भरोसे की कसौटी - Chachi Ki Chudai – New Episode
इसीतरह वो एक् केँ बाद एक् कई खुलासे करते गई औऱ हैरत सें मेरी आँखें चौड़ी होते गई, संग हि दिमाग़ मे नईसोच पैदा हौ गई कि इसे इतनाकुछ केसेपता??
अगले२० मिनट तक लगातार बोलने केँ बाद वो चुप हुइ। मुझे शांतदेख कर पूछी,
“कुछ पूछना हैं तुम्हें?”
“हाँ। फिलहाल बस एक् हि प्रश्न। तुम्हें इतनासभी कुछ केसेपता। कौन हौ तुम्। क्याँ करती होँ? सीबीआई हौ? सीआईडी? एनआईए? याँ रॉ??”
“हाहा। नहि। मे इनसभी मे सें कुछ भि नहि हूं। औऱ असल मे क्याँ हूं.यह तुम्हें धीरे-धीरे धीरे-धीरे पतालग हि जाएगा। अभि जोँ सबसे ज़रूरी हैं वो ये कि क्याँ तुम् ऐसे लोगों कां पर्दाफाश करने मे मेरी सहायता करोगे?”
मे थोडा सोचते हुए बोला,
“मम्म। पर्र तुम् तौ वैसे हि बहोत एक्सपर्ट हौ। तुम्हें मेरीमदद क्यूं चाहिए?”
“क्योंकि मे जौ भि करुँगी याँ कर पाऊँगी वोँ सभीकुछ पीठ पीछे होगा। मुझेकोई ऐसा चाहिए जोँ डायरेक्ट इन सबमें इन्वोल्व होँ सके.”
“तुम्हारा मतलब जोँ इन लोगों केँ संग उठना बैठना करसके.?? इनकेसंग रहसके.?? अरे दोस्त। तुम् तौ मुझे मरवाने पर्र तूली होँ.”
“पहले पूरीबात सुनोअभय। मैंने क्याँ अभि तक ऐसाकुछ किया हैं जिससे तुम् याँ तुम्हारे परिवार वालों कों किसी भि तरह कि कोई दिक्कत याँ किसीतरह कां कोई खतरा दिखा याँ आया हौ ??” बहोत स्पष्टता औऱ दृढ़ता केँ संग बोलि मोना |
“नहि.” छोटा सां उत्तर दिया मैंने भि |
“तोँ फिन पूरा भरोसा रखोमुझ पऱ.” उसने अपनाहाथ मेरेहाथ पऱ रखतेहुए कहा |
मे क्याँ करता। बैचलर व्यक्ति। जल्दी पिघल गय़ा |
“ठीक हैं। मे सजधजकर हूं | बताओ। क्याँ करना होगा मुझे?”ऐसा कहतेहुए एक् लम्बी सांसली मैंने |
“गुड। तौ सुनो। मे। औऱ मेरेसंग जौ औऱ जितने भि हें। वोँ सब अगलेकुछ दिनों तक तुम्हें कई चीज़ों मे ट्रेनिंग देंगे। तुम्हे बस इतना करना हैं कि बगैर किसी प्रश्न केँ, वोँ लोग जोँ औऱ जैसा सीखाएँगे तुम्हें। तुम् बस वैसे हि सीखते रहना | नो वर्ड्स। ओके?” अपने होंठों पऱ ऊँगली रखतेहुए बोलीं |
मुझे उसकाये अंदाज़ बड़ा मनपसंद आया | डांटते हुएकुछ समझाना.!
“तोँ फिनचलो, आज कि हमारी ये भेंट यहीं खत्म होती हैं। ओके?दो दिनबाद सें तुम्हारी ट्रेनिंग शुरुआत होगी | कब औऱ कहां आनां होगा तुम्हें,
यह हम् तुम्हें अपने तरीके सें बता देंगे। अब, जाने सें पहले.एनी क्वेश्चन?”
“नहि, कोई क्वेश्चन तोँ नहि। पऱ एक् छोटी सि शर्त हैं। |”
“कैसी शर्त?”
