Beti Bani Sahara – New Episode
भइया, पिछले कुछभाग एक् संग पढ़ने केँ बाद अभि भि दिल औऱ सांप मे कुछअलग सां गरम-गरम एहसास हौ रहा हैं।
कथानक औऱ गति केँ दृष्टिकोण सें देखो तोँ शुरुआत मे हि संभोग केँ बाद कां दृश्य इतना घनिष्ठ थां कि मन मे बिजली दौड़ गई। फिनजब पिताजी नें तोहफा माँगा, वो पिछला वाला तोँ प्राची कां डर, उसके पसीने, उसका आंतरिक संघर्ष। दोस्त मे स्वयं परेशान होँ गय़ा थां! गति बिल्कुल धीमी-जलन वाली थि, जैसेकोई अच्छी नीली फिल्म नहि, बल्कि एक् भावनात्मक रोमांचक कथा हौ। हर विवरण कों इतना टाइम दिया गय़ा कि हर पंक्ति पढ़ते टाइम एक् अलग उत्तेजना उठ जाती हैं। जब पहलीबार कोशिश नाकाम रही औऱ प्राची रो पड़ी, तोँ उसकेदिल केँ संग-संग हमारे दिल मे भि दर्दहुआ। फिनजब उसने स्वयं हिम्मत करके दूसरी कोशिश कि उल्टी मुद्रा मे बैठकर, तोँ उत्साह कुछअलग हि स्तर पर्र थां! चरम तक पहुँचते-पहुँचते तौ मेरामाल निकलते-निकलते बचा कोई खामी नहि, बिल्कुल परिपूर्ण प्रवाह। बीस मिनट कि जबरदस्त चुदाई। हर धक्का आतंरिक तौर पऱ महसूस होँ रहा थां। मजा आँ गय़ा दोस्त!
प्राची कि यात्रा देखकर दिलखुश भि हुआ औऱ थोडा दोषी भि। पहलेडर, दर्द, 'मां' चिल्लाना, फिन उसने स्वयं फैसला किया 'मे आपकेलिए येसभी करूंगी' जब उसने बापू केँ ऊपर चढ़कर उनके हथियार कों अपनी सुराही जैसी गांड मे डालने निर्णय स्वयं सें लिया, औऱ आँसू बहाते हुए भि जारीरखा। दोस्त उसके साहस औऱ उनके प्रेम दोनों नें मुझेछू लिया। उसके अपराधबोध वाले विचार जैसे 'मैंने पिताजी कों उदासकर दिया' इतने वास्तविक थें कि क्याँ कहने!
बापू कां 'मे जबरदस्ती नहि करूँगा' बोलकर फिन भि धीरे धीरेउसे संभालना। उसके लंबे संवादों मे जोँ स्वामित्व वाला प्रेम थां, वो अलग हि रोमांच देता थां। 'तुँ मेरी पहली औऱ अंतिम पत्नि हैं' वाली भावना नें दिलजीत लिया। दोनों केँ बीच कां बंधन इतना मजबूत लगा कि निषिद्ध होने केँ बावजूद भि लगरहा थां, ये असली प्रेम हैं, बस दुनिया केँ बंधनों सें दूर बिलकुल अलग तरीके कां।
शयनकक्ष कां दृश्य इतना स्पष्ट रूप सें वर्णित किया गय़ा थां कि मे स्वयं वहा बैठा थां। घड़ी कि टिक-टिक, प्राची केँ आँसू, पिताजी केँ पसीने, पट-पट कि आवाज़, उसकी योनि कि महक, नारियल तेल कि गंध.सभी कुछ जीवंत महसूस हौ रहा थां! जब प्राची नें कुत्ते जैसी मुद्रा ली औऱ बापू नें धीरे-धीरे सें अपना हथियार अंदर डाला, उसकातंग छेद, उसका चिल्लाना, फिन आहिस्ता उसका कराहना बदलना, हर दृश्य इतना मजबूत थां कि मन मे फिल्म चलरही थि। स्नानघर वाला उल्टी कां दृश्य भि इतना स्वाभाविक थां कि अंत मे गर्भावस्था कां संकेत आते हि दिल मे एक् नया उत्साह भर गय़ा। 'अब हम् तीन होँ जाएंगे' ये पंक्ति पढ़कर तोँ खुशी औऱ सदमा दोनों एक् संगआए!
