मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 25
हम् सुभह केँ वक़्त कि खाली सड़कों कों पार करतेहुए जल्द-जल्द रिसोर्ट पहुंच गए। वहां हमारे स्वागत केँ लिएदो आदमी पहले सें हि मौजूद थें। हमारे आगमन कां पूरा इंतजाम उन्होंने पहले सें हि कररखा थां। जैसे हि कैब रुकी, वे आगे बढ़कर हमसे परिचय करनेलगे औऱ मुझे दूल्हा औऱ मां कों दुल्हन जानकर हम् दोनों कों बधाई दि।
फिन हमें हमारे ठहरने कि स्थान कि ओर लेँ जानेलगे। कुलचार सूटकेस थें, क्योंकि मम्मी विवाह केँ बाद सीधे मेरेसंग एमपी जाने वालीथीं, तौ उनकाकुछ सामान भि थां जोँ वे अपनेसंग रखना चाहती थीं। रिसोर्ट केँ दोबॉय हमारे सामान कों हमारे कमरे तक लेँ जाने केँ लिए बुलाए गए।
रिसोर्ट बाहर् सें जितना बड़ा दिखता थां, अंदर जाने पर्र उसकी विशालता कां औऱ भि ज़्यादा अंदाजा हुआ। बाईंओर रेस्टॉरेंट, डिस्को औऱ पूलसाइड पब थां।
सीधेआगे एक् दो-मंजिला इमारत थि। दाईंओर कां पूरा क्षेत्र खाली थां, जिसमें हरीघास कों अच्छी तरह सें मेंटेन किया गय़ा थां।
यहां विभिन्न समारोहों औऱ ओपन मैरिज पार्टियों केँ लिए स्थान थि। गेट केँ बाहर् एक् पार्किंग एरिया भि थां जिसे मैंने आते वक्त देखा थां।
हम् जैसे हि थोडा आगे जाकर दाईंओर मुड़े, वहां एक् विशाल क्षेत्र मे छोटे-छोटे टेंट जैसे कॉटेज बनेहुए थें। बीच मे एक् लंबा औऱ संकरा पानी कां पूल थां, जिसमें सें फव्वारे उठरहे थें, औऱ उसके चारों तरफवे कॉटेज थें।
रिसोर्ट केँ कर्मचारी हमें वहां लेँ गए औऱ बताया कि वेसब विवाह मे आने वाले मेहमानों औऱ परिवार केँ सदस्यों कों यहां रुकवाते हें।
उन्होंने ये भि बताया कि वो दो-मंजिला इमारत मात्र इनसाइड बुफे औऱ विवाह केँ लिएहॉल केँ रूप मे बनाई गई हैं, जहां जश्न भि होँ सकती हैं। बाकी एडमिनिस्ट्रेटिव सेक्शन औऱ पीछे रसोई औऱ कैटरिंग कां इंतजाम हैं। फिलहाल दो शादियों कां अरेंजमेंट चलरहा हैं। बुधवार कों एक् बड़ी विवाह कि बुकिंग हैं औऱ कल कि विवाह केँ लिएबस हम् लोग हें। हमारा छोटा कार्यक्रम हैं, इसलिये वोँ सभीकुछ सामने वाली बिल्डिंग केँ अंदर हि अरेंज किया गय़ा हैं।
हमारे लिए मात्र दो कॉटेज बुककिए गए थें। दोनों फैमिली कॉटेज थें। एक् मे मम्मी औऱ नानीमा चलीगईं औऱ दूसरे मे मे औऱ नाना। उनदो आदमियों मे सें एक् हमारी बुकिंग कां हेड थां। उनके देखभाल मे हि ये विवाह कां कार्यक्रम संपन्न होना थां।
जैसे हि हम् कॉटेज केँ अंदर घुसे, तोँ चौंकगए।
बाहर् सें पता नहि लगता थां कि अंदर इतना खूबसूरत औऱ सुव्यवस्थित होगा। विशाल क्षेत्र मे दोनों तरफदो डबलबेड रूम थें। बैठने कां इंतजाम मे सोफा औऱ सेंटर टेबलरखा हुआ थां। दीवार पऱ बड़ा एलसीडी टेलीविज़न लगाहुआ थां। एक् फ्रिज थां औऱ अपोजिट वाल पऱ एक् बड़ा खिड़की थि,
जिसके बाहर् पेड़ों कि लंबी कतार थि औऱ उसकेपार समुद्र थां, जहां प्राइवेट जेट बनाकर वेलोग प्राइवेट स्टीमर हनीमून केँ लिए देते हें।
मे बाथरूम चेक करने गय़ा औऱ बड़ा बाथरूम मे सब आधुनिक सुविधाओं कां इंतजाम थां। बाथरूम सें बाहर् आते हि वो मैनेजर साहब नाना कों बताने लगे कि क्याँ-क्याँ औऱ केसे कार्यक्रम सेट कियाहुआ हैं। उन्होंने एक् प्रिंटेड पेपर दिया, जिसमें सभी डिटेल केँ संग वक्त केँ अनुसार लिखाहुआ थां। कब हल्दी कि रस्म होगी, कब रिंग सेरेमनी होगी, कब रजिस्ट्री साइनिंग होगी, कब विवाह होगी, इत्यादि सभीकुछ लिखाहुआ थां। हमारे कोई गेस्ट नहि थें, इसलिये रिसेप्शन औऱ फ़ूड कि स्थान पर्र क्रॉस कियाहुआ थां।
