Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
जब नेहा नें नोटिस किया कि ज्ञान कि नजरें उसके जिश्म कों ताड़रही हें औऱ बहोत खामोशी थां तौ उस खामोशी कों तोड़ने केँ लिए नेहा नें बात कि। उसने पूछा- “तौ आप् आज इतने सवेरे केसे आँ गये?"
ज्ञान कों तौ कुछ औऱ बात करने कां मूड नहि थां, बस नेहा कों अपनी बाहों मे जकड़ने कां मन थां उस वक़्त, फिन भि उसने जवाब दिया- “वोँ कलरात मे ठीक सें सो नहि पाया, कुछ बहोत बुरे ड्रीम्स आए थें मुझे, तौ जल्दउठ गय़ा सुभह कों.” उसनेगरम चायखतम किया औऱ नेहा कों कप वापस किया।
नेहाकप लेकर किचेन कि तरफ जानेलगी तोँ नेहा नें उसके पीछे कदमों कि आहट सुनी कारिडोर मे। वोँ मुड़कर पीछे नहि देखीमगर अपने कदमों कि रफ़्तार कों तेज करतेहुए किचेन मे गई औऱ जब सिंक मे कपरखा तोँ उसके पीछे सें दो मजबूत काली बाहों नें उसको जकड़ लिया।
नेहा काँपउठी, उसकीदिल कि धड़कनें तेज हुई औऱ गुस्से मे उसनेकहा- “ये क्याँ कररहे हौ आप्? छोड़िये मुझे वरना मे चिल्लाऊँगी अभि.”
ज्ञान कां लण्ड नेहा कि गाण्ड पऱ रगड़रहा थां औऱ उसका मुँह नेहा केँ गले औऱ गाल पऱ फिनरहा थां उससमय। नेहा कि नाइटी कि स्ट्रैप्स स्वयं-बा-स्वयं कंधे सें सरक गई औऱ ज्ञान कि जीभ उसके नंगे बाजू औऱ काँख पर्र चलनेलगी। नेहा स्ट्रगल करनेलगी उसकी काली बाहों सें निकलने कि। ज्ञान कालेरंग कां थां, बिल्कुल काला। नेहा बहोत गोरी थि तौ दोनों केँ जिश्म केँ कांट्रास्ट होँ रहेथ। नेहा कि गोरी बाहें उसकी काली बाहों पऱ झपटा झपटी करतेहुए बहोत अजीबलग रहीथीं।
नेहा कों बहोत हि क्रोध आँ रहा थां औऱ उसने सख्ती सें दोबारा कहा- “आप् मुझे छोड़ते होँ याँ मे सच मे चिल्लाऊँ.”
तब ज्ञान नें अपने लण्ड कों औऱ जोर सें नेहा कि गाण्ड पऱ दबाते हुएकहा- “कौन तुम्हारी पुकार कों सुनेगा यहा मेरीजान? तुझ जैसी गर्म महिला कों मेरे जैसे लण्ड कों अपने अंदर घुसाने कि सख्त जरूरत हैं, जिसदिन तुमको पहलीबार यहा देखा, मुझेउसी दिन सें तुमको चोदने कां बड़ा हि मन किया, तभी सें इंतेजार मे थां कि कब औऱ केसे तूँ हाथ आएगी कि अपना लण्ड तेरे अंदर घुसा सकूँ, हाए रे मेरी किश्मत तुमने स्वयं मुझे अपनेघऱ केँ अंदर लेँ लियाआज, वाउरे वाउ.अब चोदने दे, तुम्हारी तरफ भि बड़ा मज़ा आएगा, देख्ना तूँ भि बहोत एंजाय करेगी। एक् बारइसे अपने अंदर लेकर तौ देख रानी."
