मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 17
घऱआने मे ज़्यादा लेट नहि हुआ.सभी कामठीक सें करके वापसआकर डिनर भि कर लिया। मार्किट सें वापसआने केँ बाद उनसेबात भि करली.आज बाकि दिनों केँ मुकाबले जल्द उनसेबात ख़तमकर दि। हम् दोनों कों नीद कि सख्त जरुरत थि। पिछली 4 रातें हमने बहोत बात करके बिताई हैं। मुझे भि सुभह दफ़्तर जानां पड़ता हैं औऱ मम्मी कों भि घऱ कां काम संभालने केँ लिए सुभह जल्द उठना पड़ता हैं पर्र आज हम् दोनों कि बॉडीथकी हुईँ थि औऱ कल मे अहमदाबाद जारहा हुँ.
मां सें आजदेर रात तक बात नहि हुई, मगर मे सो भि नहि पारहा थां। अब मे P.C। खोल केँ बैठाहुआ थां। कल मे उनसेबात करतेसमय बहोत भावूक हौ गय़ा थां औऱ मैंने उनसे सामने एक् कन्फेशन भि किया। मैंने बता दिया कि मे उनसे प्रेम करता आँ रहाहुँ पिछले 6 साल सें। मैंने ये भि बोला थां कि मैनेकभी उस प्रेम केँ बारे मे किसी कों पता लगने नहीं दिया। पर्र अब हमारे नसीब मे औऱ कुछ लिखाहुआ हैं। मम्मी गौर सें मेरीबात सुनरही थि औऱ सरप्राइज भि हौ गयीँ, थि। मैंने यह भि बताया कि होँ सकता हैं मेरेउसी सच्चे प्रेम केँ कारण अनजाने मे ईश्वर नें हमारे नसीब मे यह मिलनलिख दिया हैं। जब मैंने उन्हें ये चीज़ बताने लगा कि मे उन्हे केसे प्रेम करते आँ रहा हूं, तोँ वो थोडा शर्मा गई। पिछले 18 साल उन्होंने अकेले गुजार दिये ज़िन्दगी कां अहमभाग उन्होंने दोस्त केँ बिना गुज़ारा हैं। उनका भि तन एक् परिपूर्ण संतुष्टि, परिपूर्ण तृप्ति चाहता होगा.कुछ हि दिन मे हमारी विवाह होनेजा रही हैं औऱ हम् पति पत्नि बनके पूरी लाइफ गुजारने जारहे हैं औऱ मे उन्हें वो सभीकुछ देना चाहता हुँ.
मगर मे अभि तक वर्जिन हुँ औऱ वो मुझसे 16 साल बड़ी हैं। मे पोर्न कां एडिक्टेड नहि हुँ पर्र इस परिस्थिति मे मैने इंटरनेट सें सेक्स एजुकेशन लेने कां फैसला लिया। हस्बैंड वाइफ कों क्याँ क्याँ करना चाहिए सुखी लाइफ बिताने केँ लिए। एक् दूसरे कों मेंटली, औऱ फिजिकली भि खुश रखना चाहिए। तौ मैंने सेक्स गाइड पड़ना शुरुआत किया। स्पेशली मे पड़रहा हु " “How too satisfy Women in Bed”
जब मे घऱआया तोँ नानीजी नें मेरा स्माइल केँ संग स्वागत किया। पऱ उन्होंने मेरे चेहरे कि तरफ देखके, थोडा चिंतित होकर पुछा
" क्याँ हुआ बेटा!! तुम्हारी तबियत तौ ठीक हैं?"
मे पहले चोंक गय़ा पर्र बाद मे रियालाइज किया कि शायद मेरे आँखों केँ नीचे जौ हल्के डार्क सर्कल दिखरहे हैं, उसी केँ कारण नानीजी चिंतित हौ गई होंगी। पिछले 5 रातठीक सें नीद पूरी नहि हुइ थि। मां औऱ मे दो प्रेमी केँ तरहरात भर बातें करतेरहे औऱ संग हि संग दफ़्तर केँ काम केँ अलावा घऱ सजाने कि खरीदारी मे बहोत व्यस्त हौ गय़ा थां पर्र मे येसभी उनको केसे बताऊँ कि उनकी बेटी सें विवाह करकेघऱ बसाने औऱ उनकी बेटी केँ संग मिलन केँ लिए मे क्याँ क्याँ कररहा हुँ। मैंने परिस्थिति सँभालने केँ लिएकहा
" हाँ नानीजी.मे बिलकुल ठीकहुं"
नानीजी नें मेरे चेहरे कों गौर सें देखा औऱ फिन नाना केँ तरफ नज़र घुमाई। तब नाना उनको बोले
" अरे भइया इतनादूर सें सफर करके आँ रहा हैं। थक गय़ा होंगा."
फिन मेरेतरफ देख केँ बोले
" आजरात कसकेनीद लें लो, सुभह एकदम फ्रेश होँ जाओगे?"
