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बारिश हौ रही हैं संग हि थोड़ी - थोड़ी तेज हवाएं भि चलरही हैं। एक् सुनसान मार्ग पर्र अंधरे कों चीरते हुए। एक् गाड़ी तेजी सें मार्ग पऱ दौड़रही हैं। वाहन कों देखकर ऐसालग रहा हैं। मानो चालक कों मौसम कि परवाह भि नहि हैं वोँ तोँ मात्र अपनी धुंध मे गाड़ी भागये जारहा हैं। कुछदेर बाद वाहन मे चालक केँ पास वालीसीट पऱ बैठी बच्ची रोने लगती हैं। तब चालक अपनी बच्ची कों देखकर उसे शांत करने केँ लिएउसे एक् हाथ सें प्रेम सें सहलाने लगती हैं। इस दौरान वो अपनी गाड़ी कि रफ्तार भि कुछकम कर देती हैं। यह चालकउस बच्ची कि मम्मी हैं। कुछदेर बाद वोँ बच्ची शांत होकरफिन सें सो जाती हैं।
फिन बच्ची कि मम्मी गाड़ी चलाते हुए, कुछ देरबाद एक् सुरक्षित स्थान यानी होटल टाइप स्थान पऱ गाड़ी रोकती हैं क्योंकि अब बारिश बहोत तेज होँ रही हैं। जिसेउसे गाड़ी चलाने मे दिक्कत हौ रही थि। औऱ आराम करने लगती हैं।
किसीशहर मे एक् कालोनी केँ छोटे सें घऱ केँ अंदरदो लोगआपस मे किसीबात पर्र झगड़रहे हैं। व्यक्ति मे तुमसे कितनी बारकहा हैं मुझे मेरी जीवन अपने हिसाब सें जीनेदो। तुम्हे मेरीबात समझ नहि आती क्याँ ?
सामने वाला मात्र उसकी बातों कों सुनेजा रहा हैं। व्यक्ति उसेफिन सें बोलता हैं क्याँ हुआ मेरीबात कां जवाबदो ? सामने वालाफिन भि कुछ नहि कहता औऱ रोएजा रहा हैं। फिन व्यक्ति उसे धक्का देकर उसकेहाथ मे सें कुछ छिने कि कोशिश करता हैं।
तभी स्त्री उसकाहाथ पकड़कर उसे रोकती हैं। औऱ वो चीज कों छोड़ने कि विनती करने लगती हैं। व्यक्ति उसचीज कों छोड़ देता हैं। मगर वो फिन सें उसे बोलता हैं क्यूं नाटककर रही हैं, जब मे मांगरहा हूं तोँ चुपचाप सें मुझे वोँ देदो। स्त्री रोतेहुए नहि। मे नहि दूंगी।
व्यक्ति नहि सुनकर जोर सें चिल्लाते हुए। तौ देख मे केसे लेता हूं। औऱ उसकेपास जाकर उसकेहाथ सें वोँ चीजफिन सें छीनने लगता हैं। इसबार स्त्री कुछ नहि कर पाती हैं, औऱ वो उसे वोँ चीजछीन लेता। औऱ मुड़कर जाने लगता हैं।
महिला उसकेपेर पकड़उसे वो चीज नां लेँ जाने कि विनती करती हैं।
व्यक्ति क्याँ तुम् नहि जानती कि मे सभी अपने परिवार कि खातिर हि कररह हूं। ताकि जल्द सें जल्द तुम् लोगों कों खुशियां दे सकूं। फिन भि तुम् ऐसीबात कररही होँ। औऱ घऱ सें बाहर् जाने लगता हैं।
अब महिला सें औऱ बर्दाश्त नहि होता हैं, तौ वोँ रोतेहुए कहती हैं कि आप् खुशियों कि बातकर रहे हें। आपने
