Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा गीली हौ चुकी थि औऱ उसकी गर्मी बढ़ती जारही थि आहिस्ता। उसकी साँसें भि तेज हौ रहीथीं औऱ वोँ जैसे सजधजकर होँ गई थि लण्ड कों अपनी बुर केँ अंदर लेने केँ लिए। आखिर मे नेहा बोलि कि उसका मुंह दुखने लगा हैं औऱ उसने चूसना बंद किया औऱ बेड पऱ पीठ केँ बललेट गई।
दोनों मर्द उसकी बुर पऱ टूट पड़े जल्दी। दोनों मित्र मिलकर एक् बुर कों शेयरकर रहे थें। नेहा नें स्वयं अपने आप् अपनी बुर कों दोनों केँ हवाले करतेहुए अपनी दोनों टाँगों कों फैला दिया, औऱ सिसकने लगी थि मुट्ठी मे चादर कों जकड़े हुए औऱ जिश्म कों रगड़ते हुए। दोनों मर्द उसकी बुर कों बारी-बारी चाट, चूस रहे थें औऱ उनकेहाथ नेहा कि चूचियों कों मसलेजा रहे थें।
रूपचंद नें तोँ एक् उंगली नेहा कि गाण्ड केँ छेद मे भि घुसाने कि कोशिश कि, पर्र नेहा नें झटक दिया तोँ उसने उंगली अंदर नहि किया। प्रवींद्र मज़ा लेतेहुए आँखें फाड़े देखेजा रहा थां। औऱ फिन नेहा कों चोदने कां टाइम आँ गय़ा।
शीक नें शुरुवात किया, अपने मोटे लण्ड कों नेहा कि बुर पर्र रगड़ते हुए।
नेहा नें टाँगों कों औऱ भि ज़्यादा फैलाया, शीक कों अपने अंदर लेने केँ लिए। औऱ सर कों थोडा उठाकर उसके लण्ड कों अपनीहए देखने लगी।
एक् डर सि थि उसके चेहरे मे उससमय जिसको प्रवींद्र गौर सें देखरहा थां। प्रवींद्र उठकरबेड केँ लगभगआया देखने केँ लिए।
शीक नें पहले अपने लण्ड कों नेहा कि बुर पऱ रगड़कर अपने लण्ड कों उसके पानी सें गीला किया, फिन धीरे-धीरे सें, धीरे-धीरे लण्ड केँ सुपाड़े कों नेहा कि बुर केँ छेद सें लगाया। नेहा नें उसको महसूस करतेहुए एक् आह्ह.भरी, सर उठाकर देखते हुए, औऱ लण्ड कां सुपाड़ा उसकी बुर केँ अंदर घुसा तौ नेहा नें आह लेतेहुए ‘इइस्स्स्स ' किया।
शीक नें उसके चेहरे मे देखा औऱ कहा- “धीरे-धीरे बेबी, धीरे-धीरे। फिकरमत करो मे बिल्कुल ध्यान सें कररहा हूं, तुमको कोई दर्द नहि होने दूंगा। कितनी कोमलदिख रही हौ, मेरीपरी होँ इससमय तुम्। इतनी रसीले बुर कों मे भलाचोट केसे पहुंचा सकता हूं? तुम् बेफिकर रहो बेबी.” औऱ नेहा कि तड़पती सिसकारियों औऱ आहों केँ बीच, शीक नें अपने तजुर्बे केँ अनुसार धीरे-धीरे सें अपनीकमर कों हिलाते हुए लण्ड कों अंदर किया। शीक केँ लण्ड कों अपने अंदर घुसते महसूस करतेहुए नेहा नें अपनेसर कों वापस तकिये पर्र पटक दिया। जिस वक़्त लण्ड उसके अंदर घुसा, एक् गहरी साँस लेतेहुए नेहा कां मुँह खुलाहुआ थां। औऱ जैसे हि दूसरा धक्का देने केँ लियेशीक नें लण्ड कों बाहर् खींचा।
नेहा तड़पती आवाज़ मे चिल्लाई- “उफफ्फ़। उइइ मम्मी आआहह."
