बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex – New Episode
रात कों सब नें संग मे बैठ केँ खानां खाया। पूरे वक्त राहुल अपनी मम्मी कों ताडरहा थां। कभी सरिता कि बड़ी बड़ी चुचियों कों देखता तोँ कभी उसकी लचकती हुई गांड कों निहारता। सरिता भि जान गई, थि उसका बेटा अपनी हि मम्मी कों गंदी नज़रो सें देखरहा। यहसोच सोच केँ उसके जिस्म मे भि अजीब सि हलचल होँ रही थि। वोँ भि अपने बेटे कों पुरे नज़ारे दिखारही थि। अपनी गांड कों मटका मटका केँ चलती.मनोज कों खानां परोसते टाइम थोडा ज़्यादा हि झुक जाती थि उससे राहुल कों सरिता केँ चुचियों केँ बीच कि गहरीखाई दिखाई दे जाती थि। राहुल केँ पैंट मे तम्बू बन चुका थां औऱ वोँ किसीतरह अपने खड़े लन्ड कों छुपा केँ डाइनिंग टेबल पे बैठाहुआ थां। उसकोडर थां कही पिताजी नें देख लें उसेइस हालत मे।
कहना समाप्त होते हि राहुल झट सें अपनेरूम मे भाग गय़ा। दूसरी तरफ सरिता औऱ मनोज अपनेरूम मे चलेगए औऱ मनोज केँ लिए पैकिंग करनेलगे। स्वीटी नीचे हि बैठी थि औऱ tv देखरही थि।
राहुल नें रूमबंद कर केँ अपने लन्ड कों अपने पैंट सें मुक्त कर दिया। उसका लन्ड फनफना रहा थां। फिन उसने आंखेबंद कर केँ मुठ मारना शुरुआत किया। उसके सामने अपनी मां कि तस्वीर दिखाई देरही थि। वोँ दिन मे पहले हि 2 बारमुठ मार चुका थां इसलिये इसबार उसे झड़ने मे अधिक वक्तलग रहा थां। औऱ पिछली बार कि तरह उसकेपास लाइवशो भि तौ नहीं चालू थां.
कुछ हि देर मे नीचे सें सरिता नें राहुल कों आवाज़ लगाई
सरिता - राहुल.जल्द नीचे आँ जा.बापू निकलरहे हैं।
राहुल अचानक सें चौक गय़ा। उसके सामने उसका पैजामा पड़ा थां वोँ पेहेन केँ नीचेभगा। पैजामा पतला होने केँ वजह सें उसके पैंट मे कां तम्बू साफ दिखाई देरहा। वोँ जब तक नीचेआता टैब तक मनोज व्हीकल मे बैठ गय़ा थां.राहुल नें मनोज कों दरवाजे सें विदा किया.फिन सरिता स्वीटी औऱ राहुल मुड़ केँ घऱ मे घुसे औऱ दरवाजा बंदकर दिया। जैसे हि सरिता औऱ स्वीटी दरवाजा बंदकर केँ पलटे तौ उनके कि नज़र सीधे राहुल केँ पैंट मे बने तम्बू पऱ गिरी। वोँ देख केँ स्वीटी तोँ शॉकलगा औऱ वोँ झट सें राहुल कों डाँटते हुए बोलीं
राहुल - ओये हीरो.कपड़े तौ ठीक सें पेहेन लिया कर.(पऱ नज़र नहीं हटाई )
सरिता - (मुस्कुराते हुए) स्वीटी शायदकोई काम अधूरा छोड़ केँ आया हैं तेरा भइया.अब तोँ बड़ा होँ गय़ा हैं नाँ
औऱ दोनोजोर जोर सें हँसने लगे.
राहुल शर्मा केँ सीधारूम मे भाग गय़ा.
सरिता कों राहुल कां तम्बू देख केँ अंदाजा होँ गय़ा थां कि उसका हथियार अपने बाप सें बड़ा हैं.औऱ स्वीटी नें तौ अभि तक पोर्न मूवीज केँ अलावा असलियत मे लन्ड देखा हि नहीं थां। उसके बोयफ़्रेंडस तोँ कईहुए पऱ स्वीटी उनकोकभी कुछ उल्टा सीधा करने देती नहीं थि।
राहुल रूम मे जेकसोच रहा थां कि आजयह क्याँ हि रह हैं मेरे संग.सुभह सें अजीब अजीब घटनाए हौ रही हैं।
एक् हि दिन मे राहुल केँ संग बहोत कुछ हौ गय़ा थां.नीचे हुए एम्बर्समेंट केँ बाद राहुल कां लन्ड भि सो गय़ा.औऱ राहुल भि जाके अपनेबेड पे सो गय़ा.
सरिता औऱ स्वीटी भि अपने अपने कमरे मे चलेगए। सरिता तोँ लेटे लेटेसोच रही थि.राहुल कों अगर किसीतरह सिड्यूस कर लिया तौ मेरी बुर कि उतावलापन हमेशा केँ लिएमिट जाएगी.औऱ यह सेक्स टॉयज कि जरूरत भि नहीं पड़ेगी.पऱ अब राहुल कों सिड्यूस करे तौ केसे.स्वीटी भि आजकलघऱ मे हि रहती हैं.उसको कुछशक होँ गय़ा तौ.वी तोँ मनोज कों जरूर बतायेगी.बाप कि लाडली बेटी जोँ ठहरी.यह सोचते सोचते सरिता कों नींदलग गयीँ,।
अगलेदिन सुभह सरिता रोज कि तरह जल्दउठ गई.अपने कमरे सें निकलते हि उसने देखा कि राहुल कां रूम खुला हि हैं औऱ वोँ अभि सोरहा हैं थां। वोँ धीरे-धीरे सें रूम मे घुस गई.राहुल गहरी नींद मे थां.सरिता राहुल केँ लगभगजा केँ बैठ गयीँ,.राहुल चादरओढ़ केँ सोयाहुआ थां। सरिता नें धीरे-धीरे सें चादर नीचे खीची। उसको राहुल कां लन्ड देख्ना थां.राहुल कां लन्ड भि अभि सोयाहुआ हि थां पऱ फिन भि सरिता कों आकर्षक लगरहा थां.सरिता कों राहुल कां लन्ड छुनेकी बड़ी ख़्वाहिश होँ रही थि पऱ फिन उसने सोचा कि शायद राहुल जग जाएगा.
अपनामन मार केँ फिन सरिता वो सें उठ गई.औऱ द्वार (दरवाज़ा) खोल केँ वो सें निकल गयीँ,.निकलते टाइमजब उसने द्वार (दरवाज़ा) बन्द किया तोँ दरवाज़े कि आवाज़ सें राहुल कि नींदखुल गई,.उसने इधरउधर देखा.इसको कुछहोश हि नहीं थां औऱ कुछखबर हि नहीं थि अभि अभि कमरे मे क्याँ हुआ हैं।
राहुल फिन चादरओढ़ केँ सो गय़ा.
