Beti Bani Sahara – New Episode
Update 33:
डिनर टेबल पे सज चुका थां। पिताजी, प्रज्ञा, प्राची औऱ दादीमा अबबैठ केँ डिनर करनेलगे। पिताजी नें ट्रिप केँ बारे मे कुछ भि बात नहि कि औऱ चुपचाप सभी अपना अपना खानां समाप्त करनेलगे।
प्रज्ञा : बापू मुझेकुछ पैसे चाहिए थें।
दादीमा : क्यूं मेरी पोती तुझको पैसे कां क्याँ काम। कुछ लाना होँ तौ बापू कों हि बतादे न् बापू लेँ आयेंगे बाजार सें दफ़्तर सें आने टाइम।
प्रज्ञा : नहि दादीमा, मेरेपास कपड़ों कि कमी होँ गई हैं। अगर ट्रिप पे जानां हुआ तौ मेरेपास कोई भि कपड़े नहि हैं ढंग कां जौ मै वहांपहन सकूं।
बापू:अरे ऐसा केसे, मेरी बेटी कों कपड़े कि कमी नहि होनी चाहिए। वैसे भि मम्मी कपड़े तोँ लोगो कों अपने सें जा केँ लेना चाहिए, साइज, कलर, कौन सां डिजाइन प्रज्ञा कों मनपसंद आए, यहउसी कों जा केँ लेना चाहिए।
दादीमा : ठीक हैं बेटा, मैचली जाऊंगी इसकेसंग।
प्राची : दादीमा आप् क्यूं परेशानी करेंगी। आपके तोँ पांव मे भि दर्द रहता हैं। मैचली जाऊंगी प्रज्ञा केँ संग। क्यूं प्रज्ञा ?
प्रज्ञा : हा दिदी, आप् केँ संग हि जाने कां सोचरही थि।
पिताजी: ठीक हैं बाबू, तुम् ओर प्रज्ञा चलीजाओ, पैसे जितने लगेबता देना। मैदे दूंगा।
प्रज्ञा : वाओ पिताजी, आप् कितने अच्छे हैं, आपके जैसा पिताजी सबको मिले।
प्राची : हां प्रज्ञा, पिताजी सच मे तेरा बड़ा ख्याल करते हैं। तूँ उनकी छुटकी जोँ ठहरी। हाहाहाहाहा.
प्रज्ञा : ऊझ्ह दिदी, अब मे छुटकी कहाहु। अब मे बड़ी होँ गई हु। मेराकद भि बढ़ गय़ा हैं। औऱ अब तोँ मुझे ब्रा भि स्लिम आनेलगी हैं।
वही फ्लो फ्लो मे कुछ भि बोल देना। प्रज्ञा नें ऐसे हि पिताजी औऱ दादीमा केँ सामने यह ऐलानकर दिया थां कि उसकी मम्मों बड़ी हौ गई हैं।
पिताजी प्रज्ञा कि बादसुन केँ एक् झूठी खांसी सकर दिया।
दादीमा : अरे बिल्कुल हि मन नहि लगती हैं लड़की। यहसभी पिताजी केँ सामने तौ मतबोल।
बापू:अरे मम्मी डांट क्यूं लगारही हौ आप्, प्रज्ञा अब सचमे बड़ी हौ रही हैं। इसमें लज्जा कैसा। बड़े होने केँ क्रम मे यहसभी होता हि हैं बेटी। लंबाई, वेट, जिस्म कि बनावट मे चेंज होना, सभी नेचुरल हैं।
प्राची : हां दादीमा, प्रज्ञा हसीन भि होतीजा रही हैं बड़ी होने केँ संग। ऐसी सुन्दर लड़की बहोत कम होती हैं। सच मे मुझे अच्छा लगता हैं कि प्रज्ञा जैसी मेरी एक् बेहन हैं।
प्रज्ञा : थैंक्स दिदी औऱ पिताजी। दादीमा सॉरीमै सोचती हि नहि बोलने सें पहले। मुझे ब्रा केँ बारे मे नहि बोलनी चाहिए थि।
बापू:अरे बेटा, मुझ सें याँ घऱ मे इतना शर्माने याँ संकोची होने कां कोई जरूरत नहि हैं, तुँ जैसी हैं, वैसी हि रह औऱ घऱ मे एकदमखुल केँ अपनेभाव औऱ विचार रख सकती हैं।
