चाची - भतीजे केँ गुलछर्रे (Full Storyd) – New Episode
मुन्नी जबआई तोँ उसेदेख कर मे औऱ परेशान होँ गय़ा। बातये थि कि वो बड़ी चंचलशोख हसीन लड़की थि। जबआयी तौ सलवार कुर्ती पहने थि। इस कच्ची उमर मे भि उसकीतंग कुरती मे सें उसके कमसिन उरोजसाफ़ उभरकर दिखरहे थें। सामान रखकर वो प्रेम सें अपनी मौसी यानि माया चाची सें लिपट गई। "मौसी, कितनी खूबसूरत लगरही होँ? बहोत खुश भि लगती हौ, चलो अभि माँ कों लिख देती हूं, वो बिचारी बेकार चिंता मे हैं कि तुम् खुश होँ याँ नहि."
चाची नें भि उसेगले लगा लिया। "कितनी बड़ी हौ गई हैं मुन्नी, दोसाल पहले बच्ची लगती थि, अबदेख कैसी जवान हसीन होँ गई, हैं मेरी बेटी." मुन्नी थोड़ा शरमायी पऱ उससे लिपटी रही। चाची नें मेरी भि पहचान उससेकरा दि। मेरीओर वो बारबार कनखियों सें देखती। पर्र उसका सारा ध्यान अपनी मौसी कि हि ओर थां.
वो सीधा अपना सामान चाची केँ कमरे मे लेँ गई,। मेरादिल बैठ गय़ा। चाची नें भि हंसते हुए मेरीओर मुंह करके मुझे चिढ़ाया कि लें, अब तुँ क्याँ करेगा। हुआ भि यही। पूरेदिन मेराकुछ जुगाड नं लगा.मन मारकर अपने लन्ड कों किसीतरह दबाकर बैठारहा। मुन्नी भि शुरुआत कि झिझकभूल कर मुझसे सहज बातें करनेलगी.
जब वो नहाने गई, थि तब मौकादेख हमने जल्द सें सिक्सटी नाइनकर लिया। पर्र उसदस मिनिट केँ संभोग सें मुझे कहां संतोष होने वाला थां। चाची नें मेरी अवस्था देखी तौ मौकादेख करकान मे बोलि। "अनुराग बेटे, उदास नं हौ, रात कों कुछ मौका निकाल लेंगे."
रात कों खाट बिछाने केँ पहलेजब मुन्नी नीचे बाथरूम गयीँ, थि तब चाची नें मेरा लन्ड चूस दिया। मुझेबड़ा दिलासा मिला कि चलो नींद तौ आयेगी। सोते वक्त चाची नें कहा कि दो खाटें मिलकर काफ़ी स्थान हैं इसलिये सभीसंग हि सो जाएंगे। मुन्नी थकी हुइ थि इसलिये जल्द हि सो गयीँ,। वो बिस्तर पर्र एक् तरफ़ लेटी थि। बीच मे चाची थि औऱ उनके पीछे मे सोयाहुआ थां। मुन्नी बड़े प्रेम सें चाची केँ गले मे बाहें डालकर सोयी थि.
पऱ मेरा लन्ड कहां मानने वाला थां। पीछे सें चाची कि खुली चिकनी पीठ औऱ साड़ी मे सें दिखते नितंबों केँ उभार सें फ़िर मेराखड़ा हौ गय़ा। आगे सरककर मैंने अपने लन्ड कों चाची केँ चूतड़ों पऱ रगड़ना शुरुआत कर दिया.वे भि उत्तेजित थि पऱ मुन्नी केँ सोये बिनाकुछ नहि हौ सकता थां। इसलिये वे अपनी भांजी केँ सोने कां इंतज़ार करती हुईँ चुपचाप पड़ीरही.
मुन्नी कों सोयाजान करजब उन्हों नें मेरीओर मुड़ने कि कोशिश कि तोँ मुन्नी कि नींद खुली। वो आधी नींद मे कुछ बुदबुदायी औऱ फ़िर सें उससे चिपट गई,। "मौसी, पलटो नहि नां, ऐसे हि मेरीओर मुंह करके सोयीरहो." जब वो फ़िरसो गयीँ, तोँ मौसी नें मुझसे फ़ुसफ़ुसा करकहा। "लल्ला, जातेल लेँ आँ, आज तुम्हारी तरफखुश कर देती हूं नहि तोँ तूँ बेचारा भूखा हि रह जायेगा."
मे उठा औऱ चुपचाप नारियल केँ तेल कि बोतल लेँ आया। मेरे लेटने पऱ मौसी नें अपनी साड़ी चुपचाप पीछे सें ऊपर कि औऱ धीमे स्वर मे मुझे बोलीं। "लेँ लल्ला, आज पीछे सें हि कर लेँ। इसका हिसाब मे तुझसे फ़िरकर लूँगी। पऱ तेललगा लेँ पहले नहि तौ मुझे दुखेगा."
चाची केँ गोरे नितंब अब नग्न थें। जब मे समझा कि वे मुझसे अपनी गांड मारने कों कहरही हें तौ मेरी खुशी कां पारावार न् रहा। अंधा चाहे एक् आँख औऱ मिल जाएँदो! मैने चुपचाप तेल उंगली पऱ लेकर उनके गुदा पर्र लगाना शुरुआत किया। "अंदर उंगली डालकर ठीक सें लगा बेटे। औऱ अपने लन्ड पऱ भि लगा लेँ." चाची केँ नरमनरम गुदा केँ छेद मे उंगली डालकर तेल लगाते हुए मुझे वो मज़ाआया कि कल्पना भि नहि कि थि.
जब चाची नें हाथ पीछे करके मेरा लन्ड टटोलकर देखा तौ वासना सें सिहर गई। "क्या बात है, तूँ तौ आजफ़ाड देगारे मेरी.दो बारझड़ कर भि इतना तन्नाया हैं! औऱ तेललगा, औऱ देख धीरे-धीरे धीरे-धीरे डालना." असल मे मेरारोज जितना मोटा नहि थां पऱ चाची कों उसे अपनी गांड मे लेने कां डर थां इसलिये उन्हें वो ज़्यादा बड़ालग रहा थां। मैंने भि उनकी सांत्वना कि। उनकेकान मे धीरे-धीरे सें कहा। "चाची, आज तौ जरा सां हैं, आपकीशपथ, आपनेसाम कों चूसा नहि होता तोँ आनंदआता फ़िर!"
