मे पागल अपने बेटे केँ लिए – New Episode
Update-20
सुभह हौ चुकी थि।
शुभम कि नींद खुली, उसने देखा रेशमा कों जोँ अभि भि बेड केँ पाय सें बँधी हैं। “ जैसे एक् भैस याँ गाय एक् खूटे सें बँधी होती हैं “, उसकासर शुभम केँ पांव पे रखा हैं।
रेशमा कां सारा मेकअप बिगड़ चुका थां। उसके आँखो कां काजलफेल चुका थां, वोँ पूरी नंगी धड़ंगी बदन मे एक् तिनका तक नहि, उसकेगले मे बांधा वोँ पट्टा सुभम कों यहसभी देख केँ बड़ा सकूँ पहुचा कि उसके इशारों पे नाचने वाली पालतू कुत्तिया कि तलाशअब समाप्त हुइ
शुभम् नें अपने पांव कों थोडा झटका तौ रेशमा जाग गई
क.क…क्याँ हुआ? “मालिक कुछ चाहिए आपको”?
शुभम मुस्कुराते हुए रेशमा मेरीजान मैंने तेरेसंग कलरात बहोत बेरहमी वहसी दरिंदा बन गय़ा थां, मुझे क्षमा करदे रेशमा
रेशमा - मालिक आपका दि हुई दुत्कार भि मेरेलिए प्रशंसा सें कम नहि, मे पहले हि बता चुकी हूं “हम् पाकीजा ख़ातुनो केँ अंदर एक् पालतू वैश्या छिपी होती हैं“ जिसे आप् जैसा हि मर्द बाहर् निकाल सकता हैं, हम् मुस्लिम मे जितनी भि औरते होती हैं बाहर् दिखती बहोत संस्कारी हैं मगर भेतर सें उतनी घिनौनी औऱ कमीनी होती हैं, बुर्खा केँ भीतर एक् रंडीचल रही होती हैं मार्ग पे
मालिक आपने मेरे भीतर छिनार महिला कों आजादकर दिया हैं, आज सें अभि सें इसबदन केँ मालिक आप् हैं, इसबदन आप् जैसा चाहो वैसे इस्तेमाल करो
शुभम् - (खुस होतेहुए )चल बेहन कि लौड़ी उठजा मुझे बहोत ज़ोर कि पेशाब आँ रही हैं
रेशमा - “ मालिक जल्द उठिए “ रेशमा नें अपना पट्टा बेड केँ पाय सें खोला औऱ पट्टे कों सुभम केँ हाथ मे थमा दिया
शुभम - सबाश! “मेरी रण्डी “ अब तुम् असल मे मेरी पल्टी कुत्तियाँ होँ मे तुझसे विवाह भि करूँगा मगर तुँ घऱ मे मेरी रण्डी होगी
रेशमा - जी मालिक
सुभम रेशमा केँ पट्टे कों हाथ थामे बाथरूम कि औऱ जानेलगा, “रेशमा पीछे पीछे एक् पालतू कुत्तिया केँ माफिक अपने घुटनों केँ बलजीभ निकाल केँ चलनेलगी संगलार भि टपकरही थि “ (औऱ हाफ भि रही थि )
बाथरूम मे सुभम
चल रंडी अपना मुंहखोल
रेशमा नें अपना मुंह खोला औऱ शुभम अपना
“पीलामूत “
रेशमा केँ मुंह मे धार मारने लगा। रेशमा गटगट (गड़गड़…गड़.) करके पीनेलगी
सुभम - रेशमा मेरीजान एक् बूँद भि बर्बाद मत करनायह तेरे होने वाले शौहर कां अमृत हैं।
“जितना पिएगी उतना जियेगी “
रेशमा नें हामीभरी, थोडा मूत पीकेनाक सिकोड़ने लगी,
बोलने लगी मालिक सुभह कां पेशाब बहोत गंदा महकता हैं, “यह पीलाझाग वाला पेशाब “, मगर मेरे शहजादे केँ खातिर यह भि पी लुंगी
शुभम् - रेशमा हरामज़ादी अपने मुँह मे थोडा पेशाब भर केँ कुल्ला कर
रेशमा - बिल्कुल मालिक आप् बसकहो,
“ हुकुम दो मुझे“अगर मे नाँ मानुधर दो खींच केँ एक् गाल पे, “महिला जात कों मारपीट केँ हि रखना चाहिए“ तभी वोँ काबू मे रहती हैं वरना बेलगाम होँ जाती हैं, बाबू!
