~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 8
सब साथी कैंटीन मे आँ जाते हैं औऱ एक् टेबल पर्र बैठ जाते हैं। फिनसब अपनेलिए एक् सैंडविच औऱ कोलड्रिंक ऑर्डर देते हैं।
पहलायार : निखिल, तुमने बताया हि नहि कि तुम् स्टेज पर्र किसेदेख रहे थें ?
निखिल : बताया तोँ थां कि वोँ वाद-विवाद कां विषय अच्छा थां तौ वहींसुन रहा थां।
पहलायार : अरे दोस्त, हम् इतने बड़े बेवकूफ भि नहि हैं कि तेरीयह बातसच मान लें औऱ यदि वाद-विवाद सुनरहा थां, तोँ स्टेज पर्र किसेदेख रहा थां। अब जल्द सें हमेंसच बोल भि दे हम् सभी तेरे मित्र हैं।
निखिल : दोस्त, ऐसीकोई बात नहि हैं। (वोँ बात कों आगे नहि लेँ जानां चाहता थां इसलिये झूठ बोलता हैं)
दूसरा साथी : समीर, क्यूं निखिल कों परेशान कररहा हैं, यदिउसे नहि बताना हैं तोँ कोईबात नहि।
समीर : ठीक हैं, अब मे निखिल सें कोईबात नहि पूछूंगा।
निखिल : समीर, तुम् ऐसीबात क्यूं कररहे हौ ?
समीर : जब तुम् हमें अपनायार हि नहि समझते तोँ क्याँ फायदा तुमसे कोईबात पूछने कां ?
निखिल : नितिन, अब तुँ हि इसे समझा सकता हैं, ये मेरी तोँ बात समझने सें रहा।
नितिन : तुम् दोनों बेकार कि बात छोड़ो, वोँ देखो हमारा ऑर्डर आँ गय़ा। (नितिन नें वेटर कि तरफ इशारा करतेहुए। )
सब मित्र ब्रेकफास्ट औऱ दूसरी बातें करने मे व्यस्त हौ जाते हैं। कुछदेर बाद। समीर, (एक् तरफ इशारा करता हैं औऱ बोलता हैं। ) देखो दोस्त क्याँ मालआए हैं आज कैंटीन मे, निखिल औऱ नितिन उसतरफ देखते हैं तौ वहां एक् लड़कियों कां समूह दिखता हैं। जौ अभि आया थां।
समीर : दोस्त, क्याँ मस्त - मस्तमाल हैं काश!यह सबइसी कॉलेज मे होती तौ मजा आँ जाता।
नितिन : इसे तौ जहां लड़की दिखीयह वहीं शुरुआत होँ जाता हैं।
समीर : क्याँ करूं दोस्त, लड़की चीज़ हि ऐसी हैं कि देखते हि तनमन मे कुछ - कुछ होने लगता हैं।
निखिल : समीर, कुछ - कुछ नहि बस तेरा दिमाग़ ख़राब होने लगता हैं। ( बोलकर हस देता हैं )
समीर : तुम्हे क्याँ पता कि लड़की कों देखकर तनमन मे क्याँ - क्याँ होता हैं ? तुँ तौ हमेशा लड़कियों सें दूर हि रहता हैं, इसलिये यह बातें तेरेसमझ केँ बाहर् हैं।
नितिन : हां दोस्त, यहबात तोँ समीर नें एक् दमसही हैं। तुमको कॉलेज मे इतना वक्त हौ गय़ा हैं, मगर तुमने कोई भि लड़की कों अपना साथी भि नहि बनाया।
निखिल : मुझेइन बातों मे कोई दिलचस्पी नहि हैं औऱ मेरे तुम् दोनों यार होँ तौ सहीफिन मुझे किसी कि क्याँ जरूरत हैं।
नितिन : हम् तोँ तेरे साथी हैं, मगरकोई लड़की साथी भि होना चाहिए।
( नितिन कि बात कों बीच मे काटते हुए, समीर बोलता हैं। )
समीर : जैसे गर्लफ्रेंड। ( हंसते हुए। )
अभि यहलोग अपनी बातों मे इतने व्यस्त थें कि कोई निखिल केँ पीछेआके उसकी आंखेबंद कर देता हैं। ऐसे अचानक अपनी आंखेबंद होँ जाने सें निखिल हैरान!! होँ जाता हैं, क्योंकि उसेइस बात कां आभास हौ जाता हैं कि येहाथ किसी लड़की केँ हैं।
फिन वोँ सोचता हैं कि यहां तोँ कोई भि लड़की उसकी साथी नहि हैं फिनये कौन होँ सकती हैं ? तभी उसकेमन मे ख्याल आता हैं कि यह वोँ तौ नहि.।
इतनेदेर सें खड़ी वोँ लड़की बोलती हैं -
लड़की : अभि तक नहि पहचाना ?
निखिल : सपना दिदी। (जैसे हि लड़की बोलती हैं निखिल उसकी आवाज़ पहचान जाता हैं। )
सपना : पहचान लिया, मगर इतनीदेर सें।
निखिल : वोँ मे सोचरहा थां कि कौन हौ सकता हैं, मगरसमझ मे नहि आँ रहा थां, मगरजब आपने बोला तोँ मे आपको पहचान गय़ा।
सपना : अच्छा, तौ यहबात थि।
निखिल : यहसभी बातें छोड़ो, आप् यहां केसे ? मेरा मतलब हैं कि मेरे कॉलेज मे आप् क्याँ कररही हैं ?
सपना : वोँ हमारे कॉलेज सें भि कुछ लड़कियों नें भाग लिया थां। तोँ उनकेसंग हि यहांआई थि औऱ जब कैंटीन मे आई तोँ मुझे तुम् दिखगए।
निखिल : दिदी, यह मेरे साथी हैं समीर औऱ नितिन।
सपना : हैलो, समीर औऱ नितिन।
समीर : हैलो, दिदी।
नितिन : हैलो, दिदी।
सपना : निखिल, मे भि तुम्हें किसी सें मिलवाती हूं।
(औऱ वोँ जाकर किसी कों अपनेसंग लें आती हैं। समीर औऱ नितिन उसे देखते हि रह जाते हैं औऱ निखिल तौ उसे देखते हि कहींखो गय़ा। )
सपना : निखिल, कहां खोगए ?
निखिल : दिदी, कहीं नहि। (हड़बड़ाते हुए बोलता हैं)
सपना : अनिता, यह मेरा छोटा भइया निखिल हैं औऱ यह इसकेयार समीर औऱ नितिन।
अनिता : नमस्कार!
