मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 23
मैंने मेरे कमरे मे पहुँचकर मम्मी कों जल्दी एसएमएस किया:
"फिन सें भूल गई!!!!"
उनका भि जल्दी जवाबआया:
"क्याँ?"
मैंने थोड़ी शरारत भरी अंदाज मे लिखा:
"अरे, तुम्हें मालूम हैं न् कि रात मे जब तक गरमदूध नहि पीता हूं औऱ मेरेसर केँ बालों मे तुम्हारा हाथ नहि चलता, तब तक मुझेठीक सें नींद नहि आती हैं!!"
संदेश सेंड करने केँ बाद सोचा कि आज मम्मी आएगी क्याँ? साम कों जिस तरीके सें वो नजरें चुराकर चलरही थीं, उसे सोचकर मे समझ नहि पाया कि उनकेमन मे क्याँ विचार हें। अगर आयीं तोँ आज मुझे स्वयं कों रोकना मुश्किल होँ जाएगा। विवाह कां मुहूर्त जितना लगभग आँ रहा हैं, उनको पाने केँ लिए उतना हि बेताब हौ रहा हूं। उन्हें अपना बनाने कि ख्वाहिश भि उतनी हि बढ़रही हैं। उनकेलिए मेरीआग भि बढ़रही हैं। वक्तबीत रहा थां, पर्र मां कां कोई जवाब नहि आया। मे भि समझ नहि पारहा थां कि मम्मी आज क्याँ जवाब देंगी। क्याँ उनके अंदर भि मेरे जैसी चाहत कि भावना नहि बढ़रही हैं? क्याँ वोँ भि मेरे बारे मे सोचकर वो भि आसक्त होती हें? अचानक इस उधेड़बुन केँ बीच मोबाइल बीप करनेलगा। उनका मेसेज आया:
"वो मे जानती हूं। मगर मुझे आपका इरादा मालूम हैं। "
यह पढ़कर मेरे होंठों पऱ एक् मुस्कान खिल गई।
मम्मी हमेशा मेरेमन केँ इरादे सही तरीके सें जान जातीथीं, औऱ आज भि उन्होंने मेरेमन कि बात पकड़ली। फिन भि मैंने भोला बनतेहुए लिखा:
"क्याँ?"
उनका जल्दी जवाबआया:
"आप् बहोत बदमाश बनगए हौ। "
अच्छा, इसीलिए पूरीसाम मुझसे दूर-दूर रहरही थीं। मैंने लिखा:
"ओह, इसीलिए यहा नहि आँ रही हौ! तुम्हें मेरी बदमाशी पसन्द नहि हैं?"
उन्होंने जल्द सें लिखा:
"उन्ह.एकदम नहि। "
अब मुझेबस उनकेमन कि बात जानने कि धुन सवार हौ गई। मैंने लिखा:
"इसलिये मुझसे दूररह रही होँ?"
बस, फटाक सें बीप-बीप करके जवाबआया:
"हम्म.इसीलिए तोँ। "
मेरेसिर पऱ शरारत चढ़ गई औऱ मैंने धीरे धीरे टाइप किया:
"दो दिनबाद क्याँ करोगी? तब भि मुझसे दूर रहोगी?"
मैसेज भेजकर सोचरहा थां कि अब वो क्याँ जवाब देंगी। हालाँकि अब वो पहले सें ज़्यादा सहज हौ गई हें, खासकर जब हम् अकेले होते हें। मे उन्हें नाम लेकर बुलाता हूं औऱ वो एक् प्यारी पत्नि कि तरह मुझसे बात करती हें। तोँ अब मे उनके जवाब कां प्रतीक्षा कररहा थां। अचानक मेरी चिंता कां सिलसिला बीप-बीप कि आवाज़ सें टूट गय़ा। उन्होंने लिखा:
"सोचना पड़ेगा। "
मे समझ गय़ा मम्मी मेरी परीक्षा लेँ रही हें,
औऱ इसमें उन्हें मजा भि मिलरहा होगा। मैंने भि उसीतरह जवाब दिया:
"ओ गोड, अभि भि सोचोगी?"
