Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा कि घुटनों केँ ऊपर केँ हिस्से औऱ जांघों कि शुरुवात भि नजर आँ रही थि औऱ ड्राइवर बार-बार अपने मिरर कों अड्जस्ट करतेहुए उसकी जांघों कों भि देखरहा थां आँखों कों खुश करतेहुए। नेहा जैसे बैठी थि ड्राइवर कों मिरर मे उसके जांघों केँ बीच केँ हिस्से नजरआए जौ बेहद सफेद औऱ गुलाबी रंग कि मिलावट केँ थें औऱ जिसको देखकर ड्राइवर कां खड़ा होँ गय़ा औऱ वोँ बार-बार अपने लण्ड कों पैंट मे सीधा करतेहुए ड्राइव किएजा रहा थां। नेहा औऱ प्रवींद्र दोनों कों पता थां कि क्याँ मामला हैं।
आखिरकार, शीक केँ घऱ केँ सामने कैब कों रोका प्रवींद्र नें। कैब कि पेमेंट किया प्रवींद्र नें औऱ उसको वापससाम केँ 3:00 बजे लेने केँ लिएआने कों कहा।
ड्राइवर नें पूछा-“कोई भाभीजी कां रिश्तेदार बीमार हैं क्याँ भइया?
प्रवींद्र नें कहा-“हाँ भइया उसके पिता कि तबीयत ठीक नहि हैं.” मतलब नेहा केँ पिता केँ बारे मे कहा प्रवींद्र नें ड्राइवर सें।
ड्राइवर नें दोनों हाथों कों ऊपर उठाकर कहा-“सभी ईश्वर कि ख़्वाहिश हैं.” औऱ ड्राइवर नें ये समझा कि प्रवींद्र अपनी पत्नि कों लेकर अपनी ससुराल आया हैं।
दोनों नें कैब केँ जाने कां प्रतीक्षा किया, औऱ उसकेबाद वो शीक केँ आँगन मे दाखिल हुए। कैब ड्राइवर कों पता नहि होने दिया कि किस घर-मकान मे जारहे थें दोनों। शीक औऱ रूपचंद घऱ केँ अंदर सें दोनों कों बाहर् देखरहे थें औऱ दोनों नें एक् दूसरे सें कहा कि लड़की तोँ एक् सेक्स बाम्ब हैं।
शीक नें कहा-"अरे वाउ। एक् मुद्दत हुइ ऐसी जवान लड़की कों चोदेहुए दोस्त। देखो तोँ क्याँ जिस्म हैं दोस्त, वाउ। क्याँ चूचियां हैं, क्याँ गाण्ड हैं दोस्त बहोत आनंद आएगारे। ये तोँ हमारे लण्ड कों लेने कों बिल्कुल सजधजकर लगती हैं
औऱ रूपचंद नें कहा- “दोस्त, हमने जरूरकुछ बहोत बड़े पुण्य किए होंगे जोँ हमकोऐसी मालमिल रही हैं आज चोदने केँ लिए, ये तौ एक् परीलग रही हैं मेरे साथी। हमारी किश्मत मे ऐसी लड़की केसे आँ गई भला। दोस्त शीक, तुम्हारे खयाल सें क्यूं वोँ जवानइस चिकनी कों हमारे संग बाँटरहा हैं? क्याँ बात होगी?"
शीक नें जवाब दिया-“ये शहर केँ लोग लगते हें मियां, औऱ वहा केँ लोग वोँ स्विंगिंग कहते हें नाँ, वोँ करना मनपसंद करते हें, अपनी बिवियों कों दूसरों सें चुदवाते देख्ना पसन्द करते हें, औऱ पत्नि भि स्वयं कों अपने पति केँ सामने किसीगैर मर्द सें चुदवाते हए आनंद लेती हैं। अजीब-अजीब शौक पालते हें येशहर वाले आजकल मियां। इसीलिए दूर गाँव मे आया हैं अपनी पत्नि कों चुदवाते हुए देखने, ताकी किसी कों उसके बारे मे पता नाँ चले। दुनियां बदल गई हैं रूपचंद मियां। बदल गई हैं ये दुनियां। चलो हम् भि बदलते हें। ये तौ अपनी बेटी कि तरह हैं। चलो बेटी चोदते हें साला बेटी चोद। हाहाहाहा."
