Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
अगले सुभह कों घऱ मे हलचलमची हुई थि सवेरे-सवेरे, क्योंकी नेहा कां बड़ाभाइ घऱ वापसजा रहा थां। जब वोँ अपनी वाइफ औऱ बेटी केँ संग निकल गय़ा तोँ बाकी केँ लोगों कों कुछसमय मिला ब्रेकफास्ट रेडी करके खाने कों। तभीकैब नें बाहर् हार्न बजाया, नेहा कां पिताजी निकालने हि वाला थां कि वोँ मैनेजर आया औऱ कहा कि किसी कों आने कि जरूरत तोँ नहि हैं, क्योंकी वोँ सभीकुछ संभाल सकता हैं। औऱ अगर किसीचीज कि सख़्त जरूरत पड़ी तौ वोँ स्वयं यहाआकर बोल देगा।
नेहा केँ बाप कों नहि जानां पड़ा। नेहा नें अपने बापू कों देखकर स्माइल कियाफिन आरती भाभी कि ओर देखकर मुश्कुराई औऱ ब्रेकफास्ट करनेलगी।
बाद मे जब नेहा औऱ प्रवींद्र अपना समानपैक करनेलगे सूटकेस मे तोँ एक् बार नेहा अपने पिताजी केँ संग
अकेली गई कमरे मे। नेहा कों अपनी बाहों मे भरके पिता नें कहा- "बहोत एंजाय करोगी बेटी अब तुम्, काश मे भि तुम्हारे संग जाता औऱ थोडा सां टाइम तेरेसंग बिताने कों मुझे भि मिलता इस स्पेशल मौके पऱ."
नेहा नें कहा- “मेरे जितने खुशकिश्मत तोँ आप् भि होँ पिताजी। मे अपने हनिमून पऱ जारही हूं पऱ आपको तौ मुफ्त मे आरती भाभीमिल गई यहा एक् हनिमून मानने केँ लिए, हैं कि नहि पिताजी? हाँ?"
फिन दोनों हँसने लगा।
फिन नेहा नें कहा- “बापू मुझे बहोत उत्तेजना होती हैं आपके औऱ आरती भाभी कों एक् संग सोचकर, बताओ मुझे वोँ केसे मिली आपको? वोँ म न् गई पहलीबार जब आपने उससे प्रपोज किया तोँ? केसेसभी गुजरा मुझे बताओ नाँ। वोँ मान गई, क्रोध नहि किया आपसे उसने, कुछ गड़बड़ नहि हुआ? पहलीबार कहां हुईँ उसकेघऱ याँ वोँ आपकेयहा आई थि? याँ आप् उसकेघऱ गये थें? प्लीज मुझे बताओ नां पहलीबार केसेहुआ आप् दोनों केँ बीच?"
बाप नेहा कों बताने जा हि रहा थां कि आरतीवहा आँ गई औऱ दोनों कों बात करनाबंद करना पड़ा।
औऱ आरती नें कहा- “नेहा, मुझे तुमसे बात करनी थि, प्लीज जोँ कुछ तुमने कल देखा मेरे औऱ तुम्हारे पिताजी केँ बीच उसके बारे मे कभी किसी कों कुछमत बताना प्लीज.”
नेहा नें अपनी छोटी भाभी कों देखते हुएकहा- “क्याँ? क्याँ देखा थां मैंने? कब? मैंने तौ कुछ भि नहि देखा थां भाभी."
दोनों हँसने लगे औऱ आरती नें नेहा कों जोर सें हग किया। तोँ नेहा नें आरती केँ कान मे कहा- “मेरा बूढ़ा बापू बहोत मजबूत हैं मुझेपता हैं, जितना हौ सकेखूब एंजाय करना औऱ मौके कां भरपूर फायदा उठना मेरी प्यारी भाभी। तुम् लकी हौ उसकेसंग टाइम बिताने कों, किसी कों कुछ भि पता नहि चलेगा आप् बेफिकर मज़ा करना
आरती भाभी। एक् हफ़्ता मिला आपको भि हनिमून मानने कों सो ज्यादा सें ज्यादा मज़ा करना.”
