Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 8.
दोपहर बादजब मे घऱ पहुँचा तोँ माॅम नें खानां लगाया। रीतु अपनी सहेली काजल सें मिलने गयीँ, थि। मे अपने कमरे मे गय़ा। कुछदेर आराम करने करने केँ बाद पैराडाइज क्लबचला गय़ा। आज कुलभूषण खन्ना नहि आया थां। वहां ड्यूटी देने केँ बाद मैंने कुलभूषण खन्ना केँ असिस्टेंट सें एक् दिन कि छुट्टी लेकरघऱ आँ गय़ा। आठबजगए थें मगर अभि तक रीतुआईं नहि थि। माॅम सें पूछा तोँ उन्होंने कहा वोँ नौबजे तक लौटोगे। माॅम नें खाने केँ लिए पुछा तौ मैंने रीतु केँ आने तक इन्तजार करने केँ लिएकहा।
मे अपने कमरे मे गय़ा। कपड़े बदले औऱ छत पर्र टहलने लगा। तभी मुझेयाद आया कि मैंने अपने ब्लेजर औऱ पैंट तौ लांड्रिंग मे दिए हें, वोँ तौ मे लाना हि भूल गय़ा। मैंने रीतु कों मोबाइल लगाया औऱ उससे पूछा वोँ अभि काजल केँ पास हि हैं याँ वहां सें निकल गई हैं तोँ उसनेकहा आधे घंटे मे निकलरही हैं। मैंने उससेकहा कि आते वक़्त रास्ते मे हि जोँ लाउंड्री हैं औऱ उससे मेरीबात करा देना औऱ मेरी कपड़े लेती आनां।
पहले तोँ बड़ी आनां कानीकरी कि वोँ लांड्रिंग वाला उसकेआते वक़्त रास्ते मे नहि पड़ेगा, वोँ स्थान दुर हैं, वोँ बस सें नहि आयेगी, बस सें आने सें कपड़े खराब होँ जायेंगे, गर्मी सें मेरी पोलिस उत्तर जायेगी, टैक्सी सें आयेगी, टैक्सी केँ भाड़े केँ पैसे नहि हें, तब मैंने बड़ी मुश्किल सें उसे कपड़े लेकरआने केँ लिए सजधजकर किया।
रीतु कों किसीबात केँ लिए convince कराना बड़ी टेड़ी खीर हैं। यह शर्तिया अपने हसबैंड कों नाकों चने चबवा देगी। मे जाकर अपनेबेड पर्र लेट गय़ा औऱ पिछले दिनों केँ बारे मे सोचने लगा।
लगभग एक् आध घंटेबाद रीतुआईं औऱ मेरे आयरनकिए हुए कपड़े सलिके सें पलंग पऱ रख दि। मैंने उसे देखा वोँ इस वक़्त एक् हरेरंग कां सलवार सूट पहनी थि। उसके जिस्म सें आतीवही जानी पहचानी खुशबू। हमेशा कि तरह जगमग जगमग।
" बस मे तुम्हारी पालिश तोँ नहीं उतरी। " मैंने कहा।
" नहि उतरी। " वोँ खड़े खड़े हि बोलीं।
" अंदेशा तोँ बहोत थां तुम्हें। "
" हां। अलबत्ता उससे अधिक बुरीबात हौ गई। "
" क्याँ ?" मे सशंकित स्वर मे बोला।
" बस मे कुछ लफंगे सवार थें। "
" ओहो !" - मे हमदर्दी भरे स्वर मे बोला - " उन्होंने तुम्हें छेड़ा होगा, गन्दे इशारे किए होंगे, फब्तियां कसी होंगी। "
" इससे भि बुरा किया कमीनों नें। "
" अच्छा !" क्याँ किया उन्होंने ?"
" उन्होंने मुझेहर तरह सें नजर अंदाज कर दिया, मेरीतरफ झांका भि नहि, पीठफेर ली मेरीतरफ सें। "
" ये तोँ वाकई बुरा किया कमीनों नें। "
" हां न्। आप् यदि मुझे टैक्सी सें आने कों बोले होते तौ क्याँ होती मेरी इतनी बेइज्जती। " " आप्."
उसकीबक बक शुरुआत हौ गई थि औऱ मे चुपचाप उसे देखेजा रहा थां। मे जानता थां कि वोँ टैक्सी सें हि आयी होगीमगर उसे तौ मुझसे अपनीबक बक करनी थि। मुझे तोँ उसकीबक बक भि बहोत प्यारी औऱ सेक्सी लगती थि। उसके बोलने कां अंदाज, उसके लबों कां हिलना, उसके हाथों कां झटकना, बोलते वक़्त उसकेलटो कां उसके गालों कों चूमना। मे तोँ जैसे कहींखो गय़ा थां।
" लगता हैं अभि तक आपने डीनर नहि किया। "
" क। क्याँ कहा ? " मे जैसेहोश मे आया।
" मैंने कहा लगता हैं अभि तक आपने डीनर नहि किया। "
" केसे जानां ?" मे हकबकाया।
" आंखों हि आंखों मे मुझे निगल जाने कि कोशिश जोँ कररहे हौ। "
" मात्र कोशिश कररहा हूं। " - मैंने नकलीअहह भरी - " कोशिशें तोँ मे औऱ भि बहोत करता हूं मगर कामयाब कहां होँ पाता हूं। "
" कयीबार कोशिश मे कामयाबी सें अधिक मज़ाआता हैं। "
" वोँ केसे ?"
