Beti Bani Sahara – New Episode
Update 24:
प्राची 2 बार, चूदाई सें पहले हि, झर चुकी थि। उसकीआग अब झरने सें शांत नहि औऱ भड़करही थि, क्यूं कि पिताजी कां जीभ औऱ होंठ उसकी बुर पे अपना कमाल अभि भि दिखारहा थां। पिताजी चपाचप योनिरस पिएजा रहे थें औऱ प्राची फिन सें हल्की चीख मारेजा रही थि।
बीचबीच मे बापू अपनी उंगली भि प्राची केँ योनि केँ मुहाने पऱ फिरा देते थें। प्राची बापू कि उंगली फिरते हि एक् चंचनाहट, एक् गुदगुदी सि महसूस करती। आज बापू केँ संगउसे बहोत आनंद आँ रहा थां। बापूअब चाटना छोड़ केँ हल्के हाथों सें योनि दरवाज़ा पे सहलाते औऱ बीचबीच मे योनि केँ दाने कों कसमसल देते थें। पिताजी केँ हाथ लगते हि प्राची कों एक् सिहरन सि होती थि।
बुर कि पंखुड़ियों सें बापू कां यू खेलना प्राची केँ मन कों एक् अलग सां चैन, एक् अलग सां आनंददे रहा थां। उसे पहलेदिन सेक्स कर केँ लगा थां, वोँ सेक्स कभी एन्जॉय नहि कर पाएगी औऱ सेक्स मे मात्र मर्द कों हि आनंदआता हैं, पऱ आज पिताजी नें उसकी धारणा कों बदल केँ रख दिया थां। उसे पिताजी पे अचानक बहोत प्यार आँ रहा थां। वोँ पिताजी कों अपना मर्दमान चुकी थि। बापू कों वोँ आजसच मे अपना बुर चोदने कि देना चाहती थि, जौ बापू नें सुहागरात केँ दिन जबरदस्ती लें लिया थां।
बापू नें भि आजयह महसूस कर लिया थां कि आज उनकी बेटी उनकासंग बारेजोश केँ संगदे रही हैं औऱ सच मे वोँ आज सेक्स एंजॉय कररही हैं।
पिताजी नें इस एंजॉयमेंट कों बनाए रखने केँ लिए सोचा कि, मेरा प्राची केँ बुर मे डायरेक्ट लंड डालना सही नहि होगा, अब इसकासील तोँ टूट हि चुका हैं तौ मुझेआज इसे बुर कां असली मज़ा देना चाहता हु। उसकेलिए क्यूं नां पहले उंगली सें हि प्राची कां बुर चोदन कियाजाए।
बापू नें मनबना लिया कि आज वोँ पहले प्राची केँ बुर कों उंगली सें चोदेंगे, फिन लंड सें।
पिताजी नें यहीसोच केँ प्राची सें बोला : मेरीजान, आपकोआज एक् नया एहसाह करना चाहता हु। आप् सजधजकर हैं ?
