Beti Bani Sahara – New Episode
Update 15:
सुभह कि मीठी हल्की धूपखिल चुकी थि। घऱ मे एक् चैन वाला सन्नाटा अब भि पसराहुआ थां। यह शांति एक् ऐसी शांति थि जौ किसी तूफान केँ थमने केँ बादआती हें। रात कां तूफान थां हि इतना जबरदस्त। एक् तौ प्यासा 40 साल कां अधेड़ औऱ कामना सें भराहुआ व्यक्ति, ऊपर सें जिसे 2 साल सें महिला कि गर्मी महसूस करने कों नहि मिला हौ, उसकी क्याँ ख़ुशी रही होगीजब उसे एक् कच्ची काली औऱ फुल सि लड़की कों भोगने कां, उसे तोँ एक् सुनहरा मौकामिल गय़ा थां, आप् सोच सकते हैं कितना खुश होंगे बापू।
उधररात कों जब पिताजी नें अपने कि बेटी केँ किले कां दरवाज़ा तोड़ा थां तौ घऱ मे कोई भि उससे अपरिचित नहि रह गय़ा थां। दादीमा कों पताचल गय़ा थां कि उसके बेटे नें अपनी पत्नि बनी बेटी केँ संग अच्छे सें सम्भोग कि क्रिया कि हैं, रात कों। औऱ प्रज्ञा भि इससे एकदम वाक़िफ हौ चुकी थि कि आज सें उसकी दिदी, केवल दिदी कि नहि, उसकी मम्मी भि बन गई हैं, जिसेहर रातअब पिताजी केँ संग बिताना होगा, जैसे सुहाग कि रात दिदी नें बापू केँ कमरे मे बिताया थां।
प्रज्ञा तोँ इतनाडर गई थि, उसरात जब दिदी कि गुटी हुइ चीख सूनी थि उसने। वोँ दादीमा केँ पासभाग गई थि औऱ कितना घबरा सि गई थि वोँ, अपनी दिदी केँ लिए। वोँ तौ दादीमा नें समझाया थां कि असल मे क्याँ हुआ हैं, नहि तोँ प्रज्ञा तौ यही समझती कि बापू नें उसके बेहन केँ संगकुछ कर दिया हैं।
जबरात कों पिताजी कां मोटा लंड अपने प्यारी बेटी प्राची केँ योनि मे धंसा थां, औऱ प्राची जबउसे बर्दाश्त नहि करपाई थि औऱ, उसकीचीख जोँ निकली थि, वोँ दादीमा केँ संग प्रज्ञा केँ कानों तक भि आया थां।
प्रज्ञा तोँ दौड़ते हुए अपनी दादीमा केँ पास पहुंच गई थि औऱ उनसे, अपने दिदी केँ लिए, अपना चिंता, दादीमा सें जाहिर किया थां।
दादीमा नें उसेअब समझाया कि, यह तौ होना हि थां बेटी, एक् लड़का औऱ लड़की कां जब विवाह होता हैं तौ उसे अपने पत्नि कों यह दर्द देना हि पड़ता हैं। वही दर्द तोँ बापू नें दिया थां अपनीफुल सि बेटी कों।
प्रज्ञा : अच्छा दादीमा बापू कां नूनू, दिदी केँ गुगू डालने सें इतना दर्दहुआ हैं दिदी कों?
दादीमा : हां बाबू, पिताजी नें अपना लिंग तेरे दिदी केँ गुप्तांग मे पहलीबार डाला हैं नाँ इसलिये हि थोडा तेरीचीख पड़ी थि, तुँ टेंशन मत लें बेटी, तेरी दिदी बिल्कुल ठीक रहेगी।
प्रज्ञा : पर्र दादीमा, क्याँ यहहर लड़की कों करना हि पड़ता हैं।
दादीमा : बेटी इंसान केँ जिंदगी कां यह तौ एक् जरूरी अध्याय हैं। विवाह होना, विवाह होने केँ बाद बच्चे होना, फिनउस बच्चे कों पालना औऱ उसे फलते फूलते देख्ना, यही तोँ जिंदगी कां सार हैं बेटी, ओर उसकी शुरुआत तोँ सुहागरात सें हि होती हैं। औऱ सुहागरात मे हर लड़की कों यह करना पड़ता हैं बेटी, यह दर्द सहना पड़ता हैं।
प्रज्ञा : हां दादीमा कही तौ सुनी थि मैने कि एक् लड़काअगर लड़की केँ संग सेक्स करता हैं, तौ लड़की कों बच्चा ठहर जाता हैं। पता हैं दादीमा, मै बहोत दिनों सें इसगलत फाहमी मे थि कि अगरकोई लड़का kiss करता हैं, किसी लड़की कों तौ वोँ प्रेगनेंट हौ जाती हैं। मुझे इसके बारे मे बिल्कुल पता नहि थां कि नुनु लड़की केँ गुगु मे घुसने कों सेक्स बोलते हैं।
दादीमा प्राची केँ नादानी पे हस पड़ी : हाहाहाहाहा, अरे नहि बेटी, अब जौ पिताजी औऱ दिदी कररहे हैं, उसे सेक्स कहते हैं, उस सें भि बच्चा नहि होता, बच्चा तोँ तब ठहरता हैं जब सेक्स केँ बाद लड़का अपनीकाम रस लड़की केँ बुर मे डाले।
प्रज्ञा : हांय्ह्ह, दादीमा कामरस क्याँ होता हैं?
