दूध का दम - padihai chhod di – New Episode
Update 5
जब सुभह कों मेरा नींद खुलता हैं तोँ मे स्वयं कों खाट पऱ अकेला पाता हूं। मे बैड पर्र लेटे लेटेरात केँ बारे मे सोचने लगता हूं औऱ अपने आप् मे हि मुस्कुराने लगता हूं।
कुछदेर बाद मे उठ केँ बाहर् जाता हूं औऱ अपने सुभह केँ साराकाम करता हूं फिन मां कों कहकरखेत कि ओर जाने लगता हूं। रास्ते मे हि मे कालू कों भि बुलाने उसकेघऱ चले जाता हूं। बहुतदेर तक घऱ कां दरवाजा खटखटा केँ बाद सरिता झांकी गेट कों उबासी लेतेहुए खुलती हैं। जिन्हें देखकर साफनजर आँ रहा थां कि वेअब तक सोरही थि।
मगर मेरेनजर कों जोँ सबसे ज़्यादा आकर्षित करता हैं। वोँ थां चाची कां गाल, जिसके ऊपर दांत कां निशान थां। देखने सें हि पताचल रहा थां कि किसी नें बहुत बेरहमी सें उनके गोरेगाल कों काटा थां। मुझे समझते देर नहि लगता कि ये किसका काम हैं।
चाची मुझे अपनीगाल कों घूरते हुए नोटिस कर लेती हैं। जिसके बाद वो अपनेगाल पऱ हाथरख केँ हंसते हुए कहती - देख्ना रातों कों एक् कीड़े नें काट लिया।
मे - मच्छरदानी लगाकर सोना चाहिए थां देखो केसे आपके गोरेगाल कों लालकर दिया। अच्छा जाओउस कीड़े कों बुलाकर लाओ।
ये कहतेहुए मे औऱ चाची घऱ मे घुस केँ आंगन मे आँ जाते हें। तभी चाची समझआती हैं कि उनकाझूठ पकड़ा गय़ा। जिसके बाद वोँ शर्मा केँ वहां सें जाने लगती हैं।
तभी मे पीछे सें उनकाहाथ पकड़ लेता हूं औऱ हंसते हुए कहता हूं - क्याँ हुआ चाची शरमा गई क्याँ।
चाची अपनेहाथ कों छुड़ाते हुए - छोड़ना कालूदेख लेगा।
मे - अरे अभि सें उससे इतना डरनेलगी।
तभी चाची अपनेहाथ कों छुड़ा केँ कमरे मे भाग जाती हैं। कुछदेर बाद कालू बाहर् आता हैं औऱ हम् दोनों खेत कि तरफचल देते हें।
यहां पर्र मे आपको कालू कि मम्मी केँ बारे मे थोडा सां बता देता हूं। उसकी माँ भि कम खूबसूरत नहि हैं खास करके उनकीदो बड़ी-बड़ी चूचियां जौ कि देहात मे सबसे बड़ी हैं। जिसे चूसने कां सपने देहात कां हर व्यक्ति देखता हैं। कालू कि माँ नें एक् नहि बल्कि 2 शादियां कि हैं। पहली विवाह उनका कालों केँ बड़े पिताजी सें हुआ थां। मगर उसकेमौत केँ बाद उन्होंने अपने देवरु सें हि विवाह करली जौ कि कालू केँ पिताजी थें।
खेत मे मे कालू सें कहता हूं - लगता हैं तेरा नींद पूरा नहि हुआ हैं।
कालू - ऐसीबात नहि हैं बसआज थोडा अधिक हि आंखलग गय़ा।
मे - औऱ चाची कों भि आंखलगा दीया।
कालू - मतलब
मे - मतलबयह कि तूँ कलरात चाची केँ कमरे मे सोया थां।
कालू हकलाते हुए - नहि तौ
मे उसकेपीठ पर्र एक् घुसा मारते हुए - सालेअब तौ सचबोल दे औऱ कितना झूठ बोलेगा सुभहतु चाची केँ कमरे सें निकला थां यादकर मे भि वहीं थां। औऱ चाची केँ गाल पर्र किया गय़ा मेहनत भि मुझेदिख रहा थां।
कालू शर्माते हुए - वोँ मे वोँ मे
मे - मे मे मे क्याँ कररहा हैं
कालू - दोस्त तुम्हे तोँ सभीपता चल गय़ा होगा नां फिन भि तु मुझसे ऐसे प्रश्न क्यूं कररहे हें।
मे - तूने मुझेये सभी केँ बारे मे बताया क्यूं नहि थां।
कालू - तुम्हारी मां नें मना किया थां।
मे - अच्छा यहसभी छोड़यह बता कि तु चाची केँ संग तौ रात कों कितने दूर तक गय़ा थां।
कालू शर्माते हुए - छोड़ नां दोस्त।
फिन कालू मुझे पूरीबात सुनाने लगता हैं। (आगे कि किस्सा कालू कि जुबानी)
मुझे मेरी मम्मी नें इसखेल केँ बारे मे 1 महीने पहले हि बता दिया थां। जिसके कारण हम् दोनों केँ बीचकभी कबार चुम्मा चाटी तोँ कभी ब्लाउज केँ ऊपर सें हि मम्मी मुझे अपनी चूचियां दबाने दे दि थि। मगरकल रात कों जैसे हि हम् दोनों घऱ लौटे।