“मे जब सें ट्रेनिंग केँ लिएआऊँ। जहाँ भि आनां पड़े। आप् वहा अवश्य होंगी। दरअसल क्याँ हैं कि, कुछ अजनबियों केँ बीच एक् जानां पहचाना चेहरे अगर मौजूद होँ। तोँ काम कां मजा दुगना आता हैं। औऱ। ”
“औऱ.?”
“औऱ मन भि लगा रहता हैं |” मे झेंपते हुए बोला |
सुनकर वोँ कहकहा लगाकर हँस पड़ी | हँसते हुए बोलीं,
“मुझे कहीं न् कहीं आपकी किसीऐसी बात बोलने कि उम्मीद थि। खैर, कोई बात नहि। मे अवश्य रहूँगी। दरअसल क्याँ हैं हैं कि, जिस इंसान पऱ भरोसा कररही हूं। उस भरोसे कि कसौटी पर्र वो कितना खरा उतरता हैं। ये अवश्य देख्ना चाहूँगी। इससे मेरा वक्त भि कटेगा औऱ.”
“औऱ.?”
“आपकोसही सही गाइड करने कां भि मौका मिलेगा |” नज़रें नीचे पेपर्स कि ओर करतेहुए एक् शरारत सि कातिलाना मुस्कान लिए बोलीं |
दोनों उठे। औऱ बाहर् निकले। अभि कुछकदम आगेचले हि थें कि, सीढ़ियों केँ पास अचानक सें वो फ़िसली। नीचे गिरने हि वाली थि कि। मैंने लपककर उसकाहाथ पकड़ लिया। औऱ ज़ोर सें अपनी तरफ़ खींचा। वो करीब-करीब मेरे बहोत लगभग आँ गई। सट हि गयीँ, होतीअगर बीच मे अपनी दायीं हथेली नं लायी होती | हम् दोनों एक् दूसरे कों देखते रहेकुछ मिनटो केँ लिए। एक् दूसरे केँ आँखों मे। शायदकुछ देर औऱ देखते रहते। कि तभी एक् छोटा सां पत्थर नीचे सीढ़ियों पर्र लुड़का। आवाज़ सें हम् दोनों कि तन्द्रा टूटी.होश मे आये जैसे.अलग होकर दोनों नें एक् दूसरे कों गुडबाय कहा |
उसने इशारे सें मुझे दूसरे तरफ़ कि सीढ़ियों सें जाने कों कहा। | औऱ स्वयं पलटकर दूसरी तरफ़ केँ एक् दरवाज़े केँ पीछे हौ गई | मे नीचेउतर आया थां | एक् ऑटो वाला पहले सें खड़ा थां | संग मे एक् व्यक्ति भि | मुझेउसी सें जाने कों कहा | मैंने कुछकहा याँ सोचा नहि। ऑटो मे बैठ गय़ा | मेरे बैठते हि ऑटोचल पड़ा |
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ट्रेनिंग शुरुआत हुइ | काफ़ी सख्त ट्रेनिंग थि | रत्ती भर कि भि गलती होने सें काफ़ी डांटा जाता | पर्र मनमार कर सीखना तौ थां हि | इसके अलावा औऱ तोँ कोई चारा भि नहि थां |
टाइम गुज़रता रहा | मोनाहर दिनआती | मेरा हौसला बढ़ाती | ट्रेनिंग भि दिनबदिन औऱ टफ होता गय़ा |
पर्र पूरे धैर्य औऱ हौसले सें मे लगारहा ट्रेनिंग पऱ |
चार महीने लगे।
ट्रेनिंग ख़त्म होने मे। |
इनचार महीने मे कई दफ़ेऐसे हुएजब मे औऱ मोना बहोत क्लोज आतेआते रहगये | औऱ हों भि क्यूं न्। संग मे दोपहर का खाना, बातें, यहा तक कि कईबार डिनर भि हमनेसंग हि किया |