" कोशिश इनसान बारबार करता हैं। कामयाबी केँ बाद वोँ कथाखतम होँ जाती हैं। "
" क्याँ बात हैं, आज तौ बड़ी काबिलियत भरी बातें कररही हैं। "
" मे अक्सर काबिलियत भरी बातें करती हूं, खासतौर सें सूर्य अस्त होने केँ बाद। "
" गुड। अब अपनी प्रवचन बन्दकर मुझे जोरों सें भुखलगी हैं। "
" तोँ मैंने आपको खाने सें रोका हैं कब सें स्वयं हि बकबक कियेजा रहे हौ। " वोँ अपनी आंखें तरेरती हुइ बोलीं।
फिन खानां खाने केँ बाद मे अपने कमरे मे आँ गय़ा औऱ आगरा जाने केँ लिए अपनेबैग सजधजकर किया औऱ फिनखाट केँ हवाले हौ गय़ा।
सुभह साढ़े आठबजे होंगे जब मे गाजियाबाद श्वेता दि केँ फ्लेट आया। जीजा अपने कमरे मे आरामकर रहा थां। श्वेता दि सजधजकर हौ गई थि। उन्होंने पीलेरंग कि साड़ी पहनी हुई थि। बिना आस्तीन कां ब्लाउज जिसमें उनके गोरी माशल भुजाएं बहुत आकर्षित लगरही थि। ब्लाउज कां गला v आकार कां थां जिसमें सें उनकी cleavage कुछहद तक नुमाइश होँ रही थि। गले मे मंगलसूत्र केँ अलावा जिस्म पर्र कुछ औऱ भि गहनेपहन रखी थि। उनका गदराया हुआ यौवन किसी भि इन्सान कों घायल करने केँ लिए पर्याप्त थां।
मैंने ब्रेकफास्ट वहीं कियाफिन जीजा सें इजाजत लेकर हम् दोनों गाड़ी लेकर वहां सें निकलगये। मे ड्राइव कररहा थां औऱ वोँ आगे वालीसीट पर्र मेरेबगल बैठी थि। कुछदुर तक हम् शान्त हि रहे। जब वाहन भीड़ भाड़ वाले एरिया सें बाहर् निकलमेन रोड पर्र आईतब श्वेता दि नें कहा।
" अब बताओ क्याँ बात हैं "
" कैसीबात ? " मैंने नजरें स्क्रीन सें हटाकर उनकीतरफ देखा।
" जब तुम् राजीव सें प्रायवेट बात करने कों बोलकर मुझे वहां सें हटने केँ लिए बोले थें। "
" ओह ! वोँ। " मे वापस नजरें स्क्रीन पर्र रखतेहुए कहा - " " बता दुंगा, थोड़ी धीरजरखो। "
" नहि। अभि बताओ। "
" वोँ बहुत लम्बी किस्सा हैं, इस टाइम वाहन ड्राइव करतेहुए केसेबोल सकता हूं। एक् काम करते हें वहां पहुंच कर बताता हूं। वहां अकेले मे हमें बहुत टाइम मिलेगा। "
" ओके। " बोलकर वोँ चुप होँ गई। कुछदेर बाद वोँ एक्साइटेड हौ कर बोलीं - " आज कितने दिनों केँ बाद नं हम् किसी जश्न मे शामिल हौ रही हें, कितना मज़ा आयेगा। हैं नाँ। "
" हां। तुम्हारे विवाह केँ बाद पहलीबार। " - मैंने मुस्कराते हुएकहा।
" हां। जब हम् छोटे थें कितने मस्ती करते थें, कितने झगड़ते थें। "- वोँ कहींखोई खोई सि बोलि। - " औऱ अब जैसे लगता हैं मे अपना बचपनभुल गयीँ, हूं। "
" अच्छा तौ हैं, अब विवाह शुदा जीवन कि लुत्फ उठारही होँ। इतना अच्छा प्रेम करने वाला पति मिला हैं। वैसे भि जिन्दगी कां चक्र तौ हमेशा बदलते रहता हैं। "
" हां। " वोँ चुपचाप सि होँ गई।
" सभीठीक हैं नां ? "
" हां। सभीठीक ठाक हैं। " - वोँ अचानक सें अलगरंग मे आतेहुए बोलीं - " छोड़ो वोँ सभी, कोई गाना वाना लगाओ। किशोर कुमार केँ मस्त गाने। "
लगभग एक् घंटेबाद वोँ गाने सें बोर होनेलगी तौ मैंने कहाअगर नींद आँ रही हौ तोँ सोजाओ। मगर उसनेे मनाकर दिया। औऱ स्वयं हि तरन्नुम मे शायरी करनेलगी -
" फिन मुझे दीदा - ए - तरयाद आया,
दिल जिगर तश्रना ए फरियाद आया,
दम लिया थां नां कयामत नें हनोज,
फिन तेरा वक़्त ए सफ़रयाद आया। "
" वाउ ! वाउ। शायरी कि तुकबंदी तोँ बहोत अच्छी हैं मगर मुझेसमझ नहि आया। " मैंने उनको शाबाशी देतेहुए कहा।
वोँ हंसते हुए बोलि - " मुझे उर्वशी नें सुनाया थां पर्र सच कहूं तोँ मुझे भि इसका अर्थ नहींपता। "
" उर्वशी ऐसी भि शायरी करती हैं मगर मुझे तौ." मे अचरज सें बोला।
" क्याँ मुझे तौ ? " वोँ सवाल सूचक दृष्टि डाली।
" नहि, कुछ नहि। "
" तुम् कुछ छुपारहे हौ, मेरीशपथ कहो। "
" मुझे तोँ बड़ी सिम्पल औऱ अच्छी अच्छी शायरी भेजती हें। " मैंने धीरे-धीरे सें कहा।
" क्याँ मतलब ? - वोँ अचरज सें बोलीं - " उर्वशी तुम्हें शायरी मैसेज करती हैं। "
" हां। इसमें अचरज कि बात क्याँ हैं, तुम्हीं नें तौ कराई थि हमारी जान पहचान, भुल गई, ? "
" नहि। " वोँ अभि भि शंकित नजरों सें मुझेघुर रही थि - " वैसे वोँ क्याँ क्याँ मैसेज करती थि ? "
" अरे दोस्त ! क्यूं हलकान होती हैं, वहीं सिम्पल साधारण सि मैसेज। "
" मुझे दिखाओ। " मुझे घुरते हुए बोलि।
