तेरी याद साथ है - bhabhi ki chudai - Episode 1
मेरानाम सोनू हैं, जमशेदपुर मे रहता हूं। जमशेदपुर झारखण्ड कां एक् सुंदर सां शहर जौ टाटा स्टील कि वजह सें पूरी दुनिया मे मशहूर हैं।
वैसे मेरा जन्म बिहार कि राजधानी पटना मे हुआ थां, मेरे पिताजी एक् सरकारी जॉब मे ऊँचे ओहदे पर्र थें जिसकी वाजह सें उनकाहर 2-3 साल मे तबादला होँ जाता थां। पिताजी कि जॉब कि वजह सें हम् कई शहरों मे रह चुके थें, उनका अंतिम पड़ाव जमशेदपुर थां। हमारे परिवार मे कुल 4 लोग हें, मेरे मां-बापू, मे औऱ मेरीबड़ी बेहन।
जमशेदपुर आने केँ बाद हमनेतय कर लिया कि हम् हमेशा केँ लिए यहीं रहेंगे, यही सोचकर हमने अपनाघऱ खरीद लिया औऱ वहीं रहनेलगे। हम् सभीलोग बहोत खुश थें।
अब जोँ बात मे आपको बताने जारहा हूं वोँ आज सें 4 साल पहले कि घटना हैं, जमशेदपुर मे आएहुए औऱ अपनेनया घऱलिए हुए हमेंकुछ हि दिनहुए थें कि मेरे बापू कां फिन सें ट्रान्सफर होँ गय़ा, ये हमारे लिए बहुत दुखद थां क्यूँकि हमनेये उम्मीद नहि कि थि।
अब हमारे लिए मुश्किल आँ खड़ी हुई थि कि क्याँ करें। पिताजी कां जानां भि जरुरी थां, हमेंकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां।
फिन हम् लोगों नें ये फैसला किया कि माँ पिताजी केँ संग उनकीनई स्थान पऱ जाएँगी औऱ हम् दोनों भइया बेहन जमशेदपुर मे हि रहेंगे। मगर हमेंयूँ अकेला भि नहि छोड़ाजा सकता थां।
हमारी इस तकलीफ़ कां कोईहल नहि मिलरहा थां, तभी अचानक पिताजी केँ दफ़्तर मे पिताजी कि स्थान ट्रान्सफर हुए सिन्हा जी नें हमें एक् उपाय बताया। उपायये थां कि सिन्हा जी अपने औऱ अपने परिवार केँ लिएनया घऱ ढूंढरहे थें औऱ उन्हें पताचला कि पिताजी मां केँ संगनई स्थान पर्र जारहे हें। सिन्हा अंकल नें पिताजी कों एक् ऑफर दिया कि अगर हम् चाहें तोँ सिन्हा अंकल अपने परिवार केँ संग हमारे घऱ केँ ऊपर वाले हिस्से मे किरायेदार बन जाएँ औऱ हमारे संग रहने लगें। हमारा घऱतीन मंजिला हैं औऱ ऊपर कां हिस्सा खाली हि पड़ा थां।
हम् सभी कों ये उपाय बहोत मनपसंद आया, इसी बहाने हमारी देखभाल केँ लिए एक् भरा पूरा परिवार हमारे संग हौ जाता औऱ मां पिताजी धीरे-धीरे बिना किसी फ़िक्र केँ जा सकते थें।
तौ येतय होँ गय़ा कि सिन्हा अंकल हमारे घऱ मे किरायदार बनेंगे औऱ हमारे संग हि रहेंगे। सिन्हा अंकल केँ परिवार मे उनकी पत्नि केँ अलावा उनकीदो बेटियाँ थि, बड़ी बेटी कां नाम रिंकी औऱ छोटी कां नाम प्रिया थां। रिंकी मेरी हम् उम्र थि औऱ प्रिया तीनसाल छोटी थि। रिंकी कि उम्र 21 साल थि औऱ प्रिया 18 साल कि। आंटी यानि सिन्हा अंकल कि पत्नि कि उम्रयही लगभग 40 केँ आसपास थि। मगर उन्हें देखकर ऐसा नहि लगता थां कि वोँ 30 साल सें ज़्यादा कि हों। उन्होंने अपने आपको बहोत अच्छे सें मेंटेन कररखा थां।
खैर उनकीकथा बाद मे बताऊँगा। येकथा मेरी औऱ उनकी दोनों बेटियों कि हैं।
पिताजी औऱ माँ सिन्हा अंकल केँ हमारे घऱ मे शिफ्ट होने केँ दोदिन बाद रांची चलेगए। अबघऱ पऱ रहगएबस मे औऱ मेरी दिदी। मैंने अपनी दिदी केँ बारे मे तौ बताया हि नहि, मेरी दिदी कां नाम नेहा हैं औऱ उस टाइम उनकी उम्र 23 साल थि। दिदी नें अपनी पढ़ाई पूरीकर ली थि औऱ घऱ पर्र रहकर सिविल सर्विसेस कि तैयारी कररही थि। उनका नाता भि तय हौ चुका थां औऱ दिसम्बर मे उनकी विवाह होनी थि।
रिंकी, औऱ प्रिया नें आते हि दिदी सें दोस्ती करली थि औऱ उनकीखूब जमनेलगी थि, आंटी भि बहोत अच्छी थीं औऱ हमारा बहोत ख्याल रखती थि, यहा तक उन्होंने हमें खानां बनाने केँ लिए भि मनाकर दिया थां औऱ हम् सबका खानां एक् हि स्थान यानि उनकेघऱ पर्र हि बनता थां।
रांची अधिकदूर नहि हैं, इसलिये मां-पिताजी हर शनिवार कों वापस आँ जाते औऱ सोमवार कों सुभह सुभहफिन सें वापस रांची चले जाते। हमारे दिन बहोत मज़े मे कटरहे थें। रिंकी नें हमारे घऱ केँ पास हि औरत कॉलेज मे दाखिला लें लिया थां औऱ प्रिया कां विद्यालय थोड़ादूर थां। मे औऱ रिंकी एक् हि क्लास मे थें औऱ हम् अपने अपने फ़ाइनल इयर कि तैयारी कररहे थें, हमारे सब्जेक्ट्स भि एक् जैसे हि थें।
हमारे क्लास एक् होने कि वजह सें रिंकी केँ संग मेरीबात चीत उसकेसंग होती थि औऱ प्रिया भि मुझसे बातकर लिया करती थि। प्रिया मुझे भैया कहती थि औऱ रिंकी मुझेनाम सें बुलाया करती थि। मे भि उसे उसकेनाम सें हि बुलाता थां।
हमारे घऱ कि बनावट ऐसी थि कि सबसे नीचे वाले हिस्से मे एक् हॉल औऱ दोबड़े बड़े कमरे थें। एक् रूम हमारे मां पिताजी कां थां औऱ एक् रूम मेहमानों केँ लिए। ऊपर यानिबीच वाली मंजिल पर्र भि वैसा हि एक् बड़ा सां हॉल औऱ दो कमरे थें जिनमें सें एक् रूम मेरा औऱ एक् रूम नेहा दिदी कां थां। रिंकी सें घुल-मिल जाने केँ कारण वोँ नेहा दिदी केँ संग उनके कमरे मे हि सोती थि औऱ मे अपने कमरे मे अकेला सोता थां। बाकिलोग यानि सिन्हा अंकल अपनी पत्नि औऱ प्रिया केँ संग सबसेऊपर वाले हिस्से मे रहते थें।
उम्र कि जिस दहलीज़ पर्र मे थां, वहा सेक्स कि भूख लाज़मी होती हैं दोस्तो, मगर मुझेकभी किसी केँ संग चुदाई कां मौका नहि मिला थां। अपने दोस्तों औऱ इन्टरनेट कि मेहरबानी सें मैंने ये तोँ सीख हि लिया थां कि ईश्वर कि बनाई हुइ इस अदभुत क्रिया जिसे हम् शुद्ध भाषा मे सम्भोग औऱ चालू भाषा मे चुदाई कहते हें वोँ केसे किया जाता हैं। इन्टरनेट पऱ सेक्सी कहानियाँ औऱ ब्लू फिल्में देख्ना मेरारोज कां काम थां। मे रोजनई नई कहानियाँ पढ़ता औऱ अपने 7 इंच केँ मोटे तगड़े लन्ड कि तेल सें मालिश करता। मालिश करते करते मैंने मुठ मारना भि सीख लिया थां औऱ मुझे ज़न्नत कां मज़ा मिलता थां। अपनी कल्पनाओं मे मे हमेशा अपनी कॉलेज कि प्रोफ्फेसर केँ बारे मे सोचता रहता थां औऱ अपना लन्ड हिला-हिला करअपन पानी गिरा देता थां। घऱ मे ऐसा माहौल थां कि कभी किसी केँ संगकुछ करने कां मौका हि नहि मिला। बस अपने हाथों हि अपने आप् कों खुश करता रहता थां।
रिंकी याँ प्रिया केँ बारे मे कभीकोई बुरा ख्याल नहि आया थां, याँ यूँ बोलो कि मैंने कभी उनकोठीक सें देखा हि नहि थां। मे तौ बस अपनी हि धुन मे मस्त रहता थां। वैसेकई बार मैंने रिंकी कों अपनीतरफ घूरते हुए पाया थां मगरबात आई गई हौ जाती थि।
जमशेदपुर आयेकुछ समय हौ गय़ा थां औऱ मेरी दोस्ती अपनी कॉलोनी केँ कुछ लड़कों केँ संग हौ गई थि। उनमें सें एक् लड़का थां पप्पू जोँ एक् अच्छे परिवार सें थां औऱ पढ़ने लिखने मे भि अच्छा थां। उससे मेरी दोस्ती थोड़ी अधिक हौ गई औऱ वोँ मेरेघऱ आने जानेलगा। मुझे तौ बाद मे पताचला कि वोँ रिंकी केँ लिए मेरेघऱ आता जाता थां मगर उसनेकभी मुझसे इस बारे मे कोई ज़िक्र नहि किया थां। वोँ तोँ एक् दिन मैंने गलती सें उन दोनों कों साम कों छत पऱ एक् दूसरे कि तरफ इशारे करतेहुए पाया औऱ तब जाकर मुझेदाल मे कुछ कालानज़र आया।
उसी दिनसाम कों जब मे औऱ पप्पू घूमने निकले तौ मैंने उससेपूछ हि लिया- क्याँ बात हैं बेटा, आजकल तुँ छत पर्र कुछ ज़्यादा हि घूमने लगा हैं?
