Beti Bani Sahara – New Episode
Update 35 :
प्राची पिताजी केँ प्रहार सें निहाल होँ गई थि, उसके चूत सें टपकरहे पिताजी कां गाढ़ा सफेद वीर्य केँ बूंदे यह प्रमाण देरहे थें कि प्राची कि अच्छी सहवास हुई हैं पिताजी केँ संगआज भि।
बापू: प्राची, अहह, मज़ा आँ गय़ा मेरी बच्ची।
प्राची : मुझे भि बापू।.
बापू:वाउ, थैंक्यू मेरी बच्ची कि मुझे तुमने डूबने सें बचा लिया, मै तौ उसनसे दे दलदल मे डूबने हि वाला थां कि तूने मेराहाथ थमा मेरी लाडो। मुझे तेरेबदन सें ज़्यादा जौ तुमने भावनात्मक रूप सें मेरामदद किया हैं, उसने मेरी बड़ी सहायता कि।
प्राची : आपने भि तोँ मेरा जिंदगी सवार दिया हैं पिताजी।
बापू:हां बेटी, बस एक् बार तेरा गर्भ धारण होँ जाए तौ माँ कों भि तसल्ली मिल जाएगी। पीछे हि पर्र गई हैं वोँ मेरीफूल सि प्यारी प्राची बेटु केँ।
प्राची : वही बापूमै आपसे पूछने वाली थि, कल हम् डॉक्टर केँ पास क्यूं जारहे हैं?
बापू:अरे कुछ नहि बेटी, मम्मी केँ हि तसल्ली केँ लिएकुछ टेस्ट करना हैं, बच्चेदानी कां जाँच करना हैं बस।
प्राची : ओहओक बापू, कोइ औऱ भि चेकअप करना हैं ?
बापू : नहि मेरी रानी। कल कि अबकल देखेंगे। अभि तौ मुझे मेरी बेटी केँ संगचैन केँ लम्हा बिताने हैं। आज मेरेपास मेरी लाडो
प्राची : हम्ममम.एक् बात पूंछू आपसे पिताजी? कितना प्रेम करते हैं आप् मुझसे ? औऱ मेरा सबसे अच्छा बात क्याँ लगता हैं आपको ?
पिताजी: दोस्त प्रेम तौ इतना करताहु कि अब तेरे बिना एक् रात नहि कट सकती मेरी बेटी, हररात मुझेबस तूँ चाहिए। औऱ सबसे अच्छी बात कि तुम् मुझसे प्रेम करनेलगी होँ औऱ वोँ जौ तुम्हारा रस झरता हैं जब तुम्हे चरमसुख पे पहुंचती हौ उसकेबाद जोँ तुम्हारी प्रतिक्रियाएं होती हैं वोँ मुझे बहोत पसन्द हैं।
प्राची : जैसे कि बापू?
पिताजी: जैसे कि तुम्हारा रस झरते हि तुम् बेकाबू होँ केँ कांपने लगती हौ।
फिन तुम्हारा वोँ पूरे बॉडी कां थरथराना औऱ जांघों मे एक् अनोखा सां कम्पन आनां,
तुम्हारे बुर कां मेरे लिंग कों कस केँ जकड़ लेना, इतना टाइटन्स कि कोई नब्सीखू व्यक्ति जल्दी हि झरजाए,
फिन तुम्हारा वोँ झरने केँ संग चीत्कार उठना।
यह सभी मुझे दीवाना बना देता हैं मेरी बेटी।
असल मे प्राची कों बहोत तेजचरम सुख महसूस करवा देते थें बापू, जब ज़्यादा चोदने लगते थें, याँ 3-4 राउंड सें अधिक होँ गय़ा हैं औऱ फिन भि चूत चोदते रहते थें उस वक्त।
औऱ कुछइस तरह सें वोँ पिताजी कि बाहों मे हि बेकाबू होँ केँ कंट्रोल खो देती थि।
उसकोचरम सुख लगातार 6-7 बार आँ हि जाता थां 4-5 राउंड केँ चोदाई मे।
कभीकभी तोँ उसको इतना जायदा उद्वेग आता थां कि उसकारस बाहर् तक निकलआता थां मूत केँ जैसे :
उसतरह कां उद्वेग केँ बाद प्राची कों अपने आप् कों संभालने मे 4-5 मिनटलग जाए थें, तब तक उसकाबदन पिताजी केँ लौड़े केँ चोट सें उत्पन्न हुएसुख केँ कारण थरथराता हि रह जाता।
उसकेबाद एक् मादक सेक्सी सि प्राची कि बुर रस केँ महक कां खुशबू कमरे मे फैल जाता थां जौ बापू कों बेहद पसन्द थां।
प्राची : सच मे क्याँ पिताजी, मैऐसे थरथराने लगतीहु ?
पिताजी: हां मेरीजान, तुम्हे सेक्स केँ जुनून मे यहपता नहि चलता, पऱ मे तेराहर एक् पल कों अवलोकन करता रहता हूं, औऱ मेराजोश औऱ बढ़ता रहता हैं। तुँ बड़ी मजेदार हैं मेरी बेटी। मै एक् खुशकिस्मत बापू हूं जोँ अपने बेटी कां पति हैं।
प्राची : ओहसच मे पिताजी, मैउस टाइम शायद एक् दूसरी दुनिया मे हि रहती हूं, इसलिये मुझेपता नहि चलता।
बापू: हम्ममम.देख नां लौरा टनटना गय़ा मेराफिन सें, अपना मंजिल ढूंढरहा हैं तेरे अंदर, इजाजत दो तोँ दूसरा राउंड शुरुआत करे मेरी प्यारी बेटी।
प्राची : जी बापू। आप् एक् राउंड मे कब मनाते हैं.