मे थोडा हंसकर उनकी बातों कों सहमति देनेलगा। मे ये महसूस कररहा थां कि, मे उन लोगों कां दामाद बननेजा रहाहुँ, पर्र मे उन लोगों कां पोता भि तोँ हुँ। तोँ आज तक नानीजी मुझेजिस नज़र सें देखते आँ रही हैं, जैसे मेरे बारे मे चिंतित होती हैं आज भि वैसे हि उन्होंने प्रेम, स्नेह औऱ ममता केँ संग मुझे देखा औऱ अपनी चिंता बताई.ये भि सही हैं कि मां औऱ मे जैसे एक् परिवर्तन सें गुजररहे हैं, उन लोगों कों भि तौ वक्त लगेगा अपने पोते कों पूरीतरह दामाद कि नज़र सें देखने केँ लिए। मे यहीसभी सोचते सोचते दरवाजा खटखटाया थां कि क्याँ मे मां कों सामने सें देख पाऊंगा याँ नहीं.मगर वो कहीं दिखाई नहि दि.
मे जहाँ बैठाहु, मेरे पोजीशन सें डोर केँ बाहर् रसोई कां डोर हैं। मुझेयहा बैठकर आवाज़ सें पताचल गय़ा थां कि मां रसोई मे थि। तौ नाना सें बात करतेहुए मेरी नज़रबार बारउस डोर केँ तरफजा रहा थि क्यूंकि अब मेरी पत्नि कां चेहरा देखने केँ लिए मेरामन बहोत चंचल होँ रहा थां तोँ जब वो गरमचाय लेकेआईं, मे बात करते करतेइधर उधर देखने कि एक्टिंग करनेलगा औऱ उनकी एक् झलकदेख लि.
वो गरमचाय कि ट्रे केँ संग नज़र झुकाके चलतेहुए आँ रही थि। चेहरा बिलकुल नोर्मल थां बिना किसी एक्सप्रेशन केँ। मे समझ गय़ा कि वो सभी केँ सामने सहज रहने कि कोशिश कररही हैं। मगरफिन भि उनको चलकरआते हुएदेख केँ मेरी छाती मे एक् अजीब सि सिहरन हुईँ औऱ मेरे जीन्स केँ अंदर मेरा लोड़े मे खुनभर गय़ा।
मम्मी नज़दीक आईं तौ मे भि नानाजी नानीमा केँ सामने उनको अधिकदेख नहि पारहा थां पऱ बीचबीच मे उनपर नज़रडाल रहा थां। उन्होंने नाना कों गरमचाय दि औऱ मेरे सामने वाली टेबल पे मेराकप रख दिया। उन्होंने मेरीतरफ नज़र नहि उठाई.तभी नानीजी बोल पड़ी तोँ मम्मी नें नज़र उठाके उन्हे देखा। नानीजी बोलि
" मंजू.हितेश केँ लिए ब्रेकफास्ट बनादे"
फिन नानीमा मुझेदेख कर बोलि
" बेटा क्याँ खाओगे?"
मैनेकहा
" कुछ भि चलेगा"
नानीमा जब मुझसे बातकर रहीथीं, तब मम्मी भि नानीमा कों हि देखरही थि। फिन नानीमा, मम्मी कों देखके बोलीं
" बेटा परांठे बनादे "
मां सरहां मे हिलाके चली गई औऱ रसोई मे दाखिल होँ गयीँ,। मां ऐसेआईं औऱ गई, जैसे कि मे वहां हूं हि नहीं। मेरी उपस्थिति कों पूरा नज़रअंदाज़ करकेचली गयीँ,। मुझे बहोत क्रोध आया। फ़ोन पे बात करके हम् कितना एक् दूसरे केँ नज़दीक आनेलगे थें, औऱ अब मम्मी मुझे एकदमदूर कररही हैं !! मुझे उनका दि हुइ गरमचाय भि पीने कां मन नहि कररहा थां पऱ क्याँ करूँ!!अब यहा सें उठकेजा नहि सकता। नानाजी नानीमा केँ सामने फिन एक् नई परिस्थिति क्रिएट हौ जायगी। फिन सोचा कि ठीक हैं, अबदूर रहरही हैं, मगरकब तक दूर भागेगी मुझसे। मे भि जिद्दी हु, उनको जल्द सें जल्द मेरी बाँहों मे आनां होगा.ये सोचकर क्रोध थोडा ठण्डा होनेलगा औऱ मे गरमचाय कां कप उठाके नानीजी कों देखते हुएसिप मारने लगा।
नानीजी कहरही थि कि विवाह केँ दोदिन पहलेहमे रिसोर्ट पहुंच जानां चाहिए औऱ फिन विवाह केँ बाद अगलेदिन हम् सभी वहां सें निकल जाएंगे। नाना कहते हैं कि इतनेदिन वहां रहकर क्याँ करना हैं। विवाह केँ एक् दिन पहले जानां हैं, विवाह कां मुहूर्त अगली सुभह हैं। तौ विवाह जल्द हि ख़तम हौ जायेगी औऱ उसीदिन दोपहर मे हम् निकल जाएंगे। जबइसबात पऱ उन लोगों केँ बीचबहस चलरही थि तब मे सिर्फ साइलेंट दर्शक बनकरउन दोनों कों देखरहा थां तभी मम्मी रसोई सें बाहर् आई.आके नानाजी नानीमा सें नज़र छिपाकर दिवार पऱ टेक लगाके खड़ी होकर मुझे देखने लगी।