मेरीबात सुनकर पप्पू अचानक चोंक गय़ा औऱ अपनी आँखें नीचे करकेइधर उधर देखने लगा। मे जोर सें हंसने लगा औऱ उसकीपीठ पर्र एक् जोर कां धौल मारा- साले, तेरी क्याँ लगा, तूँ चोरी चोरी अपने मस्ती कां इन्तजाम करेगा औऱ मुझेपता भि नहि चलेगा?
“अरे दोस्त, ऐसीकोई बात नहि हैं। ” पप्पू मुस्कुराते हुए बोला।
“अबे चूतिये, इसमें डरने कि क्याँ बात हैं। अगरआग दोनों तरफलगी हैं तौ हर्ज क्याँ हैं?” मैंने उसके कंधे पर्र हाथ रखतेहुए कहा।
पप्पू कि जान मे जान आँ गई औऱ वोँ मुझसे लिपट गय़ा, पप्पू कि हालतऐसी थि जैसे मानोउसे कोई खज़ाना मिल गय़ा होँ- दोस्त सोनू, मे स्वयं हि तुम्हे सभीकुछ बताने वाला थां मगर हिम्मत नहि होँ रही थि। मुझेऐसा लगरहा थां कि पता नहि तूँ क्याँ समझेगा।
“बात कहां तक पहुँची?”
“कुछ नहि दोस्त, बस अभि तक इशारों इशारों मे हि बातें हौ रही हें। आगे केसे बढ़ूँसमझ मे नहि आँ रहा हैं। ”
“हम्म्म्म …, अगर तुँ चाहे तोँ मे तेरी सहायता कर सकता हूं। ” मैंने एक् मुस्कान केँ संगकहा।
“सोनू मेरे दोस्त, अगर तूनेऐसा कर दिया तौ मे तेरा एहसान जीवनभर नहि भूलूँगा। ” पप्पू मुझसे लिपटकर कहनेलगा- दोस्त कुछकर न् !
“अबेगधे, दोस्ती मे एहसान नहि होता। रुक, मुझेकुछ सोचने दे शायदकोई सूरत निकल निकलआये। ” इतनाकह कर मे थोड़ी गंभीर मुद्रा मे कुछ सोचने लगा औऱ फिन अचानक मैंने उसकीतरफ देखकर मुस्कान दि।
पप्पू नें मेरी आँखों मे देखा औऱ उसकी स्वयं कि आँखों मे एक् अजीब सि चमक आँ गई।
मैंने पप्पू कि तरफ देखा औऱ मुस्कुराते हुए पूछा- बेटा, मेरे दिमाग़ मे एक् प्लान तौ हैं मगर थोड़ा खतरा हैं, अगर तूँ चाहे तौ मेरे कमरे मे तुम् दोनों कों मौकामिल सकता हैं औऱ तुम् अपनीबात आगेबढ़ा सकते होँ।
“पर्र दोस्त तेरेघऱ पऱ सबके सामने केसे मिलेंगे हम्?” पप्पू थोड़ा घबराते हुए बोला।
“तूँ उसकी चिंता मतकर, मे सभी सम्हाल लूंगा ! तुँ बसकल दोपहर कों मेरेघऱ आँ जानां। ”
“ठीक हैं, मगर ख्याल रखना कि तूँ किसी मुसीबत मे नं पड़ जाये। ” पप्पू नें चिंतित होकरकहा।
इतनी सारी बातें करने केँ बाद हम् अपने अपनेघऱ लौटआये। घऱआकर मे अपने कमरे मे गय़ा औऱ पलंग पऱ लेट गय़ा।
थोड़ीदेर मे प्रिया आई औऱ मुझे उठाया- सोनू भैया, चलो मम्मी बुलारही हैं खाने केँ लिए !