ठीक सें तेल चुपडकर मैंने उनकी साड़ी सें हाथ पोंछे औऱ सुपाड़ा उनके गुदा पऱ जमाकर सजधजकर हौ गय़ा। उन्हों नें अपनी उंगलियों सें अपना गुदा कां छेद खींचकर चौड़ा किया औऱ फ़ुसफ़ुसा कर बोलीं। "चलडाल अब."
मैंने लन्ड पेलना शुरुआत किया। इतना टाइटछेद थां कि बड़े धीरे-धीरे धीरे-धीरे अंदर गय़ा। मे सांसरोक करसूत सूत लोडा पेलता रहा। अचानक पक्क कि आवाज़ सें सुपाड़ा उनके गुदा मे समा गय़ा। उनकाबदन एकदम कठोर होँ गय़ा औऱ नं चाहते हुए भि उनके मुंह सें दर्द कि एक् सिसकी निकल गई,.
मुन्नी कि नींदखुल गई,। "क्याँ हुआ मौसी?" चाची नें उसे थपथपा कर सुला दिया."कुछ नहि छोटी, जरा कमर मे दर्दहुआ। तूँ सोजा." मे सांस रोककर बिना हिले डुलेपड़ा रहा। चाची कि कसी गांड मे मेरा सुपाड़ा फंसाहुआ थां औऱ इतना आनंद आँ रहा थां कि लगता थां कि अभि झड़ जाऊंगा। पऱ अपने आप् पऱ काबू करके मे लेटारहा.
पाँच मिनिट बादजब मुन्नी फ़िर गहरी नींद मे सो गई, तब चाची हल्के सें बोलि। "अबडाल पूरा अंदर लल्ला। दर्द हौ रहा हैं पऱ हायराम बहोत अच्छा भि लगरहा हैं." उनका दर्द भि अबकम होँ गय़ा थां। मैंने लन्ड फ़िर पेलना शुरुआत कर दिया औऱ दो मिनिट मे जड तक उनके चूतड़ों केँ बीच उतार दिया। उनकी गांड मेरे लोडे कों ऐसेकस केँ पकड़े थि जैसे किसी नें अपनेहाथ सें दबोच लिया हौ। "अबमार लल्ला मेरी गांड। हौले हौले मारना, आवाज़ न् हौ."
मे सरककर पीछे सें माया चाची सें चिपट गय़ा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनकी गांड मारने लगा.बड़ा आनंद आँ रहा थां। लगता थां कि घचाघच जोरजोर सें उस टाइट गांड कों चोदूँ पऱ मुन्नी केँ जग जाने कां खतरा थां। इसलिये सधी हुई लय सें हौले हौले मारता रहा। गांड कां छेद टाइट तौ बहोत थां पर्र तेललगा होने सें लोडा मस्त फ़िसलरहा थां। चाची भि मज़ा लें लेकर गांड चुदवाने लगी.
अपना एक् हाथ उन्हों नें धीरे-धीरे सें अपनी जांघों केँ बीचडाल दिया औऱ अपनी बुर कों उंगली सें चोदती हुई इस गुदा मैथुन कां मज़ा लेनेलगी। "झड़ना नहि लल्ला अभि, पहले मुझे पानी छोड़ने दे." उनके कहने पर्र मैंने अपना एक् हाथ उनकेबदन पर्र डाल दिया औऱ मम्मे मसलता हुआ गांड मारता रहा.
थोड़ी हि देर मे एक् गहरी सांस लेकर चाची झड़ गई। बुर कों रगडरगड कर पानी निकाल करहाथ पीछे करके उन्हों नें अपनी उँगलियाँ मेरे मुंह मे दे दि। बुर केँ रस कां स्वाद आते हि मे अपना धीरजखो बैठा औऱ उन्हें चिपटकर उनके बालों मे मुंह छुपाकर उनकी गर्दन कों चूमता हुआकस केँ गांड मारने लगा। बिस्तर चरमराने लगी.
चाची कहतीरही "अरे धीरे-धीरे लल्ला, छोकरी जाग जायेगी." पर्र मे अबतैश मे थां औऱ कस केँ दोचार बार धक्के लगाकर झड़ गय़ा। पहलीबार मेरे लन्ड नें अपना वीर्य चाची कि गांड कि गहरायी मे उगला। हम् दोनों पड़ेपड़े इस कामसुख कां मजाउठा रहे थें तभी मुन्नी अचानक उठकरबैठ गई,। "क्याँ चलरहा हैं मौसी? मे मम्मी कों बता दूँगी." उसकी आवाज़ मे गजब कि शैतानी भरी थि.
हम् दोनों कों मानों सांप सूंघ गय़ा। सकपका कर साड़ीठीक करने कां प्रयत्न करतेहुए माया चाची बोलि। "कुछ नहि बिटिया, अनुराग जरा मेरीकमर कि मालिश कररहा थां, दुखरही थि नां। तुँ तौ सोरही थि। जाग केसे गयीँ, ?" मे सांस रोकेपड़ा रहा। चाची नें साड़ी सें हम् दोनों केँ जुड़े जिस्म कों ढक लिया थां.
लड़की बदमाश थि। उठकर सीधे चाची कि साड़ी खींची औऱ खिलखिलाते हुए बोलीं। "ये मालिश चलरही थि!। छुपाओ नहि मौसी, मे तोँ सोई हि नहि, एक्सक्यूज़ कररही थि। साम सें हि तुम् दोनों केँ हावभाव सें मुझेपता चल गय़ा थां कि जरूरकोई बात हैं." मे शरमाकर लन्ड चाची कि गांड मे सें खींचने लगा तोँ बोलि। "रहनेदो अनुराग भैया, छुपाओ मत, ऐसे हि पड़ेरहो। गांडमार रहे होँ मौसी कि तौ ठीक सें एक् बार मारो."
