दूध का दम - padihai chhod di – New Episode
Update 3
लंच खानेजब मे घऱ पहुंचता हूं तौ घऱ कां हुलिया हि बदल चुका थां पूरेघऱ कों साफ किया गय़ा थां औऱ फूलों सें सजाया गय़ा थां।
मम्मी मस्तनहा धो केँ अपनेपैर कि उंगलियों केँ नाखून मे रंगभर रही थि।
मां अपने नाखून कों रंगने मे इतना मांगन होँ गई थि कि मे घऱ केँ अंदर आँ गय़ा हैं औऱ उन्हें पता भि नहि चला, मे माँ केँ पासआकर खड़ा हौ जाता हूं औऱ उनसे कहता हूं - आजकोई पूजा हैं क्याँ मां।
माँ - तुम को बताया थां नां खेल केँ बारे मे।
मे - उसकेलिए घऱ सजाने कि क्याँ जरूरत।
मां - जरूरत हैं तुँ क्याँ जाने, वोँ सभी छोड़ो पहलेयह बता कबूतर लाया।
मे - कैसा कबूतर तूने तौ मुझेकोई कबूतर लाने कों नहि कहा।
माँ - अपनेसिर पर्र हाथ मारते हुए मे भि नाँ एक् नंबर कि भुलक्कड़ हूं, मे तौ तुझेही बताना भूल हि गई कि आजसाम कि पूजा केँ लिएदो कबूतरों कि जरूरत पड़ेगा, अच्छा हुआ तूँ जल्द आँ गय़ा जाऔजा करदो कबूतर खरीदलाओ।
मे - पूजा कैसा पुजा औऱ अभि मे कहां सें दो कबूतर लाऊं।
माँ - सरिता (कालू कि मम्मी) केँ घऱ सें
मे - ठीक हैं मे खानां खाकरला दूंगा
माँ - नहि अभि जाओ वरना सारे कबूतर ख़त्म होँ जाएंगे उसकेबाद तुम्हें हि बाजार जानां पड़ेगा।
उसकेबाद मे कालू केँ घऱ कि तरफचल देता हूं उसकाघऱ मेरेघऱ सें 2 3 घऱआगे थां, मे उसकेघऱ केँ बाहर् पहुंचकर दरवाजे कों पीटता हूं औऱ संग हि कालू कों आवाज़ भि देता हूं।
कुछदेर बाद सरिता चाची दरवाजा खोलती हैं, इससे पहले मे कुछ बोलता उससे पहले हि सरिता चाची बोल पड़ती हैं - कबूतर लेनेआए हौ।
मे - हांमगर आपको केसेपता।
सरिता - पता, पता केसे नहि होगा सुभह सें सभीलोग वही तौ लें जारहा हैं मेरेघऱ सें।
आसपास केँ सारे देहात मे सबसे ज़्यादा कबूतर सरिता चाची हि पालती हैं।
मे - हांदो लेना हैं।
सरिता - ठीक हैं तुम् अंदर तोँ आओ बाहर् क्यूं खड़े हौ।
मैंने इसबीच नोटिस किया कि आंटी अपने एक् हाथ कों पीछे सें अपने एक् गांड केँ नितंब कों सहलारही थि, मैंने इस पर्र अधिकगौर नहि किया मुझेलगा खुजली वगैरह होगा।
चाची अंदर जाने लगती हैं औऱ मे उनके पीछे-पीछे, घऱ केँ अंदर जाते हि मुझे एक् कमरे सें कालू निकलते हुए दिखता हैं, वोँ मुझे देखते हि कहता हैं - अरे राजूकोई काम थां क्याँ।
मे - क्यूं कोईकाम हौ तभी मे तुम्हारे घऱ आँ सकता हूं क्याँ औऱ वैसे भि मुझे तुमसे नहि हैं चाची सें काम हैं।
कालू - औ तूँ भि कबूतर खरीदने आया हैं, मुझेलगा हि थां इसीलिए मैंने दो कबूतर तेरेलिए अलग सें रख दीया हैं।
चाची कबूतर लाने केँ लिए एक् कमरे मे चली जाती हैं तभी मे कालू सें पूछता हूं - दोस्त ये कबूतर पूजाखेल येसभी क्याँ हैं दोस्त मुझेकुछ समझ मे नहि आँ रहा औऱ नाँ हि मुझे माँ बतारही हैं।
कालू - दोस्त मुझे भि अधिकपता नहि हैं बस इतना(तभी अंदर सें चाची खांसते हुएआती हैं जैसे वो कालू कों मुझेउस बात कों बताने सें रोकरही थि)
