हवेली by The_Vampire (Completed) - haweli mein chudai - Episode 1
मित्रो! आप् सभी नें वेम्पायर भइया कि इस प्रसिद्ध कथा कां नाम तोँ जरूर सुना होगा.मगर शायदकुछ हि लोगों नें इसेपढ़ा होगा
क्योंकि यहकथा एक् पीढ़ी (generation) पहले लिखी गयीँ, थि औऱ वोँ फोरम भि बंद होँ चुकी हें
मे इस किस्सा कों यहा आप् सभी केँ सामने प्रस्तुत कररहा हूं। फिरभी किस्सा पूरी हैं मगर एपसोड एक्-एक् करके हि पोस्ट करूंगा.
आप् सभी भि इसे एक् नयी किस्सा कि तरह पढ़ें औऱ हर एपसोड केँ बाद अपनी प्रतिक्रियाा भि दें
हवेली by The_Vampire (Completed) - haweli mein chudai – New Episode
हवेली.1
वोँ हवेली आज भि वैसे हि सुनसान थि जैसे कि वोँ पिछले 10 साल सें थि। आसमान मे चाँद पुरेनूर पे थां औऱ हरतरफ चाँदनी फैली हुई थि। उसके बावजूद हवेली केँ गलियारे अंधेरे मे डूबेहुए थें। दूर सें कोई देखे तौ इसबात कां अंदाज़ा तक नहीं होँ सकता थां केँ इसमें कोई ज़िंदा इंसान भि रहता हैं। आँगन मे सूखीघास, बबूल कि झाड़ियाँ, खुलाहुआ बड़ा द्वार (दरवाज़ा), डाल पे बोलता हुआ उल्लू, हरतरफ मनहूसियत पुरजोश पर्र हि.
पूरी हवेली मे 25 कमरे मे जिसमें सें 23 अंधेरे मे डूबेहुए। सिर्फ़ 2 कमरो मे हल्की सि रोशनी थि। एक् रूम थां ठाकुर शौर्य सिंह कां औऱ दूसरा उनकीबहू रूपाली कां। हवेली मे फेलेहुए सन्नाटे कि एक् वजह 2 दिन पहले हुई मौत भि थि। मौत हवेली कि मालकिन औऱ ठाकुर शौर्य सिंह कि पत्नि सरिता देवी कि जौ एक् लंबी बीमारी केँ बादचल बसी थि। उसरात हवेली मे मौत कां ख़ौफहर तरफ देखाजा सकता थां। मरने सें पहले बीमारी मे दर्द कि वजह सें उठी सरिता देवी कि चीखें जैसीआज भि हरतरफ गूँजरही थि.
मगर हमेशा यहीआलम नाँ थां। इस हवेली नें सुंदर दिन भि देखे थें। हवेली कों शौर्य सिंह केँ परदादा महाराजा इंद्रजीत सिंह नें बनवाया थां। नां तोँ आसपास केँ किसी रजवाड़े मे ऐसी हवेली थि औऱ नाँ हि किसी कां इतना सम्मान थां जितना इंद्रजीत सिंह कां थां। परंपरा अगलीकई पीढ़ियों तक बनीरही। हरतरफ इंद्रजीत सिंह केँ कुल पऱ लोकगीत गाए जाते थें। जौ भि हवेली तक आयाकभी खालीहाथ नहीं गय़ा। जोँ भि गुज़रता, हवेली केँ दरवाज़े पे सर झुकाके जाता जैसे वोँ कोई मंदिर होँ औऱ यहा ईश्वर बसतेहों.
आज़ादी केँ बाद महाराजा कि उपाधि तौ चली गई, मगर रुतबा औऱ सम्मान वहीरहा। लोगआज भि हवेली मे रहने वालो कों महाराज केँ नाम सें हि पुकारते थें। औऱ यही सम्मान शौर्य सिंह नें भि पायाजब उनका राजतिलक किया गय़ा। औऱ फिन एक् दिन पड़ोस केँ रजवाड़े कि बेटी सरिता देवी कों बहू बनाकर इस हवेली मे लाया गय़ा.
