Beti Bani Sahara – New Episode
Update 18:
साम कों पिताजी घऱ आँ चुके थें। सबनेमिल केँ डिनर खाया औऱ पिताजी औऱ प्राची कों फिन सें एकांत मिल गय़ा। वोँ दोनों उसीरूम मे औऱ बेड पे वापस आँ गए थें, जहां बापू नें कल बेदर्दी सें प्राची कि गुप्तांग भोगा थां।
दादीमा नें पहले हि बोले थां बापू सें : बेटा, मेरीबहु केँ संग, जैसा मैने बोला थां, अभि कुछ दिनों तक कुछमत करना। तुम्हारी तरफ अपने आप् पे कंट्रोल करना पड़ेगा बेटा।
बापू एकांत मे आते हि एक् जिम्मेदार पति कि तरह, प्राची कां हाथ अपनेहाथ मे लिए औऱ बोला : बेटी मैकल केँ लिए अभि वोँ शर्मिंदा महसूस कररहा हुआ। काश मे तुम्हारी तरफकल जानवरों कि तरह नं पेला होता। तोँ आजरात वोँ मै तेरे योनि कि प्यास मिटता।
प्राची : नहि बापू, आप् कल कि बातेभूल जाएं। आप् बहोत अच्छे बापू औऱ पति दोनों हैं मेरेलिए। आप् अगर जानवर होते तौ, आज मुझे दर्द हैं यह जानते हुए भि, मेरेऊपर चढ़ हि जाते। आप् अलग हैं पिताजी। आप् बहोत केयरिंग पति हैं।
पिताजी औऱ बेटी प्रेम मे थें। दोनों कि उसरात देर तक रोमांटिक बाते होतीरही। यह बातेये प्रमाण देरही थि। कि प्राची औऱ बापू, अब पति औऱ पत्नि केँ बंधन अच्छे सें बंधरहे हैं। ओर अपना प्राचीन नाताभूल केँ आगेबढ़ गए हैं।
उसरात बापू नें कुछव नहि किया। वोँ बस प्राची कि होठों कों चूसते रहे औऱ कपड़े केँ ऊपर सें हि अपने बेटी कां गोलाई कों दबाते रहे औऱ फिन दोनों बाप बेटी लिपट केँ नींद केँ गहराई मे खोगए।
अगलेदिन प्राची केँ चाल मे थीरा सुधार थां। वोँ अब भि लंगड़ा केँ हि चलरही थि मगरआज बिना किसी सहारे केँ।
दादीमा आज भि अपने पोती कि वैसे हि सिकाई करतीरही। औऱ इसीतरह २दिनबीत गए औऱ अब बुर कां सूजन एक् दम समाप्त सां हौ गय़ा थां। प्राची कि चाल नॉर्मल तोँ नहि हुआ थां। पर्र अब बहोत सुधार गय़ा थां।
उसदिन प्राची, प्रज्ञा केँ कमरे मे उसेदूध देने गई।
प्राची : प्रज्ञा, यहदूध पीलो, कितना मेहनत कररही हैं एग्जाम केँ लिए।
प्रज्ञा : जी दिदी., मेरा मतलब हैं माँ।
प्राची ओर प्रज्ञा कां नाताबदल चुका थां।
प्राची कमरे सें बाहर् जाने हि वाली थि। कि प्रज्ञा नें उसे आवाज़ दिया : मम्मी, जराइधर आइए नं मेरेपास।
प्राची नें प्रज्ञा केँ मुंह सें मम्मी सुन केँ गदगद होँ गई।
प्राची : हांबोल नं प्रज्ञा।
प्रज्ञा: मम्मी, आप् ठीक तोँ हैं नां।
प्राची : हां बाबू, मै बिल्कुल ठीक हि। तुँ ऐसा क्यूं पूछरही हैं?
