Sagar (Full Storyd) – New Episode
bhay mein nay sirf 2 hi update paray haen joo roman mein thay kun ke mein hindi नहीं पर sakta, plz bhay koe iss kahani too roman mein krr day bht achi stoey lag rahi hay, translator use kiya lekin faida नहीं kun ke translator se kch smj नहीं a raha, plz bhay request hay plz koe iss kahani too roman mein krr दो plz
Thank you FF bhay ?. Update de diya h. Sabse pehle Sorry joo mene ap ko pahchan nahee paya. ap k jane k baad maira mood bi kuchh achaa nahee thaa. Abb thik lag raha h.?
Sagar (Full Storyd) – New Episode
eagerly waiting। कहा hu bhay। हम too yaha mausam की aas lagaye baithe h की कब baarish hongi। और ap hu के kahin और he bina ritu के baarish karne में lage pade hu.
juldi से update दो bhay। अब too kayi दिन hu gaye h। और कोई bahana नहीं chalega। की mein writer नहीं ho। fala-fala।
Thank you Manikmittalme bhay ?.Kya kare yar.kam dham k baad ap logon kee stories bi padhne baith jata hoon too update mai deri hu jata h. Waise Posts updated.
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 24। Continue.
कमरे केँ अंदरनजर पड़ते हि मे बुरीतरह चौंक गय़ा। मे दरवाजे केँ ओट मे खड़ा आंखें फाड़े दोनों सहेलियों कों देखरहा थां। उर्वशी दि एक् ऐसी हाॅट नाइटी पहनी थि जोँ उनके मांशल जांघों तक हि आती थि। उपरआधा वक्ष नंगा थां। ऐसा प्रतीत होँ रहा थां कि उन्होंने कई ब्रा याँ पैंटी नहि पहनी थि। उनका सफ़ेद औऱ अधनंगा शरीरउस नाइटी मे कहरढा रहा थां। वोँ इस टाइम ड्रेसिंग टेबल केँ सामने खड़ी होकर अपने बालों पऱ कंघीकर रही थि।
श्वेता दि शायद अभि अभि नहाकर आई थि। वोँ केवल पेटीकोट पहनेहुए थि जिसे उन्होंने अपने बड़े बड़े बूब्स पऱ आधे सें बांधरखा थां। पेटिकोट नीचे उनके घुटनों तक हि सीमित थि। औऱ उन्होंने भि कोई ब्रा पैंटी नहि पहनरखी थि। वोँ एक् तौलिए सें अपनीबाल सुखारही थि। क्याँ कहूं। शब्द नहि थें कुछ कहने केँ लिए।
इन दोनों औरतें केँ इस सेक्सी अवतार कों देखकर मेरी सांसें ऊपर कि ऊपर औऱ नीचे कि नीचे हौ गई। मेरी आंखें उनकेइन वस्त्रों केँ अन्दर छुपी हुई जन्नत कां दिदार करने केँ लिएचीर हरण करनेलग गई। मेरा लिंग मेरे पैंट औऱ जांघिया सें फड़फड़ा कर बाहर् आने केँ लिएउछल कूद मचाने लगा।
शायद दोनों खानां बनाने केँ बाद नहाई थि औऱ अब कपड़े पहनने केँ लिए तैयारी कररही हैं।
मुझे इनकी मंशा संदेहास्पद तोँ लगरही थि मगर कहीं न् कहीं मे आश्वस्त भि थां। दिन मे अचानक सें बर्थडे पार्टी करना, वाइन मंगवाना, घुमा फिराकर बहकी बहकी बातें करना। मुझेऐसा प्रतीत होँ रहा थां कि यह दोनों सहेलियां आज मेरा शिकार करने वाली हैं। औऱ ऐसा शिकार भलाकौन नहि होना चाहेगा।
मगर उत्तेजना केँ संगसंग कहीं नाँ कहीं मुझेडर भि लगरहा थां। क्याँ मे इनदो भड़कती शोलों कि आग कों अकेला बुझा पाऊंगा ? मर्दों कां तोँ एक् बार स्खलन हुआ तोँ फिन दुबारा रेडी होने मे बहोत वक्त लगता हैं मगर औरतें एक् बार स्खलन होने केँ बाद दुबारा जल्दी हि रेडी होँ जाती हैं। वोँ एक् बार केँ हि सेक्स केँ दौरान कईबार स्खलन कां सुखभोग लेती हें।