सरिता कों कुछ प्लान नहींसुच रहा थां राहुल कों सिड्यूस करनेका.उसने सोचा पहले स्वीटी कों घऱ सें दौड़ना पड़ेगा.तोँ वोँ स्वीटी केँ कमरे कि तरफ गई,.उसने देखा कि स्वीटी अभि बेड मे हि थि उठी नहीं थि पर्र जगी हुई थि औऱ पड़े पड़े हि फोन मे कुछकर रही थि। सरिता कमरे मे दाखिल होँ गयीँ, औऱ स्वीटी सें बोलीं.
सरिता - क्याँ सुभह सुभहफोन मे लगी हुईँ हौ.
स्वीटी - कुछ नहींबस फेसबुक देखरही थि.कुछ कम थां क्याँ इतनी सुभह सुभह मेरे कमरे मे ?
सरिता - नहीं नहीं.मे तोँ युहीआयी थि.औऱ क्याँ चलरहा तुम्हारे फेसबुक पे आजकल.
स्वीटी - कुछखास नहीं.कोई विवाह कररहा हैं.कोई घूमने जारहा हैं.सभी अपनी फोटो शेयरकरे जारहे हैं.बस यहीचल रहा हैं औऱ क्याँ.
दरअसल स्वीटी कों भि विवाह करनेकी बहोत ख़्वाहिश थि पर्र सीधे सीधेबोल तौ सकती नहीं.तौ जहा चांस मिला वो कुछ तौ टोंटमार देती थि.उसके भि जिस्म मे वासना केँ कीड़े दौड़रहे थें.
सरिता - (मौके कां फायदा उठाते हुए)अच्छा.तोँ तुम् क्यूं नहीं जाती घूमने कही.
स्वीटी - हम्म्म्म.जा तौ सकती हूं पऱ कहाजाऊ.
सरिता - अरे उसमे कौनसी बड़ीबात हैं.अपनी मौसी केँ पासचली जा.तेरेमूड भि थोडा फ्रेश होँ जाएगा औऱ तेरे मौसी कों भि कोईमिल जाएगा शॉपिंग मे कंपनी जेलिए.
शॉपिंग कां नाम लिया नहीं तोँ स्वीटी उछाल पड़ी.औऱ उठ केँ बैठ गई,.
स्वीटी - हैं यहसही हैं.औऱ मौसी कां घऱ हैं भि कितना दूर.दि तीनदिन रह केँ वापस आँ जाउंगी.
सरिता - हा तोँ बातकर लो अपने मौसी सें.
स्वीटी - अभि लगतीहु फ़ोन.
स्वीटी नें मौसी सें 2 मिनटबात कि औऱ बोलीं.
स्वीटी - क्याँ आईडिया दिया हैं मां। मौसी भि फ्री हि हैं.मे फिनकल चली जाउंगी.
सरिता - (यह तौ अबकल जाने कि बातकर रही हैं.अब क्याँ करे)अरे बेटा कल क्यूं आज हि निकल जा.गाड़ी घऱ पे हि हैं.औऱ वैसे भि यहा कोनसा काम हैं तेरी.
स्वीटी - हैं यह भि ठीक हैं.यहां क्याँ हि करना हैं मुझे.यह बोल केँ बेड सें उठी औऱ बाथरूम कि तरफचल पड़ी.औऱ जाते जाते सरिता सें बोलीं
स्वीटी - मां मे सजधजकर होकेआती हु.आप् कुछ बढ़िया सें नास्ता बनाओजब तक.
सरिता कां प्लान चल गय़ा.
सरिता - (अब स्वीटी काम सें कमदोदिन तौ नहीं आएगी.)
औऱ सरिता नीचे किचेन मे चली गयीँ,.उसने फिन स्वीटी कां फेवरेट नास्ता बनाने मे लग गई,.राहुल अभि सोयाहुआ हि थां.कुछ देरबाद स्वीटी सजधजकर होँ केँ नीचे आयी.सरिता नें नास्ता बना केँ टेबल पऱ लेकरखा थां.
सरिता - तेरा फेवरेट नास्ता बनाया हैं आज.
स्वीटी - ओहो.क्याँ बात हैं.मजा आँ गय़ा.मां आज तोँ दिन हि बना दिया आप् नें सवेरे आईडिया औऱ अब बढ़िया नास्ता.आज इतनी मेहरबान केसे होँ रही हौ मुझ पे
सरिता - (तुँ क्याँ जाने तेरे जाने सें मेरा कौनसा काम बनने वाला हैं) अरे बेटा इस मे कौनसी बड़ीबात हैं.आखिर मां हु तेरी.
स्वीटी नें फिन फटाफट नास्ता समाप्त किया औऱ निकल गई,.अब सरिता ऊपर अपने कमरे मे गई, औऱ उसकी पुरानां नाईट गाउन निकाला जौ मनोज नें उसे उपहार दियाकई सालों पहले.वोँ बोहुत डीपकट वाली थि औऱ उचाई मे सिर्फ सरिता केँ जांघो तक आती थि.सरिता नाहा केँ निकली औऱ वोँ गाउन पेहेन लिया.
वोँ वो केँ उसने अपने आप् कों मिरर मे देखा औऱ अपने हि सुडौल शरीर कों देख केँ शर्मा गई, औऱ मुस्कुराने लगी.आगे तोँ उसका मैदान साफ थां.
सरिता सीधा राहुल केँ कमरे मे दाखिल होँ गई,.वी सोयाहुआ हि थां.उसने दरवाजे पे हि खड़ेहुए राहुल कों आवाज़ लगाई
सरिता- राहुल बेटा.औऱ कितनी देर तक सोयेगा.उठजा.
राहुल - राहुल अंगड़ाई लें केँ आंखे खोलता हैं.औऱ सामने देख केँ दंगरह जाता हैं.उसको सामने कां दृश्य सपना लगता हैं.तोँ वोँ अपनी आंखें फिन सें मसलता हैं.औऱ देखता हैं.वोँ बेड सें उठ केँ बैठ जाता हैं.उसीकी आंखे एक् लम्हा केँ लिए भि सरिता सें नहीं हटाती.वी उसको सरिता कों घूरे जाता.उसके लंड पंत मे सें सलामी देने लगता हैं.वोँ देख केँ सरिता मन हि मन मुस्कुराती हैं।
सरिता - राहुल क्याँ हुआ बेटा। चलउठजा अब.जल्द सें रेडी होँ जा औऱ नास्ता कर लेँ.