पिताजी : आजा मेरीजान, अपने बापू केँ पासआजा।
पिताजी नें अपना होंठ प्राची केँ पंखुड़ी जैसे होंठों पे चस्पा कर दिया औऱ चूत मिजने लगे उसका। औऱ एक् हाथ सें दोनों मम्मों कां कंट्रोल भि लेँ लिया थां।
पिताजी कां लिंग एक् दम टाइट हौ चुका थां। औऱ 10 मिनट केँ फॉरप्ले केँ बाद संभोग कां नयादौर चलने वाला थां।
बापू अचानक सें उठे औऱ दराज खोलने लगे।
प्राची थोडा चकित हौ गई, (मन मे ): बापूआज दराज क्यूं खोलरहे हैं, क्याँ कंडोम लगाने वाले हैं ? याँ लुब्रिकेंट निकलेंगे ? लुब्रिकेंट कां तोँ जरूरी नहि हैं मेरी योनि तोँ वैसे हि गीली हैं औऱ कंडोम तौ दादीमा नें हि माना किया हैं पिताजी कों लगने सें। फिन पिताजी क्याँ निकाल रहे हैं?
प्राची कां अंदाजा सही निकला, पिताजी केँ हाथ मे नारियल तेल हैं डब्बा औऱ लुब्रिकेशन कां भि डब्बा थां। पऱ क्यूं ?
प्राची : बापू मेरी बुर तौ आपके पानी सें पहले सें हि गीली औऱ चिकनी भि हैं, फिनयह क्यूं निकलरहे हैं ?
पिताजी: बेटी, याद हैं नां, मैनेआज तुमसे एक् तोहफा मांगा थां, वोँ टाइम आँ गय़ा हैं बेटी, मुझे उपहार चाहिए अभि वोँ वाला।
प्राची : पिताजी कौन सें उपहार कि बातकर रहे हैं आप्?
बापू: तेरासिल पैक पीछे कां छेद बेटी।
प्राची : क्याँ बापू. आप् उपहार मे मेरी गान्ड कां सिल तोड़ेंगे?
बापू:हां मेरीजान, याद हैं मैने तुम्हारी तरफकहा थां कि एक् दिनमै तेरा दूसरा सिल भि तोड़ना चाहता हु। वोँ दिनआज हैं मेरी लाडो।
प्राची नें मुस्कुरा दिया, पर्र उसकी अंदर सें हालत खराब हौ गई थि। वोँ डर केँ मारे पिताजी कां विरोध भि नहि करपारही थि। औऱ सरप्राइज़ केँ कारणबोल भि नहि पारही थि।
उसे सारा प्राचीन सिल तोरई कां मंजरयाद आनेलगा थां कि केसे उसकी पहली चूदाई केँ बाद बहोत दिनों तक उसका हालात खराबरहा थां। वोँ डर गई थि औऱ उसके पसीने छूटने लगे।
पिताजी: आँ बेटी, पीछे मुड़जा जरा। बापू नें एक् तकिया लगाया औऱ प्राची कों उसमें पेट केँ बल सोने कों बोला।
प्राची करीब-करीब डॉगी पोजिशन मे आँ गई थि।
बापू नें बहोत सारा क्रीम अपने उंगली मे लेकर प्राची केँ गान्ड कि छेद पे चपोरा
औऱ उंगली अंदर ठेलने हि वाले थें कि प्राची चिहुक केँ उठ गई औऱ बैठ गई।
प्राची केँ चेहरे पे डरसाफ दिखरहा थां : पिताजी रुक जाइए।
too be continued।
vah , nice guess , apki detailed comment kaafi aacha laga , apki guessing bi achi h. Bilkul papa kuch ayese gift kee demand kr sakte h. Aage story mai yeh khulasa hi hi jayega.
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Update 36:
पिताजी: क्याँ हुआ मेरी रानी ?