आरती कि जान मे जानआई औऱ नेहा कों औऱ जोर सें हग करतेहुए कहा- “तुम् कितनी अच्छी होँ नेहा, हमेशा खुशरहो, लोवयू.” औऱ आरती नें नेहा केँ गालों पर्र चुंबन किया।
फिन तकरीबन बारहबजे प्रवींद्र औऱ नेहाघऱ सें निकले अपने हनिमून ट्रिप पर्र। एक् बड़ी सि वेनआयी थि उनको लेने केँ लिए, सभी पहले सें प्लान कियाहुआ थां। जिस होटेल मे वो लोगजा रहे थें वहा सें ट्रांसपोर्ट आया थां उन्हें लेने केँ लिए। उस होटेल सें टूर आपरेटर वालों कि तरफ सें वैनआयी थां उनको समंदर केँ किनारे कि एक् फाइव स्टार होटेल लेँ जाने केँ लिए किसी औऱ स्टेट मे। दोनों चलेगये।
फिन नेहा केँ पिताजी नें आरती कि तरफ देखा औऱ वोँ अपने ससुरजी कि नजरों कों अपने आप् पर्र आने कां प्रतीक्षा हि कररही थि। वोँ एक् महिन साड़ी मे थि औऱ एक् बैकलेस ब्लाउज़ पहनी हुई थि जिसकी एक् डीप'वी' कट थि सामने छाती पऱ। क्लीवेज कितने दिखरहे थें कहने कि जरूरत नहि। औऱ वैसे भि आरती हमेशा बहत सेक्सी ड्रेस हि पहना करती हैं। वोँ शहर सें जोँ थि। बूढ़े कि नजरें आरती कों भूखेशेर कि तरहदेख रही थि उससमय।
औऱ टाइम बर्बाद नाँ करतेहुए उसने आरती कों गोद मे उठाया औऱ नेहा केँ घऱ केँ गेस्टरूम मे लें गय़ा। मगर एक् चीज कां खयाल नहि किया दोनों नें।
वोँ ये कि गैरेज केँ अंदर सें ज्ञान सभीदेख रहा थां औऱ उसने स्वयं सें पूछा-“कौन लोग हें ये? क्यूं एक् इतनीउमर वाले व्यक्ति नें एक् इतनी हसीन जवान लड़की कों गोद मे उठाकर घऱ केँ अंदर लेँ गय़ा भला?"
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Adultery नेहा बह के कारनामे - Desi sex story – New Episode
कड़ी_51 नेहा नें प्रवींद्र केँ संग हनिमून पऱ औऱ आरती नें ससुरजी केँ संग आनंद किया।
आप् सबकोयाद होगा कि जब नेहा अपने गाँव सें वापसचली आई थि तोँ उसके पिताजी नें केसे आरती केँ घऱ जाकर उससे नाता जोड़ा थां। बहतहाट एनकाउंटर थां वोँ जब आरती बाथरूम सें निकली थि उसदिन। औऱ अबइन दोनों ससुरजी बहू कि एक् औऱ आक्सन देखेंगे हम्। हाँ बेशकये दोनों उसदिन केँ बादकाई बारऐसे मिलते रहे औऱ इनका चक्कर चलतारहा।
सो अभि केँ लिए ससुरजी आरती कों गोद मे उठाकर बेडरूम मे लेँ गय़ा। तोँ जैसे पहलेकहा गय़ा कि उसकी साड़ी बहोत महीन थि औऱ डीप'वी' कट, स्लीवलेश औऱ बैकलेस ब्लाउज़ थि, पीठ पर्र बस एक्-दो लेस थें ब्लाउज़ कों होल्ड करने केँ लिए। आरती केँ चूतड़ों केँ मूवमेंट कमाल कि थि जब वोँ लचकते हुए चलती थि औऱ उसकी साड़ी उसकी जांघों, चूतड़ों औऱ गाण्ड पऱ जिसतरह सें चिपकी हुइ थि उन सबको आकार देतेहुए, उसकी मम्मों बस कयामत थि जब वोँ खड़ी रहती थि तब भि औऱ जब झुकती थि तौ बस जन्नत कां नजारा होता थां समझलो।