मुझेयाद आयाजब मैंने पहलीबार सेक्स किया थां। वोँ एक् पैंतीस साल कि खुबसूरत स्त्री थि। सहवास केँ दौरान उसने मुझेकुछ बातें कही थि। उसनेकहा थां हम् औरतें मात्र संभोग सें हि रज स्खलन प्राप्त नहि कर लेती बल्कि हमारे बदन मे ऐसेकई पार्ट्स हैं जिसे हमारा सेक्स पार्टनर चुम केँ, चाट केँ, रगड़ केँ, उत्तेजित कर केँ हमारे योनि सें रज स्खलन करवा सकता हैं। इनमें सें कोई एक् सें भि हम् चरमसुख प्राप्त कर सकती हें। हमारे होंठों कों चुसे जाने सें., हमारे जीभ कों चुसे जाने सें., हमारी चुचियों कों दबाये मसले जाने सें., निप्पल कों अपने होंठों मे दबाकर चुसे जाने सें., हमारे कटि प्रदेश कों प्रेम करने सें., हमारे योनि केँ अगलबगल हिस्से कों अपने होंठों सें चुमे, चाटे जाने सें।, हमारे चूतड़ों कों पकड़कर दबाये मसले जाने सें हमारी योनि स्खलन प्राप्त कर लेती हैं। कभीकभी तोँ हम् अपने कानों औऱ गले कों भि चुमने चाटने सें अपनी पानी निकाल देती हें। मतलब हम् औरतों केँ स्खलन मे बदन केँ कई पार्ट्स काम करते हें। हम् औरतें मात्र एक् बार केँ सम्भोग मे हि कईबार चरमसुख प्राप्त कर सकती हें।
मगर मर्दों केँ जिस्म मे सेंसेटिव पार्ट मात्र एक् हि हैं। उनका लिंग। जब तक लिंग कों मसला नहि जाय, रगड़ा नहि जाय, उस पर्र प्रेशर नहि दियाजाय तब तक वोँ स्खलन सुख प्राप्त नहि कर सकते। भले हि वोँ अपने हाथों सें करें याँ बैड औऱ तकिए पर्र रगड़कर करें। याँ सेक्स कर केँ करें। इसीलिए कहा गय़ा हैं कि औरतों कां सेक्स पावर मर्दों सें कई गुना अधिक होती हैं।
औरतों केँ लिए लिंग कां आकार भि कोईखास मायने नहि रखता। वोँ किसी भि आकार केँ लिंग सें चरमसुख प्राप्त कर सकती हैं। औरतें प्रेम कि भुखी होती हैं। उनका पार्टनर यदि उनकी मनोदशा कों समझे औऱ केवल अपना हि सेक्स सुख कि कामना नं रखकर अपने पार्टनर केँ सुख कां ख्याल रखें तौ वोँ अपने प्रेमी पऱ जानों जान सें न्योछावर हौ जाती हैं।
मे उसकी बातें सोचरहा थां कि उर्वशी दि कि नजरमुझ पर्र पड़ी।
" अरे ! दरवाजे पर्र खड़े खड़े होकर क्याँ कररहे हौ ? अन्दर आओ "- उर्वशी दि नें अपने बालों पर्र कंघी करतेहुए कहा।
मे कमरे मे चला गय़ा औऱ जाकर बिस्तर पर्र बैठ गय़ा।
" कहां चलेगए थें ?"- श्वेता दि नें पूछा। वोँ अभि भि अपने बालों कों तौलिए सें पोंछे जारही थि।
" कहीं नहि गय़ा थां। तुम् दोनों खानां बनाने मे बिजी थि तौ नीचे आन्टी केँ घऱ मे चला गय़ा। "
वोँ दोनों ड्रेसिंग टेबल केँ सामने खड़ी थि। मे दोनों कों बारी बारी सें देखेजा रहा थां। उनकी बड़ी बड़ी छातियों सें नजर हटती तौ उनके जांघों पर्र चली जाती। वहां सें हटती तोँ फिन उनकी गोलाईयों पर्र चली जाती।
" किसकी अच्छी हैं ?"- उर्वशी दि कि आवाज़ सुनकर मेरा ध्यान टुटा।
" क्याँ ?"- मे उनकी बड़ी बड़ी गोलाईयों कों देखते हुएकहा।
" बाल। हम् दोनों मे किसकी बाल अच्छी हैं ?" - वोँ धूर्तता पूर्वक मुस्कराते हुए बोलि।
मेरी आंखें उनकी बालों पऱ पड़ी। कमर तक लम्बी। जौ नहाने केँ कारण भींगी हुई थि।
" बाल ! मे तौ कुछ औऱ हि समझा थां। "
" फिलहाल तोँ बाल केँ बारे मे हि बताओ ?"
