मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 20
मैंने अपने मुंह कों उनके दूसरे कान केँ पास लेँ जाकर चूमा, तौ उन्होंने अपनेसर कों घुमाकर मेरे दूसरे कंधे पर्र रख दिया औऱ गर्दन कों थोडा हिलाकर मुझे औऱ स्थान दि।
मैंने अपनाहाथ उनकीकमर सें हटाकर उनकीपीठ पऱ रखा औऱ मेरी उंगलियाँ उनके ब्लाउज़ केँ नीचेचली गईं। मुझे अपनी उंगलियों सें उनके ब्रा कां लम्स महसूस हुआ औऱ मे दीवाना होँ गय़ा। फिन मैंने अपने मुंह कों उनके गोरे औऱ नर्म कंधे पऱ रखकर एक् हल्का काट लिया। तभी मम्मी नें एक् तेज़ सिसकी केँ संग अपनी बुर कों मेरे लिंग केँ ऊपरदबा दिया। मे समझ गय़ा कि अब वो क्याँ चाहती हें। मैंने जल्दी अपना मुंह औऱ नीचे करके उनके क्लीवेज मे अपनीनाक डुबो दि औऱ जोर सें एक् सांसली।
तभी उनके हाथों कि उंगलियाँ मेरीपीठ पऱ ज़ोर सें दबगईं। मेरे गालों पर्र उनके नर्म स्तनों कां हल्का स्पर्श दोनों तरफ सें होँ रहा थां। ऐसालग रहा थां मानो मे अपने पजामे केँ अंदर हि झड़ जाऊंगा। मगर मे ये नहि चाहता थां। मे उनके अंदर स्खलित होना चाहता थां। मैंने स्वयं कों थोडा काबू मे करतेहुए सीधा खड़ा हौ गय़ा औऱ दोनों हाथों सें उनकीपीठ पकड़कर उनके चेहरे कों देखा। अब मेरी आँखों मे नशाउतर आया थां।
मे उसी नशीली नज़र सें उनके चेहरे कों देखरहा थां। उनके नर्म, पतले गुलाबी होंठ काँपरहे थें। उन्होंने भि आँखें खोलकर मुझे देखा। उन्हें भि नशा हौ गय़ा थां। हम् दोनों एक्-दूसरे कि आँखों मे देखरहे थें। दोनों कि साँसें तेज़ी सें चलरही थीं। मैंने अपने बॉल्स केँ अंदर कि खलबली कों काबू मे करने केँ लिए अपने होठों कों आहिस्ता नीचे लेँ जाकर उनके माथे केँ पास लेँ गय़ा औऱ उनके माथे कों चूमा। फिन उनकेनाक कों धीरे-धीरे सें चूमा। फिन उनके ठोड़ी कों। हर किस्स केँ टाइम वो कुछ लम्हा केँ लिए अपनी आँखें मूंदकर मेरे प्रेम कों महसूस कररही थीं। दोनों कि गर्म साँसें एक्-दूसरे केँ चेहरों पऱ महसूस हौ रहीथीं।
उनके गुलाबी होंठअब मुझे अपनीतरफ खींचरहे थें। मे मदहोश होकर अपनी आँखें बंद करके धीरे धीरे अपने होंठ उनके होंठों केँ ऊपर लें गय़ा। मेरे होंठ स्पर्श करगए। वो हिस्सा बहोत नरम औऱ गर्म थां। थोडा औऱ अच्छी तरह सें महसूस करने केँ लिए अपने होंठों कों हल्का खोलते हि अचानक मेरे दिमाग़ मे कुछ संकेत आया। मैंने जल्दी आँखें खोलीं औऱ देखा कि मेरे होंठ औऱ मम्मी केँ होंठों केँ बीच उनकाहाथ रखाहुआ हैं औऱ मे उनकीनरम हथेली पर्र चूमरहा थां। उनसे नज़र मिलते हि उनकी आँखों मे एक् लज्जा औऱ मुस्कान दिखाई दि। मे रुक गय़ा। समझ नहि आया कि अचानक उन्होंने ऐसा क्यूं किया। मैंने अपनी सांस कों काबू मे रखतेहुए फुसफुसाते हुएकहा, "क्याँ हुआ?"
वो अपनी हथेली कों वैसे हि रखकर अपना चेहरा आधा छुपाकर नजर झुकाली औऱ फुसफुसाते हुए बोलि, "औऱ नहि.बस."
मे थोडा उदास होँ गय़ा। अचानक ऐसे रुकने केँ कारण मुझे थोडा क्रोध भि आँ रहा थां। मेरा लौड़ा उसकी पसंदीदा स्थान पऱ प्रवेश करने केँ लिए बेताब हौ रहा थां। फिन भि, धीरे-धीरे सें मैंने पूछा, "क्यूं?"
वो अबनजर उठाकर मेरीतरफ देखी औऱ रुक-रुक कर बोलि, "आपको.मे.आपके पास चाहिए थि नाँ! पास तोँ आँ गई."
