मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 27
नाना कां दियाहुआ नयासूट पहनते वक्त, मे ज़िन्दगी केँ सबसे बड़ेकदम कों उठाने केँ लिए रेडी हौ रहा थां। विवाह करके एक् नई ज़िन्दगी मे प्रवेश करनेजा रहा थां। हमें नहि पता थां कि हमारे नसीब मे आगे क्याँ लिखा हैं, मगर मे मां सें बहोत प्रेम करता थां औऱ ये जानता थां कि वो भि मुझसे बहोत प्रेम करती हैं। अब हम् पति-पत्नि बनकर ज़िन्दगी गुजारने कि शपथ खानेजा रहे थें।
हम् एक्-दूसरे कों चाहते थें, एक्-दूसरे केँ संग जीना चाहते थें, औऱ एक्-दूसरे कों ज़िन्दगी कि हर खुशी देना चाहते थें। नानाजी-नानीमा भि इस रिश्ते कों दिल सें चाहरहे थें औऱ हमेंखुश देख्ना चाहते थें।
मे आँखें बंद करके प्रार्थना करनेलगा कि हमारी ज़िन्दगी मे कोई बाधा याँ कष्ट न् आए। हम् एक् संग पूरी ज़िन्दगी खुशी औऱ शांति सें जी पाएं।
मे कॉटेज सें निकलते हि नाना औऱ कुछ अन्य लोगों केँ संग चलनेलगा। हम् सभी एक् हॉल मे पहुँचे जहाँ सेरेमनी कां आयोजन किया गय़ा थां। पण्डितजी औऱ कुछ लेडीज वहा पहले सें मौजूद थीं, जिनमें सें कुछ केँ चेहरे हल्दी केँ टाइम देखे थें।
मे जाकर सोफे पर्र बैठ गय़ा। एक् फोटोग्राफर आकर मेरी तस्वीरें लेनेलगा, जिससे मुझे थोड़ी बेचैनी महसूस होनेलगी। तभी नाना नें मेरेहाथ पर्र अपनाहाथ रखा, तौ मैंने उन्हें देखा। उनकी आँखों मे एक् आश्वासन औऱ सभीकुछ सहजरूप सें लेने कां संकेत मिला, जिससे मे स्वयं कों उस वातावरण केँ संग मिलाने लगा।
औरतें आपस मे बातकर रहीथीं औऱ मैनेजर बीच-बीच मे नानाजी सें बातकर रहा थां। मे बस दुल्हन, यानी मां, केँ आने कां प्रतीक्षा करनेलगा।
मगरये इंतजार लंबा होने सें पहले हि कुछ औरतों केँ संग मां औऱ नानीमा नें हॉल मे प्रवेश किया। मां कों देखकर मे चौंक गय़ा।
क्याँ येवही लड़की हैं, जिसे मे बचपन सें देखता आँ रहा हूं, जौ मेरी मम्मी हैं, जिसे मे जी-जान सें ज्यादा प्रेम करता आँ रहा हूं बचपन सें? थोड़े मेकअप केँ संग, लहंगे औऱ चोली मे औऱ कुछ हल्की ज्वेलरी मे वो एकदमपरी जैसी लगनेलगी थीं। उनकी बॉडी कां कर कर्व परफेक्ट हैं। आज वो औऱ भि सेक्सी लगरही थीं।
लहंगा पहनने सें उनका फ्लैट पेट औऱ नाभिदिख रहा थां। पहलीबार उन्हें इसरूप मे देखकर मेरे अंदर सिरसिराहट सि होनेलगी। मेरी नज़र थोड़ी ऊपर होते हि उनके बूब्स पर्र रुक गई।
आज उनका सुडौल आकर स्पष्ट रूप सें दिखरहा थां, जिससे उनकी सुंदरता औऱ बढ़ गई थि। उनका चेहरा देखकर पताचल रहा थां कि वो नजरें झुकाए, लज्जा औऱ लाज मे लाल होतेहुए मेरीतरफ बढ़रही थीं।
यहा किसी कों मालूम न् हौ, मगर नानाजी, नानीमा औऱ मेरे सामने मां ज्यादा शर्मा गईं। हमें हि सिर्फ मालूम हैं हमारा नाता, हमारी पहचान। हम् एक् रिश्ते सें आज दूसरे एक् नए रिश्ते मे जुड़ने जारहे हें। मेरे अंदर एक् उत्साह तौ थां हि, औऱ अब मां कों देखकर मेरेमन मे एक् हलचल मचनेलगी। मे स्वयं कों नियंत्रित करतेहुए, बसये सोचकर शांत रहने कि कोशिश कररहा थां कि बसकुछ घंटों केँ बाद वो परी जैसी लड़की, मेरी पत्नि बनकर मेरी हौ जाएगी।
मम्मी आकर मेरेबगल मे सोफे पऱ बैठगईं, औऱ नानीमा उनकेपास बैठगईं। मम्मी अपनी नज़रें एकदम झुकाए, मात्र अपनीगोद मे रखेहुए हाथों पर्र टिकाए हुएथीं, चारों तरफ एक् बार भि नहि देखरही थीं। मे इतना सामने हूं, फिन भि वो नहि देखरही हें। उनके होंठों पर्र जौ मुस्कान हैं, उससेपता चलरहा हैं कि वो इस रिश्ते कों ख़ुशी-ख़ुशी अपनाना चाहती हें। बसये महसूस करके मेरामन उनके प्रति प्रेम सें पिघलने लगा। पंडितजी केँ पासदो रिंग्स रखीथीं, जोँ नानीजी नें पहले हि दे दि थीं। पंडितजी नें एक् रिंग उठाकर मुझे औऱ दूसरी मां कों दे दि।
सारी औरतें ख़ुशी कि आवाज़ सें हमेंइस मुहूर्त कां महत्व महसूस कराने लगीं। मैंने नानीमा कि ओर देखा तोँ उन्होंने मुझे इशारा किया कि अंगूठी पहनाने केँ लिए रेडी हौ जाऊँ। मैंने एक् बार मम्मी कों उनकी झुकी हुइ नज़र केँ संग उनके चेहरे कों देखा औऱ फिन अपनाहाथ थोड़ाआगे बढ़ाया। नानीमा नें धीरे-धीरे सें मम्मी सें कहा, "मंजू."
