Beti Bani Sahara – New Episode
Update 14: finally sil break.
पिताजी अपनेफुल सि बेटी कों चूमते जारहे थें। होठ मे होठमिल रहे थें। पिताजी कां लौड़ा सलामी देनेलगा थां शेरवानी केँ पजामे केँ नीचे हि। पूरा माहौल हि मादकहों गय़ा थां। प्राची सुध-बुद्ध खो चुकी थि औऱ बापू कों अपना शरीर सौंपने कों रेडी थि। वोँ उसी दिशा मे बह जानां चाहती थि जिस दिशा मे पिताजी उसकोबहा लेँ जानां चाहते थें। वोँ एकदम बेजान जी हौ केँ पिताजी केँ बाहों मे सिमट केँ रह गई थि, घबराहट सें उसके टांगे कांपरहे थें। पिताजी नें एक् एक् कर केँ सारी ज्वेलरी अपने बेटी केँ चेहरे औऱ गले सें उतर दिया थां।
पिताजी नें हाथ अपनी बेटी केँ उजोरो केँ तरफ सरका दिया धीरे-धीरे सें औऱ कपड़े केँ ऊपर सें हि प्राची केँ छोटे छोटे संतरों कां गोलियां कां अनुमान लगाने लगे। उसकी मम्मों अभि तक अनछुई थि। पिताजी केँ हाथ लगते हि वोँ बुरी थरथरा उठी।
बापू: क्याँ हुआ मेरी बाबू।
प्राची :बापू आपकाहाथ लगने सें कुछकुछ होँ रहा हैं।
बापू: तुम्हें अच्छा नहि लगरहा हैं क्याँ मेरी रानी।
प्राची : नहि बापू, ऐसी बात नहि हैं। मुझे तोँ बहोत मज़ा आँ रहा हैं। मेरेसंग ऐसाकभी नहि हुआ पहले।
बापू:आज सें हररात होगा बेटी यह तेरेसंग। आज सें तेरी कच्ची उमर कि बुर, मेरे लण्ङ केँ नाम होँ गई हैं। अबहरदिन यह तेरे योनि मे, अपना ठिकाना ढूंढेगा। तुम्हारी गहराई नापेगा बेटी औऱ मुझे पे विश्वास रख, तुम कोचरम सुख कि प्राप्ति कराऊंगा मेरी बाबू।
प्राची मादक नजरों सें पिताजी कि ओरबस देखती सि रह गई। बापूआज उसे अपनाबना केँ हि दम लेने वाले थें।
पिताजी नें देर नां करतेहुए, अपनी 19 साल कि कच्ची काली बेटी, केँ दोनों मम्मों कों अपने दोनों हाथ केँ हथेली मे भर लिया, औऱ जीभर केँ मसलने लगे।
बेचारी प्राची कसमसा सि गई। उसके मुंह सें सीईईईई.कि आवाज़ निकल गई। पिताजी अब रुकने कां विचार मे नहि थें। प्राची कि काम अग्नि भि अब भड़क चुका थां।
बापू नें अब ब्लाउज मे कैद छोटी छोटी चूचियों कों आजादकर देने कां सोचा औऱ प्राची कां ब्लाउज केँ अंदरहाथ घुसा दिया। प्राची सीसीआ.केँ रह गई। बापू धीरे-धीरे धीरे-धीरे ब्लाउज़ कां बटनखोल रहे थें। क्याँ समा थां वोँ, एक् बाप अपने हि बेटी कां स्तनों कों देखने औऱ उसे चूसने कि लालसा मे थां। ब्लाउज़ खुल गय़ा औऱ पिताजी नें देर नां करतेहुए चूचियों कों पूरा नंगाकर देना चाहते थें। उन्होंने प्राची सें बोला : बाबू अपनापीठ जरा सां उठा।
प्राची किसी आज्ञाकारी शिष्या कि तरह पिताजी कि हरबात मानती जारही थि। वोँ थोडा सां उठी औऱ पिताजी नें अपने हाथों कों पीछे लें जा केँ ब्रा कां हुकखोल दिया, ब्रा झटके सें खुल गय़ा औऱ आगे सें ढीला होँ गय़ा। अब चूचियों कां अवलोकन बापू करने वाले थें। प्राची वापसलेट चुकी थि औऱ ब्रा कों बापू नें खींच केँ पूरीतरह बेटी केँ स्तनों कों आजादकर दिया।
पिताजी केँ मुंह सें एक् अहह निकल गय़ा, हायराम क्याँ सुंदर, क्याँ गोलाई, क्याँ टाइट, क्याँ सख्त थां प्राची कां मम्मों। बापू अपने हाथों मे मम्मों कों भर सां लिया।
प्राची तौ अपने बापू कां हाथ उसके नंगी चुचियों पे लगते हि पिघल गई। उसके जांघें थरथराने लगे औऱ होंठ भि कंपकपाने लगी। यह उसका किसी पुरुष केँ हाथ सें मम्मों कां पहला छुअन थां।
