maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 77
आश्चर्य केँ संग बहोत देर तक मे उसे देखता हि रहा., वोँ अपने होंठों कों आपस मे कसकर दबाते हुए मेरेपास बैठ गई,। ऐसालगा मानो वोँ किसी दर्द कों पीने कि कोशिश कररही हौ.
मैंने उसकाहाथ पकड़कर कहा – कहां चली गयीँ, थि तुँ? पता हैं मे कितना परेशान हौ गय़ा थां तेरीयहा नाँ पाकर.
चकोर – अरे परेशान होने कि कोईबात नहि हैं। यहबता तुम्हारी तरफकोई काम धंधा मिला?
संजूघोर निराशा मे डूबे स्वर मे बोला – नहि कुछ नहि मिला…कोई हरामजादा सीधे मुँहबात तक करने कों रेडी नहि हैं काम तोँ क्याँ देगा…
चकोर – मे जानती हूं यहाऐसा हि होता हैं… बिनाजान पहचान यहा किसी कों मज़दूरी भि नहि करने देताकोई… चल छोड़… लेँ मे तेरेलिए खानां लाई हूं…
फिन उसनेबैग सें खाने कां एक् पैकेट निकाला। यह तेरी किसने दिया? मैंने उसे प्रश्न किया तौ उसने मेरीबात कों टालते हुएकहा – सभीबता दूँगी पहले तूँ खानां खा… मुझे भि भूखलगी हैं.
अबचार दिन कां भूखा व्यक्ति औऱ उसके सामने बिरयानी रख दि जाए तौ वोँ बिनाकुछ सोचे समझे उसपरटूट हि पड़ेगा, यहीहाल मेराहुआ। हालाँकि चकोर भि खाने मे मेरासंग देरही थि, मगर मे तोँ खाने पर्र भूखे कुत्ते कि तरहटूट पड़ा थां। मुझेयूं खातेदेख उसके खुश्क होंठों पऱ एक् फीकी सि मुस्कान आँ गई,.
खा-पीकर मैंने उसेफिन वही प्रश्न किया तोँ बदले मे उसनेबैग सें एक् जोड़ी कपड़े निकाल कर मेरेहाथ मे पकड़ा दिए औऱ मुस्कुरा कर बोलीं – पहले कहींनहा धोकरयह कपड़े बदल लेँ, फिन कहीं अच्छी स्थान बैठकर बातें करेंगे.
मैंने बिनाकोई प्रश्न किए उससे कपड़े लिए औऱ पास मे हि एक् सार्वजनिक शौचालय मे जाकर अपने जिस्म कां मैल धोया, वोँ कपड़े पहने जौ मेरे करीब-करीब स्लिम हि आए। उसकेबाद मे जब चकोर केँ पास पहुंचा तौ उसकेपास एक् मोटी सि थोड़ी साँवले रंग कि एक् स्त्री खड़ी मिली। जिसके दाँत हमेशा पान खाते रहने सें लाल-पीले हौ रहे थें.
मुझे देखते हि चकोर बोलि – भैया यह शन्नो ताई हें। इन्होंने हि मुझे एक् स्थान काम दिला दिया हैं। उसी केँ एडवांस सें यहसभी लिया हैं.
फिन मेराहाथ पकड़कर बोलीं – यही नहि पास हि मे एक् खोली भि किराए पऱ दिला दि हैं। जिसमें हम् दोनों धीरे-धीरे रह सकते हें। चलआजा…
मे निठल्ला जवान व्यक्ति, लज्जा केँ मारेउस बेचारी सें यह भि नहि पूछसका कि आख़िर इतनी जल्दउसे क्याँ काममिल गय़ा औऱ वोँ भि एडवांस केँ संग?खैर रहने कों छत पाकर, खानां खाकर मे कुछ टाइम केँ लिएसभी कुछभूल गय़ा। कई दिनों बाद भरपेट खानां मिलने सें बहोत गहरी नींदआई उसरात। दूसरे दिन मे फिन अपनेलिए काम ढूँढ नें निकल पड़ामगर सारेदिन भटकने केँ बाद नतीजा वहीढाक केँ तीनपात। साम कों चकोरफिन खाने कां पैकेट लेकरआई। जिसेखा पीकर हाराथका मे फिन गहरी नींद मे सो गय़ा। इसीतरह दिन निकलते रहे मे भटकता रहा, चकोर खाने पीने कां इंतज़ाम करतीरही। मेरे दिमाग़ मे यह कभी-कभी यह सोचकर बड़ी कोफ़्त होतीजा रही थि कि देखो मे मुस्टंडा सां खाली बैठा हूं, मेरी बेहन कमाने जाती हैं। एक् दोबार मैंने शन्नो ताई कों भि बोला कि वोँ मेरेलिए भि कोईकाम धंधा बताए.मगर वोँ टाल-म-टोल करतीरही, तरह-तरह केँ बहाने बनाती रही। मे अब अपने आप् कों दुनिया कां सबसे निठल्ला औऱ मजबूर इंसान समझने लगा, जिस भइया कों अपनी छोटी बेहन केँ हाथ पीले करने कि चिंता होनी चाहिए वही भइया अपनी बेहन केँ रहमों-करम पे जिंदा थां। उसकी कमाईखा रहा थां, जौ नाँ जाने केसे-केसे करके क्याँ-क्याँ करकेचार पैसे कमाती थि। इसी कोफ़्त मे आकर नतीजा यहहुआ कि मे अपने जैसे हि दूसरे फालतू लोगों केँ संग उठने बैठने लगा.नशे पत्ते करनेलगा। नशे कि लत नें मुझेअब यह भि सोचने सें रोक दिया कि मुझेकुछ करना चाहिए। दिन, महीने, सालइसी तरह गुजरगये। एक् दिन चकोर बीमार पड़ गई,। एक् खैराती हॉस्पिटल मे शन्नो नें हि उसे भरतीकरा दिया। काफ़ी इलाजहुआ मगर वोँ ठीक नहि हुई। एक् दिन मेरे अंदर केँ भइया नें डॉक्टर सें पूछ हि लिया कि आख़िर मेरी बेहन कों बीमारी क्याँ हैं?
डॉक्टर कां जवाब सुनकर तौ जैसे मेरे अंदर कि इंसानियत भि जैसेमर गयीँ,। अपने नकारापन सें मैंने अपनी प्यारी बेहन कों नरक कि आग मे झोंक दिया थां। उसे एचआईवी कां घातकरोग लग गय़ा थां। यहाआकर जौ पहला निवाला मैंने खाया थां वोँ उसने अपनाबदन बेचकर मुझे दिया थां। मगरनशे कि लत नें मुझे इतना बेगैरत कर डाला थां, मे कुछ करने लायक नहि थां तोँ उसी खैराती हॉस्पिटल मे उसे मरने कों छोड़ दिया.मगर उसदिन केँ बाद मेरी अंतरात्मा नें मुझे सुकून सें जीने नहि दिया, लाख सिर पटकने पऱ मे चार पैसे जुटाने मे नाकाम रहा। मेरी नाकामियों कां ख़ामियाजा मेरी बेहनउठा रही थि। चार पैसे जुटाने कि धुन मे मैंने एक् स्थान चोरी करने कि कोशिश कि मगर क्या बात है रे मेरी फूटी क़िस्मत, पहलीबार मे हि धर लिया गय़ा। 6 महीने कि सज़ा हुई, जिसेकाट करजब बाहर् आया तौ मेरी बेहन, मेरी प्यारी बेहन मुझे छोड़कर जा चुकी थि। जिसकी मौत कां मे स्वयं ज़िम्मेदार थां। इतना कहते-कहते संजू फुट-फूटकर रोनेलगा.
अपनी हिचकियों पर्र काबू करतेहुए आगे बोला – अब तुम् हि बताओ साथी, इस दुनिया मे मेरेलिए बचा हि क्याँ जिसके लिए मे जी सकूँ??
मैंने अपनी जीवन कों खतम करने कां फ़ैसला लेँ लिया औऱ यहाचला आया.मगर वाउरे मेरी भाग्य, तुमने मुझे वोँ भि नहि करने दिया.
युसुफ उसे सांत्वना देतेहुए बोला – मैंने मैथ मे एक् फ़ॉर्मूला पढ़ा थां। (-)+(-)=+ होँ जाता हैं। मेरी बदनसीबी जब तुम्हारी बदनसीबी केँ संग जुड़ जाएगी तौ हौ सकता हैं हम् दोनों कि बदनसीबी दूर हौ जाए.
संजू अपने आँसू पोंछते हुए बोला – मेरेपास तौ अबकुछ हैं नहि खोने याँ पाने कों, अगर मेरा जिंदगी तुम्हारे हि कुछकाम आए तोँ भि मे अपने आप् कों धन्य समझूंगा। आज सें जैसा तुम् कहोगे मे वैसा हि करूँगा। दोनों कों अपनी-अपनी आपबीती आपस मे शेयर करते-करते काफ़ी समय निकल गय़ा थां। वातावरण मे अंधेरा छा चुका थां। वोँ दोनों नये-नये बदनसीब यारवहा सें एक् दूसरे कां हाथ थामकर चल पड़े अपनी अंजान मंज़िल कि तरफ जिसका कोईपता नहि थां कि वोँ कहां मिलेगी.