, अपनी जीवन अपने हिसाब सें जीने केँ चक्कर मे मेरी औऱ मेरे बच्चों कि जीवन कों मुसीबतों मे डालकर रख दि। मगरकभी भि आपसेकुछ नहि कहा।
आपके इन्हीं गलतलत कि वजह सें घऱ कि सारी जमापूंजी समाप्त कर दि। मेरे गहने औऱ घऱ तक बेच दिया। जिसे मुझे औऱ मेरे छोटे बच्चों कों कष्ट उठाने पड़े। पऱ फिन भि मे अपने बच्चों केँ लिए चुपचाप सब बातों कों अनदेखा कर दिया।
आपको तोँ घऱ कि कोई चिंता नहि हैं, इसलिये मे स्वयं काम करकेघऱ औऱ अपनें बच्चों कि देखभाल कररही हूं। औऱ आज आप् मेरे बच्चों केँ भविष्य केँ लिएजमा किएधन कों भि लें जानां चाहते हैं।
आपकीइसी वजह सें परेशान होकर आपके परिवार नें घऱ सें अलगकर दिया। औऱ इस कारण मेरे बच्चों कों अपने दादाजी - दादीमा, चाचा-चाची सें अलग होना पड़ा। एक् हि शहर मे रहने केँ बावजूद मेरे बच्चों कों उनका प्रेम नहि मिला। बसजबकभी उनकी फूफी उन्हें मिलने बुलाती हैं। तौ उन्हें उनका प्रेम औऱ उनके बच्चों कां संग मिलता हैं। मे कितनी बार उन्हें कहा आप् घऱ चलिए। पऱ वोँ हमेशा आप् केँ कारणमना कर देती हैं।
मगरअब औऱ नहि। मे अपने बच्ची कों लेकर अपने भइया केँ घऱजारही हूं। औऱ हां आप् कल मेरे बेटे कों हॉस्टल सें निकलवा कर। उसे उसके मामाजी केँ यहांभेज देना।
महिला कि बातें सुनकर व्यक्ति उसे कहता हैं मानता हूं मेरीवजह सें तुम्हे औऱ मेरे बच्चों कों परेशानी हुईँ हैं। पऱ मे जोँ भि कररहा हूं। तुम् लोगों कों खुशियां देने केँ लिए हि कररहा हूं। तुम् जानती होँ मे तुमसे औऱ बच्चों कितना प्रेम करता हूं औऱ तुम् भि मुझसे कितना प्रेम करती हौ। फिनघऱ छोड़कर जाने कां क्यूं बोलरही हौ।
स्त्री क्योंकि हरबार मे तुम्हारी बातों मे आँ करचुप होँ जाती थि। औऱ सोचती थि चलोकोई नहि अब तुम् ऐसा नहि करोगे। पहले जैसेबन जाओगे। जिसे मे औऱ सब प्रेम करते थें। पर्र मे गलत थि। औऱ आज मे तुम्हारी किसी भि बात मे नहि आने वाली निखिल।
औऱ वो अपनी बच्ची केँ पास जाती हैं। जोँ सोरही थि उसे नींद सें उठाकर अपनेसंग चलने कां कहती हैं। तौ बच्ची पूछती हैं माँ कहा चलना हैं ? तौ वोँ कहती हैं अपने मामाजी केँ यहां। उसकीबात सुनकर बच्ची खुश होँ जाती हैं। औऱ अपनी मम्मी केँ संग जाने लगती हैं।
घऱ सें बाहर् जाने केँ लिए जैसे हि वोँ चलती हैं तोँ उसे निखिल रोकता हैं औऱ कहता अभि तुम् नां जाओ। बाहर् तेज बारिश हौ रही हैं। सुभहचले जानां।
