Beti Bani Sahara – New Episode
Update 8:
घऱ मे माहौल अबकुछ बदल गय़ा थां। रात कों खाने केँ टेबल पे सभी बैठे थें। दादीमा नें अब परिवार मे सबको बताने कां फैसला लिया कि घऱ मे एक् विवाह बस 2 दिनबाद हि होने वाली हैं। प्राची, प्रज्ञा औऱ बापूसभी बैठे थें।
दादीमा : खानां कैसाबना हैं।
सबनेकहा कि अच्छा बना हैं।
दादीमा नें बोला : प्रज्ञा, मै एक् बात तुम्हे बताना चाहती हु मेरी बच्ची।
प्रज्ञा : जी दादीमा कहिए।
दादीमा : प्रज्ञा, तुम्हे याद हैं मम्मी नें क्याँ कहा थां तुम्हे जब वोँ आखरीबार बात कि थि तुमसे।
प्रज्ञा : हम्ममम, दादीमा मुझेजब याद हैं। मुझे माँ नें कहा थां कि कोई ज़्यादा शरारत मत करना। घऱ मे हमेशा दिदी कि बात मानना ओर आपको वोँ बात मानना।
दादीमा : औऱ क्याँ कहा थां प्राची केँ बारे मे।
प्रज्ञा : दादीमा, शायदकहा थां कि अपने दिदी कों आज सें मम्मी कि तरह मानना वोँ तेरी माँ कि तरह देखभाल करेगी, सारेसुख औऱ दुखइसी कों बताना।
दादीमा: फिन क्याँ तुँ सच मे माँ कि बात मानती हैं।
प्रज्ञा : हां दादीमा प्राची दिदी मेरी मम्मी जैसी हि हैं। वोँ मेरा ख्याल रखती हैं बहोत।
पिताजी यहसभी बातेसुन रहे थें औऱ प्राची अब शर्माने लगीवही बैठे-बैठे।
दादीमा: ठीक हैं बेटा। अगर तुँ प्राची कों अपना मम्मी मान हि चुकी हैं तौ तेरेलिए एक् खुशखबरी हैं बेटा। तेरी दिदी अबसच मे तेरी मम्मी बनने वाली हैं।
प्रज्ञा : क्याँ दादीमा, मैकुछ समझी नहि?
दादीमा: हां बेटी, बापू कि विवाह प्राची सें होने कां फैसला हुआ हैं। घऱ केँ लिएयह बहोत जरूरी हैं बेटा। बापू कों वोँ तेरी माँ कि बहोत कमी महसूस होँ रही थि।
प्रज्ञा नादान थि, उसेबस विवाह कोई गुड्डे ओर गुड़िया कि खेल जैसीलग रही थि, उसनेकहा: क्याँ दादीमा, सच मे दिदी पिताजी कि दुल्हन बनेगी। औऱ मेरी रियल माँ भि। वाउ।
दादीमा : हां बेटी, बापू कों जरूरत हैं मां कि।
प्रज्ञा अब विवाह कां असली मतलब नहि जानती थि। उससेलगा बस दुल्हन बनाना औऱ पिताजी कां हर ध्यान रखना, उनको खानां देना, उनकेनाम कां सिंदूर लगाना उसी कों विवाह कहते हैं। उसेयह पता नहि थां कि विवाह केँ बाद एक् पति अपने पत्नि कों चोदता हैं। वोँ ठहरी 18 साल कि कच्ची काली, उसे चूदाई केँ बारे मे कुछव नहि पता थां, उससेयह वोँ नहि पता थां कि विवाह केँ बात पिताजी उसके दिदी कां सील तोड़ेंगे।