एक् दूसरे केँ बारे मे काफ़ी कुछ जानां भि हमने; जैसे कि। परिवार मे कौनकौन हें, पढ़ाई कहां तक हुईँ हैं, आगे कि क्याँ योजना हैं। इत्यादि.| उसके बारे मे जौ पताचला, वो यह हैं कि उसके मां बाप कां उसके बचपन मे हि देहांत हौ गय़ा थां | वो अपने एक् रिश्तेदार केँ यहारह करपली बढ़ी। जब बढ़ी हुई तबउसे पताचला कि उसके मां बाप कि मृत्यु किसी दुर्घटना याँ बीमारी केँ वजह सें नहि बल्कि उनकी हत्या हुईँ थि | औऱ उन्ही हत्यारों कि खोज मे वोँ इंडियन सीक्रेट सर्विसेस केँ कांटेक्ट मे आई औऱ बाद मे अपनी स्वयं कि टीमबना करदेश औऱ समाज कों गंदे लोगों केँ गिरफ़्त सें छुड़ाने केँ काम मे लग गई | औऱ इसी क्रम मे उसका मुझसे भेंटहुआ औऱ अपने विश्वस्त सूत्रों सें मेरे बारे मे पतालगा ली |
हम् दोनों इतनेघुल मिलगये थें कि मैंने अपनी चाची सें भि उसे मिलवा दिया थां | चाची कों शायद मेरा किसी हमउम्र लड़की सें मेल मिलाप होना अच्छा नहि लगा होँ पर्र वो मेरेलिए खुश भि बहोत हुइ | मोना भि बाद मे चाची कि तारीफ़ करने सें स्वयं कों रोक नहि पाई औऱ कहा थां कि चाची मे अब भि आज कि कमसीन लड़कियों कों मात देने कां पूरादम हैं |
ट्रेनिंग खत्म होने केँ कुछ हि दिनों बाद मोना केँ माध्यम सें खबर मिली कि शहर मे पिछले काफ़ी दिनों सें ड्रग्स औऱ अवैध हथियारों कि खरीद फ़रोख्त बहोत बढ़ गई हैं औऱ ऐसे अवैध धंधे करने वाले अक्सर शहर केँ मशहूर ; पर्र संग हि उतना हि बदनाम, “कैसियो बार” मे जमा होते हें।
इसबार मे बार केँ संगसंग कैसिनो कि भि सुविधा उपलब्ध हैं औऱ शौक़ीन लोग कैसिनो मे समय बीताने अवश्य आते हें | कुछ सिर्फ़ ऐय्याशी औऱ पैसे उड़ाने केँ लिए तौ कुछ अपनी भाग्य आज़माकर अमीर होने केँ लिए |
“अभय, अब असल मैदान मे उतरने कां वक्त आँ गय़ा हैं | ” मोना नें चिंतित पर्र दृढ़ स्वर मे कहा |
“पता हैं मोना.अं.” चिंता मे डूबा, सिगरेट केँ कश लेताहुआ दूर कहीं देखता हुआ मे बोला |
“किससोच मे डूबे हौ?” मेरीओर देखते हुए पूछी मोना |
“आगे कि योजना केँ बारे मे। हालाँकि तुम् सभी समझा चुकी होँ। फिन भि.”
“फिन भि क्याँ अभय.??”इस बार मोना केँ होंठ केँ संग स्वर भि कंपकंपाए |
“योजना केँ सफल होने केँ अधिकतम सम्भावना केँ बारे मे सोचरहा थां |”
“ऐसा क्यूं। क्याँ तुम्हें मेरी योजना पऱ भरोसा नहि?” सशंकित लहजे मे मोना नें पूछा |
“ऐसीबात नहि हैं मोना। दरअसल, मेरीये आदत हि हैं कि जब तक काम पूरा नं हौ जाए। मे उसकाम केँ बारे मे सोचना बंद नहि करता.यों समझो कि सोचना बंद नहि कर पाता |”
“ह्म्म्म। सच कहूं तोँ मे भि ऐसा हि कुछमन हि मनकररही थि |”
“वोँ क्याँ?”