सब लड़के : नमस्कार !!
सपना : निखिल, यह मेरी जूनियर अनिता हैं। आज कि प्रतियोगिता मे इसने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया हैं।
नितिन : बधाई होँ!!
समीर : बधाई होँ!!
अनिता : शुक्रिया।
निखिल : बधाई हौ!! अनिता।
(निखिल केँ मुंह सें अनिता सुनके सबलोग उसकीतरफ देखते हैं। वोँ इसलिये क्योंकि उसने बहोत प्रेम सें कहा थां। तभी निखिल कों भि लगा कि उसने बहोत बड़ी गलतीकर दि। अब जानेयह लोग क्याँ सोचगे ?)
अनिता : शुक्रिया। (शरमाते हुए.)
सपना : निखिल, क्याँ तुम् अनिता कों पहले सें जानते हौ ?
( सपना केँ इस प्रश्न सें निखिल औऱ अनिता दोनों झेप! जाते हैं। )
निखिल : दिदी, नहि तोँ।
समीर : अबबात मेरीसमझ मे आई।
सपना : समीर, क्याँ कहना चाहते होँ ?
निखिल : कुछ नहि दिदी, यह तोँ ऐसे हि बोलरहा हैं।
सपना : निखिल, तुम् चुपरहो। समीर, तुम् कहो।
समीर : दिदी, एक् बात मेरीसमझ मे नहि आँ रही थि। तौ अभि आप् लोगबात कररहे थें कि अचानक मुझे वोँ बातसमझ मे आँ गई। तभी मेरे मुंह सें वोँ बात निकल गई।
सपना : अच्छा! अभि हमें जानां हैं; बाद मे मिलते हैं।
निखिल : दिदी, रुकिए नां अभि तौ आप् लोगआए हैं।
सपना : नहि, मेरेयार भि मेरा इंतजार कररहे हैं औऱ हमें कॉलेज भि जानां हैं।
निखिल : ठीक हैं।
(सपना औऱ अनिता चली जाती हैं )
नितिन : निखिल, आज तोँ बचा गय़ा। नहि, तौ तेरी क्लास यहींलग जाती। ( हंसते हुए.)
समीर : दोस्त, अब तौ हमेंपता चल गय़ा हैं कि तुँ स्टेज पऱ किसेदेख रहा थां। अब तुँ कुछ बोलेगा याँ नहि ?
निखिल : दोस्तों, ऐसीकोई बात नहि हैं।
नितिन : दोस्त, अब तौ सचबोल दे।
निखिल : हां, मे उसे जानता हूं, वोँ मेरीयार हैं।
समीर : वोँ तौ हम् भि जानते हैं कि वोँ तेरी साथी हैं, मगर हम् औऱ कुछ जानां चाहते हैं।
निखिल : ऐसाकुछ भि नहि हैं, जैसा तुम् सोचरहे हौ।
समीर : ठीक हैं, हमें तौ हमारा जवाबमिल गय़ा। ( हंसने लगता )
नितिन : अच्छा! हुआ कि आज हम् कॉलेज आए, जिससे हमें निखिल कां यहराज तौ पताचला। यह तौ हमेंकभी नहि बताता।
कुछदेर औऱ बातचीत करने केँ बादसब अपनेघऱ निकल जाते हैं। निखिल घऱ पहुंच जाता हैं औऱ जाके अपनेरूम मे आराम करने लगता हैं। कुछदेर बाद सपना भि घऱ आँ जाती हैं। साम कों सपना औऱ निखिल छत पर्र टहलरहे थें।
सपना : निखिल।
निखिल : हां, दिदी।
सपना : क्याँ तुम् सच मे अनिता कों नहि जानते ?
निखिल : दिदी, आप् यह क्यूं पूछरही हौ ?
सपना : मुझे तुम्हें औऱ अनिता कों देखकर ऐसालगा थां कि तुम् एक् - दूसरे कों जानते होँ, इसलिये मे तुमसे वहींपूछ लिया थां, मगर तुमने मनाकर दिया थां। फिन समीर कि बात पर्र तुम्हारे चेहरे कुछ पऱ तनाव आँ गय़ा थां, इसलिये तुमसे येबात पूछरही हूं क्याँ तुम् सच मे अनिता कों नहि जानते होँ ?
निखिल : दिदी, मे अनिता कों जानता हूं। वोँ मेरेसंग विद्यालय मे हि पढ़ती थि। मे औऱ अनिता अच्छे यार थें।
सपना : तोँ तब तुमने झूठ क्यूं बोला ?
निखिल : मे, यहबात किसी कों नहि बताना चाहता थां, मगरफिन भि सब कों पताचल गई।
सपना : वोँ क्यूं भला ? ( हंसते हुए.)
निखिल : मुझे नहि पता क्यूं ?
सपना : अच्छा! क्याँ तुम् दोनों एक् - दूसरे प्रेम करते होँ ?
निखिल : मुझे नहि पता।
सपना : क्याँ नहि पता हैं ?
निखिल : यही कि वोँ मुझसे प्रेम करती हैं याँ नहि।
(यह बोलकर वोँ चुप होँ जाता हैं, क्योंकि सपना हंसने लगती। उसे अंदाजा हौ जाता हैं कि वोँ अभि क्याँ बोल गय़ा। )
सपना : निखिल, यदि तूँ उसे प्रेम करता हैं तौ उससे इज़हार करदे। वरना तेरेदिल कि बातदिल मे हि रह जायेगी।
निखिल : दिदी, मे डरता हूं कि कहीं वोँ इनकार नाँ करदे।
सपना : निखिल, पहलेउसे इज़हार तौ कर औऱ मुझे लगता हैं कि वोँ तुम्हें इनकार नहि करेगी।
निखिल : ठीक हैं, जल्द हि मे उसे अपने प्रेम कां इज़हार कर दूंगा।
सपना : बेस्ट ऑफलक। मेरे भइया।
निखिल.निखिल.निखिल।
bhay.aapki ichha aapko kahani nahee padni toh koy dusri kahani padh lo yaha bhut sari kahani h .joo aapki pasand kee hu use pad saktey .
~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 9
निखिल। निखिल.आवाज़ सुन निखिल अपनी यादों सें बाहर् आता हैं औऱ अपनेरूम कां दरवाजा खोलता हैं।
सपना : कब सें आवाज़ लगारही हूं, कहां व्यस्त होँ गय़ा थां ?