औऱ सरिता वो सें निकल जाती हैं.राहुल कां हालकुछ ठीक नहीं थां अब.वोँ सीधा बाथरूम मे जाता हैं औऱ अपनी मां केँ नाम सें मुठ मारने लगता हैं.थोड़ी देर मे उसका पानीछूट जाता हैं.फिन वोँ सजधजकर हौ केँ नीचेआता हैं.
सरिता वो पे नास्ता लगा केँ टेबल केँ पास बैठी थि.राहुल कों विश्वास नहीं होँ रहा थां जोँ वोँ देखरहा थां.वोँ सरिता कों घूरता जारहा थां.यह देख केँ सरिता कां मनखुश हि रह थां.उसका प्लान कामकर रहा थां.
राहुल टेबल केँ पास आँ केँ बैठ जाता हैं.
सरिता - क्याँ हुआ राहुल.सभीठीक तौ हैं
राहुल कि तोँ आवाज़ हि अटैक गयीँ, थि.
राहुल - (लड़खड़ाते हुए)हा.हा.सभी ठीक …हैं
सरिता- तोँ फिनऐसे क्याँ देखरहा हैं
राहुल - (आंखे नीचेकर केँ ) नहीं मम्मी कुछ नहीं.वोँ तौ बस युही.
सरिता - (बड़ी मसुमियात सें)आज बोहुत दिनों बाद मैंने न् यह ड्रेस निकली हैं.तेरे बापू नें मुझे उपहार दि थि बोहुत सालो पहले.तोँ सोचा ट्राय कर केँ देखलो अभि भि स्लिम होती हैं याँ नहीं.आँ तोँ गई, हैं ड्रेस पऱ थोड़ी टाइट होँ गई, हैं.अभि थोड़ी मोटी हौ गयीँ, हु नाँ.
राहुल - (फिन घूरते हुए ) नहीं नहीं मां.
सरिता - क्याँ नहीं नहीं.अछि नहींलगी तुझीयह ड्रेस.
राहुल - नहीं मां वोँ बात नहीं.
सरिता - फिन.
राहुल - वोँ.वोँ.
सरिता - क्याँ वोँ वोँ.
राहुल - (आप् बड़ी सेक्सी दिखरही हौ) वोँ मम्मी आप् अभि बहुत स्लिम होँ.
सरिता - अच्छा वैसे.
औऱ सरिता टेबल सें खड़ी होँ गई,.घूम केँ राहुल कि तरफ सें उल्टी घूम गयीँ,.सजे चुटर हल्के हल्के सें दिखरहे थें.राहुल कि आंखेफटी कि वहतिरह गई,.
सरिता - (उत्साहित होँ केँ)औऱ यह ड्रेस कैसीलगी तुम्हें.
राहुल - (कहना तोँ चाहता थां कि तुम् बड़ीहिट लगरही हौ इस ड्रेस मे पऱ.) अछि हैं मां
सरिता - (शरारती आवाज़ मे)ड्रेस अछि हैं याँ मे अछिलग रहीहु इस ड्रेस मे.
राहुल - मां आप् भि अच्छी लगरही होँ.
सरिता - (कामुकता सें ) बसअछि लगरही हु.तोँ पहले नहीं लगती थि.
राहुल - वैसीबात नहीं हैं मां.
सरिता - तोँ कैसीबात हैं.
राहुल - नहीं वोँ.वोँ.
सरिता - फिन वोँ वोँ शुरुआत हौ गय़ा तेरा.मै इस ड्रेस मे सेक्सी लगरही हु केँ नहीं.
राहुल ऐसीबात सुन केँ दंगरह गय़ा.फिन होश संभाल केँ बोला.
राहुल - हा मां
सरिता - क्याँ हा.
राहुल - (लड़खड़ाते हुए ) आप् वोँ.सेक्सी लगरही हौ इस ड्रेस मे.
सरिता - अरे बुद्धू तौ इतनीदेर लगते हैं यह बोलने मे.
राहुल - नहीं मां वोँ बस युही.
सरिता - अच्छा चलठीक हैं.नास्ता ख़त्म कर लें औऱ प्लेट्स किचेन मे लेकरआजा.मे रसोई मे हि हु.औऱ वोँ वो सें निकल गयीँ,.
राहुल कि नज़र सरिता केँ गांड केँ तरफ हि थि.वोँ जैसाचल रही थि.वैसे उसके चुतरहिल रहे थें.
राहुल फिन नास्ता समाप्त कर केँ प्लेट किचेन मे लेकर गय़ा.वो सरिता सिंक मे प्लेट्स धोरही थि.
राहुल - इसेकहा राखु
सरिता - एक् कामकर.यहां सिंक मे डालदे.
वोँ सिंक कि तरफबढा औऱ प्लेट सिंक मे रखने हि वाला थां केँ.सरिता उसकीतरफ पलट गई.इसे सरिता केँ चुचिया राहुल केँ छाती सें टकरा गए.राहुल केँ जिस्म मे करंट जैसा दौड़ गय़ा.वोँ हिला नहींबस पुतले जैसा खड़ा होँ गय़ा.सरिता पीछे नहीं हटी.वोँ औऱ पास आँ गई, औऱ अब उसकी चुचिया पूरीतरह सें राहुल कि छाती सें सट्टे हुए थें.दोनो कि सांस तेज़ हौ गयीँ, थि.राहुल होड़ घबराया हुआ भि थां.
सरिता नें कुछ नहींकहा औऱ धीरे-धीरे सें अपनी एड़ियों पे कड़ी हौ गयीँ,.जिस सें उसका बैलेंस थोडा बिगड़ा तोँ उसने अपना एक् हाथ राहुल केँ कंधे पे दाल दिया.राहुल नें भि उसको संभल नें केँ लिए एक् हाथकमर केँ तरफ सें पकड़ लिया.दोनों कुछ नहि बोलरहे थें.बस एक् दूसरे केँ सांसो कों महसूस कररहे थें.कमरे मे पूरा सन्नाटा छायाहुआ थां.सरिता नें अपनी आँखेबंद करली औऱ धीरे-धीरे सें अपने होंठ राहुल केँ होंठो कि तरफ बढ़ाना शुरुआत किया.राहुल कां भि अभि कॉन्फिडेंस बढ़ गय़ा थां.वोँ थोडा सां झुकने लगा.अब दोनों केँ होंठो केँ बिच मे बहोत काम फैसला रह गय़ा थां.तौ सरिता नें आँखे खोली औऱ राहुल कि तरफदेख केँ एक् कामुक मुस्कान दे दि
.अब राहुल पुरे कॉन्फिडेंस मे आँ गय़ा.फिन सरिता नें तेजी सें अपने होंठ राहुल केँ होठों केँ तरफ बढ़ाये.दोनों केँ होंठ मिलने वाले हि थें कि.