प्राची : बापू प्लीज, मत करिए नं यह, मुझेडर लगरहा हैं।
पिताजी: कुछ नहि होगा बेटी, यह एक् नया एहसास हैं बेटी, कहते हैं जिंदगी मे सभीकुछ एक्सपीरियंस करना चाहिए, तौ सेक्स मे भि गान्ड चूदवाने कां अलग मज़ा हैं बेटी। मैयह आनंद तुमको देना चाहता हु।
प्राची : बापू बहोत मोटा हैं आपका, मुझे दर्द होगा बहोत, आपकोमै मेरा योनि जितना चाहिए उतना देने कि रेडीहु, पूरारात चाहिए तौ आप् पूरारात चोदईये, मै उफ्फ तक नहि करूंगी बापू, आप् कां मेरे बुर पऱ पूराहक देतीहु मे, मगर बापूयह मत करिए नं प्लीज।
पिताजी: बेटी, इधर मेरी बांहों मे आजा मेरी बच्ची, इधर आँ, डरने कि कोई जरूरत नहि हैं।
प्राची पिताजी केँ आगोश मे समा केँ सहमी सि, एकदम नंगी सि, समा गई।
पिताजी: बेटी, तूँ इसडर कों निकलदे, तुँ नहि चाहेगी तौ मे नहि डालूंगा। तेरी योनि दरवाज़ा जैसे ज़बरदस्ती मैने तोड़ा थां, अबमै दुबारा वोँ गलती तेरेसंग कभी नहि करूंगा बेटी, तौ अपनेमन सें तूँ यहडर निकलदे।
प्राची : ( थोडा चैन महसूस करतेहुए ) थैंकयू बापू।
पिताजी: बेटी, हम् वैवाहिक जिंदगी मे हैं, जहां अपने पार्टनर कां ख्याल रखना हम् दिनों कां कर्तव्य हैं। मै नहि चाहता, मेरीवजह सें तूँ फिन सें जख्मी होँ जाए। पर्र तूँ यहसोच बेटी, कि यह करने सें, हमारे बीच केँ जिंदगी मे एक् नया सां मोड़ जैसा लगेगा तुम को। ऐनल सेक्स ठीक वैसा हि हैं जैसे नॉर्मल सेक्स बेटी। बस तुम्हे एक् आजादी मिल जाएगी कि अगर एक् मार्ग सें तूँ अभि सुख अनुभव कररही हैं तोँ अब सें दो रास्तों सें अनुभव कर पाओगी। मे भि तेरे अंदर 2 मार्ग सें घुश सकूंगा। एक् बुर औऱ दूसरा गांड़।
प्राची : बापू, मै आपकीबात कां बहोत रेस्पेक्ट करतीहु, आप् हि सें तोँ मुझे जिंदगी कां एक् नया आधार मिला हैं, आपके सामने मै इतनीसहज महसूस करतीहु कि हरदिन अपना टांग खोले नंगे लेटती हु, औऱ आप् हररात मुझेचरम सुख कां अनुभव करवाते हैं, मुझे तौ आपके बाहों मे हि चैन मिलता हैं अब मेरे बापू। औऱ मै आपकीइसी अंदाज केँ कारण पूरीरात आपके लौड़े सें मजे लुटती हु। बापूमै आपको उदास नहि करना चाहती। पर्र पिछले वार जोँ मेरे योनि दरवाज़ा कों अपने तोड़ा थां, उस दर्द कां अनुभव करने केँ बाद मुझे हिम्मत नहि हौ रही पिताजी कि मै आपको अपना गुदा दरवाज़ा भि सौप पाउंगी।
बापू: बेटी, मुझ पे विश्वास रख, मै हमारे रिश्ते मे एक् नयापन लाने कि कोशिश कररहा हु, एक् दिन कां दर्द हैं, फिन तौ एक् अलग हि आजादी मिल जाएगी तुम्हारी तरफ औऱ मुझे। जबमनकरे आगे सें डालूंगा, जबमनकरे तोँ पीछे सें। सभी अच्छा होगा बेटी, मुझ पे भरोसा कर। तुँ मुझेयह तोहफा आज देदो, मै वादा करताहु कि तुम्हें अबउसबार जैसा दर्द कां सामना नहि करना होगा।
प्राची : पिताजी मै आपके अलावा किसीओर पे थोड़ी विश्वास कर सकतीहु। आपकेलिए तोँ मे जान भि दे दूंगी, बस थोडा सां घबरा गई थि बापू हमारे सुहागरात कि यादों केँ वजह सें।
पिताजी: मुझेमाफ करदे बेटी, सुहागरात मे मुझे वैसे जबरदस्ती नहि करनी चाहिए थि। सच मे यह मैनेगलत किया थां बेटी, उसी कां कारण हैं कि तेरेदिल मे एक् डर अभि भि बैठा हैं। मे बहोत धीरे-धीरे करूंगा मेरी बेटी, आज तूँ निश्चित रह, अगर तूँ दर्दसह नहि पाएगी तौ मे नहि करूंगा।
प्राची कों अब पिताजी कि बातों सें हिम्मत आँ गई थि।
प्राची : ठीक हैं बापू, आपकोमाफ किया, अब आपकोमै नहि रोक सकती, क्योंकि मे जान गई हु, कि आज केँ पिताजी औऱ उसदिन केँ बापू नें बहोत अंतर थां। आज केँ बापू अपनी पत्नि सें प्रेम करते हैं औऱ उसकी इज्ज़त करते हैं, पऱ उसदिन केँ बापू प्यासे व्यक्ति थें, जौ बस एक् औरत कों भोगने केँ चक्कर मे हवस सें अंधे होँ गए थें। अपनी बेटी कों रुला केँ भि पूरीरात दरिंदों कि तरह चोदा थां। पऱ आज, आपने मेरा विश्वास आजजीत लिया हैं पिताजी, मैआजआह तक नहि करूंगी औऱ आपकोहर वोँ औरतसुख दूंगी जोँ आप् चाहते हैं। अब मे आपको नहि रोकूंगी पिताजी, क्योंकि मे जान गई हु कि आप् मेरेसंग अबकभी गलत नहि होने देंगे।
बापू खुशी सें झूमउठे औऱ प्राची पर्र चुम्बन कि बरसात कर दि।
प्राची औऱ बापू केँ होंठआपस मे मिलने लगे।
प्राची अब बापू कों गांड़ मारने कां ग्रीन सिग्नल दे दि थि। वोँ पिताजी सें लिपट सि गई औऱ उनकातना हुआ लौड़ा कों हाथ केँ हथेली सें भर लिया।
पिताजी भि जोश मे आनेलगे औऱ राउंड २ कि तैयारी करनेलगे।
बापू : आँ बेटी, जरा जैसा बैठी थि वैसे हि बैठ औऱ गान्ड कां छेद मेरेतरफ करदे।
प्राची नें पिताजी कि बात मानी औऱ अपना गांड़ बापू केँ तरफ घुमा केँ डॉगी पोजिशन मे बैठ गई।
बापू : बेटी, तुँ बिल्कुल भि मत घबराना, मुझ पे भरोसा रखना, औऱ कभी भि लगे कि नहि होँ पाएगा दर्दसहन, तौ मुझेरोक देना।
प्राची : जी बापूओके।
पिताजी : आज एक् बाद देखूं कि तेरी सकरी गुदा कां छेद।
बापू नें अपनेहाथ प्राची गांड़ केँ तरफ लेँ गए औऱ उंगलियों सें प्राची केँ दोनों चूतड़ों केँ पाटा केँ बीच छुपे गांड़ कां छेद कों उभरकर बाहर् लाने औऱ देखने कि कोशिश करनेलगे।
एक् मिनट केँ लिए बापूसहम सें गए : इतना छोटाछेद मे लिंग जाएगा केसे ?