मे उनकीतरफ नं देखकर भि येसभी मेरे साइड विज़न सें देखपा रहा थां। मेरे अंदर कां भि थोडा क्रोध कम हौ रहा थां इसलिये मन मे उनको देखने कि प्रबल ख़्वाहिश हुईँ। फिन भि मे बहोत वक्त सें स्वयं कों कंट्रोल कररहा थां वो वही खड़ी खड़ी मुझेदेख रही थि औऱ उनके साड़ी कां आंचल स्वयं केँ हाथ कि उँगलियों मे लेकेगोल गोल घुमारही थि। मे स्वयं सें जूझरहा थां कि मे उनकीतरफ देखूँ याँ नहीं। पऱ कुछसमय बाद जैसे हि मे सर मोड़ नें लगा, तौ उनकी आंखों सें मेरी आंखेमिल गई। मुझसे नज़र मिलते हि एक् लज्जा सें भरी मुस्कराहट उनकेहोठ पे खील गई। मगर वोँ गई नहीं। मेरा क्रोध फिनबढ़ गय़ा कि अभि कुछदेर पहलेऐसे नज़रअंदाज़ करकेगईं, औऱ अभि छुप छुपके मुझेदेख कर मुस्कुरा भि रही हैं।
मैंने भि नज़रअंदाज़ किया औऱ मुंह मोड़कर नज़र नानीमा कि तरफकर ली। पर्र मेरेऑफ विज़न सें मुझेपता चलरहा थां कि वो अभि भि वहां खड़ी होकर मुझेदेख रही हैं। अब मुझे स्वयं केँ ऊपर क्रोध आया। मैंने क्यूं देखा अभि उनको। मेरीइस हरकत सें उनकोपता चल गय़ा कि मे ग़ुस्से मे हु औऱ वोँ जान बुझकर मुझे चिढ़ाने केँ लिए अभि भि वहां खड़ी हैं। बचपन सें वोँ मुझे अच्छी तरह सें जानती हैं। नहि देखता तोँ ठीक थां मगर क्याँ करे, इस नज़र कि क्याँ गलती, मन हि नहि मानता उनको देखे बिना।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 18
थोड़े समयबाद मां रसोई मे चली गई औऱ इतने मे नानाजी नानीमा दोनों बातकर रहे थें औऱ नाना मेरेतरफ मुड केँ बोले
"तोँ रिसॉर्ट कि बुकिंग लें लेते हैं?"
मे जैसे हि हाँ बोलने जारहा थां तभीबीप बीप करके SMS आया.
मे "हां" बोलकर फोनचेक करनेलगा। इनबॉक्स मे देखा मां कां SMS थां उन्होंने लिखा थां
"माँ सहीकह रही हैं। आप् कों देख केँ लगता हैं आप् बीमार पड़गए हें"
रसोई सें बीचबीच मे धीमी आवाज़ आँ रही थि परांठे बनाने कि। मेरे अंदर कां क्रोध धीरे-धीरे धीरे-धीरे पिघलने लगा औऱ मुझे मम्मी कों तंग करने कां मन किया तौ मैंने रिप्लाई किया
"तोँ ठीक हैं मे नानीमा कों बता देता हूं कि क्यूं औऱ केसेये सभीहुआ"
मे सेंड करके सुनने कि कोशिश कररहा थां कि मम्मी कों SMS रिसीव हुआ कि नहीं.मगर कोई ट्यून सुनाई नहीं दि पर्र जल्दी मेराफोन बीपबीप करनेलगा। मां कां हि SMS थां उन्होंने लिखा थां
"अरे नहि नहीं.ऐसा मत कीजिए। आप् इतने गुस्से मे क्यूं हौ?"
नानाजी नानीमा कों पता न् चाले इसलिये मे नानाजी नानीमा कां बात सुनने कि एक्टिंग करनेलगा औऱ वैसे हि फोन मे SMS टाइप करतेहुए मम्मी सें संदेश केँ ज़रिए बात करनेलगा। मैंने लिखा
"तुम् जौ मुझसे इतनादूर भागरही हौ"
उनका रिप्लाई जल्दी आया
"दूर कहां !! मे तौ इधर हि हुँ। इतनीपास."
मे थोडा सोच केँ टाइप किया
"नहीं। मेरी पत्नि कों मेरे औऱ पास होना चाहिए."
कुछसमय रिप्लाई नहि आया पऱ मालूम हैं ये संदेश उन्होंने पड़ लिया। मेरी उंगलियां फोन कीपैड पर्र नाचरही थि इस टेंशन मे कि वो क्याँ रिप्लाई देंगी पऱ रिस्पॉन्स नहि आया। रसोई सें अभि भि आवाज़ आँ रही थि। अचानक फोन वाइब्रेट हुआ। देखा कि उन्होंने रिप्लाई भेजा थां.
"वक्तआने दीजिए, आपको आप् कि पत्नि जितनी पास चाहिए उतनी हि पासमिल जाएगी"
मम्मी नें इसतरह कि बात पहलीबार छेड़ी थि। आज तक हमेशा इसतरह केँ प्रेम कों अवॉइड करती थि। पऱ आज उन्होंने उनकेदिल कां दरवाजा पूरा खोलकर कह दिया कि अब वोँ स्वयं कों पूरीतरह सें मेरी पत्नि मानने लगी हें.
यह संदेश पड़ते हि ऐसालगा कि मेरे जिस्म कां पूराखून मेरे लोड़े मे जमा होँ रहा हैं। वोँ फटाफट सें एक् दम खड़ा हौ गय़ा.
मे अपना एक् पांव दूसरे पांव केँ ऊपर रखके नानाजी नानीमा केँ सामने मेरे प्राइवेट एरिया कों दबाकर कंट्रोल करनेलगा। उन लोगों कों बोलने कां मनकररहा थां कि आज हि विवाह कां मुहूर्त निकाल लो जिससे आजरात मे हि हमारी सुहागरात हौ जाए। अचानक नाना केँ प्रश्न सें मेरीयह भावना टूटी। वो मेरीतरफ देख केँ पुछरहे थि.