मैंने अपनी आँखें खोली औऱ सामने प्रिया कों अपनेघऱ केँ छोटे छोटे कपड़ों मे देखकर अचानक सें हड़बड़ा गय़ा औऱ फिन सें बैड पऱ गिरपड़ा।
“सम्भल कर भैया, आप् तौ ऐसेकर रहे हौ जैसेकोई भूतदेख लिया होँ। जल्दचलो, सभीलोग आपका इंतज़ार कररहे हें खाने पर्र !” इतना बोलकर प्रिया दौड़कर वापिस चली गई।
यूँ तोँ प्रिया कों मे रोज हि देखता थां मगरआज अचानक मेरीनज़र उसके छोटे छोटे अनारों पऱ पड़ी औऱ झीने सें टॉप केँ अंदर सें मुस्कुराते हुए उसके अनारों कों देखकर मे बेकाबू होँ गय़ा औऱ मेरे रामलाल नें सलामी दे दि, यानि मेरा लन्ड एकदम सें खड़ा होँ गय़ा। मुझे अजीब सां लगा, मगर फिनये सोचने लगा कि शायद रिंकी औऱ पप्पू केँ बारे मे सोचकर मेरी हालतऐसी होँ रही थि कि मे प्रिया कों देखकर भि उत्तेजित होँ रहा थां।
खैर, मैंने अपने लन्ड कों अपनेहाथ सें मसला औऱ उसे शांत रहने कों कहा। फिन मैंने हाथ-मुँह धोए औऱ सिन्हा अंकल केँ घऱ पहुँच गय़ा यानिऊपर जहाँसभी लोग खाने कि मेज पर्र मेरा इन्तजार कररहे थें।
सभीलोग बैठे थें औऱ मे भि जाकर प्रिया कि बगल वाली कुर्सी पर्र बैठ गय़ा, मेरेठीक सामने वाली कुर्सी पर्र रिंकी बैठी थि। आज पहलीबार मैंने उसेगौर सें देखा औऱ उसके जिस्म कां मुआयना करनेलगा। उसनेलाल रंग कां एक् पतला सां टॉप पहना थां औऱ अपने बालों कां जूड़ाबना रखा थां। सच कहूँ तोँ उसकीतरफ देखता हि रहा मे। उसके सुन्दर सें चेहरे सें मेरीनज़र हि नहि हटरही थि। उसकीतनी हुइ चूचियों कि तरफजब मेरीनज़र गई तौ मेरेगले सें खानां नीचे हि नहि उतररहा थां।
इन सबकेबीच मुझेऐसा एहसास हुआ जैसेदो आँखें मुझे बहोत गौर सें देखरही हें औऱ ये जानने कि कोशिश कररही हें कि मे क्याँ औऱ किसेदेख रहा हूं।
मैंने अपनी गर्दन थोड़ी मोड़ी तौ देखा कि रिंकी कि मां यानी सिन्हा आंटी मुझेदेख रहीथीं।
मैंने अपनी गर्दन नीचे कि औऱ चुपचाप खाकर नीचेचला आया।
मैंने अपने कपड़े बदले औऱ एक् छोटा सां पैंटपहन लिया जिसके नीचेकुछ भि नहि थां। मे अपना दरवाज़ा बंद हि कररहा थां कि फिन सें प्रिया अपने हाथों मे एक् बर्तन लेकरआई- सोनू भैया, येलो मां नें आपकेलिए मिठाई भेजी हैं।
मे सोच मे पड़ गय़ा कि आज अचानक आंटी नें मुझे मिठाई क्यूं भेजी। खैर मैंने प्रिया केँ हाथों सें मिठाई लें ली औऱ अपने कंप्यूटर टेबल पऱ बैठ गय़ा। मेरेमन मे अभि तक उथल पुथलचल रही थि। कभी प्रिया कि छोटी छोटी चूचियाँ तोँ कभी रिंकी कि बड़ी औऱ गोलगोल चूचियाँ मेरी आँखों केँ सामने घूमरही थि। मैंने कंप्यूटर चालू किया औऱ इन्टरनेट पऱ एक् पोर्न साईट खोलकर देखने लगा।
अचानक मेरे कमरे कां दरवाज़ा खुला औऱ कोई मेरे पीछे आकारखड़ा हौ गय़ा। मेरी तोँ जान हि सूख गई, यह सिन्हा आंटीथीं। मैंने झट सें अपना मॉनीटर बंदकर दिया। आंटी नें मेरीतरफ देखा औऱ अपने चेहरे पर्र ऐसेभाव लेँ आई जैसे उन्होंने मेरा बहोत बड़ा अपराध पकड़ लिया हौ। मेरी तोँ गर्दन हि नीचे हौ गई औऱ मे पसीने सें नहा गय़ा।
आंटी नें कुछकहा नहि औऱ मिठाई कि खाली प्लेट लेकरचली गईं।
मेरी तोँ गांड हि फट गई, मे चुपचाप उठा औऱ अपनेखाट पऱ जाकरसो गय़ा। सुभहजब मुझे नाश्ते केँ लिए बुलाया गय़ा तौ मैंने कह दिया कि मेरामन नहि हैं। मे ऐसे हि बैड पऱ पड़ा थां।
थोड़ीदेर मे मुझेऐसा लगा कि कोई मेरे कमरे मे आया हैं, मैंने उठकर देखा तोँ सिन्हा आंटी अपने हाथों मे खाने कां बर्तन लेकरआई थीं। उन्हें देखकर मेरीफिन सें फट गई औऱ मे सोचने लगा कि आज तौ पक्का डांट पड़ेगी।
मे चुपचाप अपनेबैड पऱ कोहनियों केँ सहारे बैठ गय़ा। आंटीआईं औऱ मेरेसर पऱ अपनाहाथ रखकर बुखार चेक करनेलगी- बुखार तोँ नहि हैं, फिन तुम् खा क्यूं नहि रहे होँ। चलो जल्द सें फ्रेश हौ जाओ औऱ ब्रेकफास्ट करलो।
आंटी कां व्यवहार बिल्कुल सामान्य थां, मगर मेरेमन मे तौ उथल पुथल थि। मैंने अचानक सें आंटी कां हाथ पकड़ा औऱ उनकीतरफ विनती भरी नजरों सें देखकर कहा, ”आंटी, मे कलरात केँ लिए बहोत शर्मिंदा हूं। आप् क्रोध तौ नहि हौ न्। मे वादा करता हूं कि दुबारा ऐसा नहि होगा। ” मैंने अपने सूरतऐसी बनाली जैसे अभि रो पड़ूँगा।
तेरी याद साथ है - bhabhi ki chudai – New Episode
आंटी नें मेरेहाथ कों अपने हाथों सें पकड़ा औऱ मेरी आँखों मे देखा। उनकी आँखें कुछ अजीबलग रहीथीं मगरउस वक़्त मेरा दिमाग़ कुछ भि सोचने समझने कि हालत मे नहि थां। आंटी नें मेरे माथे पऱ एक् बार चूमा औऱ कहा, “ मे तुमसे नाराज़ याँ गुस्से मे नहि हूं मगरअगर तुमने ब्रेकफास्ट नहि किया तौ मे सच मे नाराज़ हौ जाऊँगी। ”
मेरेलिए ये विश्वास सें परे थां, मैंने ऐसी उम्मीद नहि कि थि। मगर जौ भि हुआ उससे मेरे अंदर कां डर जातारहा औऱ मेरे चेहरे पर्र एक् मुस्कान आँ गई। पता नहि मुझे क्याँ हुआ औऱ मैंने आंटी केँ गाल पऱ एक् चुम्मी दे दि औऱ भागकर बाथरूम मे चला गय़ा। मे फ्रेश होकर बाहर् आया, तब तक आंटीजा चुकीथीं। मैंने फटाफट अपना ब्रेकफास्ट ख़त्म किया औऱ बिल्कुल तरोताज़ा हौ गय़ा।
अचानक मुझे पप्पू औऱ रिंकी कि मुलाकात कि बातयाद आँ गई, मैंने पप्पू कों कह तौ दिया थां कि मे इन्तजाम कर लूँगा मगरअब मुझेसच मे कोई उपायनज़र नहि आँ रहा थां।
तभी मेरे दिमाग़ मे बिजली कौंधी औऱ मुझे एक् ख्याल आया। मैंने फिन सें अपने आप् कों अपने पलंग पर्र गिरा लिया औऱ अपने इन्सटिट्यूट मे भि मोबाइल करकेकह दिया कि मे आज नहि आँ सकता।
मे वापसबैड पर्र इसतरह गिर गय़ा जैसे मुझे बहोत तकलीफ होँ रही होँ।
थोड़ी हि देर मे मेरी बेहन मेरे कमरे मे आई मेराहाल चाल जानने केँ लिए। उसने मुझे पलंग पर्र देखा तोँ घबरा गई औऱ पूछने लगी कि मुझे क्याँ हुआ।
मैंने बहाने बना दिया कि मेरेसर मे बहोत दर्द हैं इसलिये मे आराम करना चाहता हूं।
दिदी मेरी हालत देखकर थोड़ा परेशान हौ गई। असल मे आज मुझे दिदी कों शॉपिंग केँ लिए लेकर जानां थां मगरअब शायद उनकाये प्रोग्राम खराब होने वाला थां। दिदी मेरे कमरे सें निकलकर सीधे आंटी केँ पास गई औऱ उनको मेरे बारे मे बताया। आंटी औऱ सारेलोग मेरे कमरे मे आँ गए औऱ ऐसे करनेलगे जैसे मुझेकोई बहोत बड़ी तकलीफ होँ रही होँ।
उन लोगों कां प्रेम देखकर मुझे अपनेझूठ बोलने पऱ बुरा भि लगरहा थां मगरकुछ किया नहि जा सकता थां। दिदी कों दुःखी देखकर आंटी नें उसे हौंसला दिया औऱ कहा कि सभीठीक होँ जायेगा, तुम् चिंता मतकरो।
दिदी नें उन्हें बताया कि आज उनको मेरेसंग शोपिंग केँ लिए जानां थां मगरअब वोँ नहि जा सकेगी। मैंने मन हि मन ईश्वर सें प्रार्थना कि औऱ मांगने लगा कि आंटी दिदी केँ संग शोपिंग केँ लिएचली जाये।
ईश्वर नें मेरीसुन ली। आंटी नें दिदी कों कहा कि उन्हें भि कुछ खरीदारी करनी हैं तोँ वोँ संग मे चलेंगी।