युसुफ केँ पासकुछ पैसे थें जौ उसनेकुछ कबाड़ इकट्ठा करके कमाए थें, उससेउन दोनों नें पेट कि भूख शांत कि, उसकेबाद उन दोनों नें डिसाइड किया कि अब जौ भि होँ आगे वोँ औऱ गुरबत कि जीवन नहि जीएंगे। युसुफ नें सही हि कहा थां कि (-)+(-)=+ होता हैं। उसीरात उन्होंने एक् दुकान कां ताला तोड़ा औऱ अच्छी ख़ासी रकम उनकेहाथ लगी। दूसरे हि दिन एक् अच्छी सि खोली किराए पऱ ली औऱ दोनों यार एक् नईराह पर्र चलनेलगे। संजू जहाँ मरने मारने सें नहि डरता थां, वहीं युसुफ अपनी बुद्धि औऱ विवेक सें काम निकाल लेता थां। देखते हि देखते कुछ हि महीनों मे उस इलाक़े मे उनकीधाक जमनेलगी। संजू कि दिलेरी सें छोटे बड़े गुंडे दहशत खानेलगे, वोँ ज़रा-ज़रा सि बात पर्र हि बिना अंजाम कि परवाह किएहाथ छोड़ देता थां। यहा तक कि एक् दो कों उसने चाकू सें घायल भि कर डाला औऱ स्वयं भि हुआ। संजू शिंदे केँ पास तौ कुछ पाने याँ खोने केँ लिए थां हि नहि मगर युसुफ कां अपनाभरा पूरा परिवार थां जिसे वोँ देहात छोड़आया थां। उसेयह भि नहि पता थां कि अब वोँ लोगकिस हालत मे होंगे। उसे उनकी ज़िंदगियाँ संवारने केँ लिएधन कि ज़रूरत थि, जौ इन छोटे-मोटे चोरी चकोरी सें पूरा पड़ने वाला नहि थां। वोँ दिनरात किसी लंबेहाथ मारने कि फिराक मे लगा रहता थां, जिसका जिक्र वोँ कई मर्तबा संजू सें भि कर चुका थां, मगर संजू केँ मुताबिक वोँ जौ बोलेगा वोँ करने कों रेडी थां। उसकेपास अकूत शक्ति थि, दिलेरी थि, कुछ नहि थां तोँ बस पैसे कमाने केँ लिए दिमाग़, जिसकी कमी कि वजह सें वोँ अपनीजान सें प्यारी बेहन कों भि खो चुका थां.
एक् दिन मरीना बीच केँ पत्थरों पर्र बैठे वोँ दोनों इसी बारे मे विचार विमर्श कररहे थें कि किसतरह सें एक् लंबाहाथ माराजाए जिससे उनकीधन कि ज़रूरत पूरी हौ सके.जब किसीठोस नतीजे पर्र नां पहुँच सके तोँ थककर वोँ दोनों वहा सें जाने केँ लिएउठ खड़ेहुए, चलने केँ लिए जैसे हि मुड़े कि सामने एक् निहायत हि हसीन स्त्री कों देखकर वोँ दोनों अपनी स्थान पर्र जाम होकररह गये.
28-30 साल कि बेहद हसीन स्त्री कों अपने सामने देखकर वोँ दोनों तगे सें खड़े उसके सौन्दर्य मे खोगये। गोरे चिट्टे पैरों मे चमकीले फैन्सी सैंडल, ब्राउन लॉन्ग स्कर्ट जोँ उसकी पिंडलियों कों बखूबी ढकेहुए, मगर उसकेऊपर तोँ मानो कयामत कां साम्राज्य फैलाहुआ थां। उसकी 32 कि कमर तक स्कर्ट केँ बादऊपर वोँ एकदम फक्क सफेद झीना सां टॉप पहने थि जिससे उसकी कालेरंग कि ब्रा साफ-साफ दिखाई देरही थि। कसेहुए टॉप मे क़ैद उसकी 34 कि कसी हुई ठोस बूब्स पऱ उन दोनों कि नज़रजम कररह गयीँ,। टॉप कां गला इतना चौड़ा कि उसकी ब्रा कि स्ट्रैप कंधों केँ ऊपरदिख रही थि। ब्रा केँ स्ट्रैप उस चमकीले टॉप केँ बाहर् दिखरहे थें। सामने उसकी गोरी-गोरी बूब्स केँ बीच कि गहरी दरारदेख कर किसी कां भि मन उन्हें मसलने कां होँ जाए.यहा तक कां सफ़रतय करने केँ बादउन दोनों कि नज़र जैसे हि उसके चेहरे पऱ पड़ी, मन हि मन वोँ उसकी प्रशंसा किए बिना नहि रहसके। एकदम गोरी रंगत, मानो वोँ कोई विदेशी स्त्री उनके सामने खड़ी हौ। गोल-गोल चेहरा, हल्के फूलेहुए गाल, लालीलिए हुए पतले-पतले होंठों पऱ सुर्ख लाली, सुतवाँ नाक, कमान समान भौंह केँ नीचे काले स्याह गॉग्ल्स सें ढकी उसकी आँखें, सुनहरे कंधे तक केँ बाल, जौ एक् बेहद चमकीले ब्राउन कलर केँ स्कार्फ़ सें ढकेहुए थें। दोनों हि उसे देखते हि रहगये। नज़र उसकेरूप लावण्य सें हटने कां नाम हि नहि लेँ रही थि। जब बहोत देर तक भि उनकी नीयतउसे देखने सें नहि भरी.
चुटकी बजकरउस युवती नें उन दोनों कां ध्यान अपनीओर आकर्षित किया – कहां खोगये युसुफ मियाँ। संजू शिंदे??? क्याँ कोई सुन्दर महिला पहलेकभी नहि देखी??
अब तक तोँ वोँ बेचारे दोनों उस अप्सरा जैसी सुंदर महिला केँ रूपजाल मे हि खोएहुए थें मगरअब उसके मुँह सें अपनेनाम सुनकर तौ वोँ दोनों अपनी स्थान पर्र उछल हि पड़े.उन दोनों कि हालत पऱ वोँ मेनका मंद-मंद मुस्करा रही थि.
उनकी हालत कां मजा उठाते हुए वोँ बोलीं – ऐसे क्यूं चौंकरहे हौ… मुझे तोँ तुम् दोनों कि पूरी कुंडली पता हैं… क्यूं युसुफ मियाँ, धन कमाने केँ लिए परेशान हौ। अपने घरवालों कों सुख सुविधा देना चाहते हौ। क्यूं मे सहीकह रही हूं नां???
युसुफ हक्का बक्का अभि भि उसेइस तरह सें देखरहा थां मानो उसके सामने महिला कां रूप लेकरकोई अजूबा खड़ा हौ.
बड़ी मुश्किल सें अपनीइस हालत पर्र काबू करतेहुए युसुफ बस इतना हि बोल पाया – हां….मगर??
उसकीबात बीच मे हि काटते हुए वोँ बोलि – मगर वेकीन केँ चक्कर मे मतपड़ो… यह बताओ, रुपया कमाने केँ लिए क्याँ-क्याँ कर सकते हौ??
अब तक शांत खड़ा संजू बोला – ओ मैडमजी… पहले तौ आप् अपने बारे मे बताओ…कौन होँ औऱ हम् लोगों केँ बारे मे इतनासभी केसे जानती हौ??
संजू कि बात पऱ चुटकी लेतेहुए वोँ सुंदरता बोलि – अरेवाउ… संजू… तुम्हारे मुँह मे भि जबान हैं? मे तोँ सोचरही थि कि बोलने कां कामबस युसुफ मियाँ कां हि हैं। चलो तुम् पूछते हौ तोँ अपने बारे मे भि बता देती हूं। मेरानाम लीना हैं, अपनेकाम केँ बारे मे मे यहाकुछ नहि बता सकती…रही बात तुम् लोगों केँ बारे मे इतनी जानकारी केसे हैं, तौ उसीदिन सें मेरी नज़र तुम् दोनों पऱ हैं जब तुम् दोनों जुहूबीच पऱ एक् दूसरे कों पहलीबार मिले थें, जब युसुफ नें तुम्हारी जान बचाई थि। अब मे आती हूं असल मुद्दे पर्र, अगर तुम् लोगों कों रुपया कमाना हैं तोँ यहलो मेरा कार्ड, कल दोपहर केँ बादआकर मुझसे इसपते पऱ मिलो.
युसुफ नें आगे बढ़कर उसकेहाथ सें कार्ड लिया.हां इस दौरान वोँ उसकेहाथ कों टच करने कां लालच नहि छोड़ पाया। उसकीइस हरकत पऱ लीनानाम कि वोँ खूबसूरत औरत उसके चेहरे पऱ नज़र डालकर मुस्कराती हुई पलटकर एक् तरफ कों बढ़ गई,। पीछे वोँ दोनों हतप्रभ खड़े उसकी थिरकती गान्ड कों तब तक निहारते रहेजब तक कि वोँ उनकी आँखों सें ओझल नहि होँ गई,.
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UPDATE 78
संजू - बड़ा हि कड़कमाल हैं दोस्त…
उसकेओझल होते हि संजू केँ मुँह सें निकले इस शब्द नें युसुफ कि तंद्रा भंग कि। एक् लंबी सि साँस लेकर उसने अपनेउस हाथ कों चूमा जिसने उसकेहाथ कों टच किया थां.
युसुफ – सहीकहा तुमने… मगर साली कों हमसे क्याँ काम लेना हैं जौ इतने दिनों सें हमारे पीछेलगी हम् लोगों केँ बारे मे तहकीकात कररही हैं। कुछ तोँ गड़बड़ हैं भइया??
संजू नें उसकाहाथ थामा औऱ उसे खींचते हुए बोला – हमें क्याँ लेना देना साली सें?? होगीकोई। चलोचल करकुछ खाते-पीते हें, भूखलग रही हैं.
युसुफ – हांचलो, मगर देख्ना तोँ पड़ेगा कि आख़िर यह चीज़ क्याँ हैं… औऱ हम् लोगों सें कौन सां काम लेने वाली हैं???
वोँ चलते-चलते पास केँ हि एक् सस्ते सें होटलकम बार मे घुसगये। कुछ सस्ती सि व्हिस्की ऑर्डर कि औऱ बैठकर पीनेलगे। एक्-एक् पेग लेने केँ बाद…
संजू बोला – मेरे ख्याल सें हमेंइस स्त्री कों अपने दिमाग़ सें निकाल देना चाहिए। यह सुनहरी नागिन नां जाने कैसाकाम हमसे निकलवाना चाहती हैं? अपनाकाम निकाल कर रफूचक्कर हौ जाए औऱ हम् लोग पुलिस केँ लफडे मे फँस जाएँ.
युसुफ – एक् स्त्री सें हि डर गय़ा मेराशेर? अरे दोस्त देखें तोँ सही इसमें हमारा कितना फ़ायदा होने वाला हैं। क्याँ पता इसकासंग देने सें हमारे भि बारे न्यारे होँ जायें?
