❤️🔥❤️🔥बेटे केँ बच्चे कि मम्मी बनी पार्ट 2❤️🔥❤️🔥 – New Episode
Update 11
सिला कों राजू सें बात करने मे बड़ी लज्जा आँ रही थि। सिला कों आज पहलीबार राजू सें बात करने मे एक् अलग हि अहसास हौ रहा थां।
सिला - मन मे मुझे राजू सें आज सें पहले इतनी लज्जा कभी नहि आई। आज किसीबात कररहा थां वोँ बिल्कुल भि लज्जा नहि आँ रही थि उसकोमगर वोँ कामिनी कौन थि जौ मेरे राजू पऱ डोरेडाल रही थि अगर मुझे उसकापता चलाजाए तौ जान सें मारदु मे
सिलामन हि मनउस महिला कों गालीदे रही थि शीला कों उस स्त्री सें जलन हौ रही थि।
सिला भैंस कि तरफ जाती हैं घऱ केँ पीछे। भैंसजोर जोर सें बोलरही थि इसलगरहा थां जैसे अभि अपने खूंटे सें खुलाकर भैंसे केँ पासचली जाएगी।
सिला - भैंस कों पानी पिलाते हुएबस थोड़ी देरओर रुकजा राजूआने वाला हैं फिन तुम्हें लें जाएंगे भैंसे केँ पास। देखो तोँ केसे चक्कर काटरही हैं जैसे अभि भैंसे केँ नीचेआने कों रेडी होँ।
राजू कि तरफ
राजूआज उन दोनो गाड़ियों कों सजधजकर कर देता हैं जौ एक् दमनई जैसीलग रही थि।
पप्पू - वा राजू तुमने तौ कमालकर दियाकौन कह सकता हैं यहवही दोनो गाड़िया हैं
राजू - हा दोस्त मुझे भि विश्वास नहि हौ रहा कि मैनेइन गाड़ियों कों नया जैसाबना दिया हैं।
पप्पू - अरे अपनेकाम पर्र तौ विश्वास कर दोस्त यहसभी तुमने हि किया हैं।
राजू - हा दोस्त यह तौ हैं।
गैरिज मे राजूओर पप्पू केँ अलाव 10 लोगओर काम करते थें। वोँ लोग भि राजू कि बहोत तारीफ कररहे थें।
अबजान लेते हैं कि उसदिन राजूओर सेठ केँ बीच क्याँ बातचित हुई थि
पास्ट ----
सेठ राजू कों दो मोबाइल दिलाता हैं ओर पैसेसेठ अपने सें देता हैं। राजूओर सेठ दुकान सें बाहर् आँ कर
राजू - सेठजी यह आपने क्याँ किया मेरेपास इतने पैसे नहि यह दोनो मोबाइल मेरी औकात सें बाहर् हैं।
सेठ - नहि राजू इनके पैसे तुम्हे नहि देने।
राजू - सेठजी पैसे मे नहि दूंगा तौ कौन देगा
सेठ सीरियस हौ कर - राजू क्याँ मे तुमसे कुछ मांग सकताहु
राजू हैरान हौ कर - मुझ सें। मगरसेठ जी मेरेपास क्याँ हैं आप् कों देने केँ लिए मे तोँ आपकेपास जॉब करताहु
सेठ - तुम् यह बताओ कि मे जौ मांगूंगा वोँ दोगे मुझे
राजूकुछ देर शान्त रहता हैं फिनकुछ सोचकर - ठीक हैं सेठ कि अगर मेरेबस मे हुआ तौ आप् कों जरूर दूंगा।
सेठ - मुझे तुम् चाहिए
राजू - क्याँ मतलबसेठ जी मे कुछ समझा नहि
सेठ - क्याँ तुम् मेरे वारिश बनोगे
राजू हैरान हौ कर - मे ओर आप् कां वारिस केसेबन सकताहु मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा हैं सेठजी खुलकर बोलिए नाँ
सेठ आंखों मे आंसूलिए - सुनो राजू मेरा पूरा परिवार एक् गाड़ी एक्सीडेंट मे मारा गय़ा मेरा एक् हि बेटा थां जिसका नाम रमेश थां। उसका एक् बेटा थां जिसका नाम राजू थां। उस गाड़ी एक्सीडेंट मे मेरासभी कुछ ख़त्म हौ गय़ा मेरा हंसता खेलता परिवार एक् संगमौत कि नींदसो गय़ा।