" ठीक हैं बाबा ! आगराचल केँ देख लेना। "
वोँ आश्वस्त नहि हुईँ।
" क्याँ अब भि, मेरा मतलब विवाह केँ बाद भि मैसेज करती हैं ? "
" हां। अभि भि करती हैं। परसों हि तोँ किया थां। " - मैंने उसे औऱ छेड़ते हुएकहा।
" औऱ तुम् ? क्याँ तुम् भि करते होँ ? "
" मे भि करता हूं। "
अब श्वेता दि केँ मन मन्दिर मे उथल-पुथल मच गई थि। वोँ बहुतदेर तक चुपरही फिन बोलीं -
" अच्छा परसों वोँ क्याँ मैसेज कि थि ? "
" अरे दोस्त ! कितनी शकी होँ। मैंने कहा नं आगरे मे बता दुंगा। "
" नहि। परसो वाली मैसेज बताओ बाकी वहांबता देना। " उसनेजीद पकड़ली।
मे सोचता हुआ बोला - " मुझे पुरीतरह सें याद नहि आँ रहा हैं। "
" कुछ तौ याद होगा वहीं बताओ। "
" ठीक हैं, मुझे सोचने दो। "
वोँ बैठे बैठे हि पहलुबदल रही थि औऱ मे ड्राइव करतेहुए थोड़ी सोचने कि मुद्रा मे आँ गय़ा।
" अभि याद नहि आँ रहा हैं। " मैंने ललाट सहलाते हुएकहा।
" चुपचाप सीधीतरह सें बताओ नहि तौ अभि व्हीकल सें ढकेल दुंगी। " वोँ आंखें तरेरते हुए बोलि।
" हद हैं दोस्त। ठीक हैं याद करने कि कोशिश करता हूं। " - थोड़ी देरबाद बोला - " हां, कुछकुछ यादआया, बोलता हूं। "
" सुनो। "
वोँ मुझे अपलक देखती रही।
" तेरीबु."( मे यहांबु बोलकर रुक गय़ा जैसे कि मे भुल गय़ा हूं )
वोँ चौंकी।
" तेरी बुटदार चु." ( मे अबचु पऱ रुक गय़ा )
वोँ इसबार अपनी आंखें फैलाई। यहदेख मे जल्द सें बोला -
" तेरी बुटदार चुनर कों देखकर मेराझां.( अब मे झां पऱ फंस गय़ा )
अब उसके चेहरे केँ रंग बदलने लगे थें। उसके क्रोध होने सें पहले मैंने वाक्य पुरी कि -
" तेरी बुटदार चुनर कों देखकर मेरा झांझर सां दिलडोल उठा। "
अब वोँ थोड़ी नोर्मल हुइ तौ फिनआगे कां लाईन केहना शुरुआत किया।
" तेरी बुटदार चुनर कों देखकर मेरा झांझर सां दिलडोल उठा।
तेरीचु.( अबफिन मे चु पर्र फंस गय़ा औऱ याद करने कां नाटक करनेलगा )
वोँ मुझे बिनापलक झुकाए मुझेदेख रही थि। मैंने उसे देखाफिन आगे कां लाईन बोल्ना शुरुआत किया -
" तेरी चुन-चुन करती पायल नें मेरा लंड." ( इसबार मे लंड पर्र रुक गय़ा )
उसके चेहरे केँ हाव-भाव सें लगरहा थां कि अब ज्वालामुखी फटने हि वाला हैं इसलिये मैंने जल्द सें अगले लाईन कों भि पुरा किया -
" मेरा लंडन जानां रोक दिया। " - बोलकर मैंने उसे देखा औऱ उसे शायराना अंदाज़ मे पुरी शायरी एकसाथ कहा।
" तेरी बुटदार चुनर कों देखकर, मेरा झांझर सां दिलडोल उठा।
तेरी चुन-चुन करती पायल नें, मेरा लंडन जानां रोक दिया। "
वोँ मुझे गुस्से सें अपनी आंखें बड़ी बड़ी करके अपलक देखेजा रही थि।
मैंने कहा - " ऐसे क्याँ देखरही हौ ? मैंने तौ पहले हि कहा थां मुझेयाद नहि आँ रहा हैं।। वैसे शायरी अच्छी थि नं ? "
उसने एक् जोरदार कां पंच मेरे बांह पऱ मारा।
" अरे ! क्याँ करती हौ ? एक्सीडेंट होँ जाएगा। " - मैंने अपनेहाथ सहलाते हुएकहा।
" मे सभी समझती हूं। तुम् नं ! तुम्हे नां मे वहां जाके आगरा केँ पागलखाने मे भर्ती करवा दुंगी। तुम् पहले पहुंचो वहां। " - उसने मुझे घुरते हुएकहा।
" मुझे एक् औऱ याद आँ गय़ा। सुनाऊं ? " मैंने उसे छेड़ते हुएकहा।
" जरुरत नहि हैं। चुपचाप कार चलाओ। - मुझे घुरते हुए हि बोलीं - " औऱ रास्ते मे कहीं होटल केँ सामने रुकना "
" क्यूं ? भुखलगी हैं क्याँ ? अरे ! कितना खाती होँ दोस्त दोढाई घंटे पहले हि तोँ खाया थां, मोटी हौ जाओगी। जानती हौ, मोटापा नं अपने आप् मे एक् गम्भीर बिमारी हैं। तुम्हारी यह छरहरी काया."
" चुपरहो " - मुझेबीच मे टोकते हुए बोलीं - " बकवास बंदकरो। मुझे बाथरूम जानां हैं। "
" बाथरूम !। बाथरूम क्यूं ? घऱ मे नहाई नहि थि क्याँ याँ केवलहाथ मुंह धोना हैं। "
" तुम् ! " - वोँ गुस्से सें देखी - " टायलेट जानां हैं। अबयहमत पूछना कि टायलेट क्यूं जानां हैं। "
" ठीक हैं नहि पूछूंगा। वैसे एक् बात कहूं ? "
" क्याँ ?"
" मे पुछने वाला थां। "
" तुम् एक् नम्बर केँ कमीने होँ। " - कहकरफिन मेरेबगल मे घुसा मारा।
कुछदुर जाने केँ पश्चात एक् होटल जौ ठीकठाक हि थां मिला। हम् गाड़ी सें उतरकर होटल कि तरफचल दिए।
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Update 8 A.
