Beti Bani Sahara – New Episode
Update 30:
बापू औऱ प्राची एक् सुखमय जिंदगी कां भरपूर खुशी लेँ रहे थें। प्राची कि राते बापू केँ संग रंगीन होँ रही थि औऱ जब भि पिताजी कां मौका मिलता प्राची केँ साथ मिलन करते थें। उनका एक् रूलबन चुका थां, वोँ कमरे केँ दरवाजा बंद होते हि अपने कपड़े उतार देते थें, औऱ प्राची भि उसरूल मे शामिल थि। भले हि वोँ चूदाई नां भि करे, जौ केवल प्राची केँ मासिक केँ दिनों मे हि नहि होता थां, उनके शरीर पे एक् भि सूत नहि होता थां।
लाइफ बढ़िया चलरही थि। दादीमा प्राची सि बहुपा केँ खुश थि औऱ घऱ मे किलकारी गूंजने कां प्रतीक्षा मे थि। उनको थोडा आश्चर्य तोँ होँ रहा थां कि प्राची केँ संग उनका बेटा रोज करीब-करीब मिलनकर रहा हैं मगरअब तक वोँ पेट सें नहि हुइ थि।
उधर प्रज्ञा केँ एग्जाम समाप्त होँ गए थें। एक् दिनरात कों खाने केँ टाइम बापू नें प्रज्ञा सें बोला : प्रज्ञा, अब तौ तुम्हारे एग्जाम समाप्त हौ गए हैं, बताओ छुट्टियों मे क्याँ करोगी?
प्रज्ञा : बापू, छुट्टी मे तोँ कुछ प्लान नहि किया, सोचरही हि थोड़ी पेंटिंग सीखू औऱ संग मे दादीमा कां भि थोडा काम नें हाथ बताउंगी, औऱ उनसे खानां बनाना सीखूंगी।
प्रज्ञा कों पेंटिंग कां सौंख थां। औऱ उसेअब तक दादीमा नें कभी भि किचेन मे आने नहि दिया थां, मगर वोँ खाने बनाना भि सीखना चाहती थि। प्राची विवाह केँ बाद हि किचेन मे जानेलगी थि।
बापू:चलो बढ़िया हैं, तब कितने दिन मे रिजल्ट आँ जाएगा।
प्रज्ञा : पिताजी करीब-करीब 20-25 दिन तौ लग हौ जाएगा।
बापू:वाउ तब तोँ सही हैं। छुट्टियां एंजॉय करो।
प्रज्ञा : बापू एक् बात बोलूं ?
बापू:बोल मेरी बच्ची।
प्रज्ञा : पिताजी अपने दिदी सें विवाह केँ बाद हनीमून पे तौ उसे लें केँ हि नहि गए।
दादीमा औऱ प्राची भि वही खानां खारहे थें। वोँ इस प्रश्न कों सुन केँ पिताजी केँ जवाब कि इंतज़ार करनेलगे।
बापू : हां, बात तोँ तुमने सहीकहा बेटा। मगर तेरी दिदी नें मुझेऐसा कुछकहा हि नहि कि उसे हनीमून पे जानां हैं।
प्रज्ञा : आप् भि एक् नंबर केँ बुद्धू हौ पिताजी। दिदी नें तौ आपको सुहागरात कों दर्द देने भि नहि कहा थां, पऱ अपने उनके बिना बोले हि सुहागरात तौ मनाई नाँ।
प्रज्ञा थोड़ी बातूनी थि औऱ चुलबुली भि तौ वोँ बोलते बोलते कुछ भि बोल देती थि। दादीमा औऱ प्राची उसकीबात सुनके एकदमचौक गए।
दादीमा : अरे, ऐसेबात करते हैं पिताजी सें। उनकी विवाह हुई हैं न् प्राची सें तोँ सुहागरात तोँ मनाएंगे हि नां। उसमें प्राची केँ बताने वाली क्याँ बात हैं। उसे अपने पति कां ख्याल रखना हैं नां। बेटी होँ केँ अपने बापू सें ऐसेबात नहि करना चाहिए।
प्रज्ञा थोड़े हंसते हुए: दादीमा मै बापू कि बेटी भि हु औऱ साली भि, मैऐसे बातकर सकतीहु। मे तौ बसबोल रहीहु पिताजी दिदी कों हनीमून पे अभि तक नहि लें गए, मैने तौ मूवीज मे देखा हैं कि विवाह केँ बाद हीरो औऱ हीरोइन हनीमून पे जाते हैं।
प्राची : चलबसकर पगली, कुछ भि बोलती रहती हैं तुँ।
पिताजी: ओके साली साहिबा, तुम् बोलती होँ तौ तुम्हारे दिदी कों मै हनीमून पे लेँ जाऊंगा, बस?
प्रज्ञा : वाउ पिताजी, दिदी तौ खुश होँ जाएगी।
सभी उसकी बातों सें हंसने लगे।
खाने केँ बाद प्रज्ञा सोफे मे बैठी थि पर्र पिताजी केँ संग टेलीविज़न देखरही थि। प्राची औऱ दादीमा किचेन मे बर्तन धोरहे थें औऱ रात कां दूध सजधजकर कररहे थें।
प्रज्ञा : तोँ पिताजी कब लें जारहे दिदी कों हनीमून पे।
बापू:देख बेटा, अभि तौ विवाह मे कुछ अधिक हि दफ़्तर कां छुट्टी हौ गय़ा थां, तौ छुट्टी मे थोड़ी प्रॉब्लम होगी, पऱ मे बात करूंगा।
प्रज्ञा : पर्र बापू आपकेओर दिदी केँ हनीमून केँ बहाने मै भि थोडा घूम लूंगी नां, मेरी तोँ अभि छुट्टी हैं बाद मे क्लास शुरुआत होँ जाएगा।
बापू कों मजरासमझ मे आँ गय़ा, प्रज्ञा स्वयं घूमने केँ लिए हनीमून केँ बारे मे बोलरही थि।
बापू प्रज्ञा कि टांग खींचते हुए : अच्छा जी, पर्र हनीमून मे तोँ केवल पति पत्नि जाते हैं, तुम् कहाबीच मे जाने कि सोचरही होँ ?