संजू – साला डरताकौन हैं…। वोँ भि एक् मामूली सि महिला सें। मुझे तौ बस महिला जात सें नफ़रत सि होँ चुकी हैं। एक् स्त्री कि वजह सें हि मेरी बेहनउस दलदल मे फँस गई,, तब सें मुझे किसी भि महिला पर्र भरोसा नहि रहा.
बातों केँ चलते वोँ दो-दोपेग औऱ पी चुके थें। यह उनकाअब रोज़ कां हि काम होँ गय़ा थां। नशा अपनाअसर दिखाने लगा थां.
युसुफ नें संजू कों चढ़ाते हुएकहा – अरे दोस्त संजू। वैसे भि हम् कौन सें करोड़पति हें जौ वोँ हमारा कुछ लें लेगी.कुछ नहि मिला तोँ मौकादेख कर साली कों मिलकर चोद डालेंगे.
संजू कों भि नशे मे उसकी कड़क जवानी नज़रआने लगी थि। वोँ थोड़ा झूमते हुए बोला – यहसही कहा युसुफ भइया तुमने। पैसे वैसेगये तेल लेने… साली कि कड़क जवानी कां मजा तोँ लेँ हि लेंगे। बहोत कड़क हैं बहनचोद। वैसे मैंने आज तक किसी महिला कों नहि चोदा हैं। मगरइसे देखकर मेरायह नियमभंग करने कां मन करनेलगा हैं.
झूमते हुए युसुफ नें कहा - मे तोँ बस एक् बार उसकी मस्त बलखाती गान्ड कों खूब मसल-मसलकर जमकर चोदना चाहता हूं। उसकीउस चिकनी गोल-मटोल गान्ड मे लंड डालकर हिलाना चाहता हूं। उसकेबाद भले हि उसकी गान्ड पे लात मारकर अपने रास्ते निकल लेंगे। संजू। क्याँ बोलता हैं??
संजू - डन!
यह कहकर संजू औऱ युसुफ नें एक् दूसरे कों हाई-फ़ाईव किया। एक्-एक् पेग औऱ गटकने केँ बाद उन्होंने जमकर खानां खाया औऱ कलउस सुंदरी सें मिलने कां प्लान तय करके वोँ दोनों अपनी खोली कि तरफचल दिए। दूसरे दिन सुभह सें हि वोँ दोनों लीना सें मिलने कि तैयारी मे जुटगये। उन्होंने रात मे हि अपनेलिए अच्छे-अच्छे कपड़े खरीदलिए थें। नहा धोकर एक् सस्ता सां सेंट लगाकर नये कपड़े पहने औऱ तयशुदा टाइम पऱ वोँ दोनों उससे मिलने कों चलदिए। कार्ड पर्र दिएगये पते पर्र पहुँचकर उन्होंने अपने सामने एक् फ्लैट केँ बंद दरवाजे कि बेल बजाई। अंदर कहीं चिड़ियाँ सि चहचहाईं। कोईदो मिनट केँ प्रतीक्षा केँ बाद दरवाजा खुला औऱ उसी केँ संग-संग सामने कां दृश्य देखकर उन दोनों केँ मुँह भि खुलेरह गये.
दरवाजे केँ बीचो-बीच लीना खड़ी थि, इस वक्त वोँ बिना किसी मेकअप केँ थि, मगरफिन भि उसकी सुंदरता मे कोईखास कमी नहि थि। ऊपर सें उसके कपड़े… हाए… देख्ना इन दोनों मे सें किसी कां खड़े-खड़े हि पानी नां निकलजाए। निहायत हि छोटा सां शॉर्ट, जौ मुश्किल सें उसके उभरेहुए चुतड़ों कों ढकपारहा थां। इतना टाइट कि आगे सें उसकी बुर कि मोटी-मोटी फाँकें साफ-साफ अपनी उपस्थिति दर्ज करवारही थि। उनकेबीच कि दरार… उउउफफफ्फ़… युसुफ कि देखकर हालत हि खराब होनेलगी, उसके मुँह मे उसकीउन फांकों कों चाटने केँ ख्याल सें हि पानीभर आया.कमर मे इतना नीचे बँधा थां कि अगर उसकी बुर पर्र बाल होते तोँ शर्तिया ऊपर सें दिखाई देते औऱ उसकाटॉप… माशाअल्लाह… उसके बूब्स कों बमुश्किल ढकपारहा थां। नीचे सें इतनालूज़, ऐसालग रहा थां, मानोउसे किन्हीं दो खूँटियों केँ ऊपरऐसे हि टाँगरखा होँ। अगरकोई बैठकर झाँकने लगे तोँ उसकी ब्रा समेत चुचियों कां पूरा भूगोल पताकर सकता थां। यही नहि ऊपर उसका इतना चौड़ा गला कि उसकी पिंक ब्राआधी तक दिखरही थि। उसके पुष्ट बूब्स कि गहरीखाई देखकर वोँ दोनों पलक झपकाना हि भूलगये। टॉप केँ ढीले होने कि वजह सें उसका एक् तरफ कां शोल्डर बिल्कुल नंगा थां, जिससे उसकी ब्रा कि स्ट्रैप अलग हि दिखरही थि। कंधे तक केँ खुले रेशमी बालों केँ बीच उसका चाँद सां मुखड़ा जिस पऱ इस टाइम शरारत सें भरपूर मुस्कराहट विद्यमान थि.
अपनी नशीली आँखों सें उन दोनों कों घूरते हुए बोलीं - वेलकम दोस्तों… मेरेघऱ मे तुम् दोनों कां स्वागत हैं। आओ। अंदरआओ.
इन शब्दों केँ संग हि वोँ अपनी स्थान पऱ पलट गई,.
उफफफ्फ़… क्याँ कयामत हैं दोस्त??? लगता हैं आज तोँ पानी निकलवाकर हि रहेगी यह… पीछे सें उसके शॉर्ट कां औऱ हि बुराहाल थां। इतना नीचा कि उसके कूल्हों कि गोलाईयों कि ढलान बिल्कुल साफ दिखाई देरही थि। उसकी माइक्रो पैंटी कि डोरी जौ कमर केँ बंद सें होती हुइ उसकी गान्ड कि दरार मे घुसी पड़ी थि, पीछे सें साफदिख रही थि कि वोँ अंदरकिस स्थान औऱ कितनी सुरक्षित होगी। अपने गोल-गोल नितंबों कों मटकाते हुए वोँ उन दोनों केँ आगे-आगे चलरही थि, उसके पीछे आहें भरतेहुए वोँ दोनों किसी चाबीलगे खिलौनों कि तरह उसकी लचकती गान्ड केँ मज़े लेतेहुए पैंट मे अपने-अपने लंड एडजस्ट करतेहुए चल पड़े.
एक् छोटी सि लॉबीपार करके वोँ एक् हॉलनुमा कमरे मे पहुँची जहाँ एक् लॉन्ग सोफा, दो चेयर औऱ एक् सेंटर टेबल पड़ी हुइ थि। सामने एक् बेहद सुसज्जित शोकेस मे एक् 44” कां टेलीविज़न थां जिस पऱ इस वक्तकोई हॉलीवुड मूवीचल रही थि। कुल मिलकर लीनायहा ऐश कि जीवनबसर कररही थि, जिसके श्रोत कां उन्हें अभि कुछपता नहि थां। उसने लॉन्ग सोफे कि तरफ इशारा करकेउन दोनों कों बैठने केँ लिएकहा औऱ स्वयं एक् चेयर पर्र बैठ गई,। जौ सेंटर टेबल केँ उसपार ठीक उनके सामने थि। बैठते हुए जानबूझकर उसने अपनी संगमरमर जैसी चिकनी गोल मांसल जांघों केँ बीचगैप बनारखा थां जिसमें सें उसकी बुर कि मोटी-मोटी फाँकें उभरी हुईँ साफ-साफ नुमाया होँ रही थि। बैठने केँ बाद उसका टाइट शॉर्ट उस स्थान पर्र औऱ ज्यादा टाइट हौ गय़ा, जिससे उसका रसीले सॉफ्ट कपड़ा दोनों फांकों केँ बीच कि दरार मे धँस गय़ा। कुल मिलाकर कपड़े केँ बावज़ूद उन दोनों कों उसकी ढाई-तीन इंच लंबी बुर कि शेप क्लियर दिखाई देरही थि। उन दोनों कां ध्यान अपनी जन्नत पऱ पाकर वोँ मन हि मनखुश होँ रही थि। उसेपता थां कि किसी भि मर्द सें काम निकलवाने कां कौन सां सटीक तरीक़ा होता हैं.
अपने चेहरे पऱ स्माइल लाकर वोँ बोलि – तुम् दोनों कों यहा तक पहुँचने मे कोई परेशानी तोँ नहि हुईँ??
उसकी आवाज़ सुनकर उन दोनों नें एक् संग झटके सें अपनेसिर उठाए। एक् संग हि उनके मुँह सें निकला - ज…ज्ज…जी। कोईखास नहि.
लीना – तौ बताओ क्याँ लेना मनपसंद करोगे?? कुछ ठंडा… गर्म.??
एक् बार उसके चेहरे पर्र नज़र डालकर उन दोनों कि नज़रें झिझक केँ कारणफिन झुक गई,। नज़र झुकाए हुए हि युसुफ नें कहा – जी मैडमजी, जौ आप् पिलाना चाहें.
लीना – नहि। तुम् लोग मेरे मेहमान होँ औऱ मेहमान कि ख़्वाहिश जानकार हि मेहमान नवाज़ी होती हैं… कहो क्याँ लोगे??
युसुफ थोड़ी हिम्मत जुटाकर बोला – ख़्वाहिश तौ हमारी कुछ औऱ हि पीने कि हैं… मगर आप् पिलाएँगी नहि.
लीना – ऐसा क्यूं सोचते हौ? कहो तौ सही क्याँ पीना चाहते हौ?? मेरेपास हरतरह कि ब्रांड मिलेगी तुम्हें। बिंदास बोलो, क्याँ चाहिए तुम्हें??