प्राची : हां मेरे सैयाजी, मैआज आपकेसंग कुछ भि करने कों सजधजकर हु।
बापू : ठीक हैं प्राची, मै तेरे बुर मे आज पहले ऊंगली डालूंगा, फिन अपना हथियार।
प्राची : मैने बोला नां बापू, आपको मे आजकुछ करने सें नहि रोकूंगी, आज मुझे आप् बहोत आनंददे रहे हैं।
पिताजी समझगए, आज पहलीबार प्राची कों पताचल गय़ा हैं कि एक् मर्द केसे अपने महिला कों मज़ा दिलाता हैं।
बापू अपनी एक् उंगली प्राची केँ बुर मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे सरकने लगे। बुर गीली थि औऱ रसदार भि। पिताजी कि उंगली प्राची केँ बापू योनि मे फिसलते हुए प्रवेश करनेलगा।
पिताजी नें अपनीबीच कि उंगली सें 4-5 बार योनि कि दरार पऱ फिराया औऱ फिन अंदर प्रवेश करतेचले गए।
प्राची केँ मुंह सें आहें निकलने लगी। बापू उंगली बुर मे घुसारहे थें औऱ प्राची कां शरीर पूरा कांपरहा थां। बुर कि नसे बापू केँ उंगली प्रवेश सें हि पूरे जिस्म मे गर्मी पैदाकर रहे थें। अहह कितना मज़ा आँ रहा थां प्राची कों। वोँ बसचित हौ लेटी थि औऱ पिताजी उसके योनि केँ संग अपने उंगली सें खिलवाड़ करतेजा रहे थें।
बापू अपनी बेटी केँ बुर केँ अंदर अपने उंगली सें तब तक प्रेशर बनाते रहे, जब तक उनकी उंगली पूरीतरह सें प्राची कि बुर केँ गहराई तक नहि धंस गय़ा। पिताजी नें जड़ तक अपनी उंगली प्राची कि योनि मे पेश दियाओर प्राची कों हल्के सें मीठा मीठा दर्द कां अनुभव हुआ। यह दर्दआज उसे क्याँ आनंददे रहे थें यहवही जानती थि।
उसके मुंह सें आह सि फूट पड़ी : सीआईएससीई.आह्हाहाहाहाह.पिताजी जरा धीरे-धीरे धीरे-धीरे।
पिताजी: अहह मेरी रानी, मेरी बेटी, मेरी जान.एकदम धीरे-धीरे हि कररहा हु मेरी बाबू।
प्राची : पिताजी, आज सें पहले मुझेपता हि नहि थां कि मेरे गुप्तांग सें खेल केँ आप् मुझे इतना आनंददे सकते हैं। आहाहाहाहाह.मेरे सैया जी.आपकी उंगली मेरे बुर मे कहरढा रही हैं पिताजी।
पिताजी: अग्ह्ह्ह्ह्ह्ह.बेटी तेरे बातों सें मेरा लंड आउटऑफ कंट्रोल हौ गय़ा हैं।
प्राची : पिताजी आज मेरी भि गुप्तांग मेरे कंट्रोल सें बाहर् हौ गई हैं पिताजी, रहरह केँ इसका पानी निकलजा रहा हैं बापू।
पिताजी इन बातों सें जोश मे आतेजा रहे थें औऱ उनकी उंगली अब तेजी सें सटासट प्राची केँ बुर केँ अंदर बाहर् होनेलगी थि। योनि पहले तौ थोड़ी टाइट सि महसूस हुइ थि पिताजी कों जब उन्होंने उंगली प्रवेश किया, मगर अब बुर केँ चिकनाई बढ़ चुकी थि औऱ उसकी बुर मे बापू कि उंगली वोँ अच्छे सें फचाफच घुसने लगा थां।
पिताजी नें जब देखा हि एक् उंगली प्राची केँ बुर मे धीरे-धीरे अंदर बाहर् होँ रही हैं तौ बापू नें एकदम सें हि प्राची केँ योनिमुख पे एक् औऱ उंगली सें दस्तक कर दि औऱ जरा सां जोर लगते हि पक्क सें दूसरी उंगली वी योनि मे प्रवेश कर गई।