मे मम्मी कों उठाकर सीधा उनके कमरे मे लेँ जाता हूं औऱ बैड पर्र पटक देता हूं। उसकेबाद मे माँ केँ पूरे चेहरे कों पागलों कि तरह चूमने चाटने लगता हूं कभीगाल कों चूमता तोँ कभीजीभ सें चाटता तौ कभी दांत सें काट लेता।
मे अपने आप् पे अपना पूरा नियंत्रण खो चुका थां। तभी मम्मी मेरी दोनों गालो कों पकड़ केँ अपने होठों कों मेरे होठों पर्र रख देती हैं जिससे मे थोडा सां शांत होता हूं औऱ शांति सें मम्मी कि होठों कों चूसने लगता हूं।
हम् लोगतब तक एक् दूसरे कों किस करते हें जब तक हमारी सांसे नहि फुल जाता। किस केँ टूटने केँ बाद मे हम् दोनों एक् दूसरे कि आंखों मे देखने लगते हें।
तभी मे थोडा सां नीचे जाता हूं औऱ माँ केँ ब्लाउज कां बटन खोलने कि कोशिश करने लगता हूं। मगरतभी माँ मुझेरोक देती हैं औऱ कहती हैं - आज तक इतना सब्र कियाबस अबकल तक रुकजाओ कल तुम्हे जौ मर्जी होँ कर लेना मे तुम्हारी तरफ नहि रोकूंगी।
उसकेबाद मे माँ केँ पेट कों अपनीजीभ सें चाटने लगता हूं। चाटते हुए हि मे अपनीजीभ कों नाभि केँ अंदरडाल देता हूं औऱ उसे भि चाटने लगता हूं। कुछदेर जीभर केँ नाभि कों चाटने केँ बाद मे माँ केँ पेट कों चुमने औऱ काटने लगता हूं।
जिसके कारण मम्मी केँ पेट पऱ निशान पड़ जाता हैं। मम्मी तोँ मुझे इससेआगे जाने नहि देती इसलिये मे पेट कों चुनते हुए भि सो जाता हूं। उसकेबाद माँ मुझे सुभह तेरेआने केँ बादउठा देती हैं। ( अपनी जुबानी)
मे - वाउ भइया तेरी तौ मजे हें।
कालू - क्यूं तेरेमजे नहि हैं।
मे - कहां दोस्त कलरात कों हि तौ माँ नें मुझेये सभी केँ बारे मे बताना हैं। बस पेटीकोट औऱ ब्रा मे मेरेसंग सोई थि।
कालू - कोईबात नहि आज नहि तोँ कल तेरी माँ भि तुम्हें सभीकुछ करने देगी।
मे - मगरआज रात कां तौ तुम को प्रतीक्षा नहि हौ रहा होगा।
कालू - सहीबोल रहे हौ दोस्त मुझेजरा सां भि प्रतीक्षा नहि हौ रहा। मे तोँ माँ कों इसखेल केँ ख़त्म होने सें पहले हि उनकापैर भारीकर दूंगा।
उसकेबाद हम् सब्जियां तोड़ केँ घऱचले आते हें औऱ वहीरोज कां दुध औऱ सब्जियों कों बाजार जाकर बेचना।
जब मे घऱआता हूं तोँ माँ मुझे खानां खाने कों देती हैं। खानां खाने केँ बाद मां मुझसे कहती हैं - तुझेही तौ खेल केँ बारे मे कुछपता होगा नहि।
मे - मुझेकब बताया जोँ मुझेपता रहेगा औऱ दूसरों कों भि बताने सें मनाकर दिया।
माँ - अच्छा ठीक हैं ठीक हैं क्रोध मत हौ। 5 दिनों तक अलग-अलग तरह केँ खेल होंगे। मगर आखिर मे जौ खेल होता हैं उसके बारे मे मे जानती हूं। इसखेल कों जीतने वाला हि सरदार बनता हैं। चाहे तुम् पहले कितने भि खेलजीत लोमगर अगर तुम् इसखेल मे हारगए तौ तुम् सरदार नहि बन सकती।
मे - अच्छा ऐसाकौन सां खेल हैं।
माँ - तुम्हें एक् पहलवान केँ गांड पर्र थप्पड़ मारना होगा। वो पहलवान अपने स्थान पर्र सें कितना दूर हिलता हैं याँ चिल्लाता हैं उसी केँ मुताबिक इसखेल कां विजेता चुना जाता हैं।
मे - क्याँ इतना आसान।
माँ - उन पहलवानों कों अगर तुम् डंडे सें भि मारोगे नाँ तौ भि नाँ वो चिल्लाएगा नाँ हि अपने स्थान पर्र सें हीलेगा इतना ताकतवर होता हैं वो लोग। तेरे बापू नें इसखेल मे सबसे अधिक नंबर लाया थां। औऱ तेरे मामाजी अपने देहात मे सबसे ज़्यादा नंबर लाया थां। मगर वो लोग आखिर मे पहलवान कों हिला नहि पाये जिसके कारण वो दोनों हार जाता हैं औऱ सरदार नहि बनता।
मे - ऐसा क्याँ पहलवान लाते हें याँ पहाड़।
माँ - इसलिये तुम कोआज सें हि उसकी प्रैक्टिस करना शुरुआत कर देना चाहिए।
मे - वो केसे करूंगा भला।
माँ - मेरेऊपर औऱ किसके ऊपर औऱ कौन करने देगा तुझेही अपनेऊपर।