निखिल : दिदी, वोँ थोड़ी नींद आँ गई थि।
सपना : चल खानां खा लेँ, सभी तेरा हि प्रतीक्षा कररहे हैं।
निखिल : दिदी, बसदो मिनट मे आया। आप् लोग खानां शुरुआत कीजिए।
सपना : ठीक हैं।
अभि बाकीलोग डायनिंग टेबल पऱ बैठ थें, सपना भि आकरबैठ जाती हैं।
नीलेश : निखिल, नहि आया।
सपना : आँ रहा हैं।
दो मिनिट बाद निखिल भि आँ जाता हैं औऱ बाकी लोगों केँ संग खानां खाने लगता हैं। कुछदेर मे सबलोग खानां खा लेते हैं, पलकहॉल मे आकर टेलीविज़न देखने लगती हैं। बाकीलोग भि वहींआकर बैठ जाते हैं।
सपना : पलक, चलो टेलीविज़न बंदकरो औऱ अपनेरूम मे जाकरसो जाओ, सुभह विद्यालय भि जानां हैं।
पलक : मां, कल सन्डे हैं। (हंसते हुए.)
सपना : अच्छा! तौ अपनी पढ़ाई करो।
पलक : बापू.। (नीलेश कों देखकर रोनी सूरत बनाते हुए। )
नीलेश : सपना, थोड़ी देरदेख लेनेदो।
सपना : ठीक हैं मगर थोड़ी देरबाद टेलीविज़न बंदकर देना।
ये बोलकर सपना रसोई मे काम करनेचली जाती हैं, पायल भि अपनी मां कि सहायता केँ लिए रसोई मे चली जाती हैं। पलक उठकर अपने पिताजी केँ पास जाती हैं औऱ उनकेगाल पर्र एक् पप्पी दे देती हैं।
पलक : थैंक्यू बापू।
नीलेश : मेरा प्यारा बेटा। ( उसकेगाल चूमते हुए.)
नीलेश : चलो, अब तुम् टेलीविज़न देखो।
नीलेश : निखिल, क्याँ बात हैं तुम् चुपचाप बैठे होँ ? खाने केँ वक्त भि अपनेरूम मे हि थें ?
निखिल : जीजाजी, ऐसीकोई बात नहि हैं। बस वोँ अनिता औऱ अवनी कां सोचरहा थां।
नीलेश : मैंने तुमसे पहले भि कहा थां उन्हें कुछ नहि होगा। वोँ हमेंमिल जायेंगे।
निखिल : जीजाजी, फिन भि मन मे हमेशा एक् डर रहता हैं कि यदि वोँ लोग नहि मिले तौ क्याँ होगा ?
( निखिल केँ इस प्रश्न सें नीलेश भि थोडा चिंतित होँ जाता हैं क्योंकि उसे सपना कां डर थां कि वोँ क्याँ प्रतिक्रिया देगी, जब उसेये बातपता चलेगी। )
नीलेश : तुम् सहीकह रहे होँ, हम् यहीदुआ कर सकते हैं कि वोँ दोनों हमें तुरंत हि मिल जाएं।
फिनकुछ देर औऱ वेलोग बातें करते रहते हैं। पलक भि अपनी हि मस्ती मे टेलीविज़न देखरही थि। सपना औऱ पायल भि रसोई मे अपनाकाम करीब-करीब पूराकर चुके थें, थोड़ी देरबाद वोँ भि हॉल मे आँ जाते हैं।
सपना : पलक, चलो टेलीविज़न बंदकरो बहोत देखली अब जाकेसो जाओ।
पलक : माँ, बस थोड़ी देर औऱ फिन मे चली जाऊंगी।
सपना : नहि, अभि अपनेरूम मे जाओ।
पलक : बापू.। (नीलेश कों देखकर फिन सें रोनी सूरत बनाते हुए। )
नीलेश : सपना, वोँ बोलरही हैं नाँ थोड़ी देरबाद चली जाएगी। तब तक देख लेनेदो।
सपना : आपके लाड़ प्रेम सें हि यह बिगड़ रही हैं, तभी तौ जिद करनेलगी हैं।
नीलेश : अभि वोँ छोटी बच्ची हैं इसलिये जिदकर रही हैं औऱ यदि बच्चे जिद नहि करेंगे तौ कौन करेगा ?
सपना : आप् सें तौ बात करना हि हैं; बेकार हैं।
पलक अपने माँ कि बातसुन हंसने लग जाती हैं।
नीलेश : बेटा, ऐसे अपनी मां कि बात पर्र हंसते नहि हैं। ( यह बोलते वक़्त वोँ भि मंद-मंद हंस देता हैं )
सपना : आप् भि हंसलो।
नीलेश : सपना, तुम् भि नां जरा सि बात पर्र बुरामान जाती हौ।
सपना : यहसभी छोड़ो, मुझेयह बताओ कि अनि.?
(सपना कि बात कों बीच मे काटते हुए नीलेश बोल देता। )
नीलेश : सपना, बाद मे बात करते हैं।
( पलक कि तरफ इशारा करता हैं वोँ इसलिये कि अभि पलक उनकी बातेसुन रही थि। )
सपना : ठीक हैं।
ऐसे हि कुछदेर बादसब अपनेरूम मे सोनेचले जाते हैं। जैसे हि सपना औऱ नीलेश रूम मे जाते हैं कि सपना अपना अधूरा प्रश्न पूरा करती हैं जिसे नीलेश अपने तरीके सें समझा - बुझा देता औऱ दोनों सो जाते हैं। दूसरे रूम मे पायल औऱ पलक भि सोगए हैं मगर एक् रूम मे अभि भि निखिल जगरहा हैं औऱ किसी बातों कों यादकिए जारहा हैं।
निखिल कि यादें : घऱ पऱ अपनेरूम मे सजधजकर होँ रहा हैं तभी उसकेरूम मे कोईआता हैं।
सपना : क्याँ बात हैं आज बड़े सजधजरहे हौ ?
(अपनी दिदी कि आवाज़ सुनकर वोँ हड़बड़ा जाता हैं। )
निखिल : दिदी, आप् कबआए ?
सपना : अभि आई हूं, तुमने अभि तक मेरे प्रश्न कां जवाब नहि दिया।
निखिल : दिदी, कौन सां प्रश्न ?
सपना : यही कि आज बड़े सजधजरहे होँ ? क्याँ बात हैं ?