दादीमा अबसमझ गई, कि उसे अपनी पोती कों आज एक् शिक्षिका केँ तरहअब बताना पड़ेगा।
यहसभी ज्ञान दादीमा उस वक्त प्रज्ञा कों देने वाली थि जब कमरे केँ अंदर पिताजी अपनी बेटी केँ गुप्तांग मे, अपने मर्दानगी कि निशानी कों घुसाए, मज़ा लेँ रहे थें औऱ अपनी बेटी कों भोगरहे थें।
दादीमा : प्रज्ञा लगरहा हैं अब तूँ भि बारी होने कों आतुर हौ गई हैं। चल मे तुम्हारी तरफ बताती हि कि एक् पति ओर पत्नि कां नाता क्याँ होता हैं, औऱ वोँ केसे बनता हैं।
प्रज्ञा एक् जियासु बच्चे कि तरह दादीमा कि बाते सुनने कों सजधजकर थि।
प्रज्ञा : हां दादीमा बताइए।
दादीमा : देख बेटी, इतना तोँ तुझेही पताचल हैं कि सेक्स केसे होता हैं। लड़का अपना नुनु, यानी कि लिंग याँ लंड याँ लौड़ा, सब नुनु केँ हि नाम हैं, किसी लड़की केँ गुगु, यानी बुर याँ गुप्तांग याँ चूत याँ योनि, सब गुगू केँ नाम हैं, उसमें घुसाता हैं तोँ उसे सेक्स बोलते हैं। अब वोँ घुसाने कां भि एक् लंबा तरीका होता हैं, लिंग कों लड़की केँ योनि मे डाल केँ लड़का उसको अंदर-बाहर् लगातार करता हैं, औऱ फिन सेक्स केँ अंत मे लड़के औऱ लड़की कों चरमसुख मिलता हैं, वोँ तरीका करने केँ बाद हि बच्चा पैदा होँ सकता हैं, चरमसुख यानि लड़के केँ लिंग सें एक् गाढ़ा सफ़ेद रस निकलता हैं तौ उसे सेक्स करने केँ समय एक् दमअंत मे आता हैं। वोँ, उस लड़का कों लड़की केँ योनि मे भरना पड़ता हैं, तभी वोँ बच्चेदानी मे जा केँ अंडे कि सींचता हैं औऱ फिनसभी सहीरहा तौ लड़कीपेट सें होँ जाती हैं।
दादीमा प्राची कों उसी केँ भाषा मे समझारही थि। वोँ अपने नादान पोती कों सभीबता रही थि।
प्रज्ञा कां जिज्ञासा औऱ बढ़ गय़ा।
प्रज्ञा : दादीमा, यानी पिताजी, वोँ अपना लंड अभि दिदी केँ बुर मे डालदिए हैं, औऱ अब अंदर बाहर् कररहे हैं, इसीलिए बिस्तर भि चोई-चोई औऱ दिदी कां पायल छन-छनकर रहा हैं, अब मे समझी दादीमा।
दादीमा : हां बेटी, तुँ बिलकुल सही हैं।
प्रज्ञा : तोँ क्याँ दादीमा, बापू दिदी केँ भि योनि मे अपना गढ़ा सफेद पानी डालेंगे।
दादीमा : हां बेटी वोँ डालेंगे, औऱ उस गाढ़े सफेद पानी कां नाम, वीर्य होता हैं। वोँ बीज कि तरहकाम करता हैं लड़की केँ बच्चेदानी मे।
दादीमा नें, अपने पोती कों सच मे जिंदगी कां परम ज्ञान दिया थां आज। प्रज्ञा कों अबहरचीज कां मतलबसमझ आनेलगा थां।
प्रज्ञा : दादीमा पिताजी कब तक दिदी केँ योनि मे अंदर बाहर् करते रहेंगे।
दादीमा : बेटी अंदर बाहर् करने कों चोदना याँ चूदाई करना बोलते हैं। बापू तेरी दिदी कों तब तक चोदेंगे जब तक अपना वीर्य प्राची केँ योनि मे न् डालदे बेटी।
प्रज्ञा अबहरबात समझ गई। तभीउसे औऱ दादीमा कों महसूस हुआ कि, प्राची केँ आहे भरनाओर तेज़ होँ गय़ा थां औऱ बिस्तर भि औऱ तेजचोई चोई करनेलगा थां।
प्रज्ञा : दादीमा, पिताजी बहोत जोर सें दिदी कि चूदाई केँ रहे हैं नाँ।
दादीमा : हां बेटी, पिताजी अच्छे सें चुदाई केँ रहे हैं तेरे दिदी कां।
प्रज्ञा : दादीमा, मुझे भि यह महसूस करना हैं, मैनेअब तक यहकभी अनुभव नहि किया हैं। बापू कों कहो न् मुझे वोँ एक् बार चोदे।
दादीमा प्रज्ञा केँ नादानी पे हंसी पड़ी : अरे पागल, तुम्हे पिताजी केसे चोदेंगे, प्राची केँ तौ विवाह हैं बापू केँ संग, वोँ उनकी पत्नि हैं अब, उसेजी भर केँ चोद सकते हैं तेरे पिताजी। तूँ बेटी हैं उनकी, वोँ तुझेही केसे चोदेंगे।
प्रज्ञा : दादीमा घऱ दिदी पिताजी कि घरवाली हैं, तोँ मे भि बापू कि साली हुई नाँ, यानीआधी घरवाली, पिताजी नें हि मुझे बोला थां।
दादीमा उसकी नादानी पे एकदमहस पड़ी : हाहा, धत पहली, किसी वोँ व्यक्ति कि २ पत्नि थोड़ी होती हैं।
प्राची : दादीमा तोँ मेरी भि विवाह करदो नं बापू सें, पहले केँ राजा केँ पास तोँ बहोत सि पत्नि होती थि, फिन क्यूं नहि कर सकते विवाह।
दादीमा नें बोला: बेटी, तूँ अपने हि दिदी कि सौतन बनाना चाहती हैं। तेरी दिदी तोँ तेरेइस तरह केँ जिद सें टूट जाएगी। उसकीनई नई विवाह, उसकीनई दुनिया टूट जाएगी मेरी बच्ची।
प्रज्ञा कों अबहोश आया कि वोँ तोँ अपनी दिदी कां हि हक मारना चाहरही थि। उसे तोँ सेक्स केँ बारे मे सुन केँ इतना खुशीआया औऱ पिताजी औऱ दिदी कि विवाह केँ बाद बापूजिस तरह सें दिदी कों चोदरहे थें उसनेउसे रोमांचित कर दिया थां इसलिये वोँ ऐसेबोल परी थि। उसे अपनी गलती कां एहसास हुआ।
प्रज्ञा : ओह, दादीमा मै तौ आपकी बातें सुन केँ इतना रोमांचित हौ गई थि कि मैनेऐसी बातकर दि। मुझेमाफ करदो दादीमा
दादीमा : कोई नहि मेरी बच्ची, मै तेरी मनोदशा समझरही हु।
पिताजी ओर प्राची कां सुखद चीत्कार दोनों दादीमा औऱ पोती कों रातभर सुनाई देतारहा, प्रज्ञा दादीमा केँ रूम मे हि सो गई थि रात मे।
आज सुभह, सारेघऱ मे एक् नए रिश्ते केँ आगाज केँ संग शुरुआत हुआ हैं।