वोँ अपने फैसला सें हि डरगए थोडा, कि कही प्राची कां हाल पहलेदिन कैसा नाँ हौ जाए।
कारण थां कि बापू कां लिंग थां भि ऐवरेज व्यक्ति सें मोटा औऱ लंबा।
बापूअब पीछे नहि हट सकते थें, विवाह केँ 3 महीने होने कों आँ गए थें औऱ प्राची कां गांड़ अभि भि कुंवारी हि थि। उसे गुदा भेदन केँ सुख सें वंचित नहि रख सकते थें बापू।
बापू: प्राची, त्यार हौ नाँ मेरी बच्ची।
प्राची : हां बापू।
बापू नें प्राची कि हां सुनते हि बोला, आजा मेरी बाबू थोडा अपने हाथों सें अपने चूतड़ों कों खोलजरा।
प्राची नें वैसा हि किया, उसकी गांड़ कां छेद चिपचिपा थां, पिताजी नें जोँ उसमें लुब्रिकेशन लगाया थां, अभि थोड़ी देर पहले हि।
पिताजी नें फिन भि थोडा औऱ क्रीम प्राची केँ गांड़ मे चपोरा औऱ अपने लिंग कों नारियल तेल सें तरकर लिया।
बापू : प्राची बेटी, अपनेऊपर काबू रखना, जायद दर्द होनेलगे तोँ बताना।
प्राची : ओक पिताजी।
पिताजी नें गांड़ केँ छेद मे अपना मोटा लौड़ा सटाया औऱ प्रेशर लगाने लगे।
छेद वाकई बहोत छोटा थां बापू केँ जैसा मोटा लंड घुसने केँ लिए।
पिताजी प्रेशर लगाएजा रहे थें औऱ फिन भि लिंग अंदर धसने कां नाम हि नहि लेँ रहा थां।
पिताजी नें अपना सारा पावरलगा दिया औऱ लिंग हलकी सि गांड़ केँ मुहाने कों खोलपाई। इतने मे हि प्राची कों बहोत असहनीय दर्द होनेलगा।
वोँ चीत्कार उठी : अहह। ऊंह्ह्ह.पिताजी.प्लीज़ नहि.बहोत अधिक दर्द हौ रहा हैं मुझे।
बापू:बस बेटी घुस हि गय़ा थोडा सां औऱ।
बापू नें फिन थोडा प्रेशर लगाया औऱ पक्क सें लिंग 1 इंच अंदर गांड़ मे चला गय़ा।
प्राची इस हमले कों सह नहि पाई औऱ एक् चीत्कार मारते हुएआगे कि तरफ हौ गई औऱ बापू केँ हाथों सें बेटी कां कमरछुट गय़ा। वोँ सीधाबेड पे चित सि पर्र गई औऱ लेटीरही।
प्राची : अहहअहह अहह.पिताजी बापू.नहि नहि.मर जाऊंगी मै।
बापू भि नहि चाहते थें आज जबरदस्ती लौड़ा पेशना अपने बेटी केँ अंदर, तौ उन्होंने प्राची पर्र बल प्रयोगों करनासही नहि समझा।
प्राची : पिताजी, माफकर दीजिए, मुझे बहोत दर्दहुआ हैं। नहि कर पाऊंगी मे यह। आपकोमै यह उपहार नहि दे पाऊंगी।
पिताजी : बेटी, कोईबाद नहि, तूने कोशिश कि, पऱ तुँ नहि लें पारही हैं गांड़ मे, तौ मे जबरदस्ती नहि करूंगा। छोड़ देते हैं आज।
प्राची कों चैन मिला थोडा।
पिताजी उदास होके नंगे हि प्राची केँ बगल मे लेटगए। वोँ हताश थें कि एक् नया अनुभव वोँ नहि करपाए।
प्राची दर्द मे थि औऱ जबउस कां दर्द, थोडा कमहुआ, तोँ उसने आंखें खोली। पिताजी बगल मे हताशा लिए लेटे थें।
प्राची : पिताजी सॉरी।
बापू:कोई नहि प्राची बेटा। तूनेआज बहोत हिम्मत दिखाई हैं। मुझे खुशी हैं कि तूनेमुझ केँ भरोसा किया औऱ कम सें कम मौका तौ दिया गुदा चोदन कां। हम् कभी औऱ ट्राई करेंगे। आज जबरदस्ती भि करूंगा।
प्राची चुपचाप पिताजी केँ आवाज़ मे जौ उदासी थि उसे महसूस करपारही थि। वोँ भि थोडा दुःखी सि होँ गई।