शौर्य सिंह कों सरिता देवी सें 4 औलाद हुईँ। 3 बेटे औऱ एक् बेटी। सबसे बड़े बेटे पुरुषोत्तम कि विवाह रूपाली सें हुईँ औऱ वही अपने पिता कि ज़मीन जायदाद कि देखभाल भि करता थां। दूसरा बेटा तेजवीर सिंह अपने बड़े भइया कां हाथसाध देता थां पर्र ज्यादा समय अययाशी मे गुज़रता थां। तीसरा बेटा कुलदीप सिंहअब भि विदेश मे पढ़रहा थां। औऱ सबसे छोटी थि सबकी लड़ली कामिनी। 3 भाइयों कि दुलारी औऱ घऱ मे सबकी प्यारी शौर्य सिंह कि इकलौती बेटी.
हवेली मे हरतरफ हसी गूँजती रहती थि। आनेवाले अपनी झोलिया भरके जाते औऱ दुआ देते कि कुल कां सम्मान सदाऐसे हि बनारहे औऱ शायद होता भि यहीमगर एक् घटना नें जैसेसभी बर्बाद कर दिया। वोँ एक् दिनऐसा आया केँ शौर्य सिंह सें उसकासभी छीनके लेँ गय़ा। उनका सम्मान, खुशियाँ, दौलत औऱ उनका सबसे बड़ा बेटा पुरुषोत्तम सिंह.
एक् साम पुरुषोत्तम सिंहघऱ सें वाहन लेके निकला तोँ रात भि लौटके नहींआया। यहकोई नयीबात नहीं थि। वोँ अक्सर काम कि वजह सें रात बाहर् हि रुक जाता थां इसलिये किसी नें इसबात पऱ कोई ध्यान नहीं दिया। मुसीबत सुभह हुइ जबखबर यहआई केँ पुरुषोत्तम कि कार हवेली सें थोड़ी दूर मार्ग केँ किनारे खड़ी मिली औऱ पुरुषोत्तम कां कहींकोई पता नहीं थां। व्हीकल मे खून केँ धब्बे सॉफ देखेजा सकता थें। तलाश कि गयीँ, तौ थोड़ी हि दूर पुरुषोत्तम सिंह कि लाश भि मिल गयीँ,। उसकेबदन मे दो गोलियाँ मारी गई, थि.
हवेली मे तोँ जैसी आफ़त हि आँ गई,। परिवार केँ लोग तोँ पागल सें होँ गये। किसी कों कोई अंदेशा नहीं थां केँ यह किसने किया। पहले तौ किसी कि इतनी हिम्मत हि नहीं सकती थि केँ शौर्य सिंह कि बेटे पे हाथउठा देते औऱ दूसरा पुरुषोत्तम सिंह इतना सीधा व्यक्ति थां कां सबसेहाथ जोड़के बात करता थां। उसकी किसी सें दुश्मनी होँ हि नहीं सकती थि.
उसकेबाद जौ हुआ वोँ बदतर थां। शौर्य सिंह नें बेटे केँ क़ातिल कि तलाश मे हरतरफ खून कि नदियाँ बहा दि। जिस किसी पे भि हल्का सां शक होता उसकीलाश अगलेदिन नदी मे मिलती। सबकोपता थां केँ कौनकर रहा थां पर्र किसी नें डर केँ कारणकुछ नां कहा.यही सिलसिला अगले 10 साल तक चलतारहा। शौर्य सिंह औऱ उनके दूसरे बेटे तेजवीर सिंह नें जाने कितनी लाशें गिराई पऱ पुरुषोत्तम सिंग केँ हत्यारे कों नां ढूँढसके.
हत्यारा तोँ नां मिलामगर कुल पर्र कलंक अवश्य लग गय़ा। जौ लोग शौर्य सिंह कों ईश्वर समझते थें आज उनकेनाम पे थूकने लगे। जिसे महाराज कहते थें आजउसे हत्यारा कहनेलगे। औऱ हवेली कों तौ जैसे नज़र हि लग गयीँ,। जोँ कारोबार पुरुषोत्तम सिंह केँ देखरेख मे फलफूल रहा थां डूबता चला गय़ा। शौर्य सिंह नें भि बेटे केँ गम मे शराब कां सहारा लिया.यही हाल तेजवीर सिंह कां भि थां जिसे पहले सें हि नशे कि लत थि। कर्ज़ा बढ़ता चला गय़ा औऱ ज़मीन बिकती रही.
हवेली कां 150 साल कां सम्मान 10 सालों मे ख़तम होताचला गय़ा.