( हंसते हुए.। )
निखिल : दिदी, वोँ मे आज अनिता कों अपने प्रेम कां इज़हार करनेजा रहा हूं।
सपना : हा.हा.हा.हा (जोर - जोर सें हंसने लगती हैं। )
निखिल : आप् ऐसे क्यूं हंसरही हैं ?
सपना : मेरे प्रेम भइया, मे इसलिये हंसरही हूं कि आजफिन तुम् उसे इज़हार करने केँ बजायदुम दबाकर कहींभाग नाँ जाओ।
निखिल : दिदी, आजऐसा नहि होगा।
सपना : अच्छा! पहले भि कितनी बार यहीं बोला थां, मगरहुआ क्याँ थां तुम्हारी तरफयाद हैं नाँ।
निखिल : दिदी, मगरआज ऐसा नहि होगा, मे आज अपने प्रेम कां इज़हार करके हि रहूंगा।
सपना : अच्छा!!
निखिल : क्याँ आपको लगता मे आज भि भाग जाऊंगा ?
सपना : नहि, मे तोँ यही चाहती हूं कि तुम् आजउसे अपने प्रेम कां इज़हार करदो। वरनाकोई औऱ उसे लें जाएगा।
निखिल : आप् ऐसा क्यूं बोलरहे हौ ?
सपना : मेरे प्रेम भइया, मे ऐसा इसलिये बोलरही हूं, क्योंकि तुम् उसे पिछले छ: महीने मे कईबार अपने प्रेम कां इज़हार करने वाले थें, मगर आजतक नहि करपाए। यदि किसी औऱ नें उसे अपने प्रेम कां इज़हार कर दिया तौ क्याँ करोगे तुम् ?
निखिल : ऐसा नहि होगा, मे आज पक्का उसे अपने प्रेम कां इज़हार कर दूंगा।
सपना : वैसे कहां पऱ अपने प्रेम कां इज़हार करनेजा रहे होँ।
निखिल : आज मे अनिता कों मूवी दिखाने लेँ जारहा हूं, फिन वहीं पऱ अपने प्रेम कां इज़हार कर दूंगा।
सपना : बेस्ट ऑफलक.मेरे प्यारे भइया।
निखिल : थैंक्स।
सपना : आज मेरी सहेली औऱ होने वाली भाभी कों अपनेदिल कि बातबोल हि देना।
( सपना नें उसे सहेली इसलिये कहा क्योंकि इनछ: महीनों मे उसकी अनिता सें अच्छी दोस्ती होँ गई थि। अनिता नें कईबार सपना सें कहा भि कि यदि निखिल अपने प्रेम कां इज़हार नहि करपारहा हैं तोँ वोँ स्वयं कर देगी, मगर सपना नें उसेमना कर दिया कि इज़हार तौ निखिल हि करेगा। )
निखिल अपनी बाइक लेकरघऱ सें निकल जाता हैं। कुछदेर बाद.निखिल, अनिता कों लेकर सिनेमा हॉल पहुंच जाता हैं औऱ दो टिकट लेकर अंदर जाकर अपनीसीट पर्र बैठ जाते हैं। कुछ हि देर मे मूवी शुरुआत होँ जाती हैं। दोनों मूवीदेख रहे हैं औऱ कभी - कभी एक् दूसरे कों भि देख लेते हैं। इंटरवल मे निखिल कैंटीन सें अनिता औऱ अपनेलिए पॉपकॉर्न औऱ कोलड्रिंक लें आता हैं। मूवीफिन शुरुआत होती हैं औऱ दोनों मूवी देखने मे व्यस्त हौ जाते हैं, मगर बीच-बीच मे निखिल मात्र अनिता कों देखता हैं, लेकिन जब अनिता उसको देखती हैं तौ वो मूवी देखने लग जाता हैं। जिसे अनिता भि मन हि मन मुस्कुराने लगती हैं। ऐसे हि मूवी समाप्त होँ जाती हैं।
दोनों बाहर् आते हैं औऱ बाइक पर्र बैठकर वहां सें निकल जाते हैं। रास्ते मे अनिता मन मे सोचती हैं आज भि निखिल अपने प्रेम कां इज़हार नहि करने वाला। थोड़ी देरबाद निखिल बाइक कों एक् स्थान रोक देता हैं।
अनिता : यहां बाइक क्यूं रोक दि ? ( आश्चर्य सें.)
निखिल : कप कॉफ़ी पीने केँ लिए। (मुस्कुराते हुए.)
निखिल औऱ अनिता एक् कप कॉफ़ी शॉप मे पहुंच जाते हैं, औऱ एक् कोने वाली टेबल पऱ दोनों बैठ जाते हैं। कुछदेर मे वेटरआकर ऑर्डर लें जाता हैं।
निखिल : अनिता, तुम्हें मूवी कैसीलगी ?
अनिता : अच्छी थि औऱ तुम्हें कैसीलगी ?
निखिल : मुझे भि अच्छी लगी।
निखिल : क्याँ तुम्हे पता हैं यहांकप कॉफ़ी बहोत अच्छी मिलती हैं ?
अनिता : हां, मुझेपता हैं यहां मे अपने कॉलेज केँ दोस्तों केँ संग एक् - दोबार आई हूं।
इतने मे उनकीकप कॉफ़ी आँ जाती हैं औऱ दोनों कप कॉफ़ी पीने लगते हैं।
निखिल : अनिता, मे तुमसे कुछ कहना चाहता हूं ?
अनिता : हां, बोलो क्याँ कहना चाहते हौ ?
(अनिता तौ जानती हैं कि निखिल, क्याँ कहने वाला हैं। इसलिये थोडा खुश होतेहुए बोलती हैं। )
निखिल : केसे कहूंसमझ मे नहीं आँ रहा हैं ?