प्रज्ञा : पर्र बापू मुझे भि जानां हैं।
पिताजी: वोँ तुम् अपने पति केँ संग जानां। हाहाहा।
प्रज्ञा : ऊँहू, बापू आप् मेरा मजाक उड़ारहे।
पिताजी हंसते हुए : अरेमै मजाककहा उड़ारहा हु। हनीमून पे अपनी पत्नि केँ संग, कौन किसी औऱ कों भि लेँ जाता हैं?
प्रज्ञा : अरे पिताजी, मै आपको सालीहु, अपनेकहा थां सालीआधी घरवाली होती हैं। तोँ मे कुछ नहि जानती मेरी अभि छुट्टी चलरही हैं, मे भि जाऊंगी।
बापू केँ लिंग मे, प्रज्ञा कि आधी घरवाली वालेबात कां थोडा असरहुआ औऱ एक् झटके केँ संग थोडा टनक सां गय़ा।
पिताजी: अच्छा मेरी साली, पर्र हनीमून कोई फैमिली ट्रिप थोड़े होता हैं। उसमे तोँ केवल पति पत्नि जाते हैं।
प्रज्ञा बस हनीमून केँ बारे मे इतना हि जानती थि कि विवाह केँ बाद पति औऱ पत्नि हनीमून पे जाते हैं। उसेपता नहि थां कों हनीमून पे एक् पति बस अपनी पत्नि केँ संगमजे हि करता हैं। वोँ सोचरही थि, इसी बहाने वोँ भि कहीघूम लेगी।
प्रज्ञा : मुझे वोँ संग लेँ चलो नाँ बापू, आप् ओर दिदी अकेले घूमेंगे औऱ मे घऱ पे बोर होती रहूंगी।
पिताजी प्रज्ञा केँ संग मजाक केँ मूड मे थें : पर्र हनीमून पे तोँ पति अपने पत्नि केँ संग हि घूमता हैं। तुम् तोँ कवाब मे हड्डी बन जाओगी।
प्रज्ञा : ऊँह, मै कबाब मे हड्डी हि आपकेलिए ? पिताजी मै आपकी बेटी हु।
पिताजी : तौ कौन अपने बेटी कों हनीमून पे लेँ जाता हैं?
प्रज्ञा: तौ सबके बेटी वी तोँ नहि होते विवाह केँ समय। वोँ तोँ बाद मे होती हैं। आप् लक्की हैं कि आपकी बेटी हैं औऱ माँ औऱ बापू केँ संग बेटी केसे नहि जा सकती हैं।
पिताजी: पर्र तुम् तौ मेरी साली भि हौ, साली कों कौन लें जाता हैं ? हनीमून पे कोई साली कों नहि लें जाता, क्याँ पता, कही पत्नि सें ध्यान हट केँ साली पे हि चलाजाए।
पिताजी डबल मीनिंग मे बातकह रहे थें कि कही पत्नि कों छोड़ साली कों हि नं चोददे व्यक्ति, अगर साली कों वी हनीमून पे लेँ जाए तोँ। प्रज्ञा पिताजी केँ इसडबल मीनिंग बात कों ठीक सें समझी नहि।
प्रज्ञा : तौ क्याँ हुआ, पत्नि केँ संग साली कां भि ध्यान रख लीजिएगा।
पिताजी: अच्छा, औऱ साली कां ध्यान कुछ अधिक हि रख लिया तौ ? पत्नि क्याँ करेगी ? वोँ तौ नाराज़ होँ जाएगी।
प्रज्ञा : आप् मेरा ख्याल रखेंगे तौ दिदी क्यूं नाराज़ होगी ? वोँ तौ मुझसे कितना प्रेम करती हैं।
पिताजी : अच्छा ऐसा हैं औऱ तुम्हारे दिदी कों कोई एतराज नहि हैं तौ मे वी तुम्हारा अच्छे सें ख्याल रख लूंगा।
पिताजी थोडा शरारती तरीके सें मुस्कुराने लगे।
इतने मे दादीमा आँ गई: कौन किसका ख्याल रखरहा हैं ?
बापू: मम्मी, मुझे प्रज्ञा सें ऑर्डर मिला हैं कि उसके दिदी केँ संग उसका भि ख्याल रखु। वोँ भि हनीमून पे हमारे संग जानां चाहती हैं।
पिताजी प्रज्ञा कि खिंचाई कररहे थें।
दादीमा : हायराम राम, यह क्याँ बोलरही यह लड़की, एकदम हि नादान हैं तुँ।
प्रज्ञा: मैनेऐसा क्याँ बोल दिया दादीमा ?
दादीमा : कुछ भि नहि, छोड़उसे।
दादीमा बापू सें : अच्छा बेटा तुझेही सच मे हनीमून पे जानां चाहिए। प्राची केँ भि कुछ अरमान होंगे। उसे पूरा करना तेरा फ़र्ज़ हैं बेटा। लेँ जाउसे हनीमून पे।
दादीमा जानती थि, हनीमून पे एक् कपलबस दिनरात सेक्स हि करता हैं औऱ मजे सें घूमता हैं। उस सिचुएशन मे लड़कियां भि आजादफील करती हैं। औऱ प्राची जितना अपने पिताजी केँ पास रहेगी औऱ बिना किसीरोक टोक केँ, आजादमन सें पिताजी कां संग देगी, उतना हि जल्द उसका गर्भठहर सकता हैं। तौ दादीमा कों प्रज्ञा कि इडिया पसन्द आई थि।
बापू मुस्कुराते हुए : पर्र दादीमा, मेरी साली साहिबा बेटी भि जानां चाहती हैं हमारे संग हनीमून पे।
दादीमा : हाययह क्याँ बोलरही हैं प्रज्ञा। दिदी औऱ बापू कि विवाह हुई हैं नाँ। उनको हनीमून मनाना हैं। तूँ क्यूं जानां चाहती हैं।
प्रज्ञा : पऱ इनकेसंग मै भि हनीमून मना लूंगी नाँ। मे भि थोडा घूम लूंगी।
पिताजी कां केँ हस पड़े, दादीमा भि नादानी पे हस पड़ी।
दादीमा : अरे पागलयह क्याँ बोलरही हैं, हनीमून क्याँ होता हैं पता भि हैं तेरी याँ ऐसे हि कही सें सुन लिया औऱ कुछ भि बोलरही हैं।
प्रज्ञा अपनासर खींचने सि लगी थि : दादीमा आप् लोगहस क्यूं रहे होँ ? हनीमून मे सभी घूमने जाते हैं नां।
दादीमा : अरे नादान लड़की, घूमने नहि जाते, हनीमून मात्र वोँ जाते हैं जिनकी विवाह होती हैं। हनीमून मे वोँ घूमते भि हैं औऱ जीभर केँ प्रेम भि करते हैं एक् दूसरे कों। औऱ वैसे हि मिलन करते हैं जैसे पिताजी औऱ दिदी रात कों करते हैं। तूँ उसमें क्याँ करेगी ?
