बदलते रिश्ते...... - मालकिन - Full Story Part 1
केँ पास पहुंची औऱ बोलीं.)
मालकिन आज मुझसे देरी होँ गई हैं क्याँ करूंघऱ केँ सारेकाम निपटा करआने मै वक़्त लग जाता हैं। औऱ आप् तौ अच्छी तरह सें जानती हैं कि मेरा व्यक्ति एक् नंबर कां शराबी औऱ जुआरी हैं। सुभह उठते हि मुझसे झगड़ा करने लगता हैं औऱ इसी मे यहांआने मे मुझे देरी होँ जाती हैं।
बसबस रहनेदे मुझेरोज कि अपनीकथा सुनाने कों जल्द सें जाकर जौ कहींउसे पूराकर।
जी मालकिन.( इतना कहकर बेला जाने कों हुइ कि तभी)
औऱ हां गायों कों चारा देकर जल्द सें ब्रेकफास्ट रेडीकर देआज खेतों कि तरफ जानां हैं वहां पऱ जाकर देखें कि खेतों मे कितना कामहुआ हैं.( इतना कहतेहुए सुगंधा नहाने केँ लिएघऱ मे बने बाथरूम कि तरफ जानेलगी। सुगंधा कि उम्र करीब 40 याँ बेतालीस केँ लगभग थि। औऱ इस उम्र मे भि
वो बहोत सुंदर थि। अभि भि उसके गदराए जिस्म मे सेजवानी कि मांदक सुगंधकिसी केँ भि तन जिस्म कों उत्तेजित कर देती थि। सुगंधा विवाह करकेइस घऱ मे आई थि तौ फूलों सि कोमल औरअपनी चंचलता पूरेघऱ मे बिखेर कर देखते हि देखते वो घऱ केँ सब सदस्य कि चहेती बन गई सुगंधा कि सांस सुगंधा कों बहोत प्रेम औऱ दुलार देती थि। इसका भि एक् कारण थां सुगंधा कि सासू माँ अच्छी तरह सें जानती थि कि उनका बेटा उनकी जमीदारी कों नहि संभाल पाएगा औऱ वो घऱ कि सारी जिम्मेदारी औऱ जमीदारी सभालने कां हुनर अपनीबहु सुगंधा मे देखती आँ रही थि.
सुगंधा केँ संग अच्छी तरह सें जानती थि कि उनका बेटा गलत संगत मे आँ चुका हैं औऱ वो भि हमेशा शराब औऱ जुआ मे अपनी जीवन औऱ पैसे दोनों उड़ारहा थां लाख समझाने केँ बावजूद भि उसने किसी भि प्रकार कां सुधार नहि आया औऱ देखते हि देखते हें सुगंधा केँ संग गुजर गई मगर मरने सें पहले हि उन्होंने सुगंधाको अपनेघऱ कि सारी जिम्मेदारी औऱ जमीदारी कां कार्य सौंप दि थि औऱ बोलीं थि कि अब सें इसघऱ कि सारी जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर हैं औऱ उन्हें अपने बेटे पर्र बिल्कुल भि भरोसा नहि हैं सुगंधा भि अपनेसंग कि बात मानते हुए उनको यकीन दिलाई थि कि वो घऱ कि सारी जिम्मेदारी कों अपना उत्तरदायित्व समझकर बखूबी निभाएंगी। औऱ तब सें लेकरआज तक सुगंधा अपना फर्ज अच्छे तरीके सें निभारही थि।
तेज कदमों सें चलती हुई सुगंधा जल्द सें बाथरूम मे प्रवेश कर गई उसेइस बात कि जल्दबाजी थि कि आज खेतों मे काम देखने जानां थां औऱ वो पहले सें हि लेट हौ चुकी थि, औऱ ज़्यादा लेट नहि होना चाहती थि। इसलिये बाथरूम मे घुसते हि वो अपने शरीर सें पीलेरंग कि साड़ी कों उतारने लगी,,,, सुगंधा कां गोरा जिस्म पीलेरंग कि साड़ी मे खिलरहा थां,,, बला कि हसीन सुगंधा धीरे धीरे करके अपने शरीर पऱ सें अपनी साड़ी कों दूरकर रही थि,,,, अगले हि समय उसने अपने शरीर पऱ सें अपनी वाहन कों उतारकर नीचे फर्श पऱ गिरा दि उसके शरीर पर्र अब मात्र पीलेरंग कां ब्लाउज औऱ पेटीकोट थां औऱ इन वस्त्रों मे हसीन सुगंधा कामदेवी लगरही थि वो कुछसमय केँ लिए अपनीनजर कों अपने पैरों सें होतेहुए अपनी ब्लाउज केँ बीच सें झांकरही चूचियों केँ बीच कि गहरी दरार कों देखने लगी,,, नाँ जाने क्याँ सोचकर उसके होठों पर्र मुस्कुराहट फैल गई औऱ वहां अपने दोनों हाथों कों ऊपर लाकर, अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों सें अपने ब्लाउज केँ बटन खोलने लगी,,,, ये नजारा बेहद कामुक औऱ मादक थां। फिरभी इस बेहद कामोत्तेजक नजारे कों देखने वाला इसमें कोई भि नहि थां परंतु एक् स्त्री केँ द्वारा अपने हाथों सें अपने कपड़े उतारने कि कल्पना हि मर्दों कि उत्तेजना मे बढ़ोतरी कर देती हैं। औऱ जबबात सुगंधा कि होँ तौ सुगंधा तोँ स्वर्ग सें उतरी हुईँ किसी अप्सरा कि तरह हि बेहद हसीन थि, उसके जिस्म कि बनावट उसकाभरा हुआ शरीर औऱ स्थान स्थान पर्र शरीर पर्र बने कामुक कटाव मर्दों कों पूरीतरह सें चुदवासा बना देते थें।,,,,
आरामसे करके सुगंधा आपने ब्लाउज केँ सारेबटन खोल दि ब्लाउज केँ बटन खोलते हें लालरंग कि ब्रानजर आनेलगी औऱ संग हि सुगंधा कि जवानी केँ दोनों कटोरे जोँ कि मधुररस ं सें भरेहुए थें। औऱ ऐसा प्रतीत होँ रहा थां कि किसी भि वक़्त वो छलक जाएंगे क्योंकि सुगंधा कि दोनों चूचियां कुछ ज़्यादा हि बड़ी औऱ गोल थि,,, औऱ वो दोनों जवानी कि केंद्रीय बिंदु सुगंधा कि लालरंग कि ब्रा मे समा नहि पारहे थें।,,, अगले हि लम्हा सुगंधा अपने जिस्म पऱ सें ब्लाउज भि उतार फेंकी,, बाथरूम मे सुगंधा धीरे धीरे अपने हि हाथों सें अपने आप् कों वस्त्र विहीन करतीजा रही थि इस वक़्त ऊसके शरीर पऱ केवल पेटीकोट औऱ लालरंग कि ब्रा हि थि।
सुगंधा बाथरूम मे केवल ब्रा औऱ पेटीकोट मे खड़ी थि मगर उसकारूप लावण्य किसीकाम देवी कि तरह हि लगरहा थां जब वस्त्रों मे सुगंधा इतनी कामुक लगती हौ तोँ संपूर्ण नग्ना अवस्था मे तौ कहर ढाती होगी,,,,। सुगंधा अपने दोनों हाथों कों नीचे कि तरफ लाकर पेटीकोट कि डोरी कों अपनी नाजुक उंगलियों कां सहारा देकर खोलने लगी,,,, औऱ देखते हि देखते उसकी पेटीकोट उसके कदमों मे जा गिरी,, इस टाइम कां ये दृश्य ऐसालग रहा थां मानो सावन अपनी बाहें फैलाए प्रकृति कों अपने अंदर समेटरहा होँ,,, सुगंधा केँ गोरे गोरे शरीर पऱ लालरंग कि ब्रा औऱ लालरंग कि पैंटी उसके कामुक शरीर कों औऱ भि ज़्यादा मादकबना रहे थें। 40 वर्ष कि आयु मे भि सुगंधा कां शरीर औऱ हुस्न अल्हड़ जवानी कि गंध बिखेर रही थि। वैसे तोँ ज्यादातर औरतें वस्त्र पहनकर हि स्नान करती हें मगरजब इसतरह कां एकांत बाथरूम मे मिलता होँ तौ वो भि अपने सारे कपड़े, उतारकर नंगी होकर नहाने कां लुत्फ उठाती हैं। औऱ सुगंधा तोँ पहले सें हि इसतरह केँ एकांत कि आदी हौ चुकी थि।
इसलिये सुगंधा आदत अनुसार अपनी ब्रा केँ ऊपर खोलने केँ लिए अपने दोनों हाथ कों पीछे कि तरफ लें जाकर अपनी ब्रा केँ हुक कों खोलने लगीइस तरह कि हरकत कि वजह सें उसकी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने औऱ ज़्यादा ऊभरकर सामने आँ गई। औऱ जैसे हि ब्रा कां हुक खुला सुगंधा कि दोनों कि योजना आजाद परिंदे कि तरहहवा मे पंख फड़फड़ाने लगे,
अगरकोई अपनी आंखों सें सुगंधा कि नंगी चूचियां देख लें तौ उसे यकीन हि नाँ हौ कि ये एक् 42 वर्षीय स्त्री कि चूचीया हैं।,, क्योंकि अक्सर औऱ अधिकतर इसउमर मे आकर औरतों कि चुचियों कां आकारभले हि बड़ा हौ वो झूल जाती हें,,, मगर सुगंधा केँ पक्ष मे ऐसा बिल्कुल भि नहि थां इस उम्र मे भि उसकी चूचियां जवा ताजा औऱ खरबूजे कि तरहगोल गोल औऱ बड़ी बड़ी थि औऱ औऱ देखने औऱ आश्चर्य करने वालीबात ये थि कि,,, बड़ी-बड़ी औऱ गोल होने केँ बावजूद भि उसमे लटकन बिल्कुल भि नहि थि कहीं सें भि ऐसा नहि लगता थां कि झूल गई होँ,,, चॉकलेटी रंगी कि निप्पल किसी कैडबरी कि चॉकलेट कि तरहलग रही थि जिसे किसी कां भि मन मुंह मे लेकर चूसने कों हौ जाए।
सुगंधा अपनी ब्रा कों भि अपनी बाहों सें निकाल कर नीचे जमीन पर्र फेंक दि थि एक् स्त्री होने केँ बावजूद भि सुगंधा अपनी चुचियों कों स्पर्स करने कां लालचरोक नहि पाई औऱ उत्सुकता बस वो अपने दोनों हाथों सें अपने दोनों खरबूजे कों पकड़कर हल्के सें दबाने लगी औऱ दबाते दबाते कुछ सोचने लगी वो अपने पति केँ बारे मे हि सोचरही थि जोँ कि उसकी जवानी कों,
महसूस करने कां सुखडॉग नहि पाया थां औऱ नाँ हि सुगंधाको हि,,, अद्भुत सुख कां एहसास करा पाया थां,,,, सुगंधा कों इसबात कां दुखअब तक अखररहा थां कि नाँ तोँ वो कुछकर पाया औऱ नाँ हि उसेकुछ करने दियायही बात सोचते हुए वो अपने दोनों खरबूजो पर्र हथेली कां स्पर्श कराकर हटाली औऱ अपनामन भटकने नां देकर जल्दी अपनी पेंटी कों दोनों हाथों सें पकड़कर नीचे कि तरफ सरकाते हुए अपनी दुधिया चिकनी लंबी लंबी टांगों सें होतेहुए नीचे कि तरफलाई हैं औऱ अगले हि समय अपनी पेंटी कों भि ें उतार फेंकी,,,, अब सुगंधा बाथरूम मे संपूर्ण नग्नवस्था मे थि,,, इस टाइम सुगंधा स्वर्ग सें उतरी हुईँ कोई अप्सरा लगरही थि,,,। इस लम्हा कां नजारा किसी केँ भि लन्ड सें पानी फेंक देने केँ लिए बहुत थां। सफ़ेद सफ़ेद जिस्म कामुकता सें भराहुआ, लंबे काले कालेघने बाल जोँ कि उसकीकमर केँ नीचे भरावदार उन्नत नितंबों कों स्पर्श करते थें, गोल चेहरा भराहुआ किसी फिल्मी हीरोइन सें कम नहि थां जवानी सें भरेहुए शरीर पऱ सुगंधा कि तनी हुइ दोनों चूचियां कुदरत केँ द्वारा दि हुइ संपूर्ण जवानी कों पुरस्कृत करतेहुए मैडल कि तरहलग रही थि।
पेट पऱ चर्बी कां नामोनिशान नहि थां फिरभी सुगंधा किसी भि प्रकार कां योग व्यायाम नहि करती थि मगरजिस तरह सें सारादिन हुआइधर उधर दौड़ती फिरती हुई काम करती औऱ करवाती थि,,, इस कारण सें उसका जिस्म इस उम्र मे भि पूरीतरह सें कसाहुआ थां। मोटी मोटी चिकनी जांघें केले केँ तने केँ समाननजर आती थि,, जिसे हाथों सें सहैलाना औऱ चूमना हर मर्द कि ख्वाहिश थि।,,,
जिसतरह कि हुस्न सें भरी हुई सुगंधा थि उसीतरह सें बेहद हसीन उसकी बेशकीमती चूत थि। जिसका आकार मात्र एक् हल्की सि दरार केँ रूप मे नजर आँ रही थि। हल्की सि उपसी हुई,,, याँ युं कहलो कि गर्म रोटी कि तरह फुली हुइ थि जिस पर्र हल्के हल्के सुनहरी रंग कि झांटों कां झुरमुट बेहद हसीनलग रहा थां।,,,,। ये स्त्री केँ शरीर कां वो बेशकीमती हिस्सा थां,,, जिसे पाने केँ लिए दुनिया कां हर मर्दकुछ भि कर जाने कों सजधजकर रहता हैं। औऱ ये तोँ सुगंधा कि चूत थि, जिसके बारे मे सोचकर हि नां जानेरोज कितने लोग अपना पानी निकाल देते थें।
सुगंधा कां कसाहुआ शरीर औऱ उसकी पतली दरार रुपी चूत कों देखकर ये अंदाजा भि नहि लगाया जा सकता थां कि वो एक् बेटे कि मम्मी हैं।
वक़्त धीरे-धीरे धीरे-धीरे बहुतबीत चुका थां इसलिये सुगंधा जल्द जल्द स्नान करके रेडी हौ गई,,,, हल्की गुलाबी रंग कि साड़ी मे सुगंधा बला कि सुंदर लगरही थि। बेला जल्द सें ब्रेकफास्ट रेडीकर दि थि औऱ सुगंधा केँ लिए ब्रेकफास्ट परोसकर बाकी केँ काम मे जुट गई थि।
सुगंधा ब्रेकफास्ट समाप्त करके खेतों कि तरफ जाने केँ लिए रेडी होँ गई थि औऱ घऱ सें बाहर् निकलते निकलते वो बेला कों,, आवाज़ लगाते हुए बोलीं।
बेलाऔ बेला कहां रह गई,,,,,,, ?
