Beti Bani Sahara – New Episode
Update:11
विवाह कि तैयारी होनेलगी थि, वहां पहुंच केँ पिताजी नें एक् रूम लिया ताकिअब सजधजकर हौ पाए, 11 बजे विवाह कां मुहूर्त थां। दादीमा नें प्राची कों सजधजकर करने कां जिम्मा लेँ लिया थां। प्रज्ञा भि अपना तैयारी मे लगी थि। दादीमा प्राची केँ रूम मे गई ओर उससे विवाह कां जोड़ा पहनने कों बोला। प्राची नहाधो केँ सजधजकर होना स्टार्ट कर दि। दादीमा नें उसे अपने सामने हि सभीकुछ पहनने कों बोला, उससे दादीमा केँ सामने कपड़े पहनने मे लज्जा आँ रही थि, पर्र दादीमा नें बोलामै, तुम् सभीकुछ सही सें पहनो, वोँ सुनिश्चित करना चाहती हु। दादीमा नें प्राची कों बोला : मुझ सें क्याँ शर्मा रही हौ बच्ची मैने तौ बचपन सें तुम्हारी तरफपला हैं। चल मुझे कपड़े पहनाने दे। उतारयह तौलिया।
प्राची नहा केँ आई थि औऱ बस एक् तौलिया लपेटे हुईँ थि।
प्राची नें नाँ चाहते हुए वोँ दादीमा केँ सामने अपनी तौलिया उतार दिया औऱ उसका मखमली शरीर दादीमा केँ सामने खुल गय़ा।
अब वोँ नंगी खड़ी थि। दादीमा उसके जिस्म कां अवलोकन कररही थि।
दादीमा केँ मुंह पे एक् मुस्कान आँ गई। प्राची कां रंग गोरा थां एकदम। उसकी नंगी शरीरदमक रहा थां। दादीमा नें उसके चूचे देखे, वोँ विकसित होनेलगे थें।
बहोत अधिक छोटे भि नहि थें प्रज्ञा केँ जैसे। एकदम परफेक्ट थें, इतने बड़े थें कि पिताजी केँ पूरे हथेली मे समाजाए एक् बार मे। उसकीकमर पतली, योनि केँ ऊपर हल्के हल्के रेशमी सें बाल भि उगआए थें। बला कि हुस्न थि। औऱ एक् तौ नईनई जवानी आई थि तोँ बुर देखने मे हि कसाहुआ लगरहा थां। दादीमा प्राची केँ पास गई औऱ बोलीं : बेटी जरा सां इधरबैठ तौ मे जरा देखूं कि तेरी योनि कितनी टाइट हैं।
प्राची लज्जा सें पानी पानी होगी थि : दादीमा रहने दीजिए नं यहसभी।
दादीमा : अरे मुझे एक् बार दिखा तोँ, मै देख्ना चाहती हु तूँ मेरे बेटे कों कितना खुशकर पाएगी। तेरी बुर कितनी टाइट हैं। उसे औऱ तुम्हे सुहागरात केँ क्रिया मे कोई तकलीफ़ तौ नहि होगी।
प्राची नें दादीमा कि बात मानते हुए, पास वाले सोफे पे बैठ गई, दादीमा नें उसेकहा : बेटी थोडा टांगउठा केँ पेर फैला तौ जरा।
प्राची नें वैसा हि किया
औऱ उसकाचुत दादीमा केँ सामने खुल गई थि। दादीमा नें देखा प्राची कि योनि एक् दमबंद थि, चुत केँ ऊपरी हिस्से मे एक् छोटा सां दाना (क्लीटओरर्स) थां। चुतकसी हुईँ थि। ऊपरीचुत कि दीवारें थोड़ी ब्राउन सि थि औऱ अंदर कि दीवार पिंकलग रहा थां। देखने सें हि वर्जिन लगरही थि बेचारी। वोँ पाव रोटी कि तरह फूली हुई थि।
दादीमा कों अपनेऊपर गर्वहुआ कि वोँ अपने बेटे कों इतनी अच्छी लड़की भोगने केँ लिए पसन्द कि हैं। पऱ दादीमा कां मनडर सें भि भर गय़ा कि उसके बेटे कां लिंग़जब इस छोटे छिद्र मे जाएगा तोँ प्राची कों कितना दर्द होगा। वोँ समझ गई थि कि कल कां सुभहउसे प्राची कि देखभाल न् करनी पर्र जाए, वोँ चल भि पाएगी सही सें याँ नहि।
खैरअब यहसभी बातबोल केँ वोँ प्राची कों डरना भि नहि चाहती थि। दादीमा नें अब प्राची कों कपड़े पहनना शुरुआत कर दिया, पहलेलाल कॉलर कि ब्रा औऱ पैंटी। फिन विवाह कां जोड़ा। तब तक उधर बापू भि शेरवानी पहनकर रेडी थें औऱ प्रज्ञा भि सजधजकर होँ केँ बेहन केँ मेकअप केँ लिए उसके कमरे मे चल दि थि। अब थोडा जल्द करना थां। विवाह ११ भि हि थि औऱ अब १०:३० हौ चुका थां। प्राची कां मेकअप प्रज्ञा करनेलगी। मेकअप करते करते उसने दादीमा सें पूछा : दादीमा, आज सें प्राची दि तौ पिताजी केँ संग सोएंगी नाँ?