मम्मी नें अपना बायां हाथ उठाकर आगे बढ़ाया। हमारे दोनों हाथबीच मे आँ गए। मैंने दोनों केँ हाथों कों देखा; शायद हम् दोनों केँ हि हाथ काँपरहे थें। एक् तौ मे पहलीबार येसभी कररहा थां, दूसरी बातये कि हम् हमारा नाता बदलने जारहे थें, औऱ तीसरा, हम् इस रिश्ते कों दिल सें चाहकर एक् उत्साह मे डूबेहुए थें। इसीलिए हम् दोनों हि थोड़े-थोड़े काँपरहे थें। शायदवहा कि कुछ महिलाओं नें येदेख लिया औऱ वेआपस मे कुछ कहकरहँस पड़ीं। हमें लज्जा आई, औऱ मम्मी नें अपनासिर औऱ नीचे झुका लिया। मैंने आरामसे उनकी उंगली केँ पास रिंग लें जाकर उन्हें अंगूठी पहना दि।
सभीलोग तालियों औऱ खुशी कि आवाज़ सें हमें अभिनंदन देनेलगे।
हम् दोनों नें हि आरामसे अपनेहाथ अपनीओर खींचलिए। फिन पंडितजी नें मां कों अंगूठी पहनाने केँ लिएकहा। मे नाना कि ओर एक् बार मुड़ा। वो बस मेरेबगल मे बैठे थें। मुड़ते हि उन्होंने अपना एक् हाथ मेरे कंधे पर्र रखकर मुस्कुराने लगे। मैंने भि मुस्कुराते हुए अपनी नजरें घुमाकर अपनाहाथ आगे बढ़ाया। मम्मी शायदये सभीकुछ नहि देखपा रहीथीं, इसलिये जैसे हि मैंने अपनाहाथ आगे किया, नानीजी नें मम्मी कि पीठ पर्र ममताभरे हाथ सें स्पर्श किया। मम्मी नें फिन अपनाहाथ आगे बढ़ाया औऱ हमारे काँपते हुएहाथ एक् संगआए। उन्होंने मेरी उंगली मे अंगूठी पहना दि।
फिन सें एक् खुशी कां हंगामा उठा औऱ सभी तालियाँ बजाने लगे। मैनेजर नाना कों बधाइयाँ देनेलगा। कुछ वृद्ध महिलाएं नानीमा कों हँसते हुएगले मिलने लगीं। औऱ बाकीलोग मुझे औऱ मम्मी कों बधाइयाँ देनेलगे। हम् प्रेम सें उनकी शुभकामनाओं कां शुक्रिया करनेलगे।
मैंने मां कि ओर नज़रें चुराकर देखा तोँ वो अब चेहरा उठाकर, आँखें उठाते हुएसब महिलाओं कों मुस्कुराहट केँ संग शुक्रिया देरही हें औऱ आभार प्रकट कररही हें। उनके चेहरे पर्र एक् विशेष चमक आँ गई थि औऱ आँखों मे एक् खुशी कि लहर दिखाई देरही थि।
जैसे हि उनकी नज़रें घूमीं, हमारी निगाहें मिलगईं। मे उनकी खुशी कों महसूस कर स्वयं भि खुश होकर मुस्कुराया, तौ वो भि मुस्कुराकर शरमागईं औऱ झट सें नज़रें हटालीं।
हम् वहा सें अलग-अलग दोरूम मे चलेगए। मां कों मेहँदी केँ लिए सारी औरतें लें गईं औऱ कुछलोग मेरेसंग थें। मे वहां बैठा औऱ मेरी मेहँदी शुरुआत हौ गई। मेरीबस दोनों हथेलियों पर्र थोड़ी-थोड़ी मेहँदी लगा दि गई औऱ कहीं नहि। उनलोग नें फटाफट मेरी मेहँदी लगाकर रस्म पूरीकर दि। नानाजी औऱ मे बाहर् आँ गए। नानाजी मुझे हंसकर देखे औऱ बोले,
"बेटे, तुम् यहारहो। मे मंजू केँ पास जाकरआता हूं। "
मे बस हंसकर सिर हिलाया तोँ वो चलेगए। मुझे भि जाने कां मनकररहा थां, पर्र अब पॉसिबल नहि हैं। तोँ, मे बाहर् रिसेप्शन कि तरफआगे बढ़ गय़ा। थोड़ी देरबाद नाना आकर बोले,
"चलो, हम् कॉटेज मे चलते हें। वहा अभि बहोत वक्त लगेगा। मेहँदी लगाना, गाना बजाना, बहोत कुछ चीज़ों कां इंतजाम कररखे हें येलोग। "
नाना ये बोलकर हंसते हुएआगे बढ़े। मे उनके पीछे-पीछे कॉटेज कि तरफ चलनेलगा। मेहँदी केँ संग मम्मी कों केसे लगेगा, वो कल्पना करतेहुए मन मे एक् खुशी कि लहर लेकर मे कॉटेज पहुँच गय़ा। मेरामन बस उनको देखने केँ प्रतीक्षा मे अंदर हि अंदर छटपटाने लगा।
उस दिनरात केँ डिनर मे हि मे उन्हें देख पाया। कॉटेज वालों नें उसदिन हमारे लिए एक् ग्रैंड डिनर कां बंदोबस्त कररखा थां। गेट सें आते वक्त हमने जोँ रेस्टोरेंट देखा थां, वहींआज कां डिनर फिक्स कियाहुआ हैं। मेहँदी केँ बाद सें हम् अपने-अपने रूम मे हि थें, तौ नं मैंने मां कों देखा, नं उन्होंने मुझे। सो, जब हम् डिनर केँ लिएवहा जाने केँ लिए निकले, तौ मैंने मां कों देखा। अब उन्होंने एक् ग्रीन कलर कि साड़ी पहनी हुई थीं।