तब तक रूपचंद अपने लण्ड कों नेहा कि चूचियों केँ बीच मे रगड़रहा थां।
शीक नें धक्का देना शुरुआत किया औऱ नेहा अपने मुट्ठी मे कसके चादर जकड़े हुए अपने जिश्म कों ऐंठरही थि बैड पर्र। उसकी चूचियां केँ निपल्स कड़क खड़ेऊपर छत कों ताकरहे थें। शीक नें दाँतों कों पीसते हए धक्कों कि रफ़्तार कों बढ़ाया तौ नेहाबेड पर्र रगड़ते हए बेहाल होतीचली गई जिससे पलंग कि चादरइधर कि उधर हौ गये।
फिन अचानक प्रवींद्र नें कुछ फुसफुसाते हुएशीक औऱ रूपचंद केँ कानों मे कहा।
नेहा नें एक् गहरी साँस लेतेहुए उनको देखा औऱ पूछा-“अब क्याँ हैं? इतना अच्छा तौ चलरहा हैं सभी.”तब शीक अपनीपीठ केँ बलखाट पर्र लेटा औऱ नेहा कों अपनेऊपर लेँ लिया, लण्ड बुर केँ अंदर हि रहाउस दौरान।
जब नेहाशीक केँ ऊपर होँ गई तौ रूपचंद नें उसकी गाण्ड कों चूमना चाटना शुरुआत किया। उसनेथूक सें नेहा कि गाण्ड केँ छेद कों भिगोया, अपने उगली रगड़ी गाण्ड केँ छेद केँ ऊपर। उस वक़्त लगरहा थां कि नेहा एक् घोड़े पऱ संवार थि, दोनों टाँगें दोनों तरफ थि, शीक कां लण्ड उसकी बुर केँ अंदर थां औऱ वोँ धीरे धीरेउछल रही थि लण्ड कों अपनी बुर केँ अंदर-बाहर् करतेहुए। औऱ उसकी गाण्ड केँ ऊपर रूपचंद अपनेहाथ सें कामकर रहा
थां। तब रूपचंद नें थूक सें अपने लण्ड कों भि भिगोया औऱ लण्ड कों नेहा कि गाण्ड केँ छेद पऱ रगड़ा औऱ धीरे-धीरे सें उसकी गाण्ड केँ छेद मे अपने लण्ड कों ठुसने कि कोशिश किया।
जिससे नेहाजोर सें चिल्लाई- “नहींईई। वोँ मतकरो, वहा नहींईई.”
तौ रूपचंद रुक गय़ा एक् लम्हा केँ लिएफिन आहिस्ता अपने लण्ड कों उसकी गाण्ड केँ छेद मे घुसेड़ने लगा। नेहा सिसकरही थि, औऱ उससमय शीक केँ लण्ड कां मज़ा लेँ रही थि, फुल एंजाय कररही थि जैसेबस झड़ने हि वाली होँ, ऐसालग रहा थां। बिल्कुल बहाल थि, वोँ उस वक़्त जोरों सें हाँफती जारही थि शीक केँ लण्ड केँ ऊपर उछलते हुए।
तभी रूपचंद कां लण्ड उसकी गाण्ड केँ छेद मे आधा घुसा औऱ वोँ कसमसाते हुये चिल्लाई- “उफफ्फ़। ओहह.माई गोड। इस्स्स्स। दो-दो एक् संग नहि बाबा। मे नहि झेल पाऊँगी। निकालो उसे नहींन्न्न्न्.”
