मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 14
मुझे वहां खड़े खड़े उनके जाने कि दिशा मे देखते हुए महसुस होनेलगा कि अगले 16 दीन.अब 16 दिन नहीं, बल्की 16 साल जैसे लगनेलगे। नाना पण्डित जी सें विवाह कि डेटपता करकेआये हैं। वो शुभ मुहूर्त आज सें 16 दिनबाद हैं.
अब हालतऐसी हैं कि इतनाकुछ होने केँ बादअब 16 दिन रहेंगे केसे.अब मुझे एक् भि समय मम्मी कों छोड़के रहने कां मन नहि कररहा थां.
पर्र हां.तब मुझेपता नहि थां कि इन 16 दिनों मे बहोत कुछ होगा, बहोत कुछ मिलेगा हमे, जौ हमारे आगे कि ज़िन्दगी जीने कां मार्ग सहजकर देगा औऱ संग मे मुझे एक् नई चीज़ भि मिलेगी, जौ आज तक मेरे जिंदगी मे नहि हुआ थां कुछदिन केँ लिए मुझे अपनी हि होने वाली पत्नि केँ संगछुप छुप केँ प्रेम करने कां मौका भि मिल गय़ा थां.
सुभह एमपी पहुँच केँ, जल्द फ्रेश होकर साइट कि दौड़ लगाईआज कां दिन बहोत भारी थां पूरादिन साइट पे बिताके साम कों जब वापसआया। घऱआके खाट पे लेट गय़ा। दिनभर कि थकावट केँ संगसंग पिछले कुछदिन सें नीद भि कम हौ रही थि आजउसी कां असर एकसाथ पड़ गय़ा.
तेजभूख लगरही थि यादआया जौ व्यक्ति टिफ़िन सप्लाई करता हैं, आज उसनेदिन मे हि फ़ोन करकेबता दिया थां कि आजरात कों खानां दे नहि पायेगा। मे रसोई मे गय़ा फ्रिज मे मात्र अंडा मिला। संडे रहने केँ कारण नं दूध न् ब्रेड कुछ नहीं थां। उस अंडे औऱ मैगी कों बनाने लगा। मुझेबस इतना हि पकाना आता हैं कभी मम्मी नें रसोई मे जाने हि नहि दिया। अचानक मन मे आया कि अरेअब तोँ मेरी बैचलर लाइफ हि ख़तम होनेजा रही हैं। अब तौ फैमिली मेन बननेजा रहाहुँ। कुछ हि दिन मे मुझेफिन सें मां केँ हाथ कां खानां खाने कां सौभाग्य मिलेगा
मगरयहा मुझे मां कां नहीं, मेरी पत्नि कां, विवाह कि हुई पत्नि केँ हाथ कां खानां मिलेगा। मे मैगी बनाते बनाते कल केँ बारे मे सोचरहा थां मम्मी कों मालूम थां कि मे बैग लेने केँ लिएरूम मै जाऊंगा। इसलिये वो जल्द सें नानीमा केँ हाथ टिफ़िन बॉक्स भेजकर, फटाफट पीछे केँ बरामदे सें मेरेरूम मे चली गई, औऱ मेरा इंतजार करतीरही। येसभी सोच केँ मन मे एक् ख़ुशी कां आवेशआने लगा। मां नें कल मुझे समझा दिया कि वो हमारे नए रिश्ते केँ लिएअब कितनी खुश हैं। वो मुझेदिल सें चाहती हैं मुझे अपने पति केँ रूप मे प्रेम करना शुरुआत कर दिया हैं। येसभी उनकी हरकतों नें औऱ उनकी नज़रों नें मुझे समझा दिया। वो चाहती थि कि मेरेमन मे जोँ दुविधा, संकोच औऱ सवालों कां तूफ़ान चलरहा थां इसबार एमपीआने सें पहले वो सभी क्लियर होँ जाये। तौ लास्ट मोमेंट मे स्वयं आके वोँ सभीकुछ जताके गई,। अब मे उनको पत्नि केँ रूप मे सोंचू येबात भि उन्होंने समझा दि। जाने क्यूं, अब मुझे उनको मेरी बांहों मे भरके, आँखों मे आँखे डालके उनके चेहरे कि तरफबस देखते रहने कां मन होँ रहा थां.