साड़ी सें मैच करता ब्लाउज, गले मे ग्रीन स्टोन औऱ प्लेटिनम कां हार थां, औऱ हाथ मे वही बैंगल्स। मगर सुभह सें एक् अंतर थां, औऱ वो थां उनकेहाथ औऱ पांव कि मेहँदी। पांव कि मेहँदी साड़ी केँ कारण ज्यादा नज़र नहि आँ रही थि, पऱ हाथ केँ एल्बो तक खूबसूरत डिज़ाइन कि मेहँदी लगी हुइ थि, जौ उनकी हुस्न कों औऱ निखार रही थि। अब वो सचमुच एक् वैसी लड़कीलग रहीथीं, जौ बस विवाह केँ लिएअब दुल्हन बननेजा रही हैं।
मैंने टेबल केँ पासरखी हुइ कुर्सियों कों थोडा बाहर् निकालकर नानीमा औऱ मां कों बैठने मे सहायता कि, औऱ नाना टेबल केँ अपोजिट साइड मे नानीमा केँ सामने बैठे। सो, मुझे मम्मी केँ अपोजिट मे, उनके सामने बैठना पड़ा। मम्मी मुझे नहि देखरही हें। वो नानीमा सें धीरे धीरेबात कररही हें याँ नानाजी कों बात करतेहुए एक् आधबार देखरही हें। बस मुझसे नज़र हटाएरखी हें। मे उनकीतरफ बार-बार देखरहा हूं, नानाजी औऱ नानीमा कि नज़र छुपाकर। एक् बारचाह रहा थां कि वो भि मुझे देखें। हम् आमने-सामने बैठे हें। कल हम् विवाह करके पति-पत्नि केँ रिश्ते मे जुड़ने जारहे हें। वो मेरी पत्नि बननेजा रही हें। बसयही सभी चिंता मेरे अंदर उनके प्रति चाहत औऱ बढ़ती जारही हैं। उनकाइस तरह शर्माना, उनके मेहंदी लगेहुए हाथ, होंठों कि मुस्कान, सांस केँ संग-संग छाती कां हल्का-हल्का कंपन.ये सभी मुझेबस उनकीतरफ खींचे जारहा हैं। मुझे मालूम हैं कि विवाह सें पहले वो अब मेरी बाँहों मे नहि आने वाली हें, पऱ मे उन्हें एक् बार बाहों मे भरकर उनकेदिल कि धड़कन महसूस करना चाहता हूं।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 28
मैनेजर हमारा बहोत ख्याल रखरहा थां। वो बार-बार पूछरहा थां कि कोई तकलीफ हौ रही हैं याँ कुछ चाहिए। दो वेटर सर्व करनेलगे, थोड़ी देरबाद नानीमा उनको देखकर प्रेम सें हँसते हुए बोलीं कि वेलोग बसयहा रखदें, हम् स्वयं सर्वकर लेंगे। फिन नानीमा हम् सबको सर्व करने लगीं। मम्मी भि हाथबटा रहीथीं। उनके हाथों मे मेहंदी केँ संग-संग रेडनेल पॉलिश नजरआई।
मुझे पहलीबार मम्मी कां इसतरह कां रूप देखने कों मिला। वो मेरे सामने एक् अलग लड़की जैसी लगने लगीं। वो मम्मी नहि, जिसे मे बचपन सें जानता हूं, कोईनई लड़की, जिसे आरामसे जानरहा हूं, जिसका रूप आरामसे नजर आँ रहा हैं। वो इतनी हसीनलग रही हें कि मे मन हि मन स्वयं कों लकी महसूस कररहा हूं कि ऐसी सुंदर औऱ सैक्सी लड़की मेरी जीवनसाथी, मेरी पत्नि बननेजा रही हैं।
मम्मी सबको सर्व करने लगीं। हम् सभी एक् संग बहोत दिनों बाद बाहर् खानेगए थें, इसलिये सभीलोग इस डिनर कों एन्जॉय कररहे थें। हमारी नई जीवन शुरुआत होने सें पहले जोँ भि टेंशन याँ संकोच थां, वो धीरे धीरेमिट रहा थां। अब मैनेजर भि चलेगए थें औऱ दोनों वेटर भि साइड मे जाकर खड़े होँ गए थें। हम् बिंदास बातें करनेलगे। मैंने नानाजी औऱ नानीमा कों माँ-पिताजी कहकर बुलाया दोबार। मां नें उस टाइम मेरीतरफ एक् झलक देखी मुझे उनके चेहरे पऱ खुशी औऱ होठों पर्र मुस्कान नजरआई। मां मात्र नानीमा केँ संगकुछ बातें धीरे धीरेकर रहीथीं। इन्हीं सभी बातों केँ बीच, जब मां नें एक् डिश सर्व करने केँ लिए मेरी प्लेट केँ पासहाथ लाया, तोँ मैंने उन्हें देखकर मुस्कुराते हुए, अपनेहाथ सें इशारा करके नाँ कहा। वो बस मुस्कुराकर हाथहटा लीं। जब नानीमा केँ पासगईं, तौ नानीमा नें बात करते-करते ध्यान दिया औऱ मां कों बोलीं,
"पहले हितेश कों दो, मंजू। "
मां ये सुनकर शरमागईं औऱ नजरें झुकालीं। नानीमा कि प्लेट मे परोसते हुए धीरे-धीरे सें बोलीं,
"वो नहि लेंगे। मैंने उन्हें पूछा थां। "
ये सुनते हि नानीमा केँ चेहरे पऱ एक् हंसीखिल गई औऱ वो खुश होकर नानाजी कि तरफ देखने लगीं।