अचानक हुएइस हमले सें प्राची कों एकदम सें दर्द कां एहसास सां हुआ। उसे अचानक सें पिताजी कि उंगली मोटी लगनेलगी। उसने अपनासर उठा केँ अपने बुर कि ओर देखा तोँ वोँ देखती हैं, कि पिताजी अपनी२ उंगली उसके गुप्तांग मे प्रवेश कर चुके हैं, वोँ थोडा सिहर सि गई, पर्र बोलकुछ नाँ पाई।
वोँ अब पिताजी केँ संगहवस केँ क्रिया मे पूरासंग देना चाहती थि। आजजिस तरह कां मज़ाउसे लाइफ मे पहलीबार मिलरहा थां उसकेलिए इतना दर्द तौ वोँ सह हि सकती थि।
बापूदो उंगली डाले थोड़े देर तक धीरे-धीरे धीरे-धीरे बुर मे अंदर बाहर् करतेरहे।
पिताजी ऐसा करतेहुए अपनी बेटी कों देखेजा रहे थें। वोँ प्राची केँ चेहरे कि हरभाव कों पढ़पा रहे थें औऱ समझपा रहे थें कि प्राची महसूस कैसाकर रही हैं।
बापू नें देखा कि फिन सें प्राची कि आहेंतेज होनेलगी हैं। आंखेबंद होँ चुकी हैं, ओर बेटी २ उंगली भि सह सकती हैं अब। फिन क्याँ थां, पिताजी अब अपने हाथों कों तेजी सें प्राची केँ बुर पे चलाने लगे।
पिताजी कां हाथ तेजी सें अपनाकाम कररहा थां। पिताजी केँ हर झटके केँ संग प्राची कां पूरा जिस्म हिलरहा थां। चूचियां भि उछलरही थि।
कमरे मे फचफचफच। कि आवाज़ हंगामा करनेलगी थि। संग कि प्राची केँ मुंह सें आहे भि निकलरही थि : अहहहाह.उम्म्ह्ह्ह.उम्मम्म.पिताजी ओरतेज करिए न् बापू, बहोत आनंद आँ रहा हैं।
पिताजी अपने हाथों कों ओर रफ़्तार सें चलनेलगे। बापू नें अपने उंगली कों अब सीधा घुमा केँ बुर केँ आखिरी गहराई मे घुसाने कां प्रयास करनेलगे थें।
प्राची बस मदहोशी मे पड़ीरही थि।
अचानक प्राची नें अपना जिस्म टाइट करना शुरुआत कर दिया, बापूओर तेजी सें अपनाकाम करतेरहे।
प्राची एकदम सें प्यास सि रहीथीं, वोँ जलबिन मछली बिना छटपटाने लगी। उसकेकमर ऊपर कि ओरहवा मे रहरह केँ उठाने लगे। जोश कि पराकाष्ठा कों वोँ छू चुकी थि।
पिताजी अब अपनी बेटी पे कोईरहम नहि दिखारहे थें। प्राची छटपटाते हुए पिताजी कां हाथ पकड़रही थि, कि शायद बापूरुक जाए। पर्र पिताजी प्राची कों पूर्ण सुख देना चाहते थें इस उंगली चोदन कां। पिताजी औऱ तेज करनेलगे।
प्राची आज तक ऐसी छटपटाहट, इतनी सेन्सेशन कों महसूस नहि कि थि तोँ इसजोश मे उसका सारा ऊर्जा चूस केँ रख दिया थां।
बापू कां २ उंगली उसकी बुर कों गजब आनंददे रही थि।
अचानक सें उसका जिस्म थरथराने लगा औऱ फिन अकड़ सां गय़ा। उसकी गांड़ हवा मे उठ गई औऱ जिस्म धनुष कि तरह अकड़ गय़ा। एक् आर्क सां बन गय़ा थां प्राची कां बदन। इतनाजोश। पिताजी यहदेख केँ पागल होँ गए थें। उसके बुर सें फ़लफला केँ एक् रस कां फव्वारा पिताजी केँ उंगलियों पे निकलता महसूस हुआ। औऱ अलगे हि समय प्राची कां चूतडबेड पे धराम सें गिर पड़ा। वोँ गजबझड़ चुकी थि, बहोत सारा पानी निकला थां उसकी बुर सें। बापू नें जैसे हि अपना दोनों उंगली उसके बुर केँ बाहर् खींचा कि एक् पुच्च.कि आवाज़ आई। औऱ संग हि बापू केँ उंगलियों पे उनकी बेटी कां ढेर सारा गढ़ा योनिरस लग गय़ा थां। पिताजी कि उंगलियों अपने बेटी केँ रस सें सराबोर थां।
