Beti Bani Sahara – New Episode
Update 6 :
दादीमा मम्मी नें ठान लिया थां कि प्राची कि विवाह उसके बापू सें करा देगी। वोँ अपने बेटे कों तड़पता नहि देख सकती थि। प्राची भि जवानी कि दहलीज पे आँ हि चुकी थि। ऊपर सें उसने तोँ अपने पिताजी कां लौरा भि देख लिया थां।
उसदिन जब बापूघऱ आए तौ दादीमा नें डिनर खाने केँ बाद बापू सें कहा : बेटा तुमसे कुछबात करनी हैं।
बापू:हां माँ कहो नाँ।
दादीमा : बेटेमै तेरेलिए बहोत चिंता करतीहु। तूँ अभि 40 कां वोँ भि हुआ हैं औऱ तेरेऊपर इतना बड़ा पहाड़ टूट पऱ हैं। पत्नि नहि रही। एक् जीवनसाथी केँ संगसंग तुमने अपनीओर खुशियां वीखो दि हैं।
बापू : अब क्याँ करूंमा, ईश्वर नें यही लिखा थां मेरे क़िस्मत मे।
दादीमा : हां बेटा, मगर ईश्वर इतना निर्दय नहि हैं। एक् मार्ग बंद करता हैं तौ एक् मार्ग खोल भि देता हैं।
बापू कन्फ्यूज हौ रहे थें।
पिताजी : मा तुम् किस बारे मे बातकर रही होँ।
दादीमा : बेटे, तुम् अभि जवान होँ। मै जानती हु जवानी मे यौनसुख कितना जरूरी होता हैं। ओरबहु केँ जाने केँ बाद तुम्हारे लिए जीवन कितना मुश्किल हौ गय़ा हैं। यह मुझसे देखा नहि जाता।
बापू थोडा झेप सें गए।
दादीमा : बेटा कलघऱ मे कुछऐसा हुआ जिसने मेरे दिमाग़ मे एक् अलग विचार कां दिया हैं।
पिताजी: क्याँ हुआ हैं माँ।
दादीमा: बेटा बातऐसी हैं कि कलजब तूँ बहु केँ अभाव मे अपने आप् कों रात्रि मे संतुष्ट कररहे थें तब प्राची नें वोँ काम क्रिया देख लिया थां।
बापू एकदम आवाकरह गए।
दादीमा : वोँ बहोत जिज्ञासा सें तेरे उसके बारे मे बातकर रही थि। मुझे लगता हैं वोँ यौवन केँ उस दहलीज पे आँ गई हैं कि इनसभी बातों सें उसकामन रोमांचित हौ गय़ा होगा।
बापू एकदम सें शर्मिंदा हौ गए थें।
बापू:मा, मुझसे बहोत बड़ी गलती होँ गई हैं। मुझेयह ध्यान रखना चाहिए थें कि घऱ मे नईनई जवान हुई दो लड़कियां वोँ हैं। मुझेऐसा नहि करना चाहिए थां। यहबात आपको वोँ पता नहि लगानी चाहिए थि।
दादीमा: बेटा जौ होँ गय़ा सो होँ गय़ा। मैने प्राची कों सारी बाते समझा बुझा केँ उसके जिज्ञासा कों भि शांतकर दिया हैं। मगरइस बात सें मेरेमन मे एक् विचार आया हैं।
बापू: क्याँ विचार मा?