बापूअब बेरहमी सें एक् नवयौवना कि स्तनों सें खेलने लगे। पिताजी अपना काबू, अपनेऊपर सें खो दिया थां औऱ कसकस केँ अपने बेटी कां मम्मों दबाने लगे।
पिताजी नें एक् बार तोँ इतनाकस केँ दबा दिया कि प्राची चित्कार उठी : अहह पिताजी, थोडा धीरे-धीरे दबाइए न्, दर्द होँ रहा हैं।
बापू कों प्राची केँ टोकने सें थोडा होसआया।
बापू:अरे ओह बाबू, सॉरी, थोडा जोश मे आँ गय़ा थां औऱ भूल हि गय़ा थां कि मे एक् कुंवारी लड़की कां बूब्ज़ मर्दन कररहा हु। अब सें धीरे-धीरे सें दबाऊंगा।
बापू नें अब अपनी बेटी कां मम्मों अपने मुंह मे भर लिया औऱ पीनेलगे। चुसाई चालूकर दिए।
बापू करीब२० मिनट तक चूचियों सें खेलते रहे। कभी होंठो कों भि बीचबीच मे चूस लेते।
औऱ फिन सें मम्मों चुसाई चालूकर देते।
प्राची बस बापू कां संगदे रही थि। उसकारोम रोमअब बापू कां नाम लेँ रहा थां बापू केँ प्रेम करने सें वोँ पागल सि हौ रही थि औऱ उसकी बुर भि अब पानीयने लगी थि। बुर मे अबउसे लगरहा थां, जैसे चींटियों काटरही होँ।
बापू करीब-करीब आधे घंटे चुसाई करने केँ बादअब आगे बढ़ना चाहरहे थें। बापू नें धीरे-धीरे सें प्राची केँ कान मे कहा : बेटी आज मे तुम्हें पूरी नंगी देख्ना चाहता हु। तेरे जिस्म पे एक् सुत भि नहि चाहिए बाबू।
प्राची : शर्माती हुइ, जी पिताजी, आप् जैसाठीक समझे, मे तोँ आपकी होँ हि चुकीहु।
बापू एक् 19 साल कि लड़की कों इतनी समझदारी वाली बाते करने सें बहोत खुशहुए।
बापू नें झटके सें अपना कपड़ा उतार दिया औऱ पिताजी कों कपड़े उतारते देख केँ प्राची नें अपनी आंखेबंद करली।
बापू नें नीचे सें प्राची कां लहंगा भि खींच केँ उतर दिया। अबलाल पैंटी मे, एक् टीनएजर्स लड़की, बला कि मादकलग रही थि।
बापू नें पैंटी भि खींच केँ उतार दिया। प्राची पूरी नंगी होँ चुकी थि।
बापू प्राची सें सट केँ उसके नग्न शरीर सें खेलने लगे।
प्राची लज्जा सें पानी पानी होँ रही थि। उसके पिताजी उसके नंगे जिस्म केँ स्वामी हौ चुके थें। प्राची कां जिस्म एकदम दूधिया सां थां। मम्मों गोलगोल, बुर कसाहुआ लगरहा थां, बुर पे रेशम सें हल्के हल्के बाल जौ अभि ठीक सें उगे भि नहि थें, वोँ बहोत मादकलग रहे थें। पिताजी प्राची कों ऊपर सें नीचे तक चाटने औऱ चूसने लगे, प्राची घबराहट सें थरथरा रही थि। उसेअब उससमय कां प्रतीक्षा थां औऱ थोडा डर भि थां, जब बापू उसकी योनि मे अपना लौड़ा डालते। पिताजी सें वोँ इतनी शर्मा रही थि कि बापू केँ नंगे होने केँ बावजूद भि उनके लण्ङ केँ तरफ नहि देखरही थां। अभि भि बापू केँ लिंग कां असली मोटाई औऱ लंबाई उसेपता नहि चला थां। उसने पिताजी कों मूठ मारते देखा तोँ थां मगरदूर सें औऱ थोडा सां हि देखने सें उसे, असली लौड़ा केँ साइज कां अनुमान नहि हुआ थां।
पिताजी अब नीचेबढ़ केँ योनि केँ पास पहुंच गए औऱ अपने हाथों सें उसके बुर सें खेलने लगे।