जीआई मालकिन। ( बेला भि रसोईघर सें करीब-करीब भागते हुए सुगंधा केँ पासआई)
रोहनउठा कि नहि,,,,,
जी नहि मालकिन रोहन बाबू अभि तक सोरहे हें,,,
अरे तोँ जाओउसे जगाओकब तक सोता रहेगा,,,,
जी मालकिन अभि जारही हूं ( औऱ इतनाकह कर बेला रोहन कों जगाने केँ लिए जानेलगी औऱ सुगंधा खेतों कि तरफ निकल गई)
बेलाइसी तरह सें दिनभर अपनी मालकिन केँ हुक्म पऱ बिनाथके लगी रहती थि। इसीवजह सें सुगंधा भि बेला कों ज्यादा मानती थि सुगंधा खेतों कि तरफचली गई थि औऱ बेला रोहन कों जगाने केँ लिए उसके कमरे कि तरफजा रही थि, रोहन सुगंधा कां बेटा थां ज्योति हाई विद्यालय पासकर चुका थां मगर पढ़ाई मे उसका बिल्कुल भि मन नहि लगता थां देहात केँ आवारा छोकरो केँ संग थोड़ी बहोत उसकी संगत हौ चुकी थि। सुगंधा इसलिये उसकेसंग बेहद शख्ती सें काम करती थि उसेइस बात कां डर थां कि कहीं वो भि उसके बाप कि तरह निकम्मा नाँ होँ जाए,,,,
बेला रोहन केँ कमरे केँ लगभग पहुंची तोे देखी कि दरवाजा हल्का सां खुलाहुआ हैं,,,,,
ये रोहन बाबू भि नाँ,,, नां जानेकब समझेंगे,,,,, बिल्कुल भि समझ नहि हैं कि दरवाजा बंद करके रखें,,,,, ( बेलामन हि मन मे बड़बड़ाते हुए कमरे केँ अंदर प्रवेश कि,,, )
रोहन बाबूऔ रोहन बाबूये देखो (जमीन पर्र गिरी हुई तकिए कों उठाते हुए ) कौन सि चीज कहां गिरी पड़ी हैं इसका इन्हें भान हि नहि हैं,,,, (तकिए कों उठाकर खाट पऱ रखतेहुए)
अरेउठ जाइए रोहन बाबू वरना मालकिन क्रोध करेंगी,,,,
(
इतना कहतेहुए बिना कि नजर चादर केँ उठेहुए भाग पर्र पड़ी तोँ वो एकदम सें दंगरह गई,,, औऱ बेला कां दंग हौ जानां लाजिमी थां क्योंकि वो चादर रोहन कि टांगों केँ बीचो-बीच उठाहुआ थां जैसे कि छोटा सां तंबू होँ,, औऱ खेलीखाई बेला कों समझते देर नहि लगी कि ये चादरकिस वजह सें उठी हुईँ हैं,,, वो एक् तक उसउठे हुएभाग कों देखरही थि वो रोहन कों जगाना भूल गई उसकेमन मे अजीब सें ख्याल आनेलगे,,,, बेलाये तोँ अच्छी तरह सें समझ गई थि कि चादर कां ये हिस्सा रोहन केँ लन्ड कि वजह सें हि उठाहुआ हैं,,, मगर बेला केँ लिए हैरान करने वालीबात ये थि कि रोहन कि उम्र केँ मुताबिक चादर कां उठाहुआ आकारकुछ अधिक हि बड़ा औऱ तगड़ा लगरहा थां। एक् समय केँ लिए तौ लन्ड केँ आकार केँ बारे मे सोचकर हि बेला केँ तन शरीर मे झुनझुनी सि फैल गई,,,,, औऱ उसकी मांसल जांघों केँ बीच कसमसाहट भरीलहर दौड़ने लगी,,,,,,,
बेलाआई तोँ थि रोहन कों जगाने मगर रोहन केँ लन्ड कि वजह सें बने तंबू कों देखकर रोहन कों जलाना भूल गई अब उसकेमन मे अजीब अजीब सें ख्याल घूमरहे थें,,, अब उसकेमन मे ऐसा आँ रहा थां, कि वोँ चादरहटा कर देखें रोहन कां हथियार कैसा हैं क्योंकि महिला कां मन होने केँ नाते उसकेमन मे रोहन केँ लन्ड कों देखने कि उत्सुकता कुछ ज़्यादा हि बढ़ती जारही थि।
बेला अपनी उत्सुकता कों रोक नहि पारही थि उसकेहाथ स्वयं ब स्वयं आगे बढ़ते जारहे थें,,। वो चादर कों अपनेहाथ मे पकड़ली थि,,,,
बेला अपनी उत्सुकता कों रोक
नहि पारही
थि उसकेहाथ स्वयं ब स्वयं आगे
बढ़ते जारहे थें,,। वो चादर कों अपनेहाथ
मे पकड़ली थि,,,,
अजीब सें असमंजस मे फंसी हुई थि बेला,,, उसे डर भि लगरहा थां औऱ उत्सुकता भि बढ़ती जारही थि उसेइस बात कां डर थां कि कहीं चादर हटाने पर्र रोहन कि नींद नाँ खुलजाए औऱ अगर नींदखुल गई तोँ वो उसके बारे मे क्याँ सोचेगा हौ सकता हैं वो अपनी माँ सें बता भि दे क्योंकि रोहन अभि भले हि जवान हौ रहा थां मगर वो नादान थां।,,, मगर स्त्री कां मन औऱ वो भि एक् प्यासी स्त्री कां नाम मर्दों कों लेकर उनके अंगों कों लेकर हमेशा उत्सुक्ता सें भरा होता हैं,,,। वो चाहे जितना भि मर्दों केँ अंगअंग सें अवगतहों मगर किसीगैर मर्द केँ अंगों कों जानने कि उत्सुकता औऱ प्यास हमेशा उनमें बराबर बनी रहती हैं। औऱ यहीहाल इस टाइम बेला कां भि होँ रहा थां। लन्ड कों देखने कि प्यास उसकेमन मे बढ़ती जारही थि बेला वैसे भि एक् प्यासी औऱ चुदक्कड़ महिला थि,,, जोँ कि अपनी शराबी पति सें बिल्कुल भि संतुष्ट नहि होँ पाती थि औऱ इसकेलिए अपने नौकर मित्र औऱ खेतों मे कामकर रहे मजदूरों केँ संग संबंध बनाने मे बिल्कुल भि नहि हीचकीचाती थि।,,,
रोहन कां तंबू चादर सहित अभि भि उसी स्थिति मे तनाहुआ थां,,, बेला कां दिल जोरों सें धड़करहा थां वो कभी रोहन केँ मासूम चेहरे कि तरफ तौ कभीउठे हुए तंबू कि तरफदेख लें रही थि।,,,,
वो अपनामन पक्का करके धीरे-धीरे धीरे-धीरे चादर कों नीचे कि तरफ खींचने लगी उसकी सांसे बड़ी तेजी सें चलरही थि। उसकीजी मे तोँ आँ रहा थां कि वो चादर केँ ऊपर सें हि रोहन केँ लन्ड कों पकड़ लें,,,, मगर एक् अनजाना डर रोहन कि तरफ सें उसकेमन मे बनाहुआ थां।,,,, धड़कते दिल केँ संग बेला रोहन कि चादर नीचे कि तरफ खींचरही थि,,,, मगर इसके पहले कि बेला चादर केँ नीचेतने हुए तंबू कों अपनी आंखों सें देख पाती इससे पहले हि रोहन केँ शरीर मे कसमसाहट होनेलगी,, बेला एकदम सें घबरा गई वो कुछसमझ पाती इससे पहले हि रोहन कि आंखखुल गई,,,, बेला केँ पास अपने आप् कों संभाल पाने कां बिल्कुल भि वक्त नहि थां,,,, वो जिस स्थिति मे थि,,, उसी स्थिति मे मूर्ति वंतबनी रही,, रोहन भि अपनी आंखें खोलकर एक् टकउसे देखेजा रहा थां,,,, बेला झुकी हुइ थि औऱ रोहन केँ चेहरे सें 1 फीट कि हि दूरी पऱ उसका चेहरा थां,,,, बेला एकदम सें घबरा गई थि उसके हाथों मे अभि भि चादर थि। मगरडर केँ मारे चादर पर्र सें वो अपनेहाथ नहि हटापाई थि।,,, इस स्थिति मे रोहन सें क्याँ कहेउसे कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां आई तोँ थि वो उसे जगाने मगर कमरे कि स्थिति रोहन कि हालत कों देखकर वो सभीकुछ भूल चुकी थि,,,, मगर घबराते हुए उसके मुंह सें बस इतना हि निकला।
उठ जाइए रोहन बाबू बहुतदेर हौ चुकी हैं मालकिन क्रोध करेंगी,,,,
( बेला इतने शब्द घबराते हुएकही थि,,, मगर रोहन पर्र जैसे बेला केँ बातों कां बिल्कुल भि असर नहि होँ रहा थां वो तौ एक् टक बेला कों हि देखेजा रहा थां।,,,, कुछदेर तक खामोशी छाईरही देना अभि भि अपनी हालत कों व्यवस्थित नहि करपाई थि, रोहनकिस तरह सें उसकीतरफ देखरहा थां बेला कों बेहद असहज महसूस हौ रहा थां,,,, उसेलग रहा थां कि शायद नींद सें उठने कि वजह सें रोहनइस तरह सें देखरहा हैं मगरजब बेला रोहन कि नजरों केँ सीधान कि तरफ ध्यान दीे तोँ,,, वो एकदम सें दंगरह गई,,, क्योंकि वो उसके चेहरे कि तरफ नहि बल्कि उसकी चुचियों कि तरफदेख रहा थां,,,, बेला कि स्थिति इससे भि खराबतब होँ गई जब वो अपनी छातियों कि तरफनजर घुमााई।,,,, ब्लाउज केँ ऊपर कां एक् बटन खुलाहुआ थां, जिसकी वजह सें बेला कि बड़ी-बड़ी गोल चुचियां बाहर् कि तरफ झांकरही थि,,,, संग हि चॉकलेटी रंग कि तनी हुईँ निप्पल साफसाफ नजर आँ रही थि।
औऱ यहीसभी रोहन प्यासी नजरों सें एकटकदेख रहा थां। बेला एक् समय केँ लिए तोँ झेंप सि गई,,,
मगर अगले हि समय उसके चालाक दिमाग़ मे ढेर सारी युक्तियां घूमने लगी,,, खेलीखाई बेला रोहन कि प्यासी नजरों कों भाप गई,,, रोहन कि जवान होँ रही उम्र केँ मुताबिक रोहन कां औरतों केँ जिस्म मे औऱ उनके अंगों मे रुचि रखना स्वाभाविक थां इसलिये बिना उसकी रुचि कां पूरीतरह सें फायदा उठाने कि युक्ति अपनेमन मे बनाली थि। अब बेला कों शर्मिंदगी कां एहसास बिल्कुल भि नहि होँ रहा थां। जानबूझकर अब झुकी हुइ थि,,, याँ यूंकह लो कि अब वो जानबूझकर रोहन कों अपनी चुचियों केँ दर्शन करारही थि। रोहन कि हालत खराब हौ रही थि जिसतरह सें वो नजरे गड़ाए,
बेला कि ब्लाउज मे सें झांकरही ऊसकी नंगी चूचियों कों देखरहा थां उसमें उसका बिलकुल भि दोष नहि थां,,, सारा कसूर उसकी उम्र कां थां औऱ बचा कुछाकसर उसके दोस्तों नें पुराकर दिया थां,,, क्योंकि पढ़ाई मे उसकामन बिल्कुल नहि लगता थां औऱ,,, गलत संगत मे पड़कर औरतों कों गंदी नजरों सें देख्ना शुरुआत कर दिया थां औऱ येसभी उसी कां नतीजा थां कि इस टाइम वो अपनीघऱ कि नौकरानी जिसे नौकरानी तोँ बिल्कुल भि नहि कहाजा सकता थां क्योंकि वो एक् तरह सें इसघऱ कि सदस्य होँ चुकी थि औऱ रोहन अधिकतर बेला कि निगरानी मे रहता थां क्योंकि वही उसका देखभाल भि करती थि। क्योंकि अधिकांश वक्त रोहन कि माँ जमीदारी संभालने मे हि व्यतीत कर देती थि।
बेला केँ संगसंग रोहन कि भि सांसे तीव्र गति सें चलरही थि।,,, रोहन कों अपनी चूचियां दिखाकर उसको तड़पता हुआ देखकर बेला कों आनंद आँ रहा थां।,,, बेला चुटकी लेतेहुए अंजान बनती हुई बोलीं।,,
ऐसे क्याँ देखरहे हें रोहन बाबू,,, ( इतना कहतेहुए बेला अपनी छातियों कि तरफनजर दौड़ाई औऱ,,,
ब्लाउज मे सें झांकरही अपनी चूचियों कों देखकर अनजान बनतेहुए बोलीं,,,,। )
ओहहहहहहह,,, तोँ यहां टकटकीे लगाएदेख रहे हें रोहन बाबू,,,,, (बेला मुस्कुराकर खड़ी हुईँ औऱ शरारती अंदाज मे मुस्कुराते हुए बोलीो। )
बड़े शरारती होँ गए हौ रोहन बाबू औऱ अब तौ लगता हैं बड़े भि होँ रहे हौ,,, ( इतना कहतेहुए रोहन कि उत्तेजना मे वृद्धि करने केँ उद्देश्य सें जानबूझकर अपने दोनों हाथों सें ब्लाउज केँ ऊपर सें अपने दोनों चुचियों कों हल्के सें दबाकर मानो कि ब्लाउज मे दोनों कबूतरों कों एडजेस्ट कररही होँ इसतरह सें अपने होठों कों हल्के सें दांत गड़ाकर बिना शर्माए रोहन कि आंखों केँ सामने हि अपनी ब्लाउज केँ उपरीबटन कों बंद करनेलगी,,