युसुफ भि पक्का खिलाड़ी थां, वोँ थोडा ढिठाई केँ संग बोला – जौ हम् पीना चाहते हें, वोँ तोँ आपकेपास हैं औऱ आप् इतनीदूर बैठी हें… तौ फिन… केसे???
लीना भि पूरी खेलीखाई थि, वोँ युसुफ कि बात कां मतलब अच्छे सें समझरही थि। मगर बजाय क्रोध दिखाने केँ उसने अपनी एक् जाँघ उठाकर दूसरी केँ ऊपर रखतेहुए कहा – बड़े उस्ताद हौ युसुफ मियाँ… उंगली पकड़ने कि बजाय सीधाहाथ हि थामना चाहते होँ… अभि तोँ गरमचाय सें कामचला लो… उसकेलिए तुम् लोगों कों थोडा इम्तिहान देना पड़ेगा…
मोटी-मोटी गुदाज जांघों केँ बीच दबाव पड़ने सें उसका योनि प्रदेश कुछ औऱ ज्यादा हि फूल गय़ा। उस पऱ नज़र गड़ाते हुए युसुफ बोला.
युसुफ - उसकेलिए हम् किसी भि इम्तिहान सें गुजरने कों सजधजकर हें। कहो क्याँ करना होगा??
उसकीबात पऱ मन हि मन मुस्कराकर लीना नें अपनीमेड कों आवाज़ दि – लूसी… ज़रादो गरमचाय लाना…संग मे कुछ स्नैक्स भि…
गरमचाय पीतेहुए लीना नें कहा – मे तुम् लोगों कों दो पैकेट दूँगी, जिन्हें तुम्हें, हिनाबार एंड क्लब केँ मालिक, अब्बास अली कों उसके ठिकाने पऱ पहुँचना हैं औऱ उससे 10 लाख लेकरआने हें। याद रखना, वोँ थोडा टेढ़ा व्यक्ति हैं। अब तुम् जानोयह काम केसे करना हैं… अगर तुम् यह पैकेट उसे देकर पेमेंट लेँ आए तोँ उसमें सें 10% यानी 1 लाख तुम् दोनों कां इनाम.
अब तक शांत बैठा संजू बोला – टेढ़े केँ लिए हम् भि टेढ़े हें… उसकी आप् चिंता मतकरो… बस आप् अपना प्रॉमिस याद रखना.
लीना – हां.हां। क्यूं नहि। चाहो तौ उसमें सें 1 लाख अपने निकाल कर हि देना मुझे.
संजू – मे पैसे कि बात नहि कररहा… जौ आपनेकुछ देर पहले वादा किया थां। स्पेशल इनाम कां हमारे लौटने केँ बाद.
लीना खिलखिलाकर हँसते हुए बोलि – आई। शाबाश। तोँ संजू शिंदे कों भि वोँ उपहार चाहिए… चलो तुम् भि क्याँ याद करोगे… किसरईस सें पाला पड़ा हैं, तुम् दोनों कि तमन्ना अवश्य पूरी कि जाएगी… तुम्हारे आज केँ इम्तिहान मे सफल होने कि ख़ुशी मे मेरीतरफ सें एक् स्पेशल बर्थडे पार्टी तय। जोँ खानां चाहो, पीना चाहो औऱ जौ भि। आजरात लूसी भि हमारे जश्न मे शामिल होगी…
लीना नें लूसी कि मोटी गान्ड दबाते हुएकहा – क्यूं लूसी तुम्हें तौ कोई प्राब्लम नहि??
लूसी - आईईई मैडम। जैसा आप् बोलो…
इतना कहकर लूसी अपनी गान्ड सहलाते हुएवहा सें अपनी गान्ड हिलाती हुइ रसोई मे भाग गई,। गरमचाय नाश्ते केँ बादउन दोनों नें लीना सें पैकेट लिए औऱ विदा लेकर उसके फ्लैट सें निकललिए.
बाहर् आकर संजू नें कहा – युसुफ भइया देखो तोँ सहीऐसा क्याँ इन पैकेट मे जिसकी कीमत 10 लाख रुपये हैं.
युसुफ – अरे दोस्त तूँ रहेगा पक्का भोंदू हि… अब क्लब वाले कों सोना याँ हीरे मोटी तोँ भेजेगी नहि। कुछ नां कुछ नशे-पत्ते कि हि चीज़ होगी.चल देखते हें… इसको केसे निपटाना हैं औऱ सुन, जब तक कोईऐसी वैसी प्राब्लम खड़ी नां होँ तब तक भड़कने कां नहि। समझा… मौके केँ हिसाब सें काम लेना हैं हमें.याद रहेयह अपना पहलाऐसा काम हैं जिसमें अच्छा ख़ासा धन केँ संग-संग दो-दो मस्त जवानियाँ भोगने कों मिलने वाली हें। इसलिये किसी भि सूरत मे हमेंफेल नहि होना हैं, बस थोडा अपने आप् पर्र संयम रखना.ओके??
संजू – अरे दोस्त युसुफ भइया तुम् इतना डरते काहे कों होँ। चलो देखते हें क्याँ हालत बनते हें वैसा हि करेंगे। आप् फिकरमत करो.सभी ठीक हि होगा.
युसुफ – खुदाकरे सभीठीक हि होँ…
इसतरह बातें करतेहुए वोँ दोनों निकल पड़े अपनी मंज़िल कि ओर। हिनाबार एंड क्लब, मुंबई कि घनी आबादी केँ बीच, दिन छिपते हि यहा नशेडियों कि भीड़जमा होने लगती हैं। अभि दिन छिपने मे देरी थि इसवजह सें बार अभि करीब खाली हि थां। इक्का-दुक्का ग्राहक शांति सें अपनी टेबल पऱ बैठा थां। युसुफ औऱ संजू सीधे रिसेप्शन काउंटर पर्र पहुँचे.
काउंटर पऱ बैठे व्यक्ति नें उनसे प्रश्न किया – कहो क्याँ चाहिए?
युसुफ – हमें अब्बास भइया सें मिलना हैं.
वोँ – काहेकू?
युसुफ अपने हाथों मे दबे पैकेट कि तरफ इशारा करतेहुए – यह पैकेट उनको देने कां हैं.
वोँ – क्याँ हैं इनमें?
संजू – ओए सयाने। ज्यास्ती प्रश्न जवाब नहि करने कां… उसकूबोल… दोलोग मिलने कों आए हें। लीना मैडम नें पैकेट भेजेला हैं… वोँ समझ जाएँगा.
वोँ अकड़कर बोला – ओए लौन्डे… इधर ज्यास्ती नहि बोलने कां। समझा क्याँ?? वरनाबाद मे पछताने कां भि टाइम नहि मिलता.
युसुफ नें बीच मे कूदते हुएकहा – जानेदे भइया, छोकरा नादान हैं। तुम् अब्बास भइया कों हमारे आने कि खबरदो.
वोँ संजू कि तरफखा जाने वाली नज़र सें घूरते हुए बोला – चलठीक हैं। तुम् इधेरएच खड़ा रहने कां, मे अभि बोलके आता.
कोई दो मिनटबाद हि वोँ एक् दरवाजे केँ पीछे सें निकलकर आते हि बोला – जाओ तुम् लोग, भइया अंदर हि बैठेला हैं औऱ सुनो, तुम् लोग केँ पासकोई हथियार तोँ नहि?
युसुफ नें नाँ मे गर्दन हिलाई औऱ संजू कां हाथ पकड़कर उसबंद दरवाजे कि तरफबढ़ गय़ा। रास्ते मे। तुँ तोँ आते हि शुरुआत होँ गय़ा… किसीदिन बेमौत मरवाएगा। युसुफ नें उसे समझाते हुएकहा.
अभि संजूकोई जवाब देने हि वाला थां कि तभी वोँ दोनों दरवाजे केँ उसपार जा पहुँचे। अंदर एक् दफ़्तर नुमारूम थां जहाँ एक् सोफे केँ आगे एक् टेबल थां, संग मे दो चेयर पड़ी थि। सोफे पर्र एक् मध्यम हाइट काठी कां पक्के रंग वालाउमर कोई 40 साल जिसके नाक केँ पास एक् चाकू कां निशान थां, लाल-लाल आँखों वाला शख्स जौ शायद अब्बास हि थां। करीब पूरे सोफे पर्र पसराहुआ बैठा थां। संग कि चेयर पर्र दो औऱ लोग भि थें, जौ शायद उसकेखास चमचे होंगे.
उन दोनों कों देखते हि अब्बास बोला – आओरे तुम् लोग… बैठो। क्याँ लोगे? व्हिस्की, रम याँ देशी??
युसुफ नें आगे बढ़कर उसे सलाम बोला औऱ जाकर उसकीबगल मे बैठते हुए बोला – नहि भइयाइस टेम हम् लोगकुछ नहि लेते.यह पैकेट भेजे हें लीना मैडम नें आपको देने केँ वास्ते.
अब्बास पैकेट टेबल पर्र रखवाकर बोला – माल तोँ अच्छा हैं कि नहि?
युसुफ – हमें नहि पता भइया… आप् स्वयं हि चेककर लो.
अब्बास एक् व्यक्ति कि तरफ इशारा करतेहुए बोला – देख अहमद एक् पैकेट खोल केँ चेककर। माल अच्छा होएंगा तभीच लेगा अपुन। वरना औऱ बहोत हें देने वाले.
अहमद नें चाकू कि नोक सें पैकेट कि सील तोड़ी, जिसमें सफेद पाउडर कि थैलियाँ भरी हुई थि, उनमें सें एक् थैली निकाल कर उसको खोला। थोडा सां पाउडर एक् 1000 केँ नोट पऱ रखकर उसनेउसे सूँघा.
अहमद - माल तौ कड़क हैं भइया। लगता हैं इंपोर्टेड हैं…
इतना कहकर उसने वोँ नोट अब्बास कों थमा दिया। उसने भि चेक किया औऱ बोला - सही बोला तूँ… इंपोर्टेड हैं। लीना साली जैसी स्वयं कड़क हैं वैसाइच माल रखती हैं… चलठीक हैं। वोँ ड्रावर सें 5 गड्डी निकाल करयह छोकरा लोग कों देदे.