मैनेसाम कों जोँ sms किया थां। मुझे मेरी पत्नि मेरेपास चाहिए, माँ उसीबात कों लेकरयह बातकह रही हैं पऱ मुझसे अब औऱ रुका नहि जारहा थां। मे उनके अंदर अपना लंड घुसाकर मेरे फुलेहुए बड़े टोपे कों गहराई मे लेँ जाकर मेरे बॉल्स कां सारा वीर्य उनके अंदर छोड़ केँ शांत होना चाहता थां। मे आवाज़ मे थोडा औऱ प्रेम औऱ पैशनला कर फुसफुसाया
"नहीं.मुझे औऱ पास चाहिए"
यहबोल कर मैने दोनों हाथों सें उनको मेरीतरफ खींचा। उन्होंने अपनी हथेली वैसे हि रखतेहुए, थोडा नटखट सां बनकर आँखों मे औऱ मुस्कराहट लाकर एक् दम फुसफुसाकर कहा
"तौ.वक्तआने दीजिये."
मे समझ गय़ा अब वो किसी भि हालत मे कुछ करने केँ लिए सजधजकर नहि हैं। शायद उन्हें औऱ वक्त चाहिए उनके बेटे केँ संग, जोँ अब उनका पति बननेजा रहा हैं, स्वयं कों पूरीतरह सें समझाने केँ लिए। मे उनकी ख़्वाहिश केँ खिलाफ कोईकदम उठाकर उन्हे दुःख नहि पहुंचाना चाहता थां। उन्होंने अपनेबदन कों 18 सालों सें किसी कों नहि दिया हैं औऱ नं हि किसी कों अपनेदिल मे पति केँ रूप मे बिठाना चाहा। मगर आज वो मेरेपास सभीकुछ मात्र मुझे देने केँ लिए सजधजकर हैं। वो मेरी पत्नि बनने केँ लिए सजधजकर हैं औऱ मुझे उसका सम्मान देना चाहिए। मुझेपता हैं कि अब वो मेरी हैं। मुझे जिंदगी भर उससे प्रेम करने कां अवसर मिलेगा औऱ मे भि सिर्फ उसको हि प्रेम करना चाहता हूं। मे उन्हे अपनी पत्नि केँ रूप मे पाना चाहता हूं, इस जन्म सें अगलेसात जन्म तक।
अब वर्तमान मे.
ट्रेन मे लाइट्स ऑफ करकेसभी सोगए। मे भि अपनीसीट पर्र एक् बेडशीट बिछाकर औऱ दूसरी बेडशीट कों ओढ़कर सो गय़ा। गर्मी कां टाइम होने केँ बावजूद, ट्रेन केँ भीतर कां माहौल एकदम ठंडा थां। मे आख़री बारइस तरह, यानी कि एक् बैचलर व्यक्ति कि तरह MP मे वापसजा रहा हूं। अगलीबार जब मे वापस जाऊँगा, तब मे एक् मैरिड व्यक्ति कि तरह अपनी पत्नि केँ संग लौटूंगा।
मुझेतब पाता नहि थां कि ये हफ्ता मेरे जिंदगी कां सबसे लंबा हफ्ता बन जाएगा। दफ़्तर केँ काम केँ दबाव कों संभालते हुए, मैंने अपनेनए जिंदगी कि शुरुआत केँ लिएसब तैयारियाँ करनी शुरुआत कर दि थि। घऱ कि सब जरूरी चीजें एक्-एक् करके अरेंज गईंथीं। अब तक मे एक् सिंगल बेड पर्र सोता थां, मगरअब हम् दोनों केँ लिए एक् डबलबेड भि खरीद लिया हैं।
नए गद्दे औऱ पिलोसब गहरे रंगों मे चुनेगए थें। छोटेबेड कों हॉल मे रख दिया गय़ा हैं।
मे एक् दुविधा मे थां, मुझे विवाह केँ लिएकम सें कम तीन-चार दिन कि छुट्टी चाहिए थि, जबकि मैंने दफ़्तर मे नई ज्वाइनिंग कि थि। काम कां दबाव भि थां, औऱ मुझेये भि दिखाना थां कि मेरेपास एक् सटीक कारण होँ। यदि मे अधिक लंबी छुट्टी केँ लिए आवेदन करता हूं, तोँ मेरेटीम मेंबर्स मुझसे इसका कारण जानना चाहेंगे। औऱ मे उन्हे केसे बताऊं कि मे विवाह केँ लिएजा रहा हूं। अगरये बता दि तोँ उनसभी कों इनवाइट करना पड़ेगा। औऱ अगर उनमें सें कोई मेरी विवाह अटेंड करना चाहे तौ फिनसभी गड़बड़ हौ जाएगा। मुझेये सभी कायदे सें संभालना पड़ेगा जैसे विवाह केँ बादजब मे वापस आऊंगा, तोँ सबकोपता चलेगा कि मैंने विवाह करके अपनी पत्नि कों संग लाया हैं। मगरउस टाइम मे कुछ भि बताकर स्थिति कों संभाल सकता हूं। मे येकह सकता हूं कि मुझे जबरदस्ती लड़की दिखाने लेँ गए थें औऱ जबउसे मनपसंद कर लिया गय़ा, तौ घरवालों नें जल्दी एक् दिन केँ अरेंगमेंट मे विवाह करवा दि। इस मे उन्हें एक् छोटा सां रिसेप्शन दे दूंगा, ताकिसभी झमेला खत्म हौ जाए। इसलिये, मैंने मात्र तीनचार दिन कि छुट्टी केँ लिए आवेदन किया हैं। अगर एक् दिन एक्स्ट्रा लगे, तौ मे मोबाइल पऱ बता दूंगा औऱ छुट्टी लेँ लूंगा।
