Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 24। A
श्वेता दि औऱ उर्वशी दोनों संभ्रांत परिवार कि महिलाएं थि। एक् मेरी कजिन सिस्टर थि तोँ दुसरी उनकीखास सहेली जिनहे मे दिदी कह केँ पुकारता थां। औऱ उन दोनों केँ संग मे सेक्स कर चुका थां। मगर दोनों केँ संगअलग अलग हि किया थां। इकठ्ठे कभी नहि हुआ थां। आजजिस तरह सें दोनों नें भरी दोपहरिया मे ड्रिंक्स बर्थडे पार्टी कां आयोजन किया थां ऐसा पहलेकभी नहि हुआ थां। वोँ ड्रिंकर नहि थि मगरआज ड्रिंक्स कां इंतजाम किएहुए थि।
दोनों जानती थि कि मैंने उन दोनों केँ संग सेक्स कियाहुआ थां औऱ वे अपनेहाव भाव सें इस पऱ मजाक भि कर दिया करती थि।
आजजब उर्वशी नें अपने हसबैंड संजय औऱ उनकी बेहन मधुमिता केँ नाजायज संबंधों कि दास्तान सुनाई तोँ रूम कां माहौल बहुत वासनामई हौ गय़ा थां। उत्तेजना मेरेसर पर्र चढ़कर नाचने लगा थां।
बड़ी मुश्किल सें अपनी भावनाओं कों दबाकर रखा थां कि कब अपनी लोवर निकाल कर स्वयं कों पुरीतरह सें नंगाकर लूं औऱ उन दोनों केँ बदन सें एक् केवल कपड़े उतारकर उन्हें भि पुरीतरह सें नंगाकर दूं औऱ दोनों केँ संग घमासान बिस्तर कबड्डी शुरुआत करदूं। औऱ हुआ भि। क्याँ गजब कां हुआ। यह मेरी लाइफ कि पहली औऱ सबसे शानदार थ्रीसम सेक्स थि।
श्वेता दि केँ घऱ सें मे लगभगचार बजे केँ आसपास निकला औऱ सीधे अपनेघऱ चला गय़ा। मेनगेट पऱ तालालगा हुआ थां। मुझेलगा शायद माॅम चाची केँ पास हौ। मे चाची केँ घऱ गय़ा। माॅम वहीं थि। वोँ दोनों आपस मे बातें कररही थि। मुझे देखते हि माॅम नें चाबी सौंपी औऱ कहा कि तुघऱचल मे थोड़ी देर मे आती हूं।
मे घऱआया औऱ अपने कमरे मे खाट पऱ लेट गय़ा। आज कि सुखद घटनाओं केँ बारे मे सोचकर मेरा लंड फिन सें खड़ा होनेलगा। मुझे उर्वशी दि कि वोँ बातें यादआने लगीजब उन्होंने विस्तार सें संजयजी औऱ मधुमिता कि पहली चुदाई केँ बारे मे बताया थां। मे फ्लैश बैक मे चला गय़ा।
*****
जब मेरेयह पुछने पर्र कि " फिन क्याँ हुआ " केँ जबाव मे उर्वशी नें कहा कि " फिन क्याँ होना थां थोड़ी देर मे दोनों भइया बेहन नंगे, चुमा चाटी औऱ घमासान चुदाई " तोँ मैंने कहा - नहि उर्वशी दि, ऐसे नहि जरा डिटेल मे बताओ ?"
