गलत संगत कां असर – New Episode
एपसोड - 12
विक्की- अच्छा छोटी मां मे जाता हूं। इतना कहकरबेड सें नीचे आँ जाता हूं।
(उसका लन्ड फुल फॉर्म मे थां वो छुपाना चाहता थां कि कहीं रजनी नं देख लें इसलिये विक्की वहा जानां चाहता थां)
रजनी-अरे रुक तौ अभि किसी कों आँ जाने सें औऱ ये तेरी अंडरवियर केँ अंदर क्याँ हुआ हैं। (विक्की केँ खड़े होते हि रजनी लन्ड कों देखकर मुस्कुरा देती हैं औऱ जानबूझकर पूछती हैं)
इतना सुनकर विक्की कि धड़कनें तेज़ी सें चलने लगीं। (विक्की कों कुछसमझ मे नहि आता हैं औऱ वो कमरे सें बाहर् निकलने कां एक्सक्यूज़ बनाता हैं)
विक्की- वोँ कुछ नहि मम्मी जी मे जाता हूं
मगर रजनी नें ऊपर सें हि विक्की कां लन्ड पकड़ लिया जिससे विक्की केँ मुँह सें अहह निकल गई।
रजनी- लगता हैं तेरेयहा पे दर्द हौ रहा हैं।
विक्की- नहि मम्मी जी मे ठीक हूं औऱ ऊपर सें हाथलगा लिया।
रजनी नें हाथ हटाकर ऊपर सें लन्ड पकड़कर दबा देती हैं औऱ आगे पीछे जाने लगती हैं।
विक्की कों दर्द केँ संगमजा भि आने लगता हैं क्योंकि एक् घंटे सें लन्ड इसी पोजीशन मे खड़े-खड़े दर्द होनेलगा थां।
विक्की कां विरोध धीरे धीरेकम होनेलगा।
विक्की- आआह मां जीऐसे बहोत मजा आँ रहा हैं आआ मम्मी जी,
रजनी- औऱ मजा चाहिए
विक्की हाँ मे गर्दन हिलाता हैं।
रजनी अंडरवियर उतार देती हैं जिससे उसके सामने जंगल मे एक् 8 इंच लंबा औऱ 2.5 इंच मोटा लन्ड सामने आँ जाता हैं। रजनी पहले तौ हाथों सें आगे पीछे करती हैं।
विक्की बस खड़े-खड़े रजनी कों देखता औऱ आँखें बंद करकेमजा लेता हैं।
रजनी उठकरगेट बंदकर देती हैं औऱ विक्की कों बेड पर्र लिटा देती हैं।
औऱ स्वयं विक्की कां लन्ड मुँह मे लेकर चूसने लगती हैं।
विक्की- आआह मांजी यह क्याँ किया आपने (विक्की नें अभि तक केवल BF मे हि देखा थां, अश्लीयत केँ अनुभव सें उसकेहोश हि उड़गए जिससे उसेमजा आनेलगा)
रजनी विक्की कां लंद मुंह मे लेकर चूसने लगी।
थोड़ी देरऐसे करते-करते विक्की नें रजनी कां सिर पकड़कर अपने लन्ड केँ ऊपर दबाने लगा।
कुछदेर बाद विक्की रजनी केँ मुंह मे झड़ गय़ा औऱ रजनी पूरा वीर्य पी गई।
विक्की थकतेहुए,
विक्की- आआह मांजी मजा आँ गय़ा आपकेपास तौ चमत्कार हैं ऐसीसुख ज़िंदगी मे पहलीबार मिला हैं।
रजनी- मे तोँ तुझको कईबार अकेले मे बुलाई हूं पऱ तुँ नहि आता तोँ मे क्याँ करूँ।
विक्की- ठीक हैं आगे सें ध्यान रखूंगा।
रजनी- इससे अधिक भि मजा दूँगी बस मेरा कहना मानेगा तब औऱ सुनयह मात्र तेरे औऱ मेरेबीच कि बात हैं औऱ किसी कों पताचली तौ दोनों परिवार कि बदनामी होगी।
विक्की बेड सें उठ जाता हैं औऱ कपड़े पहनने लगता हैं। नहि मांजी मे इतना भि भोला नहि हूं कि यहसभी बातें किसी कों भि बतादूँ।
ठीक हैं माँ जी मे चलता हूं औऱ आपका दर्दअब दूर तौ होँ गय़ा होगा। कल फिन आपकी सेवा मे हाज़िर हूँगा।
औऱ विक्की रजनी कों हल्की सि किस देकर जाने लगता हैं।
रजनी- विक्की यह तुँ नीचे केँ बाल नहि बनाता हैं क्याँ?