दादीमा : अरेकोई सीमा तोँ होनी चाहिए नां एक् पुरुष केँ सामने याँ अपने पिताजी केँ सामने। जोँ एक् महिला केँ जिस्म कों लेके इसकी जियास हैं मे तोँ उसकेलिए हि इससे टोकती हु बेटा। यह अभि थोड़ी जानती हैं कि मर्दयह सभी बाते अपने बेटी सें करने मे बचते हैं थोडा। कुछऊंच नीच होँ गय़ा तोँ।
पिताजी: माँ तुम् कों मेरे पे भरोसा नहि हैं क्याँ ? क्याँ मैने प्राची कों, उससे मेरी विवाह होने सें पहलेकभी ऐसे नजरों सें देखा थां क्याँ। तौ प्रज्ञा कों निश्चिन्त हौ जानेदो। मै उसका बापू हि हु। औऱ एक् बेटी कि तरह हि प्रेम दूंगा।
दादीमा : अरे बेटा मेरे कहने कां वोँ मतलब नहि थां। मुझेगलत मतसमझ। बसऔरत कि थोडा अपने आप् कों संभाल केँ रखना याँ बोल्ना चाहिए घऱ केँ पुरुष केँ सामने।
पिताजी: अरे मम्मी वोँ जमाना गय़ा। अब लड़कियां भि घऱ कां भार उठाती हैं। जैसेअगर प्राची इसघऱ केँ बारे मे नहि सोचती तोँ कभीमुझ सें विवाह नहि करती। अपनेघऱ कों बचाने केँ लिए इसने अपने बाप सें हि विवाह करने कां फैसला लिया। यह बहोत बड़ीबात हैं माँ। अब मे चाहता हु कि मेरे बेटी प्रज्ञा पे भि कोई पाबन्दी नहि हौ घऱ नें कि वोँ कुछ सोचेफिन बोले।
प्रज्ञा : थैंक्यू बापू।
प्रज्ञा कां खानां समाप्त हौ चुका थां तौ वोँ अपना थालीलिए रसोई कि ओरचल दि। उधर प्राची, पिताजी ओर दादीमा भि करीब अपना अपना खानां समाप्त होँ कर चुके थें।
दादीमा : बेटा अभि तुम् दोनों संग हि होँ तोँ एक् बात पूछनी थि।
बापू:हां मम्मी कहो नां।
दादीमा : बेटा तेरे औऱ प्राची केँ विवाह हुए करीब-करीब 2 महीने सें ज़्यादा होँ चुके हैं। कैसीचल रही हैं तुम् दोनों केँ बीच कां जिंदगी। एक् दूसरे कों प्रेम तौ करते हि नाँ।
बापू प्राची कि ओर देखे, वोँ इस प्रश्न सें अपनी निगाहें नीचे केँ लीलाज सें।
बापू:हां मा, हमारे बीच मे अच्छा चलरहा हैं सभी।
दादीमा : मेरा मतलब अच्छा सें यह थां कि, रात कां मिलन होँ रहा हैं नां ?
बापू : हांमा करीब-करीब हरदिन हि हौ रहा हैं।
प्राची अपनेपेर कि उंगलियों कों आपस मे रगड़ नें लगी, उसे बहोत जायदा लज्जा आँ रही थि। दादीमा केँ सामने याँ पिताजी केँ सामने तौ वोँ एकदमखुल केँ बाद करती थि इनसभी मामलों मे, मगरआज जब दोनों एक् संग हि उसके औऱ उसके बापू केँ बीच हि चूदाई केँ बारे मे उसकी मौजूदगी मे इतनाखुल केँ बातकर रहे थें तौ उसे बहोत हि अजीबलग रहा थां।
दादीमा : बेटा, एक् बात औऱ पुछूं, थोडा पर्सनल हौ जाएगा तुम् दोनों केँ लिए, पऱ मेरामन बेचैन हैं यह पूछने केँ लिए।
बापू:मा ऐसा क्याँ बात हैं, बिल्कुल पूछो, तुमसे कुछ छुपा थोड़ी हैं, तुमने हि तौ मेरा औऱ प्राची कां मिलन करवाया थां। तुम्हे पूछने कां हक हैं मम्मी।
दादीमा : बेटा, तुम् दोनों जौ संभोग करते हौ, तौ अंत मे क्याँ तुम् प्राची केँ योनि मे अपनारस नहि डालते ? याँ कंडोम उसे करनेलगे हौ ?