प्रज्ञा : वाउ दादीमा, यहसही होँ गय़ा, दिदी मेरी माँ बन जाएगी तौ बेस्ट रहेगा। मे बहोत प्रेम करतीहू दिदी सें।
दादीमा : ठीक हैं बेटी, आज सें दिदी कों मां हि बुलाना।
बापू केँ जान मे जानआई, वोँ बहोत घबराए हुए थें कि प्रज्ञा इस विवाह कों केसे अपनाएगी। मगर वोँ तौ नादान निकली।
प्राची भि लज्जा केँ मारे पानी पानी हौ गई थि।
बापू कि नजरअब प्राची कों एक् अलगनजर सें देखरही थि। पिताजी खाते वक्त, प्राची कों देखरहे थें। औऱ सोचरहे थें: वाउ क्याँ माल होँ गई हैं मेरी बेटी। मेरी विवाह होने वाली हैं इससे, सोच केँ हि मे बेकाबू हौ रहाहु। प्राची केँ सीने कि तरफअब पिताजी कि नजर गई उनकामन गदगद होँ गय़ा।
वाउ क्याँ कमाल कि जवानी आई हैं मेरी बेटी पे। जरा इसके उभार तोँ देखो, संतरे जैसे छोटे छोटे। मुझे इनपर बहोत काम करना होगा। जल्द हि मे इनको चूसूंगा ओरदबा दबा केँ बड़ा करूंगा। हायराम क्याँ समा होगा वोँ। इसकेओंठ तोँ देखो। पंखुड़ी सि कों गुलाब कि। रस पीने मे कितना मज़ा आएगा। बुर भि कितनी प्यारी होगी मेरी बेटी केँ। मै कितना क़िस्मत वालाहु। ऐसी अधेड़ उम्र मे एक् कच्ची काली कों भागूंगा। मम्मी नें तौ मेरी लाइफबना दि। प्राची कों मै अच्छे सें काली सें फूल बनाऊंगा।
बापू एक् टक सें प्राची कों देखेजा रहे थें यह दादीमा नें भाप लिया। दादीमा नें बोला: बेटा ऐसे क्याँ देखरहा हैं। बसकुछ दिनसबर करमिल जाएगी।
प्राची कां ध्यान वोँ मेरीतरफ आँ गय़ा औऱ मे पकड़ा गय़ा औऱ थोडा झेप गय़ा।
उधर प्राची कि धड़कन तेज होँ गई। अरे, क्याँ बापू मुझे ताड़रहे थें ? दादीमा नें ऐसा क्यूं बोला। जरूर वोँ देखरहे होंगे। बाप रे बापू मुझेऐसे क्यूं देखरहे थें। कही वोँ मेरेसंग सुहागरात कि बाते तोँ नहि सोचरहे थें। मेरे स्तानो कों ताड़रहे थें। बाप रे बापू केँ इरादे बिल्कुल नेक नहि लगरहे थें।
पिताजी औऱ बेटी दोनों शर्मा रहे थें। खानां केँ बाद प्रज्ञा अपनेरूम मे जा चुकी थि।
दादीमा नें बापू सें बोला : बेटा, मैने तौ तुम् दोनों सें बात कि थि विवाह केँ लिएमगर तुम् दोनों एक् दूसरे सें बात नहि करपाए इस मामले पे। तोँ तुम् लोग थोडा बातकर लो, ऐसा नाँ होँ कि विवाह बिना किसी केँ रजामंदी केँ हौ जाए।
दादीमा चाहती थि कि बाप बेटी डायरेक्ट हि सुहाग कि सेज पे एक् दूसरे सें इस बारे मे बात न् करे, थोडा पहले हि इस बारे मे बातकर केँ कंफर्टेबल होँ जाए।