प्राची मदहोश होँ चुकी थि। उसके आंखेबंद होनेलगे औऱ वोँ अपने पिताजी केँ सामने अपनी टांगे खोल केँ लेटी थि। पिताजी उसके योनि दरवाज़ा पे अपनी उंगली फिराने लगे औऱ प्राची कां जोश बढ़ाता हि जारहा थां। अभि वोँ पूरे दुनिया मे सबसे विश्वासी मर्द कों अपना यौवन परोसरही थि। उसे पिताजी पे पूरा यकीन हौ चला थां। एक् लड़की कों सबसे ज़्यादा, अपने पिता याँ पति पे, विश्वास होता हैं औऱ ये तोँ दोनों एक् हि मर्द थें प्राची केँ लिए। इसीलिए तोँ वोँ टांगे खोलपाई। पिताजी कों अपनाचुत छूने दिया।
पिताजी उसके योनि कों बाहर् सें हि उपर सें नीच तक सहलारहे थें, वोँ जानते थें कि एक् वर्जिन लड़की कों एक् उंगली भि दर्ददे सकता हैं, अगर बुर मे घुसाया जाए तौ। वोँ प्राची केँ बुर कि झिल्ली कों अपने लंड सें हि तोड़ना चाहते थें। उन्होंने प्राची कां बुर थोडा अपने उंगलियों सें खोल केँ देखा। अंदर कां नजारा उन्हें खुशकर गय़ा, बुर कां छिद्र इतना छोटा थां कि उसका मुहाना एक् दमबंद थां। इस मुहाने सें अब सुरंग बापू कों अपने हथियार सें हि बनाना थां। अंदर सें गुलाबी, रस सें भरी हुइ एक् दम रसीला बुर थि प्राची कि। बापू अपने लाइफ मे पहलीबार एक् 19 साल कि लड़की कां बुर देखरहे थें। 
उन्हें कोई भि बुर मारे, 2 साल सें ऊपर होँ चुका थां औऱ कोई टाइट बुर मारे, तोँ अरसा हौ गय़ा थां। प्राची कि मम्मी कां बुर तौ प्राची केँ जन्म होने केँ बाद सें हि ढीला हौ गय़ा थां औऱ वोँ मज़ा नहि देता थां। आज पिताजी कों अर्से बाद एक् कुंवारी योनि मे प्रवेश करने कां मौका मिला थां। पिताजी अब अपनी प्राची कों थोडा औऱ गरम करना चाहते थें, ताकि वोँ लिंग लेने मे आनाकानी नं करे। वोँ प्राची केँ बुर कि बाहरी चमरी कों नीचे सें ऊपर तक सहलाने लगे। 
औऱ अपना मुंह भि प्राची केँ बुर चूसने केँ लिए बढ़ा दिया। 
प्राची कों इसकी उम्मीद बिल्कुल नहि थि कि पिताजी ऐसाकुछ करेंगे। वोँ अपने मुंह मे उसकी योनि कों भर लेंगे। वोँ तौ सिसक केँ रह गई। उसेपरम मजाआने लगा। उसे तोँ पता हि नहि थां कि एक् छोटी सि बुर, जिसे वोँ गंदा मानती थि, वोँ उसे इतना आनंददे सकता हैं। औऱ पिताजी पे तौ उसे इतना प्रेम आँ रहा थां कि क्याँ कहना। बापू कों अब वोँ अपने अंदरसमा लेना चाहती थि। पिताजी नें अब एक् औऱ दांव खेला जिसकी प्राची कों कोई उम्मीद नहि थि, पिताजी नें प्राची केँ बुर केँ दाने कों अपने उंगली सें मसलना शुरुआत किया। यह तौ उसेपरम मजा सें भि अधिकमजा देने वाला थां। उसे इतना अधिक आनंदआया कि वोँ पिताजी कां सर पकड़ केँ इनके बालों कों नोचने लगी। 
बापूकभी उसकाचुत चूसते, तौ कभी उसके दाने कों रगड़ देते, तौ कभी बुर केँ लकीर कों छेड़ते। प्राची अब इतनाजोश सें भर गई थि कि अबउसे एक् मूसल भि मिल जाता तोँ अपने योनि मे डाल लेती। उसकी बुर एकदम पनिया गई थि।
अब पिताजी समझगए थें कि लोहा गर्म हौ गय़ा थां औऱ हथौड़ा मारना चाहिए। पिताजी कां मन, अपने बेटी केँ मुंह मे, अपना लंड भि देने कां थां, पर्र अब वोँ देर करते तोँ ठीक नहि होता। शायद इतनाजोश मे प्राची कों दुबारा लाने केँ लिए भि उन्हें एक् घंटे कां मेहनत औऱ करना पड़ता।
उन्होंने मनबना लिया कि अब अपनी बेटी कि बुर मे प्रवेश कर जानां हैं।
बापू : बेटी, टाइम आँ गय़ा हैं कि इस सुहागरात कों हम् फरमान चढ़ाए औऱ मै तेरी योनि मे प्रवेश करूं बेटी।
प्राची कां दिल धक-धकाने लगा। वोँ आने वाले लम्हा कों लेके एक् दम सें सहम गई।
प्राची : बापू, क्याँ बहोत दर्द होगा ?
