~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
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भइया, मैंने पहले भि कहा थां कि येकथा पूरी जरूर होगी।
किस्सा कितनी लंबी होगी, यह अभि नहि कह सकता हूं औऱ रहीबात मेरेपास वक्त कि तौ मेरेपास इतना वक्त हमेशा रहता हैं कि मे कुछलिख याँ पढ़ सकूं, इसलिये आप् निश्चिन्त रहें।
आप् लोगों कां संगरहा तौ ये किस्सा तौ पूरी होगी औऱ शायदआगे भि कोईनई कथालिख दूं।
बस, यदि मुझेकुछ होता हैं तौ हि किस्सा रुक सकती हैं।
आप् सब कां मेरीकथा कों मनपसंद करने केँ लिए धन्यवाद!!
gautamking19 Kapil Bajaj kamdev99008 Iron mann
भइया हमारी दुआ हैं आपकोकुछ भि नहि हौ भइयाअब जल्दसभी भेजदे दीजिए update Thode Bade or Jyada de dijiye
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Update 11
ऐसे हि निखिल, नीलेश औऱ आखिरी बातकर थें, तभी दरवाज़े पे नॉक होता हैं। आखिरी उठकर दरवाजा खोलती हैं औऱ एक् व्यक्ति अंदरआता हैं, वोँ व्यक्ति निखिल औऱ नीलेश कों देख आखिरी सें बोलता हैं।
व्यक्ति : यहलोग कौन हैं ?
आखिरी : यह मेरे बड़े भैय्या नीलेश हैं औऱ यह निखिल जी हैं। ( निखिल औऱ नीलेश कि तरफ इशारा करके। )
आखिरी : भैय्या, यह वैभवजी हैं मेरे पति।
(व्यक्ति कि तरफ इशारा करतेहुए। )
आखिरी कि बातसुन नीलेश औऱ निखिल खड़े होकर वैभव सें मिलते हैं, तभी आखिरी सें बोलती हैं।
आखिरी : अरे!, मे बताना हि भूल गई। यह अवनी केँ बापू हैं औऱ अनिता जी केँ पति। (निखिल कि तरफ इशारा करतेहुए। )
वैभव : यह तौ अच्छी बात हैं। (खुश होतेहुए। )
वैभव : मगर तुम्हारे भैय्या यहां केसे ? (उलझन मे.!)
निखिल : यह मेरे जीजाजी हैं।
वैभव : अच्छा, मे तौ उलझन मे पड़ गय़ा थां।
आखिरी : वोँ क्यूं भला ?
वैभव : पहले तुमने अपने भैय्या सें मिलवाया तौ मुझेलगा निखिल उनकेसंग आया होगा, मगर बाद मे तुमने कहा कि निखिल जी अवनी केँ बापू हैं तोँ सोच मे पड़ गय़ा कि फिन तुम्हारे भैय्या यहां केसे।
वैभव कां जवाब सुनके आखिरी हंसने लगती हैं।
आखिरी : माफ करना, वोँ आपकीबात सुनके हंसी आँ गई।
वैभव : कोईबात नहि।
सबलोग सोफे पऱ बैठ जाते हैं।
वैभव : वैसे अपने भैय्या औऱ निखिल जी कों गरमचाय पानी कां पूछा याँ नहि ?
आखिरी : नहि, वोँ ध्यान हि नहि रहा।
वैभव : तोँ फिनदेर किसबात कि जल्द सें गरमचाय लें आओ।
नीलेश : वैभवजी, उसकीकोई जरूरत नहि हैं।
आखिरी : मे अभि आप् सब केँ लिएगरम चाय लाती हूं।
आखिरी गरमचाय लेने कैंटीन मे चली जाती हैं औऱ वापसआकर सब लोगों गरमचाय देती हैं। गरमचाय पीतेहुए वैभव बोलता हैं।
वैभव : आखिरी, यह तुम्हारे वही भैय्या हैं, जिनका जिक्र तुम् हमेशा करती होँ ?