उन्होंने फटाफट जवाब दिया:
"ह्म्म."
मैंने थोडा सोचकर लिखना शुरुआत किया:
"मगर मुझे मेरी पत्नि। मेरी मंजू हमेशा। ज़िन्दगी भर मेरेपास, मेरी बाँहों मे चाहिए। "
इसबार जल्दी जवाब नहि आया, पऱ प्रतीक्षा भि ज़्यादा नहि करना पड़ा। उन्होंने लिखा:
"ओके, मे उसेबता दूंगी। "
इस जवाब सें मे थोडा चौंक गय़ा। मम्मी क्याँ लिखकर भेजरही हें? वो तौ औऱ किसी कों एसएमएस हि नहि करतीं। ऐसालगा जैसे किसी औऱ केँ लिए टाइप किया होँ, मगर मेरे मोबाइल पर्र सेंड हौ गय़ा। मे समझ नहि पाया। क्याँ उन्होंने गलती सें टाइपकर दिया? मैंने दुविधा केँ संग लिखा:
"किसको?"
उनका जल्दी जवाबआया:
"क्यूं, आपकी पत्नि कों। "
ये पढ़कर मेरे चेहरे पऱ फिन सें मुस्कान आँ गई। मेरेमन मे एक् खुशी कि लहर दौड़ने लगी। मैंने फटाफट टाइप किया:
"ओह, तोँ उन्हें ये भि बताना कि उनका होने वाला पति उन्हें बहोत-बहोत प्रेम करता हैं। उनके बिना जीवन कां एक् समय भि नहि जी पाएगा। "
उन्होंने जवाब दिया:
"ठीक हैं, मे उसेबता दूंगी। ओके। "
मैंने फिन सें लिखा:
"औऱ हाँ, उनकोये भि बताना कि उनके पति केँ दिल मे हमेशा एक् हि सुंदर लड़की थि, हैं, औऱ रहेगी। दुनिया कि सबसे सुंदर औऱ प्यारी लड़की कों पत्नि केँ रूप मे पाकर उनका पति स्वयं कों भाग्यवान मानता हैं। "
उनका जवाबआया:
"मे बता दूंगी, औऱ वो येबात याद रखेगी। "
ये पढ़कर मुझे मालूम हौ गय़ा कि मम्मी बहोत इमोशनल होँ गई हें। उन्हें परेशान करने केँ लिए मैंने लिखा:
"तुमको केसे मालूम कि वो याद रखेगी याँ नहि?"
कोई रिप्लाई नहि आया। मां शायदसमझ गईं कि पिछले एसएमएस मे उन्होंने एक् गलतीकर दि हैं। शायद वो वहीफिन सें पढ़रही होंगी औऱ सोचरही होंगी कि केसेफिन सें बात कों घुमाया जाए। थोड़ी देर प्रतीक्षा करने केँ बाद उनका जवाबआया:
"क्योंकि मे उससेपूछ लूंगी। "
मैंने जल्दी लिखकर सेंड किया:
"तौ अभि पूछो नाँ। "
मम्मी अब थोड़ी अपनी हि बातों मे फंसगईं। वो समझ नहि पारही थीं कि क्याँ रिप्लाई करें। मगर फिन भि उन्होंने लिखा:
"अभि वो बिजी हैं। "
मे हंसते हुए टाइप करनेलगा:
"ठीक हैं, उनको फ्री होने केँ लिएकहो औऱ उनकोबता दो। "
मैंने ये सेंडकर दिया औऱ फोन पकड़कर बैठारहा। बहोत टाइम तक कोई रिप्लाई नहि आया। मे सोचने लगा कि वो क्याँ कररही हें। जबकुछ वक़्त बाद भि कोई रिप्लाई नहि आया तोँ मैंने फिन सें एसएमएस टाइप किया:
"उनसेबात हुइ?"
अब उनका रिप्लाई आया:
"ह्म्मम्। "
मे:
"तुमने पूछा वो येसभी याद रखेगी याँ नहि?"
मम्मी:
"हाँ, पूछ लिया। "
मे:
"क्याँ कहा उन्होंने?"