ससुरजी उसकोकिस करता गय़ा उसकीजीभ कां रस निचोड़ते हए। आरती कों बैड पऱ लेटा दिया थां नेहा केँ बापू नें औऱ स्वयं उसकेऊपर चढ़ गय़ा थां, उसकी एक् टांग आरती कि टांग पऱ थि औऱ आरती कि बाहें ससुरजी केँ कंधे सें होकर उसकीपीठ पर्र फिनरही थि। जबकि बूढ़े केँ हाथ नेहा केँ नीचेपीठ पर्र उसके ब्लाउज़ कि लेस कों खोलने कि कोशिश मे लगेहुए थें किस करने केँ दौरान।
फिन अचानक आरती नें किस कों रोकते हुएकहा- “डैड, नेहा नें क्याँ कहा थां हमको एक् संग देखकर कल
आपसे? मे तौ लज्जा सें लाल होँ गई थि औऱ मेरे पशीने छूटगये थें, उसनेसभी कुछदेख लिया थां नां?"
ससुरजी नें उसकोकिस करना जारीरखा, उसकेगाल पऱ जीभ फेरते हुए उसकेगले तक पहुँचा तब जवाब दिया "तुम् नेहा कों लेकर बिल्कुल टेन्शन मतलो रानी, वोँ किसी कों कुछ नहि बताएगी कभी."
मगर आरती नें जिद किया पूछते हुए कि नेहा नें उसको क्याँ कहाजब वोँ बाहर् चली गई तोँ?
नेहा केँ पिताजी नें अपनी आरतीबहू सें कहा- “नेहा एक् समझदार लड़की हैं, वोँ हम् दोनों कों समझ गई औऱ मुझसे मात्र इतनाकहा कि मे खूब एंजाय कररहा हूं."
आरती नें कहा-“सच? बस इतना हि कहा, वोँ हमारे लिये इतनी अच्छी क्यूं हैं? उसने मुझको अपनेहाथ मे आपका लण्ड थामेहुए देखा थां, अपने बाप केँ लण्ड कों उसकीबह केँ हाथ मे देखा औऱ आपकाहाथ मेरी जांघों पऱ थां औऱ नेहा नें आपसे केवलयह कहा कि आप् एंजाय कररहे होँ?"
आरती बोलती गई- “कमाल कि लड़की हैं नेहा भि, इतनाकुछ देखा औऱ कुछ नहि कहा उसने, तब तोँ वोँ भि आपकोखुश कर सकती हैं। अगरऐसा हुआ कि नेहा नें आपको अपनेखाट पऱ लिया तौ मुझे जरूर बताना ओके? आपकी अपनी बेटी आपकेबैड पर्र होगी तौ आप् खुश होंगे। ऐसाहुआ तोँ कहो?" नेहा केँ पिताजी कां मनकररहा थां कि वोँ आरती कों अपने औऱ नेहा केँ बारे मे सभीकुछ बतादे।
मगर उसकोडर थां कि कहींजलन केँ कारण आरती नें किसी कों बता दिया तौ क्याँ होगा, तोँ उसने आरती सें कहा- “मैंने इस बारे मे कभी नहि सोचा औऱ मेरे खयाल सें वैसाकभी नहि होगा."
पऱ तब तक आरती नें उसका लण्ड सहलाते हुएकहा- “मगरडैड, ऐसा हौ सकता हैं, ये मुमकिन हौ सकता हैं, उसने हम् दोनों कों देख लिया, तौ उसको मालूम हैं कि हम् क्याँ करते हें, तौ वोँ समझती हैं। तोँ आप् क्यूं नहि उसको ट्राइ करते होँ? फिन एक् दिन हम् तीनों एक् थ्री-सम कर पाएंगे."