आखिरी : जी।
नीलेश : मे कुछ समझा नहि ?
वैभव : आपकी बेहन, हमेशा आपके बारे मे हि कहती रहती हैं कि मेरे भैय्या ऐसे हैं, वैसे हैं। मुझे तोँ कभी-कभी यह लगता हैं कि यह आपकेलिए पागल हैं। कईसाल पहलेजब हम् मात्र साथी थें, तबयह दिल्ली सें मुझे आपके देहात भि लेँ गई थि, मगर आप् वहां सें कहीं औऱ चलेगए थें। फिन भि हमेशा कहती थि कि एक् दिन भैय्या जरूरमिल जाएंगे।
नीलेश : क्याँ यहसच हैं ? ( हैरान! होतेहुए.)
वैभव : बिल्कुल सच हैं।
आखिरी : यहसभी बातें छोड़िए, आप् अचानक यहां केसे ?
वैभव : वोँ दरसअल मे इधर सें निकलरहा थां तोँ सोचा कि तुम् सें मिल लेता हूं औऱ देखो तुम्हारे संग नीलेश भैय्या औऱ निखिल जी सें भि मुलाकात होँ गई।
वैभव : नीलेश भैय्या, आप् इसीशहर मे रहते हैं क्याँ ?
नीलेश : जी नहि, हम् तौ इंदौर मे रहते हें।
वैभव : इंदौर अच्छा शहर हैं। मेरी भि ख़्वाहिश वहीं रहने कि थि, मगर किन्हीं कारणों सें यहीं रहना पड़ा।
नीलेश : यह भि कोई बुराशहर नहि हैं; राजधानी हैं मध्य प्रदेश कि।
तभी वैभव कां मोबाइल बजता हैं औऱ वोँ बाहर् जाकरबात करता हैं फिनकुछ देरबाद वापसआता हैं।
वैभव : अभि मे जारहा हूं, आप् सब सें रात कों मिलता हूं। वैसे आप् लोग अभि यहीं रुकने वाले हौ नाँ ?
नीलेश : जी, सुभह डॉक्टर सें मिलना हैं तोँ आजरात तौ रुकना हि पड़ेगा।
वैभव : अच्छा, तौ रात कों मिलते हैं।
नीलेश : ठीक हैं।
वैभव केँ जाने केँ बाद निखिल बोलता हैं।
निखिल : जीजाजी, आप् दिदी कों मोबाइल कर दीजिए। वोँ भि मोबाइल कां इंतजार कररही होगी।
नीलेश : हां, तुम् सहीबोल रहे हौ, अभि कर देता हूं।
नीलेश मोबाइल लगता हैं, कुछदेर मे मोबाइल रिसीव की हौ जाता हैं।
नीलेश : हैलो.सपना।
सपना : कब सें आपके मोबाइल कां इंतजार कररही थि। क्याँ कहाउस महिला नें ? अनिता औऱ अवनीठीक हैं नाँ ? आप् लोगकब वापस आँ रहे हौ ? (बिना सांसलिए बोलती.)
नीलेश : सपना, आहिस्ता एक्-एक् कर केँ भि पूछ सकती हौ।
सपना : क्याँ कहाउस स्त्री नें ?
नीलेश : उसने हि अनिता औऱ अवनी कि सहायता कि थि। उसे मे अच्छी तरह सें जानता हूं। वोँ.।
(नीलेश आगे बोलता उसे पहले हि सपनाबोल देती हैं। )
सपना : अच्छा!, मेरीतरफ सें उसे शुक्रिया कह देना।
नीलेश : ठीक हैं।
सपना : आप् लोग वापसकब आँ रहे हैं ?