उसकेइस मुंहफ़ट जवाब पर्र चाची कों हंसी आँ गयीँ,। "बड़ी शैतान हैं, इतनी सि हैं पर्र सभी जानती हैं। लगता हैं काफ़ी खेली हैं येखेल."
मुन्नी नें पास सें अपनी मौसी केँ नितंबों केँ बीचगड़े मेरे लन्ड कों बड़ी उत्सुकता सें तकतेहुए जवाब दिया। "नहि मौसी, मेरे इतने किस्मत कहां। अम्मा तौ मुझ पर्र कड़ीनजर रखती हैं। औऱ फ़िर मे अंटशंट लोगों केँ संगकुछ नहि करना चाहती थि। बस एक् खास सहेली सें थोड़ी आनंदकर लेती थि। सोचरही थि कि यहाआकर महीना भर अपनी खूबसूरत मौसी केँ संगकुछ मस्ती करूंगी। यहा तौ औऱ हि मस्तखेल चलरहे हें."
उसकीइस बात पर्र खुश होकर चाची नें उसे खींचकर बाँहों मे भरकर चूमते हुएकहा। "सच, मे तुम को इतनी अच्छी लगती हूं मुन्नी? पर्र अब क्याँ करेगी, माँ सें तोँ कुछ नहि कहेगी नां?" मुन्नी नें जवाब दिया। "नहि मौसी, पऱ एक् शर्त पऱ, मुझे भि अपनेइस खेल मे शामिल करो."
"सोच लें मुन्नी, एक् बार हमारे संग आँ गयीँ, तौ सभी सहना पड़ेगा। बीच मे मुकरने कि कोशिश कि तोँ ठीक नहि होगा." चाची नें प्रेम सें धमकाया। अब तक मुन्नी भि काफ़ी गर्म होँ चुकी थि। अपनी अर्धनग्न मौसी केँ मांसल बदन औऱ मेरेतने आधे गांड मे धँसे शिश्न कों देखकर उसकी सांसें जोर सें चलरही थि। चाची सें मिन्नतें करती हुई बोलि। "नहि मौसी, तुँ जोँ कहेगी वो करूंगी." औऱ वो भि पटापट चाची कां मुंह चूमने लगी.
उस कमसिन कच्ची किशोरी औऱ लगभग लगभग उसकी माँ कि उमर कि सगी मौसी कि ये चूमाचाटी देखकर मेराफ़िर तन्ना गय़ा। चूमना रोककर चाची नें मुझसे कहा। "लल्ला, लन्ड निकालना नहि, पूरा अंदरडाल दो औऱ आनंद देखो, ऐसा नजारा तूनेकभी देखा नहि होगा ब्लू फ़िल्म मे भि." कहकर चाची नें अपने ब्लाउ केँ बटन खोले औऱ साड़ीकमर केँ ऊपरउठा ली.
मौसी केँ नंगे मम्मों औऱ उधड़ी जांघें औऱ उनकेबीच कि चूत देखकर मुन्नी तैश मे आँ गई,। "हायराम मौसी, कितनी प्यारी हैं तूँ, औऱ तेरी चूचियाँ कितनी बड़ी हें, चुसूँ इन्हें मौसी?" औऱ चाची केँ जवाब कां इंतज़ार न् करके उनके उरोज दबाती हुईँ वो एक् निप्पल मुंह मे लेकर चूसने लगी.
उसकेबाल चूमते हुए चाची नें भि उस छोकरी केँ जिस्म कों नंगा करना शुरुआत किया। काफ़ी आसानकाम थां क्योंकी रात कों सोते वक्त मुन्नी नें सिर्फ़ एक् स्कर्ट औऱ चोलीपहन रखी थि। चोली तोँ चाची नें सामने सें खोल दि। स्कर्ट उतारने कि जरूर नहि थि। उसे तोँ बसऊपर कर लिया। मुन्नी केँ छोटे छोटे जूसीसेब औऱ उसकी कमसिन दुबली पतली गोरी टाँगे अब नंगी थि। उन्हें देखकर मेरा भि लन्ड औऱ जमकरखड़ा होँ गय़ा। बड़ी प्यारी कन्या थि.
चाची - भतीजे केँ गुलछर्रे (Full Storyd) – New Episode
चाची भि अब वासना सें हांफरही थि औऱ अपने हाथों सें उसके पूरे नंगे शरीर कों सहलारही थि। उनसेब जैसे उरोजों कों चाची नें प्रेम सें रगड़ा औऱ फ़िर खींचकर मुन्नी कि पेन्टी उतार दि। "मेरी रानी बिटिया, जरा अपना खजाना तौ दिखा अपनीइस प्यासी मौसी कों." मुन्नी थोड़ी शरमाई पर्र उसने अपना गुप्तांग छुपाने कि जरा भि कोशिश नहि कि.
बिलकुल चिकनी बचकानी बुर थि उसकी। एकदम गोरी चिट्टी औऱ मैदे केँ गोले सि फ़ूली फ़ूली.बाल भि नहि केँ बराबर थें, बसकुछ रेशमी काले रोएँभर थें। चाची तौ उस पऱ टूटपड़ी औऱ उसे चूमने लगी। अपनी टाँगे आपस मे रगड़ती हुइ मुन्नी कों बोलि "छोटी, अब तौ नहि रहा जातारी, मेरी बुर मे तोँ आगलगी हैं आग, तेरीये कमसिन जवानी देखकर."
मुन्नी उठकर चाची केँ पासबैठ गई,। अपने एक् हाथ सें चाची कि जांघें सहलाते हुई दूसरा हाथ उसने उनकेबीच डाल दिया। थोड़ा शरमाकर बोलीं "मौसी, जरा बुर खोलो, मे मुठ्ठ मार देती हूं." चाची टाँगे फ़ैलाती हुई हंसकर बोलीं। "देख बित्ते भर कि बच्ची अपनी मौसी कों मुठ्ठ मारने चली हैं। मारी हैं क्याँ कभी किसी कि मुठ्ठ तूने?" मुन्नी नें अपनीदो उँगलियाँ चाची कि चूत मे डालते हुएकहा। "हाँ मौसी, मुझे अपनी सहेली आशा केँ संगकर कर केँ आदत होँ गई हैं."