बेला कि बातों कों सुनकर रोहन घबरा सां गय़ा,,, वो लज्जा केँ मारे अपनी नजरों कों इधर-उधर घुमाने लगामगर बेला कि कि कातिल अदाओं सें अपनी नजरों कों अधिकदेर तक हटा पाना उसकेबस मे नहि थां। इसलिये गहरी गहरी सांसों केँ संग वो बेला कि मादक अदाओं कों देखता रहा। रोहन कि हालत कों देखकर बेलासमझ गई थि कि उसका निशाना ठीक स्थान पर्र जाकरलगा हैं।,,, बेला नजाकत भरीचाल चलतेहुए रोहन कि तरफकदम बढ़ाते हुए उसके लगभग पहुंच गई इसबार वो रोहन केँ बिल्कुल लगभग थि,,, औऱ मादकभरे स्वर मे धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बॉली,,,,।
रोहन बाबूउठ जाइए सुभह होँ गई हैं,,,।
( औऱ इतना कहतेहुए जब वो उठरही थि तोँ जानबूझकर अपना एक् हाथ चादर केँ अंदरतने हुए तंबू पऱ रखकर हल्के सें दबाते हुए जानबूझकर चौकते हुए बोलि,,,। )
दैयारे दैयाये क्याँ थां। ( इतना कहकर वो उसकेतने हुए तंबू कि तरफदेख कर मुस्कुरा दि औऱ चुटकी लेतेहुए बोलीं।
रोहन बाबूअब तौ तुम् बड़े हौ गए हौ औऱ तुम्हारा वोँ भि,,,
( इतना कहकर बेला हंसते हुए अपनी गांड मटकाकर कमरे सें बाहर् चली गई,,, रोहनउसे जाताहुआ देखता रहा उसका चेहरा उत्तेजना सें लाल होँ चुका थां। )
सुगंधा रेडी होकर खेतों कि तरफजा रही थि, भरावदार जिस्म पऱ सुगंधा कि नई साड़ी खूबजँच रही थि,, ऊंची नीची पगडंडियों सें जातेहुए सुगंधा केँ पांव इधर-उधर पड़रहे थें जिसकी वजह सें,, सुगंधा कि गोलाकार नितंब दाएं बाएंऊपर नीचे कि तरफलचक जारही थि औऱ नितंबों मे आँ रही हैं लचकन,, तबले पऱ किसी थिऱकन कि तरहपड़ रही थि,,,। ये नजारा बेहद कामोत्तेजना सें भराहुआ थां,,, सुगंधा कि कमर बलखा जाने कि वजह सें जिसतरह सें उसकी गांडऊपर नीचेहिल रही थि,,, देखने वालों कि हालत खराब हुइ जारही थि,,,, इसतरह सें सुगंधा कां गांड मटका केँ चले जानां किसी केँ भि लन्ड मे सें पानी छोड़ देने केँ लिए बहुत थां।,, वैसे भि सुगंधा केँ जिस्म कां नईनई साड़ी इसतरह सें चिपकी हुईँ थि कि उसके भरावदार जिस्म कां हर एक् कटावहर एक् अंग अपना आकारलिए हुए स्पष्ट रूप सें नजर आँ रहा थां।
सुगंधा अपनी मस्ती मे खेतों कि तरफचली जारही थि देहात केँ सब मर्द बूढ़े हौ याँ जवानसब नजरें चुराकर सुगंधा कि तरफ देखकर गर्मआए भररहे थें,,, देहात मे ऐसाकोई भि व्यक्ति नहि थां जोँ कि सुगंधा कों आंख उठाकर नजर सें नजर मिलाकर देखसके,, क्योंकि सुगंधा कां रुतबा इसतरह कां थां देहात केँ सब लोगों कि जमीन केँ संग-संग कुछ नाँ कुछ सुगंधा केँ पास गिरवी रखाहुआ थां औऱ,,,, देहात कि सारे मजदूर सुगंधा केँ खेतों मे मजदूरी करके हि अपना जिंदगी बसरकर रहे थें,,,, मगरइस बात कां जरा भि घमंड सुगंधाको नहि थां बल्कि वो तोँ हमेशा हि देहात वालों कि जरूरतमंद लोगों कि सहायता करने केँ लिए रेडी रहती थि इसलिये देहात भर मे सुगंधा कि साख औऱ इज्जत बहोत ज़्यादा थि।,,,
मगर कुदरत नें सुगंधा कों कुछ ज़्यादा हि हुस्न बक्स दि थि,,, जिसकी वजह सें नाँ चाहते हुए भि देहात घऱ केँ मर्दों कि नजर सुगंधा केँ मदभरे जवान जिस्म पर्र पड़ी हि जाती थि,,,,
सुगंधा उबड़ खाबड़ रास्तों कों पार करतेहुए खेतों कि तरफचली जारही थि देहात भर केँ लोग जहां भि मिलते थें उसेजी मालकिन नमस्कार मालकिन करके उसकी इज्जत मे इजाफा कररहे थें औऱ वो भि मुस्कुरा कर सबका अभिवादन स्वीकार कररही थि।
थोड़ी हि दूर पऱ देहात कि औरतें इकट्ठा होकरदो औरतों केँ झगड़े कां खुशीलूट रही थि दोनों खूब एक् दूसरे कों गाली गलौज करतेहुए लड़रहे थें तभी एक् स्त्री कि नजर सामने सें आँ रही सुगंधा पऱ पड़ी,,,। सुगंधा पर्र नजर पड़ते हि वो जोर सें बोलीं,,,
वो देखो मालकिन आँ रही हैं,,,,।
( इतना सुनते हि देहात कि सब औरतें सुगंधा कि तरफ देखने लगी क्योंकि वो लोग जानती थि कि सुगंधा झगड़े कों सुलझा देगी,,,, सुगंधा भि देहात कि औरतों कों इसतरह सें इकट्ठा हुआ देखकर उनकेपास जाकर बोलीं,,,। )
तुम् लोग इतनी भीड़ क्यूं लगारखे होँ क्याँ हौ रहा हैं इधर,,,,
( तभी उनमें सें एक् महिला नें सुगंधाको सारा मामला बता दि औऱ सुगंधा उसकीबात सुनकर थोडा नाराजगी भरे स्वर मे उन दोनों औरताें सें बोलि,,, )
ये तुम् लोग क्याँ लगारखी होँ इतनी बड़े हौ गई होँ मगरफिन भि बच्चों कि तरह झगड़ती होँ, इतराती गाली गलौज करके एक् दूसरे सें लड़ोगे तोँ येसभी असर तुम्हारे बच्चों पर्र भि जाएगा अरे अपनी तौ जैसे-तैसे गुजार लें रहे हौ अपने बच्चों केँ बारे मे तौ सोचो,,,, तुम् लोगों मे जरा भि अक्ल नहि हें।,,,
( सुगंधा दोनों औरतों कों नाराजगी भरे स्वर मे डांटरही थि,,, औऱ वो दोनों नजरे नीचे झुकाए सुगंधा कि बातसुन रही थि,,, सुगंधा उन दोनों केँ झगड़े कों सुलझा दि थि औऱ जाते-जाते बोलीं,,,। )
आइंदा अगर मैंने तुम् दोनों कोईतरह सें लड़ते झगड़ते पाई तौ मुझसे बुराकोई नहि होगा औऱ इतना कहकर वो खेतों कि तरफ जानेलगी,,,
Hello friends . एक् नई स्टोरी लेकरआया हूं आप् लोगों केँ सामने उम्मीद हैं आप् लोगों कों अच्छी लगेगी.
aabhar rohan bhay meri baat maan krr xforum pr kahani post kee,yaha us site say jyada readers milenge us forum pr har time error rahta h .
बदलते रिश्ते...... - मालकिन – New Episode
दोनों कां झगड़ा शांत हौ चुका थां,,, औऱ उन दोनों केँ संगसंग देहात कि सब औरतें,,, सुगंधा कों जातेहुए देखरही थि,,, एक् महिला होने केँ बावजूद भि उन औरतों कि नजर सुगंधा कि लचकती हुइ लाजवाब भरावदार,,, गांड पऱ हि टिकी हुइ थि,,, देहात कि औरतों कां इसतरह सें सुगंधा कि हुस्न कों नींहारना हीैइस बात कि शाबीती देता थां कि, सुगंधा कि हुस्न कों लेकर औरतों मे भि किसतरह कां आकर्षण थां। जब औरतों कां येहाल थां तोँ मर्दों कां क्याँ हाल होता होगा,,, सुगंधा कि हुस्न औऱ उसकी मटकी हुइ गांड कों देखकर उनमें सें एक् स्त्री गरम आहह-आहह भरतेहुए बोलीं,,,
काश ईश्वर नें मुझको भि मालकिन जैसी सुंदर बनाए होते तोँ आनंद आँ जाता,,,
हां तब तौ तेरा व्यक्ति तेरी चूत मे रात-दिन लन्ड डालकर पड़ा रहता हैं,,,,। ( तभी उनमें सें एक् स्त्री टहाके लगाकर बोलीं,, )
वो तोँ अब भि मेरी चूत मे लन्ड डालकर पड़ा रहता हैं मगर साला वो भि मालकिन कां हि दीवाना हैं,,,।
क्यूं क्याँ हुआ?
वो जब भि मुझे चोदता हैं तौ चोदते चोदते बोलता हैं कि,, मालकिन कितनी सुंदर हैं मालकिन कि चूचीया कितनी बड़ी-बड़ी हें मालकिन कि गांड कितनी मस्त हैं,,, मालकिन कि चूत कितनी मस्त होगीउस मे लन्ड डालकर चोदने मे कितना मज़ा आएगा
बाप रेयेसभी कहता हैं तब तुँ क्याँ करती हैं?
मे एक् लात मारकर उसे खटिया पर्र सें नीचे गिरा देती हूं औऱ बोलती हूं कि जा जाकर मालकिन कों हि चोद लें,,,
( उसके इतना कहते हि सब औरतें हंसने लगी औऱ अपनेकाम मे लग गई। )
सुगंधा अपनी मस्ती मे उबड़ खाबड़ रास्तों सें खेतों कि तरफचली जारही थि,,,, सुगंधा कि भरावदार बलखाती हुइ गांड मर्दों पऱ अपनाअसर दिखारही थि,,,, इस उम्र मे भि सुगंधा कि जवानी कां जलवा बरकरार थां। अपनी सासू माँ केँ द्वारा दि गई जिम्मेदारी कों बखूबी निभारही थि औऱ इसीबीच वो अपने पति द्वारा संतुष्टि नहि पारही थि मगरफिन भि सुगंधा अजीब मिट्टी कि बनी हुइ थि कि अपने सारे भि जरूरत पूरी नां होने केँ बावजूद भि वो तनिकभर भि विचलित नहि हुईँ थि नाँ तोँ उसकेकदम हि कहीं भटके थें औऱ नां हि उसे अपने पति सें किसी भि प्रकार कां ग्लानी हि थां,,,, वो तौ बहोत खुश थि।,,, ऐसा नहि थां कि उसे अपनी शारीरिक अपेक्षाओं कि उपेक्षा केँ बारे मे ज्ञात नहि थां मगर वो शायद अपनेमन सें अपनीइस परिस्थिति केँ बारे मे समझौता करली थि औऱ उसेये भि ज्ञात थां कि उसके सुंदर शरीर कों नां जाने कितनी नजरें घुरती रहती हें।
मगरइस बात सें उसे बिल्कुल भि फर्क नहि पड़ता थां वो अपनी मस्ती मे हि कहीं भि आती जाती थि,,, क्योंकि वो इसबात कों अच्छी तरह सें जानती थि कि देहात मे ऐसाकोई भि आदमी नहि हैं जौ कि उसकेसंग गलत हरकतकर सकेयाद उसके मुंह पर्र उसे अश्लील बातें कह सकें,,,
इसलिये तोँ सुगंधा अधिकतर खेतों कि तरफ याँ गाँव मे अकेले हि घूमा करती थि।,,,,
कुछदेर बाद सुगंधा खेतों मे पहुंच चुकी थि जहां पर्र गेहूं कि कटाईचल रही थि मजदूर अपना अपनाकाम बखूबी कररहे थें क्योंकि वो लोग भि जानते थें कि वैसे तौ उनकी मालकिन नरमदिल कि हैं मगरअगर दिएगए काम मे किसी भि प्रकार कि लापरवाही बरती जाती थि तौ वो बेहद शख्ति सें काम लेती थि औऱ उसे मजदूरी सें हटा भि देती थि।,,,,, इसलिये तोँ सारे मजदूर अपना अपनाकाम बड़ी इमानदारी सें कररहे थें,,,
सुगंधा खेत केँ किनारे खड़ी होकर मुआयना कररही थि चारों तरफ गेहूं लहलहा रहे थें जहां तक नजरजा रही थि वहां तक सुगंधा कि हि जमीन थि,,, मजदूर लगेहुए थें काम बराबर हौ रहा थां येसभी देखकर सुगंधा खुश हौ रही थि। खेतों मे कामकरा रहे लाला जोकि सुगंधा कां लेखा-जोखा वही संभालता थां औऱ ये बहोत हि पुरानां नौकर थां जौ कि अभि भि बड़ी इमानदारी सें अपनाकाम कररहा थां। 60 वर्षीय लाला कि नजर जैसे हि सुगंधा पऱ पड़ी वो खेतों मे सें जल्द जल्द सुगंधा कि तरफचला आँ रहा थां। जल्दबाजी औऱ हड़बड़ाहट मे उसके पांव लड़खड़ा जारहे थें जिसेदेख कर,,, सुगंधा बोलीं,,
संभाल कर लालाजी कहींगिर मत जाइएगा,,,,
( सुगंधा लालाजी कि बहोत इज्जत करती थि क्योंकि वो उसके पिता केँ समान थां औऱ लालाजी भि सुगंधा कों अपनी बेटी हि मानता थां औऱ सुगंधा कि बात सुनकर जल्द-जल्द वो सुगंधा केँ पास पहुंच गय़ा औऱ बोला,,,। )
अरे बिटिया कां ज़रूरत थि तुम्हें इधरआने कि,,,
हम् सभीकुछ संभाल लेते,,,,।
हम् जानते हें चाचा जी कि आप् सभीकुछ संभाल लेते औऱ अब तक सभीकुछ संभालते तौ आँ हि रहे हें,,, वो तोँ मेरामन कियासौ मे आँ गई,,,,।
कोईबात नहि बिटिया आँ गई तौ अच्छा हि हुआ,,, रामू कों कुछ पैसों कि जरूरत थि,,, उसे अस्पताल जानां थां,।
हांहां क्यूं नहि बुलाओ रामू कों कहां हैं?
