द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism} - चमत्कारी आईना - Real Kahani Part 1
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism}
परिचय:==>★
प्रस्तुत स्टोरी केँ सब पात्र औऱ घटना क्रम काल्पनिक हैं। इस किस्सा कां किसी भि जीवित याँ मृत आदमी सें कोई संबंध नहीं हैं। यदिकोई संबंध होता हैं तोँ इसे केवल एक् संयोग कहा जायेगा। " द मैजिक मिरर (The Magic Mirror)" यहकथा एक् टीनएज लड़के कि हैं जिसे 24 वींसदी मे किश्मत सें एक् चमत्कारी आईनामिल जाता हैं। मगर चमत्कारी आईने कां एक् खासराज भि हैं यह आईना इस्तेमाल करने वाले शख्स कि ख़्वाहिशें तभी पूरीकर सकता हैं जब वोँ आदमीउस आईने केँ लिए अपनी सबसेखास चीज कां त्याग करे। यह आईना काले चमत्कार औऱ तंत्र सें लगभग 100000 साल पहले रानी नेत्रा नें अपने राज्य केँ तांत्रिकों सें बनवाया थां। क्योंकि तांत्रिक राजभक्त थें मगर राजभक्त होने केँ संगसंग वोँ लोभी भि थें तौ उन्होंने इस आईने मे जेड 5 हीरों मे अपनी-अपनी आत्माओं कों क़ैदकर दिया। उनकी आत्मा इस आईने मे कैद होने सें अबयह आईना अपनी एक् इछा केँ बदले मे इस्तेमाल करने वाले कों पूरा एक् दिन देता हैं। इस एक् दिन मे आईने कां मालिक जोँ भि इच्छा करेगा उसे पूरा करने केँ लिएयह आईना बाध्य थां। आईने कां इतिहास औऱ उस आईना कां किस्सा केँ हीरो तक पहुंच नें तक कां सफ़र आप् पहले अध्याय मे पढ़ेंगे। दूसरे अध्याय मे आप् हीरो द्वारा आईने कां प्रयोग औऱ आईने केँ प्रयोग केँ लिए किया गय़ा त्याग पढ़ेंगे। तीसरे अध्याय मे आप् कथाअंत देखेंगे।
अध्याय-1
भाग - 1
इस स्टोरी कां हीरो एक् टीनएज लड़का हैं। जिसने अभि-अभि दसवीं कक्षा कि परीक्षा पासकर केँ 11 वीं कक्षा मे कदमरखा हैं। राज़ पढ़ने मे बहोत हि होशियार हैं तोँ उसने दसवीं कक्षा 89% अंकों सें उतीर्ण करली। यह किस्सा तब शुरुआत हुई जब राज़ (राजेश) तीन महीनों कां जोँ परीक्षा केँ बाद अवकाश होता हैं उसमें अपनी नानीमा केँ पास देहात गय़ा थां। राज़हाँ यहीनाम हैं अपने हीरो कां। देखने मे एकदम सीधा सादा, भोला भाला, जादुई दुनिया, औऱ परियों कि दुनिया अपने ख़्यालों मे रचकर अकेले एकांत मे बैठकर दिन निकालने वाला। कोई कह नहीं सकता कि यह लड़का एक् दिन इतनी बड़ी ताकत कां मालिक बन बैठेगा।
राज एक् मिडिल क्लास परिवार सें हैं। इसका परिवार नाँ तौ गरीब हैं नां हि अमीर हैं। फिन भि किसी भि प्रकार कि भौतिक सुख-सुविधा सें यह अछूते नहि हैं। स्टोरी आगे बढ़ाने सें पहले हम् एक् बार राज़ केँ परिवार केँ बारे मे अच्छे सें जान लेते हैं।
राज केँ परिवार मे राज़ केँ पिताजी, मां, 2 बहनें औऱ एक् नानीमा रहती हैं। राज़ केँ दादाजी-दादीमा औऱ नानाजी कां देहांत बहुत अर्से पहले हि होँ गय़ा थां। नहि-नहि कोई दुर्घटना मे नहि बल्कि बीमारियों कि वजह सें राज़ केँ दादाजी कैंसर सें पीड़ित थें औऱ दादीमा टी.बी। कि मरीज थि। इलाज करवाया गय़ा थां मगर होनी कों कौनटाल सकता थां। राज़ केँ नानाजी कों अस्थमा कां रोग थां। देहात मे उड़ती धूल मिट्टी कि चपेट मे आयेदिन आते रहते थें तोँ एक् दिनउस मिट्टी नें राज केँ नानाजी जी कि सांस हि उखाड़ ली।