नाना सें जब फ़ोन पे बात होँ रही थि, तब उन्होंने ये सुनकर कहा कि अगरकुछ दिन अधिक छुट्टी मिलती तौ अच्छा होता। पऱ अब क्याँ करें?फिन उन्होंने मुझे रिसोर्ट बुकिंग केँ बारे मे सभी बताया। ऐसेकम लोगों कां विवाह सुनकर रिसोर्ट वाले चौंकगए। बाद मे नाना अपने हिसाब सें एक् कहानी बनाकर बोल दि, मगरफिन उन्होंने पैसे अधिक मांगे। नाना मुझसे कुछ बोलने मे झिझकरहे थें। मे समझ गय़ा कि वेकुछ कहना चाहते हें, मगरबोल नहि पारहे थें। मैंने पूछा, "क्याँ हुआ नाना? क्याँ वेलोग औऱ कुछ मांगरहे हें?" तोँ नाना नें कहा, "नहि, पर्र वेलोग तौ ऐसी सुनसान विवाह देखकर समझे कि शायद हम् लड़की कों भगाकर विवाह करवारहे हें। कोई गेस्ट याँ रिलेटिव्स नहि आँ रहे हें। इसलिये वेलोग जानबूझकर सभी ज्यादा रेटलगा रहे हें। वो लोगों नें कहा कि अगर दूल्हा याँ दुल्हन सें एकबार बात होती, तौ वेलोग कुछ आमेनिटीज़ केँ बारे मे बातकर सकते हें। हौ सके तौ तुम् पताकर लो, क्याँ कहना चाहते हें याँ क्याँ कुछ हैं। मे नंबर। Sms कर देता हूं। " थोड़ी देरबाद नाना कां sms आया, तौ मैंने रिसॉर्ट केँ नंबर पऱ कॉलआई किया। मैने मेरा परिचय दिया कि अगले मंगलवार कों एक् विवाह कि बुकिंग हुईँ हैं। हम् बस 4 लोग आएंगे, मे हि दूल्हा हूं। आप् लोगकुछ आमेनिटीज़ केँ बारे मे बोल्ना चाहते हें।
उन लोगों नें मुझे पहलेविश किया। फिन मेरे जिंदगी कां एक् महत्वपूर्ण अध्याय उन लोगों केँ रिसॉर्ट सें शुरुआत होँ रहा हैं, इसलिये मैंने उन्हें भि अभिनंदन जताया। फिन बताया गय़ा कि वेलोग विवाह केँ सब व्यवस्थाओं केँ संग-संग विवाह केँ बादकुछ सुविधाएँ भि प्रदान करते हें। उन लोगों कां रिसॉर्ट मुंबई मे एक् खाड़ी केँ पास स्थित हैं, जोँ आगे बढ़कर अरब सागर सें मिलती हैं। यहावे विवाह केँ बाद दूल्हा-दुल्हन केँ हनीमून केँ लिए बेहद हसीन स्टीमर प्रदान करते हें।
इस स्टीमर कों रिसॉर्ट केँ पास खाड़ी मे एक् निजी छेत्र बनाया गय़ा हैं, जहांरात भर बर्थडे पार्टी कर सकते हें याँ फिन खाड़ी मे उनका जहाज खड़ारह सकता हैं। ये लग्जरी प्राइवेट स्टीमर हैं। ऊपर केँ डेक मे सीटिंग अनुभव करने कां बंदोबस्त हैं। चारों ओर सें हवाआने केँ लिए बड़ी बड़ी खिड़कियां हें। डेक सें सीधे एक् सीडी नीचे जाती हैं। नीचे एक् रूम हैं, जिसमें अच्छा बैड, टॉयलेट, टेलीविज़न, फ्रिज, औऱ शॉवर हैं। इस कमरे कों सुहागरात केँ लिए फूलों सें सजाकर दिया जाता हैं। नीचे जाने केँ बादऊपर कां दरवाजा लॉक किया जाता हैं, औऱ कोई भि डिस्टर्ब नहि कर सकता। यहा रातभर सुहागरात मनाने कां अद्वितीय अनुभव होता हैं। मैंने मोबाइल पऱ इनसब जानकारियों कों लिया औऱ रेट भि पूछा।
koy dikkat nahi bas ek bata du bhay kabhee achi cheezon ko waqt lagata h , ap k kahani ko vaahi jyada comment karte h joo iss say jude h mansik toor pe so ap jaab ap ko waqt mile ap story ko likhiye haam sadaayv ap k sath h.