अब मे मम्मी कां स्पर्श पाने केँ लिए, उनकेदिल कि धड़कने महसुस करने केँ लिए औऱ उनकी मिठी आवाज़ सुनने केँ लिए बेताब हौ रहा थां मैनेफोन लिया.इस वक़्त पौनेदस बजरहे थें मे सोचरहा थां कि अब इतनीरात कों क्याँ वोँ जागी होगी!!फिन भि आज मेरालक ट्राय करनेलगा। मैनेफोन केँ संदेश ऑप्शन मे जाके एक् एसएमएस टाइप किया "मुझे अभि तुमसे बात करने केँ लिएमन कररहा हैं। जब मैने वापस पढ़ा, मुझे स्वयं कों बेवकूफाना लगा.फिन कुछ वक्त सोचा औऱ डिलीट करके मात्र 'हायरे' लिखा। पिछले एक् हफ्ते सें उनसे मेराकोई डायरेक्ट कन्वर्सेशन नहींहुआ औऱ अब तोँ सिचुएशन एकदमअलग हैं। मैनेयही सोचा औऱ मां कों भेज दिया.कल मां नें स्वयं कों मेरेपास सरेंडर करके, मेरेलिए उनका प्रेम जता दिया थां, फिन भि मेरेमन कि सभी भावनाए औऱ संकोच अभि तक पूरीतरह दूर नहि हुआ। हम् एक् रिश्ते कों भूल केँ दूसरे नए रिश्ते मे जुड़ने जारहे हैं। वक्त केँ संगसंग वो नए रिश्ते हमारे बीच स्ट्रांग होते रहेंगे। मुझे मालूम हैं कि स्वयं कों मेरेपास सरेंडर करने केँ बाद भि मम्मी कों भि समय लगेगा सभीकुछ एडजस्ट करने केँ लिए। इन्ही सभी भावनाओं केँ बीच मेरा खानां हौ गय़ा थां पर्र मेरामन बारबार फोन पे जारहा थां। अब तक कोई रिप्लाई नहि आया.
शायद वो सो गई हैं। मैने सोचा उनकोकॉल आई करूंफिन लगा कि अगर उनको उठने मे समयलगा तौ नानाजी नानीमा कों भि वो आवाज़ सुनाई देगी.अगर उन्होंने सुन लिया तोँ समझ जायेंगे इतनीरात कों किसका फ़ोन हैं। क्योंकि कि मम्मी कों अधिककोई फ़ोन नहीं करता हैं, मे हि हूं जौ करता हैं। पहले होता तौ ठीक थां मगरअब मुझे एक् लज्जा आनेलगी। मे उदास हौ गय़ा। मे बाउल औऱ स्पून लेके रसोई जाने केँ लिए जैसे हि उठा एक् sms आया.
मैंने जल्दी sms देखा। मम्मी नें भेजा हैं, उन्होंने भि सिर्फ 'हम्म' भेजा। मेरे होठो पे मुस्कुराहट आँ गई। मे समझ गय़ा वो जागी हुई हैं अबजब उन्होंने मुझसे बात शुरुआत कर दि हैं, तभीसभी बातें मेरेमन केँ अंदर दौड़ने लगी। मे सही शब्द ढूँढने लगा.कुछ समझ न् आने केँ बादलिख दिया 'मम्मी तुम् अभि भि जागी हौ?'। मे सेंड करने हि वाला थां कि मे रुक गय़ा औऱ टेक्स्ट करेक्शन किया। "क्याँ तुम् अभि भि जागी हौ?" भेजने केँ बादमै फोन स्क्रीन पे नज़रलगा केँ बैठारहा पर्र दिमाग़ मे कुछ औऱ चलरहा थां। मे इसबार अहमदाबाद जाके भि उनको मां कह केँ बुलारहा थां पर्र कल केँ बाद मुझेलगा कि मुझेअब जल्द पूरीतरह सें नए रिश्ते कों अपनाना पडेगा। बिपबिप मम्मी नें रिप्लाई भेजा हैं 'हममम'.