दादीमा: हां बेटी, जैसे तेरी मां सोती थि।
प्राची कों बहोत लज्जा आँ रहा थां।
प्रज्ञा : दादीमा, मगर प्राची दिदी तोँ मेरेरूम मे भि सो सकती हैं नां।
दादीमा : फिन पिताजी तेरी दिदी केँ संग सुहागरात केसे मनाएंगे।
दादीमा केँ मुंह सें बर्बस हि यह निकल गय़ा। तब दादीमा कों एहसास हुआ कि यह तोँ उससे प्रज्ञा कों नहि कहना चाहिए थां।
प्रज्ञा : हां दादीमा मैने सुना तोँ हैं कि लड़की औऱ लड़का कां जब विवाह होता हैं तोँ पहलीरात कों सुहागरात कहते हैं। पऱ यह होता केसे हैं?
दादीमा : बसकर शैतान तुम्हे अभि हि सभी जानना हैं? टाइमआने पे तुम्हें सभीपता चल जाएगा।
प्रज्ञा : बताओ नं दादीमा प्लीज प्लीज़।
दादीमा समझ गई थि, प्रज्ञा जिसबात कि जिद एक् बारकर देती हैं, औऱ जब तक वोँ बात पूरा नहि होता वोँ शांत नहि बैठ सकती हैं।
दादीमा बुराफंस गई थि। उसेअब बताना हि पड़ता।
दादीमा : बेटी बापू औऱ दिदी सुहागरात मे सेक्स करेंगे।
प्रज्ञा : हांनन्य, सेक्स केसे होता हैं?
दादीमा : बहोत प्रश्न करती हैं बदमाश।
यहसभी सुनसुन केँ प्राची कि तौ हालात खराब होँ जाती हैं। लज्जा सें उसे लगता हैं कि वोँ धरती मे हि समाजाए।
प्रज्ञा : बताओ नं दादीमा प्लीज।
दादीमा: अरे पिताजी अपना नुनु तुम्हारे दिदी कि गुगु नें डालेंगे औऱ अंदर-बाहर् करेंगे।
प्रज्ञा कों लिंग औऱ योनि कां यहीनाम पता थां।
प्रज्ञा : दादीमा तोँ इससे क्याँ होगा ?