प्राची कि हालतअब देखने लायक थि। उसकेबाल बिखरे सें होँ गए थें। उसकी बुर एक् दम चिपचिपी पानी सें भराहुआ थां। उसकी सांसे तेजचल रही थि औऱ वोँ पसीने सें लथपथ हौ चुकी थि। उसकी अभि चूदाई सें पहले हि ऐसी हालत हौ गई थि कि लगारहा थां पूरीरात किसी नें उसे चोदा होँ।
प्राची सोचने लगी : ओह, मेरे बापू तोँ खिलाड़ी निकले। बिना चोदे हि मेरीऐसी हालत केँ दि।
प्राची कों अपने बापू मे बहोत प्रेम आँ रहा थां, औऱ अब वोँ ललचाई नजरों सें अपने पिताजी कि ओर देखते जारही थि। वोँ जानती थि अभि तोँ एक् लम्बी चूदाई कि रात कि शुरुआत हि हुईँ हैं। इतने मे हि प्राची ३बारचरम सुखपा चुकी थि।
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Update 25:
पिताजी महसूस करपारहे थें कि बेटी पस्त हौ चुकी हैं, उनके फिंगरिंग कि कला दिखाने केँ बाद।
बापू नें अबदेर नं करतेहुए अपना चड्डी नीचे सरकाया औऱ अपना लंड आजादकर दिया,
उनकामन तोँ सीधे प्राची केँ योनि मे घूस जाने कां थां मगर प्राची अभि जल्दी झड़ चुकी थि औऱ निढ़ाल पड़ी हुई थि। उसेफिन सें गर्म होने मे थोडा तौ वक्त लगता। बापू नें सोचा क्यूं न् एक् बार बेटी केँ मुख चोदन करने केँ बादचुत चोदन कियाजाए।
बापू : बेटी, कैसालगा मेरा तेरी योनि सें खेलने कां तरीका, मज़ाआया नं तुझेही मेरी बच्ची?
प्राची : जी पिताजी, अपने तोँ आज मेरे योनि मे तूफान हि मचा दिया थां। बहोत आनंदआया पिताजी मुझे। यह मेरेलिए एकदमनया थां पिताजी।
पिताजी : बेटी, अभि तुँ बस अपना सबकुछ मुझे समर्पण करदे, फिन देख मे तुझेही क्याँ क्याँ नया सिखाता हु।
प्राची : पिताजी, आपकी पत्नि हु, आपकी हि हौ चुकीहु, ओर आपसेअब तोँ मुझे बेहद प्रेम हौ गय़ा हैं पिताजी।
बापू: बेटी मुझे तोँ तेरे सें उसीदिन प्रेम हौ गय़ा थां, जब तेरी दादीमा नें, हमारी विवाह कि बात चलाई थि।
पिताजी फिन सें प्राची केँ लबों कों चूमने लगे, उसके गर्दन पे भि किस करनेलगे।
बापू: बेटी, अब मे तेरीफिन सें कुछनया सिखाऊंगा, सजधजकर हैं नाँ।
प्राची (अरेअब नया क्याँ सिखाएंगे ) : ठीक हैं बापू, मै सजधजकर हु।
बापू: शाबाश मेरी रानी, चल तेरी मेरे मुंह पे अपना योनि रखना हैं औऱ उल्टे होँ केँ सीधा मेरी लिंग कि ओरलेट जानां हैं। मे चित होके लेटूंगा औऱ मेरा लिंग कों अपने मुंह मे लेना हैं। उसे थोड़ी सि गीली केँ दे तौ तेरे योनि मे जाने मे आसानी होगी। वही तुम्हारी तरफ थोडा गर्म करने केँ लिएमै तेरे बुर चाटता हु।
प्राची कों यहकुछ समझ नहि आया : अरे, बापू मे आपकी लिंग चूसूँगी, फिन आप् मेरी योनि केसेचाट पाएंगे।
पिताजी : तुँ बस देखती जा मेरीबची, चलआज मेरेऊपर।
पिताजी प्राची केँ संग 69 पोजीशन मे मज़ा लेना चाहते थें।
बापूचित लेटगए औऱ प्राची, बापू केँ कहे अनुसार, पिताजी केँ मुंह केँ ऊपर अपना योनि लें केँ सजधजकर होँ गई। अब उनका मुंह प्राची केँ बुर केँ मुहाने कि तरफ थां। बापू नें प्राची कां कमर दबोच लिया औऱ उसकी योनि अपनी मुंह कि औऱ दवा केँ, सूअरररपपप्प.कि आवाज़ केँ संग योनिरस पीनेलगे।