प्राची मन मे : यहमै क्याँ कर दिया, बापू केँ कितने अरमान थें, मेरेसंग सम्पूर्ण चूदाई कां, मैने उसपे पानीफेर दिया। पऱ मे करूं तोँ क्याँ करूं, मुझे इतना दर्दहुआ कि आज तक बहोत कम हि झेलने कों मिला हैं। पिताजी कां लौड़ा, हैं भि तौ निगोरा बमपिलाट। आहिस्ता किसीछेद मे जाता हि नहि बिना दर्ददिए।
उसने देखा बापू कां लिंग सिकुड़ने लगा हैं औऱ वोँ आंखें मूंद केँ हताश लेटेहुए थें। उदासी उनके चेहरे पे लिखी हुई थि।
प्राची कों अपनेऊपर बहोत क्रोध भि आँ रहा थां, बापू केँ लिए बुरा भि लगरहा थां, औऱ मन मे एक् अजब सि बेचैनी औऱ अफसोस कां भावना भि थां। दर्द तोँ कम हौ गय़ा थां। पऱ हिम्मत टूट चुकी थि उसकी।
प्राची : (मन मे ) देखो नं बापू नाराज सें हौ गए हैं मुझ सें, उनका लिंगबता रहा हैं कि वोँ मुझे सें आकर्षित नहि हैं अभि। नहि नहि पिताजी कों मे ऐसे दुःखी भि देख सकती, मुझेकुछ करना पड़ेगा।
प्राची पिताजी सें : बापू।
पिताजी नें प्राची केँ तरफ बिना देखे हि: हम्ममम.कहो बेटी।
प्राची : बापू, आइए मेरी बुर लूपलूप कररही हैं आपके लौड़े केँ लिए। आइए नं मेरे पति देव।
वोँ बापू कों उदासी सें निकलना चाहती थि।
बापू: नहि बाबू, छोड़ो अबमूड नहि रहा।
प्राची ( अफसोस औऱ दुःखी होके ) : आँ जाइए नां बापू, हर दिन तोँ आपका एक् राउंड मे होता हि नहि थां, आज एक् हि राउंड मे मूड क्यूं चला गय़ा आपका ?
बापू: छोड़ बेटी, अब मेरीवजह सें तेरी दर्द होँ गय़ा इतना, अबमन नहि कररहा हैं करने कां। बुर तोँ रोज चोदता थां तेरा, आज बहोत मन थां मेरा तेरे गान्ड चोदने कां। अब वोँ हुआ हि नहि तोँ आगे राउंड लगाने कां कोई फायदा नहि।
प्राची समझ गई पिताजी दुःखी हैं औऱ थोड़े नाराज़ भि हौ गए हैं। पर्र नन्ही जान क्याँ करेजब 40 साल कां व्यक्ति उसकी 19 साल कि छोटी सि चुत याँ गान्ड मे जाने कां कोशिश करे तौ उसे दर्द तौ होगा हि नाँ।
प्राची कों बहोत जायदा गिल्टी महसूस होनेलगा कि मैने बापू केँ अरमानों पे पानीफेर दिया, बापू मेरेलिए इतना करते हैं औऱ मै उनकेलिए इतना सां दर्द नहि सह सकती। यह मैनेगलत किया। पिताजी कों मना नहि करना चाहिए थां मुझे। वैसेजब मे यहां बापू केँ लिंग कां दर्द नहि सहनकर पाऊंगी, तोँ फिन बापूजब मुझे गर्भवती करेंगे, औऱ मेरे बच्चे कां जन्म होगा, फिन केसे सहूंगी ?
दादीमा बोलती हैं महिलाओं कों बहोत दर्द सहना हि पड़ता हैं। मुझे भि सहना पड़ेगा। नहि नहि, मै पिताजी कों दुःखी नहि कर सकती। उन्हें प्रेम सें वंचित रखना मेरे पत्नि धर्म केँ विरुद्ध हैं। मै करने दूंगी बापू कों। पिताजी कों अभि बोलती हूं कि चोद लीजिए मेरे गांड़ कों।
प्राची नें फ़ैसला कर लिया औऱ पिताजी कों अपने गांड़ सौंपने कों रेडी थि, दर्दसहन करने कों भि रेडी थि। इससे पहले कि बहोत देर होँ जाए, प्राची नें बापू सें बोला : बापू।
बापू : हां प्राची।
प्राची : आइए, कर लीजिए।
बापू: आंखें खोले औऱ प्राची केँ तरफ देखते हुए बोले : क्याँ करलूं?