दादीमा अपने कमरे मे हुईँ। औऱ अबहॉल मे सोफे पे बाप बेटी बैठे थें।
पिताजी: बेटी, मुझे तूँ कोई बुरा आदमीमत मानना। यहमा कां हि सुझाव थां कि तुम्हें मेरी पत्नि बना दि जाए।
तुम्हारे मन मे हजारों प्रश्न होंगे कि बापू क्यूं मेरेसंग ऐसाकर रहे हैं। पऱ दादीमा कां कहना वोँ ठीक हैं बेटी, प्रज्ञा कों एक् मम्मी कि जरूरत हैं। यह जरूरी हैं, इसलिये मे वोँ मानाहु।
प्राची : बापू, आप् इसघऱ मे मालिक हैं। मां केँ जाने केँ बात आप् हि मेरे सबकुछ हैं। दादीमा नें जबयह बोला कि, मुझे अपने हि माँ कां, स्थान लेना होगाइस घऱ मे, औऱ आपकेदिल मे, तोँ मे घबरा तोँ जरूर गई थि मगर सोचने केँ बादयह सहीलग रहा हैं कि प्रज्ञा केँ खातिर, आपके खातिर, मुझेयह विवाह मंजूर हैं बापू। मेराओर कोई प्रश्न नहि हैं आपसे, आप् नें जौ सोचा हैं अच्छा हि सोचा होगा मेरेलिए।
इतनाबोल केँ प्राची, शर्मा केँ अपने कमरे मे भाग गई।
पिताजी कों अब प्राची कां ग्रीन सिग्नल मिल चुका थां। वोँ पिताजी कि परीओर पत्नि दोनों बनाने कों सजधजकर थि।
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Update 9:
अगलेदिन अब संयोजित तरीके सें होनेलगा, दादीमा नें दोनों बहनों केँ लिए मार्केटिंग कां सोचा विवाह केँ लिए। विवाह तौ मंदिर मे होनातय हुआ थां औऱ अधिक धूमधाम औऱ गेस्ट भि नहि बुलाए गए थें क्योंकि अभि केँ लिएयह विवाह गुप्त हि रखा जानां तयहुआ थां समाज सें। दादीमा नें बापू सें बोला: बेटा, दोनों बहनों कों थोडा विवाह कां शापिंग करना हैं चल मेरेसंग।
पिताजी: ओके माँ, मगर मे जा केँ क्याँ करूंगा आप् हि चले जाइए दोनों कों लेके, मे पैसेदे देताहु।
दादीमा नें बोला:ठीक हैं जैसी तेरी मर्जी।
दादीमा, प्राची ओर प्रज्ञा चल दि।
दादीमा नें सबसे पहले एक् कपड़े कि दुकान मे गई ओर प्राची केँ लिए एक् लाल विवाह कां जोड़ा लिया। लहंगा बहोत खूबसूरत थां। प्रज्ञा केँ लिए भि नया कपड़ा लिया गय़ा। आखिर उसकी दिदी कि विवाह थि। दादीमा नें कुछ अंडरगार्मेंट भि लेने कों कहा दोनों बहनों सें। दादीमा : प्राची कुछनया सां पैंटी ओर ब्रा लेना, यह बहोत जरूरी हैं कि वोँ तेरे पिताजी केँ मन कों भाए।
प्राची : जी दादीमा मम्मी।
प्रज्ञा अबवी नादान थि : दादीमा, यह तोँ दिदी पहनेगी नं फिन बापू केँ मन कों क्यूं भाना चाहिए ?