आपने भाषा कों लेकर भि बिल्कुल देसी औऱ स्वाभाविक संतुलन बनाया हैं, चूत, बुर, लौड़ा, गांड.सभी कुछऐसे लिखा गय़ा जैसेकोई सच मे बोलरहा हौ। पिताजी केँ लंबे स्पष्टीकरण 'तेरा बुर मेरा लिंग कों इतना कसकर पकड़ता हैं कि कोईनया व्यक्ति जल्दी झड़जाए' ये सुनकर लज्जा भि आई औऱ अंदर सें बिजली भि दौड़ी! प्राची केँ छोटे-छोटे 'जी पिताजी, मे आपकी हूं' वाले संवादों नें भावनात्मक स्पर्श दे दिया। हर कराह, हर अहह। बापू। बहोत दर्द होँ रहा हैं, सभीकुछ इतना पर्दे पऱ जैसालगा कि अगर वीडियो बनजाए तोँ लोग पागल होँ जाएंगे। दोहराव भि अच्छी लगी क्योंकि हरबार नई भावना लाती थि।
येकथा मात्र पिछली चुदाई कि नहि हैं। ये विश्वास कि हैं, समर्पण कि हैं, औऱ पारिवारिक बंधन कों एक् नए, निषिद्ध मगर शक्तिशाली तरीके सें दिखाती हैं। प्राची कां आपकेलिए मे दर्द भि सह लूंगी वाला एहसास औऱ बापू कां मे तुम्हारी तरफकभी चोट नहि पहुँचने दूँगा, दोनों नें दिल कों छू लिया। अंत मे गर्भावस्था कां संकेत, डॉक्टर केँ पास जाने वाला दृश्य नें स्टोरी कों एक् नया आयामदे दिया। अब मात्र मजा नहि, बल्कि एक् नई जीवन कि शुरुआत भि! मुझे व्यक्तिगत रूप सें बहोत मनपसंद आया क्योंकि इसमें दर्द औऱ सुख कां इतना परिपूर्ण संतुलन थां, औऱ दोनों चरित्रों कि भावनाएँ इतनी गहरीथीं कि मे स्वयं उनकेसंग जीरहा थां।
Beti Bani Sahara – New Episode
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प्राची कों किसी औऱ सें संभोग इस पूरी किस्सा कां सत्यानाश कर देगा क्योंकि यहकथा बाप-बेटी केँ अनचाहे बने रिश्तों कि हैं !
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 38:
घड़ी मे वक़्त 7 बजआए थें औऱ आज कि सुभह, पिताजी केँ लिए, बहोत हि चैनभरी थि।
खिड़की कां पर्दा अभि भि चढ़ाहुआ थां। औऱ बाहर् सें परदे सें छनकर हल्की हल्की धूप कमरे मे आँ रही थि। आज प्राची सें पहले पिताजी कि नींदखुल गई थि। पिताजी नें प्राची केँ तरफ देखा, प्राची अभि भि नग्न अवस्था मे सोई पड़ी थि। बापू नें प्राची कों देखते हि एक् मीठी मुस्कान दे दिया औऱ सोचा : जरा देखो तोँ इस शैतान सि लड़की कों, रात कों केसे पूरेजोश मे मेरा लिंग अपने गांड़ मे लिया थां स्वयं सें, औऱ अभि एकदम शरीफ सि बच्ची लगरही हैं औऱ शांति सें सोरही हैं।