मे उनसे वो चार्ट लेकरदेख रहा थां। आजदो रस्में सेट कि गई हें। दोपहर कों हल्दी हैं औऱ साम कों रिंग सेरेमनी। वो व्यक्ति बतारहे थें कि यहा केँ पंडितजी केँ मुताबिक, उनकेदिए हुए वक्त कां पालन करके हमनेये चार्ट बनाया हैं। सब रस्में औऱ तरीके शास्त्र सम्मति सें यहा संपन्न होते हें। उन्होंने अपनाफोन नंबर भि दिया औऱ बताया कि कोई भि समस्या होने पऱ उन्हें सीधेकॉल आईकर सकते हें।
दोपहर मे हल्दी रस्मठीक वक्त पऱ शुरुआत होँ जाएगी औऱ हमें लेने केँ लिएवे आएंगे। वोँ मैनेजर हमें फ्रेश होने केँ लिए कहकर औऱ रूम पऱ हि नाश्ता भेजने कि सूचना देकर, हमें स्वागत औऱ शुभकामनाएं देकर निकलगए। नाना मुझे फ्रेश होने केँ लिए कहकर, वो प्रिंटेड चार्ट लेकर नानीमा केँ रूम पर्र चलेगए। नानीमा कों भि पूरी जानकारी देनी थि। मम्मी कों भि पताचल जाएगा कि कब औऱ केसे क्याँ होगा। मे फ्रेश होने केँ लिए बाथरूम मे चला गय़ा।
जब मे फ्रेश होकर बाथरूम सें निकला, तब नाना रूम मे वापस आँ गए। उनकेहाथ मे कुछ कपड़े थें, जोँ वोँ उन्होंने नानीमा केँ रूम मे रखी हुईँ सूटकेस सें लाए थें। मुझे बाहर् निकलते हुए देखकर उन्होंने कहा,
"अब तोँ सोने कां अधिक वक़्त नहि मिलेगा। 11:30 बजे हल्दी कि रस्म हैं। मैंने तुम्हारी नानीमा कों भि बता दिया। वो लोग भि फ्रेश होकर नाश्ता करकेबस थोड़ी देर आरामकर लेंगी औऱ फिन सजधजकर हौ जाएंगी हल्दी केँ लिए। "
ये सुनकर मैंने थोड़ी लज्जा औऱ खुशी महसूस कि। नानाजी-नानीमा स्वयं मेरे औऱ मां केँ इस रिश्ते कों चाहते हें। वे अपने हाथों सें हमारे इसनए रिश्ते कों जोड़रहे हें औऱ हमें हमारे नए रिश्ते मे कदम रखने केँ रास्ते मे हर मोड़ पऱ हमारा संगदे रहे हें। उनका समर्पण औऱ स्नेह मेरेदिल कों छूरहा थां। वे भि चाहते हें कि उनकी एकलौती बेटी, जिसने जिंदगी मात्र दुःख औऱ अकेलेपन केँ सहारे जीया हैं, अब वो खुशियों केँ पलों मे बदलजाए औऱ उसकी ज़िंदगी हर लड़की कि तरह अपने पति केँ संग गुजरे औऱ उसमे जौ सुख औऱ शांति मिलती हैं, वो पासके। औऱ फिन, मे उनका इकलौता पोता भि हूं। बचपन सें उनका सारा प्रेम औऱ ममता मेरेऊपर हि बरसा हैं। इसीलिए वे भि चाहते हें कि उनका हि पोता अब उनके हि घऱ मे दामाद बनकर रहेगा औऱ सभी मिलकर एक् ख़ुशी केँ महल मे ज़िंदगी गुजारेंगे। इसलिये वेइस विवाह कों शास्त्रानुसार सारी रस्मों औऱ प्रक्रियाओं केँ संग पूरा करना चाहते हें।
मे इनसभी ख्यालों मे खोयाहुआ थां। नाना बाथरूम जाते टाइम बोले,
"मे तुम्हारी नानीमा कों बताआया हूं। वो सूटकेस उनकेरूम मे हैं। वो वहां सें तुम्हारे नए कपड़े दे जाएंगी। "
जानेलगे तौ मैंने सोचकर कहा,
"नाना। येलोग."
मेरीबात समाप्त होने सें पहले नाना मेरीतरफ देखकर मेरीबात काटते हुए, थोड़ी मुस्कान केँ संग एकदमसाफ लहजे मे कहा,
"बेटा। बापू."
मे उनकीये बात सुनकर उनके सामने शर्मिंदा होँ गय़ा। फिन हल्का हंसकर उनसे नज़र हटाकर धीरे-धीरे सें कहा, "ठीक हैं। बापू."
नाना नें मुझेउस हालत सें निकालने केँ लिए औऱ मेरेसंग देने केँ लिए शांतभाव सें कहा,
"बोलो, क्याँ कहरहे थें?"