अभि बुलाए देते हें मालकिन,,, रामुओ रामु,,, जल्द आँ,,, मालकिन तुम्हारी तरफ बुलारही हैं।
( खेतों मे कामकर रहा रामू जैसे हि लाला कि आवाज़ सुना सारेकाम जल्दी छोड़कर लाला केँ पास भागता हुआआया औऱ आते हि,,, सुगंधाको नमस्ते करतेहुए बोला)
राम-राम मालकिन( इतना कहतेहुए वो हाथ जोड़कर खड़ा हौ गय़ा। )
कितने रुपयो कि जरूरत हैं तुम्हें अस्पताल जाने केँ लिए,,,
तीन चारसौ मिल जाते तौ मालकिन काम हौ जाता,,,
( इतना सुनते हि सुगंधा अपने पर्स मे सें 500 500 केँ दोनोट निकालकर रामू कों थामाते हुए बोलीं। )
अच्छे सें इलाज करवाना औऱ पैसों कि जरूरत होँ तोँ बेझिझक मांग लेना,,,
( सुगंधा केँ दिएहुए पैसे औऱ सुगंधा कि बात सुनकर रामु बहोत खुश होँ गय़ा,,, औऱ सुगंधा कि जयबोल कर वो ावापस खेतो मे जाकरकाम करनेलगा।,,, )
रामू केँ चले जाने केँ बाद सुगंधा औऱ लाला दोनों,,, खेत केँ किनारे ऊंची पगडंडी पर्र खड़े थें तभी लाला बोला,,,।
मालकिन यहांधूप अधिक हैं आइए पेड़ केँ नीचे चलते हें,,,।
( लाला कि बात सुनकर सुगंधा पेड़ केँ नीचे छांव मे एक् बड़े सें पत्थर पऱ बैठ गई,,, लाला सुगंधा केँ पास हि खड़ा होँ गय़ा औऱ उसेफसल कि कटाई कि सारी बातें बताने लगाजिस तरह सें कामचल रहा थां उसे देखते हुए सुगंधा बहुतखुश थि,,, औऱ इसबार गेहूं कि फसलकुछ ज़्यादा हि हुई थि,,,।,,, )
मालकिन पिछले साल सें ज़्यादा इससाल गेहूं कि फसल ज़्यादा हुइ हैं।,,, औऱ अभि भि अपने गोदाम मे ढेर सारा गेहूं भरा पड़ा हैं मे तौ कहता हूं मालकिन कि सारा कां सारा गेहूं मार्केट मे बेचदो,, आपकी तिजोरी धन सें छलक उठेगी,,,,।
लालाजी आप् मुझे मालकिन मालकिन नाँ कहा करीए,,, मे आपकी बेटी केँ समान हूं आप् सीधे मेरानाम लेँ सकते हें याँ तौ बिटिया बुला सकते हें,,,,।
जानता हूं बिटिया मगर क्याँ करूं शुरु सें आदत जौ पड़ चुकी हैं,,,,,,। ( औऱ इतना कहने केँ संग हि वो जमीन पऱ बैठने चला कि तभीउसे सुगंधा रोकते हुए बोलीं,,,। )
अरेअरे ये आप् क्याँ कररहे हें,,, इसतरह सें नीचे क्यूं बैठरहे हें।,,,,,,, मे आपसे कितनी बार कहीं हूं कि आप् मेरे पिता केँ समान हें औऱ इसतरह सें बर्ताव कर केँ मुझे लज्जित नाँ करें,,,,।
( इतना कहतेहुए सुगंधा खड़ी हौ गई औऱ लाला कां हाथ पकड़कर उसे उठाने कि कोशिश करनेलगी मगर लाला प्रेम सें हाथ छुड़ाते हुए बोला,,,। )
मे जानता हूं मगर क्याँ करूंआदत सें मजबूर हूं मे तुम्हारे बराबर नहि देख सकता आखिरकार मालिक औऱ नौकर मे कुछ तौ फर्क होता हैं,,,,,।
आपसेकोई बातों मे नहि जीत पाएगा,, (इतना कहतेहुए सुगंधा फिन सें बैठ गई,,, दोनों केँ बीचकुछ देर तक खामोशी छाईरही उसकेबाद लाला खामोशी कों तोड़ते हुए बोला,,,। )
मालकिन मे तमाम उम्रइस घऱ कां वफादार रहा हूं बहुत अरसा गुजर गय़ा मुझे एक् घऱ केँ लिएजॉब करतेहुए मगरजिस तरह सें आप् साराकाम धंधा संभाल लेगाइस तरह सें किसी नें भि आज तक नहि संभाला थां मुझे तौ मालिक कि हालत देखते हुए लगता हि नहि थां कि जमीदारी ज़्यादा दिन तक टिक पाएगी मगरजिस तरह सें बड़ी मालकीन नें आपको सारा कारोबार जमीदारी कि जिम्मेदारी सोचकर गई हैं उनकी उम्मीद सें कई गुना अधिक बेहतरीन तरीके सें अपने सारा जमीदारी कां काम संभाल ली हैं,,,,।
( लालाजी कि बातें सुनकर सुगंधा कुछबोल नहि रही थि बल्कि चारों तरफ अपनी नजरें दौड़ाकर खेतों कों हि देखरही थि क्योंकि वो जानती थि कि इस बारे मे बहस करने सें कोई फायदा नहि खारही बात बड़े मालिक कि तोँ अब सुगंधा कों भि अपने पति सें बिल्कुल भि उम्मीद नहि थि। विवाह करकेजब वो घऱ मे आई थि तौ उसेइस बात कि बिल्कुल भि उम्मीद नहि थि कि 1 दिनऐसा आएगा कि उसे हि सभीकुछ संभालना होगा,,,,,,,
सुगंधा कों खामोश देखकर लाला कों लगा कि सुगंधा केँ पति कां जिक्र छेड़कर, उसनेगलत कर दिया इसलिये वो बात कों बदलते हुए गेहूं कि फसल औऱ आम केँ बगीचे केँ बारे मे बातें करनेलगा,,,,। जहां नजरेजा रही थि वहां तक सुगंधा केँ हींखेत औऱ बगीचे नजर आँ रहे थें,,, कुछदेर तक लालावही बैठारहा औऱ इसकेबाद,,, उठतेहुए बोला,,,।
आप् यहीं बैठे रहिए मालकिन मे कामदेख करआता हूं वरना गेहूं कि कटाईआज पूरी नहि हौ पाएगी,,,, ( इतना कहकर लाला वहां सें खेतों मे चला गय़ा सुगंधा चारों तरफ नजरे दौड़ाते हुए अपने बारे मे सोचरही थि,,, किउसे जीवन मे,,,
क्याँ मिलाकुछ भि नहि,,,, धन-धान्य सें परिपूर्ण होतेहुए भि उसकी जीवन मे कुछ अधूरा थां, वो मन हि मन मे सोचरही थि कि,,, जिसने हें प्रेम अपनापन पाने केँ लिए विवाह केँ लिए वो सपनादेख रही थि,,, औऱ यही स्नेह दुलार पाने केँ लिए उसने विवाह भि कि थि मगरउसे नाँ तोँ अपने पति कि तरफ सें अपनापन हि मिला औऱ नां हि स्नेह प्रेम कि उष्मा हि प्राप्त हुईँ,,, पति होतेहुए भि नां केँ बराबर हि थां। सुगंधाको अपने पति सें मात्र स्नेह औऱ प्रेम कि हि अपेक्षा थि वो सारीरीक तौर पर्र किसी भि प्रकार कि सुख कि अपेक्षा नहि रखती थि। वो तनसुख कि प्यासी नहि थि बल्कि मनकासूख चाहती थि सुगंधा पेड़ केँ छांव केँ नीचे बैठे बैठे अपने आप् कों सबसे गरीब स्त्री औऱ गरीब पत्नि समझरही थि क्योंकि जमीदारी केँ सुख औऱ रुआब केँ सिवा उसकी झोली मे कुछ भि नहि थां।,,,,,, कुछदेर तक वहीं बैठे बैठे अपनेमन सें मनो मंथन करतीरही,,,,।
दिनचढ़ चुका थां गर्मी कां मौसम थां। ऐसेतेज धूप मे हवाएं भि गरमचल रही थि,,,,। धीरे-धीरे धीरे-धीरे सुगंधा केँ माथे पर्र पसीने कि बूंदे उपसने लगी प्यास सें उसकागला सूखने लगा,,,, उसे प्यास लगी थि इधरउधर नजर दौड़ाई तोँ कुछ हि दूरी पर्र ट्यूबवेल मैसे पानी निकलरहा थां जौ कि खेतों मे जारहा थां,,,। ट्यूबवेल केँ पाइप मे सें निकलरहे हें पानी कों देखकर सुगंधा कि प्यास औऱ ज़्यादा भड़कने लगी,,, वो अपनी स्थान सें उठी औऱ ट्यूबेल कि तरफ जानेलगी,, तेजधूप होने केँ कारण सुगंधा,,, पल्लू कों हल्के सें दोनों हाथों सें ऊपर कि तरफउठा कर जानेलगी,,, दोनों हाथ कों ऊपर कि तरह हल्कै सें उठाकर जाने कि वजह सें सुगंधा कीचाल औऱ अधिक मादक हौ चुकी थि,,, फिरभी वक़्त सुगंधा पर्र किसी कि नजर नहि पड़ी थि मगरइस वक़्त किसी कि भि नजरउस पऱ पड़ जाती तोँ उसे स्वर्ग सें उतरी हुईँ अ्प्सरा देखने कों मिल जाती,,, बेहद हि कामोत्तेजना सें भरपुर नजारा थां। इसतरह सें चलने कि वजह सें सुगंधा कि मद मस्त गोलाई लिएहुए नितंब कुछ ज़्यादा हि उभरी हुइ नजर आँ रही थि,,, कुछ हि देर मे सुगंधा ट्यूबवेल केँ पास पहुंच गई औऱ दोनों हाथआगे कि तरफ करके पानी पीनेलगी,,, शीतलजल कों ग्रहण करने सें उसकी तष्णा शांत होँ गई,,,। पानी पीने केँ बाद वहांमन हि मन मे सोचरही थि कि काश जीवन भि ऐसी होती कि कुछ भि चाहती तोँ हाथआगे बढ़ाकर पूरीकर लेतीमगर ऐसा हौ पाना संभव नहि थां।,,,,,,,
सुगंधा कुछदेर वहींरुक कर अपने चेहरे पर्र ठंडे पानी केँ छींटे मारकर अपने आप् कों तरोताजा करने कां प्रयास करनेलगी,,,,।
ट्यूबवेल केँ पास हि,,, कुटिया नुमा कच्चा घर-मकान बनाहुआ थां जहां सें खुसर फुसर कि आवाज़ आँ रही थि,,,। सुगंधाको कुछ अजीब सां लगा वो
मन हि मन मे सोचरही थि कि इतनी दोपहर मे औऱ इस टूटेहुए कच्चे घर-मकान मे कौन होँ सकता हैं।,,, सुगंधा आरामसे अपनेपैर अागेे बढ़ारही थि।,,,,
सुगंधा धीरे-धीरे धीरे-धीरे पांव रखतेहुए टूटेहुए घर-मकान कि तरफबढ़ रही थि जैसे जैसे वो टूटेहुए घर-मकान कि तरफआगे बढ़रही थि वैसे-वैसे अंदर सें आँ रही कसूर कसूर कि आवाज़ तेज हौ रही थि मगर क्याँ बात हौ रही हैं ये उसकेसमझ सें परे थि। मगरउसे इतना तौ समझपड़ गय़ा थां कि,,, टूटी हुईँ कुटिया मे 2 लोग थें क्योंकि रहरहकर हंसने कि भि आवाज़ आँ रही थि औऱ हंसने कि आवाज़ सें उसे ज्ञात हौ चुका थां कि टूटी हुईँ छोकरी नें एक् स्त्री औऱ एक् व्यक्ति थें,,
सुगंधा धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुएसोच रही थि कि इसतरह सें देख्ना अच्छी बात नहि हैं क्योंकि हौ सकता हैं कि उसके हि मजदूर ऊस टूटी हुइ कुटिया मे आरामकर रहे हौ ये सोचकर वो कुछदेर ऐसे हि खड़ीरही,,,, मगर औरतों कां मन हमेशा उत्सुकता सें भरा हि रहता हैं वो जानना चाहती थि कि इतनी खड़ी दोपहरी मे,,, खेतों कां काम छोड़कर इस टूटी हुइ कुटिया मे क्याँ करेंयही जाने केँ लिए वो फिन सें अपने कदमों कों आगे बढ़ाने लगी,, जैसे-जैसे कुटिया केँ लगभगजा रही थि वैसे वैसे अंदर सें हंसने औऱ खुशर फुसर कि आवाज़ तेज होतीजा रही थि,,,
जिसतरह सें अंदर सें स्त्री कि हंसने कि आवाज़ आँ रही थि एक् स्त्री होने केँ नाते सुगंधाको इसका एहसास हौ चुका थां कि, टूटी हुई कुटिया केँ अंदर एक् मर्द औऱ स्त्री केँ बीचकुछ हौ रहा थां जिसे देख्ना तोँ नहि चाहिए थां मगर सुगंधा कि उत्सुकता उसे अंदर झांकने केँ लिए विवशकर रही थि।
खेती कि जमीन होने कि वजह सें जमीन पऱ सूखेहुए पत्ते कां ढेरलगा हुआ थां जिसकी वजह सें सुगंधा आहिस्ता आहिस्ता अपने पैरों कों उस पऱ रखतेहुए आगेबढ़ रही थि ताकि आवाज़ नां हौ,,,, वैसे भि ट्यूबवेल चलने कि वजह सें आवाज़ आनां संभव नहि थां फिन भि सुगंधा पूरीतरह सें एहतियात बरतरही थि धीरे-धीरे धीरे-धीरे कर केँ पास टूटेहुए घर-मकान केँ लगभग पहुंच गई घर-मकान केँ लगभग पहुंचते हि आखिरी सें आँ रही आवाज़ साफ सुनाई देनेलगी,,,,
वो कितने बड़े बड़े हें रे तेरे,,,, इसे तौ मे दबा दबाकर पीऊंगा।,,,,,
( सुगंधा मर्दाना आवाज़ मे इतनी सि बात सुनते हि सन्नरह गई,, उसी समझते देर नहि लगी कि अंदर क्याँ होँ रहा हैं। सुगंधा कां उत्सुक मन अंदर झांकने केँ लिए व्याकुल होनेलगा औऱ वो इधर-उधर नजरे थोडा करऐसी स्थान ढूंढने लगे कि जहां सें अंदर कां दृश्य देखाजा सके टूटी फूटी कुटिया होने कि वजह सें स्थान-स्थान सें ईंटे निकल चुकी थि,,, सुगंधा अपने आप् कों कच्ची दीवार मे सें निकली हुई ईद कि दरार मे सें अंदर झांकने सें रोक नहि पाई औऱ उसने अपने चारों तरफ नजरे जुड़ा करइसबात कि तसल्ली करली थि कोईउसे देख तौ नहि रहा हैं औऱ तसल्ली करने केँ बाद अपनी कारी कजरारी आंखों कों टूटी हुईँ ईंट कि दरार सें सटा दि,,,,,,
सुगंधा इस टाइमउस बच्चे कि तरह व्याकुल औऱ ऊत्सुक हुएजा रही थि जिसतरह सें,,, एक् बच्चा बाइस्कोप केँ पिटारे मे सें ढक्कन हटाकर अंदर कि फिल्म देखने केँ लिए होता हैं।