प्रज्ञा : वोँ आप् ३दिन सें ऐसे लंगड़ा लंगड़ा केँ चलरही हैं।
प्राची : वोँ तोँ बस, थोड़ी पांव मे चोटलग गई थि।
प्राची अभि वोँ सोचरही थि प्रज्ञा वही छोटी बच्ची हैं जिसेकुछ वीपता नहि, पऱ प्रज्ञा तौ दादीमा सें अबकुछ जान चुकी थि।
प्रज्ञा : अच्छा, पिताजी नें आपको दर्द आपके वहां ( बुर कि तरफ इशारा कर केँ ) मे दिया औऱ चोट आपको पांव मे लग गई। यह केसे मम्मी, सर समझाइए।
प्राची यह नहि सोचरही थि कि प्रज्ञा अबयहसभी पता होगा। वोँ आश्चर्य सें भर गई।
प्राची : अरे, तुम्हारी तरफयह सभी किसने बताया, तुँ यहीसभी पढ़रही हैं क्याँ आजकल।
प्रज्ञा : हांपढ़ तोँ रहीहु हि, पर्र दादीमा नें भि सभी बताया मुझे।
प्राची समझ गई दादीमा नें प्रज्ञा कों वोँ बिगाड़ दिया हैं। वोँ अंदर सें थोडा मुस्कुरा केँ रह गई।
किस्सा अभि जारी रहेगी.।
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Update:19
प्राची औऱ प्रज्ञा कि इसीतरह कि बाते थोड़े देर चलतीरही।
करीब, सोने कां टाइम होँ चला थां, कि दादीमा नें आवाज़ लगाई : प्रज्ञा, बेटी सोने कां टाइम हौ चला हैं, सोजा औऱ दिदी कों भि जानेदे पिताजी केँ कमरे मे।
प्रज्ञा : (प्राची सें मजाक मे) दिदी, लगती हैं दादीमा पिताजी कि तरफ हैं, वोँ बस आपको पिताजी केँ सामने रखना चाहती हैं। ताकि बापू कों आप् हर टाइम पत्नि सुख देतीरहे।
प्राची : हट बदमाश, अपने पिताजी केँ बारे मे कोईऐसे बोलता हैं क्याँ ?
प्रज्ञा : अच्छा, यहमत भूलो दिदी, पिताजी अब मेरे जीजाजी भि होँ चुके हैं, औऱ साली - जीजा केँ रिश्ते मे तोँ, थोडा मजाक चलता हि हैं नं दिदी।
प्राची : हांहां, बारीआई साली बनाने वाली। चलअबसो जा।
प्रज्ञा : हामै तौ सो हि रहीहु मेरी प्यारी दिदी, पर्र माँ तोँ पिताजी कों खुश करेगी अबरात भर।
प्राची थोडा हसनेलगी : अरे तुँ तोँ कुछ ज़्यादा हि मजाकिया हौ गई हैं। लगरहा हैं, तेरीइन सभी बातों मे ज़्यादा हि रुचिबढ़ रही हैं। अभि तुँ यहसभी मे ध्यान मतदे, अभि मात्र १८ कि हैं, ध्यान लगा केँ एग्जाम कि तैयारी कर।
प्रज्ञा : आप् भि तौ १९ कि हि हैं। आपको तोँ इनसभी मे रुचि केँ संगसंग अनुभव भि हौ गय़ा हैं, बापू.ओह सॉरी, मेरे जीजाजी कां मोटातोप सें जंग लड़ने कां।
प्राची अपने छोटी बेहन कि इसतरह केँ डबल मीनिंग बातो सें शर्मा केँ पानी पानी होँ गई।
प्राची : तुँ पीटेगी किसीदिन मेरे हाथों, इतनी बेशर्म जैसी बाते कि तोँ। चलअबसो जाचुप चाप, बड़ीआई तोप सें जंग लड़ने वाली। एक् बारतोप सें सामना हौ गय़ा, तोँ वहीदम तोड़ देगी।
अंत कां जौ वाक्य थां, वोँ अनायास हि निकल गय़ा प्राची केँ मुंह सें, उसेयह केहना नहि चाहिए थां। ऐसा प्राची कों वोँ बोलने केँ बाद महसूस हुआ।
प्रज्ञा : अरे क्यूं दिदी, अपने तोँ दम नहि तोड़ा आप् तौ हरदिन जंग लड़ती होगी बापू केँ तोप केँ संग।
प्राची : (थोडा दुःखी होँ केँ) : नहि प्रज्ञा, मेरे अंदर, पहलेजंग केँ बाद हि कोई ताकत नहि बचा हैं, अबजंग लड़ने कां।
प्रज्ञा : मतलब दिदी, आप् कहना क्याँ चाहते हैं ? आप् बापू केँ संगखुश नहि हैं?