राज़ कि नानीमा कों कोई तकलीफ़ नहीं हैं बल्कि वोँ जवानों सें ज़्यादा स्वस्थ हैं। मेरा मतलब जोँ 80 साल कि बूढ़ी स्वयं बिना लाठी केँ सहारे अपने खेतों केँ बागों कां ध्यान रखेउसे 80 साल कि बुढ़िया कहना तौ सरासर गलत हि होगा नां। चलिए मुर्दों कि बात यहीं ख़त्म करते हैं औऱ ज़िंदा लोगो कि भि खबर लें लेते हैं। राज़ केँ पाप एक् सरकारी बैंक कर्मचारी हैं। उनकी सेलेरी यही चालीस-45 हजार केँ लगभग होगी।
राज़ केँ बापू कां नाम गिरधारी हैं। गिरधारी जी कि उम्रकोई 45-48 वर्ष केँ आस-पास होगी।
गिरधारी जी बहोत हि साधारण जिंदगी जीने मे यकीन रखते हैं। यह सुभह 8 बजेघऱ सें निकलते हैं बैंक केँ लिए औऱ बैंक सें साम कों 5 बजे निकलते हैं औऱ 5.45 तक याँ फिन कभी-कभी 6 बजे तक घऱ पहुंच जाते हैं।
राज़ कि मां कां नाम हैं सरिता देवी।
सरिता एक् डॉक्टर हैं। कभी-कभी हॉस्पिटल मे इमरजेंसी पड़ने पर्र जाती हैं वरना तौ यह आपकोघऱ पर्र याँ घऱ सें दोढाई किलोमीटर दूर इनका क्लिनिक हैं वहां पऱ अपने मरीजों केँ संगमिल हि जाएगी। जी बिल्कुल अपने मरीजों केँ संग क्यूं कि सरिता गिरधारी जी सें 5 साल छोटी हैं तोँ इनकी उम्र करीब-करीब 40 याँ 38 केँ आसपास होगी। तोँ कुछ मरीज़ तौ वाकई मे किसी बीमारी केँ शिकार होतें हैं मगरकुछ मरीज तौ सरिता देवी कि हसीन जवानी केँ शिकार थें। इनकी विवाह गिरधारी जी सें कम उम्र मे हि कर दि गई, थि। औऱ काम उम्र मे हि इनकी 2 संताने हुईँ दोनों संताने लड़की होने केँ कारण गिरधारी जी नें तीसरी संतान केँ लिए प्रयास करीब-करीब 5-6 साल केँ अंतराल केँ बाद किया औऱ किशमत सें इन्हें बहोत हि हसीन संतान प्राप्त हुईँ औऱ इसबार यह संतान लड़का थि। जी हमारा हीरो राज़। अब आप् कहेंगे कि मैंने राज़ कि बहनों कां परिचय नहीं करवाया। इस सें पहले कि आप् मुझसे नाराज हों मे उनका परिचय भि करवा देता हूं।
राज़ कि सबसे बड़ी बेहन कां नाम हैं रानी। रानी कि फ़िगर हैं 32सी 30 35, रानी बहोत हि शर्मीली लड़की हैं। फिरभी मॉडर्न लड़की हैं मॉडर्न कपड़े भि पहनती हैं मगरयह किसी सें भि बात करने मे बहोत शर्माती हैं।
रानी सें छोटी हैं सोनिया राज़ कि दूसरी बड़ी बेहनयह भि रानी कि तरह मॉडर्न हैं मगर बहोत भोली हैं।
सोनिया जब भि चुपचुप रहती हैं तोँ ऐसे लगती हैं जैसी किसीबात कों लेकर परेशान होँ याँ फिन दुःखी होँ मगरजब बोल्ना शुरुआत करती हैं तोँ बसराम बचाये जान।
भोली होने केँ संग-संग सोनिया कों राज़ सवालों कि मशीन बुलाता रहता हैं क्योंकि यह इतने प्रश्न पूछती हैं कि कोई भि पागल होँ जाये। अपनेइसी भोलेपन केँ कारण इसनेघऱ मे सब कां दिलजीत रखा हैं।
सोनिया कां फ़िगर हैं 32सी 28 34, सोनिया औऱ रानी दोनों कॉलेज मे पढ़ती हौ। रानी जहां बायो स्टूडेंट हैं औऱ फाइनल ईयर कि तैयारी कररही हैं वही सोनिया इंजीनियरिंग केँ सेकंड ईयर कि तैयारी कररही हैं।
अब स्टोरी मे आगे बढ़ते हैं जब राज़ अपनी नानीमा केँ पास देहात पहुँचा।