मम्मी शर्माकर नजरें झुकालीं औऱ नानीमा कि प्लेट मे परोसने लगीं। नानीमा समझगईं कि मम्मी नें इसनए रिश्ते कों दिल सें स्वीकार कर लिया हैं। नानीमा नें बस अपने बाएंहाथ कों पीछे सें लें जाकर मां कि पीठ पर्र रखा औऱ मम्मी कों अपनीतरफ खींचते हुए एक् मुस्कान केँ संग बहोत कुछ समझा औऱ समझा दिया।
सबकी जीवन मे कुछ लम्हा, कुछदिन, कुछऐसे मोमेंट्स आते हें जब जीवन एक् अनजान मोड़ पऱ आकर एक् नई दिशा मे मुड़ जाती हैं। तब हम् शायदये सोच नहि पाते कि इसनईराह पऱ कदम रखना कितना जरूरी याँ जोखिम भरा होँ सकता हैं। पऱ हम् सभीइसे अपनी जीवन मे अनुभव करते हें औऱ नईसोच औऱ नई उम्मीद केँ संगआगे बढ़ते हें। बाकी लोगों सें मेरी जीवन एकदमअलग हि हैं। सबकी विवाह होती हैं, सभी अपनी जीवनसाथी पाते हें। पर्र मे अपनी जीवनसाथी, अपनी पत्नि केँ रूप मे जिसे पानेजा रहा हूं, वो मेरी हि सगी मां हैं। मुझे मालूम हैं हमारा येनया नाता औरों सें बिल्कुल अलग हैं। हम् दोनों औऱ नानाजी-नानीमा, सबकी सहमति सें औऱ हमारे बीच केँ प्रेम औऱ बंधन केँ कारण, इस रिश्ते कों अपनाना चाहते हें।
मम्मी अब एक् दूसरी लड़की कि तरहबन गईं हें, जिसे मे प्रेम करता हूं औऱ चाहता भि हूं। पऱ एक् बात तौ सच हैं, कोई भि नाता, खासकर पति-पत्नि कां, तब मजबूत, टिकाऊ औऱ स्वस्थ होता हैं जब उसमें एक् दूसरे केँ लिए प्रेम, विश्वास, औऱ एक् दूसरे कों माफ करने कि ताकत होती हैं। मेरे औऱ मां केँ मन मे मां-बेटे कां प्रेम तौ थां हि, अब एक् नया प्रेम दोनों केँ मन मे छा गय़ा हैं। हम् एक् दूसरे कों बहोत प्रेम करते हें। बचपन सें हम् एक् दूसरे पऱ सबसे अधिक विश्वास करतेआए हें औऱ हमारी खुशी केँ लिए हम् बहोत कुछ त्याग करने कि ताकत भि रखते हें, जौ हम् मेरे बचपन सें करतेआए हें औऱ अब तोँ हम् सभीकुछ करने केँ लिए सजधजकर भि हें।
दुनिया कि कोई औऱ लड़की, चाहे कितनी भि हसीन औऱ सुंदर क्यूं न् हौ, मेरेमन मे वो स्थान नहि लें सकती जहाँ मेरी मंजू, मेरी होने वाली पत्नि औऱ मेरी मम्मी, मेरेदिल मे बसी हुइ हें। हमारे बीच एक् हलचलमची हुईँ हैं, जौ इसनए रिश्ते कि शुरुआत कों दर्शाती हैं।
अगलेदिन विवाह कां टाइम सुभह केँ मुहूर्त मे तय किया गय़ा थां। हम् सब सुभह सें उठकर तैयारियों मे लगगए। कल साम कि रिंग सेरेमनी वालेहॉल मे हि विवाह कि व्यवस्था कि गई थि। वहादो कमरे थें: एक् दूल्हे औऱ उसके परिवार केँ लिए, औऱ दूसरा दुल्हन औऱ उसके परिवार केँ लिए।
हॉल मे पहुँचते हि मे औऱ मां सबसे पहले रजिस्ट्रार सें मिले औऱ उनकेदिए हुए कागजात पऱ हमने हस्ताक्षर किए। नानाजी-नानीमा भि संग थें। मां कों देखा तोँ वोँ होठों पऱ मुस्कान लिए, नज़रें झुकाए नानीमा केँ संग बैठीथीं।
सुभह केँ इस टाइम मे वो बहोत प्यारी लगरही थीं। मेरेमन मे एक् अद्भुत अनुभूति दौड़रही थि, औऱ मे भि थोड़ी लज्जा महसूस कररहा थां।
मैंने आरामसे हस्बैंड केँ जगह पर्र हस्ताक्षर किए औऱ नानीमा नें मेरे गार्जियन बनकर गवाह केँ रूप मे हस्ताक्षर किए। फिन मम्मी नें अपनेहाथ सें वाइफ केँ जगह पऱ हस्ताक्षर किए औऱ नाना नें उनके फादर केँ रूप मे गवाह केँ हस्ताक्षर किए।
मां केँ हस्ताक्षर होते हि रजिस्ट्रार साहब नें हमें पति-पत्नि बनने कि बधाई दि औऱ सभीलोग तालियाँ बजाकर हमें अभिनंदन करनेलगे। कुछ अन्य हस्ताक्षर भि आवश्यक थें, जोँ वहा कि कुछ महिलाओं नें किए, औऱ फिन रजिस्ट्रार साहब हमें पुनः बधाई देकरचले गए।
अब, कानूनी तौर पऱ हम् पति-पत्नि बनगए थें। फिन शास्त्रसम्मत रूप सें विवाह कां मुहूर्त जल्द आँ गय़ा। हम् दोनों, मे औऱ मम्मी, दूल्हा औऱ दुल्हन केँ रूम मे रेडी होने केँ लिएचले गए।