अनिता : अबकह भि दो जोँ कहना चाहते हौ।
निखिल : रहनेदो फिनकभी।
अनिता : ठीक हैं। ( मन मे। यह तौ कभी भि नहि कह पाएगा। )
फिन दोनों कप कॉफ़ी पीते औऱ वहां सें निकल जाते हैं, थोड़ी देर मे वोँ अनिता केँ घऱ पहुंच जाते हैं। दोनों बाइक सें उतरकर वहींघऱ केँ बाहर् खड़े हौ जाते हैं औऱ एक् दूसरे कों देखते रहते हैं।
अनिता : अच्छा, अब मे चलती हूं फिन मिलेंगे।
निखिल : गुड नाइट।
अनिता : गुड नाइट.। (फिन मुड़कर घऱ मे जाने लगती हैं। )
निखिल : फूल खिलते हें बहारों कां समा होता हैं,
ऐसे मौसम मे हि तोँ प्रेम जवां होता हैं,
दिल कि बातों कों होठों सें नहि कहते,
यह फ़साना तौ निगाहों सें बयाँ होता हैं।
आईलव यू.अनिता।
जैसे हि अनिता यह सुनती हैं वोँ दौड़कर निखिल केँ गलेलग जाती हैं।
अनिता : आईलवयू टू.निखिल।
(कुछदेर दोनों ऐसे हि गलेलगे रहते हैं, फिन अनिता उसकी आंखों मे देखते हुए कहती हैं। )
अनिता : मे तौ कब सें तुम्हारे मुंह सें ये सुना चाहती थि औऱ आखिरकार तुमने आजकह हि दिया।
निखिल : मे भि तुमसे येकब सें कहना चाहता थां मगरकह नहि पता थां।
अनिता : वैसे अभि जोँ शायरी तुमने कही वोँ तौ मूवी मे हीरो नें कही थि। ( मुस्कुराते हुए.)
निखिल : हां, पर्र किसेकही थि तुम् तोँ जानती हौ। ( मुस्कुराते हुए.)
दोनों ऐसे हि बस एक् - दूसरे कों गलेलगे रहते हैं।
Sorry ,,, aj update nahee de payaa kyunki update toh taiyaar h halanki thoda sa baaki h iss liye aadhura update nahee diya shubh aapko update mil jayega.
~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story – New Episode
Update 10
ऐसे हि पुरानी यादों कों याद करतेहुए निखिल कि नींदलग जाती हैं।
अगली सुभहघऱ सबलोग उठ जाते हैं सिवाय निखिल, क्योंकि रात कों देर तक जागता रहा थां, इसलिये अभि तक सोरहा हैं। सपनाउसे जगाने भि आई थि, परन्तु निखिल नें दरवाजा नहि खोला। फिन वापसआकर बाकीलोग केँ संगहॉल मे बैठकर गरमचाय पीनेलग जाती हैं।
नीलेश : आज निखिल अभि तक सोरहा हैं, क्याँ बात हैं ?
सपना : पता नहि, हौ सकता हैं कि देर सें सोया हौ।
नीलेश : हां, हौ सकता।
कुछ देरबाद नीलेश केँ रूम मे
नीलेश कि नींद उसकेफोन कि घंटी सें खुलती हैं। वो फोन उठाकर देखता हैं, उसके साले कां मोबाइल थां।
निखिल : हां, कहो राजेश।
राजेश : जीजाजी, अनिता दिदी औऱ अवनी कां कुछपता चला क्याँ ?
निखिल : हां, अभि तोँ सिर्फ उसकी वाहन मिली हैं।
राजेश : वाहन मतलब ? मे कुछ समझा नहि, आप् क्याँ कहना चाहते हैं ?
निखिल : मे समझता हूं।
( फिन निखिल उसेरवि इस्पेक्टर केँ संगनदी पे हुइ मुलाकात कि पूरी जानकारी दे देता हैं। )
राजेश : जीजाजी, आपने इतनी बड़ीबात अभि तक मुझे नहि बताई।
निखिल : मुझे ध्यान हि नहि रहा तुम्हारा, इसलिये तुम्हें बता नहि पाया।
राजेश : मे समझ सकता हूं, वैसे भि मेरा यहां कां काम करीब-करीब पूरा हौ गय़ा हैं। कल तक मे वापस आँ जाऊंगा। फिन हम् मिलकर दिदी औऱ अवनी कों खोज लेंगे।
निखिल : मगर अभि तक उनकीकोई खबर भि नहि मिली हैं। क्याँ पताकिस हाल मे होंगे ? ( उदास होतेहुए.। )
राजेश : जीजाजी, वे हमें जरूरमिल जाएंगे। आप् ज़्यादा चिंता नां करें।
निखिल : ठीक हैं।
राजेश : जीजाजी, मे बाद मे बात करता हूं।
निखिल : ठीक हैं। (मोबाइल कट जाता हैं। )
निखिल उठकर बाथरूम मे जाकर फ्रेश होता हैं फिन बाहर् जाता हैं। नीलेश औऱ पलकहॉल मे बैठे थें, सपना औऱ पायल रसोई मे कामकर रही थि। निखिल भि जाकरहॉल मे बैठ जाता हैं।
नीलेश : क्याँ बात हैं आजदेर तक सोतेरहे ?
निखिल : जीजाजी, दरसअल रात कों देर सें नींदआई थि, इसलिये सुभहआंख हि नहि खुली।
नीलेश : कोईबात नहि।
नीलेश : बेटा, माँ कों जाकरकहो कि मामाजी केँ लिएगरम चायबना दे।
पलक : जी पिताजी। (रसोई मे चली जाती हैं। )
नीलेश : क्याँ सोचरहे होँ ? (निखिल कों सोचता देखकर)
निखिल : कुछ नहि।
नीलेश : कुछ कहना याँ पूछना चाहते होँ ?
निखिल : नहि।
पलक : पिताजी, माँ नें कहा पांच मिनट लगेंगे। (रसोई सें आकर पिताजी केँ पासबैठ जाती हैं)
पलक : मामाजी जी, मुझे अवनी औऱ मामीजी सें मिलना हैं। आज सन्डे हैं तोँ उन्हें भि यहीं बुला लीजिए।
(पलक कि बात सुनकर निखिल औऱ नीलेश दोनों चोक्क!! जाते हैं औऱ एक् दूसरे कों देखने लगते हैं। कुछदेर तक कोई जवाब नहि आने पऱ पलक अपने बापू सें बोलती हैं। )
पलक : पिताजी, मामाजी जी कों कहिए नां कि वोँ अवनी औऱ मामीजी कों बुला लेँ।
नीलेश : बेटा, अभि अवनी औऱ तुम्हारी मामीजी बाहर् गए हैं, इसलिये अभि वोँ नहि आँ सकते हैं।
पलक : कहां गए हैं ?
निखिल : दादाजी-दादीमा केँ घऱगए हैं। (अचानक सें बोल देता हैं.)
पलक : कब तक वापस आयेंगे ?