तोँ नेहा केँ बापूउस आइडिया सें बहोत खुशहये। तोँ उसनेकहा- “ठीक हैं, वोँ नेहा कों ट्राइ करेगा." हकीकत मे उसकेलिए सभीअब बहोत आसान हौ गय़ा क्योंकी आरती थ्री-सम चाहती हैं औऱ नेहा कों सभीपता हैं तोँ सभी बहोत आसानी सें होँ जाएगा उसने सोचा। उसको नेहा सें मात्र इतना कहना हैं कि उसकी आरती भाभी उसकेसंग सभी करना चाहती हैं। येसभी सोचते हुए बूढा जवान होँ गय़ा औऱ जोश मे आकर आरती केँ कपड़े नोचने लगा उसके जिश्म सें। साड़ी जल्द सें निकल गई औऱ उसकी ब्लाउज़ भि उतर गई औऱ आरती कि
चूचियां ससुरजी केँ मुँह मे आँ गईं।
आरती उसकी बाहों मे थि औऱ उसकी चूचियां ससुरजी केँ मुँह मे, जबकि आरती अपने जिश्म कों सीधा करतेहुए अपनेसर कों पीछेकर रही थि। उस आक्सन सें उसकी चूचियां औऱ भि ज़्यादा ससुरजी केँ लिए हाजिर थीं। औऱ उससमय अपने हाथों सें आरती अपने ससुरजी कि पैंट उताररही थि। फिनकुछ देरबाद ससुरजी कि शर्ट भि निकाल दिया आरती नें। औऱ दोनों नेहा केँ पलंग पर्र नंगे होँ गये बिल्कुल। ससुरजी नें आरती कि मम्मों केँ साइड पर्र किस कियाफिन जीभ फेरा औऱ उसकी कांखों कों जबरदस्त चाटने लगा, आरती कि कांखें क्लीन शेवन थि, बिल्कुल सफाचट।
मस्त एपसोड भइया।
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उसके पशीने कि नमकीन लजाजत ससुरजी केँ जीभ मे, उसको आकर्षित करतीजा रही थि। जबकि आरती कसमसा रही थि, उस दौरान ससुरजी कां लण्ड आरती केँ पेट पऱ रगड़रहा थां औऱ धीरे धीरे बुर कि राहपा लिया लण्ड नें।
आरती नें सिसकते हुए जिश्म मे उठती सिहरन केँ संग अपने ससुरजी कों बाहों मे जोर सें जकड़ा एक् तड़पती आहह-आहह। केँ संग औऱ अपने ससुरजी कि जीभ कों अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी।
मगर ससुरजी नें लण्ड कों बुर मे नहि डाला बल्की उसको आरती केँ मुँह तक लें गय़ा औऱ एक् प्यासे कि तरह आरती नें उसके लण्ड कों पूरा अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी, खुशी सें एंजाय करतेहुए औऱ ससुरजी केँ चेहरे मे हरबार देखते हुए। ससुरजी गुर्राया, उसका जिश्म काँपा, औऱ उसकी आवाज़ ऐसे निकली- “ओह्ह। ओह्ह.हाँ, ऐसे हि। हाँ औऱ अंदरलो अपने मुँह मे औऱ अंदरलो इसे आरती.वाउ। बहोत मज़ा आँ रहा हैं। औऱ अंदर अपनेगले कि गहराई तक जानेदो लण्ड कों आरती। इस्स्स्स। आघघग."
आरती अपने ससुरजी केँ चेहरे मे देखते हुए उसकोउस चुसाई कि खुशी देनेलगी, अपनेगले कि गहराई तक उसके लण्ड कों लेतेहुए। औऱ कोई 10 मिनट कि चुसाई केँ बाद आरती नें कुछ नखरे करतेहुए नटखट आवाज़ मे। कहा- “हम्म्। अबबस मेरा मुँह दुखने लगा, आपका बहोत बड़ा हैं। आपके बेटे वाले सें ज़्यादा बड़ा हैं आपका."