मेरे सजने-संवरने मे ज़्यादा वक्त नहि लगा। मात्र शेरवानी पहननी थि औऱ सिर पर्र साफा बांधना थां। दूसरी ओर, दुल्हन केँ कमरे मे हलचलमची हुइ थि। मां कों सजाने औऱ विवाह कां जोड़ा पहनाने केँ लिएकल वालीकुछ महिलाएं वहां मौजूद थीं। बाहर् भि कुछलोग थें, जौ रिसोर्ट कि ओर सें आए थें औऱ अपनी-अपनी ड्यूटी निभारहे थें। ऐसी विवाह कां नां तोँ कभी आयोजन हुआ थां, नां हि इन लोगों नें कभी देखा थां। उन्हें येपता नहि थां कि आज एक् मम्मी औऱ बेटा पति-पत्नि केँ रिश्ते मे बंधने जारहे हें, जिसमें पूरे परिवार कि सहमति हैं। वेबस अपनी खुशी सें सभीकुछ कररहे थें।
पंडितजी नें भि अपनी तैयारी शुरुआत कर दि थि। उन्हें भि भनक नहि थि कि वेआज एक् मां औऱ बेटे कि विवाह कराने वाले हें। मे एक् हसीन डिज़ाइन कि हुई शेरवानी पहनकर सोफे पर्र जाकरबैठ गय़ा।
विवाह कि एक् नई अनुभूति हर टाइम मेरेमन मे घूमरही थि। जिस स्त्री कों मे इस दुनिया मे सबसे अधिक प्रेम करता हूं, जिसेदिल सें पत्नि केँ रूप मे पिछले 6 साल सें चाहता आया हूं, वो सुंदर लड़की, मेरी मां, आज मेरी पत्नि बननेजा रही हैं। मेरी मम्मी कों दुल्हन केँ रूप मे देखने केँ लिए मेरामन बेसब्री सें प्रतीक्षा कररहा थां। बल्कि, ये भि सच हैं कि मम्मी कों अपनी पत्नि बनाकर अपनी बाँहों मे भरने कि चाहत मे मेरामन अंदर हि अंदर बार-बार चंचल होकर कांपउठ रहा थां। पिछले 6 साल सें उनकेसंग मिलन कां जोँ सपनामन हि मन मे देखता आया थां, अब हमारा नसीबउसे सच करनेजा रहा हैं। मे अब अपनी ज़िन्दगी उनकेसंग, उनका पति बनकर बिताना चाहता हूं। औऱ वो भि मेरी पत्नि बनकर ज़िन्दगी कि अंतिम सांस तक मेरेसंग जीना चाहती हें।
कलरात रेस्टोरेंट मे डिनर केँ दौरान, मां कि खुशी, शरम, औऱ दबी हुइ उत्तेजना वाला चेहरा देखकर, औऱ उनकेनई दुल्हन बनने केँ खुशी औऱ मेहँदी कों देखकर, मे अत्यंत होर्नी महसूस कररहा थां। मुझे मां कों अपनी बाहों मे भरने, औऱ अपने गर्म होंठों सें उनके पूरे शरीर कों प्रेम भरे चुम्बनों सें भर देने कि तीव्र ख़्वाहिश हौ रही थि। उसी खुशी कों साझा करतेहुए, मैंने नानाजी-नानीमा सें छुपकर मम्मी कों एक् SMS भेजा, जिसमें लिखा थां:
"You are looking very gorgeous, Hot and sexy। I can't stay away from you anymore."
मेरे SMS केँ बाद मम्मी कों पता नहि चला क्योंकि उनकाफोन पर्स केँ अंदर थां। मे अपनी भावनाएं उन तक पहुँचाने केँ लिए बार-बार उन्हें देखरहा थां औऱ इशारे सें समझारहा थां। शुरुआत मे उन्होंने शायदकुछ नहि समझा, मगर जल्द हि उन्होंने समझ लिया औऱ मेरीओर मुस्कुराते हुए नज़र घुमाई। मुझेसमझ मे नहि आया कि उन्होंने जानने केँ बाद भि कोई प्रतिक्रिया क्यूं नहि दि। इस पर्र मुझे मम्मी पऱ क्रोध आनेलगा औऱ मैंने उन्हें दोबारा इशारा करने कां मौका ढूंढना शुरुआत किया।
तभी मम्मी नें नानीमा केँ कान मे कुछकहा, औऱ नानीमा नें मैनेजर सें वाशरूम कां मार्ग पूछने केँ बादहाथ सें इशारा किया। अचानक, मम्मी चेयर सें उठकर अपने पर्स केँ संगचल पड़ी औऱ जाते वक़्त एक् बार मुझेदेख कर मुस्कुराई।
मे समझ गय़ा कि मां मेरे SMS कां जवाब देने केँ लिए वाशरूम गई हें। इसलिये मे नानाजी औऱ नानीमा सें अलग होकरबैठ गय़ा। कुछ वक्तबाद मेरेफोन पऱ वाइब्रेशन महसूस हुआ। मैंने स्क्रीन खोली औऱ देखा, मां कां जवाब थां:
"धत, बदमाश। "
मुझेपता थां कि मम्मी मेरा SMS पढ़कर लज्जा सें लाल हौ गई होंगी। ये भि साफ थां कि उनकेमन मे भि मेरे प्रति वही चाहतउठ रही थि। मैंने जल्द सें टाइप किया:
"It's true Manju Darling। I'm lucky too have you as my beloved wife। I love you so so much and will love you forever."
