पेलो मुझे मेरे राजा भैया - Maa Beta Pyaar - Episode 1
पेलो मुझे मेरे राजा भैया
मैराज, उमर२३ साल कां एक् जवान कम्प्युटर प्रोफेशनल हू। मेरे पापा गौरीशन्कर कां देहान्त आज सें ३साल पहले होँ गय़ा थां। घऱ मे मा शोभा औऱ बेहन नेहा रहते थें। मा कि उमर४६ साल कि हैं। मा बहोत गोरी, सुन्दर औऱ मासलबदन वाली महिला हैं। उसकी विवाह बहोत कमउमर मे हुईँ थि जबकि पापा उमर मे उससे बहुतबडे थें।
एक् बार मेरेकुछ यार घरपरआए थें, उन्होने मा-पापा कों देखा तोँ दन्गरह गए.मा नें उन्हे हमेशा कि तरहगरम चाय-नास्ता परोसा थां औऱ पापा वहीपे हमारे संग बैठकर गपशपकर रहे थें। मगर मेरे दोस्तोका ध्यान नां तोँ पकोडोमे थां औऱ नां हि पिताजीकी बातोपे। वोँ बस टकटकी लगाए मेरीमा कों देखरहे थें, यहा तक कि उनमेसे एक् यार तोँ सारीगरम चाय अपने कपडेपर गिरा दि। हम् सभीहस पडे औऱ फिन पिताजीने उसे अन्दर जाकर शर्ट बदलनेके लिएकहा। कुछदेर बाद हम् मेरे घरसे निकलपडे औऱ दूसरे मित्र केँ घऱगए।
मेरी साइकल लगाने मे थोडीदेर लगी तोँ मैकुछ टाइमबाद घऱ मे दाखिल हुआ.घऱ मे प्रवेश करतेहुए मैने मेरे दोस्तोकी बाते सुनी औऱ थोडा रुक गय़ा.
एक् साथी:अरे पूछमत, गजब कि माल हैं.
दूसरा: पकोडे परोसते हुए उसकी पल्लु खिसका थां, क्याँ मम्मे हैं, मेरा तौ देखतेही खडा हुआ.औऱ फिन मेरीगरम चायगिर गई.
पहला:हा तूँ तोँ हैं हि बेवकूफ.
दूसरा: अबे नहीं, वोँ तोँ बहाने थां, मै तौ अन्दर घुसना चाहता थां, शर्ट बदलते हुए मैने बहोत गौर सें देखाराज कि मा कों, अन्दर तौ एकदम खुलके दिखरही थि।
मैये बाते सुनकर स्तब्ध होँ गय़ा, तौ यह कमीने मेरीमा केँ बारेमे हि बातेकर रहे थें।
उसदिन तोँ मैने किसी तरहसे टाइम बिता लियामगर मुझे अहसास हुआ कि मा एक् बेहद हसीन औऱ सेक्सी महिला हैं जिसपर केवलमै हि नहीं बल्कि बहोत लोगोकी बुरीनजर हैं।
एक् बार इन्ही दोस्तोके घऱमै दोपहर मे बैठा थां तौ एक् औऱ यारवहा पे आया.यह मित्र बहोत चालू टाईप कां थां, हमेशा लडकियोकी औऱ औरतोकी बात करता थां। उसकानाम थां मदन.
मदन: अरेयह देखोमै क्याँ लायाहू.
हमने देखा, उसने एक् ब्लू-फिल्म कि सीडीलाई थि, फिन क्याँ, हम् लोग वहीपे सीडी लगाके बैठगए। पिक्चर बहोत हॉट थि, एक् लडका किसी रिश्तेदारके घऱचला जाता हैं, जहापे कई औरते होती हैं औऱ सारी उससे उम्रमे बडी होती हैं। वोँ शैतान लडका बारी बारीसे हर एक् केँ संगयौन सबन्ध बना लेता हैं। इनसभी घटनाओका चित्रण बहोत दिलचप तरीकेसे किया थां औऱ फिल्म कि औरतेभी बहोत सेक्सी थि। हम् सभीये फिल्म देखकर बहोत उत्तेजित हुए।
फिल्म खतम होनेके बादमै निकलपडा, मदन भि मेरेसंग थां, बाते करते करते हम् जारहे थें तोँ मदन नें पूछा
मदन: राज तुम को फिल्म कैसीलगी
मै:हा बहोत सेक्सी थि दोस्त.
मदन: मुझे भि.असल मे मुझे ऐसीही फिल्मे मनपसंद हैं
मै:ऐसी मतलब, वोही नां सेक्सी वाली.
मदन: नहींरे, ऐसी मतलब.रिश्तोमे चुदाई वाली.
मदन कि बात सुनकर मै हैरान होँ गय़ा, कुछ नाँ बोलते मै साईकल चलाजा रहा थां, तौ मदन नें एक् कोने मे मुझेरोक दिया औऱ बोला
मदन: देखराज तुँ बुरामत मान, मैने जौ मनमेआया सोबोल दिया, तुँ मेरा जिगरी दोस्त हैं इसलिये, तूँ बुरामान गय़ा तौ बोलदे.
