Sagar (Full Storyd) – New Episode
लाॅक डॉउन कां असरअब मुझ पऱ भि पड़ गय़ा हैं। तौ प्रोब्लम होगी हि। इसीलिए कोई भि एपसोड लिख नहि पाया.
लिखना बड़ीबात नहि हैं मगरजब किसीचीज मे आपकादिल नहि करता हैं तौ वोँ चीजें नीरश हौ जाती हैं। लोगों कों पसन्द नहि आती हैं।
हमारे घरों मे सब्जियां रोज बनती हें। मगरवही सब्जी कभीकभी बहोत अच्छी लगती हैं औऱ कभीकभी बेस्वाद। जबकि उन सब्जियों मे सेमवही मसाला होता हैं। औऱ बनाने कां तरीका भि वही होता हैं। जिन सब्जियों कां स्वाद लज्जतदार होता हैं.उसका कारणकुछ नहि मात्र उन कों बनाने मे दिल कां लगा होना होता हैं।
यहां भि यही रूल्स फॉलो होता हैं.मन अशांत हौ तोँ भलादिल कहां लगेगा कथा लिखने मे.
मे शायददो हफ्तों तक कुछलिख हि नहि पाऊं !
कुछ वक़्त लगेगा।
मगर अशांत मन कों भटकाने केँ लिए यहांहर टाइम मौजूद रहूंगा। कुछ पढ़कर। कुछ कमेन्टस कर।
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 24 A.
Flashback continue.
जैसे हि उर्वशी चुप हुइ मे दौड़कर बाथरूम भागा। संजय औऱ उसकी बेहन मधुमिता कि चुदाई किस्सा सुनकर लंड आसमान ज़मीन एक् किएहुए थां। औऱ वाइन पीने केँ कारण पेशाब भि लग गय़ा थां।
इतनाजोर सें पेशाब लगा थां कि दोतीन मिनट तक लगगए पेशाब करते करते। फिनहाथ मुंह धोकररूम मे प्रवेश किया। औऱ वहां केँ माहौल कों देखा तौ मेरा लंड जौ पेशाब करने केँ बाद थोडा शांत होँ गय़ा थां फिन सें अशांति पऱ उतरआया।
दोनों हस्तनी सहेलियां श्वेता दि औऱ उर्वशी पुरीतरह निर्वस्त्र बिस्तर पर्र एक् दूसरे सें गुत्थमगुत्था हौ कर एक् दूसरे कों चुमचाट रही थि।
मैंने पोर्न मूवी तौ बहुतों देखी थि। औऱ कुछ लेस्बियन सेक्स मूवी भि देखा थां मगरकभी जीवंत नहि देखा थां। दो गोरी-चिट्टी मांशल जिस्म वाली शादीशुदा युवतियों कों पुरीतरह नंगी एक् दूसरे सें गुत्थमगुत्था देख्ना जिस्म केँ रोंगटे खड़ेकर देने वाला थां। दोनों केँ लेस्बियन सेक्स कों औऱ देखने केँ लालशा मे मैंने उन्हें डिस्टर्ब करना उचित नहि समझा औऱ बगल मे रखे सोफे पर्र बैठ गय़ा। मैंने भि अपना लोवर निकाल दिया। अब मे भि उन्हीं कि तरहसर सें पैर तक निर्वस्त्र थां।
श्वेता दि पलंग पऱ पीठ केँ बल लेटी हुईँ थि औऱ उनकेउपर उर्वशी दि चढ़ी हुई थि। दोनों सहेलियों नें अपने दोनों पांवों कों कैंची कि तरह फंसाकर रखा थां जिससे दोनों कि रस सें भरी हुइ चुत एक् दूसरे सें रगड़खा रही थि। संग मे दोनों अपनी मोटी मोटी जांघें फैलाए एक् दुसरे सें घसेजा रही थि।