जिसके बाद कालू भि अपनेबात कों पलट देता हैं औऱ कहता हैं मुझे भि ज़्यादा नहि पता, मे समझ जाता हूं कि कालूअब कुछ नहि बताएगा इसलिये मे केवल कबूतरों कों लेकर वहां सें निकल जाता हूं।
घऱ पहुंचकर मे दोनों कबूतर माँ कों दे देता हूं औऱ उसकेबाद खानां खानेबैठ जाता हूं कुछदेर बाद मां मुझे खानां देती हैं औऱ मे खानां खाने लगता हूं तभी माँ मुझे कहती हैं- बसअबघऱ सें बाहर् कहींमत जानां नहाधो लोसाम कों पूजा हैं।
मां बहुत गुस्सैल स्वभाव कि हैं इसलिये मैंने अधिक प्रश्न नहि किया औऱ वे जोँ जौ कहतीरही वही करतारहा।
साम हौ चुका थां मां नें मुझे जबरदस्ती एक् शेरवानी औऱ पजामा पहना दिया थां, मगर अभि तक मां तैयार नहि हुइ थि, वे अभि भि अपने कमरे मे स्वयं कों रेडीकर रही थि जैसे उसकी विवाह होँ, 1 घंटेबाद साम सें अंधेरा होँ जाता हैं तब जाकर माँ अपने कमरे सें बाहर् आती हैं।
उन्होंने एक् सेक्सी सि गुलाबी रंग कि साड़ी पहनी थि औऱ एक् कालेरंग कि ब्लाउज उनका ब्लाउज बहुत छोटा थां, औऱ साड़ी तौ जैसे उन्होंने अपने हि विरुद्ध पहनी हौ क्योंकि माँ ऐसी साड़ी कभी नहि पहनती हैं, साड़ी मे सें उनका गहरी नाभिदिख रहा थां जिसे वो हमेशा आमतौर पर्र ढक केँ हि रखती हैं।
मे - माँ ये केसे कपड़े पहने हौ कहीं विवाह मे नहि जारहे हें पंचायत मे जारहे हें।
मां - पंचायत नहि पूजा औऱ सबकोऐसे हि कपड़े पहनकर जाने कों कहा हैं, बिना सिर पर्र पल्लू लिए किसीनई नवेली दुल्हन कि तरह।
मे - मगर सुभह तोँ आपनेकहा थां कि हम् सरदार जी केँ यहां जायेंगे।
मां - तुँ 10 मिनट शांत नहि कर सकताजब हम् वहां जाएंगे तौ तुम्हे सभीपता चल जाएगा अबचल।
उसकेबाद माँ दोनों कबूतर जोँ कि पिजड़े मे थां उसे उठाती हैं औऱ घऱ केँ बाहर् आकरघऱ केँ दरवाजे मे तालालगा देती हैं।
मां - अबयेमत पूछना कि ताला क्यूं लगारही हूं तेरे पिताजी पहले वहांजा चुके हें।
मे भि वहीं पूछने वाला थां मगर मां नें मेरे पूछने सें पहले हि जवाबदे दिया उसकेबाद मे औऱ माँ संग मे पूजा वाली स्थान पऱ जाने लगते हें।
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Gaon kee samuhik chudayi hongi sayad pakke say usme joo apni mummy ko jyada waqt chodega wo jeetega esa hi kuch plot h lag too yahi raha h
दूध का दम - padihai chhod di – New Episode
अरे भइया क्याँ करते हौ! एपसोड थोडी औऱ खींचते, तौ मज़ा आँ जाता।
वैसे एक् सुझाव हैं, जोँ आप् कि किस्सा केँ लिएअहम हैं। आप् ये जोँ बारबार माँ मां लिखरहे हें, गावँ मे एसा नहि चलता। गावँ केँ वातावरण मे स्टोरी कों अगर पिरोया जाये तौ अम्मा, याँ मां यही ज़्यादा सही हैं। इस सें औऱ अधिक गावँ जैसा प्रतीत होता हैं।
एक् अद्भूत औऱ रोचककथा उपस्थित करने केँ लिए आप् कों दिल सें शुक्रिया देता हूं।
दूध का दम - padihai chhod di – New Episode
Update 4