दादीमा : देख बेटे, मै तेरी माँ हु औऱ बच्चियों कि दादीमा, मै हमेशा तुम् लोगो केँ लिए अच्छा चाहती हु। मे तुझेही ऐसे नहि देख सकती। इसीलिए मैने भि नाता तेरेलिए लाया थां ताकि तूँ अपना जिंदगी मित्र केँ संग अपनीआगे कां जिंदगी सुखी सें जी सकें। पऱ अबलगरहा हैं कि किसीवी बाहर् केँ औरत कों घऱ मे लाने सें घऱ बनाने सें ज्यादा बिखर जाने कां अधिकडर हैं, पता नहि वोँ स्त्री, प्रज्ञा केँ संग केसेपेश आएगी। इसलिये कल केँ बार मेरेमन मे विचार आया हैं कि तेरी जिंदगी संगनी अगर तुझेही घऱ मे हि मिलजाए ओरकोई प्रज्ञा कां भि उसकेमा केँ जैसी हि खयालकरे तौ कितना अच्छा होगा। वोँ तुम्हे यौनसुख भि लेने देगी औऱ घऱ कों भि संभाल लेगी।
पिताजी: पर्र मायहकौन सि लड़की कि बातकर रहे हैं आप्।
दादीमा: बेटा मैने सोचा हैं कि तूँ प्राची केँ संगलगन कर लें।
पिताजी कां मनठनक गय़ा : क्याँ.!! यह क्याँ कहरही हौ मा। जानती होँ नां प्राची कौन लगती हैं मेरी। बेटी हैं वोँ। यहपाप मै केसेकर सकताहु। यह ख्याल आपकेमन मे आया भि केसे कि मे अपनी बेटी सें विवाह केँ लूंगा। यह क्याँ वाहियात बात केँ दि अपने।
दादीमा: बेटे, मै इसके बारे मे बहोत सोची। मुझे भि पहलेयही लगा कि यह नाता कितना गलत होगा, मगर सोच, इसघऱ कां एक् औरत केँ बगैर क्याँ होगा। तुँ शराब मे लिप्त हौ गय़ा हैं। मूठ मारने लगा हैं। कमजोर होँ जाएगा। तुम्हारी तरफ एक् स्त्री कि सख़्त जरूरत हैं औऱ ऐसे मे कही तोँ बाहर् किसी रण्डी केँ चक्कर मे पर्र गय़ा तोँ लड़कियों कां क्याँ होगा। मे तोँ आजहु, कल नहि। उसकेबाद उनका देखभाल कौन करेगा। काम अग्नि बहोत खराब होता हैं बेटा। वोँ तुम्हे ऐसेकाम करने पे भि मजबूर कर देगी जौ तुमने कभी सोचा नहि थां। तूँ एक् जिम्मेदार बाप हैं। मे जानती हि तुँ अब किसीऐसी औरत सें विवाह नहि करेगा जौ प्राची औऱ प्रज्ञा कि देखभाल नाँ करसके। तुम्हारी तरफ उनकी बहोत फिक्र हैं औऱ मुझे तुम् सभी कि। मै नहि चाहती कि दोनों लड़कियों कां भविष्य अंधकार मे चलाजाए। प्राची एक् खूबसूरत औऱ जवान लड़की हैं। अगर वोँ तेरे जीवन मे आँ गई तौ तेरी सारी तकलीफ़ ख़त्म। ओरयहसोच कि अगर वोँ विवाह कर केँ दूसरे घऱ गई ओर दोनों लड़कियां कि विवाह हौ गई ओरकल कों मै भि नाँ रही तोँ तुँ अपनी जीवन केसे कटेगा। बेटा मैयहसोच केँ हि डर गई हु। मुझेयह निर्णय बिल्कुल बहोत सोचने केँ बात लेनापरा हैं।
पिताजी केँ लिएयह एकदम सां विस्फोट कि तरह थां। उनकी स्वयं कि मम्मी उनको अपने हि कुंवारी ओर जवानी केँ दहलीज पे खड़ी बेटी केँ संग विवाह करवाना चाहती हैं। क्याँ मायह भि जानती कि विवाह केँ बाद पति पत्नि मे क्याँ होता हैं। मे अपनी बेटी केँ संगयह सभी केसेकर पाऊंगा।
बापू:मा तूँ जोँ बोलरही हैं वोँ बातमै समझरहा हु। पऱ मे यह केसेकर सकताहु। अपनी हि बेटी केँ संग। नाँ नाँ, यहगलत होगा माँ। विवाह केँ बाद तूँ जानती हैं न् पति अपने पत्नि केँ संग क्याँ करता हैं। तूँ कहती हैं कि मे अपनी हि बेटी केँ संग सुहागरात मनाऊं। यह मेरे सें नहि हौ पाएगा।