बहोत हि बढ़िया भाग..
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Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
जब प्रवींद्र औऱ नेहा उनकी चौखट तक पहुँचे तोँ खटखटाने सें पहले हि रूपचंद नें दरवाजा खोल दिया। नेहा नें सर उठाकर उन दोनों कों एक् चिंतित मश्कान सें देखा।
प्रवींद्र नें दोनों सें हाथ मिलाया औऱ नेहा कों परिचय कराया। तब तक नेहा दोनों मर्दो कों नीचे सें ऊपर तक ताड़रही थि, खासकर अपनी आँखों कों उन दोनों केँ पैंट केँ ऊपर लाना नहि भूली, जहाँ उनके लण्ड छुपे थें। फिनसभी घऱ केँ अंदर दाखिल होनेलगे। नेहा सें परिचय केँ बाद दोनों नें नेहा कों गाल पऱ किस किया, औऱ नेहा नें भि दोनों कों वैसे हि गाल पऱ किस रिटर्न किए। रूपचंद नें हल्के सें अपनाहाथ नेहा कि गाण्ड पऱ फेरा उसकागाल चूमते समय औऱ शीक औऱ प्रवींद्र नें उस आक्सन कों अच्छी तरह सें देखा।
नेहा नें उससमय ऐसा रिएक्ट किया कि उसकोकुछ पता नहि चला।
आखीर मे बिना टाइम बर्बाद किएसभी बेडरूम मे आँ गये। दोनों मर्दो केँ लण्ड बिल्कुल जमके खड़े हौ गये थें, नेहा कों अपनेबीच पाकर, औऱ प्रवींद्र कां भि जबरदस्त खड़ा होँ चुका थां। तोँ सभी बेडरूम मे थें। नेहा औऱ प्रवींद्र केँ बीचये बाततय होँ गई थि कि सबके सामने वोँ नेहा कों बेबी पुकारेगा औऱ नेहा उसकोजान बोलेगी।
दोनों बुजुर्गों नें नेहा कों बैड पर्र बैठने कों कहा। नेहा बैठी तोँ उसकी ड्रेस घुटनों सें थोडा ऊपर हौ गई औऱ उसकी गोरी जांघों केँ नजारे थोड़े सें सामने आए। वो हिस्से जोँ थोडा सां अधिक सफ़ेद होता हैं छिपे रहने कि वजह सें, वोँ बहोत हि आकर्षित करता हैं। दोनों बड़े मियां नें एक् दूसरे कों देखा औऱ शीक नें पहलेबात कि “तुम् बेहद सुंदर औऱ जवान होँ जानेमन, हम् दोनों अपने आपकोबहत खुशनसीब समझते हें कि तम हमें मिली
सच मे ताकदीर वाले हें हम् दोनों." इतना कहकरशीक नेहा केँ लगभग बैठा औऱ उसके कंधे पर्र एक् हाथरखा औऱ दूसरे हाथ कों उसकी जाँघ पऱ रखकर वोँ हल्के सें सहलाने लगा।
नेहा नें बस एक् मुश्कान केँ संगसर कों नीचे झुकाया फिन प्रवींद्र कों देखा।
प्रवींद्र नें उस टाइम नेहा कों एक् आँख मारा, औऱ नेहा रूपचंद कों देखकर मुश्कराई क्योंकी वोँ उससमय उसको
औऱ शीक कों हि देखरहा थां। रूपचंद नें प्रवींद्र औऱ नेहा सें बात करतेहुए पूछा- “तौ हमें तुम् दोनों ये बताओ कि केसे औऱ क्यूं तुम् लोगों कों ऐसे रिश्ते पसन्द हें?"
नेहा नें जवाब दिया- “मे मात्र उसकोखुश करने केँ लिएयह कररही हूं, मे उसकी गर्लफ्रेंड हूं औऱ उसकी बहोत चाह हैं मुझको किसी दूसरे केँ संग चुदते देखने कि, औऱ मे उसकीइस ख़्वाहिश कों पूरा करना चाहती थि.”