मै: नहींऐसी बात नहीं.
मदन: सचकहू यार.तुँ नाराज तौ नहीं होगा.
मै: नहीं, ऐसी क्याँ बात हैं.
मदन:मै सचमे तुम्हारे घऱआता हू तौ हमेशा तेरीमा कों देखता हू.वोँ.वोँ.मुझे वोँ बहोत अच्छी लगती हैं.
मैयेबात सुनकर चुप हौ गय़ा, मदन कि इस नीयत कां मुझेशक थां मगरआज वोँ यकीन मे बदल गय़ा।
मै:मदन, तूँ इतनासाफ साफबोल रहा हैं तौ सुन, तेरी बेहन रीना भि आजकल बहोत सुन्दर दिखने लगी हैं।
यहबात सही भि थि, रीना वाकई दिखनेमे बहोत सुन्दर थि, उसके वक्ष भि बडे दिखने लगे थें आजकल.
मदन: हा दोस्त वोँ तौ हैं, मैकईबार उसे औऱ मेरीमा कों घूरते रहताहू, खास करकेजब वोँ झुककर काम करते हैं तौ मै हमेशा उन दोनोके इर्द गिर्द रहताहू ताकि उनके चुचियोकी झलक दिखे.
ये मदन तोँ औऱ भि चालू निकला। इसकेआगे मैकुछ बोलू इसके पहले उसीने कहा
मदन: हामगर राज, तेरीमा मेरीमा सें अधिक सेक्सी हैं.
औऱ फिन हम् वहीपे खडेखडे अपनेही रिश्तेदारोके बारेमे गन्दी बाते करतेरहे।
उसदिन मदन नें मुझे एक् नईसोच दि, उसकेबाद मै भि अपनीमा औऱ बेहन केँ अन्गोको गौरसे देखता निहारता औऱ मूठ मारते वक्*त उनका शरीर नजरके सामने लाता.
मा अब भि जवान लगती हैं, बडीबडी चुचिया औऱ भरा पूरा चुतड.वोँ हमेशा साडी पहनती थि औऱ ब्लाउझ मे सें उसकी चुची कि झलकदेख करकईबार मेरा लंड खडा होँ जाता थां।
एक् बारमै दोपहर कों जल्दघऱ आया, दरवाजेपे तालालगा थां, शायदसभी लोगकही गए होगेये सोचकर अपनी चाबी सें दरवाजा खोलकर अन्दर आँ केँ बैठा थां, कुछ वक्तबाद घऱ कि बेलबजी, मैने दरवाजा खोला तौ देखता हि रह गय़ा, दरवाजेपे माखडी थि, हाथमे कुछ थैलिया, पसीनेसे लथपथ.उसने गुलाबी कलरकी साडी पहनी थि औऱ एक् झीना सां ब्लाउझ.क्याँ गजब कि सेक्सी दिखरही थि, मै तोँ उसे घूरता रह गय़ा.
मा चिल्लाकर बोलीं: खडेखडे मुह क्याँ देखरहा हैं, चलयह सामान लेँ जा औऱ मुझे एक् गिलास ठन्डा पानी लेँ आँ.
मै नें जल्दी उसे पानीला कर दिया औऱ सामान रसोई मे जाकर रखनेलगा। कामखतम करने पऱ मै बाहर् केँ कमरे मे आया तोँ मावहा पे नहीं थि, शायद अपने कमरेमे गई होगीये सोचकर मै मा-पिताजीके बेडरूम पे गय़ा औऱ मैने दरवाज ढकेल दिया औऱ मुझे एक् औऱ शॉकलगा। अन्दर मा कपदेबदल रही थि, उसके शरीर पे एक् छोटीसी ब्रा औऱ पेटिकोट थां। अचानक दरवाजा खुलनेपे मा भि कुछदेर आश्चर्यसे देखने लगी औऱ मै उसके सुन्दर गठीले जिस्म कों निहारता रह गय़ा। कुछसमय बादमा कों होषआया औऱ वोँ चिल्लाई
मा: क्याँ कररहे हौ, दिखता नहींमै चेन्ज कररही हू.