रात केँ सुहागरात केँ बाद, पिताजी कि नींद सबेरे 8 बजेजब खुली, उन्होंने अपनी बाहों मे नंगी पड़ी अपनी बेटी कों सोताहुआ पाया। पिताजी अपने आप् कों आज पूरा मर्द महसूस कररहे थें। रात कों वोँ पल पिताजी कों याद आँ गय़ा जब वोँ बेदर्दी सें अपनी बेटी भोगरहे थें। अहह कितना आनंद दिया मेरी बेटी नें मुझे। बापू अपने आप् पे गर्व भि महसूस केँ रहे थें, क्योंकि वोँ 5 बार जन्नत कां सैरकर चुके थें औऱ बेटी कों तौ पता नहि कितनी बारचरम सुख तक पहुंचाया थां।
बापू एक् टक सें रात कों चोदी हुई बेटी कों देखने लगे।
अभि उनकी बेटी एक् दम शान्त समंदर कि तरहलग रही थि। रात कों तौ बापू नें इस समंदर मे इतने गोते मारे थें म, कि यह समंदर रातभर हिलकोरे मरतारहा थां।
पिताजी अपनी बेटी कि मासूमियत भरा चेहरा देखते रहे। उन्हें अपने बेटी पे प्रेम आँ रहा थां। रात कों कितना दर्द दिया थां उन्होंने अपनेसगी बेटी कों। प्राची केँ बुर कि तरफजब बापू कां ध्यान गय़ा तोँ उन्होंने देखा कि योनि कां बाहरी हिस्सा डबल रोटी कि तरह फूलाहुआ थां एकदमलाल होँ गय़ा थां। उसका छिद्र पहले सें बहुत बड़ा हौ गय़ा थां यानी कि वोँ अबकली नहि फूलबन चुकी थि। उसके गर्दन, मम्मों ओरपेट हर स्थान पे लाललाल काटे कां निशान बापू केँ बेरहमी कां गवाही देरहा थां, कितने लव बाइटदिए थें एक् बाप मे अपनी बेटी कों, संभोग केँ संयम।
अब भि प्राची रात केँ थकान केँ बाद पिताजी केँ सामने निर्वस्त ऐसे पड़ी हुई थि कि वोँ पिताजी कि गुलाम हौ।
इधर दादीमा वीउठी हुइ थि औऱ उसकोउठे हुए१ घंटा हौ चुका थां।
अभि तक नए दूल्हा औऱ दुल्हन कां दरवाजा बंद थां, जोँ उनके बेटे नें, उनकी पोती केँ संग, कल रात कों सुहागरात मनाने सें पहलेबंद किया थां।
दादीमा अबओर इंतजार नहि करना चाहती थि अपने पोती कां हालचल लेने केँ लिए वोँ, जानती थि कि उसके योनि मे आज कितना दर्द हौ रहा होगा औऱ उसको दादीमा कि जरुरत होँ सकती हैं।
दादीमा सें रहा नहि गय़ा औऱ वोँ अपने बेटे औऱ बहू केँ कमरे कि ओरचल दि।
बापूइधर अपनी बेटी कों सोतेहुए एक् टक सें निहारे जारहे थें, वोँ उसकी बनावट औऱ सुंदरता केँ कायलहुए परे थें।
तभी बाहर् सें दादीमा नें हल्का सां गेट पे दस्तक किया: बेटा, बेटा।
पिताजी - हांमा।
बापू भि उसी नग्न अवस्था मे हि दादीमा कों जवाब दिया।
दादीमा : बेटा, दरवाजा खोल नं। प्राची ठीक हैं न् तोराजी घबरा हैं उसकेलिए।
प्राची रात केँ थकान केँ बाद थोड़ी गहरी नींद मे पड़ी हुइ थि।
बापू: मम्मी थोडा वक्तदो, हम् थोड़े ऐसे अवस्था मे हैं कि थोडा वक़्त लग जाएगा।
दादीमा समझ गई कि बेटा ओर पोती अंदरअब वी नंगे हि परे हैं। दादीमा लौट केँ जाने हि वाली थि पऱ मन मे एक् विचार आँ गय़ा।
दादीमा - बेटा, कोईबात नहि मुझेजरा हाल लेनेदे अपनी पोती कां, बहोत जी घबरारहा हैं मेरा, रात कां चीखसुन केँ।
बापूसमझ गएरात कों जौ प्राची कि बुर कि झिल्ली उन्होंने अपने लिंग सें फारी थि औऱ उससमय प्राची नें चीखा थां वोँ माँ केँ कानों तक गय़ा थां। पिताजी शर्मिंदा होँ गए थोडा।
दादीमा २ मिनट इंतजार केँ बादसमझ गई बेटा द्वार (दरवाज़ा) खोलने मे संकोच कररहा हैं।
उन्होंने थोडा दिलासा दिलाते हुएकहा : कोईबात नहि बेटा, मै जानती हु तुम् दोनों अब नग्न अवस्था मे होगे। पर्र मुझसे क्याँ शर्माना।
बापू दादीमा कि बातमान कर, प्राची केँ ऊपर चादरडाल दिया ताकि वोँ नंगी नं दिखे दादीमा कों औऱ अपने नीचेकमर मे एक् तौलिया बांध केँ दरवाजा खोला : जी माँ बोलिए।
अंदर प्राची अब भि बेसुध पड़ी थि।
दादीमा : बेटे, रात कों सभी अच्छे सें हुआ न्।
बापू:हां मा, मैनेअब अच्छे सें किया।
दादीमा : मेरी पोती कैसी हैं बेटे। (यह प्रश्न करती हुइ दादीमा रूम केँ अंदर तक आँ गई)
पिताजी : ठीक हि हैं मम्मी वोँ भि।
दादीमा कों पता थां कि उनकी पोती नें 40 साल केँ मोटे लिंग कों सहा हैं रात कों। वोँ ठीक नहि होगी। वोँ जानती थि जैसा दादीमा नें कलरात कों अपने पोती कों, अपने बेटे केँ रूम मे छोड़ा थां, औऱ रात कों जैसा वोँ चीखी थि, वैसा वोँ बिल्कुल नहि होगी जैसा वोँ कल सुहागरात सें पहले थि।
दादीमा नें प्राची केँ तरफ देखा। वोँ अब भि बेसुध चादर ओढ़े पड़ी थि। ऐसालग रहा थां कि रात कों बहोत थक गई थि औऱ थकान केँ कारण अभि वीसोरही थि। दादीमा नें गर्दन पे ध्यान दिया तोँ उनको बापू कां दियाहुआ लव बाइटदिख गय़ा उन्हें। पिताजी नें यहभाप गए औऱ थोडा नज़ारे नीचीकर लिया।
दादीमा नें बापू कों बोला- बेटा एक् मिनिट केँ लिए दरवाज सटादे जरा, अपने पोती कों देख्ना हैं मुझे। तूँ व्यक्ति हैं औऱ एक् स्त्री कां तकलीफ तुँ नहि समझ सकता। एक् बार मे अवलोकन कर लूंगी तोँ आश्वस्त होँ जाऊंगी।
पिताजी दादीमा कों मना नहि कर सकते थें, आखिरमा नें हि तोँ उनकी उनके बेटी केँ संग मिलन करवाया थां। वोँ उनकी गार्जियन थि।
बापू नें दरवाजा हल्के सें भीरा दिया।
दादीमा : बेटे, अपनी दुल्हन कां जरा चादरहटा तोँ।