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 21
लञ्च ब्रेक मे मम्मी कां मोबाइल आया। उन्होंने मुझसे पूछा कि मे घर-मकान मालिक सें मिलकर आया कि नहि। इसबात केँ बारे मे कलरात मां सें बात हुई थि, औऱ आज मुझे जानां थां पर्र मे गय़ा नहि, इसलिये उन्होंने मुझेअब फिन सें मोबाइल करकेयाद दिलाया। मैंने उनसेकहा कि आजघऱ लौटने केँ वक़्त मिलकर आऊंगा।
औऱ उस चक्कर मे रात कों लौटते वक़्त थोड़ी देर हौ गई। घर-मकान मालिक एक् अच्छे इंसान हें, पर्र बहोत बातें करते हें। वो मुझे देखकर हि बोलने लगे कि मेरे नाना केसे हें, कब आएंगे यहां, वे कितने अच्छे इंसान हें, उनसेफिन सें मिलना चाहते हें वगैरह वगैरह। मैंने उन्हें बताया कि मे विवाह करके पत्नि कों लेकर आँ रहा हूं, औऱ घऱ कि सब व्यवस्थाएँ सुधारना चाहता हूं। मेरी विवाह केँ बारे मे सुनकर हज़ारों प्रश्न पूछने लगगए। मुझे किसीतरह सें उनसे छुटकारा मिला।
रात मे डिनर केँ बादफिन मां कों मोबाइल किया। मे दिनभर उनसेउस रिसोर्ट केँ बारे मे बात करनाचाह रहा थां पर्र सहीतरह सें मौका नहि मिला। मैंने उन्हें रिसोर्ट वालों सें हुएसब बातचीत केँ बाते मे बताया। वेसभी सुनकर चुप होँ गईं, मात्र उनकी सांसों कि आवाज़ आँ रही थि। मैंने थोड़ी देरबाद चुप्पी तोड़ते हुए पूछा कि क्याँ वो उसरात वहां रुकना पसन्द करेंगी? वोँ यहबात सुनकर शर्मा गई, मे महसूस करपारहा थां कि वे कितनी शर्माई हुईँ हें। उसकेबाद भि उन्होंने जवाब नहि दिया। मैंने फिन सें पूछा। उन्होंने धीरे-धीरे सें, लज्जा सें बोला कि उन्हें वहां उनके मां-पिताजी केँ सामने लज्जा आएगी, औऱ वे सीधे मेरेसंग हमारे नएघऱ पर्र आनां चाहती हें। मे समझ गय़ा कि रिसोर्ट मे नानाजी-नानीमा केँ रहतेहुए, मेरेसंग यानी कि अपने स्वयं केँ बेटे केँ संग सुहागरात मनाने मे उन्हें लज्जा औऱ लाज कां सामना करना पड़ेगा। इसलिये वे चाहती हें कि हम् यहां आँ जाएं, इस घऱ मे जौ हम् दोनों कां नयाघऱ बनेगा, मे उनकीहर ख़्वाहिश कों पूरा करने केँ लिए उत्सुक हूं। वेऐसे चुप होकररह गईं, मेरामन खुशी सें काँपरहा थां। मैंने अपनेमन मे शक्ति जुटाई औऱ धीरे-धीरे सें पूछा,
"ठीक हैं, हम् मुंबई सें दोनों यहां आजाएंगे?"
फिन मे थोडा रुक केँ बोला,
"मे एक् बातपूछ सकता हूं?"
वो धीरे-धीरे सें बोलीं,
"पूछिए?"
मैंने प्रेम सें धीरे-धीरे सें पूछा,
"तुम् हनीमून नहि जानां चाहती हौ?"
मुझेलगा कि वोँ इसबात कों सुनकर थोडा कांपउठी, शायद अंदर सें वो हिल गई थि। उसने काँपती हुईँ आवाज़ सें जवाब दिया, जिससे मुझेलगा कि शायद एक्-दो आँसू भि गिरगए हों। वो फुसफुसाते हुए बोलि,
"मैंने कभी सोचा नहि थां कि मुझे ज़िंदगी मे इतनासुख, इतनी ख़ुशी मिलेगी। मुझे इतना प्रेम मिलेगा?"
यह बोलकर मम्मी रुकगईं। वो चुपके सें रोरही थीं। मेरे छाती मे कष्टहुआ। मे उन्हें रोतेहुए नहि देख सकता थां। चाहे वो खुशी केँ आंसूहों याँ दुख केँ, मुझे उनकी आँखों सें एक् भि बूँद आंसू निकलने नहि देना थां। फिन उन्होंने स्वयं कों थोडा कंट्रोल करकेकहा,
"मे जानती थि, कोई भि लड़की आप् कों पति केँ रूप मे पाएगी तोँ वो दुनिया कि सबसे अधिकखुश नसीब होगी। आपका प्रेम पाकर, मेराये जन्म सार्थक होँ गय़ा। मे ये प्रार्थना करती हूं कि मे आपको हमेशा खुशरख पाऊं। आपकी खुशी मे हि मेरी खुशी हैं। आप् मुझेअगर पेड़ कि छाँव मे घऱ बसाने केँ लिए भि कहेंगे तोँ मे वहा भि आपको सारी खुशियाँ देना चाहती हूं। ज़िंदगी कि आख़िरी सांस मे भि मे आपकी बाँहों मे रहना चाहती हूं। मे आपका दियाहुआ सिन्दूर मांग मे लेकर मरना चाहती हूं."
मां यह बोलकर फिन सें रो पड़ी, मे विचलित होँ गय़ा।
उन्हें सांत्वना केसेदूं, येसमझ नहि पारहा थां। मेरी सारी बातें, सभीकुछ जोँ मैंने कहा, सारा प्रेम, वो सभी उनकेदिल मे अटकाहुआ थां। मे भि भावुक होँ गय़ा थां। मे धीरे-धीरे सें उनसे बोला,
"अरे, दुनिया कि सबसे अधिक सुंदर औऱ प्यारी लड़कीजब रोती हैं, तौ मुझे सबसे ज्यादा कष्ट होता हैं। औऱ वो लड़कीअगर मेरी पत्नि हौ, तोँ उसी कष्ट सें मेरादिल टूट जाता हैं। फिन भि तुम् रोओगी??"