मे - माँ तुम्हें दर्द नहि होगा
मां - दर्द औऱ मुझे शेरनी कों कभी दर्द नहि होता।
उसकेबाद मे भि सजधजकर होँ जाता हूं। मां मेरे सामने अपने घुटनों पऱ हाथ रखतेहुए थोडा सां झुक जाती हैं। मुझे अपनीगोल मटोल गांड पर्र मारने केँ लिए कहती हैं। जिसके बाद मे मां कि गांड पऱ एक् छोटा सां थप्पड़ मारता हूं।
जिससे माँ चिढ़ जाति हैं औऱ मुझ पर्र चिल्लाते हुए कहती हैं - जिस्म मे दम नहि हैं क्याँ इतना धीरे-धीरे सें क्यूं माररहा हैं जोर सें मार।
मां केँ ऐसे चिल्लाने सें मे डर जाता हूं। औऱ अचानक हि मां कि गांड पर्र एक् जोरदार थप्पड़ जड़ देता हूं। थप्पड़ इतना जोरदार थां कि मां केँ साड़ी पहनने केँ बावजूद भि घऱ मे एक् चट कि आवाज़ गूंज जाती हैं। औऱ माँ मुंह केँ बलगिर जाती हैं क्योंकि माँ भि इस हमले केँ लिए सजधजकर नहि थि।
माँ केँ गिरते हि मे उन्हें उठाता हूं। माँ दर्द सें कराते हुए कहती हैं - अहह मेरा मुंह मेराकमर मेरा गांडसभी तोड़ दियाइस नालायक नें।
मे - माँ मैंने तोँ पहले हि कहा थां मगर तुम् हि नहि मानीअब भूखतो।
माँ दर्दभरी आवाज़ मे कहती हैं - ठीक हैं कुछ नहि हुआ हैं आज केँ लिए इतना हि तुँ जा अपनेकाम पर्र।
मे - मां मे आपकी मालिश।
मां मुझेबीच मे हि टोकते हुए कहती हैं - नहि नहि कोई जरूरत नहि हैं तुजा अपनेकाम पर्र।
मे भि वहां सें चले जाने मे अपना भलाई समझता हूं।
फिनवही रोज कां काम। मगर आज मुझेकाम मे मन नहि लगरहा थां क्योंकि मेरे पूरेमन पऱ माँ हावी हौ चुकी थि। कलसाम तक मेरेमन मे उनके खिलाफ कोईगलत भाव मे थां मगरआज। सच कहते हें लोग औरतों केँ पल्लू केँ संग हि मर्द कां शराफत पर्र गिर जाता हैं। मेरेसंग भि कलवही हुआ माँ नें जैसे हि अपने साड़ी औऱ ब्लाउज कों उतारा मेरा नियत भि उतर गय़ा। पर्र अब मे भि औऱ नहि शर्मना चाहता हूं, मे भि माँ केँ संगखुल केँ मजे लेना चाहता हूं। मे अपने आप् मे एक् दृढ़ निश्चय लेता हूं कि आज मे भि कालू कि तरह अपनी माँ कों चोदकर रहूंगा। यहीसभी सोचते हुए मेरा पूरादिन निकल जाता हैं।
उसकेबाद जब मे साम कों घऱ पहुंचता हूं। घऱ पहुंचते हि माँ मुझसे कहती हैं - अच्छा हुआ जोँ तूँ जल्द आँ गय़ा चल जल्द जानां नहि हैं।
मे - कहां
माँ - आजखेल कां पहलादिन हैं तुम्हे पता नहि कहां जानां हैं।
जिसके बाद मे भि एक् लंबी सांस लेता हूं औऱ मां केँ पासचला जाता हूं। औऱ उनकेकमर पर्र हाथ रखकर खींच केँ अपने आप् सें सटा लेता।
इस वक़्त माँ कां पूरा जिस्म मेरे जिस्म सें चिपका हुआ थां। मां मेरेइस बर्ताव सें चौक जाती हैं औऱ मेरे आंखों मे एक् टकनजर सें देखने लगती हैं। मे भि आज उन्हें यहबता देना चाहता थां कि उसके सामने उसका बेटा नहि हैं एक् असली मर्द खड़ा हैं। जौ उसकेफूल जैसे जिस्म कों अपने मर्दाना जिस्म सें पिसकर उसका सारारस निकाल सकता हैं।
माँ मेरेइस हरकत सें तेज़-तेज़ सें हंसने लगती हैं। जिससे मेरे अंदर कां आत्मविश्वास टूट जाता हैं औऱ मे माँ कों छोड़ देता हूं। मां हंसते हुए कहती हें - चलचल बहोत देखली तेरी मर्दानगी।
उसकेबाद हम् लोगघऱ सें निकल पड़ते हें। इसखेल कों खेलने वालों कां परिचय दे देता हूं।
खिलाड़ी औऱ उसकी मम्मी
राजु रुपा
कालू सरिता
महेश कमली
सुरेश गुलाबो
राजेश चंपा
महेश सुरेश राजेश तीनों चचेरे भइया हें। औऱ उनकी माँ कमली गुलाबो चंपा तीनों सगी बेहन हैं। तीनों नें एक् हि घऱ मे विवाह किया हैं। तीनों एक् सें एक् कंटाप माल हैं।