अभि हम् होटल जाने केँ रास्ते पऱ हि थें कि मुझे एक् ख्याल आया औऱ मैंने श्वेता दि सें कहा -
" मुझेयह 2 nd class वाली होटल पे बहोत डाउट रहता हैं। तुम् न् यहां तौ बाथरूम जाओमत। "
" क्यूं ? " वोँ रूकते हुए बोलि।
" ऐसे होटल मे बाथरूम केँ अन्दर गुप्त कैमरा छिपे होते हें जौ औरतों कों नहाते वक़्त, टायलेट करतेहुए, याँ पेशाब करनेहुए रिकॉर्ड कर लेते हें। "
" क्याँ ?" वोँ चौंकते हुए बोलि।
" हां "
" तोँ अब क्याँ करें "
" यहां सें चलते हें आगे चलकर रास्ते मे कहीं सुनसान स्थान देखकर पेशाब कर लेना। "
" ठीक हैं, जल्दचलो। "
उसने शायद पेशाब शब्द पर्र ज़्यादा गौर नहि किया थां। हम् वापस गाड़ी मे सवार होकर वहां सें निकलगये। अभि हम् थोड़ी हि दूरी पऱ गये थां तोँ वोँ कसमसाते हुए बोलीं - कहीं रूको नं। मुझे बर्दाश्त नहि हौ रहा हैं। "
मैंने वाहन कों मेनरोड सें हटाकर साइड मे एक् कच्ची रोड पऱ रोक दिया। वहांअगल बगल जंगल तोँ नहि थां मगर पेड़ पौधे बहोत थि।
" जाओ पेड़ केँ ओट मे बैठकर करलो। "
वोँ जल्द सें भागती हुए गई औऱ एक् पेड़ केँ पीछेजा करबैठ गई। मगर ताज्जुब कि बातयह हैं कि वोँ पेड़ गाड़ी सें केवल दसेकफुट दूर थि। जब कि उस पेड़ केँ थोड़ी हि आगे बहोत सारेघने पेड़ थें। उसके सीटी कि मनमोहनी आवाज़ मेरे कानों मे अमृतघोल रही थि। मेरे नाभी केँ नीचे साढ़े सातबाई अढ़ाई कां लिंगराज जोर सें इन्कलाब जिंदाबाद कां नारा लगाने लगा। मे अभि उसको कन्ट्रोल करने मे लगा हि थां कि वोँ आई औऱ वाहन केँ दरवाजे खोलकर बगल मे बैठ गई।
" चलेंअब ? " उसने मुझे देखते हुएकहा।
" तुम्हे करतेदेख अब मुझे भि लग गई हैं। मे अभि आँ रहा हूं। "
बोलकर मैंने अपनीओर केँ दरवाजे सें बाहर् निकला औऱ उसी पेड़ केँ पीछेचला गय़ा जहां उसने पेशाब किया थां। जहां उसने पेशाब कि थि वहां कि जमीन पर्र उसके पेशाब जमा हौ गए थें। मे इतना उत्तेजित होँ गय़ा कि मेरे लिंगराज नें पेशाब करने सें मनाकर दिया। बड़ी मुश्किल सें उसे रेडी कराया औऱ उसके पेशाब केँ उपर हि पेशाब कर दिया।
वहां सें निवृत्त हौ कर गाड़ी मे सवारहुआ औऱ वहां सें निकल गय़ा।
ड्राइव करतेहुए कहा - " कल सें बाथरूम नहि कि थि क्याँ "
" सुभह निकलने केँ पहले फ्रेश हुईं थि। क्यूं ?"
" वहांदेख करलगा जैसेकई लोगों नें पेशाब किया हैं। "
उसनेफिन मेरीतरफ मारने केँ लिएहाथ उठाया तौ मे जल्द सें बोला -" sorry sorry मे अबकुछ नहि बोलुंगा। तुम् हाथवाथ फिनमत उठा देना वोँ पहले सें हि तुम्हारे मारने सें दर्दकर रहा हैं। "
" तुम्हारी हरकतें हि ऐसी हैं। अबअगर फिन तुमने कुछ उल्टा पुल्टा कहा तोँ शर्तिया मे तुम्हें कार सें ढकेल दुंगी। " - उसनेे आंखें तरेरते हुएकहा।
मे चुप होँ गय़ा। पन्द्रह बीस मिनट तक हम् ऐसे हि चुपरहे। आखिर मे उसने अपनी चुप्पी तोडते हुएकहा _
" उर्वशी केँ संग तुम्हारा कोई अफेयर थां ?"
मे चुपचाप रहा औऱ गाड़ी ड्राइव करतारहा। जब मैंने कुछ नहि बोला तौ वोँ दुबारा पुछी -
" कहो नाँ। तुम् दोनों रिलेशनशिप मे थें ?"
" क्याँ बोलूं ? जबकुछ बोलने जाता हूं तबतबहाथ उठा देती हौ। मे अबकुछ नहि बोलने वाला। "- मैंने नकली नाराजगी जताते हुएकहा।
" ओलेओले मेरा राजा भैया, अपनी श्वेता दि सें नाराज हौ गय़ा। " - मेरेपेट पऱ गुदगुदी करती हुई बोलि - " अच्छा, अबकुछ नहि बोलुगी। "
" नहि नहि मुझे तुम् पर्र विश्वास नहि हैं, तुम् घड़ी घड़ी मुंह फुला लेती होँ औऱ हाथपैर चलाने लगती होँ। मे अब तुम्हें कुछ नहि बताने वाला। "
" नौटंकी बाज कहीं कां। बोलता हैं याँ नहि। "
" नहि। " मैंने मुंह फुलाते हुएकहा।
" अच्छा। तेरीशपथ। अबकुछ नहि करूंगी। " उसने अपने बाहों कां हार मेरेगले मे डालते हुएकहा।
उसकेऐसा करने सें उसका दायां वक्ष मेरेबगल सें सट गय़ा औऱ मेरेबदन मे उत्तेजना हिलोरें मारने लगा। औऱ वाहन हल्के सें लहरा गई।
" अरे ! क्याँ कररही होँ। एक्सीडेंट करवाना हैं क्याँ " मैंने स्टियरिंग सम्हालते हुएकहा।
वोँ मुझे छोड़कर जरा सि दुर होतेहुए बोलि - " बताओ नां, तुम् दोनों कां अफेयर थां क्याँ। "
" मुझसे क्यूं पुछती होँ ? वोँ तौ तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड थि। उसने तुम्हें कुछ नहि बताया ? "- मैंने उसे देखकर कहा।
" कहो नाँ दोस्त। क्यूं लड़कियों जैसी नखरे करते होँ। औऱ हां उसने मुझेकुछ नहि बताया। "
" ओके। "- मैंने ठंडी सांसभरी -" हमारा अफेयर थां। "
मैंने उसे देखा वोँ मुझे बिनापलक झुकाए देखरही थि।
" क्यूं ? क्याँ हुआ ? ऐसे मुझे एक् टक क्यूं देखरही हौ ?"
" कुछ नहि। साली। कमीनी। इतना बड़ाराज मुझे तक नहि बताया। "- वोँ गुस्से सें बोलीं -" औऱ तुमने मुझे क्यूं नहि बताया ?"