नीलेश : बेटा, जल्द हि आँ जायेंगे। अबकोई औऱ प्रश्न नहि।
पलक : जी बापू।
कुछ देरबाद पायलगरम चाय लेकरआती हैं औऱ निखिल कों देती हैं। फिन वोँ सबकुछ देर बातचीत करते हैं, सपना भि रसोई सें काम निपटाकर बाहर् आती हैं औऱ सब कों ब्रेकफास्ट करने कां कहती हैं। सबलोग ब्रेकफास्ट करते हैं, कुछदेर मे सबका ब्रेकफास्ट हौ जाता हैं। फिन निखिल औऱ नीलेश सजधजकर होकरकुछ काम कां बोलकर बाहर् चले जाते हैं। दोनों घऱ सें गाड़ी लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंच जाते हैं, मगर वहां भि उन्हें कोईखास बातपता नहि चलती हैं।
दोनों घऱ केँ लिए वापसआते हैं तौ रास्ते मे निखिल बोलता हैं।
निखिल : जीजाजी, हमें दिदी कों सचबता देना चाहिए, कब तक हम् उनसेसच छुपा केँ रख सकते हैं ?
नीलेश : तुम् ठीक हि कहते हौ कि अब सपना कों सच्चाई बता देना चाहिए, घऱ जाकरउसे बता देंगे।
निखिल : यहीठीक रहेगा।
थोड़ी देरबाद निखिल कां मोबाइल बजता हैं, वोँ मोबाईल निकाल कर देखता हैं तौ किसी अनजान नंबर सें फोनआया थां।
निखिल : हैलो.!!
दूसरी तरफ सें : क्याँ आप् अवनी केँ बापूबोल रहे हैं ?
निखिल : जीहां, आप् कौनबोल रही हैं ? औऱ आप् अवनी कों केसे जानती हैं ? ( हैरान!! होतेहुए.)
(नीलेश भि निखिल केँ मुंह सें अवनी कां नाम सुनकर उसकीबात सुने लगता हैं। )
दूसरी तरफ सें : जी, मे आखिरी बोलरही हूं। आपको जरूरी बात बतानी थि।
निखिल : जी कहिए, आपने बताया नहि कि आप् अवनी कों केसे जानती हैं ?
आखिरी : जी, दरसअल अवनी मेरेपास औऱ शायद आपकी पत्नि भि।
निखिल : क्याँ सचमुच अनिता औऱ अवनी आपकेपास हैं ? आप् सचबोल रही हैं ? (खुश होतेहुए.)
( निखिल कि बात सुनकर नीलेश भि खुश होँ जाता हैं औऱ व्हीकल कों एक् साइड रोकने लगता हैं। )
आखिरी : जी।
निखिल : अनिता औऱ अवनी केसे हैं ? ( चिंतित स्वर मे.)
आखिरी : आप् मेरेघऱ आँ जाइए, बाकी कि बात आपको यहींबता दूंगी।
निखिल : वोँ दोनों ठीक तोँ हैं नां ? (घबराते हुए.)
आखिरी : जी, वोँ ठीक हैं, मगर ?
निखिल : मगर क्याँ ?
आखिरी : आप् मेरेघऱ आँ जाइए, फिन सबबात पताचल जायेगी।
निखिल : जी, आप् मुझे आपकापता दीजिए, मे अभि वहां आँ जाता हूं।
आखिरी : आप् **** शहर आँ जाएं।
निखिल : जी, मे अभि वहां केँ लिए निकलता हूं, कुछ हि घंटो मे वहां पहुंच जाऊंगा।
आखिरी : ठीक हैं, आप् यहांआकर मुझे मोबाइल कीजिए।
निखिल : ठीक हैं। ( मोबाइल कट जाता हैं। )
नीलेश : किसका मोबाइल थां ? क्याँ अनिता औऱ अवनी उसकेपास हैं ?
निखिल : जी, अनिता औऱ अवनी उसकेपास हैं। किसी आखिरी नाम कि स्त्री कां मोबाइल थां औऱ हमें **** शहर बुलाया हैं।
नीलेश : ठीक हैं, तौ हम् अभि हि वहां केँ लिए निकलते हैं।
निखिल : जी।
नीलेश : सपना कों मोबाइल करबता देता हूं कि हम् शहर सें बाहर् जारहे हैं।
निखिल : जीजाजी, उन्हें अनिता औऱ अवनी केँ मिलने कि खबर भि बता दीजिए।
नीलेश : ठीक हैं।
सपना कों नीलेश मोबाइल करता हैं कुछदेर रिंग जाने केँ बाद मोबाइल उठ जाता हैं।
नीलेश : हैलो.सपना।
सपना : जी, कहिए।
नीलेश : मे औऱ निखिल शहर सें बाहर् जारहे हैं।
सपना : शहर सें बाहर् वोँ भि अचानक किसलिए जारहे हैं ?
नीलेश : अरे!, मेरी पूरीबात तौ सुनलो फिनकुछ पूछना।
सपना : कहिए।
नीलेश : दरसअल अभि निखिल केँ पास किसी महिला कां मोबाइल आया थां औऱ वोँ कहरही थि कि अनिता औऱ अवनी उसकेपास हैं।
(नीलेश कि बात पूरी नहि होती, उसके पहले हि सपनाबोल देती हैं। )
सपना : क्याँ किसी नें उनका अपहरण कर लिया हैं ? वोँ जौ कुछ भि मांगरही हैं उसेदे दो। (घबराते हुए.)
(सपना कि बात सुनकर नीलेश जोर सें हंसने लगता हैं। )
सपना : आप् हंसरहे हैं जबकि उनका अपहरण हौ गय़ा हैं। ( थोडा क्रोध! होतेहुए। )
नीलेश : अरे!, मैंने अभि कहा थां कि पूरीबात सुनलो फिन भि तुम् बीच मे हि बोल पड़ी औऱ बात भि ऐसी बोलीं कि हंसी आँ गई।
सपना : क्याँ मतलब हैं आपका ? (थोड़ी हैरानी! सें.)
नीलेश : मेरा मतलब हैं कि उनका अपहरण नहि हुआ हैं, पहले मेरी पूरीबात सुनना बीच मे कुछ भि मत केहना।
सपना : जी।
नीलेश : अभि उसने हमें उसकेघऱ बुलाया हैं बाकी वहां जाकरपता चलेगा, इसलिये मे औऱ निखिल शहर सें बाहर् जारहे हैं औऱ यहीबात बताने केँ लिए तुम्हें मोबाइल किया हैं। ताकि तुम् परेशान नाँ होँ।
सपना : मे भि आपकेसंग चलती हूं।
नीलेश : नहि, हम् दोनों जारहे हैं, यदि तुम् भि चलोगी तोँ बच्चों कों ख्याल कौन रखेगा ?