मेरे अंदर एक् तूफ़ान सां चलरहा हैं। आज पहलीबार मैंने नानाजी कों पिताजी कहा, औऱ हमारा नाताकुछ हि वक्त मे शास्त्र सम्मत तरीके सें स्थायी होँ जाएगा। मैंने उनकीओर देखकर कहा,
"रिजॉर्ट वालो नें बताया थां कि यहाआकर पूरा भुगतान करना होगा। मगर इस मैनेजर नें इस बारे मे कुछ नहि कहा। "
नाना नें याद किया औऱ उत्तर दिया,
"हाँ, बुकिंग केँ वक्त 25% लिया गय़ा थां। अब देखते हें, नाश्ता केँ बाद शायद जानकारी मिलजाए। कोईबात नहि, जब भि कहेगा, दे देंगे। "
बोलकर नाना अपने कपड़े लेकर बाथरूम मे चलेगए। मे अकेला होते हि मेरी लज्जा आरामसे कम होनेलगी औऱ मैंने फिन सें प्रिंटेड शेड्यूल पर्र ध्यान दिया। आज दो रस्मों केँ बाद, कल सुभह रजिस्ट्री अधिकारी आएंगे जिसके बाद मम्मी औऱ मे कागज़ पर्र साइन करके हमारी रजिस्ट्री मैरिज करेंगे। आजकलये आवश्यक होँ गय़ा हैं, वरना भविष्य मे इन पेपर्स केँ बिना बहोत सि समस्याएँ उत्पन्न होँ सकती हें। इसलिये यहा भि यहलोग कानून केँ अनुसार सरकारी अधिकारी कों बुलाकर मैरिज बर्थडे पार्टी कों ये सुविधा उपलब्ध कराते हें। मुझे भि अपने पासपोर्ट याँ बैंक अकाउंट मे मम्मी कां नाम पत्नि केँ रूप मे दर्ज कराना पड़ेगा। तबयहसब पेपर्स जरूरी होंगे।
उसकेबाद दूल्हा औऱ दुल्हन कों यहा केँ मेकअप एक्सपर्ट सजाएँगे। दूल्हा पहले पूजा मे बैठेगा। पूजा खत्म होने तक दुल्हन कि सजावट पूरी हौ जाएगी औऱ वो दूल्हे केँ पास बैठेंगी, औऱ विवाह कां वास्तविक कार्यक्रम शुरुआत होगा। मे येसभी पढ़ते-पढ़ते मां केँ चेहरे कि कल्पना कररहा थां;
दुल्हन केँ रूप मे वो औऱ भि प्यारी औऱ हसीन लगेंगी। तभी अचानक नानीजी आईं औऱ बताया कि उनकेरूम मे नया सूटकेस खुल नहि रहा हैं। नाना बाथरूम मे थें, इसलिये मैंने हि जाकर देखा।
मेरेरूम केँ बगल वालारूम हि उनका थां; मेरेरूम कि तरहदो बेड औऱ अन्यसब सुविधाएँ थीं। मम्मी फ्रेश होकर एक् दूसरी साड़ी पहनकर सूटकेस खोलने कि कोशिश कररही थीं।
उन्होंने साड़ी कों कमर मे कसकर औऱ पेट केँ पास समेटरखा थां। साड़ी उनके जिस्म केँ हर कर्व कों लपेटे हुए थि। उन्हें देखकर मेरे अंदर एक् तीव्र ख़्वाहिश जागृत होनेलगी। उन्हें अपनी बाहों मे लेकर किस्स करने कि ख्वाहिश मन मे उठनेलगी, औऱ जैसे हि दिल औऱ दिमाग़ नें ये ख़्वाहिश कि, वो अनुभूति मेरेखून मे दौड़ गई औऱ मेरे लोड़े मे गहराई सें समा गई। फिरभी, मैंने स्वयं कों काबू मे रखा।
जब मे अंदरआया, तौ मम्मी नें मुझे देखकर ऊपर कि तरफ नज़र उठाई। जैसे हि हमारी नज़रें मिलीं, उन्होंने झट सें अपनी आँखें घुमालीं औऱ उनके चेहरे पऱ ख़ुशी औऱ लज्जा केँ मिश्रण सें लालिमा आँ गई। नानीजी नें सूटकेस दिखाते हुएकहा,
"मैंने औऱ मंजू नें बहोत कोशिश कि, फिन भि सूटकेस खुल नहि रहा हैं। "
मैंने देखा कि वही सूटकेस थां जिसमें विवाह केँ सब कपड़े औऱ सामग्री रखी हुई थि।
सूटकेस केँ पास अपने घुटनों केँ बल बैठी मां कों सूटकेस खोलने कि कोशिश करतेहुए देखकर मैंने कहा,
"मे देखता हूं। "
फिन मैंने आगे बढ़कर मम्मी केँ सामने एक् घुटना फर्श पऱ टिकाकर सूटकेस कों पकड़ लिया। मम्मी नें जल्दी अपनाहाथ सूटकेस सें हटा लिया औऱ दोनों घुटनों केँ बल फर्श पऱ बैठगईं। उनकी नजरें झुकी हुई थीं। नानीमा मेरे पीछे खड़ीथीं औऱ अहमदाबाद सें खरीदे गएउसनए सूटकेस कि खराब क्वालिटी केँ बारे मे शिकायत कररही थीं।
मैंने आँखें चुराकर मम्मी कों देखा औऱ सूटकेस खोलने कि कोशिश कि। मां समझगईं कि मे उन्हें नानीमा सें छुपकर देखरहा हूं। हमारे बीच सिर्फ एक् सूटकेस कां फासला थां।
सूटकेस कां साइड क्लैप टाइट होकरफंस गय़ा थां। मम्मी औऱ नानीमा नें कईबार प्रेस करके भि उसेखोल नहि पाईं। मे घुटनों केँ बल बैठकर अपने दोनों कोहनियों सें सूटकेस केँ ऊपर प्रेशर देरहा थां औऱ मां केँ साइड पऱ जौ क्लैप थां, उसे खोलने कि कोशिश कररहा थां। मे सूटकेस केँ ऊपर थोडा झुक गय़ा थां, जिससे मे मां केँ औऱ नज़दीक आँ गय़ा।