मेरीउन बातों सें उन्होंने स्वयं कों थोडा संभाल लिया। फिन संवेदनापूर्ण आवाज़ मे थोडा नकली क्रोध दिखाते हुए बोलि,
"बस। हमेशा झूठ बोलकर मुझेखुश करने कि ज़रूरत नहि, मे जानती हूं। मे इतनी सुंदर नहि हूं, औऱ मे अभि भि आपकी पत्नि नहि बनी??"
मे समझ गय़ा कि वो आहिस्ता सहज होँ रही हैं। फिरभी अभि भि थोडा-थोडा सिसकी कि आवाज़ आँ रही थि, मगर वो स्वयं कों संभाल रही थि। मैंने भि स्थिति कों हल्का करने कां प्रयास किया। मेरेदिल कि बात, मेरी अंतरात्मा कि बात कों आसानी सें व्यक्त करनेलगा औऱ कहा,
"मे सचमुच भाग्यशाली हूं कि ऐसी हसीन औऱ प्यारी लड़की कों अपनी पत्नि केँ रूप मे पासका। क्याँ तुम् स्वयं केँ दिल पर्र हाथ रखकरकह सकती हौ कि तुम् मेरी पत्नि नहि होँ?"
इसबार वो थोडा हंसी औऱ शर्मा गई। फिन उसने एक् सिसकी केँ संग रोनाबंद करके धीरे-धीरे सें कहा,
"अगर मे आपकी पत्नि होती तोँ आप् मुझे मेरेनाम सें बुलाते??"
मे उसबात पऱ स्वयं हि हंस पड़ा। मे अक्सर मां सें बात करते टाइमकुछ नहि बुलाता हूं। औऱ वो हमेशा मुझसे कहती हें कि वो नहि चाहतीं कि मे उनका बेटा बनकर रहूं। वो चाहतीं हें कि मे उनका पति बनकर अपने आप् कों उनके पति केँ रूप मे स्वीकार करलूं। मैंने उनसेकहा,
"मुझे नानाजी-नानीमा केँ सामने नाम सें बुलाने मे लज्जा आएगी। "
उन्होंने कहा,
"तोँ ठीक हैं, मां-पिताजी केँ सामने नं बोलिए, मगरजब वेलोग न् हौ, तब तोँ कह सकते हें। "
मैंने थोडा रुक-रुक करकहा,
"हाँ, तब कह सकता हूं?"
बोलते हुए दोनों चुप होँ गए, एक् दूसरे केँ संग मोबाइल पर्र खामोशी सें प्रेम जताते हुए। थोड़ी देरबाद मैंने धैर्यपूर्वक पूछा,
"तौ अब बताओ?"
वो गले मे एक् मिठास औऱ प्रेम लेकर धीरे-धीरे सें पूछी,
"क्याँ?"
मैंने आँखें बंद करके फुसफुसाया,
"मेरी मंजु कहां जानां पसन्द करेगी हमारे हनीमून पऱ?"
उनको पहलीबार नाम सें बुलाते हुए खुदको एक् अलगनशे मे महसूस किया। वो भि मेरे जैसे प्रेम केँ नशे मे बंध होकर फुसफुसाई,
"आप् जहाँ लेकर जाएंगे, आपकी मंजु आपकेसंग जाने केँ लिए रेडी हैं?"
इस इमोशनल मोमेंट केँ बाद सें, मैंने उनकोउसी नाम सें बुलाना शुरुआत किया हैं। औऱ पिछले दो दिनों सें ऐसा हि चलरहा हैं। अब मम्मी स्वयं कों पहले सें ज़्यादा मेरी पत्नि महसूस कररही हैं, औऱ मे भि उन्हें पहले सें ज़्यादा मेरी पत्नि महसूस कररहा हूं।
parkas bhay ap har update ko like karte hu or Praise bi karte hu halanki kabhi in basic compliments k alwa bi kuch bola Karo. ap logo k genuine comment milte h toh achaa lagta h.