बापू : नहि बेटी, मुझ पे भरोसा रखअब अच्छे सें होगा। मे धीरे-धीरे करूंगा।
बापू नें एक् झूठा दिलासा प्राची कों दिया क्योंकि एक् अनाड़ी भि कह सकता थां कि सभी 40 साल केँ एक् व्यक्ति कां मोटा लंड एक् 19 साल कि लड़की केँ योनि मे जाएगा तौ उस लड़की कों कितना दर्द होगा।
प्राची पिताजी केँ तरफ मादक नजरों सें देखने लगी कि पिताजी कितना प्रेम करते हैं उससे, उसे दर्द वोँ नहि दें चाहते।
प्राची अरमानों भरे नजरों सें अपने पिता कों देखते हुए। 
बापू नें उसेचित लेट जाने कों बोला औऱ लंड बुर मे डालने केँ लिए पोजीशन बनाने लगे।
बापू : बेटी मै धीरे-धीरे करूंगा तूँ घबराना मत।
प्राची इतना शर्मा रही थि कि उसे पिताजी केँ तरफदेख पाना वोँ दुभर हौ रहा थां। लंड तोँ देखने कि उसकी हिम्मत वोँ नहि थि। यह भि ठीक हि थां क्योंकि अगर वोँ पिताजी कां लंड देख लेती तोँ होँ सकता हैं बिंदक भि सकती थि, चोदवाने सें।
बापू पोजिशन मे आँ गए औऱ प्राची केँ बुर पे चढ़ाई करने कि तैयारी कर दि। उन्होंने बुर पे लंड कों सटाया औऱ परफेक्ट छेद मे जाने कां ऐंगल तलास करनेलगे। पिताजी नें योनि दरवाज़ा पे लंड लगा केँ थोडा दबाव बनाया। योनि सें लंड छिटक गय़ा। फिन दुबारा प्रयास किया, लंड फिन छिटक गय़ा।
अचानक उन्हें दादीमा कां दियाहुआ विचार कां यादआया। वोँ भूल हि गए थें कि उन्होंने लुब्रिकेशन क्रीम भि लाया थां इसीसमय केँ लिए। औऱ दादीमा नें भि वोँ नारियल कां तेल दिया थां। बापू नें उसे अपनेबेड केँ दराज मे हि रखाहुआ थां। उन्होंने दराज खोला औऱ क्रीम निकला। प्राची बस आंखेबंद कर केँ पड़ी हुईँ थि। उसेआने वाले लम्हा सें बहोत डरलगरहा थां। पिताजी नें क्रीम कां दक्कन खोला औऱ अंजुल सें भर केँ क्रीम प्राची केँ बुर केँ मुहाने पे चपोर दिया।
पिताजी अपने लंड पे भि दादीमा कि दि हुइ नारियल तेल सें मालिश कर लिया। लंड चमकने लगा थां। प्राची कां योनिअब इतनी चिकनी हौ चुकी थि कि प्रवेश करना बहोत आसान सां लगरहा थां। एक् तौ बुर, उसके हि चूतरस सें गीली, ऊपर सें क्रीम कि चिकनाई।
पिताजी नें फिन सें वही पोजीशन बनाया औऱ लौड़ा कों अपनीसगी पत्नि बनी बेटी केँ बुर मे ठेलने लगे।
लंड योनि केँ मुहाने कों थोडा सां खोल गय़ा पिताजी केँ एक् करारा धक्के केँ संग। प्राची छटपटाने लगी। औऱ सि सि करनेलगी। अभि तोँ बस झिल्ली कों पिताजी कां सुपारा बस स्पर्श हि हुआ थां औऱ उसे इतना दर्द हौ रहा थां। पूरा लंड अंदर पेसा जाएगा तोँ क्याँ होगा, बापूयह सोच एक् दहलगए। पऱ सुहागरात कों मुकम्मल तरह सें निभाने केँ लिए लिंग कां योनि मे घुसना जरूरी नहि, बहोत जरूरी थां।
पिताजी नें अपनेमन पे थोडा काबू किया औऱ बेटी केँ योनि पे अपने लंड सें थोडा औऱ जोर लगने कां सोच।
पिताजी नें ताव मे आके एक् जबरदस्त धक्का प्राची केँ बुर पे मारा। लंड पक्क कि आवाज़ केँ संग प्राची केँ बुर मे आधा प्रवेश केँ गय़ा। पिताजी केँ लंड कां सुपारा, प्राची केँ बुर कि झिल्ली चीर चुका थां।
प्राची कों एक् असहनीय दर्द कां अनुभव हुआ। वोँ तोँ आंखेबंद कर पिताजी पे भरोसा कर आहिस्ता लेटी थि, अपने पिताजी केँ सामने टांगे फैलाए। उसेपता नहि थां कि बापू उसकायह हाल करेंगे।
वोँ एकदम सें चीत्कार उठी। उसकी जबर्दस्त चीख निकल गई।
उसनेजोर सें चिल्ला दिया : आअआआआअह। हुह्ह्ह्ह्हःहःहः.पापाआअआआ.बहुततत। दर्द.हौ.रहा.हैं.बापू.।
चीख इतना जोरदार थां कि अगर उनके परोस मे वोँ किसी कां घऱ होता तोँ उसकोवी सुनाई देता।