रूपाली अपने कमेरे मे अकेली लेटी हुइ थि। नींद तौ जैसे आँखो सें कोसोदूर थि। बस आँखें बंदकिए गुज़रे हुए वक्त कों यादकर रही थि। वोँ 20 साल कि थि जब पुरुषोत्तम सिंह कि पत्नि बनकर उसनेइस हवेली मे पहलीबार कदमरखा थां। पिछले 13 सालों मे कितना कुच्छ बदल गय़ा थां। गुज़रे सालों मे यह हवेली एक् हवेली नाँ रहकर एक् वीराना बन गयीँ, थि.
रूपाली पास केँ हि एक् ज़मींदार कि बेटी थि। वोँ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थि औऱ हमेशा गाओं मे हि पली बढ़ी थि। ईश्वर मे उसकी श्रद्धा कुछ अधिक हि थि। हमेशा पूजापाठ मे मगन रहती। नां कभीबन सवारने कि कोशिश कि औऱ नां हि कभी अपने आप् पर्र ध्यान दिया। उसकी ज़िंदगी मे बस 2 हि काम थें। अपने परिवार कां ख्याल रखना औऱ पूजापाठ करना.
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हवेली by The_Vampire (Completed) - haweli mein chudai – New Episode
हवेली.2
पर्र जब शौर्य सिंह नें उसे पहलीबार देखा तौ देखते हि रहगये। वोँ सादगी मे भि बला कि सुंदर लगरही थि। ऐसी हि तोँ बहू वोँ ढूँढ भि रहे थें अपने बेटे केँ लिए। जौ उनके बेटे कि तरह सीधी साधी होँ, पूजापाठ करती होँ औऱ उनके परिवार कां ध्यान रखसके। बसफिन क्याँ थां, बातआगे बढ़ी औऱ 2 महीनो मे रूपाली हवेली कि सबसेबड़ी बहू बनकर आँ गयीँ,.
उसके जिंदगी मे पुरुष कां संपर्क पहलीबार सुहागरात कों उसके पति केँ संग हि थां। वोँ कुँवारी थि औऱ अपनी टाँगें ज़िंदगी मे पहलीबार पुरुषोत्तम केँ लिए हि खोली। पर्र उसरात एक् औऱ सचउस पर्र खुल गय़ा। सीधा साधा दिखनेवाला पुरुषोत्तम बैड पऱ बिल्कुल उल्टा थां। उसनेरात भर रूपाली कों सोने नां दिया। दर्द सें रूपाली कां बुराहाल थां पऱ पुरुषोत्तम थां कि रुकने कां नाम हि नहीं लें रहा थां। वोँ बहोत खुश थां केँ उसे इतनी हसीन पत्नि मिली औऱ रूपाली हैरत मे अपने पति कों देखती रह गयीँ,.
यही समस्या अगले 3 साल तक उनकी विवाह मे आतीरही। पुरुषोत्तम हररात उसे चोदना चाहता थां औऱ रूपाली कि रतिक्रिया मे रूचिबस नामभर कि थि। वोँ बस नंगी होकर टांगे खोल देती औऱ पुरुषोत्तम उसपर चढ़कर धक्के लगा लेता.यही हररात होतारहा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे पुरूषोत्तम उससेदूर होताचला गय़ा.
रूपाली कों इसबात कां पूरा ज्ञान थां कि उसका पति उससेदूर जारहा हैं पऱ वोँ चाहकर भि कुछ नाँ करसकी। पुरुषोत्तम बैड पे जैसे एक् शैतान कां रूप लेँ लेता औऱ वोँ उसके आक्रामक अंदाज़ कां सामना नाँ कर पाती। उसकेलिए इनसभी कामों कि ज़रूरत बस बच्चे पैदा करने केँ लिए थि, नाँ कि ज़िंदगी कां मजा लेने केँ लिए। धीरे-धीरे धीरे-धीरे बातयहा तक आँ पहुँची केँ दोनोबैड पे नंगे होते पर्र बात नहीं करते थें। औऱ फिन एक् दिनजब पुरुषोत्तम कि हत्या कां पताचला तौ रूपाली कि दुनिया हि लूट गई,। वोँ इतनी बड़ी हवेली मे जैसे अकेली रही गयीँ, औऱ पहलीबार उसे अपने पति कि कमी कां एहसास हुआ.