प्राची : अरे नहि नहि, ऐसीबात नहि हैं बहना, मै तोँ अपने आप् सें खुश नहि हु।
प्रज्ञा : ऐसा क्याँ हौ गय़ा दिदी? बापू नें कुछकहा क्याँ?
प्राची : आरे नहि बाबा, पिताजी तौ मेरी इतनी केयर करते हैं, कि मुझे उनको अपनेसंग मिलन नाँ करने देने केँ लिए, दुख होता हैं।
प्रज्ञा : मतलब दिदी ?
प्राची : मतलबकुछ नहि, कद्दू। तुँ सोजाचुप चाप, मै चलीअब, बहोत बाते हौ गई इनसभी कि।
प्रज्ञा : दिदी, प्लीज, तुम्हे मेरीशपथ, पूरीबात बताओ नं मुझे, आप् खुश क्यूं नहि हैं बापू केँ संग ?
शपथ देके प्रज्ञा नें प्राची कों सभी बताने सें मजबूर कर दिया।
प्राची : अरे दोस्त, तूनेशपथ देकेसभी चौपटकर दिया। दरअसल, तुँ जौ समझरही हैं कि मे हरदिन बापू कां तोप केँ संगजंग लड़ती हु। वोँ नहि होँ रहा। बापू नें पहलीरात मे हि ऐसी चढ़ाई कि थि, मेरे किले पे, कि उसकी दीवारें ढह गई, जौ अभि तक बन नहि पाई हैं।
प्रज्ञा कों डबल मतबल वाली बातेसमझ नहि आँ रही थि अब। प्रज्ञा : दिदी, ऐसे पहलीमत बुझाओ, सचसच बताओ न् सही सें कि क्याँ हुआ हैं।
प्राची : अरे मेरी बेहन, मतलब मे बापू केँ संग पहलीरात केँ बाद सें मिलन नहि कि हु।
प्रज्ञा : चौंकते हुए, ऐसा क्यूं दिदी, पति पत्नि होँ अब तौ अपलोग, अबदूर क्यूं रहते होँ।
प्राची : अरे पिताजी नें पहलेदिन हि मेरेसंग इतनी जबरदस्त मिलनकर दिया, कि मेरे गुगु कां हालात खराब हैं अभि तक, उसमें बहोत सूजन आँ गय़ा थां।
प्रज्ञा: मतलब आपके योनि मे अब तक दर्द हैं, बापू केँ संग पहलीरात केँ बाद?