" बालों केँ बारे मे तौ मुझसे पुछोमत। "
" क्यूं ?"
" इन बालों केँ चक्कर मे एक् बार मेरी बड़ी फजीहत हौ चुकी हैं। "
" क्याँ हुआ थां ?"- श्वेता दि अपनेबाल पोछते हुए बोलि।
" छोड़ो, क्याँ करोगी जानकर। बड़ी दर्दभरी कथा हैं। "
" अच्छा ! ऐसा क्याँ। तब तोँ जरूर सुनूंगी "- उर्वशी दि कंघी कों ड्रेसिंग टेबल पर्र रखकर मेरेबगल मे बैठते हुए बोलि।
उनके मेरेबगल मे बैठने सें उनकी जांघें मेरी जांघों सें सट गई।
" जब मे बीएस सि फर्स्ट इयर कां स्टूडेंट थां तबयह दुर्घटना मेरेसंग घटी थि। "
" क्याँ हुआ थां ?"- श्वेता दि भि आकर मेरे दूसरे साईड बैठते हुए बोलि।
अब मे दोनों ओर सें दो खुबसूरत अधनंगी हसीनाओं केँ बीच थां। दोनों कि सेक्सी मोटी मोटी जांघें मेरे दोनों जांघों कों स्पर्श कररही थि। एक् सेक्सी नाइटी पहनी हुइ तोँ एक् केवल पेटीकोट पहने हुई। मे हवा मे उड़ने लगा।
" अरे ! कहो भि "- उर्वशी दि मेरेगाल कों खिंचती हुईं बोलीं।
मे जमीन पऱ आतेहुए बोला - " एक् दिन दोपहर केँ समय मे अपने दोस्तों केँ संग कालेज कैम्पस मे बातें कररहा थां। हमसे थोड़ी सि हि दुरी पर्र कुछ लड़कियां खड़ी थि। वोँ भि आपस मे खुसुर फुसुर कररही थि। उनमें एक् लड़की बहुत हसीन थि। अच्छी हाइट काठी थि उसकी। मगर उसमें जौ खासबात थि वोँ उसकीबाल थि। काली काली घुंघराले बाल जोँ उसकीआधी पीठ तक हि आती थि। जैसे माधुरी दीक्षित कि साजन मूवी मे थि। मेरे दोस्तों नें मुझे डेयर दिया कि मे उस लड़की सें बात करके दिखाऊं। मे अपने आपको तीसमार खान समझता हि थां सो मे बेफिक्र होकर मस्ती सें उन लड़कियों केँ पासचला गय़ा। वेसब अचानक सें मुझेआया देखकर चौंकी। मे उस घुंघराले बाल वाली लड़की केँ सामने गय़ा औऱ उसके बालों कि बड़ाई कर दि। "
" क्याँ बोला तुमने ?"- श्वेता दि बोलि।
" मैंने कहामिस, आपकीबाल बहोत हि हसीन हैं। लम्बे लम्बे
.काले काले। घुंघराले घुंघराले। "
" फिन क्याँ बोलीं लड़की "- इसबार उर्वशी नें पूछा।
" फिन.फिन उस लड़की नें एक् जोरदार कां तमाचा मेरेगाल पर्र जड़ दिया औऱ भुनभुनाती हुइ वहां सें चली गई। "
" क्याँ ! मात्र इतनी सि बात पऱ तुम्हें तमाचा मार दिया। तुमने तोँ कुछ भि खराब नहि कहा बल्कि उसकी बड़ाई हि कि "- श्वेता दि आश्चर्य करतेहुए बोलीं।