पिताजी एक् दम कम्फ़र्टेबल लगरहे थें दादीमा सें इस मामले मे बात करने मे। मगर प्राची लज्जा केँ मारेमरे जारही थि। उससे विश्वाश नहि होँ रहा थां कि दादीमा पिताजी केँ सामने हि उसेयह सभी प्रश्न कररही थि।
बापू:अरे माँ, अपने तोँ पहले हि कहा थां मुझे कॉन्डम कां इस्तेमाल नहि करने केँ लिए, तौ मे केसेकर सकताहु। औऱ रहीबात मेरे वीर्य कि तोँ मे प्राची केँ योनि मे हि भरताहु मम्मी।
दादीमा : ओह, तब बेटा प्राची कों गर्भ धारण क्यूं नहि हौ रहा हैं। मुझे चिंता सि होँ रही हैं।
बापू:अरे माँ, गर्भ धारण कां होने केँ लिए हजारों चीजें कां एकदमसही होना जरूरी हैं, हौ सकता हैं प्राची अभि ज़्यादा मैच्योर नहि हुईँ हैं बॉडी सें औऱ अभि भि पूरा शक्ति नहि आई होँ इसमें गर्भ धारण कां, याँ हौ सकता हैं, कि हमेओर कोशिश करने सें रिज़ल्ट मिलजाए, वैसे भि वक्त कि कितना हुआ हैं हमारी विवाह कों।
दादीमा : बेटा मुझे थोडा डरलगरह थां, ओर प्राची कि चिंता भि हौ रही थि, होँ नां हौ, मगर तुँ कल सबेरे प्राची कों एक् महिला रोग विशेषज्ञ सें दिखावा लेँ एक् बार।
बापू:अरे माँ, प्राची कोई बीमार थोड़ी हैं जौ डॉक्टर सें दिखावा दूं, अभि तौ हम् ट्राई कर हि रहे हैं नां, बहोत लोगों केँ तौ विवाह केँ बाद 1-2 साल कोशिश करते रहने केँ बाद वोँ बच्चा होता हैं। प्राची एकदमठीक हैं माँ जल्द हि गर्भ धारणकर लेगीयह, देख्ना।
दादीमा : नहि नहि बेटा मे यह नहि कहरही हि कि प्राची बीमार हैं याँ उसेकोई प्रोब्लम हैं। बस एक् बार चेकअप करा केँ तसल्ली हौ जाए, तोँ तुमलोग हनीमून पे जम केँ कोशिश करना, शायद ईश्वर कि कृपा होँ जाए।
पिताजी : ठीक हैं माँ ऐसीबात हैं तोँ अगले हि रविवार कों प्राची कों डॉक्टर सुषमा केँ यहां दिखावा दूंगा।
दादीमा : ठीक हैं बेटा, प्राची मेरी बातों कां बुरामत मानना, बस तेरी भलाई केँ लिए हि बोलरही हु, एक् बार चेकअप होँ जाए तेरा तोँ तुँ भि निश्चिन्त सें वैवाहिक जिंदगी कां मजा लेती रहना धीरे-धीरे, बच्चा हौ हि जाएगा।
प्राची शर्माते हुए, नज़ारे नीचेकिए हुए हि बोलि: जी दादीमा, आपकोठीक लगरहा हैं तोँ चेकअप करवा लूंगी पिताजी केँ संगजा केँ।
पिताजी : मम्मी 25 कों हमे शिमला भि निकलना हैं। तुम् औऱ प्रज्ञा भि संगचल रहे हैं। तैयारी स्टार्ट कर लेना।
दादीमा : ओह कितने दिनों कां प्लान हैं बेटा।
पिताजी: वोँ सभी अभि नहि बता सकता। प्राची कों बताने केँ बाद बताऊंगा।
दादीमा बापू कि यहबात समझ नहि सकी।
दादीमा : मतलब ?