प्राची : हां।
प्रज्ञा : अरे दिदी, मैने तोँ सोचा आपका औऱ पिताजी कां मिलनहर दिन होँ रहा हैं। मुझेपता हि नहि थां कि आप् तकलीफ मे हैं।
प्राची : तकलीफ कुछ नहि, बस एक् सप्ताह दादीमा नें, बापू औऱ मुझे, मिलन सें मना किया हैं।
प्रज्ञा : ओह, दिदी मै ईश्वर सें मनाऊंगी कि आप् जल्दठीक हौ जाओ, औऱ बापू सें दुबारा फिन सें मिलनकर पाओ।
प्राची छोटी बेहन केँ मुंह सें यहसभी सुन केँ एक् दम थरथरा गई। उसे बहोत लज्जा आनेलगा कि उसकी छोटी बेहन उसको पिताजी केँ संग चोदाई कि दुआ मांगरही हैं।
प्राची : ठीक हैं, अबसोजा।
इतनाबोल केँ प्राची जानेलगी। तभीफिन सें प्रज्ञा बोल पड़ी : दिदी, क्याँ सच मे बापू कां बहोत मोटा हैं ? मैने तौ अभि तक किसी कां देखा भि नहि हैं।
प्राची : हंसते हुए, हां तेरी तौ बहोत उमर होँ गई न् कि, तूनेअब तक किसी कां नहि देखा ? पागलसो जाचुप चाप, जब विवाह होगी तेरी भि, तोँ देख लेना।
प्रज्ञा : औऱ दिदी, यह नहि बताया आपने, कि मेरे जीजाजी कां ज़्यादा मोटा हैं क्याँ ? हाहाहाहाहा।
प्राची झेप गई: हट बदमाश।
बस इतनाबोल केँ भाग गई। प्रज्ञा समझ गई थि कि पिताजी मे कुछ तोँ बात हैं। अभि उसे दिदी केँ लंगड़ा केँ चलने कां राज कां पताचल गय़ा थां। मतलब, दिदी बापू कां लिंग, अपने यौवन दरवाज़ा मे लेने केँ कारण, दर्द सें लंगड़ा रही थि ? क्या बात है पिताजी कां बहोत मोटा हैं क्याँ ? प्रज्ञा केँ दिल मे भि बापू केँ प्रति, थोड़ी भावना आनेलगी।
वोँ तोँ पहलीरात कों दिदी कां चीखसुन केँ हि आँ गय़ा थां। मगरआज दिदी केँ द्वारा, बापू कां ऐसे वर्णन करना, उसकेलिए आग साबित हुआ। वोँ जलनेलगी थि, अपने दिदी सें, क्योंकी उसकी दिदी कों सेक्स कां मज़ामिल रहा थां, औऱ उसे नहीं।
मगर अगले हि समय उसकेमन मे खयालआया, कि बापू कों तौ दिदी कां हि सहारा मिला हैं। उनका जिंदगी कितना कष्टकारी होँ गय़ा थां। दिदी नें हि उन्हें संभाला हैं। नहि नहि मै पिताजी केँ प्रति गंदे खयाल नहि ला सकती, मेरी दिदी नें बहोत बड़ा बलिदान दिया हैं, घऱ कों बचाने केँ लिए, मै दिदी कां हि घऱ नहि तोड़ सकती। मुझे बापू सें इनसभी बातों सें दूर हि रहना चाहिए। हा मुझे बापू कों बापू हि रहने देना चाहिए।
प्रज्ञा नें अपनीसोच कों सुलझा लिया औऱ अपनेमन सें बापू केँ बारे मे जौ भि सेक्सी विचार थें, वोँ उसेहटा चुकी थि।
उधर प्राची बापू केँ कमरे मे पहुंच गई, आज, ५दिन हौ गए थें उन दोनों केँ मिलन कि रातहुए। उसदिन सें पिताजी, कभी प्राची सें मुठ मरवा लेते, तोँ कभी प्राची केँ मुंह मे लिंग प्रवेश कर केँ मज़ा लेते थें।