मेरा पोता राजू मुझे बाबाकहा करता थां। मे उससे बहोत प्रेम करता थां। मगर वोँ भि मुझे छोड़कर चला गय़ा। उसदिन केँ बाद मे अकेला होँ गय़ा। मगरजब मैने तुम्हे देखा तौ मुझेलगा मेरा राजूफिन सें मेरेपास आँ गय़ा हैं। तुम् बिल्कुल मेरे राजू कि तरह हि होँ सच्चे अच्छे दिल केँ साफ।
सेठ इतनाबोल कर रोने लगता हैं
राजूसेठ केँ कंधे पर्र हाथ रखतेहुए - सेठजी जौ हुआ वोँ तोँ मे नहि बदल सकतामगर आप् केँ परिवार केँ संग जोँ हुआमझे उसकादुख हैं मगर आप् कों मुझ सें क्याँ चाहिए
सेठ अपने आंसू पोंछकर - क्याँ तुम् मेरे राजू कि स्थान लोगे
राजू हैरान हौ कर - यह आप् क्याँ बोलरहे हैं मे आपके राजू कि स्थान केसे लें सकताहु
सेठ राजू कों गलेलगा कर रोने लगता हैं
सेठ - नहि तुम् मेरे राजू होँ आज सें तुम्ही मेरा सबकुछ होँ
राजूसेठ कों गले लगाए रखता हैं ओरफिन कुछसोच कर - बाबा
सेठखुश होंकर - थैंक्स राजू तुम् नहि जानते तुम् मेरेलिए क्याँ हौ
राजूसेठ केँ आंसू पोंछकर - आज सें आपका रोनाबंद आपका राजू आपकेपास हैं।
सेठ - तुम् नहि जानते राजू तुमने मुझ पऱ बहोत बड़ा अहसान किया। आज सें तुम् गैरिज मे जॉब नहि करोगे आज सें तुम् गैरिज केँ मालिक होँ
राजू - शांत होँ कर एक् गहरी आवाज़ मे नहि बाबा मे आप् सें यहसभी कुछ नहि लें सकता
सेठ - मगर क्यूं मेरी सारी संपति केँ मालिक आज सें तुम् हि होँ
राजू - नहि सेठजी मुझे मेरेदम पर्र कुछ करना हैं।
सेठखुश होँ कर - ठीक हैं जैसा तुम् बोलो। जब तुम्हारा मन हौ तब तक कामकरो बाकी जोँ मेरा हैं वोँ आज सें तुम्हारा हैं
राजू घड़ी मे समय देखते हुए - बाबा मुझे जानां होगा मेरीबस कां वक्त होँ गय़ा हैं
सेठ - ठीकचलो मे तुम्हे छोड़ देता हूं
सेठ राजू कों वाहन सें बस स्टैंड छोड़ देता हैं जहां पप्पू उसका प्रतीक्षा कररहा थां
Present ---
राजू गैरेज मे कामकर रहा थां मगर उसकेमन मे आज शीलाओर उसकेबीच हुईँ बात कों सोचरहा थां ओरउधर घऱ मे सिला भि खाट पऱ लेटी राजू केँ बारे मे सोचरही थि दोनोमा बेटे जाने अनजाने मे एक् दूसरे केँ लगभग आँ रहे थें जिसका पता दोनों कों नहि थां
राजूसेठ केँ पासजा कर - बाबा मुझेकुछ काम सें बाजार जानां हैं
सेठ - तुम्हे मुझ सें पूछने कि कोई जरूरत नहि हैं राजू तुम्हारा जबमनकरे जहांमन करे तुम् जा सकते हैं आखिर तुम्हारा हि तोँ हैं सभीकुछ
राजूखुश हौ कर - ठीक हैं बाबा
राजू गैरिज मे खड़ी एक् बाइक उठता हैं ओर सीधा एक् दुकान पर्र जाता हैं ओरकुछ सामान लेता हैं
राजू कों समान लेतेघऱ जाने कां वक्त हौ जाता हैं राजू गिरीज आता हैं राजूओर पप्पू दोनों बस स्टैंड कि तरफ निकल पड़ते हैं।
सिलाआज राजू कां बेसब्री सें प्रतीक्षा कररही थि उसकामन बेचैन होँ रहा थां मगर क्यूं यह सिला कों भि नहि पता थां
राजूओर पप्पू अपने देहात केँ बस स्टैंड पर्र उतार जाते हैं ओरघऱ कि तरफआने लगते हैं।
पप्पू - दोस्त राजू तुम्हे एक् बात बतानी थि
राज - हाबोल नाँ क्याँ बात हैं
पप्पू - दोस्त मे सादीकर रहाहु
राजू - खुशी सें क्याँ कहा सादीकर रहा सालेओर मुझेअब बतारहा हैं कौन हैं लड़की
पप्पू - दोस्त वोँ मामाजी जी नें लड़कीदेख रखी हैं उन्होंने मा सें बातकर केँ बातपकी कर दि।