प्राची शर्मा गई। दादीमा नें प्रज्ञा कों समझाया : अरे बेटी, पिताजी कि दुल्हन कों तौ खूबसूरत दिखना चाहिए नाँ। अंदर सें अगर पुराने कपड़े पहनेगी ओरऊपर सें नए तोँ कैसा लगेगा प्राची कों।
प्रज्ञा : अरे दादीमा, फिन तोँ मुझे वोँ नए ब्रा औऱ पैंटी चाहिए।
दादीमा : हाहा, ठीक हैं बाबा, पर्र अब तुँ ब्रा पहनती कहां हैं? अब तोँ तेरे बूब्ज़ कितने छोटे हैं बेटा। इनको ब्रा कि जरूरत नहि।
प्रज्ञा 18 साल कि काली थि बिल्कुल, उसका मम्मों बसअब थोडा बढ़ाना शुरुआत हुआ थां। वोँ अब टीनएजर हि थि औऱ पैंटी वोँ फुल वाला पहनती थि।
प्रज्ञा : दादीमा, नहि मै वोँ लूंगी। मेरेदूध अब बारे हौ रहे हैं दादीमा, कभीकभी अनकंफर्टेबल हौ जाते हैं।
प्राची : अरे पागल तुँ अब सें क्यूं पहना चाहती हैं ब्रा, एक् बार ब्राउसे करने लगेगी फिन तेरी उससेउतर केँ फेकने कां मन करेगा इतनाकस जाते हैं यह।
दादीमा: हां बेटी दिदी केँ बड़े होँ चुके हैं इसलिये बहाती हैं नं दिदी ब्रा।
प्रज्ञा नां मानीओर दादीमा कों लास्ट मे उसकेलिए वी ब्रा लेना पड़ा।
प्राची कां ब्रा कां साइज२८ हि थां। उसकेवी एवी बहोत बड़े नहि हुए थें। वोँ भि तोँ 19 साल कि कच्ची काली हि थि नां।
फिन दादीमा नें दोनों कों ब्यूटीपार्लर लें गई। दोनों बहने पहलीबार ब्यूटी पार्लर मे गई थि तौ बारीखुश हुईँ। दादीमा नें ब्यूटी पार्लर वाली कों कई निर्देश दिए औऱ उनके अनुसार हि ब्यूटी पार्लर वाली नें दोनों कां मेकअप किया। दोनों कां इसलिये कि अगर दादीमा केवल प्राची कां हि मेकअप करवा देती तौ प्रज्ञा तूफान खड़ाकर देती कि उसका मैकअप क्यूं नहि कराया दादीमा नें जब उसके दिदी कां विवाह हैं फिन।
फेशियल औऱ मेकअप करीब-करीब 3 घंटेचल औऱ प्राची बला कि सुंदर लगनेलगी। वहां बैठी केँ स्त्री नें बोला। वो कितनी प्यारी लगरही हैं यह लड़की, बिल्कुल अलिया भट्ट जैसी। प्रज्ञा नें उसके मुंह पे बोला:ओर आंटीमै कैसीलग रहीहु।
वोँ औरत : अरे छुटकी, तुम् तौ एक् दम अनन्या पांडे जैसी।
वहां बैठेअब खिलखिला केँ हसदिए।
अब विवाह कि सारी औऱ वोँ सामान खरीदा गय़ा। बापू कां शेरवानी वोँ खरीदा गय़ा थां औऱ इसे प्रज्ञा नें पसन्द किया थां।
साम होते होते वोँ घऱ आँ चुकी थि। अब प्राची वीखुश थि पऱ अभि वी उसकेमन मे पहलीरात कों लेके बहुत प्रश्न थें। उसने सोचा कि दादीमा सें वोँ थोडा उस बारे मे ओरबात करेगी। वोँ बापू कां पूरा ध्यान रखना चाहती थि। ओर उनको पूरा सन्तुष्ट करना चाहती थि, पऱ उसकोअब तक सेक्स कां कोई अनुभव हि नहि थां। वोँ बहोत जिज्ञासु थि सभीकुछ जानने केँ लिए।
उसनेसाम कों प्रज्ञा कों अपने कमरे मे पढ़ने केँ लिएभेज दिया औऱ दादीमा सें बात करने कां सोचा।
दादीमा थोडा थकान महसूस कररही थि इसलिये अपने कमरे मे लेटी थि।
प्राची : दादीमा।
दादीमा : हां बेटी आओ।
प्राची: दादीमा आपसेकुछ बात करनी थि।
दादीमा: बोल नां बेटी। एक् माँ कों विवाह सें पहले अपने बेटी कों बहोत कुछ समझाना होता हैं। पर्र तेरी माँ नहि रही तोँ मे समझ सकतीहु तुँ किस बारे मे बात करना चाहती हैं।