युसुफ – 5 गड्डी मतलब?
अब्बास – 5 पेटी… बोले तोँ 5 लाख…
युसुफ – मगर मैडम तौ 10 लाख बोलि लाने कों.
अब्बास – आए सयाने… 5 लाख बोला तौ 5 लाख… एक् रुपया ज्यास्ती नहि… यह पकड़ औऱ कट लें इधर सें। वरना। पैसे भि जाएँगे औऱ माल भि। बोल देना अपनी मैडम कों। इससे ज्यास्ती नहि मिलेगा.
अब्बास कि धमकीभरी बातें सुनकर युसुफ कों होंठ खुश्क होँ गये। उसके मुँह पऱ मानो ताला चिपक गय़ा हौ। मगरतभी संजूबोल पड़ा.
संजू - यह तोँ ग़लतबात हैं। 10 लाख कां माल 5 लाख मे केसेदे सकते हें? चलो युसुफ भइयामाल उठाओ… चलते हें यहा सें.
इतना कहकर उसने एक् पैकेट कि तरफहाथ बढ़ा दिया। इससे पहले कि संजू पैकेट सें हाथलगा पाता कि बाजू मे खड़े अहमद नें उसकी कलाईथाम ली.उसे मजबूती सें पकड़कर बोला – शेर केँ मुँह सें गोश्त निकालना चाहता हैं लौन्डे.
अब तक युसुफ भि अपनी स्थान सें खड़ा हौ चुका थां। वोँ बात संभालने केँ लिएबीच मे कुछ बोल्ना चाहता थां। मगर संजू कों इतना कहां सहन होना थां। बिना अंजाम कि परवाह किए उसने उलटेहाथ कां मुक्का अहमद कि नाक पर्र दे मारा। मानोकोई हथौड़ा पड़ा हौ उसकीनाक पऱ, उसकेसिर केँ चारों ओर चिड़ियाँ सि चहकने लगी। वोँ अपनेहोश ठिकाने नहि रख पाया बेचारा। नाक सें खून कि धार निकल पड़ी, उसकी कलाई छोड़कर वोँ पीछे कों उलट गय़ा। अपने एक् दोस्त कों गिरते देख अब्बास अपनी स्थान सें उठना हि चाहता थां कि उसे युसुफ नें दबोच लिया। वोँ दोनों सोफे पऱ हि गुत्थमगुत्था हौ गये। दूसरा आदमी जौ अभि तक चेयर पऱ हि बैठा थां, फ़ौरन उठ खड़ा हि नहि हुआ। वोँ संजू कि तरफ लपका.झपट कर उसने पीछे सें संजू केँ गले मे अपनी बाजू लपेट दि.
गर्दन पर्र दबाव डालते हुए बोला – बहोत उछल-कूद कररहा हैं साले…अब देख केसेबच केँ जाएगा यहा सें.
संजू कों अपनेगले कि नसें दबनेलगी। उसनेउस बंदे कों पीछे धकेलना शुरुआत किया। गर्दन पर्र उसका दबाव लम्हा-प्रति समयबढ़ रहा थां। पूरा दम-खम लगाकर संजू नें उसे टेलीविज़न शोकेस पर्र लें जाकर अपनीपीठ कां भार देकरदबा दिया.शो केस कां एक् कोना उसकीपीठ मे लगा। दर्द सें वोँ बिल-बिला उठा औऱ उसके बाजू कि पकड़ संजू केँ गले पर्र ढीलीपड़ गई,। मौके कां फ़ायदा उठाकर उसने अपने आप् कों आज़ाद किया.पलट कर अपने घुटने कां भरपूर बार उसकेपेट पऱ किया। दर्द सें वोँ आगे कों दोहरा होँ गय़ा। ऊपर सें संजू कां मुक्का उसकी गर्दन पऱ पड़ा। मुक्का पड़ते हि वोँ ज़मीन पर्र मुँह केँ बलगिर पड़ा.अब उसमें जल्द सें उठ पाने कि शक्ति नहि थि। उधर युसुफ अब्बास केँ मुकाबले कमजोर पड़रहा थां। नीचे सें अब्बास नें अपने घुटने मोड़कर उसेऊपर उठने पऱ मजबूर कर दिया। अभि भि वोँ दोनों एक् दूसरे कां गलादबा रहे थें। युसुफ केँ थोडा ऊपर होते हि, अब्बास नें उसे पैरों पऱ उठाकर एक् ओर कों उछाल दिया। फुर्ती सें अपनीगन निकाली औऱ उसे संजू पर्र तान दिया। अब्बास उसके बेहद नज़दीक पहुँचकर गुर्राया - बहोत बड़ाकाम कर गय़ा तूँ लौन्डे। मेरे हि अड्डे पऱ मेरे हि आदमियों पऱ हाथ छोड़ दिया.अब तूँ तौ गय़ा हरामज़ादे.
संजू ठहराठेठ गँवार, मरने कां उसेडर थां हि नहि। उसने फ़ौरन उसकीगन कि नालथाम ली.उसे अपने माथे सें सटाते हुए बोला – चलमार सालेचला गोली.
उसकीयह अप्रत्याशित डेरिंग देखकर एक् बारगी अब्बास जैसे गुंडे कि हवासरक गई,। मगर अगले हि लम्हा अपने कों संभालते हुए उसने अपनीगन कां लॉक खोला। इससे पहले कि वोँ उसका घोड़ा दबा पाता, संजू नें झटके सें उसकेहाथ सें गनछीन ली औऱ उसे उसकी कनपटी पर्र टिकाते हुए बोला – अब तुम को मुझसे कौन बचाएगा साले हरामी??
पाँसा पलटेदेख अब्बास कि हवासरक गई,, उसके चेहरे पऱ मौत कि परछाइयाँ साफ-साफ दिखाई देनेलगी, तभी युसुफ अपने शिकार सें फारिग होकर बोला.
युसुफ – अब्बास… जल्द सें माल निकाल वरनायह लौंडा वाकई मे एडा हैं। गोलीचल गयीँ, तौ फिन तेरे कों सोचने कां वक्त भि नहि मिलेगा… जल्दकर.
मरता क्याँ नाँ करता, उसने अहमद कि तरफ इशारा किया। उसने ड्रावर सें औऱ 5 गड्डी निकाल कर टेबल पर्र रख दि। पूरे 10 लाख अपनी कमीज़ मे ठूँसकर युसुफ नें संजू कों निकलने कां इशारा किया.
संजू – यह दोनों पैकेट भि उठालो युसुफ भइया…अब इस भोसड़ी वाले कों ढंग सें सबक सिखाना हैं.
युसुफ - यह तूँ कैसीबात कररहा हैं?
संजू – मैंने कहा एक् पैकेट उठाओ जल्द….
इतना कहकरगन अब्बास कि कनपटी सें सटाये हुए हि उसने एक् पैकेट अपने कब्ज़े मे लेँ लिया… नां चाहते हुए भि दूसरा पैकेट युसुफ कों उठाना पड़ा.
संजू - चलअब हमेंगेट तक छोड़कर आँ मादरचोद… औऱ याद रखनाआज केँ बाद हरेक कों एक् हि लाठी सें हांकने कि भूलकभी मत करना…चल.
नाल कां दबाव बढ़ाते हुए वोँ उसे दरवाजे तक लेँ गय़ा। युसुफ कों पहले बाहर् करके उसने अपना पैकेट भि उसे थमाया, एक् जोरदार किक अब्बास कि टाँगों केँ बीच जमकर वोँ फुर्ती सें बाहर् निकल गय़ा। टाँगों केँ जोड़ पऱ संजू कि भरपूर ठोकर खाकर अब्बास पीछे कों उलट गय़ा। उनके पीछे आँ रहे अहमद केँ ऊपर जाकर वोँ गिरा। दोनों आपस मे हि उलझकर रहगये इतने मे संजू नें बाहर् सें दरवाजे कों लॉककर दिया। बिना एक् समय गँवाए वोँ दोनों आँधी तूफान कि तरह उसके क्लब सें बाहर् निकलगये.!!!!
बाहर् आते हि मे मार्ग सें हटकर उन्होंने गलियों कां मार्ग लिया.वहा सें तकरीबन 2 किमी भागने केँ बाद दोनों नें एक् कैब कों हाथ दिया.कैब मे बैठते हि युसुफ नें एक् बार पीछे मुड़कर देखा, फिन राहत कि साँस लेकर बोला, बच गये दोस्त वरनाआज तौ मर हि जाते.
संजू नें बिना देखे हि कहा – क्यूं?? तुम्हें ऐसा क्यूं लगा?
युसुफ – तुँ भि दोस्त कमाल करता हैं। बिना सोचे समझेहाथ पांव चलाने लगता हैं। यह तोँ सोच वोँ उनका अड्डा थां… दोस्त.
संजू केँ चेहरे पऱ इस वक़्त भि कोईभाव नहि थें। बस थोड़ी साँसें उखड़ी हुइ थि। भागने केँ कारण, लंबी साँस लेकर बोला – औऱ इसके अलावा कोई चारा थां तुम्हारे पास? याँ तौ 5 लाख मे माल देकर चुप-चाप लौटआते औऱ उन्हें लेकर चंपत होना पड़ता। क्योंकि लीना मैडमकभी भि यह नहि समझती कि हमारे सामने क्याँ परिस्थिति थि औऱ वैसे भि उसने हमेंकहा हि थां कि अब्बास थोडा टेढ़ा व्यक्ति हैं, इसलिये तोँ उसने हमारा इम्तिहान लिया हैं। आसान होता तोँ वोँ अपने किसी भि व्यक्ति सें डिलीवरी करा हि देती.
युसुफ बात कि गहराई कों समझते हुए बोला – शायद तुँ ठीककह रहा हैं साथी.मगर मे चाहता थां कि बातों सें हि कामबन जाए। पर्र चलो.अंत भला तोँ सभीभला। अबइसमाल कां क्याँ करें?? क्योंकि मैडम केँ माल केँ पैसे तोँ हम् लोग लेँ हि आए.