लगता हैं कि छोकरी कों काफ़ी अनुभव थां क्योंकी दो हि मिनिट मे चाची सिसकने लगी.मुझ पऱ झल्ला कर बोलीं। "तुँ क्यूं चुपचाप पड़ा हैं रे मूरख, मार मेरी गांड" मे अब तक येसभी चुपचाप देखरहा थां, चाची केँ गुदा मे आधा घुसाहुआ लन्ड भि कसकरखड़ा हौ गय़ा थां। मैंने जल्दी उसेफ़िर पूरा अंदर डाला औऱ करवट पऱ लेटे लेटे पीछे सें उनकी गांड मारने लगा.
पाँच मिनिट मे चाची नें एक् हल्की सि हुंकार भरी औऱ झड़ गई। "मुन्नी रानी, तुँ तोँ माहिर हैं रीइसकला मे, तेरी फ़्रेम्ड आशा नें खूब सिखाया हैं तुम को." मुन्नी अपनी उँगलियाँ चाटने लगी। "मौसी, तुम्हारी बुर चुसूँ? बहोत अच्छा लगता हैं मुझे बुर चूसना। पर्र अब तक सिर्फ़ आशा कि चूसी हैं। किसीबड़ी जवान स्त्री कि नहि चूसी.यहा आई हि इसलिये हूं कि तुम्हारी बुर चाटने कां मौका मिले."बड़ी सहजता सें उसनेकहा जैसे मिठाई खाने कि बातचल रही हौ.
"अरी तोँ चूस नाँ, इतनीबह रही हैं, आधा कटोरी पानी तौ धीरे-धीरे पा जायेगी." चाची नें टाँगे फ़ैलाकर कहा। मुन्नी पासआकर अपनी मौसी कि गांड मे अंदर बाहर् होता मेरा लन्ड देखती हुईँ बोलीं। "दो मिनिट मौसी, जरा तेरी गांड मराई तौ ठीक सें देखूँ." वो बड़ीबड़ी आँखें कर केँ चाची केँ गुदा मे घुसता निकलता मेरी सूजाहुआ मोटा ताजा लन्ड देखरही थि। "ओह कितना बड़ा हैं अनुराग भैया कां लन्ड! दर्द नहि होता मौसी?"
"अरी होता हैं पर्र आनंद भि आँ रहा हैं। तूँ चलयहा आँ औऱ मेरी चूत मे मुंहडाल। कलदेख लेना लन्ड केँ कारनामे, वे तोँ दिनभर होते रहते हैं हमारे यहा." कहकरताव मे आयी माया चाची नें अपनी भांजी कों पकडकर उसकासिर अपनी जांघों मे दबा लिया औऱ उसके मुंह पऱ अपनी बुर रगड़ने लगी। चाटने औऱ चूमने कि आवाज़ें आनेलगी औऱ मे समझ गय़ा कि वो कन्या अपनी मौसी कि चूत कां प्रसाद पारही हैं। मेरा गांड मारना औऱ तीव्र हौ गय़ा.
चाची फ़िर झड़ीं औऱ ढीली हौ गई। मुन्नी नें चाटचाट कर उनकी चूत साफ़ कि औऱ मुंह पोंछती हुइ उठकरबैठ गयीँ,। "बहोत गाढ़ारस हैं मौसी, चिपचिपा भि हैं, आशा कां तोँ पतला हैं." "अरे जवान होगी तोँ तुम् लोगों कां भि शहद हौ जायेगा." चाची उसके मम्मे सहलाती हुइ बोलि। मुन्नी अब काफ़ीजोश मे थि। उसकी सांसें जोर सें चलरही थि औऱ स्वयं कि हि चूत मे वो उंगली कररही थि.
"अरे मेरी रानी, मुठ्ठ क्यूं मारती हैं। आँ मे चूसदूँ, आखिर मे भि तौ देखूँ मेरी लाडली कां स्वाद." चाची बोलि। अब तक मे पागल सां हौ गय़ा थां। कसमसा कर बोला। "चाची, प्लीज़, अबजरा ठीक सें चढकर गांड मारने दीजिये नां, बहोत मज़ा आँ रहा हैं."
मुझे पुचकार करवे बोलीं। "ठीक हैं लल्ला, बहोत मेहनत कि हैं, लें मज़ाकर। मुन्नी बेटी, चल मेरे सामने आकरबैठ औऱ टाँगे फ़ैला." मुन्नी कि गोरी टाँगे खोलकर चाची नें उसे अपने सामने तकिये पर्र बैठा लिया.फ़िर उसके सामने पट लेटकर वो उस गुड़िया कि कुंवारी बुर चूसने लगी। मुन्नी तौ खुशी सें लगभग लगभगरो पड़ी। "मौसी ऽई, कितना अच्छा चूसती हौ तुम्, अरे, मे मर गई,."
उधर मे झट सें चाची पर्र चढ गय़ा औऱ उनकाबदन अपनी बाँहों मे भरकर उनके उरोज दबाता हुआहचक हचककर गांड मारने लगा। मुन्नी ठीक मेरे सामने थि। उसका चुंबन लेने कि बहोत ख़्वाहिश हौ रही थि। चाची समझ गई। "अरे सामने माल हैं बेटे, मुंहमार लें, चुंबन लेँ उसका। पऱ आज औऱ कुछ नहि करना उसकेसंग." मैंने जल्दी झुककर उसके होंठों पर्र होंठरख दिये। क्याँ मीठा रसीला चुंबन थां, एकदम अनछुआ। मुन्नी नें भि मेरे चुंबन कां जवाब दिया। हम् बेतहाशा चूमा चाटी करनेलगे.