प्राची अंदर आँ गई, बापूबेड पे लेटेहुए थें पहले सें हि। आतेहुए प्राची नें दरवाजा लगा दिया औऱ आँ केँ अपने बापू केँ बांहों मे समा गई। बापू सें लिपट गई। मगर बापू कां तौ लिपटने सें आग औऱ भड़क गय़ा। बेचारे केँ पासअब पत्नि तौ थि मगर एक् रात कि गलती केँ कारण, पत्नि होतेहुए भि उसकोभोग नहि सकते थें।
बापू: बेटी, मे मिलन केँ लिएतरस रहाहु, प्यास बढ़ती हि जारही हैं, मुझसे अब औऱ बर्दाश्त नहि होता मेरी सजनी। क्याँ सच मे अभि तक तेरी दर्दठीक नहि हुइ हैं याँ तूँ मुझेबस तड़पा रही हैं ? अब तौ हमारे मिलन कों ४दिन होँ गए हैं।
प्राची : मेरे पतिदेव, औऱ मेरे प्यारे पिताजी, सच मे अभि तक दर्द हैं, अपने पहलेदिन हि, बहोत बेदर्दी कर दि मेरेसंग, अब नुकसान आपका हि हैं। आपने हि जबरदस्ती कि थि। अबउसी कां फल हैं कि आपको प्यासा रहना पड़ेगा।
बापू दूरी नहि सहपारहे थें : बेटी प्लीज, एक् कामकर न्, थोडा लेकेदेख नं अंदर, अब४दिन हौ चुके हैं, तुझ उतना दर्द नहि करेगा।
प्राची : नां बाबा नाँ, पिताजी आपको दादीमा नें भि बोला हैं नां कि आपको नहि करना हैं १ सप्ताह तक।
बापू:हां बेटी, पर्र मन कों केसे काबू करूं। मेरेबस मे नहि हैं, देख न् कितना टाइट खड़ा हौ गय़ा हैं तुझेही अपने बांहों मे पा केँ।
पिताजी नें अपनी पैंट उतरते हुए बोला।
बापू एकांत मे अपने पत्नि केँ संगनीच सें नग्न रहना पसन्द करते थें।
प्राची : पिताजी, मै आपकी प्यास समझरही हु। मगर मुझेआज भि दर्द होँ रहा हैं पिताजी अंदर, सूजनभले हि ख़त्म होँ गई हौ।
बापू केँ पासकोई चारा नहि थां। उनका लंड ठनकरहा थां काम अग्नि सें। वोँ बस प्राची मे प्रवेश पाना चाहते थें।
पिताजी : प्राची, मैमर जाऊंगा प्राची, मुझेयह प्यास सही नहि जारही। तेरे शरीर कि गर्मी मुझे पागलबना रहे हैं, चलअबकुछ नहि तोँ थोड़ी चुसाई हि करदेइस जालिम कां।
बापू नें अपना लंड प्राची केँ मुंह कि तरफ़ बढ़ते हुए बोला। प्राची केँ पासकोई चारा नहि थां, पिताजी जौ अब उसके पति थें, उनकी सेवा तौ उसे करना हि पड़ेगा, प्राची बापू कां मोटा बमपिलाट लिंग अपने मुंह मे लेके चाभने लगी। लॉलीपॉप कि तरह उम्मममम.उम्म्मम्म्म्ह कर केँ चूसने लगी।
बेटी केँ मुंह मे अपना लंड दे केँ गले तक उतार देना बापू कों बहोत भारहा थां। वोँ मजा लें रहे थें। प्राची किसी अल्हड़ कि तरह लौड़ा चूसरही थि। पिताजी कां हाथ अपने बेटी केँ सर पे चला गय़ा औऱ वोँ प्राची केँ सर पे हाथ फेरते हुए उसके मुंह मे अपना लण्ङपेश रहे थें।
वोँ मजे सें अब लौड़ा चूसने लगी। प्राची केँ बुर मे इसी लंड नें, ४दिन पहले कोहराम मचा दिया थां, इसलिये प्राची कों लिंग चूसते हुए, लिंग कि मोटाई सें थोडा डर भि लगरहा थां।
करीब-करीब १० मिनट कि लिंग चुसाई केँ बाद भि बापू कों वोँ आनंद, अभि भि नहि आँ रहा थां। उनसेरहा नहि गय़ा प्राची सें बोलपरे : बाबू, एक् काम करेगी।
प्राची : क्याँ पिताजी ?