दोनों कि बड़ी बड़ी चूचियां एक् दूसरे सें दबी हुईँ थि। उर्वशी श्वेता दि कि जीभ कों बुरीतरह चुसरही थि। दोनों कि चुमाचाटी औऱ सिसकारियों कि आवाज़ पुरे कमरे मे मधुर म्यूज़िक पैदाकर रही थि।
उपर चढ़े होने केँ कारण उर्वशी कि तरबुज कि तरह बड़ी गांड़ आगे पीछे एक् लय मे हीलरही थि। औऱ नीचे सें श्वेता दि भि धक्के लगारही थि। मे जहां बैठा थां वहां सें दोनों कों एक्-दूसरे केँ चुत कों घिसते हुए स्पष्ट देखरहा थां। दोनों कि चिकनी चुत कि रसमलाई रिसते हुए उनके मोटी मोटी जांघों तक आँ पहुंची थि।
उर्वशी दि केँ उपर होने केँ कारण उसकी चौड़ी गान्ड कि हल्की भुरीछेद भि मे देखपा रहा थां जौ कभीखुल रही थि तोँ कभीबंद होँ रही थि। मै बहोत उत्तेजित हौ गय़ा थां। मे डर सें अपने लंड कों छु नहि रहा थां कि कहीं मेरे कठोर हाथों केँ स्पर्श सें लंड पानी न् फेंकदे।
वोँ दोनों एक् दूसरे मे इतनाखो गई थि कि उन्हें मेरा ख्याल तक भि नहि रहा थां। कुछदेर तक एक्-दूसरे कों चुमते चाटते औऱ अपनीचुत रगड़ते कब 69 पोज मे आँ गई, इसका अंदाजा उन्हें स्वयं भि नहि थां। फिन तोँ जौ वोँ दोनों एक्-दूसरे केँ गुप्तांगों कों चुमने चाटने लगी कि उनकेचपर चपर कि आवाज़ मेरे कानों तक पहुंचने लगी। उर्वशी दि कि पैर मेरीतरफ थि जिससे मे श्वेता दि कों उनकी फुली हुई रसभरी दरारों कों अपनेजीभ सें चाटते हुए स्पष्ट देखरहा थां।
तभी श्वेता दि कि नजरमुझ पऱ पड़ी। वोँ मुस्कराई औऱ मुझे आंखों हि आंखों मे वहांआने कां इशारा कि।
मे तोँ बहोत पहले सें इस निमंत्रण कां प्रतीक्षा कररहा थां। मे बिना देरीकिए वहां झटपट पहुंच गय़ा। श्वेता दि नें उर्वशी कि चुत कों अपने दोनों हाथों सें फैलाया। उनकीचुत उनके कामरस सें भीगी हुईँ थि। बसफिन क्याँ थां। उर्वशी कि चुत कों हम् दोनों भइया बेहन एक् संग चुसने लगे। उर्वशी कों भि इसका आभास हौ गय़ा थां कि उसकीचुत मे दोदोजीभ ढुकेहुए हें। वोँ उत्तेजित हौ कर बेसब्री सें अपनीकमर हिलाने लगी। श्वेता दि उसकी क्लीट कों अपने होंठों सें दबाकर चूसने लगी औऱ मे उसकेछेद मे अन्दर तक जीभडाल उसकीचुत कों जीभ सें चोदने लगा।
यहदो तरफा प्रहार उर्वशी झेल नहि पाई औऱ बुरीतरह झड़ने लगी। उसकीचुत नें पानी कां फव्वारा छोड़ दिया जिसे हम् दोनों भइया बेहन नें गटकगटक करपी लिया।
उर्वशी केँ सुस्त पड़ते हि मैंने श्वेता दि कों पकड़कर खाट पऱ पटक दिया औऱ अपने दोनों हाथों सें उनकी बड़ी बड़ी चूचियों कों जोरजोर सें मसलते हुए उनकी गुलाबी जीभ कों अपने मुंह मे लेकर चूसने लगा। मेरा लंड उनकी कचोड़ी जैसे फुली हुइ चुत पर्र झटके पर्र झटकादिए जारहा थां। श्वेता दि भि बहुत उत्तेजित होँ गई थि। वोँ बड़ेजोश सें अपनीजीभ मेरे मुंह केँ अंदर ठेलने लगी।