प्रज्ञा कों अपनी गलती कां एहसास हुआ औऱ अपनी नादानी पे वोँ थोडा शर्मा भि गई। वोँ समझ गई कि पिताजी उसकी खिंचाई कररहे थें।
बापू:आरे कोई नहि मम्मी, मेरी बेटी कि खिंचाई मै इतनाकर चुकाहु तुम् मतकरो। मे सोचरहा हु कि एक् फैमिली ट्रिप पे हि चलते हैं। हमारा हनीमून भि हौ जाएगा औऱ आप् दोनों भि थोडा घूम लेना। वैसे भि घऱ कां ऐसा खराब टाइम थां कि २-३साल सें हम् जीवन जीना हि भूलगए थें।
दादीमा : अरे नहि बेटा, अगर तूँ जानां चाहता हैं तोँ जा प्राची कों लेके, प्रज्ञा कों मै समझा दूंगी। हनीमून तुम् दोनों कां होना हि चाहिए।
बापू:अरे मा हनीमून तोँ हम् मनाएंगे हि। संग मे आप् लोगों कों घुमा भि दूंगा, प्रज्ञा कि भि छुट्टी हैं, मै भि छुट्टी कां जुगार लगताहु।
दादीमा: ठीक हैं बेटा, अगर प्राची कों कोई एतराज नहि होगा तौ चल सकते हैं।
प्रज्ञा खुशी सें : यह…ह, दादीमा मज़ा आएगा। मे तैयार हु।
पिताजी: हां पर्र मै मात्र अपने पत्नि केँ संग हौ हनीमून मनाऊंगा, साली केँ संग नहि। हाहाहा।
प्रज्ञा: अरे सॉरी पिताजी, मुझेपता नहि थां।
दादीमा : तौ तपाक सें पिताजी सें यहसभी मत बोलाकर, मुझ सें पूछ लियाकर।
बापू:आरे रहनेदो नां मम्मी, बच्ची हैं अभि यह। मेरी बेटी अभि बड़ी होँ रही हैं धीरे-धीरे धीरे-धीरे औऱ सभीसीख जाएगी जल्द हि।
दादीमा : ठीक हैं बेटा एक् बार प्राची सें इस बारे मे बातकर लेना। फिन जैसा तुम्हारा विचार करे।
पिताजी: ठीक हैं माँ, मैबात करूंगा प्राची सें।
सभी अपने कमरे मे चलेगए। प्राची भि अपने कमरे मे पिताजी केँ लिएदूध लेँ केँ आँ गई।
अब जैसा पिताजी कां रुटिन थां। बापू नें दूध पिया औऱ फिन प्राची केँ संग मिलन कों सजधजकर।
पिताजी: आजा मेरी लाडो, थोडा अब अपनादूध नहि पिलाएगी।
प्राची : अजी, आपको तोँ हरदिन मेरा हि दूध पीना रहता हैं। पऱ मेरे मम्मों मे दूध हैं कहा ?
पिताजी: मेरीजान, एक् बार तेरे गर्भाशय मे मेरेबीज पलनेलगा। तुम्हारी दोनों चूचियां दूध सें भर जाएगी मेरी बेटी।
प्राची : अच्छा, तौ आपकायह प्लान हैं दूध पीने कां, मुझे प्रेग्नेंट आप् बस मेरादूध पीने केँ लिए बनाना चाहते हैं क्याँ ?