" अभि नहि। पहलेयह सभीसाफ करते हें "- श्वेता दि नें जुठे बर्तनों कि तरफ इशारा करतेहुए कहा -" फिन आहिस्ता बताना। "
दोनों सहेलियां आधे घंटे केँ अंदरसभी कुछ साफ़कर दि। मे पलंग पऱ लेटाहुआ बड़ी बेसब्री सें उनकेआने कां प्रतीक्षा कररहा थां। थोड़ी देरबाद दोनों आई औऱ पलंग पऱ चढ़कर मेरेअगल बगललेट गई। मे दोनों केँ बीच मे सैंडविच बना गय़ा थां।
तभी उर्वशी नें मुझे अपनीओर घुमाया औऱ अपनी नाइटी कों अपने कंधों सें नीचे सरका दिया जिससे उनकीदुध सें भि गोरी३६ डी साईज कि बड़ी बड़ी चूचियां नंगी हौ गई। उन्होंने अपनी चूचियों कों अपने हाथों सें पकड़ा औऱ निप्पल मेरे मुंह मे डाल दि। मे आश्चर्यचकित उनकी किसमिस कि तरह निप्पल कों अपने मुंहडाल कर चूसने लगा। तभी एक् हाथ मैंने अपनी लोवर केँ अन्दर जाता महसूस किया। मैंने अपनी नजरें नीचे कि। देखा श्वेता दि कां हाथ थां। वोँ लोवर केँ अन्दर मेरे खड़े लंड कों अपने हाथों सें पकड़कर सहलाने लगी। मैंने उनकी चेहरे पऱ नजर डाली वोँ उर्वशी कि तरफदेख रही थि।
मे तौ जैसे इन्द्र केँ दरबार मे थां। एक् तरफ एक् अप्सरा उर्वशी कि चुचीचुस रहा थां तोँ दुसरी तरफ एक् अप्सरा श्वेता मेरा लंड अपने कोमल हाथों सें हिलारही थि।
" बोल नाँ फिन क्याँ हुआ ?"- श्वेता दि नें उर्वशी कों कहा।
" बताती हूं नां, इतना हड़बड़ क्यूं कररही हैं। तुम को तोँ सभी बताया हि थां "- कहतेहुए उर्वशी नें मेरेउपर सें अपनीहाथ बढ़ाकर श्वेता दि कि पेटिकोट कों खिंचकर उसकी चूचियों कों नंगाकर दिया औऱ उनकी चूचियों कों दबाने लगी।
" भइया कों पता नहि हैं नाँ, इसेबता "- कहतेहुए श्वेता दि नें मेरेसिर कों पकड़कर अपनीतरफ खींचा जिससे मेरे मुंह सें उर्वशी दि कि निप्पल ' पक ' कि आवाज़ केँ संग निकल गई औऱ वोँ अपनी मम्मों कों मेरे मुंह मे दबाते हुए बोलि -" क्यूं सागर, भइया बेहन कि लवस्टोरी सुनना हैं नं। "
मे वासना सें लथपथ श्वेता दि कि बड़ी बड़ी चूचियों केँ ऊपर अपने मुंह रगड़ते हुए " हम्म् " कहा औऱ निप्पल कों अपने मुंह मे लेकर बुरीतरह चूसने लगा। दो अलग-अलग चुचियों कां स्वाद एक् संग लेँ रहा थां।
तभी उर्वशी नें श्वेता दि केँ हाथ कों हटाकर मेरा लंड अपने हाथों सें पकड़ लिया औऱ मुठ मारते हुए बोलि -" हां तोँ मे कहां थि ?"
" तुने बताया थां कि तेरे हसबैंड नें मधुमिता कि चुचियों कों उसके नाइटी केँ ऊपर सें अपने दोनों हाथों सें पकड़ते हुए उसके कानों मे धीरे-धीरे सें कहा थां कि उर्वशी गहरी नींद मे सो गई हैं वोँ अब सुभह सें पहले नहि उठने वाली हैं केँ जबाव मे मधुमिता नें " हम्म् " कहा। "
" हां। उसकेबाद एक् दो मिनट तक वे दोनों भइया बेहन वैसे हि पड़ेरहे। संजय कां एक् पैर मधुमिता केँ अधनंगी मांशल जांघों पऱ थां। उसके दोनों हाथ उसकी दोनों चूचियों पऱ थां औऱ उसका मुंह मधुमिता केँ सर पऱ कानों केँ पास थां। जब मधुमिता नें कोई प्रतिवाद नहि किया तौ संजय नें उसकी चूचियों कों अपने हाथों सें धीरे-धीरे सें दबा दिया।
(दोनों सहेलियों कों इतना खुलकर बातें करतेहुए देख मे हैरान होने केँ संग-संग बहोत उत्तेजित भि थां। )
तभी मधुमिता कि धीरे-धीरे सें आवाज़ आई -" हटो नां भइया ? भाभीउठ जायेंगी। "
" नहि उठेगी, मे जानता हूं "- वोँ उसके जिस्म सें जोंक कि तरह चिपकगये। अपने नंगे जांघ कों उसकी मोटी अधनंगी जांघो पर्र रगड़ने लगे।
मधुमिता उसकेभार सें कसमसाते हुए बोलीं -" ठीक हैं नहि उठेगी मगर अपनाहाथ हटाओ वहां सें ?"