अब दिदी औऱ मेरे दोनों केँ चेहरे पर्र मुस्कान खिल गई। दिदी क्यूं खुश थि यह तौ आप् समझ हि सकते हें मगर मे सबसे अधिकखुश थां क्यूंकि दिदी औऱ आंटी केँ जाने सें घऱ मे मात्र मे औऱ रिंकी हि बचते। प्रिया तोँ विद्यालय जा चुकी थि।
लगभग एक् घंटे केँ बाद दिदी औऱ आंटी शोपिंग केँ लिए निकलगईं। जाते जाते आंटी नें रिंकी कों मेरा ख्याल रखने केँ लिएकह दिया। रिंकी नें भि कहा कि वोँ नहाकर नीचे हि आँ जायेगी औऱ अगर मुझेकुछ जरुरत हुईँ तोँ वोँ ख्याल रखेगी।
मे खुश हौ गय़ा औऱ पप्पू कों मोबाइल करके सारीबात बता दि। दिदी औऱ आंटी कों गएहुए आधा घंटाहुआ थां कि पप्पू मेरेघऱ आँ गय़ा औऱ हम् दोनों नें एक् दूसरे कों देखकर आँख मारी।
“सोनू मेरे भइया, तेराये एहसान मे जीवनभर नहि भूलूँगा। अगरकभी मौका मिला तौ मे तेरेलिए अपनेजान भि दे दूँगा। ” पप्पू बहोत भावुक हौ गय़ा।
“अबे दोस्त, मैंने पहले भि कहा थां न् कि दोस्ती मे एहसान नहि होता। औऱ रहीबात आगे कि तोँ ऐसेकई मौके आयेंगे जब तुम्हें मेरी हेल्प करनी पड़ेगी। ” मैंने मुस्कुरा करकहा।
“तूँ जौ कहे मेरे भइया !” पप्पू नें उछलकर कहा।
हम् बैठकर इधरउधर कि बातें करनेलगे, तभी हम् दोनों कों किसी केँ सीढ़ियों सें उतरने कि आवाज़ सुनाई दि। हम् समझगए कि ये रिंकी हि हैं। मे जल्द सें वापस पलंग पऱ लेट गय़ा औऱ पप्पू मेरेबैड केँ पास कुर्सी लेकरबैठ गय़ा।
रिंकी अचानक कमरे मे घुसी औऱ वहा पप्पू कों देखकर चौंक गई। वोँ अभि अभि नहाकर आई थि औऱ उसकेबाल भीगेहुए थें। रिंकी केँ बाल बहोत लंबे थें औऱ लंबे बालों वाली लड़कियाँ औऱ औरतें मुझे हमेशा सें आकर्षित करती हें। उसने एक् झीना सां टॉपपहन रखा थां जिसके अंदर सें उसकी काली ब्रानज़र आँ रही थि जिनमें उसने अपनेगोल औऱ उन्नत उभारों कों छुपारखा थां।
मेरीनज़र तौ वहींटिक सि गई थि मगरफिन मुझे पप्पू केँ होने कां एहसास हुआ औऱ मैंने अपनी नज़रें उसके उभारों सें हटा दि।
रिंकी थोड़ा सामान्य होकर मेरेपास पहुँची औऱ मेरे माथे पर्र अपनाहाथ रखा औऱ मेरी तबीयत देखने लगी। उसके नर्म औऱ रसीले हाथजब मेरे माथे पऱ आये तोँ मे सच मे गरम हौ गय़ा औऱ उसके जिस्म सें आँ रही खुशबू नें मुझे मदहोश कर दिया थां।
अगर थोड़ादेर औऱ उसकाहाथ मेरेसर पऱ होता तौ सच मे मे कुछकर बैठता। मे उसकीतरफ देखकर मुस्कुरा दिया औऱ उसे बैठने कों कहा।
रिंकी नें एक् कुर्सी खींची औऱ मेरे सिरहाने बैठ गई। पप्पू ठीक मेरे सामने थां औऱ रिंकी मेरे पीछे इसलिये मे उसेदेख नहि पारहा थां। मैंने ध्यान सें पप्पू कि आँखों मे देखा औऱ ये पाया कि उसकी आँखें चमकरही थीं औऱ वोँ अंकों हि आँखों मे इशारे कररहा थां, शायद रिंकी भि उसकीतरफ इशारे कररही थि। पप्पू बीचबीच मे मुझेदेख कर मुस्कुरा भि रहा थां औऱ तभी मैंने उसकी आँखों मे एक् आग्रह देखा जैसे वोँ मुझसे येकहरहा होँ कि हमें अकेला छोड़दो।
उसकीतड़प मे समझ सकता थां, मैंने अपनेखाट सें उठने कि कोशिश कि तौ पप्पू भागकर मेरेपास आया औऱ मुझे सहारा देनेलगा। हम् दोनों हि बढ़िया एक्टिंग कररहे थें।
मैंने धीरे-धीरे सें अपने पाँवबैड सें नीचे किये औऱ उठकर बाथरूम कि तरफचल पड़ा, “तुम् लोगबैठ कर बातें करो, मे अभि आता हूं। ” इतनाकह कर मे अपने बाथरूम केँ दरवाज़े पऱ पहुंचा औऱ धीरे-धीरे सें पलटकर पप्पू कों आँख मारी।
पप्पू नें एक् कातिल मुस्कान केँ संग मुझे वापसआँख मारी। मे बाथरूम मे घुस गय़ा औऱ उन दोनों कों मौकादे दिया अकेले रहने कां।
मैंने बाथरूम कां दरवाज़ा बंद किया औऱ कमोड पर्र बैठ गय़ा। पाँच मिनट हि हुए थें कि मुझे रिंकी कि कराह सुनाई दि। मेरामन झन्ना उठा। मे जल्द सें बाथरूम केँ दरवाज़े पर्र पहुंचा औऱ दरवाजे केँ छेद सें कमरे मे देखने कि कोशिश करनेलगा।
“हे ईश्वर !!” मेरे मुँह सें निकलपड़ा। मैंने जबठीक सें अपनी आँखें कमरे मे दौड़ाई तौ मेरेहोश उड़गए। पप्पू नें रिंकी कों अपनी बाहों मे भररखा थां औऱ दोनों एक् दूसरे कों चूमरहे थें जैसे बरसों केँ बिछड़े हुए प्रेमी मिलेहों।
मेरी आँखेफटी रहगईं। मैंने चुपचाप अपना कार्यक्रम जारीरखा औऱ उन दोनो नें अपना।
पप्पू नें रिंकी कों अपने आगोश मे बिल्कुल जकड़ लिया थां। उन दोनों केँ बीच सें हवा केँ गुजरने कि भि स्थान नहि बची थि। रिंकी कि पीठ मेरीतरफ थि औऱ पप्पू उसके सामने कि तरफ। दोनों एक् दूसरे केँ शरीर कों अपने अपने हाथों सें सहलारहे थें।
तभी दोनों धीरे-धीरे धीरे-धीरे बैड कि तरफबढ़े औऱ एक् दूसरे कि बाहों मे हि पलंग पऱ लेटगए। दोनों एक् दूसरे केँ संग चिपके हुए थें।
उनकेखाट पऱ जाने सें मुझे देखने मे आसानी होँ गई थि क्यूंकि पलंगठीक मेरे बाथरूम केँ सामने थां।
पप्पू नें धीरे-धीरे धीरे-धीरे रिंकी केँ सर पऱ हाथ फेरा औऱ उसके लंबे लंबे बालों कों उसके गर्दन सें हटाया औऱ उसके गर्दन केँ पिछले हिस्से पर्र चूमने लगा। रिंकी कि हालत खराब होँ रही थि, इसकापता उसके पैरों कों देखकर लगा, उसके पांव उत्तेजना मे इधरउधर होँ रहे थें। रिंकी अपने हाथों सें पप्पू केँ बालों मे उँगलियाँ फिरने लगी। पप्पू धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकेगले पर्र चूमते हुए गर्दन केँ नीचे बढ़नेलगा। मज़े वोँ दोनों लें रहे थें औऱ यहा मेराहाल बुरा थां। उन दोनों कि रासलीला देखदेख कर मेराहाथ न् जानेकब मेरे पैंट केँ ऊपर सें मेरे लण्ड पऱ चला गय़ा पता हि नहि चला। मेरे लन्ड नें सलामी दे दि थि औऱ इतनाअकड़ गय़ा थां मानो अभि बाहर् आँ जायेगा।
मैंने उसे सहलाना शुरुआत कर दिया।
उधर पप्पू औऱ रिंकी अपनेकाम मे लगेहुए थें। पप्पू कां हाथअब नीचे कि तरफ बढ़नेलगा थां औऱ रिंकी केँ झीने सें टॉप केँ ऊपर उसकेगोल बड़ीबड़ी चूचियों तक पहुँच गय़ा। जैसे हि पप्पू नें अपनी हथेली उसकी चूचियों पर्र रखा, रिंकी मे मुँह सें एक् जोर कि सिसकी निकली औऱ उसनेझट सें पप्पू कां हाथपकड़ लिया।
दोनों नें एक् दूसरे कि आँखों मे देखा औऱ फ़ुसफ़ुसा करकुछ बातें कि। दोनों अचानक उठगए औऱ अपनी अपनी कुर्सी पर्र बैठगए।
मुझेकुछ समझ मे नहि आया। मे सोचने पऱ मजबूर होँ गय़ा कि अचानक उन दोनों नें सभीरोक क्यूं दिया। कितनी अच्छी फिल्म चलरही थि औऱ मेरामाल भि निकलने वाला थां।
“खड़े लण्ड पऱ धोखा !” मेरे मुँह सें निकलपड़ा।
मे थोड़ीदेर मे बाथरूम सें निकलपड़ा औऱ पप्पू कि तरफ देखकर आँखों हि आँखों मे पूछा कि क्याँ हुआ।
उसने मायूस होकर मेरीतरफ देखा औऱ ये बोलने कि कोशिश कि कि शायद मेरी मौजूदगी मे आगेकुछ नहि होँ सकता।
मे समझ गय़ा औऱ स्वयं हि मायूस होँ गय़ा।
मे वापस अपनेबैड पऱ आँ गय़ा औऱ इधरउधर कि बातें होनेलगी। तभी मैंने रिंकी कि तरफ देखा औऱ कहा, “रिंकी, अगर तुम्हें तकलीफ नं होँ तौ क्याँ हमेंगरम चायमिल सकती हैं?”