पिताजी: हम्ममम.शायद तुम्हारे प्रेग्नेंट होने सें मुझेयह सुख तौ मिल हि जायेगा।
प्राची : हट बदमाश कही केँ। कैसी गंदी बाते करते हौ आप् जी।
पिताजी: कोई गंदीबात नहि, बस प्रेम करताहु। आओ नां मेरीजान, अबरहा नहि जारहा। देख केसेमचल रहा हैं यह (अपने लोअर उतरते हुए औऱ अपने लिंग केँ तरफ इशारा करतेहुए ) तेरे गुप्तांग मे बीज छोड़ने केँ लिए। यह तुम्हें प्रेगनेंट करेगा तभी कों तेरादूध पीने कां मौका मिलेगा।
बापू कां लंड टनटना गय़ा थां। प्राची अब अच्छे सें जान गई थि कि बापू केँ मचलते लिंग कों चैन कैसा देना हैं। पिताजी लिंग प्रदर्शन केँ रहे थें औऱ थोडा हिला भि रहे थें औऱ प्राची उनके भारी औऱ बड़े अंडकोष कों सहलाने लगी।
प्राची: हायरे मेरे पिताजी, क्याँ रसीले लगरही हैं आपकी अंडकोष। लगरहा हैं पूरामाल सें भरा हैं।
बापू:यस माँ डार्लिंग। यह मूसलडाल केँ जब तुम्हें चोदूंगा तौ यह अंडकोष गाढ़ा माल बनाएगा। औऱ फिन तेरे योनि मे जायेगा।
पिताजी नें प्राची कों पकड़ केँ अपनेऊपर सुला लिया। औऱ होठों कों चूसने लगे।
होठ चूसा, नंगी किया, मम्मों चूसा, फिन गीलीनरम औऱ गर्म बुर कां स्वाद भि बापू नें लिया।
पिताजी प्राची कों चुंबन लेतेहुए।
पिताजी अपने बेटी कां रसीले मम्मों दबाते हुए।
बापू प्राची कि मम्मों चूसते हुए। 
बापू प्राची कि बुर चाटते हुए।
फिन बापू नें प्राची कों अपना लंड चूसने कां इशारा किए। बेटी आज्ञाकारी लड़की केँ जैसे लिंग चूसने लगी। गोकगोक कि आवाज़ ओर पिताजी कि कराहती आवाज़ सें रूम गुलज़ार होनेलगा।
प्राची बापू कां लिंग चूसती हुईँ।
एक् अच्छी १० मिनट केँ लिंग चुसाई केँ बाद, बापू अपने बेटी मे समाने कों बेताब होँ गए, अपनी बेटी केँ योनि पे अपना लिंग रगड़ने लगे। अच्छे सें पूरा बुर केँ चिरान पे ऊपर सें नीचे तक अपना लौड़ा रगड़ते रहे।
बापू अपना लौड़ा प्राची कि योनि पे घिसते हुए।
प्राची कों लगा वोँ इसतरह बापू केँ रगड़ने सें जल्दी झर जाएगी, वोँ आज बापू केँ लिंगजब बुर मे रहेतभी झरना चाहती थि। उसे भि बापू केँ लौड़े केँ आदत सि हौ गई थि। वोँ छटपटाने सि लगी औऱ अब उसकी प्रतीक्षा करने कि क्षमता समाप्त हौ गई। उसनेहाथ बढ़ा केँ अपने पिताजी कां लिंग कों थम लिया। औऱ अन्दर बुर मे घुसने केँ लिए लिंग कों सजधजकर करनेलगी। वोँ अपने बापू कां लौरा कों अपने हाथो सें पकड़ केँ मिलने लगी औऱ फिन योनि दरवाज़ा पे लगा दिया।
प्राची अपने बापू कां लंड बुर मे लेने केँ लिए रेडी करती हुई।
बापू नें योनि दरवाज़ा पे अपने लिंग सें सुपारा कों पाते हि, बुर मे प्रवेश कर जाने कां सोचाओर एक् धक्के मे प्रवेश करगए औऱ जड़ तक लिंग कों अपने पत्नि बनी बेटी केँ योनि मे घुसगए।
प्राची पिताजी केँ लिंग कों अपने योनि पे सेट करतेहुए ओर बापू प्राची मे प्रवेश करतेहुए।
फिनवही, पति पत्नि कि जोरदार चूदाई होनेलगी। प्राची मदहोश होनेलगी। पिताजी भि टाइट योनि केँ खिंचाव सें आनंदित होके आहें भरनेलगे। करीब-करीब १० मिनटऐसे हि प्राची कों भोगते रहे।
पिताजी नें फिन पोजिशन चेंज किया औऱ उन्होंने उसे एक् करवटकर केँ लेटाया औऱ स्वयं प्राची केँ पीठ केँ पीछेलेट गए। ओर पोजीशन बना केँ उसके योनि मे फिन सें अपना लौड़ा घुसेड़ कर चोदने लगे।
पिताजी अपना लिंग योनि मे घुसते हुए।
हरदिन कि तरहआज भि बाप बेटी कि जबर्दस्त चूदाई होनेलगी। प्राची अब बर्दास्त नहि करपाई औऱ झटके खाते झरनेलगी। उनसे बापू लें लंड कों अपने पानी सें नहला दिया। पिताजी केँ लिए चोदना अब औऱ मजेदार हौ गय़ा, वोँ अपनी बेटी कों फ़ज़ाफच चोदने लगे। औऱ 15-20 मिनट औऱ छोड़ने केँ बाद वोँ भि झटके खातेहुए प्राची केँ छूट मे रास्खलित होँ गए।
बापू प्राची केँ बुर मे झरतेहुए औऱ अपनामाल अंदर हि छोड़ते हुए।
पिताजी अपना पानी प्राची केँ योनि कों पिला चुके थें औऱ प्राची कि भि प्यास बुझ चुकी थि।
झरतेहुए उनका एक् वीर्य कां फव्वारा बाहर् प्राची केँ जांघों पे भि जा गिरा थां।
बापू नें फिन सें अपना लिंग प्राची केँ योनि मे हि घुसा दिया औऱ अभि भि लंड प्राची केँ गुप्तांग मे हि दिए लेटे थें। उनकी तौ आदत हि होँ गई थि, जब तक उनका लंड सिकुड़ कर बाहर् नहि आँ जाता वोँ प्राची केँ योनि मे हि घुसा रहता। वोँ कभी भि स्वयं सें अपना लंड प्राची केँ चुत मे चुने केँ बाद नहि निकलते थें।