प्राची : दादीमा नें बापू कों खुश तोँ कर पाऊंगी नाँ।
दादीमा : क्यूं नहि कर पाएगी मेरी बच्ची, बिल्कुल कर पाएगी।
प्राची : पऱ दादीमा पहले मैनेकभी वोँ किया नहि हैं नाँ।
दादीमा मुस्कुराते हुए : क्याँ नहि किया हैं मेरी बाबू।
प्राची शर्माते हुए: दादीमा वोँ स.स.सेक्स।
दादीमा : हम्ममम, तौ यह तेरी तकलीफ़ हैं।
दादीमा कों समझ मे आँ गय़ा कि एक् बार प्राची कों अबकुछ बताना जरूरी हैं।
दादीमा : सुन बेटी, विवाह तोँ तेरी मे करवारही हु। पर्र आगे पिताजी कि खुशी तेरेहाथ मे हैं। सुहागरात मे घबराना मत। पिताजी कों सबकुछ करने देना जौ वोँ करेंगे। पिताजी कों भि पता हैं कि तूँ एक् कच्ची काली हैं वोँ तुम को अपनेजान सें वोँ अधिक प्रेम देगा। मर्दों कों कच्ची काली लड़कियां बहोत पसन्द होती हैं। उनकाबस चले तोँ हमेशा एक् कुंवारी लड़की केँ संग हि सेक्स करे।
प्राची : ऐसा क्यूं दादीमा।
दादीमा : ऐसा इसलिये बेटा क्योंकि पुरानी महिला कां योनि ढीली हौ जाती हैं, तेरे जैसी१७ साल कि जवानी कि योनि एकदम टाइट होती हैं। ओर टाइट योनि मे मर्दों कों सबसे आनंदआता हैं।
प्राची : पर्र दादीमा मुझेडर लगरहा हैं। बापू कां बहोत बड़ा हैं, मे केसे लें पाऊंगी अपने उसमें। मेरी तोँ अब बहोत छोटी सि हैं वहां कां छेद।
दादीमा: टेंशन मत केँ बेटी, हर लड़की कां योनिऐसे कि सीलपैक होती हैं जैसे तेरी होगी।
प्राची : सीलपैक मतलब ?
दादीमा: सीलपैक मतलब, बुर कि मुहाने पे लगी छिली। पहलीरात कों अब पिताजी तेरी चूदाई करेंगे तोँ पहले उनको तेरे बुर कां मुंह खोलना पड़ेगा, उसी कों सील तोड़ना कहते हैं। उसकेबाद तेरी योनि मे बापू कां लौड़ा अच्छे सें अंदर जाएगा बेटी।
प्राची शर्मा केँ लाल होँ चुकी थि दादीमा नें उसेआज सारी बातेखुल केँ बताई थि।
प्राची : दादीमा बहोत दर्द होगा क्याँ।
दादीमा जानती थि कि जब एक् 40 साल कां मोटा लंड एक् 19 साल कि लड़की केँ बुर मे पहलीबार जाएगा तोँ उसे कितना दर्द होगा। मगर दादीमा प्राची कों डरना नहि चाहती थि इसलिये उससेकहा : नहि बेटा एक् बार थोडा दर्द हि होगा, एक् बार पिताजी तेरी योनि पे प्रवेश करगए तोँ कुछ दर्द नहि होगा। तेरी तोँ आनंद आएगा।
प्राची अपनेमन कि सारी आशंकाएं दादीमा सें दूर करतीरही ओर दादीमा अबकुछ बताती रही। दादीमा नें अंत मे कहा: बेटी एक् बात औऱ, पिताजी कों उनकाबीज अपने बच्चेदानी मे गिरने देनामै जाने सें पहलेइस घऱ मे किलकारियां गूंजते हुए देख्ना चाहती हु।
प्राची कों इतना तोँ पता हि थां कि दादीमा किसबीज कि बातकर दि थि औऱ दादीमा उसे पिताजी सें प्रेगनेंट होने कों बोलरही थि।
उसने दादीमा कों बोला : जी दादीमा। जैसी आपकी मर्जी।
ओर इतनाबोल केँ वहां सें लाल होके शर्माते हुएभाग गई।
औऱ अपने कमरे मे आँ केँ सोचने लगी, बाप रे, पिताजी मेरेसंग यहसभी करेंगे ? मै तोँ लज्जा सें पानी पानी हौ जाऊंगी ? बापू केँ सामने नग्गी केसे हौ पाऊंगी। बापू कां मोटा लौड़ा केसे लेँ पाऊंगी? उनकोखुश कर पाऊंगी नाँ?