महिला मे जानती हूं तुम् मुझे बारिश कां एक्सक्यूज़ बनाकर रोकना चाहते होँ। मगर मे अबइसघऱ मे एक् समय भि नहि रहना चाहती हूं। औऱ ये कहकर वोँ अपने दफ़्तर कि गाड़ी मे अपनी बच्ची केँ संगबैठ जाती हैं। औऱ घऱ सें निकलने लगती। तब निखिल वाहन केँ पीछे पीछे भागते हुए चिल्लाता रहता हैं रुकजाओ अनीता। रुकजाओ अनीता.।
एक् दमदार औऱ जोरदार बिजली कि गर्जन कि आवाज़ सें अनीता अपनी यादों सें बाहर् निकलती हैं। अब बारिश भि थोड़ी धीरे-धीरे हौ गई हैं। फिन वो अपनी बच्ची कि तरफ देखती हैं जौ अभि सोरही हैं। कुछदेर बाद अपनी गाड़ी वापस चलाने लगती हैं। औऱ ऐसे हि धीरे-धीरे - धीरे-धीरे अपनी मंजिल कि तरफ बढ़ने लगती हैं। अब वोँ एक् नदी केँ पुल सें गुजरती तभी अचानक उसकी वाहन केँ सामने कुछ दूरी पर्र बिजली गिर जाती हैं। जिसे वो घबरा जाती हैं औऱ अपनी वाहन कां नियंत्रण खो देती हैं। जिसके कारण उसकी गाड़ी नदी मे गिर जाती हैं।
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Update 2
इधरघऱ पऱ निखिल कां हाल बुरा थां। वोँ तोँ बसरोरो करयेसोच रहा थां। ये क्याँ हौ गय़ा मुझसे ? आज केसे मे इतनागिर गय़ा कि अपने बच्चों केँ भविष्य केँ लिएरखे, पैसों कों पाने केँ लिए अपनी इतनी अच्छी औऱ प्यारी पत्नि सें झगड़ा किया। औऱ जब वोँ घऱ छोड़कर जारही थि। तब भि मैंने उसे रोकने केँ लिएकोई कोशिश नहि कि। मे चाहता तोँ उसे केसे भि करकेरोक लेता, मगर मैंने ऐसा नहि किया।
येसभी मेरेजुआ खेलने कि वजह सें हुआ। यह कैसीलत लग गई हैं। मुझे इसके कारण पहले अपनेघऱ परिवार कों छोड़ना पड़ा। अपनी पत्नि औऱ बच्चों कि जीवन मे खुशियों कि स्थान गम हि गम दिये। जिसके केँ कारण वोँ भि मुझे छोड़कर चली गई।
ऐसे हि वोँ अपनी पुरानी गलतियों औऱ अपने परिवार, पत्नि औऱ बच्चों केँ संग बिताए प्यारे पलों कों रोरोकर यादकर रहा थां। ऐसे हि धीरे-धीरे - धीरे-धीरे वक्त गुजरता जाता हैं, औऱ उसे नींद आँ जाती हैं।
आधीरात कों लगभगतीन बजे केँ आसपास अनीता। चीखते हुए निखिल कि नींदखुल जाती हैं। औऱ वोँ अपने आसपास देखता हैं। वो अपनेघऱ मे हि सोफे पर्र लेटा हैं। उसेदेख करलगरहा हैं जैसे उसनेकोई बुरा सपना देखा होँ। वो जल्द सें उठकर अपनेरूम केँ तरफ जाता हैं, तभी अचानक उसेकुछ घंटों पहलेहुआ झगड़ा यादआता हैं।