नीलेश : अभि कुछ औऱ टाइम लगेगा हमें, इसलिये यहीं रुकना पड़ेगा। अपना औऱ बच्चों कां ख्याल रखना।
सपना : ठीक हैं, अनिता औऱ अवनी केसे हैं ? आप् मेरी अनिता सें बात करवा दीजिए।
(सपना कि बात सें नीलेश परेशान हौ जाता हैं कि अब क्याँ जवाबदे। )
नीलेश : अभि हम् उनसे मिले नहि हैं, जैसे हि मिलेंगे तुम्हारी बात करवा दूंगा।
सपना : ठीक हैं।
नीलेश : सपना, बाद मे बात करता हूं, अभि कहीं जानां हैं। बाय.। (मोबाइल काट देता हैं)
निखिल : आपनेऐसा क्यूं कहा कि "अभि हम् उनसे मिले नहि हैं, जैसे हि मिलेंगे तुम्हारी बात करवा दूंगा। " औऱ अचानक मोबाइल भि काट दिया। क्याँ कहा दिदी नें ?
नीलेश : वोँ अनिता सें बात करने कां बोलरही थि ? (चिंतित होतेहुए। )
निखिल : अब क्याँ करेंगे ?
( दोनों परेशान हौ जाते हैं कि अब सपना सें क्याँ बोलेंगे ?
दोनों कों परेशान देख आखिरी बोलती हैं। )
आखिरी : क्याँ हुआ आप् दोनों ऐसे परेशान क्यूं होँ रहे हें ?
नीलेश : पायल, तुम् अभि अपनी भाभी कों जानती नहि होँ, जैसे हि उसेपता चलेगा कि अनिता कोमा हैं तौ वोँ गुस्से मे आकर नां जानें क्याँ करेंगी ?
आखिरी : आप् ऐसा करिए, उन्हें भि यहीं बुला लीजिए। यदि आप् उन्हें मोबाइल पऱ बताएंगे तोँ होँ सकता हैं कि वे क्रोध होँ जाएं, मगर जब यहां उन्हें पता चलेगा औऱ यदिवे क्रोध भि होती हैं तोँ उन्हें शांत भि करा सकते हें।
निखिल : जीजाजी, मुझे आखिरी जी कि बातसही लगती हैं।
नीलेश : ठीक हैं, कल सुभह पहले डॉक्टर सें बात करेंगे, फिन सपना कों यहां लें आयेंगे।
ऐसे हि तीनों लोगकुछ देरबात करते रहते हैं। फिन आखिरी बोलती हैं।
आखिरी : अब आप् दोनों घऱ चलिए, अवनी सें भि मिल लीजिए औऱ थोडा आराम भि कर लेना। सफ़र सें थक भि गए होंगे।
निखिल : मगरफिन यहांकौन रहेगा ? (चिंता भरे स्वर सें)
आखिरी : उसकी चिंता आप् नां करें, क्योंकि अनिता जी कि देखभाल केँ लिए एक् नर्स हमेशा यहां रहती हैं।
निखिल : फिन भि यहां हमें सें कोई रहना चाहिए।
आखिरी : मे आपकीबात मानती हूं, मगर यहां हम् बैठने केँ सिवाय कुछ भि नहि कर सकते हैं।
नीलेश : पायल, ठीक कहरही हैं औऱ अनिता कि देखभाल केँ लिए नर्स हैं यहां पर्र।
फिन आखिरी नर्स कों बुलाने चली जाती हैं, कुछ हि देर मे एक् नर्स आँ जाती हैं। फिनसब आखिरी केँ घऱ केँ लिए निकल जाते हैं।
इधर सपना केँ घऱ पर्र पायल, पलक औऱ सपनासब हॉल मे बैठ थें। पलक टेलीविज़न देखरही थि औऱ पायल माँ केँ संगबैठ बातकर रही थि। लगभगआधे घण्टे बादपलक मां सें प्रश्न पूछती हें।
पलक : मां, बापू औऱ मामाजी जी अभि तक नहि आए ? आपनेकहा थां कि साम तक आँ जाएंगे।
सपना : पलक, मे तुम्हें बताना भूल गई कि आज तुम्हारे बापू औऱ मामाजी बाहर् हि रुकने वाले हैं, इसलिये वेआज नहि आयेंगे।
पलक : माँ, बापू औऱ मामाजी जी कहां गए हें ?
