लेडीज - गर्ल्स टॉक [ गर्ल्स व् लेडीज की आपसी बातचीत ] - desi chudai mom son – New Episode
प्रिय पाठिकाओं,
नमस्ते,
मे निहारिका, आप् सब पठीकाओ कां स्वागत हैं, एक् कोशिश - कुछ बाते, कुछ किस्से, कुछ विचारो कां आदान प्रदान हम् सब करना चाहते हें लेकिन कथा कि विषय वास्तु सें अलग नहि जा पाते, याँ कभी कोशिश करी भि तौ संतोषप्रद जबाब नं मिला।
जैसा कि हम् सब जानते हें कि किस्सा पर्र विचार याँ कमेंट देने कां अधिकार सब कों हैं चाहेव् औरत होँ याँ पुरष, मुझेये विचार इसलिये भि आया कि मुझेकुछ पूछना थां एक् साड़ी केँ बारे मे, कथा कि सीक्वेंस मे एक् पिक्चर थि, मॉडल कि पऱ किस्से पुछु ?
अपनी जवानी केँ किस्से, चटपटी - मसालेदार बाते, पड़ोस वाली भाभी सें "वोँ" जानकारी हासिल करना याँ उसकी कोशिश करना औऱ भि कई बाते हें हम् औरतो कि जिन्दगी मे जैसे लिपस्टिक केँ शेड, डिज़ाइनर ब्लाउज, मेकअप टिप्स, होम टिप्स।। आपस कि नटखट - चुलबुली बाते, जोँ अक्सर ननदी - भाभी / सहेली केँ बीच होती हें, यहा हम् भि एक् परिवार केँ जैसेआपस मे विचरो कां आदान प्रदान करे।
मात्र स्त्री हि समझ सकती हैं।।
हमारी बातेकभी ख़तम न् हुइ हें नं होंगी।.
सबऔरत पठीकाओ कि सहमति व् विचार केँ इंतज़ार मे।।
आपकी,
निहारिका।
Agar mei galt nahee hoon too yeh story k bhut deewanr hone wale h. bhut khub likha h apne shabdon ko halanki sayad apne 12-13 likha h joo kee allowed nahee h useapko edit krna pdega. Baht achi shuruwat h
लेडीज - गर्ल्स टॉक [ गर्ल्स व् लेडीज की आपसी बातचीत ] - desi chudai mom son – New Episode
जैसा कि हम् सब चाहते हैं, एक् सुंदर व् आकर्षक शरीर जौ सुन्दर दिखे, जौ ड्रेस हम् पहने वोँ आकर्षक दिखे।। सारी इच्छाओ कि पूर्ति मे बड़ा योगदान होता हैं, मम्मों कां।
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प्रिय सहेलिओं,
निहारिका कां प्रेम भरा नमस्ते,
अबआगे,
" सुंदर व् सुडोल मम्मों", जब जवानी दस्तक देती हैं, तोँ असर जोबन पर्र होता हैं, कच्ची अमिया, अनारव् अनार संतरो मे बदल जाती हें.
ये परिवर्तन, आकर्षक, उत्तेजक रोमांचित करने वाला होता हें, सबकी निगह उभरते जोबन हें, मम्मी कि हिदायत, सहेली कि चुहल बाज़ी, मन कि आकांशा।.
अपने बचपन कि यादों सें कुछसमय।.
जब मे "जवानी कि देहलीज पऱ कदम रखने वाली थि ", छोटे - छोटे उभारआने शुरुआत हुए थें, ब्रा तोँ नहि थि, पऱ समीज़ मे सें दिखने, हलके सें शुरुआत हुए थें, अनजाने मे हाथ लगना, सहलाना, नाहते वक्त हलके सें दबाना, सोचना कबबड़े होंगे, कितने बड़े होंगे, भाभी केँ कितने, बड़े होँ गए, क्याँ मम्मी जैसे होंगे।। तभी आवाज़आती हैं मां कि।। अंदर हि रहेगी बाथरूम मे बहार आँ.