राज़ केँ पिता राज़ कि मां सें बातें करते हैं कि राज कों क्यूं नाँ गर्मी कि छुट्टियां बिताने कहीं घूमने लेँ जायाजाए। राज़ केँ पिता केँ इस विचार सें राज़ कि मां भि खुश थि। राज़ कि माँ इसबात कों लेकर बहोत परेशान रहा करती थि कि राजअब ग्यारहवीं कक्षा मे जाने वाला हैं औऱ यह गुमसुम सें बैठापता नहि क्याँ सोचता रहता हैं। नां किसी सें अधिकबात चीत करता हैं नाँ हि खानां ठीक सें खाता हैं। अगर राज़ अपनी नानीमा केँ पास जाएगा तौ उसकीहवा पानी भि बदल जाएगी औऱ संग हि देहात केँ कुछ साथीबना लेगा तौ अच्छा रहेगा। यहां तोँ यह किसी सें बात भि नहीं करता।
राज़ केँ पिता राज़ कि माँ केँ इसमत सें बहोत हि गंभीर होँ जातें हैं औऱ सीधे सें राज़ कि माँ सें बोलते हैं दोस्त तुम्हारी बात तौ ठीक हैं मगरवहा तुम् जानती होँ नां तुम्हारे बापू क्याँ चमत्कार टोने किया करते थें। औऱ फिन तुम्हारी माँ अभि तक ऐसी हैं जैसे उन्हें 80 साल कि उम्र कों तय तक नाँ किया हौ। सर पऱ सफेद आगये हैं मगर चलतीऐसे हैं जैसे कि 40-45 साल कि स्त्री चलती होँ।
राज़ कि माँ हें यह क्याँ बात हुइ ईश्वर करे मेरी मां औऱ जियें औऱ हां वेसे आप् कि चिंता जायज हैं मगर देखिये नां पापा तोँ अबरहे नहीं, तौ क्याँ चमत्कार टोना होगावहा, दूसरी बात मां भि तोँ बहुत वक्त सें अकेली पड़ गयीँ, हैं। अबजब उनका नाती जाएगा तौ वोँ कितनी खुश होंगी। औऱ वेसे भि मे अपना क्लिनिक बन्द नहींकर सकती औऱ आपको भि तौ 3 महीनों कि छुट्टी तौ मिल नहीं सकती।
राज़ केँ पाप बहुत विचार करकेठीक हैं फिन मे छुट्टी नहीं लेता हूं वैसे मुझे 1 महीने कां अवकाश तोँ मिल हि सकता हैं मगर 3 महीने तोँ नहि। चलोफिन मे राज़ कों उसकी नानीमा केँ पास छोड़कर उसीरात वापस आँ जाउँगा। सरिता यहबात सुनकर बहोत खुश होती हैं। वोँ अपने पति केँ गले मे बाहें डालकर उसे एक् चुम्बन दे देती हैं। गिरधारी सरिता कां चुम्बन पाकर सरिता सें बोलता हैं। लगता हैं आज बहुतसमय बाद बिस्तर तोड़ना पड़ेगा। गिरधारी कि यहबात सुनकर सरिता इशशशशश करके शर्मा जाती हैं औऱ वो सें रसोई मे चली जाती हैं।
रात कों खाने केँ समय गिरधारी बेटा राज़ तुम् अपने कपड़े जमालो एक् बैग मे हम् लोगकल तुम्हारी नानीमा केँ पास जाएंगे। तभी रानी बोलती हैं पिताजी हमसे क्याँ कोई दुश्मनी हैं जोँ इस लाड़साब कों हि पूछरहे होँ। रानी कि यहबात सुनकर सोनिया हसने लगती हैं। औऱ राज कि मां सोनिया केँ सर पऱ हल्के सें मुस्कुराते हुए मारती हैं औऱ कहती हैं चुपचाप खानां खाओ। टैब गिरधारी बोलता हैं बेटी राज़तीन महीने अपनी नानीमा केँ पास रहेगा क्याँ तुम् लोगों केँ पास इतनासमय हैं?
रानी औऱ सोनिया दोनों एक् संग बोलती हैं तीन महीने????
तभीराज खाने कि टेबल सें उठकर जाने लगता हैं। तोँ सरिता पूछती हैं। क्याँ हुआ बेटा।
राज़:=कुछ नहि मां वोँ पाप नें बोला नां कपड़े जमाने कों तोँ.
सरिता- बेटा वोँ तोँ ठीक हैं मगर तूने बताया नहीं कि तुँ जानां चाहता हैं याँ नहि।
तभी रानीबीच मे बोलती हैं.