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 22
मैंने मेरी होने वाली पत्नि केँ लिएकुछ गिफ्ट्स खरीदे। जितने दिन सें मे जॉबकर रहा हूं, तब सें मेरा सारा रुपया बैंक मे जमा होँ रहा हैं। मेरी तनख्वाह भि अच्छी हैं, औऱ पिछले कुछ महीनों सें मेरे खाते मे बहुत रुपया जमाहुआ हैं। हाँ, मुझेपता हैं कि मे अब परिवार शुरुआत करनेजा रहा हूं, तोँ मुझे पैसों कि जरूरत होगी। फिन भि मैंने मम्मी केँ लिएकुछ अच्छे तोहफा खरीदे हें।
एक् हसीनहार खरीदा,
औऱ आजकल केँ ट्रेंड मे जैसेसब लड़कियाँ एक् पेर मे पतलीचेन जैसी पायल पहनती हें, वैसे हि मैंने एक् पायल खरीदी।
उनके गुलाबी पैरों मे वो पायल बंधेगी तौ वो औऱ भि आकर्षक दिखेंगी। फिन मैंने कुछ साड़ियाँ भि लीं। यह सभी मैंने अलमारी मे रख दिया हैं, उनकेलिए। जब वो यहाआकर अलमारी खोलेंगी, तोँ ये उनकेलिए एक् सरप्राइज होगा।
इन सभी व्यस्तताओं केँ बीच पूरा हफ्ता केसे निकल गय़ा, ये मुझेपता हि नहि चला। शायद विवाह कां दिन जितना नजदीक आँ रहा थां, मन उतना हि चंचल हौ रहा थां। इसवजह सें शायद मेरेमन नें टाइम कां ख्याल हि नहि किया। मुझेबस यहा एमपी मे मम्मी केँ आने सें पहलेसभी कुछठीक करके रखना थां, औऱ वो अब होँ गय़ा। अब उनका मायका औऱ ससुराल दोनों हि एक् हें, इसीलिए मैंने एमपी केँ घऱ कों उनके ससुराल जैसा बनाने कि कोशिश कि। यही उनके पति कां घऱ होगा।
मैंने दफ़्तर मे हस्ताक्षर करकेघऱ जाकरबैग वगैरह उठाया औऱ दौड़कर स्टेशन जाकर ट्रेन पकड़ी। हालाँकि मैंने टिकट पहले सें बुककर रखी थि। मैंने अपनेकुछ कपड़े औऱ जरूरी सामान लेकरबैग पैक किया। मुझे तीन-चार दिन रहना हैं, मुंबई भि जानां हैं। विवाह कि शेरवानी तौ बन गई हैं, बाकीकुछ नए कपड़े भि खरीदे थें। विवाह मे मां केँ लिए जौ भि चाहिए, सभी नानाजी-नानीमा खरीदरहे हें। मुझेबस जानां हैं, विवाह करनी हैं औऱ अपनी पत्नि कों लेकर आनां हैं। औऱ इसबात पर्र मे मम्मी कों दुल्हन केँ भेष मे कैसी लगेगी, आँखें बंद करके उन्हें सोचने लगा।
आज तक मे सिर्फ उनका सुंदर चेहरा, लंबागला, सुडौल गर्दन, गोल-गोल हाथ, गुलाबी रसीले छोटे-छोटे पेर, औऱ फ्लैट सेक्सी पेट हि देखा हैं। बार-बार इन सबकीझलक मन मे आने लगती हैं।
पिछले छह सालों सें मैंने उन्हें कितनी बार अपनी बाँहों मे, अपनेपास, अपनेबदन केँ संग मिलाकर कल्पना कि हैं। औऱ आज हमारा नसीब हमें पति-पत्नि बनाकर जीवन गुजारने कां सुनहरा मौकादे रहा हैं।
मेरेमन मे उनकीओर प्रेम इसलिये बढ़ता जारहा हैं क्योंकि वो भि इसे अपनीमन सें चाहती हें। वो भि अपनी जीवन सिर्फ मेरी पत्नि बनकर हि गुजारना चाहती हें। शायदयही हमारे नसीब मे लिखा थां, औऱ इसीवजह सें कुदरत नें उन्हें ऐसा बनाया हैं। आज भि उन्हें देखकर लगता हैं कि वो एक् कुवारी जवान लड़की हें, उनका जिस्म कां गठन हि ऐसा हैं। कोई नहि कह सकता कि वो मेरी मम्मी हें, जबकि वो अब 36 साल कि हें। मे 19 कां होकर भि अपने मजबूत बदन औऱ परिपक्वता कि वजह सें उमर सें बड़ा लगता हूं।
जब मां मेरेसंग होती हें, तबआज तक किसी नें भि ये नहि कहा कि वो मेरी मम्मी हें। कुछलोग तोँ उन्हें मेरी बेहन समझते हें। अब हमेंये एक् फायदा कुदरत नें दिया हैं। विवाह केँ बाद हमारी उम्र कां जौ फर्क हैं, उससे किसी केँ मन मे कोई प्रश्न नहि उठेगा। यहानई स्थान पर्र, नएलोग औऱ दफ़्तर केँ सहकर्मियों मे सें कोई भि ये नहि समझ पाएगा। ये एक् बड़ाभार मेरेदिल सें उतर गय़ा हैं।
क़ुदरत नें तौ हमें बहोत कुछठीक सें दिया, मगर एक् चीज़ सें मे हमेशा मन हि मन परेशान रहता हूं। विद्यालय जिंदगी सें लेकरआज तक, जितने भि साथीबने, वो लोग हमेशा लड़कियों केँ बारे मे बातें करते थें। मुझे नहि मालूम कि वो लोग केसे औऱ कहां सें येसभी जान लेते थें, पर्र वो लोग कहते थें कि जिस लड़की कि हिप्स चौड़ी होती हें औऱ पेट केँ नीचे वाला हिस्सा यानीकोख औऱ ग्रोइन एरिया चौड़ा होता हैं, वो लड़की गर्भ धारण करने केँ बाद बच्चे कों पेट मे रखने मे आसानी सें सक्षम होती हैं। औऱ उन लड़कियों कि बुर भि बड़ी होती हें।