मैने डरकर दरवाजा बन्दकर लिया औऱ वहासे चलतापडा। मगरउस दिन केँ बादमै कईबार मा केँ जिस्म कों याद करतेमूठ मारता थां।
मेरे पापा कि तबियत अचानक एक् दिन बिगड गई, उन्हे दिल कां दौरापडा थां औऱ फिनकुछ दिनबाद वोँ उसी बीमारी कां शिकार बनगए औऱ हमेछोड करचलदिए। अबघऱ मे हम् तीनलोग रहगए। मैने एक् नौकरी करना शुरु किया थां, नेहाअब भि पढरही थि, मै जॉबके संग पढाई करता थां। कुछ महिने तोँ उदासी मे चलेगए। कुछदिन बादफिन मेरेयार घऱ पे आए औऱ मुझे लेकर बाहर् घूमने चलेगए। मै थोडा नॉर्मल होनेलगा। ऐसेमे एक् दिन दोस्तोके घऱ फिरसे ब्लू-फिल्म लगाकर बैठे थें। फिन एक् बार एक् नौजवान औऱ एक् अधेड उम्र कि स्त्री कि स्टोरी थि, मै बेचैन हौ गय़ा औऱ वहासे चलपडा। मगर मेरेमन मे फिन एक् बारमा केँ प्रति बुरे खयालआने शुरु होँ गए। शायदमा भि मर्द कि कमी मेह्सूस होती होगीमगर लाज शरमसे शायद वोँ कुछ नहीं कहती.रात कों मैने अक्सर उसके कमरेसे कामुक सिसकारिया सुनता थां, उस वक्*त शायद वोँ अपनीचुत मे उन्गली कर केँ अपनी प्यास शान्त करती थि।
मेरी बेहन नेहा भि जवान हौ चुकी थि औऱ उसके रिश्ते कि बातचल रही थि। नेहा कि उमरउस वक्*तकोई २०साल कि होगी। नेहा भि बहोत सुन्दर औऱ सेक्सी थि बिलकुल मेरीमा क जवानी कां रूप थि, गोरी, हसमुख, पतला औऱ बहोत हि कसाहुआ जिस्म थि। एक् दिन मैनेउसे नहाते हुए देखा थां, क्याँ ज़ालिम खूबसूरती थां मेरी बेहन कां! गोरे शरीर पऱ जब वोँ साबुन मलकरनहा रही थि तोँ मेरा लंड काबू मे नहींरहा। उसकेहाथ कभी उसकी मस्त चुची पर्र औऱ कभी उसकी मस्त गोरीगोल गान्ड पऱ चलते औऱ मेरेदिल कि धडकन तेज़ होतीरही। मैयेसभी नजारा बाथरूम केँ दरवाज़े केँ छेद सें देखरहा थां औऱ अपनी पॅन्ट कि झिपखोल कर लंड कि मुठिया रहा थां। मेराहाल बुरा हौ रहा थां, कुछ हि पलोमे मैझड गय़ा मगर मेरी बेहन नेहा केँ नन्गे बदन कि तस्वीर मेरी आन्खो सें ओझल नां हौ पायी.
very sexy erotic kahani
पेलो मुझे मेरे राजा भैया - Maa Beta Pyaar – New Episode
नेहा कां व्यवहार भि दिन प्रति दिन अजीब होताजा रहा थां, उसके लिये जोँ भि रिश्ते आती उनमेसे कुछ नाँ कुछखोट निकाल लेती थि। मा भि परेशान थि कि केसे इसकी विवाह होगी याँ फिन जिन्दगी भर कुवारी बैठी रहेगी अपनेघऱ मे.
इसी दौरान मुझे पूना मे नौकरी मिल गय़ा, अच्छा खासा थां कम्पनी शहरसे थोडीदूर थि मगरआने जाने केँ लिए कम्पनी कि बस थि। मैवहा जाकरकाम मे व्यस्त होँ गय़ा, इतना कि मुझे मा-नेहा कां खयालकम रहता। वोँ लोग मुझेबीच बीच मे मोबाइल करते रहतेमगर बहोत ज़्यादा बाते नहींहुआ करती थि। बस एक् चीज कि प्रॉब्लेम थि। मैने जौ घर-मकान किराये पे लिया थां वोँ घर-मकान कां मालिक केवल शादीशुदा लोगोको घर-मकान देता थां, अकेले मर्द कों नहीं। मैने उसकोझूठ बोला थां कि मै शादीशुदा हू औऱ मेरी पत्नि आनेवाली हैं। उसका भतिजा- अनिल- मेरायार बन गय़ा। उसका एक् स्टुडिओ थां जोँ केसे तोँ भि चलरहा थां। मैउसे सहायता करता थां, कभीकुछ पैसे दिया करता थां।
मा अक्सर नेहा कों लेकर परेशान रहती थि औऱ पूछती कि पूना मे कोई लडका देखने मे हैं कि नहीं। एक् दिन उसनेकहा कि मै नेहा कों हि पूनाभेज देतीहू। ये सुनकर मै अन्दरसे खुशहुआ, मुझे उसकी नन्गी तसवीर यादआने लगी औऱ मैने हामीभर दि।
मेरेघऱ मे चार कमरे हैं। एक् कों मै अपनी नेहा केँ लिये रेडी किया.रूम सजाया, औऱ उसमे वेब-कॅम फ़िट किया जौ कि उसके कमरे कि सारी फ़िल्म बनाकर रिकार्ड करे.उस कॅमेरा कां कनेक्शन मैने मेरे लॅपटॉप सें जोड दिया। मुझेपता तौ चले कि मेरी बहना कितनी उतावली हौ जाएगी बिना किसी मर्द केँ लंड केँ? अपनेरूम मे मै वीसीआर औऱ कुछ ब्लू फ़िल्म्स रख डाली औऱ कुछ मस्तराम कि किताबे अलमारी मे रखी.मै अपनी बेहन कों पटाकर चोदने कि ताक मे थां.