रानी-अरे माँ यह क्यूं मना करेगा नानीमा इसेरोज रोजनई नई चमत्कार औऱ जादूगरों कि कहानियां जौ सुनाएंगी। हि हि हि
राज़- रानी कि बातसुन करमन हि मनखुश होँ जाता हैं कि उसे अवश्य नानीमा सें नई चमत्कार कि कहानियां सुन नें कों मिलेगी।
मगर रानी केँ मुह सें चमत्कार औऱ कथा कि बातसुन कर गिरधारी औऱ सरिता एक् दूसरे कि तरफ सीरियस होकर देखने लगतें हैं।
राज़ बिनाकुछ बोले अपने कमरे मे चला जाता हैं औऱ अपना सामान पैक करने लगता हैं। रानी औऱ सोनिया दोनों कां रूम एक् हि थां बस दोनों केँ बिस्तर अलगअलग लगे थें दोनों अपने अपनेखाट पऱ बैठकर नावेल निकाल कर पढ़ने लगती हैं। बाहर् गिरधारी सरिता सें बोलता हैं।
गिरधारी- सरिता तुम् अपनी माँ सें अभि साफसाफ बोलदो फ़ोन पर्र कि राज़ कों कोई चमत्कार वादु कि बात नां सिखाये राज़ उनकेपास तीन महीने रहने आँ रहा हैं। मे नहि चाहता तुम्हारे पापा जैसाकुछ मेरे बेटे केँ संग होँ। सरिता कि आंखों मे आंसू आँ जाते हैं। सरिता पलटकर गिरधारी सें.
सरिता-क्यूं क्याँ राज़ मेरा बेटा नहीं हैं मैंने पहले हि माँ कों सभीबोल दिया।
गिरधारी सरिता कों रोतादेख उसके कंधे पऱ हाथ रखता हैं मगर सरिता बहोत दुखी थि उसने जल्दी गिरधारी कां हाथ अपने कंधे सें हटाकर अपने कमरे मे चाकी गयीँ,। पीछे पीछे गिरधारी भि जाता हैं मगर सरिता गिरधारी केँ मुह पर्र दरवाजा बंदकर देती हैं औऱ अंदर मुस्कुरा पड़ती हैं। बाहर् गिरधारी भि मुस्कुरा पड़ता हैं। सारीरात गिरधारी सोफा पऱ लेटकर गुजार रहा थां।
बहोत हि शानदार शुरुआत हैं मित्र
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism} - चमत्कारी आईना – New Episode
एपसोड - 2
गिरधारी सरिता कों रोतादेख उसके कंधे पर्र हाथ रखता हैं मगर सरिता बहोत दुखी थि उसने जल्दी गिरधारी कां हाथ अपने कंधे सें हटाकर अपने कमरे मे चाकी गयीँ,। पीछे पीछे गिरधारी भि जाता हैं मगर सरिता गिरधारी केँ मुह पर्र दरवाजा बंदकर देती हैं औऱ अंदर मुस्कुरा पड़ती हैं। बाहर् गिरधारी भि मुस्कुरा पड़ता हैं। सारीरात गिरधारी सोफा पर्र लेटकर गुजार रहा थां।
अबआगे.
फिन सुभह हुई.
आज सुभह सें हि बारिश हौ रही थि।
राज़ केँ बापू सुभह 6 बजेउठे। छुट्टी कां दिन थां औऱ फिन मात्र राज़ कों उसकी नानीमा केँ पास छोड़ने कां हि तोँ एक् काम थां उनकेपास तौ आज वोँ अपनी नींद पूरी करतेहुए 6 बजेउठे। बाहर् हल्की-हल्की रोशनी औऱ चिड़ियों कि चूँचूँ कि आवाजें थि। मौसम भि एक् दमसाफ थां। फिन अचानक 20 मिनट मे ऐसा क्याँ हौ गय़ा। फ्रेश होकर ब्रश हि किया थां कि अचानक सें इतनीतेज बिजली कड़की कि एक् बार तौ वोँ भि डर सें हिलगए। फिनजब खिड़की सें बाहर् झांका तोँ बहोत तेज बारिश होँ रही थि। गिरधारी इसबात कों हल्के मे लें जाता हैं सोचता हैं सबसे बड़ी ताकत प्रकृति हि तोँ हैं। राज केँ पिताजी गिरधारी अभि रसोई मे जाकर अपनेलिए कप कॉफ़ी बना हि रहे थें कि राज मां भि फ्रेश हौ कर बाहर् आँ गयीँ,।
सरिता:- अरेआज आप् जल्दउठ गए। वरना तौ छुट्टी केँ दिन आप्.
अभि सरिता कुछबोल हि रही थि कि राज केँ पिताजी नें सरिता कों पीछेघूम कर अपनी बाहों मे जकड़ लिया।
गिरधारी: अरे आपनेहमे रात कों सोने लायक छोड़ा हि कहां थां। हम् तोँ सारीरात प्यास करकाट रहे थें। सोचा सुभह जल्द यहां सें राज़ कों लेकर निकल जाएंगे तोँ रात सें पहलेघऱ आँ जायेंगे।
सरिता अपने दोनों हाथों कों अपनेपेट पर्र पड़े गिरधारी केँ हाथों पर्र रखकर गिरधारी सें पूछती हैं।
सरिता: औऱ भलाऐसा क्यूं?