पिताजी केँ लौड़े नें टाइटनेस अभि भि बनी हुईँ थि। बापू प्राची कों देखते जारहे थें। उनको अपनी बेटी कों नंगी देखने सें जी हि नहि भररहा थां। बापूदिल मे स्वयं सें हि बातेकर रहे थें : अहह, रात कों तोँ कहर हि ढा दिया थां इसने, आज मेरी एक् ओर तमन्ना पूरी हौ गई, मैने बेटी कां दूसरा सील भि तोड़ दिया पिछले रात। कितना चीत्कार माररही थि। एक् बार तौ दहाड़े मार केँ रोनेलगी थि। माँ नें पता नहि कहीसुन नं लिया होँ, प्रज्ञा भि क्याँ सोचेगी कि पिताजी दिदी केँ संग क्याँ करते हैं कि उसे इतना दर्द होता हैं। अहह.मज़ा तौ जम केँ आयारात कों, उसे गांड़ कि टाइनेंस, ऐसी थि कि मुझेआज तक उतना टाइनेस कही नहि मिला थां। प्राची कां तोँ दोनों छेद मे हि गजब कि टाइटनेस हैं। नां चाहते हुए भि 15-20 मिनट सें अधिकटिक नहि पातामै अपने बेटी केँ छेद मे। अहह। जबरदस्त माल मिली हैं मुझे। कलरात कों जौ 2 राउंड हुआ, वोँ एक् अलग हि आनंद दिया मुझे। अब सें मै बारी बारी दिनों छेदों मे राउंड मार सकताहु हररात। प्राची बस मेरी हैं, औऱ उसकाबदन मैजम केँ भोगना चाहता हु, हरदिन। अब नाँ रहा जाएगा मुझसे इसके बिना एक् दिन भि। आदत हि बुरीलगा दि हैं मेरी बेटी नें अपने बुर कि।
पिताजी बेड सें उठे औऱ खिड़की कि ओरबढ़ चले, रूम मे अभि भि थोडा अंधेरा थां खिड़की बंद होने केँ वजह सें। बापू खिड़की कि तरफ बढ़े औऱ उनका लिंग अभि भि तन केँ खड़ा थां औऱ दाएं बाएंहिल रहा थां हरकदम केँ संग। बापू नें खिड़की सें पर्दा खींज केँ साइड मे केँ दिया औऱ उसका दरवाजा खोला, बाहर् चिड़ियों कि चहचहाहट सुनाई देरही थि, एक् ठंडाहवा कां झोंका रूम मे आया औऱ बापू केँ लिंग मे सुर सुरीजा पैदाकर गय़ा। बापू मुरे पर्र प्राची केँ पासगए, अहहअब उनको प्राची कां जिस्म औऱ साफ दिखने लगा,
एकदम दूधिया गोरी 19 साल कि झरहरी सि लड़की, उसके मुंह खुलेहुए थें सोने केँ समय, उसके मम्मों हर सांस केँ संगऊपर नीचेकर रहे थें, उसकेचुत कां चिरान अब थोडा लंबा दिखने लगा थां, रात कों पिताजी द्वारा दि गई वीर्य कि एक् सफेद सूखी पपड़ी सि बनी हुइ थि प्राची केँ योनिद्वार पे, गांड़ कां छेद पे भि वही सफेद पपड़ी, छेद पहले सें अधिक चिथरा हुआ थां, उसके इर्द गिर्द थोडा सूजन सां थां औऱ लगरहा थां कि रात कों गांड़ मारी गई हैं प्राची कि। प्राची अब पूरीतरह सें पिताजी हि हौ गई थि। औऱ बापू कों आज पहलीबार प्राची केँ दोनों छेद कां लाइसेंस मिला थां।
पिताजी कां लिंग इतना सोचते हि उनके काबू सें बाहर् जानेलगा, बापू(मन मे ) : अहहपता नहि क्याँ चमत्कार किया हैं प्राची केँ शरीर नें मेरेइस तोप पे, हर टाइम उसको देखते हि सलामी देने लगता हैं औऱ जब तक किले मे घुसा केँ 1-2 राउंड फायरिंग न् करदेतब तक मानता हि नहि हैं। अह.अब बर्दास्त नहि हौ रहा मेरी बच्ची, अबमन बेकाबू होँ रहा पिताजी कां, तुँ माल हि ऐसी हैं कि मन हि नहि भरता तेरे शरीर सें मेरा बाबू मेरी। आज बापू कां गन्ना लेतेहुए नींद खुलेगी तेरी मेरी पत्नि जी।