संजू – पहलेयह डिसाइड करो, कि हमें उसकेसंग लंबे वक्त तक काम करना हैं याँ बस अभि तक केँ लिए हि हैं?? अगर अभि तक कां हि विचार हैं तौ उसकेपास जाने कि हमेंकोई ज़रूरत नहि हैं। 10 लाखकैश हें औऱ 5-10 लाख मे इसमाल कों भि कोई भि लें लेगा.
युसुफ – मेरे ख्याल सें सोने केँ अंडे देने वाली मुर्गी कों एक् संग हलाल नहि करना चाहिए। चलो… चलकरउसे सारी बातें साफ-साफ बता देते हें। आगे उसकी मर्ज़ी.
maira Pyara Devar - niyantran – New Episode
UPDATE 79
कुछदेर मे हि वोँ उसकी बिल्डिंग केँ पास पहुँच गये। अभि रात केँ 9 बजे थें, कैब कां पेमेंट करके लिफ्ट सें ऊपर पहुँचे। उनके हाथों मे दोनों पैकेट देखकर…
लीना – क्याँ हुआ? सौदा नहि बना?? मुझेपता थां वोँ टेढ़ा व्यक्ति हैं। चलोकोई नां… कम सें कममाल सही सलामत वापस लेँ आएयही बहोत हैं.
उसकीबात पऱ वोँ दोनों मंद-मंद मुस्कराने लगे.
लीना – क्याँ बात हैं, तुम् लोगइस तरह मुस्करा क्यूं रहे हौ??
तभी युसुफ नें अपनी ढीली ढाली कमीज़ सें गड्डी निकालनी शुरुआत कि। पूरी 10 गड्डी उसकेहाथ मे रखतेहुए बोला – उस टेढ़े कों सीधाकर दिया इसने.
लीना – क्याँ मतलब?
फिन उसने सारी बातें उसे डीटेल मे सुनाई। वोँ विस्मय केँ संगसभी सुनती रही, फिन कुछदेर मौन रहने केँ बाद अचानक सें लीना संजू केँ ऊपरझपट पड़ी। वोँ वहीं सोफे पऱ लुढ़क गय़ा। लीना स्वयं उसकेऊपर सवार होकर उसके चेहरे कों अपने दोनों हाथों मे जकड़ा औऱ दे दनादन उसके चेहरे पऱ चुंबनों कि बौछार कर दि। संजूबस भौचक्का देखता रह गय़ा, वहीं युसुफ कि नज़र उसकी गोल-मटोल थिरकती गान्ड कि दरार मे जा अटकी। लीना केँ गोल-गोल मोटे-मोटे कड़क बूब्स संजू कि छाती सें दबगये। बुर कि गर्मी पाकर उसकाअब तक सोया पड़ा लंड उसके पैंट मे अंगड़ाई लेनेलगा। संजू नें भि अपने दोनों हाथ लीना कि रसीले गान्ड पऱ कसदिए औऱ लीना कि बुर कों अपने लंड केँ ऊपरदबा दिया.कुछ देर चूमने केँ बाद लीना संजू केँ ऊपर सें उठ गई,। संजू कों मजा आनां शुरुआत हि हुआ थां.
लीना कां हाथ पकड़कर संजू बोला – क्याँ हुआ मैडम??उठ क्यूं गयीँ, ?? थोडा औऱ करो नाँ, मजा आँ रहा हैं.
लीना मुस्करा कर संजू केँ लंड कों दबाते हुए बोलीं – डोंटवरी… आज तुम्हारी सारी तमन्नाएँ पूरी होंगी मेरेशेर… आज सें पहले मुझे तुम्हारे जैसा शेरदिल व्यक्ति कभी नहि मिला। मे तुम्हें मरतेदम तक खोना नहि चाहूँगी। पहलेजीत कां जश्न पीने पिलाने सें शुरुआत करते हें.
फिन लीना नें लूसी कों आवाज़ दि – लूसी… बर्थडे पार्टी कां इंतज़ाम करो…
कुछ देरबाद लूसी ट्रे मे एक् स्कॉच कि बॉटल, चार ग्लास औऱ कुछ स्नैक्स सुखीतली हुई मेवा केँ संग लाती हुईँ दिखी। लूसी कों देखकर युसुफ कि आँखें चौड़ी होँ गई,। जापानी पॉलिएस्टर कि फक्क सफेद टाइट शर्ट जिसके दोबटन खुलेहुए। बिना ब्रा केँ उसकी एक् दम कड़कदूध जैसी गोरी बूब्स कि अंदर साइड शर्ट केँ खुले बटन्स सें नुमाया हौ रही थि। नीचे उसनेलाल चौखाने कि इतनी छोटी सि स्कर्ट पहनरखी थि चलते मे उसकी गान्ड कि गोलाईयों कि छटा भि कभी कभार दिखाई दे जाती थि। लूसी जैसे हि आकर टेबल पर्र समान सजाने केँ लिए झुकी, पीछे सें उसकीआधी गान्ड उजागर होँ गयीँ,। युसुफ नें उसके पीछेआकर उसके मटके जैसे चुतड़ों पऱ हाथ फिराते हुएकहा.
युसुफ - हायरे लूसी… क्याँ मस्त गान्ड हैं तेरी.जी कररहा हैं, चूमलूँ इसे…
मना किसने किया हैं युसुफ मियाँ, आज कि रात हम् दोनों हि तुम्हारे लिए हें., जैसे चाहो, जहाँ चाहो पटक-पटक करखूब रस निचोड़ो। हँसते हुए लीना बोलीं
सच…सच मे… मैडम… थैंकयू… कहकर युसुफ नें लूसी कि गान्ड केँ पीछे बैठकर सच मे हि उसकी गोरी-गोरी, खूब उभरी हुइ गान्ड कि गोलाईयों कों बारी-बारी सें चूम लिया। लूसीआगे कों औऱ झुक गई,, तौ युसुफ नें उसकी माइक्रो पैंटी कि डोरी कों गान्ड केँ छेद सें एक् तरफ किया औऱ उसकी गान्ड केँ कथईछेद कों अपनीजीभ कि नोक सें चाट लिया.
सस्सिईईईई… आअहह… लूसी अपनी गान्ड कों उसके मुँह पऱ दबाते हुए सिसकी.
इतना कामुक नज़ारा देखकर संजू अपनी स्थान सें उठा औऱ उसने लूसी कि शर्ट केँ पल्लों कों पकड़कर एक् दूसरे केँ विपरीत दिशा मे खींच डाला। चत्टार्ररर। चत्टाररर। कि आवाज़ केँ संग उसकी शर्ट केँ सारेबटन खुलगये। लूसी कि 34” कि एकदम गोल-मटोल बूब्स हवा मे लहराउठी। दो बड़े-बड़े लट्टू जैसे उसके बूब्ज़, जिनके निप्पल अभि किशमिश केँ दाने जैसे हि थें, कड़क होनेलगे.
लीना ग्लास मे स्कॉच डालते हुए बोलीं – तुम् दोनों कों तोँ बिनापीए हि लूसी कि जवानी कां नशा चढ़ने लगा… पीने केँ बाद केसेहोश रख पाओगे…
संजू लीना कां टॉप उतारकर एक् तरफ फेंकते हुए बोला – कौनआज होश मे रहना चाहता हैं मैडमजी…
बोलते हुए उसने लीना कि ब्रा केँ स्ट्रैप भि उधेड़ दिए.अब दोनों हि घोड़ियाँ ऊपर सें एकदम नंगी थि। दोनों मर्दों कि नज़र दोनों कि जवानियों पऱ फिसलरही थि। यह फ़ैसला करना मुश्किल पड़रहा थां कि दोनों मे सें किसकी बूब्स अधिक हसीन औऱ सुडौल हें?? फिन दोनों मर्दों नें अपने-अपने कपड़े भि निकाल दिए केवल अंडरवियर मे आकर जहाँ संजू नें लीना कों अपनीगोद मे बिठाया औऱ युसुफ नें लूसी कों। दोनों हसीनाओं नें टेबल सें पेग उठाकर उन्हें थमाए, फिन एक्-एक् पेग स्वयं लेकर चारों नें आपस मे जाम टकराकर चियर्स बोला औऱ सिप करतेहुए एक् दूसरे कि जवानियों सें खेलने लगे.जब साम कि शुरुआत ऐसी हौ तौ रात कैसी होगीयह कहने कि ज़रूरत नहि हैं। चारों नें मिलकर उसरात कों इतना रंगीन बना दिया कि उनकीकाम लीलादेख कर इन्द्रलोक मे बैठे देवराज इन्द्र कों भि इनसेजलन होनेलगी होगी। दो-दोपेग लेने तक वोँ चारों बुरीतरह सें उत्तेजित होँ चुके थें, तोँ पहला राउंड संजू औऱ लीना कां रहा वहीं युसुफ नें लूसी कों अलटा-पलटा करखूब चोदा। उसकेबाद एक्-एक् पेग उन्होंने खाने केँ संग लिया, फ्रेश हुए औऱ फिन सें चुदाई कां दौरचल पड़ा.इस बार संजू नें अपना कड़क 8” कां खूँटा लूसी कि बुर मे डाला औऱ युसुफ नें लीना कि जमकर चुदाई कि.
लीना कि बुर मे लंड पेलते हुए युसुफ नें कहा – मैडम आपको तोँ पता हि हैं, मेरा परिवार देहात मे गुरबत मे जीरहा हैं… आप् बोलो तोँ एक् चक्कर मारआऊँ.
लीना अपनी गान्ड पीछे कों धकेलते जुए बोलीं – चले जानां… पहलेकुछ दिनयहा रहकर तुम् लोग धंधे केँ उसूलों कों अच्छे सें समझलो, फिन तुम्हारे लिए मैंने एक् प्लान सोचा हैं…
पूरा लंड लीना कि बुर मे पेलकर युसुफ नें कहा – क्याँ प्लान हैं आपका?