"तुम् क्याँ बोलते होँ बेटा?"
मे एक् दम पुतले जैसाबन गय़ा। समझ नहि पारहा थां कि वो क्याँ पुछरहे हैं। क्यूं कि पिछले कुछ पलों सें मे उन लोगों कि बातचित नहि सुनरहा थां मुझे मालूम नहि अबकिस बारे मे बात हौ रहा थि जोँ नाना ऐसा प्रश्न पूछा। मे फिन भि सिचुएशन संभालने केँ लिए बोला
"मे क्याँ बोलूं नाना। आप् लोग जौ अच्छा समझेंगे"
नानाजी कों यहपता नहि चला कि मे हवा मे तीर छोड़ा हैं। वो सीरियसली बोले
"नहि नहीं.ऐसी बात नहीं.अगर तुम्हे ज़्यादा छुट्टियां मिले तोँ तुम् दोनों मुंबई सें वापसयहा आँ सकते हौ औऱ नहि तोँ मे औऱ तुम्हारी नानीमा यहा आएंगे औऱ तुम् लोग M.P। निकल सकते होँ। तुम् तोँ वहां रहने कां सभी बंदोबस्त कर हि रहे होंगे औऱ हम् भि कुछदिन बाद एक् बार वहां जाकेदेख आएंगे."
तब मे समझा कि विवाह केँ बाद मुंबई रिसोर्ट सें कौन कहां जाएगा इस बारे मे पूछा होगा उन्होंने। मे बोला
"हमारे संग आप् लोग भि तोँ चल सकते हैं M.P.?"
तब नाना रिप्लाई देने मे थोडा हिचकिचा रहे थें तोँ नानीजी बोलि
"क्याँ हैं कि बेटा। अब सें तुम् दोनों कों हि ज़िन्दगी मे एकसाथ चलना हैं तोँ तुम् दोनों जाके अपनानया घऱ बसाना शुरुआत करो."
फिन नानाजी कों देखकर हस्ते हुए मेरीतरफ मूड केँ बोलीं
"औऱ हम् तोँ आएंगे हि। हमारी बेटी कां जौ घऱ हैं -- नहि आयेंगे क्याँ? तुम्हारे नानाजी बोलरहे थें कि कुछदिन बाद आहिस्ता समय लेके एक् बड़ेघऱ मे शिफ्ट होँ जानां। बीचबीच मे हम् भि जाकेकुछ दिन रहकर आएंगे"
इसबात पे मेने अपने अंदर एक् हल्का सां कम्पन अनुभव किया। मे अबसमझ गय़ा कि येलोग मुझे औऱ मम्मी कों M.P। भेज केँ क्यूं स्वयं अहमदाबाद वापस आनां चाहते हैं। विवाह केँ बाद मुझे औऱ मां कों एकांत मे छोड़ना चाहते हैं। नए मैरिड कपल केँ बीच कबाब मे हड्डी नहि बनने चाहते हैं। मां केँ संग मेरी शादीशुदा लाइफसही सें बनजाए, इसलिये हमे अकेला छोड़रहे हैं। उनको मालूम हैं उसघऱ मे एक् बेडरूम हैं। अगर वो लोग वहां जायेंगे तोँ एक् जवान लड़का औऱ उसकी जवान मम्मी एक् नहीं हौ पाएंगे। इस बारे मे औऱ अधिककुछ चर्चा नहि हुई। तयहुआ कि विवाह केँ दिन दोपहर कों नानाजी नानीमा अहमदाबाद आँ जायेंगे औऱ मम्मी मेरेसंग M.P। जाएंगी.
मे फ्रेश होने केँ लिए अपनेरूम मे चला गय़ा पऱ मे न् जाने क्यूं आज मम्मी कों अपनी बाहों मे लाने केँ लिए बहोत उतावला हौ रहाहुँ। मे अपनेरूम मे जातेहुए सोचने लगाअब केसे मेरी पत्नि कों मेरेपास, एकदमपास लाके, मेरेमन कों शांतकरु.
अगलादिन पूरा बाजार मे बीत गय़ा इसलिये मे लेटघऱ आया। मम्मी औऱ नानीमा पहले हि डिनरकर लिया थां मे औऱ नाना खाने बैठे तौ नानीमा पास मे बैठकर उनकी सेवा करनेलगी औऱ मम्मी खानां परोसरही थि। कलरात भि ऐसाहुआ थां मम्मी अबसभी केँ सामने सहज होकरसभी कुछकर रही हैं.
मगर मुझे एक् भि बार नज़र उठाके डायरेक्टली नहि देखरही थि। इसबार मे औऱ मां दोनों हि एक् अजीब सिचुएशन मे थें। हम् फ़ोन पे तौ बहोत सारी बातें करते थें हमारे आने वाले फ्यूचर कों लेके पर्र लॉन्ग डिस्टेंस मे जितना कंफर्टेबल थें, आमने सामने वैसा नहि थां स्पेशली नानाजी नानीमा कि मोजुदगी मे.