तबशीक नें नेहा सें पूछा- “औऱ तुम् दोनों मे सें किसने ये निश्चय किया कि उम्र वाले लोगों केँ संग आनंद कियाजाए औऱ जवानों केँ संग नहि? ये तुम्हारी पसन्द हैं याँ तुम्हारे बायफ्रेंड कि?"
नेहा नें सर झुकते हुए, थोड़ी सि शर्माते हुएकहा- “ये मेरी मनपसंद हैं."
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जैसे हि नेहा नें येबात कही, शीक नें अपनी उंगली सें उसकी ठोड़ी ऊपर उठाते हुए अपने होंठों कों नेहा केँ होंठ सें लगाया औऱ अपनीजीभ कों उसके मुँह केँ अंदरडाल दिया। फिन दोनों नें एक् दूसरे केँ मुँह केँ रस कों पिया। उस वक़्त नेहा कि मुट्ठी मे शीक कि कमीज केँ बांह जकड़ी हुईँ थि, मतलबकिस करते वक़्त। औऱ शीक केँ हाथ नेहा कि ड्रेस कों जांघों केँ ऊपर आहिस्ता उठारहे थें औऱ ड्रेस नेहा कि कमर तक उठ गई। औऱ उसकी बहोत
हि आकषिक गदराई जांघे औऱ उसकी सफेद पैंटी नजरआने लगी थि।
प्रवींद्र नें अपने पैंट मे लण्ड कों संभालते हए एक् कुर्सी खींचा औऱ बैठकर धीरे-धीरे सभी देखने केँ लिए रेडी होँ गय़ा।
शीक नें धीरे-धीरे सें नेहा कों खाट पर्र लेटाया औऱ नेहा बिना ऐतराज केँ लेट गई। अब नेहा कि बाहें शीक केँ कंधों पर्र थीं औऱ उसके होंठशीक केँ गले पऱ चूमते हुएनजर आए प्रवींद्र कों। औऱ शीक केँ होंठ नेहा केँ गले सें होकर उसकी चूचियों कि तरफबढ़ रहे थें।
प्रवींद्र नें फिन रूपचंद कों जाय्न करने कां इशारा किया। तौ वोँ भि गय़ा खाट पऱ जाकर नेहा कि चूचियों कों दबाया जोँ तब तक ड्रेस केँ अंदर हि थि। उसकी निपल्स खड़ी हुइ नजर आँ रहीथीं ड्रेस केँ ऊपर सें हि, लगता थां स्वयं कपड़े फाड़कर बाहर् निकलना चाहरही हों। औऱ तब तक शीक कां मुँह नेहा केँ जिश्म कों चाटते हुए उसकी पैंटी तक पहुँच चुका थां। नेहा कि पैंटी कों शीक नें अपने दाँतों सें पकड़कर खींचा, औऱ रूपचंद नें भि शीक कि सहायता कि नेहा कि पैंटी उतारने मे।
नेहा नें उससमय प्रवींद्र कों एक् नजर देखा, जिस टाइम वो दोनों उसकी पैंटी उताररहे थें, तौ प्रवींद्र नें अपनीजीभ बाहर् निकलकर नेहा कों इशारा किया औऱ एक् आँख मारा उसको। दोनों अधेड़ व्यक्ति, नेहा कि सफाचट बुर, औऱ उसकी गदराई जांघे जिसमें जरूरत केँ मोतबिक गोश्त थां, उनको देखकर दोनों बुजुर्गों सें सभी नाँ हआ
औऱ दोनों एक्-एक् जांघ कों अपने हाथों मे थामकर चूसने लगे, लाल निशान छोड़ते हए नेहा कि गोरी गदराए जांघों पर्र। उसकेबाद दोनों नें मिलकर नेहा कों पेट केँ बल लिटाया खाट पर्र। फिन दोनों मर्द उसकी ड्रेस केँ पीछेपीठ पर्र जौ जिप थि उसको नीचे करनेलगे।
अब आहिस्ता नेहा कि ड्रेस भि उतरने लगी। नेहा नें अपनी बाहों कों ऊपर उठाकर ड्रेस कों निकालने केँ लिए स्वयं सहायता किया। फिन नेहा कि ब्रा निकाली गई औऱ अब नेहाउन दोगैर मर्दो केँ बीचखाट पऱ बिल्कुल नंगी थि। दोनों मर्द नेहा केँ बाप औऱ ससुरजी सें भि बड़े थें उम्र मे।