मे लगातार मां कों देख-देखकर कामकर रहा थां औऱ वो बस घुटनों केँ बल बैठकर, दोनों हाथगोद मे रखकर, नजरें नीचीकिए चुपचाप बैठीथीं। वो मुझेदेख नहि रहीथीं, पर्र उनके होंठों पऱ एक् हल्की मुस्कान थि। मुझे मालूम थां कि ये मुस्कान मेरेलिए थि। नानीमा केँ सामने मेरी उपस्थिति केँ कारण वो शर्मिंदा हौ गई थीं औऱ सहज होने केँ लिए शांत होकर बैठीथीं।
नानीमा पीछे दूसरे सूटकेस, जिसमें उनका औऱ नाना कां सामान थां, उसे खोलकर कपड़े निकाल रहीथीं। मैंने पीछे एक् बार देखा कि नानीमा हमेंदेख नहि रहीथीं। हमारी तरफ नानीमा कां पीठ थां औऱ उनका ध्यान सूटकेस केँ सामान पऱ थां। अचानक, प्रेशर देने सें वो क्लैप खुल गय़ा औऱ एक् हल्की आवाज़ निकली। मम्मी नें नज़र घुमाकर मेरेहाथ कि तरफ देखा औऱ समझगईं कि सूटकेस खुल गय़ा हैं। मगर मेरे अंदर एक् शरारत चढ़रही थि। मैंने फिन सें नानीमा कों देखा; वो अभि भि बकबक करतेहुए कपड़े निकाल रहीथीं। समझ मे आया कि क्लैप खोलने कि आवाज़ उन तक नहि पहुँची थि।
मैंने अपनेहाथ सें क्लैप कों पकड़रखा थां औऱ उसी स्थिति मे बैठा थां। मैंने मम्मी कि तरफ नज़र उठाकर सीधे उनकीओर देखा। मां नें भि एक् बार नज़र उठाकर मुझे देखा औऱ फिन नज़रें झुकालीं। मेरी बॉडी उनकेपास हि थि, बीच कां फासला अधिक नहि थां क्योंकि मे अपने ऊपरीबदन कों सूटकेस केँ ऊपर लाकर प्रेशर देरहा थां। तभी मैंने जोर सें कहा,
"नानीजी, ये तौ टाइट होकरबैठ गय़ा हैं। औऱ प्रेशर लगाना पड़ेगा। "
मेरीइस बात पर्र मम्मी झट सें मेरे चेहरे कि तरफ देखी औऱ कुछ नं समझते हुए एक् सरप्राइज्ड लुक लेकर मुझे देखती रहगईं। मेरे होंठों पर्र एक् हल्की मुस्कान आई। तब नानीमा नें हमें पीछे मुड़कर देखा औऱ कहा,
"मंजू, बेटा तुँ थोडा प्रेशर लगादे, "
औऱ फिनकाम मे बिजी होँ गईं। मां मेरीतरफ देखकर मेरी बदमाशी समझगईं। वो औऱ लज्जा सें लाल हौ गईं। कुछ समय वो वैसे हि बैठी रहीं, औऱ मे उन पर्र नज़र टिकाए देखरहा थां।
थोड़ी देरबाद मां नें अपने कोमल औऱ नाजुक हाथ बढ़ाकर सूटकेस केँ ऊपररखा औऱ घुटनों केँ बल बैठकर अपनी बॉडी कों थोडा उठाकर सूटकेस केँ पास लाईं। अब हमारे बीचकोई दूरी नहि रही। मे प्रेशर लगाने कि एक्टिंग करतारहा औऱ वो आहिस्ता प्रेशर देने लगीं। वो बिलकुल नज़र नहि उठारही थीं। मैंने धीरे धीरे अपनेहाथ सूटकेस केँ क्लैप सें हटाकर उनके लंबी-लंबी नरम उँगलियों पऱ अपने उँगलियाँ टच करनेलगा। उनकी उँगलियों पर्र हल्की गुलाबी नेलपॉलिश लगी हुई थि।
मैंने अपनीकुछ उँगलियों सें उनकी उँगलियाँ पकड़ने कि कोशिश कि, पऱ वो अपनी उँगलियाँ मोड़कर हाथ आहिस्ता खिसकाकर दूरकर रहीथीं। मेरासिर उनकेसिर कों टचकररहा थां। मैंने इंटेंशनली अपनासिर उनके माथे पर्र लगाकर हल्का सां प्रेशर देना शुरुआत कर दिया।
मेरा दाहिना कंधाअब उनके बाएँ कंधे कों छूने कों जारहा थां। कुछ लम्हा बाद मां नें अपनेहाथ कों मेरेहाथ केँ स्पर्श सें दूर नहि किया। वो मेरे स्पर्श कों रोक नहि रहीथीं। मेरा कंधाअब उनके कंधे सें रगड़ने लगा। उनके ब्लाउस कि स्लीव केँ ऊपर सें हल्की गर्मी मेरे जिस्म मे आनेलगी। एक् हफ्ते बाद हम् एक्-दूसरे कां स्पर्श महसूस कररहे थें। अब हम् दोनों हि समझगए थें कि हमारा मन औऱ तन एक्-दूसरे केँ प्रेम कों पाने औऱ महसूस करने केँ लिएतरस रहे हें।
बस थोड़ी देरबाद हल्दी होगी। हम् कानूनी पति-पत्नि बनने कि तरफकदम रखना शुरुआत करेंगे। इसबात पर्र दोनों केँ मन औऱ तन मे एक् अजीब अनुभूति छाई हुई थि, इसलिये दोनों हि नानीमा कि मौजूदगी मे चोरी-चोरी एक्-दूसरे कों महसूस करनेलगे। मे अपनीनाक उनकेकान केँ ऊपर बालों मे हल्का टच करके उनके बालों कि खुशबू लेने कि कोशिश कररहा थां।
अचानक दरवाज़े पऱ खटखटाहट हुइ। नाश्ता लेकर मैनेजर औऱ एक् लेडी खड़ीथीं। उन्हें देखते हि मां झट सें सूटकेस केँ ऊपर सें अलग हौ गईं। नानीमा नें उन लोगों कों अंदरआकर नाश्ता रखने कों कहा। तभी मैंने क्लैप खुलने कां नाटक करतेहुए खड़ा हौ गय़ा औऱ नानीमा सें कहा,
"सूटकेस केँ साइड मे कपड़ा फँसकर टाइटबँध गय़ा थां। "
नानीमा मेरीतरफ देखकर हल्की मुस्कान दीं औऱ शायदकुछ कहने हि वालीथीं कि मैनेजर नें मुझे देखकर कहा,
"Sir, Mr। Patel iss not in his kamara। We want too meet him once."