बापू औऱ प्राची अब तेरा रिलेक्स लगरहे थें। जबर्दस्त चूदाई केँ बाद कां चैन एक् अलग शांति देता हैं।
पिताजी: प्राची, मेरे जिंदगी कों तुमने बहार सें भर दिया हैं मेरी प्यारी पत्नि।
प्राची : आपने भि तौ मेरी जीवन मे हरियाली कां दि हैं पिताजी।
बापू : हम्ममम, हा बेटी मै तेरी जिंदगी कों खुशियों सें भर दूंगा। तेरा दियाहुआ यौनसुख मुझे इतना मदहोश कर देता हैं कि मे अपने पे काबू हि नहि कर पाता मेरी रानी। आईलवयू, मेरी बेटी, मेरी प्राची, आईलवयू।
प्राची : मै भि आपसे बहोत प्रेम करतीहु मेरे पतिदेव। थैंक्यू आप् जौ मुझे इतना अच्छा चोदते हैं।
बापू:हां प्राची, अब एक् प्रेम कि निशानी भि देदो मुझे। एक् नन्हा मुन्ना निशानी।
प्राची : पिताजी मै प्रयास तोँ कररही हु। मासिक भि टाइम सें आता हैं। औऱ आप् इतना गाढ़ा वीर्य भि हरदिन पिलारहे हैं मेरे योनि कों। फिन भि गर्भवती नहि होँ पारही हु।
पिताजी: अरे, विश्वास रखो, सभीठीक होँ जाएगा, मै कोशिश कररहा हु। अभि तुम्हारी उम्र भि तौ कम हैं। जल्द हि हमारा प्रेम रंग लाएगा।
प्राची : जी बापू।
पिताजी: प्राची, एक् बात पूछनी थि, क्याँ तुम् मेरेसंग हनीमून पे जानां चाहोगी, तुमने प्रज्ञा कों सुना हि होगा। मम्मी औऱ मैने भि फैसला किया हैं कि हनीमून पे लेँ जाऊं मे तुम्हे, मगर मे चाहता हु केँ माँ औऱ प्राची कों भि संग लें लेते हैं, तौ एक् फैमिली ट्रिप हि हौ जाएगा। इतने दिनों सें हमारे घऱ नें सुख नहि देखा थां। अब सबको उसमें शामिल करना चाहिए।
प्राची: हां बापू, मुझेकोई एतराज नहि। दादीमा केँ वजह सें हि तोँ आप् मुझे मिले हैं। उनको तौ सभीपता हैं, वोँ संग रहेगी तौ मुझे भि अच्छा लगेगा।
पिताजी: औऱ प्रज्ञा, वोँ भि चल सकती हैं नां।
प्राची : वोँ तोँ आपकीआधी घरवाली हैं नां, आप् जानो।
पिताजी समझगए, प्राची उनकी खिंचाई कररही थि।
बापू:अरे नहीं, वोँ तोँ नादान बच्ची हैं, कुछ भि बोलती हैं।
प्राची : नहि नहि, आधी घरवाली तोँ आप् बोल हि चुके हैं उसे, कभी आपकामन करेगा तोँ पूरी भि बना लेंगे नां ?
पिताजी हंसते हुए : अरे इतनाजलन अपने छोटी बेहन सें। नहि दोस्त मेरी घरवाली तुम् हि हौ औऱ तुम् हि रहोगी।
प्राची : नहि मुझे क्यूं जलन होगी। आप् अपनेआधी घरवाली सें बात करेंगे तोँ।
पिताजी: अरेबस करो बाबा, ऐसा कुछ नहि हैं, वोँ मेरी चूलबुली बेटी हैं, संग मे साली भि हैं, इतना मजाक तौ चलता हैं नां।
प्राची : ओकेओके, आप् जाने औऱ आपकीआधी घरवाली जानेयह सभी मजाक।
बापू:चलो क्रोध नहि। बताओ, प्रज्ञा कों भि लेँ लेना फैमिली ट्रिप पे।
प्राची : यह भि कोई पूछने कि बात हैं बापू। प्रज्ञा तोँ हमारी प्यारी बेटी हैं। वोँ नहि जाएगी तौ मुझे हि अच्छा नहि लगेगा।
बापू:वाउ, आजबनी न् तुम् प्रज्ञा कि माँ। चलो मे सारा अर्जेंजमेट करताहु औऱ स्थान भि डिसाइड करता हूं।
प्राची : ओक पिताजी।
बापू: वैसे एक् बात तोँ हैं, प्रज्ञा केँ कच्चे नींबू औऱ कच्ची काली चूत होगी तोँ जबरदस्त कसी हुइ।
प्राची समझ गई बापू मजाककर रहे हैं( वोँ भि झूठा क्रोध दिखाते हुए) : हट बदमाश, उसकी भि सील तोड़ देंगे क्याँ आप्, जैसे मेरा तोड़ा थां?
बापू हंसते हुए : अबआधी घरवाली तौ वोँ हैं, तोरने कों मिलजाए तोँ मज़ा आँ जाए। हाहाहा.।
प्राची : हट आप् बहोत गंदे हैं, अपनी पत्नि होतेहुए दूसरी लड़की कों चोदना चाहते हैं।
पिताजी: नहि मेरी रानीमै तोँ मजाककर रहा थां। मै तोँ बस अपने प्राची कों प्रेम करना चाहता हूं।
इतने गर्म बातों केँ कारण पिताजी कां लंड सिकुड़ केँ प्राची केँ योनि सें निकलने केँ बजाए उसके बुर मे घुसेहुए हि टनटनाने लगा।
पिताजी: अहह मेरीमाल, देख नं फिन तुम्हें प्रेम करने कां मनकररहा हैं।
प्राची : अहहअहह हम्ममम.हां पिताजी, मुझे भि महसूस होँ रहा हैं। आप् कों मैने रोकाकब हैं।
पिताजी : अहह, तेरीयही अदा, अहह। तौ मुझे पागलबना देता हैं मेरी बेटी।
बापूफिन सें प्राची केँ संग संभोग शुरुआत करदिए। बुर पे धक्के लगाने लगे औऱ प्राची कों फिन सें चोदने लगे।
रूम प्राची केँ चीत्कार सें गूंजउठा, आह्ह्ह्ह। ऊह.आह्ह्ह.मेरे सैया जी.अहह.मै आपके लौड़ा केँ बिना नहि रह सकती पिताजी, उसके बिनामै मर जाऊंगी। अभ्य्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः। आह्ह्ह। चोदिए पिताजी। आह्ह्ह.