यहदेख उर्वशी कि काम वासना फिन सें भड़कने लगी। वोँ सरककर हमारे लगभगआई औऱ अपनीजीभ निकाल कर हम् दोनों केँ जीभ सें सटा दि।
फिन तौ हम् तीनों आपस मे अपना मुंह सटाए चुमा चाटी करनेलगे। तीनों बदलबदल कर एक् दूसरे केँ होंठों कों चूसने लगे। तीनों नें अपनी अपनीजीभ निकाल कर एक् दूसरे केँ मुंह मे ठुसने शुरुआत करदिए। तीनों केँ थुक एक् दूसरे केँ मुंह मे जारहे थें।
थोड़ी देरबाद उर्वशी वहां सें घसककर मेरे जांघों केँ पासआई औऱ मेरे फनफनाते लंड कों पकड़कर अपने मुंह मे डाल लिया औऱ आइसक्रीम कि तरह चूसने लगी। यहदेख श्वेता दि नें मुझेपीठ केँ बल लिटा दिया औऱ मेरेसर केँ ऊपर सें अपने दोनों पैरदो तरफ करके मेरे मुंह केँ सामने अपनी चिकनी चुत रखकरआगे कि ओरझुक गई। अब वोँ भि उर्वशी केँ संगसंग मेरे लंड कों चूसने लगी।
मैंने श्वेता दि कि खुबसूरत चुत कों बड़ी कामूक भरी निगाहों सें देखा जोँ उसकेकाम रस सें भीगी हुइ थि। सच मे यह जन्नत कां दरवाज़ा थां। डबल पावरोटी केँ समान फुली हुईँ औऱ बीच मे दरारली हुई। उनकीचुत कों अपने दोनों हाथ केँ अंगूठे सें फैलाया। अंदररस हि रस थां। औऱ उसकीगंध मुझे पागलकिए जारही थि। मैंने अपनाजीभ निकाला औऱ उनके दरारों मे घुसेड़ दिया औऱ उनकीचुत सें निकलरही मलाई कों चुसचुस कर पीनेलगा। मे जितना उनकीचुत सें मलाई चाटता उतना हि वोँ औऱ ज्यादा मलाई छोड़ देती। औऱ मे बड़े प्यार सें उसे भि चाटचाट कर साफ़कर देता।
इधर मेरा मोटा तगड़ा हथियार कभी उर्वशी केँ मुंह केँ अंदर होता तौ कभी श्वेता दि केँ मुंह मे होता। मेरे दोनो अंडकोष कों दोनों सहेलियां बदलबदल कर अपने होंठों सें तोँ कभीजीभ सें प्रेम करती। कभी अपने मुंह मे डालकर चुसती।
मे लंड चुसाई कां सुखभोग हि रहा थां कि उर्वशी दि कामोत्तेजना बर्दाश्त नहि करपाई औऱ मेरे जांघों पऱ चढ़ गई औऱ मेरे लंड कों पकड़कर अपनेचुत केँ छिद्र सें सटाकर उसे अपने अंदर लेनेलगी। जैसे हि मेरा लंड उनकेचुत केँ गहराइयों मे पहुँचा कि वोँ अपनीकमर ऊपर नीचे करके मुझे चोदने लगी। उनकीचुत अभि भि कसी हुईँ थि जिससे कारण लंड फंसफंस कर अंदर बाहर् होँ रहा थां।
श्वेता दि मेरे मुंह पर्र अपनीचुत रखकर चुसवा रही थि वहीं उर्वशी मेरे लंड कों अपनेचुत मे डालकर स्वयं हि मुझे चोदेजा रही थि। मे तौ जैसे सातवें आसमान पऱ थां।
कमरे कां तापमान बहुत गर्म होँ गय़ा थां। श्वेता दि मेरे मुंह पर्र अपनीचुत रगड़ते हुए अपनीगाल मेरे नाभि केँ ऊपर रखकर अपने भइया केँ लंड कों उर्वशी कि चुत मे तेजी सें अंदर बाहर् होतेहुए देखरही थि। इस कामूक दृश्य कों देख उत्तेजित होकर वोँ मेरे मुंह पऱ अपनीचुत तेजी सें पटकने लगी।