" कहां सें हटाऊं ? "- संजयउसे छेड़ते हुए बोले।
" जहां पऱ हैं। "
" कहां पर्र हैं ?" - कहतेहुए संजय नें उसकी चूचियों कों जोर सें मसल दिया।
मधुमिता जोर सें सिसकियां भरतेहुए बोलि -" मेरी छाती पर्र। "
" तुम् हि हटादो नं "- वोँ उसकी चूचियों कों एक् बारफिन सें दबाते हुए बोले।
" मे क्यूं हटाऊं ? जिसने रखा हैं वोँ हटाए। "
( रूम मे एसी चालू थां इसलिये मे ब्लैंकेट ओढ़ी हुई थि। मगर उनके हरकतों सें मुझे गर्मी महसूस होनेलगी। उनकी हरकतों कों देखकर मेरा विश्वास पक्का हौ रहा थां कि इन दोनों केँ बीच मे बहोत पहले सें कुछकुछ थां। मधुमिता कां चेहरा मेरीतरफ थां। मैंने साफ देखा वोँ यह बोलते वक़्त धीरे-धीरे सें मुस्कुराई थि। साली कों बड़ी आनंद आँ रहा थां अपने बड़े भइया सें चुचियां मिसवाने मे। औऱ नखरेऐसे कररही थि कि पुछोमत। औऱ संजय भि शायद उसकी नखरों कों समझरहे थें। )
" नहि हटरहा हैं दोस्त, लगता हैं गोंद कि तरह चिपक गय़ा हैं "- उन्होंने उसके कानों कि लौ कों होंठों सें दबाकर चुसते हुएकहा।
" तुम् बहोत बदमाशी कररहे हौ भइया। हटाओ न्, दुखता हैं "- वोँ नाटक करतेहुए बोलि।
" अगरऐसा हैं तोँ स्वयं हि हटादो। "
" नहि, आपनेरखा हैं तोँ आप् हि हटाओ "
" ठीक हैं हटाता हूं मगर पहलेयह बताओ कि किस पर्र सें हाथ हटाऊं ?" वोँ उसकी गालों कों चूमने लगे।
( मधुमिता केँ चेहरे कि हावभाव सें मुझेसमझ मे आँ रहा थां कि वोँ बहोत अधिक उत्तेजित होँ गई हैं। वोँ अपने होंठों कों बारबार अपनेजीभ सें गीलाकर रही थि। औऱ उसकेसंग संग मे भि बहोत उत्तेजित हौ गई थि। मुझे क्रोध आनां चाहिए थां मगर मे इन दोनों केँ इरोटिक गेम देखकर गर्म होँ रही थि। मेरी बुर मे पानीभर गय़ा थां। जब शराब औऱ शबाब कां चमत्कार चलता हैं तौ बुद्धि घांस चरनेचली जाती हैं। वोँ दोनों तोँ जैसे मेरारूम मे होना हि भुलगए थें। )
" मैंने कहा तौ थां मेरी छाती पऱ सें "- मधुमिता अपने चुचियों कि तरफ इशारा करतेहुए बोलि।
" छाती सें क्याँ मतलबहुआ, ठीक सें आम बोलचाल वाली भाषा मे बोल नाँ "- कहतेहुए उन्होंने मधुमिता कि नाइटी कों उसके कंधों पऱ सें नीचे सरका दिया जिससे उसकी ब्रा मे कैद चुचियां उनके आंखों केँ सामने आँ गई।
मधुमिता देखरही थि कि उसका भइया उसकी ब्रा मे कैद चुचियों कों बड़े कामुक नज़रों सें देखरहा हैं। वोँ बहोत उत्तेजित हौ गई।
" ब्रेस्ट पऱ सें "- वोँ धीरे-धीरे सें बोलीं।
संजय उसकी चूचियों कों ब्रा केँ ऊपर सें दोनों हाथों सें पकड़कर जोरजोर सें मसलने लगा। मधुमिता कि सिसकारियां निकलने लगी।