सपना : कुछकाम सें कहींगए औऱ कहां गए मुझे नहि मालूम हैं।
पलक : क्यूं गए ?
सपना : अबकोई प्रश्न नहि, चुपचाप बैठकर टेलीविज़न देखो। (थोडा क्रोध दिखाते हुए)
पलक : जी माँ।
सपना : यह तोँ किसी रिपोर्टर कि तरह एक् बाद एक् प्रश्न पूछती हि चली जाती हैं। (पायल कों धीरे-धीरे सें कहती हैं। )
पायल मां कि बातसुन हंसने लगती हैं औऱ फिन सपना भि।
इधर तीनों लोग आखिरी केँ घऱ पहुंचने हि वाले हैं औऱ कुछदेर मे आखिरी केँ घऱ पहुंच जाते हैं। आखिरी कां घऱ बाहर् सें देख निखिल बोलता हैं।
निखिल : आखिरी जी, आपकाघऱ तौ बहोत हि खूबसूरत औऱ बड़ा हैं।
आखिरी : धन्यवाद!, अबघऱ मे चले।
सब लोगहॉल मे बैठ जाते हैं। आखिरी घऱ कि नौकरनी कों आवाज़ देती हैं औऱ बच्चों कां पूछती हैं।
नौकरानी : मालकिन, वोँ अभि अपनेरूम मे हैं, आप् कहें तौ बुला लाती हूं।
आखिरी : जाओ उन्हें लें आओ औऱ गरमचाय भि बना लेना।
नौकरानी : जी मालकिन।
नौकरानी रूम मे जाकर बच्चों कों लेकरहॉल मे आँ जाती हैं औऱ जैसे हि अवनी बापू कों देखती हैं। जोर सें पिताजी कहकर उनकेगोद मे बैठ जाती हैं। अवनी कों अपनीगोद मे बैठदेख निखिल भि खुश हौ जाता हैं औऱ बाकीलोग भि मुस्कुरा देते हैं।
अवनी : बापू, मां भि आई हैं ?
निखिल : बेटी, माँ अभि नहि आए।
अवनी : मुझे मां सें मिलना हैं। ( ज़िद्दी स्वर मे जैसे छोटे बच्चे करते)
नीलेश : अवनी, मेरी प्यारी बच्ची ऐसे ज़िद्दी नहि करते। (अवनी केँ गाल सहलाते हुए.)
आखिरी : अवनी, मैंने कहा थां कि तुम्हें आज पिताजी मिलने आयेंगे।
अवनी : हां।
आखिरी : वैसे हि जल्द हि मां भि आँ जाएगी। अबजिद नहि करते हैं तुम् तोँ बड़ी समझदार बच्ची होँ। इधरआओ मेरेपास।
(अवनी निखिल कि गोद सें उठकर आखिरी केँ पासचली जाती हैं। )
अवनी : आंटी, सचमुच माँ जल्द आयेगी।
आखिरी : सचमुच। (अवनी केँ गालों कों चूम लेती हैं)
बच्चा : माँ, आप् मात्र अवनी कों पप्पी देती हैं, मुझे नहि। (जौ आखिरी केँ पास हि बैठा थां)
आखिरी : ओ!.मेरा प्यारा बेटा! (बच्चे केँ गालों कों चूमते हुए। )
आखिरी : भैय्या, यह मेरा बेटा दक्ष हैं।
नीलेश : बड़ा हि प्यारा बच्चा हैं।
आखिरी : बेटा, यह तुम्हारे मामाजी जी हैं, जाओ उनकेचरण स्पर्श करो। (नीलेश कि तरफ इशारा करतेहुए)
(दक्ष उनकेपास जाकर निखिल औऱ नीलेश केँ पांव छूता हैं औऱ वापस आखिरी केँ पास आँ जाता हैं। )
दक्ष : मां, मे अवनी केँ संग अपनेरूम मे जाओ ?
