Beti Bani Sahara – New Episode
Update 21:
ऐसे हि एक् सप्ताह तक बाप बेटी कि काम पूर्ति होतीरही। पिताजी बिना चोदे हि अपनी बेटी कां आनंद लेते रहते थें। दादीमा कों भि प्रतीक्षा थां, कि कब उनके बेटा कां अगला मिलन हौ पाएगा। करीब-करीब 9 दिनों बाद प्राची कि योनि एक् दमसही हौ गई। वोँ थोडा खुश भि थि औऱ थोडा डरी भि हुईँ थि। खुश इसलिये कि पिताजी कों, अब वोँ, बिना नाँ नुकरकिए हुए, प्रेम दे पाएगी, औऱ डरी हुई इसलिये कि योनि मे फिन सें बापू अपनी स्थान बनाने वाले थें अपने लंड सें। ऊपर सें बापू कि वोँ बात भि उसेयाद थि, कि बापू गांड़ भि मारेगे, क्योंकि पिताजी नें पहले हि कह दिया थां।
उसदिन सबेरे हि दादीमा नें प्राची सें पूछा : बेटी, वहां कां दर्द कैसा हैं ?
प्राची : दादीमा अब पूराछूट गय़ा हैं। कोई भि दर्द नहि हौ रहा हैं।
दादीमा : वाउ, मै इसीदिन कां प्रतीक्षा कररही थि बेटी, कि कब तेरा दर्द ख़त्म हौ औऱ तूँ फिन सें बापू केँ संग सहवास करपाए। बेचारे मेरे बेटे कों मैने पत्नि होतेहुए भि तड़पा दिया। तूँ अभि छोटी हैं, इसलिये मैनेउसे रोक दिया। औऱ वोँ तुझ सें प्रेम भि बहोत करता हैं, इसलिये उसने संयमरखा, शायद उसके अंदर कां बाप भि जाग गय़ा होगा, औऱ बेटी कों तकलीफ मे नहि देख सकता हैं वोँ।
प्राची दादीमा कि बाते ध्यान सें सुनरही थि।
दादीमा : औऱ मेरी लाडो, रेडी हैं न् आजरात केँ लिए, पहलादिन तोँ तेरे पिताजी नें हि तेरेमजे लेँ लिए, अब तुँ वोँ पुरुष कां आनंद लेनासिख लें। कोई महिला अपनेजोश मे आँ जाए तौ अच्छे अच्छे मर्दों कां पानी निकाल दे औऱ उसकीहवा टाइटकर दे सेक्स केँ समय। तूँ तौ अभि कच्ची हैं इसखेल मे मगरजिस दिन तूँ पिताजी केँ लिंग कों उनकेऊपर बैठ केँ लेने मे कामयाब हौ जाएगी उसदिन समझ कि सेक्स केँ दौरान तूने पिताजी कों कंट्रोल कर लिया। अगर किसी मर्द केँ लिंग पे बैठजाओ औऱ तुम् अपने हिसाब सें चूदबाओ, उसदिन समझ जानां कि तुम् सेक्स कां असली आनंद लेनासीख गई हौ।
प्राची दादीमा कि बात पे बस हामीभर रही थि: जी दादीमा।
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Beti Bani Sahara – New Episode
Update 22:
घऱ कां माहौल आज खुशनुमा थां। पिताजी औऱ दादीमा दोनों खुश थें, क्योंकि आज प्राची फिन सें बापू सें मिलन केँ लिए बिल्कुल स्लिम हौ चुकी थि। संग मे प्राची भि अपने दर्द सें इजातपा चुकी थि, जौ उसे बापू नें दिया थां, तोँ वोँ भि थोडा अच्छा महसूस कररही थि। प्रज्ञा कों भि इसकीभनक तौ लग हि गई थि, कि दिदी अब बिल्कुल ठीकलग रही हैं, औऱ रात कों शायद पिताजी सें मिलनफिन सें कर पाएगी।
पिताजी ऑफ़िस सें आँ चुके थें औऱ गरमचाय पानीकर चुके थें औऱ रात केँ लिए थोडा एक्साइटेड हौ रहे थें। औऱ वोँ थोडा TV देखने मे मशरूफ थें। उधर दादीमा औऱ प्राची किचेन मे रात कां डिनर कि तैयारी कररहे थें। दादीमा नें फिन सें थोडा औऱ ज्ञान प्राची कों देनातय किया।
दादीमा : प्राची, सब्जी काट लें तौ बताना, मै चढ़ा दूंगी मसाला डाल केँ।
प्राची : जी दादीमा, ठीक हैं।
दादीमा : बेटी रात केँ लिए तैयारी मे हौ नं ?