दादीमा : तेरे दिदी औऱ बापू दोनों मे प्रेम बढ़ेगा औऱ दोनों कों बहोत ज़्यादा मज़ा आएगा। चलबस केँ आज केँ लिए इतना ज्ञान हि बहुत हैं। दिदी कि विवाह कां मुहूर्त जल्दआने वाला हैं, निकलना भि हैं हमें मंदिर, जल्दचल।
प्रज्ञा केँ अब भि कई प्रश्न थें पऱ दादीमा सहीकह रही थि, वोँ उनसेबाद मे यहसभी पूछ लेगी।
उसने दादीमा सें बोला: दादीमा मुझेयह सभी बताना जरूर, मै आप् सें यहसभी जान केँ रहूंगी।
उसने प्राची कां मेकअप केँ दिया अच्छे सें। प्राची बिलकुल रेडी होँ चुकी थि औऱ हसीनलग रही थि।
वोँ नीचे आँ गई।
पिताजी कां तोँ प्राची कों देख मुंह खुला कां खुलारह गय़ा।
सभीलोग मंदिर पहुंच गए, पंडित जी नें पहले हि सारी तैयारी करवा दि थि, मंडपसजा थां।
पंडित जी नें दोनों कों मण्डप मे बैठने कों बोला औऱ फिन विवाह रस्में शुरुआत हुईँ। पंडित जी नें नोटिस किया कि दुल्हन कि उम्रकम लगरही हैं मगर उनको दादीमा नें बता दिया थां कि वोँ अपनी पोती कि विवाह किसी अमीर व्यक्ति सें कररही हैं जिसका उमर थोडा अधिक हैं। औऱ वैसे भि पंडित जी कों क्याँ, उनको तोँ विवाह करने सें मतलब थां।
वोँ मंत्र पढ़ने लगे।
पंडित जी नें पिताजी कों प्राची केँ मांग मे सिंदूर डालने कों बोला। औऱ दादीमा नें उसकेबाद अपने पोती कां कन्यादान किया। फिन पंडित जी नें दोनों कों फेरे लेने कों बोला। दोनों बाप-बेटी फेरे लेनेलगे, जौ अब पति पत्नि बननेवाले थें।
पंडित जी सारी विधि करतेजा रहे थें, औऱ प्रज्ञा औऱ दादीमा, एक् बाप बेटी कां विवाह देखते जारहे थें।
पंडित जी नें प्राची औऱ बापू दोनों कों ७वजन दिलवाए ओरअंत मे विवाह कंप्लीट हौ गई। साम कां टाइम हौ गय़ा थां।
दादीमा नें पंडित जी कों भोजन कराया औऱ फिन दक्षिणा भि दिया, वहां जौ पंडित केँ चेले चपटी थें, जिन्होंने मण्डप वगैरा सजाया औऱ विवाह कि सारा व्यवस्था किया थां, उन्होंने भि बापू सें नेग लिया। फिनअब लोगघऱ कि ओरचलदिए। रस्ते मे सबने खानां खाया।
घऱ जाते वक्त बापू नें एक् स्थान मार्केट मे कार खड़ीकर दि।
दादीमा नें बोला: क्याँ हुआ बेटे ? ये क्यूं रोका हैं कार?
पिताजी: बस माँ २मिन मे आया।
औऱ बापू एक् मेडिकल शॉप मे चलेगए, दादीमा कों कुछ शंकाहुआ। पिताजी थोड़े देर मे वाहन मे आए औऱ घऱ कि ओरचलदिए।
घऱ पहुंचते हि सारे रिश्ते बदल चुके थें। जबघऱ सें सभीलोग निकले थें, तोँ प्राची ओर पिताजी, एक् बाप बेटी कि तरहगए थें, औऱ जब वापसआए तोँ एक् पति पत्नि कि तरह। प्राची केँ लिए दादीमा सासू माँ बन चुकी थि औऱ बापू केँ लिए, अपनी छोटी बेटी हि साली। रिश्ते बदल केँ रहगए थें।
दादीमा नें प्राची कि घऱ मे आने कि रसम करवाई। उनकाघऱ शहर सें थोडा बाहर् थां औऱ आसपास अधिककोई घऱ भि नहि थां, तौ किसी कों पता भि नहि चला कि इसघऱ मे कोई विवाह भि हुइ हैं।
प्राची कां गृह प्रवेश हौ चुका थां औऱ उसे दादीमा नें उसकेनए ठिकाने मे आया दिया थां, जोँ कि बापू कां रूम थां। दादीमा औऱ प्रज्ञा नें पहले हि चुपके सें यहरूम सजा दिया थां। नए पर्दे, बेड पे फूलों कि लड़ी औऱ बेड पे बिखरे गुलाब कि पंखुड़ी।
प्राची बेड पे बैठ, अब पिताजी केँ आने कां प्रतीक्षा कररही थि। उसकाजी घबरारहा थां कि पिताजी आयेंगे औऱ उसे अपने मूसल सें, उसकी ओखली कि कुटाई करेंगे। आज प्राची केँ किला मे, बापू अपनेतोप सें बहोत गोले बरसाने वाले थें।
दादीमा नें बापू सें बोला: बेटा एक् मिनट मेरीबात सुनजरा।
बापू:जी मम्मी बताइए।
दादीमा: बेटा मैने देखा थां, तूँ वोँ दावा कि दुकान पे गए थें, क्यूं गए थें?