“आँ… डालो अपना गंदा पीला पेशाब मेरा मुंह मे “
शुभम्- सुसु….अहह रेशमा मज़ा…ओह…मज़ा आँ रहा मादरचोद कहीं कि पी लेँ… बेहन कि लोमड़ी
रेशमा नें खूब सारा पेशाब मुंह मे भर केँ इकट्ठा कर लिया औऱ शुभम कों दिखाने लगी ”देखो नाँ बाबू!”
गड़गड़ करके पीले पेशाब केँ पानी कां झाग अपने मुंह मे हि बननेलगी।
शुभम् देख केँ पागलहुआ जारहा थां। रेशमा वो पेशाब गटक गायी, हम्म…आनंद आँ गय़ा मालिक! “ बाक़ी कां बचा पेशाब जल्द-जल्द औऱ पिलादो “
“वोँ भड़वा आता हि होगा”?
शुभम् नें अपना लन्ड मुह मे घुसेड़ दिया औऱ कामुक आवाजे निकालने लगा “अहह…रेशमा रंडी तूने मुझे जीतेजी जन्नत कां एहसास करा दिया “लेँ बेहनचोद पीजा पीजा…, सारा कां सारा पीजा!, रेशमा कों सांस लेने मे परेशानी हौ रही थि, “उसके खूबसूरत हाथ जिनमे रेडनेल पेंटलगा थां, “सुभम केँ चूतड़ मे आँ लगे औऱ कस लिया “
“ताकि सुभम रेशमा पे रहम नाँ करे “
सुभम घंटारहम करता, उसने औऱ धकेल दियागले केँ अंत तक औऱ लगा मूतने तेजधार सें
शुभम कि पतलीमूत कि धार रेशमा केँ गले कों चोटमार रही थि, “सांस अटकने लगी थि रेशमा कि “ मगर सुभम माना नहि जब तक उसका पेशाब निकल नहि गय़ा रेशमा नें मुंह मे हि रखेरहा। आपको कैसा लगेगा आपका लन्ड एक् ऐसे मांस सें भरे स्थान मे लन्ड केँ अंत तक घुसाहुआ हैं कितना मजामयी होगा नां वैसा हि फील शुभम् कों हौ रहा थां
शुभम-बस बस रेशमा रंडी थोडा औऱ अहह…अहह…आहह-आहह…। अह…
बस होँ गय़ा
वो रेशमा कि गले कि पाइपऊपर नीचेफूल रही थि पिचकरही थि जिससे पता लगता हैं कि पेशाब वोँ सीधापेट मे जारहा थां।
“शुभम् कि झाँटे बहोत लंबी हौ रखी थि “
रेशमा केँ नाक मे वोँ झाँटे झुरझुरन पैदाकर रही थि वोँ मर्दना ख़ुशबू काली घुंडी दार झाँटे
सारा पेशाब पिलाने केँ बादमूत कि एक् एक् बूँद रेशमा केँ मुंह मे उगलने केँ बाद हि सुभम नें अपना लूड़ा बाहर् निकाला, ” लौड़ा पूरा गीला थां रेशमा केँ थूक सें “
रेशमा कि हालत पतली हौ चुकी थि
सुभम - रेशमा मेरा बच्चा क्याँ हुआ?
रेशमा ख़स्ते हुए खोखो…खोक…आनंद आँ गय़ा, खरा थां मगर मजेदार थां, बाबू !
औऱ हसनेलगी शुभम् नें रेशमा कां पट्टा खोला दिया, रेशमा कों खड़ा करके अपने सीने सें चिपका लिया। रेशमा केँ गोल मटोल बूब्स शुभम् केँ सीने मे गुलगुला सां लगनेलगा,
ओह! रेशमा मेरीजान वोँ तुम् हि जोँ मेरे सारे ख़्वाब पूरी करेगी। मेरा शोना! करोगी नाँ ?