लीना – हाए। पहले मेरी बुर कि प्यास बुझाओ… फिन बताती हूं…
यह कहकर लीना नें युसुफ कि गान्ड दबाकर उसे अपनी बुर पर्र कसकर दबाया। अपनी बुर कि फांकों कों कसकर दबाते हुए वोँ भलभलाकर झड़ने लगी औऱ युसुफ कों भि पूरीतरह निचोड़ लिया.उधर लूसी भि पूरी चुद्दकड़ लड़की निकली। इतनीकम उम्र मे भि उसे चुदाई कि सारी ट्रिक पता थि, केसे किसी मर्द कों उकसाया जाता हैं… अपनी मादक आहों सें वोँ संजू कों औऱ उत्तेजित करतीरही जिससे उसने अपना पूरीदम लगाकर लूसी कि बुर कि चुदाई कि। इसतरह वोँ चारों रातभर चुदाई अभियान मे बढ़-चढ़कर अपना-अपना झंडा गाढ़ने कि कोशिश करतेरहे। जहाँ दोनों मर्द अपनीतरफ सें कोशिश कररहे थें कि वोँ इन दोनों रंडियों सें पानी मंगवा देंगे। संजू तौ फिन भि टक्कर लेतारहा। मगर युसुफ मियाँ कि हिम्मत जवाबदे गई,। उसे मानना हि पड़ा कि स्त्री कि बुर कि थाह लेनाहर किसी केँ बस कि बात नहि.
दूसरी सुभहउन चारों मे सें किसी कि आँख खुलने कां नाम नहि लें रही थि.
मगरकोई 11 बजे लीना केँ फोन कि बेल नें उसे उठने पऱ मजबूर कर हि दिया। मोबाइल अब्बास कां थां, शुरुआत-शुरुआत मे कुछ उसने अकड़ दिखाई मगर लीना केँ धमकाने पऱ वोँ लाइन पर्र आँ गय़ा औऱ अपनेमाल केँ लिए गुहार करनेलगा.
लीना – देखो अब्बास मियाँ… मे अपना धंधा पूरी ईमानदारी सें कररही हूं। माल मे कोईखोट हौ तोँ फ्री, मगर अगरकोई मेरे पैसे खाने कि कोशिश करेगा तौ वोँ ठीक नहि। मैंने तोँ अब तक तुम्हारी साख कि वजह सें हि कोईडील नहि कि, मगरजब मुझे तुमसे भि अधिक येड़ा लड़कामिल गय़ा तोँ तुम्हारा ऑफरमान लिया.अब उसने तुम्हारी गेमबजा डाली तोँ अब इतना फड़फड़ाने कि क्याँ ज़रूरत हैं? पूरी ईमानदारी सें धंधाकरो… मे सजधजकर हूं… अपना व्यक्ति आजसाम जुहूबीच पऱ भेज देना, तुम्हारा माल तुम्हें मिल जाएगा…
दो हफ्ते यूँ हि मौज मस्ती मे निकलगये। दिनों दिन युसुफ लेन-देन केँ मामले मे माहिर होनेलगा। वहीं संजूगन वगैरह चलाना सीखकर औऱ अधिक शातिर हौ गय़ा.
एक् दिन मस्ती करतेहुए लीना बोलीं – युसुफ कहां हैं तुम्हारा देहात??
युसुफ – मैडम आपनेअली** शहर तोँ देखा होगा, उससेकोई 25 किमीदूर हैं.
लीना – तौ देहात जाकर अभि क्याँ करने वाले हौ?
युसुफ – मे चाहता हूं, बुढ़ापे मे अम्मी-अब्बू कों कुछ आरामदे सकूँ। बहनों कां निकाह हौ जाए, अच्छा घऱ उन्हें बनवा केँ दे सकूँ औऱ ग़रीब कि क्याँ ज़रूरतें होती हें.
लीना – देहात मे तुम्हारी कोई खेतीबाड़ी भि हैं क्याँ?
युसुफ – अरे कहां मैडमजी… खेतीबाड़ी होती तोँ मे यहा मुंबई मे खाक छानने क्यूं आता…
लीना – मेरे दिमाग़ मे एक् प्लान हैं… क्यूं नां तुम् अपने परिवार कों उसीशहर मे शिफ्ट करलो। एक् घऱ लें करदेदो उनको औऱ एक् अच्छी सि गुप्त स्थान तलाश करके अपना धंधावहा फैलाने कि कोशिश करो.
युसुफ – यह तौ बहोत उम्दा प्लान बनाया हैं आपने मैडम.अगर संजूसंग दे तौ वहा तौ अपना धंधा औऱ जल्द हि फैलने फूलने लग जाएगा.
लीना – क्यूं संजू… क्याँ कहते होँ? जानां चाहोगे युसुफ भइया केँ संग?
संजू – मेरा क्याँ हैं, कहीं भि आँ जा सकता हूं… मेरेकौन आगे पीछे हैं देखने वाला??
लीना दोनों कों नयेफोन सेट देतेहुए बोलि – यहलो तुम् दोनों केँ लिए अलग-अलग फोन, दोनों मे हम् तीनों केँ नंबरफीड किएहुए। जब भि बात करनी होँ कभी भि एक् दूसरे सें जब चाहेबात कर सकते हें। तौ फिनतय रहा, तुम् लोगकल हि निकलजाओ। शहर मे अपनेलिए अच्छा सां घऱदेख लो, धंधे केँ लिए स्थान तलाशकरो। कुछमाल लेते जानां, जिससे अपनाकाम शुरुआत करने कि कोशिश कर देना.खतम होने पर्र बसफोन कर देना दूसरे दिन जितना चाहिए उतनामाल तुम्हें मिल जाएगा.
जैसा कि पहले बताया जा चुका हैं, युसुफ केँ देहात मे बुड्ढे मां-बाप तीन कुँवारी बहनें थि। सबसे बड़ी एक् बेहन कां निकाह होँ चुका थां जौ उससे जस्ट छोटी थि। दूसरे नंबर कि वहीदा भि अब तक 26-27 साल कि हौ चुकी थि। उससे छोटी रेहाना उससेदो साल छोटी माने 24-25 कि औऱ सबसे छोटी रुखसाना भि अब 22 साल कि हौ चुकी थि। युसुफ केँ अब्बू टेलरिंग कां काम करते थें, मगरआज केँ जमाने मे देहात मे भि अबकौन सिलवाकर कपड़े पहनता हैं, कभी कभारकोई बड़ा-बुड्ढ़ा याँ फिनकोई ग़रीब व्यक्ति कपड़े सिलवाने आँ जाता थां.
हां औरतें अवश्य ब्लाउज पेटीकोट सिलवाती थि। जिसे वहीदा औऱ कभी-कभी उसकी अम्मी सिलकर दे देती थि। जिनकी सिलवाने कि कीमत भि देहात मे लोग बड़ी मुश्किल सें देते वोँ भि आज-कल करके काफ़ी लटकाने केँ बाद। बड़ी मुश्किल सें दोसमय कि रोटियों कां गुज़ारा होँ पाता थां। कभी-कभी लड़कियों कों जंगल सें लकड़ियाँ काटकर लाना पड़ता, एक्-दो बकरीपाल रखी थि उनसेकुछ आमदनी हौ जाती। कुल-मिलाकर बसदिन किसीतरह निकल हि रहे थें। उसके बूढ़े अब्बू शहज़ाद ख़ान कि कमरझुक गई, थि। वक्त कि मार नें वक्त सें पहले हि बूढ़ा बना दिया थां। वरनाइस उमर मे शहर मे लोग अधेड़ उम्र मे गिने जाते हें.
युसुफ औऱ संजू सीधेघऱ नां जाकरशहर मे पहले उन्होंने अपनेलिए एक् 5 रूम कां एक् अच्छा सां घऱ खरीदा। फिन काफ़ी तलाश करने केँ बाद उन्हें एक् उजाड़ पड़ी हवेली कां पताचला वोँ भि वहा केँ कुछ बेरोज़गार युवकों कि सहायता सें। जिसे उन्होंने अपने धंधे केँ लिए किराए पर्र लिया जोँ काफ़ी दिनों सें विवादित थि, जिसपर कुछ दबंगों कां कब्जा थां, तोँ उन्होंने हि उसेलीज पर्र दे दिया। सबसेखास बातउस घर-मकान कि यह थि कि उसके नीचे एक् गुप्त तहखाना भि थां जौ उन्हें अपने धंधे केँ लिए सबसे उपयुक्त लगा.कुछ बेरोज़गार युवकों कों अपनेसंग मिलाकर काम करने कों रेडी भि कर लिया। इतनाकाम निपटाकर उन दोनों नें युसुफ केँ देहात कां रुख़ किया.
देहात निकलने केँ लिए वोँ काफ़ी लेट होँ गये थें। देहात कि तरफ जाने वालेरोड पऱ आकरपता किया कि इससमय क्याँ साधनमिल सकता थां गाँव जाने केँ लिए। लेने कों वोँ दोनों स्पेशल कैब भि लेँ जा सकते थें मगरयह सभी जताकर वोँ खामख्वाह इतनी जल्दइस इलाक़े मे अपने आप् कों उजागर नहि करना चाहते थें। पताचला कि युसुफ केँ देहात तक केँ लिए प्राइवेट वहा जैसेतीन पहिए केँ टेंपो याँ फिन टाटा मॅजिक जैसेवहा हि मिल सकते हें। काफ़ी देर केँ प्रतीक्षा केँ बादवहा एक् मॅजिक आकर रुकी। इलाक़े कां नाम पुकार कर उसका क्लीनर पैसेंजर कों बुलाने लगा.
युसुफ नें संजू कां हाथ पकड़ा औऱ पीछे सें यूआकर वालीसीट पऱ सामने जाकर दोनों बैठगये। युसुफ कों अंदाज़ा थां कि इसमें भीड़ होने वाली हैं, इसलिये वोँ उसे लेकर फ़ौरन जाकरसीट घेरकर बैठ गय़ा। यहबात दो मिनट मे हि सच साबित होँ गयीँ,। उनके देखते हि देखते व्हीकल लोगों सें फुल हौ गयीँ,। सीटों कि तौ बात हि छोड़ो, लोग सीटों केँ बीच कि खाली स्थान मे भि आकर खड़े होनेलगे.