फिन हम् वहां सें सीधा देहात केँ कुल देवता केँ मंदिर चले जाते हें, जहां पे पहले हि सभी आँ चुके थें शिवाय सरदार जी केँ।
मंदिर केँ बाहर् एक् पीपल कां पेड़ हैं वहीं पऱ कई सारी कुर्सियां लगी हुई थि, उन्हीं कोर्सों मे सें एक् कुर्सी पे बापू औऱ उनकेबगल मे कालू बैठाहुआ थां जिसतरफ देहात केँ सारे मर्द बैठेहुए थें, औऱ वही औरतों केँ साइड सरिता चाची एक् कुर्सी पर्र बैठी हुइ थि जोँ कि हम् सें पहले हि आँ चुकी थि।
मे जाकर कालू औऱ पिताजी केँ पासबैठ जाता हूं औऱ वही मां सरिता चाची केँ पास जाकरबैठ जाती हैं।
मे पिताजी सें कुछ प्रश्न करता इससे पहले हि वहां पऱ सरदार जी औऱ पंडित जी आँ गये, देहात केँ दो बुजुर्गों केँ सम्मान मे देहात केँ सारेलोग अपने स्थान पर्र खड़ा हौ गए।
तभी सरदार जी हम् सभी कों बैठने केँ लिए कहते हें, औऱ स्वयं खड़े होकर कहते हें - आज हम् यहां 20 सालों बाद खेले जाने वालेखेल दूध कां दम कों खेलने वाली लोगों कां नाम लिखने आए हें।
तभी भीड़ मे सें एक् लड़का पूछता हैं ये कैसाखेल हैं जिसके बारे मे हमें नहि पता, जिसके बाद सरदार जी कहते हें - हमारे देहात मे एक् व्यक्ति 20 साल तक कि सरदार बन केँ रह सकता हैं औऱ वो कौन होगा इसका चुनाव इसीखेल सें होता हैं, 20 सालबाद खेले जाने केँ कारणइस खेल केँ बारे मे लोग अधिकबात नहि करते हें जिसके कारण तुम्हें पता नहि हैं।
इसबार मे पूछता हूं- तौ इसकानाम दूध कां दाम रखने कां क्याँ कारण हैं।
सरदार जी - क्योंकि इसखेल कों जीतने वाला व्यक्ति तौ सरदार बनता हैं मगरउस व्यक्ति कि माँ कों इस देहात कां शेरनी कहा जाता हैं जिनके दूध मे सबसे ज़्यादा ताकत होती हैं, इसलिये इसकानाम दूध कां दाम हैं।
कालू - इसखेल कों केसे खेला जाता हैं
सरदार जी - मानलो अगरइस खेल कों 10 लोग खेलता तोँ इसे 10 दिन तक खेला जाता, मगर तुम् पांचलोग हौ इसलिये इसे 5 दिन तक तुम्हारे हि घरों मे खेला जाएगा।
तभी एक् औऱ लड़का बोलता हैं- इसमें किसतरह केँ खेल होते हें।
सरदार जी - इसखेल मे हर एक् मर्द कों अपनी मर्दानगी साबित करनी होती हैं वो भि अपनी माँ केँ ऊपर हि, 5 दिनों तक तुम् लोगों कों अपनी मम्मी केँ संग एक् वासना भराखेल खेलना होगा जोँ जीतेगा उसेइस देहात कां नया सरदार बनाया जाएगा, औऱ इनाम केँ रूप मे एक् भेंस दि जाएगी जोँ रोजाना 20 लीटरदूध देती हैं।
मुझेयह बात सुनकर इतना क्रोध आँ जाता हैं कि मे सरदार कों लात मारने केँ लिए उठने हि वाला थां मगरतभी मुझे एहसास होता हैं कि किसी नें मेरेहाथ कों जोर सें पकड़रखा हैं जब मे उसतरफ मुड़कर देखता हूं तोँ वो कोई औऱ नहि मेरे पिताजी थें।
तभी पंडित जी कहते हें - जोँ जौ इसखेल मे शामिल होँ रहा हैं उनकी माये अपने कबूतरों कों लेकर मंदिर मे चलें।
जिसके बाद माँ औऱ बाकी 4 औरतें उठकर वहां सें चली जाती हैं औऱ मे बापू सें कहता हूं - बापू आपने मुझे रोका क्यूं मे केसे अपनी मम्मी केँ संगऐसा खेलखेल सकता हूं छी।