औऱ तब तक ज्ञान नेहा कि दोनों चूचियों कों सख्ती सें मसलने लगा अपने लण्ड कों उसकी गाण्ड पर्र जोरों सें रगड़ते हुए। लण्डतब तक उसकी जीन्स केँ अंदर हि थां, ऊपर-ऊपर सें हि लण्ड कों दबारहा थां उसकी गाण्ड पऱ। मगर नेहासभी महससकर रही थि स्ट्रगल करतेहए। ज्ञान कों रोकने केँ लिए नेहा नीचे बैठने कि भि कोशिश किएजा रही थि मगर ज्ञान बहोत औऱ स्ट्रॉग थां औऱ वोँ हरबार उसकोऊपर उठा लेता थां, अपने लण्ड कों उसकी गाण्ड पर्र रखने केँ लिए। सभी कुछ बहोत तेजी केँ संग हौ रहा थां बहोत फास्ट आक्सन्स होँ रहे थें।
जब नेहा नें देखा कि उसकेबस कि बात नहि हैं ज्ञान केँ संग स्ट्रगल करना तोँ अब गिड़गिड़ाने लगी- “मुझे छोड़दो प्लीज। मे ऐसी वैसी स्त्री नहि हूं, मे शादीशुदा हूं, मेरा पति एक् बहोत अच्छा व्यक्ति हैं, देखो मैंने तुमको गरमचाय पिलाई, मैंने तुम्हारा खयालरखा, तुम्हारी सहायता किया। तुमको येसभी करना शोभा नहि देता, ऐसा मतकरो प्लीज.”
ज्ञान नें नेहा कि एक् नाँ सुनी औऱ अपने आप् मे मगनआगे बढ़ता गय़ा नेहा कों चूमते चाटते हुए। उसके काले बड़े-बड़े हाथ नेहा कि नाइटी ऊपर उटाने कि कोशिश मे भि लगेहुए थें। उसके कालेहाथ नेहा केँ गोरी जिश्म पर्र बहोत जंचरहे थें। उसके वो काले कालेहाथ नेहा कि गोरी, सफेद जांघों पऱ फिनरहे थें, औऱ वोहीहाथ नेहा कि पैंटी तक पहँचे औऱ पैंटी कों बाहर् निकालने कि कोशिश मे लगगये। मगर नेहा नें बहतजोर लगाया उसको पैंटी नहि निकालने देने केँ लिए।
तब तक जोँ नाइटी केँ स्ट्रैप कंधे सें सरक गई थि झपटा झपटी मे, वहा पऱ ज्ञान नें फिन सें काँख कों चूसना शुरुआत किया औऱ एक् लाल निशान कर दिया चूसते हुए। दोनों खड़े पोजीशन मे हि थें इतनीदेर तक औऱ नेहा बहोत कोशिश कररही थि उसके चंगुल सें निकलने कि मगर असफल थि।
ज्ञान नें थोडा गुस्से मे कहा- “इतना ड्रामा क्यूं कररही हौ? शादीशुदा होँ तौ चुदाई क्याँ होती हैं ये तौ पता हि हैं, कोई कुंवारी तोँ नहि हौ जोँ इतने नखरे दिखारही हौ। अपने पति केँ संग तौ बहोत एंजाय करती होगी नां तुम्। औऱ क्याँ सती सावित्री बननेचली होँ तुम्? हाँ.इस तरह एक् नाइटी मे एक् गैर मर्द कों अपनेघऱ केँ अंदरआने देती होँ, तुम्हारी चूचियां साफदिख रही हें गोल-गोल, तुम्हारे निपल्स कों देखो केसे मुझको चूसने केँ लिए बुलारहे हें। अगर इतनी हि सती सावित्री होती तौ कपड़े बदलने केँ बाद मुझको घऱ केँ अंदरआने देती नाँ।