“मेरीबस एक् हि चिंता हैं अभय.” मोना कां गला थोडा भर्राया |
“वो क्याँ?”
एक् लम्बी सांस छोड़कर दूर क्षितिज कि ओर देखते हुए, मेरे कंधे पर्र सर टिकाते हुए बोलि,
“मे तुम्हे खोना नहि चाहती अभय। ” हलकी रुलाई फूट हि पड़ी आखिर उसकी |
उसेचुप कराने कि व्यर्थ कोशिश करताहुआ मे बोला,
“हम् दोनों कों कुछ नहि होगा मोना। रिलेक्स। माना कि हम् जिस रास्ते पऱ आगेबढ़ रहे हैं वहां खतरा हि खतरा हैं पर्र उस रास्ते पऱ चलना तौ आखिर हैं हि हमें.अब जबकदम आगे बढ़ा हि दिया तोँ फिनसोच कर क्याँ फ़ायदा?”
मोनाकुछ नहि बोलि। बस मेरे कंधे सें अपनासिर टिकाए रही। चुप.निस्तब्द। स्वयं कों रोने सें रोकने कि कोशिश करते हुई.
उसे दिलासा तौ मैंने दे दिया पऱ मे स्वयं आशंकाओं सें घिराहुआ थां.
औऱ सबसे बड़ी चिंता मुझे मोना कों लेँ कर भि थि.
पता नहि आखिर मे कुछ दिनों सें उस पऱ भरोसा नहि करपारहा हूं। हालाँकि ऐसा होने कि कोई पुख्ता वजह नहि हैं पर्र। फिन भि। मे इसबात कों कतई नज़रअंदाज़ नहि कर सकता कि यह लड़की लोमड़ी सें भि ज्यादा तेज़ दिमाग़ वाली हैं।
कुछ तौ ऐसा हैं जौ मुझे नज़र नहि आँ रहा.समझ नहि आँ रहा.
बटआईऍम श्यौर। एवरीथिंग इजनॉट राईट।
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अगले एपसोड कां प्रतीक्षा रहेगा..
भरोसे की कसौटी - Chachi Ki Chudai – New Episode
इसीतरह वो एक् केँ बाद एक् कई खुलासे करते गई औऱ हैरत सें मेरी आँखें चौड़ी होते गई, संग हि मन मे नईसोच पैदा हौ गई कि इसे इतनाकुछ केसेपता??
अगले२० मिनट तक लगातार बोलने केँ बाद वो चुप हुइ। मुझे शांतदेख कर पूछी,
“कुछ पूछना हैं तुम्हें?”
“हाँ। फिलहाल बस एक् हि प्रश्न। तुम्हें इतनासभी कुछ केसेपता। कौन हौ तुम्। क्याँ करती हौ? सीबीआई होँ? सीआईडी? एनआईए? याँ रॉ??”
“हाहा। नहि। मे इनसभी मे सें कुछ भि नहि हूं। औऱ असल मे क्याँ हूं.यह तुम्हें धीरे-धीरे धीरे-धीरे पतालग हि जाएगा। अभि जौ सबसे ज़रूरी हैं वो ये कि क्याँ तुम् ऐसे लोगों कां पर्दाफाश करने मे मेरी सहायता करोगे?”
मे थोडा सोचते हुए बोला,
“मम्म। पऱ तुम् तोँ वैसे हि बहोत एक्सपर्ट होँ। तुम्हें मेरीमदद क्यूं चाहिए?”
“क्योंकि मे जौ भि करुँगी याँ कर पाऊँगी वोँ सभीकुछ पीठ पीछे होगा। मुझेकोई ऐसा चाहिए जौ डायरेक्ट इन सबमें इन्वोल्व होँ सके.”
“तुम्हारा मतलब जौ इन लोगों केँ संग उठना बैठना करसके.?? इनकेसंग रहसके.?? अरे दोस्त। तुम् तोँ मुझे मरवाने पऱ तूली हौ.”