मोबाइल पर्र हम् दोनों प्रेमियों कि तरहमिल रहे थें। पऱ उन लोगों केँ सामने वैसा होने मे एक् लज्जा आँ रही थि। वो मेरे सामने तोँ आँ रही हैं पऱ मुझसे नज़र चुरारखी हैं पऱ जब नानाजी नानीमा दूसरी तरफ बिजी हैं तब वो मुझेछुप केँ देखती थि। औऱ नज़र मिलते हि शर्मा केँ झुका लेती थि.
उनकेनरम गुलाबी होंठों कि मुस्कान मुझे पागलकर देती हैं। उनको मेरे सामने इसे चलते फिरते, बातें करते, हस्ते हुए देखकर
मेरे छाती मे हरपल एक् हल्की सिहरन होती हैं। मेरा लंड मेरे अंडरवियर केँ अंदर सख्त होँ जाता हैं.
आज मे नाना केँ संग अहमदाबाद जाके विवाह कि शेरवानी पसन्द करकेआया थां। फिन ज्वेलरी कि दुकान मे मेरी उंगली कां नाप दिया अंगूठी केँ लिए.फिन कुछइधर उधर कां घऱ कां सामान ख़रीदते हुएलेट होँ गए थें इससभी कि वजह सें जब खानां खाकर मे थोडा आराम करने केँ लिएलेट गय़ा तौ तबपता नहि कबनीद आँ गई.
अगलेदिन मे फटाफट तैयार होकर निकलपडा। निकलते वक़्त मम्मी ड्राइंग रूम मे डोर पे खड़ी थि। मैंने नानाजी नानीमा सें विदा लेके एक् बारकुछ पलों केँ लिए मां कि तरफ देखा। उनकी आँखों मे हरबार मां कां प्रेम औऱ ममता होती थि मगरइस बार वो नहि थां.
इसबार ऐसालगा कि पति जब पत्नि कों छोड़कर दूरजात हैं, तब पत्नि कि नम आँखों मे जोँ प्रेम औऱ दर्द रहता हैं, जिसके ज़रिए वो अपनीदिल कि सारी बातें बिनाकहे बता देती हैं, वोँ उस नज़र सें मुझेदेख रही थि जिससे मेरामन भारी हौ गय़ा।
Writer ji ek guzarish h.mummy or bete kee baaton main kuchh kamuk baatein or harkatein le aao wo bi bina asli rishte bhuley huye.or mummy-beta har time ek doosre ko beta or mummy hi kahte huye yeh sab karein toh maja aa jaye
iss story pr jitne readers kee Asha thi itne readers nahee aaye. Toh mein sochna raha hun kee iss story ko band krr doon. Vote karke batayiye
kharab maat mano ap ne Update mai bahut din ka gap aata h too kahani 3 yaa 5 page pe chali jati h search mai or 2 update mai bahut baada gaap thaa us wajah say bhee your not getting desired response
Meri dusri kahani pr bi mein isi prakaar post krr raha ho halanki waha achaa response mil raha h. Shayd yeh kahani hi logo ko utni pasand nahee aa rahi.
Ab mein ek waqt pr ek hi story pr focus krr raha ho pahle apni dusri running kahani ko poora karunga phir iss pr update dunga . Agar ap loug sehmat h toh like kijiye warna comment karke bataiye
very nice. Physically shaadi k baad hnaa thik rhega. mummy beta kaa rishte shauhar patni mai badlne wala h so physically shaadi k baad thik rhega
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 19
ट्रैन मे भि केँ मां केँ बारे मे हि सोचरहा थां अगर हमारी तक़दीर हमेंआज ज़िन्दगी केँ इस मोड़ पर्र नहि लाती, तोँ बहोत सि चीज़ों केँ बारे मे मालूम हि नहि पड़ता। मां कों बचपन सें मां केँ रूप मे हि देखते आया हूं। वो हमेशा एक् अच्छी मम्मी थि औऱ संग हि संग एक् अच्छी बेटी भि। पिता केँ डेथ केँ वक्त वो मात्र 18 साल कि थि। तबइस दुनिया मे उन्होंने केवल अपने बेटे केँ सहारे जीने कि शपथखाई औऱ किसी कों उनकेदिल मे स्थान देने केँ बारे मे कभी नहीं सोचा। एक् आदर्श मम्मी बनके, एक् आदर्श बेटी बनकररह गई,.
अपनी स्वयं कि सारी खुशियों कां गलाघोट दिया। मुझे बड़ा करने औऱ स्वयं केँ माँ पिताजी कि देखभाल करने मे हि वोँ अपनी ख़ुशी ढूंढती थि। नानीमा कितनी बारकह चुकी हैं कि घऱ कां खानां बनाने केँ लिए एक् बाईरख लेते हैं। पर्र मम्मी हमेशा कहती हैं कि जब तक वोँ हैं तौ बाहर् केँ लोगों सें खानां पकाने कि क्याँ जरूरत औऱ वो भि घऱ केँ कामकाज मे जुटे रहना मनपसंद करती थि ताकि उनकासमय भि बीत जाये औऱ बदन भि एक्टिव औऱ स्लिम रहे। उनका पूरा जिस्म, हाथ, पेर इतना सुन्दर हैं, लगता हैं जैसे कि वो उनके पिताजी कि लाडली बेटी हैं औऱ धीरे-धीरे ज़िन्दगी बिताती हैं,
यानि कि फिल्में देख केँ, नावेल पढ़कर, दोस्तो केँ संगघूम फिन केँ, ब्यूटी पार्लर औऱ स्पा मे वक्त बिताकर, स्वयं कों प्रॉपर्ली मेंटेन रखरही हैं। उनके स्किन अभि भि टीनएज गर्लतरह हैं,
देख केँ पता नहि चलता वो 36 कि हैं। उनके हाथों कि, लगता नहि इन्ही नाज़ुक हाथों सें दिनभर कितना साराकाम करती हैं। उनका पूराबदन कितना नरम औऱ रसीले हैं, येकलरात मुझेपता चल गय़ा। शायद नेचर नें उनकोये उपहार देरखा हैं। शायद उनके नसीब मे ये विवाह लिखी हुइ थि, इसलिये वो आज भि एक् नौजवान कुंवारी लड़की जैसी दिखती हैं।
पहले सें हि उनकीसभी चीज़ें मुझे अच्छी लगता थि पर्र जब सें विवाह कि बातचल रही हैं, तब सें उनका पूरा जिस्म मुझे औऱ भि अधिक खुबसुरत, प्यारा औऱ सेक्सी लगरहा हैं। उनकेहाथ कां खानां मुझे दुनिया कां सबसे लजीज खानां लगता हैं औऱ नसीब केँ फेरे सें मुझेअब पूरी ज़िन्दगी उनकेहाथ कां खानां खाने कां सौभाग्य मिलरहा हैं.