उसकेबाद जौ हुआ वोँ उसनेबस एक् मूक दर्शक बनके देखा.खून मे सनी तलवार जैसे हवेली मे आमबात होँ गयीँ, थि। कोई किसी सें बात नहीं करता थां। अगलेदस साल तक यही सन्नाटा हवेली मे छायारहा औऱ इन सबका सबसे बुराअसर उसकी सासू माँ सरिता देवी पर्र हुआ जोँ पलंग सें जालगी। हरतरह कि दवा कि गई, पर्र उनकी बीमारी कां इलाज नाँ होँ सका। औऱ 10 सालबाद उन्होने दम तोड़ दिया.
उस रात रूपाली अपनी सासू माँ केँ पास हि थि। घऱ मे औऱ कोई भि नाँ थां। ठाकुर शौर्य सिंह शराब केँ नशे मे कहीं बाहर् निकलगये थें। दूसरा बेटा तौ कईदिन तक घऱ नां आता थां औऱ बेटी कामिनी अपने भइया कुलदीप केँ पास विदेश मे थि। नौकर तौ कबके हवेली छोड़के भाग चुके थें। बस एक् वही थि जोँ अपनी सासू कों मरतेहुए देखरही थि, वहीं उनकेपास बैठेहुए। सरिता देवी नें उसकाहाथ पकड़ा हुआ थां जब उन्होने आखरी साँसली, पर्र उससे पहले उन्होने जोँ कहा उसने रूपाली कों हैरत मे डाल दिया। मरने सें ठीक पहले सरिता देवी नें उसकी आँखों मे देखा औऱ उससे एक् वादा लिया केँ वोँ इस हवेली कि खुशियाँ वापस लाएगी। रूपाली कि समझ मे नहींआया केँ केसे पऱ एक् मारती हुइ महिला कां दिल रखने केँ लिए उसने वादाकर दिया.फिन सरिता देवी नें जोँ कहा वोँ रूपाली कि समझ मे बिल्कुल नहींआया। उनके आखरी शब्दअब भि उसके दिमाग़ मे गूँजरहे थें “ बेटी, स्त्री कां शरीर दुनिया मे हर फ़साद कि सबसे बड़ीजड़ हैं औऱ ऐसा हमेशा सें होताआया हैं। महाभारत औऱ रामायण तक इसी महिला केँ शरीर कि वजह सें हुई। पऱ इस शरीर केँ सहारे फ़साद ख़तम भि कियाजा सकता हैं” औऱ इसकेबाद सरिता देवीकुछ नां कहसकी.
उसकी सासू कि कहीबात कां मतलबअब उसेसमझ आँ रहा थां। मरती हुईँ उस महिला नें उससे एक् वादा लिया औऱ यह भि बता गई, केँ उस वादे कों पूरा केसे करना हैं। केसेइस पूरे परिवार कों एक् संगफिन इस हवेली कि छत केँ नीचे लाना हैं। यहबात अगरआज सें दससाल पहले रूपाली नें सुनी होती तोँ शायद वोँ अपनी सासू माँ कों हि थप्पड़ मार देती पऱ इन 10 सालों मे जौ उसने देखा थां उसके कारण ईश्वर सें उसकी श्रद्धा जैसे ख़तम हि हौ गयीँ, थि.
रूपाली अपनेबैड सें उठी औऱ कुछ सोचती हुई खिड़की तक गयीँ,। खिड़की सें बाहर् कां नज़ारा देखकर उसका रोनाछूट पड़ा.आज जोँ आँगन शमशान जैसालग रहा हैं कभीइसी आँगन मे देररात तक महफ़िल जमा होती थि। नाच गाना होता थां। हसी गूंजा करती थि। उसने अपने आँसू पोंछते हुए खिड़की पऱ पर्दे डालदिए औऱ द्वार (दरवाज़ा) अंदर सें बंदकर दिया.फिन उसने पलटके कमरे मे लगे बड़े शीशे मे अपने आप् कों देखा.
वोँ 33 साल कि होँ चुकी थि। पिछले 10 साल मे उसने सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ दुख देखे थें पऱ इन सबके बावजूद जोँ एक् चीज़ नहीं बदली थि वोँ थां उसका हुश्न। वोँ आज भि वैसे हि हसीन थि जैसेआज सें 13 साल पहलेजब दुल्हन बनकरइस कमरे मे पहलीबार आई थि। हनउससमय थोड़ी दुबली पतली थि औऱ अब उसका पूराबदन गदरा गय़ा थां। तब वोँ एक् लड़की थि औऱ आज एक् स्त्री। कमरे मे ट्यूबलाइट कि सफेद रोशनी फेली हुईँ थि औऱ नीलेरंग कि साड़ी मे उसकारूप ऐसाखिल रहा थां जैसे चाँदनी मे किसीझील कां पानी.