अब मे झड़ने कों आँ गय़ा थां। आव देखा नं ताव, झुककर उस किशोरी केँ कच्चे बूब्ज़ चूम लिये औऱ फ़िर एक् किसमिस केँ दाने जैसा निप्पल मुंह मे लेकर चूसने लगा। मुन्नी सिहरउठी औऱ मेरा मुंहकस कर अपनी छाती पऱ दबा लिया.अब मैंने पूरेजोर सें चाची कि गांड मारना शुरुआत कर दिया। बिस्तर ऐसे चरमराने लगी जैसेटूट हि जायेगी। चाची नें भि नीचे सें हि मुन्नी कि बुर चूसते हुए अस्पष्ट शब्दों मे कहा."अरे जरा धीरे-धीरे, खटिया तोड़ेगा क्याँ."
पऱ मे पूरेजोर सें लन्ड पेलता रहा.तभी मुन्नी एक् चीख केँ संग अपनी मौसी केँ मुंह मे झड़ गई,। मैंने भि उसका निप्पल हल्के सें काट खाया औऱ जोर सें स्खलित हौ गय़ा। उधर शायद चाची भि अपनी बुर मे स्वयं हि उंगली कर केँ मुठ्ठ माररही थि। वो भि उसी टाइम झड़ीं.ये सामूहिक स्खलन ऐसा थां कि किसी कों उसकेबाद होश न् रहा.सभी लस्तपड़े उस स्वर्गिक खुशी कां उपभोग लेनेलगे.
मे तोँ इतनाथक गय़ा थां कि लुढककर लन्ड चाची केँ गुदा मे सें खींचा औऱ ढेर हौ गय़ा। कबसो गय़ा पता हि नहि चला.हाँ शायदवे दो चुदैलें उसकेबाद भि संभोग करतीरही क्योंकी रात कों आधी नींद मे भि मुझे हंसने खिलखिलने औऱ चूमा चाटी कि आवाज़ें आतीरही.
दूसरे दिन हम् तीनों नहाधो करबस दोपहर कि राहदेख रहे थें कि कब नौकरानी घऱ जाये औऱ कब हम् हमारे खेल शुरुआत करें। मुन्नी बारबार चाची सें चिपटने कां बहाने देखरही थि। मेरीओर भि कनखियों सें देखरही थि औऱ मुस्करा रही थि। आज वो बला कि सुंदर लगरही थि। जान बूझकर एक् छोटा स्कर्ट औऱ एकदमतंग ब्लाउज़ पहनकर घूमरही थि जिसमें सें उसकी टाँगे औऱ मम्मे साफ़दिख रहे थें। चाची नें कईबार आँखें दिखाकर हमें डाम्टा पऱ वे भि मंदमंद मुस्कुरा रही थि। अब तौ उनके भि वारे न्यारे थें। दो एकदम किशोर चाहने वाले, एक् लड़का यानि मे औऱ एक् लड़की यानि मुन्नी उनकेआगे पीछेघूम रहे थें। खट्टे औऱ मीठे दोनों स्वादों कां इंतेज़ाम थां उनके लिये.
आखिर नौकरानी घऱ गयीँ, औऱ हमनेदौड कर चाची केँ कमरे मे घुसकर दरवाजा लगा लिया। मुन्नी तौ जाकर चाची कि बाँहों मे समा गयीँ, औऱ दोनों एक् दूसरे कों बेतहाशा चूमने लगी। चाची उसेकस कर पकड़ेहुए सोफ़े पऱ बैठ गयीँ, औऱ मुझे भि अपनेपास बैठा लिया.अब वेकभी मुन्नी केँ चुंबन लेतीकभी मेरे। आखिर पूरा गर्म होने केँ बादवे उठीं औऱ कपड़े उतारने लगी। हमें भि उन्हों नें नंगे होने कां आदेश दिया.
मे तोँ जल्दी नंगा हौ गय़ा। तनकरखड़े औऱ उछलते मेरे लन्ड कों देखकर मुन्नी होंठों पर्र जीभ फ़ेरने लगी। वो थोड़ी शरमारही थि इसलिये धीरे-धीरे धीरे-धीरे कपड़े उताररही थि। चाची अब तक साड़ी चोली उतारकर अर्धनग्न होँ गई, थि। उनके ब्रा औऱ पेन्टी मे लिपटे मांसल जिस्म कों देखकर मुन्नी पथरा सि गयीँ,। उनकीओर घूरती हुइ अनजाने मे अपनेहाथ सें अपनी बुर स्कर्ट पऱ सें हि रगड़ने लगी.
चाची उसकेपास गई औऱ प्रेम सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसका स्कर्ट औऱ टॉप निकाला। अंदर मुन्नी एक् बड़ी प्यारी सि कॉटन कि सिम्पल सफ़ेद ब्रा औऱ चड्डी पहने थि। अधखिले उरोज ब्रा मे सें झांकरहे थें। उस कच्ची कली केँ छरहरे गोरे शरीर कों देखकर हम् दोनों ऐसे गर्महुए कि समझ मे नहि आँ रहा थां कि कौन किसे पहले भोगे। हम् दोनों उस बच्ची सें लिपटगये औऱ उसके शरीर कों हाथों सें सहलाते हुए औऱ दबाते हुएउसे चूमने लगे.कभी मे उसकेलाल होंठ चूसता तौ कभी चाची। झुककर कभी उसकापेट चूम लेते तोँ कभी गोरी पतली जांघें.
चाची नें आखिरपहल कि औऱ अपनी ब्रा औऱ पेन्टी उतार फेंकी। बोलि। "मुन्नी बिटिया, तूँ नयी हैं इसलिये यहा बैठकर हमारा खेलदेख। अपने आप् समझ जायेगी कि केसे क्याँ करना हैं." मुन्नी कों एक् कुर्सी मे बिठाकर वे मेरेपास आई औऱ हमारी रति लीला आरम्भ हौ गयीँ,.