बापू थोड़े झेप सें गए। वोँ समझगए कि जोँ कलरात कों उन्होंने अपने बेटी केँ संग बेदर्दी सें शंभोग किया थां उसका सबूत उनकी मम्मी कों दिख जाएगा।
दादीमा नें फिन सें कहा : मुझे देख्ना हैं बेटे अपने पोती कों। चादरहटा तुँ।
बापू नें प्राची कां चादरउठा दिया, दादीमा केँ सामने प्राची पूरी नंगी हि पड़ी थि।
पिताजी अपनी नजरें नीचेकिए हुएवही खड़े थें।
दादीमा नें ऊपर सें नीचे तक अपने पोती केँ नंगे जिस्म कां अवलोकन किया। प्राची केँ जिस्म मे बहुत बदलाव दिखरहे थें दादीमा कों, क्योंकी दादीमा नें विवाह सें पहले भि प्राची कों नंगीकर केँ अवलोकन किया थां। प्राची केँ योनि एक् दम सुजाहुआ प्रतीत होँ रहा थां। स्थान स्थान जिस्म पे लाललाल कटे कां निशान गवाही देरहे थें कि पिताजी नें रात कों शानदार तरीके सें बेटी कों भोगा हैं।
दादीमा 5 minute तक अपने बेटे कि दुल्हन कों देखी औऱ समझ गई कि अबउसे प्राची कां ख्याल रखना पड़ेगा कुछ दिनों तक, बुर पे हुईं सूजन कों देख केँ लगरहा थां कि शायद वोँ चल भि नाँ पाए 1-2 दिन औऱ सेक्स तौ 5-6 दिनों तक नहि हि होना चाहिए।
दादीमा नें बापू कों बोला : बेटा इसकी तोँ तूने हालात खराबकर दि हैं। मैने तुम्हारी तरफ बोला थां कि धीरे-धीरे करना, तूने तौ इसको बेदर्दी सें किया हैं। देख केँ लगरहा हैं तूने मेरी पोती कां रेप हि कर दिया हैं। यह क्याँ किया तूने ?
पिताजी: मा, मैने तोँ बस जैसे करते हैं वैसे किया थां। अबसील तोड़ने केँ लिए थोडा तौ बेदर्द बनाना हि पड़ा, नहि तौ इसे तोँ इतना दर्द होँ रहा थां यह तौ अंदर हि न् प्रवेश करने देती मम्मी।
दादीमा बापू कि बातसमझ रही थि, पऱ पोती पर्र हुईँ बेदर्दी सें उन्हें पता थां कि प्राची कि ऐसी हालत सिर्फ़ सील तोड़ने सें नहि हुई हैं।
दादीमा : अच्छा तूने केवलसील तोड़ी ओर इसकी योनि कि यह हालत होँ गई ? सहीसही बता कितनी राउंड किया ?
पिताजी पकड़े गए थें। अबझूठ नहि बोल सकते थें।
बापू: 5 राउंड मा।
दादीमा : क्याँ। ?? तुम्हे पता थां नं, कि यह तेरी 19 साल कि बेटी हैं। मैनेमान लिया कि तेरी सुहागरात थि तौ सील तोड़ना जरूरी थां। मगर तुँ तोँ स्वार्थी केँ तरह पूरीरात अपनीफूल सि बेटी कों रौंदता रहा। 5 बार करने सें पहले तेरादिल नहि दहला ? एक् बार मे सुहागरात हौ गय़ा थां न् पूरा? तोँ फिन 5 बार करने कि क्याँ जरूरत थि तुम्हारी तरफ? मे तेरी क्याँ हैं?
बापूअब अपनी गलती कां एहसास कररहे थें: मेरी पत्नि औऱ बेटी हैं माँ।
दादीमा - तौ तूने इससे रण्डी समझ केँ इसके आनंदरात भर लें लिया ? अब इसकी इतनीदेख भाल करनी पड़ेगी मुझे, शायदयह चल वोँ नां पाए अभि।
पिताजी: माफ केँ दो मुझेमा। मै थोडा हवस मे बह गय़ा थां।
दादीमा : अब क्याँ फायदा, नुकसान तोँ तेरा हि हैं, एक् बार करता तौ आजरात एक् दम स्लिम रहती बेटी तेरी, तूँ फिन संभोग कर सकता थां। इसकी हालतदेख केँ तोँ अब तुँ 1 सप्ताह केँ लिएनई दुल्हन केँ संगरात कां मिलनभूल हि जा।
पिताजी शर्मिंदा थें।
दादीमा : चलअब मुंहमत बना। पता हैं २साल सें तुँ प्यासा थां मेरे बेटे। मगर तुम्हें ऐसे तोँ नहि संभोग नहि करना चाहिए थां नाँ। अपनी बेटी हैं तेरी, कोई बाजारी स्त्री नहि। तेरी पत्नि हैं। रोजघऱ मे तेरेलिए हि उपलब्ध रहती नाँ। चलअब मे चलती हि, इसे नींद सें जगा औऱ दोनों जन बाहर् आओ फ्रेश होके, तुम् दोनों कों एक् पूजा करनी हैं। रिवाज हैं कि विवाह केँ बादनई दुल्हन औऱ दूल्हा संग करते हैं अपना पहला पूजा, सुहागरात केँ बाद।
बापू : ठीक हैं माँ, आते हैं, आधे घंटे कां टाइम दीजिए हम् दोनों कों।
दादीमा फिन सें प्राची पे चादरडाल दिया। औऱ कमरे सें बाहर् चली गई।
बापू थोड़े स्तब्ध हौ गए। पऱ अब वोँ अपनी गलती कां एहसास कररहे थें। बेटी कों पूरीरात उन्हें नहि रौंदना चाहिए थां।
खैर दादीमा केँ बात कों इनको बापू कों कोई बुरा नहि लगा, वोँ जानते थें दादीमा पोतियों सें औऱ उनसे कितना प्रेम करती हैं। ग़लती करूंगा तोँ डांटेगी भि।
वोँ अब प्राची कों उठाने चलदिए।
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 16:
बापू नें प्राची कों आवाज़ लगाई : बाबू, ओ मेरी रानी, उठ भि जा मेरी दुल्हनिया।
पिताजी कि आवाज़ केँ संग हि प्राची कां निद्रा भंग हौ गय़ा। प्राची नें धीरे-धीरे सें अपनी आंखें खोली औऱ महसूस किया कि वोँ नंगी हि अपने पति याँ पिता, जोँ भि कहलो, केँ सामने पड़ी थि।
वोँ जरा सां झेप सि गई, रात केँ अंधेरे मे जोँ भि बापू नें उसकेसंग किया वोँ तौ ठीक थां, मगरदिन केँ उजाले मे उसका जिस्म कुछ अधिक हि देखने योग्य लगरहा थां। प्राची चादर अपनेऊपर लेँ लिया औऱ थोडा उठने कि कोशिश कि। हायय्ययय। मेरी गुप्तांग.प्राची कों एक् बहोत तेज दर्द महसूस हुआ। उसने अपने बुर कि तरफनजर घुमाई। अरे दोस्त.यह तोँ पूराशूज गय़ा हैं। बापू नें जैसे हि अपने बेटी कि मनोदशा देखी उनकेदिल मे एक् शर्मिंदगी सि महसूस हुआ।