उसीतरह सें बाइस्कोप केँ पिटारे कां ढक्कन खुल चुका थां औऱ सुगंधा कां व्याकुल मनइधर उधर नाँ होकर मात्र टूटी हुईँ झोपड़ीी केँ अंदर स्थिर हौ चुका थां।,,,
निकली हुई ईंट कि दरार मे सें,, अंदर कां दृश्य देखते हि सुगंधा पूरीतरह सें सन्न हौ गई,,, अंदर एक् देहात कां हि 35 वर्षीय व्यक्ति जोकि एकदम हट्टा कट्टा मगर सांवले रंग कां थां वो देहात कि हैं एक् स्त्री कि बड़ी-बड़ी चुचियों कों दोनों हाथों सें दबाते हुएपी रहा थां,,, ये नजारा सुगंधा केँ लिए बेहद कामोत्तेजना सें भराहुआ थां। समयभर मे हि सुगंधा कि सांसे तीव्र गति सें चलनेलगी,,,,,
एक् बार अंदर कां नजारा देखने पऱ सुगंधा कि नजरें हद नहि रही थि वो व्याकुल मन सें अंदर कां नजारा देखने लगी वो व्यक्ति जोरजोर सें उस महिला कि दोनों चुचियों कों दबादबा कर जितना होँ सकता थां उतना मुंह मे भरकरपी रहा थां। औऱ वो महिला अपनी मम्मों चुसाई कां भरपूर मजा लूटते हुएबोल रही थि।
आहहहहहहहह,,,,, औऱ जोरजोर सें पी मेरे राजा बहोत मज़ा आँ रहा हैं,,,,,।
( उस स्त्री कि बेशर्मी भरी बातें सुनकर सुगंधा थोड़ी सि विचलित हौ रही थि,,, कि एक् स्त्री भलाइस तरह कि गंदी बातें केसेबोल सकती हैं क्योंकि आज तक सुगंधा मे इसतरह कि बातें अपने पति केँ संगकभी नहि कि थि,,,, फिन भि नाँ जाने कि सुगंधाको उस महिला कि बातें सुनकर अंदर हि अंदर खुशी कि अनुभूति हौ रही थि सुगंधा बारबार अपने चारों तरफ नजरें दौड़ा लेँ रही थि कि कोई सें इस स्थिति मे नां देख लें,,,,।
मेरी रानीआज बहोत दिनों बादतु मिली हैं मुझेआज तोँ तुझेही जीभरकर चोदुंगा,,,,
इसीलिए तौ मे आई हूं मेरे राजा,,, जब तक तेरा लन्ड मेरी चूत मे नहि जातातब तक चुदाई कां मज़ा हि नहि आता,,,,
( दोनों कि गंदी बातें सुगंधा केँ तन जिस्म मे आगलगा रही थि एक् तोँ बरसों बाद उसनेइस तरह कां नजारा देखी थि क्योंकि बरसो गुजरगए थें उसे शारीरिक संबंध बनाए,,,, इसलिये आज अपनी आंखों सें इसतरह कां नजारा देखकर उसकेतन जिस्म मे अजीब सि हलचल होँ रही थि।,,, सुगंधा कां मन इधर-उधर होँ रहा थां देहात मे उसकी बहोत इज्जत हैं अगर किसी कि भि नजरइस तरह सें पड़ जाती तोँ उसके बारे मे क्याँ सोचेगा इसलिये वो वहां सें जानां चाहती थि वो वहां सें नजर हटाने हि वाली थि कि,,, उस महिला नें उसकी पजामे कि डोरीखोल कर ऊसकेख ड़े लन्ड कों पकड़कर हिलाना शुरुआत कर दि,,, उस स्त्री कि हरकत कों देखकर सुगंधा कां धैर्य जवाब देनेलगा,,,, उसकेकदम फिन सें वही ठिठकगए औऱ वो ध्यान सें उस नजारे कों देखने लगी,,, उस स्त्री नें जिस लन्ड कों अपनी हथेली मे पकड़कर हिलारही थि वो पूरीतरह सें एकदम काला थां। उस व्यक्ति कां इतना कड़क लन्ड देखकर सुगंधा अंदर हि अंदर सिहरउठी,,,,
दोनों पूरीतरह सें उत्तेजित होँ चुके थें टूटी हुईँ कुटिया मे जिसतरह कां खेलचल रहा हैं उसे देखकर सुगंधा भि आहिस्ता उत्तेजना कि तरफबढ़ रही थि उसकी जांघों केँ बीच अजीब सि हलचल होनेलगी थि सुगंधा अभि कुछसमझ पाती इससे पहले हि उस व्यक्ति नें उस महिला कों घुमाया औऱ जैसे महिला भि सभीकुछ समझ गई होँ वो स्वयं-ब-स्वयं अपनी पेटीकोट कों पकड़कर कमर तक उठा दि औऱ झुक गई सुगंधा देखकर उत्तेजित होनेलगी उसका चेहरा सुर्ख लाल होनेलगा,, क्योंकि वो जानती थि कि इससेआगे क्याँ होने वाला हैं।,,
गहरी सांसे लेतेहुए सुगंधा अंदर कां नजारा देखती रही औऱ वो व्यक्ति उस महिला कों चोदना शुरुआत कर दिया,,, उस महिला कि चीख औऱ गरम पिचकारी कि आवाज़ सुनकर सुगंधा कों समझते देर नहि लगी कि वो महिला,,, मजे लेँ लेकरउस व्यक्ति सें चुड़वा रही थि। औऱ वो व्यक्ति भि उसकीकमर थामेउस स्त्री कों चोदरहा थां। सुगंधा कां वहां खड़ा रहना उसकेबस मे नहि थां क्योंकि उसे अपने जिस्म मे हौ रही हलचल असामान्य लगरही थि। वो वहां सें सीधेघऱ कि तरफचल दि
सुगंधा खेतो पऱ सें अपनेघऱ पर्र लौट चुकी थि,,।
रास्ते भर वो टूटेहुए घर-मकान केँ अंदर केँ दृश्य केँ बारे मे सोचती रही नां जाने क्यूं उसकानाम आजउस दृश्य सें हट नहि रहा थां यकीन नहि हौ रहा कि जोँ उसने देखी वो सच हैं।,, उस व्यक्ति कां खड़ा लन्ड अभि भि ऊसकी आंखों केँ सामने घूमरहा थां।,,
टूटी हुइ कुटिया केँ उस कामोत्तेजक नजारे नें सुगंधा केँ तन जिस्म मे अजीब सि हलचलमचा रखी थि।
जांघो केँ बीच कि सुरसुराहट ऊसेसाफ महसूस हौ रही थि। बरसों बाद उसनेइस तरह कि हलचल कों अपने अंदर महसूस कि थि,,,, बारबार दोनों केँ बीच कि गरम वार्तालाप उसके कानों मे अथड़ा रहे थें।
उसेसोच कर अजीबलग रहा थां कि स्त्री एक् मर्द सें इसतरह कि अश्लील बातें केसेकर सकती हैं। मगरये एक् सच थां अगर किसी दूसरे नें उसेये बातकही होती तोँ शायदउसे यकीन नहि होतामगर ये तौ वो अपनी आंखों सें देखरही थि अपने कानों सें सुनरही थि इसलिये इसे झुठलाना भि उसकेलिए मुमकिन नहि थां।,,,
वो घऱ पर्र पहुंच चुकी थि जानू केँ बीच हौ रहे गुदगुदी कों अपने अंदर महसूस करके अनायास हि उसकेहाथ साड़ी केँ ऊपर सें हि चूत वालेजगह पऱ चलेगए जिससे उसेसाफ आभासहुआ कि उसजगह पर्र गीलेपन कां संचार होँ रहा थां जोंकि उसकाकाम रस हि थां। पहलीबार सुगंधा कि चूत गीली हुई थि,,, इस गीलेपन केँ एहसास सें उसे घ्रणा भि होँ रही थि तौ अदृश्य कामोन्माद सें मजा कि अनुभूति भि हौ रही थि।,,, सुगंधा कि पैंटी कुछ अधिक हि गीली महसूस होँ रही थि जिसकी वजह सें वो असहज महसूस कररही थि,,,। इसलिये वो अपनी पैंटी कों बदलने केँ लिए कमरे मे दाखिल होनेजा रही थि कि तभी पीछे सें आवाज़ आई।
मां कहां चली गई थि तुम् मे कब सें तुम्हें ढूंढरहा हूं।
जरा खेतों पर्र चली गई थि बेटा वहां कां काम देख्ना थां।,,,, अब तुम् तोँ नाँ जानेकब अपनी जिम्मेदारी समझोगे इसलिये मुझे हि साराकाम करना पड़ता हैं अगर तुम् खेतों कां कामदेख लेते तौ मे घऱ पर्र हि रहती।,,,
माँ नें अभि इस लायक नहि हूं कि साराकाम संभाल सको अभि तौ मेरे खेलने कूदने केँ दिन हैं।
( इतना कहतेहुए रोहनआगे बढ़कर सुगंधा केँ गलेलग गय़ा,,,, सुगंधा भि स्नेह बरसाते हुए रोहन कों गले सें लगाली मगरगले लगते हि,, शुभम कों अपने छातियों पर्र नरम गर्म एहसास होनेलगा जोकि अच्छी तरह सें जानता थां कि ये एहसास उसकी माँ कि बड़ी-बड़ी गोलाईयो कां थां,,, समयभर मे हि उसेइस एहसास नें कामोत्तेजना सें भर दिया,,,, रोहन कों सुभह वाला दृश्य आंखों केँ सामने नजरआने लगा,,, जब बेलाउसे जगाने आई थि औऱ उसकी ब्लाउज सें झांकते हुए उसकी बड़ी बड़ी चूचियां वो प्यासी आंखों सें देखरहा थां उस लम्हा कों याद करते हि रोहन कां लन्ड खड़ा होँ गय़ा क्योंकि इस वक़्त बेला सें भि बेहद हसीन स्तनों कि गोलाईयां उसके छातियों सें रगड़खा रही थि,,,,। रोहन तौ अपनी मम्मी कों अपनी बाहों सें अलग नहि होनेदे रहा थां वो कुछदेर तक ऐसे हि खड़ारहा सुगंधा भि कुछ लम्हा तक ऐसे हि अपनी बाहों मे भरेहुए अपने बेटे कों दुलारती रही,,,,,
मगर चूत सें बहरहे कामरस कि वजह सें उसकी पैंटी कुछ अधिक हि गीली हौ चुकी थि जिसकी वजह सें वो अपने आप् कों असहज महसूस कररही थि।
इसलिये बार रोहन कों अपने आप् सें अलग करतेहुए बोलीं तुम् यहीं रुको मे आती हूं,,, इतना कहकर सुगंधा कमरे केँ अंदरचली गई औऱ रोहनउसे जाताहुआ देखता रहामगर आज पहलीबार उसका नजरिया बदला थां जिसकी वजह बेलाही थि आज पहलीबार उसका ध्यान सुगंधा कों जातेहुए देखकर उसकी सहायता कि हुई गांड पर्र पड़ी थि औऱ रोहन अपनी मम्मी कि भारी-भरकम सुडोल गांड कों देखकर एक् अजीब सें आकर्षण मे बँधता चलाजा रहा थां। फिरभी रोहन कि मे तेरे सें पहले भि अपनी मम्मी कि हसीन शरीर पर्र पड़ी होँ चुकी थि मगरजिस तरह केँ नजरिए सें आज वो अपनी माँ कों देखरहा थां उसतरह सें उसनेकभी नहि देखा थां।
दरवाजा बंद होने कि आवाज़ सुनकर जैसे उसकी तंद्रा भंग हुई औऱ वो अपनीइस नजरिए कों लेकर अपने आप् कों हि कोसने लगा,,,, क्योंकि वो येबात अच्छी तरह सें जानता थां कि जिस नजरिए सें वो अपनी माँ कों देखरहा थां वो गलत हैं इसलिये वो अपना ध्यान हटाने केँ लिए इधर-उधर चहल कदमी करनेलगा मगर सुभह कां नजारा औऱ अभि अभि जौ उसके सीने पऱ उसकी मम्मी कि नरमनरम गोलगोल चुचियों कां स्पर्श हुआ थां,,,, उसके चलते उसकेतन जिस्म मे अजीब सि हलचल होनेलगी थि औऱ तौ औऱ अपनी माँ कों जातेहुए उसके नितंबों कों देखकर औऱ उन नितंबो कां साड़ी केँ अंदर सें हि दाएं बाएं मटकना देखकर उसकामन मस्तिष्क अजीब सि हलचल मे धँशाचला जारहा थां।,,,,,, नां चाहते हुए भि उसका ध्यान उसी औऱ आकर्षित हौ रहा थां औऱ वो बारबार मुड़ मुड़कर बंद दरवाजे कि तरफदेख रहा थां तभीउसे अपने जिस्म मे एक् हरकत केँ बारे मे पताचला,,,, तोँ उसकी सांसे भारी होँ चली उसकीनजर अपनी पेंट कि तरफ पड़ी तौ उसकाहाल बेहाल होनेलगा उसका लन्ड पूरीतरह सें खड़ा हौ चुका थां औऱ पेंट मे तंबू बनाएहुए थां।
अपनी हालत पऱ उसे क्रोध आनेलगा कि आखिरकार अपनी हि मम्मी कों देखकर उसका लन्ड क्यो खड़ा होँ गय़ा,,,,
अब रोहन कां दिमाग़ दोनों तरफ घूमने लगा थां एक् मनकहरहा थां कि येसभी बिल्कुल गलत हैं रुपया उसे सोचना हि नहि चाहिए मगर दूसरी तरफ उसकामन अपनी जवान होँ रही हैं उम्र कों देखते हुए शारीरिक आकर्षण कि तरफ झुकता चलाजा रहा थां उसकाये मनउसे बिल्कुल भि दोषी नहि मानरहा थां बल्कि उसे औऱ आगे बढ़ने केँ लिए प्रेरित कररहा थां बारबार रोहन कि आंखों केँ सामने भि अपनी मम्मी कि लचकती हुई गांड तोँ बेला कि ब्लाउज मे सें झांकती हुई चुचीनजर आँ रही थि।,,,, लन्ड कां कठोरपन बिल्कुल भि कम नहि होँ रहा थां ऐसालग रहा थां कि जैसे किसी युद्ध पऱ जाने केँ लिए एक् योद्धा अपना हथियार सजधजकर कररहा होँ मगर यहां किसी भि प्रकार कां युद्ध नहि थां। नाँ तौ यहा मैदान मे होने वाले युद्ध कि गुंजाइश थि औऱ नां हि बिस्तर पर्र यहां पर्र युद्ध हौ रहा थां तोँ अपनेमन सें हि,,, रोहन अपनेमन सें लड़रहा थां किसकी सुनेउसे कुछसमझ मे नहि आँ रहा थां दोनों तरफमन थें औऱ एक् तरफ वो थां। एक् तरफमन कि बात सुनकर वो अपने आप् कों शांत तौ जरूरकर लेता,,, मगर थोड़ी देर केँ लिए,, इसकेबाद फिन दूसरा मनऊस पर्र भारीपड़ जाता,,,, अपने आपकोलाख समझाने कि कोशिश करने केँ बावजूद भि उसकामन नहि माना,,, औऱ वो विवश हौ गय़ा,,, अपनी मम्मी केँ कमरे केँ अंदर झांकने केँ लिए,,,,