वो फिन सें सोफे पर्र बैठकर कुछ सोचता हैं, औऱ घऱ कि घड़ीतरफ देखता हैं। फिन कहता हैं अभि तौ बहोत रात हौ चुकी हैं। सुभह कों मे अनीता कों मोबाइल करउसे बात करूंगा। औऱ उसे वापसघऱ लें आएगा। औऱ अपने आप् सें कहता हैं, आज केँ बाद मे कभी भि ऐसाकोई काम नहि करूंगा। जिसे मेरे परिवार कों कोई परेशानी होँ। औऱ फिनवही सोफे पर्र सो जाता हैं।
सुभहसात बजे लगभग निखिल कि नींद खुलती हैं। वोँ जल्द सें उठकरफोन सें अनीता केँ फोनकॉल आई करता हैं। मगर उसकाफोन बंदआता हैं। दोतीन बार औऱ कोशिश करता हैं। मगरहर बारफोन बंद हि आता हैं। फिन वोँ अनीता केँ भइया केँ घऱ पऱ टेलीफोन पऱ फोन करता हैं। मगरकोई भि टेलीफोन नहि उठता हैं। ऐसे हि दो - तीन घंटों तक बार - बारफोन औऱ टेलीफोन पऱ कॉलआई करता हैं। नां फोन चालूहुआ औऱ नां हि कोई टेलीफोन उठारहा थां।
अब निखिल कों थोड़ी - थोड़ी घबराहट होने लगती हैं। वोँ सोचता मेरेपास तौ मात्र अनीता केँ घऱ कां नंबर हैं। उसके भइया कां फोन नंबर तौ मुझे मालूम नहि हैं। फिन
सोचने लगता हैं उसका नंबर केसेपता करूं ??
ऐसे हि सोचते हुएउसे ध्यान आता हैं कि अनीता नें कुछ दिनों पहले अपने भइया कों मेरेफोन सें फोन किया थां। क्योंकि उसकेफोन कां रिचार्ज समाप्त हौ गय़ा थां।
निखिल जल्द सें अपनेफोन मे डायलकॉल आई लिस्ट देखता हैं। पऱ उसमें आठदसऐसे फोन थें जोँ सिर्फ नंबर वाले थें। इनमें सें कुछ नंबर निखिल जानता थां किसके हैं, अब सिर्फ तीन नंबर हि बचे थें। निखिल उन नंबर पऱ फोन करने कि सोचता हैं। एक् नंबर पऱ कॉलआई करता हैं, जोँ किसी औऱ कां थां। फिन दूसरे नंबर पर्र फोन करता हैं।
कुछदेर रिंग जाने केँ बाद मोबाइल उठ जाता हैं।
निखिल : हैलो, राजेश।
सामने सें : हां, राजेश बोलरहा हूं। आप् कौनबोल रहे हैं ?
निखिल : मे निखिल बोलरहा हूं।
राजेश : जीजाजी नमस्कार !! जी कहिए केसे हैं आप् ?
निखिल : मे ठीक हूं। क्याँ तुम् मेरीबात अनीता सें करा सकते हौ ?
राजेश : क्याँ ? अनीता दिदी सें !!!
निखिल : क्याँ हुआ ? क्याँ तुम् मेरीबात नहि करा सकते क्याँ ?
राजेश : आप् कैसीबात कररहे हैं। अनीता दिदी सें मे केसेबात करा सकता हूं।
( निखिल राजेश कि पूरीबात सुने बिना हि बोलता हैं। )
निखिल : थोडा गुस्से सें क्यूं नहि करा सकते ?
राजेश : क्योंकि मे तोँ शहर सें बाहर् हूं। औऱ वैसे आपने उनसेबात करने केँ लिए मुझे क्यूं फोन किया ?
निखिल : हैरानी सें !!! क्याँ अनीता तुम्हारे पास नहि आई ?
( राजेश भि निखिल कि बात सुनकर हैरान रह जाता हैं )
राजेश : यह आप् क्याँ बोलरहे ? मे तोँ कई दिनों सें शहर सें बाहर् हूं। औऱ अनीता दिदी मेरेपास क्यूं आयेगी ?