उन्होंने प्राची कां पीठदबा केँ उसेनीच झुकने कों बोला औऱ अब प्राची कां मुंह बिल्कुल बापू केँ लंड केँ सामने आँ गय़ा। उसकी तोँ, पिताजी केँ योनि पे मुंह लगते हि हालत खराब होँ गई, योनि कि आगफिन भड़कने लगी थि। वोँ चप सें पिताजी कां लिंग अपने मुंह मे भरली औऱ गुप्प घुप्प.गोपपपप.गो.कि आवाज़ केँ संग लिंग उसके मुंह मे अंदर बाहर् होनेलगा।
पिताजी औऱ प्राची केँ बीचयह 69 वालाखेल करीब-करीब 10 मिनट तक चलतारहा, बीच मे प्राची, एक् बार औऱ, अपनाचुत रस, अपने पिता कों पीला चुकी थि। उसकी निगोडी बुर कों आज हौ गय़ा क्याँ थां ? उसे इसकाकुछ खबर वोँ नहि थां। पिता केँ छू लेने सें हि आज वोँ बहने होँ सजधजकर थां।
पिताजी कां लंड अब एकदम टाइट खड़ा होँ गय़ा थां। औऱ वोँ अब प्राची केँ सामने अपना हाथियार नहि डालना चाहते थें, उन्हें पता थां, अगर प्राची ऐसे हि थोडा देर औऱ उनका लंड चूसती रहेगी तौ वोँ प्राची केँ हलक सें अपनामाल उसकीपेट मे उतार देंगे।
वोँ प्राची कों बोले : बस रानी, अब वक्त आँ गय़ा हैं कि तेरी गहराई मे मैउतर केँ थोडा गोतालगा लू।
प्राची समझ गई, कि अब बापू अपनातोप उसकी किले मे डाल केँ सटासट गोले दागने वाले हैं। उसकी बुर भि बहोत पानी छोड़रही थि औऱ गर्म होँ गई थि। उसकी योनि कों अब एक् लिंग कि दरकार थि। वोँ एकदमलूप लूप केँ रही थि, गाढ़ी बुर रस केँ कारण।
वोँ पिताजी केँ ऊपर सें उतरी औऱ सीधेलेट गई। पिताजी भि अब प्राची केँ ऊपरआगे ओर योनि प्रवेश केँ लिए पोजीशन बनाने लगे। प्राची कि दोनों टांगे पकड़ केँ उन्होंने उल्टी दिशा मे खोल दिया, औऱ बुर एकदम हि खुल केँ उनके सामने आँ गई।
प्राची कि बुर कि फांके फ़रफरा रही थि औऱ फरकरही थि। यह उसके उत्तेजना कां प्रमाण देरहे थें। बापू नें उसे थोडा सां, अपने उंगलियों सें, चिथार केँ, छेद मे झांकने कि कोशिश कि।
हायराम बुर अंदर सें बहुतलाल सि दिखरही थि। छिद्र तौ अभि भि बहुत छोटे औऱ कसेहुए लगरहे थें।
बापूसमझ गए कि आज वोँ जन्नत कि शैर, अपने बेटी पे चढ़ केँ करने वाले हैं। उनका लंड अब इतना टाइट होँ चुका थां कि उन्हें अब थोडा दर्द कां अनुभव भि हौ रहा थां। अबदेर कारणसही नहि होगा। नाँ प्राची केँ लिए, नाँ पिताजी केँ लिए, दोनों हि काम अग्नि मे जलरहे थें, ओर दोनों कों एक् दूसरे कि जरूरत थि अभि। दोनों एक् दूसरे मे समा जानां चाहते थें।
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Update 26:
पिताजी कां लौड़ा पूरा उफानमार कर टनटनाया हुआ थां। एक् दम लोहे केँ रॉड कि तरह सख्त, अपने बेटी केँ योनि मे जाने कि रेडी।
पिताजी: बेटी, पहलेरात कों तोँ तेरीइस लंड नें हालात खराबकर दि थि, आजयही लंड तेरी योनि मे जायेगा औऱ इतना आनंद देगा कि तुँ पागल होँ जाएगी इसकेलिए।