मगर तीनों अलग-अलग घऱ मे रहते हें। आज कां खेल राजेश केँ घऱ मे थां। जब हम् वहां पहुंचते हें तोँ देखते हें वहां पऱ मात्र हम् पांच लड़कों औऱ उनकी मांओं केँ अलावा सरदार जी औऱ उनकी पत्नि कि थि।
हमारे आने केँ बाद हम् सबकोआज केँ खेल केँ बारे मे बताया जाता हैं।
सरदार जी - आज कां खेलयह हैं कि तुम्हें अपनी माँ केँ स्तनों कों तब तक दबाना होगाजब तक वो झड़ नहि जाती। औऱ संग हि अपने लिंग कों तब तक अपनी माँ कि गांड पर्र रगड़ा नाँ होगाजब तक झड़ नहि जाते। जोँ सबसे अधिकदेर औऱ कामुक तरीके सें इसखेल कों खेलेगा उसे हि विजेता घोषित किया जाएगा।
फिन सरदार जी सबसे पहले राजेश औऱ उसकी मम्मी चंपा कों इसखेल कों खेलने केँ लिए बुलाता हैं।
मुझे लगता हैं राजेश इसखेल कों खेलने सें पहले थोडा सां शर्माए याँ हिचकिचायेगा चाहिए। राजेश आते सें हि अपनी माँ केँ सीने सें उसका पल्लू हटा देता हैं। औऱ अपनी माँ केँ पीछे सें अपने दोनों हाथों कों आगे करता हैं औऱ ब्लाउज केँ ऊपर सें हि अपनी मम्मी कि चुचियों कों दबाने लगता हैं। औऱ संग हि साड़ी केँ ऊपर सें हि अपने लन्ड कों चंपा कि गांड मे रगड़ने लगता हैं। कुछदेर तक तौ चंपा लज्जा केँ मारे अपने मुंह सें कुछ नहि निकालती हैं। मगर थोड़े हि देर मे वो भि अपना कां काबूखो देती हैं औऱ अपनेबदन कों अपने बेटे केँ ऊपर ढीला छोड़ देती हैं औऱ संग हि आहे भरने लगती हैं - अह्ह ओह्ह माँ औऱ जोर सें।
कुछदेर बाद सरदार जी हम् सबकोवही करने कों कहते हें। जिसके बाद सूरेश औऱ महेश भि अपनी मम्मी केँ संग वैसे हि करने लगता हैं।
कुछदेर बाद राजु भि वहां पऱ रखे एक् कुर्सी पऱ बैठ जाता हैं औऱ अपनी मम्मी कों भि अपनेगोद पऱ बिठा लेता हैं। औऱ उसकी चुचियों कों जोरजोर सें दबाने लगता हैं। कुछ हि देर मे आहें भरतेहुए चाची भि अपने बेटे केँ लन्ड पर्र अपने गांड कों रगड़ने लगती हैं।
जब मेरानजर सरदार जी पऱ पड़ता हैं। वो अपने एक् हाथ कों अपनी पैंट केँ अंदर लें जाकर अपने लन्ड कों मसलरहा थां औऱ संग हि दूसरे हाथ सें अपनी पत्नि कि गांड कों।
जब मेरानजर माँ पऱ पड़ता हैं। तोँ वो मुझे भि चालू करने कां इशारा करती हैं। मे एक् लंबी सांस लेकर सोचने लगता हूं कि इसे औऱ भि कामुक केसे बनाया जा सकता हैं। तभी मेरानजर वहां पऱ रखी एक् बिस्तर पर्र पड़ता हैं। मे माँ कां हाथ पकड़ता हूं औऱ लें जाकर उन्हें उस बिस्तर पर्र एक् तरफ मुंह करके लेटा देता हूं। औऱ मे स्वयं उनके पीछे जाकरलेट जाता हूं। मे अपने एक् हाथ कों मां केँ नीचे सें लेँ जाकर उनकी चुची कों पकड़ लेता हूं औऱ दूसरे हाथ कों ऊपर चलेगा कर दूसरी मम्मों कों पकड़ केँ दबाने लगता हूं। औऱ पीछे सें अपने लन्ड कों माँ कि गांड पऱ रगड़ने लगता हूं।
पूरेघऱ मे केवल - हायहाय अह्ह बेटा औऱ जोर सें ऊ मम्मी, हां माँ
थोड़ी हि देर मे धीरे धीरे करकेसभी झड़ने लगते हें। औऱ मां भि कब कां झड़ चुकी थि मगर अभि तक मेरा नहि हुआ थां। सभीलोग मेरे औऱ मां कि काम क्रिया कों एकटकनजर सें देखते थें। मे समझ जाता हूं कि ऐसे तोँ मे झड़ने सें रहा। इसलिये मे मम्मी कों पेट केँ बल लिटा देता हूं औऱ स्वयं उनकेऊपर चढ़कर लेट जाता हूं औऱ अपने लन्ड कों माँ कि गांड पऱ जोरजोर सें रगड़ने लगता हूं। जिससे मां मुझे बोलने लगती हैं - अह्ह धीरे-धीरे अह्ह बेटा धीरे-धीरे कर।
मगर मे कहां सुनने वाला थां मे वैसे हि करता रहता हूं औऱ 5 मिनटबाद मेरा भि माल निकल जाता हैं जिसके बाद मे मम्मी केँ ऊपर हि हापने लगता हूं।
ye kya thaa?Malai bahar nikaal di? Kaalu too Apne mummy k saath baccha paida krna chahta thaa? Kya kahani mein bi population nahee badhaa sakte Smoker king ?