बापू - गलती हमारी हैं जौ हमने तुम्हें इसखेल केँ बारे मे नहि बताया।
मे - मगरकल वो माँ केँ संगकुछ भि करने कों कह सकते हें जौ मे केसे करूंगा औऱ क्याँ आपको बुरा नहि लगेगा मे आपकी पत्नि केँ संग।
बापू - बेटा अभि तुम् शांत बैठोघऱ मे तुम्हारी मम्मी तुम्हें सभीबता देगी।
मे कुछ नहि बोलता हूं चुपचाप बैठ जाता हूं कुछ हि देरबाद सारी औरतें औऱ पंडित जी मंदिर सें बाहर् आँ जाते हें, उनके हाथों मे उनका कबूतर नहि थां जोँ कि शायदउन लोगों नें मंदिर मे हि रख दिया होँ,
फिनवे हम् सभी लड़कों कों अपनेपास बुलाते हें औऱ हमारे हाथों मे एक् धागा बांध देते हें, जब मे ध्यान सें देखता हूं तौ वैसे हि धागे मेरी माँ औऱ बाकी औरतों केँ हाथों मे भि बांधा गय़ा थां।
उसकेबाद खेल कों लेकरकुछ बातें होने लगती हैं, जिस पऱ मेरा बिल्कुल भि ध्यान नहि थां मे तौ केवल कालू औऱ बाकीउन तीन लड़कों कों देखरहा थां जोँ उसखेल कों खेलने वाला थां, वेसभी लोगइस खेल केँ लिए बहुत उत्साहित लगरहे थें।
कुछ हि देर मे बैठक समाप्त होँ जाती हैं औऱ हम् सभी कों अपनेघऱ जाने कां इजाजत मिल जाता हैं जिसके बाद हम् लोगघऱ जाने लगते हें, मां औऱ सरिता चाची दोनों एक् संग बातें करतेहुए जारही थि औऱ वही मे कालू केँ संगजा रहा थां कालू चुपचाप थां जैसे उसनेकोई पापकर दिया होँ।
मे - सच-सच बताना तुम्हारी तरफइस खेल केँ बारे मे पता थां नां।
कालु - हां दोस्त पता थां मेरी मम्मी नें बताया थां
मे गुस्से सें - मुझे क्यूं नहि बताया
कालू - दोस्त क्याँ बताता।
ये कहकर कालूचुप हौ जाता हैं, उसकाघऱ आँ चुका थां औऱ वो दौर केँ अपनेघऱ मे चला जाता हैं मे उसे औऱ कुछ नहि पूछ पाता हूं, मे मन मे सोचता हूं कितना भागेगा कल सुभह तोँ तूँ मेरेपास हि आएगा।
उसकेबाद मे औऱ मां भि घऱ आँ जाते हें घऱ मे घुसते हि मे मां सें कहता हूं - मां यहसभी क्याँ हैं।
मां - मे तुम कोसभी सुभहबता दूंगी अभि जाकरसो जाओ।
मे - नहि
मे आगेकुछ बोलता उससे पहले हि माँ गुस्से मे बोलती हैं - बोला नां तुम्हे सुभहबात करेंगे अभि जाजा केँ सोजा।
माँ भि गुस्सैल स्वभाव कि थि उसेजब क्रोध आँ जाता हैं तोँ वो किसी कों कुछ नहि समझती इसीलिए मे अपने कमरे मे चला जाता हूं।
मे अपने कमरे मे चला जाता हूं औऱ अपने कपड़े खोलकर नीचे फर्श पर्र हि फेंक देता हूं। भले हि मे उसखेल केँ खिलाफ थां मगरजब सें मैंने उसके बारे मे सरदार जी केँ मुंह सें सुना थां, तब सें नाँ जाने क्यूं मेरा लन्ड मेरे अंडर वियर मे खड़ा थां ये बैठने कां नाम हि नहि लें रहा थां।
मगर मे उस पऱ अधिक ध्यान नहि देता हूं औऱ अपने पलंग पे जाकर एक् ब्लैंकेट ओढ़ केँ लेट जाता हूं। अभि मुझे लेटेहुए कुछ हि देरहुआ थां कि तभी मेरे कमरे कां दरवाजा खुल जाता हैं। जिसे मैंने मात्र सटा दिया थां कुंडी नहि लगाया थां, मे अभि सोच हि रहा थां कि यह केसेखुल गय़ा।