ससुरजी मुश्कुराया औऱ अपनी छोटीबहू कि तारीफ सें खुशहुआ। औऱ फिन ससुरजी अपनीपीठ पऱ लेट गय़ा औऱ आरती कों अपनेऊपर लिया। आरती लंबी अपने ससुरजी केँ जिश्म पर्र लेटी औऱ आरती नें अपनेहाथ सें उसके लण्ड कों स्वयं अपनी बुर केँ अंदर किया, अपनी दोनों टांगों कों फैलाते हुए। उसकी सिसकी निकल पड़ीजब लण्ड उसके अंदरघसा तोँ, फिन आरती बिल्कल बैठ गई ससर केँ लण्ड पर्र जैसे एक् घोड़े पर्र बैठी हौ औऱ खद अपनी गाण्ड उछालने लगी लण्ड कों अपने बुर केँ अंदरलिए हुए।
इसबार ससुरजी केवल लेटाहुआ थां औऱ आरतीसभी कुछकर रही थि। वोँ आरती कि चूचियों कों झूलते हुएदेख रहा थां आरती केँ उछलने पर्र।
जब आरती लण्ड कां मज़ा लेने केँ लिए स्वयं ऊपर-नीचे उठक बैठककर रही थि तोँ उसकी चूचियां जिसतरह सें लटकती झूलरही थीं उसको देखकर ससुरजी कों बड़ा आनंद आँ रहा थां। ससुरजी नें अपने हाथों सें दोनों चूचियों कों मसलना शुरुआत किया औऱ आरती नें गर्दन पीछे कि तरफकर दिया तड़पती आवाज़ मे। फिन ससुरजी भि अपनीकमर हिलाने लगा लण्ड कों उसकी बुर कि ज़्यादा गहराई मे ठूसते हुए।
फिन आरती उसके लण्ड कों बुर मे लिए अपनी गाण्ड कों गोल-गोल घुमाने लगी ससुरजी पर्र बैठकर, बड़ी मस्त अंदाज सें आरती वैसाकिए जारही थि चुदाई कां मज़ा लेतेहुए जिससे ससुरजी बहोत खुशहुआ। फिनकुछ लम्हा बाद आरतीझुक कर अपने ससुरजी कि छाती पऱ अपनी चूचियां दबाते हुए उसकेगले कों चाटना शुरुआत किया, लण्डतब भि उसके अंदर हि थां।
अपने ससुरजी कि छाती केँ बालों कों अपनी चूचियों पर्र महसूस कररही थि अपने चूचियां रगड़ते हुए, औऱ कमर लगातार हिलाती जारही थि संग-संग। मतलबउपर छाती पर्र छाती रगड़रही थि, नीचेकमर सें कमर, बुर मे लण्ड, आरती प्यास रही थि, कराहती जारही थि, सिसकती जारही थि औऱ लगता थां कि अब उसकी आगजम लगभग थि औऱ ससुरजी भि जैसे झड़ने वाला थां। तौ ससुरजी नें अपनेटोस पऱ खड़े होतेहुए आरती केँ चूतड़ों कों। अपनी जांघों केँ ऊपर उठाया, औऱ अपनीकमर जोरों सें हिलाते हुए अपने लण्ड कि रफ़्तार कों बढ़ाया जोँ तेजी केँ संग आरती केँ अंदरआने जानेलगा।
तौ आरती कि जिश्म मे एक् कंपन सि उठी औऱ औऱ वोँ चिल्लाई- “हाँडैड हाँन्न आईआम कम्मिंग, हाँ। ऊओह्ह। आआहह। हम्म्म म। अयाया."