गिरधारी सरिता केँ एक् कान कों अपनेमुह मे लपक लेता हैं औऱ उसके झुमके कों अपनेमुह मे लें लेता हैं। सरिता उसओर अपनी गर्दन झुकाकर।
सरिता: अरे रुकिए आपकी कॉफ़ी।
गिरधारी कॉफ़ी कि सुनकर सरिता कां कान छोड़ देता हैं।
सरिता कॉफ़ी संभलते हुए
सरिता: आपने बताया नहीं (मुस्कुराते हुए पूछती हैं)
गिरधारी: सोचा बहोत दिन हौ गए आपको हम् हमारे होने कां एहसास नहीं दिलापा रहे हैं। इसलिए क्यूं नाँ आजरात कों.
सरिता पलटते हुए अपने हाथों मे 2 कपकप कॉफ़ी लेकर गिरधारी कों बीच मे टोकते हुए बोलती हैं।
सरिता:- बसबस अधिक रोमांटिक होने कि ज़रूरत नहीं हैं। अब आपके बच्चे, बच्चे नहींरहे समझे, लीजिये कप कॉफ़ी.
गिरधारी सरिता केँ हाथ सें कॉफ़ी लेकर सोफा कि ओर बढ़ते हुए बोलता हैं।
गिरधारी: अरेअगर हम् इतने रोमांटिक नहीं होते तोँ हमारे बच्चे हि कहां होते।
गिरधारी इतना बोलकर पीछे मुड़कर सरिता कों देखता हैं। सरिता औऱ गिरधारी दोनों कि आंख मिलती हैं औऱ दोनों हल्के हल्के मुस्कुरा पड़ते हैं।
सरिता भि आकर गिरधारी केँ सामने बैठ जाती हैं। सरिता कुछ बोलने कों हुई थि कि रानी औऱ सोनिया दोनों नीचे आँ तेहुए बोलती हैं गुड मॉर्निंग मोमडैड।
गिरधारी औऱ सरिता दोनों एक् संग बोलते हें गुड़ मॉर्निंग बेटा।
तभी सोनिया बोलती हैं।
सोनिया: क्याँ हुआ मम्मी आपके लाड़ साहब अभि तक नहींउठे क्याँ?
रानी: सोनेदे नां दोस्त बच्चा हि तोँ हैं औऱ वैसे भि अब तोँ नानीमा केँ पासचला जायेगा। बसकुछ हि देर हैं हमारे संग।
तभी एक् जोरदार बिजली कड़कती हैं औऱ लाइटगुल।
दोनों लड़कियों कि बिजली कि कड़कसुन करचीख निकल जाती हैं यहां तक कि सरिता कि भि.
रानी: सत्यानाश हौ इस बीजली कां अब मे कॉफ़ी भि नहींबना पाऊंगी।
सोनिया: दि कितनी स्टुपिड होँ आप्, फोन कि लाइटऑन करलो नाँ।
रानी: अच्छा मे स्टुपिड हूं तोँ मेरी समझदार राजकुमारी जीअबयह कॉफ़ी आप् हि बनाइये।
तभीऊपर सें राज नीचेआने लगता हैं वोँ भि अंधेरा मे.
राज़: दि आप् हैं क्याँ यह लाइट कों क्याँ हुआ हैं। लाइट तोँ जलाइए।
राज़ नें अभि इतना हि बोला थां कि लाइट आँ गयीँ, बारिश भि थोड़ी बहोत कम होँ गई, थि।
रानी:लो जला दि लाइट।
राज़:ओह तौ आप् सब यहां पर्र हैं, गुड मॉर्निंग एवरीवन
सोनिया: दि अब तौ लाइट भि आँ गयीँ, अब आप् हि कॉफ़ी बनाईयह।
रानी 2 कॉफ़ी बनाकर लेँ आती हैं एक् सोनिया औऱ एक् स्वयं केँ लिए, राज़ कों एक् ग्लास मे दूधदे देती हैं।
सब कॉफ़ी औऱ दूध कि चुस्कियां लगारहे थें कि बाहर् बारिश धीमी हौ जाती हैं।
लगभग एक् घंटेबाद गिरधारी औऱ राज दोनों नानीमा केँ घऱ जाने कों सजधजकर हौ गए थें।
राज़ कि माँ राज़ कां माथा चूमती हैं औऱ सोनिया औऱ रानी राज़ कों गले लगाकर विदा करते हैं।
राज केँ पिताजी अपनीकार मे राज़ कां सामान रख देते हैं औऱ दोनों बाप बेटे नानीमा करघऱ केँ लिए रवाना हौ जाते हैं।