प्राची नें एक् बार अपने पिताजी कां लंड, जोँ अब उसके जिस्म केँ अंदरूनी हिस्से मे जाने वाला थां, उसे अपने हाथों मे लें केँ महसूस किया। उसने बापू केँ सुपारा पे चढ़े चमरी कों हल्के सें नीचे कि ओर खींचा औऱ लंड केँ विशाल सुपारा छिटक केँ बाहर् आँ गय़ा, उसेदेख केँ, प्राची थोडा विचलित सि हौ गई।
पिताजी कां लौड़ा सच मे बहुततन केँ खड़ाहुआ थां। वोँ थोडा सां तोँ सिहर गई थि। सुपारा इतना नुकीला बन गय़ा थां कि वोँ समझ गई थि, कि वोँ उसके योनि केँ दरार चीरते हुए अंदर घुसेगी।
मगर प्राची सच मे बहुत गर्म भि होँ गई थि औऱ अपनी गांड़ उठाउठा केँ पिताजी कों निमंत्रण देरही थि कि, वोँ अपनी पत्नि मे प्रवेश करजाए जल्द सें।
बापू कों भि लगाअब बहोत होँ गय़ा, अब प्रवेश जल्द करना होगा, नहि तौ आनंद खराब हौ जाएगा।
बापू प्राची केँ बगल मे लेटगए, उसको साइड सें अपनेपेट मे सटा लिया औऱ लौड़ा कों उसके योनि केँ एकदम लगभग लेँ केँ चलेगए। वोँ अब प्राची कि बुर कि गर्मी कों अपने लंड पे महसूस करपारहे थें। वोँ अब सजधजकर थें।
बापू नें प्राची केँ बुर पे अपना लंड लगाया औऱ एक् बार मे हि पूरे ताक़त सें योनि मे दाखिल करा दिया।
लंड पक्क कि आवाज़ केँ संग अंदरचला गय़ा। प्राची कों फिन सें एक् असहनीय दर्द कां आभासहुआ। वोँ चीख पारी : आँ। आहुह्ह्ह्ह आहुह्ह्हह्हःह्ह्हःहः.पिताजी बहोत दर्द होँ रहा हैं, फिन सें।
बापू : बस बेटी आज ज़्यादा दर्द नहि होगा। तूने पहली सेक्स केँ बाद 7 दिन कां जौ ब्रेक लेँ लिया, इस कारण सें योनि कि टाइटन्स कम नहि हुइ हैं। बस 2 मिनट संभाल बेटी अपने आप् कों।
प्राची दर्द सहती हुईँ बापू सें सट केँ लेटीरही। पिताजी बहोत अधिकजोश मे थें उनका लिंग प्राची केँ योनि मे घूस केँ भि हिचकोले माररहा थां।
प्राची केँ बुर मे जड़ तक पिताजी कां लौड़ा गड़ाहुआ थां। वोँ दर्द सें छटपटा रही थि।
पिताजी करीब 5 मिनट, उसी अवस्था मे प्राची केँ बुर कि गहराई मे टिकेरहे औऱ फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे वोँ अपनाकाम चालूकर चुके थें। उनकाकमर आगे पीछे होनेलगा।
प्राची कां भि दर्दअब एक् मीठीटीस मे बदल गई थि, उसके योनि कि दीवारों मे खुजली सि होँ रही थि।
पिताजी अब थोडा फ्री हौ केँ बुर पे अपना लंड पटकने लगे। पहले धीरे-धीरे धीरे-धीरे, फिन थोडा तेज, औऱ अब बापू पूरी रफ्तार मे चूदाई कि शुरुआत कर चुके थें।
पिताजी कां लौड़ा सटासट प्राची केँ बुर मे अंदर-बाहर्, अंदर-बाहर् करनेलगा। बापूचोद चोद केँ निहाल होँ रहे थें। उनका अंडकोष प्राची केँ गांड़ कि छेद पे तेजतेज चपेरे माररहा थां।
तेजतेज चूदाई केँ प्रकोप सें प्राची अब मदहोश होनेलगी थि। पिताजी केँ लंड कां ठिकाना अब प्राची कि बुर होँ चुकी थि।
बापू केँ कड़क लिंग कि चोट सें प्राची कां रोमरोम हिल गय़ा थां। यह एक् जबरदस्त समागम होँ रहा थां, एक् पिता औऱ पुत्री केँ बीच।
प्राची केँ मुख सें भांति भांति केँ मादक आवाज़ वोँ निकलरहे थें : आह्हः। आह्ह्ह्ह। उत्ह्ह्ह। उफ़.पिताजी आप् कमालकर रहे हैं.मै आपकी पत्नि बन केँ बहोत खुशहु। अहह पिताजी। ओहह्ह्ह.