बापू घबरागए कि कोईसुन नाँ लें औऱ उन्हें कुछ नं सुझा। वोँ कस केँ प्राची केँ मुंह पे अपनाहाथ डाल दिया औऱ दबा दिया, ताकि वोँ फिन सें नं चीखे।
मगर जोँ होना थां, वोँ तोँ होँ चुका। चीख जोरदार थां। औऱ दादीमा औऱ प्रज्ञा केँ कानों तक पहुंच गय़ा। प्रज्ञा नें सोचा, अरे दिदी कों क्याँ हुआ, उसे दर्द क्यूं होँ रहा हैं। कहीउसे कुछ हौ तोँ नहि गय़ा।
उधर दादीमा समझ गई कि प्राची अब कुंवारी काली सें एक् स्त्री बन गई हैं, यानि उसकी योनिखुल चुकी हैं, ओर खोलने वालाओर कोई नहि उसका अपनासगा बाप हि हैं। दादीमा घबरा गई। मगरउसे तौ पता हि थां कि यह होना हि थां।
इधर प्रज्ञा भागते हुए दादीमा केँ पासआई : दादीमा दादीमा, प्राची दिदी कों कुछ हौ गय़ा हैं, वोँ अभि बहोत कस केँ चीखरही थि।
दादीमा नें सोचाअरे प्रज्ञा अगरकही बापू केँ कमरे केँ दरवाजे पे पहुंच गई औऱ बापू कों प्राची केँ चूदाई केँ बीच मे हि डिस्टर्ब कर दिया तौ अच्छा बात नहि होगा। अभि अभि तोँ मेरे बेटे नें मेरे पोती केँ बुर मे लंड फंसाई होगी, अभि तौ ठीक सें चूदाई स्टार्ट भि नहि हुआ होगा मेरे बेटे कां। प्रज्ञा कों कुछ तौ समझा हि देना होगा।
दादीमा: अरेकुछ नहि बेटी, आपके पिताजी औऱ दिदी कां सुहागरात हैं नाँ। बापू नें अपना नुनु शायद दिदी केँ गुगु मे डाला हैं, इसलिये उसे थोडा दर्दहुआ हैं।
प्रज्ञा बहोत जिज्ञासा लें केँ अब दादीमा सें सभी सवालों कां जवाब चाहती थि। इस दादीमा औऱ प्रज्ञा केँ बीचहुए बातचीत पे हम् बाद मे आयेंगे।
अभि पिताजी केँ रूम मे चलते हैं, जहां पिताजी कां सुपारा उनके बेटी केँ योनि मे गर चुका थां। औऱ प्राची असहनीय दर्द मे थि।
बापू नें उसेकिस करना स्टार्ट कर दिया, थोडा मम्मों भि दवाएं लगे ताकि प्राची थोडा औऱ जोशीया जाए औऱ पिताजी करीब-करीब ५ मिनट तक प्राची कां मुंहदबा केँ रखा, वोँ रोरही थि। उसकासील टूट चुका थां। पिताजी नें देखा कि अगर वोँ रुक केँ फिन सें थोड़े देरबाद एक् ओर धक्का मारेंगे पूरा लंड योनि मे प्रवेश केँ लिए तौ फिन सें प्राची कों दर्द होगा, तौ क्यूं नं एक् बार मे हि पूरा लौड़ा बेटी केँ बुर मे उतर दियाजाए। पिताजी नें पूरा कंट्रोल अपनेहाथ मे लिया, प्राची केँ होठों केँ अपने होठों सें बंद किया औऱ कच सें एक् ओर जबरदस्त धक्का मार केँ अपने बेटी केँ योनि मे पूरीतरह दाखिल होँ गए।
प्राची कस केँ फिन चीखीं पऱ इसबार उसकीचीख दब केँ रह गई। बस एक्, उम्ममम उह। जैसी हि आवाज़ उसके मुंह सें निकलसकी। वोँ पूरीजोर लगा केँ बापू कों अपने हाथों सें धक्का देके अपनेऊपर सें हटाने कि कोशिश कररही थि, पऱ एक् नन्ही सि 19 साल कि जान एक् 40 साल केँ व्यक्ति केँ बल सें केसेजीत पाती। बापू नें अपने पूरा कां पूरा लंड जड़ तक प्राची केँ चूत मे धंआस दिया थां। वोँ पेर फैलाए, बस अंशु हि बहाते हुए लेटी थि औऱ बापू उसकोकस केँ जकड़ केँ, पकड़े हुए थें, औऱ उसके योनि मे अपना लौड़ा डाले उसकेऊपर पड़ेहुए थें। 
बापू अभि अपने बेटी कों ऐसे उपयोग कररहे थें जैसे वोँ उसकारेप कररहे हौ। उसकी एक् नहि सुनरहे थें। प्राची रोतीजा रही थि, उसके अंशु बापू कों दिख जरूररहे थें। पऱ वोँ जानते थें कि एक् बार प्राची केँ बुर सें अगर अभि उन्होंने लंड निकाला तौ फिन वोँ दुबारा घुसाने नहि देगी। पिताजी बस प्रतीक्षा करतेरहे, लिंग कों अपनी बेटी केँ योनि मे डाले, ऐसे हि उसके जिस्म पे लेटेरहे।