मे समझ गय़ा कि वो अब पेमेंट कि बात करनेआए हें। मैंने उनसेकहा,
"No no, he iss there। He has just gone too freshen up."
कहकर मे वहां सें जानेलगा। जाते टाइम एक् बार मम्मी कों चुपके सें देखा। वो वहीं बैठकर सूटकेस खोलरही थीं औऱ मुझेऊपर सें उनके कंधे औऱ बूब्स कां ऊपरी हिस्सा ब्लाउस केँ ऊपर वाले हिस्से सें दिखाई देरहा थां।
मेरे अंदर उन्हें अपना बनाकर पाने कि चाहत औऱ भि तेज़ हौ गई।
मे अपने कमरे मे आते हि देखा कि नाना बाथरूम सें बाहर् आँ चुके थें। नए कुर्ता-पाजामा मे नाना अच्छे लगरहे थें। मैनेजर नें उनसे पेमेंट कि बात कि। नाना नें कहा कि ब्रेकफास्ट करने केँ बाद वो दफ़्तर मे जाकर पेमेंट कर देंगे। मैनेजर नें कहा कि वो वहीं रहेगा।
ब्रेकफास्ट करकेजब नाना जारहे थें, तोँ मैंने कहा,
"बापू, मे भि चलता हूं। "
वो मेरीतरफ देखकर मुस्कुराए औऱ शांत आवाज़ मे बोले,
"अरे, तुम् आरामकरो। अभि फिन हल्दी केँ लिए सजधजकर होना हैं। मे बसयेसभी चुका केँ आँ जाता हूं। "
फिन एक् बार मुस्कान देकर नाना चलेगए। मे कमरे मे अकेला पलंग पर्र आँखें बंद करकेलेट गय़ा औऱ थोड़ी देर पहले मम्मी केँ स्पर्श कि अनुभूति महसूस करनेलगा। मुझेआज स्पष्ट पताचल गय़ा थां कि वो भि मेरा स्पर्श पाने केँ लिए, मेरा प्रेम पाने केँ लिए पूरीतरह सें समर्पण करने केँ लिए सजधजकर हें। उन्होंने अपनेहर रोम-रोम मे मेरे प्रेम कों महसूस करने केँ लिए स्वयं कों सजाकर रखा हें। मे उनके जैसी सुंदर औऱ प्यारी पत्नि पाकर सचमुच अपने आप् मे खोनेलगा।
शायद मेरीआँख लग गई थि। अचानक नानीमा कि आवाज़ सें नींदटूट गई। नानीमा नें झुककर चेहरे पर्र एक् मुस्कान केँ संग मुझे जगाते हुएकहा,
"उठजाओ, बेटा। मैंने तुम्हारे नए कपड़े वहांरख दिए हें। जल्द सें सजधजकर हौ जाओ। "
कहकर हँसते-हँसते मेरे पलंग पऱ बैठगईं। मुझे दोनों बातों सें लज्जा आँ रही थि। एक् तोँ पिछली रात ट्रेन मे न् सोने केँ कारणअब मे सो गय़ा थां, दूसरी बातये थि कि नानीमा मुझेइस तरह मुस्कान केँ संग हल्दी कि रस्म केँ लिए बुलाने आईथीं। मे उठकर बैठा औऱ जैसे एक्सक्यूज़ देने केँ लिए बोला,
"सॉरी, नानीमा। वो."
नानीमा नें अब अपने दाहिने हाथ सें मेरेगाल कों छुआ औऱ आँखों मे एक् मां कि ममता भरकर प्रेम सें वैसी हि मुस्कान केँ संग धीरे-धीरे सें बोलीं,
"अब तूँ मेरा दामाद बननेजा रहा हैं। औऱ दामाद अपनी सासू कों क्याँ कहते हें? उम."
मे लज्जा केँ मारे पानी-पानी होँ गय़ा। मैंने सिर झुका लिया। औऱ नानीमा, एक् चिंतित मां कि तरह अपनी आवाज़ मे एक् इमोशन मिलाकर फिन बोलीं,
"मे अपनी एकलौती बेटी कों तेरी सौंपरही हूं। अब तुम को उसका ख्याल रखना हैं। ज़िंदगी भरउसे खुश रखना हैं। रखेगा न् मेरी बेटी कों खुश?"
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 26
मैअब क्याँ कहूँ मुझेसमझ नहि आँ रहा थां। नानीमा कों आँख उठाकर देखने मे भि लज्जा आँ रही थि। आज सें मे उनका दामाद हूं, कोई प्यारा छोटा बच्चा नहि, जौ उनका प्यारा नाती हैं। मुझेअब एक् परिपूर्ण व्यक्ति बनकर उन्हें भि विश्वास दिलाना हैं। ज़िन्दगी केँ हर रिश्ते मे अगर विश्वास, प्रतिबद्धता, ईमानदारी, निष्ठा, देखभाल, प्यार, औऱ सुरक्षा न् रहे, तोँ वो नाता केसे मजबूत बनेगा। मुझे भि अपने अंदर केँ संकोच औऱ दुविधा कों छोड़कर इस रिश्ते कि देखभाल करनी पड़ेगी।
मैंने धीरे-धीरे सें सिर उठाकर उनकी आँखों मे आँख मिलाकर कहा,
"आपकोये बात मालूम हैं कि दुनिया मे सबसे ज्यादा प्रेम मे आपकी बेटी सें हि करता हूं। उन्हें खुश नहि रखूँगा तोँ मे केसेखुश रहूँगा!"