प्राची मदहोश हौ गई, इतना कि अचानक हि एक् ऐंठन केँ संग वोँ निढाल होकेबह गई। उसका पानी निकल गय़ा, पांचवी बार, फिन सें।
प्राची कों पिताजी नें अब थोडा अलगपोज, औऱ अलग अंदाज मे, चोदना चाहते थें। वोँ प्राची कों बोले : बेटी चल थोडा मेरीगोद मे लेके तुम को चोदने कां मनकररहा हैं।
प्राची आंखेबंद किए पिताजी केँ लौड़े कां मज़ा लेँ रही थि। प्राची नें आंखे धीरे-धीरे सें खोली, उसके आंखों मे लाल डोरेदिख रहे थें। वोँ पूरीहवस कि आग मे झुलसी हुइ थि औऱ पिताजी केँ लंड सें अपनी योनि कि खुजली कां इलाज करवारही थि।
वोँ पिताजी केँ गोद मे लेने वालीबात सें थोड़ी शर्मा सि गई।
बापूभाप गए कि बेटी थोडा संकोची होँ रही हैं, उन्होंने बोला : बेटी कों अपने बापू केँ गोद मे आने मे संकोच कैसा, बच्चे मे तोँ जब भि मे बाजार सें चॉकलेट लाया करता थां तब तौ तूँ तेजी सें दौर केँ मेरेगोद मे आँ जाती थि। आज तुँ मेरे लंड कों चॉकलेट समझ लेँ बेटी ओरआज। आज बापू तुझेही लंड देरहे हैं तौ गोद मे नहि आएगी पिताजी केँ ?
प्राची बिनाकुछ बोले पिताजी सें चिपक गई। पिताजी नें प्राची कों गोद मे लेकेबेड पे हि खड़े होँ गए औऱ उसकीपीठ कों दीवार पे टिका दिया। उसे बापू नें अपने मजबूत बाहों सें जकड़ा हुआ थां औऱ उसे अपने सीने मे सटा लिया।
प्राची केँ बुर मे पिताजी नें एक् बार मे हि पूरा लौड़ा धीरे-धीरे जड़ तक धकेल दिया। एक् फचक कि आवाज़ आई। प्राची कि बुर पानिया हि इतनी गई थि। औऱ पूरा कां पूरा लिंग एक् बार मे अंदर।
बापू रफ्तार मे अंदर बाहर्, अंदर बाहर् कररहे थें। करीब-करीब 5 मिनटइसी पोज मे चोदने केँ बाद पिताजी नें फिन सें महसूस किया, कि प्राची कां बदन हिलने लगा, औऱ वोँ उन्हें कस केँ जकड़ली हैं। औऱ इतने मे हि एक् चूतरस कि तेज धारा उसके योनि सें बहनेलगी।
वोँ 6 बारझर चुकी थि पिताजी कां संग देते देते।
इसबार पिताजी नें चोदना जारी हि रखा औऱ प्राची फिन सें जोशिया गई। पिताजी अभि तक झर हि नहि रहे थें।
अब प्राची कों दादीमा केँ बातयाद आई, कि जब सें कोई महिला अपने मर्द केँ लंड पे बैठ केँ चूदावना शुरुआत कर देती हैं, तब सें वोँ उस मर्द कां कंट्रोल अपने हाथों मे लेँ लेती हैं।
प्राची नें पिताजी सें बोला : मेरेसजन जी, मै आपके उसपे बैठना चाहती हु।
बापू (मजाकिया लहजे मे), किस पे बैठना चाहती हैं ?
प्राची : आपके रॉकेट पे बापू, बोलिए थोडा सवारी करा देंगे ?