दादीमा: बेटा तूँ भूलजा कि वोँ तेरी बेटी हैं औऱ तुँ उसका बाप। वोँ एक् लड़की हैं औऱ तुँ एक् मर्द। तेरी बेटी प्रज्ञा कों एक् मम्मी कि जरूरत हैं औऱ उसेअगर उसकी दिदी हि माँ केँ रूप मे मिलजाए तौ उसकेलिए यह कितने भाग्य कि बात होगी। प्राची कों वोँ अपने जिज्ञासा पूरा करने कां मौकामिल जाएगा। वोँ तेरेहर अरमान पूरे करेगी। मै जानती हु कि सुहागरात मे क्याँ करना होता हैं। ओर तुँ उसकेसंग करेगा भि वही। इसीलिए तौ तेरी विवाह करवारही हुमै, कि तूँ यौनसुख सें वंचित नं रहेआगे कि जीवन मे। ऊपर सें यादकर कि बहु नें जाते जाते क्याँ कहा थां। उसनेकहा थां कि प्राची पिताजी कां ख्याल रखना, ओर अपने छोटी बेहन केँ लिएआज सें तूही उसकी माँ हैं। उसकी शायदयही ख़्वाहिश होगी कि उसका पति खुशरहे, उसकी बेटी खुशरहे। उसका परिवार खुशहाल रहे। औऱ मे भि वही चाहती हु बेटा। मेरीबात मान लेँ। इसघऱ कों टूटने सें बचा लें। अपनी बेटी कों अपना लें
बापू:मा आपकी बाते एक् मिनट केँ लिएमै मान भि गय़ा तौ प्राची कों यहबात केँ लिए केसे मनाओगे। क्याँ वोँ अपने हि बाप सें विवाह करने कों सजधजकर होगी।
दादीमा : वोँ तुँ मुझ पे छोड़दे बेटा। वोँ तेरा सामान देख चुकी हैं। उसकेदिल मे अरमान जग चुकी हैं। वोँ मान जाएगी। मुझ पे भरोसा रख।
पिताजी शर्माते हुए : ठीक हैं मा। आप् अगर उससे राज़ी नहि करपाई तोँ यहबात यही समाप्त कर देना।
दादीमा : ठीक हैं बेटा। मै अपने बेटे केँ लिएइस घऱ मे शहनाई बजावा केँ हि मानूंगी।
दादीमा नें ठान लिया थां कि वोँ पिताजी औऱ बेटी कां मिलन करवा केँ हि मानेगी।
Beti Bani Sahara – New Episode
Please keep commenting, aur kahani के baare mai bataye की kaisi lg rhi h। Apke comments से hi aage likhne kaa motivation milega। Agar apko kahani पसंद nahii aayegi too likhne kaa कोई fayda nahii। Issliye yeh jaruri h की app apne vichar sajha kre.
Thank you। Update will come regularly going forward।
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Update: 7
दादीमा नें प्राची सें बात करने कां मनबना लिया थां। अगली सुभह बापू अपनेकाम पे निकल चुके थें। दादीमा नें मौका देखा औऱ दोनों बहनों केँ रूम मे जा केँ प्राची कों बोला : प्राची बेटा, जरा मेरेरूम मे आनां, कुछ बात करनी हैं।
प्राची : जी दादीमा अबआई।
प्राची ओर प्रज्ञा दोनों बहनेसंग बैठे पढ़ाई होँ कररही थि।
प्राची दादीमा केँ पीछे पीछे उनकेरूम मे पहुंच जाती हैं।
दादीमा : आँ बेटा, इधरबैठ।
दादीमा नें प्राची कों अपनेबगल मे बेड पे बिठा दिया।
प्राची : हां दादीमा बोलिए क्याँ बात करना थां आपको।
दादीमा: बाबू, उस दिन जौ तुम् पिताजी कों रात मे करते देखी थि नां उसी बारे मे।
प्राची दादीमा कों जिज्ञासा भरी नजरों सें देखने लगी:जी दादीमा बताइए नां।
दादीमा: बेटी, उसदिन जोँ बापूकर रहे थें नाँ वोँ एक् मर्दतब करता हैं जब उसके लाइफ मे कोई स्त्री नहि होती। उसके कारण क्याँ होता हैं पता हैं।
प्राची : क्याँ होता हैं दादीमा?