फिन मैंने उनकेहाथ पर्र अपनाहाथ रखकर धीरे-धीरे सें कहा,
"आप् लोगों नें अपने नाती कों दामाद बनाने कां जोँ फैसला किया, उसकी मे अपनीजान देकर रक्षा करूँगा। "
नानीमा नें अपनेहाथ सें प्रेम औऱ ममता केँ संग मेरेगाल सहलाते हुएकहा,
"मेरी बेटी अपने पति केँ संगखुश रहेगी, ये जानकर मुझेअब मरने कां भि दुःख नहि होगा। "
नानीमा कि आँखें बोलते-बोलते नम हौ गईं औऱ वो मुझेगले लगाना चाहीं। मे आगे बढ़कर उनकेगले लग गय़ा।
वो प्रेम सें मेरीपीठ पर्र अपनी ममताभरा हाथ फिराने लगीं। उनकेमन केँ इमोशन कों थोडा काबू करकेफिन हँस पड़ीं औऱ मेरेकान केँ पास आरामसे बोलीं,
"चलो, सभी तौ ठीक होँ जाएगा। मगर मेरेमन मे इन खुशियों केँ संग एक् दुःख भि हैं। "
मे वैसे हि उनकेगले लगेहुए पोजीशन मे रहकर पूछा,
"वो क्याँ हैं, माँ?"
मैंने नानीमा कों 'माँ' कहकर बुलाया। उन्होंने इसे महसूस किया औऱ फिन थोड़ी देरबाद हँसते हुए एकदम नीची आवाज़ मे बोलीं,
"मुझे दामाद मिला, मगर मैने पोता खो दिया। अब मुझे 'नानीमा' कहकर बुलाने वालाकोई नहि हैं। मुझे 'नानीमा' कहकर बुलाने केँ लिएकोई चाहिए। "
बोलकर नानीमा हँसने लगीं औऱ मे उनकेगले लगेहुए पोजीशन मे रहकर शर्माते हुए बोला,
"आप् भि न्.!"
.
मे हल्के पीलेरंग कां कुरता औऱ सफेद पायजामा पहनकर कॉटेज सें बाहर् निकला,
तौ देखा नाना मैनेजर केँ संग बातें कररहे हें। मुझे देखते हि नाना औऱ मैनेजर दोनों मुस्कुराए औऱ नाना बोले,
"आँ जाओ बेटा, हम् चलते हें। वेलोग बसआने वाले हें। "
मुझे मालूम थां कि हमारी हल्दी कि रस्म एक् हि वक्त पऱ रखी हुई हैं, मगरये अलग-अलग स्थान होगी। हमारे औऱ कोई रिश्तेदार, यार याँ परिवार न् होने केँ कारणयहा केँ लोगों कां हि बंदोबस्त किया गय़ा हैं, जोँ मुझे औऱ मम्मी कों अलग-अलग हल्दी लगाएंगे। मे कुछ न् बोलकर उनकेपास जानेलगा। तभी दूसरे कॉटेज कां द्वार (दरवाज़ा) खुला औऱ हम् सभीउधर मुड़कर देखने लगे।
नानीजी पहले निकलकर दरवाज़े केँ सामने खड़ी होकर अंदर कि तरफ देखने लगीं। फिन मम्मी बाहर् आईं। मम्मी केँ दरवाजे केँ पासआते हि नानीमा अपना एक् हाथ मम्मी कि पीठ पऱ सें लें जाकर उन्हें पकड़कर आहिस्ता आगे बढ़ाने लगीं।
मे बस मां कि तरफ देखते रह गय़ा। उन्होंने एक् नई हल्के पीलेरंग कि साड़ी पहनी हुईँ हैं, जिसकी बॉर्डर सफेद औऱ पीले सें डिज़ाइन कि गई हैं।
मैचिंग शॉर्ट स्लीव ब्लाउज पहनरखा हैं, जिससे उनके नाज़ुक औऱ लंबे गोरे बाजू औऱ हाथ औऱ भि खूबसूरत लगरहे हें। उनकेगले मे एक् मोतियों कां हार औऱ एक् हाथ मे एक् मोतियों कां ब्रेसलेट हैं। बाल जुड़ा करके थोड़ी ऊपर कि तरफ बांधा हुआ हैं, जिससे उनकी गर्दन औऱ गले कि लंबाई पूरीतरह सें नज़र आँ रही हैं।
आज पहलीबार इसतरह केँ परिधान मे उन्हें देखरहा हूं। इतने साधारण परिधान मे भि वो मुझे बहोत ज्यादा सेक्सी लगने लगीं। वो अपने पिताजी-मां औऱ मेरे सामने नजर उठाने मे शायद शर्मा रहीथीं, इसलिये नजर नीचे करके नानीमा केँ संग धीरे धीरे हमारी तरफआने लगीं। वो इतनी खूबसूरत लगरही हें कि मेरेमन मे बस एक् ख़ुशी कि लहर दौड़ने लगी। उन्हें देखकर लगता नहि कि वो 36 साल कि हें औऱ मेरी मम्मी हें, बल्कि एक् नवयुवती कि तरह शर्मा केँ आगेबढ़ रही हें।
यहा कां मैनेजर ये दृश्य देखकर कल्पना भि नहि कर पाएगा कि मे उनका बेटा हूं औऱ यहा शास्त्र सम्मत तरीके सें उनसे विवाह करके अपनी पत्नि बनाने केँ लिएआया हूं।
हम् सभी एक् संग सामने वाली इमारत कि तरफ जानेलगे। वहा एक् रूम दुल्हन केँ लिए, यानी कि मां केँ लिए, औऱ दूसरा रूम दूल्हे केँ लिए, यानी कि मेरेलिए, सजाकर रखा हैं। दोनों रूम सें बहोत आवाज़ें आँ रही हें। बहोत सारी महिलाएँ भरी हुई हें। कुछलोग बाहर् थें, हमेंआते हुएदेख करवेलोग अंदरचले गए औऱ आगे कि तैयारी शुरुआत कर दि।