पिताजी: शर्माते हुए, छोड़ो नाँ मा थोड़ी पर्सनल बात हैं।
दादीमा : मै तेरी माँ हु, मैने हि तेरी विवाह, तेरी बेटी सें कराया हैं, मुझेहक हैं यह जानने कां कि चल क्याँ रहा हैं, तूँ बीमार तोँ नहि?
पिताजी: अरे नहि मा।
दादीमा: तौ फिन क्याँ बात हैं?
बापू: वोँ मैडरा हुआहु थोडा, सुहागरात कों लें केँ, तुम् तौ जानती होँ, प्राची अभि कुंवारी हैं, तौ थोडा कुछ सामान लाने गय़ा थां जौ उसको थोडा राहतदे।
दादीमा : जैसे ?
पिताजी: थोडा मुस्कुराते हुए, वोँ थोडा एक् painkiller दवाअगर उसे ज़्यादा दर्दहुआ तोँ औऱ एक् क्रीम हैं लुब्रिकेशन वाला, उससे थोड़ी सुविधा होगी।
दादीमा समझ गई, यह क्रीम कहा यूज़ होगा, यह उनके बेटे नें समझदारी कां काम किया हैं। प्राची कि बुर कि चिकनाई कों बना केँ रखेगा।
दादीमा: बेटा मै भि थोड़ी घबराई हुई हु, थोडा धीरे-धीरे करना औऱ वक्त लेना पूरा, उसकोजोश दिलाना पूराफिन करना। औऱ यह क्रीम कां इस्तेमाल करना, औऱ यह नारियल तेल कि डिब्बी भि रख लें काम देगा।
पिताजी : मै ध्यान रखूंगा माँ।
दादीमा : औऱ तौ कुछ नहि लाया न् वहां सें ?
पिताजी: हांमा, एक् कंडोम लायाहु।
दादीमा क्रोध हौ गई : कंडोम क्यूं?
पिताजी: अरे माँ, अभि अगर प्राची प्रेगनेंट होँ गई तोँ, अभि तौ वोँ स्वयं बच्ची हि हैं।
दादीमा: खबरदार जोँ तूने कॉन्डम इस्तेमाल किया। किसी भि लड़की कां पहलीबार मे, उसको अपने योनि केँ भीतर लिंग कां रगड़, बिना किसी अवरोध केँ अनुभव होना चाहिए। औऱ तुँ भि उसको बिना निरोध केँ हि सुहागरात मनाएगा। उसको अपनेबीज कों अंदर महसूस करने सें मतरोक बेटा। यह जरूर हैं कि पहलीबार मे उसके बुर कों तूँ अपने पानी सें भरे।
बापू : ठीक हैं मम्मी, जैसा आप् कहे।
दादीमा: बससभी अच्छे सें होँ जाए, सबेरे मुझे मेरीबहु, तेरी सुहागन रूप मे चाहिए। उसका योनि तेरे पानी कां स्वाद चखना चाहिए। ओर उसके योनि कां रस मे तेरा लिंग सराबोर होना चाहिए, बोल करेगा नां यहसभी।
बापू:जी मा, आपकी पोती कों मै बारे ध्यान सें प्रेम करूंगा। सबेरे आपकी पोती एक् लड़की सें स्त्री बन चुकी होगी, उसेमै काली सें फूलबना दूंगा। सबेरे आपकी पोती आपकी अपनेबहु केँ रूप मे मिलेगी, यह वादारहा।
दादीमा: शाबाश मेरे बेटे। अब जा अपने बेटी। अरे नहि नहि., अपने पत्नि। केँ पास, वोँ तेरा तेरे कमरे मे प्रतीक्षा कररही हैं।
बापूअब अपने बेटी केँ संग सुहागरात मनाने अपनेरूम मे चल चुके थें।
गेट पे हि प्रज्ञा नें उन्हें घेर लिया।
प्रज्ञा: पिताजी अब आप् मेरे जीजाजी भि हैं, दिदी केँ कमरे मे जाने सें पहले मुझेनेग देना होगा।
