुदा हैं। अबयह हमारे बीच ग़लत हैं औऱ जोँ पहलेहुआ, वोँ भि ग़लत थां। (थोडा गुस्से सें कहता हैं। )
आखिरी : मगर मैंने हमेशा आपसे वहीं प्रेम करना चाहती थि, मगर भाग्य कों मंजूर नाँ थां, लेकिन अब वापस मेरी किस्मत नें मुझे वोँ मौका दिया। ( रोतेहुए.बोलती हैं। )
नीलेश उसे रोतादेख उसेपास खिसक जाता हैं औऱ उसे रोनाबंद करने केँ लिए बोलता हैं, मगर वोँ चुप नहि होती हैं बल्कि औऱ रोना शुरुआत कर देती हैं। ( वोँ जानती थि कि नीलेश उसे रोताहुआ नहि देख सकता। )
नीलेश : मे जानता हूं कि तुम् मुझे बहोत अधिक प्रेम करती हौ, परन्तु यहसभी ग़लत हैं तुम् मेरीबात समझने कि कोशिश करो।
आखिरी : भैय्या, तोँ फिन आप् जाइए; अपनेरूम मे आराम कीजिए। आपको मेरे प्रेम कि कोई परवाह नहि हैं। (औऱ जोर सें रोने लगती हैं। )
नीलेश उसे रोतादेख सोचता हैं कि यदि मे यहां सें गय़ा तोँ यह रातभर रोती रहेगी। फिनकुछ औऱ सोचकर आखिरी सें बोलता हैं।
नीलेश : मेरी प्यारी बेहन, तुम् मुझे प्रेम करना चाहती होँ नाँ तौ करलो, मगर पहले अपने रोनाबंद करदो।
आखिरी : सच। (रोनाकम करतेहुए। )
नीलेश : हां, मेरी प्यारी बेहन।
नीलेश कि हां, सुनकर वोँ नीलेश केँ होंठो कों अपने होंठो सें मिल देती औऱ उसके होठों कों चूसने लगी। कुछ देरऐसे चूसती रहती हैं, मगर नीलेश कि तरफ सें कोई जवाब नहि आता हैं तोँ वोँ चूमना बंदकर देती।
नीलेश उसकीतरफ देखता हैं जौ अभि नीलेश कि तरफ हि देखरही थि। फिन एक् कातिलाना मुस्कान केँ संग वोँ उठकर नीलेश केँ ऊपर घुटनों केँ बलबैठ जाती हैं अब नीलेश कि कमर उसकी जांघो कि बीच थि। वोँ झुककर फिन सें नीलेश केँ होंठो कों अपने होंठो सें मिला देती औऱ उसके होठों कों चूसने लगती। कुछ देरबाद नीलेश भि उसकासंग देने लगता हैं।
~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story - Continue reading for full story
Relavant source : click here