डोर बेल्ल बज गयीँ,.दोनों घबरागए औऱ झट सें अलग हौ गए.राहु पीछेसरक गय़ा.दोनों नें अपनेहोश संभाले.
राहुल - मे देखता हु.कौन हैं.
सरिता - हैं हैं देखजा.
जैसे हि राहुल किचेन सें बहार निकला.उतने मे सरिता बाजु वाले कमरे मे चली गई, औऱ एक् लम्बा सां जैकेट जैसा पेहेन लिया जौ नाईट गाउन केँ संगआता हैं.
बहार राहुल नें दरवाजा खोला तोँ पड़ोस मे काम करनेवाली कांता बाई दरवाजे पे कड़ी थि.
राहुल - (बड़े उखड़े हुए स्वर मे ) क्याँ काम हैं.
कांताबाई - वोँ बड़ी मालकिन नें छोटी मालकिन कों घऱ पे बुलाया हैं.
उतने मे सरिता कमरे सें बहार निकली.
सरिता - कौन हैं राहुल.
राहुल - कांताबाई आयी हैं.दादीमा नें आपको बुलाया हैं घऱ पे.
यह सुनते हि सरिता दरवाजे पे आँ गई,.
सरिता - क्याँ हुआकुछ काम हैं क्याँ.
कांताबाई - पता नहि छोटी मालकिन.बस मुझे बोलै कि आप् कों बुला केँ लेकरआने.
सरिता - अभि बुलाया हैं क्याँ.
कांताबाई - हैं मालकिन.अभि बुलाया हैं.
सरिता - अच्छा तुँ चल मे आतीहु.
राहुल नें फिन दरवाजा लगा दिया.औऱ सरिता ऊपर केँ कमरे केँ तरफ जातेहुए बोलि.
सरिता - राहुल मे जराजेक आतीहु दादीमा केँ पास.पता नहि क्याँ काम निकलआया हैं.
राहुल - (दुःखी होतेहुए) हैं मम्मी ठीक हैं.
सरिता औऱ राहुल दोनों कों मलाल होँ रहा थां.इतना अच्छा मौकाहाथ लगा थां.पऱ जोँ भि आजहुआ उससे राहुल कां कॉन्फिडेंस बहोत बढ़ गय़ा थां.औऱ उसेअब लगनेलगा थां कि.जौ उसने अपनी मम्मी कों चोदने कां सपने देखा थां वोँ सच होँ सकता हैं.आज नहि कभी औऱ सही.
उधर सरिता भि मायूसी सें ऊपर कमरे मे गई, औऱ अपने कपडेबदल केँ साड़ी पेहेन ली.सरिता कों भि लगरहा थां कि उसका प्लान तौ चल गय़ा थां.पऱ कम्बख्त सासू माँ बिच मे आँ गयीँ,.फिन उसने सोचा.अभि नहि तोँ क्याँ हुआ.आज रात कों तौ हम् दोनों हि घऱ मे हैं.
राहुल नें फिन बैठे बैठे टेलीविज़न देखरहा थां.औऱ ऊपर सें मम्मी निचे आयी.साड़ी पेहेन केँ.मां कि साड़ी नहि केँ निचे बंधी हुइ थि। औऱ वोँ बिलकुल कामसूत्र कि मूरत कि तरहदिख रही थि.
सरिता निचेआयी औऱ बोलि.
सरिता - साड़ी ठीक तोँ दिखरही हैं न्.
राहुल - हैं मम्मी अछिदिख रही हैं.
सरिता - (शरारती स्वर मे) क्यूं इसमें सेक्सी नहि लगरही मे.
राहुल इसबार नहि डरा.उसकाडर ख़तम होँ गय़ा थां.
राहुल - वोँ तौ आप् हि सेक्सी हौ.तोँ कुछ भि पेहेन लो सेक्सी हि लगोगी नं.
सरिता - (खिलखिलाते हुए) अच्छा.बड़ा बदमाश होँ गय़ा हैं तुँ.तूँ ठहर मे तुम को आँ केँ दिखती हु.
औऱ यहकह केँ निकल गई, घऱ सें.
बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex – New Episode
सरिता अपनेघऱ सें निकल केँ अपनी सासू केँ घऱ जाने केँ लिए निकल गई,.रास्ते मे वोँ सोचरही थि कि जैसै उसने प्लान मे सोचा थां वैसा हि हुआ पऱ कमबखत कांता नें रायता फैला दिया.आज राहुल बराबर मेरे प्लान केँ मुताबिक फस गय़ा औऱ उसेशक भि नहींहुआ कि यहसभी उसकी मां नें उससेजान बूझ केँ करवाया थां (औऱ मन हि मनहस देती हैं).अब कुछनई तरकीब सोचनी पड़ेगी.
राहुल घऱ मे tv शुरुआत कर केँ सोफे पे बैठा थां.पर्र उसके दिमाग़ केँ tv पे एक् हि सीन रिपीट पे चलरहा थां जिस मे उस केँ होठ अपने मां केँ होठों सें छूने वाले थें.उसको विश्वास हि नहीं हौ रहा थां कि उसकी मम्मी उसको फ्रेंच किस करने वाली थि.फिन उसकेमन मे आया कि शायदयह एक् एक्सीडेंट थां औऱ मे फालतू मे इमोशंस मे बहरहा हु.पऱमा कि आंखेबंद कि हुई तस्वीर उसके आंखों सें जा नहींरही थि.फिन वोँ सोचने लगा क्यूं न् एक् बार ट्राय करके देखाजाए कि मम्मी कों मुझ मे इंटरेस्ट हैं याँ सुभह जौ हुआ वोँ बस एक् एक्सीडेंट थां.
सरिता अपनी सासू केँ घऱ पहुच गयीँ,.विमला हॉल मे हि बैठी थि.
सरिता - प्रणाम सासुमा.आपने बुलाया थां?
विमला - जीतीरहो बेटी.आओ बैठो.दरअसल मे कल विजया (मनोज कि छोटी बेहेन) केँ पास जाने वाली थि.सोचरही हुकुछ दिन उसकेपास रह केँ आउ.
सरिता - अच्छी बात हैं सासुमा.
विमला - तोँ एक् काम हैं.जानां हि हैं तोँ मैंने सोचा उसकेलिए एक् दो साड़िया लेकर जाती हु.तोँ तुम् बाजार सें जा केँ आजकुछ अच्छी साड़िया लेकर आँ जाओ.हम् रात मे निकल जायेंगे.
सरिता - क्याँ ससुरजी भि आँ रहे हें.
विमला - हाँफिन.वैसेयहा क्याँ हि करना हैं उनको.