इतना सेक्रीफाइस किया शायद इसलिये आज उनकोफिन सें एक् नई ज़िन्दगी मिलने जारही हैं। मात्र कुछ हि महीने उनको अपने पति कां प्रेम मिला। कितनी ख्वाहिशें, कितने सारे ड्रीम्स सभीदिल मे दफ़नकर दिए थें मगरअब उनकी सारी ख्वाहिशें, सारे अधुरे ख्वाब पूरे करने कां टाइमआया हैं। अब वो एक् मम्मी नहीं, एक् पत्नि बन चुकी हैं। उनका बेटे कों जोँ अब उनका पति बननेजा रहा हैं, उसे अपनातन मनसभी कुछ सौंपना चाहती हैं। वो भि पति केँ प्रेम केँ लिए प्यासी हैं। ज़िन्दगी कां हर लम्हा पति कि बांहों मे गुजारना चाहती हैं। अपनीहर खुशी, हर ग़म पति सें शेयर करना चाहती हैं।
मैंने शपथ खाली एक् पत्नि कों अपनी पति सें जौ जौ मिलना चाहिए, मे सभीकुछ उन्हें देना चाहता हूं। वो हमेशा सें एक् घरेलू महिला रही हैं। अपनेघऱ संसार कि देखभाल करना, पति कि सेवा करना, बच्चों कां खयाल रखना--इन सभी मे ख़ुशी सें जीना उन्हे मनपसंद हैं। मे भि हमेशा जिस पत्नि कां सपने देखता थां, वो ऐसी हि एक् घरेलू सुंदर लड़की कां थां मे भि उनको पत्नि केँ रूप मे पाकर खुदको दुनिया कां सबसेखुश नसीब इंसान समझता हूं.
मैकलसाम केँ बारे मे सोचने लगासाम कों नाना सें बातहुआ थां कि जाके शेरवानी औऱ अंगूठी कां मेज़रमेंट देना हैं पऱ नज़दीकी किसी भि दुकान मे नहीं.सभी नाना कों जानते हैं। सभी कां शक होगा। इसलिये अहमदाबाद सिटी सें लेना पड़ाफिन डिनर केँ बाद नाना नें औऱ कुछ बाते कि इसलिये जल्द सोनेचले गए औऱ मुझे भि सोने केँ लिएबोल दिया।
बीतेकल कि घटनाएं
सभी जल्द डिनर करके अपने अपनेरूम मे चलेगए.
मैनेरूम कां दरवाजा लॉक नहि किया, ऐसे हि बंधकर दिया। पिछले कुछदिन सें जैसाचल रहा थां, आज थोडा अलगलग रहा हैं। कुछदिन सें रात कों डिनर केँ बाद मे मां सें फ़ोन पे बातरहा हु तौ आज मुझे वो चीज़ मिसिंग लगी पर्र मम्मी कों अबफोन नहि कर पाऊंगा। दोनों रूम मे बात होगी तोँ नानाजी नानीमा कों जरूरपता चलेगा इसलिये मे स्टडी टेबल पे बैठा औऱ फोन पे SMS टाइप किया
"क्याँ कररही होँ?" फिन मम्मी कों सेंडकर दिया। जल्दी रिप्लाई आया। शायद मां भि मेरेतरह फीलकर रही हैं। उन्होंने लिखा
"सोने कि तैयारी"
मैने टाइप किया
"मगर मे नहि सो पाउंगा"
इसबार थोडा वक्त लिया उन्होंने। समझ नहि पाई होंगी मैनेऐसे क्यूं लिखा। इसलिये उन्होंने पुछा
"क्यूं.क्याँ हुआ"
मैने होठो पे थोडा मुस्कराहट लाकर लिखा
"क्योंकी सोने केँ वक्त मेरी जौ आदत थि, वो आजकल नहि होँ पारही हैं, इसलिये तोँ आजकलनीद नहि आतीठीक सें"
उन्होंने लिखा
"वो आदत क्याँ हैं.!?!."