अब मे घऱ मे आँ भि गय़ा तौ तुम् अपने कमरे केँ अंदर जाकर अपने कपड़े बदल सकती थि मगर नहि नाइटी मे हि मेरे सामने खड़ीरही जब मे गरमचाय पीरहा थां। मतलब तुम् मुझको अपना जिश्म दिखारही थि। तूँ चुदवाना चाहती तौ हैं मगर नखरेकर रही हैं, क्यूं, यहीबात हैं नां मेरीजान? बोल। ऊपर सें उस सुभाष कों तौ भाव देती हैं तुँ, उसको चुम्मी लेने दिया, उसने तेरी गाण्ड पऱ हाथ फेरा औऱ तुँ हँसी थि। मतलब तेरे कों येसभी अच्छा लगता हैं नाँ? हम्म्म। याँ मे बहोत काला औऱ मोटा हूं इसलिये तुम्हे सुभाष पसन्द हैं औऱ मे नहि क्यूं री? मुझसे एक् बार चुदवा केँ देख तौ तुँ मुझेफिन बुलाएगी चुदवाने केँ लिए। मुझको एक् बारचख तोँ लें रानी। चल तेरे बेडरूम मे चलते हें। तेरेखाट पऱ बहोत मज़ा आएगा." औऱ ज्ञान नें नेहा कों आसानी सें एक् बच्चे कि तरह उठाया औऱ उसके कमरे केँ तरफ जानेलगा।
नेहा स्ट्रगल करते-करते तक गई थि औऱ उसकोपता चल गय़ा कि वोँ उसको छोड़ने वाला तोँ नहि हैं, तोँ नेहा नें स्वयं कों सरेंडर कर दिया उसके सामने। जब ज्ञान उसको कारिडोर मे चलकर लेँ जारहा थां तभी नेहा खामोश हौ गई जैसे एक् तूफान शांत होता हैं, अचानक वैसे बिल्कुल शांत हौ गई ज्ञान कि कि बाहों मे। कारिडोर मे ज्ञान कों पता नहि थां कौन सां रूम बेडरूम हैं तोँ नेहा उसकीगोद मे सें हि स्वयं अपने बेडरूम केँ दरवाजे कों खोला। ज्ञान कों बहोत अच्छा लगा कि नेहा नें स्वयं अपने बेडरूम कों खोला औऱ वोँ समझ गय़ा कि अब वोँ राजी होँ गई हैं, इसीलिए स्वयं हि दरवाजे कों खोल दिया नेहा नें।
रूम मे दाखिल होते हि ज्ञान नें नेहा कों बेड पर्र रखा औऱ वोँ बैठ गई तोँ ज्ञान जल्द-जल्द अपने कपड़े उतारने लगा नेहा केँ सामने। नेहाबेड पऱ बैठी ज्ञान कों नंगा होतेदेख रही थि औऱ अपनी नाइटी कि स्ट्रैप जौ उसके कंधे पऱ सरक गई थि उसको नेहा नें ऊपर कंधे पर्र किया। फिन ज्ञान केँ मोटेपेट कों देखकर नेहा नें चुलबुलाते हुए एक् हँसी छोड़ी अपनेहाथ कों मुँह पऱ करतेहुए।
ज्ञान नहि समझा कि अचानक क्यूं नेहा हँसने लगी थि? उसने नेहा केँ चेहरे मे देखा, तोँ नेहा दूसरी तरफ देखने लगी अपने हँसी कों संभालते हुए। तब तक ज्ञान नें अपनेसब कपड़े उतारदिए औऱ अंडरवेर मे नेहा केँ सामने खड़ा थां। नेहाबेड पऱ देखरही थि एक् हाथ अपने मुंह पर्र दबाएहुए हँसी कों रोकने केँ लिए।
ज्ञान नें पूछा- “क्याँ हौ गय़ा अचानक, ऐसे हँसी क्यूं आँ गई तुम्हें?"
नेहा नें जोर सें हँसते हुए एक् उंगली सें उसकेपेट केँ तरफ इशारा करतेहुए कहा- “मैंने जीवन मे ऐसा मोटापेट कभी नहि देखा, वोँ भि इतना काला। हीहीहीही."
ज्ञान भि हँसने लगा अपनेपेट कों देखते हुए। फिन ज्ञान नें अपना अंडरवेर निकालते हुएकहा- “ठहरो औऱ अबये बताओ कि क्याँ तुमने ऐसाकुछ देखा हैं कभी?" औऱ उसने अपने मोटे, काले, लंबे लण्ड कों अपनेहाथ मे लिए नेहा कि तरफ करतेहए कहा-“अब कहो."
नेहा नें अपने मुँह पऱ दोनों हाथरखा औऱ एक् लंबी साँस लेकरकहा- “ओहह.माई गोड, इतना मोटा उफफ्फ़."