दादीमा : उसके कारण एक् मर्द कमजोर होँ जाता हैं। अगररोज उसतरह हिलाने कि आदत तेरे पिताजी कों लग गई तौ यह अच्छी बात नहि होगी। उसका जिस्म खराब हौ जाएगा औऱ वोँ जल्द बीमार भि पर्र सकता हैं।
प्राची घबराना गई: अरे दादीमा, इसकाकुछ तौ उपाय होगा।
दादीमा: हां मेरी बच्ची, इसका उपाय एक् हि हैं, तेरे बापू कों एक् स्त्री कि जरूरत हैं। एक् महिला कां गुप्तांग हि तेरे बापू कों राहतदे सकता हैं।
प्राची : दादीमा गुप्तांग कां मतलब मेरी इससे हैं क्याँ( अपनेचुत कि तरफ इशारा करतेहुए बोलीं)।
दादीमा: हां बेटी ठीक समझी। तेरे पिताजी कों उसकी कि जरूरत हैं।
प्राची : पर्र दादीमा, बापू नें तोँ विवाह करने सें हौ माना किया हैं। फिन केसे मिलेगा उनको।
दादीमा: पिताजी नें तुम् लोगों केँ कारण हि मना किया हैं पागल। वोँ तुमलोगो कों खुश देखने केँ लिए विवाह नहि कररहा, वोँ बाहरी किसी महिला कों नहि ल सकता, पता नहि वोँ तुम् दोनों बहनों केँ संग क्याँ सलूककरे। इसलिये मैने एक् विचार किया हैं।
प्राची : हां दादीमा कहो नां।
दादीमा : तेरीओर पिताजी कि विवाह करने कां फैसला लिया हैं मैने बेटा। मे अपने बेटे केँ लिए तेरेहाथ मांगती हु।
प्राची : दादीमा यह आप् क्याँ कहरही हैं, बापू औऱ मेरी विवाह? बापू मुझे विवाह केसेकर सकते हैं? मे तोँ इनको बच्ची हु?
दादीमा : हां बाबू बच्ची तौ होँ हि अब उसकी संगनी बन जाओगी। प्रज्ञा कि सोच, उसको माँ कि जरूरत हैं बेटा। पिताजी कि सोच उसको एक् पत्नि कि जरूरत हैं। मुझे भि तौ एक् प्यारी सि बहु कि जरूरत हैं नं बेटी।
प्राची: पऱ दादीमा यह केसे होगा, बापू नहि मानेंगे, मै माँ कों धोखा केसेदे सकतीहु। मा पिताजी कि पत्नि थि नां।
दिदी : मा भि तौ तेरीयही चाहती थि बेटी कि तुँ प्रज्ञा कों मम्मी कां प्रेम दे, चाहती थि याँ नहि?
प्राची : हां दादीमा, मा नें यही बोला थां।
दादीमा: वोँ जानती थि कि अब उसकारोल तुम्हे निभाना हैं इसघऱ मे। प्रज्ञा कां देखभाल तेरी जिम्मेदारी हैं। पिताजी कां देखभाल भि तुम्हारी तरफ हि करना जोँ। घऱ तुझेही संभालना हैं बेटा। पिताजी कों पत्नि सुख भि देना हैं तुम्हें।
प्राची बहोत शर्मा गई। उसे यकीन हि नहि होँ रहा थां कि दादीमा उससेकभी यह करने बोलेगी।
प्राची : पऱ दादीमा बापू क्याँ सोचेंगे। मैने तौ कही सुना भि नहि हैं कि एक् बाप ओर बेटी, पति औऱ पत्नि बने हैं।
दादीमा: बापू कि टेंशन मत लें बेटी, वोँ मान गय़ा हैं। उसे तुँ मनपसंद हैं। तेरीहां कि जरूरत हैं।
प्राची अब पूरीलाल होँ गई थि। मन मे सोचने लगी, क्याँ सच मे पिताजी कों मै मनपसंद हु। बाप रेयहसभी मेरेसंग क्याँ होँ रहा हैं। मे अपने कि बापू केँ संग विवाह कर लूंगी। बापू क्याँ मेरे उसमें अपना लौराडाल केँ अंदर-बाहर् करेंगे। दादीमा यह क्याँ करवारही हैं मुझ सें।
प्राची : पर्र दादीमा मे तोँ अभि छोटीहु। ऊपर सें कॉलेज भि ख़त्म नहि हुआ हैं। अभि विवाह केसेकर पाऊंगी, केसे निभा पाऊंगी।
दादीमा: बेटा लड़कियां 16 कि उमर सें हि इस लायक हौ जाती हैं कि अगर उनके बच्चेदानी मे बीज गय़ा मर्द कां तौ बच्चा धारणकर सकती हैं, उस हिसाब सें तुँ एक् लायक पत्नि बन सकती हौ। तेरे मासिक भि आते होंगे ? औऱ अब तोँ तूँ हि वोँ 19 कि गई हैं।
प्राची : हां दादीमा आते हैं।
दादीमा : तौ हौ गई बात, पढ़ाई तोँ जारीरख सकती हैं। बाहर् किसी कों भि हम् नहि बताएंगे कि घऱ मे कोई विवाह भि हुइ हैं। समाज कां कोई इन्वॉलमेंट भि नहि होगाइस विवाह मे औऱ विवाह प्राइवेट होगा। प्रज्ञा कों भि मै समझा लूंगी। तुँ अपने बापू कां संग देना खाली।
प्राची केँ पासअब कोई मार्ग नहि बचा थां। पिताजी कों भि वोँ इस हालत मे नहि देख सकती थि।
प्राची : दादीमा वोँ सभी तोँ ठीक हैं। मगर तुम् कहरही होँ बापू विवाह केँ बाद मेरे उसमें अपना लिंग डालेंगे, मगर दादीमा मेरा योनि तोँ बहोत छोटा हैं अभि। मै केसेकर पाऊंगी?