विक्की- नहि माँ जी वोँ समय नहि मिलता मगर आपके भि तौ नीचेबाल हें।
रजनी-हाँ मेरेकोई बनाने वाला नहि हैं अगर तेरेपास समय हैं तोँ मे तेरी औऱ तुँ मेरी सहायता कर सकता हैं।
विक्की रजनी केँ घऱ सें निकल जाता हैं औऱ आज रजनी केँ संगहुए लम्हा कों सोचने लगता हैं।
जल्दउसे रजनी कि बुर भोगने कों मिल जाएगी।
घऱ पहुँचता हैं तौ साम केँ 5 बज जाते हें।
निधि- कहां थां इतनीदेर सें,
विक्की- रवि केँ संग थां। दिनभर बसउस आवारा केँ संग घूमो औऱ कुछमत करना।
विक्की वहां सें अपने कमरे मे चला जाता हैं। रात होते हि खानां खाकरसभी अपने कमरे मे चले जाते हें।
विक्की कमरे मे जाते हि सो जाता हैं।
गलत संगत कां असर – New Episode
भाग - 13
अगलेदिन,
विक्की- मम्मी आजअगर मे विद्यालय नाँ जाऊं तोँ (रवि केँ नाँ होने केँ कारण)
निधि- नहि वैसे भि तूँ बहोत आवारा होँ गय़ा अगर विद्यालय नहि जाएगा तोँ औऱ आवारा बनेगा।
विक्की- प्लीज मम्मी मानजाओ आज केँ लिएकल चल जाऊंगा।
निधि- नां कां मतलब नां
विक्की बेमन सें रेडी होनेचला जाता हैं औऱ फिन विक्की अपने विद्यालय औऱ संजय औऱ कोमल अपने विद्यालय चली जाती हैं निधिघऱ केँ कामकाज मे लग जाती हैं। (ऐसा लगता हैं)
मगर सबकेघऱ जाने केँ बाद निधि नें घऱ केँ गेटबंद किया औऱ अपने पूरे कपड़े उतार केँ नंगी हौ गई। अपने हाथोदूध औऱ बुर मसलने लगी। रसोई सें खीराउठा केँ सीधे विक्की केँ कमरे मे चली गई औऱ कमरे कां गेटबंद कर केँ विक्की केँ अंडरवियर उतारकर चाटने लगी। खीरे कों मुंह मे डाल केँ चिकना कर अपनी बुर मे अंदर बाहर् करनेलगी। कुछदेर बाद निधिवही बैड पऱ झड़ गई लेट केँ सो गई।
2 घंटेबाद जब नींद खुली निधिमन हि मन मुस्कुराई औऱ वहां सें नीचे जाकेनहा केँ घऱकाम काज मे लग गई।
*****
कोमल केँ विद्यालय मुझे,
विद्यालय मे प्रार्थना हौ रही हैं मगर प्रिया औऱ कोमल दोनों लोग गायबऊपर लैब जोँ बंद पड़ी होती हैं उसमें दोनों एक् दूसरे केँ बदन सें खेलरहे होते हें।
ke-आआह प्रिया ऐसेचाट मेरी बुर तूनेजिस दिन सें आग लगाई हैं ऐसे हि आंसू बहती रहती हैं।
P-तुम् कुछकम नहि हैं धन्नो मेरे तौ पहले सें ऐसाहाल हैं।
दोनों लोगो कि सिस्कियां पूरेलैब मे गुज़रही होती हैं।