रूपाली नें अपनाहाथ अपने कंधे पे रखा औऱ साड़ी कां पल्लू सरका दिया। दूसरे हि लम्हा शरम सें स्वयं उसकी अपनी आँखें झुक गई,। पहलीबार आज उसने अपने आपकोइस नज़र सें देखा थां। यह नज़र तोँ उसने अपने आप् पऱ तब भि नहीं डाली थि जब वोँ विवाह केँ जोड़े मे तैय्यार होँ रही थि। उसने धीरे-धीरे सें अपनी नज़र उठाई औऱ फिन अपने आप् कों देखा। नीलेरंग कां ब्लाउस औऱ उसमें क़ैद उसके 36 साइज़ कि छातियाँ औऱ नीचे उसकी गोरी नाभि। उसके होंठो पे एक् हल्की सि मुस्कुराहट आई औऱ उसने टेढ़ी होकर अपनी छातियों कों निहारा। जैसेदो पर्वत सर उठाए खड़ेहों। गौरव केँ संग औऱ नीचे उसकी नाभि जैसेधूप मे सॉफ सफेद चमकता कोई रेगिस्तान। उसने अपना एक् हाथ अपनेपेट पे फेरते हुए अपनेदाई तरफ केँ मम्मों पे रखा औऱ जैसे अपने आप् हि उसकेहाथ नें उसकी छाति कों दबा दिया। दूसरे हि लम्हा उसकेबदन मे एक् ल़हेर सें दौड़ गई, औऱ उसके घुटने कमज़ोर सें होनेलगे। पहलीबार उसने अपने आप् कों इस अंदाज़ मे छुआ थां औऱ आज जोँ महसूस कररही थि वोँ तौ तब भि महसूस नाँ किया थां जबयही छातियाँ उसके पति केँ हाथों मे होती थि, जब वोँ इनको अपने मुँह मे लेके चूसा करता थां.
रूपाली नें जैसे एक् नशे कि सि हालत मे अपने ब्लाउस केँ बटन खोलने शुरुआत करदिए। उसे 10 साल सें किसी मर्द नें नहींछुआ थां औऱ 10 साल मे नां हि कभी उसकेबदन नें कोई ख्वाहिश कि पऱ आज उसकी सासू कि कहीबात नें सभीकुछ बदल दिया। एक् एक् करके ब्लाउस केँ सारेबटन खुलगये औऱ अगले हि पऱ वोँ सरककर नीचे ज़मीन पे जा गिरा। ब्रा मे अपनी छातियों कों देखकर रूपाली एक् बारफिन शर्मा सि गयीँ, पर्र अगले हि समय नज़र उठाकर अपने आपको देखने लगी। सफेदरंग कि ब्रा मे उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ जैसे स्वयं उसपर हि क़यामत ढारही थि। ब्रा उसकी छातियों पे कसाहुआ थां औऱ आधे मम्मों ब्रा सें उभरकर बाहर् आँ रहे थें। जैसे किसी ग्लास मे शराब ज़रूरत सें ज्यादा डाल दि गई, होँ औऱ अबछलक कर बाहर् गिररही हौ। रूपाली अपना एक् हाथकमर तक लें गई, औऱ ब्रा केँ हुक कों खोलने कि कोशिश करनेलगी। जैसे हि स्वयं उसकेहाथ कां स्पर्श उसकी नंगीकमर पे हुआ, उसे फिन अपने घुटने कमज़ोर होते सें महसूस हुए.