शायद उनकोइस प्रश्न कां जवाब देने मे लज्जा आई होगी। क्युकी इतना हि लिखने मे बहोत वक्तलगा दिया। मेरामन ख़ुशी सें भररहा हैं, अभि भि जागी हैं !! मेरे दोनों हाथो केँ थंबअब मेरेफोन कीपैड केँ ऊपरनाच रहे हैं। मन मे तूफ़ान औऱ मन मे संकोच। समझ नहि आँ रहा क्याँ करूँ--केसे करूँ याँ डायरेक्ट फ़ोन लगाऊं। मे नें टाइप किया “क्याँ मे तुम्हे फ़ोनकर सकता हूं?"। पहलीबार अपनी मम्मी सें इसतरह बातकर रहाहुँ। आज हम् दोनों ज़िन्दगी कि राहों मे ऐसे एक् मोड़ पे खड़े हैं, कि कुछ भि करने सें पहल, बोलने सें पहलेमन मे दुविधा आँ रही हैं। जैसे हम् दो अनजान इंसान हैं। इतने सालों कां सभीकुछ अचानक बदल गय़ा औऱ हम् अबनाप तोल केँ सभीकुछ करने मे लगे हैं। अब सें हम् कों दूसरे तरीके सें एक् दूसरे कों जानना शुरुआत करना पड़ेगा। अब एक् दूसरे केँ दिल कां दरवाजा, जौ दरवाजा मात्र ज़िन्दगी मे अपने जीवनसाथी केँ लिए हि खुलता हैं, उसको खोलना पड़ेगा। समय निकल गय़ा, पऱ रिप्लाई आया नहीं। शायद अभि मां फ़ोन पे डायरेक्ट बात करने मे शर्मा रही हैं.
मे जानता हूं उनकोसमय कि जरुरत हैं। एक् रूप सें दूसरे रूप मे आने केँ लिए, अपनेतन मन कों अपने होने वाले पति केँ पास पूरीतरह सोंपने केँ लिए। मे उन्हे पति कां प्रेम देके, उनकेसंग पूरी ज़िन्दगी गुजारना चाहता हुँ। उन्हे दुनिया कि सबसे ज़्यादा खुशनसीब पत्नि बनाना चाहता हुँ.कभी भि उनको ज़रा सां दुःख नहि पहुचाना चाहता। मे चाहता हु कि अगले 7 जन्मों तक वो मेरी पत्नि बनकेरहे। इसबार फिलहाल मे अपनेमन केँ ऊपर पत्थर रखके अपना बाउल उठाके रसोई मे चला। जैसे हि रसोई मे पंहुचा बीपबीप आवाज़ सुनाई दि। मे दौड़ केँ बेडरूम मे आया औऱ फोन उठाके चेक किया। मम्मी नें रिप्लाई दिया 'okey'। फिन सें मन कांपने लगा.बैड पे बैठके जल्दी मम्मी कों फ़ोन लगाया औऱ जैसे हि रिंग होना चालू किया, मम्मी नें फ़टाक सें रिसीव कर लिया। मे उनके हेलो कां इंतजार करनेलगा पर्र उन्होंने कुछ बोला नहीं.मगर मे उनकी उपस्थिति महसुस करपारहा थां। ऐसे तौ रात हैं, चारोतरफ सन्नाटा हैं, कोई आवाज़ नहीं। मुझे उनकी सांसो कि आवाज़ भि सुनाई देरही हैं। मुझे एक् हलकी हलकी कम्पन होनेलगी येसोच केँ कि फ़ोन केँ उसतरफ मेरी होने वाली पत्नि हैं। मे उसकी मीठी आवाज़ सुनने केँ लिए उसके बोलने कां इंतजार कररहा थां असल मे हम् दोनों हि खामोश थें औऱ हम् हमारे बीच कि ख़ामोशी कि भाषा पड़ने कि कोशिश कररहे थें पऱ जब उनकीतरफ सें कुछ भि नहि आया तोँ मे बोला। मेरेदिल कां दरवाजा उनकेलिए खोल दिया। मैने धीरे-धीरे सें पूछा
"नाना नानीजी सोगए?"