" मे। मुझे उसने अपनीशपथ दिलाकर किसी कों भि बोलने सें मना किया थां इसलिये नहि बोला। "
" वाउ। उसने तुम्हें बोला औऱ तुमने मान लिया। मुझे अपनी बेस्ट फ्रेंड, नुरेनजर, हम् प्याला, हम् निवाला औऱ नाँ जाने क्याँ क्याँ बोलते हौ औऱ सिक्रेट उर्वशी केँ संग शेयर करते होँ। " - वोँ गुस्से सें बोलीं।
" देखोफिन क्रोध हुईँ नाँ। इसीलिए नहि बतारहा थां। औऱ कुछ बातें ऐसी होती हें जोँ नहि बताईजा सकती हैं अगर किसी लड़की केँ इज्जत कां प्रश्न हौ तौ। "
" ठीक हैं ठीक हैं। " वोँ अभि भि मुंह फुलाए बैठी थि।
" मेरी जानेमन तुम् तोँ ऐसा रियेक्ट कररही होँ जैसे मे तुम्हारा खसम हूं। " मैंने उसके बांह पऱ चिकौटी काटते हुएकहा।
" बकवास बंदकरो। " - वोँ पुर्ववत गुस्से सें बोलि।
हम् थोड़ी देर तक चुपरहे। वोँ शायद किसीसोच मे डुबी हुइ थि। फिन उसने खामोशी तोड़ी।
" क्याँ तुम् लोगों नें वोँ भि कर लिया हैं ?" वोँ धीरे-धीरे सें बोलि।
" वोँ ? वोँ क्याँ ? "
" वोँ ! वही जोँ एक् लड़का लड़की करते हें। "
" हां। खुब घुरा फिरा हमलोगो नें। पार्क, सिनेमा, लांग ड्राइव."
" बेवकूफ मे पार्क सिनेमा कि बात नहि कररही हूं। "
" फिन किसकी बातकर रही हौ ?"
" म.म। मे उसकीबात कररही हूं जौ लवर अकेले मे करते हें। जौ पति-पत्नि बन्द कमरे मे करते हें। " वोँ झिझकते हुए बोलि।
" अच्छा वोँ। " - मैंने ऐसे बोला जैसे मुझेअब बातसमझ मे आयी होँ -" ऐसेकहो नां चो। मतलब सेक्स किया हैं याँ नहि। "
" हांवही। " वोँ गुस्से सें मुझे घुरते हुए बोलि।
" ज़्यादा तोँ नहि मगरसात आठबार किया हैं। " - मैंने ऐसे बोला जैसे मुझे बहुत लज्जा आँ रही हौ।
जब मैंने उसकीतरफ देखा तोँ मुझेलगा कि जैसेअब वो मुझ पर्र रासन पानी लेकर झपटने हि वाली हैं। मैंने जल्दी वाहन खड़ीकर दि औऱ उससेकहा -
" देखो ! अभि तुमने मेरीशपथ खाई हैं। "
वोँ थोड़ी देर मे शान्त हौ गई। फिन मैंने गाड़ी आगे बढ़ा दि। मैंने थोड़ी देरबाद कहा - " वैसे तोँ मे पटाना चाहता थां उसके सहेली कों मगर उसने तौ मुझे घांस तक नहि डाला बल्कि विवाह करके फुर्र हौ गई तोँ मैंने सोचा वोँ नहि तौ उसकी सहेली हि सही। "
वोँ कुछ बोलीं नहि, चुपचाप सुनती रही। उसेसभी समझ मे आँ रहा थां कि मे किसके बारे मे कहरहा हूं। वोँ एक् बार मेरीतरफ देखीफिन सामने सीसे कि तरफ देखने लगी।
" तुमसे कभीझुठ नहि बोलता यहबात तुम् भि जानती हौ। अगर तुम्हें बुरालगा होँ तोँ sorry." - मैंने उसे मनाते हुएकहा।
वोँ चुप बैठीरही।
" मुझे एक् जबरदस्त शायरी याद आँ रही हैं, बोलूं ?" - मैंने कहा।
वोँ मेरीतरफ पलटी औऱ अपनी चौबीस कैरेट केँ मुस्कराहट सें माहौल कों तनावमुक्त कर दि।
यह औरतें न्, समय मे तोला लम्हा मे माशा।
" नहि नहि कोई जरूरत नहि हैं। जैसे तुम् वैसे हि तुम्हारी शायरी। "- वोँ बोलि।
रास्ते मे एक् ढाबे मे हल्का फुल्का ब्रेकफास्ट किया औऱ गरमचाय सिगरेट पीने केँ बाद आगरा कि ओर निकल पड़े। आगरा थोड़ी देरबाद पहुंचने हि वाले थें। रास्ते मे मैंने श्वेता दि कों मेरे औऱ उर्वशी केँ रिश्तों केँ बारे मे पुछताछ करने सें मना किया।
उर्वशी कां पति संजय चोपड़ा एक् बेहद हि रईस औऱ दिल्ली शहर कां जानां माना व्यापारी थां। उसके दिल्ली मे हि नहि वल्कि आगरा, मुम्बई, हैदराबाद औऱ जयपुर मे भि होटल कां बिजनेस थां। मैंने तोँ यहां तक सुना थां कि वोँ अगले इलेक्शन मे रूलिंग बर्थडे पार्टी केँ तरह सें m.p। केँ लिए खड़ा होने वाला हैं। पता नहि सच हैं याँ झूठ।
उर्वशी भि कोई साधारण घराने सें नहि थि। उसके पिता कां गुड़गांव मे आटोमोबाइल हार्डवेयर कां इंपोर्ट एक्स्पोर्ट कां काम थां। उर्वशी अपने माँ बाप कि एकलौती लड़की थि। बहोत बहोत हि सुन्दर बिल्कुल उर्वशी ढोलकिया कि तरह।
उर्वशी कि दोस्ती श्वेता दि सें कालेज मे हुइ थि औऱ जल्द हि वे दोनों बेस्ट फ्रेंड बन गई थि। श्वेता दि नें हि उर्वशी सें मेरी परीचय कराई थि जौ बाद मे चलकर उसकेखाट तक पहुंच गई।
उन्होंने अपने विवाह कि रिसेप्शन आगरा केँ अपने हि होटल मे रखी थि। जब हम् होटल पहुंचे तब दोपहर केँ दोबजरहे थें। हम् होटल केँ रिसेप्शन हाल मे पहुंचे। वहां मेहमानों कां जमघटलगा हुआ थां। रिसेप्शन कों बहोत हि अच्छी तरह सें सजाया गय़ा थां। खाने मे कईतरह कि Verity थि। वेज औऱ नानवेज दोनों हि तरह कां व्यवस्था थां। शराब कां साईड मे अलग काउंटर बना थां जहां पऱ मेहमानों कि भीड़ अधिक थि। वर्दी धारी वेटरहाल केँ चारों ओर मेहमानों केँ खातिरदारी मे जुटेहुए थें। नयेनये विवाह केँ बंधन मे बंधेहुए जोड़े केँ लिए एक् शानदार मंचबना हुआ थां जौ अभि खाली पड़ा थां। हाल केँ अन्दर स्थान स्थान मर्द औऱ औरतें ग्रुप बनाकर स्नैक्स औऱ तरलपेय कां मजा लेतेहुए बातों मे व्यस्त थें।
जब हम् हाल मे प्रवेश किये तौ हमारी नजरें मेजबान कों ढूंढने लगी। हमने चारों तरफ देखा तौ संजय कों कुछ लोगों मे घिराहुआ पाया वहीं उर्वशी कुछ औरतों केँ बीच मे। उर्वशी उन औरतों सें हंसहंस कर बातें कररही थि।
" देखो ! उर्वशी वहां हैं। उन औरतों केँ बीच मे। हंसहंस केँ बातें करतेहुए। " श्वेता दि नें उर्वशी कि तरफ इशारा किया।
" हां। " मैंने देखाइस टाइम वोँ लाल साड़ी, लाल ब्लाउज, लाल सैंडल मानेसर सें पैर तक लाल हि लालगेट अप मे थि। गले मे सोने कां बड़ाहार, जुल्फें खुली हुई, होंठों पर्र लाली। कयामत लगरही थि।
" देखकर कौनबोल सकता हैं कि यह साली इतनी चालु निकलेगी। " उसने मेरी आंखों केँ आगे अपनी हथेली हिलाते हुएकहा।
" तुम्हे एक् बात कहूं। " मैंने श्वेता दि कों थोडा साईड मे लें जाकर बोला।
" क्याँ ?"