बापू:जरा अपनी नीचे सें पैंटी मे कैद समान कों तौ एक् बार देखने दे, आज योनि कां हाल देखूं कि अब कैसी हैं तेरी योनि।
प्राची नें समझा कि बापूबस अवलोकन करना चाहते हैं कि मेरी योनि कां क्याँ हाल हैं। उसने बापू केँ आज्ञा केँ अनुसार अपना नीचे कां सारा वस्त्र उतर दियाओर उसकी यौवन नंगी हौ गई। पिताजी कों फिन सें ३दिन केँ प्रतीक्षा केँ बाद अपने बेटी कां गुप्तांग देखने कों मिलरहा थें। पिताजी उसको देखते हि खोगए, वाउ सुजान एकदम गायब थां। बुर कां चिरान पहलीरात केँ बाद हि चिथर चुका थां। औऱ अंदर कि पिंक सि चमड़ी पलट केँ थोडा बाहर् कि ओर निकल गई थि। फिरभी योनि दरवाज़ा अंदर भि लाल थां पूरा, यानि प्राची कां दर्द, जरूर पूरा नहि ख़त्म हुआ होगा। औऱ योनि दरवाज़ा भि अभि बहोत ढीला नहि हौ पाया थां। बेहद मादक बुर थि प्राची कि।
पिताजी नें अपना लिंग अपनेहाथ मे लिया औऱ प्राची केँ योनि छिद्र कि ओर बढ़ते चलेगए।
प्राची एकदम सें चौंक गई। उसके चौंकने मे आजडर थां।
प्राची : बापू, यह क्याँ कररहे हैं। मेरा दर्द अभि गय़ा नहि हैं, मे नहि लें पाऊंगी बापू। छोड़ दीजिए न्। मे मर जाऊंगी दर्द सें अगर आपनेआज मेरेसंग.
उसने अपने गुप्तांग कों अपने हथेली सें ढक लिया, जैसे कि वोँ पिताजी केँ लिंग प्रवेश कां विरोध केँ रही होँ।
पिताजी : अरे मेरी प्यारी बच्ची, डरमत, मै तेरे बाप औऱ पति दोनों हु। मैकोई ऐसाकाम नहि करूंगा, जौ तुझेही पसन्द नहि हौ, याँ तूँ नहि करना चाहती होँ। पहलेदिन तौ तेरीसील तोड़नी थि इसलिये थोडा बल प्रयोग किया, आज नहि करूंगा मेरी बेटी। मे तौ बस, थोडा सां, ऊपरऊपर सें, तेरे योनि कि गर्मी महसूस करना चाहता हु मेरीजान।
प्राची थोड़ी कंफ्यूज थि।
प्राची : मतलब बापू?
बापू: मतलब, मै बस तेरे योनि दरवाज़ा पे हि अपना लिंगसटा केँ तुम्हारी चुत कि गर्मी अपने लिंग मे महसूस कर सकताहु। बस थोडा संगदे दे मेरीजान।
प्राची कों समझ आँ गय़ा, पिताजी इसबार अपना लंड तौ नहि डालेंगे अंदर।
उसने हामीभर दि
बापू अपने लिंग कों प्राची कि गुप्तांग कों स्पर्श करनेबढ़ गए।
पिताजी नें बारे प्रेम सें अपना लंड प्राची केँ बुर पे सटा दिया, औऱ उसके छिद्र पे लगा केँ भि वोँ कोई भि बल प्रयोग नहि कररहे थें, ताकि लिंग अंदर बुर मे प्रवेश केँ जाए। वोँ बस बुर कि गर्मी महसूस करतेरहे। 
पिताजी अपना लिंग प्राची केँ योनि केँ दरार पे ऊपर सें नीचे मलनेलगे। प्राची कों इससे एक् अलगतरह कि गुदगुदी जरूर हौ रही थि।
बापू, प्राची कों कोई दर्द नहि देरहे थें, पर्र बीच-बीच मे हल्का सां योनि केँ मुहाने पे, अपना लंड हल्के सें दबा भि देते थें। यह पिताजी कि एक् अलग सि कला थि, जौ वोँ अब अपने पत्नि बने बेटी कों दिखारहे थें। वोँ यहजता रहे थें कि प्राची केँ बुर पे अब उनका हि हक हैं।