मगर रूपचंद नें उसकी गाण्ड कों चोदना शुरुआत कर दिया थां औऱ उसका लण्ड अंदर-बाहर् होनेलगा थां तब तक। फिन एक् लम्हा बाद नेहा कि आवाज़ ऐसीआई- हाँ, हाँ, आरामसे, इस्स्स्स। हाँहाँ आहिस्ता डालो। उफफ्फ़। उईई मम्मी." औऱ नेहाझड़ गई दो-दो लण्ड अपने अंदर एक् संग लेतेहुए।
bhay कोई ldki कि peshab pine wali tatti khane wali mast long kahani likho plz
thanks
fantastic update brother keep posting waiting your next update
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
Thanks For Reading.. wrote: Thanks For Reading..29 Mar 2020 02:24 एक् दिन चाची कि पेशाब पीने केँ बादमै चाची कि बुर चाटरहा थां तौ मुझेलगा क्यो नां चाची कि गांड केँ छेद कों भि चाटाजाए। आज तक मेरा ध्यान चाची कि गुदाछेद कि ओर नहीं गय़ा थां। मैने चाची कों पेट केँ बल लेटने कों कहा। औऱ चाची कि Hips कों दबाने लगा। चाची कि गांड इतनीबडी मोटी औऱ फूली हुइ थि कि उनकी गांड कां छेद दिखना नामुमकिन थां।bhay iss prakaar kisi कि story mai apni story update नहि karte। अगर post krna h too apni story alag सें shuru karoतब मैने चाची कि गांड केँ दोनो पाटो कों अपने हाथो सें फैलाकर देखा चाची कि गांड कां छेद दिखाई दिया।
waaw कितना प्यारा छेद थां। चाची केँ सफेद Hips पे हल्का भूरालाल रंग कां छेद। एकदम tight औऱ बंदछेद। छेद केँ चारोओर सूरज कि किरणो कि तरह दिखती रेखाएं थि।
मैंने उस गुदा दरवाज़ा पऱ अपनीजीभ सें छू दिया औऱ चाटा। फिन अपनी अंगुली पे थूकलगा कर अंगुली उनकी गुदाछेद मे रखकर अन्दर घुसाने लगा। चाची कों दर्द होनेलगा बोलि बेटा मतकर दर्द हौ रहा हैं। मैने उनकीबात न् सुनते हुए अपनी अंगुली जोरलगा कर अंदरडाल दि।
चाची कि गुदा कां छेद बहोत tight थां। चाची कि गुदा मे अंगुली अंदर बाहर् करनेलगा। अब अंगुली निकाल कर चाची कि गांड फैलाकर फिन सें जीभ सें चाटने लगा। चाची कों भि गांडछेद करजीभ कां touch बहोत अच्छा लगा। अब मैने चाची कों doggy pos मे आने कों कहा, जिससे चाची कि गांडफैल जाए औऱ उनकी गांड कां छेदउभर कर सामने आँ गय़ा। मैजीभ सें गुदा छिद्र चाटने लगा औऱ अपनीजीभ गांड केँ छेद मे घुसाने कि कोशिश करनेलगा।
Thanks For Reading.. wrote: Thanks For Reading..29 Mar 2020 11:35 yeh kaunsi kahani h chachi कि, bich mai kese aa gaibhay yeh iss story kaa ansh नहि hपर्र lambi honi चाहिए kahani,,,
yeh kaunsi kahani h chachi कि, bich mai kese aa gai पऱ lambi honi चाहिए kahani,,,
fantastic update brother keep posting waiting your next update
Raj kumar27 wrote: ↑29 Mar 2020 02:22 bhay कोई ldki कि peshab pine wali tatti khane wali mast long kahani likho plz MAHADEV wrote: ↑29 Mar 2020 13:30thanks naik wrote: ↑30 Mar 2020 23:24 fantastic update brother keep posting waiting your next update Thanks mitro
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
तभी रूपचंद कां लण्ड उसकी गाण्ड केँ छेद मे आधा घुसा औऱ वोँ कसमसाते हुये चिल्लाई- “उफफ्फ़। ओहह.माई गोड। इस्स्स्स। दो-दो एक् संग नहि बाबा। मे नहि झेल पाऊँगी। निकालो उसे नहींन्न्न्न्.”