निखिल : कलरात कों अनीता औऱ अवनी वाहन सें तुम्हारे पास जाने केँ लिएघऱ सें निकली थि।
राजेश : हैरानी सें !! पर्र वोँ लोग मेरेपास क्यूं आँ रहे थें ? वोँ भि इतनीरात मे।
निखिल : राजेश, दरसअल कलरात कों हमारे बीच झगड़ा हौ गय़ा थां। इसलिये वोँ क्रोध होकर तुम्हारे पास आँ रही थि। अब तुम् कहरहे होँ, वोँ तुम्हारे पास नहि आई। औऱ उसकाफोन भि बंद आँ रहा हैं। कहीं उनकेसंग कुछ ग़लत तोँ नहि हुआ !!!
राजेश : जीजाजी, अनीता दिदी औऱ अवनीठीक होगे। होँ सकता हैं कि उनकेफोन कि बैटरी समाप्त होँ गई होँ। इसलिये बंद आँ रहा होँ। आप् चिंता नां करें। थोडा प्रतीक्षा कर लीजिए।
निखिल : राजेश, पर्र उन्हें घऱ सें निकले दस सें बारह घंटे होँ चुके हैं। औऱ तुम्हारे घऱ कां मार्ग गाड़ी सें तोँ सिर्फ दो घंटे कां हि हैं। तोँ अबतक आँ जानां चाहिए थां। जरूर उनकेसंग कुछ ग़लतहुआ होगा।
( निखिल कि बात सुनकर राजेश भि घबरा जाता हैं। )
राजेश : जीजाजी, आप् ऐसा कीजिए। पुलिस मे जाकर रिपोर्ट लिखवा दीजिए। मे भि जल्द सें जल्द वहांआता हूं। औऱ जैसे हि अनीता औऱ अवनी कि कुछखबर मिले, तोँ मुझे मोबाइल कर देना।
निखिल : ठीक हैं, मे पुलिस स्टेशन जाता हूं औऱ रिपोर्ट लिखवाता हूं। औऱ फोनकट कर देता हैं।
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Update 3
निखिल घऱ सें निकाल कर पुलिस स्टेशन पहुंच जाता हैं।
पुलिस स्टेशन मे अपनी पत्नि औऱ बच्ची केँ लापता होने कि रिपोर्ट कर औऱ बाकी कि पुलिस कार्यवाही पूरीकर घऱ वापस आँ जाता हैं।
घऱआकर वो अपनी बड़ी बेहन कों मोबाइल करता हैं। ( वोँ इसलिये करता हैं, क्योंकि पुलिस नें उसेकहा थां कि जौ भि परिचित हैं। जहां वोँ जा सकती हैं उन्हें सें पूछ लें। हौ सकता हैं वोँ वहांचली गई होँ। )
निखिल : हैलो
सामने सें : हां, बोलिए।
निखिल : क्याँ मेरीबात सपना सें हौ सकती हैं ?
सामने सें : दो मिनट रुकिये। अभि मे मां कों बुलाती हूं।
( लड़की माँ केँ कमरे मे जाकर मां आपकेलिए किसी कां मोबाइल हैं, जाकरबात कर लीजिए। )
सपना : हैलो, कौन बोलरहा हैं ?
निखिल : दिदी, मे निखिल।
सपना : निखिल !! आज केसे हमारी याद आँ गई ?
निखिल : दिदी, आपसे एक् बात पूछनी थि।
सपना : पूछो क्याँ पूछना हैं ?
निखिल : दिदी, क्याँ अनीता औऱ अवनी आपकेपास आई हैं ?
सपना : क्रोध होकर क्याँ मतलब हैं तुम्हारा ? क्याँ कहना चाहते हौ तुम् ?
निखिल : दिदी, मे बस इतना जानना चाहता हूं कि अनीता औऱ अवनी क्याँ आप् केँ संग हैं ?
सपना : नहि, औऱ तुम् ऐसा क्यूं पूछरहे होँ ? क्याँ बात हैं ?
( निखिल सोचते हुए, सपना दिदी केँ इस प्रश्न कां क्याँ जवाबदे। क्याँ उन्हें सचबता दें याँ फिन रहनेदे। )
सपना : क्याँ हुआ ? मैंने कुछ पूछा हैं तुमसे ?