मॅजिक लोगों सें खचाखच भर गय़ा, यहा तक कि एक् पांव रखने कि स्थान नहि बची, तभी उसमें एक् लड़की घुसी। लोगों नें उसे ज़बरदस्ती सें अंदर ठूंस दिया। आरामसे एक्-एक् पांव जमाती हुइ वोँ युसुफ औऱ संजू जहाँ बैठे थें वहा तक पहुँच गई,। इधरउधर मंडी घुमाने तक कि गुंजाइश नहि थि। चूँकि भीड़ केँ कारण अंदर अंधेरा सां होँ गय़ा थां, कुछ भि साफ-साफ दिखाई नहि देरहा थां। वोँ लड़की झुकी हुइ अपनेलिए टिकने लायक स्थान तलाशकर रही थि कि किसीतरह वोँ अपने चूतड़ टिकासके। तभी उसकी नज़र युसुफ पर्र पड़ी। मानोउसे कोई खजाना मिल गय़ा हौ.
चहकते हुए बोलि – अरे भइयाजान आप्…। देहात जारहे हौ???
युसुफ उसकीतरफ गौर सें देखने लगा.
वोँ फिन बोलि – अरे पहचाना नहि?? मे नन्ही… आपकी बेहन रेहाना कि यार…
युसुफ नें उसे पहचानते हुएकहा – ओह… तुँ नन्ही हैं… मेरी तोँ पहचान मे हि नहि आई। तुँ तौ काफ़ी बड़ी हौ गई, हैं… देहात जारही हैं??
नन्ही – हन भइयाजान, पऱ इस वाहन मे लगता हैं पांव रखने कि भि स्थान नहि बची.फिन वोँ संजू कि तरफ इशारा करके बोलीं – यह भइया भि आपकेसंग हें क्याँ??
युसुफ नें जैसे हि हां मे गर्दन हिलाई, वोँ फ़ौरन बोल पड़ी – तौ फिन दोनों मिलकर मेरेलिए थोड़ी स्थान बनाओ नां। झुके-झुके देहात तक कमर हि दुखने लगेगी… मेरी.
युसुफ नें संजू कि तरफ देखा। दोनों नें एक् नाकाम कोशिश कि दोनों केँ बीच स्थान बनाने कि मगर एक् इंच स्थान भि नहि करपाए.
बहोत मुश्किल हैं नन्ही… बोलअब केसे करें?? युसुफ अपनी असमर्थता जताते हुए बोला.
नन्ही – कोईबात नहि। कुछदेर कि हि तौ बात हैं। जैसे बचपन मे आप् मुझेगोद मे बिठा लेते थें, वैसे हि अबबैठ जाऊंगी.
इतना कहकर उसने उसकी रज़ामंदी कां भि प्रतीक्षा नहि किया औऱ झट सें अपनी गुदगुदी 34” चौड़ी गान्ड रखकर युसुफ कि गोद मे बैठ गयीँ,। उसके बैठते हि युसुफ कि हवासरक गयीँ,। उसेयह अंदाज़ा भि नहि थां कि यह लड़की इतनी बिंदास निकलेगी कि भरी व्हीकल मे उसकीगोद मे हि आकरबैठ जाएगी। मगर नन्ही कि भि अपनी मजबूरी थि। एक् घंटा सें भि अधिक कां मार्ग वोँ यूं झुके-झुके नहि काट सकती थि। ऊपर सें सही सें पेर जमाने कि गुंजाइश भि नहि थि। युसुफ कि टाँगों कों उसकावजन झेलना मुश्किल पड़रहा थां। उसकी हालत कां मजा लेतेहुए संजूमन हि मन मुस्करा रहा थां। आख़िर मे युसुफ कों बोल्ना हि पड़ा.
युसुफ – नन्ही। तुँ तौ बहोत भारी हौ गयीँ, हैं। मेरी तोँ टाँगें अभि सें दुखने लगी.
नन्ही उसे उलाहना सां देतेहुए बोलि – भइयाजान… केसे मर्द हौ… एक् लड़की कां वजन भि नहि झेल सकते.चलो फिन मे एक् काम करती हूं, अपनाआधा वजनइस भइया पऱ रखलूँ?
युसुफ – हांयह ठीक रहेगा… चल तूँ अपने पांव संजू कि तरफकर लें औऱ आधावजन मेरी जांघों पर्र आँ जाएगा, आधा संजू कि…
संजू उनकेबीच पाकरही खिचड़ी सें कतई सहमत नज़र नहि आया.मगर कहता भि क्याँ। उसके मित्र केँ देहात कि लड़की केँ सामने वोँ मना भि नहि कर पाया। जैसेतय हुआअब नन्ही वैसे हि अपनी जांघों कां आधाभार संजू कि टाँगों पऱ रखकर एक् तरह सें उन दोनों कि गोद मे अधलेटी सि हौ गयीँ,। उसकी रसीले रूई जैसी गद्दार गान्ड कि गर्मी सें युसुफ कां लंड उसके पैंट मे अकड़ने लगा, जिसका उभार नन्ही कों अपने एक् कूल्हे पऱ होँ रहा थां.
उसने युसुफ कि तरफ देखा, दोनों कि नज़र मिलते हि दोनों मुस्करा उठे। नन्ही नें सरमवश अपनी नज़र झुकाली। दूसरी तरफ उसकी एक् जाँघ संजू केँ लौड़े सें सटी हुई थि, नतीजा जाँघ केँ मांसल दबाव सें उसका लंड भि करवट बदलने लगा। गान्ड औऱ जाँघ पर्र अलग-अलग दो लंड कि चुभन केँ एहसास नें नन्ही कि साँसों कों गरमा दिया। व्हीकल चलते हि हिचकोलों नें औऱ आग मे घी डालने कां कामकर दिया.
अब युसुफ केँ हाथ भि हरकत करनेलगे। युसुफ नें अपना एक् हाथ नन्ही केँ चिकने पेट पऱ फिराना शुरुआत कर दिया। नन्ही बिना नज़र मिलाए खुशीलूट रही थि। फिन जैसे हि युसुफ कां हाथ नन्ही कि मांसल हल्की सि गहरी नाभि पर्र पहुंचा, युसुफ कि उंगलियाँ नाभि केँ आस-पास केँ क्षेत्र कों सहलाने लगी.मगर जब युसुफ नें अपनी एक् उंगली नन्ही केँ नाभि कुंड मे प्रवेश कराया, नन्ही कि सहन शक्ति जवाबदे गयीँ,। गुदगुदी केँ मारे नन्ही कां पेट थिरकने लगा। हल्के सें हँसते हुए नन्ही नें अपनाहाथ युसुफ केँ हाथ पऱ रखकरउसे रोकते हुएकहा.
नन्ही – क्याँ करते होँ भइयाजान… गुदगुदी हौ रही हैं मुझे…
युसुफ नें नन्ही केँ कान मे फुसफुसा करकहा – तौ तूँ हि बता मे अपनाहाथ कहां रखूं??
नन्ही नें एक् बार अपनी वासना मे लिपटी नज़र युसुफ पऱ डाली औऱ कहा – औऱ जहाँ भि रखना हौ रखो, मगर यहा नहि…
नन्ही कि नाभि प्रदेश सें अपनाहाथ सरकाकर युसुफ नें उसकी चोली पर्र रखतेहुए कहा – यहारख लूँ??
नन्ही कां चेहरा लज्जा औऱ कामुकता सें लाल हौ गय़ा, उसनेबस इतना हि कहा – मुझे नहि पता…
यह युसुफ केँ लिए खुला निमंत्रण थां। वोँ कुछदेर तक अपनेहाथ सें नन्ही कि मांसल चुचियों कों सहलाता रहा.इधर संजू नें जब उनकीकाम क्रीड़ा देखी, तोँ उसने भि पीछे रहना मुनासिब नहि समझा औऱ आहिस्ता सें अपना एक् हाथ नन्ही केँ घाघरे मे डाल दिया औऱ उसकी बालों रहित चिकनी पिंडलियों कों सहलाने लगा.अब नन्ही पऱ दोहरी मारपड़ रही थि। मज़े मे उसने अपनी आँखें मूंदली औऱ दोनों केँ स्पर्श कां मजा लूटने लगी। आरामसे दोनों मर्दों कि हरकतें बढ़ती हि जारही थि। ऊपर युसुफ नें उसकी चोली केँ बटनखोल डाले, ऊपर सें नन्ही नें अपना आँचल डालकर ढक लिया औऱ वोँ दोनों हाथों सें उसके गोल-गोल चुचियों कों मसलने लगा.उधर संजू कां हाथ अपनी मंज़िल कि ओरबढ़ रहा थां। कुछदेर उसकी पिंडलियों कों सहलाने केँ बाद वोँ उसकी जाँघ तक पहुँच गय़ा। नन्ही नें पहले तोँ अपनी टाँगें खोलकर हाथ कों अंदर तक जाने कां मार्ग दे दिया, फिन जैसे हि उसकाहाथ उसकी योनि पर्र पहुंचा। नन्ही नें अपनी मांसल जांघों कों कस लियासंग हि उसके मुँह सें दबी-दबी सि मादक सिसकी निकल गई,.
संजू नें दूसरे हाथ कां इशारा देकरउसे टाँगें चौड़ी करने कों कहा। नन्ही भि अब पूरामजा लेने केँ मूड मे थि, तौ उसने अपनी जांघें फिन सें खोल दि। संजू नें मौके कां फ़ायदा उठाकर नन्ही कि पैंटी कों एक् तरफ सरका दिया। नन्ही कि बुर बुरीतरह सें गीली होँ चुकी थि, उसी गीलेपन केँ कारण संजू कि एक् उंगली उसकी बुर मे अंदर तक सरक गयीँ,। नन्ही नें बुरीतरह तड़पकर संजू केँ लंड कों हाथ सें मसल दिया। बेचारी दो मर्दों कि हरकतों कों झेलने मे असमर्थ होतीजा रही थि.
maira Pyara Devar - niyantran - Kahani ab aur interesting hogi
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