पिताजी: क्याँ हुआ प्राची।
प्राची : पिताजी, अहह, बहोत तेज दर्द होँ रहा हैं वहां पे।
बापू:ओह, मुझेमाफ केँ दे बेटी, मैरात कों कुछ जायदा हि भावना मे बह गय़ा थां, होश हि नहि रहा कि तुँ एक् कुंवारी लड़की थि कलरात सें पहलेओर थोडा धीरे-धीरे करना चाहिए औऱ मुझे इतनादेर तक तुम्हारी योनि मे घर्षण नहि करना चाहिए थां। एक् तोँ सील टूटीकल तुम्हारी उसका दर्द औऱ फिनआज यह दर्द। सॉरी बेटी मुझेमाफ केँ दे।
प्राची थोड़ी रूआंसी सि हौ केँ बोलीं : पिताजी इसमें आप् कि गलती थोड़े नां हैं। आप् कों किसी महिला कां स्पर्श बहोत दिनों सें नहि मिला थां तौ आप् मुझेकल जीभर केँ चोद लेना चाहते थें औऱ अपने किया वोँ वैसा हि। मे आप् पे क्रोध भि नहि हु। मेरा तोँ कर्तव्य थां, कलरात कों आपकासंग देना। आप् मेरे पति जोँ बनगए हैं अब सें।
बापू:वाउ बेटी अब तौ तूँ सयानी बिटिया केँ जैसे बाते करनेलगी हैं। मे वादा करताहु कि अब सें मे तुझेही बहोत प्रेम करूंगा बेटी।
प्राची अपने पिताजी सें लिपट जानां चाहती थि मगर बुर कि दर्द नें उसे उठाने तक नहि दिया।
चल बेटी थोडा हिम्मत कर औऱ उठ केँ नहा लें।
प्राची अपना सारादम लगा केँ उठनाचाह रही थि, पऱ उसे तौ ऐसालग रहा थां कि बापू नें उसका शरीर तोड़ केँ रख दिया हैं कलरात। उसकेबदन मे जान हि नहि हैं। वोँ तौ रात कों पिताजी कां संग देने मे इतना छड़ी थि कि उसका सारा उर्जा हि खत्म होँ गय़ा हौ जैसे।
प्राची : अहह, पिताजी मैउठ हि नहि पारही।
बापू केँ पासअब कोई मार्ग नहि थां। बापू नें अपने दराज मे रखे एक् पेन किलर दवाई प्राची कों खिला दि औऱ कहा : बेटी तेरा दर्द थोड़े देर मे छू मंतर होँ जाएगा। अब केँ लिएचल मेरेसंग मै तेरी फ्रेश होने मे सहायता करताहु।
प्राची : पिताजी आप् केसे मेरी सहायता कर पाएंगे।
पिताजी: अरे मे तुझेही अपनी बाहों मे उठा केँ लेँ चलताहु बाथरूम।
प्राची थोडा शरमाई औऱ बोला: बापू, नहि नहि यहमत करिए मुझे बहोत लज्जा आएगी।
बापू : बेटी, अब मे तेरा पति हु, रात कों तुझेही पूरी कि पूरी नंगीकर केँ तेरी आबरू सें खेलाहु। तेरी गहराई कों अपने मर्दानगी सें नापा हैं मैने। तेरे स्तनों कां स्वाद चखाहु। तेरी बच्चेदानी नें मेरा आखरी बूंद तक निचोड़ा हैं औऱ मैनेउसे अपनेबिज सें सींचा हैं। अब मुझसे क्याँ शर्माना मेरी रानी। आँ मेरी बाहों मे।
इतनाबोल केँ बापू नें प्राची कां चादरहटा केँ उसके शरीर कों फिन सें नंगाकर दिया।
उसे अपने बाहों मे भर केँ जकड़ लिया औऱ उठा दिया। वोँ नग्न१९ साल कि यौवन सें भरी, शर्माई सि, बापू कि बाहों मे झूल सि गई।
उसे बापू नें बाथरूम मे लें जाकर कमोड पे बिठा दिया औऱ बोला, बेटी जब तेरा हौ जाए तोँ मुझे बुला लेना, स्वयं सें उठाने कि कोशिश न् करना।
पिताजी बाथरूम सें बाहर् निकलगए। वोँ बाहर् तौ आँ गए पऱ उनका लंड फिन सें हिचकोले मार केँ तन गय़ा। पूरे८ इंच लंबा विकराल लंड।
उधर१० मिनटबाद प्राची नें पिताजी कों आवाज़ लगाई : पिताजी मेरा होँ गय़ा, आप् आँ जाइए।
बापू अंदरगए तोँ प्राची अपने नित्य क्रिया सें निपट चुकी थि औऱ कमोड सें उठने कि कोशिश कररही थि, पिताजी नें एक् स्टूल जोँ रूम मे पर्र थां उसेबाथ रूम मे लगा दिया औऱ प्राची कों उसपे बिठा दिया, उसको ब्रश कराया, औऱ फिन नहाने कि तैयारी मे लगगए।
पिताजी : बेटी आज बरसोबाद मनकररहा हैं कि तेरेसंग नहालु। तेरी मां केँ संग वोँ मैने बहोत दिनों सें नहि नहाया थां।
प्राची कि यह बहोत रोमांटिक लगा:जी पिताजी, आप् जैसाठीक समझे।
पिताजी नें प्राची केँ हामी सुनी औऱ उनकातना हुआ लिंग औऱ ऊफान मरनेलगा।
उन्होंने तौलिया खोल केँ लंड कों आजादकर दिया, अपने पत्नि बनी बेटी केँ सामने। रात कों पिताजी केँ संग सुहागरात तौ जरूर हुई थि प्राची कि, पऱ लज्जा केँ मारेरात कों वोँ पिताजी कां औजार हि नहि देखपाई थि। उसके मुंह सें निकल गय़ा : बाप रे.पिताजी अपने इतना बड़ा घुसाया थां मेरी गुप्तांग मे।
बापू:हां बेटी, रात कों इसी नें तेरी बुर दरवाज़ा तोड़ा थां।
प्राची अपने आप् पे विश्वास नहि करपारही थि कि इतना विकराल लण्ङ उसके छोटी सें गुप्तांग मे गई केसे।
पिताजी कों अब नंगी प्राची कों देख केँ बहोत ज़्यादा जोशचढ़ गय़ा, मगर वोँ अभि चाह केँ भि प्राची मे प्रवेश नहि कर सकते थें। उन्होंने एक् अलग उपाय निकाला।
पिताजी: प्राची मेरीजान, मेराफिन सें मनकररहा हैं, देखरही हैं नं कितना अकड़ केँ खड़ा हैं यह तेरे नग्न दर्शन केवल सें। इसे थोडा शांतकर दोगी।
प्राची अंदर सें दहल गई : बापू.यह केसे.नहि नहि, पिताजी.रहम करिएमुझ पे.मेरीयह हालत नहि हैं कि यहमै लें पाऊंगी अभि। बहोत दर्द हौ रहा हैं पिताजी मेरी गुप्तांग मे। प्लीज़ पिताजी.मुझे छोड़ दीजिए।
पिताजी: अरे पागल., इसे हमेशा तेरे गुप्तांग मे डाल केँ हि शान्ति नहि मिलेगा मुझे। अभि तोँ मे इसेअगल तरीके सें तेरे अंदर डालूंगा।
रची : केसे पिताजी?