मैनेजर केँ कहने पर्र नानीमा मम्मी कों लेकर दुल्हन केँ कमरे मे जाने लगीं। मे मां कों जातेहुए देखता रहा। उनका ब्लाउज पीछे सें ज्यादा कट कियाहुआ हैं,
जिससे उनकी सुडौल गर्दन औऱ कमर कां ऊपरी हिस्सा साफ-साफ दिखाई देरहा हैं। मेरेमन मे एक् हलचल मचनेलगी। जब मैंने नीचे देखा तोँ उनके फ्लैट स्लिपर मे पेर कि रसीले गुलाबी एड़ियां नजरआईं।
मुझे नहि पता क्यूं, मगर उनकी गोल-गोल रसीले गुलाबी एड़ियां देखकर मेरे पजामे केँ अंदर मेरे लोड़े मे एक् सिहरन सि होनेलगी। मुझेऐसा लगा कि मे अभि झुककर उनके सामने बैठकर उनके गुलाबी पैरों कों चूमलूं। मे जानता हूं कि उनकासभी कुछबस मेरा हि होने वाला हैं। तब मे प्रेम सें उनकेबदन केँ हर कोने कों चुंबन सें भर दूँगा।
मैनेजर मेरे पीछे हि थां। वो बोलने लगा,
"यहा हमनेसभी कुछ पण्डितजी केँ संग परामर्श करकेसही तरीके सें बंदोबस्त किया हैं। यहसब महिलाएँ विवाहित हें औऱ हमारे यहा विवाह केँ सब कार्यक्रमों मे अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ निभाती हें। "
हम् आगे बढ़ने लगे। मैंने नाना केँ संगउस कमरे मे घुसते हि सब महिलाओं कि तरफ देखा। सब नें मुस्कान औऱ खुशी कि आवाज़ केँ संग मेरा स्वागत किया। एक्-दो वृद्ध महिलाएँ आगेआकर मेराहाथ पकड़कर मुझेआगे लें जाने लगीं। उनके चेहरे पऱ मम्मी याँ बड़ी बेहन जैसा प्रेम औऱ खुशियाँ नजरआईं। मुझे एक् छोटी चौकी पऱ बैठने केँ लिएकहा गय़ा। मे बैठा, नाना औऱ मैनेजर साहब वहीं साइड मे रखे सोफे पर्र बैठे।
तभी पण्डितजी अंदरआए। वे मेरे सामने वालेआसन पऱ बैठे। उन्होंने अपनाकुछ सामान वहीं रखकर एक् किताब निकालकर पढ़ना शुरुआत किया। नाना सें मेरानाम पूछकर कुछ मंत्र बोलते हुए किताब बंदकर दि। फिन एक् लाल औऱ पीलेरंग कां धागा लेकर मेरेहाथ मे बाँधने लगे।
एक्-दो महिलाएँ मंगलमय ध्वनि देकर औऱ शंख बजाकर इस मुहूर्त कों औऱ धार्मिक बनाने लगीं। पण्डितजी नें मंत्रों केँ संग वो धागा बाँधना खत्म किया औऱ अपनी एक् ऊँगली सें सामने रखी हल्दी, चंदन सें बनेहुए पेस्ट कों छूकरतीन बारकुछ मंत्र पढ़े, फिन एक् वरिष्ठ स्त्री कों आगे कां कार्यक्रम शुरुआत करने कों कहा। एक्-एक् करकेसात महिलाएँ आगेआईं। सब विवाहित दिखती थीं। सभी उस हल्दी पेस्ट कों लेकर एक्-एक् करके मेरे पैरों, घुटनों, बाजुओं, हाथों औऱ चेहरे पर्र लगाने लगीं। वे हल्दी लगाते हुए आहिस्ता रगड़ती जारही थीं। मुझे एक् सुखद अनुभूति कां अनुभव हुआ।
बचपन सें दूसरों कों विवाह करतेहुए देखा थां औऱ स्वयं कि भि विवाह कां सपना देखा थां, आज वो समय आँ चुका हैं। मेरी विवाह कि रस्में शुरुआत हौ गई हें। जिंदगी मे एक् सही मित्र पाना बहोत जरूरी होता हैं, जोँ आपके जिंदगी केँ रास्ते कों सुगम औऱ खुशहाल बनादे। सारे सुख-दुख मे आपकासंग देकर जीनासहज करदे। नानाजी-नानीमा नें मेरेलिए वैसे हि एक् लड़की ढूंढी हैं, जिसे मे दुनिया मे सबसे ज़्यादा प्रेम करता हूं। उसे अपनी जीवन मे पाकर उसकेसंग- संग चलना चाहता हूं।
वो लड़की यानी मेरी प्यारी मम्मी, आज मेरी पत्नि बननेजा रही हैं, औऱ वो अपनेसगे बेटे कों अपने पति केँ रूप मे पानेजा रही हैं। मे इसी विचार मे खोया थां कि थोड़ी देरबाद मैंने महसूस किया कि मेरे पूरे शरीर पऱ वेलोग हल्दी लगारहे हें। मेरे कपड़े पूरीतरह पीले हौ गये हैं। कुर्ते कि आस्तीन कों मोड़कर, पजामे कों ऊपर कि तरफ उठाकर, छाती केँ बटन खोलकर, औऱ गर्दन केँ पीछे तक हर स्थान हल्दी लग गई हैं। मुझे लज्जा आनेलगी, इतनी सारी औरतें, औऱ वेलोग आपस मे हँसते-बोलते हल्दी लगारही थीं।