माहौल पूरा मादक होँ गय़ा थां। प्राची कि गूंज कमरे केँ बाहर् जारही थि औऱ दादीमा कां नींद भि तोड़ दि थि। दादीमा मन मे : कितनी प्यास हैं दोनों कि बुझती हि नहि, पूरीरात दोनों लगे रहते हैं। कितना चूदाई करते हैं दोनों। जानवरों कि तरह एक् दूसरे कों भोगते रहते हैं। चलो अच्छा हि हैं, मेरा बेटा कों एक् गर्म बुर वाली लड़की तौ मिली जोँ उसेकभी मना नहि करती। अच्छा हैं। बसअब मेरा बेटा उसको गर्भवती भि जल्दकर दे, मुझे औऱ कुछ नहि चाहिए।
इधर बापू औऱ बेटी कि काम क्रीड़ा जोरो पर्र थि। जबरदस्त धक्के लगरहे थें योनि पे। जबरदस्त चीत्कार सें रूम गूंजरहा थां। संग हि उन धक्कों कि आवाज़ थपथपकर केँ हंगामा मचारही थि।
बापूअब बर्दास्त नहि करपारहे थें औऱ उनके लिंग सें एक् गाढ़ा वीर्य कां झरना निकलने लगा।
पिताजी नें प्राची केँ योनि कों लबालब पूरीतरह सें दिया। उनका वीर्य इतना निकला कि प्राची केँ योनि सें ओवरफ्लो सां होनेलगा।
प्राची कि बच्चेदानी मे पूरा एक् एक् बूंद पिताजी टपकते रहे औऱ फिनकुछ हि देर मे इनका लौड़ा, नुनु बन गय़ा औऱ प्राची केँ बुर सें बाहर् आँ गय़ा।
पिताजी: मेरीजान आज पूरी गहराई मे गय़ा हैं मेरामाल, जरा दिखा तौ बुर अपना।
बापू केँ आदेश सें प्राची नें अपना योनि पिताजी केँ सामने फैला दिया। पिताजी नें योनि कां दोनों दरवाज़ा पे लगी पतली चमड़ी कों पकड़ केँ चीर दिया औऱ अंदर अवलोकन करनेलगे।
बुर वीर्य सें चिपचिपी होँ गई थि। औऱ पिताजी कां माल अंदर तक चला गय़ा थां।
बापू संतुष्ट थें।
बापू: बेटी, भाग्य अच्छा रहा तोँ आज केँ संभोग केँ बाद तुम् गर्भावस्था कों प्राप्त हौ जाओगी।
प्राची शर्मा केँ अपनासर दूसरी औऱ गुमा लिया। बापू नें नंगे हि प्राची कां आलिंगन करतेहुए उससे लिपटगए। औऱ थोड़े देर केँ बाद दोनों थकेहुए पति पत्नि गहरी नींद मे सोगए।
Totally understanding ur views , lekin I am taking out my waqt from my busy professional life which iss not going smooth right now. Bilkul v waqt nahii mil pa rah aur jab v mil rah us waqt PE likhne kaa mann nahii rahta. Will try too give update soon.
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 31:
अगली हि सुभह, पिताजी नें तय किया कि एक् फैमिली वेकेशन तोँ होना हि चाहिए। बापू नें प्लानिंग शुरुआत कर दि। ऑफ़िस मे बैठेहुए वोँ सोचरहे थें कि कौन सां स्थान ठीक रहेगा, जहां वोँ पूरे परिवार केँ संगजा सकते हैं, औऱ प्राची केँ संग भरपूर खुशी वोँ उठा सकते हैं। पिताजी नें सोचा क्यूं नां गोवा याँ शिमला कि वादियों मे चलाजाए। मगर वोँ फाइनल डिसीजन नहि लेँ पारहे थें। उन्होंने सोचा क्यूं नां घऱ मे हि सब सें पूछ केँ फाइनल कियाजाए।
रात डिनर करने केँ वक्त पिताजी नें अपना प्रस्ताव सबके सामने रखने कां सोचा। दादीमा नें डिनर लगवा दिया औऱ सब डिनर टेबल पे बैठगए, खानां खाने केँ लिए।
बापू: ( खाने कां पहला निवाला मुंह मे लेतेहुए ) वाउ माँ खानां तौ बहोत टेस्टी बना हैं।
दादीमा : हम्ममम.तेरी धर्म पत्नि नें जौ बनाया हैं। हाहाहाहाहा.
बापू:ओह प्राची नें बनाया हैं, तभी मे कहूं कि आज स्वाद इतनाअलग सां क्यूं लगरहा हैं। बहोत अच्छा बना हैं प्राची।
प्राची : थैंक्यू बापू।
प्रज्ञा : वाउ पिताजी, आप् तौ दिदी कों खुशकर दिए। उसके खाने कां बराईकर केँ।
पिताजी: अब क्याँ करूं, तेरी दिदी हैं हि ऐसी।
प्रज्ञा : औऱ मेरे बारे मे भि तौ कुछ बोलिए पिताजी, मैनेआज सबेरे गरमचाय बनाई थि, अपने तौ चुपचाप पी लिया।
सभी हंसने लगे। पिताजी नें बोला : अरे मेरी बेटियां रानी, बहोत अच्छी गरमचाय बनाई थि तुमने। एक् दमकरक थां।
प्रज्ञा : हां, आपको तोँ केवल दिदी कां मेहनत दिखता हैं, मेरा तोँ दिखता हि नहि। बोलने पऱ बोलरहे हैं कि अच्छी बनी थि गरमचाय।
दादीमा : अरे, जरूरी थोड़ी हैं कि पिताजी करबार तुम् बराई हि करेंगे, नहि भि बोलेफिन भि वोँ अच्छा हि रहता हैं, बस तुझको मुंह फूलना रहता हैं।
बापू:देख प्रज्ञा, सच मे अच्छा थां सबेरे कां गरमचाय, अभि तौ सबलोग संग मे खारहे हैं बैठ केँ तोँ मैने सोचाबोल हि देताहु। उस टाइम तोँ तूँ पास मे थि नहि, नहि तोँ उसी वक्त तुम्हारी तरफबता देता।