उनका रिप्लाई जल्दी आया:
"I LOVE YOU to SO SO MUCH JANU."
मुझेये महसूस हुआ कि उनका जवाबदिल सें लिखा गय़ा थां। जब मां वापसआईं औऱ उनके चेहरे पर्र एक् नई दुल्हन कां अद्भुत अभास थां, तौ मेरे लंड मे एक् अनोखी सिहरन फैल गई। मे उस लम्हा कां बेसब्री सें इंतजार कररहा थां जब शास्त्र सम्मति सें वो मेरी पत्नि बन जाएँगी।
औऱ वो घड़ी आँ गई।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 29
मे पंडितजी केँ सामने बैठकर उनका कहनामान रहा हूं। पंडितजी नें पूजा शुरुआत कर दि हैं। वो नाना सें दूल्हा औऱ दुल्हन कां नाम औऱ उनके माँ-बाप कां नामपूछ रहे हें। नाना नें मेरानाम हीतेश बताया औऱ माँ-बाप कां नाम दीपिका औऱ अरुण बताया। मुझे थोड़ी देर केँ लिएसमझ नहि आया, पर्र जल्द हि यादआया कि मां कां नाम उनकी जन्म कुंडली मे दीपिका हि लिखाहुआ हैं।.
सभीकुछ साफ हौ गय़ा फिन दुल्हन कां नाम मंजु औऱ माँ-बाप केँ नाम केँ लिए नाना नें स्वयं कां औऱ नानीमा कां हि नाम बताया। पंडितजी नें पूजा शुरुआत कर दि।.
कुछ महिलाएँ वहीं चारों ओरबैठ गईं। मेरे अंदर एक् लज्जा औऱ उत्तेजना कां मिश्रण महसूस हौ रहा हैं, क्योंकि मुहूर्त कां वक़्त आने हि वाला हैं। तभी पंडितजी नें पूजा केँ बीच मे कहा कि दुल्हन कों बुलाइए।
मेरेदिल कि धड़कन तेज होँ गई। वो लम्हा अब बहोत लगभग हैं, जब मेरी मम्मी, मेरी मंजु, मेरी पत्नि बननेजा रही हैं।
मनुष्य कां मन औऱ मन उसकी ज़िन्दगी केँ हरदिन, हरसमय, हर क्षण कों याद नहि रख पाता। उसके जिंदगी मे कुछदिन, कुछ लम्हा, कुछ घटनाएँ हि होती हें, जोँ जीवनभर केँ लिए स्मृतियों मे बस जाती हें। यह स्मृतियाँ कभी-कभी पीड़ा औऱ कष्ट देती हें, तौ कभी-कभी अपार खुशी औऱ खुशी कां एहसास कराती हें। हमारे सब जिंदगी इसी नियम सें चलते हें।
आज मेरे जिंदगी कां वो दिन हैं, जिसे मे शायद आखिरी सांस तक हर मोमेंट कों याद करना चाहूंगा, मेरामन, ज़िन्दगी मे कभी भि, कहीं भि, इन पलों कों यादकर, अभि महसूस कि गई खुशी केँ एहसासों कों फिन सें जीवंत कर, उनके मिठास कां एहसास कराता रहेगा।
मे अपनी स्थान पर्र बैठा थां, औऱ वहां मौजूद सबलोग दुल्हन केँ आगमन केँ लिए उत्सुकता सें प्रतीक्षा कररहे थें। मेरेमन मे एक् तूफान सां चलरहा थां। येवही घड़ी थि जिसकी याद मे इतनेदिन गुजारे थें। ये वो लम्हा थां जौ मेरे औऱ मां कि जीवन कों एक् नई दिशा मे लें जाकर एक् नए रिश्ते मे जोड़ देगा। हमारे बीच केँ मां-बेटे केँ बंधन केँ संग पति-पत्नि कां प्रेम भरा नाता जुड़ जाएगा। मे व्याकुल मन लेकर मम्मी कों दुल्हन केँ रूप मे देखने केँ लिए पागल होँ रहा थां।
मेरेइस चिंता केँ बीच, वहां मौजूद सब लोगों कि आनंदमय ध्वनि औऱ मंगलमय आवाजों केँ संग मैंने अपने बाईंओर दरवाजे कि ओर देखा। मम्मी नें अपनी दुल्हन कि भेष मे हॉल मे प्रवेश किया।
दो आदमियों नें उनकेऊपर एक् पर्दे जैसाकुछ उठाकर रखा थां। वो अपनासिर झुकाकर, आरामसे कदमों सें पूजा कि ओरआने लगीं। नाना उनकेबगल मे अपने दोनों हाथों सें मम्मी कों पकड़कर लारहे थें। ये मालूम पड़रहा थां कि मां नें एक् हसीनलाल, मरूनरंग कां सुनहरे डिज़ाइन वाला लहंगा पहनाहुआ थां।
जिसे मे बचपन सें प्रेम करता हूं, जिसने मुझे प्रेम देकर बड़ा किया, वो स्त्री, मेरी मंजू, मेरी मम्मी, आज मेरी धर्मपत्नी बनरही हैं। हाँ, ये बातसही हैं कि आज तक मैंने अपनेमन कि गहराई मे, उन्हें सोचकर, उनकेबदन केँ एक्-एक् अंग कि कल्पना करके, एक् व्यक्ति कां एक् स्त्री केँ लिए जौ प्रेम होता हैं, वो प्रेम उनसे किया हैं। औऱ आजइस मुहूर्त केँ बादबस वो मेरी होँ जाएगी, मात्र मेरी। जिसके संग मे अपना स्वयं कां परिवार बनाकर, पूरी जीवन जीने कि ख्वाहिश रखता हूं।