अगलेदिन शनिवार कों नेहा कों मै स्टेशन सें लेने गय़ा। नेहा नें जीन्स औऱ टी शर्ट पहनी हुई थि औऱ उसकेबाल छोटेकटे हुये थें। उसके सीने कां उभारदेख कर मेरेदिल कि धडकन तेज़ हौ गयीँ,। नेहा बिलकुल किसी हिरॉईन जैसीदिख रही थि। उसकी चुची किसी पहाडी कि चोटी कि माफ़िक कडी थि। लोगउसे देखरहे थें जिसका मुझे बहोत क्रोध आँ रहा थां। जब नेहा नें मुझे देखा तौ दौडकर मेरी बाहो मे आँ गई,। आलिन्गन मे लेते हि मुझे उसकेबदन कि मादक सुगन्ध मह्सूस हुइ औऱ उसकी चुची मेरे सीने केँ अन्दर घुसने कों व्याकुल थि.
" कैसी हौ, नेहा?कब सें तेरीराह देखरहा थां। वाउ, मेरी बहना तूँ तौ औऱ भि सुन्दर होँ गयीँ, हौ ! बहोत प्यारी लगरही होँ मेरी बहना!" मैनेकहा तोँ नेहाबोल उठी,
" सच भैय्या? मै तौ सोचरही थि कि तुम् मेरीराह कमदेख रहे थें औऱ कुछ औऱ ज्यादा देखरहे थें। भैय्या लडकिया मर्दो कि नज़र पहचान लेती हैं। वैसे तूम भि बहोत स्मार्ट दिखरहे हौ! लगता हैं शहर कां असर हैं"
मुझेलगा कि नेहा नें मुझे उसकी चुची कों घूरते हुयेदेख लिया थां। मैशरम केँ मारेचुप रहा। रास्ते मे बाईक पर्र जबमै ब्रेक मरता तोँ नेहा कां सीना मेरीपीठ सें जा टकराता औऱ मेरी पॅन्ट मे तम्बू बन जाता। मुझे मह्सूस हौ रह थां कि नेहा शरारती ढन्ग सें मुस्कुरा रही थि।
"मुझे अच्ही तरह सें पकडकर रखो, कही गिर नां जन!" मैनेकहा तौ नेहा नें मुझेकमर सें कस केँ पकड लिया औऱ उसकाहाथ मेरे लंड सें कोई अधीकदूर नहीं थां। उसकी सान्स मेरी गर्दन सें टकरारही थि। उत्तेजना कि हालत मे हम् घऱ पहुन्च गये.
" भैय्या किचनकहा हैं? मैकुछ खानां बन देतीहून’ घऱजाकर नेहा नें कहा। किचन तोँ मै खोली भि नहीं थि."
"किचन तौ बन्द हैं, मेरी बहना, खानां तोँ बाज़ार सें लाताहू। मै खानां बनाना नहीं जनता, येह तौ तुम् जानती हि हौ" मैनेकहा तौ नेहामुझ सें लिपटकर बोलीं,
’ भैय्या, बिना स्त्री केँ घऱघऱ नहीं होता.अब मै आँ गयीँ, हू तोँ आपके घर-मकान कों घऱ मे बदल दून्गी। आप् जाकर सब्जी वगैरा लेँ आये फ़िर देख्ना मेरा कमाल"
मै अपनी बेहन कों अलिन्गन मे लेँ करखडा रह औऱ प्रेम सें उसकी गान्ड पर्र हाथ फ़ेरने लगा औऱ वोँ भि मेरे लंड पर्र अपनी बुर कों रगडने लगी। मुझेपता हि नहींचला जब मेरेहोठ नेहा केँ होठो सें जा टकराये तौ वोँ अलग होती हुइ बोलीं,
"भैय्या, बसकरो अब। अपनी बेहन कों प्रेम दिखाने कां बहोत वक़्त हैं, आप् बाज़ार जाइये औऱ सामान लें आइये"
खडे लंड कों ज़बरदस्ती बिठाते हुएमै बाज़ार चलागय। सामान खरीदा औऱ वपिसआने हि वाला थां कि मोबाइल बजा। मोबाइल नेहा कां थां, " भैय्या मेरे लिया एक् ओडोमोस लेते आनां, यहा मच्छर बहोत हैं" मै केमिस्ट कि दुकन पर्र चला गय़ा। वहा मुझे एक् बोतलऐसी दवा कि भि मिली कि जिसको पीने सें स्त्री पर्र वोँ असर होता हैं जौ मर्द पर्र वायाग्रा कां होता हैं। घऱआया तौ नेहा मेरे कमरे मे बैठी मस्तराम कि पुस्तक पढरही थि। मेरा अन्दाज़ा ठीक निकला। ऐसी पुस्तक पढने सें मेरी बेहन केँ जिस्म मे वासना ज़रुर भडकेगी। मुझेदेख कर उसने पुस्तक छुपाली। मै उसको सामान देकर बोला,
" अबमै बाहर् एक् यार केँ यहाजा रहाहू। साम कों खानां खायेन्गे, तुम् दरवाजा बन्द रखना"
मेरे साथी कां एक् फोटो स्टुडिओ थां, मैवहा अक्सर जाया करता थां औऱ हम् एक् दूसरे सें ऐसेही इधरउधर कि बाते करते थें। मैवहा गय़ा तौ साथी किसीकाम केँ सिलसिले मे बाहर् गय़ा थां, मगर उसके असिस्टन्ट मुझे जानते थें, उन्होने मुझे उसके दफ़्तर मे बिठाया। मैने बैठे बैठेवहा अपना लॅपटॉप खोला औऱ बेहन केँ कमरे मे लगेवेब कॅम कों देखने लगा.वेब कॅमठीक कामकर रहा थां। नेहा अपने कपडेबदल रही थि। मुझे उसकी तस्वीर केँ संग आवाज़ भि सुनायी देरही थि। नेहा नें अपनी टी-शर्ट उतारी औऱ उसकी चुचीचमक उठी। वोँ मस्तराम कि पुस्तक लेँ कर अपनेखाट मे बैठी हुइ थि औऱ एक् हाथ सें अपनी चुचीमसल रही थि.