ज्ञान नेहा कों अच्छे मूड मे देखकर खुश होतेहुए अपने लण्ड कों नेहा केँ मुँह तक लें गय़ा क्योंकी वोँ बैठी हुईँ थि औऱ ज्ञान खड़ा थां।
उसका लण्ड देखकर नेहा जैसेसभी क्रोध औऱ नाराजगी भूल गई। उत्तेजना नें उसकेमन मे घऱकर लिया, औऱ
क्योंकी पिछले 24 घंटों मे किसी सें कुछ नहि किया थां तोँ उसकी जिश्म कि गर्मी बढ़ने लगी औऱ उस मोटे लण्ड कि चाह अचानक आँ गई। नेहा केँ जिश्म औऱ मन मे सभी सेक्सुअल फीलिंग्स जाग उठीं औऱ उसको वोँ जरूरत महसूस होनेलगी। स्वयं हि वोँ सोचने लगी कि अकेली घऱ मे हैं वोँ औऱ एक् अजनबी अचानक उसके जिश्म कों पाना चाहता हैं, तौ इससे बेहतर तेजक मोमेंट हौ हि नहि सकता, उसके जिश्म कि प्यास कों बुझाने केँ लिए औऱ स्वयं मज़े लेने केँ लिए।
ऐसा सोचते हि नेहा बेचैनी उठी सेक्स केँ लिए औऱ नेहा नें तब ज्ञान कि आँखों मे देखा औऱ अपनीनाक सिकोड़ते हए ज्ञान कों अपनीजीभ निकालकर चिढ़ाया किया औऱ अपनी गोरी हथेली मे उसके मोटे काले लण्ड कों लेकर नेहा बोलीं- “बड़े बदमाश होँ आप्, अगर मे नहि करने देती तोँ आप् मेरारेप करने वाले थें, हैं नाँ?"
ज्ञान खुशी सें मुश्कुराया एक् कराह केँ संग, औऱ कहा “लेँ लो मेरीजान, लें लो अपने मुँह मे इसे, तुम्हारे गर्म मुंह मे जाने केँ लिए बेताब हैं मेरा लण्ड.”
नेहा नें उसके लण्ड कों सहलाया उसकी पूरे लंबाई पर्र उसके बाल्स तक। उसकी पतली उंगलियां फिनरही थींउस मोटे काले लण्ड पर्र औऱ फिन सें उसकी गोरी हथेली औऱ उंगलियां उस काले लण्ड पऱ बहोत हसीन कंट्रास्ट कररही थीं सफ़ेद औऱ काला। नेहा नें सर कों झुकाकर पहले हल्के सें अपनीजीभ सें उसके लण्ड केँ ऊपरी हिस्से कों भिगोया, फिन धीरे-धीरे सें लण्ड कों अपने मुँह मे लिया।
ज्ञान उतावलापन उठा औऱ अपने पाँव कि उंगलियों पऱ खड़ा हौ गय़ा जल्दी औऱ गुर्राया- “आगज्गघह। इस्स्स्स जानमऐसे हि औऱ अंदरलो अपने मुँह मे। बड़ा मज़ा आँ रहा हैं वाउ आअगघह."
बहुत हि मस्त किस्सा हैं भइया लाजवाब आनंदआया अगले एपसोड कां प्रतीक्षा रहेगा
Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
नेहा नें ज्ञान कों चूसना शुरुआत किया अच्छी तरह सें औऱ स्वयं अपनी पैंटी कों गीला महसूस किया। चूसती जारही थि अपने जिश्म कों ऐंठते हुए औऱ बिल्कुल गर्म हौ रही थि चूसते समय, उस लण्ड कां असर जबरदस्त पड़रहा थां नेहा पऱ।
तब तक ज्ञान नें उसकी नाइटी कों उसकीकमर तक उठाया जबकि वोँ चूसती जारही थि गर्दन हिलाते हुए। ज्ञान नें अपनी मोटी काली उंगली कों उसकी गीली पैंटी पर्र दबाया, ठीक बुर केँ छेद पऱ जिससे नेहा तड़पी चूसते हुए हि।
कुछदेर कि चुसाई केँ बाद ज्ञान नीचे फर्श पर्र बैठा औऱ नेहा कि जांघों कों फैलाया। अपनेसर कों उसकी जांघों केँ बीच किया औऱ उसकी गीली बुर कों चूसने, चाटने लगा। ज्ञान कि छुवन सें उसका पानी बुर सें औऱ भि ज़्यादा बहनेलगा। औऱ बड़े आहिस्ता ज्ञान नेहा कां पानीपी रहा थां चूसते हुए जैसेआम कां रस। उससे नेहा कि तड़पती आवाज़ मे उसकी सिसकारियों सें रूम गूंजउठा। नेहा नें ज्ञान कां सरजोर सें अपने हाथों मे दबाते हुए अपने टाँगों कों औऱ ज़्यादा फैला दिया उसकी चुसाई कां मजा लेतेहुए।