" ब्रेस्ट तोँ इंग्लिश मे बोलते हें। अपने भाषा मे बताओ "- कहकर संजय नें अपनी एक् हाथ उसकी ब्रा पर्र सें हटाकर मधुमिता केँ चेहरे कों अपने चेहरे केँ सामने किया। दोनों एक्-दूसरे केँ आंखों मे देखरहे थें। दोनों कि आंखें वासना सें लाल हौ गई थि। दोनों केँ होंठ एक् दूसरे केँ बहुत लगभग थें।
" बोल नां मधु " - संजय नें फुसफुसाते हुएकहा औऱ उसकी आंखों मे देखते हुए अपनी चुटकियों सें उसकी ब्रा केँ ऊपर सें निप्पल कों मसलने लगे।
मधुमिता कि नजरें अपने भइया कि उंगलियों पऱ थि जोँ उसकी निप्पल कों मसलने मे लगाहुआ थां। जब संजय नें देखा कि वोँ उसके उंगलियों कों देखरही हैं तोँ उसने अपनी उंगलियों कों वहां सें हटा दिया औऱ अपना मुंह नीचेकर केँ ब्रा केँ ऊपर सें निप्पल कों अपने होंठों मे भर लिया औऱ चूसने लगा।
मधुमिता ओहहाय रामकर उठी। वोँ सिसकी मारते हुए बोलीं - "ऊंह ! मुझेशरम आती हैं। "
" बोल नाँ दोस्त " - उसके निप्पल कों होंठों सें निकालते हुए संजय नें कहा औऱ फिन उसके दुसरे निप्पल कों ब्रा केँ ऊपर सें हि होंठों सें चुसने लगा।
मधुमिता कुछदेर तक ब्रा केँ ऊपर सें निप्पल चुसाई कां आनंद भोगी। वोँ देखरही थि उसका भइया ब्रा केँ ऊपर सें हि एक् चुची कों मसलरहा हैं औऱ दूसरी मम्मों केँ निप्पल कों चूसरहा हैं। वोँ बहुत उत्तेजित होँ गई औऱ अपनीकमर कों दायें बायें हिलाने लगी। मगर संजय केँ पैर उसके जांघों पर्र होने सें वोँ ठीक सें हिला भि नहि पारही थि।
वोँ अपनी नजरें अपनी छाती सें हटाकर संजय केँ ऊपर डाली तोँ उसे अपनीओर हि देखते पाया। वोँ उसकी चूचियों कों ब्रा केँ ऊपर सें खेलते हुएउसे हि देखरहा थां। उसे अपने भइया कां लंड भि अपने जांघों पऱ चुभता हुआ महसूस हुआ। दोनों एक्-दूसरे कि आंखों मे देखरहे थें। संजय उसकी आंखों मे देखते हुए उसकी निप्पल कों ब्रा केँ ऊपर सें चुसरहा थां औऱ उसकी दुसरी चुची कों हाथों मे भरकरदबा रहा थां। मधुमिता अबहवश कि आग मे जलनेलगी।
वोँ अपने भइया कि आंखों मे देखते हुए फुसफुसाई -" चुची। "
संजय अपनी बेहन केँ मुंह सें चुची शब्द सुनकर पागल जैसे हौ गए। उनसेअब बर्दाश्त नहि होँ रहा थां। उन्होंने उसकी दोनों बांहों कों उपरउठा कर उसके बगलों ( कांख ) कों चाटना शुरुआत कर दिया। मधुमिता केँ बगलों मे बहुत हल्के हल्के बाल थें। शायद कुछेक दिन पहले उसने शेविंग किया थां। दोनों बगलों कों चाटने केँ बादफिन सें उसकी एक् निप्पल कों अपने मुंह मे लेकर चूसने लगे। थोड़ी देरबाद निप्पल कों मुंह सें निकाला औऱ मधुमिता कों देखते हुएकहा -" तु भि बाल साफ़ नहि करती हैं क्याँ ?"