रेशमा - अबइस कनीज कि क्याँ मजाल जोँ अपने मालिक केँ कहे कों टालदे “ आप् हुकुम करो जनाबयह रेशमा आपके लन्ड केँ नीचे रहना चाहती हैं,
शुभम - मेरीजान बस जल्द सें जल्द तलाक लेलो औऱ मेरेघऱ कि बहुबन केँ आँ जाओ
रेशमा - जी हुजूर (, हस्ते हुए )
“वैसे आपको बदबू नहि आँ रही आपके पेशाब कि जोँ अभि मैंने पिया हैं“
शुभम् - “शपथ सें बाबू बहोत बदबूमार रहा हैं तुँ पी केसे गायी“?
रेशमा - शोना!
शुभम् - “हम्मबोल नाँ”
रेशमा - “मे बोलरही थि कि मे आपको नहलादु क्याँ ? कहो नां ? पूरेबदन कों मल-मल केँ साफ़ करूँगी “
शुभम् - नहि रेशमा मुझेलेट होँ रहा हैं औऱ कभी, मगर तूँ नहा लें जाकेजा, औऱ सॉरी बच्चा यह तेरेदूध कों कुछ जायदा जोड़ सें खींच दिया, ”जरा इधरदेख मेरी तरफ़“ औऱ यह तेरेगले मे जौ निशान हैं इन्हें केसे छुपाएगी अपने पति सें
रेशमा- मुझेउस भड़वे सें कुछ नहि छिपना जान!“फिन हि मेकअप कर लूंगी “
शुभम् औऱ रेशमा कां एक् डीपकिस होता हैं, औऱ शुभम् निकल गय़ा अपनेघऱ कि ओर
इधर रेशमा खयालों मे चली गई,
शीशे केँ सामने खड़ी रेशमा नें अपनी उंगलियों सें उन नीले निशानों कों छुआ जोँ शुभम कि 'दरिंदगी' औऱ प्रेम कि गवाही देरहे थें। उसके शरीर पर्र स्थान-स्थान दाँतों केँ निशान औऱ उंगलियों कि छापऐसी लगरही थि मानो किसी कलाकार नें कोरे कागज़ पऱ अपनीसनक उकेर दि हौ।
उसने अपनेगले केँ उस पट्टे कों आइने मे देखा औऱ एक् सिहरन उसके पूरेबदन मे दौड़ गई। उसने बुदबुदाते हुएकहा, "यह निशान नहि, यह मेरे मालिक कि मुहर हैं। मे अब आज़ाद नहि, मे बंध चुकी हूं उस ज़ंजीर सें जिसे प्रेम औऱ गुलामी कहते हें। "
उसने अपनी अलमारी सें एक् झीना सां रेशमी गाउन निकाला, मगरउसे पहनने सें पहले उसने एक् बारफिन बाथरूम कि ओर देखा। वहा कि हवा मे अभि भि शुभम केँ बदन कि सोंधी खुशबू औऱ उस तीखे पेशाब कि महक घुली हुई थि, जिसे उसने अभि-अभि अमृत समझकर पिया थां।
गर्म औऱ पीलातरल उसकेगले केँ नीचे उतरा थां। उस टाइम कि घुटनउसे एक् अजीब सां चैनदे रही थि। उसने सोचा, "शौहर तोँ केवलहक जमाता हैं, मगर मालिक रूह कों नंगाकर देता हैं। शुभम नें मेरे भीतर कि उस बदचलन स्त्री कों जगा दिया हैं जोँ सदियों सें बुर्के केँ भीतरदम तोड़रही थि। "