" A bad mann iss better than a bad name."
" मतलब ?"
" बद बदनाम होने सें अच्छा हैं। "
" मे समझी नहि। " उन्होंने मुझे सवालभरी निगाहों सें देखा।
" मे समझाता हूं.मानलो.एक् लड़काराम, जिसने कभी शराब कों हाथ भि नहि लगाया होँ, कभी शराबपी नां होँ उसेयदि कोई शराब दुकान मे याँ शराब दुकान केँ पास याँ पब मे कोईदेख लें तोँ वोँ यही समझेगा कि वोँ लड़काराम शराबी हैं। औऱ एक् लड़का जिसका नाम मोहन हैं वोँ डेली ड्रींकर हैं रोज शराब पीता हैं मगरउसे शराब पीतेहुए कभी किसी नें भि नहि देखा तोँ लोग उसके बारे मे यही कहेंगे कि मोहन कितना अच्छा लड़का हैं, शराब कों हाथ तक नहि लगाता।। यहांराम बदनाम हैं मगर एक्चुअली बद व्यक्ति मोहन हैं।.समझी। "
वोँ कुछ बोलि तौ नहि मगर समझने कां प्रयत्न कररही थि।
मैंने फिनकहा -" मानलो। मे कहता हूं मानलो कि मे एक् अय्याश छोकरी बाज लड़का हूं, मेरीकई लड़कियों सें नाजायज ताल्लुकात हैं मगर किसी नें भि। किसी नें भि मुझे वोँ सभी गन्दी हरकतें करतेहुए नहि देखा हैं, औऱ नां हि सुना हैं इसका मतलबमै एक् शरीफ बन्दा हूं। दुसरी तरफ वोँ उर्वशी कां हसबैंड संजय एक् बहोत हि शरीफ औऱ पराई औरतों सें दूर रहने वाला लड़का हैं मगर भुले भटके किसी कोठा याँ वैश्या केँ संगदिख गय़ा तौ लोगयही समझेंगे कि वोँ एक् रंडीबाज औऱ चरित्रहीन लड़का हैं।। तुम् गलतकरो मगर पकड़े मतजाओ तोँ सभीठीक ठीकमगर अगर पकड़े जाओ तौ सभी खराब खराब।। इसीलिए कहते हें कि बद व्यक्ति बदनाम होने सें अच्छा हैं। "
" ठीक हैं ठीक हैं। समझ गई। तुम्हारी विद्या तुम्हे हि मुबारक। चलो उर्वशी केँ पास चलते हें। " उसने मेरी बांह पकड़कर लेँ जातेहुए कहा।
चलते-चलते वोँ अचानक रूकी औऱ मुझसे पूछा " तुम् भि कुछ gift लाए होँ ?"
"हां। तुम् क्याँ लाई होँ ?"
" एक् सोने कि अंगूठी, चांदी कां पायल औऱ कपड़े कां सेट। औऱ तुम् ?"
" मे " -मे उसकेकान मे फुसफुसाया -" Manforce Condoms "
उसने मेरेपेट एक् जोर कां मुक्का मारा औऱ मुस्कराते हुए मेरी बांह पकड़ उर्वशी कि तरफचल पड़ी।
Murder say pehle tak story lajwab jaa rahi thi lekin ab kisi film kee story jaisi hu gayi h. By the way aage dekhen kya hotha h.
Sagar (Full Storyd) – New Episode
Update 8 B.
दोनों सहेलियां बगलगीर होकर मिली। मैंने उर्वशी कों विवाह कि मुबारकबाद दि। उर्वशी नें अजय केँ लिए संवेदना प्रकट कि। फिन वोँ अपने हसबैंड संजय केँ पास हमें लेँ गयीँ,।
संजयजी भि हमसे बड़े गर्मजोशी सें मिले औऱ मेरेकाम औऱ परिवार केँ बारे मे पुछा। मैंने बड़े धैर्य सें उन्हें सभी बताया। मुझे वोँ बहोत हि मिलनसार औऱ हंसमुख स्वभाव केँ शख्सलगे। फिन उर्वशी नें अपने माँ-बाप सें औऱ फिन अपने सासू माँ ससुरजी सें मिलवाया। हम् दोनों नें उनको प्रणाम किया।। फिन दोनों सहेलियां मुझसे बिदा लेँ कर गर्ल्स टाक मे लग गई।
मे भि टहलते टहलते जुस काउंटर पर्र पहुंच औऱ मिल्क शेक लेकर ज्योंहि पलटा कि एक् लड़की सें टकरा गय़ा। मैंने जल्द सें लड़की कों कमर सें पकड़कर गिरने सें बचाया।
लड़की मुझे thanks कहतेहुए पलटी तौ उसे देखते हुए मे चौंक गय़ा।
" तुम् !" मैंने चौंकते हुएकहा।
" तुम् ! तुम् यहां क्याँ कररहे हौ ?" लड़की नें भि चौंकते हुएकहा।
यहवही लड़की थि जिससे मे रीतु केँ कालेज मे मिला थां औऱ जिससे मैंने मज़ाक मे फ्रेंडशिप बनाने कां आफर दिया थां।
" जौ आप् कररही हैं। " मैंने संभलते हुए मुस्कुरा करकहा।
" लड़की वालों केँ तरफ सें हौ ?"