सहेली सें आधी अधूरी बात, जान् नें कि कोशिश, पड़ोस कि भाभी केँ संगबात करने कि कोशिश, उनके ब्लाउज मे देखने कि कोशिश, कितने बढ़गए, मे क्याँ खाऊ जौ मेरे भि बड़े हौ जाए।।
उलझन।।
वक्तसंग बढे, मेरी पहेली ब्रा, चोरी सें मा कि बाथरूम मे पहनी थि, बड़ी थि, ढीली थि, पऱ उत्तेजना भरपूर।।
उफ़ गिलापन महसूस हुआ थां।। पहेली बार।.
kafi achha start h Niharika ji Sabse hat krr kuch lag raha h is kahani main Update kafi shanndar thaa.bus dhyaan rakhiyega kee koy bi rules na tute.like aapne joo age mention kari h Waiting for next
लेडीज - गर्ल्स टॉक [ गर्ल्स व् लेडीज की आपसी बातचीत ] - desi chudai mom son – New Episode
प्रिय सहेलिओं,
निहारिका कां प्रेम भरा नमस्ते,
अबआगे,
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चढ़ती जवानी केँ संग जोबन पर्र निहकर आनां शुरुआत हुआ, बसफिन क्याँ थां, नहाते हुए मेरा पसंदीदा खेल, जोबन केँ संग खेलना, छूना, दबाना, मसलना।। गिला होना।
बाथरूम मे एक् - डेढ़ घंटा केसे निकल जाता थां पता हि नहि चलता थां, जब तक मां कि आवाज़ नहि आती।। "अरे अंदर हि रहना हैं क्याँ, जल्द आँ रसोई मे। "
उफ़, इतनासमय तोँ आज भि लगता हैं।। बाथरूम मे.
मेरेपास सिंपल कुर्ती थि, ढीलीव् पायजामा, एक् दिन मेरी सहेली नें अपनीनै ड्रेस दिखाई मैंने भि उसकी तारीफ करीतब उसनेकहा तूँ भि पहन केँ दिखा उसका साइज मेरे जितना थां उस वक्त३२ बी।
कुर्ती पिंककलर कि थि व् वाइट चूड़ीदार थां, वाओ तुँ थोबड़ी सेक्सी लगरही हैं, मे शर्मा गई, पऱ
एक् बातघऱ कर गयीँ, मुझे भि टाइट कुर्ती लेनी हैं, जिसमें मेरा जोबनसाफ़ दिखे।। महिला कि ज़िंदगी एक् केँ बाद एक् पड़ावआते औऱ जाते हें। सचमुच उसकी चद्ती जवानी केँ माइलस्टोन होते हें.
ये स्त्री हि समझ सकती हैं। पहलीबार ब्रा कां लेना। सचमुच एक् अलग अहसास होता हैं, जब जोबन दिखने शुरुआत होते हें तोँ मां कि हिदायत व् पूरीनज़र होती हैं लड़की पऱ।। कही फिसल नं जाये।
मुझेयाद हैं, पहलीबार ब्रा कां लेना। एक् पुरानी ब्रा थि मम्मी कि, ३४बी कि, पऱ मेरी साइज३२ बी थि पिनलगा केँ पहेली बार पहनी थि, आज तोँ एक् नई ब्रा लानी हैं बाजार सें।। उलझन अकेले केसेजाओ
फिन सोचा मम्मी केँ संग, न् बाबाकुछ बोल दिया तोँ, पड़ोस भाभी सें बातकरू उफ़ क्याँ सोचेगी जवानी आँ रही हैं लड़की पे, क्याँ करूयही सोचते संडे कां आधादिन निकल गय़ा, दोपहर कों खानां खाकर जैसे तैसेखा लिया,
पऱ अब क्याँ करू हिम्मत कर केँ सहेली कों फ़ोन लगाने केँ लिए पड़ोस कि भाभी केँ पास गयीँ,, भाभी नमस्कार
भाभी - आओ निहारिका, कहा रहती होँ आजकल ?
मे - भांभी यही तोँ, घऱ केँ कामबस, औऱ क्याँ
भाभी - केसे आनांहुआ ?
- मे - भाभी, वोँ एक् फ़ोन करना थि, सहेली कों
भाभी - अच्छा, आजाकर लें
मे - हम्म
अब, मन मे सोचरही थि केसेबात करुँगी ? भाभीपास हि होंगी, सुन लेंगी उफ़। करना तोँ हैं हि आज