ससुरजी कां भि काम होँ गय़ा औऱ जल्द सें उसने आरती कों अपने नीचे घुमाया, औऱ अपने लण्ड कों बाहर् घसीटकर अपने वीर्य कि पिचकारी आरती कि चूचियां पर्र मारा जिसको आरती नें अपनी उंगली मे लेकर चाटा। फिन दोनों बैड पऱ थकेहुए हाँफते हुयेलेट गये। बैड कां बुराहाल थां उस वक़्त।
ज्ञान सरखपा रहा थां कि घऱ मे कौन थां, जबकि नेहा एक् हफ्ते केँ लिए बाहर् गई हुईँ हैं तौ। हाँ ज्ञान कों पता थां कि हनिमून केँ लिए नेहा एक् हफ्ते केँ लिए बाहर् गई हैं अपने पति केँ संग। ज्ञान बहत उत्तेजित हआजब उसने एक् अधेड़ व्यक्ति कों एक् गर्म जवान लड़की कों अपनी बाहों मे उठाकर अंदर लें जातेहए देखा। उसको पक्का यकीन थां कि वोँ बूढ़ा उस जवान लड़की कों चोदने जारहा थां औऱ ज्ञान नें सोचा कि उसको भि उसका हिस्सा जरूर मिलना चाहिए उस गर्म जवान लड़की सें।
अब क्योंकी ज्ञान नेहा केँ घऱ औऱ आँगन सें अच्छी तरह सें वाकिफ थां, हर कोने-कोने कां पता थां ज्ञान कों। तौ जब नेहा केँ पिताजी आरती कों बाहों मे उठाकर अंदर लें गय़ा थां तोँ जल्दी ज्ञान आँगन मे घुसा थां उन लोगों केँ दरवाजा बंद करने केँ बाद। वोँ पानी भरने केँ बहाने अंदर गय़ा थां औऱ कुछदेर बादघऱ केँ पिछवाड़े चलकर गय़ा थां, नेहा केँ कमरे तक औऱ बाहर् कि खिड़की केँ पासझुक कर सुनने कि कोशिश किया थां औऱ उसकोसभी कुछ सुनाई दिया थां, जिससे उसकोसभी कुछपता चल गय़ा।
ज्ञान कों सभीसमझ मे आँ गय़ा कि ससुरजी बहू कों चोदरहा थां, क्योंकी उसकोपता चल चुका थां विवाह मे कि वोँ लड़की नेहा कि छोटी भाभी हैं औऱ इनकी बातों सें अभि ज्ञान कि समझ मे आँ गय़ा कि बूढ़ा नेहा कां बापू हैं। ज्ञान कों बड़ी खुशी हुइ कि उसको एक् औऱ गर्म जवान लड़कीमिल रही हैं चोदने कों, मगर उसकोअब बूढ़े केँ घऱ सें निकलने कां इंतेजार थां।
उधर फाइव स्टार होटेल मे नेहा औऱ प्रवींद्र कां राजाओं कि तरह स्वागत किया गय़ा। रिसेप्शन पऱ सबमों कि नजरें नेहा पर्र गड़ी हुई थीं। वोँ एक् फ्लिमसी साड़ी मे थि, औऱ उसकी ब्लाउज़ बस एक् ब्रा कि जैसी थि जिसमें उसकी पूरी क्लीवेज दिखरही थि। वोँ कुछऐसी दिखरही थि कि हरकोई नेहा कों अपने दिमाग़ मे अपनी फैंटेसी केरूप मे सोच सकता हैं, जरूरी नहि कि इस पिक्चर मे जौ हैं उसकीतरह दिखे। इस पिक्चर मे बस उसकी साड़ी औऱ ब्लाउज़ कों देखिए। नेहा नें वेसा हि पहना थां औऱ होटेल केँ सबलोग वहीदेख रहे थें।
सबकी नजरें उसी पऱ थि रिसेप्शन मे खासकर उसकी क्लीवेज पर्र। लोग उसकोइस तरह सें देखरहे थें जैसेइस तश्वीर मे लोगदेख रहे हें।
एक् बुजर्ग व्यक्ति थां जिसने नेहा कों उसके कमरे तक लेँ गय़ा, औऱ वोँ ऐसे नेहा केँ बगल मे चलकर गय़ा जब प्रवींद्र पीछे आँ रहा थां।
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