बापू एक् टक सें प्राची केँ चेहरे कां भावपढ़ रहे थें, औऱ उनका लण्ङ भि अबकुछ अधिक हि टाइट हौ गय़ा थां।
इतना होने केँ बाद भि प्राची, मजे सें आंखे मूंदे लेटीरही, बापू कि हिम्मत औऱ बढ़ी, औऱ वोँ प्राची मे प्रवेश कर जानां चाहते थें अब।
उन्होंने एक् औऱ दबाव बनाया। लिंग योनि दरवाज़ा कों खोल केँ, थोडा अंदर कि दीवार पे दस्तक दे हि चुका थां।
कि इतने मे, प्राची कों बापू कां इरादा पताचल गय़ा।
वोँ हक्का बक्का रह गई। अरे पिताजी तौ अंदर डालने लगे हैं। वोँ एकदम चिंहुक सि गई।
औऱ पिताजी सें बोल पड़ी: पिताजी, यह आप् क्याँ कररहे हैं। नहि बापू, यहमत कीजिए, मैमर जाऊंगी पिताजी, आप् नहि समझरहे हैं, पऱ अंदर बहोत दर्द हैं मेरे योनि मे।
बापू: प्लीज बेटी मै बहोत प्यासा हु। काबू नहि करपारहा हु स्वयं पे आगे इतनी गीली औऱ हसीन बुर देख केँ। देख नं, तेरी बुर, मेरे लंड लगने सें केसे पनियआ गई हैं। केसे लुपलुपा रही हैं। यह मुझे ललचारही हैं बेटी।
प्राची एकदम सें रोनेलगी। नहि बापू, मुझे आप् नहि समझेंगे तोँ कौन समझेगा। मे ठीक होते हि आपको अपना सबकुछ सौंप दूंगी, आप् जीभर केँ भोग लेना मुझे। मे स्स्स तक नहि करूंगी, पऱ बापूआज मुझे छोड़ दीजिए। मेरा भरोसा मत तोड़िए बापू।
पर्र हवस बहोत बुरीचीज होती हैं। पिताजी कां मन होँ रहा थां कि, एकदम किसी रंडी कि तरह, अपने बेटी पे भि वोँ बल प्रयोग करदे, औऱ अपनी बेटी कों पटक केँ बुर केँ गहराई, तक एक् हि बार मे फोर्स केँ संग, लण्ङ धंसादे।
मगर उनके अंदर एक् बाप भि थां। इसतरह सें बल प्रयोग कां मतलब, वोँ जानते थें। एक् तरह सें,, म वोँ प्राची केँ संगरेप जैसा होता। वोँ अपने बेटी केँ नजरों मे नहि गिरना चाहते थें।
उन्होंने कोई औऱ उपाय न् देखते हुए, प्राची केँ दूध केँ बीच मे अपना लण्ङ फंसा केँ अपनाकाम अग्नि कों शांत करना चाहा।
वोँ प्राची कों बोले : ठीक हैं बेटी तूँ कहती हैं तोँ मे नहि डालता।
प्राची केँ जान मे जानआई।
बापू: पऱ प्राची आज जौ तुमने मुझे रोका हैं इसकी दुगनी कीमत तुम्हे चुकानी होगी।
प्राची : वोँ केसे बापू?
बापू: तुम्हे जब भि अगलीबार मे चोदूंगा मुझे तुम्हारी सील तोड़ने दोगी।
प्राची आश्चर्यचकित रह गई, उसकीसील तौ पिताजी पहले हि तोड़ चुके थें।
प्राची : पिताजी आप् नें तोँ मेरीसील तोड़ दि थि। पहलीरात कों हि तोँ। आपकेनाम किया थां मैने अपना, सील पैक योनि। योनि मे आप् प्रवेश कर चुके। फिनअब कौन सि सील।
बापू:अब भि एक् सील बाकी हैं बेटी।
प्राची : कौन सि पिताजी?
बापू: तेरी गांड़ कां सील बेटा।
प्राची केँ आंखेफटी कि फटीरह गई। हेराम, केसे जाएंगा बापू कां मोटा मूसल इतनी छोटी सि पीछे कि छेद मे??