मैन लिखा
"सोने सें पहले गर्मदूध पीने कि औऱ तुम्हारे हाथ सें मेरेसर केँ बालों मे स्पर्श पाने कि आदतपड़ गई"
मैवेट करतेरहा कि वो क्याँ रिप्लाई देगी मुझे ज़्यादा इंतजार नहि करनापडा उन्होंने लिखकर भेजा
"तौ अब.!!! "
मैनेकुछ सोचा औऱ टाइप किया
"अब क्याँ.मुझे नीद नहि आएगी। मे जागा रहूंगा औऱ मेरी तबियत ख़राब होँ जाएगी। तुम्हे क्याँ? तुम् धीरे-धीरे सोजाओ "
मुझमें बदमाशी चढ़ गई। मैंने सेंडकर दिया पऱ वो केसे रिएक्ट करेगी पता नहि थां पऱ जब उनका रिप्लाई आयातब पताचला कि उन्होंने मेरी बदमाशी पकड़ली। उन्होंने लिखा
"उफ्फ्फफ्। ठीक हैं। मे दूध लेकेआती हूं"
यह पढ़कर मेरे अंदरखुन तेजी सें दौडने लगा। मैंने सोचा नहि थां कि मम्मी इतनी आसानी सें मेरेमन कि ख़्वाहिश जान जाएगी। जिस तरीके सें आजआने केँ बाद सें वो मुझसे रही हैं, उसे कों सोच केँ मेंने कल्पना नहि कि थि कि वो अभि मुझसे मिलने आएगी। मे आने केँ बाद सें चाहरहा थां कि मम्मी केँ संग एकांत मे एक् मुलाकात हौ औऱ पूरीसाम मां मुझे जोँ क्रोध दिलारही थि, तभी सें उनको मेरे बांहों मे पाने केँ लिएमन मचलरहा थां। मे सोच मे डुबा थां अभि तक हमारी विवाह हुईँ नहीं। शास्त्र सम्मति सें अभि तक हम् पति पत्नि नहि बने पऱ ये भि सही हैं कि अब हम् मां बेटे भि नहि हैं। हमने एक् दूसरे कों मन सें पति पत्नि मान नाँ शुरुआत कर दिया.दिल नें एक् दूसरे कों पति पत्नि केँ रूप मे स्वीकार कर लिया। मैंने एक् हफ्ते सें मूठ नहीं मारी। मेरे बॉल्स केँ अंदर सारा वीर्य जमा होँ रखा हैं। मे हमारी सुहागरात मे एक् दूसरे कों परिपूर्ण तृप्ति देने कां इंतजार कररहा थां मगरअब जिस्म केँ अंदर एक् ऐसा कम्पन हौ रहा हैं, कि अगरआज मेरामाल खाली होकरसभी मां केँ बदन केँ अंदरचला जाए तौ कोईखेद नहि होगा। मेरेइसी सोच मे अचानक मां डोर खोलकर अंदरआई। हाथ मे दूध कां गिलास हैं साड़ी पहनी हुईँ हैं
आँचल घुसाने नें केँ कारण साड़ी छाती केँ ऊपर सें टाइट होँ गई औऱ उसमे उनकेगोल गोल मध्यम साइज कि बूब्स सामने कि तरफ उभरेहुए दिखाइ देरहे हैं। उनको देखते हि मेरा लौड़ा एकदम सख्त होकर अंडर वियर केँ अंदर फूलने लगता हैं। जैसे कि अभि कपड़े फाड़ केँ बाहर् आनां चाहता हैं औऱ सही स्थान पे घूसने केँ लिए रेडी हैं पऱ मैने स्वयं कों कंट्रोल किया। मां अंदरआकर रुक गई। मुझसे सें नज़र मिलाने मे शर्मा गई औऱ नज़र झुकाके मुस्कुरा दि। फिन उन्होंने वहि खड़े खड़े पीछेहाथ लेँ जाकर धीरे-धीरे सें डोरबंध कर दिया औऱ स्टडी टेबल केँ तरफआने लगती हैं। मे उन्ही कों देखता रहाकुछ हि देर मे मेरे नजदीक आकर टेबल केँ पास खड़ी होँ गई औऱ फिन गिलास टेबल पऱ रख दिया। एक् हफ्ते सें हमने जितनी इंटिमेट औऱ सीक्रेट बातकही थि, वो मेरेमन मे घूमरही थि। मे कुछ नं बोलके सिर्फ देखेजा रहा थां। वो चुप होकर वहां खड़ीरही लेफ्ट हैंड कि उंगलियों सें टेबल कां किनारा स्पर्श किए। वो धीरे-धीरे सें होंठो पे मुस्कराहट कायम रखतेहुए बोलि
"अबदूध पी लीजिए औऱ सो जाइए"
यह कह केँ कुछसमय ऐसेखडी होने केँ बाद वो मुड़ी औऱ जाने केँ लिएकदम रखा। जैसे वो मुड़ी औऱ आगे बढ़ने कि कोशिश कि, मैंने फट सें मेरे लेफ्ट हैंड सें उनका राईट हैंड पकड़ लिया औऱ वो रुक गई।
मगर मुझेघूम कर नहीं देखा। उनकोटच करते हि मेरा जिस्म कांपउठा औऱ वोँ भि हल्का सां कांप गई। मैंने एकदम धीरे-धीरे सें कहा
"मुझेनीद केसे आयेगी.तुमने अपनाहाथ मेरे बालों मे तोँ फिराया हि नहीं"
उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया औऱ जाने केँ लिएहाथ भि नहि छुड़वाया। बस मेरीतरफ पीठ करके खड़ीरही। उनके सांस केँ संगसंग पीठ हल्का हल्का फूलरहा हैं। मे धीरे-धीरे सें उठा। उनकाहाथ मेरेहाथ मे रख केँ हि उनके सामने गय़ा। वो मुझसे लंबाई मे छोटी हैं। उनकीनजर झुकी होने केँ कारण मे उनका चेहरा नहि देखपा रहा थां मगर हमारे बीच फासला बहोत हि कम थां। जैसे कि दोनों अगरजोर सें सांस लें तोँ दोनों कि छातीटच हौ जाए.ऐसी पोजिशन पे खड़े होकर मुझे उनकीनाक दिखरही हैं, नाक केँ सामने वालाभाग साँस केँ संगसंग फूलरहा हैं औऱ थोडा थोडा काँप भि रहा हैं। उनके क्लीवेज कां पैसेज क्लियर नज़र आँ रहा हैं। मख्खन जैसे रसीले दोनों बूब्स कां ऊपर कां भाग ब्लाउज केँ ऊपर वाले हिस्से सें थोडा नज़र आँ रहा हैं.