उर्वशी कि उत्तेजना चरम पर्र पहुंच गई थि। वो जोरजोर सें मेरे लंड पऱ कूदते हुए औऱ सिसकारियां मारते हुए बुरीतरह झड़ने लगी। उन्होंने अपनी पानी सें मेरे लंड कों नहलवा दिया। मेरा लंड उर्वशी कि चुत कि गर्मी औऱ उनके झड़ते हुए पानी कों बर्दाश्त नहि कर पाया औऱ वोँ भलभला कर उनकेचुत मे झड़ने लगा। श्वेता दि कि नजरें हमारे संधि स्थल पऱ हि थि। हमें झड़ते देखकर वोँ भि बर्दाश्त नहि करपाई औऱ उन्होंने भि अपनी नलकी मेरे मुंह मे खोल दि। औऱ मे बड़े प्यार सें उनकी मलाई पीता गय़ा। उर्वशी झड़ने केँ बाद श्वेता दि केँ पीठ पर्र सुस्त हौ करपसर गई।
थोड़ी देरबाद तीनों अगलबगल लेटगए। लगभगदस पंद्रह मिनट तक हम् अपनी सांसें दुरूस्त करतेरहे।
श्वेता दि जबसहज सि महसूस कि तौ उसने उर्वशी सें पुछा -" तेरा औऱ सागर कां यहसभी चक्कर केसे चालुहुआ थां, यह तोँ तुने अभि तक बताया नहि। "
" इसने नहि बताया ? " - उर्वशी नें कहा।
" पुछने कां समय नहि मिला "- श्वेता दि बोलि।
मे चुपचाप खाट पऱ लेटे थोडा आराम करतेहुए फोन पऱ इंग्लैंड औऱ पाकिस्तान क्रिकेट मैच कां ड्रीम इलेवन टीम बनाने लगा।
" ह्वाट्सएप पे बढ़िया बढ़िया मैसेज भेज केँ पटाया। "
" ऐसा क्याँ बढ़िया मैसेज भेजता थां कि एक् दम सें चुद हि गई ?"
" शुरुआत गुड मार्निंग मैसेज सें किया थां। "
" गुड मार्निंग मैसेज ?"
" हां.गुड मार्निंग मैसेज। इतना सुन्दर होता थां नं कि क्याँ बताऊं। जौ भि पढ़ेगा वोँ यही समझेगा कि भेजने वाला व्यक्ति कितना अच्छा संस्कारिक औऱ धार्मिक किस्म कां व्यक्ति हैं। "
" अच्छा तौ तु धार्मिक टाइप केँ मैसेज सें पट गई ?"
" अरे नहि दोस्त। सुन ! यह तेरा मासूम सूरत वाला कमीना भइयारोज सुभह.जोँ दिन होता थां उसीदिन केँ हिसाब सें ईश्वर कां फोटो औऱ संग मे अच्छी अच्छी धार्मिक मैसेज भेजता थां। "
" तोँ इसमें खराबी क्याँ थि ?"
" खराबी कुछ भि नहि थि। बल्कि बहोत हि सुन्दर मैसेज होता थां। जानती हैं.इसके भेजेहुए देवी देवताओं केँ फोटो औऱ मैसेज सें मेरा मोबाइल कां गैलेरी पुराभर गय़ा थां। मुझेडर लगता थां कि भुल सें भि कहीं मेरापैर टच नं हौ जाएफोन सें औऱ फोन केँ अन्दर केँ देवी देवता नाराज नं होँ जाएं। मैंने तोँ फोन सोते वक़्त खाट पर्र रखना तक छोड़ दिया थां। "
" फिन ?" - श्वेता दि नें हंसते हुएकहा।
" फिन.फिन दोतीन महीने बादरात मे गुड नाईट मैसेज भेजना शुरुआत किया। "
" किसतरह कां मैसेज ?"