पिताजी: तेरे दोनों होंठों केँ बीच सें यह तेरे अंदर जायेगा औऱ तूँ इसेचूस चूस केँ शान्त कर सकती हैं।
प्राची केँ लिए एकदमनया सां बात थां। बापू अपना लंड उसके मुंह मे देने कि बातकर रहे थें। पऱ उसेयह अपनेचुत मे लेने सें ज़्यादा आसानलगा।
प्राची : अच्छा पिताजी, तौ यह करना चाहते हैं आप् मेरेसंग।
बापू:हा मेरी सैक्सी बेटी, मेरी सहायता कर।
बापू नें वोँ स्टूल एकदम झरना केँ नीचेलगा दिया औऱ पानीचला दिया। प्राची कां जिस्म भीगने लगा। पिताजी भि प्राची केँ सामने आँ गए औऱ अब प्राची कां मुंह बापू केँ लिंग केँ एकदम सामने थां।
लो बेटी, थोडा अपना मुंह खोलो औऱ इसे अंदर अपने मुंह मे जानेदो। मुंह मे लेँ केँ, लॉलीपॉप समझ केँ इसे वैसे हि चूसना।
प्राची नें वैसा हि किया। वोँ पहले अपनेजीभ सें बापू केँ लिंग कां सुपारा कों छुआ।
उसे बापू केँ लंड कां स्वाद थोडा कसैला सां लगा। मगर लण्ङ सें निकलरहा प्रीकम कां सुगन्ध प्राची कों वोँ पागलकर रहा थां। पिताजी नें प्राची केँ दोनों मम्मों अपने हाथों सें थाम लिया औऱ दबाने लगे। प्राची धीरे-धीरे धीरे-धीरे बापू कां लौड़ा कों अपने मुंह मे इंचबाई इंच अन्दर लेतीरही। लण्ङ कि मोटाई सें प्रज्ञा कां मुंह एकदम ज़्यादा ज़्यादा खुलरहा थां। वोँ आहिस्ता पिताजी कां लिंग कां रसपान करनेलगी। Sruuuppp.sruuppppp, chapppppppp-chapppp, gooooooo। गोओओप्प कि आवाज़ औऱ झरने सें पानी गिरने कि आवाज़ सें पूराबाथ रूम गूंजउठा।
पिताजी कों परम खुशी महसूस होनेलगा थां। अपनी बेटी सें विवाह कर केँ उन्होंने बहोत सही फैसला किया थां। एक् दम मखमली गुलाब कि पंखुड़ी जैसे होंठों सें उनकी बेटी बापू कां लंड अपने मुंह मे लिएजा रहीथीं।
पिताजी नें धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई औऱ फुलजोश मे अपना लण्ङ अन्दर बाहर् प्राची केँ मुंह मे करनेलगे। प्राची किसी अल्हड़ लड़की केँ जैसे लंड चूसरही थि, इसेपता चलरहा थां कि उसनेऐसा पहलीबार किया हैं। बापू कां लिंग अपने बेटी केँ हलक तक चला जाताकभी ओरबीच बीच मे प्राची कां सांस तक फंसकर रह जाता थां, फिन पिताजी अपना लौड़ा बाहर् खींच लेते थें, औऱ उसकेजान मे जानआती थि।
गप्प गप्प, गुप्प गुप्प कि आवाज़ सें लंड अबसटा सट प्राची केँ मुंह मे जारहा थां। करीब-करीब १० मिनट केँ अंतराल केँ बाद बापू इतना मखमली एहसास केँ आगेहार गए औऱ उनका पानी अपनी पुत्री केँ गले मे हि उतर गय़ा। प्राची कां मुंह बापू केँ गर्म वीर्य सें भर गय़ा। उसेपता नहि थां कि वोँ उसे क्याँ करे, बाहर् थूकदे याँ गटकजाए।
पिताजी उसकी इशारे कों समझते हुएउसे इशारे मे हि बोला कि गटकजाओ।
प्राची तौ नादान थि, वोँ बापू केँ कहे अनुसार एक् घुट मे सारा पानीपी गई। पिताजी बहोत खुशहुए क्योंकि उनका लण्ङ कां स्वाद अब उनके बेटी कों पताचल गय़ा थां। कल तौ सारा पानी बापू नें प्राची केँ बुर कों हि पिलाई थि। आज सारा पानी प्राची केँ हलक सें नीचे गय़ा थां।
प्राची कों पिताजी कां गर्म पानीपी केँ थोडा अजीब जरूरलगा। पर्र अब वोँ पिताजी कों मन थोड़ी कर सकती थि।
बापू: बेटी, कैसालगा प्यार रस कां स्वाद।
प्राची : बापू, अच्छा लगा। बहोत गरम थां।
बापू: थैंकयू मेरी बच्ची, तूने मेरे अरमान पूरे केँ दिए। आँ मै तुम कोनहा देताहु अब।
बापू नें प्राची कां हरअंग रगड़ रगड़ केँ उसे नहाया। अब उनकाहाथ, प्राची केँ नंगीपीठ पर्र फिरता, तौ कभी मम्मों कि गोलाई नापता। कभी बुर पे उगे हल्के हल्के बालों कों सहलाता तोँ भि बुर केँ दाने कों छेड़ते। पिताजी कां हाथ प्राची कि मनोदशा खराब करनेलगा, वोँ परमसुख केँ तरफ बढ़ने लगी। ५ मिनट केँ, पिताजी केँ हाथ सें, छुअन केँ बाद हि प्राची केँ बुर गीली हौ केँ बहने लगीं, उसके मुंह सें अचानक कि एक् लंबीअहह निकली, उसका जिस्म अकरस गय़ा। बापूसमझ गए प्राची झर चुकी हैं।