बापू सें नहि रहा गय़ा। बापू कों सबेरे कां यह वक्त, प्राची कां नग्न यौवन औऱ बाहर् सें आँ रही ठंडीहवा नें लिंग मे गजब कि गर्मी पैदाकर दि थि।
बापू प्राची केँ पासगए औऱ प्राची कों हल्के सें हिलाया : मेरी लाड़िली, सोई हौ अभि तक।
प्राची कां कोई जवाब नहि आया। बापू नें फिन पूछा : प्राची बेटी, उठ भि जा, देख क्याँ कहरढा रही हैं तेरी नंगी जिस्म मेरे लौड़े पे।
प्राची कां डोभना हर सांस केँ संगऊपर नीचेकर रहा थां औऱ अभि भि प्राची कां कोई जवाब नहि आया।
बापू:मन मे, आज नहि रुका जाएगा मुझ सें, मजबूर कर दिया हैं इसके सेक्सी जिस्म नें मुझे, किलाफतह कर हि लेताहु, हमला होने केँ बाद तोँ जग हि जाएगी राजकुमारी।
पिताजी नें मन बनाया औऱ प्राची पे चढ़ाई कर दि। पिताजी एक् अनुकूल पोजीशन मानने लगे जिससे प्राची केँ योनि दरवाज़ा तक उनका लिंग पहुंच सके।
बापू अपने बेटी केँ चुत तक पहुंच गए, उसे सीधाकर केँ करवट बदला, औऱ अपना लंड कां टोपा अपने पत्नि केँ चुत पर्र सेट किया। औऱ अपने लिंग कों आगे जाने केँ लिए प्रेशर लगा दिया।
पिताजी कां लिंग गर्मरोड केँ तरह प्राची कां बूर चीरता हुआ अंदर कि ओर जानेलगा।
औऱ जल्द कि लिंग प्राची केँ बच्चेदानी तक जाआया।
एक् ज़ोर कि अहह। केँ संग प्राची कि निंद्रा भंग हुइ औऱ उसने पाया कि उसके पिता जी, उसके टांगों कों फैलाए, उसके टांगों केँ बीच मे अपने घुटनों कों मोर केँ बैठेहुए हैं, औऱ उनका लिंग उसके योनि केँ गहराई तक घुस चुका हैं।
प्राची कों एक् अजीब सि चुलचुली सि मचरही थि उसके योनि मे। वोँ कुछबोल भि नाँ पाई अपने पति सें कि वोँ बाहर् निकल लीजिए याँ अभि छोड़ दीजिए। वोँ बसआवक रह गई। औऱ पिताजी कि ओर देखती रही। पिताजी कि आंखों मे उसे प्यास स दिखा। बापू कां बदन गर्म हौ गय़ा थां औऱ चेहरा भि तमतमा स गय़ा थां औऱ लाल होँ गय़ा थां। वोँ बस अपने आंखेबंद कर केँ मदहोश सि हौ गई।
दरअसल जब अभि पिताजी नें प्राची मे प्रवेश किया थां उस वक्त प्राची केँ योनि कों बिन बुलाए मेहमान केँ आने कि कोईखबर नहि थि, पऱ पिताजी कां मेहमान बिना दरवाजे पे दस्तक दिएघऱ मे आँ घुसा थां। मतलबजब बापू नें लिंग प्राची मे घुसाया तोँ उसका योनि एक् दम सूखा पड़ा थां। बापू नें जैसे हि अन्दर धांसा अपने लिंग कों उनके उनके टोपे पे केँ जबरदस्त घर्षण महसूस हुआ। उनके मुंह सें एक् दर्दभरी अहह.भि निकल गई थि। वोँ तौ उनके लिंग पे लगे प्रीकम केँ कारण लिंग अन्दर चला गय़ा नहि तोँ प्राची कि योनि सुखीपरी थि।