“क्यूं नहि, इसमें तकलीफ कि क्याँ बात हैं। आप् लोग बैठो, मे अभि गरमचाय बनाकर लती हूं। ”
इतना कहकर रिंकी ऊपरचली गई औऱ गरमचाय बनाने लगी।
जैसे हि रिंकी गई, मैंने उठकर पप्पू कों गले सें लगाया औऱ उसे बधाई देनेलगा। पप्पू नें भि मुझेगले सें लगाकर मुझे शुक्रिया दिया औऱ फिन सें मायूस सां चेहरा बना लिया।
“क्याँ हुआ साले, ऐसा मुँह क्यूं बना लिया?”
“कुछ नहि दोस्त, बसखड़े लण्ड पर्र धोखा। ” उसनेकहा औऱ हमने एक् दूसरी कि आँखों मे देखा औऱ हम् दोनों केँ मुँह सें हंसीछूट गई।
“अरे नासमझ, तुँ बिल्कुल बुद्धू हि रहेगा। मैंने तेरीतड़प देखली थि इसीलिए तौ रिंकी कों ऊपरभेज दिया। आज घऱ मे कोई नहि हैं, तूँ जल्द सें ऊपरजा औऱ मज़े लें लें। ” मैंने आँख मारते हुएकहा।
मेरीबात सुनकर पप्पू कि आँखें चमकने लगी औऱ उसने मुझे एक् बार औऱ गले सें लगा लिया।
मैंने उसे हिम्मत दि औऱ उसेऊपर भेज दिया। पप्पू दौड़कर रिंकी कि किचन मे पहुँच गय़ा।
मेरी उत्तेजना पप्पू सें कहीं अधिकबढ़ गई थि ये देखने केँ लिए कि दोनों क्याँ क्याँ करेंगे।
पप्पू केँ जाते हि मे भि उनकीतरफ दौड़ा औऱ जाकरऊपर केँ हॉल मे छिप गय़ा। हमारे घऱ कि बनावट ऐसी थि कि हॉल केँ ठीकसंग किचनबनी हुई थि। मे हॉल मे रखे सोफे केँ पीछेछुप करबैठ गय़ा। रिंकी उस वक़्त किचन मे गरमचाय बनारही थि औऱ पप्पू धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसके पीछे पहुँच गय़ा। उसने पीछे सें जाकर रिंकी कों अपनी बाहों मे भर लिया।
रिंकी इसकेलिए सजधजकर नहि थि औऱ वोँ चौंक गई, उसने जल्दी मुड़कर पीछे देखा औऱ पप्पू कों देखकर हैरान रह गई, “ ये क्याँ कररहे होँ, जाओयहा सें वरना सोनू कों हम् पर्र शक होँ जायेगा। ”
ये कहतेहुए रिंकी नें अपने आपको छुड़ाने कि कोशिश कि।
पप्पू नें उसकीबात कों अनसुना करतेहुए उसे औऱ जोर सें अपनी बाहों मे भर लिया औऱ उसके गर्दन पऱ चूमने लगा। रिंकी बारबार उसेमना करतीरही औऱ कहतीरही कि सोनू आँ जायेगा, सोनू आँ जायेगा।
पप्पू नें धीरे-धीरे सें अपनी गर्दन उठाई औऱ उसको बोला, ” टेंशन मतलो मेरीजान, सोनू नें हि तोँ सभी प्लान किया हैं। उसे हमारे बारे मे सभीपता हैं औऱ उसने हम् दोनों कों मिलाने केँ लिएये सभीकुछ किया हैं। ”
“क्याँ !?! सोनूसभी जानता हैं। हे ईश्वर !!!” इतना कहकर उसके आँखें झुकगईं औऱ मैंने देखा कि उसके होठों पर्र एक् अजीब सि मुस्कान आँ गई थि।
“जान, इन सभी बातों मे अपनासमय मत बर्बाद करो, मे तुम्हारे लिए पागल हौ चुका हूं। मुझसे अब बर्दाश्त नहि होता। ”ये बोलते बोलते पप्पू नें रिंकी कों अपनीतरफ घुमाया औऱ उसका चेहरा अपने हाथों मे लेकर उसके जूसी होठों कों अपने होठों मे भर लिया। रिंकी नें भि निश्चिंत होकर उसके होठों कां रसपान करना शुरुआत कर दिया। रिंकी केँ हाथ पप्पू केँ पीठ पर्र घूमरहे थें औऱ वोँ पूरेजोश मे उसे अपने जिस्म सें चिपकाये जारही थि।
पप्पू केँ हाथअब धीरे-धीरे धीरे-धीरे रिंकी कि चूचियों पऱ आँ गए औऱ उसने एक् हल्का सां दबाव डाला। पप्पू कि इस हरकत सें रिंकी नें अचानक अपने होठों कों छुडाया औऱ एक् मस्त सि हल्की चीखभरी। शायद पहलीबार किसी नें उसकी चूचियों कों छुआ थां, उसके माथे पर्र पसीने कि बूँदें झलकआई।
पप्पू उसके शरीर सें थोड़ाअलग हुआ ताकि वोँ आहिस्ता उसकी चूचियों कां मज़ा लेँ सके। रिंकी नें अपने दोनों हाथऊपर करलिए औऱ पप्पू केँ बालों मे अपने उँगलियाँ फिरने लगी। पप्पू नें अपने दोनों हाथों सें उसकी दोनों चूचियों कों पकड़ लिया औऱ उन्हें प्रेम सें सहलाने लगा। रिंकी केँ मुँह सें लगातार सिसकारियाँ निकलरही थीं।
पप्पू नें धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकेगले कों चूमते हुए उसकी चूचियों कि तरफ अपने होंठ बढ़ाये औऱ रिंकी केँ टॉप केँ ऊपर सें उसकी चूचियों पऱ चूमा। जैसे हि पप्पू नें अपने होंठरखे, रिंकी नें उसके बालों कों जोर सें पकड़कर खींचा। रिंकी कां टॉपगोल गले कां थां जिसकी वजह सें वोँ उसकी चूचियों कि घाटी कों देख नहि पारहा थां। उसने अपनाहाथ नीचे बढ़ाकर टॉप कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे ऊपर करना शुरुआत किया औऱ संग हि संगउसे चूम भि रहा थां। रिंकी अपनीधुन मे मस्त थि औऱ इससमय कां पूरा पूरामज़ा लें रही थि।
पप्पू नें अब उसकाटॉप उसकी चूचियों केँ ऊपरकर दिया। रिंकी कों शायद इसका एहसास नहि थां, उसेपता हि नहि थां कि क्याँ हौ रहा हैं, वोँ तोँ मानो जन्नत मे सैरकर रही थि।
“हम्मम्मम….उम्म्म्म्म्म….ओह पप्पू मत करो….मे पागल हौ जाऊँगी…”
पप्पू नें उसकीतरफ देखा औऱ आँख मारी औऱ अपनेहाथ उसकीपीठ कि तरफ बढ़ाकर रिंकी कि काली ब्रा केँ हुकखोल दिए। रिंकी कों इसबात कां कोईपता नहि थां कि पप्पू नें उसके उभारों कों नंगा करने कां पूरा इन्तजाम कर लिया हैं। पप्पू नें अपने हाथों कों सामने कि तरफ किया औऱ ब्रा केँ कप्स कों ऊपरकर दिया जिससे रिंकी कि गोल मदहोश कर देने वालीबड़ी बड़ी बिल्कुल गोरी गोरी चूचियाँ बाहर् आँ गईं।
“हे ईश्वर !” मेरे मुँह सें धीरे-धीरे सें निकलपड़ा।
सच कहता हूं दोस्तो, इन्टरनेट पर्र तौ बहोत सारी ब्लू फिल्में देखीथीं औऱ कई रंडियों औऱ आम लड़कियों कि चूचियों कां दीदार किया थां मगर जौ चीज़ अभि मेरे सामने थि उसकीबात हि कुछ औऱ थि। हलाकि मे थोड़ीदूर खड़ा थां मगर मे साफसाफ उनदो प्यार कलशों कों देख सकता थां।