उन्होंने कुछसमय बाद धीरे-धीरे सें कहा
"हा"
उनकी मिठी आवाज़ मे साफ़ साफ़ लज्जा झलकरही हैं। मेरामन ख़ुशी सें झूमउठा.
फिन भि येसभी उनको महसुस नहीं करने दियाबात घुमाकर हल्की हंसी केँ संग बोला
"मैंने अभि अभि डिनर किया"
वो थोडा चुप होँ गई औऱ आवाज़ मे थोडा चिंता मिला केँ संग पुछी
"इतनेलेट क्यूं?"
मे नार्मल रहके बोलते रहा
"वोँ एक्चुअली आज साइट पे दौड़भाग कि वजह सें लेट हौ गय़ा थां। "
बोलके थोडा रुका औऱ जैसेकुछ यादआया, फिन सें बोला
"औऱ आज वो टिफ़िन वाला भि खानां नहि लाया."
मे समझरहा थां कि अभि भि लज्जा औऱ संकोच माँ कों सहज होने मे रोकरहा हैं। मगरइस बार वो वक्त नं लेके जल्दी पुछी
" क्यूं?"
" पता नहीं, उसकाकुछ काम थां इसलिये आज नहींआया" मैंने कहा.
वो थोडा वक्तचुप होँ रही.फिन थोडा चिंतित होकर
"तौ खानां केसेहुआ?"
मे हस्ते हस्ते बोला
" मुझे जोँ बनाने आता हैं, वही बनाया-मैगी औऱ अंडा"
उन्होंने कुछ सोचा औऱ बोलि
"बाहर् होटल मे तौ खानां मिलता हैं"
जैसे कि मेरी ग़लती पकडी गई, सफाई देतेहुए कहा
" हा.मिलता तोँ हैं। पऱ अभि.इतनी रात मे। जाने कां मन नहि किया"
औऱ सोचते हुएबोल दिया
"औऱ अब सें नहि करुँगा."
फिन क्याँ पता केसे, मे बोलते रहा
"बस कुछदिन औऱ, उसकेबाद तोँ फिन हमेशा तुम्हारे हाथ कां हि."
बोलके मे रुक गय़ा पूरा नहि कर पाया। पहलीबार इसतरह कि बात निकल गई मुंह सें। मुझे लज्जा आनेलगी। हमारी विवाह केँ बारे मे हमने एक् दूसरे सें आज तक कुछ जिक्र नहि किया.उधऱ मम्मी भि चुप हौ गयीँ,। इसबात सें एक् चीज़हुआ वोँ यह कि अब तक मेरे औऱ मां केँ बीच हमारे नए रिश्ते कों लेके जौ अदृश्य दीवार थि वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे गिरना शुरुआत होँ गई। मैने मेरेदिल कां दरवाज़ा पूराखोल दिया औऱ उनकेलिए मेरा प्रेम बाहर् निकलने लगा। मेरेगले सें एक् हलकी कपकपाती हुई आवाज़ निकल केँ बोलीं
"I Love You"
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 15
जैसे हि मैंने यहकहा, मे फ़ोन केँ उसपार सें मम्मी कि तेज़ सांसों कि आवाज़ सुनने लगा। मेरेइस तरह इमोशन्स केँ संग वोँ शब्द कहने सें शायद मम्मी कांपउठी। इसलिये कुछ वक्त तक वो चुप हि रही। हम् दोनों हि फ़ोन पकड़ केँ बैठे थें। जैसे वोँ मेरे प्रेम कों महसूस कररही होँ। थोडेसमय बाद वो स्वयं कों थोडा कंट्रोल मे लाकर धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनेदिल कां दरवाजा भि खोलने लगी औऱ ये मुझेतब पताचला, जब उन्होंने अपनी कपकपाती आवाज़ सें फुसफुसाते हुएकहा.