बापू नें सुखी योनि मे हि धक्का लगाना शुरुआत किया। एक् तौ प्राची कि योनि वैसे हि टाइट थि ऊपर सें योनि सुखी भि थि। पिताजी केँ करीब 4-5 धक्के तक प्राची केँ चूत कि होठों नें बापू कां लौड़ा ऐसा पकड़ा कि पिताजी कों लगा कि वोँ तौ 10 धक्कों तक भि नहि टिक पाएंगे, मगर प्राची कां चूत पिताजी केँ लिंग केँ स्वागत नें तुंरत पानी छोड़ केँ गिला हौ गय़ा। प्राची कि बुर बापू केँ चंद धक्को केँ बाद हि पनिया सि गई औऱ चिकनी हौ गई। अब बापू कां मार्ग साफ हौ गय़ा औऱ सटासट दोनों कां मिलन होनेलगा।
प्राची अपने पति कों मना नहि करपारही थि, वोँ इतनी गीली होँ गई थि कि क्याँ हि कहना। हमला अचानक हुआ थां औऱ यह हमला उसकेमन कों भि भानेलगा। वोँ भि अब हल्का हल्का अपनेकमर कों ऊपर कि ओर उछालकर बापू कों मेसेज देरही थि कि पिताजी आओ औऱ भोगलो अपनेफूल सि बच्ची कों। वोँ अब मदहोशी कि कगार पे पहुंच गई।
पिताजी केँ शरीर पसीने सें भर गय़ा औऱ प्राची कां भि वहीहाल थां। बापू एक् सुर सें, 30 मिनट सें, प्राची केँ बच्चेदानी पे तारातर दस्तक देरहे थें।
वोँ हांफने सें लगे औऱ प्राची पहले हि 10-10 मे केँ अंतराल मे 2 बार रास्खलित हौ चुकी थि। अब उसका बुर गिला हि नहि, एकदमरस सें भर गय़ा थां, गाढ़ा सफेदरस सें, जोँ प्राची केँ 2 बार झड़ने सें हुआ थां।
रूम सुभह सुभह हि इसफचफच कि आवाज़ कां आदि नहि थां, जिसका आज वोँ साक्षी बनरहा थां। पिताजी अबचरम सीमा तक पहुंचने हि वाले थें।
तभी दादीमा नें बाहर् सें गेट पे दस्तक कि : अरेआज जगे नहि होँ क्याँ तुम् दिनों, आठ बजने कों आँ गए औऱ यह राजकुमारी अभि तक अपने राजा कि बाहों मे चैन सें सोरही हैं।
दरअसल, रात केँ सन्नाटे मे कमरे कां आवाज़ बहोत अधिक गूंजता थां, मगर सुभह केँ हलचल मे कमरे मे क्याँ चलरहा हैं, इसकी आवाज़ बाहर् जाती हि नहि थि।
बापू एक् दम सें अपने हमले पे ब्रेक लगाया। औऱ बोल पड़े : बसजगगए हैं मम्मी, अभि आते हैं।
दादीमा : अरेजग गए हें बोलरहा हैं औऱ अभि तक अलसी केँ तरहबेड पे हि पड़ाहुआ हैं, आँ बाहर् देख सूरजसर पे चढ़आया हैं। आजयाद हैं नां पोती कों डॉक्टर केँ यहां दिखाना हैं।
पिताजी(मन मे ) : अरे अभि हि माँ कों यहसभी सूझरहा हैं। यहजिद हि पकड़ लेती हैं।
पिताजी: बसमा, आँ गए।
दादीमा : आँ गए क्याँ, चल दरवाजा खोल जल्द सें। मैगरम चाय लें आईहु। औऱ अपने महारानी कों भि उठाला।
पिताजी एक् दम धर्म संकट मे पर्र गए, एक् तोँ पसीने पसीने हॉफरहे थें, ऊपर सें प्राची मदहोश हुई उनके नीचे पड़ी थि, औऱ तौ औऱ लिंग भि प्राची केँ चूत मे धसापरा थां। ऊपर सें मम्मी आके परेशान केँ रही।
पिताजी: अरे मम्मी, गरम चाय आँ केँ पीताहु, टेबल पे बाहर् हि रखिए, आँ रहाहु 5 मिनट मे।