" वाउ भैय्या, पुस्तक तोँ बहोत मस्तरखी हुइ हैं घऱ मे! मेरे प्यारे भैय्या, स्टेशन पऱ तौ बहोत ताड़रहे थें अपनी बेहन कि चुची कों। क्याँ बात हैं अपनी बेहन कों पत्नी बनाने कां प्लान तोँ नहीं हैं? मेरे प्यारे भइया, मै जानती हू तुम् मुझे नहाते टाइम देखा करते थें.लो मै आँ गई, तुम्हारे पास, अब औऱ मत तडपाओ.अब कितनी देर लगाओगे मुझे अपनाने मे? तुम्हारी प्यारी बहना कि बुर तुम्हारे लिये बेकाबु होँ राही हैं भैय्या आपके लंड कों यादकर केँ.अब आँ भि जाओ नां."
मै हैरान रह गय़ा। मै तोँ मै, मेरी बेहन स्वयं मेरी पत्नी बन जानां चाहती थि! मैने पॅन्ट कि ज़िप खोली औऱ घऱ मोबाइल लगाया। नेहा नें उठाया तौ मैने पूछा
"नेहा, मेरी बेहन क्याँ कररही हौ?" मेराहाथ मेरे लंड कों सहलारहा थां। वेबकॅम मे अब मेरी बहना अपनी बुर कों मसलरही थि.
"कुछ नहीं भैय्या कुछ ज़रूरी कमकररही थि। क्याँ बात हैं भैय्या?"
मैने कहा, "कुछ नहीं, बस तेरीयाद आँ रही थि"
इस पर्र नेहा नें अपनी चुची मसलते हुए जवाब दिया"हा भैया.मुझे भि." उसकीयह अदा देखकर मै तौ बस झडते झडतेरह गय़ा। लंड कों पॅन्ट केँ अन्दर डालकर स्वयं पर्र काबू रखकर बोला
"बस थोडा सब्र करना, मै जल्द हि आँ जाऊन्गा"
तभी मेरा मित्र अनिल - जौ उस स्टुडिओ कां मालिक थां- आँ गय़ा। वोँ मुझसे कुछ पैसे उधार लेँ चुका थां जोँ वापिस करना चाहता थां। मेरेमन मे आयडिया आयी, जिससे मेरे घर-मकान मालिक कां भि शकदूर हौ सकता थां। मैनेउसे कहा
"अभि मैकही औऱ जारहा हू, तुँ पैसे मेरेघऱ पे भिजवा देना, औऱ हासंग मे अपनी भाभी कों भि देख लेना"
अनिलखुश हुआ औऱ बोला "साले, छुपे रुस्तम, भाभी कों लेँ आया औऱ बताया तक नाही, घऱ पे अब खाने कां प्रोग्राम हौ जाये"
मैनेहस केँ कहा"अरे आज हि तोँ आयी हैं, उसे थोडा सेटल होने मे समय लगेगा, फिन जरूर जश्न करेन्गे" यूकहकर मै वहासे चला गय़ा.
साम कों अनिल पैसे देनेआया तौ मैने नेहा कों दरवाजा खोलने कों बोल,
" भाभीजी नमस्कार, यह पैसेराज भइया कों देने थें."
नेहा नें उसे बैठने केँ लियेकहा औऱ गरम चाय-पानी पूछा.मै भि अन्दरसे बाहरके कमरे मे आया। अनिल नें मजाक मे कहा
"क्यू भाभी, यह शैतान आपकोकहा छुपाकर रखता हैं? इतनी सुन्दर बिवी हैं, राज तुमने कभीभनक भि नहीं होने दि"
अनिल कि इन बातोसे नेहा शरमाकर मुस्कुराते हुए अन्दर चली गई। मै औऱ अनिलकुछ देर यूही बाते करतेरहे औऱ फिन वोँ चला गय़ा.
यह प्लान मैनेजान बूझकर किया थां, मै जानना चाहता थां कि नेहाइस कां क्याँ जवाब देती हैं। जैसे हि अनिलचला गय़ा, नेहा हसते हुये मेरेपास आयी,
"भैय्या आपका साथी तौ मुझे भाभीकह कर बुलारहा थां." मैने थोडा हिचकिचाने कां नाटक किया.