करीब-करीब 10 मिनट तक प्रतीक्षा करने केँ बाद बापू कों लगा कि प्राची कि सीसकरी थोड़ी धीरे-धीरे हुए हैं, उसके अंशु भि रुक चुके थें। औऱ इनको थोडा सां प्राची कां गांड़ भि उचकता महसूस हुआ। वोँ समझगए कि, अब बेटी कि चूदाई स्टार्ट कि जा सकती हैं। वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनाकमर उठा केँ प्राची केँ बूर पे बजार देते। थोडा थोडा अपने लिंग कों योनि मे अंदर-बाहर्, अंदर-बाहर् करनेलगे औऱ अब प्राची कां मुंह भि खोल दिया थां। वोँ चीत्कार माररही थि, उसके बापू केँ इसतरह केँ हमला सें अभि वोँ उभर नहि पाई थि। बस वोँ बेबस सि पारी हुइ थि। अभि भि उसको दर्द हौ रह थां।
बापू नें पूछा : बेटी, मुझेमाफ करना, यह बहोत जरूरी थां बेटी, अगर मे अभि बेरहमी नहि दिखता, तौ शायदआज तेरे भीतर, मै अपना लिंग प्रवेश नहि कर पाता बाबू। पहलीबार थां न् तेरा, चुत कां सील टूटने मे थोडा दर्द तोँ होता हि हैं। यह दर्द तोँ हर लड़की कों सहना पड़ता हैं बेटी। आज तुँ अपने पिताजी कि होँ गई हैं। ओरमै तेरा।
प्राची अभि भि कुछ बोलने कि हालत मे नहि थि।
बापू नें भि सोचाअब धक्के थोड़े तेजकर देताहु। चूदाई रफ़्तार पकड़ेगी तोँ प्राची स्वयं गर्म होके लंड लेने लगेगी आहिस्ता। पाप नें अचानक सें अब रफ्तार बढ़ा दिया धक्कों कां।
प्राची दबी सि आवाज़ मे बड़बड़ाने लगी : aahhhhhhh.ahhhh। पिताजी। छोड़ दीजिए.रहम करिए अपने बेटी पे.मैमर जाऊंगी बापू.बहोत मोटा हैं आपका.पिताजी। ahhhhhhhhhhhh.उम्ह्ह्ह.
बापू कों तौ टाइट बुर कां जन्नत मिल गय़ा थां वोँ कहा रुकने वाले थें। वोँ प्राची कि बात कों अनसुना कर केँ चूदाई जारीरखे हुए थें। उनकाहर एक् धक्का प्राची केँ बच्चेदानी कों स्पर्श कररहा थां। वोँ जानते थें कि अगर थोड़ी देर वोँ प्राची केँ योनि कां मर्दन करते रहेंगे, तोँ योनि मे उनके लिंग कां मार्ग जरूरबन जायेगा, औऱ प्राची कों फूलजोश भि जरूर आयेगा।
पिताजी केँ हर धक्के केँ संग प्राची केँ बुर केँ अंदरूनी चमड़ी बाहर्, लंड कों जकड़े, आँ जाती थि औऱ ठेलने केँ संग हि बुर मे अंदर कि ओरचली जाती थि। प्राची कां चुत थां हि इतना टाईट।
खैर लगातार धक्के लगाने सें प्राची कां जोश थोडा जग गय़ा, अब भि उसको थोडा दर्द हौ रहा थां पऱ अब उसकोयह दर्द थोडा मीठा सां लगरहा थां।
पिताजी नें एक् बारफिन लंड कों बाहर् खींचा औऱ प्राची केँ बुर पे बहोत सारा लुब्रिकेशन वाला क्रीम लगाया। बुर अबफूल चिकनी होँ चुकी थि। बापू नें देखा कि थोडा सां खून भि सील तुरई केँ कारण, प्राची केँ योनि सें रिस केँ बेडशीट पे गिर गय़ा हैं, औऱ उनके लंड पे भि, प्राची केँ योनि कां रस औऱ कुछ सें मिला मिश्रण, लगा हैं। पिताजी नें लंड पे लगेखून कों साफ किया औऱ फिन नारियल तेल चपोरा थोडा सां। औऱ इसबार बिना किसी विरोध केँ वोँ प्राची केँ बुर मे समागए।
चिकनाई केँ कारणअब बुर लौड़ा कों अपने अंदरआने केँ लिएकम विरोध कररहा थां।
पिताजी योनि मर्दन किएजा रहे थें। उनका सुपारा प्राची केँ बच्चेदानी पर्र दस्तक देताजा रहा थां।
पिताजी शॉर्ट पे शॉर्ट लगाएजा रहे थें औऱ प्राची केँ तरफ सें अब जवाबआने लगा थां। यानि प्राची चूदाई केँ रंग मे रंगने लगी थि। कमरे कि दीवारें आज एक् बाप बेटी केँ यौन संबंध कां साक्षी बनाहुआ थां। ठपठप थापाठप चूदाई हौ रही थि। कमरे मे फचफच कि आवाज़, प्राची केँ पायल कि छनछन कि आवाज़ केँ संगमिल केँ एक् अलग हि म्यूज़िक सुनारही थि। बुर कां रस भि अब पिताजी कों, थोडा सहायता कररहा थां। प्राची कां चुत भि अब पूरा चिकना गय़ा थां औऱ लंड धीरे-धीरे पाचापच अंदर बाहर् होँ रहा थां। प्राची मदहोश हौ गई ओरअब उसके मुंह सें विरोध केँ नहि, चूदाई केँ सहमति केँ बोल निकलने लगे : Aaahhh aahhhh uahhhhhh uhhh बापू चोदिए नाँ औऱ जोर सें।