आखिरी : जाओ, मगर कोई मस्ती नहि करना।
दक्ष : जी मां।
दक्ष औऱ अवनीरूम मे चले जाते हैं।
नीलेश : दोनों बच्चे आपस मे घुलमिल गए हैं।
आखिरी : दोनों कि आपस मे अच्छी बनती हैं, ऐसा लगता हि नहि कि यहदोदिन पहले हि मिले हैं।
निखिल : बच्चों कां तौ ऐसा हि हैं, अपनी उम्र केँ बच्चों मे जल्दघुल मिल जाते हें।
आखिरी : निखिल जी, आपनेसही कहा।
आखिरी : सकीना, गरमचाय बन गई क्याँ ?
सकीना (नौकरानी) : जी मालकिन, बसदो मिनट।
कुछ देरबाद नौकरानी गरमचाय लें आती हैं फिनसब गरमचाय पीते हैं।
सकीना (नौकरानी) : मालकिन, रात कों खाने मे क्याँ बनाना हैं ?
आखिरी : अभि तुम् जाओ, मे तुम्हें बाद मे बताती हूं।
सकीना (नौकरानी) : जी।
निखिल : दो मिनटआया, आप् लोगबात कीजिए। (बाहर् जाने लगता हैं)
नीलेश : निखिल, क्याँ हुआ कहां जारहे होँ ?
निखिल : वोँ राजेश कों मोबाइल करकेबता देता हूं कि अवनी औऱ अनिता मिलगए हैं। वो भि परेशान हौ रहा हैं उनकेलिए, पहले भि मे उसे गाड़ी वालीबात बताना भूल गय़ा थां। यदिइस बार भि नहि लगाया तौ कहीं वोँ कुछ ग़लत नां समझ बैठे।
नीलेश : ठीक हैं।
निखिल बाहर् जाकर राजेश सें बात करता हैं औऱ उसे अनिता औऱ अवनी कि जानकारी दे देता हैं। निखिल वापसआकर नीलेश औऱ आखिरी केँ पासबैठ जाता हैं।
नीलेश : क्याँ कहा राजेश नें ?
निखिल : वोँ भि अनिता कों देखने केँ लिएकल साम तक यहां आँ जायेगा।
आखिरी : यह राजेश कौन हैं ?
निखिल : वोँ मेरा साला हैं।
आखिरी : अच्छा, आप् लोग बैठिए, मे सकीना कों खाने कां बता केँ आती हूं।
ऐसे हि रात हौ जाती हैं, वैभव भि घऱ आँ जाता हैं। सबलोग व बच्चे भि हॉल मे बैठे थें। तभी सकीना आती हैं औऱ आखिरी सें बोलती हैं।
सकीना (नौकरानी) - मालकिन, मैंने खानां बना दिया हैं औऱ डायनिंग टेबल पऱ रखा दिया। अब मे घऱजारही हूं।
आखिरी : ठीक हैं, मगरकल सुभह थोडा जल्द आँ जानां।
सकीना (नौकरानी) - जी मालकिन।
आखिरी : चलिए, आप् सब खानां खा लीजिए।
सबलोग डायनिंग टेबल पऱ बैठ जाते हैं। आखिरी सब कों खानां परोसती हैं औऱ जैसे हि नीलेश कि थाली मे सब्जी परोसती हैं तोँ नीलेश उसकीतरफ देखता हैं। आखिरी बस मुस्कुरा देती हैं।
वैभव : आखिरी, तुम् भि संग बैठकर खालो।
आखिरी : नहि, आप् लोगखा लीजिए, मे बाद मे खा लूंगी।
नीलेश : पायल, बाद मे क्यूं अभि हमारे संग मे बैठकर हि खालो।
आखिरी : ठीक हैं।
(वोँ भि बैठकर खानां खाने लगती हैं। )
अवनी : क्याँ आपका भि नाम पायल हैं ?