" वही तोँ। तब मुझे क्याँ पता थां कि बाल कि बड़ाई करने सें तमाचे भि खाने पड़ते हें। मगरकुछ दिनों बाद मुझे मालूम पड़ा कि उसने मुझे तमाचा क्यूं मारा। "
" क्यूं मारा ?"- श्वेता दि बोलीं।
" दरअसल वोँ लड़की बंगाली थि। औऱ बंगला भाषा मे बाल कां मतलब झांट होता हैं। "
" क्याँ ?"- दोनों एक् संग बोलि।
औऱ जोरजोर सें हंसने लगी।
" औऱ बाल कों क्याँ बोलती हैं ?"- श्वेता दि नें हंसते हुएकहा।
" चुल याँ केश। यदि पंकज उधास कों मालूम होता तोँ वोँ ' बंगाल कां चमत्कार बालों मे ' वाली गज़लकभी भि नहि गाता। "
वोँ दोनों हंसेजा रही थि।
मे चिढ़ते हुए बोला -" अब तुम् दोनों गला फाड़कर मुस्कुराना बंदकरो। औऱ यह बताओ कि खाने पीने कां क्याँ इंतजाम हैं। "
" भुखलगी हैं ?"- उर्वशी दि नें हंसते हुएकहा।
" अरे ! जश्नरखा हैं तोँ कुछ फिलहाल केँ लिए हल्का फुल्का हि खाने पीने कां इंतजाम करो ?"
" क्याँ श्वेता " - उर्वशी दि नें श्वेता दि कि तरफ देखते हुएकहा -" कैसी बेहन हैं तु। भइया कों भुखलगी हैं औऱ तुकुछ कर नहि रही हैं। "
" क्यूं नहि करूंगी। मेरा भइया हैं तोँ मे हि न् अपने भइया केँ भुख प्यास कां ख्याल करूंगी " - कहतेहुए श्वेता दि नें मेरेसिर पऱ हाथरखा ओर झुकाकर अपने सीने पर्र मेरा मुंहकर दिया। मेरा मुंह उसकी नंगी चूचियों सें जा चिपका।
उन्होंने न् जानेकब अपने पेटीकोट कों अपने छाती सें नीचे घिसका दिया थां। मे हतप्रभ तरन्नुम मे उनकी निप्पल कों मुंह मे डाला औऱ फिनसभी कुछभुल गय़ा।
वाउ ! वाउ ! क्याँ दिन थां आज कां। लोग-बाग ख्वाब देखते हें औऱ मे हकीकत जीरहा थां। वैसे दोनों सहेलियां थोड़ी डोमिनेट जैसेलग रही थि पऱ मुझे उससे क्याँ। डोमिनेट हौ याँ सवमिसिव मुझे तौ मज़ा हि आनां थां।
मे श्वेता दि कि चुचियों कों प्रेम सें मुंह मे लेकर चुसेजा रहा थां कि उर्वशी दि कि आवाज़ आई।
" तेरे भइया कों तोँ पता हि नहि हैं श्वेता। इसे तोँ मेरे हसबैंड सें सिखना चाहिए कि बेहन कि चुचियों कों केसे प्रेम किया जाता हैं। "
मे सुनते हि श्वेता दि केँ चुचियों सें अपना मुंह हटाया औऱ हैरत सें उर्वशी दि कि तरफ देखा।
" क्याँ कहा आपने ?"
" बहरे हौ ?"