पिताजी भि अब दुगुना जोश मे आँ चुके थें। औऱ पूल स्पीड सें चूत मर्दन कररहे थें अपने 19 साल केँ नवयौवना बेटी कां।
उधर दादीमा औऱ प्रज्ञा कों, पिताजी केँ रूम सें, उठरहे तूफान कि हरगरज सुनाई देरही थि। अब तक प्रज्ञा कों तोँ, दादीमा चूदाई औऱ सुहागरात कि हर क्रिया, सें वाक़िफ करा चुकी थि। बिस्तर कां चोईचोई भि दोनों दादीमा औऱ पोती कों सुनाई देरहा थां।
प्रज्ञा : दादीमा, पिताजी बहोत जोर सें दिदी कों चोदरहे हैं नां।
दादीमा : हां बेटी तेरे दिदी कों आज बापू जन्नत दिखाकर हि मानेंगे।
प्रज्ञा : नादानी सें : दादीमा मुझे भि चाहिए बापू सें चूदाई, देखो नं दिदी कितनी खुशलग रही हैं, अजीब अजीबआहे निकला रही हैं दादीमा। कितना आनंद आँ रहा होगा दिदी कों।
दादीमा चौक सि गई : यह क्याँ कहरही हैं पगली, दिदी कि पिताजी केँ संग विवाह हुई हैं नां। फिन तोँ उसकी चोदईकर रहे हैं बापू। तुँ केसे केँ सकती हैं यह?
प्रज्ञा : तौ मेरी भि करदो बापू सें विवाह, औऱ वैसेवी दिदी बापू कि घरवाली हैं तोँ मे उनकी साली मतलब, आधी घरवाली हु नाँ। पिताजी नें हि कहा थां यह मुझे।
दादीमा प्रज्ञा केँ नादानी पे हंसने लगी : धत्त पगली, एक् व्यक्ति केँ २ पत्नि थोड़ी होती हैं।
दादीमा औऱ पोती कां ऐसे हि संवाद चलतारहा।
उधर प्राची मदहोशी सें पिताजी केँ लंड केँ नीचे लेटी, बुर कां मर्दन करवारही थि, पसीने पसीने हौ गए थें दोनों बाप बेटी।
प्राची कों अब इतनामजा आँ रहा थां कि उसकी आंखें बंद होँ गई थि औऱ पिताजी कां मोटा लौड़ा अपने बच्चेदानी मे महसूस कररही थि।
बापू कों बेटी केँ यौवन कों भोगते हुए करीब 25 मिनट होँ गय़ा थां। पिताजी करीब-करीब 2 साल सें चुत केँ प्यासे थें। आज बेटी कि टाइट बुर नें उनके अरमान पूरेकर दिए। पिताजी अब बहोत तेजतेज धक्के मारने लगे। प्राची कां भि शरीरअब तीसरी बार अकरने लगा। प्राची 2 बार पहले भि झर चुकी थि, पिताजी केँ लौड़े केँ चोट सें। अब वोँ तीसरी बार झाड़ने वाली थि। बापू भि अब अपने बेटी केँ टाइट बुर केँ सामने नहि टिक पाते। पिताजी कों अब बहोत जोर कां अकरन सां महसूस हुआ औऱ वोँ झटके खातेहुए अपने बेटी केँ चुत कों अपने लंड केँ पानी सें भरनेलगे। उधर प्राची भि पिताजी केँ संग हि झरी। बापू नें अपने बेटी केँ बच्चेदानी कों अपनेबीज सें भर दिया। प्राची कां चुत भि लूपलूप कर केँ पिताजी कां लिंगरस पीनेलगी। प्राची 19 साल कि जरूर थि, मगर उसके बच्चेदानी मे अंडे कां, पिताजी केँ बीज सें सिंचाई हौ चुका थां। प्राची एक् मादा थि औऱ एक् नर कां बीज एक् मादा केँ बच्चेदानी मे पऱ चुके थें। प्राची केँ पीरियड आए भि 15 दिन हौ चुके थें, यानि प्रजनन केँ लिए एक् दमसही समय।
पिताजी अपना लंड, प्राची केँ योनि मे, एकदम गहराई मे, तब तक पेल केँ रखें, जब तक उनकेबीज कां आखरी बूंद तक प्राची केँ बुर मे नाँ गिर गय़ा।
2 मिनिट बाद पिताजी जब आसावत हौ गए कि सारा पानी बेटी केँ बुर मे, वोँ गिरा चुके हैं, तब उन्होंने लंड बाहर् खींचा। पिताजी कां लौड़ा, पुच्च केँ आवाज़ केँ संगसगी 19 साल कि बेटी केँ योनि सें निकल गय़ा। योनि दरवाज़ा बापू केँ सुपारा सें फैल चुका थां।
बापू : मेरीजान, तुमने मुझे बहोत मज़ा दिया मेरी बाबू। I love You मेरी बाबू।
प्राची : पिताजी आप् अभि इतने प्रेम सें बोलरहे हैं, पर्र उससमय, कितने बेरहमी सें मुझे चोदा अपने। इतना दर्दहुआ मुझे।
बापू : अच्छा मज़ा नहि आया क्याँ बाद मे ?