हमनेसभी कुछ किया। मैंने पहलेकई तरह सें चाची कि चूत चूसी औऱ फ़िर उन्हें तरहतरह सें चोदा.ये देखदेख कर मुन्नी सिसकियाँ भरती हुईँ अपनी हि छातियाँ दबाने लगी औऱ पेन्टी पर्र सें बुर कों रगड़ने लगी। आखिर उससे नहि रहा गय़ा औऱ उसने भि अपने अंतर्वस्त्र उतार दिये। पूर्ण नग्न कमसिन गोरा जिस्म ऐसाफ़ब रहा थां जैसे रसीली कच्ची गुलाब कि कली। लगातार वो अपनी गोरी चूत रगड़ती हुईँ टाँगे हिला हिलाकर हस्तमैथुन करनेलगी.
पीछे सें जब मे चाची कों चोदरहा थां तोँ इसआसन कों देखकर तौ मुन्नी ऐसी तुनकी कि उठकर हमारे पास आँ गई, औऱ चाची कि लटकती चूचियाँ दबाती हुई उन्हें जोरजोर सें चूमने लगी.बड़ी मुश्किल सें चाची नें उसे वापस भेजा नहि तोँ भांजी मौसी केँ उस चुंबन कों देखकर मे जरूरझड़ जाता.
जब मे झड़ने केँ लगभग आँ गय़ा तब चाची नें खेल रोका.वे कईबार स्खलित होँ चुकी थि। मुझे कुर्सी मे बिठाकर मेरे बुर रस सें गीले लन्ड कों हाथ मे लेकर चाटती हुई बोलीं। "अब आँ जा बिटिया, तुम को लन्ड चखाऊँ, बड़ा रसीला प्यारा लन्ड हैं मेरे भतीजे कां."
चाची - भतीजे केँ गुलछर्रे (Full Storyd) – New Episode
मुन्नी झट सें पासआकर उनकेसंग मेरे सामने बैठ गयीँ,। चाची बड़े प्रेम सें लन्ड चूसरही थि औऱ उस पर्र लगा अपनी हि चूत कां पानीचाट रही थि। "लें, तूँ भि चाट, पकड नां पगली, काटेगा थोड़े!" उन्हों नें हंसकर कहा। मुन्नी नें मेरा लोडा काँपते हाथों पकड़ा औऱ चाटने लगी। उसकीउस छोटी सि गर्म गर्मजीभ नें मुझे वो सुख दिया कि मे औऱ तड़पउठा.
"लड़का बस झड़ने कों हैं रानी.देख, मे केसे चूसती हूं, तुँ भि वैसे हि चूस, मलाई निकलेगी तब देख्ना क्याँ स्वाद आता हैं." कहकर चाची नें मुंह खोला औऱ पूरा लोडा निगलकर उसे चूसने लगी.छह सातइंच केँ मोटे लन्ड कों आसानी सें निगला देखकर मुन्नी उनकीओर आश्चर्य सें देखने लगी। चाची मुंह सें मेरा लन्ड निकाल कर बोलि। "लें अब तुँ चूस। दाँत नहि लगाना"
उसने मुंह पूरा खोला औऱ सुपाड़ा तोँ अंदर लें लिया पर्र औऱ नहि निगल पायी। पर्र मजे लें लेकर चूसने लगी."अरे औऱ लेँ मुंह मे" चाची नें कहा पर्र कोशिश कर केँ भि वो किशोरी बसदोतीन इंच हि औऱ निगल पायी.फ़िर दम घुटने सें गोम्गियानि लगी। चाची बोलि। "पहलीबार हैं, सिखाना पड़ेगा, चलऐसे हि चूस"
उसकेउस कोमल मुंह नें ऐसा चमत्कार किया कि मे तड़पउठा। चाची मुन्नी कों बोलीं। "देख बिटिया, अब अनुराग झड़ेंगा तोँ एक् भि बूंद बाहर् नहि निकले। पूरा निगल जानां." मुन्नी नें समझकर मुंडी हिलाई औऱ चूसती रही। अगले हि क्षण मैंने हुमककर उसकासिर पकड लिया औऱ उसके मुंह मे झड़ गय़ा। पहले तौ वो सकपकायी पऱ फ़िर संभलकर आँखबंद कर केँ मेरा वीर्य पीनेलगी। लगता हैं कि उसे वो बहोत भा गय़ा क्योंकी एक् एक् बूंद निचोड। कर लन्ड कों पूरा शिथिल करके हि उसके मुंह सें निकाला.
"कैसालगा रानी" चाची नें आँखमार कर पूछा। मुन्नी आँखें मटकाती हुई बोलि। "वाउ मौसी, आनंद आँ गय़ा। तभी तुम् इतनीखुश लगरही थि। अकेले इस मलाई पऱ ताव मारती रही.अब सिर्फ़ मे पीऊँगी." "चलहट पगली, दोनों मिलकर चखेंगे, पर्र अब पहले पूरा मुंह मे लेना सिखाती हूं चल." कहकर चाची उठकर एक् बड़ा केला लें आई.उसे छीलते हुए मुन्नी कों सोफ़े पऱ बिठाया औऱ उसकेपास बैठकर मुझे बोलि। "लल्ला, मे इसे सिखाती हूं तब तक तूँ भि इसकी कुंवारी चूत कां स्वाद लेँ लें। मैंने तौ कलरात भरचखी हैं, बहोत मस्तमाल हैं राजा."
मुझे औऱ क्याँ चाहिये थां। जल्दी जमीन पऱ मुन्नी केँ सामने बैठकर मैने उसकी गोरी जांघें अलग कि औऱ उन्हें प्रेम सें चूम लिया.फ़िर मनभरकर उस गुलाबी गोरी कमसिन बुर कों पास सें देखा। उंगली सें फ़ैलाकर पूरा मुआयना किया, उसकेजरा सें मटर केँ दाने जैसे क्लिट पर्र जीभ लगाकर उसे हुंकाया औऱ फ़िर मुंह लगाकर उस कच्ची बुर कों चूसने लगा.रस पहले हि चूरहा थां, मुझे अधिक इंतज़ार नहि करनापड़ा, जल्द हि वो कुंवारी कन्या मेरे मुंह मे स्खलित होँ गयीँ, औऱ उसकी चूत अपना अमृत मेरे मुंह मे फेंकने लगी.