" आप् केँ कहने कां मतलब संजयजी औऱ मधुमिता कां आपस मे सेक्सुअल रिलेशनशिप हैं ?"
" हां। "
मैंने आश्चर्य सें उनकीतरफ देखाफिन श्वेता दि कि ओर देखा। श्वेता दि केँ चेहरे केँ हाव-भाव सें लगता थां कि उन्हें इस केँ बारे मे सभीपता हैं। मैंने फिन उर्वशी दि कि तरफ देखा औऱ कहा -" आप् कों केसेपता ?"
" बताऊंगी सोना। पहले बाथरूम जाओ औऱ नहाधो कर फ्रेश हौ करआओ। फिन बर्थडे पार्टी करते हें। औऱ फिन बातें भि करते रहेंगे "- उर्वशी दि नें मुस्कुराते हुएकहा।
मैंने श्वेता दि कि तरफ देखा। वोँ अपनी पेटीकोट कों पहले कि हि तरह बांधली थि। उन्होंने भि मुस्करा कर अपनी सहमति जताई।
मे बिनाकुछ कहे अटैच बाथरूम मे घुस गय़ा औऱ रेडी होँ कर बाहर् आया। श्वेता दि नें जीजू कां शार्ट दिया थां। मेरे शरीर पऱ शार्ट केँ अलावा कुछ नहि थां। जब मे बाथरूम सें बाहर् आया तोँ देखा कि वे दोनों पहले वाली हि ड्रेस मे हि थि। उन्होंने कोई भि वस्त्र चेंज नहि किया थां। दोनों बिस्तर पऱ बैठी थि। बिस्तर सें सटकर टेबललगा हुआ थां औऱ उसकेउपर बीयर कां बोतल, मेरी स्काच कि छोटी बोतल, तीन ग्लास, एक् प्लेट मे ड्राई फ्रूट्स, एक् प्लेट मे सलाद औऱ एक् बड़े सें प्लेट मे बोनलेस चिकन चीलीरखा हुआ थां। उन्होंने जाम कि तैयारी कररखी थि।
मे बिस्तर केँ पास पहुँचा तौ उर्वशी दि नें मेरेहाथ कों पकड़कर अपने औऱ श्वेता दि केँ बीच बैठा दिया। हम् तीनों सटकर बैठे थें। मे उन दोनों केँ बदन सें आती हुईँ गर्मी सें पिघले हुएभाप बनेंजा रहा थां। मेरा लिंग जोँ नहाने केँ बाद थोडा शांत थां फिन सें अपनी औकात मे आनेलगा।
उर्वशी दि नें दो ग्लास मे बीयर ढाला औऱ एक् ग्लास मे मेरा वाइन।
फिन चीयर्स बोलकर अपना अपना ग्लास हमने अपने होंठों सें लगाया।
मैंने एक् घुंट मारा औऱ चटखारे लेतेहुए कहा - " अब बताओ तुम्हारे हसबैंड औऱ तुम्हारे ननदी कि प्यार कथा। "
" बताती हूं, थोड़ी सि औऱ बीयरपेट मे जायफिन बताती हूं "- उर्वशी दि नें बीयर पीतेहुए कहा।
इसबीच मे उठकर अपना फेवरेट सिगरेट क्लासिक अपने पैंट मे सें निकाला औऱ वापसउसी स्थान पर्र बैठ गय़ा।
जब एक् एक् ग्लास उन्होंने खतम कियातब उर्वशी नें हल्के तरंग मे बोल्ना शुरुआत किया -" आगरा केँ होटल मे उसरात एक् कमरे मे जब तुम् दोनों भइया बेहन अपनीरास लीलारचा रहे थें उसी वक़्त एक् दूसरे रूम मे एक् दूसरे भइया बेहन कि कामूक गाथा लिखीजा रही थि। "
मे सिगरेट सुलगाया औऱ कश लगाते हुएकहा -" शुरुआत सें बताना ?"