मगर रूपचंद नें उसकी गाण्ड कों चोदना शुरुआत कर दिया थां औऱ उसका लण्ड अंदर-बाहर् होनेलगा थां तब तक। फिन एक् समयबाद नेहा कि आवाज़ ऐसीआई- हाँ, हाँ, आरामसे, इस्स्स्स। हाँहाँ धीरे-धीरे डालो। उफफ्फ़। उईई मम्मी." औऱ नेहाझड़ गई दो-दो लण्ड अपने अंदर एक् संग लेतेहुए।
प्रवींद्र कि खशी कि कोई सीमा नं थि उससमय, वोँ सभी देखते हए। नेहा नें अपनी टाँगों कों पूरीतरह सें फैला। दिया थां, जैसे दोनों टाँगों कों फाड़ दिया हौ। औऱ दोनों मर्दो केँ लण्ड कों अपने अंदर दर्द औऱ मजे केँ संगलिए
जारही थि। उतावलापन भि रही थि, औऱ खशी भि महसूस कररही थि एक् संग। उसको जौ फीलिंग्स होँ रही थि बयान करना मुश्किल हैं। वोहीसमझ सकती थि कि उस लम्हा क्याँ महसूस होँ रहा थां उसे, बुर केँ अंदर एक् मोटा, बड़ा सां लण्ड अंदर-बाहर् होँ रहा थां औऱ गाण्ड केँ अंदर दूसरा लण्ड आँ जा थां, स्वयं बेकाबू होतीजा रही थि हॉफते हुए।
कभी-कभी नेहा कां दम घुटने लगता थां तौ वोँ गहरी साँसें लेँ रही थि, गुर्रा भि रही थि, अपने जबड़े कों जोर सें दबाकर कभी-कभी दाँतपीस रही थि तोँ कभी सिसकारियां लेँ रही थि। नेहा केँ नीचे सें शीक अपने लण्ड कों उसकी बुर मे लूंसे जारहा थां औऱ ऊपर सें रूपचंद गाण्ड मे घुसारहा थां। नेहाउन दो बूढों केँ बीच मे थि जोँ दो नौजवानों कि तरह उसको बड़ेमजे सें चोदरहे थें।
फिनकुछ देरबाद शीक नेहा कि गाण्ड मारना चाहरहा थां, तोँ उसने रूपचंद कों नीचेआने कों कहा, पोजीशन बदलने कों कहा। रूपचंद मान गय़ा। मगर नेहा नें एतराज कियायह कहकर कि फिन सें पीछे मे अंदर डालने सें
दर्द होगी। तौ दोनों मर्द नेहा कों फुसलाने लगे, उसको सहलाते हुए चूमने लगे। प्रवींद्र भि आया नेहा कों सहलाने मनाने केँ लिए।
प्रवींद्र नें कहा- “देखो नां सभी कितना ठीकचल रहा थां, बस अदला-बदली सें क्याँ फरक पड़ेगा? करनेदो नां इसको भि पीछे सें अब."
नेहाउन मर्दो कि ठरकपन कों आगे बढ़ने केँ लिएमान गई। फिन रूपचंद अपनीपीठ पर्र लेटा औऱ अपने लण्ड कों नेहा कि बुर मे डाला, औऱ ऊपर सें अबशीक नें अपने लण्ड कों नेहा कि गाण्ड केँ छेद मे घुसेड़ने कि कोशिश कि। शीक नें अपने लण्ड औऱ नेहा कि गाण्ड कों थूक सें भिगोया औऱ लण्ड ट्रंसने लगा।
नेहा चिल्लाई- “नहि। रुको, आपका बहोत अधिक मोटा हैं, नहि घुसेगा, मुझे बहोत दर्द होगीमत डालो अंदर आप्, आपका इतना मोटा लौडा मेरे अंदर पीछे मे नहि जाएगा."
मगरशीक कों नेहा कां चिल्लाना औऱ शिकायत करना औऱ भि पसन्द आँ रहा थां औऱ उसकामन उसकी गाण्ड मारने कां औऱ भि ज़्यादा कररहा थां, वोँ रुकने वाला कहां थां। उसने नेहा कों बड़ी होशियारी सें फुसलाते हुए अपने लण्ड कों उसकी गाण्ड केँ छेद मे घुसेड़ हि दिया। केवल एक् हिस्सा अंदर घुसा तौ नेहा चिल्लाई औऱ उसके आँसू निकल पड़े। फिन शीक नें अपने लण्ड कों थोडा सां औऱ अंदर पेला तौ नेहा रोनेलगी। शीक नें फिन औऱ ठूसा तोँ नेहा सिसक गई औऱ आखिर मे शीक कां लण्ड भि घुस गय़ा नेहा केँ अंदर.फिन सें दो लण्ड उसकी गहराई मे थि औऱ दोनों अंदर-बाहर् धक्का देनेलगे।
नेहाजोर सें चिल्लाती रही- “आआहह। इस्स्स्स। मुझको फाड़ डालोगे तुम् दोनों। फाड़ डाला मेरी गाण्ड कों। उईईई मां। इतना मोटा लण्ड, मे केसेझेल पाऊँगी? बसकरो नाँ दर्द होँ रहा हैं, अंदरजलन सि होँ रही हैं, रुको नाँ प्लीज."