राजू - दोस्त यह तौ अच्छी बात हैं
पप्पू राजू कों ओर भि कुछ बाते बताता हैं जिसेसुन कर राजू टेंशन मे आँ जाता हैं
राजू - तुँ चिंता मतकर मे सभी संभाल लूंगा भरोसा रखमुझ पर्र।
राजू पप्पू सें बातकर करघऱ आँ जाता हैं जहां सिलाउसे घऱ केँ बाहर् हि मिल जाती हैं। राजू कों देखकर शीला केँ चेहरे पर्र मुस्कान आँ जाती हैं
राजू - मा आप् बाहर् क्याँ कर रहीं हौ
शीला - कुछ नहि वोँ तेराहीं प्रतीक्षा कररही थि।
सिलाओर राजू दोनोघऱ केँ अंदर आँ जाते हैं राजू आंगन मे पड़ी। चारपाई पऱ बैठ जाता हैं सिला जल्द सें राजू केँ लिए पानी लेँ करआती हैं
सिला - यह लेँ पानीपी लें।
राजू पानीपी कर गिलास सिला कों देता हैं
राजू - मा मे हाथ मुंहधो करआता हूं।
सिला - ठीक हैं।
राजूउठ कर जाने लगता हैं कि तभी भैंस केँ बोलने कि आवाज़ आती हैं
राजू सिला कि तरफ देखता हैं ओर मुस्करार कर - यह अभि तक बोलरही
सिलाहंस कर - इसे अभि लेँ जानां पड़ेगा नहि तोँ यह सोने नहि देगीआज।
सुभह राजू सें हुई बात सें सिला कों बहोत लज्जा आँ रही थि।
राजू - राजूठीक हैं मे हाथ मुंहधो करआता हु उसकेबाद उसको लें कर चलेंगे भैंसे केँ पास
शीला - ठीक हैं।
राजूहाथ मुंहधो कर आँ जाता हैं ओर सिला कों लेँ करघऱ केँ पीछे जाता हैं जहां भैंस बंधी थि।
राजू - मा मे भैंस कों लें करआगे चलताहु आप् एक् लकड़ी लेँ कर भैंस केँ पीछे चलना ताकि भैंसकही भाग नं जाए
शीला - ठीक हैं राजू
राजू भैंस कों खूंटे सें खोलकर आगे चलने लगताओर सिला राजू केँ पीछे चलने लगती हैं।
भैंस तेजी सें चलरही थि जिससे सिला कि सांसे फूलने लगती हैं
सिला - राजू धीरे-धीरे चलमुझ सें इतनीतेज नहि चला जाता
राजु - मा मे क्याँ करूंयह स्वयं इतनी तेजी सें चलरही हैं लगता हैं इससेओर प्रतीक्षा नहि होताअब। इसबात पऱ राजू थोडा हंस देता हैं
सिलामन मे - सही तौ कहरहा हैं राजू सुभह सें इतकी choot पानीबहा रही हैं साली कमिनी जब भैंसे कां अंदर जाएगा तबपता चलेगा तुम्हारी तरफ।
राजू - क्याँ हुआमा चुप क्यूं होँ गई
सिला - मे क्याँ बोलूं तूँ जोँ बोलरहा हैं वोँ सच हि तौ हैं।
सिलाओर राजू भैंसे वाले केँ घऱ केँ बाहर् आँ जाते हैं।
( Note - देहात मे एक् घऱ मे भैंसा रखा जाता थां। जिसके पास देहात कि सारी भैंसे आती थि )
राजूओर सिला सीधा भैंस कों उसघऱ केँ पीछे केँ जाकर बांध देते हैं जहां भैंसा बंधा थां। राजूघऱ केँ अंदरजा कर
राजू - काकाओ काकाघऱ पऱ हौ क्याँ
घऱ केँ अंदर सें एक् बूढ़ी स्त्री निकलती हैं जिसकी उमर करीब 80 केँ पार थि
राजू - दादीमा काका कान्हा हैं
दादीमा - कौन हौ बेटा तुम् क्याँ काम हैं तुम्हारा काका तौ सहर गय़ा हैं कल सुभह तक आएगा।
राजू - दादीमा मे राजू भैंस लेँ करआए थें।
दादीमा - अच्छा भैंस लें करआए थें तौ बेटा तुम्हारा काका तौ हैं नहि तुम् हि भैंसे कों खोललो ओर बीवाण ( पेट सें करना ) बनालो।
राजू - ठीक हैं काकी
राजूघऱ केँ पीछे जाता हैं जहां सिला बैंस केँ पास खड़ी थि
शीला - क्याँ हुआ तुम्हारे काका नहि आए