उन्होंने बोल्ना शुरुआत किया।
" संजय कों तुम् जानते हि हौ। दिखने मे स्मार्ट, हैंडसम, टाॅल, खुबसूरत औऱ वही उनकी बेहन मधुमिता जौ बिल्कुल हूबहू आयशा टाकिया कि जिरक्स काॅपी। मे जब विवाह करकेउस घऱ मे गई तब सें हि मुझेइन दोनों भइया बेहन मे कुछ ज़्यादा हि प्यार भावदिख रहा थां। मगर मैंने कभी भि उन दोनों कों कोई ग़लत हरकत करतेहुए नहि देखा थां। आगरा मे रिसेप्शन बर्थडे पार्टी वालीरात केँ बारे मे तुम्हें पता हि हैं कि हम् सब नें वाइनपी थि। नशासब कों थोडा बहोत थां। रात मे खाने पीने केँ बाद तुम् भइया बेहन अपने कमरे मे चलेगए। औऱ मे अपने कमरे मे। संजय कों उसरात अपने दोस्तों केँ संगताश खेलने कां प्रोग्राम थां तोँ वोँ अपने दोस्तों केँ पासचले गए। मे अपने कमरे मे अकेले बोर होँ रही थि तोँ मैंने मधुमिता कों मोबाइल किया औऱ कहा कि वोँ मेरेरूम मे चलीआए। मधुमिता अपनी सहेलियों केँ संग एक् रूम मे थि। वोँ मेरीबात सुनते हि मेरेरूम मे चलीआई। शायदउस वक़्त रात केँ बारहबज रहे होंगे। मे उसे देखते हि समझ गई कि उस नें भि वाइनपी रखी हैं। मेरे पुछने पर्र उसने बताया कि वोँ अपनी सहेलियों केँ संगरूम केँ अंदरबैठ कर वाइनपी थि। मैंने इस पऱ ज़्यादा तवज्जो नहि दि। मैंने दरवाजा बंद कि औऱ हम् दोनो नें नाइट ड्रेस पहनी औऱ पलंग पऱ लेट गई। लाईट हमने पहले हि बंदकर दि थि।
नशा औऱ थोड़ी थकावट केँ कारण मे जल्द हि सो गई। रात केँ किसी वक़्त रूम मे बेल बजने कि आवाज़ सें मेरी नींदटुट गई। आलस केँ चलते उठने कां मन नहि करता थां। तभी मैंने देखा मधुमिता बैड सें उठी औऱ बोलि -" कौन हैं ?"
" मे हूं। " संजय कि आवाज़ आई।
मधुमिता खाट सें उठी औऱ दरवाजा खोल दि। संजय कमरे मे प्रवेश किए औऱ दरवाजे कों बंदकर दिया।
मधुमिता कि आवाज़ आई -" दरवाजा क्यूं बंदकर दिया आपने। मे अपने कमरे मे जाती हूं नं। "
" रात केँ दोबजरहे हें, कहां जाओगी ? सब गहरी नींद मे सोए होंगे। यही पे सोजाओ। " संजय नें कहा।
फिन किसी कि आवाज़ नहि आई। कमरे मे अंधेरा थां मगर एक् नाइट बल्बजल रहा थां जिससे हल्की हल्की रोशनी थि। मैंने सोने केँ लिए अपनी आंखें बंदकर दि। मे खाट केँ किनारे पर्र सोई थि। मेरेबगल मे मधुमिता लेटी थि। संजय भि कपड़े उतारकर केवल एक् शार्ट पहनकर खाट केँ दुसरे किनारे लेटगए। बिस्तर बड़ा थां इसलिये सोने मे किसी प्रकार कि असुविधा नहि थि। मधुमिता हम् दोनों केँ बीचसोई थि।