दूध का दम - padihai chhod di – New Episode
Update 6
फिन सरदार जी हमेंअंक देता हैं।
1 राजु
2 कालू
3 सुरेश
4 राजेश
5 महेश
फिन सरदार जी कहते हें - कल कां खेल सुरेश केँ घऱइसी वक्त मे होगा। फिन सरदार जी वहां सें चले जाते हें।
उसकेबाद हम् भि वहां सें निकल जाते हें सुरेश औऱ महेश कां घऱबगल मे हि थां।
पूरे रास्ते हम् चारों मतलब, मे, मां, कालु, चाची कुछ भि नहि बोलरही थि। थोड़ी हि देर मे कालू कां घऱ आँ जाता हैं। औऱ वो दोनों हमें अलविदा कहकर अपनेघऱ चला जाता हैं।
जब हम् अपनेघऱ पहुंचते हें तौ घऱ कां ताला खुलाहुआ थां। जिसका मतलब थां कि पिताजी घऱ आँ चुके हें। उसकेबाद हम् लोग अंदर जाते हें। माँ सीधा रसोई मे खानां बनाने चली जाती हैं औऱ मे अपनेरूम मे चला जाता हूं। उसरात मेरेघऱ कुछखास नहि होता हैं। मगर कालू केँ घऱ बहोत कुछ होने वाला थां।
(आगे कि स्टोरी कालू कि जुबानी)
जब मे घऱ पहुंचता हूं तौ मम्मी चुपचाप खानां बनाने चली जाती हैं। मुझे थोडा सां अजीबलग रहा थां क्योंकि वो मुझसे कोई भि बात नहि कररही थि।
जब खानां बन जाता हैं तब मे औऱ माँ संग बैठकर खानां खाने लगते हें। खानां खातेहुए हि मे मम्मी सें पूछता हूं - क्याँ हुआ माँ तुम् कुछ परेशान लगरही होँ
माँ - कुछ भि तोँ नहि। खानां खाने केँ बाद तुँ मेरे कमरे मे मेरा प्रतीक्षा कर मे आँ जाऊंगी।
जिसके बाद हम् दोनों मे कोईबात नहि होता हैं। औऱ मे खानां खाकर माँ केँ कमरे मे चला जाता हूं।
मे मम्मी केँ कमरे मे बेठा उनका प्रतीक्षा कररहा थां कि तभी दरवाजे सें माँ अंदरआती हैं। अभि उन्होंने एक् नाइटी पहनाहुआ थां औऱ उनकेहाथ मे एक् गिलास दूध भि थां। माँ मेरेपास आती हैं औऱ बिस्तर पर्र बैठ जाती हैं औऱ अपनेहाथ मे पकड़ा गिलास मेरे औऱ बढ़ा देता हैं। जिसे मे भि बड़े प्रेम सें उनकेहाथ सें लें लेता हूं औऱ गिलास कां आधादूध पी जाता हैं। गिलास मे बचाआधा दूध मे माँ कों पिला देता हूं। मे अच्छे सें दूध कों नहि पिला पाता हूं जिसके कारण थोडा सां दूध माँ कि छाती पऱ गिर जाता हैं औऱ संग हि उनके मुंह केँ चारों ओर भि लग जाता हैं।
जिसे पोछने केँ लिए माँ नें अपनेहाथ कों उठाया हि थां कि मे उनके हाथों कों पकड़ लेता हूं। औऱ नां मे अपनासिर हिला देता हूं।
मे मम्मी केँ कंधों पकड़ केँ उन्हें खाट पर्र सुला देता हूं। माँ भि अच्छे सें खाट पर्र पीठ केँ बल होकरलेट जाते हें। जिसके बाद मे बिस्तर पऱ सें खड़ा होता हूं औऱ अपने कपड़ों कों आहिस्ता खोलते हुए माँ कों देखने लगता हूं।
मम्मी बिस्तर पर्र लेटी लंबी लंबीमगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे सांसे लेतेहुए मुझे हि देखरही थि। जब वोँ सांस लेते वक्तहवा कों अंदर कि ओर लेतीतब उनके सीने पे लटकेदो बड़े पहाड़ ऊपर कि ओरउठ जाता। औऱ जैसे हि वो सांस छोड़ती उनके दोनों पहाड़ ऊपर सें नीचे हौ जाते। इस दृश्य मे वो बहुत कामुक लगरही थि। जैसे हि मे अपने पेंट कों नीचे करता हूं मेरा 7 इंच खड़ा लैंडझट सें बाहर् आँ जाता।
मेरे लन्ड कों देखते हि उनकी लंबी लंबी सांसे रुक जाती हैं। भले हि आज तक मैंने अपनी मम्मी कि मम्मों औऱ गांड कों कितना भि दबाया हौ मगरआज तक हम् दोनों नें एक् दूसरे कों कभी भि नंगा नहि देखा हैं। मे अपने खड़े लन्ड कों सेहलाते हुए बिस्तर पर्र चढ़ जाता हूं।
माँ केँ चेहरे कों मे अपने दोनों हाथों मे थाम लेता हूं औऱ उनके होठों केँ चारों तरफलगा दूध चाटने लगता हूं। यहदूध गिलास केँ दूध सें कहीं ज़्यादा मीठा थां। जिसे मे चाटचाट केँ गायबकर देता हूं औऱ उस स्थान कों अपनेथूक सें गीलाकर देता हूं। जब मुंह पर्र लगा सारादूध समाप्त होँ जाता हैं तब मे औऱ दूध केँ तलाश मे नीचे, उनकी छातियों केँ पास जाने लगता। जहां पऱ पहुंच कर मुझेदूध केँ छोटी बड़ी कहीं बूंदे नजरआता हैं। जिसतरह शेर पानी कों चाट केँ पीता हैं उसीतरह मे छाती पऱ लगेउन दूध केँ बूंदों कों चाटने लगता हूं। मेरीइस हरकत सें माँ सिसक उठती हैं - आआह्ह्ह्