तब तक उन दोनों बुजुर्गों केँ मुँह सें लारटपक पड़ी, नेहा कों उस हालत मे पलंग पऱ अपने सामने पाकर। दोनों नें एक् दूसरे कों देखा, फिन मुश्कुराए औऱ एक्-एक् मम्मों कों अपने मुँह मे लें लिया दोनों नें चूसने कों, मसलने कों। नेहा केँ मुंह सें जल्दी एक् आह फूटी औऱ उसने अपनेसर कों पीछे किया गर्दन कों सीधा करतेहए, औऱ उसकी नजरें प्रवींद्र कि नजरों सें टकराई वैसा करते वक़्त।
प्रवींद्र बहोत ध्यान सें देखरहा थां, औऱ बहोत उत्तेजित महसूस कररहा थां, नेहा कों दो अजनबियों कों उसकेसंग वोँ सभी बिना झिझक केँ करतेहुए देखकर।
कुछदेर नेहा कि मम्मों चूसने केँ बादशीक अपने कपड़े उतारने जारहा थां तौ प्रवींद्र बोला- “अंकल, उसको बोलो उतारने कों, वोही आप् दोनों केँ कपड़े उतारेगी."
तब दोनों बुजुर्ग मुड़कर नेहा कों देखने लगे औऱ नेहा प्रवींद्र कों देखते हुए अपने दाँतों मे होंठ दबाए मुश्कुरा रही थि। फिन नेहाशीक कि शर्ट उतारने लगी। फिन रूपचंद कि भि शर्ट निकाली नेहा नें। तब नेहाशीक कि पैंट कां जिप खोलने लगी, औऱ आहिस्ता उसकी पैंट कों नीचे करतेहुए नेहा नें शीक केँ मोटे लण्ड कां आकार देखा उसके अंडरवेर केँ अंदर। जबरदस्त खड़ा थां शीक कां औजार। आरामसे अपनी रसीले उंगलियों सें नेहा नें शीक कि अंडरवेर कों नीचे करना शुरुआत किया तोँ उसकातना हुआ लण्डझट सें बाहर् निकला। नेहा कि आँखें उसको देखते रहगईं।
फिन बहोत हैरात सें देखते हुए, नेहा तकरीबन चिल्लाते हुए बोलीं- “अरे बाप रे। मैंने आज तक इतना मोटा वालाकभी नहि देखी हैं, इतना बड़ा, इतना लंबा औऱ मोटा। ये क्याँ हैं ये मेरे अंदर नहि जा सकता हैं। नां बाबा नाँ." औऱ नेहा प्रवींद्र कि ओर देखते हुए उसको इशारे सें शीक कां लण्ड दिखाती हैं।, जौ मोटा औऱ लंबा थां, कुछहद सें अधिक हि बड़ा थां।
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फिन बहोत हैरात सें देखते हुए, नेहा तकरीबन चिल्लाते हुए बोलीं- “अरे बाप रे। मैंने आज तक इतना मोटा वालाकभी नहि देखी हैं, इतना बड़ा, इतना लंबा औऱ मोटा। ये क्याँ हैं ये मेरे अंदर नहि जा सकता हैं। नां बाबा नां." औऱ नेहा प्रवींद्र कि ओर देखते हुए उसको इशारे सें शीक कां लण्ड दिखाती हैं।, जौ मोटा औऱ लंबा थां, कुछहद सें अधिक हि बड़ा थां।
नेहा केँ जिश्म मे एक् सिरहन सि हुइ औऱ उसने लण्ड कों दिलचस्पी सें देखा, फिन अपने हथेली मे लिया औऱ उसके ऊपरी हिस्से पऱ अपनी उंगलियों कों फेरते हुए पूछा-“ये ऐसा क्यूं हैं ऊपर, दूसरे लोगों कि तरह क्यूं नहि हैं?" यह प्रश्न नेहा नें शीक सें किया। फिन प्रवींद्र कों सवालिया नजरों सें देखा, शीक केँ लण्ड कों उससे दिखाते हुए।
शीक नें जवाब दिया- “मेरीजान, येऊपर कां हिस्सा इसलिये ऐसा हैं क्योंकी इसका छिलका क सरकमसाइज्ड हैं."