दादीमा : गुस्से मे मन मे बोला : कितना अलसी हि गय़ा हैं यह, मै खड़ीहु गेट पे आवाज़ लगारही ओरलाट साहेब निकल हि नहि रहे।
दादीमा पिताजी सें : गरमचाय ठंडी होगी, लेँ अब दुबारा गर्म नहि करूंगी, खोल दरवाजा, यही कमरे मे हि दे देतीहु।
बापूअब समझगए कि माँ कों अब कमरे केँ अन्दर कां सिचुएशंन बताना हि पड़ेगा वरनायह नहि मानेगी।
पिताजी: मा समझाकरो, हम् अभि बाहर् आने केँ हालात मे नहि हैं, प्राची भि नहि आँ पाएगी, 5-10 मिनट कां टाइम दीजिए, आँ रहे हैं हम्।
दादीमा कां क्रोध चरम पे चला गय़ा, वोँ समझ नहि पाई थि कि कमरे मे क्याँ हौ रहा हैं : क्यूं नहि आँ सकते, जब सें विवाह हुईँ हैं तु तौ घरघूसना हि गय़ा हैं।
पिताजी कों अबकोई मार्ग नजर नहि आया औऱ अबसमझ गए कि साफसाफ शब्दों मे हि मम्मी कों बताना पड़ेगा कि कमरे मे आखिरचल क्याँ रहा हैं।
बापू:मा, जरा प्राची केँ संग संभोग कां जीकर गय़ा थां आज सबेरे सबेरे, हमलोग सातबजे हि जगगए थें, बस प्राची मे हि हु औऱ उसको भरने हि वालाहु, आताहु माँ 5-10 मिनट मे।
दादीमा अपने बेटे कि आवाज़ जौ उसबंद कमरे सें आई थि, वोँ सुन केँ सन सि रह गई।
दादीमा (शर्मिन्दा हौ केँ मन मे ) : आएराम, यह क्याँ, आज सबेरे सबेरे हि रौंदरहा हैं बहु कों। मतलब 7 बजे सें यह प्राची केँ संग संबंध बनारहा हैं, क्या बात है राम, अभि भि अंदर घुसा हैं उसके मतबल, ओह, छिह.यह मैने क्याँ कर दिया, दोनों केँ निजी वक़्त मे दखलदे दिया। उसको भरने हि वाला हैं, ओह, मतलब वीर्य छूटने केँ वक्त हि मैनेटोक दिया। यह क्याँ किया मैने। यहलोग कां रात सें जी नहि भरता क्याँ, रात मे कलफिन प्राची कि घूंटी घुटीं आवाज़ आँ रही थि उसकी, मतलबरात सें अबदिन मे भि। कही मेरे बच्चे करने कि जिद केँ कारणयह प्राची कों ज्यादा सें ज़्यादा तोँ नहि प्रेसर देरहा हैं कि जितना करेगा उतना चांस जायद होगा। अरे नहि नहि, मुझे बच्चा चाहिए पर्र इसतरह नहि कि जबतब प्राची कों बच्चे केँ खातिर मेरा बेटा रौंदता रहे। वोँ अभि हैं हि कितनी सि।
दादीमा कों अपराध बोध होँ रहा थां, उधर प्राची शर्मा केँ पानी पानी हि गई थि औऱ बापूसर सें पाव तक पसीने सें तर, पिताजी मन मे सोचे : मम्मी नें आज बुरा पकड़ लिया, फिन सें भाषण सुनाएगी कि पोती कों संयम सें भोगना हैं।
दादीमा एक् धीमी स्वर नें बोलीं : अच्छा, अपना वक़्त लें लो। आहिस्ता आओ।