प्राची : दादीमा मतलब बापू कों मुझ सें कोई उपहार चाहिए तबयह मुझे बताएंगे।
दादीमा मुस्कुराते हुए : औऱ वोँ तोहफा क्याँ हैं बेटी।
प्राची : दादीमा बापू नें अब तक बताया नहि हैं।
बापू:अरे मै लेँ लूंगा प्राची सें मम्मी आप् टैंशन मतलो।
दादीमा : हाहाहाहाहा.तुम् दोनों मियां पत्नि कां खेल तुम् दोनों हि जानो। जोँ भि हैं, बसऐसे हि खुशीबने रहे तुम् दोनों केँ बीच। मांग लेना अपनी बेटी सें अपना तोहफा, मुझे नहि पड़ना तुम् दोनों केँ इसखेल मे। चलो मेरा खानां हौ गय़ा। मे चलतीहु।
प्राची : लाओ दादीमा मैउठा लेतीहु आपका भि बर्तन। प्राची, बापूओर दादीमा कां बर्तन उठा केँ किचेन कि ओरचल पड़ी।
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Beti Bani Sahara – New Episode
Update 34:
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महिलाएं जल्द जल्द किचेन कां काम निपटा रही थि, प्राची पिताजी कां दूध रेडीकर रही थि। वही प्रज्ञा अपने कमरे मे जा चुकी थि। दादीमा बरतनों कों दोने केँ बाद उनको स्टैंड मे लगारही थि। बापूरात कि न्यूज टेलीविज़न मे देखरहे थें। पर्र पिताजी कां मन टेलीविज़न देखने पे लग नहि रहा थां। उनकोरात केँ खाने केँ बादजब तक प्राची रात कां काम निपटा नहि लेती थि तब तक रूम मे आती नहि थि, तब तक इंतजार करना पड़ता थां। उनकोयह प्राची कां प्रतीक्षा करना, बिल्कुल पसन्द नहि थां। उनकोयह प्रतीक्षा एक् लंबे वक़्त जैसा लगता थां। खैरआज बापू केँ मुख पे एक् अलग खुशी सां थां। उनकोआज कां प्रतीक्षा उतनाचुभ नहि रहा थां। वोँ प्राची केँ संगरात कों एक् नयाखेल खेलने वाले थें।
प्राची औऱ दादीमा दोनों हि किचेन कां काम ख़त्म कर केँ जल्द हि निकलगए। दादीमा नें बापू कों अभि भि हॉल मे बैठा पाया।
दादीमा : क्याँ हुआ मेरेलाल, आज सोना नहि हैं ?
बापू:हां मम्मी, बस अभि गय़ा। आज सोचा थोडा न्यूज देखलूं।
दादीमा : हांजा जल्द सोने., वैसे तूँ सोएगा तौ नहि हि अभि, प्राची केँ संग प्यार केँ समय जौ गुजरने हैं। जा प्राची, पिताजी साथ प्रेम करना अच्छे सें।
प्राची शर्माते हुए : जी दादीमा।
दादीमा : प्राची, मेरी बच्ची, तुँ कितनी सुशील हैं री, मेरीबात कभी नहि कटती।
दादीमा पिताजी सें : मेरीफूल सि बच्ची कां सदाऐसे हि ख्याल रखना मेरे बच्चे, हमेशा प्रेम करना।
पिताजी: जी माँ, आप् निश्चिंत रहिए, एकदम, प्राची कों मैकभी दुखी नहि होने दूंगा। औऱ सही बोला आपने प्राची जैसी सुशील बेटी औऱ पत्नि मुझेकही ओर नहि मिलती, इतनी सुशील सि लड़की हैं यह। बहोत ख्याल रखूंगा मे आपकी पोती कां।
दादीमा : बस बेटा मैयही चाहती हु कि मेरी बेटी पऱ तेरे प्रेम कि बरसात होतीरहे औऱ जल्द हि वोँ फलने फूलने लगे( दादीमा कां इशारा प्राची केँ गर्भवती होने सें थां। )