मां:
"वो येसभी बातें उसकेदिल मे सजाकर ज़िन्दगी भरयाद रखेगी। "
मेरेमन मे उनकेलिए प्रेम भर गय़ा। अब वो इतनी प्रतिबद्ध औऱ समर्पित हौ रही हें, मुझे उनकीइन भावनाओं कि कदर करनी हैं ज़िन्दगी भर। मे उनकेदिल कि बातो कों औऱ जानना चाहरहा थां। मैंने लिखा:
"औऱ कुछ नहि बोलि?"
उन्होंने थोडा वक्त लिया औऱ लिखकर भेजा:
"वो भि अपने होनेवाले पति कों बहोत, बहोत प्रेम करती हैं। पूरी जीवन उनकेसंग, उनको प्रेम करके गुज़ारना चाहती हैं। "
मे भि भावुक हौ गय़ा। उनकेलिए जौ आसक्ति मेरेमन मे थि, वो इन प्यारी भरी बातों केँ बीच आहिस्ता बड़ी होतीजा रही थि। मेरेमन मे उन्हें पाने कि, शारीरिक रूप सें उनकेपास आने कि ख़्वाहिश जोर पकड़रही थि, पर्र अब मे भावुक होनेलगा। मुझे महसूस हुआ कि मेरेऊपर एक् जिम्मेदारी धीरे धीरेबढ़ रही हैं। मे, मम्मी कों खुश रखकर, उनकीहर ख़्वाहिश पूरी करके, उन्हें सारेसुख औऱ मजा देकर उनकी ज़िन्दगी कों रंगीन बना देना चाहता हूं। वो ज़िन्दगी भर पति केँ प्रेम केँ लिए तरसती रही होंगी,
अपनी फेमिली पाने कि चाहत कों दिल मे छुपाकर रखी होंगी, एक् प्यारी पत्नि बनकर ज़िन्दगी गुजारने कां सपनादिल मे दफ़नकर लिया होगा। पऱ आज मे उन्हें सभीकुछ देना चाहता हूं।
इन भावनाओं केँ बीच मेरे मोबाइल पऱ फिन सें एसएमएस आया:
"क्याँ हुआ आपको?"
मैंने मजाक करतेहुए लिखा:
"औऱ कुछ नहि बोला उन्होंने?"
मां समझ नहि पाईं कि मे औऱ क्याँ पूछना चाहता हूं। उन्होंने रिप्लाई मे वही लिखकर भेजा:
"औऱ क्याँ!!??"
मैंने लिखा:
"दो दिनबाद भि क्याँ वो मेरे सें दूर रहेगी?"
थोड़ी देर कि चुप्पी रही, फिन उनका रिप्लाई आया:
"वो इसका जवाब अभि नहि बताएगी। औऱ वक्तआने दीजिये, आपको इसका जवाबमिल जाएगा। "
मुझे मालूम थां कि मां अभि मुँह सें कुछ नहि बताएंगी, औऱ नं हि आज मेरेपास आएंगी। मे बसइनदो दिनों केँ गुजरने कां प्रतीक्षा करनेलगा।
I am flat kya sunder update likha h. I am so lucky kee ye story pad raha hin itne rmotions itni sunderta say likhen h. Writer ko saadar naman
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
bhay ap Agar yah story ko English में type Karte too too mein bi yah story padh sakta thaa kyonki muze Hindi padhani naheen aati sirf bolani Aati h Hindi Akshar muze padhna naheen Aata likhna naheen Aata han Agar Hindi English में likha hu too mein padh sakta hoon aasani से
or sayad Mere jaesa or bi readers h isiliye iss story Ko naheen pad rahe haen lekin mein yah story padhna chahta hoon
kahani bhut seedhi or slow chl rahi h Kuch mod lao like accident ladke kaa or wo river mein bah krr kahi pahunch jata h apni memory kho deta h. Like this naheen too bore lagne lagegi kahani.