दादीमा कों ओरकुछ नाँ सूझा। वोँ दबेपैर गेट सें वापस जानेलगी, औऱ मन मे सोची:मै भि उल्लू हि हु, बेटा औऱ पोती कि विवाह कि हुफिन भि यह नाँ समझी कि अब उनको अपने वक्त सें उसके कमरे सें निकलने देना चाहिए। यह क्याँ किया मैने, मेरा बेटा कों संबंध बनाते वक्तमुझ सें ऐसे केहना पऱ गय़ा मेरेजिद केँ कारण, एक् बारजब उसने बोला कि आँ रहा हैं बाहर्, तभी मुझेसमझ जानां चाहिए थां कि पत्नि केँ संग अन्दर हैं तोँ 5-10 मिनट कां मतलब क्याँ थां। मै बूढ़ी कि गई पऱ उल्लू हि रह गई, किस्मत सें प्रज्ञा नहि थि यहांआस पास नहि तौ मे तोँ लज्जा सें हि मर जाती।
पिताजी नें जैसे हि पाया कि दादीमा केँ कदमगेट सें दूरजा रहा हैं। पिताजी प्राची सें बोले : कोईबात भि रानी, दादीमा समझ गई हैं कि हम् अभि प्रेम कररहे हैं, शर्मा मत, बस मेरी बच्ची, गहराई मे थोडा औऱ शॉर्ट मारने दे औऱ मै तेरी चूत भरदुजरा।
बिना प्राची केँ जवाब सुने हि पिताजी रफ्तार नें सटसट शॉर्ट लगाने लगे। प्राची मस्ती सें कराहउठी। दादीमा केँ उस डिस्टर्ब करने सें बापू जोँ झरने वाले थें वोँ अबटल चुका थां, मतलब पिताजी प्राची केँ बूर मे फिन लगातार धक्के लगा सकते थें।
फिन सें फुल स्पीड नें पिताजी नें प्राची कों चोदना स्टार्ट किया। औऱ गहरे स्ट्रोक मारने शुरुआत किए। ओर प्राची मदहोशी सें कराहउठी।
उनका प्रोग्राम अब 15 मिनट सें चलता हि आँ रहा थां, जब सें दादीमा गेट सें हटी थि।
प्राची : बाप रे, बापू, अहह., अहह., बस बापू, बस.मैसह नहि पारही, बापू.
पिताजी( प्राची केँ चूत मे लंबे लंबे शॉर्ट लगतेहुए.) : बस, अहह., मेरी, अहह., रानी, अहह., होँ गय़ा बाबू, अहह., तेरे बुर कि गरमाहट, अहह., गजब कि हैं मेरी बच्ची, अहह., थोड़ी देर औऱ, अहह.
प्राची : पिताजी.आहुहह्हः। इच्छह्ह.अहह.बापू.मै नहि सह पाऊंगी बापू.अहह.पा.प.प.प.प। प.पा हुह्ह्ह्ह्ह्हः। बस.
औऱ प्राची हिचकोले खानेलगी, उसकी निगोडी बुर छल छाला केँ चू गई, औऱ पिताजी केँ लिंग कों तरबतर कर दिया।
बापू कों बेटी कां गीलापन पा केँ गजब कां उद्वेग आयाओर पूरा जिस्म थरथराने लग, औऱ उनके भि लंड सें एक् मोटी वीर्य कि धारफूट पड़ी जोँ प्राची केँ बूर कि ओवरलोड केँ गय़ा। प्राची भि झटकेखा रही थि पिताजी केँ नीचे पड़े पड़े।
सुभह कां यह मिलन पूर्ण हुआ।
प्राची औऱ बापू दिनों 5 मिनट तक ऐसे हि करेरहे, बापू कां लिंग भि प्राची केँ चूत मे हि धंसारहा ओर स्वयं सें छोटा हौ केँ 5 मिनटबाद बाहर् निकल गय़ा। थोडा सांस मे सांसआने केँ बाद पिताजी नें प्राची सें बोल : आज तेरी सासू मां मेरीखबर लेगी।
प्राची हल्की मुस्कान केँ संग : हाहा, आज तोँ आप् बुरा फंसे बापू।
पिताजी: बुरा क्याँ फंसे, अपनी पत्नि कों चोदरहा थां, किसी दूसरी कों थोड़ी, अगर प्रज्ञा कों चोदरहा होता तोँ बुरा फसता।
प्राची प्रज्ञा कों चोदने कां नाम सुनते हि सन्रह गई : बापू, प्रज्ञा ?