मधुमिता सुनकर शर्मा गई औऱ बोलीं -" धत ! आपनेकब देख लिया ?"
" अभि हि तौ देखा "- वोँ उसकी मम्मों कों दबाते हुए बोला।
" झुठमत कहो। "
" तौ फिनयह क्याँ हैं ?"- कहतेहुए संजय नें मधुमिता कों कांखों केँ बाल कि तरफ इशारा किया।
" ओह ! आप् उसकीबात कररहे थें औऱ मे वहां कि समझ."
" तुम् कहां कि समझरही थि ?" - जबकि संजय कों सभीसमझ मे आँ गय़ा थां।
" कुछ नहि। छोड़िए मुझे नींद आँ रही हैं। "
" ऐसे केसे छोड़दूं। पहले बताओ कि तुम् कहां कि समझरही थि ?"
" धत ! मे नहि बताऊंगी "- वोँ अपनी मुस्कान छुपाते हुए बोलीं।
" ठीक हैं तब मे भि तुम्हें आज सोने नहि दुंगा "- बोलकर उसकी चूचियों कों दबाने लगे।
" हटो नहि तौ मे भि पकड़ लुंगी। "
" मेरेपास तेरीतरह इतनी बड़ी बड़ी नहि हैं। "
" मे यह पकड़ लुंगी "- कहकर मधुमिता नें झटके सें अपनाहाथ संजय केँ लोवर केँ अन्दर डाल दिया औऱ उसके लंड कों पकड़ लिया।
( मे यह देखकर चौंक गई। बहुततेज लड़की निकली। संजय कां लंड भि बहुत मोटा औऱ आठेकइंच लम्बा थां। नं जाने वोँ अपने भइया केँ लंड कों पकड़कर सहलारही होगी याँ मसलरही होगी याँ डररही होगी। मुझेपता नहि चलरहा थां। )
" अपने लंड पर्र मधुमिता केँ हाथ कां स्पर्श पाकर संजय नें कहा -" यह तौ गलत हैं तुमने मेरा पकड़ लिया हैं औऱ मैंने ब्रा केँ ऊपर सें हि पकड़ा हैं। "
" तोँ इसमें मे क्याँ करूं "- वोँ लोवर केँ अन्दर अपने हथेलियो सें लंड कों पकड़कर मसलते हुए फुसफुसाई -" यह आपकी गलती हैं। "
( पक्का वोँ अपने भइया केँ लंड कों अपने हाथों मे भर केँ हिलारही थि। औऱ उसके बातों सें साफपता चलता थां कि वोँ अपनी चूचियों कों अपने भइया सें नंगी करवाना चाहती थि। )
औऱ संजय नें किया भि वही। वोँ उसकी नाइटी कों पुरीतरह सें उसके जिस्म सें बाहर् निकाल दिये औऱ उसकी ब्रा कों खोलकर साइड मे रख दिया। मधुमिता कि बड़ी बड़ी चूचियां संजय कि आंखों केँ सामने नंगी थि। वोँ आंखें गड़ाए अपनी बेहन कि कुंवारी, ठोस औऱ कड़ी चुचियों कों घुरेजा रहे थें।
संजय नें कुछदेर तक चुचियों कि सुन्दरता कों निहारा फिन मधुमिता कों देखा। वोँ कामुक नज़रों सें संजय कों देखरही थि। संजय नें उसकी चूचियों कों अपने दोनों हथेलियों मे दबोच लिया औऱ जोरजोर सें मसलने लगे। मधुमिता कामुक अंदाज मे सिसकारियां छोड़ने लगी।
(औऱ मे ब्लैंकेट केँ भीतर अपनी बुर मे अपनीदो उंगलियां डालकर अन्दर बाहर् करनेलगी। )
संजय चुचियों कों मसलते हुए अपनी बेहन कि आंखों मे देखेजा रहे थें। मधुमिता भि अपने भइया कि नजरों सें अपनी नजरें मिलाए उसके लंड कों मुठियाए जारही थि।
संजय उसकी चूचियों कों दबाते हुए बोले -" बोल नां मधु तुमने कहां कि बाल केँ बारे मे सोचा थां ?"