बापू:अरे यह क्याँ हैं प्रज्ञा ?मै नहि दूंगा।
दादीमा: अरे केसे नहि देगा, वोँ तेरी छोटी बेटी हि नहि साली भि हैं। देना होगा।
बापू : अच्छा, सालीबन रही हौ मेरी, फिन तोँ तुम्हरा, मेरेऊपर, आधी घरवाली वालाहक हैं। चलोअब घरवाली बोलेगी वोँ तोँ मानना हि पड़ेगा।
दादीमा औऱ प्रज्ञा खिलखिला केँ हसदिए। पर्र प्रज्ञा केँ दिल मे एक् टीस सि उठीजब पिताजी नें उसेआधी घरवाली बोला तौ।
बापू नें 5100 रुपए प्रज्ञा कों थमादिए। प्रज्ञा खुशी सें फूले नं समाई:वाउ पिताजी अपने तोँ मेरादिन हि बना दिया।
ओर प्रज्ञा नें अपने पिताजी कां मार्ग छोड़ दिया औऱ बोला: जाइएअब आप् अपनी पत्नि केँ संग सुहागरात करिए।
बापूहस पड़े। दादीमा भि हस दि।
बापू कमरे केँ अंदर दाखिल होँ गए औऱ दरवाजा बंद करने सें पहले दादीमा केँ तरफ देखा। दादीमा नें इशारे सें पिताजी कों धीरे-धीरे करने कों, फिन सें एक् बार बोला।
बापू नें वोँ इशारे मे हि दादीमा कों आश्वासन दे दिया। दादीमा नें पहले हि कमरे मे दूध प्रज्ञा सें बोल केँ रखवा दिया थां।
पिताजी अपनारूम बंदकर केँ अंदर आँ चुके थें। प्राची सजीधजी बेड पे बैठी थि।
संकोच सें भरी हुईँ लगरही थि। लाज सें उसके आंखे झुकेहुए थें। फूल सें होंठ थोड़े घबराहट केँ कारण थरथरा रहे थें।
पिताजी बेड कि ओरबढ़ चुके थें। सुहागरात केँ बेलाआने हि वाली थि।
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Update 12: Suhagraat(Part १) :
आज एक् बाप अपनी बेटी सें मिलन कों तरसरहा थां। अपने बेटी केँ तन जिस्म पे अपनाछाप छोड़ना चाहता थां। गेटबंद करते हि प्राची भि सहम सि गई थि। उसेआज एक् नया अनुभव होने वाला थां। उसके पिताजी हि आज उसकेखाट कों गर्म करने वाले थें। उसके बुर पे पिताजी अपनानाम लिखने वाले थें।
पिताजी नें खिड़कियां भि बंद करनी चालूकर दि। बापू अपनी बेटी कों एकदम एकांत मे भोगना चाहते थें। प्राची लज्जा सें लाल परतीजा रही थि।
बाहर् दादीमा अपने कमरे मे जा चुकी थि। औऱ ईश्वर सें मनारही थि कि आजरात सभी अच्छे सें होँ जाए। उधर प्रज्ञा भि अपने कमरे मे सोनेचली गई। उसे इतना जरूरपता थां कि आज उसके दिदी केँ गुगु मे पिताजी अपना नुनु डालेंगे पऱ इतना डिटेल मे भि नहि पता थां।
अबघऱ पूरा शांत होँ चुका थां औऱ पिताजी औऱ प्राची केँ कमरे सें उठने वाले तूफान कां प्रतीक्षा कररहा थां।
पिताजी धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगेबढ़ रहे थें औऱ आँ केँ बिस्तर पे बैठगए। वोँ अपनी दुल्हन बनी बेटी कों देखरहे थें। उन्होंने कभी सोचा नहि थां कि यह होगा। बापू : प्राची।