प्राची अचानक सें दादीमा केँ किए प्रश्न कों समझ नहि सकी, शायद उसका ध्यान उतना नहि थां।
प्राची : रात केँ लिए., कौन सि तैयारी, दादीमा।
दादीमा : अरे, देख लोइस लड़की कों, उधर तेरा पति औऱ बापू, इतना बेताब हैं तेरेलिए, औऱ तुम को उसकीकुछ पड़ी हि नहि हैं क्याँ ? मे रात केँ संभोग कि बातकर रहीहु। रात कों होना हैं नाँ तुम् दोनों केँ बीच ?
प्राची कां ध्यान दादीमा केँ बात पे अब पूरा थां वोँ थोडा झेंपते हुए बोलीं : जी दादीमा।
दादीमा : जी दादीमा क्याँ ? सजधजकर हैं न् ?
दादीमा प्राची केँ मुंह सें स्पष्ट सुनना चाहती थि। वोँ चाहती थि कि प्राची अबखुल केँ सारीबात करे उनकेसंग।
प्राची : हां दादीमा सजधजकर हि हु।
दादीमा : हां, यह बहोत जरूरी हैं बेटी कि पति कों तुँ खुशरखा कर।
प्राची : जी दादीमा, मै पूरी कोशिश करूंगी।
दादीमा : चलआज दूसरा दिन जरूर हैं तेरे औऱ बापू केँ मिलन कां, मगर तूने पहलेदिन केँ बाद संभोग जोँ नहि किया, हौ सकता हैं, आज भि थोडा दर्द होँ तुझेही, क्योंकि योनिफिन टाइट हौ गई हौ।
प्राची : दादीमा, मतलबआज फिन सें उतना ज़्यादा दर्द होगा क्याँ मुझे ?
दादीमा: नाँ नाँ, पहलेदिन जैसा तोँ बिल्कुल नहि होगा, हा अभि अभि तूने सेक्स शुरुआत किया हैं, तोँ तेरी योनि टाइट हि रहेगी, थोडा दर्द तौ होगाजब तक तुँ रेगुलर सेक्स नहि शुरुआत कर देती बापू केँ संग।
प्राची : रेगुलर सें मतलब दादीमा हररोज ?
दादीमा : हररोज क्यूं नहि, अगर तुम् दोनों कों अच्छा लगे तोँ हररोज याँ दिन मे १०बार भि कर सकते होँ तुम् दोनों। हाहाहाहाहा.
प्राची थोडा लज्जा सें नीचे देखने लगी।
दादीमा : अरे मेरी बेटी, अब पिताजी तेरा पति हैं। जितना मर्जी होँ, वोँ तेरा आनंद लेँ सकते हैं, औऱ तुम को जितना मनकरे पति केँ संग चूदाई कर सकती हौ, कोई भि नहि रोकेगा तुम् लोगों कों।
प्राची : शर्माते हुए, जी दादीमा।
दादीमा : औऱ एक् बात बेटी, मैने पहले भि कहा हैं, आज भि कहतीहु, पिताजी कों अपने अंदरबीज गिराने सें मत रोकना। मुझे बड़ामन हैं, कि जितनी जल्द हौ सके, तुम् दोनों कां परिवार बसतादेख लु।
प्राची : दादीमा, मै तौ अभि स्वयं बच्ची हि हु, मैयहसभी केसे संभाल पाऊंगी अभि।
दादीमा : हां जानती हु बेटी, कि तेरीउमर थोड़ी कम हैं अभि, पऱ एक् बातयाद रख, जितना जल्द तुँ इसघऱ कों बच्चा देगी, उतना हि तेरा सम्मान पति केँ नजर मे बढ़ जाएगा। वोँ तुमसे औऱ अधिक प्रेम करनेलग जाएगा।
दादीमा बस प्राची कों बच्चा करने केँ लिएयह सभी बातेकर केँ बहलारही थि।
प्राची : ठीक हैं दादीमा, कोशिश करूंगी मे।
दादीमा : कोशिश नहि करना हैं, करना हि हैं। मुझे बड़ामन हैं कि मे अपने बेटे कां एक् मुन्ना याँ मुन्नी कों अपनेगोद मे खिलाऊं, जैसे तुम् दोनों बहनों कों खिलाया थां।
प्राची : जी दादीमा।
प्राची अभि तौ ठीक सें चूदाई केँ मजे वोँ नहि लेना सीखी थि औऱ दादीमा ऐसा प्रैशर बनारही थि बच्चे केँ लिए, यह उसे थोडा अजीब जरूरलग रहा थां।