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 24
अगलेदिन, यानी कि संडे कि सुभह, मुझे जल्द उठना पड़ा क्योंकि घऱ मे एक् पूजा कां आयोजन थां। ये पूजाउस मन्नत कि थि जौ नानीमा नें मेरेलिए रखी थि जब मे एक् बार बीमार होकर अस्पताल मे भर्ती थां। सभी कहते हें कि विवाह जैसे पवित्र बंधन मे बंधने सें पहले सारे उधार चुका देने चाहिए, इसलिये ये पूजा आयोजित कि गई थि।
पंडितजी हमारे परिवार केँ हि पंडितजी थें औऱ उन्हें मेरे विवाह केँ बारे मे कुछ भि नहि पता थां। वे मात्र मन्नत पूरी करने केँ लिएआए थें।
ड्राइंग रूम मे पूजा होँ रही थि। मे पंडितजी केँ सामने बैठा थां, नानाजी मेरे पीछे दाईंओर थें, नानीमा उनकेबगल मे औऱ मम्मी नानीमा केँ पास, यानी कि मेरे पीछे बैठीथीं।
पूजा ख़त्म होने केँ बाद पंडितजी नें मुझे नानाजी, नानीमा औऱ मां कों प्रणाम करने कों कहा। मे अपनेआसन सें उठकर नानाजी केँ पास गय़ा औऱ उनके पांवछुए। फिन नानीमा केँ पास जाकर झुककर उनके भि पांवछुए। मेरेमन मे ये प्रश्न नहि थां कि मां केँ पेर छूने चाहिए याँ नहि, क्योंकि वोँ मेरी मम्मी हें।
फिरभी दोदिन मे वो मेरी पत्नि बन जाएंगी, फिन भि मे ज़िन्दगी भर उनके पांवछू सकता हूं। पऱ नानीमा कों लगा कि मे दुविधा मे थां कि मां केँ पेरअब छूना चाहिए याँ नहि। इसलिये जैसे हि मे नानीमा केँ पेर छूने गय़ा, नानीमा नें मेरेसर पर्र हाथ रखकर आशीर्वाद दिया औऱ मे झुककर उनके सामने हि रह गय़ा। तब नानीमा नें मुझेकहा, "अबजाओ, मां केँ पांवछू लो। " शायद उन्होंने मुझे औऱ मम्मी दोनों कों ये मेसेज देना चाहा कि विवाह नं होने तक हम् मम्मी-बेटे हि हें।
मे मां केँ पास गय़ा औऱ झुककर उनके पांवछुए। मम्मी सर झुकाकर खड़ीथीं। मुझे हमेशा उनकेउन गुलाबी पैरों कों चूमने कां मन करता हैं, पर्र इस परिस्थिति मे मैंने अपनेमन सें, एक् बेटे कि तरह, उसकी मां केँ पांव छूने कां भाव रखतेहुए उनके पांवछुए।
पूजा थोड़ी देर सें ख़त्म हुईँ, हम् सबने दोपहर का खाना किया औऱ फिन थोडा आराम करनेलगे, क्योंकि साम कों हमें निकलकर ट्रेन पकड़नी थि औऱ रातभर कां सफरतय करना थां। मुझेअब कुछ सोचने कां मौका नहि पारहा थां। सभीकुछ इतना जल्द होँ रहा थां। हम् रेडी होकर, सारा सामान लेकर, कैब सें स्टेशन पहुँचे औऱ वक्त होते हि ट्रेन मे सवार हौ गए।
मां नें आज एक् पिंक साड़ी पहनी हुईँ थि। उस साड़ी सें औऱ उनके चेहरे सें जोँ चमक आँ रही थि, वो सभी मिलकर उन्हें बेहद सुंदर बनारहे थें।
मेरेमन मे एक् खुशी कां झोंका सां आँ गय़ा। मे सोचरहा थां कि ये प्यारी, खूबसूरत, हसीन औऱ सेक्सी लड़कीकुछ टाइमबाद मेरी पत्नि बन जाएगी। औऱ वो मेरी, सिर्फ मेरी हि हौ जाएगी।