" शुरुआत मे तोँ सिम्पल साधारण सां भेजता थां मगरबीस पच्चीस दिन केँ बाद थोडा रोमांटिक टाइप भेजना शुरुआत किया। "
" तौ तेरेमन मे कैसा रियेक्सन होता थां ?"
" पहलीबार थोडा अजीब सां लगाफिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे सामान्य सां लगा.औऱ जैसे जैसेदिन गुजरते गय़ा अच्छा लगनेलगा। "
" क्याँ तु भि मैसेज करती थि ?"
" गुड मार्निंग वाला तौ मे भि करती थि। आखिर इतना सुन्दर मैसेज केँ जबाव मे मुझे भि तोँ कुछ अच्छे अच्छे मैसेज भेजना बनता थां न्। "
" औऱ रात वाली। गुड नाईट केँ बदले ?"
" कुछेक दिन तोँ नहि भेजीफिन एकाध महीने केँ बाद मे भि भेजना शुरुआत कर दि। "
" यानी कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे आग लगनी शुरुआत हौ गई "- श्वेता दि मुस्कराते हुए बोलि।
" वोँ तौ लगनी हि थि। आखिर कमीना हैं भि तौ हैंडसम। फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे रात वाली मैसेज औऱ ज़्यादा रोमांटिक होनेलग गई। औऱ एक् रात इसने थोड़ी अश्लील टाइपगुड नाईट मैसेज भेजा। "
" किसतरह कां ?"
" गूगल सें कोई फोटो डाउनलोड करके भेजा थां। जिसमें एक् लड़की लिंगरी मे पीठ केँ बल लेटी हुइ थि औऱ उसकेउपर एक् लड़का लड़की केँ एक् बोबे कों अपने हाथों मे पकड़े हुए उसकी चुम्बन लें रहा थां औऱ नीचेगुड नाईट लिखाहुआ थां। "
" फिन ?"
" मे तोँ देखकर भौंचक्का हौ गई थि। शुरुआत मे क्रोध आया.फिन बिनाकोई जबावदिए फोन स्विच ऑफकर दि औऱ सो गई। सुभह उठने केँ बादजब फिन सें वोँ मैसेज देखी तौ मुझेकुछ कुछ होनेलगा। मेरी भि भावनाएं मचलने लगी.फिन तोँ जैसे एक् रूटिन बन गई। यहरोज सुभह-सुभह गुड मार्निंग मैसेज अच्छी अच्छी वाली भेजता थां औऱ रात मे गुड नाईट वाली मैसेज रोमांटिक औऱ गंदी टाइप वाला भेजने लगा। "
" तौ तु क्याँ करती थि.इसके मैसेज कां जबाव देती थि याँ नहि ?"
" कुछदिन बाद मे भि देनेलगी। "
"अच्छा ! रोमांटिक औऱ गंदीगुड नाईट वाली कि भि ?"
" हां। मगर मे मात्र गुड नाईट लिखकर भेज दिया करती थि। "
" फिन ?"
" फिन तौ इसकी हिम्मत बढ़ते गई औऱ रात मे न् जाने कहां-कहां सें खोजखोज कर गंदी गंदी पिक्चर औऱ पोर्न टाइप उपहार भेजने लगा। यहसभी देखकर मे उत्तेजित होनेलगी। आखिर मे भि तोँ एक् जवान लड़की थि। लड़के लड़कियों कि नंगी चूदाई तस्वीर देखकर भलाकौन उत्तेजित नहि होगा ?"
" फिन ?
" फिन एक् दिन इसने मुझे मोबाइल किया औऱ डेट केँ लिए पुछा। "
" हम्म्। फिन ?"