वो मन हि मन अपनी बेटी केँ बारे मे सोचने लगी। "मेरी बेटी। क्याँ वोँ भि मेरीतरह अंदर सें प्यासी होगी?अगर मे उसे मालिक केँ कदमों मे डालदूँ, तौ क्याँ यह मेरा सबसे बड़ा तोहफा नहि होगा? एक् कुंवारी, सील-पैक कली। मालिक उसे मसलेंगे, उसे पालतू बनाएंगे, औऱ हम् मम्मी-बेटी मिलकर उनके पलंग कि शोभा बढ़ाएंगे। " इस ख्याल सिर्फ सें रेशमा कि जांघों केँ बीच बुर मे एक् अजीब सि गीलापन महसूस होने लगा। चिपचिपा रसफिन सें बहाने लगा, (बुर कों मुट्ठी सें भिचते हुए ) करमजली तुम्हारी तरफ संतोस नहि मिला नाँ अगलीबार देख तुँ
रेशमा नें तयकर लिया थां कि अबउसे उस 'भड़वे' (अपने शौहर) केँ पास वापस नहि जानां हैं। उसे तलाक कि आग सुलझानी थि, मगर उससे पहलेउसे शुभम कि 'मालकिन' यानी सुमन केँ सामने स्वयं कों पेश करना थां।
"मे सुमन कि पेर कि जूती बनकर रहूँगी। वोँ मेरी बड़ी मालकिन होंगी औऱ मे उनकी दासी। हम् दोनों मिलकर मालिक कि सेवा करेंगे। वोँ उन्हें प्रेम देंगी औऱ मे उन्हें अपनीदेह कि वोँ हर गंदगी औऱ ज़िल्लत दूँगी जिसे एक् शरीफ पत्नि कभी नहि दे सकती। "
उसने बाथरूम मे जाकर शावर चालू किया। पानी कि बूंदें जब उसके सुन्न पड़े शरीर पऱ गिरीं, तोँ उसे शुभम केँ हाथों कि छुअनयाद आनेलगी। उसने अपने हाथों सें अपने उभारों कों सहलाया औऱ जोर सें सिसकते हुएकहा, "मालिक। जल्द वापस आइये। आपकीयह कुत्तिया फिन सें प्यासी हैं। मुझेफिन सें उस ज़िल्लत कि गर्त मे गिरा दीजिये जहाँ मात्र आपकानाम हौ। "
जैसे हि शुभम नें घऱ केँ भीतरकदम रखा, उसे वो चिर-परिचित खुशबू महकी जोँ उसकी मम्मी सुमन केँ हाथों केँ बने खाने कि थि। मगरआज माहौल मे केवल ममता नहि, बल्कि एक् गहरी कामुक साजिश कि महक थि।
सुमन, जोँ किचन मे थि, जैसे हि उसने दरवाजे कि आहट सुनी, वो करीब दौड़ती हुई बाहर् आई। उसके चेहरे पऱ एक् कुटिल मुस्कान थि—वही मुस्कान जोँ उसने औऱ रेशमा नें मिलकर इस पूरेखेल कों रचतेसमय साझा कि थि।
सुमन नें बिना एक् लम्हा गंवाए शुभम केँ सामने घुटनों केँ बल बैठकर उसके जूते केँ फीते खोलना शुरुआत कर दिया। ये एक् मां कां नहि, बल्कि उस साज़िश कि एक् भागीदार कां समर्पण थां। उसनेऊपर देखते हुए अपनी आँखें मटकाईं औऱ धीमी आवाज़ मे पूछा:
"आँ गए आप् ? बोलो, कैसीरही उस मुस्लिम कुतिया कि रात? क्याँ उसने आपकेहर हुक्म कों सजदे मे कबूल किया?"