34 इंच कि बिल्कुल गोरी औऱ गोल चूचियाँ मेरी आँखों केँ सामने थि औऱ उनका आकारऐसा थां मानो किसी नें किसी मशीन सें उन्हें गोलाकार रूपदे दिया हैं। उन दोनों कलशों केँ ऊपरठीक बीच मे बिल्कुल गुलाबी रंग केँ किशमिश केँ जितना बड़ा दाने थें जोँ कि उनकी हुस्न मे चार नहि आठआठ चांदलगा रहे थें।
मेरे लन्ड नें तौ मुझे तड़पा दिया औऱ कहनेलगा कि पप्पू कों हटाकर अभि जल्दी रिंकी कों पटककर चोद डालो।
मैंने अपने लन्ड कों समझाया औऱ आगे कां खेल देखने लगा। रिंकी कि चूचियों कों आजाद करने केँ बाद पप्पू रिंकी सें थोड़ाअलग होकरखड़ा हौ गय़ा ताकि वोँ उसकी चूचियों कां ठीक सें दीदार करसके। अचानक अलग होने सें रिंकी कों होशआया औऱ उसनेजब अपनी हालत देखी तोँ उसके मुँह सें चीख निकल गई, “ हे ईश्वर, ये तुमने क्याँ किया?”
औऱ रिंकी नें अपने हाथों सें अपनी चूचियाँ छिपाली। पप्पू नें अपनेहाथ जोड़लिए औऱ कहा, “जान, मुझेमत तड़पाओ, मे इन्हें जीभर केँ देख्ना चाहता हूं। अपनेहाथ हटालो नां !”
रिंकी नें अपनासर नीचेकर लिया थां औऱ अपने आँखें एक् मस्त सि अदा केँ संगउठा कर पप्पू कों देखा औऱ दौड़कर उसकेगले सें लग गई। पप्पू नें उसेअलग किया औऱ अपने घुटनों केँ बल नीचेबैठ गय़ा। नीचेबैठ कर पप्पू नें रिंकी केँ दोनों हाथपकड़ करऊपर कि तरफ रखने कां इशारा किया।
रिंकी नें शरमाते हुए अपनेहाथ ऊपर अपने गर्दन केँ पीछेरख लिए।
क्याँ बताऊँ यारो, उस वक़्त रिंकी कों देखकर ऐसालग रहा थां मानोकोई अप्सरा उतरआई हौ ज़मीन पर्र।
मेरेहोठ सूखगए थें उसेइस हालत मे देखकर। मैंने अपने होटों पर्र अपनीजीभ फिराई औऱ अपने आँखें फाड़फाड़ करउन दोनों कों देखने लगा।
पप्पू नें नीचे बैठे बैठे अपनेहाथ ऊपर किये औऱ रिंकी कि चूचियों केँ दो किसमिस केँ दानों कों अपनी उँगलियों मे पकड़ लिया। दानों कों छेड़ते हि रिंकी केँ पाँव कांपने लगे औऱ उसकी साँसें तेज होँ गईं। आती–जाती साँसों कि वजह सें उसकी चूचियाँ ऊपर-नीचे हौ रही थि।
पप्पू नें उसके दानों कों जोर सें मसल दिया औऱ लालकर दिया। रिंकी नें अपने होठों कों गोलकर लिया औऱ सिसकारियों कि झड़ीलगा दि।
रिंकी नें नीचे एक् स्कर्ट पहनरखी थि जोँ उसकी नाभि सें बहोत नीचे थि।
पप्पू नें अब अपने हाथो कि हथेली खोलली औऱ उसकी चूचियों कों अपने पूरे हाथों मे भर लिया औऱ दबाने लगा।
रिंकी केँ हाथअब भि ऊपर हि थें औऱ वोँ मज़े लें रही थि। पप्पू नें अपनाकाम जारीरखा थां औऱ धीरे-धीरे सें अपनीनाक कों रिंकी कि नाभि केँ पास लें जाकरउसे गुदगुदी करनेलगा।
अपनेनाक सें उसकी नाभि कों छेदने केँ बाद पप्पू नें अपनीजीभ बहार निकाली औऱ धीरे-धीरे सें नाभि केँ अंदरडाल दिया।
“उम्म्म्म……ओह पप्पू, मार हि डालोगे क्याँ?” रिंकी नें सिसकी भरतेहुए कहा औऱ अपनेहाथ नीचे करके पप्पू केँ बालों कों पकड़ लिया।
पप्पू आहिस्ता उसकी नाभि कों अपनेजीभ सें चाटने लगा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे नाभि केँ नीचे कि तरफ बढ़नेलगा। रिंकी बड़ेमज़े सें इस एहसास कां मज़ा लेँ रही थि औऱ इधर मेरी हालत तौ ऐसी हौ रही थि मानो मे अपनी आँखों केँ सामने कोई ब्लूफीम देखरहा हूं।
मे कब अपने लन्ड कों बाहर् निकाल लिया थां, मुझे स्वयं पता नहि चला। मेरेहाथ मेरे लन्ड कि मालिश कररहे थें।
सच कहूँ तौ मेरादिल कररहा थां कि अभि उनके सामने चला जाऊँ औऱ पप्पू कों हटाकर स्वयं रिंकी केँ बेमिसाल शरीर कां रसलूँ।
पऱ मैंने अपने आप् कों सम्भाला औऱ अपनी आँखें उनकेऊपर जमा दि।
अब मैंने देखा कि पप्पू अपने दाँतों सें रिंकी कि स्कर्ट कों नीचे खींचने कि कोशिश कररहा हैं औऱ थोड़ा सां नीचेकर भि दिया थां। ऐसा करने सें रिंकी कि पैंटी दिखने लगी थि। रिंकी कों पताचल रहा थां याँ शायद नहि क्यूंकि उसके चेहरे पऱ हर लम्हा भावबदल रहे थें औऱ एक् अजीब सि चहक उसकी आँखों मे नज़र आँ रही थि।
अब पप्पू नें उसकी चूचियों कों अपने हाथों सें आजादकर दिया थां औऱ अपने हाथों कों नीचे लाकर स्कर्ट केँ अंदर सें रिंकी कि पिंडलियों कों सहलाना शरूकर दिया। धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसने उसके पैरों कों सहलाते–सहलाते उसकी स्कर्ट कों भि संग हि संगऊपर करनेलगा। रिंकी कि गोरी–गोरी टाँगे अब सामने आँ रहीथीं।
शपथ सें यारो, उसके पैरों कों देखकर ऐसालग रहा थां जैसेकभी भि उनकेऊपर कोईबाल उगे हि नहि होंगे। इतनी चिकनी टाँगे कि ट्यूब लाईट कि रोशनी मे वोँ चमकरही थीं।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे पप्पू नें उसकी स्कर्ट कों जांघों तक उठा दिया औऱ बसये देखते हि मानो पप्पू बावला हौ गय़ा औऱ अपने होठों सें पूरी जांघों कों पागलों कि तरह चूमने औऱ चाटने लगा।
रिंकी कि हालतअब भि खराब थि, वोँ बस अपनी आँखें बंद करके पप्पू केँ बालों कों सहलारही थि औऱ अपने कांपते हुए पैरों कों सम्भालने कि कोशिश कररही थि।
पप्पू नें रिंकी कि स्कर्ट कों थोड़ा औऱ ऊपर किया औऱ अब हमारी आँखों केँ सामने वोँ थां जिसकी कल्पना हर मर्द करता हैं। काली छोटी सि वीशेप कि पैंटी जोँ कि रिंकी कि बुर पर्र बिल्कुल स्लिम थि औऱ ऐसालग रहा थां मानो उसने अपनी पैंटी कों बिल्कुल अपनी त्वचा कि तरहचढ़ा रखा होँ।