मगरकोई होता जौ उन दोनों कों चुपके सें देखकर उनका वीडियो रिकॉर्ड करता हैं।
कुछ हि देर कोमलफिन थोड़ी देरबाद प्रिया भि जड़ जाती हैं औऱ वोँ दोनों अपने कपड़े पहनकर नीचे क्लास मे चलो जाती हैं।
******
विक्की कल कि तरहआज भि विद्यालय मे अकेला पहुुंच जाता हैं।
गगन- लें लौडेआज तोँ कन्फर्म करो दोस्त रवि कहीं बाहर् हैं याँ फिन उसकी औऱ उसकी लड़ाई हैं कल बहोत देरयह उसकेघऱ मे भि रहामगर रवि कहीं नहि दिखाई दिया।
मलिक- इसकी माँ कि आंख सल्ले कों आज पेलना हैं।
रिशु, राघव-हां भइया औऱ लड़के बुलाये याँ हम् लोग बहुत हें।
गगन-अबे लौड़े इसकेलिए तोँ मे अकेला हि बहुत हूं बस वोँ बकलरवि नां आँ जाए।
मलिक-ठीक हैं आज जैसे विद्यालय ख़तम होँ रिशु तुँ इसका पीछा करनायह किधर सें जाता हैं फिन इसको रास्ते मे काम तमाम,
राघव-हा भोसड़ीवाले कों यहपता लग जाएगा कि किसने पंगा लिया हैं।
तीनो एक् संगहा डील होँ गई।
क्लास मे कोई औऱ भि थां जौ विक्की कां 2-3 दिन सें इंतजार कररहा थां मगर मौका नहि मिलरहा थां बात करने।
विक्की कां आज भि विद्यालय मे मन नहि लगरहा थां तभी इसकेपास ज्योति आँ जाती हैं। (हा वोँ ज्योति हि थि)
J- क्या बात है विक्की,
V- हाकहो क्याँ हैं।
J- वोँ उसदिन जौ किया उसकेलिए सुक्रिया अदा करना थां।
V- कर लिया नां अब निकलो
J- हां हौ गय़ा तुमसे कुछ पूछना थां।
V- हम्म जल्द पूछो औऱ निकलो मे ज़्यादा बात नहि करता लड़कियों सें, सर दर्द होता हैं मेरा,
J- वोँ तुमरे संगरवि नहि आता तुम्हारी लोगो कों लड़ाई होँ गई हैं क्याँ,
विक्की गुस्से सें- तुमसे किसने कहा मेरी औऱ रवि कि लड़ाई हैं।
J- अरे विक्की क्रोध मतबस मे युहीपुछ रही हूं।
V- नहि तुमने क्यूं ऐसे पूछाजब तुम कोकुछ मालूम नहि हैं औऱ वोँ अपनी रिश्तेदारी मे गय़ा हैं इसलिये नहि आँ रहा हैं समझीअब चल निकल होगी तूँ मास्टर कि बेटी अपनेलिए मुझेडर नहि लगता।
J- हाए इतना क्रोध मैंने कोईगलत बात थोड़ी पूछी हैं बस उसको भि सुक्रिया करना थां इसलिये तुँ तोँ मेरेऊपर फर्जी क्रोध कररहा हैं।
V- ज़्यादा चिपकमत कलरवि आएगातब पुछ लियो औऱ धन्यवाद कर लेना।
J- अच्छा ठीक हैं 2 मिनटअगर अच्छी बातकर लेगा तेराकुछ बिगड़ जाएगा क्याँ?