तभी पाइलों कि आवाज़ केँ संग मां मेरे कमरे केँ अंदर आँ जाती हैं। जब मे उन्हें देखता हूं तौ देखता हि रह जाता हूं।
मां नें मात्र एक् ब्रा औऱ पेटिकोट पहना थां।
ऐसा नहि हैं कि मैंने मां कों कभीऐसे हालात मे नहि देखा थां। मैंने तौ कईबार मां कों नहाते हुए उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां औऱ मोटी जांघों कों भि देखा हैं। कईबार तोँ मैंने उनकी नंगीपीठ पर्र नहाते हुए साबुन भि मला हैं। जहांउन हालातों केँ बीज भि मुझे मेरेमन मे मां कों लेकरकोई गलत विचार नहि आया थां।
मगरइस समय नां जाने क्यूं मां मुझे बहोत खूबसूरत लगरही थि जैसेवे दुनिया कि सबसे खूबसूरत औऱ आखरीऔरत हौ। उनका वोँ गोरा शरीर, खुलेहुए बाल, आंखों मे काजल, माथे पे एक् छोटी सि बिंदिया। औऱ थोडा सां नीचे जाने पऱ। उनके छोटे सें ब्रा मे कैद चुचियां जीसे बहुत मुश्किल सें उस ब्रा नें अपनेकैद मे रखा थां। उनकी दोनों पहाड़ों केँ बीचबने उसखाई नें मेरे मुंह मे पानीला दिया थां। थोडा सां औऱ नीचे जाने पऱ मुझे मां कि थोड़ी सि मोटीमगर गोल सि पेट दिखती हैं। पेट कि सुंदरता कों चार चांद लगाने केँ लिए उसकेऊपर एक् गहरी बड़ी सि गोल नाभि दिखती हैं। जौ मेरे मुंह मे आए पानी कों मेरेगले सें धकेलने केँ लिए बहुत थां। मगर थोडा सां औऱ नीचे जाने सें तौ मेराजान हि निकल जाता हैं। उन्होंने पेटीकोट कों इतना नीचे पहना थां कि उनके बुर केँ बालदिख रहा थां।
मां वैसी हि मेरे सामने खड़ा होकर मुझे स्वयं कों बहुतदेर तक निहारने देती हैं। जिन्हें मे अभि बिना पलके झपकाए निहारते जारहा थां।
मां चलतेहुए मेरेबेद केँ किनारे आके खड़ा हौ जाती हैं। उनकी पायलों कि आवाज़ सुन मेरा ध्यान टूटता हैं। औऱ मे जल्दी हि अपनी गलती कां एहसास करतेहुए माँ सें कहता हूं - क्याँ हुआ माँ आपकोकुछ चाहिए थां क्याँ।
माँ पहले मेरे पलंग पऱ बैठती हैं औऱ फिन मेरेसिर पर्र हाथ फेरते हुए कहती हैं - मे तौ मात्र देखने आई थि कि मेरा राजा बेटा सोया याँ नहि।
मे मां केँ चेहरे कि मुस्कान औऱ उनके प्रेम सें मोहित होके अपने आप् कों बंदकर देता हूं औऱ कहता हूं - अभि कहां मां, अभि तोँ मुझे कमरे मे आए मात्र 10 मिनट हि हुआ हैं।
माँ अपने चेहरे कि मुस्कान कों औऱ भि बढ़ाते हुए - 10 नहि 20 मिनट हौ गय़ा हैं तुम को कमरे मे आए, मगर 10 मिनट सें तौ तु मुझे एकदक नजरों सें घूरेजा रहा थां ऐसा क्याँ दिख गय़ा तुझेही तेरी मां मे।
मे अपनेआंख कों एक् झटके मे खोल देता हूं औऱ हकलाते हुए मां सें कहता हूं - कुछ भि तौ
नहि
माँ झुकती हैं औऱ मेरेसिर पऱ चूमते हुए कहती हैं - कितना उलझ गय़ा हैं मेरा बेटा कभी कहता हैं मे तुम्हारे संग वोँ सभी केसे करूंगा, औऱ अभि मुझेऐसे देखरहा थां जैसे वोँ मुझे अभि जिंदा खा जाएगा।
लज्जा केँ मारे मे मां कि इसबात कां कोई जवाब नहि देता। तभी मां कहती हैं - औऱ हांआज मे तुम्हारे संग हि सोना चाहती हूं
मे - नहि, मतलब क्यूं