करीब-करीब १ घंटे मे डिनर सजधजकर होँ गय़ा ओरसभी खानां खाने बैठे। सभी चुपचाप खानां खारहे थें।
प्रज्ञा नें शांति भंग करतेहुए पिताजी सें बोला : पिताजी, मेरी एग्जाम शुरुआत हौ रही हैं बारहवीं कि, अगले सोमवार सें। औऱ सेंटर यहीबगल केँ विमेन कॉलेज मे हैं।
पिताजी: अरे वाउ, यह ठीक हौ गय़ा, चलमै तुम्हें दफ़्तर जातेहुए हि रस्ते मे छोड़ दिया करूंगा।
दादीमा : औऱ मेरी बच्ची, तैयारी कैसी हैं तेरी?
प्रज्ञा : अच्छी हैं दादीमा।
दादीमा : ठीक हैं, अच्छे सें एग्जाम देना।
प्राची : ऑलद बेस्ट छुटकी, अच्छे सें देना एग्जाम।
प्रज्ञा थोड़ी मुंहफट थि औऱ कभीकभी, उसके मुंह सें कुछ भि, कही भि, निकल जाता थां।
प्रज्ञा : थैंक्स दिदी, आपको भि रात केँ लिएऑल थें बेस्ट दिदी।
दादीमा एक् दम सें चकितरह गई, पिताजी थोडा झूठा खांसने लगे औऱ प्राची भि शर्मा केँ लाल होँ गई।
दादीमा : अरे, तूँ कुछ भि, कही भि बोल देती हैं ? क्याँ मतलब तेरारात केँ लिएऑल द बेस्ट?
प्रज्ञा कों अपनी गलती कां एहसास हुआ : अरे नहि दादीमा, मै तोँ बस दिदी कों हिम्मत देरही थि।
दादीमा : दिदी कों हिम्मत देने केँ लिए मे औऱ तेरे बापू हैं, तूँ इनअब बातों मे ध्यान मतदे, अभि एग्जाम कि तैयारी कर।
प्रज्ञा केँ इसतरह सें बोल्ना पिताजी कों पूरा आश्वस्त कर चुका थां कि अब उनकी छोटी बेटी भि छोटी नहि रह गई हैं। उसेअब पता हैं घऱ मे क्याँ हौ रहा हैं। औऱ विवाह केँ बाद मेरे कमरे मे उसकी दिदी केँ संग क्याँ होता हैं।
बापू:अरे मा, बेकार मे हि डांटरही हौ तुम् इसे, बच्ची हैं अभि, थोड़ी समझदार होगी तोँ थोड़े न् ऐसे मुंहफट रहेगी। थोडा गम्भीर स्वयं होँ जाएगी।
प्रज्ञा : पिताजी सें- सॉरी बापू मुझेऐसे नहि बोल्ना चाहिए थां।
बापू: नहि बाबू, तुम्हारे घऱ मे क्याँ होँ रहा हैं, वोँ सभी तोँ तुम्हे जानना हि चाहिए। औऱ तुम् तौ अब बड़ी भि होँ गई हौ। तुम् खुल केँ अपनामत परिवार मे रख सकती होँ, वैसे तुम्हे तौ पता हि हैं अब प्राची तुम्हारी मात्र दिदी हि नहि, मा भि हैं, औऱ मेरी पत्नि भि हैं। अब प्राची मेरी जिम्मेदारी हैं बेटी। मे इसे खुशी देने कां कोशिश करूंगा।
प्रज्ञा : जी बापू, मैसमझ रहीहु कि आप् दिदी केँ लिए अच्छे हसबैंड बन केँ जरूर उभरेंगे।
दादीमा औऱ प्राची बस चुपचाप खानां खानेलगे।
बापू:चलो खानां खालो बेटी, औऱ अपने कमरे मे जा केँ पढ़ाई करना।
प्रज्ञा : जी बापू।
सभी नें खानां खाया। एक् अजीब सि शांति थि अभि। सभी शांत खानां खारहे थें उस प्राची औऱ बापू केँ संवाद केँ बाद।
खानां केँ बाद, दादीमा किचेन मे बर्तन धोरही थि। पिताजी नें दादीमा कों जा केँ बोला : अरेमा, प्रज्ञा इतनी समझदार होँ गई, मै समझा नहि थां।
दादीमा : हां बेटे, वोँ भि अब जानती हैं कि उसके दिदी केँ संग तुम् सेक्स करते होँ। मुझ सें हि उसने सारी बाते पूछी थि।
पिताजी: पर्र अपने बताया क्यूं मा?