आखिरी : हां, मगर तुमने ऐसा क्यूं कहा कि "आपकानाम भि पायल हैं"।
अवनी : मेरी दिदी कां नाम भि पायल।
आखिरी : अच्छा।
वैभव : बेटा, पहले खानां खालो, फिन सभी बातें कर लेना।
अवनी : जी।
फिन सब खानां खाते हैं औऱ खानां खाने केँ बादसब हॉल मे बैठ जाते हैं। आखिरी भि डायनिंग टेबलसाफ कर वहां आँ जाती हैं। आते हि निखिल केँ प्रश्न करती हैं।
आखिरी : निखिल जी, आपकी एक् औऱ बेटी हैं ?
निखिल : आखिरी जी, आप् ग़लतसमझ रही हें। (मुस्कुराते हुए.)
आखिरी : क्याँ मतलब आपका ?
निखिल : अवनी, जीजाजी कि बड़ी बेटी पायल कि बातकर रही थि।
आखिरी : अच्छा!, यहबात हैं। (मुस्कुराते हुए। नीलेश कि तरफ देखती हैं। )
आखिरी : भैय्या, आपने बताया नहि कि आपकी बेटी कां नाम भि पायल हैं।
नीलेश : ऐसीकोई बात हि नहि हुइ कि मे तुम्हें बताता।
आखिरी : अच्छा, यहबात हैं तोँ हम् एक्-दूसरे केँ बारे मे जान लेते हैं।
पहले आखिरी अपने परिवार केँ बारे मे बताती हैं। फिन वैभव केँ परिवार केँ बारे मे। (यहां दोनों केँ परिवार केँ बारे ज़्यादा, इसलिये नहि बताया क्योंकि कि किस्सा मे उनकाकोई अधिकअहम किरदार नहि हैं। यदि कहींकोई आता हैं तोँ उसकाउस वक्त परिचय करवा दूंगा। )
आखिरी : निखिल जी, अब आप् बताइए आपके परिवार मे कौन - कौन हैं ?
निखिल : मेरे परिवार मे पिता जी, माँ, छोटा भइया उसकी पत्नि औऱ उनके बच्चे, अनिता, अवनी औऱ मेरा बेटा अनुज।
आखिरी : भैय्या, अब आपकी बारी हैं बताने कि। ?
नीलेश : मेरे परिवार मे सपना जोँ कि निखिल कि बेहन हैं औऱ मेरीदो बेटी पायल औऱ पलक।
आखिरी : अच्छा, मगर आपने चाचा - चाची कां नहि कहा।
नीलेश : वोँ अबइस दुनिया मे नहि रहे। ( दुःखी होतेहुए.)
नीलेश कि बात सुनते हि आखिरी उसकेगले लग जाती हैं औऱ दोनों भइया बेहन रोने लगते हैं।
आखिरी : माफ करना भैय्या, मुझेपता नहि थां। (रोतेहुए कहती हैं। )
उन्हें ऐसा रोतेदेख दूसरे लोगों केँ आंखों मे भि आंसू आँ जाते हैं, मगरकुछ टाइमबाद वैभव दोनों कों चुपकरा देता हैं। थोड़ी देर शांति सि छाई रहती हैं फिन नीलेश उस शांति कों भंग करता हैं।
नीलेश : पायल, ताऊ जी, ताई जी औऱ भैय्या औऱ भाभी आजकल कहां रहते हें ?