"अब क्याँ बताउ नेहा तुम्हारी तरफ, यहा घर-मकान केवल शादीशुदा लोगो कों देते हैं, औऱ मुझेघऱ केँ सख्त जरूरत थि, तुम् तोँ जानती होँ कि मैयहा बिलकुल अकेला आया थां। तौ घऱ मिलाने केँ लिये मैने घर-मकान मालिक कों झूठ बोला कि मेरी विवाह हौ चुकी हैं औऱ पत्नि आनेवाली हैं। यह अनिलउस घर-मकान मालिक कां भान्जा हैं, उसने तुम्हे देखा तौ उसेलगा कि मेरी पत्नि आयी हैं.
नेहा हसतेहुए बोलि,
" मगरमै कहा बुरामान रहीहू, क्याँ मै जानती नहीं तुमने घऱ केँ लिये कितनी मेहनत कि हैं" औऱ उसने मेरे गालोपे चूम लिया। मेरी चेहरा लाल होँ गय़ा, मगर अपने आप् कों सम्भालते हुए मैनेकहा
"मुझे खुशी हैं तुमने बुरा नहींमन उसकीबात कां। चलोअब खानां खाते हैं, भूखलगी हैं" औऱ हम् दोनो भइया बेहन रसोई मे गये। मैने कुर्ता औऱ लुन्गी पहनी थि औऱ नेहाने एक् टी-शर्ट औऱ एक् स्कर्ट जौ उसके घुटनो तक आँ रही थि। मैबार बार उसकी चुचियो औऱ टान्गोकी तरफ ललचाई नजरोसे देखरहा थां।
नेहा नें खानां बडा लजीज बनाया थां। खानां खा केँ हम् बाहर् वाले कमरे मे आकरबैठ गए। मैने नेहासे कहा, "वाउ भइयाऐसा खानां कितनी देर केँ बाद नसीबहुआ हैं। नेहा, सचमुच, तुम् जिसकी पत्नी बनोगी, बडा खुशनसीब होगा। बाहर् कां खानां खाकर तोँ मै तन्ग आँ चुका थां."
पेलो मुझे मेरे राजा भैया - Maa Beta Pyaar – New Episode
नेहा प्रेम सें मेरीगोद मे बैठकर बोलि, " भैया अगर तुम् चाहो तोँ ऐसा खानां तुम्हे सारीउमर मिल सकता हैं, बस मुझे अपनेपास रखलो, कभी अलग न् करो"मै उसे अपनी बाहो मे भर केँ कहा,
"मै भि तोँ यही चाहता हू, मेरी रानी बहना, मगर कभी तौ तुम्हे अपने पति केँ घऱ जानां पडेगा, तुम् मेरी पत्नि बनके नहींरह सकती"
"क्यू नहीं भैया, दुनिया मे इतनी सारी बाते होती रहती हैं, अगर हम् दोनो पति-पत्नी जैसेरहे तौ क्याँ फर्क पडता हैं" नेहा बोलीं। उसकेयह बोलसुन कर मेरे रोन्गटे खडे होँ गये, मेरी बेहन तौ मुझसे दोकदम आगे निकली। मै बोला
"क्याँ बोलरही होँ, उसके लिये तेरी मेरी पत्नी बनना होगा.यह दुनिया उसकोकभी स्वीकार नहीं करेगी, दुनिया कि छोडो, मा क्याँ कहेगी? मै भि तुम्हे बहोत चाहता हू, तुम को प्रेम करताहू, तुम्हारे जैसी प्यारी बेहन कों किसी औऱ केँ सन्ग भेजने कि कल्पनासे मुझेजलन होने लगती हौ, मगर क्याँ करे मेरी रानी."
नेहा मेरी प्रेम भरीबात सुनकर भावुक होँ उठी औऱ मेरेहोठ चूमने लगी, "सच भैय्या? इतना प्रेम करते होँ मुझे ?"
मैने भि उसके चुम्बन कों संग देतेहुए कहा"सच मेरी प्यारी बहना, कई दिनोसे मेरेमन मे ये ख़्वाहिश थि मगर केसेकहू समझ मे नहीं आँ रहा थां, आज तुमने मेरेमन कि बात कहकर सारा मामला खोल दिया"
नेहा मुस्कुराकर बोले" तोँ भैया, बनाओगे मुझे अपनी दुल्हन? मेरी भाग्य खुल जायेगी, तुम्हारे जैसे प्रेम करनेवाला कहा मिलेगा.!"
मै अभीभी थोडा उलझन मे थां
"अरी पगलीऐसा भि होता हैं, मात्र कहनेसे क्याँ होगा, हमे तौ यहा रहना हैं, समाज मे केसे रहेन्गे"
मगर नेहा केँ पासहर चीज कां जवाब थां.
"उसमे कौनसी बडीबात हैं भैया, हम् तौ अपनेगाव सें कईमील दूर आँ चुके हैं, यहा हमारा कोई रिश्तेदार नहीं, बल्कि यहा तोँ लोगहमे पति-पत्नी मानने लगे हैं, तौ अच्छा हैं, उसी कों आगे बढाते हैं"
"मगर, नेहा."मै बोलने लगा तौ मेरे होठोपे अपनेहोठ रखकर नेहाने मेरामुह बन्द किया औऱ मुझसे लिपट गई.