संजय केँ बेल बजाने, कमरे मे आने औऱ उनकेखाट पऱ लेटने तक मे उठी नहि तोँ उन्हें लगा कि मे गहरी नींद मे सोई हुई हूं। औऱ उन्हें यह भि पता थां कि मैंने वाइन भि पी थि। संजय जानते थें कि मुझेआधे बोतल बीयर मे हि नशा होँ जाता हैं। औऱ बीयर पीने केँ बाद एक् बारसोई तोँ फिनकोई कितना भि चिल्लाए, नींद नहि टुटती हैं। मगरउस रात न् जाने क्यूं एक् बार जौ नींद टुटीफिन दुबारा आँ नहि रही थि। शायदनई स्थान औऱ बर्थडे पार्टी मे हुइ घटनाओं केँ चलते। मैंने आंखबंद करली औऱ नींदआने कां प्रतीक्षा करनेलगी।
आंखबंद किए बहुतदेर हौ चुकी थि तभी मुझेकुछ अजीब सां महसूस हुआ। शायद बिस्तर पऱ उन दोनों केँ हिलने डुलने सें लगा थां। मैंने आंखें खोली औऱ लेटेहुए हि उन्हें देखा। दोनों जोँ पहले करवट केँ बल लेटेहुए थें, अबपीठ केँ बल होँ गए थें। मैंने फिन सें अपनी आंखें बंदकर ली।
थोड़ी देरबाद संजय केँ धीरे-धीरे सें एक् बार खांसने कि आवाज़ आई। उसकेचार पांच मिनटबाद मधुमिता कि एक् बार खांसने कि आवाज़ आई। शायद वोँ अभि भि जगेहुए थें। मैंने अधिक ध्यान नहि दिया औऱ सोने कां प्रयास करनेलगी।
तभी मुझेफिन सें संजय केँ एक् हि बार वाली खांसने कि आवाज़ आई। मुझे क्रोध आनेलगा। इनके खांसने सें मुझे नींद नहि आँ रही थि। मैंने कुछकहा नहि औऱ सोने कि कोशिश करनेलगी। थोड़ी देरबाद मधुमिता कि खांसने कि आवाज़ आई। मेरामन वितृष्णा सें भर गय़ा। इन दोनों भइया बेहन नें तौ खांसने कां अन्ताक्षरी शुरुआत कर दिया हैं। खैर, मे क्याँ कर सकती थि। मे फिन सें सोने कि कोशिश करनेलगी।
थोड़ी देरबाद संजय कि फिन सें खांसने कि आवाज़ आई औऱ उसके जल्दी बाद मधुमिता भि खांसी। अचानक सें मेरे दिमाग़ कि बत्ती जली। यह तोँ कोई औऱ चक्कर लगरहा हैं। मेरी सांसें तेज हौ गई औऱ मेरेदिल कि धड़कन बढ़ गई। मे सांस रोकेपीठ केँ बल लेटे उनकेइस गेम कां प्रतीक्षा करनेलगी। मे भले हि पीठ केँ बल लेटी हुईँ थि मगर मेरा चेहरा उनकेतरफ हि थां। मे कनखियों सें उन्हें देखरही थि औऱ उनके अगलेकदम कां प्रतीक्षा करनेलगी।
थोड़ी देरबाद मैंने संजय कों हाथों कि कूहनी केँ बल अपनेबदन कों उठाते देखा। उन्होंने मधुमिता केँ चेहरे पऱ निगाह डाला औऱ फिन मेरे चेहरे पर्र। मे कनखियों सें उनकी हरकतें देखरही थि। तभी वोँ घसककर आगेआये औऱ मधुमिता केँ जिस्म सें चिपकगए। फिन अपने कूहनियों केँ बलउठकर अपना एक् हाथ मधुमिता कि चुची कों नाइटी केँ ऊपर सें धीरे-धीरे सें पकड़ते हुए मेरीतरफ झुके औऱ मेरे चेहरे केँ पास अपना मुंह लाकर धीरे-धीरे सें बोले " उर्वशी सो गई होँ क्याँ ?"