आखिरी : भैय्या, वेसब इंग्लैंड मे रहते हैं। कभी-कभी मोबाइल पऱ बात हौ जाती हैं औऱ जबकभी वे भारतआते हैं तौ मिलना होता हैं। मे स्वयं चारसाल पहले उनसे मिली थि।
आखिरी यहबात कहकरफिन सें दुःखी हौ जाती हैं।
नीलेश : पायल, ऐसे दुःखी नहि होते हैं। अब जल्द सें मुस्कुरा दो।
आखिरी : भैय्या, पहले आप् लोगों सें दूररही औऱ अब उनसे।
(औऱ रोने लगती हैं। )
इसबार आखिरी कों रोतादेख अवनी बोलती हैं।
अवनी : आंटी, आप् क्यूं रोरही हैं ?
आखिरी : बेटा, कुछ नहि ऐसे हि रोना आँ गय़ा। ( औऱ अपने आंसूसाफ करती हैं। )
वैभव : बच्चों, अब अपनेरूम मे जाकरसो जाओ।
दक्ष : बापू, अभि नींद नहि आँ रही हैं। थोड़ी देर टेलीविज़न देखलूं।
वैभव : ठीक हैं, मगर थोड़ी देर सें सो जानां।
दक्ष : थैंकयू बापू।
फिन बच्चे टेलीविज़न देखने लगते हैं बाकीसब बातें करने लगते हैं। लगभगआधे घंटेबाद आखिरी बोलती हैं।
आखिरी : बच्चों, चलोअब सोने कां वक्त होँ गय़ा हैं।
दक्ष : मां, थोड़ी देर औऱ।
आखिरी : बेटा, सुभह विद्यालय भि जानां हैं। अब टेलीविज़न बंदकरो औऱ अवनी औऱ तुम् दोनों अपनेरूम मे जाओ। मे थोड़ी देर मे आती हूं।
दक्ष : जी मां।
आखिरी : आप् भि सो जाइए, सुभह आपको भि दिल्ली केँ लिए निकलना हैं।
वैभव : आखिरी, मे बताना हि भूल गय़ा कि वोँ दिल्ली जाने कां अभि रद्द होँ गय़ा हैं। अब शनिवार कों जानां हैं।
आखिरी : यह तोँ अच्छी बात हैं, मगर पहलेबता देते तोँ मे सकीना कों जल्द नहि बुलाती।
वैभव : गलती हौ गई।
आखिरी : मे बच्चों कों दूध देकरआती हूं।
फिन आखिरी बच्चों कों दूध देकरव सुला केँ वापसआती हैं।
आखिरी : निखिल जी औऱ भैय्या चलिए, आपको भि आपकेरूम दिखा देती हूं।
फिन आखिरी केँ संग दोनों एक् रूम कि तरफ जाते हैं। जौ कि मास्टर बेडरूम थां, उसमें एक् डबलबेड लगा थां।
आखिरी : भैय्या, यह आपकारूम मे निखिल जी कों उनकारूम दिखा कि आती हूं।
नीलेश : अरे, दूसरे रूम कि क्याँ जरुरत हैं यहरूम हि हम् दोनों केँ लिए पर्याप्त हैं। यहां धीरे-धीरे दोनों सो जायेंगे।
निखिल : आखिरी जी, जीजाजी सहीकह रहे हैं।
आखिरी : ठीक हैं, आप् दोनों भि सो जाएं। बहोत रात हौ चुकी हैं।
आखिरी हॉल मे आकर वैभव सें बोलती हैं
आखिरी : आप् भि चलिए।
वैभव : भैय्या औऱ निखिल जी कहां हैं ?
आखिरी : भैय्या औऱ निखिल जी कों सोने कां बोल दिया हैं। अब आप् भि चलिये।
फिनसब अपनेरूम मे सो जाते हैं। अगली सुभहसब लोगों उठकरगरम चाय ब्रेकफास्ट करते हैं औऱ नीलेश, निखिल औऱ आखिरी हॉस्पिटल केँ लिए निकल जाते हैं।
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