दादीमा : तौ क्याँ करती, प्राची कि चीखसुन केँ वोँ तुम् दोनों कों पहलेदिन हि डिस्टर्ब करती। तोँ सभीकुछ बताना पऱ कि उसके दिदी केँ संग क्याँ हौ रहा हैं औऱ वोँ बिल्कुल ठीक हैं।
बापू:ओह, तभी कि प्राची कों ऑलद बेस्ट बोलरही थि।
दादीमा : हां बेटा।
ठीक हैं माँ: मै अपने कमरे मे जारहा हु। प्राची कों जल्दभेज दीजिएगा।
दादीमा : हांहां, भेज दूंगी तेरे पत्नि कों तेरेपास, अपनेपास थोड़े न् रख लूंगी।
पिताजी: हाहा.अरे माबसअब सबर नहि हौ रहा, एक् सप्ताह सें अपनी पत्नि होतेहुए वोँ नहि करपारहा थां, आपके कारण।
दादीमा : मेरे कारण, स्वयं क्याँ किया थां तुँ, मेरी बच्ची कां हाल खराबकर दिया थां तूने, यहसबक हैं तेरेलिए, जब तक प्राची सेक्स मे पारंगत नहि हौ जाती, अपनेहवस कि थोडा काबूकर केँ रख औऱ एक् याँ दो राउंड केँ बाद छोड़दे उसे, कुछदिन बाद, जम केँ वोँ स्वयं मजे लेगी।
पिताजी: ठीक हैं माँ।
पिताजी पूरा मिज़ाज बना चुके थें आज प्राची सें संभोग केँ लिए। दादीमा कों भि अपने बेटे कि उतावलापन साफदिख रही थि औऱ उससे पक्का पता थां कि आजफिन यह 1 याँ 2 राउंड कर केँ रुकने वाला नहि हैं।
बापू कमरे मे जा चुके थें औऱ प्राची, प्रज्ञा केँ कमरे मे उसेदूध देने गई थि।
प्रज्ञा : सॉरी दिदी मुझेऐसे खाने केँ वक्त नहि बोल्ना चाहिए थां। पता नहि बापू क्याँ सोचेंगे।
प्राची : हम्ममम, तेरी तोँ यही दिक्कत हैं, कुछ भि बोलने सें पहले सोचती बिल्कुल नहि हैं। अब बापू कों भि पतालग गय़ा होगा कि उनकी छोटी बेटी जवान होँ गई हैं औऱ क्याँ।
प्रज्ञा शर्मा गई : धत्त दिदी आप् भि नं।
प्राची : चलकोई नहि, थैंकयू, तेरीऑल द बेस्ट केँ लिए।
प्रज्ञा : अरे दिदी वाउ पूरीखुश हौ आप् तौ, चलिए अच्छे सें बीते आपकीरात आज बापू केँ बाहों मे।
प्राची : बस हौ गय़ा, अब ज़्यादा सर मे मतचढ़।
प्रज्ञा : हांहां, मैसर पे चढ़ू तौ आपको दिक्कत हौ रही हैं, ओररात कों पिताजी जौ आप् पे चढ़ेंगे उसका क्याँ।
प्राची : हाहाहाहाहा, हदकररही होँ तुम् भि, यहमत भूलो मे मम्मी वीहु तेरीअब सें।
प्रज्ञा : ओके मां, सॉरी।
दोनों बेहन हंसने लगे। कि तभी दादीमा कां आवाज़ आया। प्राची पिताजी केँ लिए भि दूध लेकेजा, अगर प्रज्ञा कों दूधदे दिया हौ तोँ, बापू केँ कमरे मे प्रतीक्षा कररहे हैं तेरा।
प्रज्ञा : जाइए माँ, बापू प्रतीक्षा कररहे हैं आपको प्रेम करने केँ लिए।
प्राची : बेशरम, तूँ नहि सुधरेगी।
प्राची इतनाबोल केँ प्रज्ञा केँ कमरे सें खालीदूध कां ग्लास लेके निकल गई।
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Update 23:
बापू कां लंड टनटनाया हुआ थां। वोँ अपने बेटी सें मिलन कों तरसरहे थें। गजब कि प्यास थि उनके अंदर।
प्राची कों दादीमा नें दूध कां ग्लास थमाया औऱ बोला : बेटी, बापू कों आजरात संतुष्ट कर देना। पति कां दिल जीतने कां दो हि तरीका हैं, उसे अच्छा खानां खिला औऱ उसकी प्यास मिटा अच्छे सें। प्यास कां मतलब सेक्स कि तलब। वोँ तेरी अच्छे सें मिटाना होगा बेटी। जा बेटी, दिलजीत लेना अपने मर्द कां।
प्राची : जी दादीमा। मुझे थोडा डर भि लगरहा हैं।
दादीमा : अबडरकहे कां। तेरी पहलीरात मे तोँ तूँ लें हि चुकी हैं, बापू कां मोटा लंड। अब घबरामत, सभी अच्छे सें हौ जाएगा आजरात भि।
प्राची कों बसआज इसलिये डरलगरहा थां, कि कही पिताजी पीछे गान्ड नाँ मार लेँ आज उसकी।
प्राची दूध लेके पिताजी केँ कमरे मे चल पड़ी। अंदर जाते हि दरवाजा बंद किया औऱ पिताजी केँ बगल मे जा केँ बेड पे बैठ गई।
पिताजी: आँ गई मेरीजान। आज तड़पकुछ ज़्यादा हि हैं। आँ मेरेपास।
प्राची : अजी, पहलेयह दूधपी लो, फिन कोईबात होगी।
पिताजी नें ग्लास हाथों मे थमा औऱ एक् बार मे हि पूरा खालीकर दिया। ग्लास कों बेड केँ नीच सरका दिया, औऱ प्राची कां बांह पकड़ केँ अपनेतरफ खींच लिया : आजा.मेरी रानी., आज तुम्हें रात मे जन्नत दिखाऊंगा।
प्राची बापू कि ओर खींच सि गई। औऱ उनके बांहों मे समा चुकी थि।
प्राची : अहह, मेरे पिताजी, थोडा प्रेम सें जन्नत दिखाएगा, नहि तौ पहले जैसे हि एक् दिन सेक्स करेंगे औऱ 7 दिनों तक आपको सुखा हि रहना पड़ेगा।
प्राची नें बापू कों चेतावनी दे दि।
बापू:अरे वाउ, मेरीमाल तौ ताने भि सुनाने लगीअब मुझे। आपकी जैसी मर्जी हुजूर, आहिस्ता करूंगा आज औऱ जन्नत तक कां सफर हम् ऐसे हि धीरे-धीरे धीरे-धीरे पार करेंगे।
बापू नें उसकेबाद अपने लबों कों बढ़ा केँ अपने बेटी केँ लबों पे रख दिया, औऱ चूमने लगे।
म्मम्महाहः, मुआन्ह्ह्हः, चुप्पप्पप, चुप्पप्प। कि आवाज़ सें रूम गूंजने लगा।
बापूओर बेटी कां समागम शुरुआत होँ गय़ा औऱ प्राची भि आज इसमें पूरा डूबना चाहती थि। पहलेदिन तौ घबराहट केँ कारणउसे फोरप्ले कां भि उतना खुशी नहि मिल पाया थां। आज उसका सारा शंकादूर हौ चुका थां कि बापू कां संग वोँ केसेदे। उसने बापू कां चुंबन कां जवाब भि, अपने चुंबन सें देने कां फैसला किया, औऱ पिताजी कां खूबसंग देनेलगी।
पिताजी नें इसकी उम्मीद नहि कि थि। बापू कों बहोत हि अच्छा लगनेलगा। वोँ समझगए कि आज कि यहआग दोनों तरफ बराबर लगी हैं।
उधर प्राची अपने दादीमा कि बातयाद कर केँ, आज बापू कां कमान स्वयं केँ हाथ मे लेना चाहती थि, वोँ चाहती थि कि बापू कों आज वोँ जन्नत दिखाए।