नानीजी नें मुझे देखा, हमारी नज़रें मिलीं। वो बस होंठों पऱ एक् मुस्कान लेकर मुझेदेख रहीथीं, फिन मम्मी कि तरफ देखकर उनकेकान मे आरामसे कुछ बोलीं। मुझे मम्मी कां एक्सप्रेशन तौ दिखाई नहि दिया, पऱ नानीमा अपनी मुस्कान कों औऱ चौड़ी करके हँसने लगीं। मम्मी शायद लज्जा औऱ खुशी कि मिली-जुली अनुभूति सें औऱ सिर झुकाकर नानीमा केँ हाथ केँ बंधन केँ अंदर पिघलने लगीं। चारों तरफ सें सभी लेडीज कि खुशी औऱ मंगलमय आवाजें मेरे कानों मे रस घोलने लगीं। सामने मेरी मम्मी कों अपनी दुल्हन केँ रूप मे आतेहुए देखकर मे बस एक् नई अनुभूति मे डूबने लगा।
इससमय नें मेरेमन कों आश्चर्य औऱ खुशी सें भर दिया, एक् ऐसा एहसास जिसे शब्दों मे बयान करना मुश्किल हैं। मां कां लाल औऱ सुनहरे डिज़ाइन वाला लहंगा उनकी सुंदरता कों औऱ भि बढ़ारहा थां। उनकेहर कदम केँ संग मेरादिल धड़करहा थां, औऱ मे सोचरहा थां कि अब सें थोड़ी हि देर मे, वो मेरी धर्मपत्नी बन जाएँगी। इसनए रिश्ते केँ बंधन मे बंधने कि खुशी औऱ गर्व मेरेदिल मे उमड़रहा थां। ये वो क्षण थां जिसे मे जिंदगी भर अपनेदिल केँ लगभग रखूंगा, एक् ऐसीयाद जोँ हमेशा मेरेसंग रहेगी।
मां मेरे नजदीक आते हि पण्डितजी नें मुझे निर्देश दिया कि आगे केँ कार्यक्रम केँ लिए क्याँ करना हैं। उनकेकहे मुताबिक, मे पूरीतरह मां कि तरफघूम गय़ा। अब मम्मी मेरे नजदीक खड़ी हें, दुल्हन केँ भेष मे। मे उनकीतरफ देखते हि, पण्डितजी केँ एक् व्यक्ति नें मुझे एक् फूलों कां हारथमा दिया औऱ पण्डितजी नें वरमाला एक्सचेंज करने कां निर्देश दिया। सब औरतें तेज़-तेज़ सें हर्षध्वनि करने लगीं। नानीमा अपने चेहरे पर्र खुशी कि हंसी लेकर मां कों एकदम नजदीक पकड़े हुएथीं।
मां केँ सिर केँ ऊपर चुनरी घूंघट बनकररखा हुआ थां। बालों कों अच्छी तरह डिज़ाइन करके पीछे बांधा हुआ थां। सिर पर्र सोने कि बिंदिया मांग केँ ऊपरचमक रही थि। चेहरे पऱ नई दुल्हन कां मेकअप थां। मम्मी कि त्वचा हमेशा सें मक्खन जैसी रसीले औऱ गोरीरही हैं, पऱ आज वो इससाज मे एकदम किसी अप्सरा जैसीलग रहीथीं।
वो बस एक् 18 साल कि जवान लड़की लगने लगीं, जिनका रूप विवाह केँ स्पर्श सें औऱ भि निखरने लगा हैं। आँखें झुकी हुईँ हें, पर्र उनमें काजल औऱ हल्का सां मेकअप कियाहुआ हैं। नाक मे सोने कि नथ नें उनके चेहरे कों एकदमअलग बना दिया हैं। विवाह कि ख़ुशी कां अनुभव, लज्जा, औऱ एक् अनजानी उत्तेजना केँ कारण उनकीनाक कां अगलाभाग सांस केँ संग-संग थोडा-थोडा काँपरहा हैं। मेरे अंदर कां वो अज्ञात अनुभव बढ़कर चरम सीमा पर्र पहुँच गय़ा जब मैंने उनकेदो पतले गुलाबी होठों कों देखा। उनकेहोठ स्वाभाविक रूप सें गुलाबी हें, औऱ लिपस्टिक केँ कारणवे औऱ भि लोभनीय बनगए हें।
इतने लगभग सें देखकर मुझेलगा कि वेरस मे भरेहुए संतरे केँ दो मीठे फांक हें। उन होठों पऱ एक् ख़ुशी कि मुस्कान सजी हुई हैं। मुझेबस अपने अंदरये ख़्वाहिश हुईँ कि मे उन होठों कों अपने होठों सें मिलाकर उनके अंदरभरे हुएरस कां स्वाद चखलूँ। मे अंदर हि अंदर काँपने लगा।
मे मम्मी कों बचपन सें जानता हूं, बचपन सें उन्हें हररूप मे देखते आँ रहा हूं। शायद इसलिये विवाह केँ तनाव सें ज़्यादा उन्हें पाने कि चाहत मेरे अंदर उमड़ने लगी।