मैंने आज तक किसी लड़की सें कोई नाता नहि बनाया हैं। तौ मुझे प्रैक्टिकली कुछपता नहि थां, इसलिये मन मे एक् डर सां थां। मम्मी कि बॉडी कि हाईट मुझसे बहुतकम हैं, फ्लैट पेट केँ संग पतलीकमर औऱ उनके नीचे ऊँचे-ऊँचे हिप्स केँ संग उनका पूरा एरिया परफेक्टली शेप्ड हैं।
न् ज्यादा चौड़ा, नं अधिक पतला। उस दिन फ़ोन पऱ मम्मी नें अपनी उम्र केँ कारण दोबारा मां बनने केँ बारे मे अपनी दुविधा जताई थि। मे जानता हूं कि वो अभि भि कई सालों तक बच्चे पैदा करने मे सक्षम हें, मगरफिन भि हमें विवाह केँ बाद हि बेबी केँ लिए कोशिश करनी पड़ेगी।
अगर नसीब मे हैं तौ ठीक हैं, औऱ अगर नसीबसंग नं दे, तौ भि मां केँ प्रति मेरे प्रेम मे कोईकमी नहि आएगी। मे उनसेदिल सें प्रेम करता हूं औऱ उनकी ख़ुशी मेरेलिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। मुझे मालूम हैं कि अगर वो फिन सें मम्मी बनीं, तौ वो बहोत खुश होंगी, औऱ मे उनकी ख़ुशी केँ लिएसभी कुछ करने कों रेडी हूं।
पर्र एक् बात जोँ मेरेमन कों काटेजा रही हैं, वो ये हैं कि क्याँ मे उनकेसंग ठीक सें फिजिकल संबंध बना पाऊँगा? क्याँ मे उन्हें वो पूर्ण संतुष्टि दे पाऊँगा जिसकी वो हकदार हें? क्योंकि मे जानता हूं कि मेरा लौड़ा बाकी लोगों सें मोटा औऱ थोडा लंबा तोँ हैं हि, पर्र क्याँ येसभी हमारे रिश्ते मे कोई रुकावट पैदा करेगा? पऱ असली प्रॉब्लम मेरे लोड़े केँ टोपे कों लेकर हैं। उत्तेजना सें वो फूल केँ एक् गोलबॉल जैसाबन जाता हैं औऱ बहोत बड़ा होँ जाता हैं। क्याँ मे मां केँ नरम औऱ छोटेबदन केँ अंदर उनको बिना कष्टदिए मेरे लोड़े कों ठीक सें अंदरडाल पाउँगा!! यहिसभी बातें मेरेमन कों काटती हैं। क़ुदरत नें न् जाने क्याँ रखा हैं हमारे नसीब मे।
अहमदाबाद पहुंच करघऱ पहुँचने तक मेरे सीने मे एक् अजीब सि अनुभूति होँ रही थि—ख़ुशी भि, थोड़ी लज्जा, थोड़ी अन्जान चिंता। सभी मिलकर जिस्म मे हल्का-हल्का कम्पन महसूस करारहे थें। डोरबेल बजाते टाइम शायद मेरेहाथ थोडा कांपगए। अंदर जोँ लोग हें, उनकेसंग बसदोदिन बाद सें रिश्ते बदल जाएंगे। नानाजी-नानीमा मेरे सासू-ससुरजी बन जाएंगे, मे उनका एकलौता दामाद, मम्मी मेरी पत्नि औऱ मे उनका पति बन जाऊंगा।
नानीमा नें इसबार बेहदखुश होकर औऱ चौड़ी मुस्कान केँ संग मुझे अंदर स्वागत किया। नाना भि कुर्ता औऱ पायजामा पहनकर, चेहरे पऱ चौड़ी हंसीलिए मेरीतरफ हाथ फैलाकर आए औऱ गले लगाया। मे उनके पांव छूकर ड्राइंग रूम मे जाकर बैठा। एक् तौ गर्मी, संग मे एक् अंजान अजीब तनाव, पसीने सें एकदमभीग गय़ा थां। पंखा खोलकर नाना भि सोफ़े पर्र बैठगए।
मां तभी पानी लेकरआई। मैंने उन्हें देखा औऱ इसबार अचानक मुझे उनमें बदलाव नज़रआया। फिरभी उनमें वही पुरानी लज्जा औऱ लाज थि, मगरआज वे थोड़ी अलगलग रहीथीं। उनके चेहरे पर्र जैसे एक् ग्लो छायाहुआ थां, जोँ उनकी प्राकृतिक सुंदरता कों औऱ बढ़ारहा थां। उनकी ख़ुशी सें भरी आंखों औऱ खिलखिलाते चेहरे नें मेरेदिल कों छू लिया।
मां आज बहोत अधिक हसीन औऱ सुंदर लगरही थीं। पिछले हफ़्ते मे जब मैंने उन्हें देखा थां, तब भि वे हसीनथीं, मगरआज उनकी हुस्न औऱ भि उजाली थि। मेरामन एकदम ख़ुशी सें भर गय़ा औऱ मुझे अपनी मां केँ लिएनए भाव औऱ भावनाएँ महसूस होने लगीं। आज मेरेमन मे एक् विश्वास बांध गय़ा कि इस दुनिया मे औऱ भि कई सुंदर लड़कियाँ होँ सकती हें, पऱ मेरी नज़र मे मेरी मां सें ज्यादा कोई सुंदर नहि हैं।
मे बचपन सें ऐसी हि एक् लड़की कों अपनी पत्नि बनाने कां सपना देखता थां, औऱ दो दिनों मे वो हसीन लड़की मेरी पत्नि बनकर मेरी बाँहों मे होगीं।