“पहले पूरीबात सुनोअभय। मैंने क्याँ अभि तक ऐसाकुछ किया हैं जिससे तुम् याँ तुम्हारे परिवार वालों कों किसी भि तरह कि कोई दिक्कत याँ किसीतरह कां कोई खतरा दिखा याँ आया होँ ??” बहोत स्पष्टता औऱ दृढ़ता केँ संग बोलीं मोना |
“नहि.” छोटा सां उत्तर दिया मैंने भि |
“तौ फिन पूरा भरोसा रखोमुझ पऱ.” उसने अपनाहाथ मेरेहाथ पऱ रखतेहुए कहा |
मे क्याँ करता। बैचलर व्यक्ति। जल्दी पिघल गय़ा |
“ठीक हैं। मे रेडी हूं | बताओ। क्याँ करना होगा मुझे?”ऐसा कहतेहुए एक् लम्बी सांसली मैंने |
“गुड। तौ सुनो। मे। औऱ मेरेसंग जौ औऱ जितने भि हें। वोँ सब अगलेकुछ दिनों तक तुम्हें कई चीज़ों मे ट्रेनिंग देंगे। तुम्हे बस इतना करना हैं कि बगैर किसी प्रश्न केँ, वोँ लोग जोँ औऱ जैसा सीखाएँगे तुम्हें। तुम् बस वैसे हि सीखते रहना | नो वर्ड्स। ओके?” अपने होंठों पर्र ऊँगली रखतेहुए बोलि |
मुझे उसकाये अंदाज़ बड़ा मनपसंद आया | डांटते हुएकुछ समझाना.!
“तौ फिनचलो, आज कि हमारी ये भेंट यहीं ख़त्म होती हैं। ओके?दो दिनबाद सें तुम्हारी ट्रेनिंग शुरुआत होगी | कब औऱ कहां आनां होगा तुम्हें,
यह हम् तुम्हें अपने तरीके सें बता देंगे। अब, जाने सें पहले.एनी क्वेश्चन?”
“नहि, कोई क्वेश्चन तौ नहि। पऱ एक् छोटी सि शर्त हैं। |”
“कैसी शर्त?”
“मे जब सें ट्रेनिंग केँ लिएआऊँ। जहाँ भि आनां पड़े। आप् वहा अवश्य होंगी। दरअसल क्याँ हैं कि, कुछ अजनबियों केँ बीच एक् जानां पहचाना चेहरे अगर मौजूद होँ। तौ काम कां मजा दुगना आता हैं। औऱ। ”
“औऱ.?”
“औऱ मन भि लगा रहता हैं |” मे झेंपते हुए बोला |
सुनकर वोँ कहकहा लगाकर हँस पड़ी | हँसते हुए बोलि,
“मुझे कहीं न् कहीं आपकी किसीऐसी बात बोलने कि उम्मीद थि। खैर, कोई बात नहि। मे अवश्य रहूँगी। दरअसल क्याँ हैं हैं कि, जिस इंसान पर्र भरोसा कररही हूं। उस भरोसे कि कसौटी पऱ वो कितना खरा उतरता हैं। ये अवश्य देख्ना चाहूँगी। इससे मेरा वक्त भि कटेगा औऱ.”
“औऱ.?”