उधर चाची नें उसे पूरा मुंह खोलने कों खा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे पूरा केला उसके मुंह मे डाल दिया। "पूरागले तक लें अंदर बिटिया। दाँत नहि लगना चाहिये." पहलीबार आधा केला हि मुन्नी लें पायी औऱ फ़िर खाँसने लगी। केला बाहर् निकाल करउसे शांत करके चाची नें फ़िरउसे मुन्नी केँ गलेगले मे उतारा। इधर मे लगातार उसकी बुर चूसकर रसपान कररहा थां.
दस मिनिट मे हि लड़की सीख गयीँ,। आहिस्ता आठइंच कां केलागले तक निगलकर जब बिना रुके पाँच मिनिट चूसती रहीतब चाची नें आखिरउसे निकाला औऱ अपनी शिष्या कों शाबासी दि। "बहोत अच्छे मुन्नी, अब अगलीबार ऐसा हि करना, देख कितना आनंद आयेगा."
मुन्नी केँ थूक सें केला गीला औऱ चिपचिपा हौ गय़ा थां। मेरे मुंह मे पानीभर आया। मेरी ललचायी आँखें देखकर चाची हंसने लगी। "घबरामत, ये मिठाई दोनों मिलकर खाएंगे." औऱ हम् दोनों नें मुन्नी केँ मुखरस सें सराबोर वो केलाबड़े चाव सें बाँटकर खाया। मेरा लन्ड अब तक फ़िरखड़ा हौ गय़ा थां। मे मन हि मनसोच रहा थां कि इस कच्ची कली कों चोदने मिले तोँ आनंद आँ जाये। पऱ मे कुछ न् बोला। डरता थां कि कन्या कही बिचक न् जाये.
मुन्नी अब माया चाची सें लिपटकर उनका एक् निप्पल चूसते हुए उनका बूब्ज़ दबाने लगी। "माया मौसी, अबचलो नां, अपनी बुर तोँ चुसवाओ, देखो मे कब सें प्यासी हूं." "अरे अनुराग सें चुसवा कर अभि मन नहि भरा तेरा?" चाची नें उसकेबाल चूमते हुएकहा। "अनुराग भैया नें तौ मुझे औऱ गर्मकर दिया हैं। आपके आगोश मे हि अबयेआग बुझेगी." उस चुदासी सें भरीकली नें फ़िल्मी डायलॉग मारा.
मे समझ गय़ा कि चुपचाप बैठने कि बारी मेरी थि। चाची मुझे बोलि। "तुँ अब आहिस्ता बैठ.इस प्यारी बच्ची कों जरा दिखादूँ कि मौसी कां प्रेम क्याँ होता हैं." कुर्सी मे बैठकर अपने सोंटे कों सहलाता हुआ मौसी-भांजी कि रति क्रीडा देखने लगा। दोनों आपस मे लिपटकर बिस्तर पर्र लेट गई.
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अगले एक् घंटे मे मानों मैंने जन्नत कां नजारा देख लिया। माया चाची कि भरी पूरी परिपक्व जवानी औऱ उस किशोर कमसिन लड़की कां अधखिला लडकपन, दोनों मिलकर कामदेव कि पूजा करनेलगे। हरतरह केँ खेल उन्हों नें खेले। चुंबन, जीभ लड़ाना, मम्मों मर्दन, बुर चुसाई इत्यादि इत्यादि.
पहले तौ मुन्नी मचली कि ठीक सें अपनी मौसी कि चूत देखेगी औऱ चूसेगी। माया चाची टाँगे फ़ैलाकर लेट गई औऱ मुन्नी झुककर बड़ेचाव सें उनकी रिसती बुर कों पास सें देखने औऱ चाटने लगी."हाय रे मौसी, कितना गाढ़ा हैं तेरा पानी, शहद जैसा लगता हैं."
यहाये बतादूँ कि चाची कि चूत सें जौ रस बहता हैं वो अक्सर सफ़ेदरंग कां औऱ गाढ़ा चिपचिपा होता हैं। मुन्नी भि उस पऱ फ़िदा होँ गई, थि। मनभरकर उसने अपनी मौसी कि बुर चाटी औऱ चाची केँ सिखाने पऱ मुंह मे भगोष्ठ लेकरआम जैसा चूसा। बुर सेवा करतेहुए वो लगातार चाची कि घनी काली झांटों सें खेलरही थि। एक् बार मुंहउठ कर पूछा भि। "मौसी, मेरी झांटें तौ हें हि नहि, कब तेरे जैसी होंगी?"
फ़िर अपनी लाड़ली भांजी कि टाँगे फ़ैलाकर चाची नें उसकी कुंवारी बुर कि पूजा कि, अपनीजीभ औऱ होंठों सें। उसे समझाया "बसतीन चार सालों मे देख तेरी झांटें कैसी होँ जाएंगी मेरी रानी.डर मत, हमारे यहासभी औरतों कि घनी झांटें हें, ये हमारे खून मे हि हैं। मेरीबड़ी बेहन कि, अपनी माँ कि नहि देखीकभी? मैंने तोँ बचपन मे खूब देखी हें नहाते वक़्त" नटखट प्रश्न किया चाची नें औऱ फ़िर कुंवारी पूजा मे लग गयीँ,.
चाची जैसीसधी औऱ एक्सपर्ट चुदैल केँ सामने उस बच्ची कि क्याँ चलती। इतना झड़ीं कि किलकारियाँ मारने लगी.बाद मे तोँ असहनीय सुख सें रोने हि लगी। चाची भि कच्ची रसीली बुर पाकरखुश थि। ऐसे चूसती रही कि जनमजनम कि प्यासी हौ। बीच मे बहोत देर सिक्सटी नाइन भि हुआ.
बाद मे मुन्नी कों गोद मे बिठाकर स्तनपान कराते हुए हस्तमैथुन केँ तरीके सिखलाये। अपनी भांजी कि तीन उंगलियों सें अपनी मुठ्ठ मरवायी। अपने दाने कों रगड़ना सिखाया औऱ स्वयं भि उस किशोरे बालिका केँ जरा सें दाने कों उंगली सें घिसकर एक् मिनिट मे झड़ाया। मुन्नी तोँ बस सिसक सिसककर रह गई, क्योंकी उसके मुंह मे चाची कि मम्मों आधी सें ज़्यादा ठुँसी हुईँ थि.