अंदर कमरे मे सुगंधा अपनी हालत कों देखकर लज्जा सारहुए जारही थि,, कमरे मे आते हि वो दरवाजे कों बंद करके अपनी साड़ी कमर तक उठा दि थि औऱ,,,
उसकीनजर अपनी पैंटी कि तरफ गई तौ वो पूरीतरह सें गीली होँ चुकी थि ऐसालग रहा थां जैसेउस पऱ पानी केँ छींटे पड़े हौ औऱ ऊतनाभाग पूरीतरह सें गिला हौ चुका थां,,, सुगंधा अपनी हालत पऱ गौर करतेहुए शर्मिंदगी कां एहसास कररही थि उसेइस बात कों लेकर अधिक लज्जा आँ रही थि कि वो किसतरह सें चोरी चोरी टूटी हुईँ कुटिया मे अंदर झांकरही थि,,,
औऱ वो भि क्याँ झांकरही थि,,, एक् स्त्री कों 1 व्यक्ति सें चुदवाते हुएदेख रही थि,,, वो तौ उसेइस बात सें राहत कि कोई नहि उसेइस हालत मे देख नहि लिया वरनाअगर कोईये देख लेता कि देहात कि जमीदारीन,,, चोरी चोरी टुटी हुइ कुटिया केँ पास खड़ी होकरतेज धूप मे भि कुटिया केँ अंदर चुदाई कररहे महिला औऱ व्यक्ति कों देखरही थि तोँ,,, क्याँ होता सारे देहात मे उसकीथु थु होती बदनामी होँ जाती,,,,
सभी ऊसे गंदी महिला केँ नजरिए सें देखने लगते ऊसकी इज्जत माटी मे मिल जाती,,,, सुगंधा मन हि मन ईश्वर कां धन्यवाद अदा करनेलगी थि अच्छा हुआ किसी नें उसेउस हालत मे देखा नहि,,,,
क्याँ सोचते हुए सुगंधा अपनी शाड़ी कों एक् हाथ सें थामेहुए दूसरे हाथ सें पेंटी कों नीचे कि तरफ सरकाने लगी,,,,,,
औऱ बाहर् रोहन व्याकुल हुएजा रहा थां। फिरभी रोहन अभि तक कुछ भि ज़्यादा देखा नहि थां बस बेला केँ अधखुले नारंगिया औऱ अपनी माँ केँ गोलाइयों कां स्पर्श अपनी छातियों पर्र महसूस किया थां,,,, बस इतने सिर्फ सें हि रोहन बेहाल हुएजा रहा थां इसलिये वो कमरे केँ अंदर झांकने केँ लिए विवश होँ रहा थां।।
सुगंधा अपनी
शाड़ी कों एक् हाथ सें थामेहुए
दूसरे हाथ सें पेंटी कों
नीचे कि तरफ
सरकाने लगी,,,,,,
औऱ बाहर् रोहन व्याकुल हुएजा रहा थां।
फिरभी रोहन अभि तक कुछ
भि अधिक देखा नहि
थां बस बेला केँ अधखुले नारंगिया औऱ
अपनी माँ केँ गोलाइयों कां स्पर्श
अपनी छातियों पऱ महसूस किया
थां,,,, बस इतने सिर्फ सें हि
रोहन बेहाल हुएजा रहा थां इसलिये वो
कमरे केँ अंदर झांकने केँ लिए विवश होँ रहा
थां।,,,,,
सुगंधाको जहां तक याद थां उसकी चूत पहलीबार अत्यधिक गिली हुइ थि,,,, औऱ ऐसा होना भि लाजमी थां बरसों सें जिस महिला नें शारीरिक सुख कों महसूस नां किया हौ,,,, नाहीइस तरह केँ संभोग वाले दृश्य देखी हौ तोँ ऐसी औरतों केँ सामने अगरइस तरह कां गरमा गर्म नेत्री सें पेश होँ जाए तोँ उसका भि वहीहाल होगा जोँ इस वक्त सुगंधा कां होँ रहा थां,,,,,
सुगंधा धड़कते दिल केँ संग अपनी पैंटी कों नीचेकी तरफ सरकाते हुए,,,, उसे घुटनों सें नीचेकर दि अब वो आहिस्ता अपनी पूरी हुईँ चूत कों देखने लगी सुगंधा बहुत दिनों बाद अपनी हसीन बुरको निहार रही थि,,,, सुगंधा केँ चेहरे पऱ मासूमियत फेली हुई थि,,, ठीक वैसी हि मासूमियत देसी मासूमियत एक् माँ अपने छोटे सें बच्चे कों देखते हुए महसूस करती हैं। अपनी हसीन गर्म रोटी कि तरह फुली हुई चूत कों देखकर वो मन हि मन सोचने लगी कि,,,,,
कुछ भि तौ नहि बदलाआज भि वैसी हि दिखती हैं जैसे कि जब वो कुंवारी थि तब दिखती थि बस हल्के हल्के बालों कां झुरमुट सां बन गय़ा हैं औऱ वो भि साफकर दे तौ आज भि 18 साल कि सुगंधा हि लगेगी,,, सुगंधा सें रहा नहि गय़ा औऱ वो हल्के सें अपनाहाथ नीचे कि तरफ बढ़ाकर हथेलियों सें अपनी चूत कों सहलाने लगी,,, ऐसा करने पर्र सुगंधा कों खुशी कि अनुभूति होँ रही थि वो हल्के हल्के अपनी फुली हुईँ चूत पर्र झांटों केँ झुरमुटों केँ ऊपर सें हि सहलाना शुरुआत कर दि,,,,, सुगंधा अपनी हि हरकत कि वजह सें कुछ हि लम्हा मे उत्तेजित होनेलगी उसकी सांसे तेज चलनेलगी,,,, हथेली कां दबाव चूत केँ ऊपरीसतह पऱ बढ़ने लगामगर अपनी बढ़ती हुई औऱ तेज दौड़ती हुइ सांसो पर्र गौर करते हि वो अपने आप् कों संभाल ली जैसे कि अब तक अपने आप् कों संभालती अारही थि।,,,, वो अपनी स्थिति पऱ काबू नां पानी कि कमजोरी कों अच्छी तरह सें जानती थि वो जानती थि कि अगर वो कमजोर हौ गई तौ आगे बढ़ती हि जाएगी औऱ फिन बदनामी केँ सिवाकुछ नहि मिलने वाला हैं क्योंकि अपने पति सें तोँ उसेअब किसी भि प्रकार कि उम्मीद बिल्कुल भि नहि थि औऱ अपनी शारीरिक जरूरतों कों पूरा करने कां मतलब थां किसीगैर मर्द कां सहारा लेना औऱ ऐसा करने पर्र पूरे खानदान कि बदनामी औऱ जमीदारी कां रूआब भि जाने कां डरबना हुआ थां।,,,,
इसलिये सुगंधा लम्हा भर मे हि अपने आप् पर्र काबू पाकर घुटनों केँ नीचे फंसी हुईँ पेंटी कों पैरों कां सहारा लेकर अपने लंबे गोरे पैराे सें बाहर् निकाल दि,,,,
ये नजारा बेहद कामुक लगरहा थां एक् हाथ सें सुगंधा अपनी सारी कों संभाले हुई थि औऱ कमर केँ नीचे कां भाग पूरीतरह सें संपूर्ण नग्नावस्था मे थां।
भरावदार सुडोल खुली हुई गांड कां गोरापन दूध कि मलाई कि तरहलग रहा थां,,, संग हि मोटी चिकनी जांगे केले केँ तने कि समानचमक रही थि।,,,, सुगंधा वैसे हि हालत मे एक् हाथ सें अपनी साड़ी कों पकड़े हुए अलमारी कि तरफ बढ़ी अपनेकदम आहिस्ता आगे बढ़ाने कि वजह सें उसकी भारी भरकम नितंबों कां लचकपन बेहद हि मादकलग रहा थां। इस स्थिति मे अगरकोई भि सुगंधा केँ दर्शन कर लेँ तौ उसका जन्मसफल हौ जाएं।,,,
बदलते रिश्ते...... - मालकिन – New Episode
फिरभी रोहन कमरे केँ बाहर् बेचैन होँ रहा थां अंदर जाने केँ लिएमगर उसेये नहि पता थां कि वास्तव मे उसकी मम्मी कमर केँ नीचे सें पूरीतरह सें नंगी होकर कमरे मे घूमरही हैं। अगरइस बात कां उसेपता चल जाता तौ शायद उसका लन्ड पानी छोड़ देता क्योंकि जिस इसलिये मे उसका लन्ड पूरीतरह सें खड़ा थां वो पूरीतरह सें उत्तेजित होँ चुका थां औऱ वो भि अपनी माँ केँ हि चलते तौ जाहिर सि बात थि कि अगरऐसी अवस्था मे वो अपनी मम्मी कों संपूर्ण व्यवस्था कि हालत मे दर्शन करने कां तौ उसके लन्ड सें पानीछुट हि जाता। वो अंदर देखने कां जुगाड़ बनारहा थां मगरकोई भि जुगाड़ उसकासफल नहि होँ पारहा थां,,,,। अभि भि उसके पेंट मे पूरीतरह सें तंबूबना हुआ थां।,,,,,
औऱ कमरे केँ अंदर सुगंधा अलमारी खोलकर अपनी पैंटी ढूंढरही थि।,,,,, औऱ आलमारी कां ड्राइवर खोलकर वो अपनी गुलाबी रंग कि पैंटी बाहर् निकाल ली औऱ वापस अलमारी कों बंदकर दि,,,,, सुगंधा खाट केँ लगभगआकर फर्श पर्र गिरी हुईँ पेंटिं कों उठाकर खाट केँ नीचे छुपा दि,,,, औऱ अपनी गुलाबी रंग कि पैंटी कों इधरउधर घुमाकर देखने सकी गुलाबी रंग कि पैंटी सुगंधा कों बेहद पसन्द थि औऱ अलमारी मे गुलाबी रंग कि ढेर सारी पैंटी रखी हुइ थि फिरभी अबयेशौक उसे ज़्यादा पसन्द नहि थां क्योंकि अपने अंतर्वस्त्र,,,, दिखाने कां शोक अपने पति केँ बेरुखेपन कि वजह सें ख़त्म होँ चुका थां।,, मगरआज अपनी फुली हुइ चूत कों देखकर नां जाने कि उसकामन गुलाबी रंग कि पैंटी पहनने कों होँ गय़ा थां।
इसलिये वो नीचे कि तरफझुक कर अपने एक् पांव कों पेंटी केँ एक् छेद मे डाल दि औऱ अगलापेर उठाकर दूसरे छेद मे डाल दि,,,, रोहन कां जुगाड़ सफल होतानजर आनेलगा। उसे कमरे कि खिड़की केँ बारे मे याद आँ गय़ा क्योंकि हमेशा हल्की सि खुली हुईँ रहती थि औऱ वो मन मे प्रार्थना करकेउस खिड़की कि तरफआगे बढ़ा कि आज भि वो हल्की सि खुली हुई होँ,,, ओ खिड़की केँ पास पहुंचते हि वो खुशी सें झूमउठा जैसे कि सच मे उसकी प्रार्थना स्वीकार कर दि गई हौ,,,, खिड़की आज भि हल्की सि खुली हुइ थि रोहन जल्दी खुली हुइ खिड़की केँ पल्ले कि ओट सें अंदर कि तरफ झांकने लगा,,,,, पहले तौ वोँ अंदरइधर उधरनजर दौड़ा याँ उसेकुछ नजर नहि आँ रहा थां अंदर ट्यूबलाइट कि रोशनी फैली हुई थि कुछ नाँ नजरआने पऱ उसे निराशा महसूस होनेलगी मगरतभी बात नहि टूटा बदलकर देखने कि कोशिश करनेलगा तोँ खाट केँ पास उसकी माँ खड़ीनजर आँ गई
सुगंधा कि पीठ रोहन कि तरफ थि रोहन कि नजरें अपनी माँ कि पेट कि तरह कि गई औऱ जब उसकी नजरें उसकी माँ केँ हाथों कि हरकत कि तरफ पहुंची तब तक देर होँ चुकी थि,,, पेंटी पहनकर वाउ अपनी साड़ी कों नीचे गिरा चुकी थि,,,, रोहन कों बस उसकी मम्मी कि गोरी गोरी हल्किसी पिंडलिया हि नजरआई,,,
मगर इसका आभासउसे होँ गय़ा थां कि उसकी मम्मी नें साड़ी कों नीचे कि तरफ छोडी थि,,,, जिससे उसेसमझ मे आनेलगा कि उसकी माँ नें कुछ तोँ जरूरकर रही थि हौ सकता हैं कि वो नंगी हुईँ होँ याँ कुछ औऱ भि करती हौ मगर नंगी होने कां आभास होते हि उसकेतन जिस्म मे उत्तेजना कि लहर दौड़ने लगी,,,,
रोहन कि नजर एक् बारफिन सें साड़ी केँ ऊपर सें हि अपनी माँ कि बड़ी बड़ी गांड पर्र पहुंच गई औऱ उसअंग कों कल्पना करके लगना वस्था मे देखने कि कोशिश करनेलगा मगर रोहन अभि भि साड़ी केँ अंदर केँ अंग केँ नग्न वास्तविकता सें अनजान थां वो नहि जानता थां कि स्त्री नंगी होने पऱ कैसी दिखती हैं उसकेअंग कीसइस तरह केँ नजरआते हें,,,,,
रोहन अपनी माँ कों देखते हुएकुछ औऱ कल्पना कर पाता इससे पहले हि उसकी मम्मी दरवाजे कि तरफआगे बढ़ने लगी औऱ रोहन जल्दी भागकर कमरे सें दूरचला गय़ा इसकेबाद सुगंधा स्वयं हि अपनेलिए औऱ अपने बेटे केँ लिए खानां निकाल कर लेकरआई औऱ दोनों बिनाबात किए भोजन करनेलगे सुगंधा इसवजह सें खामोश होकर खानां खारही थि कि उसके जेहन मे अभि भि टूटी हुईँ कुटिया केँ अंदर केँ संभोगनिक दृश्य घूमरहे थें,,,,
औऱ रोहन शांत होकर इसलिये खानां खारहा थां कि आज सुभह-सुभह बेला कि झूलती हुइ चुचीयो कों देखकर,,, कामोत्तेजना वश अपनी माँ कों देखने कां नजरिया बदल गय़ा थां।
कुछदिन यूं हि बीतगए,,, सुगंधा कां सारा ध्यान गेहूं कि कटाई औऱ उस कि छँटााई मे हींलगा रहा,,,, दिनभर कि व्यस्तता केँ कारण उसके जेहन सें कुटिया मे देखी हुईँ चुदाई कि कामोत्तेजना सें भरेहुए दृश्य मिटगए थें औऱ वैसे भि सुगंधा आपने आपकोइन सभी बातों सें दूर हि रखती थि,,,,,,। वापस वो अपनेमन कों जमीदारी औऱ खेत खलियान केँ काम मे लगाली थि,,,,
मगर दूसरी तरफ रोहन कां ध्यान पूरीतरह सें भटकरहा थां एक् तौ वो पहले सें हि पढ़ाई सें दूर हि दूर रहता थां औऱ ऊपर सें बढ़ती हुईँ उम्र कि नजाकत कों देखते हुए,,,, जवानी कि राह पऱ बढ़रहा रोहनअब औरतों केँ अंगों मे रुचि लेनेलगा थां,,,। आती-जाती औरतों औऱ लड़कियों कों वहां चोरी छुपे घूरता रहता थां,,,, खास करके उसकी नजरों कां केंद्र बिंदु औरतों कि चूचियां औऱ उनकी भारी भरकम गांड हि रहती थि।।