मे तौ पहले सें हि सजधजकर थि.थोड़ी आनाकानी कि फिनमान गई। फिन हम् मूवी देखने गए वहीं थियेटर मे हि हमने पहलीकिस कि औऱ फिनकुछ दिन केँ बाद एक् होटल मे गए। सुभह ग्यारह बजे केँ आसपास। वहीं हमारी पहली चुदाई हुईँ। पहलेदिन हि इसनेतीन बार मेरी लें ली। "
" क्याँ ?"- श्वेता दि मुस्की काटते हुए बोलि।
" यह "- उर्वशी दि भि मुस्कराते हुए अपनीचुत कि तरफ इशारा कि।
" रूक। मे पेशाब करकेआती हूं तब बाकी बताना "- श्वेता दि खड़ा होतेहुए बोलीं।
" चल। मे भि चलती हूं। "
फिन दोनों नंगी हि रूम मे हि बने अटैच बाथरूम मे चली गई। औऱ बिना दरवाजा बंदकिए नीचे बैठकर पेशाब करनेलगी।
जैसे हि दोनों अपनी अपनी बड़ी गांड़ फैलाए नीचेबैठ कर पेशाब करना शुरुआत कि। कि मेरा लंड फनफना कर खड़ा होँ गय़ा। उनकी पेशाब करने कि आवाज़ मेरे कानों तक पहुंच रही थि।
जबवेनंग धडंग बाथरूम सें आई तौ मेरा खड़ा लंड देखकर मुस्कुराने लगी। श्वेता दि बैड पर्र चढ़ते हि झुकी औऱ बिनाहाथ लगाए मेरे लंड कों अपने मुंह मे लेकर चूसने लगी। उर्वशी दि बगल मे पलंग पऱ लेटकर हमें देखने लगी।
थोड़ी देरबाद मैंने श्वेता दि केँ मुंह सें अपना लंड निकाला औऱ उठकर उनके पीछेबैठ गय़ा। अपनी छाती उनके रसीले पीठ सें सटाते हुए अपने हाथों कों आगे बढ़ाया औऱ उनकी दोनों चूचियों कों पकड़कर जोरजोर सें मसलने लगा। वोँ अपनी बड़ी गांड़ मेरेगोद मे रखकर पीछे कि ओरझुक गई औऱ अपनी चूचियों कों मसलवाने कां मजा लेनेलगी। मेरा तनतनाया हुआ लंड उनकी चौड़ी गांड़ सें दब गय़ा थां। वोँ सिसकारियां भरतेहुए अपनी गांड़ मेरे लंड पऱ घसनेलगी।
थोड़ी देरबाद मैंने उन्हें आगे कि ओर झुकाया औऱ अपने लंड कों पकड़कर उनकेरस छोड़ती चुत केँ दरारों मे घिसने लगा। उनकीचुत केँ पानी सें मेरा लंड गीला होँ गय़ा थां।
मैंने उन्हें थोडा औऱ आगे कि ओर झुकाया। वोँ अपनी चौड़ी गान्ड पीछे सें उपर उठाएआगे कि ओरहाथ केँ सहारे झुक गई। वोँ कुतिया वाली पोजीशन मे होँ गई थि। मैंने अपने घुटनों केँ बल पोजीशन लिया औऱ उनकीचुत केँ छिद्र मे अपना लंड रखा औऱ जोर कां धक्का लगा दिया। उनकीचुत उनकेकाम रस सें इतनी ज़्यादा गीली हौ गई थि कि दो हि प्रयास मे पुरा लंड उनकीचुत कि गहराई मे प्रवेश कर गय़ा।
मे उनकी चूचियों कों दबाते हुए धीरे-धीरे धीरे-धीरे उन्हें चोदने लगा। शुरुआत शुरुआत मे हल्के-हल्के धक्के सें चोदरहा थां। उर्वशी दि नें जब मुझे श्वेता दि कों कुतिया पोजीशन मे चोदते हुए देखा तौ वोँ पीठ केँ बललेट गई औऱ सरकते हुए हम् दोनों केँ कमर केँ नीचे जहां मेरा लंड श्वेता दि कि चुत मे अन्दर बाहर् हौ रहा थां, पहुंच गई। औऱ अपनी आंखों सें लगभगदस बारहइंच कि दूरी पऱ मेरे लंड कों श्वेता दि केँ चुत सें अंदर बाहर् होते देखने लगी। वोँ इतने लगभग सें लंड कों चुत मे घुसते निकलते देखकर बहुत उत्तेजित हौ गई औऱ जैसे हि मेरा लंड श्वेता दि केँ चुत केँ अंदर सें बाहर् कि ओर निकला, अपने हाथों सें पकड़कर पुरीतरह बाहर् निकाल ली औऱ अपने मुंह मे डालकर चूसने लगी। मेरे लंड कों चूसने केँ बाद श्वेता दि कि चुत केँ अंदर अपनीजीभ डाली औऱ चार पांचबार चारों तरफजीभ फिराई फिन मेरे लंड कों पकड़कर श्वेता दि कि चुत केँ छेद पऱ सटा दि।