"मुझे अपनालो भैया, मेरे पति बनजाओ, मेरे स्वामी, मेरे मालिक। मैनेआज तक कई रिश्ते देखे औऱ कई लडकोको नां कहाइसी लिए कि मै अपने भैया कि बनजाऊ, मै आपसे बहोत प्रेम करतीहू भैया, आय लव्हयू."
मैबस इन्ही शब्दोको सुनने केँ लिए व्याकुल थां, नेहा केँ मुख सें सुन लिया तोँ मानो धन्य हौ गय़ा औऱ उसे कसके बाहोमे भर लिया। नेहा भि उसीआग मे जलरही थि, उसने मेरे आलिन्गन कां संग देना शुरु किया.
"भैया मुझे प्रेम करो! मुझेआज बेहन कां नहीं पत्नी कां प्रेम दो, मेरे प्यारे भैया! कब सें अपने भैया कि प्रेम भरी नज़र कों तरसरही हू, राज भैया वर्ना अभि तक विवाह नं कर लेती.कई लडके तोँ मुझ सें विवाह करने कों तरसरहे हैं, मगरमै अपनी जवानी अपनेराज भैया केँ लिये सम्भाल कररखी हू, इसे स्वीकार करलो मेरे राजा.!"
अब मुझे अपने आप् पर्र काबू रखना सम्भव नहीं थां, मै वहासे उठ केँ खडाहुआ औऱ नेहा कों अपनी बाहो मे उठा लिया, उसने अपनी बाहे मेरेगले मे डाल दि औऱ मुझे चूमने लगी.मै उसे उठाकर बेडरूम मे लें गय़ा औऱ उसेबैड पर्र पटक दिया.उस समय नेहा नें सफ़ेद स्कर्ट औऱ सफ़ेद कुर्ती पहनी हुई थि, उसकेबाल खुले छोडे थें औऱ होठोपे एक् अजीबसे मुस्कान थि, कसमसे वोँ एक् अप्सरा दिखरही थि।
"आओ नां भैया अब औऱ मत तडपाओ" नेहा नें यह कहतेहुए अपना निचला होठ दातोतले दबाया। मेरा लंड अब तम्बू बनकर लोहे कि रॉड जैसाबना थां। मै उसपरझपट पडा औऱ उसकेमुख पऱ झुककर उसको चूमने लगा। उसकी बाहे मेरेगले पर्र थि औऱ वोँ मुझेचूम रही थि जैसे एक् पत्नी अपने पति कों प्यारसे चूमती हैं। यह हम् दोनोका शायद पहला अनुभव थां, शुरु मे तोँ हम् केवल एक् दूसरे केँ होठ चबानेकी कोशिश किएजा रहे थें, मगरफिन हम् बडे प्यारसे होठ चूसने लगे, मैने नेहा केँ होठ हि नहीं बल्कि पूरा चेहरा चूम लिया। प्रेम केँ जोश मे आकर नेहा केँ मुह सें मादक आवाजे निकलरही थि जौ मुझे औऱ भडकारही थि। इसीबीच मैने फिरसे उसका चुम्मा लिया औऱ अचानक मेरीजीभ उसकेमुह मे चली गई। नेहा औऱ उत्तेजित होँ गई औऱ मुझे कसकेपकड लिया औऱ उसकीजीभ अब मेरीजीभ सें पेन्चा लडाने लगी। हम् दोनो भइया बेहनबडे प्रेम सें इसतरह मुख-रस कां आदान-प्रदान करतेरहे।
मै नेहा केँ पूरे जिस्म कों सहलारहा थां, मेरा एक् हाथ अपनी बेहन कि जान्घो केँ बीचचला गय़ा औऱ उसने अपनी जान्घे खोल दि। नेहा कि चिकनी जान्घे बिलकुल रेशम जैसी थि। मै देखा कि नेहा नें पॅन्टी नहीं पहनी थि इसका मतलब वोँ तोँ पूरी तैयारी सें आयी थि। उसकी बुर किसीफूल कि तरह रसीले थि। मेरी प्यारी बेहन नें शायद मेरे लिये बुर साफ़ कि थि। उसकी बुर पऱ बाल कां नामोनिशान नहीं थां। मेरेहाथ केँ स्पर्श सें मेरी बेहन कां शरीर काम्प उठा औऱ वोँ मुझ सें औऱ जोरसे चिपक गयीँ,.
नेहा कां मखमली शरीर मेरी बाहो मे मचलरहा थां। मुझे मालुम हि नं थां कि मेरी सेक्सी बेहनमुझ पऱ पहलेसे फ़िदा हैं औऱ मुझ सें हि चुदवाने केँ ख्वाब देखती आँ रही हैं। इन विचारोने मुझमे औऱ उत्तेजना भर दि औऱ मै उसकी जान्घे औऱ बुर सहलारहा थां। पावरोटी कि तरह फुली हुईँ बुर कों जब मेरे हाथो नें स्पर्श किया तोँ मेरी बेहन कि आह्ह्ह निकल गई,,
"भैया.आआआ, धीरे-धीरे धीरे-धीरे करो, प्लीझ.मै कुवारी हू, अपनीयह चीज मैने तुम्हारे लिए सम्भाल केँ रखी हैं."