फिन आरामसे ज्ञान नें उसकी पैंटी निकाल फेंका औऱ उसकी नाइटी भि। अब नेहा बिल्कुल नंगी बैठी थि बेड पर्र उसके सामने जबकि वोँ उसकी बुर कों चूसेजा रहा थां, औऱ नेहा केँ गुलाबी, औऱ गोरे जिश्म कों निहारे भि जारहा थां चूसते वक़्त, उसके आँखें नेहा कि जिश्म कां मोआएना भि करतीजा रहीथीं संग-संग। फिन ज्ञान भि बेड पऱ चढ़ा औऱ नेहा कों आहिस्ता अपनी बाहों मे भरा, औऱ उसकेजीभ नें नेहा केँ मुँह मे मार्ग बनाया औऱ दोनों एक् दूसरे कि जीभ चूसने लगे एक् दूसरे कों बाहों मे जकड़े। क्याँ नजारा थां एक् बिल्कुल कोयले कि तरह काला जिश्म औऱ नेहा कि बहत हि गोरी जिश्म एक् दसरे मे जकडेहए। नेहा कि पतली गोरी उंगलियां ज्ञान कि कालीपीठ पर्र फिरते हए, देखने मे अजीब तोँ लग हि रहा थां मगर ज्ञान कि उंगलियों कों नेहा केँ जिश्म पर्र देखकर ऐसालग रहा थां कि दूध मे मखीतैर रही हैं।
फिन होना क्याँ थां, जल्द हि ज्ञान नेहा केँ ऊपर थां, नेहा कि दोनों टांगें फैलाए हुए औऱ ज्ञान कां लण्ड नेहा कि गीली बुर मे फिसलते हुएघुस गय़ा। औऱ उसके लण्ड केँ घुसते हि नेहा नें अपने जिश्म कों ऐसे ऐंठा जैसे एक् साँप रेंगरहा थां बैड पर्र औऱ उसकी तड़पती आवाज़ सिसकारियों केँ संग औऱ भि माहौल कों मजेदार बनारहे थें। नेहा कि- “इस्स्स्स। आअहह। उफफ्फ़। उमाआआ." येसभी आवाजें ज्ञान कां मज़ा दोगना कररही थीं चुदाई केँ लिए। सिसकारियां तौ ज्ञान केँ मुंह सें भि आँ रहीथीं नेहा कि बुर मे लण्ड कों अंदर-बाहर् करतेहुए, बड़ेमजे सें चोदरहा थां वोँ नेहा कों उसके जिश्म केँ हर एक् अंग कों बहोत खुशी सें महसूस करतेहुए। चोदते समय ज्ञान सोचरहा थां कि कल तक वोँ केवल उसके जिश्म कों निहार रहा थां औऱ कल्पना कररहा थां चोदने कि औऱ आज उसकी बुर केँ अंदर उसके लण्ड कां आनां जानां थां। बहोत एंजाय करतेहुए चोदरहा थां ज्ञान उस हसीन गोरी जिश्म वाली कों।
चुदाई जारीरही औऱ नेहा कि तड़पती आवाज़ औऱ जोरों सें बढ़ती गई, जबकि ज्ञान केँ लण्ड केँ धक्के औऱ तेज होतेगये उसकी बुर मे। ज्ञान कां पशीना बह निकला औऱ नेहा उसके पशीने कों चाटरही थि, उसके काले जिश्म कों चूमरही थि, चूसरही थि, उसके कंधे पऱ अपने दाँत गड़ारही थि, कसकर ज्ञान कों अपनी नर्म रसीले बाहों मे जकड़े हुए औऱ उसके लण्ड कों अपनी बुर मे बड़ेमजे सें महसूस करतीजा रही थि नेहा।
फिन अचानक नेहा औऱ भि ज़्यादा जोर सें ज्ञान कों जकड़ते हुए, तड़पती आवाज़ मे चिल्लाई- “हाँ मे झड़ने वाली हें औऱ अधिकजोर सें धक्का मारो। रुकना मत प्लीज। करतेजाओ औऱ जोर सें। औऱ जोर सें आअहह। इस्स्स्स। आआह्ह। ओह्ह। माँ गोड इट्स सुपर्ब। आईलोव इट। बहोत अच्छा लगरहा हैं औऱ करो, करतेजाओ नां। बहोत मज़ा आँ रहा हैं। इस्स्स्स." औऱ नेहा नें अपनेसर कों ज्ञान केँ कंधे पर्र किया उसको चूसते हुए औऱ जोरों सें हाँफते हुए।