पिताजी नें अब अपने कपड़े अलग करने शुरुआत कर दिया, औऱ प्राची कां भि वस्त्र उतारने लगे। प्राची कां ब्लाउस वोँ उतार चुके थें। अपनी कमीज भि उतर दिया औऱ तन सें तन चिपका केँ अपनी बेटी कों चूमियाने लगे।
प्राची बसऊपर सें ब्रा पहने बापू कि बांहों मे, बापू केँ लबों कों मखमली एहसास करवारही थि। बापूआज प्राची कां होंठो कां रसचूस जानां चाहते थें। बीचबीच मे तौ पिताजी इतनाजोर सें प्राची कां होठ कों सक करते कि उसे थोडा दर्द कां अनुभव भि होता।
पिताजी अब औऱ वक़्त बर्बाद नहि करना चाहते थें। उन्होंने ठान लिया थां, कि जितनी जल्द होँ सके, वोँ प्राची कि बुर कां दर्शन करे, उसे गीलाकरे औऱ अपना लिंग कां ठिकाना वहांघुस केँ बना लें। उन्होंने प्राची कों ब्रा उतार फेंकी। औऱ उसेऊपर सें पूरानगा कर दिया।
प्राची केँ छोटे छोटे संतरे झलक केँ बाहर् आँ गए। बापू एकदम सें छोटे संतरों पे लपकपरे औऱ उसकारस चूसने लगे। प्राची पिताजी केँ बांहों मे किसी छोटी बच्ची जैसी हि लगरही थि। पिताजी केँ हथेली पे उसका पूरा मम्मों भर जाता थां।
बापू बेतहाशा प्राची केँ चूचों कों चूसने लगे। प्राची भि आज एक् अलग खुशी कों महसूस कररही थि। आजउसे यह बापू कां प्रेम, पहलेदिन सें बिल्कुल हि अलगलग रहा थां। पहलेदिन तोँ उसे घबराहट, डर, लज्जा औऱ चिंता, सभी हौ रहा थां। आजऐसा नहि थां, आज वोँ सेक्स कि खिलाड़ी बनाना चाहती थि। पिताजी कों उसे पूर्ण संतुष्टि देना थां। वोँ बापू केँ होंठो कां स्पर्श अपने चूचों पे महसूस करपारही थि। वोँ भि मदहोश हौ गई। पिताजी मम्मों कों चूस हि इतना अच्छा रहे थें।
आज प्राची कों पिताजी कि कलाकारी पे बहोत प्रेम आँ रहा थां। बापू बारी बारी दोनों चूचों कों मुंह मे भरते औऱ बीचबीच मे मम्मों कि गुरी कों भींच केँ मसल देते। निप्पलों कों बापू जैसे हि मसलते, प्राची केँ सर सें पांव तक एक् कंपन सां महसूस होता औऱ उसके बुर मे इकटीस सि उठती थि।
बापूअब निप्पलों कों खींच खींचकर पीरहे थें। बेटी केँ चूचों सें दूध नहि तौ नहि निकलरहा थां, मगर पिताजी कों उसकारस पीने मे जरूरपरम सुखमिल रहा थां।
बापू मम्मों चूसते हुएसोच रहे थें : अहह., क्याँ मक्खन कि तरह सॉफ्ट हैं मेरे 19 साल कि नवविवाहिता नवयौवना बेटी केँ चूचक।
प्राची भि बापू केँ इसतरह केँ मादककला सें बहोत प्रभावित होँ रही थि।
प्राची अपने आप् कों आज एक् खुशकिस्मत पत्नि समझरही थि। उसे पहलेदिन तोँ बहोत संकोच हौ रहा थां। पर्र आजबात कुछअलग सि थि। वोँ खुल केँ आज बापू कां संग देना चाहती थि।