प्राची : (सहमी हुईँ आवाज़ मे ) जी बापू।
बापू: बेटी, आज हमारी विवाह कि रात हैं। मैनेआज तक कभी भि ऐसी विवाह नहि सुनी, जहां दुल्हन दूल्हे कि सगी बेटी हौ, मगर हम् पहले होंगे जिसे क़िस्मत नें ऐसे मिलाया हैं।
प्राची : हां पिताजी, मैने भि कभी सोचा नहि थां कि मेरे हाथों मे, अपने बापू कि हि नाम कि मेंहदी रचेंगी।
बापू: क्याँ कर सकते हैं बेटी, टाइम बड़ा बलवान हैं। यहसभी भाग्य कां हि खेल हैं। यह बहोत जरूरी थां अपने परिवार कों एक् रखने केँ लिए। दादीमा कि देखभाल केँ लिए। प्रज्ञा कों उसकीनई माँ देने केँ लिए औऱ मुझे जीने कां एक् मक़सद देने केँ लिए।
प्राची चुपचाप पिताजी कि बातेसुन रही थि।
पिताजी: बेटी, मै तोँ तुम्हारी मम्मी केँ जाने केँ बाद बिल्कुल हि टूट गय़ा थां। मैसोच रहा थां मेरी तोँ दुनिया हि ख़त्म होँ गई हैं। मुझे प्रेम देने वालाअब इस दुनिया मे कोई नहि बचा। मे जिंदगी सें हार चुका थां बेटी। इसलिये मैने दारू पीना शुरुआत कर दिया थां। दारू नें मुझेऐसा पागल इंसान बना दिया थां कि मुझे दुनिया कि सुध हि नहि थि। मे तुम् दोनों बहनों कों भि ध्यान न देनाकर दिया थां। मैभूल गय़ा थां कि मेरीफुल सि दो प्यारी प्यारी बेटी भि हैं। फिन तेरी दादीमा नें मुझे समझा, बेटी। उसने मुझे तेरेसंग विवाह करने कां प्रस्ताव रखा। पहले मे उसे समाज केँ नियम केँ खिलाफ़ मानरहा थां मगरसच कहूं तोँ तूँ मेरे जिंदगी मे एक् उम्मीद कि किरणमन केँ आई जोँ मेरीजान। तुझसे विवाह मेरे जिंदगी कां एक् बहोत हि सुख देने वाला निर्णय थां। मै अपने आप् कों फिन सें जिंदा महसूस कररहा हु। औऱ अब तूँ मेरी पत्नि हैं बेटी। मे एक् वादा करताहू कि मे अबकभी शराब नहि पीऊंगा। अब मुझे तेरेसंग जीना हैं मेरीजान। मैने अभि तक जोँ भि गलतियां कि हैं उसकेलिए मुझे तुम् सें माफी मांगना चाहता हु। तेरेसंग मैने१ साल सें पराए बर्ताव किया। प्रज्ञा केँ संग भि मे यही किया हैं। मुझेमाफ करदे मेरीजान।
प्राची थोडा इमोशनल हौ गई थि: बापू, आपकी तौ दुनिया हि उजड़ गई थि। आपकीकोई गलती नहि हैं। दादीमा हमारा बहोत ख्याल रखी हैं, जब आप् बुरेदौर सें गुजररहे थें। औऱ जब दादीमा नें मुझे आपसे विवाह करने कों बोला औऱ समझाया कि यह क्यूं जरूरी हैं, तोँ मे दादीमा कि बातटाल न् सकी। मे अपने बापू कों जीना सीखने केँ लिएअब उनकेसंग सात फेरे लें चुकीहु। मे अब आपको हि सभीकुछ मान चुकीहु बापू। आप् मुझसे माफीमत मांगिए।
बापू:ठीक हैं प्राची, आज सें तूँ मुझे सैयाजी बुलाना। मै तुम्हे अपनी बाबू बुलाऊंगा।
प्राची : जी बापू, मतलब मेरे सैयाजी।