प्राची : वही जौ आपको चाहिए। आपका उपहार।
बापू (हैरानी मे ) : पऱ अभि तौ तुम्हे असहनीय दर्द होँ रहा थां।
प्राची : हां पिताजी, मगर मैने फैसला किया हैं कि आपके खुशी सें बड़ी मेरेलिए कोईचीज नहि हैं। आपकादिल मे नहि दुखा सकती बापू। आपकोमै उससुख सें वंचित नहि केँ सकती जोँ आपको चाहिए। दर्दमै सह लूंगी। पऱ आपको प्रेम जरूर मिलेगा मेरा। आपकाहक हैं मेरे दोनों छेद पे। वोँ मिलेगा आपको।
बापू: नहि बेटी, तुम्हे तकलीफ देके मुझे अपनी तमन्ना पूरी नहि करनी हैं। ठीक हैं, मै तेरे योनि सें हि खुशहु मे। बस अभि तेरे योनि चोदने कां मन नहि कररहा। तोँ अभि छोड़दे।
प्राची : नहि पिताजी, आपको मेरी गान्ड चाहिए औऱ वोँ मिलेगा आपको, मै दूंगी।
बापू: नहि तुम्हे दर्द होगा।
प्राची: नहि बापू, मै थोडा सह लूंगी, आप् बेफिक्र रहिए।
बापू : अचानक इतनी हिम्मत केसे मेरी रानी।
प्राची : आपके प्रेम सें पिताजी, आज अपने मेरेसंग कोई जबरदस्ती नहि कि, अपने मेरादिल जीत लिया हैं पिताजी, अब आपकादिल मुझे जीतने दीजिए नाँ। आइए लेटीये।
पिताजी कि प्राची नें चितपीठ केँ बल लिटा दिया औऱ उनको चूमने लगी। पिताजी केँ लण्ङ मे दुबारा हरकत होनेलगा। वोँ पिताजी कां लण्ङ कों पकड़ केँ उसे चूमने लगी औऱ चाटने लगी। प्राची कां गरमजीभ कां स्पर्श पाते हि लिंगटन टना गय़ा।
बापू : अहह बेटी, क्याँ चमत्कार किया तूने, देख क्याँ कड़क हौ केँ सलामी देरहा हैं तुम्हें यह मेरा मोटा हथियार।
प्राची : हां बापू, क्याँ आप् सजधजकर हैं ?
बापू:अरे किसके लिए ?
प्राची : मेरे गांड़ कि गर्मी औऱ कसावट कों झेलने केँ लिए।
बापू प्राची केँ इस बोल्ड अदा पे फ़िदा होँ गए : हाहा, बिल्कुल मेरीजान।
फिन क्याँ थां, प्राची पिताजी कों लेटा केँ उनकेऊपर चढ़ गई औऱ पिताजी कां लौड़ा स्वयं सें अपने गांड़ मे लेने कां फैसला किया।
बापू : अहह मेरी बेटी, तूने तौ आनंद हि दे दिया मुझे, तूँ स्वयं सें अपनासील तुड़वाएगी मुझे सें अपने गांड़ कां। वाउ मेरी रानी।
प्राची : हां पिताजी, आपकोहर खुशी दूंगी मे।
प्राची नें पिताजी कां लिंग अपने गांड़ केँ मुहाने पे लगाया औऱ अपने अनुसार धीरे-धीरे धीरे-धीरे पिताजी केँ लिंग पे बैठने लगी।
प्राची : आहहह्ह्ह.बापू बहोत मोटा हैं। पर्र मैहार नहि मानूंगी। आपका उपहार आपको मिलेगा बापू। आह्हः.
प्राची केँ आंखों सें आशु गिरने लगे, उसेसच मे असहनीय दर्द हौ रहा थां, जैसे जैसे वोँ नीचे होतीजा रही थें औऱ बैठाती जारही थि पिताजी केँ लिंग पे।
बापू भि अपने लिंग पे बहोत अधिक दबाव महसूस कररहे थें। उनको भि लिंग केँ सुपारे मे दर्द महसूस होनेलगा।
बापू:अहह बेटी, अहह, मै तोँ तेरा हिम्मत कां दाद देताहु, बाबू इतना दर्दसह रही हैं तूँ मेरेलिए।
प्राची : बापू आपके बच्चे कों जन्म देने मे मुझे इससे भि ज्यादा दर्द सहना पड़ेगा। यह तोँ कुछ भि नहि हैं। आपके खुशी केँ लिएमै कुछ भि करूंगी बापू।
पिताजी नें अपनाहाथ आगेकर केँ प्राची केँ कंधे कों कस केँ पकड़ लिया, प्राची अपने पूरीजान लगा केँ बापू केँ लिंग पे एक् झटका दि औऱ पक्क कि आवाज़ केँ संग सुपारा समेतआधा लौरा प्राची केँ गान्ड मे धस गय़ा।
प्राची कों एक् बहोत अधिक असहनीय दर्दहुआ। प्राची चीत्कार उठी : अहह.मां.अहह.मै मर जाऊंगी.आअआअहः बापू.बहोत दर्द हौ रहा हैं।
प्राची केँ आंखों सें आंसू केँ मोटे मोटेधार टपकाने लगे। प्राची बेहोश सि होनेलगी थि।
पिताजी कों भि बहोत तेज़ दबाव महसूस होँ रहा थां अपने लिंग पे, प्राची कां छेद बहोत हि छोटा थां औऱ यह तौ होना हि थां। दोनों बाप-बेटी दर्द मे थें। पिताजी नें अपने हाथों सें प्राची केँ दोनों चूतड़ों कों थमा औऱ प्राची कों ऊपर उठाने लगे।
प्राची : नहि बापू, लौड़ा बाहर् मत निकालिए, निकल गय़ा तोँ मे दुबारा यह नहि कर पाऊंगी। इतना दर्द नहि सह पाऊंगी।
प्राची गजब कां हिम्मत दिखारही थि।
बापू नें भि अब प्राची केँ हिसाब सें हि उसकी चूदाई करने कां सोचा।
पिताजी : ठीक हैं बेटी, ऐसे हि तुँ थोड़ी देर मेरे लिंग कों लिए बैठीरह औऱ फिन हम् संभोग शुरुआत करेंगे।
प्राची केँ आंखों सें अभि भि आंसूबह रहे थें।
पिताजी नें सोचा एक् दचकालगा केँ पूरा हि लिंग अंदर केँ देताहु फिन थोडा देररुक केँ प्राची ऊपर नीचे अपने हिसाब सें चोदेगी मुझे।
बापू नें प्राची कों जकड़ केँ पकड़ा औऱ गच्च सें पूरा लिंग अंदरकर दिया।
पिताजी केँ इस धक्के सें प्राची एकदम चकितरह गई।
प्राची फिन सें चीत्कार उठी : अहह.बापू.यह क्याँ कर दिया अपने.अहह.