कोई-कोई मुझसे बात करने कि कोशिश कररही थि, पऱ मे सबको सिर्फ एक् स्माइल देकर जवाबदे रहा थां। फिनवे लोग मेरेसिर केँ ऊपर पानी डालने लगीं। मे भीग गय़ा औऱ मेरी हालतदेख वे खिलखिला करहँस पड़ीं। मे भि क्याँ करूँ, बस मुस्कुराते हुए उनकेसंग इससमय कां मजा लेतारहा।
रब करके मेरी हल्दी उतारने केँ बाद, थोड़ी देर मे सभीलोग मुझे छोड़कर साइड मे चलीगईं। पण्डितजी नें कहा,
"बेटे, अब जाकरनहा लो। "
मे वहां सें उठकर सबको नमस्कार करके अपने कॉटेज कि तरफचल पड़ा। नाना भि मैनेजर केँ संगउस रूम सें बाहर् चलेगए।
मैंने बाहर् आते हि दुल्हन केँ रूम कि ओर देखा।
वहा सें हँसी-मज़ाक औऱ ख़ुशी कि आवाजें आँ रहीथीं। मे समझ गय़ा कि वहा कां हल्दी कां कार्यक्रम अभि तक पूरा नहि हुआ हैं। नाना मेरेपास आए औऱ हम् वहां सें निकल पड़े।
पूरा जिस्म रगड़-रगड़ केँ नहाने केँ बाद भि कई स्थान अभि भि पीलारंग रह गय़ा थां। चेहरे पर्र भि पीलेपन कां अहसास थां। मे नये कपड़े पहनकर रूम मे आया औऱ तभी नाना बाहर् सें अंदरआकर बोले,
"बेटा, मैनेजर पूछरहा थां कि हम् लञ्च कहां करना चाहते हें। मैंने तुम्हारी नानीमा—मतलब माँ सें पूछा तौ उन्होंने कहा कि यहारूम मे हि लञ्च करेंगे। तौ मैंने भि वैसे हि बता दिया। "
नाना बात करते टाइम अपनेनए रिश्ते कों संजोने कि कोशिश कररहे थें, जबकि मे समझ नहि पारहा थां कि क्याँ कहूँ। मैंने बसकहा,
"ठीक हैं, पिताजी। "
हल्दी केँ बाद सें साम तक नं मैंने मां कों देखा औऱ न् नानीजी कों। हालाँकि, मां केँ चेहरे कों देखने कां मन बहोत थां, मगर उनकेरूम मे जाने मे संकोच होनेलगा। हम् लोगों नें अपने-अपने रूम मे दोपहर का खाना किया। नाना बस दो-तीन बार बाहर् गए, शायदकुछ लोगों सें मिलने।
नाना कि स्थिति बेटी कि विवाह मे व्यस्त पिता कि तरहलग रही थि। वो रिसोर्ट केँ कर्मचारियों, नानीजी, मम्मी, औऱ मुझसे लगातार समन्वय कररहे थें। उन्होंने सबकी जरूरतों कां ध्यान रखा, औऱ सभीकुछ व्यवस्थित किया। अब वो अपनेबेड पर्र आराम करने केँ लिए लेटेहुए थें, क्योंकि थोड़ी देरबाद रिंग सेरेमनी औऱ मेहँदी कि रस्में होने वालीथीं। रिसोर्ट नें हमारे शार्ट समय कों ध्यान मे रखतेहुए सब रस्मों औऱ कार्यक्रमों कों तयकर लिया थां, औऱ पण्डितजी केँ दिए वक़्त कां भि ख्याल रखा थां। सभीकुछ जल्द-जल्द निपटाना पड़रहा थां, मगर विवाह केँ कार्यक्रम मे कितना भि योजना बनाओ, अंत मे सभीकुछ ऐसा हि लगता हैं।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Awesome updates Esac bhay। kahani writing, pics, gifs iss excellent। I don't know how many times repeatedly I have red your kahani and all updates। mann नहीं bartha। bhay Please post updates asap। Eagerly waiting for it। One suggestion pls include lot of erotic sex, romance in suhagrat session
। Pls keep one detail update on impregnation sex। Pregnant sex। 4 bacche hu jaye
। uthna दूर tak updates add krna bhay।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Aage kya hua? Next part padhiye
Mazedaar update. Bass ek guzarish h.shadi k baad bi beta mummy ko mummy hi kehkar uske mazey ley or mummy bi apne bete ko hammesha beta kehkar hi puri mamta k saath uski kamuk harkatonn or chudayi main uskah saath dey.
muze yeh too nahee ptaa kee yeh sacch incident h ya jhuth pr jaisa bi kahani ko depict kia jaa raha just awesome. # Nana Nani kaa apni beti Manju k liye itna bada decision vahi le sakta h jiske andar ishq hi ishq bhara hu. Keep writing more.
Relavant source : click here


