अब दोनों बाप बेटी पूरानहा केँ एक् दूसरे कों तौलिया सें सूखने लगे। पिताजी नें प्राची केँ हरअंग कों तौलिया सें पोंछा, ओर बाहों मे भर केँ हि बाहर् आँ गए। प्राची कों बापू नें कपड़े स्वयं केँ हाथों सें पहनाया औऱ प्राची केँ मांग मे सिन्दूर भरा। प्राची नें पिताजी कों प्रणाम किया औऱ पिताजी केँ सहार लें केँ बाहर् कि ओरचल दि। पेन किलर केँ कारण हि वोँ थोडा उठपाई औऱ बापू केँ सहारा लें केँ, लड़खड़ा केँ चलपरही थि।
रूम कां गेट खुलते हि दादीमा पूजा केँ लिए दोनों कों लेँ केँ पूजाघऱ कि ओरचल दि। दादीमा पोती कि यहदशा देख केँ अब चकित नहि हुईँ थि, क्योंकि वोँ प्राची कि हालतउसे सोतेहुए ममे हि देखली थि। गरिमट थि कि वोँ अबचलप रही हैं। दादीमा नें सोचा पूजा केँ बाद वोँ प्राची सें थोडा बात करेगी औऱ उसे थोडा आराम मिले उसका वोँ कुछ उपाय करेगी।
३० मिनटबाद पूजा खत्म हौ चुका थां। औऱ घऱ मे सब ब्रेकफास्ट करनेचल दिए।
Beti Bani Sahara – New Episode
Update 17:
जब प्राची बाहर् आई लड़खड़ाते हुए, प्रज्ञा कों समझ आँ गय़ा कि दिदी कि चल बापू नें हि बिगड़ी हैं।
प्रज्ञा दादीमा सें धीरे-धीरे सें बोलीं : दादीमा, दिदी कों क्याँ हुआ, रात केँ सेक्स कां असर हैं क्याँ ?
दादीमा: अरे बेशर्म अपने मम्मी केँ बारे मे ऐसे बोलती हैं।
प्रज्ञा हंसने लगी।
उसने मजाक मे हि प्राची केँ कान मे जा केँ बोला : क्यूं दिदी, बापू नें अधिक मेहनत कर दि क्याँ रात कों।
प्राची : धत् बदमाश।
दोनों थोडा हंसने लगे।
ब्रेकफास्ट करते वक्त प्रज्ञा अपने दिदी औऱ पिताजी कों बारबार देखरही थि। उसे यकीन नहि होँ रहा थां, जिस दिदी औऱ पिताजी कों वोँ अभि इतने शांति सें खातेहुए देखरही थि वोँ दोनों रात मे क्याँ क्याँ, ओर कितना जबर्दस्त गुल खिलारहे थें। कितने वाइल्ड तरीके सें रात कों दिदी चीखरही थि। पिताजी कों देखोजरा कितने शरीफबन केँ खारहे हैं। रात कों तोँ दिदी कि जान हि निकाल दि थि इन्होंने।
उधर दादीमा भि उधेड़ बुन मे थि कि प्राची कां वोँ दर्द मे केसे सहायता करे, जिससे वोँ जल्द अपने पति औऱ पिता केँ संग सहवास मे भाग लें पाए औऱ शंभोग करपाए।
उधर बापू औऱ प्राची चुपचाप खानां खारहे थें।
खानां केँ बाद पिताजी दफ़्तर निकलगए। औऱ प्रज्ञा वी अपनेरूम मे अपना होमवर्क करनेचली गई। उसके१२ केँ एग्जाम जल्द हि होने वाले थें।
दादीमा प्राची केँ लेँ केँ अपनेघऱ नें आँ गई।
दादीमा : प्राची, मेरी बच्ची। कैसीरही पहलीरात बापू केँ संग।
प्राची थोडा मुस्कुराते हुए : अच्छी रही दादीमा।
दादीमा : सचसचबता बेटी, मेरे सामने कुछ छुपाने कि जरूरत नहि हैं, मै हि तुम्हारी दादीमा औऱ मै हि तुम्हारी मम्मी हु।
प्राची : दादीमा वोँ थोडा.
दादीमा : क्याँ थोडा ?
प्राची : दादीमा वोँ थोडा दर्द हौ रहा हैं रात केँ बाद वो पे।
दादीमा : कहा पे बेटी, मैने बोला नं खुल केँ बता।
प्राची : दादीमा योनि मे।
दादीमा : अरे मेरी बेटी, यानी पिताजी नें मिलनकर हि लिया तेरेसंग।
दादीमा कों तौ पता हि थां कि बापू नें प्राची केँ संग कितना सेक्स किया हैं, मगर प्राची शर्मिंदा नं होँ, इसलिये दादीमा यह नहि बताना चाहती थि कि जब प्राची सोरही थि तौ दादीमा नें उसके जिस्म कां अवलोकन किया थां।
प्राची : हां दादीमा, हुआ थां हमारा मिलन। मेरी तोँ हालत खराबकर दि हैं पिताजी नें।
दादीमा : क्यूं मेरी बच्ची, ऐसा क्याँ हुआ ?