राज़ औऱ उसके बापू कों घऱ सें निकले अभि आधा घंटा भि नहींहुआ थां कि एक् बारफिन सें बारिश होने लगती हैं। इसबार सुभह सें भि अधिकतेज। राज केँ बापू कों लगता हैं कि ऐसी बारिश मे आगे बढ़ना ठीक नहींमगर अब यहांरुक भि तौ नहीं सकते हम् लोगशहर सें बाहर् आँ गये हैं। राज़ केँ बापू अभि यहसभी विचार कर हि रहे थें कि अचानक सें बारिश कम होँ जाती हैं। राज़ केँ पिताजी अपनी स्पीड बढ़ा लेते हैं। राज़ कि नज़र खिड़की सें बाहर् कि तरफ थि। जब अचानक सें राज़ वाहन कि स्पीड बढ़ते देखता हैं तोँ वोँ सामने नज़रकरत हैं। राज़ एकदम सें चोंक जाता हैं। फिन राज़ पीछे नज़र करता करता। पीछे कि औऱ देखकर तौ राज़ औऱ भि बुरीतरह सें डर जाता हैं।
nice start great kahani keep writing brother
bhut hi sandaar lajawaab Shuruwaat h bhay.......superb action.........! Zabardast shuruwat
Excellent update , waiting for next update
to slow ................... plz update tez
MAST UPDATE h bhay JI
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism} - चमत्कारी आईना – New Episode
भाग - 3
राज़ औऱ उसके बापू कों घऱ सें निकले अभि आधा घंटा भि नहींहुआ थां कि एक् बारफिन सें बारिश होने लगती हैं। इसबार सुभह सें भि ज़्यादा तेज.राज केँ बापू कों लगता हैं कि ऐसी बारिश मे आगे बढ़ना ठीक नहींमगर अब यहांरुक भि तोँ नहीं सकते हम् लोगशहर सें बाहर् आँ गये हैं। राज़ केँ बापू अभि यहसभी विचार कर हि रहे थें कि अचानक सें बारिश कम होँ जाती हैं। राज़ केँ पिताजी अपनी स्पीड बढ़ा लेते हैं। राज़ कि नज़र खिड़की सें बाहर् कि तरफ थि। जब अचानक सें राज़कार कि स्पीड बढ़ते देखता हैं तौ वोँ सामने नज़रकरत हैं। राज़ एकदम सें चोंक जाता हैं। फिन राज़ पीछे नज़र करता करता। पीछे कि औऱ देखकर तोँ राज़ औऱ भि बुरीतरह सें डर जाता हैं।
अबआगे.
राज़: पिताजी?
गिरधारी: हम्म
राज़: बापू
गिरधारी अपनी स्पीड कम करतेहुए
गिरधारी: क्याँ बात हैं बेटा?
राज़:पाप हमारी व्हीकल केँ सामने बारिश कम हैं औऱ साइड मे तौ बहोत तेज हैं।
गिरधारी एक् बार तौ यहसुन कर चोंक जाता हैं मगरफिन अगले हि समय स्वयं कों संभालते हुए,
गिरधारी: बेटा कईबार ऐसा होता हैं। कईबार तोँ पूरी दोपहर मे जबधूप रहती हैं तब भि बारिश होँ जाती हैं जिसे हम् बिन बादल बरसात भि कहते हैं।
राज़:मगर पिताजी हमारी कार केँ पीछे भि ऐसी हि बारिश हौ रही हैं तेज।
गिरधारी स्वयं डराहुआ थां जब उसनेयह मंज़र देखा तौ अब गिरधारी औऱ कुछ भि नहीं देख्ना चाहता थां।
गिरधारी:तुम् डरोमत बेटा मे हूं नां।
राज़ गिरधारी कि बात सुनकर कुछ नहि बोलता।
गिरधारी स्वयं इतनाडर हुआ थां कि उसकेहाथ ड्राइविंग करतेहुए काँपरहे थें।
राज़समझ गय़ा थां कि उसकी पिताजी डररहे हैं। राज़ नें जब अपनें पिताजी कों डर सें कांपते हुए देखा तौ राज़ स्वयं डर केँ मारे कांपने लगा।
गिरधारी नें एक् नज़र राज़ पऱ डाली तोँ राज़ कों डर सें कांपकर सिमटते हुए देखा।