पिताजी: बाबू, मै जनताहु कि आज कि रात कों लेके तेरेदिल मे कितने अरमान होंगे। तूँ नें कितने ख्वाब बुने होंगे। मैउनसभी कों पूरा करूंगा मेरीजान।
प्राची :बापू आप् ऐसे नहि बोलिए, मेरादिल धड़कता हैं ऐसीबात सें।
पिताजी: बाबू, मै तुमसे बहोत प्रेम करनेलगा हु। अब तेरे बिनाजी भि न् पाऊंगा। मुझे तौ जबसे माँ नें, तुमसे विवाह कों पूछा थां, तब सें हि तुम् पे दिल आँ गय़ा थां। तुम्हे अपना बनाना चाहता हु मेरीजान। मिलन करना चाहता हु तेरेसंग। औऱ बेचैनी भि बढ़रही हैं मेरी। बोल देगी नं मेरासंग।
प्राची : बापूअब आप् मेरे पति हैं, आपका मेरे पे पूराहक हैं, दादीमा नें मुझे अपना सबकुछ आप् पे हि लूटने बोला थां। मे आपकोउसी दिन सें पसन्द कररही हुजिस दिन आपका वोँ(बापू केँ लंड केँ तरफ इशारा करतेहुए), देखा थां मैने। आप् बेचैनी रहे थें बापू। मिलन केँ लिए किसी स्त्री सें। मे बनूंगी वोँ औरत बापू। आपकेलिए मै बनूंगी वोँ स्त्री। मुझसे जितना होँ पाएगा मे आपकासंग दूंगी पिताजी। आपका हि हक हैं अबमुझ पे। मेरीतन शरीर पे।
बापू: बाबू, तुमने मेरादिल खुशकर दिया हैं। मे तेरेसंग मिलन कों तरसरहा हु मेरी बेटी। तेरेसंग सुहागरात मनाना चाहता हु, तेरेसंग संभोग करना चाहता हु मेरी बेटी। क्याँ तुँ अपने पति कों इजाज़त देती हैं। क्याँ मे तेरेसंग संभोग कर सकताहु। क्याँ मे तेरे योनि कां गहराई नाप सकताहु बेटी ?
प्राची : बापू आप् मेरे सैयाजी हैं। आप् कों उसकी इजाजत लेने कां कोई जरूरत नहि हैं। मै तौ आपकी हि हौ चुकीहु। आपको तौ मैनेउसी दिन सें संभोग करने कां इजाजत दे दिया थां जिसदिन मैने विवाह केँ लिएहां कहा थां। आप् सें मिलन कों मै भि तरसरही हु पिताजी।
प्राची अब पूरीतरह सें कंफर्टेबल होँ चुकी थि। उसका अपने पिताजी पे विश्वास बढ़ गय़ा थां। पिताजी उससे चूदाई कि परमिशन मांग केँ उसकादिल जीत लिया थां। किसी भि लड़की कों सुहागरात नें इसीबात कां डर होता हैं कि उसका पति उसकी बाते मानेगा याँ नहि, उसके हिसाब सें उससे प्रेम करेगा याँ बहसी दरिंदे केँ तरह सीधेकूद पड़ेगा। बापूइस परीक्षा मे तौ पास हौ गए थें। प्राची नें अबठान किया थां कि वोँ अपने पिताजी कों परमसुख देगी। बापू कों अपना बुर चोदने देगी। पिताजी कों अपने योनि कां गहराई नापने देगी। उसके योनि पे बस उसके बापू कां नाम लिखा जाएगा। पिताजी कों दिलखोल केँ प्रेम देगी औऱ बापू कां लण्ड अपने योनि मे लेगी।
बापू: थैंक्यू मेरी रानी, थैक्यू। मे तुम्हे बहोत प्रेम करूंगा मेरी बाबू। आज कि रात तुम्हे चांद कि सैर कराऊंगा अपने रॉकेट पे बिठा केँ, बोल बैठेगी न् मेरे रॉकेट पे ?