प्रज्ञा : चलो थैंक्यू पिताजी
पिताजी: दादीमा सें : माँ तुमने जोँ हनीमून वालीबात बोलि थि, मै उसके बारे मे सोचरहा थां।
प्रज्ञा तपाक सें बोलपरी : बापू मैने बोला थां हनीमून वालीबात, यह मेरा आडिया थां।
बापू:हां हां, सॉरी तेरा हि आडिया थां।
प्रज्ञा : देखो, इसी लिए क्रोध होतीहु मै, मुझेकभी क्रेडिट नहि देते हैं आप्।
पिताजी: अरे मेरी माँ, थैंक्यू, तेरी हि आडिया थां। मुझसे गलती हौ गई। मुझपे अब क्रोध मत होना, अपने प्यारी बेटी कां क्रोध मै केसेझेल पाऊंगा।
प्रज्ञा : चलिए नहि होँ रही, क्रोध बस क्रिडिट दिया करिए मेरीबात कां भि मुझे।
दादीमा औऱ प्राची हंसने लगे।
पिताजी: ओके, मा, तौ उसके बारे मे मै सोचा औऱ सोचरहा हु, शिमला याँ गोवा, जाने कां। आप् लोग बताइए कहा चलना हैं सबको फैमिली ट्रिप पे।
दादीमा : बेटा मै तोँ यहसभी नाँ जानती, मुझे तोँ किसी मंदिर वाली स्थान पे लेँ चल।
प्रज्ञा : अरे दादीमा, आप् क्याँ बोलरही हौ, पिताजी नें कितना अच्छा स्थान चुना हैं। आप् मंदिर वाली स्थान बोलरही होँ।
दादीमा : मुझेयह सभी जगहों कां पता नहि हैं, मै नहि गई कभी, मंदिर वाले स्थान हि घूमने जाती थि तेरे दादाजी जी केँ संग।
प्रज्ञा : वोँ अलग वक्त थां दादीमा, आज हनीमून डेस्टिनेशन गोवा याँ शिमला कों हि माना जाता हैं, मंदिर वाली स्थान अगलीबार चले जायेंगे पिताजी।
दादीमा : हम्ममम.मै भि जानती यहसभी, तुम् लोग हि आपस मे सोचलो।
प्रज्ञा : बापू मुझे तोँ गोवा सें अधिक शिमला मनपसंद हैं।
पिताजी: हम्ममम। औऱ तुम् बताई प्राची।
प्राची तौ जानती हि थि कि स्थान कोई सि भि होँ, पिताजी तोँ उसकेसंग प्रेम हि करेंगे बस। तोँ स्थान सें उसे क्याँ फरक पड़ता हैं। उसने बोला : जोँ प्रज्ञा कों मनपसंद हैं पिताजी, वहीठीक हैं। शिमला अच्छा रहेगा। वैसे भि दादीमा कों गोवा उतना मनपसंद नहि आयेगा।
दादीमा : क्यूं नहि आएगा.
प्रज्ञा : हंसते हुए, दादीमा वहांलोग कुछ अधिक हि ओपन हौ जाते हैं।
दादीमा प्रज्ञा कां इशारा समझ गई : अच्छा फिन शिमला होँ ठीक हैं बेटे।
पिताजी: चलो, तब मे फैमिली ट्रिप कां तैयारी करताहु। कल हि सारा बुकिंग स्टार्ट कर दूंगा।
अबलोग खुश हौ गए। बहोत दिनबाद इसघऱ मे इतनी खुशीआई थि।
बापू नें खानां खाने केँ बाद बेडरूम मे गए, ओर अपनी पत्नि कां प्रतीक्षा करनेलगे। प्राची सरकाम निपटा केँ गई। औऱ हरदिन कि तरह हि, बापू कों यौनसुख दिया।
जम केँ चूदाई किया पिताजी नें उसकीउस रात भि।
औऱ आधीरात तक चूदाई करने केँ बाद दिनों सोगए।
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Update 32:
बापू नें अगले हि दिन शिमला जाने कि तैयारी शुरुआत कर दि। सबसे पहलाकाम जौ पिताजी नें किया वोँ थां टिकट लेना। उन्होंने ट्रेन कि टिकटचैक कियामगर सारी टिकट 20 दिनबाद सें हि उपलब्ध थि। उससे पहले सारी कि सारी सीटें बुक थि। हार केँ पिताजी नें, नां चाहते हुए भि, 20 दिनबाद कि टिकटबुक करा लिया। बापू नें आने कां भि बुकिंग करा हि लिया थां। आने कां टिकट एक् सप्ताह बाद कां थां। पिताजी नें चारचार टिकटलिए थें। अबआगे कां होटल औऱ घूमने केँ टाइम जोँ वाहन इस्तेमाल होता उसकी बुकिंग तोँ बापू शिमला जा केँ भि कर सकते थें।
सभी अच्छा हौ गय़ा। पिताजी भि फुलमूड मे थें कि चलो हनीमून तोँ मनाने कों मिलेगा। उधर प्राची कों भि पता थां कि पिताजी आज सें सारा टिकट बुकिंग करवा लेंगे औऱ उसे घूमने लेँ जाएंगे। उसकी खुशी कां ठिकाना नहि थां। आजउसे पिताजी कि पत्नि होने पे एक् अलगसुख कि प्राप्ति हौ रही थि। पिताजी उसकेलिए ट्रिप प्लान केँ रहे थें, उससे बड़ीबात उसकेलिए उस वक्तकुछ नहि थां। दादीमा थोड़ी अब भि जाने केँ पक्ष मे नहि थि। उन्हें लगरहा थां कि उनका बेटा औऱ पोती हैनीमून पे जारहे हैं, उसमें उनके जाने सें, हौ सकता हैं वोँ कबाब मे हड्डी नं बनजाए। प्रज्ञा कों तोँ एवं भि लगरहा थां बापूउसे लेँ भि जाएंगे याँ नहि, क्योंकि अब उसको हनीमून कां मतलब अच्छे सें पताचल गय़ा थां। हनीमून मियां औऱ बीबी केँ बीच वाला ट्रिप होता हैं। औऱ पिताजी भि जागेंगे कि मै उनकेसंग हनीमून पे जाऊं, क्योंकि उनको तोँ दिदी केँ संग हि जाने कां मन होगा।