औऱ वैसे भि पुरातन काल सें मर्दों केँ आकर्षण कां केंद्र बिंदु औरतों कां बूब्ज़ प्रदेश औऱ नितंबों कां घेराव हि रहा हैं जोँ अब तक चला आँ रहा हैं औऱ येकभी भि ख़त्म नहि होने वाला,,,,।
औऱ आकर्षण हि तौ हैं जौ मर्द औऱ औरतों कों एक् दूसरे केँ लगभग लाता हैं एक् दूसरे मे रूचि कां कारण हि आकर्षण हैं।,,,,,,,
इसलिये तौ रोहन भि उसी दिशा मे आगेबढ़ रहा थां।।
जब सें बेला कि झुलत़ी बूटियों कां दर्शन हुआ थां तब सें रोहन कि रातों कि नींदउड़ चुकी थि औरतों केँ अंगों मे नां चाहते हुए भि वो रुची लेनेलगा थां।,,,,
आते जाते वो बेला कों चोर नजरों सें देखा करता थां।
मगर उसका आकर्षण अपनी माँ कि तरह भि बढ़ता जारहा थां क्योंकि वो कि तरह सें जानता थां कि उसकी मम्मी बेहद सुंदर औऱ एकदम गोरी हैं खास करके रोहन कों उसकी माँ केँ नितंबों कां घेराव बेहद आकर्षक लगता थां,,, औऱ यही रोहन केँ आकर्षण कां केंद्र बिंदु भि थां।,,,
अपनी माँ कों चोरी-छिपे कामुक नजरों सें देख्ना इसबात कां तोँ सुगंधा कों पता नहि चलामगर बेला कों रोहन कि कामुक नजरों कां अंदाजा लग गय़ा औऱ मन हि मनखुश होनेलगी खेलीखाई बेला अच्छी तरह सें जानती थि कि इस उम्र मे लड़कों कों क्याँ अच्छा लगता हैं।,,,,
रोहन कों अपनीतरफ रिझाने केँ लिए बेला जानबूझकर कुछ ज़्यादा हि मटककर चलनेलगी रोहन कि नजरें उसके नितंबों पऱ बनीरहे इसलिये वो रोहन केँ सामने अपनीकमर कों कुछ ज़्यादा हि बल खातेहुए औऱ अपनी गांड कों मटकाते हुएआने जानेलगी,,,
रोहन केँ लिएये लम्हा बेहद कामोत्तेजना कां अनुभव करा देने वालेलग रहे थें क्योंकि आते जाते बेला कि लचकती हुई गांड,, औऱ उसकी स्वयं कि मम्मी कि बेहद सुंदर भरावदार नितंबों कां मटकना देखकर रोहन कां दिलबाग बागहुए जारहा थां।,,,,,,
रोहन कि कामुक नजरों कों भापकर बेलाउस पर्र अपनी जवानी औऱ मादक अंगो कां आकर्षण डालने लगी थि जिसके आकर्षण मे रोहन बंधता चलाजा रहा थां।,,,,,
ऐसे एक् दिनघऱ मे कोई नहि थां सुगंधा किसीकाम सें बाहर् गई हुईँ थि।,, मौकादेख कर बेला फायदा उठाना चाहती थि,,, घऱ पर्र सिर्फ रोहन औऱ बेलाही थि,, वो घऱ कि सफाईकर रही थि गर्मी कां मौसम होने कि वजह सें वो मात्र ब्लाउज औऱ पेटीकोट हि पहनकर घऱ कि सफाईकर रही थि,,, गर्मी कां तोँ एक्सक्यूज़ थां वो जानबूझकर अपनी साड़ी उतार फेंकी थि। बेला अपनीचाल चलतेहुए ब्लाउज केँ नीचे सें दोबटन कों खोल दि औऱ अपनी पेटीकोट कों हल्के सें ऊपर कि तरफ उठाकर कमर मे खोस दि जिससे,,,
उसकी पेटीकोट घुटनों तक उठ गई,,,,,,,
वो जानती थि कि इस वक़्त रोहन अपने कमरे मे आरामकर रहा होगा,,,,,, औऱ वो उसे रिझाने केँ लिए उसके कमरे पर्र पहुंच गई,,,, घऱ कि नौकरानी होने कि वजह सें रोहनउसे अधिकभाव नहि देता थां येबात वो अच्छी तरह सें जानती थि,,, मगरकुछ दिनों सें रोहन केँ बदलते हुए नजरिए कों देखते हुए अच्छी तरह सें जानती थि कि जैसा वो कहेगी वैसा हि वो करेगा, मर्दों कि कमजोरी कों बेला अच्छी तरह सें समझती थि।
वो जानती थि कि इससमय रोहन
अपने कमरे मे आरामकर रहा होगा,,,,,, औऱ वो उसे रिझाने
केँ लिए उसके कमरे पर्र पहुंच गई,,,, घऱ कि
नौकरानी होने कि वजह सें रोहनउसे
अधिकभाव नहि देता थां येबात वो
अच्छी तरह सें जानती
थि,,, मगरकुछ दिनों सें रोहन केँ बदलते हुए
नजरिए कों देखते हुए अच्छी तरह सें
जानती थि कि जैसा वो
कहेगी वैसा हि वो करेगा, मर्दों
कि कमजोरी कों बेला
अच्छी तरह सें समझती
थि।
औऱ मर्दों कि ईसी कमजोरी कां लाभ बेला पूरीतरह सें लेना चाहती थि,,, बेला अपनीमद मस्त अदाओं कां जाल बिछाने केँ उद्देश्य सें,, रोहन केँ कमरे पर्र पहुंच गई, कमरे कां दरवाजा हल्का सां खुला थां इसलिये बेला दरवाजे कों थोडा सां औऱ खोलकर दीवाल सें टेका लगाकर खड़ी हौ गई,,, रोहन अपने आप् मे मशगूल खाट पर्र लेटकर छत कि तरफदेख रहा थां बेला कों यहीलग रहा थां कि रोहन आरामकर रहा हैं मगर रोहन पलंग पऱ लेटकर छत कि तरफ देखते हुए बेला औऱ उसकी मम्मी केँ बारे मे हि सोचरहा थां वो उन दोनों केँ नग्न शरीर कि कल्पना करके अपने आप् मे मस्त होँ रहा थां,,,,,,,, रोहन कि आंखों केँ सामने बेला कि झूलती हुइ चूचियां गौर सुगंधा कि लचकती हुईँ गांड बार-बार नाचजा रही थि,,,,,,,
देना रोहन केँ मासूम चेहरे कों देखकर मन हि मन मुस्कुराने लगी वो मादकता भरी आवाज़ मे बोलि,,,
रोहन बाबू,,,,,,,, ए,,,,,,, रोहन बाबु,,,,,,
( मादकता भरी आवाज़ कानों मे पड़ते हि रोहन कि नजरें दरवाजे कि तरफघूम गई औऱ दरवाजे पर्र बेला कों खड़ीदेख करमन हि मन प्रसन्न होनेलगा,,,। उसेइस बात कि कतई भि उम्मीद नहि थि कि इससमय बेलाा उसके कमरे पऱ आएगी,,,,,
इंसान जिस किसी केँ बारे मे भि एकदमगान होकर उसके हि विचारों मे ख्यालों मे खोया हौ औऱ ऐसा शख्स कि आंखों केँ सामने आँ जाए तौ उस इंसान कि क्याँ हालत होती हैं वही हालतइस वक्त बिल्कुल रोहन कि भि होँ रही थि रोहनबैड पर्र लेटा लेता देना केँ बारे मे हि सोचरहा थां कि बीमा कों इसतरह सें दरवाजे पर्र खड़ा देखकर वो अपने आप् पऱ काबू नहि कर पाया औऱ खाट सें उठकरबैठ गय़ा,,,, औऱ खाट सें उठकर बैठते हुए बोला,,,,। )
बेला तुम् यहां औऱ इस वक़्त,,,,
आनां हि पड़ेगा नाँ बाबूजी तुम् तोँ हमारी खोजखबर रखते हि नहि होँ तोँ हमें हि तुम्हारी खोजखबर रखनी पड़ती हैं।,,, ( बेला पतली सि दुपट्टे केँ सामान चुनरी कों अपनी ऊंगलियो मे फसाकर ईठलाते हुए बोलि,,, )
ममम,,,, मै कुछ समझा नहि बेला तुम् कहना क्याँ चाहती होँ,,,,,,
( बेला कि मादकता भरी आवाज़ सुनकर रोहन कि हालत खराब होनेलगी थि,,, इतना कहते हि,,, रोहन कि नजरें बेला केँ मादकता भरे जिस्म पऱ ऊपर सें नीचे कि तरफ घूमने लगीअब जाकर उसनेगौर किया कि बेला उसकी आंखों केँ सामने सिर्फ ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे हि थि औऱ उस पऱ हल्की सि झीर्रीजैसी,, ओढ़नी डालरखी थि जिसके आर-पार सभीकुछ नजर आँ रहा थां रोहन नें इसबात पर्र गौर किया कि,,, बेला केँ ब्लाउज कि निचले हिस्से केँ दोनों बटन खुलेहुए थें,,, औऱ उसमें पेटीकोट कों घुटनों सें ऊपर तक लाकरकमर सें खोसरखी थि,,,।,,,, बेला कां रंग हल्का सांवातला थां मगर कपड़ों केँ अंदर कां अंगधुप नां लगने कि वजह सें गोरानजर आँ रहा थां जिसकी वजह सें बेला केँ पैरों कि पिंडलियों कों देखकर,,, वातावरण मे उत्तेजना कि हवा अपनाअसर दिखाने लगी थि जौ कि रोहन पर्र बराबर उसकानशा छारहा थां,, रोहन एक् टक बेला कों हि घूरते चलाजा रहा थां औऱ जिसतरह सें रोहनउसे ताड़रहा थां उसे देखकर बेला कों अपनी युक्ति सफल होतीनजर आँ रही थि।,,, रोहन कों अपनीतरफ इसतरह सें प्यासी नजरों सें देखता पाकर,,, बेला अपने होठो पऱ कामुक मुस्कान लातेहुए कमरे केँ अंदरकदम बढ़ाते हुए बोलीं,,,,
क्याँ देखरहे होँ रोहन बाबू,,,,,,, ?
ककककक,,,, कुछ नहि बेलाकुछ भि तौ नहि,,,, व( (बेला केँ इस प्रश्न पर्र अपनी चोरी पकड़ी जातीदेख कर वो सकपकाते हुए बोला,,,, मगर खेलीखाई बेला रोहन कि नजरों कों अच्छी तरह सें समझती थि इसलिये वो,,, रोहन केँ बिल्कुल लगभग जाकर अपने चुनरी कों चूचियों कि तरफ सें दुरुस्त करतेहुए बोलीं,,,।
अब रहने भि दो रोहन बाबू मे अच्छी तरह सें जानती हूं कि तुम् क्याँ देखरहे थें,,,,,
( इतना कहकर बेला खिलखिला कर हंसने लगीमगर बेला कि बातें सुनकर रोहन घबरा सां गय़ा थां,,, उसकेपास बोलने लायककुछ भि नहि थां,,,, रोहन कों इसतरह सें सकपकाया हुआ देखकर बेलाही बात कों आगे बढ़ाते हुए बोलीं,,,,।
अच्छा छोड़ो इन बातों कों मुझे तुमसे एक् काम थां।,,,
हांहां कहोकौन सां काम थां,,,,
रोहन बाबूअब इसघऱ कि नौकरानी होने केँ नाते (इतना कहने केँ संगहीं बेला रोहन कि तरफ अपनीपीठ करकेघूम गई,,,,,,, ) येबात एक् मालिक होने केँ नाते तुमसे करना मुझेठीक तौ नहि लगरहा हैं मगर क्याँ करूं,,,, मेरेपास कोई दूसरा चारा भि नहि हैं,,,,।
( इतनाकह कर देनाकुछ देर खामोशी हि रही औऱ इसतरह सें रोहन केँ सामने घूम जाने कां नाटक वो जानबूझकर कि थि,,,, औऱ ऊसे अपनाये नाटकसफल होतानजर आँ रहा थां क्योंकि वो,,, कनखियों सें पीछे कि तरफदेख कर रोहन कों अपनीतरफ हि देखता पाई थि,,। रोहन भि एकदम मंत्रमुग्ध सां बेला कि मांसल चिकनी पीठ कों हि देखेजा रहा थां,,,, जिस पऱ मात्र सिर्फ एक् पतली सि डोरी हि बंधी हुइ नजर आँ रही थि बाकी कां गर्दन सें लेकर केँ कमर तक कां हिस्सा संपूर्ण रूप सें नंगा हि थां,,,,, बेला कि नंगी चिकनी पीठ देखकर रोहन कि तौ हालत खराब हौ रही थि मगर जैसे हि उसकीनजर,,,, कमर केँ निचले हिस्से पर्र पड़ी तौ उसकेहोश उड़गए उसके लन्ड मे रक्त कां भ्रमण तीव्र गति सें होनेलगा औऱ देखते हि देखते उसके पेंट मे नायाब तंबूबन गय़ा क्योंकि बिनाजान पूछकर अपनी पेटीकोट कों हल्के सें कमर सें नीचे कि तरफ बांधी थि,,, जिसकी वजह सें बेला केँ गोलाकार नितंबों कि हल्की सि गहराई लिएहुए वो मादकता सें भरी हुई लकीरसाफ साफनजर आँ रही थि,,,,, जिसे देखते हि रोहन कि जवानी उबाल मारने लगी थि औऱ उसके लन्ड नें बेला कि मदमस्त जवानी कों सलामी भरतेहुए पेंट मे तंबू सां बना दिया थां,,,,, बेला कनखियों सें रोहन कि हालत कों देखकर मन हि मन प्रसन्न हौ रही थि,,,,, औऱ बेला जल्दी अपनीइस अद्भुत शरीर कि रचना पर्र परदा गिराते हुए वापस रोहन कि तरफ मुंह करके खड़ी होँ गई,,,, औऱ अपनीबात कों आगे बढ़ाते हुए बोलीं। )
रोहन बाबू देखो जोँ मे कहनाचाह रही हूं तुम् समझ तौ रहे होँ नाँ,,,,,
( रोहन क्याँ कहता वो तोँ बेला कि बातों पऱ ध्यान हि नहि देरहा थां उसका तोँ सारा ध्यान बोला केँ सुंदर जिस्म कों झांकने मे हींलगा हुआ थां। फिन भि हामी भरतेहुए बोला,,,,। )
हां हां तुम् क्याँ कहना चाहती हौ साफ-साफ बोलो,,,,
रोहन बाबू मुझे अच्छा तोँ नहि लगरहा हैं मगर क्याँ करुं मेरी मजबूरी हैं मे चाहती हूं कि तुम् मेरेसंग मेरेकाम मे थोडा सां हाथबटा दो,,,,, मे जानती हूं कि ये अच्छी बात नहि हैं मगर मुझे तुम् पऱ पूरा भरोसा हैं कि तुम् मेरीबात नहि टालोगे,,,,,
हांहां इसमें कौन सि बड़ीबात हैं हाथ हि तौ बटाना हैं,,, मे तुम्हारी बात मानता हुं, औऱ तुम्हारा हाथ बटाने केँ लिए सजधजकर हूं मगरये तौ बताओ कि काम क्याँ करना।,,,
रोहन कि उत्सुकता देखकर बेलामन हि मन प्रसन्न होतेहुए अपने होठों पऱ कामुक मुस्कान लातेहुए बोलि,,,,।