पिताजी: हां माँ, अब तोँ सबकोउसी लम्हा कां इंतजार हैं। प्राची कों बस अच्छे सें मै प्रेम करता रहूंगा, अबआगे ऊपर वाले कि मर्जी। अपने बोला थां तौ कल एक् बार डॉक्टर सें भि दिखा दूंगा।
दादीमा : शाबाश मेरे बच्चे, लेँ जाअब अपनी पत्नि कों सहवास केँ लिए। अच्छे सें रात गुजरे तुम् दोनों कि। औऱ आवाज़ थोडा कम कियाकरो तुम् दोनों, मेरा तोँ ठीक हैं, पर्र घऱ मे एक् औऱ जवान होती हुईँ बेटी हैं, जोँ अभि अभि यौवन युक्त हुई हैं। उसेइन सभी मे अभि बहोत अधिक उत्सुकता होती होगी। तुम् दोनों कां आवाज़ उसके यौवन कों हमेशा झकझोर देता होगा। तौ इसलिये थोडा संभल केँ।
बापू औऱ प्राची कों पता थां दादीमा प्रज्ञा कि बातकर रही हैं।
बापू:जी मम्मी, हम् ध्यान रखेंगे। पऱ प्रज्ञा समझदार लड़की हैं माँ, उसेपता हैं कि अब उसकी दिदी बापू कि पत्नि बन गई हैं औऱ पति पत्नि मे प्रेम तौ होता हि हैं। फिन भि हम् ध्यान देंगे कि आवाज़ सें उसे किसीतरह कि डिसटर्बएंस नां हौ।
दादीमा: हांसमझ दार तोँ हैं, मगर एक् कुंवारी लड़की नहि हैं। उसे भि अबयहसभी जानने कि उत्सुकता होगी, कि दिदी औऱ बापूऐसा क्याँ करते हैं कि दिदी कों इतना मज़ा याँ दर्द होता हैं। तौ बस थोडा सां संभल केँ।
पिताजी: ठीक हैं मम्मी।
दादीमा : चल मे सोनेचली, प्राची कों लेँ जा सहवास केँ लिए।
प्राची शर्मीली सि लड़की कि तरहबस नजरें नीचेकिए हुए दादीमा कि आदेश सुनते हि बापू केँ संगचल पड़ी।
दादीमा अपनेरूम मे चली गई थि। बापू नें प्राची केँ कमर मे हाथ डाला औऱ अपने कमरे मे लेँ जानेलगे : आजा मेरी प्राची बेटी, पिताजी कां मन बहोत बदमाशी करने कां हौ रहा हैं तेरेसंग मेरी लाडो।
प्राची अपनेकदम बढ़ाते हुए : बापू मेरीजान, आपकी बदमाशी हि तौ मेरेदिल कों भास गय़ा हैं। मुझेपता नहि थां कि विवाह करने केँ बाद मुझे आपसे इतनामजा मिलेगा बापू। आप् बहोत अच्छे हैं। आपको बदमाशी करने सें कोई नहि रोकरहा।
बापू कमरे मे अन्दर दाखिल होतेहुए : बेटी, तूँ जोँ मेरासंग देती हैं मुझे बड़ा अच्छा लगता हैं। मन करता हैं, काम धंधासभी छोड़दूं औऱ तेरेसंग बस बदमाशी हि करता रहूँ पूरादिन।
प्राची : दरवाजा बंद करतेहुए : पिताजी अच्छा आप् कुछ उपहार कां पूछरहे थें नां, मुझेतब सें जानना हैं कि ऐसा क्याँ हैं जोँ आपको मुझसे चाहिए, मुझे तोँ सारा तोहफा तौ आप् हि लें कर देते हैं नाँ।
पिताजी: बेटी, वोँ तोहफा बहोत स्पेशल हैं मेरेलिए जौ मात्र तूँ दे सकती हैं मेरी बेटी।
प्राची : ओके पऱ वोँ तोहफा हैं क्याँ बापू।
पिताजी: वोँ तोँ मे तुम कोजीभर केँ प्रेम करने केँ बाद हि बताऊंगा। आजा मेरी रानी मेरी बांहों मे।
उन्होंने प्राची कों अपने मजबूत बांहों मे भर लिया औऱ उसेउठा केँ बेड कि ओरचलपरे।
पिताजी नें अपनी बेटी कों उसबंद कमरे मे भोगना चालूकर दिया। फिन तौ वही 30 मिनट तक पिताजी औऱ बेटी कि सम्भोग क्रिया चलतीरही।