" I Love You 2"
मां नें पहलीबार स्वयं सें मेरेलिए प्रेम जताया औऱ यह सुनके मे ख़ुशी सें पागल हौ गय़ा। मेराखुन तेजी सें दौड़ने लगा। मे इमोशनल होकरआँख बंद करके थोडा पीछे होकर अपनेसिर कों दिवार पऱ टेकलगा दिया.ऐसे फीलहुआ जैसे कि मे हवा मे बादलो केँ संग भागेजा रहाहु। मे प्रेम भरी आवाज़ सें धीरे-धीरे धीरे-धीरे, करीब फुसफुसाके बोलने लगा.
"मे हमेशा सें यहविश करताआया हूं कि मुझे एक् हसीन पत्नि मिले। औऱ आज दुनिया कि सबसे खुबसुरत, सबसे प्यारी लड़की। मेरी पत्नि बननेजा रही हैं। इससे अधिक मुझेकुछ नहि चाहिए"
औऱ मे चुप होँ गय़ा। थोड़ी देरबाद मां नें रुकरुक केँ कहा.
"इससे पहले। औऱ एक् बार.सोच लेना चाहिए"
" क्याँ?.किस बारे मे?"
" बापू मां हमारे बीच.जोँ नाता चाहते हैं"
" क्यूं?"
इसबार माँ थोडा समयचुप रही.फिन कहनेलगी
" हर जवान लड़का एक् जवान लड़की कों हि मनपसंद करता हैं"
अब मुझेसमझ आया मम्मी कि दुविधा क्याँ हैं। वो सोचरही हैं कि मे इस रिश्ते केँ लिए नानाजी नानीमा कि बातों मे आके राज़ी हुआ हूं। मगर मे उनको केसे समझाऊं कि मे कब सें उनसे प्रेम करते आँ रहाहुँ, उनको चाहता आँ रहाहुँ। तौ मैंने अपनी आवाज़ मे प्रेम भर केँ कहा.
" मुझे नाँ कभीकोई जवान लड़की दिखी, जिसको मे चाहूं, नं कोई हैं, जोँ तुम् जैसी प्यारी औऱ खुबसुरत होँ। मेरेदिल मे बस एक् हि लड़की हैं.औऱ हमेशा वोँ हि रहेगी.वोँ होँ.तुम्"
वो कुछसोच केँ बोलीं
" मगर.मुझमे भि.बहोत सारी खामियां हैं"
" मतलब। क्याँ?"
मे सुनने केँ लिए बेताब हुँ कि वो क्याँ केहना चाहती हैं। कुछसमय बाद वो धीरे-धीरे सें बोलीं
" मे 36 कि हुँ."
मे जल्दी जवाब दिया
" तोँ भि मे आपको प्रेम दूंगा, ख़ुशी दूंगा, जोँ देना चाहता हुँ औऱ जीवनभर चाहूंगा."
शायद मेरीबात उनको अच्छा लगी.मगर फिन वो बिलकुल खोई हुईँ आवाज़ सें संकोच करते करते बोलीं
"औऱ अब.अगर.अगर.मे दोबारा मम्मी नहि बनपाई तोँ!!"
मैंने जैसे हि इसबात कां मतलब समझा, अचानक मेरे प्राइवेट एरिया मे एक् अद्भुत सनसनी होनेलगी। जिसके फल स्वरुप मेरे लोड़े केँ अंदरखुन दौड़ने लगा पर्र ये परिस्थिति उसकेलिए नहि हैं इसलिये मैने स्वयं कों कंट्रोल किया.
मम्मी नहि चाहती हैं उनके प्यारे बेटे कि लाइफकुछ गलत डिसीजन सें ख़तम हौ जाए.इस रिश्ते कों अपनाने केँ बाद किसी भि कारण सें पछतावा न् हौ.
मैने बोल्ना शूरु किया.