V- हा, चलअब निकल,
J- वैसे जाने सें पहलेयह बतादू मुझे मालूम हैं तेरी औऱ रवि कि लड़ाई हुईँ हैं क्योंकि मैंने कलरवि कों बाग वालेघऱ मे जातेहुए देखा थां तौ तूँ मुझसे झूठ नाँ हि बोले तौ अच्छा हैं।
V- तेरा हौ गय़ा अब तूँ निकल यहां मेरेसार मतखा।
ज्योति गुस्से सें मुह बनकरचली जाती हैं।
विक्की मन मे (एक् तौ वैसे भि सालारवि कां पता नहि औऱ यह ज्योति औऱ मेरासर कहेजा रही हैं। चलोआज सामबाग बालेघऱ मे देखता हूं जाके।
पूरादिन ऐसे निकल जाने केँ बाद विक्की विद्यालय सें घऱ जाता हैं। )
*****
P- कोमल तेरी एक् चीज़लेई बो चाहिए
ke- क्याँ लाई हैं मेरीजान मेरेलिए
प्रिया, कोमल एक् सेक्स स्टोरी कि पुस्तक दिखती जिसमें बहोत स्टोरी औऱ उनकी नंगी तस्वीरें बनी होती हें।
ke- यह तूँ क्याँ लाई हैं दोस्त
P- यह सेक्स बुक हैं इसमें बहोत कामवासना वालीकथा हैं तेरी चाहिए तोँ बोल,
ke- नेकी औऱ पूछ केँ देफिन 2, 3.दिनबाद बापिस कर दूंगी
P- नहि तुँ लेले मेरेपास बहोत सि हैं।
ke- तेरे दोस्त सही हैं दोस्त,
P - तोँ आजघऱ चलेगी मस्ती करने,
ke - नहि दोस्त कल करते हैं आज सुभह- 2 तूनेथका दिया।
P - मेरी कोमल रानी तुँ अभि सें इतनाथक गई जबलंद लेगी तौ क्याँ करेगी लगता हैं 2-3 दिन उठेगी नहि, औऱ हंसने लगती हैं।
ke - क्याँ दोस्त प्रिया तूँ भि,
दोनों लोगऐसे बातें करते वक़्त गुज़रते हें। विद्यालय खत्म होने केँ बाद दोनों लोग अपनेघऱ चले जाते हें।
गलत संगत कां असर – New Episode
एपसोड - 14
गगन, राघव, रिशु औऱ मलिक एक्-दूसरे कों इशारा करते हें, औऱ चारो विक्की केँ पीछेचल पड़ते हें।
कुछदूर चलने केँ बाद विक्की कों
महसूस होता हैं कि चारों उसका पीछाकर रहे हें।
शक होता हि वोँ कदम तेज़कर देता हैं, मगरतब तक देर हौ चुकी होती हैं।
चारों एक् संग हमारे पऱ झपटामार देते हें। विक्की जंगल कि तरफ भागने लगता हैं।
मलिक बोलता हैं, "अहह, सालाकाम
आसान होँ गय़ा। इसी स्थान इसका हिसाब करते हें। "
राघव क्रोध होकर कहता हैं, "बकबककाम कर, पहलेइसे पकड़ो!"
रिशु औऱ राघव विक्की कों पकड़ लेते हें।
तब तक गगन औऱ मालिक भि वहां आँ जाते हें।
रिशु हंसी दबतेहुए कहता हैं, आज काफ़ी दिनों बाद अकेले हाथलगा हैं।
गगन ताना मारते हुए बोलता हैं, "हम् लोगउस लड़की कों छेड़रहे थें, तुम्हारी तरफ क्याँ तकलीफ़ थि? तेरी बेहन लगती थि क्याँ?"
विक्की गुस्से सें जवाब देता हैं, "गगन, जुबान संभाल करबात कर। "
मालिक हंसी उड़ाते हुए बोलता हैं, "अभि हमारे कब्जे मे हैं, फिन भि इसकी अकड़ नहि गई। "
विक्की गुस्से मे कहता हैं, "तुम् लोगों कि औकात मुझेपता हैं। "
गगन चिल्लाता हैं, "चुपकर, पहलेइसे सीधा करते हें!"
राघव, “इसकी अकड़ तौ बहोत हि ज़्यादा हैं। ”
रिशु औऱ राघव मिलकर विक्की कों अंग-अंग सें पकड़ लेते हें।
मालिक एक् ज़ोर कां मुक्का उसकेपेट मे दे मारता हैं।
विक्की दर्द सें कहार उठता हैं,
“एक् बाप केँ हौ तौ एक्-एक् करकेआओ… तबपता चलेगा कौन कितने पानी कां हैं!”चारो हंसने लगते हें।
“बसकुछ मिनटरुक, ” गगन बोलता हैं, “अभि पताचल जाएगा कौनकौन कितने बाप कां हैं। ”
गगन विक्की कों एक् औऱ क्रोध मरने हि वाला होता हैं, तभी अचानक मालिक ज़मीन पऱ धाराशायी हौ जाता हैं।
बाकीतीन हैरान हौ कर देखते रह जाते हें।
पीछे सें आवाज़ आती हैं—
"क्यूं रे? अपने दूसरे बाप कों भूलगये क्याँ?"