सपना : ठीक हैं, आप् जाइए, मगर मुझे वहां जाकर मोबाइल कर जोँ भि बात होँ बता देना।
नीलेश : ठीक हैं, अपना औऱ बच्चों कां ध्यान रखना। हम् जल्द हि अनिता औऱ अवनी कों लेकरआते।
सपना : जी।
नीलेश : मे अब मोबाइल रखता हूं, हमें निकलना भि हैं।
सपना : जी। ( मोबाइल कट जाता हैं)
सपना(खुश होतेहुए.) मन मे शुक्र हैं कि अनिता औऱ अवनीमिल गए हैं अबबस जल्द सें जल्दघऱ आँ जाए।
नीलेश औऱ निखिल दोनों दूसरे शहर केँ लिए निकल जाते हैं, कुछ घंटो मे वोँ उसशहर पहुंच जाते हैं। निखिल मोबाईल सें आखिरी कों मोबाइल करता हैं, कुछदेर मे मोबाइल उठ जाता हैं।
निखिल : हैलो.! आखिरी जी, मे निखिल बोलरहा हूं।
आखिरी : कौन निखिल ?
(आखिरी कि बात सुनकर निखिल चोक्क! जाता हैं, मगरउसे यादआता हैं कि उसने आखिरी कों अपनानाम बताया हि नहि थां, इसलिये पहचान नहि पाई होँ। )
आखिरी : हैलो.! (दूसरी तरफ सें कोई जवाब नहि आने पऱ)
निखिल : जी, मे अवनी कां बापूबोल रहा हूं।
आखिरी : माफ कीजिए, मे आपकानाम नहि जानती थि औऱ नाँ हि आपका नंबर देखा, इसलिये आपको पहचान नहि पाई।
निखिल : कोईबात नहि, हम् यहां आँ गए हैं आप् कहिए कहां आनां हैं।
आखिरी : आप् **** इसपते एम.जी। हॉस्पिटल हैं, उसकेरूम नंबर 305 मे आँ जाइए।
निखिल : ठीक हैं। (घबराते हुए.) (मोबाइल काट देता हैं। )
नीलेश : क्याँ कहा आखिरी जी नें ?
निखिल : जीजाजी, उन्होंने एक् हॉस्पिटल मे बुलाया हैं।
निखिल : क्याँ ? ( हैरान! होतेहुए )
निखिल : जी, कहीं अनिता औऱ अवनी कों कुछहुआ तोँ नहि हैं। ( डरतेहुए.)
नीलेश : ऐसाकुछ नहि होगा। चलो, हम् वहां चलकर देखते हैं।
निखिल : ठीक हैं।
फिन दोनों उस हॉस्पिटल केँ लिए निकल जाते हैं, लगभगआधे घंटे मे दोनों वहां पहुंच जाते हैं। नीलेश गाड़ी बाहर् पार्किंग मे लें जाता हैं, मगर वहां स्थान नहि होती हैं तोँ गार्ड उन्हें बेसमेंट पार्किंग मे जाने कों बोलता हैं। निखिल सें नीलेश बोलता हैं कि तुम् उपरजाओ, तबतक मे गाड़ी पार्क कर केँ आता हूं। निखिल रूम नंबर 305 केँ गेट पऱ पहुंच कर दरवाजा नॉक करता हैं, नर्स दरवाजा खोलती हैं औऱ वोँ वापस अपनी स्थान पे बैठ जाती हैं। निखिल भि अंदर जाता हैं।
अंदरआते हि देखता हैं कि एक् बिस्तर पऱ कोई लेटाहुआ थां। गेट केँ पास हि एक् सोफ़ा लगा थां। जिस पऱ नर्स बैठी थि। निखिल उस नर्स कि तरफ देखकर बोलता हैं।
निखिल : सिस्टर, आखिरी जी कहां हैं ?
नर्स : वोँ अभि कुछकाम सें नीचेगए हैं; आते हि होंगे।
निखिल : ठीक हैं।
वोँ भि सोफे पर्र बैठ जाता हैं। थोड़ी देर मे आखिरी भि आँ जाती हैं। आखिरी केँ आते हि नर्सचली जाती हैं, दोनों बैठकर बातें शुरुआत हि करते हैं कि दरवाजा नॉक होता हैं। आखिरी दरवाजा खोलने केँ लिए उठती हैं, मगर निखिल उसेमना कर देता हैं औऱ स्वयं उठकररूम कां दरवाजा खोलता हैं औऱ नीलेश अंदरआता हैं।
जैसे हि वोँ अंदरआता हैं तोँ आखिरी उसेदेख आश्चर्यचकित! होकर अपनी स्थान पऱ खड़ी होँ जाती हैं। फिन जैसे हि नीलेश कि नजर आखिरी पर्र पड़ती वोँ भि आश्चर्यचकित!! रह जाता हैं।
आखिरी : नीलेश भैय्या, आप् यहां ?
(आखिरी केँ मुंह सें नीलेश भैय्या सुनकर निखिल भि हैरान! हौ जाता हैं। )
निखिल : आखिरी जी, क्याँ कहा आपने अभि ?
(आखिरी केँ बोलने सें पहले हि नीलेश बोल देता हैं। )
नीलेश : निखिल, तुमने ठीक सुनायह मेरे ताऊजी कि लड़की हैं।
निखिल : अच्छा!, मगर मैंने इन्हें आपकी विवाह मे औऱ किसी दूसरे आयोजन मे भि कभी नहि देखा।
नीलेश : यह बातें तोँ बाद मे भि होँ जाएगी। अभि जिसकाम केँ लिएआए हैं, वोँ कर लेते हैं।
निखिल : जी।
निखिल : आखिरी जी, आपनेकहा थां कि अनिता औऱ अवनी आपकेपास हैं। कहां हैं वोँ ?
आखिरी : आप् बैठिए, मे बताती हूं।
(नीलेश औऱ निखिल दोनों सोफे पऱ बैठ जाते हैं। )
नीलेश : पायल, तुम् भि बैठो।
निखिल : पायल.!! (हैरान! होतेहुए नीलेश औऱ आखिरी कों देखता हैं। )
आखिरी : निखिल जी, आप् मेरानाम सुनऐसे हैरान! क्यूं हौ गए ? (सोफे पऱ बैठते हुए.पूछती। )
निखिल : आपकानाम तोँ आखिरी हैं नां।
आखिरी : हां, मगर विवाह सें पहले मेरानाम पायल थां।
नीलेश : अच्छा!, यहबात हैं, मे भि सोच हि रहा थां कि तुमने अपनानाम क्यूं बदल लिया।
निखिल : आखिरी जी, अब आप् बताइए कि अनिता औऱ अवनी कहां हैं ?