आजसाम कों घऱ पऱ एक् अलग माहौल थां। हमेशा कि तरह नहि, बल्कि इसबार सभीअलग मूड मे थें। नानाजी-नानीमा बहोत सारी हंसी केँ किस्से सुनारहे थें औऱ हम् सभी मिलकर हंसते थें। मम्मी भि कभी-कभी ड्राइंग रूम मे आती औऱ उनके चेहरे पर्र भि एक् खुशीभरी मुस्कान दिखाई देती थि। फिरभी उन्होंने मेरीओर सीधे नहि देखा, पऱ उनकी नजरें कुछबार मेरेसंग टकरागईं औऱ फिनवे शर्माकर अपनी दिशाबदल लीं।
कल हम् साम कों मुंबई केँ लिए निकलरहे हें। रात कि ट्रेन सें हम् सुभह बांद्रा टर्मिनस पहुंचेंगे औऱ फिन वहां सें कैब सें रेसोर्ट जाएंगे। वहां हम् फ्रेश होंगे, नाश्ता करेंगे औऱ फिनसाम कों एक् रस्म होगी। उसकेबाद हम् डिनर करके जल्दसो जाएंगे, क्योंकि अगलेदिन विवाह कां मुहूर्त हैं। सबने अपनी-अपनी पैकिंग करली हैं। मेरी शेरवानी, मम्मी कां विवाह कां जोड़ा औऱ विवाह केँ सामान कों अलग-अलग सूटकेस मे पैककर लिया गय़ा हैं।
मे अभि भि नानीजी कों नानीमा जी हि बुलारहा थां इसीलिए बात करते करते एक् बार नानीमा नें मुझे देखा औऱ फिन नानाजी जी कों देखा दोनोकुछ देर तक मेरीओर नजर टिकाकर रखे। फिन नाना नें हंसी मे भरकरकहा,
"होँ जायेगा सुजाता, धीरे धीरेसभी हौ जाएगा। "
मे समझ नहि पारहा थां कि वेलोग किस बारे मे बातकर रहे थें। नानीजी नें मेरी आँखों मे उस प्रश्न कों पढ़ लिया औऱ हंसते हुएकहा,
"मुंबई जाकरफिन ऐसामत करना बेटा, वहा औऱ भि लोग होंगे। "
मे चुप रहकरसुन रहा थां, मेरे दिमाग़ मे मां छाई हुई थि जिसे मैंने हमेशा सपनों मे देखा हैं। इसलिये बातचीत केँ बीच मे एक् ज़रा लिंकखो बैठा। मेरी हालत देखकर नानीजी फिन बोलीं,
"अब तौ मुझे नानीजी मत बुलाओ, माँ केहना शुरुआत करदो। नहि तौ रिसॉर्ट मे नानीमा बोल दिया तोँ सभी गड़बड़ होँ जाएगा। "
वोँ यह बोलते हुए जोरदार हंसी हसनेलगी। नाना भि हंसरहे थें, मगर उनकी हंसी उतनी ज़ोरदार नहि थि जितनी नानीजी कि थि। इस स्थिति मे मुझे थोडा अजीब लगनेलगा, संग हि संग लज्जा भि महसूस होँ रही थि। क्योंकि बचपन सें इन लोगों कों नानाजी-नानीमा बुलाता आया हूं। अब मुझे मां-पिताजी हि कहना पड़ेगा। मगर करना तौ पड़ेगा, नहि तोँ हमारे जिंदगी मे बहोत सारी अनचाही समस्याएँ आँ सकती हें। मैंने तयकर लिया हैं कि अब सें उन्हे मे मां-बापू हि कहूंगा। पर्र शुरुआत केसे करेंयही प्रॉब्लम थां। पर्र अभि नानीजी नें सीधाबोल दिया औऱ जोँ बोलि, वो सच मे ठीक भि हैं। विवाह मे नाना मां कों सम्प्रदान करेंगे औऱ नानीजी मेरेतरफ सें जितनी सारी रस्में हें, वो सभी सम्पन्न करेंगी। मैंने बस हंसते हुए अपनी गरदन झुकाली औऱ इस परिस्थिति कों सहज बनाने लगा। फिन बहोत सारी इधर-उधर कि बातें होने केँ बाद हम् सबने डिनरकर लिया। आज मां थोड़ी शांत हें, पर्र सामने थोड़ी कम आँ रही हें। मेरी नजरें चारों ओरघूम रहीथीं, शायद मां कहींदिख जाएं, उन्हें देखने कि चाह मे। पर्र आज वो पूरीसाम खानां पकाने मे जुटी रहीं औऱ रसोई सें बाहर् कम निकलीं। मे उन्हें देखने कि ख़्वाहिश सें अपनी सीमा पऱ थां, मगर मे अपनेमन कों दबाकर सब केँ सामने सहज होकरबैठ गय़ा। हम् सभी अपने अपनेरूम मे जाकरसो गए। मे थोडा उत्साहित हौ रहा थां। अगररात मे मां एक् बार एकांत मे मेरेपास आँ जाए, तोँ मे सब बाधाओं कों तोड़कर उनसे प्रेम करना चाहूंगा। जब हमने मानसिक रूप सें एक् दूसरे कों पति-पत्नि मान लिया हैं औऱ पूरी निष्ठा केँ संग एक् दूसरे केँ पास सरेंडर कर दिया हैं, तोँ क्यूं शारीरिक रूप सें नहि मिल सकते। मे इसकेलिए रेडी हूं, मेरेमन मे कोई शंका नहि हैं।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Aage kya hua? Next part padhiye
Superb update (muze thoda Chhota sa laga halanki koy nai, story sai raste pr chl rahi h, sayad 2-3 update main shaadi hu jayegi uske baad hi kaa toh sabko intezar h )
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