नेहा नहि समझरही थि तबशीक नें नेहा सें रूपचंद कि अंडरवेर उतारने कों कहा, तब वोँ उसको समझा पाएगा। जब रूपचंद कां लण्ड सामने आया जोँ एवरेज साइज कां थां। तबशीक नें रूपचंद सें अपने लण्ड कों थामने कों कहा ताकी उसके लण्ड कि आगे कि चमड़ी दिखाई दे। तब नेहा कों शीक नें समझाया कि जौ आगे कि चमड़ी रूपचंद केँ लण्ड केँ ऊपरी हिस्से पर्र हैं वोँ आके कि चमड़ी उसके लण्ड सें हटायी गय़ा हैं इसीलिए उसका लण्ड वैसा हैं।
तब नेहा नें पूछा- वैसा क्यूं हैं?
शीक नें बताया कि वोँ हाइजेनिक हैं औऱ उसका धार्मिक संस्कार भि।
नेहाशीक केँ लण्ड सें आनंद लें रही थि, उसको जैसे एक् खिलोना मिल गय़ा होँ उस वक़्त। तब तक रूपचंद नें अपने लण्ड कों नेहा केँ मुँह केँ पास किया औऱ बिना झिझक केँ नेहा नें उसे अपने मुँह मे लेँ लिए, उसी वक़्त वोँ शीक कां लण्डहाथ मे लिए हुइ थि। नेहा पलंग पर्र घुटनों केँ बल पऱ आई औऱ दोनों मर्दो कों अपने सामने किया औऱ एक्-एक् हाथ मे एक्-एक् लण्ड कों थामाफिन एक्-एक् करके बारी-बारी दोनों लण्ड कों चूसने लगी। शीक कां लण्ड मुँह मे लेते वक़्त उसको अपने मुँह कों औऱ खोलना पड़ता थां। वोँ शीक केँ चेहरे मे देखती तोँ कभी रूपचंद केँ चेहरे मे फिन प्रवींद्र कों देखती चूसते समय।
प्रवींद्र कों बड़ा मज़ा आँ रहा थां देखते हए कि किसअदा सें नेहा दोनों लण्डों कों धीरे-धीरे संभाल रही थि, जैसे उसकेलिए एक् मामूली बात हौ। नेहा शिकायत कररही थि शीक सें कि उसका मुँहदुख रहा थां उसको चूसने सें क्योंकी उसका बहोत ज़्यादा बड़ा हैं, मुँह कों बहोत ज़्यादा बड़ा खोलना पड़रहा थां। शीक एक् शैतानी मुश्कुराहट केँ संग नेहा केँ सर कों पकड़कर अपने लण्ड कों औऱ भि अधिक ठूससने कि कोशिश करताजा रहा थां नेहा केँ मुँह मे, मगर नेहा नहि लेँ पारही थि। फिन भि नेहा नें दोनों मर्दो कों बारी-बारी चूसा औऱ दोनों खुश थें।
नेहा नें एक्-दो बार प्रवींद्र कों भि इशारे सें बुलाया उसको भि चूसने केँ लिए।
मगर प्रवींद्र नें कहा कि वोँ बस देखेगा वहीं बैठकर औऱ नेहा कों जारी रखने कों कहा। उस वक़्त नेहा कों देखते हए प्रवींद्र भि अपने लण्ड कों हाथ मे थामेहए थां। लण्ड कों मूठ मारने कि तरह हथेली सें रगड़े जारहा थां, अपनी जवान भाभी कों दोगैर मर्दो केँ लण्ड चूसते हुए देखकर।
शीक एक् हाथ सें नेहा कि गाण्ड सहलारहा थां जिससमय वोँ उसकोचूस रही थि, जोँ नेहा कों अच्छा लगरहा थां। रूपचंद कि उंगलियां नेहा कि बुर सें भीगरही थीं औऱ वोँ अपने दूसरे हाथ सें उसकी चूचियों कों मसलरहा थां।
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जबरदस्त कथा ससुरजी ,चाचा औऱ pravindra एक् संग मज़ा आयेगा
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