राघव चौंककर बोलता हैं, "यह.यह यहां केसे आँ गय़ा?"
रिशु भि घबराया हुआ हैं, "गगन तोँ बोलरहा थां यहशहर केँ बाहर् हैं!"
राघव औऱ रिशु विक्की कां पकड़ छोड़ देते हें।
रवि गरजता हुए, "खड़े क्याँ हौ? मारो इनको!"
विक्की जल्दी राघव पर्र झपट पड़ता हैं
औऱ हाथपाई शुरुआत होँ जाती हैं।
रविगगन सें टक्कर लेता हैं औऱ उसे ज़मीन पर्र गिरा देता हैं।
विक्की रिशु कों एक् ज़बरदस्त थप्पड़ जोड़ता हैं; रिशुवही गिरकर बेहोश होँ जाता हैं।
मालिक उठकररवि पर्र वार करने हि लगता हैं कि विक्की एक् ज़ोर कि लातमार करउसे फिन सें गिरा देता हैं।
चारो अपनीजान बचाकर भाग जाते हें। लड़ाई ख़तम होँ चुकी थि।
मलिक-रवि औऱ विक्की तुम्हें यह लड़ाई महँगी पड़ेगी
रवि याँ विक्की दोनों एक् हांतब कि तब देखेंगे।
विक्की औऱ रवि दोनों एक्-दूसरे कों देखरहे हें।
विक्की जाकेरवि केँ गलेमिल गय़ा हैं कहा थां इतने 2 दिनों सें
रवि नें सांस संभालते हुए, क्याँ करु साली दोस्ती हैं ऐसी आनां पड़ेगा।
विक्की- दोस्त उसदिन केँ लिए सॉरी मुझे तेरेसंग ऐसा बर्ताव नहि करना चाहिए थां।
तभीवहा पऱ ज्योति पहुंचती हैं।
ज्योति- विक्की तुम् ठीक हौ तुम्हें चोट तौ नहि आई,
(विक्की दोस्त यहफिन आँ गई, मेरा दिमाग़ खाने)
विक्की- क्याँ हैं फिन आँ गई मेरामन खाने तेरापास कोई औऱ काम नहि,
ज्योति- मन खाने नहि तेराहाल चाल लेनेआई हूं,
विक्की- हां हम् लोगठीक हें अभि सुभहहाल लेँ चुकी हें नाँ अब निकल,
ज्योति- हांजा रही हूं तुझसे कौनबोल रहा हैं।
विक्की- हांचल निकल एक् तोँ तेरे हि चक्कर मे यहसभी हौ रहा हैं औऱ तूँ मत बोलाकर।
इतनी सि बात मे ज्योति कि आंख मे आंसू आँ जाता हैं वोँ वहां सें भाग केँ चली जाती हैं।
रवि-अबे यह तूने क्याँ किया
विक्की- अबे सुभह सें यह मेरामन खाएजा रही हैं.
रवि-अबे दोस्त तूँ कम सें कम उसका धन्यवाद अदा तौ कर देता,
विक्की- मै क्याँ करु,
रवि- अबे दोस्त कलजब तेरे कों मारने कि प्लानिंग चलरही थि तब ज्योति मेरेपास आई थि साम कों
(अब ज्योति औऱ रवि कि जुवानी मे,
ज्योति- हायराम रवि
रवि- अरे, क्याँ हैं?