मुझसे औऱ रुका नहि गय़ा। मैने उनकाहाथ छोड़ दिया.फिन मे दोनों हाथ सें उनकापेट टच करके, हाथ लेँ जाकेकमर कों पकड़ा।
उनके पूरे शरीर मे एक् कम्पन महसूस हुआ औऱ उनकी साँसें भि भारी होँ रही थि। मेरी नज़र उनकेऊपर झुकी हुई थि। मेरे पजामे मे एक् तम्बू जैसाबना हुआ थां। मेरी भि साँसें धीरे-धीरे धीरे-धीरे तेज हौ रही थि। मैने मेरासर नीचे करके मेराफोर हेड उनकेफोर हेड पऱ टच करवाया। धीरे-धीरे धीरे-धीरे हमारे बीच कां फासला कम होतेजा रहा थां हम् मे सें कोई भि आगे नहि जारहा थां, फिन भि हम् दोनों कां जिस्म एक् दूसरे कि तरफ बढ्ने लगा।
मैने मेरी छाती पे उनकेनरम बूब्स कां स्पर्श महसूस किया.फिन उनकानाक मेरी छाती पे टच किया.फिन उनके पूरा जिस्म मेरेबदन सें मिल गय़ा।
अब उनकी गर्म सांसे मेरी स्किन पे टच होँ रही थि। मेराचिन उनकेसर केँ ऊपररखा हुआ हैं वोँ बसबीच बीच मे अपनी मुठ्ठी कि ग्रिप लूज़कर रही हैं औऱ फिन टाइट करके मेरे कंधो कों पकड़रखी हैं। हम् दोनों कि सांसअब बहोत तेजचल रही थि। हम् दोनों अपनेकुछ समय एक् दूसरे कों महसूस करनेलगे। मे लम्बाई मे भि उनसे अधिक थां औऱ बदन केँ गठन मे भि। इसलिये ऐसालग रहा हैं कि मेरे लंबे चौड़े जिस्म केँ ऊपर उनका नाज़ुक नरम छोटा जिस्म आहिस्ता छिपाहुआ हैं। मुझे मालूम थां मेरा सख्त लौड़ा उनकेपेट पे लगाहुआ थाे औऱ उन्होंने जरूर उसको महसूस किया होगा.फिन भि मेरा लिंग क्याँ चाहता हैं ये बताने केँ लिए मैने मेरे हाथों सें उनकी पतलीकमर पकड़ी औऱ अपनीतरफ खींचा। वो अब बिलकुल मेरे शरीर मे चिपक गई औऱ उनका प्राइवेट एरिया मेरेसंग टच होँ गय़ा मगरफिन भि उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया। वो अपनीनाक मेरेगले केँ पास स्किन पे रगडरही थि। उनके बूब्स कि गर्मी मेरा शर्ट कों पार करके मेरी छाती पे महसूस होँ रही थि। मेरातना हुआ लौड़ा उनकेनरम पेट केँ ऊपर औऱ जोर सें प्रेस होनेलगा। मे पागल सां होँ गय़ा। मुझसे औऱ रुका नहि गय़ा। मे उनके बालों केँ अंदर अपनानाक डूबो केँ उनके बालों कि गंध लेनेलगा औऱ अपने दोनों हाथ उनकी पूरीपीठ पे सहलाने लगा। वो भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे उत्तेजित हौ रही थि। उनकेहाथ अब मेरा कन्धा छोड़कर मेरीपीठ केँ ऊपरघूम कर मेरे जिस्म कों महसूस करनेलगे।
अब मे होंठो सें उनकी गर्दन कों छुनेलगा। इस पोजीशन पे उन्होंने अपना मुंह मेरे लेफ्ट कंधे केँ ऊपर लें जाकर उनकीचिन कों रख दिया। मे अब मेरीनाक औऱ होंठो कों रगडने लगा। मे जैसे हि नीचे तक झुका, मेरे लंड कां तम्बू अब उनकी बुर केँ एरिया मे टच होनेलगा। मे उनकेगले कों चूमते हुएआगे बढ़ा, मेरा सख्त लौड़ा उनकी बुर पऱ प्रेस कर दिया उनके मुंह सें सिसकारियां निकलने लगी.
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मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Next part miss mat karna
Writer bhay agar is story ko agle 3-4 updates main khatam hone k chances h toh isi story ko pehle complete krr do, ya agar lamba chalegi toh joo bi story apne ganit say continue krna, koy badi baat nai h
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