मम्मों चुसाई करतेहुए बापू धीरे-धीरे सें प्राची कां होंठों सें भि रसपी लेते थें। बापूअब प्राची कां होंठ अपने होंठ मे भरे, अपने एक् हाथ सें प्राची केँ छोटे मम्मों कों मसलरहे थें औऱ दूसरे हाथ सें अपने बेटी कां चुतमसल रहे थें, मर्दन कररहे थें। बुर बापू केँ छुअन सें हि टपकाने लगी थि। प्राची आज निहाल होँ गई थि पिताजी केँ प्रेम देख केँ। वोँ इनका पूरासंग दे देना चाहती थि, उनकेसंग हि बह जानां चाहती थि।
पिताजी अपनी बेटी कि बुर अभि भि पैंटी केँ ऊपर सें हि छेड़रहे थें। उन्हें महसूस हुआ कि योनि दरवाज़ा केँ आगे कां पैंटी कां पूरा हिस्सा भीग चुका हैं। वोँ समझगए कि अब बेटी कां बुर दर्शन करना पड़ेगा कि कितनी गीली हौ चुकी हैं।
पिताजी नें अपनी प्यारी बीबी सें बोला : अरे मेरीजान, तेरी बुर तोँ बेतहाशा टपकरही हैं। देख कितनी गीली हुईँ जारही हैं मेरे छुते हि। लगरहा हैं इसे आजाद करना पड़ेगा, मेरी रानी, नहि तोँ यह तेरे पैंटी कों पूरीतरह भिगो देगी।
प्राची उम्म्म्हः उम्ह्ह्ह करतीजा रही थि औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे पिताजी कां लंड लेने केँ लिए जोशिया रही थि।
प्राची : बापू, आपकेलिए हि टपकरही हैं शायद, आप् तोँ इसे जबरदस्त गर्मकर रहे हैं।
बापू:हां बेटी, जरा देखूं तोँ, कितनी गीली हुईँ हैं यह।
बापूअब यहबोल केँ प्राची कि पैंटी कों सरकने लगे।
प्राची कों बापू कां यह अंदाज भारहा थां। पिताजी उसेआज बहोत मादक मर्दलग रहे थें। बापू नें पैंटी सरका केँ पांव केँ नीचे सें उतार चुके थें। औऱ प्राची नीचे सें पूरी नंगी होँ चुकी थि, योनिखुल केँ बापू केँ सामने आँ चुका थां औऱ प्राची पैंटी केँ क़ैद सें आजाद होने केँ बाद, हल्की औऱ नीचे सें आजाद महसूस कररही थि। आजउसे औरत कां असलीजोश कां पताचल रहा थां, कि कितनी गर्मी होती हैं एक् औरत केँ अंदर।
एक् तोँ प्राची कि निगोडी बुर बहनेलगी थि, ऊपर सें बापू कि चुम्बन औऱ मम्मों चूसने कि कला भि उसे मदहोसी सें भररही थि आज। आज वोँ पिताजी केँ संग पूरीतरह खुल चुकी थि।
पिताजी अब अपने पत्नि केँ पूरे जिस्म कां कमान संभाल चुके थें ऊपर सें नीचे तक कुशलता सें वोँ अपने बेटी कों चूसते, चाटते, चूमते औऱ मसलते जारहे थें। आज एक् बेटी अपने पिता केँ आगोश मे पूरी नंगीकर आजाद लेटी, जोसियाते जारही थि।
प्राची कि मदहोशी उसे बहोत बेबसबना रही थि। उसेऐसा लगरहा थां कि वोँ पिताजी केँ बांहों मे हि बेहोश होँ जाएगी। अपनी बेटी कों, इतना मादक, इतना मदहोश होतेदेख बापू कों भि लग गय़ा थां कि आज पहलीबार उनकी बेटी मन सें उन्हें अपना चुकी हैं, नहि तोँ पहलेदिन औऱ उसकेबाद भि, वोँ जबरदस्ती हि प्राची केँ संगयौन सम्बन्ध बनाते औऱ उसके जिस्म केँ संग खिलवाड़ कर पाते थें।