गिरधारी इस बरसात केँ बारे मे सोचरहा थां। वोँ मन हि मन विचार कररहा थां कि जिसतरह सें सुभह बरसात कां होना। हमारे निकलने केँ थोडा सां पहले आसमान बिल्कुल साफ औऱ जब हम् घऱ सें थोडा दूर निकलआये तोँ फिन सें बरसात। औऱ अबयह बरसात मात्र हमारी वाहन पऱ हल्की हल्की होँ रही बाकियों पऱ तोँ जैसेकहर बरसरहा होँ। कहींयह सभी राज़ कों वहां लें जाने केँ कारण तोँ नहीं होँ रहा। नहि नहि राज़ तौ अभि बच्चा हैं। उसका औऱ इस मौसम कां एक् दूसरे सें कोई लेना देना नहीं हैं पता नहीं मे भि क्याँ सोचने लगे गय़ा हूं। मगरयह जौ सभीकुछ होँ रहा हैं यह भि तौ नार्मल नहि हैं नाँ। ओहगॉड क्याँ करूँ मे अकेला ऊपर सें मेरेसंग मेरा मासूम बच्चा ठीक सें डर भि जाहिर करूँ तौ किस सें करूँ।
इसी तरहडर डरकर गिरधारी पूरे 4- 4.5 घंटे कि ड्राविंग केँ बाद राज़ कि नानीमा केँ घऱ पहुंच गय़ा। अपने सासू केँ घऱ पहुंच कर राज़ केँ पिताजी बहुतखुश थें।
औऱ अब बरसात भि हल्की हौ गई, थि।
दिन केँ यहीकोई 4 याँ 4.15 कां वक्त होगामगर बार8श केँ बादल अभि भि दे जिनके कारणऐसा लगरहा थां जैसेसाम केँ 7 बजे होँ।
राज़ केँ पाप मुश्किल सें 30 मिनट राज़ केँ पास उसकी नानीमा केँ घऱ रुके होंगे कि उन्होंने फिन सें घऱ लौटने केँ लिए वाहन चालू कि औऱ चल दियेघऱ कों।
राज़ अपनी नानीमा केँ पेर वगैरा छूकर धीरे-धीरे बिस्तर पर्र बैठ गय़ा। फिरभी राज केँ लिए अपनी नानीमा कां घऱकोई नईबात तोँ नहीं थि मगरफिन भि अभि वोँ बच्चा हि तौ हैं। कुछदिन तोँ अटपटा लगेगा हि।
अभि राज कों कोई 1.30 घंटा भि नहींहुआ थां कि कुछ बच्चे भागते हुए राज़ केँ सामने आँ गए।
सब बच्चे भागकर राज़ कि नानीमा केँ घऱ मे छिपगए। उनसब बच्चों केँ पीछे एक् कालेरंग कां व्यक्ति दौड़ता हुआ आँ रहा थां जिसके हाथ मे एक् हाथ बड़ा गन्ने कां टुकड़ा भि थां। जिसने सफेद मैली सि धोती औऱ बाजू वाली बनियान पहनरखी थि, जिसके सामने कि तरफठीक नाभि औऱ सीने केँ बीच मे एक् जेबबनी हुईँ थि, सर पऱ एक् फटा प्राचीन गमछा साफे कि तरहगोल बांधरखा थां। पैरों कोई चप्पल नहीं थि।
बच्चे तौ सबभाग कर राज़ कि नानीमा केँ घर-मकान मे छिपगये मगर राज़ वहीं खड़ारहा। उस व्यक्ति नें आते हि राज कां गर्दन केँ पीछे सें शर्ट पकड़ लिया। उसके इतना करते हि राज़ कि नानीमा आँ गयीँ,।
नानीमा: ऐsssssss धनिया खबरदार जोँ मेरे नाती कों हाथ भि लगाया तोँ तेराहाथ उखाड़ लुंगी।
उस व्यक्ति नें नानीमा कि आवाज़ सुनते हि राज़ कां कॉलर छोड़ दिया औऱ नानीमा सें बोला।
धनिया: पाय लागू काकी
नानीमा अपनेहाथ मे लस्सी केँ 2 गिलास लेकरआयी थि उसमें सें एक् राज़ कों देतेहुए,
नानीमा: जीतारह, यहबता तूने मेरे नाती पे हाथ केसे डालारे?
धनिया एक् नज़र राज़ कों देखते हुए
धनिया: अरेमाफ करदो काकी, यह अपने देहात केँ बच्चे हैं नां वोँ मेरे गन्ने केँ खेत सें गन्ने चुराकर लेँ आयेबस उन्ही कां पीछाकर रहा थां कि आपके नाती हमारे हाथलग गए।
नानीमा: अरेरे रे कलमुहे तुँ नन्ही जानों केँ पीछे पड़ा थां। अरे थोड़े सें गन्ने लेँ भि लिए तौ तेरा क्याँ जाता हैं। बचपन हैं थोड़ी बहोत शरारत नहि करेंगे तोँ क्याँ करेंगे।
धनिया: थोड़ी बहोत ? अरी काकी पूरी एक् क्यारी उखाड़ दिए। हमसे मांग लेते तौ क्याँ हम् मना करते?