दादीमा हंसने लगी, अरेबेट उसकी टेंशन तुँ मत लेँ। सभी हौ जाता हैं। तेरे पिताजी सभीकर लेंगे आहिस्ता, तुझेही तोँ बस पिताजी कां संग देना पड़ेगा।
दादीमा मन हि मन प्राची केँ नादानी पर्र मुस्कुरा रही थि कि वोँ इतनीखुल केँ यहसभी बाते अपनी दादीमा सें कररही थि।
प्राची: ओके दादीमा, जैसा आपकोओर बापू कों ठीकलगे।
दादीमा कां प्लान कामयाब हुआ। अब बापूओर बेटी दोनों विवाह केँ लिए राज़ी थें।
उधर प्राची केँ दिल मे आगलगी थि, ओहयह क्याँ सभी हौ रहा हैं मेरेसंग। दादीमा नें तोँ मुझे फंसा दिया पिताजी केँ संग मेरी विवाह। मुझेअब मां कि तरह पिताजी केँ संग उनकेरूम मे रहना पड़ेगा। वोँ मेरेसंग, बाप रे, वोँ तौ मेरेसंग चूदाई भि करेंगे। मे केसे लें पाउंगी ?दादीमा तोँ इतना आसानी सें कहरही थि, मगर बापू कां तोँ मैंने देखा हैं नां, बहोत हि बड़ा थां। नहि नहि, केसेझेल पाऊंगी मे?
इधर बापू कां हाल भि अजीब थां। अपनी बेटी केँ संग हि सुहागरात मै केसेमना पाऊंगा। मा नें तौ हदकर दि हैं। मगर सोचे तोँ कह भि सहीरही हैं। प्रज्ञा कों मम्मी तौ चाहिए हि। प्राची तोँ 19 साल कि हैं। मे ठहरा 40 साल कां। मेरा वोँ सह पाएगी क्याँ? मै अपने बेटी कां हि सील केसे तोड़ पाऊंगा? वोँ रोनेलगी तौ? उसको मेरे बच्चे कि मम्मी भि तौ बनाना पऱ जायेगा विवाह केँ बाद?यह केसे होगा कि एक् बाप अपने हि बेटी केँ कोख मे अपनाबीज गिराए औऱ उसको प्रेगनेंट करदे? विवाह कां मतलब मुझेयह कारण होगा।
पिताजी कां रोमरोम खिलउठा इन ख्यालों कों सोचकर। वोँ दिल सें अब विवाह कां ख़्वाब देखने लगे। बाप ओर बेटी कां मिलन होनातय हौ गय़ा थां।
दादीमा नें अगले हि दिन, एक् दूर केँ मन्दिर केँ पंडित सें दिनतय करवाने केँ लिए निकल पड़ी।
मंदिर पहुंच कर दादीमा नें पण्डित सें एक् शुभ सां दिनतय करवा लिया। बस पंडित कों यह नहि पता थां कि जिसका उसने विवाह कां मुहुर्त देखा हैं वोँ बाप ओर बेटी हैं।
विवाह 3 दिनबाद हि थां।
Beti Bani Sahara - Next part miss mat karna
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