प्राची : पता हैं दादीमा, पिताजी नें तौ जबरदस्ती हि मेरी योनि मे अपनादाल दिया, मुझे बहोत दर्दहुआ दादीमा। मुझेलगा किसी नें चाकू सें मेरे योनि कों चीर दिया हैं। पिताजी कां वोँ, गर्म लोहे कां सरिया लगरहा थां दादीमा।
दादीमा : देख बाबू, तुँ अभि- अभि जवान हुईँ हैं। पहलीबार थां, इसलिये तुम्हारी तरफलगा कि बापू तेरेसंग जबर्दस्ती कररहे हैं। मगरहर लड़की कों पहलीबार ऐसे हि कोई पुरुष हौ हैंडल करना पड़ता हैं। क्योंकि पहलीबार मे थोडा दर्द होता हैं, ओर लड़की उससेडर जाती हैं। अबसभी सही होगा। मुझेपता हैं तुम्हारी तरफअब वोँ दर्द होगा वहां। पर्र तुँ घबरामत, यहसभी नॉर्मल बात हि हैं।
प्राची : ओहओक दादीमा।
दादीमा: अच्छा बेटी यहबता, पिताजी नें कंडोम तोँ नहि पहना थां नाँ।
प्राची इतना पर्सनल प्रश्न सें लज्जा सें पानी पानी हौ गई : नहि दादीमा, ऐसे हि किया उन्होंने।
दादीमा : चलो, ईश्वर कां लाखलाख शुक्र हैं कि उसने मेराकहा मना।
प्राची : दादीमा, अपने पिताजी कों कंडोम पहनने सें क्यूं रोका।
दादीमा : तेरेलिए मेरी बच्ची, तेरा पहला संभोग थां, तुम्हे उसका पूरामजा मिलना चाहिए थां। जब तक नंगा लिंग, तेरी योनि केँ दीवारों पे नहि रगड़ खाता, तोँ तुम्हे असली संभोग कां पता केसे चलता।
प्राची : अच्छा दादीमा, थैंकयू।
प्राची दादीमा कां शुक्रिया इसलिये किया क्योंकि वोँ देखरही थि कि दादीमा उसका कितना ख्याल करती हैं।
दादीमा: हम्ममम.अच्छा, यहबता, वोँ पिताजी नें बीज अंदर गिराया नां?
प्राची : जी दादीमा, उन्होंने सारा अंदर हि गिरा दिया।
दादीमा : पांचों बार ?
प्राची : दादीमा, आपको केसेपता बापू नें ५बार मेरेसंग मिलन किया ?
दादीमा इस प्रश्न सें पकड़ी गई। अबझूठ बोल्ना सही नहि थां। दादीमा नें सबेरे वाली सारीबात प्राची कों बता दिया।
प्राची दादीमा सें लिपट गई औऱ थोडा रोने जैसा मुंह बनाने लगी। दादीमा आप् मेरे कारण बापू कों वोँ डांट सुना दिया। बापू कों माफकर दो दादीमा। वोँ कलरात बहोत प्यास रहे थें। मेरेसंग मिलन करने मे उनको बहोत चैनमिल रहा थां औऱ वोँ अपने आप् कों रोक हि नहि पारहे थें। इसलिये मैने भि उनको नहि रोका। मैने उनकासंग दिया दादीमा, गलत नहि किया न् मैने ?
दादीमा : नहि बेटी बिल्कुल गलत नहि किया। अच्छी बातइन सभी मे यहरही कि पिताजी तेरे गुप्तांग कों पांचबार अपना वीर्य पिलाया हैं। मतलब तेरी प्रेग्नेंसी कां संयोग बन सकता हैं।
प्राची बससर झुका केँ थोडा सां मुस्कुरा दि।
दादीमा : अब शर्मा क्यूं रही हैं, बोल बनेगी नं अपने पिताजी कि बच्चे कि मम्मी।
प्राची : जी दादीमा, पिताजी औऱ आपको जोँ ठीकलगे।
दादीमा : शाबाश मेरी बच्ची, पऱ यहमतसमझ केँ एक् दिन सें हौ जाएगा यहसभी, बापू कां तुझेही अबहररात ऐसे हि संग देना होगा। पिताजी बारबार प्रयास करेंगे, फिनजा केँ कहीं होगा कुदरत कां करिश्मा।
प्राची समझरही थि दादीमा किस प्रयास कि बातकर रही थि, उसनेबस सर हिला केँ हामीभर दि।
प्राची : दादीमा, पऱ मेरे गुप्तांग मे बहोत दर्द हौ रहा हैं, बापू नें सबेरे पेन किलर भि दिया थां। तभी मे ये बैठीहु। मैअब बापू केँ संगयह सभी नहि निभा पाऊंगी दादीमा।
दादीमा : हां मे समझरही हि बेटी, मै नें तेरे बापू सें कह दिया हैं केँ तेरे बिल्कुल हि ठीक हौ जाने पऱ हि अगला मिलन होगा।
दादीमा : रुक बेटी मे थोडा तेरी राहत कां जुगार करतीहु। एक् बारसेक देतीहु, तुम्हे आराम मिलेगा।
प्राची खुश होँ गई।
दादीमा नें पानी लाया औऱ फिन दरवाजा बंदकर दिया कि प्रज्ञा कों कुछपता न् चले, औऱ दादीमा नें प्राची सें बोला : आँ बेटी, थोडा अपना साड़ी उठा औऱ पेंटी खोल, सेक देतीहु मे।
दादीमा प्राची कि योनि पहले भि देख चुकी थि तौ उसेइस बार इतना लज्जा नहि आया।
उसने पेंटी तोँ पहनी भि नहि थि, इतना दर्द थां।
प्राची : दादीमा मैने पेंटी नहि पहनी।
दादीमा : वाउ, फिन जल्द आँ, औऱ साड़ी उठा अपनी।
प्राची नें वैसा कि किया, उसका फूलाहुआ बुर दादीमा केँ सामने खुल गय़ा।
दादीमा नें बुर कां अवलोकन किया। योनि दरवाज़ा बड़ी होँ चुकी थि औऱ पहले सें ज्यादा खुली हुइ लगरही थि, योनि केँ ऊपरी हिस्सा फूलाहुआ थां औऱ लाल होँ गय़ा थां। यहसभी प्रमाण देरहा थां कि यह योनि अपना पहला चुदाई करवा चुका हैं।
दादीमा नें गर्म पानी कि पट्टी सें हल्का हल्का बुर पे फिरने लगी औऱ प्राची कों बहोत राहत मिला।
दादीमा : आज सें, जब तक तेरा दर्दठीक नहि होगा, पिताजी कों इसकेपास भि नहि आने देना। पति कों जितना तड़पाएगी वोँ उतना हि प्रेम करेगा, थोड़े नखरे भि करना, हर बातऐसे हि मतमान जानां, जैसेरात मे मान गई थि, देख पिताजी नें केसे तेरी बुर कि हालतकर दि हैं।
प्राची कों बहोत चैनमिल रहा थां।
पूरादिन दादीमा नें रह-रह केँ ४-५बार ऐसे हि प्राची केँ योनि कि सिकाई करतीरही। साम तक प्राची कां योनि कां सूजन थोडा कम होनेलग थां।
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