मगरकौन रुकने वाला थां उस वक़्त। दोनों मस्त चुदाई कररहे थें मज़ा लेतेहुए। जितना नेहा चिल्ला रही थि उतना दोनों मर्दो कों ज़्यादा आनंद आँ रहा थां। शीक कों नेहा कि गाण्ड बहत हि टाइटलग रही थि औऱ उसको बेहद आनंद आँ रहा थां, खासकर नेहाजब चिल्ला रही थि तब। वोँ उसकी गाण्ड मे धक्का देता गय़ा औऱ नीचे सें रूपचंद अपने लण्ड कों उसकी बुर मे अंदर-बाहर् करता गय़ा।
नेहा कि साँसें फूलरहे थें, वोँ सिसकरही थि, लंबी-लंबी साँसें लेतेहुए तड़पती जारही थि दोनों मर्दो केँ बीच। नेहाऐंठ रही थि, कभी पीछे मुड़कर शीक कों देखरही थि, कभी प्रवींद्र कों देखरही थि, औऱ जब मुड़कर शीक कों देखी तौ शीक नें उसके मुंह कों अपने मुँह मे लें लिया। फिन नेहा नें भूखी शेरनी कि तरहशीक कि जीभ कों मुँह मे लेकर चूसा, फिन नेहा नें शीक केँ कंधे पऱ अपना दाँत गड़ाई, जिससे शीक केँ कंधे पऱ नेहा कि दाँतों केँ निशान बनगये। नेहा पऱ जैसे एक् जुनून सवार हौ गई थि उस लम्हा, झूमने लगी थि, उछलने लगी थि, उतावलापन भि रही थि, नशे कि हालत मे दिखने लगी थि, उसकी आवाज़ बदली सि लगनेलगी थि।
नेहा झड़ने वाली थि। उसकी बुर पानी छोड़ चुकी थि औऱ रूपचंद कां लण्ड बहोत आसानी सें अंदर-बाहर् होनेलगा थें। जबकि शीक कां लण्ड बहोत टाइट अंदर बाहर् होँ रहा थां, उसकी गाण्ड केँ अंदर। फिन रूपचंद नें गुर्राते हए अपने लण्ड कों बाहर् निकाला औऱ अपने वीर्य कि पिचकारी छोड़ा, जौ नेहा केँ पेट पऱ पड़ी औऱ वापस रूपचंद केँ पेट पर्र गिरी।
नेहाझड़ चुकी थि औऱ जोरों सें हाँफरही थि उससमय जब रूपचंद नें अपना वीर्य छोड़ा।
मगरशीक केँ लण्ड कां तब भि उसकी गाण्ड मे आनां जानां जारी थां। उसने नेहा कि कमर कों जोर सें अपने पंजों मे जकड़ा हुआ थां औऱ जबरदस्त चोदरहा थां, नेहा कि गाण्ड माररहा थां औऱ आखिर मे वोँ भि गुर्राया “आगघह। इस्स्स्स। व्-व-वाहह." औऱ उसको लण्ड बाहर् नहि निकालना पड़ा, क्योंकी उसने अपने वीर्य कों नेहा कि गाण्ड कि गहराई मे हि छोड़ा पूरा केँ पूरा।
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story - Kahani ab aur interesting hogi
Thanks mitro
excellent kahani mind blowing hot & sexy please continue
very nice update brother keep posting.............. waiting your next update thank you..................
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