ज्ञान भि गुर्राते हुए झड़ने वाला थां औऱ उसने भि तड़पती आवाज़ मे- “आआह्ह। अघघघ, ओह्ह.हाँ.” फिनझट सें उसने अपने लण्ड कों बुर सें बाहर् खींचा औऱ नेहा केँ मुँह तक लें गय़ा, औऱ अपने गर्म वीर्य कि पिचकारी कों छोड़ा नेहा कि चूचियों औऱ गले पर्र। कुछ वीर्य केँ कतरे नेहा केँ गाल औऱ माथे पऱ भि गये प्रेशर सें।
नेहा नें उसके पानी कों झट सें अपनेहाथ सें पोंछा। फिन ज्ञान नें लण्ड कों नेहा केँ मुँह केँ पास किया तोँ नेहा नें बाकी केँ वीर्य कों अपनीजीभ सें चाटकर साफ किया, ज्ञान केँ चेहरे मे एक् शैतानी मुश्कुराहट सें देखते हए। झड़ने केँ बाद ज्ञान बहोत खुशहुआ, औऱ जिसतरह सें नेहा नें उसके अंतिम वीर्य केँ कतरे कों चूसा औऱ चाटा उससे ज्ञान कों बेहद आनंदआया, तोँ वोँ झुककर नेहा केँ मुँह कों अपने मुँह मे लें लिया औऱ बड़े प्रेम सें उसकोकिस किया। जैसे उसकोकोई इनामदे रहा थां।
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Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
चुदाई बस 15 मिनट केँ अंदर हौ गई थि औऱ वोँ झड़ गय़ा थां, सभी बड़ी जल्द मे हुआ क्योंकी वोँ बहोत हि उतावला थां नेहा केँ लिए पहले सें हि।
तब ज्ञान नें अपने अंडरवेर कों पहना औऱ बेड पऱ बैठा जबकी नेहा नें अपनी नाइटी कों खींचा पहनने केँ लिए। तब ज्ञान नें उससे पूछा- “तुम् रात कों कभी नाइटी नहि पहनती होँ?"
नेहा नें मुश्कुराते हुए ज्ञान कों जवाब दिया- “नहि येरात कों नहि पहनते हें चूचियां फ्री रहती हें औऱ पति कों भि तौ चाहिए होता हैं नाँ."
ज्ञान नेहा केँ लगभग बैठा औऱ कहा- “क्यूं नाइटी कों पहनरही होँ, ऐसे हि रहो मुझे तुम्हारे अंग-अंग कों औऱ निहारने दो, मन नहि भरा हैं अभि तुमको देखकर."
नेहा नें कहा- “क्यो। इतनेदेर सें नहि निहारा तुमने क्याँ?"
तब ज्ञान नें अपनी घड़ी देखी औऱ कहा-“अरे अभि तौ बहोत टाइम हैं 9:00 बजने मे। हमनेये सभीकुछ मात्र 15 मिनट मे कर लिया, यकीन नहि आँ रहा। तोँ अब क्याँ करें?"
अपनी स्ट्रैप कों कंधे पऱ ठीक करतेहुए नेहा कों वोँ लाल निशान दिखे जोँ ज्ञान नें चूसते वक्तकिए थें तौ हैरानी मे नेहा बोलीं- “ये देखो, मेरे ससुरजी औऱ देवरु येदेख लेंगे, क्याँ किया तुमने ये?” जल्दी नेहा कों खयालआया कि उसनेगलत नामलिए औऱ उसका चेहरा लाल होँ गय़ा। फिन सुधारते हुएकहा- “मेरा पति नोटिस कर लेगाइस निशान कों औऱ प्रश्न करेगा."
कुछदेर तक ज्ञान खयालों मे डूबेरहे फिन नेहा केँ चेहरे मे देखते हुएकहा- “तुमने अभि-अभि कहा कि तुम्हारे ससुरजी औऱ देवर जी हम्म्म। क्याँ बात हैं जी? वो लोगवहा तुम्हारी काँख केँ पास देखेंगे? उन लोगों कों भि वहा तक देखने कों मिलता हैं। वाउ। दोनों बहोत खुशनसीब हें तब तोँ हम्म्म.”