शुभम नें एक् ठंडीअहह भरी औऱ सुमन केँ सिर पर्र हाथ फेरते हुए हँसकर बोला:
"बाबू!, क्याँ बताऊँ! वो रांड़ तौ सच मे मेरी पालतू कुतिया बन गई हैं। आज तौ उसने मेरा सारा कां सारा गर्म 'अमृत' (पेशाब) गटक लिया औऱ एक् बूंद भि ज़मीन पऱ नहि गिरने दि। इतनी प्यासी थि वोँ तेरे बेटे कि गंदगी केँ लिए, कि अब वोँ कहती हैं कि उसे मेरे जूतों कि चाकरी करनी हैं। "
सुमन केँ चेहरे पऱ जीत कि चमक आँ गई। उसने शुभम केँ मोज़े उतारते हुएकहा:
"देखा!जब उसने मुझसे भीख मांगी थि कि 'सुमन, अपने बेटे कों मेरी झोली मे डालदो, मे उसकी दासी बनकर रहूँगी', तब मुझे यकीन नहि थां कि वो इतनी जल्द अपनी असलियत (एक् पालतू वेश्या) पऱ उतर आएगी। पऱ अच्छा हैं, आखिर वोँ मेरी सहेली हैं, पऱ अब वोँ इसघऱ कि कनीज़ बनेगी। "
शुभम नें सोफे पऱ पसरते हुए विस्तार सें बताया:
"सुमन, उसने तौ यहा तक कह दिया कि वोँ मुझसे विवाह करेगी, पर्र घऱ मे वोँ मेरी रंडी औऱ तेरी नौकरानी बनकर रहेगी। उसने अपना पट्टा मेरेहाथ मे थमा दिया थां औऱ घुटनों केँ बल चलकर बाथरूम तक आई। उसकी आँखों मे जौ ज़िल्लत कि चमक थि, उसे देखकर मेरा सीना गर्व सें चौड़ा हौ गय़ा। "
शुभम नें इधर-उधर देखते हुए पूछा, "नीतू कहां हैं? उसेभनक तोँ नहि लगी?"उसने पूछा नहि कि भाई कहा हैं अभि आए क्यूं नहि ?
सुमन नें उठकर शुभम केँ लगभग बैठते हुए उसकेगाल थपथपाए, "अरे, नीतू अपनी सहेली केँ घऱ गई हैं, अभि दोदिन नहि आएगी। आप् फिक्र मतकरो, इसघऱ मे अब मात्र तेराराज चलेगा। रेशमा कों मैंने पहले हि समझा दिया हैं कि उसे केसे तुम कोखुश रखना हैं। अब वोँ जल्द हि अपने शौहर कों लातमार करयहा आएगी, औऱ तब मे देखूँगी कि वोँ मेरी कितनी सेवा करती हैं। "
शुभम् - सुमन केँ चहरा जोड़ सें पकड़ा, शुभम नें कर्कश आवाज़ मे कहा, "सुन सुमन, तूनेउस रेशमा कों मेरे हवाले करके बहोत बड़ाकाम किया हैं। पर्र अब मुझेउस रंडी कि ज़िल्लत देख केँ जौ जोश चढ़ा हैं, उसे शांत तूँ हि करेगी। "
सुमन - सुमन नें अपनी पलकें झपकाईं औऱ लाड़भरे अंदाज़ मे फुसफुसाते हुएकहा, "मेरा बच्चा। मेरा शोना बाबू इतना गर्म हौ गय़ा हैं? उस कमीनी रेशमा नें मेरे बेटे कों इतना तड़पा दिया? आँ जा मेरेपास, तेरीयह मम्मी तेरीहर प्यास मिटा देगी। "
आज मम्मी-बेटा बन केँ चुदने कां मूड हैं बेबी
सुमन नें आगे बढ़कर शुभम केँ होंठों पर्र अपने होंठरख दिए। शुरुआत मे ये एक् हल्की छुअन थि, मगर देखते हि देखते ये एक् गहरी औऱ गीली 'फ्रेंच किस' मे बदल गई।
च़प-च़प। स्लर्प। उम्मम्म। * दोनों कि जीभ एक्-दूसरे सें उलझने लगी। शुभम नें सुमन केँ निचले होंठ कों अपने दाँतों केँ बीच दबाकर ज़ोर सें खींचा, जिससे सुमन केँ मुँह सें एक् मदहोश कर देने वाली सिसकी निकली।
सुमन - "अहह। धीरे-धीरे मेरेलाल। तेरायह पागलपन मुझे पागलकर देगा, " सुमन हाँफते हुए बोलीं, मगर उसकेहाथ शुभम कि शर्ट केँ बटन खोलने मे व्यस्त थें।
सुमन - ओह बाबू तुम्हारा यहथूक कितना मीठा हैं उम्म…
शुभम नें अपनी मम्मी कों कमर सें पकड़कर झटके सें अपनीगोद मे खींच लिया। सुमन कां भारी औऱ सुडौल शरीर शुभम कि जांघों पर्र थां। शुभम नें उसकेकान केँ पास जाकरकहा, शुभम-"चुप कर राँड़! तूँ मेरी मम्मी केँ संगसंग मेरी रखैल हैं। बोल, हैं न् तूँ मेरी गुलाम?"