मैंने अपनी आंखें मजबुती सें बंदकर ली औऱ अपनी सांसें रोकली। थोड़ी देरबाद उन्होंने अपना चेहरा मेरे चेहरे पऱ सें हटाया औऱ वापस अपने स्थान पऱ लेटगए।
जिसतरह सें उन्होंने मधुमिता कि चुची कों पकड़ा थां वोँ देखकर मे नं जाने क्यूं बहोत उत्तेजित होँ गई। एक् बड़े भइया कां अपनी छोटी बेहन कि चुची पकड़ना मुझे बहोत उत्तेजित कररहा थां। औऱ सबसे बड़ीबात यह थि कि मधुमिता नें कोई ओब्जेक्सन नहि किया थां। वोँ जगी हुइ हैं यह तौ मे श्योर जानती थि।
दसेक मिनट केँ बादफिन सें संजय कि धीमे सें आवाज़ आई -" उर्वशी, उर्वशी। " मे चुपचाप सोने कां नाटक करतीरही।
थोड़ी देरबाद उन्होंने वैसे हि धीरे-धीरे सें फुसफुसा कर बोला -" मधु, मधु। "
वोँ अब अपनी बेहन कों पुकार रहे थें मगर उसने भि कोई जबाव नहि दिया।
दो मिनटबाद उन्होंने मधुमिता कों फिन सें धीरे-धीरे सें पुकारा। इसबार मधुमिता नें धीरे-धीरे सें कहा - हम्म्। "
संजय मधुमिता कि तरफ करवट होतेहुए धीरे-धीरे सें बोले -" उर्वशी सो गई हैं क्याँ ?"
" पता नहि "- मधुमिता नें धीरे-धीरे सें कहा।
" देख नाँ ! सो गई हैं क्याँ ?"
" आप् स्वयं हि देखलो। मुझे निंद आँ रही हैं "- कहकर वोँ पीठ केँ बललेट गई।
मे कनखियों सें सभीकुछ देखरही थि। वोँ फिन सें अपने हाथों कि कूहनियों केँ सहारे उठे औऱ अपने दोनों हथेलियों सें मधुमिता कि दोनों चूचियों कों नाइटी केँ ऊपर सें दबोचते हुए मेरीतरफ झुके। फिन मुझेनाम सें धीरे-धीरे सें पुकारा। मे चुपचाप गहरी नींद मे सोने कां नाटक करतीरही। दोचार सेकेंड बाद वोँ अपना चेहरा मुझ पर्र सें हटाकर मधुमिता केँ उपर किया।
फिन वोँ मधुमिता केँ बदन पऱ झुकते हुए उसकी दोनों चूचियों कों दबाते हुए उसके कानों मे धीरे-धीरे सें कहा -" उर्वशी गहरी नींद मे सोई हुईँ हैं, वोँ सुभह सें पहले नहि उठने वाली। "
" हम्म्." मधुमिता कि बहोत हि धीरे-धीरे सें आवाज़ आई।
मे यह देखकर बहोत हि उत्तेजित होँ गई। मधुमिता नें अपनी चुचियों कों पकड़े जाने पर्र कुछ भि नहि कहा। मेरी बुर मे पानीभर गय़ा। मैंने उनकी नजरें बचाकर अपनेहाथ कों अपने जांघों केँ बीच लें गई औऱ अपनी बुर मे ऊंगली डाल दि। इनसेस्ट किस्सा पढ़ी थि मैंने मगरकभी प्रत्यक्ष होतेहुए नहि देखी थि। "
" फिन क्याँ हुआ ?" - मैंने वाइन कां लास्ट घूंट मारते हुएकहा।
" फिन क्याँ होना थां ? एक् मिनट केँ अंदर दोनों भइया बेहन पुरेनंग धड़ंग होँ गए औऱ फिन चुमा चाटी, चुसा चुसी, 69, फोर प्ले औऱ लास्ट मे घमासान चुदाई " - उर्वशी दि नें कहा।
उर्वशी दि कि इन बातों औऱ वाइन पीने पिलाने केँ दौरान हम् तीनों भि इस दौरान वस्त्र हिन हौ गए थें। औऱ संजय औऱ मधुमिता कि सेक्स किस्सा सुनकर बहुत उत्तेजित होँ गए थें।
फिन हमारा थ्रीसम सेक्स शुरुआत हुआ जोँ मेरी जीवन कां पहला औऱ सबसे बढ़िया एक्सपिरियंस रहा।
Sagar (Full Storyd) - Continue reading next part
Relavant source : click here