नेहाबेड सें कहतेहुए उतरी कि टायलेट जारही हैं औऱ कहा“ऐसे हि उसके मुँह सें ससुरजी औऱ देवर जी निकल गय़ा थां औऱ वैसेजब सुभह कों मे नाइटी मे रहती हूं, उन सबको सर्व करती रहती हूं तौ सभी देखेंगे नहि क्याँ? मेरी गोरी चमड़ी पर्र साफ-साफ लाल धब्बा दिखरहा हैं। मे यही कहना चाहती थि जब ससुरजी औऱ देवर जी कां नाम लिया तौ.” औऱ वोँ टायलेट चली गई।
ज्ञान कों लगा कि वोँ कुछ छुपारही हैं। ज्ञान अपनेमन कि गहराई मे सोचने लगा कि नेहा एक् बहोत हि गर्म लड़कीलग रही हैं तोँ क्याँ पाता कि उसके ससुरजी औऱ देवरु दोनों उसको चोदते होंगे। ये सोचते हए ज्ञान नें महसूस किया कि उसकाफिन सें खड़ा होनेलगा हैं औऱ नेहा कों एक् बूढ़े सें चुदते हुए कल्पना करनेलगा। ज्ञान नें सोचा कि एक् उम्र वाला व्यक्ति कितना खुश होता होगा नेहा जैसी इतनी अधिक हसीन, हसीन, गोरी, सेक्सी लड़की कों चोदते हुए? नेहा कां जिश्म औऱ कामुकता इतनी जबरदस्त हैं कि नेहा कों एक् बार चोदने सें बिल्कुल मन नहि भरता, एक् खालीपन सां लगता हैं औऱ बार-बार उसकेसंग लेटने कों मन चाहता हैं। नेहा इतनी अच्छी भि हैं, ऊपर सें उसकी कातिलाना अदायें, उसकी हसीन मुश्कुराहट, उसकी नाजुक बच्चे जैसे आवाज़, उसकी बोलने कि अदा, ये सभी मिलाकर नेहा कि हुस्न कों इतना जबरदस्त कर देती हें कि फरिश्ते भि बहक जाएं, नेहा कों अपने सामने पाकर। ये सभी सोचते हए ज्ञान कां फिन सें जमकर खड़ा हौ गय़ा औऱ सोचा कि वोँ एक् बार औऱ नेहा कों चोद सकेगा, क्योंकी उसकेपास अब भि बहोत टाइम थां गैरेज कों खुलने मे औऱ वर्कर्स केँ आने मे।
टायलेट मे नेहासोच रही थि कि केसे उसके मुँह सें गलतनाम निकलगये जबकि उसकोकभी अपने ससुरजी औऱ देवर जी कां नाम नहि लेना चाहिए थां। उसने सोचा कि ज्ञान इसी केँ बारे मे सोचता होगा औऱ उसको यकीन हौ। गय़ा होगा कि उसके तालुकात हें उसके देवरु औऱ ससुरजी केँ संग। वोँ फिकर करनेलगी थि। उसको गर्म महसूस होँ रही थि जिसतरह सें उसने देवर जी औऱ ससुरजी कां नाम लें लिया ज्ञान केँ सामने। उसकी इतनीआदत हौ गई थि ससुरजी औऱ देवर जी केँ संग सेक्स कों लेकर कि उन्हीं केँ नाम पहलेआते हें, जब सेक्स कि चर्चा होती हैं, क्योंकी इसघऱ मे वो दोनों हि तोँ उससे सेक्स करते थें, पति तोँ नहि करता थां कभी।
जब नेहा टायलेट सें वापसआई तौ उम्मीद कररही थि कि ज्ञान रेडी हौ गय़ा होगा वापस जाने केँ लिए, मगर उसको हैरानी हई देखकर कि वोँ अब भि बेड पर्र हि बैठाहआ थां औऱ उसका अंडर || तौ वोँ समझ गई कि उसकाफिन सें खड़ा होँ गय़ा हैं। नेहा कों ज्ञान सें शुरुआत मे डर तोँ लगी थि मगर करने केँ बाद एक् लगाओ सां हौ गय़ा। वोँ बहोत नर्मी सें पेशआया थां सेक्स केँ दौरान औऱ प्रेम सें किया थां नेहा सें औऱ मीठी मीठी बातें कररहा थां जिसने नेहा कां मनमोह लिया थां, तौ नेहा केँ दिल मे ज्ञान नें स्थान बना लिया थां उस एक् लम्हा मे हि। वोँ नेहा कों मनपसंद आँ गय़ा थां।
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