सुमन नें अपनी गर्दन पीछे कि ओर झुका दि, जिससे उसकेगले कि नसेंउभर आईं। वो मदहोशी मे बुदबुदाने लगी, "हाँ सुमन - बाबू। मे केवल तुम्हारी हूं। मुझे अपनी उंगलियों पऱ नचाओ। जैसे चाहो वैसे इस्तेमाल करो। मेरा बच्चा, मेरा शहज़ादा." मगर रेशमा मेरे इशारों पे नाचेगी
शुभम केँ हाथअब सुमन कि साड़ी केँ पल्लू कों सरका चुके थें। उसने सुमन केँ गले औऱ कंधों पऱ पागलों कि तरह चूमना शुरुआत किया।
शुभम - मुआह.लब। लब। * शुभम नें सुमन केँ गाल पर्र एक् हल्का सां थप्पड़ जड़ा औऱ बोला, "रेशमा केँ संग जौ किया, उससे कहीं अधिक बुरा तेरेसंग करूँगा, समझी?"
सुमन - सुमन नें मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंदकर लीं। उसकी साँसें तेज़ होँ गई थीं। "करो नाँ बाबू। तुम्हारा हर सितम मेरेलिए प्रेम हैं। अपनीइस मां कों भि उस रेशमा कि तरह अपनी दासीबना लो। मे तुम्हारी हर गंदगी चखने कों सजधजकर हूं। "
पूरारूम अब उनकी भारी साँसों औऱ गीली चुंबनों कि आवाज़ों सें गूँजरहा थां। शुभम कां 'तुँ-तड़ाक' वाला अंदाज़ सुमन कों औऱ भि ज्यादा उत्तेजित कररहा थां। वो अपने बेटे केँ सीने सें चिपक गई, मानो उसके वजूद मे हि समा जानां चाहती हौ।
शुभम नें सुमन केँ चेहरे कों अपने हाथों मे दबोचा औऱ उसकी आँखों मे देखते हुए आदेशात्मक लहजे मे कहा, "सुन सुमन, आज इस सोफे पऱ मज़ा नहि आएगा। आज मे तेरी नीतू केँ पलंग पर्र रौंदूंगा। चलउठ, आज उसकी गैरमौजूदगी मे उसके कमरे कि पवित्रता भंग करेंगे। "
सुमन कि आँखें चमक उठीं। उसने अपने बेटे केँ दबदबे कों महसूस करतेहुए कहा, "ओह मेरे शहजादे! तुँ तोँ बड़ा शातिर होताजा रहा हैं। नीतू केँ कमरे मे? अगरउसे पताचला तौ वोँ क्याँ सोचेगी? पर्र खैर। जौ तेरा हुक्म, मेरा शोना बाबू। "
शुभम नें सुमन कां हाथ पकड़ा औऱ उसे घसीटते हुए नीतू केँ कमरे कि ओर लें गय़ा
कमरे मे कदम रखते हि शुभम नें दरवाजा अंदर सें बंदकर लिया। कमरे मे नीतू केँ परफ्यूम कि हल्की खुशबू अभि भि मौजूद थि। शुभम नें सुमन कों सीधेखाट पऱ धक्का दिया। सुमन अपनी साड़ी संभालती, उससे पहले हि शुभम उसकेऊपर चढ़ गय़ा।
दोनों केँ बीचफिन सें वही तीखा औऱ गीला रोमांस शुरुआत हौ गय़ा।
श्लर्प। उम्मम्म। चप-चप.
शुभम नें सुमन केँ गले कों काटते हुएउसे बेदमकर दिया। सुमन मदहोशी मे बड़बड़ा रही थि, "अहह। बाबू। धीरे-धीरे। जान निकल जाएगी मेरी."