मधुमिता कों भि येसभी अच्छा लगरहा थां।
वोँ भि लंड कों मुठ मारते हुए बोलीं -" आपकोपता हैं। "
संजय नें अपनी लोवर निकाल कर फेंक दिया। वोँ पूरीतरह सें नंगा हौ गय़ा। मधुमिता नें उनके लंड कों देखा औऱ मंत्र मुग्ध होतेहुए उसे अपने हथेलियों सें पकड़कर जोरजोर सें मसलने लगी। इधर संजय उसकी नंगी चूचियों कों मुंह सें चाटने लगा। चाटते चाटते उसकी अंगुर कि जैसी निप्पल कों मुंह मे भरकर चूसने लगा। थोड़ी देरबाद फिन उन्होंने कहा -" मुझेपता हैं मगर मे तुम्हारे मुख सें सुनना चाहता हूं। बता नाँ ?"
मधुमिता कामान्ध होकर फुसफुसाई -" वहां कि बाल। "
" कहां कि बाल ?"
" बहोत बदमाश हौ। खाली गन्दी गन्दी बातें मुझसे बोलवाना चाहते होँ। "
" इसमें गन्दी बातें क्याँ हैं ? जैसे मेरे लंड केँ अगलबगल हल्का हल्का बाल हैं। वैसे हि तेरी भि होगी। "
मधुमिता उत्तेजना सें थरथराते हुए बोलीं -" तुम् स्वयं हि देखलो। "
" वोँ तौ देखूंगा हि मगरतु बता नाँ पहले ? हैं भि याँ पुरीतरह साफ हैं। "
" हल्की हल्की हैं "- वोँ उनके लंड कों जोर सें मसलने लगी।
संजय मधुमिता केँ उपरचढ़ गये औऱ अपने लंड कों उसकी पैंटी केँ ऊपरठीक उसकीचुत केँ बीचों-बीच रखकर अपनीकमर हिलाने लगे। औऱ उसकी चूचियों कों मसलने लगे। मधुमिता नें अपनीपैर उठाकर संजय केँ उपररख दिया।
" बोल नां मेरी प्यारी बेहन ?"- संजय नें फिन पूछा।
बेहन सुनकर मधुमिता उत्तेजना मे संजय केँ गाल कों दांतों सें काटली औऱ फुसफुसा कर बोलि -" मेरीचुत कि बाल। "
( मधुमिता केँ मुंह सें येसभी सुनकर मेरीचुत पानी सें बहनेलगी )
संजय मधुमिता केँ चेहरे कों अपने हाथों सें पकड़कर अपने चेहरे केँ सामने किए औऱ उसकी होंठों कों चुमकर बोले -" कहां कि बाल ?"
" मेरीचुत कि "- वोँ कामान्ध स्वर मे बोलि।
संजयउसे पुरीतरह बेशर्म बनाने मे अड़े थें।
" मेरी बेहन केँ चुत कि ?"
" हम्म्। "
" क्याँ हम्म ?"
" धत ! तुम् बड़े हरामी होँ। मुझेशरम आती हैं। "
" आज तेरी शरमगाह मे अपना लंड पेलकर तुम्हें भि अपनीतरह बेशर्म बना दुंगा। बनादूं तेरी बेशर्म ?"- संजय नें अपनी एक् हाथ मधुमिता केँ पैंटी मे डालते हुएकहा।
मधुमिता अपनीचुत पर्र संजय कि उंगलियों कां स्पर्श पाते हि वासना सें भरी स्वर मे फुसफुसाई -" बनादो बेशर्म। "
" मगर उसकेलिए तेरीचुत मे अपना लंड डालना होगा "- वोँ उसकीचुत मे ऊंगली डालते हुए बोले -" अपनेचुत मे मेरा मोटा लौड़ा डलवाएगी ?"
" हम्म। डलवाऊंगी "- वोँ नशे सें बोलि।
" चुत मे लंड जाने कां मतलब समझती हैं ?"
" हम्म। "
" क्याँ ?"