पैंटी केँ आगे कां भाग पूरीतरह सें गीला थां औऱ होँ भि क्यूं नां, इतनीदेर सें पप्पू उसे मस्तकर रहा थां।
इतनेसभी केँ बाद तोँ एक् 80 साल कि बुढ़िया कि बुर भि पानी सें भर जाये।
पप्पू नें अब वोँ किया जिसकी कल्पना शायद रिंकी नें कभी नहि कि थि, उसने रिंकी कि रस सें भरी बुर कों पैंटी केँ ऊपर सें चूम लिया।
“हाय रे….मर गई.पप्पू, ये क्याँ कररहे होँ?”….रिंकी केँ मुँह सें बस इतना हि निकल पाया।
पप्पू बिनाकुछ सुने उसकी बुर कों मज़े सें चूमता रहा औऱ इसीबीच उसने अपने होठों सें रिंकी कि पैंटी केँ एलास्टिक कों पकड़कर अपने दाँतों सें खींचना शुरुआत किया। रिंकी बिल्कुल एक् मजबूर लड़की कि तरहखड़े खड़े अपनी पैंटी कों नीचे खिसकते हुए महसूस कररही थि।
पप्पू कि इस हरकत कि कल्पना मैंने भि नहि कि थि। “साला, पूरा उस्ताद हैं। ” मेरे मुँह सें निकला।
जैसे जैसे पैंटी नीचे आँ रही थि, मेरी धड़कन बढ़तीजा रही थि, मुझेऐसा महसूस हौ रहा थां मानो मेरादिल उछलकर बाहर् आँ जायेगा।
मैंने सोचा कि जब अभि येहाल हैं तोँ पता नहि जब पूरी पैंटी उतर जाएगी औऱ उसकी बुर सामने आएगी तौ क्याँ होगा।
तेरी याद साथ है - bhabhi ki chudai – New Episode
पता नहि जब पूरी पैंटी उतर जाएगी औऱ उसकी बुर सामने आएगी तौ क्याँ होगा।
खैर मैंने सोचना बंद किया औऱ फ़िर सें देख्ना शुरुआत किया।
अब तक पप्पू नें अपने दांतों कां कमालकर दिया थां औऱ पैंटी करीब उसकी बुर सें नीचे आँ चुकी थि, काली-काली रेशमी रसीले झांटों सें भरी बुर कों देखकर मेरासर चकराने लगा।
पप्पू भि अपनासर थोड़ाअलग करके रिंकी कि हसीं मुनिया केँ दर्शन करनेलगा।
रिंकी कों जब इसका एहसास हुआ तौ उसने अपने हाथों सें अपनी बुर कों छिपा लिया औऱ एक् हाथ सें अपनी पैंटी कों ऊपर करनेलगी।
पप्पू नें मौका नहि गंवाया औऱ उसकी पैंटी कों खींचकर पूरीतरह उसके पैरों सें अलगकर दिया।
“हे ईश्वर, अगर मैंने अपने आपको सम्भाला नहि होता मेरे मुँह सें जोर कि आवाज़ निकल जाती। मैंने बहोत मुश्किल सें अपने आपको रोका औऱ अपने लन्ड कों औऱ जोर सें सहलाने लगा।
पप्पू नें जल्द सें अपने होंठ रिंकी कि बुर पऱ रख दिया औऱ एक् ज़ोरदार चुम्बन लिया।
“उम्म्म्म…आआहह्ह्ह, नहि पप्पू, प्लीज़ मुझेछोड़ दो। मे मर जाऊँगी। ” ये कहतेहुए रिंकी नें उसकासर हटाने कि कोशिश कि मगर पप्पू भि खिलाड़ी थां, उसने अपनेसर केँ ऊपर सें रिंकी कां हाथ हटाया औऱ अपनीजीभ बाहर् निकाल कर पूरी बुर कों चाटना शुरुआत कर दिया।
“ओह्ह मांह, ये क्याँ कर दिया तुमने…प्लीज़ ऐसामत करो…मुझे कुछ हौ रहा हैं…प्लीज़ …प्लीज़.। ह्म्म्म्म्…” रिंकी कि सिसकारियाँ औऱ तेज होँ गईं।
पप्पू नें अब अपने हाथो कों रिंकी किए हाथों सें छुड़ाया औऱ अपनीदो उँगलियों सें बुर केँ होठों कों फैलाया औऱ देखने लगा। बिल्कुल गुलाबी औऱ रस सें सराबोर बुर कि छोटी सि गली कों देखकर पप्पू भि अपना आप् खो बैठा औऱ अपनी पूरीजीभ अंदरडाल कर उसकी चुदाई चालूकर दि। ऐसालग रहा थां मानो पप्पू कि जीभकोई लन्ड होँ औऱ वोँ एक् कुंवारी कमसिन बुर कों चोदरही होँ।
“ह्म्म्म्म…ओह मेरेजान, ये क्याँ होँ रहा हैं मुझे…??? ऊउम्म…कुछ करो न् प्लीज़…मे मररही हूं…” रिंकी केँ पाँव अचानक सें तेजी सें कांपने लगे औऱ उसका जिस्म अकड़ने लगा।
मे समझ गय़ा कि अब रिंकी कि बुर कां पानी छूटने वाला हैं।
“आःह्ह्ह…आआह्ह्ह…आःह्ह्ह…ऊम्म्म्म…मे गई…मे गई…आऐईईई…”औऱ रिंकी नें अपना पानीछोड़ दिया औऱ पसीने सें लथपथ होँ गई। उसे देखकर ऐसालग रहा थां मानो उसनेकई कोस कि दौड़ लगाई होँ।
पप्पू अब भि उसकी बुर चाटरहा थां।
इन सबकेबीच मेरी हालतअब बर्दाश्त करने कि नहि रही औऱ इस लाइव ब्लू फिल्म कों देखकर मेरामाल बाहर् निकलपड़ा।
“आःह्ह्ह्ह्ह…उम्म्म…एक् जोर कि सिसकी मेरे मुँह सें बाहर् निकली औऱ मेरे लन्ड नें ढेर सारा पानी निकल दिया।
मेरी आवाज़ नें उन दोनों कों चौंका दिया औऱ दोनों बिल्कुल रुक सें गए। रिंकी नें जल्दी अपना शर्ट नीचे करके अपनी चूचियों कों ढका औऱ अपनी स्कर्ट नीचेकर ली। पप्पू इधरउधर देखने लगा औऱ ये जानने कि कोशिश करनेलगा कि वोँ आवाज़ कहां सें आई।
मुझे अपनेऊपर क्रोध आयामगर मे मजबूर थां, आप् हि बताइए दोस्तो, अगर आपके सामने इतनी हसीन लड़की अपनी चूचियों कों बाहर् निकाल कर अपनी स्कर्ट उठाये औऱ अपनी बुर चटवाए तोँ आप् केसे बर्दास्त करेंगे। मैंने भि जानबूझ करकुछ नहि किया थां, सभी अपने आप् हौ गय़ा।
रिंकी दौड़कर बाथरूम मे चली गई औऱ पप्पू तड़पता हुआ उसके पीछे दौड़ा।
रिंकी बाथरूम मे घुसकर अपनी साँसों पऱ काबू पाने कि कोशिश कररही थि। पप्पू पीछे सें वो पहुंचा औऱ एक् बारफिन सें रिंकी कों अपनी बाहों मे भर लिया। रिंकी अब भि उस खुमार सें बाहर् नहि आई थि वोँ भि पप्पू सें लिपट गई। मे अब तक थोड़ा सामान्य होँ चुका थां मगरआगे कां दृश्य देखने कि उत्तेजना मे मेरा लन्ड सोने कां नाम हि नहि लें रहा थां।
मे थोड़ीदेर रुका औऱ फिनदबे पाँव बाथरूम कि तरफबढ़ा। बाथरूम केँ दरवाज़े पर्र पहुँचते हि मेरे कानों मे पप्पू औऱ रिंकी कि आवाजें सुनाई दि।
“नहि पप्पू, प्लीज़ अब तुम् चलेजाओ। शायद सोनू हमेंछुप करदेख रहा थां। मुझे बहोत लज्जा आँ रही हैं। हायरे राम, वोँ क्याँ सोचरहा होगा मेरे बारे मे ! ऊईईई… छोड़ो नाँ… !!”