सरिता - यह भि सहीबात हैं.ठीक हैं मे अभि राहुल कों लेकर बाजार जातीहु औऱ अच्छी सि साड़िया खरीद केँ लातीहु.
विमला - हाठीक हैं.सीधे घऱ पे हि आँ जानां.मे दिनभर घऱ पे हि रहूंगी.
सरिता - ठीक हैं सासुमा.मे चालू.
विमला - हाठीक हैं.
विमला नें यह बताया हि नहि केँ वोँ विजया केँ पास क्यूं जारहे हैं नां सरिता नें पूछा.सरिता अब अपनेघऱ केँ तरफ जाने केँ लिए निकल गयीँ,.जाते जाते उसके दिमाग़ कि घंटीबज गई,.वोँ घऱ पहुंची तौ राहुल टेलीविज़न देखरहा थां.वोँ सीधे राहुल केँ पास गयीँ, तौ राहुल नें पूछा.
राहुल - क्याँ हुआ मां.दादीमा नें क्यूं बुलाया थां.
सरिता - अरेकुछ नहि.वोँ दादीमा औऱ दादा तुम्हारे.तुम्हारी फूफी केँ पासजा रहे.उनकेलिए कुछ लेना हैं.
राहुल - अच्छा.
सरिता - चल तेरी हि लेकर जानां पड़ेगा मुझे मार्किट.वाहन तौ स्वीटी लेकर गयीँ, हैं.अब तेरी बाइक पे हि जानां पड़ेगा.
राहुल जल्दी खड़ा होँ गय़ा.
राहुल - हाचलो मम्मी चलते हैं.
राहुल नें बाइक निकली औऱ बहार रेडी खड़ा थां.सरिता उतने मे अपना पर्स लेकर आयी.डोर लॉक किया औऱ राहुल केँ पास आँ केँ.
सरिता - तुँ ठीक सें चला तोँ लेगा नां.
राहुल - हा मां.मे रोज चलताहु.
सरिता - हा वोँ मुझेपता हैं.पऱ मे नहि रोज बैठती नाँ बाइक पे.नाँ जाने कितने साल हौ गए मुझे बाइक पे बैठे हुए.औऱ तूँ कौनसा औरतो कों लेकर घूमता हैं.
राहुल - औरतो कों लेकर मतलब.
सरिता - अरे बेटा.मे दोनों पाऊँ एक् तरफकर केँ बैठूंगी नाँ.तौ तुँ बैलेंस कर लेगा.
राहुल - (शरारती अंदाज मे) आप् चिंता मत करो.आप् मुझेकास केँ पकड़ लेना बाकि मे संभल लूंगा.
सरिता - ठीक हैं तब.
औऱ वोँ बाइक पे बैठ गई,.सरिता केँ दोनों हाथ राहुल केँ कमर सें लिपटे हुए थें.राहुल केँ तौ रोंगटे खड़े होँ रहे थें.महिला कों क्याँ किसी लड़की कों भि अभि तक राहुल नें अपनी बाइक पे नहि बिठाया थां.जैसे वोँ ब्रेक मरता.सरिता आगे कि तरफ हौ जाती औऱ उसकी बड़ी बड़ी चूचिया राहुल लेँ पीठ पे टकरा जाती.राहुल कों बड़ामजा आँ रहा थां.औऱ उसका हथियार भि पैंट मे सलामी देरहा थां.वोँ तोँ अच्छा हैं कि उसने जीन्स पहनी थि.तोँ अधिककुछ दिखाई नहि पड़रहा थां.सरिता पीछे सें सभी पहचान गई, थि.कि राहुल इतने ब्रेक क्यूं माररहा थां.दो तीनबार उसनेजब ब्रेक मारा तौ उसकेबाद सरिता राहुल कों पीछे सें कस केँ बैठ गई,.उसकी दोनों चूचिया राहुल कि पीठ सें पूरीतरह दबी हुईँ थि.दोनों केँ बिच मे सें हवा जाने कि भि जगा नहि बची थि.राहुल कों तौ जैसे बदलो मे सें गाडी चलने कां एहसास होँ रहा थां.दोनों मज़े लें रहे थें.कुछ देर मे मार्किट आँ गय़ा.
राहुल - कहा चलना हैं.
सरिता - वोँ साड़ी कि दुकान मे.
दोनों साडी कि दुकान मे गए.सरिता नें फटाफट सें दो सरिया खरीदली औऱ वोँ दुकान सें निकलगए.
राहुल - अबकहा जानां हैं मम्मी.
सरिता - अब मार्किट मे आये हि हैं तोँ मे भि कुछ खरीद लेतीहु मेरे लिया.
राहुल - हायहठीक हैं.कहा चलना हैं.
सरिता नें उसे इशारे सें बताया.
सरिता - उस दुकान मे चलते हैं.
वोँ अंडरगारमेंट्स कि दुकान थि.बहार सब पुतलो पे अंडरगारमेंट्स चढ़ेहुए थें.कुछ एक् औरतो केँ पुतले पे लिंगेरी चढ़ी हुईँ थि.राहुल औऱ सरिता दुकान मे चलेगए.
सेल्सगर्ल - क्याँ दिखाऊ मैडम.
सरिता - वोँ स्पेशल नाईट वाला चाहिए.
सेल्सगर्ल - मैडम ट्रांसपेरेंट मे दिखाऊ.नया कलेक्शन हैं.
सरिता - हा दिखाओ.
सेल्स गर्ल - मैडम साइज.३४ डी.
राहुल उधर खड़े हौ केँ सभीसुन रहा थां पर्र उसके पल्ले कुछ नहि पड़रहा थां क्युकी दोनों पुरेकोड लैंग्वेज मे बातकर रहे थें.फिन सेल्स गर्ल नें एक् बॉक्स सरिता कों दिया औऱ कहा मैडम आप् चेककर लीजिये.वहां सामने चेंजिंग रूम हैं.
सरिता चेंजिंग रूम मे घुस गयीँ,.थोड़ी देरबाद उस नें राहुल कों अंदर सें आवाज़ लगायी.
सरिता - राहुल.राहुल बेटा.जरा इधर आनां तोँ.
राहुल - (बहार खड़े खड़े) क्याँ हुआ मम्मी सभीठीक तोँ हैं नाँ.
सरिता - अंदर आँ जाओ.कुछ काम हैं तुमसे.
राहुल - ठीक हैं मां.आया.
कहते हि वोँ अंदरघुस जाता हैं.वो अंदरघुस थां हैं.अंदर कां सीनदेख केँ उसकी हालत ख़राब होँ जाती हैं.उसको पसीने छूट नें लगते हैं.पैंट केँ अंदर कां मोटा लन्ड अचानक सें पुरेजोश मे आँ जाता हैं.