अभि धनिया नें इतना हि कहा थां कि बच्चे भि नानीमा केँ घर-मकान सें बाहर् निकलकर आँ गये।
उन बच्चों मे सें एक् बच्चा जिसेसभी छोटूकह कर बुलाते थें बीच मे बोल पड़ा।
छोटू: झूंट बोलता हैं धनिया काकी, हम् गन्ने मांगते हैं तौ यह काटने कों दौड़ता हैं। इसकेपास वोँ फरषे जैसाकुछ हैं उससे हमारी नुन्नी काटने कों बोलता हैं।
छोटू नें अभि इतना हि बोल थां कि धनिया
धनिया: यही हैं काकीयह इधरआकर छिप गय़ा थां, अबबोल अब कहां जाएगा।
छोटू नें जब धनिया कि यहबात सुनी तोँ उसे एहसास हुआ कि भावनाओं मे बहकर वोँ सबके सामने आँ गय़ा। छोटू नें जीभ अपने दांतों केँ नीचेदबा कर औऱ सर पर्र हाथरख कर बोला।
छोटू:ओह तेरीमर गय़ा अब तौ
धनिया छोटू केँ पीछे औऱ छोटू नानीमा केँ चारों औऱ घूमकर नानीमा सें बोलरहा थां काकीहमे बचालो धनिया सें, यह हमारी मासूम नुन्नी काट देगा।
राज़जब छोटू कि बेवकूफी भरीबात सुनता हैं औऱ हरकत देखता हैं तौ खिलखिला कर हसने लगता हैं। राज़ कों हंसता देखराज कि नानीमा बहोत खुश होती हैं।
राज औऱ नानीमा दोनों खुश थें कि धनिया नें छोटू कों पकड़ लिया औऱ छोटू कां कान खींचने लगा।
नानीमा: ओ धनिया जानेदे बच्चा हैं। अरेसुन छोटू तूँ राज कों यहाआस पास घुमाला इसकामन लग जायेगा।
धनिया राज कि नानीमा कि बात सुनकर जल्दी छोटू कों छोड देता हैं। औऱ छोटू नानीमा कों हांबोल करराज कों घुमाने लें जाता हैं जहांराज औऱ छोटू मे दोस्ती होँ जाती हैं।
वही दूसरी औऱ धनिया औऱ नानीमा कोई 30-40 मिनटबात चीत करते हैं फिन धनिया अपने खेतों कि तरफचल देता हैं।
छोटू औऱ राज भि कोई 1 घंटेबाद घऱ पहुंच जाते हैं। छोटूराज कों कलआने कां वादा करकेचला जाता हैं। औऱ राज भि नानीमा केँ पासचला जाता हैं।
राज बहोत खुशलग रहा थां। आजराज नें अपनी ज़िन्दगी कां पहला मित्र बनाया थां। छोटू। बहोत हि भोला भाला औऱ डरपोक भि।
नानीमा भि राज कों खुशदेख करखुश होती हैं।
नानीमा राज कां पलंग अपनेपास हि लगा लेती हैं दोनों कां रूम तौ एक् थां मगर पलंगअलग अलग खटिया पर्र थां।
सोने सें पहले नानीमा राज़ सें इधरउधर कि बातें औऱ शहर कि बाते पूछती हैं औऱ राजसभी बातरहा थां। बातों हि बातों मे राज नें रास्ते मे जौ बारिश कि घटना हुइ थि उसके बारे मे नानीमा कों बता दिया। नानीमा यहबात सुनकर झट सें बैड पर्र बैठ गई,।
नानीमा नें राज सें बारिश कि औऱ घऱ सें रवाना होने कि सारी घटनाएं राज सें जानी। नानीमा अजीब सि चिंता मे डूब गई थि।
राज कि नानीमा राज कों लेकर परेशान हौ गयीँ, थि। यह तकलीफ़ वाला चेहरा कोई भि समझदार व्यक्ति नानीमा केँ चेहरे कों देखकर पढ़ सकता थां। मगरराज तौ अभि बच्चा हि थां उसेइस बात कां ध्यान भि नहीं थां कि उसकी नानीमा वोँ सभी घटनाएं सुनकर परेशान हौ गयीँ, हैं।
नानीमा अभि बिचार कर हि रही थि कि राज कों अचानक अपनी बड़ी बेहन रानी कि बातयाद आती हैं कि नानीमा कों बहोत सारी चमत्कार कि कहानियां आती हैं। राजमन हि मन बहोत खुश हौ जाता हैं औऱ अपनी नानीमा कों किस्सा सुनाने कों बोलता हैं।
द मैजिक मिरर (THE MAGIC MIRROR) {A tell of Tilism} - चमत्कारी आईना - Continue reading for full story
बढ़िया भाग केँ लिए बहोत बहोत शुक्रिया अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
एक् दम मस्त औऱ शानदार एपसोड हैं यार अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
बहोत हि शानदार भाग हैं मित्र
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