" जी " मैंने कहा।
वोँ घुटनों तक कां जीन्स औऱ नाभि सें उपर तक कां डिजाइनर सफेदरंग कां टॉप पहनेहुए थि। पैरों मे ऊंचेहील कां सेंडल थां। उसके लम्बे लम्बे पैर, केले केँ टहनियों कि तरह माशल जांघें, नंगीकमर, गहरी नाभि, गिरिवर केँ ऊंचे शिखरों कि तरह वक्ष, गुलाबी होंठ, कजरारे नैन.सभी कुछ बन्दा केँ मन मुताबिक जैसा थां।
मे उसके सौन्दर्य कां रसपान कर हि रहा थां कि उर्वशी औऱ श्वेता दि वहां आँ गई।
उर्वशी नें लड़की सें पुछा " क्याँ हुआ मधुमिता ? सभीठीक हैं नां। "
" हां भाभीसभी ठीक हैं। थोड़ी फिसल गई थि। सभीठीक हैं। " उस लड़की नें मुझे घुरते हुएकहा।
ओह तोँ यह उर्वशी कि ननदी औऱ संजयजी कि बेहन हैं। मैंने सोचा।
" तुम् दोनों एक् दूसरे कों जानते हौ क्याँ " उर्वशी नें मधुमिता सें पूछा।
" हां भाभी एक् बार दिल्ली मे मिल चुके हें। मगरजान पहचान नहि हैं। " मधुमिता नें कहा।
उर्वशी नें मुस्कुराते हुए मधुमिता सें कहा -" यह सागर हें। श्वेता कां भइया। औऱ मेरा भि सबसे प्यारा भइया। श्वेता सें तोँ तुम् विवाह मे मिल चुकी हौ। औऱ सागर.यह हैं मेरी एकलौती ननदी मधुमिता। "
मधुमिता नें श्वेता दि कों नमस्ते किया। औऱ मुझसे हैंडसेक किया।
उर्वशी नें मुझे कुटिल मुस्कान भरी नजरों सें देखा औऱ मधुमिता सें बोलि " सागर बहोत हि शरीफ औऱ नेक लड़का हैं। यह श्वेता औऱ रीतु सें भि अधिक मुझे मानता हैं। मुझेजब भि कोई जरूरत पड़जाय तोँ मेरी सहायता केँ लिए हमेशा सजधजकर रहता हैं। '
मे हड़बड़ाया। मैंने श्वेता दि कों देखा वोँ मेरे हि तरफदेख रही थि। मैंने मधुमिता कों देखा तौ वोँ भि मुझे हि घुररही थि। मुझेडर लगा कहीं मधुमिता कालेज वालीबात यहां नं बतादें।
तभी किसी नें उर्वशी कों पुकारा औऱ वोँ श्वेता दि कों लेकर उनकेपास चली गई। उनके जाते हि मेरी confidence वापसआई।
मैंने मधुमिता कों देखा औऱ मुस्कुरा करकहा " मेराउस दिन केँ प्रस्ताव केँ बारे मे आप् नें क्याँ सोचा ?"
वोँ मुझेदेख कर व्यंग भरे स्वर मे बोलि " अच्छी इमेज बनाई हैं आप् नें अपने फेमिली मे। अगर उन्हें पता होता कि लड़कियों केँ बारे मे आप् केँ कितने उच्च विचार हैं ?"
मैंने मुस्करा करकहा " मैंने क्याँ ग़लतकहा। हमारे शास्त्रों मे भि तोँ यहीकहा गय़ा हैं कि औरतों कां चरित्र औऱ पुरूषों कां क़िस्मत तोँ देवता भि नहि समझपाए फिन मानव कि क्याँ विशात हैं। "
वोँ कुछ बोलि नहि मात्र मूझे अपनी बड़ी बड़ी आंखों सें घूरती रही। मैंने उस वक़्त जातेहुए एक् वेटर सें दो ग्लास मैंगो शेक लेकर एक् उसे दिया औऱ एक् स्वयं लेकर अपने होंठों सें लगा लिया।
" मेरे प्रश्न कां जवाब अभि भि नहि मिला " मैंने कहा।
" आप् कों आप् केँ प्रश्न कां जवाब चाहिए ?" वोँ चलते चलते बोलीं।
" यदि आप् कों कोई आपत्ती नहीं होँ। "
" ओके। जब आप् प्रश्न कर हि रहे हें तोँ क्यूं न् मे भि कुछ प्रश्न करूं। "
" जरुर जरुर। पुछिए। '
" आप् मेरे पांच सवालों कां जवाबदें दे। अगर आपका जवाबसही हुआ तौ we are dost "
" कैसा प्रश्न ?" मे शंकित भरी नजरों सें उसे देखा।
" सिम्पल। जनरल नॉलेज वाली। "
मैंने उसे देखा। वोँ मुझे अपलक देखेजा रही थि। क्याँ लड़की थि। अपने आप् कों जेनिफर लोपेज समझती हैं याँ ऐश्वर्या राय। जरूर पैसे कां औऱ सुन्दरता कां घमंड हैं।
" मैडम। यह क्याँ बात हुईँ। आप् क्याँ पूछेगी औऱ किस विषय पऱ पूछेंगी। यह तौ मे नहि जानता मगर दुनिया मे इतने जनरल नॉलेज केँ प्रश्न हैं कि उसे गुगल बाबा केँ अलावा दुनिया मे कोई भि नहि बता सकता। अबयदि आप् नें पूछा कि अमेरिका केँ अलास्का केँ गवर्नर कां नाम बताओ, जर्मनी केँ रेलमंत्री कां नाम बताओ, युगांडा केँ होम मिनिस्टर कौन हैं, तेलंगाना केँ हाई कोर्ट केँ जज कां नाम क्याँ हैं ?। यहकौन बता सकता हैं। "
वोँ चुप हौ गई औऱ मुझे घुरती रही।
मैंने बातों कों बढ़ाते हुएकहा " इससे अच्छा हैं कि इसकेउलट गेम खेलते हें। '
" क्याँ ?" उसनेकहा।
" मे आप् सें पांच प्रश्न पूछूंगा औऱ उसके जबाव मे आप् कों उत्तर गलत देने होंगे। '
" मतलब ?" उसने सवालभरी नजरों सें देखा।
" मतलबयह कि मे आप् सें पांच प्रश्न पूछूंगा औऱ आप् कों उसके जबावसही नहि बल्कि गलत देने हें। यदि आप् नें एक् भि प्रश्न कां जवाबसही मे दिया तोँ आप् हार जाएंगी औऱ मे जीत जाउंगा। फिन आप् कों मेरी फ्रेंड शिप कबूल करनी होगी। "
" ओके। औऱ अगर मैंने आपके सवालों कां जवाबगलत मे दे दिया तौ "
' तौ फिन आप् जीती औऱ मे हारा। उसकेबाद मे आप् कों फ्रेंड शिप केँ लिएजोर नहि दुंगा। आप् अपनीराह औऱ मे अपनीराह। "
वोँ कुछदेर तक सोचती रही। उसे इसमें कुछ तौ राजलग रहा थां। मैंने उसे सोचते देखकहा ' आप् सोचती बहोत अधिक हैं। सिम्पल सां गैम हैं। आप् कों बसगलत ऐनसर देने हें। जैसे मे आप् सें आपकानाम पुछूं तोँ आप् अपनानाम मधुमिता नाँ बोलकर रीना सीनाआदि बता देना। '
वोँ आश्वस्त हुइ।
" ओके। डन। अपना प्रश्न पुछो। " मधुमिता नें कांफिडेंस सें कहा।
" ओके। मेरा पहला प्रश्न हैं "- मे ड्रामेटिक अंदाज मे बोला -" भारत केँ राष्ट्रपति कां नाम क्याँ हैं ?"