अगले हि दिनलगन कि बेलाआने वाली थि। ओरयहअब सवालों केँ जवाब प्राची कों मिलने वाली थि।
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Update:10
रातआज लंबी लगनेलगी थि प्राची कों। उधर उसके पिताजी भि सोच मे डूबे थें। उनको सुहागरात कां सोच केँ हि टेंशन हौ रहा थां। उनका लौड़ा बेचैन सां थां औऱ जब सें अपने बेटी साथ विवाह कि बातचली थि तब सें, विवाह केँ बाद कां दृश्य सोचकर हि टाइट होँ जाता थां। बापूमन मे : अहह, मेरी बेटी कि ख्याल अब मे रखूंगा। पता हैं मुझे कि अभि वोँ थोड़ी छोटी हैं मगर उसकोकोई भि तकलीफ नहि दूंगा। मेरी बेटी एकदम कुंवारी कच्ची काली हैं। उसको मे कच्ची काली सें पूरा खिलाहुआ फूलबना दूंगा। हायराम उसकी योनि कितनी टाइट होगी? उसका पहलीबार ठुकाई मै, उसका बापू, हि करेगा।
पिताजी अपना लण्ङ कों रगड़ने लगे थें। उनकोअब अपने बेटी कि बुर पऱ थाप मारना थां। उसकासील तोड़ने कां एक्साइटमेंट हि अलग थां। पिताजी भि कभी ड्रीम्स नें वोँ अपने बेटी कि सील तोड़ने कां नहि सोचा थां। आजयह होँ रहा थां।
पिताजी सें रहा नहि गय़ा। उन्होंने मुठ मारना चालूकर दिया। पिताजी प्राची केँ जिस्म केँ बारेसोच करमुठ मारते रहे औऱ करीब-करीब 30मिनट केँ बादझर गए। पिताजी झरने केँ बादमन मे थोडा शांति महसूस कररहे थें। उन्होंने मन मे अपने पहली पत्नि सें बोला : मुझेमाफ कर देना, मै तुम्हारा जगह तुम्हारी बेटी कों देनेजा रहाहु। आज सें यहखाट उसकेसंग रात कों गर्म होगा। मै बुरा इन्सान नहि हु, बस परिस्थितियों नें मुझेइस दहलीज पे ला केँ खड़ाकर दिया हैं।
आज वोँ दिन आँ गय़ा थां, जब एक् बेटी कां अपने हि बाप सें मिलन होने वाला थां। विवाह कां दिन थां आज। दादीमा नें सारी तैयारी केँ लिया थां। प्राची ओर प्रज्ञा भि सजधजकर थि। पिताजी भि बहोत एक्साइटेड थें। बापू नें कार निकाली औऱ अबलोग विवाह वाले मंदिर केँ लिए निकलगए।
Beti Bani Sahara - Aage kya hua? Next part padhiye
shukriya.asha Katra ho kee story pasand aa rhi h. Jarur bataiyega kee aap sb ko sabse acha kya lg rah h. me kosis karunga suhagraat Shaandaar hu.
Bro ek no. Lokh rahe hu bhay aur sabse baadi baat kee update a rahe hain bus ayese hi aate rahe update baaki kahani' ek no. hain
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