अंदर सरिता नें अपना ब्लाउज उतर दिया थां औऱ अपनीपीठ दरवाजे कि तरफकर केँ कड़ी थि.जैसे राहुल अनादर घुसा तौ उसको सरिता कि नंगीपीठ केँ दर्शन हौ गए.उस सें उसकी हालत ख़राब हौ गई,.
सरिता - बेटा मेरी थोड़ी सहायता करदे.
राहुल - हा मां कहो नां.क्याँ करना हैं.
सरिता - मेरे ब्रा कां हुक शायदरुक गय़ा हैं.थोडा खोलदे तोँ.
राहुल धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ा.उसके हाथ काँपरहे थें.फिन उसने अपनेहाथ आगे बढ़ाये औऱ ब्रा केँ हुक कों छुआ.जैसे हि उसने वोँ खोलने कि कोशिश कि तोँ उसकेहाथ सरिता कि नंगीपीठ कों छूगए जिससे राहुल केँ शरीर मे करंट दौड़ गय़ा.सरिता समाज गई, कि राहुल अभि नया खिलाडी हैं.औऱ इस सें पहलेकभी किसी स्त्री कों छुआ नहि हैं.इसलिये इतना घबरारहा हैं औऱ उसकेहाथ काँपरहे हैं.कुछ देर कोशिश करने केँ बाद.
सरिता - क्याँ हुआ बेटा.नहि खुलरहा हैं क्याँ.(अपनी गर्दन निचेदाल केँ धीरे-धीरे सें हसने लगती हैं)
राहुल - कोशिश कररहा हु मम्मी.पर्र यहपता नहि केसे खुलता हैं.
सरिता - क्याँ तुमने कभी किसी लड़की कां ब्रा नहि खोला क्याँ.औऱ खिलखिला केँ हस पड़ती हैं.
राहुल शर्मा जाता हैं.औऱ कहता हैं.
राहुल - नहि मम्मी.हुक तौ छोड़िये मे तोँ ब्रा कों पहलीबार छूरहा हु.
सरिता - (खिखिलाते हुए ) अच्छा.चल छोड़दे.मे कर लुंगी.
इतना कहते हि ब्रा कां हुकखुल जाता हैं.औऱ आगेगिर जाता हैं.सरिता अपनी चूचियों कों सदी केँ पल्लू सें धक् लेती हैं औऱ राहुल कि तरफ पीछेमुद केँ कामुक सि मुस्कान देतेहुए कहती हैं.
सरिता - थैंक्स बेटा.तुँ तौ बड़ी जल्द ब्रा खोलना सिख गय़ा.तुँ बहाररुक मे आतीहु.
राहुल कां मन वैसेकर नहि रहा थां वहां सें निकलने कां.वोँ अपनी मम्मी कि नंगीपीठ केँ चमक कों देख केँ पागल होँ गय़ा थां.उसकी त्वचा बड़ी कोमल थि.जोँ मंद लाइट मे चमकरही थि.दिल कि ख़्वाहिश मार केँ राहुल वहां सें निकल गय़ा.
फिनकुछ देर बाद.सरिता चेंजिंग रूम सें बहार आँ गयीँ,.औऱ दो बॉक्स पैक करनेकेह दिया.फिन दोनों वहां सें निकले औऱ घऱचले गए.
बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex – New Episode
घऱ पहुचने पे सरिता नें कमरे मे जाके ख़ुद केँ लिए ख़रीदे हुए कपड़ों कां बॉक्स अल्मारी मे छुपा केँ रख दिया औऱ साड़ियाँ लेकर अपने साँस केँ घऱचली गई, …घऱ सें निकलते समय राहुल सें कहा….
सरिता - मे ज़रा सासुमा केँ पास जाकेयह साड़ियाँ देकरआती हु.
राहुल - अरे तौ पहलेबोल देती आप्…सीधे वो हि जाते हम् कार पे…
सरिता - कोईबात नहि बेटा….मे चली जाऊँगी…बग़ल मे तौ जानां हैं…
डरअसल सरिता कों अपनेलाए हुए कपड़े जौ घऱ पे रखने थें…वोँ कपड़े अपनी साँस केँ पास केसे लेकर जाती…कही ग़लती सें साँस वोँ दिखाने केँ लिएबोल देती तौ…
सरिता फिन विमला केँ पास आँ केँ वोँ साड़ियाँ दे दि…विमल कों भि साड़ियाँ पसन्द आयी…
विमल - मुझेपता थां…तेरा चोईस बढ़िया रहता हैं…इसीलिए तुम्हें हि यह साड़ियाँ लाने कों कहा मैंने…बोहत खूबसूरत कलर हैं…विजया कों अवश्य पसन्द आएगीयह साड़ियाँ…
सरिता - हाँयह तोँ हैं…मेरी औऱ विजया कि मनपसंद भि काफ़ी मिलती जुलती हैं…
दोपहर कां वक्त होँ गय़ा थां…तौ विमल नें पूछ लिया…
विमल - अरे तुने खानां खाया केँ नहि…
सरिता - अरे अभि कहां सासुमा…अभि तौ मार्केट सें आयी हु…अबघऱ जाके खानां पकाऊँगी…राहुल भि तौ घऱ पे हि हैं नां…
विमला – तोँ एक् कामकर नाँ…ये कांता खानां बना हि रही हैं…तुँ राहुल कों भि यही बुला लें…हमारे संग हि खानां खा लेना…
सरिता - हाँठीक हैं…औऱ मुझे भि अबघऱ जाकेकाम करने कां मन नहि कररहा….
यह कहते हि सरिता नें राहुल कों फ़ोन किया…
सरिता - राहुल बेटा…तूँ दादीमा केँ घऱ आँ जा…लञ्च यहीकर लेंगे आज…
राहुल कों अपने दादाजी दादीमा केँ घऱ पे जानां पसन्द नहि थां क्यूँकी जब भि वोँ उनकेघऱ जाता तौ दादा उसको पकड़ केँ अपनी पुरानी कहानिया घंटो तक सुनते बैठ जाते….तोँ राहुल नें सरिता कों टालते हुएकहा…
राहुल - मम्मी मुझे तोँ अभि भूँक नहि लगी हैं…आप् घऱआते वक़्त…कुछ पैक करवा केँ लेके आनां…भूँक लगने पे खा लूँगा…
सरिता - अच्छा ठीक हैं…मे तेरा खानां पैक करवा लातीहु…
फिन राहुल अपने कमरे मे चला गय़ा…उसका लन्ड सवेरे सें कंट्रोल मे नहि थां….एक् केँ बाद एक् ऐसी घटनाए घाटरही थि कि जौ उसके लन्ड कों एकदम गर्मकर रही थि…तोँ राहुल नें सोचाअब घऱ मे कोईआने वाला तोँ हैं नहि…जाके अपनेरूम मे पोर्न मूवी देखता हु…औऱ अपने लन्ड कों शांत करताहु….