ज्योति- वोँ विक्की नहि दिखरहा हैं तुम्हारे संगकोई बात हुईँ हैं क्याँ,
रवि- नहि तुम् काम बताओ निकालो
ज्योति बिस्तार मे सभीरवि कों बता देती हैं औऱ जाने लगती हैं।
रवि- सुनो ज्योति मेरीउसे मेरी थोड़ी खटपट होँ गई औऱ कुछ नहि औऱ शुक्रिया सहायता करने केँ लिए,
ज्योति- तुमने जोँ मेरी सहायता कि थि उसकेआगे यह तौ कुछ भि नहि)
रवि उसकोसभी कुछ विस्तार सें बताता हैं।
विक्की अबे दोस्त यह भारी गलती होँ गई।
रवि-चल कोई नां कल उसको विद्यालय मे सॉरीबोल देना।
विक्की- हां वोँ तौ मगर दोस्त तुँ नाँ होता तोँ आज मेरा तोँ कामलग जाता।
फ़िररवि औऱ विक्की दोनों घऱ कि याँ निकल चुके।
विक्की घऱ पूछता हैं तबसाम हौ चुकी थि।
निधि नें दरवाजा खोला तोँ विक्की मुस्कुराते हुए अंदरआया।
निधि -"आँ गय़ा बेटा। कहा थां इतनीदेर सें वही आवारा केँ संग होगा"
विक्की -“नहि मम्मी थोडा काम थां इसलिये देर हौ गई,
निधि हल्की सि हंसी रुकती हुईँ बोलि,
हाँ मुझे मालूम हैं? चल, पहले फ्रेश होँ जा…मे खानां लगाती हूं। ”
विक्की ऊपर कपड़े बदलने चला गय़ा, औऱ उधर निधि नें खानां लगाया वक़्त अजीब सि घबराहट औऱ एक्साइटमेंट महसूस कररही थि।
आज उसने थोड़ी सादगी सें सेक्सुअल दिखने कां सोचा थां—ब्लाउज कां एक् बटन खोला, पल्लू हल्का सां ढीला.बस इतना कि देखने वाले कों समझ न् आए पर्र नजरहट भि नं पाए।
जब विक्की नीचेआया औऱ टेबल पऱ बैठा, निधि उसके सामने आँ कर बैठी।
पल्लू हल्की सि फ़िसल गय़ा। जैसे अंजाने मे, पऱ शायद अंजाने मे नहि।
औऱ उसकेदूध कि ऊपरसतह औऱ क्लीवेज दिखने लगी।
विक्की कां चेहरा एक् समय केँ लिएरुक सां गय़ा। उसकालंद खड़ा हौ गय़ा औऱ
उसकी आँखों मे हल्की सि हया औऱ हल्की सि लज्जा दोनों दिखाई दिये।
निधि नें उसकी प्रतिक्रिया महसूस कि, पऱ कुछ बोले बिना केवल हल्का सां मुस्कुरा दिया।
थोड़ी देरबाद वोँ खड़ी होकर रसोई मे चली गई।
विक्की नें खानां समाप्त किया औऱ बर्तन लें कर रसोई मे आया।
निधि स्लैब केँ पास खड़ी थि।
जब विक्की उसकेपास आया पीछे सें चिपक गय़ा औऱ उन दोनों केँ बीच कां फासला बहोत कमरह गय़ा- इतना कि निधि कों उसकी गर्म सांस अपने कंधे केँ पास महसूस हुईँ.औऱ विक्की कां लण्ङ सीधे निधि कि गांड सें टकरारहा थां जिसे दोनों लोगफील कररहे थें पर्र बोलाकोई नहि रहा थां।
निधि कों समझने मे अधिक टाइम नहि लगा कि उस लम्हा विक्की क्याँ महसूस कररहा थां.
औऱ शायद वोँ भि उससमय कों रोकना नहि चाहती थि।
फ़िर कोमल कि आवाज़ देने सें दोनों लोगहोश मे आए विक्की वाहा सें बिना रुके अपने कमरेचला गय़ा वही निधि रसोई केँ काम मे लग गई।
रात होने पर्र कोमल पुस्तक पढ़कर आनंद लेती हैं औऱ निधि औऱ विक्की दोनों लोगसाम साम केँ हादसे कों याद करते हें।
विक्की आजखुश थां शायदउसे जल्द निधिमिल जाएगी यहींहाल निधि कां थां। दोनों लोग एक् दूसरे कों यादकर केँ सोगए।
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