पाप बिल्कुल समझगए थें कि प्राची आजपरम सुख लेना चाहती हैं उनके लंड पे बैठ केँ।
पिताजी: हां मेरी बाबू, आँ जा, यह लौड़ा अब तेरा हि तोँ हैं। इस रॉकेट पे बैठ कि जितना उड़ना हैं उड़, यह तेरे पति कां हैं, कोईकुछ नहि बोलेगा।
पिताजी इतनाबोल केँ सीधेलेट गए।
बापू कां लंड अभि वोँ 90 डिग्री पे खड़ा थां, एकदम कड़क।
प्राची बापू केँ लंड पे बैठने केँ लिए अपना दोनों पेर, पिताजी केँ कमर केँ ईर्द गिर्द कर केँ, नीचे अपना बुर सरकने लगी, उसने अपना योनि केँ छिद्र कां मुहाना लंड केँ टोपे पर्र रख दिया औऱ पिताजी नें धीरे-धीरे धीरे-धीरे, एक् बार मे हि, प्राची कों अपने लंड पे बिठा केँ, उसे चोदने वाले थें। लण्ङ हाचक सें प्राची केँ बुर मे जड़ तक चला गय़ा। प्राची केँ मुंह सें एक् जोरो कि aaauuuchh.aaaahhhhhh। कि आवाज़ आई औऱ वोँ एक् मिनट केँ लिए योनि मे लंड लिएहुए बैठ गई, औऱ दर्द कों बर्दाश्त करनेलगी।
प्राची पहले तौ धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपना चूतड पिताजी केँ कमर पे पटकरही थि।
फिन जैसे जैसे उसकाजोश बढ़ा वोँ तेजी सें बापू कि चूदाई करनेलगी।
पिताजी भि आंखे मूंदे प्राची कि इसकला कां मजा उठाने लगे। ठपठपठप ठप्पा ठप.थापक थपथप.ऐसी आवाज़ केँ संगसंग, प्राची केँ मादक आहटों औऱ सिसकारियां सें पूरारूम गूंजउठा : आह्ह्ह.क्या बात है मेरे सैया जी.मेरे पिताजी.ओ मेरे पतिदेव.मै पागल होँ रहीहु। आह्ह्ह्ह्हः.बापू मुझेकुछ होँ रहा हैं।
प्राची कि चीत्कार औऱ पिताजी कि सीसीयाहट अबबता रहा थां कि जल्द हि पिताजी कां ज्वालामुखी अपने बेटी केँ बुर मे हि फटने वाला हैं।
बसअब प्राची इतनी रफ्तार सें चूदबाने लगी कि पिताजी अबसह नहि पाए। महिला अगरचाह लें तौ अच्छे अच्छों मरद कां पानी 2 मिनिट मे निकलदे। प्राची फ्री होँ केँ पिताजी केँ लंड पे उछलती जारही थि। अचानक पिताजी एक् जोर कां आआहुहह्हः.कि आवाज़ सें चीत्कार उठे औऱ एक् गर्म वीर्य रूपीबीज कां फव्वारा, उन्होंने प्राची केँ बुर मे भर दिया।
बापू कां लंड हिचकोले मारता हुआ, आखरी बूंद तक प्राची केँ योनि मे टपकता रहा। पिताजी कि मास पेशियां भि थरथरा रही थि। आज वोँ अपने बेटी सें हि हारगए थें। पहलेदिन उन्हें जितना मज़ा 5 राउंड केँ केँ नहि आया, उतना उन्हें आज प्राची केँ संग एक् बारकर केँ आया।
फिरभी प्राची तोँ इसखेल मे, 8 बार पानी छोड़ चुकी थि। वोँ अब निढाल सि हौ केँ बापू केँ सीने पे हि गिर पड़ी। उसका पूराजोश ठंडा होँ चुका थां। सांसे तेज औऱ दिल कि धड़कन बहुततेज। वहीहाल बापू कां भि थां। उन दोनों कि ऊर्जा बिल्कुल चूस चुकी थि। औऱ अब उनकोआगे इसरात केँ खेल कों खेलने कि हिम्मत नहि थि। दोनों पसीने सें लथपथ थें। दोनों एक् दूसरे सें नंगे हि चिपकगए। औऱ आंखेबंद कर केँ लेटेरहे। थोड़ी देर मे हि दोनों नींद केँ आगोश मे समागए।
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