तभी, जोश-जोश मे शुभम कां हाथ पलंग केँ नीचे गय़ा। उसे वहां किसी सख्तचीज़ कां अहसास हुआ। उसने अपनाहाथ अंदर डाला औऱ घसीटकर बाहर् निकाला—वो एक् कालेरंग कि डायरी थि, जिस पर्र ‘S' लिखाहुआ थां।
शुभम औऱ सुमन दोनों कि सांसें एक् लम्हा केँ लिएथम गईं।
शुभम नें चुम्मा-चाटी रोक दि औऱ डायरी कों हाथ मे घुमाते हुए बोला, "देख सुमन, तेरी लाडली बेटी यहा क्याँ छिपाकर बैठी हैं। यह डायरी। इसमें उसकी वोँ बातें होंगी जौ उसनेकभी हमसे नहि कहीं। "
सुमन नें अपनी साड़ीठीक कि औऱ घबराते हुए बोलीं, "बाबू, यह तौ नीतू कि पर्सनल डायरी हैं। इसमें क्याँ हौ सकता हैं? कहीं इसमें हमारे बारे मे तौ कुछ."
शुभम नें एक् कुटिल मुस्कान केँ संग डायरी केँ पहले पन्ने पऱ हाथरखा। कमरे मे सन्नाटा छा गय़ा। डायरी केँ पन्नों मे कुछऐसा लिखा थां याँ शायदकुछ ऐसी तस्वीरें थीं, जिसने शुभम केँ चेहरे केँ भाव हि बदलदिए।
शुभम कि आँखें फटी कि फटीरह गईं। उसने धीरे-धीरे सें कहा, "मम्मी। नीतू जितनी भोली दिखती हैं, उतनी हैं नहि।
शुभम केँ चेहरे पऱ एक् ऐसी शैतानी मुस्कान आई जिसेदेख सुमन कां कलेजा काँप गय़ा। उसने डायरी केँ पन्ने पलटे औऱ जौ पढ़ा, उसने कमरे केँ तापमान कों जैसे एकदम सें बढ़ा दिया।
डायरी केँ बीच केँ पन्नों पर्र नीतू कि लिखावट मे छपे शब्द किसीबम केँ धमाके सें कम नहि थें। शुभम नें ऊँची आवाज़ मे पढ़ना शुरुआत किया ताकि सुमन भि सुनसके:
"आजफिन मैंने छेद सें देखा। मां औऱ भइयाफिन सें वहीकर रहे थें। मां कितनी खुशनसीब हैं कि भइयाउसे उसतरह छूता हैं। भइया मेरा हैं, उस पऱ केवल मेराहक होना चाहिए थां। मां सें नफरत होती हैं मुझे, वोँ भइया कों अपनी उंगलियों पऱ नचाती हैं। काश भइया मुझे भि उसी नज़र सें देखता। मे तौ उसकी जूती बनने कों भि सजधजकर हूं। "
कमरे मे सन्नाटा पसर गय़ा। सुमन केँ हाथ-पाँव फूलने लगे, सुमन -"बाबू.यह। यह नीतू नें लिखा हैं? उसे हमारे बारे मे सभीपता हैं?"
शुभम नें डायरी कों जोर सें बंद किया औऱ सुमन कि ठोड़ी पकड़कर उसका चेहरा अपनीतरफ घुमाया। उसकी आँखों मे अब एक् शिकारी कां जुनून थां।
शुभम - "देखा सुमन? तेरी 'संस्कारी' बेटी तोँ हमसे भि बड़ी खिलाड़ी निकली। वोँ जलरही हैं तुझसे। वोँ तड़परही हैं मेरेलिए। उसने लिखा हैं कि वोँ मेरी जूती बनने कों रेडी हैं। अबदेख मे उसकेसंग क्याँ खेल खेलता हूं। "
सुमन - (कांपती आवाज़ मे) "तूँ। तूम क्याँ करने वालेह
होँ शोना? वोँ तुम्हारी बेहन हैं."