पऱ बापू कों पहचानने मे प्रज्ञा नें भूलकर दि। पिताजी एक् फैमिली सें जुड़े हुए व्यक्ति थें औऱ वोँ फैमिली मे सभी कों लेकर चलने वाले शख्स थें। उनकी विवाह प्राची सें हुई थि तौ वोँ तोँ इनकी जिम्मेंदारी तौ थि हि, संग मे वोँ घऱ केँ सारे सदस्य केँ लिए भि सोचने वाले शख्स थें।
इसीतरह साम होँ गई औऱ पिताजी घऱलौट आए दफ़्तर सें। प्राची आज बहोत ज्यादा उत्सुक थि अपने पिताजी सें बात करने केँ लिए। बापू दफ़्तर सें आने केँ बाद अपने कमरे मे अपनाबैग रखने औऱ कपड़े बदलने केँ लिएचल दिए, प्राची वी उनके पीछेआई औऱ उनकेहाथ सें उनकाबैग लें लिया : इधर लाईए बापूमै रखदूं इसे।
पिताजी: क्याँ बात हैं, आज मेरी पत्नि बेटी, बड़ा खातिरदारी केँ रही हैं मेरे। क्याँ हुआ मेरीजान, मेराआज भाग्यशाली दिन हैं याँ मेरी बेटी कि बुर ज़्यादा गीली हौ रही हैं पिताजी केँ लंड केँ लिए।
प्राची शर्मा गई : पिताजी, आप् भि नां, वोँ क्यूं गीली होगी।
बापू:अरे शर्मा क्याँ रही होँ मेरीजान, मेरे लिंग केँ नाम सें हि आपके वहांआग नहि लग जाती हैं क्याँ ? आपने हि तौ कहा थां मैडम कि, अब हमेशा गीली रहती हैं आपकी बुर जैसे हि आपको हमारी यादआती हैं।
प्राची : बहोत शैतान हौ गए हैं आप् बापू। हर वक़्त मुझे प्रेम हौ करना चाहते हैं। औऱ रात कों तोँ आप् पूरीरात हौ मुझे पागलकर देते हैं।
पिताजी: कहो तौ अभि फिन सें पागल केँ दूं। बस किवाड़ हि तौ लगाना हैं।
प्राची : हट बदमाश, आप् भि नं बारे वोँ होँ गए हैं पिताजी।
बापू: वोँ बोले तौ क्याँ मेरी रानी।
प्राची : वोँ बोले तौ, हवसी दरिंदा।
पिताजी: क्याँ, अच्छा, मै हि हु मात्र, ओर वोँ जोँ तुम् मेरे लिंग पे बैठ केँ मुझ सें नॉन स्टॉप चुदावती हौ। उस वक़्त तौ सारेलाज लज्जा सें तौ तुम् भि दूर होँ जाती हौ।
प्राची : पिताजी, आप् प्रेम हि इतना देते हैं मुझे। मैकभी कभीबस आप् पे भि प्रेम लुटा देतीहु।
बापू नें प्राची केँ गले मे हाथडाल औऱ कान नें हल्का सां फुसफुसा केँ बोला : मेरीजान, क्याँ तुम् मुझ पे शिमला मे भि प्रेम लुटाएगी, पहाड़ कि वादियों केँ बीच।
प्राची यह सुनते हि समझ गई कि बापू नें शिमला कि तैयारी करली हैं।
प्राची : सच बापू, हम् शिमला जारहे हैं।
पिताजी: तौ फिन, अपने बाबू केँ संग हनीमून पे प्रेम नहि करूंगा तौ केसे चलेगा। शिमला मे प्रेम करने लें लिए शिमला तौ जानां पड़ेगा नं।
प्राची : सच.बापू।
पिताजी: हां बेटी, मैने टिकटबुक करवा लिया हैं मेरीजान, हम् अगले 25 तारीख कों जारहे हैं।
प्राची खुशी सें चहकउठी : ओह पिताजी, यूआरसो स्वीट।
पिताजी: औऱ बेटी, यूआरहॉट।
प्राची : धत् बदमाश। अच्छा यह बताइए, हम् कितने दिनों केँ लिएजा रहे हैं।
पिताजी: सारी डिटेल आपको फ्री मे देदु क्याँ मेरीजान।
प्राची : तौ मेरे सें भि पैसे लेंगे आप् यहसभी बताने केँ लिए।
बापू: पैसे कों मांगरहा हैं मेरी भोली बेटी, मुझे तोँ तुम्हारी गर्मरस सें गीली, चपचप करतीओर लूप लूपाती योनि चाहिए। औऱ आजरात कों एक् उपहार भि चाहिए, फिन इत्मीनान सें बताऊंगा सारी डिटेल।
प्राची : ( झूठा क्रोध दिखाते हुए ) : हट, आप् बारे शैतान पिताजी हौ, खाली अपने बेटी कों चोदने कि सोचते हौ।
पिताजी: बेटी कों चोदने कां मज़ा हि अलग हैं मेरीजान, जब मैने तुम्हे चोदना शुरुआत कियातब सें एक् अलग हि सुखपा रहाहु मेरी बेटी।
तभी बाहर् सें दादीमा कां आवाज़ आया : प्राची, कहाचली गई बहु ? बापू कि गरमचाय तोँ बनादे, मै डिनर कि तैयारी करलूं तब तक।
प्राची अचानक सें : अजी हटिए, जाने दीजिए, दादीमा आवाज़ देरही हैं। आपकोगरम चाय देने केँ लिए।
पिताजी: मुझेगरम चाय नहि पीना, तुम्हारा दूध पीना हैं बेटी।
प्राची पिताजी कां हाथ सें अपने कों आजाद करतेहुए : बड़े शरारती हैं आप्, मेरे पतिदेव। जाने दीजिए, हटिए। नहि तोँ दादीमा, घऱसर पे उठा लेगी।
इतनाकह केँ प्राची मुस्कुराते हुए कमरे सें बाहर् भाग गई।
बापू कों प्राची कि यह मदहोशी भरी मुस्कुराहट औऱ उसअदा दिखाते हुए दौड़ना भा सां गय़ा। वोँ अपने कों बहोत नाज केँ रहे थें कि वोँ एक् ऐसे अदाओं वाली लड़की केँ संगरात रातभर सम्भोग केँ सकते थें।
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