निखिल : डरतेहुए.दिदी बातये हैं कि। कि.
सपना : अबआगे भि बोलेगा याँ शाहरुख कि तरहबस कि। कि। करेगा।
निखिल : दिदी, अनीता औऱ अवनीकल रात सें लापता हैं।
सपना : हैरान !! होतेहुए क्याँ बकवास कररहे होँ तुम् ? तुम् होश मे हौ याँ फिन पीने भि लगे हौ ?
निखिल : दिदी, मे सहीबोल रहा हूं।
सपना : रुक अभि मे अनिता कों मोबाइल करती हूं।
निखिल : दिदी, उसकाफोन बंद आँ रहा हैं। मे कईबार लगाया थां।
सपना : घबराकर, वोँ ऐसे केसे लापता होँ गई। असलबात क्याँ हैं बता मुझे ?
निखिल : दिदी, आप् घऱ पऱ आँ जाओ। मे मोबाइल पर्र नहि बता पाऊंगा।
सपना : अच्छा मे आती हूं।
निखिल : ठीक हैं। औऱ मोबाइल कटकर देता हैं।
इधर सपना मोबाइल रखकर अपनी बड़ी बेटी कों आवाज़ लगती हैं। पायल.पायल.
पायल : जी मां आई।
पायल : हां, माँ कहिए।
सपना : बेटा मे कुछकाम सें बाहर् जारही हूं। तुम् घऱ कां ख्याल रखना। औऱ यदि पिताजी कां मोबाइल आए तौ उन्हें कह देना। मेरेफोन पर्र लगा लें। औऱ पलक विद्यालय सें आँ जाए, तौ उसे खानां खिला देना। ठीक बेटा।
पायल : ठीक हैं माँ।
सपना : चलअब मे जारही हूं। अपना औऱ पलक कां ध्यान रखना।
सपना वाहन मे बैठकर निखिल केँ घऱ कि औऱ निकल जाती हैं। कुछदेर बाद उसकी वाहन निखिल केँ घऱ बाहर् रुकती हैं। घऱ केँ दरवाजे पऱ जाकर दरवाजा खटखटाया।
थोड़ी देरबाद निखिल दरवाजा खोलता हैं। औऱ अपनी दिदी कों अंदरआने कां मार्ग देता हैं। घऱ केँ अंदरआते हि सपना गुस्से सें बोलती हैं, अब बोलेगा भि। निखिल पहले आप् बैठे जाइए। सपना केँ बैठने केँ बाद निखिल बोलता हैं।
निखिल : दिदी, दरसअल बातये हैं कि। ( रात सें लेकर सपना कों मोबाइल करने केँ पहले तक कि सब बातें )। बता देता हैं।
सपना : निखिल कि पूरीबात सुनने केँ बाद खड़ी होती हैं औऱ निखिल केँ पास जाकर उसकेगाल पऱ एक् जोरदार तमाचा जड़ देती हैं।
निखिल : बस अपनी दिदी कों देखता रहता हैं। औऱ अपनी दिदी सें माफ़ी मांगने लगता हैं।
सपना : मुझे सें माफ़ी मांगने सें क्याँ फायदा होगा। तेरे कारण अनिता औऱ अवनीघऱ सें गए थें। औऱ अब क्याँ पता कहां हैं, औऱ किसहाल मे होंगे ? यदि उन्हें कुछ भि हुआ तोँ मुझसे बुराकोई नहि होगा। देख लेना।
फिन वोँ किसी कों मोबाइल करती हैं।
मोबाइल पर्र बात करने केँ बाद वोँ निखिल सें कहती हैं।
अभि तुम् मेरेसंग मेरेघऱ चलो। फिन दोनों भइया - बेहन गाड़ी मे बैठकर सपना केँ घऱचल देते हैं।
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