उन्होंने एक् जबर्दस्त फॉरप्ले केँ बादयह क्रिया शुरुआत किया थां।
प्राची अब भावनात्मक रूप सें बापू केँ साथ सहवास कां खुशी उठाती थि। वोँ बापू सें अब पूरीतरह प्रेम कर बैठी थि औऱ उनको अपना पति दिल सें मान लिया थां। एक् बारकोई लड़की किसी मर्द कों अपना पति दिल सें मान लिया तोँ समझो उसपे अपना जौ जान लुटा देती हैं।
बापूजब भि उसे छुटे तोँ उसे एक् अलग एहसास होता थां। वोँ पिघलने लगती थि पिताजी केँ स्पर्श सिर्फ सें हि।
बापूजम कर प्राची केँ स्तनों कों चूसते औऱ प्राची कों एक् अलगमजा मिलता हरबार हि।
औऱ जब बापू प्राची केँ चप-चपाती योनि मे अपना लिंग डालते तौ उसको एक् अलग हि परम खुशी मिलने लगता थां।
वोँ इस दुनिया सें जुदा सें होँ जाती। उसे स्वयं कां होश नहि रहताजब बापू कां लिंग अपने गहराई मे वोँ महसूस करती।
उसका संभोग क्रिया लंबा चलता, कभी प्राची पिताजी केँ लौड़े पे बैठकर बुर भेदन करवाती.
तोँ कभी पिताजी अपनी लाडली बेटी कों चित लेटा केँ एकदम गहराई मे लिंग घुसा केँ लंबे धक्के मारते।
औऱ बापू प्राची कों तब तक रगड़ केँ चोदते रहतेजब तक अपना गढ़ा, गर्म, सफेद क्रीम प्राची केँ बुर मे नाँ चोर देते।
उसरात भि वहीहुआ। प्राची कों उसके बाप नें खूबजम केँ भोगा। औऱ दोनों पसीने सें लथपत होँ गए औऱ हांफने लगे।
प्राची कों यौनसुख कि अबलत लगतीजा रही थि।
Any guess kee papa kya gift mang sakte h apni beti say.answer mai in comments. I will continue the kahaniyan only if I get some good comments. otherwise if no one find this kahani erotic aur intresting, I will end this kahani after one aur two updates .
Beti Bani Sahara – New Episode
भइया, इतनी जल्दहार मत मानिये आपकी kahani मे eroticism अच्छा हैं। Foreplay, emotions, dialogue, power dynamic सभी मौजूद हैं। Prachi कां पिताजी कों "पति" मान लेना औऱ emotional surrender वाला part अच्छा लिखा हैं। daadi कां character भि बहोत strong हैं वोँ openly बातकर रही हैं, जोँ इसकथा मे मसाले कों औऱ बढ़ाता हैं।
मगर आप् चाहो तौ थोडा औऱ sensory details डाल सकते होँ जैसे sounds, smells, sweat, trembling, eye contact, Prachi कि inner feelings कों औऱ गहराई देना जैसे लज्जा, प्रेम, guilt, lust कां मिश्रण, Dialogue मे औऱ थोड़ी dirty talk बढ़ा सकते हैं, मगर natural way मे हि रखना अधिक बेहतर होगा
अंत मे Cliffhanger भि अच्छा लगा।
मुझे तोँ kahani erotic औऱ interesting लगी, बहुत टाइम सें इस किस्सा कां review पोस्ट करना थां मगर दफ़्तर केँ कार्यों मे व्यस्त होने केँ कारण मुझे ज़्यादा वक़्त मिल नहि रहा थां!
अगले एपसोड कि इंतज़ार रहेगी।
Beti Bani Sahara - Next part miss mat karna
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