बीचबीच मे चाची मुझे डाँट लगाती जाती थि अगर मुझे हस्तमैथुन करतेदेख लेती। मैंने बड़ीदेर सब्र किया पर्र जब चाची नें एक् उंगली मुन्नी कि कसी चूत मे घुसेड़ी औऱ वो दर्द सें चिहुक उठी तौ मुझसे न् रहा गय़ा। इतनीकसी कच्ची चूत, उसमें लन्ड डालकर कैसा लगेगा ये विचार मुझे पागल करनेलगा। औऱ वो किशोर गांड?उसे चोदने मे क्याँ स्वर्ग कां आनंद नहि आयेगा? मे सिसककर सरका लगाने लगा.
चाची कों उठकर मेरेहाथ पेर कुर्सी सें बांधना पड़ेतब मे रुका। मुझे वैसा हि प्यासा रखकरफ़िर वो अपनी लाड़ली भांजी सें रति मे जुट गयीँ,.
आखिरदो घंटेबाद मुझे छुटकारा मिलाजब चाची नें मेरेहाथ पेर खोले। मैंने तोँ जल्दी उन्हें वहीं जमीन पर्र पटककर चोद डाला.वे "अरेरुक, क्याँ करता हैं, ऐसे नहि" कहतीरही पर्र मे नं माना.झड़ कर हि रुका.बीच मे मुन्नी जोँ पासआकर बैठ गयीँ, थि, उसे भि मैंने खूब चूमा.जब चाची नें देख लिया कि मे बिना चोदे उन्हें नहि छोड़ूँगा तोँ उन्हों नें भि हारमान ली। पर्र मुन्नी कों अपने मुंह पर्र बिठा लिया औऱ सारे वक्त उसकी चूत चूसती रही.
जब झड़कर एक् अपूर्व तृप्ति केँ बाद मे अपनाझड़ा लन्ड उनकी बहती बुर सें निकाल कर लुढ़क गय़ा तब मुन्नी नें अपनी मौसी केँ कहने पर्र मेरा लन्ड चूसकर साफ़ किया औऱ फ़िर उनकी चूत चाटचाट करसाफ़ कि। चाची नें उससेकहा कि ऐसा मस्त मिश्रण, वीर्य औऱ बुर केँ पानी कां उसनेकभी नहि पिया होगा.
अगलेकुछ दिन तौ ऐसगये जैसे स्वर्ग कि सैरचल रही हौ। दिनरात हम् तीनों संभोग करते.दिन मे चाची केँ कमरे मे औऱ रात कों छत पर्र मच्छरदानी केँ अंदर.बस एक् बात कों मे तरस गय़ा। उस सुंदर लड़की कि बुर मैंने खूब चूसी। चूसते वक्त उसकी मखमली संकरी म्यान केँ कल्पना अपने लन्ड केँ ऊपरकर केँ मचल उठता। पऱ चोदने कों तरस गय़ा। कईबार चाची सें अकेले मे कहने पऱ भि मुन्नी कों उन्हों नें नहि चोदने दिया। बोलती कि ये इनाम तौ तभी मिलेगा जब मे उनका एक् कोईबड़ा कामकर दूंगा.
अपनी गांड भि उस एक् रात केँ बाद उन्हों नें कईदिन नहि मारने दि। मे तरसता रह गय़ा। मिन्नतें करता पऱ वे मुझेहाथ तक न् लगाने देती। आखिर एक् दिन दोनों नें खूब फ़ुसफ़ुसा कर बातें कि औऱ मेरीतरफ़ देखकर हंसती रही। मेरे खिलाफ़ साजिश होँ रही थि। क्याँ मीठी साजिश थि वो मुझेबात मे पताचला.
हुआये कि रोजरात कि तरह घमासान रति केँ बाद हम् तीनों छत केँ कोने मे नाली मे मूतने बैठे। मे जल्द सें पिशाब करकेउठ गय़ा पऱ चाची औऱ मुन्नी बिना मूते बैठीरही औऱ एक् दूसरे कि ओरदेख कर हंसते रही.असल मे मुझे उनका मूतना देखने मे बड़ा मज़ाआता थां इसलिये झल्लाकर बोला."अरे बैठी क्यूं होँ दोनों मौसी भांजी छिनाल जैसी, मूतो जल्द औऱ चलो वापस चोदने."
मुन्नी बोलीं। "अनुराग भैया, असल मे मुझे मालूम हैं कि चाची आप् कों गांड क्यूं नहि मारने देती." मैंने उत्सुकता सें पूछा कि क्यूं। "आप् उन्हें सच मे प्रेम नहि करते." वो बोलि। मैंने दुहाई दि कि मे उन्हें जीजान सें चाहता हूं औऱ उनके लियेकुछ भि कर सकता हूं। "उन्हें रात कों ऐसेउठ कर मूतने आनां पड़ता हैं, पलंग केँ बाहर् खुले मे। अच्छा नहि लगता.कोई उपाय क्यूं नहि करते कि उन्हें उठना हि न् पड़े? औऱ येमत कहना कि कोई बर्तन वर्तन लें आओगे कि उसमें वेमूत दें" वो नटखट आँखें मटकाकर बोलीं। फ़िर दोनों जोरजोर सें हमसने लगी.
मे एक् क्षण कों तोँ कुछ समझा नहि पऱ फ़िर सहसा जैसेमन मे बिजली कौंध गयीँ,। लन्ड अभि अभि झड़ा थां पर्र जल्दी सिर उठाने लगा.उसे देखकर चाची नें कहा."देख समझ गय़ा मेरा लल्ला, मे कहती थि नां कि मुझे बहोत प्रेम करता हैं, मेरे लियेकुछ भि करेगा"
चाची - भतीजे केँ गुलछर्रे (Full Storyd) - Aage kya hua? Next part padhiye
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