राहुल अपने कमरे मे गय़ा औऱ अपना अकड़ा हुआ लन्ड कों आज़ाद कर दिया…उसने लैप्टॉप पे पोर्न चलाया औऱ अपनीमूठ मरनेलगा…
वो दूसरी तरफ़ सरिता नें सोचा कि राहुल केँ संग हि खानां खायाजाए तोँ उसने दोनो खानां पैक करवा लिया औऱ घऱ कि तरफ़ निकल गयीँ, …घऱ पहुचने पे उसने देखा कि राहुल हॉल मे तोँ नहि हैं…तोँ वोँ अपने कमरे मे जाने केँ लिएऊपर जाने लगी…ऊपर जातेहुए उसे किसी कि आवाज़ आयी तौ वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ी तौ उसेफिन समाजआया कि उसका बेटा पोर्न देखरहा हैं औऱ वोँ भि बिना हेड्फ़ोंन केँ….
सरिता धीरे-धीरे सें बिनाकोई आवाज़ किए राहुल केँ कमरे केँ बाहर् पहुँची.वो उसने देखा कि राहुल कां रूम खुला हि हैं…उसने धीरे-धीरे सें राहुल केँ कमरे मे झाँकके देखा तोँ उसके सामने कां दृश्य देख केँ वोँ सिहर उठी….उसके बेटे कां लम्बा औऱ मोटा नंगा लन्ड सरिता नें पहलीबार देखा थां…उसके चुत गिली होने लगी…सरिता कों होश हि नहि रहा कि कब वोँ अपनीचुत अपने हाथो सें सहलाने लगी…
एक् तरफ़ राहुल अपने मोटे लन्ड कों ज़ोर ज़ोर सें हिलाए जारहा थां….औऱ दूसरी तरफ़ सरिता अपनीचुत कों ज़ोर ज़ोर सें रगड़रही थि…
सरिता नें पहलीबार अपने बेटे कां लम्बा औऱ मोटा लन्ड देखा थां…
सरिता - (सोचते हुए) राहुल कां लन्ड तौ उसके बापू सें भि बड़ा औऱ मोटा हैं….हाए क्याँ लन्ड हैं…यह लन्ड चुत मे जब जाएगा तौ क्याँ मजा आएगा….
राहुल दूसरी तरफ़ पूरा अनजान थां कि…उसकी मम्मी उसकोमूठ मरतेहुए देख केँ अपनीचुत रगड़रही थि….
जैसे जैसे राहुल नें ज़ोर ज़ोर सें मूठ मारना शुरुआत किया तोँ वहा सरिता नें भि ज़ोर ज़ोर सें अपनीचुत कों रगड़रही थि….
फिन राहुल नें झड़ने हि वाला थां कि उसके मुँह सें आवाज़ निकली…
राहुल - (मधोशि मे) आह्ह्ह….मम्मी….ओह मेरी मां…मे गय़ा….
यहसुन केँ सरिता भि झाड़ गयीँ, ….औऱ उसकी चीख़ निकालने हि वाली थि केँ उसके अपना मुँह अपने दूसरे हाथ सें धाक लिया.
राहुल नें अपना सारा३-४ फ़वरे केँ संग अपना सारा पानी छोड़ दिया….उसका सारामाल उसकी छाती पे उड़ गय़ा थां….राहुल कि साँसे तेज़ होँ गयीँ, थि…
वहा सरिता भि झाड़ गई, थि औऱ उसकी थंगे काँपरही थि…उसको खड़े रहने कों भि परेशानी होँ रही थि….फिन भि सरिता कां मन प्रफुलीत हौ गय़ा थां….उसको यहजान केँ ख़ुशी होँ रही थि कि उसका बेटा…अपनी मां केँ बारे मे सोच केँ मूठमार रहा थां…नाँ कि किसी जवान लौंडिया केँ बारे मे सोच केँ …आगे कां प्लान तौ सरिता कां सेट थां…बस अमल मे लाने कि देरी थि…
सरिता झट सें वो सें निकल केँ हॉल मे चली गयीँ, औऱ थोड़ी देरजा केँ थोड़ी दे सोफ़े पे जा केँ लेट गई, ….राहुल भि थक केँ नींद केँ आग़ोश मे आँ गय़ा थां…
फिन सरिता नें खानां प्लेट्स मे लगाया औऱ राहुल कों आवाज़ दिया…
सरिता - राहुल….राहुल बेटा….
राहुल यहसुन केँ अचानक सें नींद सें झाग गय़ा औऱ अपनेहोश मे आएहुए कहा….
राहुल - हाँ मम्मी….मे अपने कमरे मे हु….क्याँ हुआ…
सरिता - अरे तेरी भूँक नहि लगी क्याँ…आज कुछखा लें…तेरे चक्कर मे मे भि भूकीहु…
राहुल - आया मां ….बसदो मिनट…
औऱ झट सें राहुल नें अपने कपड़े पहनते हुए नीचेभगा…
नीचे सरिता नें सारा खानां डाइनिंग तबले पे लगारखा थां औऱ साइड केँ चेर पे बैठ केँ राहुल कां इंटेज़ार कररही थि….राहुल दौड़ता हुआ नीचेआया…
राहुल - अरे मम्मी…तुम् नें क्यूं परेशानी उठाई…मे अपने आप् खा लेता थां खानां…
सरिता - अरे मेरा राजा बेटा….मैंने तोँ अपना खानां भि पैक करवा लिया…सोचा आज तुँ घऱ पे हैं तौ क्यूं नाँ तेरेसंग हि खानां खउ….वैसे भि तूँ घऱ पे रहेत किधर हैं…(मायूसी दिखाते हुए) औऱ तुँ अपनी बूढ़ी मां केँ संग रहना भि क्यूं चाहेगा…
राहुल - नहि नहि मां… ऐसीबात नहि हैं…
सरिता - कैसीबात…
राहुल - नहि वोँ बस…वोँ….आप् केँ संग…वोँ…
सरिता - अरे तूँ फिन शुरुआत होँ गय़ा….वोँ वोँ….