प्राची अब उधेड़-बुन मे डूब गई, औऱ उधर बापू प्राची कां टीट चोदन, करने कों सजधजकर होँ रहे थें।
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Update 20:
अब पापाजी कि तड़पचरम पे थां। वेबस प्राची केँ मम्मों केँ बीच अपना लंड फसा केँ बह जानां चाहते थें। जैसे उन्होंने बहोत सारे ब्लू फिल्म मे देखा थां, जहां लड़का अपना लिंग लड़की केँ मम्मों कि बीचडाल केँ मम्मों कि लौड़ा कों आगे पीछे करता थां।
बापू प्राची केँ सीने पे चढ़आए औऱ प्राची सें बोला : बेटी तूँ दोनों हाथों सें अपने चूचियों कों थाम केँ मेरे लंड कों जकड़ लेँ जरा, मनकररहा हैं तेरे मम्मों कों सटासट चोदलू।
प्राची केँ लिएयह नया थां। उसने पिताजी सें कहा : केसेकरू बापू ?
बापू नें अबदेर न् करतेहुए अपना गर्म लोहे केँ सरिया जैसे सख्त लिंग कों प्राची केँ मम्मों केँ बीच दरार नें फंसा दिया औऱ फिन प्राची कों हाथ सें इशारा कर केँ बताया कि लंड कों केसे जकड़ना हैं मम्मों केँ दबाव।
प्राची केँ मम्मों तोँ उतने बड़े नहि थें, जैसे बापू ब्लू देखा थां। मगरजब प्राची नें लण्ङ कों अपने चूचों सें जकड़ा। तौ बापू कों अपने लौड़े केँ इर्द गिर्द एक् मखमली सां एहसास जरूर होनेलगा।
बापू अपनेकमर कों आगे पीछे करनेलगे। लंड पहले सें हि प्रीकम सें थोडा चिकना होँ गय़ा थां औऱ सटासट मम्मों केँ बीच फसलें लगा। पिताजी कों बुर जैसा मज़ा तोँ नहि आँ रहा थां मगरनरम एहसास वोँ अलग थां यहओर इसका अपनाअलग मज़ा थां। पिताजी नें १५ मिनट तक अपने पत्नि बने बेटी कां मम्मों चोदन किया। प्राची कों अपनेनरम मम्मो केँ बीच एक् गर्म सरिया जैसा बापू कां लंड कां एहसास वोँ अच्छा लगरहा थां। बापूअब चुने वाले थें औऱ फ़ज़ाक सें उनके लंड सें एक् तेज वीर्य कि धार निकला ओर प्राची कां पूरा सीना औऱ गर्दन गर्म शैलाब सें भींगा गय़ा।
प्राची आज बापू कों एक् अलग मज़ादे चुकी थि। पिताजी नें आखरी बूंद तक अपना पानी छोड़ने केँ बाद प्राची केँ सीने सें हटगए।
पिताजी केँ लौड़े पे अब भि वीर्य कां कतरालगा हुआ थां। पिताजी नें प्राची कों बोला : आँ बेटी, थोडा बापू कि मलाईचख लेँ।
औऱ बापू नें, प्राची कां बिनाकोई जवाब सुने हि लंड कों मुंह केँ तरफ बढ़ा दिया।
प्राची किसी आज्ञाकारी पत्नि कि तरह अपना मुंहखोल दोओरजीभ बाहर् निकाल कर बापू कां लौड़े पे लगी मलाई कों चाटने लगी।
प्राची नें पिताजी कां लिंग अच्छे सें चाट केँ साफ किया।
बापू नें भि एक् तौलिए सें प्राची केँ सीने पे गिरे अपनेमाल कों पोछा औऱ फिन निढाल होँ केँ प्राची सें लिपटगए। औऱ दोनों बाप बेटी नें एक् दूसरे कों जकड़ केँ नींद केँ अघोष मे समागए।
Beti Bani Sahara - Aage kya hua? Next part padhiye
सब कां इतना प्यारा कमेंट करने केँ लिए शुक्रिया। मे औऱ अच्छा औऱ इरॉटिक बनाने कां कोशिश करूंगा इस किस्सा कों ।
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