मधुमिता संजय कि आंखों मे देखते हुए फुसफुसाई -" चोदा चोदी। "
फिन तोँ मै उनके प्रगाढ़ चुम्बन कों लाइवदेख रही थि। दोनों एक् दूसरे कों बुरीतरह चुमरहे थें। दोनों एक्-दूसरे केँ जीभ कों आइसक्रीम कि तरहचुस रहे थें, चाटरहे थें। दोनों कि थुक एक् दूसरे केँ मुंह मे निर्विघ्न जारही थीं।
चुमा चाटी केँ दौरान हि संजय नें मधुमिता केँ बदन सें अंतिम वस्त्र भि बाहर् निकाल दिया। दोनों भइया बेहन मादरजात नंगें एक् दूसरे केँ उपरचढ़, उतररहे थें। कमरे केँ अंदरउन दोनों कि सिसकारियां गूंजरही थि। औऱ इधर मे अपनी मुंह भींचकर अपनी कराहदबा रही थि। संजय मधुमिता कि भारी गांड़ कों दोनों हाथों सें दबोचते हुए उसकी होंठों कों चुसेजा रहे थें।
थोड़ी देरबाद मधुमिता कों मेरेबगल मे लेटा दियामगर उसकीपैर मेरेसिर कि तरफ थि। उन्होंने उसकी दोनों टांगों कों अलगअलग करकेउपर उठा दिया। उसकी टांगें उसके चुचियों तक पहुंच गई जिससे उसकी बुर उभरकर सामने आँ गई। उसकीचुत पऱ हल्के हल्के बाल थि। चुत कि दरारें पैर फैलाने सें थोड़ी खुल गई थि जोँ उसकेकाम रस सें भरी हुईँ थि। उसकी कामरस सें उसकी जांघें भि भींगी हुईँ थि। उसकेचुत केँ होंठ मोटे मोटे थें। संजय नें देरी न् करतेहुए जल्द सें अपने होंठ उसकेचुत सें सटादिए औऱ अन्दर सें सारी मलाईचाट चाटकर साफ करनेलगे।
( मे मधुमिता कों नहि देखपा रही थि मगर मुझे विश्वास थां कि वोँ भि अपने भइया केँ हबसी लंड कों चुसचाट रही होगी। मे बस संजय कों मधुमिता कि चुत कों चाटते हुए औऱ उसके अंदरजीभ ढुकाते हुएदेख रही थि। कभीकभी तौ वोँ उसकी गान्ड केँ छेद कों चाटने लग जाते थें। )
आधे घंटे तक दोनों भइया बेहन नें 69 कि मुद्रा मे एक् दूसरे कों चुसा चाटा। फिन संजय मधुमिता केँ उपरआए औऱ अपने लंड कों उसकीचुत केँ छेद सें सटा दिया।
" धीरे-धीरे सें करना "- मधुमिता बोलीं -" बहोत बड़ा हैं। "
" घबडा़ओ मत। शुरुआत मे थोडा सां दर्द होगा उसकेबाद सभीठीक हौ जाएगा। "- संजय नें उसे आश्वासन दिया।
( मैंने थोड़ी देर मे मधुमिता केँ दर्द सें चिखने कि आवाज़ सुनी। वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे कराहरही थि। उसके पांचसात मिनटबाद दोनों कि सिसकारियां कमरे मे गुंजने लगी। मधुमिता कि पैर मेरीतरफ थां। उन दोनों कां सिर मेरे पांवों कि तरफ थां इसलिये मैने अपनीचुत मे ऊंगली करनीबंद कर दि। मगर मे उनकी चोदाई देख्ना चाहती थि इसलिये थोडा सां उनके पैरों कि तरफ खिसक गई। औऱ जौ मुझे दिखाई दिया वोँ कभी भुलने वालीचीज नहि थि। मे संजय केँ लंड कों मधुमिता केँ चुत मे अन्दर बाहर् होतेहुए स्पष्ट देखरही थि। यह देखकर मे वासना कि आग सें छटपटाने लगी। बीस मिनट तक मधुमिता कों चोदने केँ बाद उसकेचुत मे हि उन्होंने अपना वीर्य छोड़ दिया। मे जल्द सें अपने पहले वाली स्थान पऱ खिसक गई क्योंकि दोनों कां काम क्रीड़ा खतम होँ चुका थां। वोँ कभी भि उठ सकते थें। )
शनिवार तक यहां पोस्ट कर दुंगा । संजय औऱ मधुमिता केँ सेक्सुअल एनकाउंटर केँ संग जौ पिछली बार अधूरा रह गय़ा थां ।
waiting . bhiya ap bi kamdev99008 bhiya kee kahani main lag gaye . joo kaam unkah thaa woh ap karne lag gaye . yaha hum Sagar kee laayi hoyi nighty k jalwe dekhne ko taras rahe h . or ap hume intezaar karwa rahe hu . ayese na sitam dahaho aapne bhaio k upar .