मेरे शरीर मे खून मानो दौडने लगा, सच नेहा मुझे इतना चाहती थि। मैने बिलकुल धीरे-धीरे सें उसकी बुर कों सहलाना शुरु किया, उन्गलियोसे उसकी बुर कि पन्खुडियोको छेडता औऱ कभे उन्हे मुठ्*ठी मे लेकर हलकेसे दबाता। मेरीइन क्रियाओसे नेहा औऱ जोश मे आती गई.
"भैया.मेरी.मुझमे आगलगा दि हैं तुमने.मेरे प्यारे भैया.मुझे प्रेम करो भैया.आज अपनी नेहा कों अपनी पत्नी बनाकर प्रेम करो भैया.आआह्ह्ह्ह मेरे प्यारे राज भैया!!"
मैने शरारती ढन्ग मे पूछा
"कहा आगलगी हैं बताओ नाँ मेरीजान, मेरी प्यारी बहना" औऱ उसेफिन बेतहाशा चूमने लगा।
"चलोहटो नां.आप् भि नां.जाओ मै नहीं बताती." नेहा शरमाई.
"अरी पगली बताओ नाँ.प्लीज." यू कहके मैने एक् उन्गली हलकेसे उसकी बुर मे घुसेड दि। नेहा केँ मुह सें एक् औऱ मादक कराह निकली
"स्स्स्स्स.आआआह.भैया.जाओ.तुम् भि नाँ.मेरी उसमे.उम्म्म्म्म्म्म." नेहाअब भि बोल नहींपा रही थि। मगर मैने थोडीजिद कि.
"उसमे मतलब.बताओ नां डार्लिन्ग."
"इस्स्स.भैया.मेरे राजा.मेरी.मेरी.मेरी बुर मे आगलगी हैं औऱ उसमे आपकायह हथियार डालदो अब." नेहा नें मेरेकान मे फुसफुसाते हुएयह कहा औऱ एक् हाथ नीचे लेँ जाकर मेरा लंड सहलाने लगी। मेरी खुशी कां कोई ठिकाना नाँ रहाजब नेहा अपनाहाथ निचे लेँ जाकर मेरे लंड कों पकडकर सहलाने लगी। मेरा लंड लोहे कि तरह सख्त हौ चुकाथ औऱ मेरी बेहन केँ हाथ मे तोँ जैसेकोई जादु थां। मेरारोम रोमखिल उठाजब मेरी नेहा नें मेरे लंड कों मुठी मे लिया.जोश मे आँ करमै अपनी उन्गली अपनी प्यारी नेहा केँ बुर मे घुसेड दि। बुर पानी पानी होँ रही थि। मेरी प्यारी बहना उतेजित थि औऱ शायद लंड अपनी बुर मे घुसवाने कों बेकरार थि। उसने अपने चूतडउपर उठाकर मेरी उन्गली पूरीतरह बुर मे लेने कां प्रयास किया,
" भैया, अपनी बेहन कों चोदोगे नहीं? क्याँ उन्गली सें हि तडपाते रहोगे? मेरेहाथ मे जौ प्यारा लंड हैं उसको नहीं पेलोगे अपनी बहना कि बुर मे? भैया आपका लंड अब मेरी सम्पति हैं जिसको अब आपकी बेहन अपनी बुर मे छुपाकर रखेगी! भैया अबदेर मतकरो, अपनी नेहा कों चोद डालो, राज भैया, प्लीऽऽऽऽझ.
नेहा कि इन सेक्सी बातो सें मै भि उत्तेजित होतेहुए उसकी कुर्ती उतार फ़ेकी। अन्दर एक् सफेदकलर कि ब्रा थि जिससे नेहा कि चुचिया आजाद होने कां प्रयास कररही थि, मैनेउसे भि जिस्म सें अलगकर दिया.वाउ क्याँ नज़ारा थां! नेहा कां दुधिया शरीर कमरे मे चमकउठा। उसकीदूध जैसी सफेद चुची कितनी सेक्सी लगरही थि! औऱ उसकेउपर गुलाबी कलर केँ निपल, जोँ सख्त होकरखडे थें.मै मस्ती सें भर गय़ा। मै अपनेहोठ अपनी बेहन केँ निपले पर्र रख दिया औऱ चूसने लगा। नेहा केँ निपल मेरे होठोका स्पर्श पाकर औऱ कडे होँ गए औऱ मै उनको चूसने लगा। नीचे मेरी बेहन केँ हाथ मेरे लंड सें खेलरहे थें औऱ मेरी उन्गली उसकी बुर मे अन्दर बाहर् होँ रही थि,
"चुसो भैया, चुसो मेरी चुची.ऊऊह्ह मेरे प्यारे भैया, चुसलो मेरे निपल.आआह्ह्ह्ह्ह.बहोत प्यारे हौ मेरे भैया आआआआआ!"
पेलो मुझे मेरे राजा भैया - Maa Beta Pyaar - Kahani ab aur interesting hogi
- 1
- 2
Relavant source : click here