मैंने एक् जोरदार धक्का लगाया औऱ फिन सें मेरा लंड उनकेचुत मे घुस गय़ा। अब मे जोरजोर सें श्वेता दि कों चोदने लगा। उर्वशी दि अपनीसिर कों उपर कि ओर उठाई औऱ अपनीजीभ हम् दोनों केँ संधि स्थल पर्र फिराने लगी। मे श्वेता दि कों बुरीतरह चोदेजा रहा थां। श्वेता दि भि उत्तेजना केँ मारे अपनी चूतड़ तेजी सें पीछे कि ओर धकेलरही थि। लगभगआधे घंटे कि चुदाई केँ दौरान श्वेता दि तीनबार झड़ चुकी थि औऱ मेरा भि वीर्य निकलने वाला हि थां। अंतिम वक्त मे मेरा चोदने कां स्पीड इतनाबढ़ गय़ा थां कि बिस्तर भि हिलने लग गय़ा थां। ज्योंहि मेरा झड़ने कां वक़्त नजदीक आया मैंने श्वेता दि केँ चेहरे कों अपनीओर घुमाया औऱ उनकेजीभ कों चुसते हुए लंड कों उसकीचुत कि गहराइयों मे घुसेड़ कर झड़ने लगा। इसकेसंग संग एक् बारफिन सें वोँ भि झडनेलगी।
थोड़ी देरबाद तीनों पलंग पर्र लेटकर सुस्ताने लगे।
आधे घंटेबाद हम् सब नें एक् बारफिन सें नहाया। फ्रेश होने केँ बाद स्वादिष्ट व्यंजन कां लुत्फ उठाया। उसकेबाद एक् एक् राउंड चुदाई कां दौर औऱ चालूहुआ।
उसी दौरान श्वेता दि नें बताया कि रात मे सोने केँ लिए वहां चाची आँ रही हैं। यह सुनकर मे मायूस हौ गय़ा। मेरा ख़्वाहिश रातभर उनकेसंग रहने कां थां। खैर। थोड़ी देरबाद मे उन दोनों कों छोड़कर घऱ आँ गय़ा।
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" सागर.गरम चाय पियोगे क्याँ ?"
माॅम कि आवाज़ सुनकर मेरी तन्द्रा भंग हुई।
" हां.बनाओ। मे थोड़ी देर मे आँ रहा हूं "- मैंने ऊंची आवाज़ मे कहा।
क्लब भि जाने कां वक्त होँ गय़ा थां। मे सजधजकर हौ कर रीतु कों मोबाइल किया। वोँ लोग जयपुर पहुंच कर होटल मे शिफ्ट हौ गए थें। अभि सब आरामकर रहे थें। थोड़ी देरबात करने केँ बाद मे नीचे हाॅल मे गय़ा। डैड भि आज जल्द हि आँ गए थें।
साम होँ गय़ा थां। गरमचाय पीने केँ बाद मे क्लबचला गय़ा।
Thank you dost ?. ap Biswas karo. This iss my first kahani. Lockdown too aj sabhi kee problem ban chuki h. khas taur pr Small n Medium size k business pr. Lockdown dhire dhire open too hu raha h. halanki dhanda paani bad say bi badtar hote jaa raha h.
Sagar (Full Storyd) – New Episode
कई डीनो केँ बादभाग आया। सेक्सी औऱ बढ़िया। कृपया एपसोड पहले कि तरह रेगुलर लिखने औऱ पोस्ट करने कि कोशिश करें। हसीन रोमांटिक त्रिल्लर कथा हैं आपकी जोँ बेहतर बनपढ़ी हैं।
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