धीरे-धीरे सें ब्रा कां हुक खुला औऱ अगले हि समय उसके दोनो मम्मों आज़ाद थें। दो पर्वत जोँ 33 साल कि उमर होने केँ बाद भि ज़रा नहीं झुके थें। आज भि उसी अकड़ सें अपनासर उठाए मज़बूत खड़े थें। रूपाली कों स्वयं अपने अप्पर हि गर्व महसूस होनेलगा। उसके दोनो हाथों नें उसकी छातियों कों थाम लिया औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे सहलाने लगे। उसके मुँह सें एक् ठंडीअहह निकल गई, औऱ पहलीबार उसे अपनी टाँगो केँ बीचनमी कां एहसास हुआ औऱ उसका ध्यान अपनेबदन केँ निचले हिस्से कि तरफ गय़ा। उसकी टांगे मज़बूती सें एक् दूसरे सें चिपक गयीँ, जैसेबीच मे उठती ख्वाहिश कों पकड़ना चाहरही हौ औऱ छातियों पऱ उसकी पकड़ औऱ सख़्त हौ गई,, जैसे दबके बरसो सें दबीआग कों बाहर् निकलना चाहरही होँ.उसने फ़ौरन अपनी साड़ी कों पेटिकोट सें निकाला औऱ खाट कि तरफ उछाल दिया.फिन उसकेहाथ पेटिकोट कों ऐसे उतरने लगे जैसे उसमें आगलग गयीँ, होँ। थोड़ी हि देरबाद उसका पेटिकोट भि खाट पर्र पड़ा थां औऱ औऱ वोँ सिर्फ़ एक् पॅंटी पहने अपने आप् कों निहार रही थि। औऱ तबउसे एहसास हुआ केँ उसने पिच्छले 10 साल मे अपने उपेर ज़रा भि ध्यान नहीं दिया। पॅंटी नें उसकी बुर कों तौ ढक लिया थां पर्र दोनोतरफ सें बॉल बाहर् निकलरहे थें। वजहयह थि केँ 10 साल मे उसने एक् बार भि नीचेशेव नहीं किया थां। पति केँ मरने केँ बादकभी ज़रूरत हि महसूस नहीं हुइ। जब वोँ अपनी आर्म्स केँ नीचे केँ बॉलसॉफ करती तोँ बसवही रुक जाती। कभी बुर कि तरफ ध्यान हि नां जाता.यही सोचते हुए उसने अपनी पॅंटी उतारी औऱ पहलीबार अपने आपको पूरीतरह सें नंगी देखा.
शीशे मे नज़ारा देखकर रूपाली केँ मुँह सें सिसकी निकल गई,। उसे अपनी पूरी जवानी कभी एहसास नां हुआ केँ वोँ इतनी सुंदर हैं। कभी पूजापाठ सें ध्यान हि नां हटा। जैसेआज उसने अपने आपको पहलीबार पूरीतरह नंगी देखा होँ। उसका लंबा हाइट, 36 साइज़ केँ बड़े बड़े भारी बूब्ज़, पतलीकमर औऱ भारीउठी हुई गांद.दो लंभी लंबी सफेद टाँगें औऱ उनकीबीच बालों मे छिपि उसकी बुर। वोँ पलटी औऱ अपनीकमर सें लेके अपनी गांड तक कों निहारा। वोँ जोँ देखरही थि वोँ किसी भि मर्द कों पागलकर देने केँ लिए काफ़ी थि। यह सोचते हुए वोँ मुस्कुराइ। बस एक् चीज़ सें छूट कारा पाना हैं औऱ वोँ थें उसकी बुर कों छिपारहे लंबेबाल। उसने अपना एक् हाथउठे हुए बालों पे फिराया औऱ चौंक पड़ी.बॉल गीले थें। उसकाहाथ टाँगो केँ बीचआया तोँ एहसास हुए केँ स्वयं अपने आपकोदेख कर उसकी बुर गीली होँ चुकी थि। जैसे हि उसने अपनी बुर कों थोडा सहलाया उसके घुटने जवाबदे गये औऱ वोँ ज़मीन पे गिर पड़ी.आज पहलीबार उसने जानां केँ बुर गीला होना किसे कहते हें औऱ क्यूं उसका पति उसे चोदने सें पहले लन्ड पे तेल लगता थां। क्यूंकी कभी भि उसकी बुर गीली नहीं होती थि औऱ इसलिये उसे लन्ड लेने मे परेशानी होती थि.
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हवेली by The_Vampire (Completed) - haweli mein chudai - Kahani ab aur interesting hogi
देवनागरी मे लिखने केँ लिए आपका आभारयार रूपाली केँ खूबसूरती कि गर्मी मे मे पिघल नाँ जाऊँ कहीं
bhut bhut shukriya or aabhar kamdev99008 Bade bhay aapka, iss mahagatha ko phir say punarjivit karne k liye.Hindi fonts mai too padhne kaa mazaa doguna hu jata he. Keep posting bhay
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