FF bhay ?.Mughe bi dikkat hoty thi Kamdev bhay kee story ko samajhne mai. Esiliye badi musibat say chart banaya takii agle baar dikkat nahee hu. ?
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Hello doato, mein nay oehlay b aik coment kiya thaa, coment क्या aik request thi ke yeh story koe roman mein likh day, Koe member joo hindi janta hu plz writer se permission lay ke iss kahani kaa roman thread shuru krr दो plz, bht achi kahani lag rahi hay takah sub पर ke entertain hu sakain। Plz bhay request hay koe yeh कम krr दो।
डायलॉग पढ़कर लगरहा हैं कि सुरेन्द्र मोहन पाठकजी हि नाम बदलकर यहां उपस्थित हें
Sagar (Full Storyd) – New Episode
आप् सब पाठकों कों मेरा नमस्ते.?
फरवरी २०२० मे फोरम कां मेम्बर बना। औऱ शायद लाॅक डॉउन मे वक्तपास करने केँ लिएमई मे एक् इनसेस्ट कथा थोड़ी ट्विस्ट केँ संग ( मर्डर मिस्ट्री ) लिखना शुरुआत किया। मैंने अपनी जीवन मे कभी भि कोईकथा लिखी नहि थि। मे स्वयं डराहुआ थां। क्योंकि यहां पऱ एक् सें बढ़कर एक् राइटर्स थें.उन राइटर्स कि कल्पना शक्ति केँ आगे मे जीरो थां। भले हि मैंने अपनी जीवन मे अनगिनत उपन्यास पढ़ा हौ। मगर पढ़ना अलग होता हैं औऱ लिखना अलग.खैर लिखना शुरुआत किया। स्टोरी कां थीम इनसेस्ट थां तौ मे रुल केँ अनुसार एडल्टरी। हाॅरर.रोमांस.वगैरह नहि लिख सकता थां। मैंने सोचा थां हजार पांचसौ लोगइस पर्र औपचारिक निगाह डालेंगे औऱ फिनभुल जायेंगे। मगर कारवां बनता गय़ा.लोग जुड़ते गए। रास्ते मे कुछेक छुटते गए तोँ कुछनये बनतेगए।.इनतीन महीनों केँ दौरान कई लोगों सें दोस्ताना संबंध भि बना.भले हि अजनबियों केँ संग। एक् फैंटेसी कि तरह.मगर वोँ सम्बन्ध औऱ उनका प्रेम मेरेलिए दुआएं थि जिसे परमपिता ईश्वर नें उनके द्वारा मुझे नवाजा।
कभीकभी लोग राइटर्स कों कहानियों केँ द्वारा उसके बारे मे गलत अंदाज लगा लेते हें कि राइटर भि अपने किस्सा केँ नायक कि तरह ठरकी औऱ कैरेक्टरलेश होगा। जबकि ऐसा प्रायः नहि होता हैं। राइटर्स लिखते वक़्त अपनेहर एक् कैरेक्टर कों उसके चरित्र केँ मुताबिक सोचता हैं औऱ फिनउसे कलमवद्ध करता हैं।
शुक्रिया ?
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
Bs yhi dukh thaa kee ap yha hokar apne priya ese readers ko kyu tadfa rhe the. ap time lijiyega, halanki kahani ko uske mukam tak jarur leke jaiaega. Yahi Vinnati he iss reader kee tarf say.
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