वोँ दहाड़े मार केँ रोनेलगी। पिताजी: बस मेरी बच्ची बसबस होँ गय़ा, होँ गय़ा।
प्राची केँ गांड़ नें पिताजी कां खूंटा गर चुका थां। प्राची कों इसका विश्वास नहि हौ पारहा थां कि उसने बापू कां इतना मोटा लिंग अपने इतने छोटे सें छेद मे लेँ लिया हैं।
ऐसे हि 10-15 मिनट केँ बाद प्राची रोनाबंद कर दि औऱ पिताजी कां लिंग पे थोडा थोडा उछलना शुरुआत कि। पिताजी समझगए बेटी जोश मे आँ गई हैं औऱ लौड़े नें बेटी केँ गान्ड मे स्थान बनाली हैं।
फिन क्याँ थां, पिताजी नें प्राची कों थाम लिया औऱ चूदाई चालूकर दि।
प्राची भि हल्का हल्का जवाब देनेलगी।
क्याँ अद्भुत नजारा थां, एक् बेटी अपने गांड़ मे अपने पिताजी कां लंड लिए, उसपेऊपर नीचे करतेहुए चूदवा रही थि।
too be contained।
Ekdum sai kaha. Bp-Bti kee ek doosre kee prati chaahat or ishq hi aisi milan mai mithas paida krta h. Ab nvaa mithas paida honewala h sayad. Bp-Bti kaa pavitra rishta kee nishani honi hi chahiye.
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 37:
ज़बरदस्त चुदाई चलरही थि, प्राची केँ गांड़ कि पिताजी केँ द्वारा। बापू रफ़्तार मे इजाफा करने कां सोचे। औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे तेजशॉट मारना शुरुआत किया।
प्राची कां भि अब दर्द सें ध्यान हट गय़ा थां औऱ चुदाई पे ध्यान थां, वोँ भि मदहोश होनेलगी थि।
पिताजी अब अपने हिसाब सें चोदना चाहरहे थें इसलिये उन्होंने प्राची कों फिन सें डॉगी स्टाइल मे आने कों बोला, औऱ फिन सें थोडा लुब्रिकेशन केँ बाद प्राची केँ गान्ड मे समागए।
प्राची कां गांड़ कां छेदअब बापू नें खोल केँ रख दिया थां। औऱ एक् बारअगर गांड़ कां छेद ढीलाहुआ तौ वोँ बापू कां लिंग धीरे-धीरे एडजस्ट करनेलगा। पिताजी नें अबफूल फोर्स सें चुदाई करने कां फैसला किया। ओर रफ़्तार बढ़ा दि।
प्राची बापू केँ चुदाई सें बहोत ज़्यादा मजे उठाने लगीअब। औऱ उसके मुंह सें पिताजी केँ हर स्ट्रोक केँ संग एक् हल्की सि, सि। याँ अहह। जैसे आवाज़ निकल जाते थें।
वोँ बापू औऱ बेटी कां रूम, उनके जिंदगी कां एक् नया शुरुआत कां साक्षी बनरहा थां।
पिताजी केँ दरवाज़ा प्राची केँ अंदरतेज तेज धक्के मारेजा रहे थें। औऱ जब पिताजी कां जांघ प्राची केँ पिछले जांघों सें टकराता थां तौ हैं धक्के केँ संगपट पट कि आवाज़ भि पूरे कमरे मे गूंजरही थि।
औऱ फिनवही 20 मिनट कि लगातार ताबड़तोड़ चुदाई केँ बाद पिताजी चरम पे पहुंचने वाले थें। एक् अहह कि आवाज़ बापू केँ मुंह सें निकला औऱ आवाज़ केँ संग हि पिताजी कां गाढ़ा पानी भि प्राची केँ गांड़ मे भर गय़ा।
पिताजी प्राची केँ गांड़ मे झरगए। औऱ पूरामाल अन्दर गिरने केँ बाद अपना लिंग प्राची केँ गांड़ सें बाहर् खींच लिया थां।
इसतरह सें वोँ बाप आज बेटी कां गांड़ भि मार लिया थां। बापू नें आज प्राची कों सम्पूर्ण तरीके सें पा लिया थां।
यह राउंड इतना धमाकेदार थां कि अबआगे आज कि रात, यह खेल खेलने कि शक्ति पिताजी केँ लिंग मे नहि बची, गांड़ थां हि इतना टाइट कि उसे चोदने मे बापू कि सारी कि सारी शक्ति लग गई।
बापूओर बेटी, दोनों पसीने मे लथपथ, एक् दूसरे सें लिपट केँ, नंगे हि सोगए।