उनकेसंग मिलन कां प्रतीक्षा वर्षों सें चलरहा थां। आज मेरामन बस उन्हें पूरीतरह सें अपनी बाँहों मे समेटने कों बेताब थां। मैंने कुछ लम्हा उन्हें ऐसे देखा कि स्वयं सबके सामने शर्मा गय़ा। मेरी नज़र हटते हि नानीमा कि नज़र सें मिली। नानीमा ख़ुशी औऱ ममताभरी निगाहों सें मुझेदेख रहीथीं। वो चाहती थीं कि आज उनकी बेटी कों अपने हाथों सें मेरेहाथ मे सौंपकर हमें एक् नए रिश्ते मे जोड़दें, औऱ हम् सबकी ज़िंदगी ख़ुशी औऱ शांति सें बीते।
मम्मी मेरे सामने सर कों थोडा झुकाकर, नज़र नीचे करके खड़ी हें। उनकेहाथ मे भि मेरे जैसे एक् फूलों कि वरमाला हैं। उनके मेहँदी लगेहुए हाथ उनकी दुल्हन केँ रूप कों हुस्न सें बढ़ारहे हें। उनकी गर्दन मे सोने कां डिज़ाइन कियाहुआ चौड़ा नेकलेस औऱ कान मे खूबसूरत सोने केँ झूमके हें। हाथों मे सोने केँ विभिन्न डिज़ाइन केँ कंगन हें। वो आजमन सें अपने बेटे कों पति कां अधिकार देने केँ लिए दुल्हन केँ भेष मे मेरे सामने शर्माती हुई खड़ी हें। चारों ओर ख़ुशी औऱ मजा कां माहौल व्याप्त हैं।
मेरेपास नाना औऱ मम्मी केँ पास नानीजी खड़ी होकर हमें अपने बच्चों कि तरह पूरीतरह सें सहयोग दे रहें हें। हवन कि पवित्र आग केँ सामने, हम् मम्मी-बेटे पंडितजी केँ मंत्रों केँ उच्चारण केँ बीच एक्-दूसरे कों पहलीबार सबके सामने नज़र उठाकर अपनी चारों आँखें एक् करनेलगे। मे मम्मी कों देखरहा थां। वो अपनी नज़र आहिस्ता उठाकर फिन झुकारही थीं। मुझे मालूम थां कि वो एक् कुंवारी लड़की कि तरह महसूस कररही थीं। उनकी पलकें बार-बार ऊपरउठ रहीथीं औऱ फिन नीचे जाकर मेरी नज़र सें मिलाने मे शर्मा रहीथीं, अपने मम्मी-बापू केँ सामने। पंडितजी केँ मंत्र चलरहे थें। पवित्र आग कि आभा नें उनके गालों कों औऱ लालकर दिया। तभी मां नें अपनी नज़र उठाकर मेरेसंग नज़र मिलाई। सबलोग ताली बजाकर औऱ ख़ुशी कि आवाज़ सें इस मुहूर्त कों खासबना रहे थें।
मम्मी कि नज़र मे मेरे प्रति उनका प्रेम, देखभाल, औऱ स्वयं कों मेरेपास सौंपने कि चाहतसभी कुछझलक रहा थां। उनके चेहरे पर्र आज जोँ भावनाओं कां साया छायाहुआ थां, वो मात्र एक् पत्नि केँ भावनाओं कां होता हैं अपने पति केँ लिए। हम् एक्-दूसरे कों देखकर अपनी आँखों कि भाषा औऱ ख़ामोशी कि भाषा सें शपथखा रहे थें, उस पवित्र अग्नि केँ सामने, कुछ हि पलों मे। वो समय हमारे जिंदगी कां सबसेअहम लम्हा थां।
पंडितजी नें वरमाला बदलने कां निर्देश दिया। तभी मां नें अपनी नज़र झुकाली। मैंने अपनी माला आहिस्ता ऊपर उठाई, मेराहाथ थोडा काँपरहा थां। मैंने अपनी माला उनकेसर केँ ऊपर, उनकी घूँघट केँ ऊपर सें डालकर उनकेगले मे पहनाई।
फिन मैंने अपनाहाथ नीचेकर लिया। मम्मी नें भि अपनेहाथ कों ऊपर करके मेरेगले मे माला डालने केँ लिए उठाया। चूंकि मे मम्मी सें ऊँचाई मे थां, उन्होंने अपनेहाथ कों बहोत ऊपर करके डालना पड़ा, इसलिये मैंने मां कों सहायता करने केँ लिए अपनासिर थोडा झुकाकर उनकेहाथ केँ पास लेँ आया।
फिन मां नें आहिस्ता मेरेगले मे मालाडाल दि, अपनी नज़र झुकाकर।
मुझेअब बसवही एहसास होनेलगा, जोँ इस दुनिया कि किसी भि भाषा सें व्यक्त नहि कियाजा सकता। मात्र वहीसमझ सकता हैं, जिसने इसे महसूस किया हौ। मेरामन मां केँ प्रति प्रेम सें भर गय़ा।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Next part miss mat karna
sundar Update. Please request haen story kee speed thodi tej kijiye.itna feeling explain karne kee avashyakta haen kya ?. Please Update bi thora juldi diya kijiye.
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