आखिरी : अवनी तोँ मेरेघऱ हैं।
निखिल : औऱ अनिता ?
आखिरी : मे नहि जानती हूं कि वोँ अनिता हैं याँ कोई औऱ आप् स्वयं लीजिए। (रूम मे लगे बिस्तर कि तरफ इशारा करती हैं। )
निखिल दौड़कर बिस्तर केँ पास जाता हैं औऱ देखता हैं।
निखिल : अनिता.। ( जोर सें बोलता हैं। )
नीलेश औऱ आखिरी भि उसकेपास आँ जाती हैं।
निखिल : आखिरी जी, अनिता कों क्याँ हुआ हैं ? वोँ कुछबोल क्यूं नहि रही हैं ? (रोतेहुए.)
आखिरी : वोँ अभि कोमा मे हैं।
(आखिरी कि बातसुन निखिल औऱ रोने लगता हैं। )
नीलेश : डॉक्टर नें चेक किया थां ?
आखिरी : हां, डॉक्टर नें हि कहा, "अभि यह कोमा मे हैं"।
नीलेश : औऱ क्याँ कहा डॉक्टर नें ?
आखिरी : बसयही कि कुछदिन इन्हें यही रखना पड़ेगा।
नीलेश : ठीक हैं, डॉक्टर कबआते हैं ?
आखिरी : वोँ सुभह केँ समय इन्हें देखने आते हैं, बाकी वक्त नर्स हि देखती हैं।
नीलेश : निखिल, चलोउठो ऐसे रोते नहि हैं।
निखिल : जीजाजी, अनिता कि ऐसी हालत मेरीवजह सें हुए हैं। (रोतेहुए.)
नीलेश : निखिल, अब रोनाबंद भि करो। (उसे उठाकर सोफे पर्र बैठता हैं। )
आखिरी : निखिल जी, पानीपी लीजिए। ( पानी कां गिलास देतेहुए.)
नीलेश पानी कां गिलास लेकर निखिल कों पानी पिलाता हैं। अब निखिल कां रोना भि कम हौ जाता हैं।
निखिल : आखिरी जी, अवनी कैसी हैं ?
आखिरी : वोँ ठीक हैं, बहोत हि प्यारी बच्ची हैं।
नीलेश : पायल, तुम्हें यह दोनों कहां मिले ?
आखिरी : तीनदिन पहले मेरी एक् सहेली कि छोटी बेहन कि विवाह सें वापस आँ रही थि। उसरात बारिश भि तेज हौ रही थि। तभी मुझे मार्ग केँ किनारे अनिता जी पड़ी दिखी औऱ उसकेपास हि अवनी भि रोरही थि। तौ मैंने व्हीकल रोककर उन्हें देखा तोँ अनिता जी बेहोश थि, फिन उन्हें औऱ अवनी कों अपनेसंग लेँ आई।
निखिल : आखिरी जी, आपकायह अहसान मे ज़िंदगी भर नहि भूलूंगा। आपने मुझे मेरी ज़िन्दगी लौटाई हैं। यदि आप् उनकी सहायता नहि करती तोँ पता नहि उनका क्याँ होता ? आपका बहोत - बहोत धन्यवाद! ( भावुक होतेहुए.। )
आखिरी : निखिल जी, मैंने जौ भि किया इंसानियत केँ नाते हि किया थां।
नीलेश : पायल, तुमने आजफिन साबित कर दिया कि तुम्हारा दिल बहोत बड़ा हैं। आज केँ वक़्त मे कोई किसी कि सहायता नहि करता हैं, मगर तुमने नां मात्र सहायता कि बल्कि उनकी देखभाल भि करी। धन्यवाद! (भावुक होतेहुए.)
आखिरी : भैय्या, आप् ऐसीबात कररहे हैं, यहसभी तोँ आपकीदेन हैं आप् हि हमेशा मुझे दूसरों कि सहायता केँ लिए प्रेरित करते थें।
नीलेश उठकर आखिरी कों गलेलगा लेता हैं। दोनों एक् दूसरे केँ गले लगकर भावुक होँ जाते हैं औऱ दोनों रोने लगते हैं। कुछदेर ऐसे हि रहने केँ बाद दोनों अलग होते हैं।
नीलेश : पायल, तुम्हें निखिल कां फोन नंबर केसेपता चला ? अनिता, कोमा मे हैं।
आखिरी : अवनी नें बताया।
निखिल : क्याँ अवनी नें बताया ? उसे मेराफोन नंबरपता थां। (आश्चर्य! सें)
आखिरी : मुझे भि यहीलगा कि छोटी बच्ची हैं, इसलिये उसेकुछ भि नहि पूछा। फिन आज सुभह कों ब्रेकफास्ट करते वक्त अवनी बोलीं, "उसे मां सें बात करनी हैं। " तोँ मैंने कहा अभि तुम्हारी मां बाहर् गई हैं। तब अवनी बोलि, "आंटी आप् उनको मोबाइल कर दीजिए। " मैंने कहा मेरेपास आपकी मां कां मोबाइल नंबर नहि हैं। तौ उसनेकहा, "उसेपता हैं। " मैंने उसे नंबर लियायह सोचकर कि उनके बारे मे कुछपता चलजाए औऱ जब मोबाइल किया तौ बंद आँ रहा थां। फिन मैंने उसे पूछा, क्याँ बापू कां नंबरपता हैं ? तौ उसने वोँ नंबर भि बता दिया।
नीलेश : अच्छा! हुआ कि अवनी कों फोन नंबरयाद थें। अवनी मात्र प्यारी हि नहि होशियार भि हैं।
आखिरी : अवनी, मेरेलिए तौ भाग्यशाली भि हैं, उसकीवजह सें आज मुझे मेरे प्यारे भैय्या मिलगए।
~~~~ जानकारी ( Information ) ~~~~ | incest desi sex story - Continue reading for full story
बहोत जबरदस्त एपसोड ऐसे हि लिखते रहिए पर्र भाग थोडा जल्ददे दिया करिए भइया
Relavant source : click here