मे उन्हें देखता रहा औऱ वो बस सबके सोने कां इंतजाम करने लगीं। नानाजी-नानीमा नीचे कि बर्थ पर्र सोगए। मे औऱ मां ऊपर कि बर्थ मे थें। मे अपने बर्थ पर्र लेटकर उनकीतरफ घूमकर मात्र उन्हें हि देखता रहा। उन्होंने कुछ टाइमबाद इसे महसूस किया औऱ फिन मेरीतरफ देखकर एक् स्माइल दि, फिन शर्माकर मेरीसो गईं। मे उनकीओर देखते-देखते बहोत उत्तेजित हौ गय़ा। मेरा लंड फिन सें सख्त होनेलगा। उनकी पतलीकमर औऱ हिप्स पऱ नज़र गई।
फिनऊपर जाकर उनकी सुडौल गर्दन पर्र नजर पड़ते हि मे उत्तेजना केँ चरम पर्र पहुँच गय़ा औऱ अनजाने मे मेराहाथ मेरे पजामे केँ अंदर जाकर मेरे लोड़े तक पहुंच गय़ा।
मैंने बस एक् बार मुठ्ठी सें पकड़ केँ अपना लंड छू लिया औऱ फिन थोड़ी देरबाद छोड़ दिया। स्वयं कों नियंत्रित करतेहुए, मैंने सोचा कि अबबसदो दिन औऱ हें। उसकेबाद, मेरा लंड उस स्थान मे होगा जहाँ सें वोँ दुनिया मे आया थां उस टाइम मे संसार मे सबसे ज़्यादा मजा महसूस करूँगा।
हम् सुभह 5:30 बजे बांद्रा टर्मिनस पऱ उतरगए। गर्मी कां मौसम थां, औऱ सुभह कि नरम शीतलहवा बहोत अच्छी लगरही थि। नानाजी-नानीमा मुंबई आकर थोड़े उदासीन भि हौ गए। नानाजी कि विवाह केँ बादवे लोगकुछ दिन मुंबई मे रहे थें। यहा नाना नें बिज़नेस शुरुआत किया थां औऱ बाद मे अहमदाबाद शिफ्ट हौ गए थें। वहीं मम्मी कां जन्महुआ थां औऱ आज तक वे वहीं अपनाघऱ बना चुके थें। आजयहा फिन पूरे परिवार केँ संगआकर वे थोड़े भावुक हौ गए।
हम् स्टेशन सें कैब लेकर उसमें सारे लगेजलोड करके रिसॉर्ट केँ लिएचल पड़े। लगभग डेढ़ घंटे कां मार्ग थां। मां सुभह सें चुपचाप थीं, मात्र नानीमा केँ संगकुछ बातचीत कररही थीं। मैंने नज़र चुराकर दो-चार बार उनकोदेख लिया। मेरामन अब खुशी सें हंसरहा थां। मां केँ अंदर भि एक् खुशी कि उत्तेजना फैली हुईँ थि, औऱ ये उनके चेहरे, आँखों कि हलचल औऱ शारीरिक हरकतों सें साफझलक रहा थां।
वो नानीमा केँ हि आस-पास घूमरही हें, नानीमा केँ संग हि चलरही हें। वो मेरीतरफ देख हि नहि रही हें। मे सोचता हूं कि मम्मी केँ मन मे क्याँ मेरेलिए, मेरे प्रेम केँ लिएकोई तूफ़ान होँ रहा हैं याँ ये सिर्फ मेरे अंदर हि हैं? आज बहोत दिनबाद हम् पूरी फॅमिली घऱ सें एकसाथ बाहर् आए हें, सबको अच्छा लगरहा हैं। मे भि मां केँ संग बहोत दिन सें ऐसादूर कहींआया नहि थां, इसलिये आजइस मुंबई शहर मे हम् एकसाथ आकर हमारे बीच कि बांडिंग सबको महसूस होनेलगी हैं।
हम् एक् फॅमिली हें, सभी एक्-दूसरे केँ लिए हि हें, औऱ अब तोँ औऱ भि नज़दीक रिश्ते मे जुड़ने जारहे हें। कोई अंजान लड़की नहि, इसघऱ कि बेटी हि इसघऱ कि बहु बनकर आँ रही हैं। इसीघऱ कां बेटा इसीघऱ कां दामाद बनकर ज़िन्दगी भर एक्-दूसरे सें जुड़े रहने कां बंधन बाँधने जारहा हैं।