सारादूध चाट लेने केँ बाद मे वापस मम्मी केँ चेहरे केँ पास आँ जाता हूं। वे अभि बहुत हसीनलग रही थि, उन्होंने अपने दोनों आंखों कों बंद करकेरखा थां औऱ उनका मुंह भि खुलाहुआ थां जिससे वो गरम सांसे छोड़रही थि। गरम सांसों केँ कारण उनका निचला होंठसूख गय़ा थां जिस पर्र मेरेनजर पड़ते हि, मे अपनीहॉट उस पऱ रख देता हूं औऱ उसे चूसने लगता हूं।
मेरी मम्मी जोँ अब तक कुछ भि नहि कररही थि वो अब अपने एक् हाथ सें मेरे बालों मे उंगलियां चिल्लाने लगती हैं। औऱ मेरे होठों कों भि पागलों कि तरह चूसने लगती हैं।
कुछ हि देर मे मे अपनाजीभ माँ केँ मुंह मे डाल देता हूं जिसे वोँ बहुत प्रेम सें चूसने लगती हैं। फिन मम्मी भि अपनीजीभ कों मेरे मुंह केँ अंदरडाल देती हैं जिसे मे भि चूसने लगता हूं।
किस करतेहुए मे अपना एक् हाथ माँ कि नाइटी मे डाल देता हूं औऱ उनकी चुचियों कों बारी-बारी दबाने लगता हूं।
चुचियों कों दबाने केँ बाद। मे माँ कि नाइटी कों ऊपर करने लगता हूं कुछ हि देर मे मे उनकी नाइटी कों उनके छाती तक ऊपरकर देता हूं। फिन मे किस करना छोड़बैठ जाता हूं औऱ नाइटी खोल केँ फेंक देता हूं।
उन्होंने नाइटी केँ अंदरकुछ भि नहि पहना थां। जिसके कारण वोँ अब मेरे सामने जन्मजात नंगी थि। मम्मी लज्जा केँ मारे अपने दोनों पैरों कों सटाके अपनी बुर कों छुपारही थि।
कुछदेर मम्मी कों निहारने केँ बाद। मे वापस सें पलंग पऱ लेट जाता हूं औऱ माँ कि एक् चुची निप्पल कों मुंह मे डालकर चूसने लगता हूं औऱ दूसरे कों अपने एक् हाथ सें दबाने लगता हूं।
निप्पल केँ संग मे चुचियों कों भि चुमरहा थां औऱ रहरहकर उस पऱ अपने दांत गड़ा देता। जिससे मम्मी अहहकर उठती। दोनों चुचियों कों बारी बारी चूसने चूमने औऱ काटने केँ बाद मुझे जाकर उनकेपेट कों चूमने लगता हूं। उनकी गहरी नाभि कों अपनीजीभ सें जाटनी लगता हूं।
कुछ हि देर मे, मे मम्मी केँ पेट कों लालकर देता हूं। उसकेबाद मे उठ केँ मम्मी केँ दोनों टांगों कों पकड़ केँ अलगकर देता हूं। तभी मुझे देखती हैं वो चुप जिससे मे पैदाहुआ थां औऱ जीसेआज रात मे चोदने वाला थां।
बुर कों जीभर केँ देखने केँ बाद। उसे मे अपनी उंगलियों सें साइन होने लगता हूं। कुछदेर सैहलाने केँ बाद मे अपने दोनों हाथों केँ अंगूठी सें उनकी बुर कों फैला देता हूं। जिससे मुझे उनकी गुलाबी बुर कि छेद औऱ पंख भि दिखने लगता हैं। उसे भि मे कुछदेर तक देखता हूं।
उसकेबाद मे अपनेसिर कों बुर केँ पास लेँ जाकर, एक् लंबा सांस लेकर उसके खुशबू कों सुनता हूं। बहुत मदहोश कर देने वाला जौ मुझेकुछ देर केँ लिए नसीब मे डाल दिया थां। दो-तीन बारऐसे हि बुर कों सुंखने केँ बाद मे अपनेजेभ सें उसे चाटने लगता हूं।
मेरा अजीब जैसे हि बुर पऱ पड़ता हैं। मम्मी कांप जाती हैं औऱ उनके मुंह सें एक् लंबाआह निकलता हैं। मे भि पागलों कि तरह उनके बुर कों चाटने लगता हूं, उनके पंखों कों अपने मुंह मे डालकर चूसने लगता हूं जिससे माँ बेचैनी उठती हैं - उफ्फ उफ्फ मम्मी
3 सालों सें नहि चोदने केँ कारण जैसे हि मे उनकी बुर केँ दाने कों सोचता हूं वैसे हि उनकामुत निकल जाता हैं। जौ मेरे पूरे चेहरे पर्र लग जाते हें।
मैंने कभी नहि सोचा थां कि माँ सेक्स कों लेकर इतनी कमजोर होगी। मे अपने चेहरे पर्र सें सारामुत पोछता हु औऱ उसे अपने लन्ड पे लगा लेता हूं।
फिन मे अपने लन्ड कों पकड़ केँ माँ कि बुर सें लगा देता हूं। औऱ एक् हल्का सां धक्का लगा देता हूं जिससे मेरा लन्ड कां सुपाड़ा बुर मे चला जाता हैं। सुपाड़े केँ बुर मे जाते हि माँ आहकर उठती हैं।
फिन मे मम्मी केँ ऊपरलेट जाता हूं। ताकिवे आगेहिल नाँ सके। औऱ अपने होंठ कों माँ केँ होठों कों मिला देता हूं। माँ कों किस करतेहुए मे उनकी बुर मे एक् झटका देता हूं। जिससे आधा लन्ड बुर मे चला जाता हैं। जिससे माँ कि मुंह सें चीख तौ निकलती हैं मगर वो मेरे मुंह केँ अंदर हि दब केँ रह जाता हैं। माँ यहसभी 3 सालों बाद महसूस कररही थि। जिस कारण मम्मी कों इसउमर मे भि लन्ड लेने सें दर्द महसूस होँ रहा थां।