शुभम - (हंसते हुए)"चुप कर!जब तुँ मां होकर मेरी रखैलबन सकती हैं, रेशमा मेरी पालतू कुतिया बन सकती हैं, तोँ नीतू कों 'घऱ कि रंडी' बनने मे क्याँ ऐतराज होगा? उसने स्वयं अपनी ख़्वाहिश जताई हैं इस डायरी मे। "
शुभम नें पलंग पर्र पड़े नीतू केँ तकिये कों सूंघा औऱ बोला,
शुभम -मे उसे औऱ तुम्हें एक् संगइसी बैड पऱ अपनी गुलामी करवाऊँगा। तूँ उसकी मां नहि, उसकी सौतन होगी औऱ वोँ तेरी दासी। "
सुमन - सुमन, जोँ पहलेडरी हुई थि, अब शुभम केँ इस वहशीपन कों देखकर स्वयं भि उत्तेजित होनेलगी। उसने शुभम केँ गले मे हाथ डाले औऱ फुसफुसायी, "मेरेशेर। तूँ तौ बहोत आगे कि सोचरहा हैं। तोँ क्याँ अब हम् तीनों मिलकर."मगर मे बताय देती हूं मेराहक़ तुझपे सबसे जायदा होगा तुँ मेरा बेटा केँ संगसंग पति भि हैं याद हैं याँ भूलगए
शुभम - "हाँ! रेशमा बाहर् कि कनीज़, औऱ तुम् दोनों मेरेघऱ कि इज़्ज़त कि आड़ मे मेरी समय-समय कि प्यास बुझाने वाली गुलाम। अबइसघऱ मे कोई नाता नहि बचेगा, मात्र मेरा हुक्म चलेगा। "
शुभम नें डायरी कों वापसउसी स्थान छिपा दिया औऱ सुमन कों फिन सें बाहों मे भर लिया
अजा मेरी बुलबुल
तभीगेट किसी नें खटखटाया
शुभम - अबकौन मम्मी चुदाने चलाआया
सुमन - मां तौ आप् चोदरहे
शुभम् - बेहन कि लोडी मेरा दिमाग़ नां ख़राब कर, जाओ देखो जाकेइस भोसड़ी वाले कों, कौन हैं ?
सुमन - (घबराई हुई )ज…जी अभि देखती हूं मे
सुमन भि गुस्से मे साड़ी कों सही किया औऱ मन मे गाली देतेहुए जा पहुची दरवाजे केँ पास-“ जैसे हि सुमन नें दरवाजा खोला” ——
सामने……….
(bhay लोग comments karte rahiye phir मेरा mann नहीं hotha likhne kaa ap लोग bus padh के chale जाते hu next page तभी ata h जब 10 posts hu jati h plzz plzz comments karo जैसे next page banega after 10 posts me new update post krr दिया karunga ap लोग comments नहीं karte और kahani mai क्या changes karne woh bi batate rahiye me क्या jyada dikhau क्या na dikhau kahani
mai acche comments hu bure sab kaa swagat h )
मे पागल अपने बेटे केँ लिए – New Episode
"I am leaving this kahani here। Anyone who wants too continue writing it aur repost it on their own account too take it forward iss free too दो so; you have my full permission because I am writing a new kahani.
'friend की ammie bani मेरे pyaar mai diwani'
Adultery h lekin incest koot koot के bharunga इस kahani mai, jise padhna hu too yeh read skta h
“I am going too take this one very far."
यह किस्सा क्यूं अधूरी छोड़रहे हौ आप् ? इतना जबरदस्त लिखने वाला शायद हि मिले औऱ स्टोरी पूर्ण हौ !
मे पागल अपने बेटे केँ लिए – New Episode
jisko bi yeh kahani padhna h
me ise phir से likhne jaa raha ho
English font mai kyuki बहुत sare readers h joo hindi font mai नहीं smjha pa rahe iska title bi hindi font mai h mene sex बहुत juldi और extream pe dikha दिया h me slw slw chalunga ise phir से likhungi hindi mai hi लेकिन English fonts mai too phor से padhna kyuki me kahani mai change karunga
or GIF, pics bi dalunga
kahani kaa name yahi rahega
मे पागल अपने बेटे केँ लिए - Next part miss mat karna
yeh kahani me continue krr raha ho iske pichhle update mene English fonts mai likhe h phir say or joo sex scene thaa woh mene phir say likha h too update 8-11 phir say padho mazaa ayega aage muze kahani mai changes bi karne h
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