यह वोँ…वोँ.कां क्याँ चक्कर क्याँ हैं…चल आँ जाअब खानां खा लेँ…
उतने मे राहुल डाइनिंग तबलेबी आँ केँ बैठ गय़ा…
राहुल - नहि मां.वोँ बस मे कहरहा तह कि…आप् अभि बूढ़ी थोड़ी नाँ हुई होँ…औऱ आप् केँ संग मुझे वक्त बिताना अच्छा लगता हैं…पऱ….वोँ…
सरिता - क्याँ वोँ…
राहुल - बस वोँ…आप् नां….वोँ…
सरिता - अरेफिन वोँ …वोँ…लगा दि तूने…
राहुल - वोँ नां…आप् हरबात पे टोकती रहती होँ नां…तोँ इसीलिए…
सरिता - अच्छा…इतनी सि बात….अब सें मे नां…अपने प्यारे राजा बेटे कों कोईबात पे नहि टोकोंगी…बस अब ख़ुश…
राहुल - (मुस्कुराते हुए) हाँ…मां…
फिन सरिता औऱ राहुल दोनो नें संग मे खानां खाया….औऱ फिन…
सरिता- अब मुझे तोँ नींद आँ रही हैं…
राहुल - हाँ मम्मी….खानां आज ज्यादा हि होँ गय़ा….मे भि सोचरहा हु केँ एक् झपकीमार लू…
दोनोफिन अपने अपने कमरे मे जा केँ सो गए….सरिता नें भि सोचा कि राहुल कों आजरात बहोत काम करवाना हैं.तौ अभि उसको आराम करने दियाजाए…
साम हौ चुकी थि…सरिता उठ केँ नीचे आँ चुकी थि….उसने अपने कपड़े बदललिए थि…उसने फिन वोहि सवेरे वाला गाउनपहन लिया थां….
सरिता - राहुल….राहुल बेटा….उठ जा बेटा…अब साम होँ गयीँ, …कितनी देर सोएगा….उठ जा…तेरे लिए गरमा गर्म कोफ़ी बनतीहु….
राहुल कि नींदखुल गई, …औऱ वोँ अपनी आँखे मसलते हुए….
राहुल - हाँआया मम्मी…
राहुल फिनकुछ देरबाद नीचे गय़ा…औऱ फिन उसने देखा कि सरिता नें सवेरे वाले कपड़े पहन केँ सोफ़े पे बैठी थि….राहुल कि आँखेबस उसके मां कि नंगी जाँघे औऱ चूचियो कि दरार कों ताकरहे थें….जैसे हि राहुल नीचेआया…
सरिता - उठ गय़ा तुँ…आँ जा तुम्हारी तरफ गरमा गर्म कोफ़ी पिलाती हु…
यह कहतेहुए सरिता अपनीगंद मटकते हुए रसोई मे चली गई, ….औऱ कोफ़ी लें कर आयी….तब तक राहुल सोफ़े पे जा केँ बैठ गय़ा थां…
डोनो नें कोफ़ी पे संग मे….पर्र राहुल कि नज़र अपनी मां केँ शरीर सें हठ नहि रही थि….औऱयह बात सरिता कों पता थि कि उसका बेटा उसके पूरे शरीर कों देखरहा हैं….
सरिता - क्याँ हुआ राहुल….ऐसे क्याँ देखरहे हौ…
राहुल अचानक सें अपने नज़र फेरते हुए…
राहुल - कुछ नहि मम्मी…बस यही…
सरिता - (हँसते हुए)अरे बेटा…इतना शर्माएगा तौ तेरा कैसा होगा….
राहुल - (लड़खड़ाते हुए) नहि मां बस वोँ आज…आप् बड़ी अच्छी लगरही होँ…
सरिता - (झटा गुसा दिखाते हुए)हाँ बस बस…तुम्हें मे इन कपड़ों मे हि अच्छी लगती हु…दोफ़र मे जबसडी पहनी थि…तब अच्छी नहि लगरही थि नाँ…
राहुल - नहि मां वैसीबात नहि हैं…
सरिता - (राहुल कों चिढ़ाते हुए)हाँ तोँ फिन कैसीबात हैं…
राहुल - आप् तौ सड़ी मे अच्छी लगरही थि….
सरिता - अच्छा…तोँ बता क्याँ अच्छा लगा तुम्हे आज अचानक अपनी बूढ़ी मां कों देख केँ…
राहुल - (घबराते हुए) नहि मम्मी आप् बूढ़ी कहा लगती हौ….
सरिता - (मादक सवार मे) तौ कैसी लगतीहु मेरे राजा….
राहुल - (लड़खड़ाते हुए) आप् नाँ…आप् नाँ….बड़ी सेक्सी लगती होँ…
सरिता - क्याँ सेक्सी लगता हैं मेरे राजा तुझेही अपनी बूढ़ी मां मे….
राहुल - वोँ मां…वोँ…
सरिता - तुँ इतना शर्माता क्यूं हैं…क्याँ मे तुम्हे खा जाऊँगी क्याँ…बोल दे अपनेमन कि बात…
राहुल नें सरिता केँ चूचियो केँ तरफ़ इशारा करतेहुए कहा…
राहुल - वोँ मम्मी.
सरिता- (खिलखिलाते हुए) अच्छा…यह…मेरी चूचिया…इसमें इतना क्याँ शर्माना….(दोनो चूचियो कों अपने हाथो सें उठतेहुए) बच्चपन मे तौ तूँ इनको छोड़ता हि नहि थां….
सरिता खिल खिला केँ हंसरही थि औऱ…राहुल कां लज्जा केँ मारे बुराहाल थां…
राहुल केँ मन मे इच्चाए धो बोहत होँ रही थि पऱ हिम्मत उतनी हि कम…
सरिता - औऱ क्याँ मनपसंद हैं मेरे राजा बेटे कों…
राहुल - (धीमी आवाज़ मे) आप् तोँ पूरे केँ पूरे पसन्द होँ मम्मी…
सरिता - (शर्माते हुए)ओह.मेरालाल…
औऱ प्रेम सें सरिता नें राहुल कों गलेलगा लिया…राहुल कां सर सीधे सरिता कि चूचियो पे ठीकहुआ थां…राहुल नें किसी महिला कि चूचिया इतनेपास सें पहलीबार देखी थि…उसका लन्ड पैंट मे सलामी देरहा थां….
सरिता नें फिन राहुल कों अपने सें अलग करतेहुए…
सरिता - अरे तुझेही मे तोँ वोँ जौ हम् मार्केट सें ख़रीद केँ लाए थें वोँ दिखाना भूल हि गयीँ, …चल तुम्हारी तरफ दिखती हु…
औऱ सरिता नें हाथ पकड़ केँ राहुल कों उठाया औऱ अपने कमरे कि तरफ़ लेँ करचली गई, …कमरे मे जाते हि…
सरिता - तुँ ये हि रुक…(राहुल कों बेडबी बैठा दिया) मे अभि आयी…
सरिता मार्केट सें लाएहुए बॉक्स कों बाथरूम मे लेकर गयीँ, ….औऱ कुछदेर बार बाहर् आयी…
तोँ सामने कां नज़रदेख केँ राहुल कि आँखे औऱ मुँह खुले केँ खुलेरह गए…
बड़ा परिवार सुखी परिवार - parivaar ka sex - Continue reading next part
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