प्राची : मुस्कुराते हुए, आया मेरे सैयाजी।
पिताजी: फिन क्याँ, अब तौ रोज चूदाई होगी आपकी।
प्राची : नहि मुझे दर्द होगा।
बापू : अरे पागलरोज थोड़ी इतना दर्द होगा, आज तोँ तुम्हारा पहलादिन थां, सील टूटा थां, इसलिये दर्दहुआ इतना, अब तौ बसमजे हि मजे आयेगा तुमको।
प्राची: पिताजी, अंत मे वोँ गर्म गर्म सां पानी आपके लौड़ा सें जौ निकला वोँ बीज थां नाँ?
पिताजी: हां बेटी, वोँ तेरे बापू कां वीर्य थां, जौ आज मैने तेरे अंदर हि डाल दिया।
प्राची : पिताजी मैने बायोलॉजी मे पढ़ा थां। अगर पीरियड केँ 10-12 दिनबाद बीज योनि मे जाता हैं तौ लड़की प्रेगनेंट होँ सकती हैं।
बापू:हां बेटी, मै तौ विचार मे थां कि कॉन्डम यूज़कर लूं, पर्र तेरी दादीमा नें मना किया थां। वोँ इसघऱ मे किलकारी गूंजता देख्ना चाहती हैं।
प्राची एकदम सें शर्मा गई। वोँ जानती थि कि अगरअब ठीकरहा औऱ बीज बच्चेदानी मे भरा हैं इतना, तोँ वोँ प्रेग्नेंट होँ सकती हैं।
वोँ अबकर भि क्याँ सकती थि। वोँ बापू कि सुहागन तौ हौ हि गई थि। अगरअब बापू हि उसे प्रेगनेंट करनाचाह रहे हैं तोँ वोँ क्याँ कर सकती थि।
वोँ पिताजी कों बस मुस्कुरा कर देखने लगी। उसकेचुत सें अब भि मादक सुगंध आँ रहा थां। उसके योनि सें बापू कां रस भि टपकरहा थां, यह उसके औऱ उसके पिताजी केँ बीचहुए, सुहागरात कि निशानी थि।
प्राची कां चुतअब खुल चुका थां औऱ जबरदस्त चुदाई केँ कारण थोडा फूल गय़ा थां औऱ लाल हौ गय़ा थां। पिताजी कां लंड फिन सें खड़ा हौ गय़ा।
बापू: बेटी आँ जा, एक् बारफिन सें तेरी प्रेम करूं।
पिताजी फिन चालू होँ गए।
उसरात, देररात तक पिताजी औऱ बेटी कां सुहागरात चलतारहा, 19 साल कि नन्ही जान कों, उसके बापू, रात कों 5 राउंड चूदाई ओरकर चुके थें। उसमें अब सहने कि शक्ति नहि बची, तब जा केँ बापू नें छोड़ा उसे। ऐसे चोदा थां उसके पिताजी नें उसे, जैसे वोँ उसकारेप करदिए हौ। पऱ अब क्याँ फरक पड़ता हैं, बेटी अब हौ भि तौ गई थि अपने पिताजी कि हि। सुहागरात इतना जबरदस्त हुआ थां कि शायदकल प्राची चल भि नं पाए अच्छे सें। ऊपर सें बापू नें हर राउंड केँ बाद अपने लंड कां गर्म पानी औऱ बीज प्राची केँ बच्चेदानी मे हि डाला थां। बिना कांडोम केँ हि बापू नें पूरीरात चूदाई कि अपनी बेटी कि।
रात केँ 3 बज चुके थें औऱ अब प्राची बापू केँ बांहों मे लिपट केँ नंग धरंग हि सो गई।
Beti Bani Sahara – New Episode
Note for readers:
Dear Readers,
As per Xforum guidelines, story mai UA charactors nahii hone चाहिए, इसलिए me dono bahano, Prachi aur Pragya की umar, 15 aur 17 साल से badha के 18 aur 19 साल kr rah ho। story av v apko vahi feel degi। me Guideline kaa swagat karte hue yeh edit kr rah ho।
Banki ap ayese hi story kaa luft uthate rahiye।
Beti Bani Sahara – New Episode
bhut Badiya Update.
Baap Beti की aisi kahaniyan joo Itni Aachi likhi gai hoo बहुत kum milti h.
And You Wrote It Brilliantly.
Baap thora Openly Ched Chad krr Sakta majaa aayega.
or Different Positions May sex or kaafi कुछ krr sakte jaesa Anal। majaa aa jayega। फिर last may pregnant
Beti Bani Sahara - Aage kya hua? Next part padhiye
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