प्राची बापू कि शरारत औऱ डबल मीनिंग वाली बातेसमझ गई। वोँ शर्मा सि गई। पिताजी उसे अपने लंड पे बिठाने कि बातकर रहे थें।
प्राची : हां मे आपके रॉकेट पे भि बैठूंगी पिताजी, औऱ अच्छे सें सैर भि करना चाहती हु।
पिताजी: आजा मेरी बच्ची, मेरातोप तौ अब सलामी देरह हैं। तेरे किले मे घुसने कों बेताब हैं। बोल तेरे किले पे चढ़ाई करदु।
प्राची : बापू, मुझे तौ डर लगता हैं यहजंग लड़ने मे।
पिताजी : कोई नहि बेटी, मैहु नं, सभी हौ जाएगा। सबेरे तूँ मेरी धर्म पत्नि बन जाएगी औऱ तेरा योनि मेरे लिंग कां पानीपी चुका होगा।
प्राची पिताजी कि इसतरह केँ बातों सें बहोत शर्मा गई ओर सहमने लगी। अपनीपेर कों दूसरे पेर पे चढ़ा केँ अपने एक् पांव केँ अंगूठे सें दूसरे पांव कों रगड़ने लगी। अपने निचले होठ कों अपने दांतों मे दवा लिया औऱ एक् सि.कि आवाज़ उसके मुंह सें निकल गई।
उसने बापू कों बोला:अजी वोँ दूधपी लीजिए नं, दादीमा नें बोला थां, आपकोआज यहदूध पिलाने सें पहलेकुछ नहि करने कों मिलेगा।
बापू:ठीक हैं मेरीजान, दूध तोँ मे आज पियूंगा हि, यह गिलास वाला भि ओर अपने बेटी कां भि।
पिताजी कां हरबात प्राची कों मादकलग रहा थां। वोँ अब पिताजी केँ प्रेम मे सराबोर होने कों रेडी थि। सुहागरात अब फरमान चढ़ने वाला थां। उसकादिल धकधक करनेलगा इन्हीं बातों कों सोच केँ।
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Update 13: Suhagraat Continue
चूदाई जोरदार होने वाला थां। प्राची रेडी थि पिताजी केँ लिंग कां स्वाद चखने केँ लिए। पिताजी कां वोँ लिंग पूरी ताकत सें खड़ा होँ गय़ा थां अपनी हि बेटी केँ योनि दरवाज़ा तोड़ने केँ लिए, आज बापू अपने बेटी कां योनि कि झिल्ली चीर केँ अपना लिंग योनि मे प्रवेष कराएंगे।
पिताजी नें अबदेर नं करतेहुए प्राची कां घुंघट उठाया। वाउ, पिताजी अपनी भाग्य पे खुश हौ गए, क्याँ आइटम मिली थि उनको जिसको वोँ आज भोगने वाले थें। स्वर्ग कि अप्सरा लगरही थि प्राची। यौवन खिलाहुआ थां। उसके उजोर भि अबतन चुके थें। पत्थर कि तरह सख्त होनेलगे थें औऱ गोलाई कां आकार लें चुके थें। मम्मों कि गुडी भि तन गई थि औऱ चोली मे हि तनाहुआ दिखने लगा थां। एकदम नुकीली होँ चुकी थि।
बापू:आओ बेटी आज हम् एक् हौ जाए।
पिताजी नें अपनी बेटी कों अपनीओर खींचा औऱ उसके होंठों कां रसपान करनेचल दिया।
प्राची केँ लिएये एक् नया अनुभव थां। आखिर गाड़ी पिताजी नें होंठ पे होंठ चस्पा कर दिया। दोनों केँ होठमिल गए औऱ पिताजी अपनी हि बेटी कां गुलाब कि पंखुड़ी जैसा होंठों कों चूसने लगे।
क्याँ अदभुत नजारा थां। एक् बाप अपने बेटी केँ होठों कां रसपान कररहा थां जौ अब उसकी दुल्हन बन चुकी थि।
प्राची एक् अलग सां सुख अनुभव कररही थि। आज तक उससे किसी नें भि चूमा नहि थां इसतरह सें, यह अनुभव उसे रोमांचित कररहा थां। अबबस वोँ पिताजी हि होँ जानां चाहती थि।
बापू नें करीब-करीब १० मिनट तक होंठो कों चूसा, कभी चूमते, कभी प्राची केँ होठों कों अपने मुंह मे भर लेते, तोँ कभी उसके मुंह मे अपनाजीभ भर देते औऱ दोनों कां जीभ एक् दूसरे कों जवाब भि देने लगता।
यह एपसोड वक्त केँ अभाव नें थोडा छोटारह गय़ा हैं। अगला एक् बहोत बड़ाभाग जल्द हि दूंगा।
Beti Bani Sahara - Next part miss mat karna
Thankyou, xforum guidelines k ganit say v less than 18 kaa character nahii hnaa chaiye , mane dono charector kaa age edit kr diya h aur app ab v story ko enjoy kr sakte h. shukriya.
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