मम्मी थोडा सां हि शांत हुई थि कि मे फिन सें एक् धक्का दे देता हूं जिससे पूरा लन्ड बुर मे समा जाता हैं। इसबार मम्मी अपने मुंह कों मुझसे छुड़ा लेती हैं औऱ चिल्लाते हुए मुझे धक्के देने लगती हैं - ओह्ह मे मर जाऊंगी उईईई माँ इसे निकाल बेटा उउउ आआह्ह्ह बहोत दर्द होँ रहा हैं।
कुछदेर तक ऐसे हि अपने लन्ड कों बुर मे रखतेहुए मे माँ केँ ऊपर लेटा रहता हूं। औऱ उनके चेहरे कों सहलाते हुए उन्हें सांत करता हूं। कुछदेर बाद माँ शांत हौ जाती हैं जिसके बाद मे अपनीकमर कों आगे पीछे करते हुईँ उन्हें आहिस्ता चोदने लगता हूं। जिससे माँ कों भि मजाआने लगा औऱ वो मजे मे आहें भरने लगती हैं - ओह्हहाय ऊह्ह।
बुर इतनागरम थां कि मुझेलग रहा थां मेरा लन्ड अंदर हि पिघल केँ रह जाएगा। इसलिये मे अपना स्पीड भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके थोडा औऱ बढ़ा देता हूं।
जिसके कारण माँ भि अपने करहाने केँ आवाज़ कों बढ़ा देती हैं। मे माँ कों अपने बाजुओं मे कस केँ पकड़ लेता हूं। औऱ बहुतजोर जोर सें मे चोदने लगता हूं। मेरेहर एक् धक्के केँ संग बिस्तर चर-चर करकेहिल रहा थां।
मेरे जोरदार धक्कन सें माँ झड़ते हुए बोलती हैं - हाय बेटा मेरा होँ गय़ा।
मे जीवन मे पहलीबार किसी कों चोदरहा थां। वो भि अपनी 3 साल सें नाँ चोदी हुईँ मम्मी कों। मे झड़ना तौ नहि चाहता थां मगरफिन भि मेरामाल निकलने वाला थां।
जिसके बाद मे अपना लन्ड निकाल लेता हूं औऱ अपना सारामाल माँ कि बुर केँ ऊपर गिरा देता हूं औऱ उनकेऊपर हि सो जाता हूं।
दूध का दम - padihai chhod di – New Episode
Update 7
(स्टोरी राजू कि जुबानी)
सुभहजब मेराआंख खुलता हैं तौ मे चौक जाता हूं। मे पीठ केँ बल सीधा होके सोया थां औऱ माँ मेरे सीने पर्र अपनासिर औऱ एक् पाव कों मेरेऊपर रखकरसोई हुई थि। आज भि मे मात्र एक् चड्डी मे सोया थां, जिसमें मेरा लन्ड पुरातन केँ खड़ा हौ गय़ा थां, लन्ड कां सुपाड़ा तौ चड्डी सें बाहर् हौ गय़ा थां। औऱ मां कल कि तरह हि आज भि पेटीकोट औऱ ब्रा मे सोई थि।
उनका पेटीकोट जांघों तक ऊपर हौ गय़ा थां। इसलिये मे माँ केँ अधनंगी जांघों कों अपने खड़े लन्ड पर्र साफ महसूस कर सकता थां। नां जानेकब सें मेरा लन्ड उस मोटी सि जांग केँ नीचे दबके केँ झटकेखा रहा थां।
उन्होंने आज जोँ ब्रा पहना थां वोँ भि मां केँ विशाल चुचियों कों नहि देखपा रहा थां। आधी सें ज्यादी चूचियां उनके ब्रो सें बाहर् थां, जोँ मुझे मेरे नंगे छाती पर्र सांप महसूस होँ रहा थां।
अजीबबात तोँ ये थां कि, कलजब मे सोया थां तोँ माँ मेरेपास नहि सोई थि। बीच मे रात कों एक् बार मेराआंख खुला थां तब भि मां मेरेपास नहि थि। शायद बहुतरात कों वो मेरेपास आकरसोई थि।
मगरजब उन्हें मेरेपास होना हि थां तौ पहले क्यूं नहि आईआधी रात कों आने कां क्याँ मतलब थां। कलरात पिताजी भि घऱआएहुए हें कहीं माँ औऱ पिताजी रात कों नहि नहि नहि।
मुझे अंदर सें बहुत बुरा महसूस होँ रहा थां। जैसेकल रात कों मां, बापू केँ संग मिलकर मुझे धोखा दिया होँ। वो दोनों पति-पत्नि हैं, उन दोनों कों चुदाई करने कां पूराहक हैं। मगर नां जाने क्यूं मुझे इतना बुरालग रहा थां। जिसके कारण मे इस सुनहरे लम्हा कों जीने कि वजह, अपने ख्यालों मे खोया थां।
कलरात सें हि मे माँ कों अपना प्रॉपर्टी समझ लिया, जिस पर्र मात्र मेराहक हैं। जिसखेत कि अब मे हि मात्र जुताई औऱ सिंचाई कर सकता थां। मगरकल रात कों उसखेत पे पिताजी नें अपना औजारचला दिया। यह जानते हुए कि नां जाने मेरे पिताजी नें उसखेत कों कितना जूता होगा, उन्होंने हि इसखेत मे अपनेबीच कों बो केँ मुझे पैदा किया हैं। मगरअब वो केवल मेरी थि उन दोनों नें मेरेसंग ऐसा क्यूं किया।
मे छत कों देखते हुए अपने खयालों मे इतनाखो गय़ा थां कि, मुझेपता हि नहि चला कि माँ कबउठ गई। मुझेइस तरह ख्यालों मे खोयादेख मां मुझे हीलाती हैं, तब जाकर मे होश मे आता हूं।