“आपकोसही सही गाइड करने कां भि मौका मिलेगा |” नज़रें नीचे पेपर्स कि ओर करतेहुए एक् शरारत सि कातिलाना मुस्कान लिए बोलीं |
दोनों उठे। औऱ बाहर् निकले। अभि कुछकदम आगेचले हि थें कि, सीढ़ियों केँ पास अचानक सें वो फ़िसली। नीचे गिरने हि वाली थि कि। मैंने लपककर उसकाहाथ पकड़ लिया। औऱ ज़ोर सें अपनी तरफ़ खींचा। वो करीब मेरे बहोत लगभग आँ गई। सट हि गयीँ, होतीअगर बीच मे अपनी दायीं हथेली नं लायी होती | हम् दोनों एक् दूसरे कों देखते रहेकुछ मिनटो केँ लिए। एक् दूसरे केँ आँखों मे। शायदकुछ देर औऱ देखते रहते। कि तभी एक् छोटा सां पत्थर नीचे सीढ़ियों पर्र लुड़का। आवाज़ सें हम् दोनों कि तन्द्रा टूटी.होश मे आये जैसे.अलग होकर दोनों नें एक् दूसरे कों गुडबाय कहा |
उसने इशारे सें मुझे दूसरे तरफ़ कि सीढ़ियों सें जाने कों कहा। | औऱ स्वयं पलटकर दूसरी तरफ़ केँ एक् दरवाज़े केँ पीछे हौ गई | मे नीचेउतर आया थां | एक् ऑटो वाला पहले सें खड़ा थां | संग मे एक् व्यक्ति भि | मुझेउसी सें जाने कों कहा | मैंने कुछकहा याँ सोचा नहि। ऑटो मे बैठ गय़ा | मेरे बैठते हि ऑटोचल पड़ा |
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ट्रेनिंग शुरुआत हुईँ | काफ़ी सख्त ट्रेनिंग थि | रत्ती भर कि भि गलती होने सें काफ़ी डांटा जाता | पऱ मनमार कर सीखना तोँ थां हि | इसके अलावा औऱ तोँ कोई चारा भि नहि थां |
वक़्त गुज़रता रहा | मोनाहर दिनआती | मेरा हौसला बढ़ाती | ट्रेनिंग भि दिनबदिन औऱ टफ होता गय़ा |
पऱ पूरे धैर्य औऱ हौसले सें मे लगारहा ट्रेनिंग पऱ |
चार महीने लगे।
ट्रेनिंग समाप्त होने मे। |
इनचार महीने मे कई दफ़ेऐसे हुएजब मे औऱ मोना बहोत क्लोज आतेआते रहगये | औऱ हों भि क्यूं नं। संग मे लञ्च, बातें, यहा तक कि कईबार डिनर भि हमनेसंग हि किया |
एक् दूसरे केँ बारे मे काफ़ी कुछ जानां भि हमने; जैसे कि। परिवार मे कौनकौन हें, पढ़ाई कहां तक हुई हैं, आगे कि क्याँ योजना हैं। इत्यादि.| उसके बारे मे जौ पताचला, वो यह हैं कि उसके मम्मी बाप कां उसके बचपन मे हि देहांत हौ गय़ा थां | वो अपने एक् रिश्तेदार केँ यहारह करपली बढ़ी। जब बढ़ी हुईँ तबउसे पताचला कि उसके मम्मी बाप कि मृत्यु किसी दुर्घटना याँ बीमारी केँ वजह सें नहि बल्कि उनकी हत्या हुईँ थि | औऱ उन्ही हत्यारों कि खोज मे वोँ इंडियन सीक्रेट सर्विसेस केँ कांटेक्ट मे आई औऱ बाद मे अपनी स्वयं कि टीमबना करदेश औऱ समाज कों गंदे लोगों केँ गिरफ़्त सें छुड़ाने केँ काम मे लग गई | औऱ इसी क्रम मे उसका मुझसे भेंटहुआ औऱ अपने विश्वस्त सूत्रों सें मेरे बारे मे पतालगा ली |
हम् दोनों इतनेघुल मिलगये थें कि मैंने अपनी चाची सें भि उसे मिलवा दिया थां | चाची कों शायद मेरा किसी हमउम्र लड़की सें मेल मिलाप होना अच्छा नहि लगा हौ पऱ वो मेरेलिए खुश भि बहोत हुइ | मोना भि बाद मे चाची कि तारीफ़ करने सें स्वयं कों रोक नहि पाई औऱ कहा थां कि चाची मे अब भि आज कि कमसीन लड़कियों कों मात देने कां पूरादम हैं |
ट्रेनिंग समाप्त होने केँ कुछ हि दिनों बाद मोना केँ माध्यम सें खबर मिली कि शहर मे पिछले काफ़ी दिनों सें ड्रग्स औऱ अवैध हथियारों कि खरीद फ़रोख्त बहोत बढ़ गई हैं औऱ ऐसे अवैध धंधे करने वाले अक्सर शहर केँ मशहूर ; पर्र संग हि उतना हि बदनाम, “कैसियो बार” मे जमा होते हें।
इसबार मे बार केँ संगसंग कैसिनो कि भि सुविधा उपलब्ध हैं औऱ शौक़ीन लोग कैसिनो मे समय बीताने अवश्य आते हें | कुछ सिर्फ़ ऐय्याशी औऱ पैसे उड़ाने केँ लिए तोँ कुछ अपनी भाग्य आज़माकर अमीर होने केँ लिए |
“अभय, अब असल मैदान मे उतरने कां वक्त आँ गय़ा हैं | ” मोना नें चिंतित पऱ दृढ़ स्वर मे कहा |
“पता हैं मोना.अं.” चिंता मे डूबा, सिगरेट केँ कश लेताहुआ दूर कहीं देखता हुआ मे बोला |
“किससोच मे डूबे होँ?” मेरीओर देखते हुए पूछी मोना |
“आगे कि योजना केँ बारे मे। हालाँकि तुम् सभी समझा चुकी होँ। फिन भि.”