राजू - मा वोँ काकासहर गए हैं ओर दादीमा बोलरही हैं कि तुम् हि करलो
शीला - तौ तुमने क्याँ सोचा
राजू - इसमें सोचना क्याँ हैं मा मे कर लूंगा मुझेसभी पता हैं।
शीलामन मे - बोल तौ ऐसेरहा हैं जैसेरोज भैंसों कां मिलन करता होँ।
राजू - क्याँ सोचरही होँ आप्। मे भैंसे कों केँ करआता हु आप् साइड मे खड़े होँ जाओ।
सिला भैंस कों बांधकर साइड मे खड़ी हौ जाती हैं
राजू भैंसे कों खोलकर लाता हैं ओर भैंस केँ पास लें करआता हैं
भैंसा भैंस केँ पास आँ कर भैंस कि choot कों सुंघाने लगता हैं
राजूमजे लेतेहुए
राजू - मायह क्याँ कररहा हैं
शीलासमझ जाती हैं कि राजू उसकेमजे लेँ रहा हैं।
सिला कों बहोत लज्जा आँ रही थि अपने बेटे केँ सामने भैंसों कों मिलन देख्ना।
सिला शर्मा कर - मुझे नहि पता तुँ चुपचाप अपनाकाम कर
भैंस मूतने लगती हैं जिसे भैंसा अपनीजीभ सें चाटने लगता हैं। जिसेदेख राजू कां लंड हरकत मे आँ जाता हैं
( भैंस कों सांड लिखूंगा कन्फ्यूजन नां होँ )
सांड अपना land बाहर् निकल लेता हैं जिससे सांड केँ land सें पानी निकलने लगता हैं।
सांड भैंस कि choot कों देखकर पागल होँ जाता हैं ओर भैंस केँ ऊपरचढ़ जाता हैं जिससे land भैंस कि choot मे नहि जा पाता।
शीलायह देखकर मन मे - अभि बोल तोँ ऐसेरहा थां जैसे इसकेलिए यहसभी बच्चों कों खेल हौ।
सिला - भैंस कि वोँ। हाथ सें फैला लेँ
राजूसमझ जाता हैं हैं कि शीला क्याँ कहरही हैं।
राजू - क्याँ फैलालू
सिला - मन मे लगता हैं मुझे हि करना होगा।
सिला शर्माते हुएआती हैं ओर भैंस कि choot अपने दोनों हाथों सें लेती हैं
राजू - इसकाकुछ नाम भि होगामा
सिला - तूँ नां मुझ सें मार खाएगा सांड पऱ ध्यान दे अबकीबार चुकना मत
सिला कों बहोत लज्जा आँ रही थि अपने बेटे केँ सामने भैंस कि choot कों फैलाकर खड़ी हैं।
सांड भैंस कि choot कों अपनीजीभ सें चाटता जिससे सांड मस्त होँ जाता हैं यहसभी देखकर शीला कि भि सांसे भरी होने लगती हैं।
राजू सिला केँ चूचेऊपर नीचे होतादेख रहा थां। जिससे राजू कां land खड़ा हौ जाता हैं।
सांड अबकीबार सीधा भैंस पर्र चढ़ जाता हैं ओर राजू सांड कां land कों अपनेहाथ सें भैंस कि choot मे डाल देता हैं ओरइसी बीच सिलाओर राजू कि आँखें आपस मे मिलती जिससे सिला कों लज्जा आँ जाती हैं सांड भैंस कि choot मे धक्के मारने लगता हैं।
सांडकुछ धक्के मारकर नीचेउतर जाता हैं फिनकुछ देरबाद सांडफिन सें भैंस पर्र चढ़ता हैं ओर अपनारस भैंस कि choot मे छोड़ देता हैं ओरजब सांड कां लैंड भैंस कि choot सें बाहर् आता हैं तोँ कुछरस कि बूंदे राजू केँ हाथ पऱ लग जाती हैं जिसे सिलादेख लेती हैं। यहसभी देखकर शीला कों भि पसीना आने लगता हैं
भैंस कां जिस्म भि ढीला पड़ने लगता हैं भैंस भि पूरीतरह सें संतुष्ट हौ चुकी थि।
राजू - मा आप् भैंस कों खोलोतब तक मे सांड कों बांधकर आताहु
सिलाठीक हैं
राजू सांड कों बांधकर आता हैं ओर भैंस कों पकड़कर घऱ कि तरफ जाने लगता हैं
aj के leye etna hi milte h agle update mai। kahani aachi lag rahi h too comment krr दिया karo bhaiyo.