‘अरे मेरीजान, मैंने तौ पहले हि तुम्हे बताया थां कि हमारे मिलन कां इन्तेजाम सोनू नें हि किया हैं, मगर वोँ नीचे अपने कमरे मे हैं…। अब तुम् मुझे औऱ मत तड़पाओ वरना मे सच मे मर जाऊंगा.” पप्पू कि विनती भरी आवाज़ मेरे कानो मे साफ़-साफ़ सुनाई देरही थि.
“ओह्ह्ह्ह…पप्पू, अब तुम्हे जानां चाहिए…उम्म्मम…बस करो…आऐईई !!!!” रिंकी कि एक् मदहोश करने वाली सिसकी सुनाई दि औऱ मे अपने आपको दरवाज़े केँ छेद सें देखने सें रोक नहि सका। मेरा एक् हाथ लन्ड पर्र हि थां। मैंने अंदर झाँका तोँ देखा कि पप्पू नें फिन सें रिंकी कि चूचियों कों बाहर् निकाल रखा थां औऱ उन्हें अपने मुँह मे भरकरचूस रहा थां।
इधर रिंकी कां हाथ पप्पू केँ सर कों जोर सें पकड़कर अपनी चूचियों कि तरफ खींचे जारहा थां। पप्पू नें अपना एक् हाथ रिंकी कि चूचियों सें हटाया औऱ अपने पैंट केँ बटन खोलने लगा। उसने अपने पैंट कों ढीलाकर केँ अपने लन्ड कों बाहर् निकाल लिया। बाथरूम कि हल्की रोशनी मे उसकाकाल लन्ड बहोत हि खूंखार लगरहा थां।
पप्पू नें अपने हाथों सें रिंकी कां एक् हाथ पकड़ा औऱ उसे सीधा अपना लन्ड पर्र रख दिया। जैसे हि रिंकी कां हाथ पप्पू केँ लन्ड पऱ पड़ा उसकी आँखें खुलगईं औऱ उसने अपनी गर्दन नीचे करकेये देखने कि कोशिश कि कि आखिर वोँ चीज़ थि क्याँ।
“क्या बात है राम…”बस इतना हि कहपाई वोँ औऱ आँखों कों औऱ फैलाकर लन्ड कों अपने हाथों सें पकड़कर देखने लगी। पप्पू पिछले एक् घंटे सें उसके सुंदर जिस्म कों भोगरहा थां इसवजह सें उसका लन्ड अपनीचरम सीमा पऱ थां औऱ अकड़कर लोहे कि सलाख केँ जैसा होँ गय़ा थां।
पप्पू नें रिंकी कि तरफ देखा औऱ उसकी आँखों मे देखकर उसेकुछ इशारों मे कहा औऱ उसकाहाथ पकड़कर अपना लन्ड पर्र आगे पीछे करनेलगा। रिंकी कों जैसे उसने अपने लन्ड कों सहलाने कां तरीका बताया औऱ वापस अपने हाथों कों उसकी चूचियों पऱ लें जाकर उनसे खेलने लगा।
रिंकी केँ लिएये बिल्कुल नया अनुभव थां, उसने पप्पू केँ लन्ड कों ऐसेपकड़ रखा थां जैसेउसे कोई बिलकुल अजूबा सि चीज़मिल गई हौ औऱ उसकेहाथ अब तेजी सें आगे-पीछे होनेलगे। पप्पू नें अब रिंकी कि चूचियों कों छोड़ दिया औऱ उत्तेजना मे अपने मुँह सें आवाजें निकलने लगा, ”हाँ मेरीजान, ऐसे हि करती रहो…आज मेरा लन्ड खुशी सें पागल हौ गय़ा हैं…औऱ हिलाओ… औऱ हिलाओ… हम्मम…ऊम्म्म्म.”
रिंकी नें अचानक अपने घुटनों कों मोड़ा औऱ नीचेबैठ गई। नीचे बैठने सें पप्पू कां लन्ड अब रिंकी केँ मुँह केँ बिलकुल सामने थां औऱ उसने लण्ड कों हिलाना छोड़कर उसेठीक तरीके सें देखने लगी। शायद रिंकी कां पहला मौका थां किसी जवान लन्ड कों देखने कां।
रिंकी नें अपने दोनों हाथों कां इस्तेमाल करना शुरुआत किया औऱ एक् हाथ सें पप्पू केँ लटकरहे दोनों अण्डों कों पकड़ लिया। अण्डों कों अपने हाथों मे लेकरदबा दबाकर देखने लगी।
इधर रिंकी कां वोँ हाथ पप्पू केँ लन्ड कों जन्नत कां मज़ादे रहा थां, उसने अपनी रफ़्तार औऱ तेजकर दि।
“हाँ रिंकी…मेरी जान…उम्म्मम…ऐसे हि, ऐसे हि…बसअब मे आने वाला हूं…उम्म्म.” पप्पू अपनीचरम सीमा पऱ पहुँच गय़ा थां औऱ किसी भि टाइम अपने लन्ड कि धार छोड़ने वाला थां। पप्पू नें अपने जिस्म कों पूरीतरह सें तान लिया थां।
“ओह्ह्ह्ह…ह्हान्न्न…बस…मे आयाआआ…”
रिंकी अपनेनशे मे थि औऱ मज़े सें उसका लन्ड पूरी रफ़्तार सें हिलारही थि। रिंकी कि साँसें बहोत तेज़थीं औऱ उसकी खुली हुईँ चूचियाँ हाथों कि थिरकन केँ संग-संग हिलरही थीं।
मेराहाल फिन सें वैसा हि हौ चुका थां जैसा थोड़ीदेर पहले बाहर् हुआ थां। मेरा लन्ड भि अपनी चरमसीमा पऱ थां औऱ कभी भि अपनी प्यार रस कि धारछोड़ सकता थां। मे इसबार केँ लिए पहले सें सजधजकर थां औऱ अपने मुँह कों अच्छी तरह सें बंदकर रखा थां ताकिफिन सें मेरी आवाज़ न् निकलजाए।
“आआअह्ह्ह…हाँऽऽऽऽ ऊउम्म्म्म… हाँऽऽऽ…” इतना कहते हि पप्पू नें अपने लन्ड सें एक् गाढ़ा औऱ ढेर सारा लावा सीधा रिंकी केँ मुँह पर्र छोड़ दिया। रिंकी इस अप्रत्याशित समय सें बिल्कुल अनजान थि औऱ जब उसके मुँह केँ ऊपर पप्पू कां माल गिरा, उसने अपनी आँखें बंदकर लींमगर उसने लन्ड कों नहि छोड़ा औऱ उसे हिलाती रही।
करीबतीन बार पप्पू केँ लन्ड नें पानी छोड़ा औऱ रिंकी केँ गुलाबी गालों औऱ उसे मस्त मस्त होठों कों अपने वीर्य सें भर दिया।
जब पप्पू कां लन्ड थोड़ा शांतहुआ तब रिंकी अपनी आँखें ऊपर करके पप्पू कों देखने लगी औऱ झट सें अपनी गर्दन कों नीचे लाकर पप्पू केँ लन्ड पर्र अपने होठों सें एक् चुम्बन दे दिया।
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