कुछ घंटेबाद, रात केँ टाइम बापू औऱ बेटी नंगे एक् दूसरे सें चिपके, चैन कि नींद लेँ रहे थें, यहरूम कुछ हि देर पहले प्राची केँ चीखों सें गुलज़ार थां वोँ अभि शांतस लगरहा थां, उस सन्नाटे केँ बीच कमरे मे लगी घड़ी कां कांटे कि चलने कि आवाज़ खटखटकर केँ गूंजरहा थां।
करीब-करीब 3:30 कां वक़्त हुआ थां, कि अचानक प्राची कां नींद खुला, उसे महसूस हुआ कि उसके गांड़ मे तेज दर्द होँ रह थां, पर्र यह पहलेदिन कि चुदाई केँ बाद जैसा दर्द नहि थां। हां दर्द थां तौ जरूर। प्राची कों गांड़ मे दर्द तौ थां, पर्र उसके नींद खुलने कां कारणवही नहि थां। दअरसल उसेपेट मे हल्का सां दर्द हौ रहा थां, औऱ उसकाजी भि थोडा मिचली जैसा आँ रहा थां। प्राची कि सुगबुगाहट सें बापू कां भि नींदखुल गय़ा।
बापू: क्याँ हुआ लाडो? इतनेरात कों जग क्यूं रही हौ ?
प्राची : पता नहि बापू, मेरा अचानक नींदखुल गय़ा हैं, औऱ अबपेट मे थोडा दर्द औऱ जीमचल रहा हैं औऱ उल्टी सि भि आँ रही हैं।
पिताजी: ओह, तूँ ठीक तौ हैं मेरी बच्ची?
यह प्रश्न पूछते हुए बापूउठ खड़ेहुए ओर प्राची कों पानी देनेलगे।
पिताजी: यहपीलो बाबू, थोडा अच्छा लगेगा।
प्राची : थैक्यू पिताजी।
औऱ प्राची नें बापू केँ हाथ सें ग्लास लेके पानी पिया।
पानीपी केँ उसने ग्लास रखा हि थां कि उसेजोर कि मिचली आनेलगी। वोँ झटके सें उठी, औऱ ओए ओए.कि आवाज़ करतेहुए, बाथरूम केँ तरफदौर पड़ी।
बापू भि उसके पीछे बाथरूम मे गए। ओर उन्होंने देखा कि प्राची कों उल्टियां होँ रही थि। पऱ यह अचानक केसे ? अभि तौ वोँ प्राची केँ कुछदेर पहले हि चुदाई केँ रहे थें औऱ प्राची उस वक्त तौ बिल्कुल ठीक थि.!
बापू कां मन भरमाने लगा। प्राची ओएओए.कर केँ उल्टियां करने केँ बाद अपना मुंह धोनेलगी औऱ फ्रेश सि होने केँ बाद बाथरूम सें बाहर् आनेलगी।
पिताजी: क्याँ हुआ हैं बेटी, अचानक यह तुम को उल्टियां क्यूं होनेलगी, प्रेम करने केँ वक्त तोँ बिल्कुल स्वस्थ लगरही थि।
प्राची : पता नहि बापू, सोते सोते अचानक सें तबियत थोड़ी खराब सि लगरही थि। पऱ अब उल्टी करने केँ बादठीक लगरहा हैं। शायदकुछ अपचखा लिया मैनेकल।
बापू:ओह, चलोअब अच्छा लगरहा हैं नाँ।
प्राची : हां बापू, थोडा तोँ अच्छा लगरहा हैं, पर्र आपका दियाहुआ, गांड़ कां दर्द थोडा तौ परेशान कररहा हैं, औऱ पेट भि हल्का सां दुखरहा हैं औऱ कमजोरी सां भि लगरहा हैं।
बापूडर गय़ा (मन मे ) : अरेयह क्याँ हौ गय़ा प्राची कों, कही मेरे गांड़ मारने सें तोँ नहि हौ गय़ा यहअब। मुझेऐसे चुदाई नहि करनी चाहिए थि बेटी कि। थोडा चाल भि बदला तोँ हैं प्राची कां। ईश्वर सभीठीक करना।
पिताजी ( प्राची सें ) : बाबू, तेरी तबियत ज्यादा खराब नहि लगरही तोँ अभि थोडा आरामकर लेँ तौ अच्छा लगेगा। नहि तोँ कुछ सीरियस सां फील होँ रहा तोँ बता, डॉक्टर केँ पास लें चलताहु।
प्राची : नहि पिताजी, अब अच्छा हैं अब। वैसे भि सबेरे भि कुछ प्रॉब्लम जैसालगा तोँ कल तौ हम् डाक्टर केँ यहां तौ जा हौ रहे हैं।
पिताजी: ठीक हैं मेरी बेटी।
औऱ दोनों फिन सें सोगए। पिताजी कों प्राची कि थोड़ी चिंता भि हौ रही थि। तोँ थोडा देर तक जगेरहे औऱ फिन वोँ भि नींद केँ आगोश मे समागए।
too be continued.
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