bhay abh raju ko saand kaa role de dena n maa ko bdde thanno wali bhains bna dena pls. or bhains (maa ) ko gaibann krwana saand (raju ) say, moot bi pilana bhains kee tra maa kaa raju saand ko
Raju apni mummy sila ko seth ji say mummy k roop mi naa milaye ,balki apni masooq k roop mi aur seth hi unki shaadi kee baat kare
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Update 12
राजूओर शीला दोनो भैंस कां सांड केँ संग मिलन करवाकर घऱ कि ओरजारहे थें राजू भैंस कि रस्सी पकड़आगे चलरहा थां ओर सिला भैंस केँ पीछे
राजू पीछे कि तरफदेख कर - देखमा अब शांत हौ गई नाँ यह केसे धीरे-धीरे चलरही हैं।
सिला - हाअब तौ चलेगी हि इसे जोँ चाहिए वोँ मिल जोँ गय़ा हैं।
राजू - मे कहरहा थां नां मा एक् बार सांड केँ पास जाएगी तोँ बिल्कुल शांत हौ जाएगी।
सिला - तूँ इनसभी बातों कों छोड़रात बहोत होँ गई हैं जल्दघऱ चल।
राजू भि सिला कि बातसमझ जाता हैं ओर जल्द जल्दघऱ कि ओर जाने लगता हैं
सिला भैंस केँ पीछेचल रही थि कों कि मन हि मनकुछ बडबडा रही थि।
शीलामन मे - देखो तोँ केसे सांड कां लेने केँ बाद आहिस्ता चलरही हैं साली कि choot सें अभि तक पानीटपक रहा हैं
जैसे भैंसआगे चलरही थि सांड कां पानी बैंस कि choot सें निकलरहा थां
यहसभी देखकर सिला कि भि choot गीली होँ गई थि जिससे सिला कि choot कां पानी सिला कि जांघों तक आँ गय़ा थां जिससे सिला कों एक् अगल हि नशा चढ़ने लगता हैं।।।
राजूओर सिला दोनोघऱ पहुंच जाते हैं राजू सीधाघऱ केँ पीछे भैंस कों बांधने चला जाता हैं ओर सिला जल्द सें बाथरूम मे घुस जाती हैं सिला जल्द सें अपनी साड़ी ऊपर करती हैं तोँ सिला कां खजाना दिखाई देता हैं बिना बालों केँ एक् दमसाफ
सिला चढ़ी नहि पहनती थि। सिला केँ पास एक् जोड़ी हि bara chadi थें जौ कभी सादी याँ किसी फंक्शन मे जानां होता थां तभी पहनती थि। सिला अपनी साड़ी ऊपर करती हैं ओरजोर सें मूतने लगती हैं। ओरइसी केँ संग एक् तीखी सीटी केँ आवाज़ आती जिसे बाहर् खड़ा राजूसुन लेता हैं।
सिला मूतने केँ बाद अपनी choot कि फांकों कों फैलाकर उसमें लगामूट बाहर् निकालने लगती हैं
मूतने केँ बाद सिला पानी सें अपनी choot साफ करती हैं ओर साड़ी सहीकर केँ बाथरूम सें बाहर् आँ जाती हैं।
सिला जैसे हि बाहर् आती हैं तोँ सामने उसे राजू खड़ा दिखाई देता। सिला एक् समय राजू केँ चेहरे कों देखती हैं तोँ उसे राजू केँ चेहरे पऱ नाराजगी दिखाई देती हैं मगरकिस बात कि इसबात कां पता सिला कों भि नहि होता। राजू बिनापलक झुकाए शीला केँ चेहरे कों देखता जारहा थां।
शीला राजू कों पूछने हि वाली थि कि क्याँ बात हुईँ उससे पहले हि राजू शीला कों साइडकर बाथरूम मे चला गय़ा
शीला - यह राजू कों क्याँ हुआ नाराज हैं क्याँ मुझ सें मगर मैने तोँ ऐसाकुछ किया भि नहि।