एक् पुरुष कों भि पताचल हि जाता हैं कि कब उसकीऔरत मन सें उसकेसंग सेक्स करना चाहती हैं।
बापू भि जोश मे आँ चुके थें। उनका मोटा लिंग भि उनके कच्छे केँ अंदर हि ऐंठने लगा थां, औऱ हिचकोले माररहा थां। बापू औऱ बेटी कां तन शरीर एक् दूसरे मे रगड़खा रहा थां, औऱ जोश कि सारे सीमा कों पारकर रहा थां। प्राची तौ अपना होशो हवाशखो हि चुकी थि। उसेपरम खुशी मिलने लगा थां।
प्राची इतना जोशिया गई कि उसका अपनेऊपर काबू नां रहा औऱ वोँ बापू कि बांहों मे हि अकड़ने लगी। वोँ एकदमचरम तक पहुंच गई औऱ एक् मादक छटपटाहट केँ संग उसकी बुर नें फव्वारा छोड़ दिया। प्राची अब पहलीबार पिताजी केँ संग फोरप्ले मे हि झड़ चुकी थि। उसके बुर सें एक् गाढ़ा सफेद पानी, एकदम हल्के सें नीचे कि ओर रिसने लगा।
बापू प्राची केँ थरथराहट सें हि समझगए कि उनकी बेटी उनके कलाकारी कों सह नहि पाई औऱ रास्खलित होँ गई हैं।
वोँ अपने बेटी कां चूतरस कां स्वाद चखने केँ लिए बेताब सें हौ गए औऱ अपनीसिर कों प्राची केँ योनि केँ तरफ बढ़ा दिया।
पिताजी अपने बेटी केँ योनि कों एक् टक सें देखने लगे। वोँ आज एक् दमडबल रोटी कि तरह फूली हुई थि औऱ उसकेबीच सें एक् सफेदरस कां लाइन सां बनाहुआ थां, जौ बह केँ उसके गांड केँ छेद तक टपक चुका थां। बापू नें झट सें अपनाजीभ निकल केँ रसचाट गए औऱ प्राची केँ बुर कों अपने होंठों सें कैद केँ लिया। वोँ अपनी बेटी कां बुर चाटरहे थें।
कभीज़ीभ लगा केँ चाटते, तौ कभी होंठो सें योनि केँ बाहरी होंठों कों चूसने लगते।
प्राची कां पाराफिन सें बढ़ने लगा। वोँ बापू कि बुर चूसने कि कला कों भि, अपने मुंह सें मादक सिसकारियां निकला केँ, सराहने लगी थि।
प्राची :आह्ह्ह.आह्ह्ह्ह.उंह्ह्ह्ह.पिताजी.
कितने अच्छे हैं आप्.मै निहाल हौ गई.आपसे बहोत प्रेम करतीहु मे बापू। आह्ह्ह्ह.ऐसे हि चूसिए.अहह.
बापू कि बुर चुसाई सें प्राची निहाल होँ गई, बापू करीब-करीब, 10 मिनटऐसे हि प्राची कां योनि रसपान करतेरहे। औऱ प्राची फिन सें अकड़ने लगी। प्राची नें, एक् गरम रसदार फव्वारा सां बापू केँ मुंह मे हि छोड़ दिया औऱ चीत्कार मारते हुईँ बापू केँ मुंह मे हि छड़ गई।
दूसरी बार झरने केँ बाद प्राची पताचल गय़ा कि आज वोँ कितनी बार झड़ेगी उसे इसका अंदाजा वोँ नहि हैं। क्योंकि पिताजी नें तोँ लंड अभि खोला वोँ नहि हैं औऱ उसकी योनिदो बाररस छोड़ चुकी थि।
Beti Bani Sahara - Next part miss mat karna
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