मां - कुछ जरूरी बात बताना हैं तुम्हें।
ये कहतेहुए मां मेरे ब्लैंकेट कों थोडा सां उठाती हैं औऱ उसके अंदर आँ कर मुझसे चिपककर लेट जाती हैं। मे पीठ केँ बल सीधा हौके लेटा थां। माँ मुझे अपनी औऱ चेहरा करने कों कहती हैं। जिसके बाद मे अपना चेहरा माँ कि ओर करकेलेट जाता हूं।
अब हम् दोनों अपने गर्म सांसो कों महसूस करपारहे थें। मैंने अपने दोनों हाथों कों बड़ी मुश्किल सें अपने दोनों टांगों केँ बीच लन्ड केँ पास काबू मे कर केँ रखा थां, जिससे मेरा खड़ा लैंड भि थोडा बहोत छुपाहुआ थां। तभी माँ मेरे एक् हाथ कों वहां सें निकलती हैं औऱ अपने मखमली कमर पऱ रख देती हैं। औऱ स्वयं अपना एक् हाथ मेरेगाल पऱ रख देती हैं। इसकेबाद तौ जैसे मेरा हिलना नामुमकिन सां होँ जाता हैं।
माँ - अगर मेरा राजा बेटा इसखेल कों जीत केँ मुझेइस देहात कि शेरनी बना देता हैं तोँ मे उसे स्वयं कों चोदने दूंगी।
मां नें यहबात कों इतनी आसानी सें कह दिया। अगर मे अपनेहोश मे रहता तौ मुझे जरूर क्रोध आता हैं। मगर अभि मे अपनेऊपर सें पूरा नियंत्रण खो चुका जिसके कारण मेरे मुंह सें क्याँ कि स्थान निकल जाता हैं - सच मे
यहकेह केँ मे अपनीनजर कों नीचेकर लेता हूं। जिस पर्र माँ मेरे होठों पर्र हल्का सां चुम्मा दे देती हैं औऱ कहती हैं - इसमें शर्माने वालीकौन सि बात हैं। तुम्हारे पिताजी नें भि तोँ तुम्हारी दादीमा केँ संग औऱ तुम्हारे मामाजी नें तुम्हारी नानि केँ संगयह सभी किया हैं अब तुम् मेरेसंग करोगे।
मे - जब हमारे घऱ मे सभी नें अपनी मम्मी केँ संगइस खेल कों खेला हैं, तौ आपने मुझेकभी कुछ बताया क्यूं नहि।
माँ - जब तुमने अपनी पढ़ाई कों बीच मे हि छोड़ दिया। तब मैंने ठान लिया थां कि मे तुम्हें ये सौभाग्य कभी भि नसीब नहि होने दूंगी। मगर तुमने अपनी सूझबूझ सें स्वयं कों साबित कर दिया इसलिये मैंने भि अपनामन बदल लिया।
मे माँ सें औऱ भि बातें करना चाहता थां मगर मां नें मुझेसो जाने कों कह दिया औऱ स्वयं भि सो गई। मैंने भि अपनी आंखें बंदकर लियामगर मेरी आंखों मे नींद तोँ थां नहि। जहां पर्र मे 30 मिनट पहलेइस खेल कां विरोध कररहा थां। वही पर्र मेरी माँ नें बड़ी चालाकी सें नाँ कि मुझे मनाया बल्कि मेरेसोच कों भि अपनी प्रति वासना सें भर दिया। मेरे अंदर भि अब माँ कि जिस्म कि रचना कां निरीक्षण करने कां मन करनेलगा थां। यहसभी सोचते हुए हि मुझे नींद आँ जाता हैं।
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दूध का दम - padihai chhod di - Aage kya hua? Next part padhiye
Mast khel हुआ Smoker king. jaise aap केँ naam सें pata hota hain Sutta Raja. Ab sab सें jaruri sawaal.Kya Raju ne Gaai ka, Bhains ka, Bakri ka, maa ka ya dabbe ka doodh piya hain? jo khud ko Sherni केँ khitaab सें garvonnit hona chahti hain?
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