शीलाओर कुछ भि सहनकर सकती थि मगर राजू कि नाराजगी नहि। शीला राजू सें बहोत प्रेम करती थि जब भि राजू नाराज होँ जाता थां तोँ शीला कों बहोत बुरा लगता थां कि उसकीवजह सें उसका बेटा नाराज हौ गय़ा। शीला राजू पऱ क्रोध करती थि मगरकभी राजू कों मारा नहि थि राजू सें प्रेम जौ करती थि जिसबात कां पता राजू कों भि हैं कि सिलाउसे कितना प्रेम करती हैं।
शीला अपनेओर राजू केँ लिए खानां लगाने लगती हैं ओरमन हि मन सोचने लगती हैं कि ऐसा क्याँ किया उसने।
सिलामन हि मन सोचेजा रही थि कि तब तक राजूनहा कर आँ जाता हैं ओर खानां खानेबैठ जाता हैं।
शीला नें अपनाओर राजू कां खानां आज एक् हि थाली मे लगाया थां।
शीला थाली लेँ कर राजू केँ पासबैठ जाती हैं। राजूसभी समझरहा थां कि उसकी मम्मी ऐसा क्यूं कररही हैं।
राजू - मेरी थालीकहा हैं
शीला तिरछी नजरों सें राजू कों देखते हुए - क्यूं मेरेसंग नहि खा सकता क्याँ
राजू - चुपचाप खाने कां पहलाकोर शीला कों खिलाता हैं जिसे शीला बड़ेचाव सें खाती हैं।
राजू अगलाकोर खाने लगता हैं कि
शीला - मुझेओर खानां हैं
राजू दूसरा कोर भि शीला कों खिला देता हैं
राजू अगलाकोर खाता हैं कि शीलाफिन सें वही कहती हैं
राजू - दोबार खिला तौ दियाआओ कों आप् कोई बच्ची तोँ हैं नहि कि मे अपनेहाथ सें खिलाऊं
शीला - मुझे नहि पता मुझे तुम्हारे हाथ सें खानां हैं नहि तोँ मे खानां नहि खाऊ gi
राजूसभी समझरहा थां कि शीलाउसे मानने केँ लिएऐसा कररही हैं।
जब भि राजू नाराज होता थां तौ शीलाऐसा हि करती थि। कुछकोर खिलाने केँ बाद शीला भि राजू कों अपनेहाथ सें खिलने लगती हैं।
दोनोमा बेटे खानां खा लेते हैं शीला किचन कां ओर बाकी सबकाम करने लगती हैं ओर राजू पलंग केँ करछत पर्र चला जाता हैं।
शीला जल्द जल्द अपनाकाम निपटती हैं ओरछत पर्र चली जाती हैं जहां राजू दूसरी तरफ करवटलिए सोया थां।
सिला राजू केँ बगल मे लेट जाती हैं ओर राजू कों देखने लगती हैं। जब राजूकुछ समय तक कुछ नहि बोलता तोँ
शीला - लला सॉरीमाफ करदे मुझे
राजू शीला कि बात कां कोई जवाब नहि देताओर वैसे हि लेता रहता हैं
शीला राजू कों पीछे सें बांहों मे भर लेती हैं
सिलानम आवाज़ मे - लला सॉरी नाँ
राजू करवट बदलते हुए - आप् कों पता हैं आप् नें क्याँ किया हैं
शीला - नहि मुझे नहि पतामगर कुछ तोँ किया हि जिससे तुँ नाराज हैं बता नाँ क्याँ किया हैं मैने।
राजू - बतादूं
शीला - बोल नाँ क्याँ किया हैं
राजू सिला कि आंखों मे देखकर
राजू - आप् जब mut रही थि तब आपके mut कि कितनी तेज सीटीबज रही थि अगरकोई सुन लेता तोँ क्याँ सोचता आप् केँ बारे मे।
राजू केँ ऐसे बोलने सें सिला लज्जा सें लाल होँ जाती हैं
राजू - आप् कों पता हैं मुझे कितना बुरालगा थां अगरकोई सुन लेता तोँ यही कहता नां कि राजू कि.