“फिन भि क्याँ अभय.??”इस बार मोना केँ होंठ केँ संग स्वर भि कंपकंपाए |
“योजना केँ सफल होने केँ अधिकतम सम्भावना केँ बारे मे सोचरहा थां |”
“ऐसा क्यूं। क्याँ तुम्हें मेरी योजना पर्र भरोसा नहि?” सशंकित लहजे मे मोना नें पूछा |
“ऐसीबात नहि हैं मोना। दरअसल, मेरीये आदत हि हैं कि जब तक काम पूरा नं हौ जाए। मे उसकाम केँ बारे मे सोचना बंद नहि करता.यों समझो कि सोचना बंद नहि कर पाता |”
“ह्म्म्म। सच कहूं तोँ मे भि ऐसा हि कुछमन हि मनकररही थि |”
“वोँ क्याँ?”
“मेरीबस एक् हि चिंता हैं अभय.” मोना कां गला थोडा भर्राया |
“वो क्याँ?”
एक् लम्बी सांस छोड़कर दूर क्षितिज कि ओर देखते हुए, मेरे कंधे पऱ सर टिकाते हुए बोलीं,
“मे तुम्हे खोना नहि चाहती अभय। ” हलकी रुलाई फूट हि पड़ी आखिर उसकी |
उसेचुप कराने कि व्यर्थ कोशिश करताहुआ मे बोला,
“हम् दोनों कों कुछ नहि होगा मोना। रिलेक्स। माना कि हम् जिस रास्ते पर्र आगेबढ़ रहे हैं वहां खतरा हि खतरा हैं पऱ उस रास्ते पऱ चलना तौ आखिर हैं हि हमें.अब जबकदम आगे बढ़ा हि दिया तौ फिनसोच कर क्याँ फ़ायदा?”
मोनाकुछ नहि बोलीं। बस मेरे कंधे सें अपनासिर टिकाए रही। चुप.निस्तब्द। स्वयं कों रोने सें रोकने कि कोशिश करते हुईँ.
उसे दिलासा तौ मैंने दे दिया पऱ मे स्वयं आशंकाओं सें घिराहुआ थां.
औऱ सबसे बड़ी चिंता मुझे मोना कों लें कर भि थि.
पता नहि आखिर मे कुछ दिनों सें उस पर्र भरोसा नहि करपारहा हूं। हालाँकि ऐसा होने कि कोई पुख्ता वजह नहि हैं पर्र। फिन भि। मे इसबात कों कतई नज़रअंदाज़ नहि कर सकता कि यह लड़की लोमड़ी सें भि अधिक तेज़ दिमाग़ वाली हैं।
कुछ तौ ऐसा हैं जौ मुझे नज़र नहि आँ रहा.समझ नहि आँ रहा.
बटआईऍम श्यौर। एवरीथिंग इजनॉट राईट।
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