वोँ कुछदेर सोची। अब वोँ इतनी बेवकूफ तोँ नहि होगी कि भारत केँ राष्ट्रपति कां नाम भि पता नाँ होँ।
" मनमोहन सिंह " उसने जवाब दिया।
" गुड। " मैंने अगला प्रश्न पूछा -" भारत केँ राष्ट्रीय झंडे मे कौन-कौन सां रंग हैं ?"
इसबार उसने बहुत सोच-विचार कर जबाव दिया -" नीला, पीला औऱ लाल। "
मैंने जल्दी अगला प्रश्न पूछा -" तुम्हारे पिता जी कां नाम क्याँ हैं ?"
वोँ चौंक गई। थोड़ी कसमसाई फिन बोलीं -" सुभाष चन्द्र बोस "
मे मुस्कराया। वोँ मुझेदेख कर थोड़ी शरमाई।
" कितने प्रश्न हुए " मैंने पूछा।
" तीन। " मधुमिता नें कहा।
" तुम् हार गयीँ,। " - मैंने मुस्कराते हुएकहा।
" कहां हार गयीँ, ? मैंने तौ सारे जबावगलत हि दिए हें। " वोँ चौंकते हुए बोलीं।
" तुम् गेमहार गई,। मेरा चौथा प्रश्न हि यह थां कि ' कितने प्रश्न हुए ? ' तुम्हें इसके जवाब मे आठ, दस, बीसकुछ भि केहना थां मगरतीन नहि बोल्ना थां। "
वोँ भौंचक्का सां मुझे देखती रही।
" तौ अब हमारी फ्रेंड शिप पक्की ?" - मैंने मुस्कराते हुएकहा।
वोँ अपलक मुझे घुरती रहीफिन एकाएक जोर सें हंसने लगी।
वोँ हंसते हुए बोलीं -" सच मे दोस्त बहुतफनी होँ। ओके। पक्की मगर फ्रेंड शिप नहि। "
" फिन ?"
मुझे मुस्करा कर बड़े हि ड्रामेटिक सें मे बोलि -" गर्लफ्रेंड।। क्याँ मे तुम्हारा गर्लफ्रेंड बन सकती हूं ?"
मे खुश होँ गय़ा। मैंने अपनेसिर कों उसकेआगे हल्के सें झुकाते हुएकहा -" जहे नसीब। It's my pleasure। "
उसने अपने कोमलहाथ मेरीतरफ बढ़ाई। मैंने उसे अपने दोनों हाथों सें थाम लिया। मन तौ कियाउसे पकड़कर अपनेगले सें चिपका लूं कि तभी श्वेता दि वहां आँ गई। श्वेता दि केँ आने केँ बाद मधुमिता काम कां एक्सक्यूज़ बनाकर वहां सें चली गई।
" क्याँ बात हैं ? बड़ीहंस हंस केँ बातें होँ रही थि। "- श्वेता दि नें कहा।
" हां क्यूं नाँ हौ आखिर मेरी गर्लफ्रेंड जौ हैं। "
" दो हि मुलाकात मे गर्लफ्रेंड ?" - श्वेता दि आश्चर्य करतेहुए बोलि -" बड़े फास्ट होँ। "
" हरकाम फास्ट हि होना चाहिए। वोँ दोहा सुनी हैं नां ?"
" कौन सां ?"
" कालकरे सोआजकर, आजकरे सोअब।
लम्हा मे प्रलय होयगी, बहुरी करोगे कब।। "
श्वेता दि भुनभुनाती हुए बोलि -" बसबस। सुनो हमेंआज रात यहीं रूकना पड़ेगा। उर्वशी औऱ जीजू दोनों बहोत जोरदे रहे हें। हमारे ठहरने कां इंतजाम इसी होटल मे थर्ड फ्लोर मे हुआ हैं। कमरे कां नम्बर ३०३ हैं। आज पुरा होटल मात्र मेहमानों केँ लिएबुक हें। हमारा बैगरूम मे चला गय़ा हैं। मे बहोत थक गई हूं तौ मे सोनेजा रही हूं अगर तुम्हें भि आराम करना हैं तोँ रूम मे आँ जानां। "
" क्याँ हम् दोनों एक् हि रूम मे सोयेगे। " मे खुश होतेहुए बोला।
" हां। एक् हि रूम मे। "
" वाउ ! वाउ। "
" मे जारही हूं औऱ हां एक् हि रूम मे नहि बल्कि एक् हि खाट पर्र। " - बोलकर वो पलटी औऱ एक् मीनट केँ अन्दर मेरे आंखों सें ओझल हौ गई।
मे चुम्बक कि तरह वहीं जमीन सें चिपका हुआ भौंचक्का खड़ारहा। उसके बातों कां अर्थ सोचने लगा। मेरे सांसों कि गति तीव्र हौ गई। मे कल्पनाओं केँ पंख मे उड़ने लगा। मेरादिल गार्डेन गार्डन होँ गय़ा।
आजरात जरूरकुछ तुफानी होने वाला हैं।
Sagar (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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