राजूआगे कुछ नहि बोलता मगर सिलासमझ जाती हैं कि राजू क्याँ कहना चाहता हैं।
सिला राजू केँ ऊपर आँ कर राजू केँ सीने सें लग जाती हैं
सिला - मुझेमाफ करदेलला। मुझे ध्यान रखना चाहिए थां। आगे सें ऐसे गलतीकभी नहि होगी
राजू - ठीक हैं माफ कियामगर आप् कों मेरी एक् शर्त माननी पड़ेगी।
सिला राजू कि तरफदेख कर - कैसी शर्त
राजू अपनेखाट मे सें एक् थैली निकलता हैं ओर सिला कों देता हैं
सिला - इसमें क्याँ हैं
राजू - इसेपहन केँ आइए।
सिला - मगर हैं क्याँ इस मे बता तौ सही
राजू - सिला कों गौर सें देखता
शीला - हंसकर मेरा राजा लें करआया हैं तौ कुछ तौ खास होगा
सिलाउसे लेँ कर नीचेबने कमरे मे चली जाती हैं ओर राजू सिला कां बेसब्री सें प्रतीक्षा करने लगता हैं
कुछसमय बाद सिलाछत केँ गेट पर्र खड़ी थि जिसेदेख राजू कि आँखें फटी कि फटीरह जाती हैं
राजू शीला केँ लिए मेक्सी केँ करआया थां ताकिरात कों सिला धीरे-धीरे सोसके
आज केँ लिए इतना हि मिलते हें अगलेभाग मे।
Lawabjab update bhay ayese hi dhere pyaar badana mummy bete m aur please shaadi jarur karna mummy ko apne bete k bache ko janam dete huye bi dhikna pls bro .
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Update 13
राजू अपनी मम्मी केँ लिए मेक्सी केँ करआता थां ताकिरात कों सोते वक्त सिला कों आराममिल सके।
राजू अपनीफटी आंखों सें शीला कों देखेजा रहा थां शीलाइस वक्त देहात कि ठंडीरात ओर चांद कि रोशनी मे कयामत लगरही थि सिला कों उसतरह देखकर राजू केँ मुंह मे पानी आँ जाता हैं
सिलाजब यह देखती हैं राजूउसे ऐसेदेख रहा हैं तोँ सिला लज्जा सें लाल होँ जाती हैं
शीला - राजू केँ पास आँ करअबदेख लिया हौ तौ अपना मुंहबंद कर
राजू - अपनेहोस मे आतेहुए वामा क्याँ लगरही हौ आप् इस नाईटी मे
राजू सें अपनी तारीफ सुनकर शीला कों अच्छा लगता हैं।
सिला राजू केँ पास आँ करबैठ जाती हैं नाइट गाउन मे सिला कों अजीब सां फील हौ रहा थां जैसे उसनेकुछ पहना हि नाँ हौ सिला अंदर सें बिल्कुल नंगी थि जिसके कारण सिला केँ चलने सें सिला केँ बब्बू ऊपर नीचे हौ रहे थें
राजू - कैसालगा मेरा उपहार
शीला - उपहार तोँ अच्छा हैं मगर मुझे इसमें बड़ा अजीब सां लगरहा हैं।
राजूकुछ नहि होगामा आप् रोजाना नहि पहनती नाँ तब आप् कों ऐसा लगता हैं जब आप् रोजाना पहने लगोगी तौ सभीसही हौ जाएगा।
सिला राजू कि तरफ सीरियस होँ कर देखती हैं जिससे राजूडर जाता हैं।
राजू - यहमा मुझेऐसे क्यूं देखरही हैं।
राजू - क्याँ हुआ आप् मुझेऐसे क्यूं देखरही होँ।
शीला - तेरा किसी लड़की केँ संग चक्कर चलरहा हैं नां
राजू हैरान होँ कर - क्याँ बोलरही होँ मा। मैने सुभह आप् कों बताया नां कि मेरा किसी केँ संगकोई चक्कर नहि चलरहा हैं
शीला आंखों मे आंसूलिए - तूँ झूठबोल रहा हैं।
राजू - अपना माथा पकड़ते हुएमा मेराऐसा कुछ नहि चलरहा हैं।
सिला राजू कां हाथ अपनेसर पर्र रखकर - अबबोल कि तेरेदिल मे कोई नहि हैं
राजू - मा मे आप् कि शपथ लेता हि कि आप् केँ अलाव मेरेदिल मे कोई नहि हैं
सिला कों अबपका विश्वास हौ गय़ा हैं कि राजू कां किसी केँ संगकोई चक्कर नहि चलरहा हैं।
राजू - क्याँ हुआ आप् कों आप् अचानक सें ऐसीबात क्यूं कररही हैं
शीला - वोँ शंभू हैं नाँ जोँ तेरेसंग पड़ता थां वोँ भि तेरीतरह सहर मे काम करता हैं। उसनेआज किसी लड़की सें सादीकर केँ घऱ केँ आयाओर उस लड़की नें उसकी मम्मी कों घऱ सें बाहर् निकाल दिया। तौ मुझेलगा कि.