मालकिन कां रूमसाफ करना हैं क्योंकि उनके कमरे मे छत पऱ मकड़ी कां जालालग चुका हैं उसेसाफ करने केँ लिए मे अकेले समर्थ नहि हूं,।
कोईबात नहि बेला मे तुम्हारी सहायता जरूर करूंगा
मगरदेख लो रोहन बाबू,,, ये बात किसी कों भि कानोकान नहि पता चलनी चाहिए औऱ खास करके मालकिन कों,,,, क्योंकि अगरये बात उन्हें पताचल गई तौ मे जॉब सें हाथधो बैठुगी,,,
( बोला रोहन कि प्यासी नजरों मे देखते हुए अपनेमन कि शंका व्यक्त करतेहुए बोलीं,,,। )
( रोहन कि बढ़ती हुई उम्र जवानी केँ दरवाजे पर्र दस्तक देरही थि,,,, वो बेला कि हसीन शरीर कों देखकर उत्तेजित हुआजा रहा थां औऱ इसलिये वो बुला केँ काम मे हाथ बटाने केँ लिए रेडी होँ गय़ा थां,,, क्योंकि वो ज़्यादा सें ज़्यादा देर बेला कि सुंदर शरीर कों अपनी आंखों सें टटोलना चाहता थां औऱ जिसतरह सें बेला अपनीआदत बनाएहुए थि उसे देखते हुए रोहन अंदर हि अंदर चुदवासा हुएजा रहा थां,,। इसलिये वो बेला केँ मन कि शंका कों दूर करतेहुए बोला।
तुम् बिल्कुल भि चिंता मतकरो बेलाये बात मेरे औऱ तुम्हारे बीच मे रहेगी मां कों बिल्कुल भि इसबात कि भनक तक नहि लगी थि कि मैंने तुम्हारे काम मे हाथ बटाया थां,,,,,
( रोहन कि बात सुनकर बेला कों मन हि मन प्रसन्नता कां भास होनेलगा,,,, बेला रोहन केँ जवाब सें खुश थि,,,, रोहन कि हालत कों देखकर वो ये तौ जानती हि थि कि उसका लन्ड पूरीतरह सें खड़ा होँ गय़ा थां मगर जानबूझकर अपनी नजरों कों उसके तंबू कि तरफ करतेहुए बोलीं,,,,। )
अरे रोहनये क्याँ हैं,, ? ( इतना कहतेहुए बेला शरारती अंदाज मे अपनाहाथ आगे बढ़ाकर रोहन केँ लन्ड कों पेंट केँ ऊपर सें पकड़कर हल्के सें दबाकर छोड़ दि औऱ हंसने लगी,,,,,, बेला कि ईस हरतत कि वजह सें उत्तेजना केँ मारे रोहन कि तोँ सांसहीे रुक गई,,, ये दूसरी बार थां जब बेलाने रोहन केँ लन्ड कों पैंट केँ ऊपर सें इसतरह सें पकड़ी थि,,, मगर पहलीबार कि अपेक्षा इसबार रोहन कों बेला कां इसतरह सें लन्ड पकड़ना बेहद कामोत्तेजना सें भराहुआ लगा थां रोहन कि सांसे ऊपर नीचे हौ चली थि औऱ वो आश्चर्य सें बेला कि तरफदेख रहा थां बेला उसकी हालत पर्र हंसते हुए बोलि,,,,,।
आँ जाओ रोहन बाबू सफाई करवाने,,,,,।
( इतना कहतेहुए बेला अपनी गोलाकार गांड कों कुछ ज़्यादा हि मटकाते हुए उसकेआगे आगे कमरे सें बाहर् निकल गई,,, औऱ रोहन उसकी गोलाकार भरी हुइ गांड कों मटकता हुआ देखकर कामोत्तेजना केँ परम शिखर पऱ पहुंच चुका थां औऱ वो भि पीछे पीछे कमरे सें बाहर् चला गय़ा।
आँ जाओ रोहन बाबू सफाई करवाने,,,,,।
( इतना कहतेहुए बेला अपनी गोलाकार गांड कों
कुछ अधिक हि मटकाते हुए उसकेआगे आगे
कमरे सें बाहर् निकल गई,,, औऱ रोहन उसकी
गोलाकार भरी हुई गांड कों मटकता हुआ देखकर
कामोत्तेजना केँ परम शिखर पऱ पहुंच चुका थां औऱ वो
भि पीछे पीछे कमरे सें
बाहर् चला गय़ा।,,,,
बेलाभले हि घऱ कि नौकरानी थि,,, मगर नौकरानी होने सें पहले वो एक् स्त्री थि औऱ उसमें वो सभीकुछ थां जोँ एक् औरतों मे होना चाहिए मर्दों कों आकर्षित करने लायक सुडोल जिस्म कि वो मालकिन थि रंग हल्का सां दबा होने केँ बावजूद भि बहोत सुंदर लगती थि,,,। अपनी उभरी हुई गांड पऱ उसे पूरा भरोसा थां कि उसेदेख करकोई भि मर्दलार टपकाता हुआ उसके पीछे पीछेचल आएगा औऱ अपने भरोसे पऱ विश्वास करके हि वो रोहन पऱ अपनी जवानी केँ डोरे डालना शुरुआत कि थि औऱ वो उसमे कामयाब भि होतीनजर आँ रही थि, क्योंकि इससमय रोहन भि लार टपकाते टपकाते,,, बेला केँ पीछेचला जारहा थां,, रोहन कि नजर अभि भि बेला कि महकती हुइ गांड पर्र हि टिकी हुईँ थि थोड़ी हि देर मे दोनों सुगंधा केँ कमरे मे पहुंच गए,,,। अपनी मम्मी केँ कमरे मे पहुंचते हि रोहनइधर उधर नजरें घुमाने लगा,,, कमरे मे पूरीतरह सें साफसुफ हि नजर आँ रहा थां,,, कमरे कां सारा सारा सामान व्यवस्थित तरीके सें रखाहुआ थां रोहन कों थोडा अजीबलगा कि इसमें सफाई करने जैसी क्याँ हैं इसलिये वो बेला सें बोला,,,,।
देना माँ कां रूम तौ बिल्कुल ठीक औऱ एकदमसाफ हैं इसमें सफाई करने जैसाकुछ भि नहि हैं।,,
( रोहन कि बातसुन कर बेला एक् लम्हा केँ लिएसक पका गई,,, मगर जल्दी हि बात कों संभालते हुए अपने होठों पर्र कामुक मुस्कान लातेहुए बोलीं। )
अरे मेरे भोले रोहन बाबू,,,,,, मालकिन कां रूम सप्ताह मे एक् बार जरूरसाफ होता हैं भले हि रूमसाफ हौ याँ नाँ हौ क्योंकि उन्हें सफाई पसन्द हैं,,। औऱ छत कि तरफदेख रहे हौ नां (छत कि तरफ इशारा करतेहुए) कितना सारा जालालगा हुआ हैं,,, वो तौ अच्छा हुआ कि मालकिन कि नजरअब तक उस पर्र नहि पड़ी हैं वरना मेरी तौ खैर नहि थि,,।
( इतना कहतेहुए बेला नीचे झुककर झाड़ू उठाने लगी औऱ जानबूझकर अपनी चुन्नी कों नीचे गिरा दि औऱ जब वो उठी तोँ उसके लाजवाब भरी हुई छातियों कों ढकने केँ लिएउस पर्र चुन्नी नहि थि,,, जिसकी वजह सें बेला कि बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज केँ ऊपर सें भि अपना कामुक असर बिखेर रहीं थि,,, चुची केँ बीच कि गहरी लकीरसाफ साफनजर आँ रही थि। एक् तौ पहले सें हि बेलाने ब्लाउज केँ नीचे केँ दोनों बटन कों खोल दि थि,,, जिसकी वजह सें बेला कां हसीन शरीर औऱ भि अधिक कामोत्तेजना सें भराहुआ लगरहा थां,,,,, रोहन कि नजर बेला कि मदमस्त छातियों पर्र पड़ी तोँ वो एकटक देखता हि रह गय़ा,,,, बेलाये देखकर मुस्कुरा दि,,,,, बेला कि मुस्कुराहट सें रोहन कि तंद्रा भंग हुइ औऱ वो सक पकाते हुए बोला,,,,।
पर्र। मममममम,,,, मुझे करना क्याँ होगा बेला,,,, ?
तुम्हें कुछ करने कि जरूरत नहि हैं रोहन बाबू,,,,,, ( इतना कहने केँ संग हि वो दीवाल केँ सहारे रखी हुई एक् सीढ़ी नुमा टेबल लेकरआई औऱ कमरे केँ बीचो-बीच रखतेहुए बोलि) तुम्हें केवल इतना करना हैं रोहन बाबू,,, इस सीडी कों बराबर पकड़कर रखना हैं ताकि मे इस पर्र सें गिर नां जाऊं,,,,,
( बेला इतने मीठे औऱ कामुक स्वर मे रोहन सें कहरही थि कि रोहन कि हालत बिल्कुल खराब होतीनजर आँ रही थि,,, रोहन केँ जिस्म मे कामोत्तेजना कि लहर दौड़रही थि,,, रोहन कां मजबूत लन्ड पूरीतरह सें पेंट मे गदर मचाएहुए थां।,,,, औऱ येबात बेला अच्छी तरह सें जानती थि, रोहन कि कामोत्तेजना औऱ अधिक भड़काने केँ उद्देश्य सें,,,, बेला सीढ़ी कों ठीक करने केँ बहाने कुछइस तरह सें झुकी कि उसकी भरावदार बड़ी बड़ी गांड रोहन केँ तंबु सें स्पर्श होँ गई,,,,, बेला कि ईस हरकत कि वजह सें रोहन कां लन्ड बेला कि गदराई गांड सें स्पर्श हौ गई,,,, एक् जवान होते लड़के केँ लिए बेला कि ये हरकतकहर ढाने वाली हरकत थि,, एक् जवान लन्ड पर्र गांड कां स्पर्श हीं पानी निकाल देने वाला होता हैं,,,, रोहन कां भि पानी निकलता निकलता रह गय़ा थां,,,, अगरकुछ सेकेंड तक बेला अपनी गदराई गांड रोहन केँ टम्बू बने लन्ड पर्र सें नहि हटाई होती तोँ निश्चय हि रोहन कां पानी निकल जाता वो तोँ बेला नें 2 सेकंड मे हि अपनी गदराई हुईँ गांड कों हटाते हुए वापस खड़ी हौ गई थि,,, औऱ वैसे भि वहां रोहन कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे जवानी औऱ कामोत्तेजना केँ सागर मे खींचना चाहती थि ताकि वो अपना उल्लू भि सीधाकर सकें,,,,
बेला कि इस हरकत कि वजह सें रोहन केँ तोँ पसीने छूटगए थें,,,, अपनी सांसो पर्र बिल्कुल भि संयम नहि रखपारहा थां उसकी सांसे बड़ी तेजी सें चलरही थि,,,
बेला बड़े हि कामुक अंदाज मे रोहन केँ लंबेबने हुए तंबू कि तरफ तिरछी नजर सें देखते हुए खड़ी हुइ थि औऱ उत्तेजना केँ मारे अपने निचले होंठ कों अपने दांतों सें काटली थि येसभी देखकर रोहन कि हालत औऱ ज़्यादा खराब होँ रही थि।,,
अनजाने मे हीं बेला कों अपने हि हरकत कि वजह सें इसबात कों जानने कोमिला कि जिसे वो अब तक सामान्य तौर पऱ हि लेँ रही थि वास्तव मे रोहन कां वो हथियार कुछ अधिक हि मजबूती लिएंहुए हें,,,, बेला कों अब तक यहीलग रहा थां कि जैसा कि सब मर्दों कां लन्ड होता हैं,,, ऐसा हि सामान्य स्थिति मे रोहन कां हि होगा,, मगर अपने नितंबों पर्र 2 सेकंड केँ लिए हि पेंट मे बने तंबू कि चुभन कों महसूस करके बेलाये बात अच्छी तरह सें जान गई थि कि,, रोहन केँ पेंट मे छुपाहुआ छोटा सां बबुआ सामान्य तौर पऱ छोटा नहि थां वो आकार मे कुछ ज़्यादा हि बड़ा बेला कों महसूस हुआ थां औऱ एक् लम्हा केँ लिए तोँ बेला उत्तेजना केँ मारेगन गना गई,,,, मगर अगले हि लम्हा वो अपनी स्थिति कों संभालते हुए रोहन सें बोलि,,,
मोहन बाबूअब मे सीढ़ी पर्र चढ़ने जारहे हें इसेठीक सें पकड़े रहना कहींऐसा नाँ हौ कि तुम्हारा ध्यान भटकजाए औऱ मे नीचेगिर पडु़( इतना कहकर वोँ हंसने लगी,, अपनीकही हुई बातों कां मतलब देना अच्छी तरह सें जानती थि कि उसके कहने कां मतलब क्याँ थां मगर शायद रोहन उसके कहने केँ मतलब कों बिल्कुल भि नहि समझ पाया थां इसलिये तौ आवाक बनकर वो मात्र उसे देखेजा रहा थां,,,, औऱ बेला अपनी जवानी केँ जलवे बिखेर तेहुए सीढ़ियों केँ एक्-एक् पाए पर्र अपने पांव रखकरऊपर कि तरफ चढ़ती जारही थि,,,, रोहन आंखें फाड़े बेला कों सीढ़ियां चढ़ता हुआदेख रहा थां बेला कि हसीन चिकनी टांग रोहन कि आंखों केँ सामने आते हि रोहन कि जवानी कां मयूर नाचने लगा,,,, घुटनों सें नीचे कां अंगदेख कर रोहन औऱ भि ज़्यादा उत्तेजित होनेलगा रोहन केँ देखते हि देखते बेला सीढ़ी पर्र चढ़ गई,,, बेला अच्छी तरह सें जानती थि कि वो सीढ़ियों पऱ जिस उद्देश्य सें चढ़ी थि उसका उद्देश्य जरूर पूरा होगा क्योंकि वो अपनेजिस अंग कों दिखाना चाहती थि अनजान तौर पऱ उसे दिखाने कां यही एक् बेहतरीन तरीका थां,,, अपनेइसी उद्देश्य कों पूरा करने केँ लिए देना सीढ़ियो केँ टेबल पर्र खड़ी होकर,,, धीरे-धीरे सें उस पर्र बैठकर रोहन सें नीचे फर्श पर्र पड़ा झाड़ू मांगने लगी,,
रोहन बेला कि तरफदेख रहा थां,,, बेला केँ ईसतरह सें बेठने पऱ ब्लाउज केँ नीचे केँ दोबटन खुले होने कि वजह सें अंदर सें झांकरही उसकी दोनों चुचीयां हल्की-हल्की अपनी गोलाई लिएहुए नजरआने लगी,,,। बेला कि दोनों नारंगीयो पऱ नजर पड़ते हि,, रोहन कां लन्ड अकड़ने लगा,,,,, रोहन बेला केँ नारंगि्यों कि गोलाई केँ आकर्षण मे खो सां गय़ा,,,,,
बदलते रिश्ते...... - मालकिन - Aage kya hua? Next part padhiye
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