मां कां चेहरा देखकर मुझे इतना क्रोध आँ रहा थां कि, मनकररहा थां उन्हें अपनेबैड पऱ सें धकेलदु। मगर मे अपने गुस्से कों काबू करतेहुए अपने चेहरे कों दूसरी तरफकर लेता हूं।
मां कों मेरेइस हरकत सें थोडा अजीब लगता हैं। मेरे चेहरे कों अपनी औऱ करतेहुए थोड़े गुस्से सें कहती हैं - क्याँ हुआ इतनी बदसूरत लगरही हूं क्याँ जोँ ऐसे मुंहफेर रहा हैं।
मेरामन जोँ पहले सें खराब थां मां कि बात सुनकर औऱ भि खराब होँ जाता हैं। मे उन्हें बिनाकुछ कहे अपने पलंग पऱ सें उठता हूं औऱ अपने सारे कपड़े पहन केँ घऱ सें बाहर् चलाआता हूं। माँ मेरेइस बर्ताव कों बहुत हैरानी सें देखरही थि।
घऱ सें कुछदूर जाने केँ बाद मेरेमन मे ख्याल आता हैं कि मे कुछगलत तौ नहि कररहा। जिसके बाद मे पीछे मुड़ केँ घऱ केँ दरवाजे कि तरफ देखने लगता हूं, इसआस मे कि मां वहां मेरेलिए खड़ा होगी। मगर वहां पर्र नहि थि जिसके कारण मेरा क्रोध सातवें आसमान पर्र पहुंच जाता हैं।
जब मे कालू केँ घऱ केँ दरवाजे केँ पास पहुंचता हूं। तब मुझे कालू कां कल कां बातयाद आँ जाता हैं कि, वो आज अपनी मम्मी कों चोदने वाला थां। ये ख्याल आते हि मे उन दोनों कों परेशान नहि करता हूं औऱ अकेले हि खेत पर्र चला जाता हूं।
अकेले होने केँ कारणआज सब्जियां तोड़ने मे बहुत देरी होँ गय़ा। औऱ ऊपर सें यह क्रोध जिसे मैंने सब्जियों केँ कुछ पौधों पर्र निकाल दिया थां। खैर मे किसीतरह सब्जियां तोड़ लेता हूं। इतने भारी बोरे कों तुम्हें घऱ लें जाने सें रहा इसीलिए मे टेंपो कों लेनेघऱ चला जाता हूं।
टेंपो कां चाबी लेनेजब मे घऱ मे जाता हूं। तब मां मेरेपास आती हैं औऱ मेरेपीठ पर्र एक् चमार मारते हुए कहती हैं - क्याँ हौ गय़ा तुम् मुझे सुभहऐसे देखरहा थां जैसे मुझेमार हि डालेगा तुझेही डर नहि लगतामुझ सें।
मां भलेये सभी मजाक मे कहरही थि मगर मे तौ सीरियस थां। मे मां केँ बातों कां कोई जवाब नहि देता औऱ चुपचाप बाहर् निकल जाता हूं मां भि मेरे पीछे पीछेआती हैं। वे बहुत मुझेरोक केँ जानने कि कोशिश करती हैं कि मे क्रोध क्यूं मगर मे नहि रुकता औऱ टेंपो लेकरचला जाता हूं। इसबात सें माँ समझ जाती हैं कि मे किसीबात कों लेकर बहुत क्रोध हूं मगर उन्हें यहसमझ मे नहि आँ रहा थां कि किस पे।
मे खेत सें सब्जियां लेने केँ बाद वहां सें तबेले मे चला जाता हूं। जहां पर्र मे बापू सें भि अच्छे सें बात नहि करता हूं। मगर मे उन्हें यह अहसास नहि होने देता हूं कि मे किसीचीज कों लेकर क्रोध हु। वहां सें दूध लेने केँ बाद मे मार्केट चला जाता हूं औऱ वहां सें सीधा पोल्टी फार्म चला जाता हूं घऱ नहि जाता।
रह रह केँ मेरेमन मे एक् हि बात आँ रहा थां कि, रात कों पिताजी नें माँ कों केसे चोदा होगा। साड़ी उठाके नहि। उन्होंने तोँ सुभह केवल पेटीकोट औऱ बड़ा पहना थां, जिसका मतलब बापू नें उसे पूरा नंगा करके चोदा थां। खटिया पर्र लेटे मे यहीसोच रहा थां। मुझेकब नींदलग जाता हैं मुझे स्वयं नहि पता।
ख्वाब मे मे देखता हूं कि, मां अपने कमरे मे पूरी नंगी होकर लेटी हुईँ थि औऱ बापू अपने लन्ड कों उनकी बुर मे डालकर उन्हें हुमच हुमचकर चोदरहे थें।
औऱ माँ चोदते हुएकह रही थि - आह्ह औऱ जोर सें चोदोआह मुझे एक् औऱ बेटा चाहिए तुम्हारी इस बेटी सें कुछ नहि होता।
इतना सुनते हि मे जोर सें नहि कहकरउठ जाता हूं। मे पूरा पसीना पसीना होँ गय़ा थां। तभी मेरानजर मेरेफोन पर्र पड़ता हैं। जिस पर्र कालू कां मोबाइल आँ रहा थां। मे उसका मोबाइल उठा लेता हूं
तभी कालू केहता हैं - कहां हैं तूँ खेलने नहि आनां हैं तेरी सुरेश केँ घऱ मे।
मे - दोस्त आज नहि जा पाऊंगा मेरा तबीयत बहोत खराब हैं मुझे बहोत तेज बुखार भि आया हैं।
फिन कालूठीक हैं कहकर मोबाइल रख देता हैं। उसकेबाद मे भि अपनेघऱ चला जाता हूं।
दूध का दम - padihai chhod di - Next part mein bada twist
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