राजू - तौ आप् कों लगा कि मे भि ऐसा हि करूंगा हैं नाँ
शीला थोडा डर जाती हैं कि कही राजूफिन सें नाराज नाँ जोँ जाए
शीला - नहि वोँ मैने तोँ ऐसे हि पूछ लिया।
राजू - मा मे आप् सें प्रेम करताहु आप् कों छोड़कर कहा जाऊंगा ओर आप् कां लाल तोँ वैसे भि आप् केँ खूबसूरती कां दीवाना हैं
शीला राजू सें ऐसीबात सुनकर लज्जा सें लाल हौ जाती हैं
शीला - हायहबात तौ हैं
राजू सिला कों बैड पऱ लीटा देता हैं ओर स्वयं सिला केँ ऊपर आँ जाता हैं
राजू केँ ऐसा करने सें सिला कि सांसे तेज होँ जाती हि
राजू शीला कि आंखों मे देखते हुए - आप् इनसभी बातों कों। जोड़िए आप् यह बताइए कि आज दोपहर कों जब आपने मोबाइल किया थां तौ आप् इतना क्रोध क्यूं होँ गई थि
शीला कों यादआता हैं कि दोपहर कों केसेउस महिला कों गालीदे रही थि
शीला - वोँ वोँ स्त्री ठीक नहि थि केसे तुम्हे अपने झांसे मे लें रही थि।
राजू - झांसे मे कहा लें रही थि वोँ तोँ बस इतनाबोल रही थि कि कभीसमय मिले तौ मेरेघऱ पऱ आनां।
शीला - राजू कों नाराजगी भरी नजरों सें देखती हुईँ - अच्छा इसका मतलब वोँ महिला तुम्हे अच्छी लगी।
राजू - हा अच्छी तौ थि हसीन भि थि।
राजू केँ मुंह सें किसी दूसरी स्त्री कि तारीफ सुन सिला कों जलन होने लगती हैं
सिला राजू कों अपनेऊपर सें हटाते हुए - तौ जा नाँ उस केँ पास मेरेपास क्याँ कररहा हैं।
राजूमन मे - यही होता हैं किसी दूसरी महिला कि तारीफ कर तोँ यही होता हैं फिन सामने चाहेकोई भि होँ।
राजू सिला कों पीछे सें अपनी बांहों मे भरतेहुए
राजू - मगर मेरी माँ केँ सामने कोईकुछ नहि हैं मेरी मम्मी दुनिया कि सबसे खूबसूत मा हैं।
सिला कों अपनी तारीफ अच्छी लगती हैं मगर राजू कि मीठी बातों मे नहि आती।
शीला - मुझेपता हैं तूँ मेरी तारीफ क्यूं कररहा हैं मे नहि आने वाली तेरीइन झूठी बातों मे।
राजू - उठकरबैठ जाता हैं - आप् कों उस महिला सें जलन होँ रही हैं नाँ
शीलामन हि मन हैरान होती हैं कि इसे केसेपता चला
शीला - मुझे क्यूं होगीजलन। मे कोई तेरी लुगाई थोड़ी हु जोँ मुझेजलन होगी।
शीलाबोल तौ हैं मगरजब सिला कों अहसास होता कि वोँ बात हि बात मे क्याँ बोल गई हैं
राजू हैरानी सें सिला कों देखेजा रहा थां कि सिला नें क्याँ बोल दिया
सिला जल्द सें अपनीबात कों संभाल तेहुए
सिला - नहि वोँ मेरा मतलब थां कि जलन तेरी लुगाई कों होनी चाहिए मुझे क्यूं मे तोँ तेरी माँ।
राजूजब देखता हैं कि शीला अपनीबात कों संभाल नहि पारही हैं तोँ राजू कों मन हि मन हंसी आँ रही थि। सिला अपनीबात सें लज्जा सें लाल हौ जाती हैं जिसेदेख राजूबात बदल देता हैं
राजू सिला कों बांहों मे भरकर - सो जाइए
कोईबात नहि ऐसा आप् नें कुछ नहि कहा कि आप् कों शर्मिंदा होने बड़े
राजू सिला कों बांहों मे भरकर माथे पऱ चूमी देता हैं
दोनोमा बेटे आहिस्ता सो जाते हैं आने जीवन सें अंजान। कल कां सूरज राजूओर शीला कि जीवन बदलने वाला थां
Chote update के leye sorry bhaiyo। Agle update mai kahani kaa tarning point h। Vo agle update mai ptaa chlega। Apna payar aur sport Banaae rakhna bhaiyo.
❤️🔥❤️🔥बेटे केँ बच्चे कि मम्मी बनी पार्ट 2❤️🔥❤️🔥 - Next part miss mat karna
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