कैब मे मे ड्राइवर केँ पास बैठा हूं। पीछे नानाजी, नानीमा औऱ उनकेपास मम्मी बैठी हुईँ हें। आजऐसा लगरहा हैं जैसे नानीजी कि बेटी विवाह करकेदूर चली जाएगी, उनकाघऱ खाली हौ जाएगा। इसीलिए, जितना टाइम मिले, मम्मी औऱ बेटी एक् संग रहकर अपनेमन कि प्यास मिटापा रही हें। नाना जाते-जाते एक्-एक् स्थान दिखारहे हें औऱ वहां कि बातें बतारहे हें। नानीजी भि बीच-बीच मे उनकासंग देकर बातों कां लिंक जोड़रही हें।
मे आगे बैठा हूं, पीछे नानाजी कि बातें सुनने केँ लिए बीच-बीच मे पीछे मुड़कर देखरहा हूं औऱ तभी एक् झलक मां कों देख लेता हूं। मां बस बाहर् कि तरफनजर टिकाए हुए हें, मगर मालूम पड़रहा हैं कि उनकामन हमारे बीच मे हि हैं।
उनके होठों पर्र हल्की सि मुस्कान औऱ आँखों मे लाज औऱ लज्जा कि जौ छायादिख रही हैं, उससेपता चलता हैं कि वो मन मे एक् खुशी कि अनुभूति महसूस कररही हें, पऱ एक् बार भि मुझसे नजर नहि मिलारही हें।
बाहर् सें हवाआकर मम्मी केँ माथे केँ ऊपर केँ कुछबाल उड़ाकर उनके चेहरे पऱ फेंकरही हैं।
मम्मी बार-बार हाथ सें उन बालों कों हटाकर अपनेकान केँ पीछे लें जाकर समेटने कि कोशिश कररही हें।
उनकेइस तरह हलकी-हलकी मुस्कुराते हुए चेहरे सें बाल हटाने कां स्टाइल देखकर मेरेमन मे उनकेलिए प्रेम औऱ सेक्स दोनों हि जागरहा हैं। एक् अनिर्वचनीय अनुभूति मुझे घेरेहुए हैं, औऱ इसकापता चलता हैं मेरे जीन्स केँ अंदर मेरे लोड़े कि बेचैनी सें। मे अपने लंड कों दबाकर पेर केँ ऊपर दूसरे पांव चढ़ाकर, पीछे मुड़ने केँ लिए दाहिने हाथ कों हेडरेस्ट केँ ऊपर रखकर तिरछा बैठाहुआ हूं। नाना कि बातें सुनने सें ज़्यादा मेरा इरादा मां कों चोरी-चोरी देखने कां हैं। पर्र मे इसतरह पीछे मुड़कर बैठा हूं कि मां कों मेरे देखने कां अहसास हौ रहा हैं।
वो मेरे प्रति अपनी संवेदनाओं कों शायद महसूस कररही हें, मगर अपनी नज़रों कों बाहर् सें अंदर कि ओर नहि मोड़रही हें। पिछली बार, जब हम् घऱ लौटे थें, मुझे उन्हें छूने कां अवसर मिला थां, मगरइस बार वो मेरे नज़दीक नहि आँ रही हें। मे उन्हें अपनी बाहों मे भरकर, अपने सीने सें लगा लेने कि कल्पना कररहा हूं। उनके उड़ते बालों मे अपनीनाक डूबोकर उनकी खुशबू लेने कि ख़्वाहिश हैं, मगर शायदये ख्वाहिश विवाह सें पहले पूरी नहि हौ सकेगी। सुहागरात मे, मे उनकेतन औऱ मन दोनों कों प्रेम औऱ मात्र प्रेम सें पूरीतरह भर देना चाहता हूं। हम् सुभह कि खाली मार्ग पर्र जल्द सें रिसोर्ट पहुँच गये।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Next part miss mat karna
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