पिताजी (गलती कां एहसास होतेहुए ) : अरे मेरे मुंह सें निकल गय़ा उसकानाम, सॉरी, मेरा मतलब थां किसीओर कों चोदरहा होता तेरे अलावा तब।
प्राची : नहि बापू, अपने प्रज्ञा कां नामऐसे हि नहि लिया हैं, सही बताइए, आपको प्रज्ञा मनपसंद हैं क्याँ, क्याँ मै नहि।
पिताजी प्राची कां जलनसमझ गए : अरे भि बाबा सॉरी, मेरे जुबान सें निकल गय़ा प्रज्ञा कां नाम। वोँ तौ मेरी बेटी हैं।
प्राची : मै भि तोँ पहले आपकी बेटी हि थि बापू, आप् मेरेसंग तौ कररहे हैं नां, उसकेसंग भि कर दीजिएगा कर दीजिएगा कभी आप् तौ।
बापू:अरे पागल, तेरी तोँ विवाह हुई तब नां तुँ मेरी पत्नि बनी औऱ अब संबंध बनाता हु तेरेसंग, प्रज्ञा बेटी हैं दोस्त।
प्राची थीरा तौ समझ गई कि होँ सकता हैं बापू कि जुबान फिसल गई। पर्र वोँ सवालिया नजरी सें पिताजी कों देखने लगी
बापू नें बढ़ केँ प्राची केँ सर पे एक् चुम्बन लिया औऱ बोले : सच मे बाबू, मेराऐसा कि इरादा नहि हैं। मे तेरे सिवा किसी केँ संग नहि जाऊंगा। तुँ मेरी पत्नि हैं, मेरीजान हैं जानेमन, माफकर दे, जुबान फिसल गई थि मेरीबस।
प्राची : थीरा हंसते हुए, बापू आप् डरते हैं मुझसे तौ कितने फनी लगते हैं, हाहाहाहाहा। मै तौ बसऐसे हि आपकी टांग खींचरही थि, मे जानती हु आप् मेरी मर्जी केँ खिलाफ कभी दूसरी लड़की कों नहि छुएंगे औऱ प्रज्ञा तोँ हमारी बेटी हि।
बापू केँ जान मे जानआई : अच्छा, तूने तोँ डरा हि दिया थां, मतलब तेरी मर्जी सें मै प्रज्ञा कों चोद सकताहु नां। हाहाहाहाहा
प्राची : हाहा बापूनोट फनी, वैसे प्रज्ञा मेरे जैसे आपका मोटा मूसलसह कहां पाएगी।
मजाक मजाक मे हि पिताजी केँ दिल मे प्रज्ञा केँ लिएआज पहलीबार बेटी सें हट केँ एक् अलगछवि बन गई थि। उनके लिंग मे प्रज्ञा केँ नाम सें हरकत शुरुआत होँ गई।
पिताजी नें सोचा : अगर मेरे लिंग अभि खड़ा होँ गय़ा औऱ प्राची कों भनक तक लग गई केँ प्रज्ञा केँ नाम सें हुआ हैं तौ बारी प्रॉब्लम हौ जाएगी, उसे तोँ अभि भि यह मजाक हि लगरहा हैं। नहि नहि मुझेयह मजाकयही रोकना होगा।
पिताजी : चल होँ गय़ा प्रज्ञा कि चूदाई, अभि चल बाहर्, मा कों 5 मिनटबोल कर अभि 25 मिनट हौ गए हैं।
प्राची : तौ आप् तोँ चोदते हि इतना हौ मुझे।
दोनों हंसने लगे।
पिताजी: चल जल्द, डॉक्टर केँ यहां भि तेरीआज भि लें गय़ा तोँ मम्मी मेरेसर पे चढ़ केँ नाचेगी।
प्रज्ञा : हां बापू, वोँ रात कों अपने वोँ पीछे किया थां नां, तौ उधर भि थोडा दर्ददे रहा हैं। कोइपैन किलर लें लेंगे क्याँ डॉक्टर सें।
पिताजी: ओहओक माँ जान, अबचल सजधजकर होँ जा।
प्राची उठी औऱ लंगड़ाते हुए बाथरूम मे चल दि। वीर्य भरे चूत सें उठते हि पिताजी कां माल रिसने लगा, औऱ चलने केँ कारण उसके जांघ सें होतेहुए नीचे तक एक् धार जैसा बनताहुआ बहनेलगा।
बापू संतुष्टि कि अनुभूति करनेलगे।
Beti Bani Sahara - Next part miss mat karna
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