" मे बचपन सें जिनके संग खुशियां बाटता आँ रहाहु, जिनके संग मेराहर ग़म शेयर करताहुँ। मेराहर सुख, दुख, हंसी, मजा, शान्ति सभीकुछ उनकेसंग हि जुड़ा हुआ हैं। मेरेलिए जौ मेरी साथी, मेरी प्रेरणा स्त्रोत हैं, उनको अपना जिंदगी दोस्त बनाकर ज़िन्दगी गुजार नें मे जोँ ख़ुशी हैं, उससे अधिक मुझेकुछ नहि चाहिए."
मे कुछसमय रुक केँ फिन सें बोलने लगा
"अगर हमारे नसीब मे होगा, तौ उसका हँसते हुए स्वागत करेंगे, अगरकुछ नहि लिखा हैं तोँ भि उसे हँसते हुए स्वीकार करेंगे."
मे चुप हौ गय़ा। मुझे स्वयं भि मालूम नहि थां मे इतनी सारी बातें बोल पाऊंगा। पर्र यह बोलके दिल कों चैनमिल रहा थां। मे कभी किसी सें प्रेम कां इज़हार नहि किया औऱ आज मेरी होने वाली पत्नि कों बोल दिया। मे उस तरफ़ कि भावनाएं जानने केँ लिएगौर सें सुनने लगा कि वो क्याँ कहती हैं। मगर वोँ सभीचुप हैं। अचानक मुझे सिसकी लेने कि आवाज़ मिली। मे समझ नहि पाया। मे परेशान सां होनेलगा। कुछसमझ नहि आँ रहा थां पर्र थोड़े समयबाद जैसे हि सभीकुछ क्लियर हुआ, मेरी छाती मे पानी कि तरंग दौड़ गई। मेरादिल पिघलना शुरुआत हौ गय़ा। मम्मी उसतरफ रोरही हैं। मुझे मालूम हैं, मेरी बातों सें उनकोये आँसू बहाने पड़रहे हैं.
मैंने उनकोकुछ कहना चाहा। पर्र कुछसमझ नहि आँ रहा थां। मात्र एक् ख़्वाहिश मन मे दौड़ने लगी
मन कररहा हैं इससमय मे उनकेपास जाकर, उनको बाँहों मे लेके, अपने जिस्म केँ संग मिलाके, उनकीजिन प्रेम भरी सुन्दर नाज़ुक आँखों सें आंसू आँ रहा हैं, उसको चूमता रहूं औऱ उन आंसुओ कों मे पीजाऊ। मैने धीरे-धीरे सें केहना चाहा औऱ मेरी ग़लती केँ लिए माफ़ी माँगना चाही। पऱ मे हमेशा उनको मम्मी कहके पुकारता थां अबइस परिस्थिति मे क्याँ औऱ केसे बुलाना हैं, येसोच कर भि कुछ फैसला नहि करपारहा थां। पति अगर पत्नि कों नाम सें बुलाए तौ स्वाभाविक हैं। पऱ यहा पत्नि उमर मे भि बडी औऱ रेस्पेक्ट सें भि। इसलिये उनकोनाम सें बुलाना थोडा अजीबलगा। जबउसतरफ थोड़ी शांति हुईँ, कुछ नं पुकार धीरे-धीरे सें उनको बोला
" मुझे क्षमा करदो"
वोँ जान गयीँ, कि मे समझ गय़ा उसतरफ क्याँ हौ रहा हैं। सो वो स्वयं कों संभालते हुए आवाज़ मे थोडी हंसी केँ संग प्रेम सें कहनेलगी.
" क्यूं?"
मे चुप थां उनकेमन कि भवनाओ कों समझने कि कोशिश कररहा थां। फिन अपनी ग़लती कों सुधारने कां प्रयास करतेहुए कहा
" मे आयिंदा कभी नहि रुलाऊंगा"
मम्मी इसबार थोडीहंस पडी औऱ एक् परम तृप्ति केँ संगकहा.
" बुद्धु.कोई भि लड़कीऐसे आंसूबार बार बहाने केँ लिए स्वयं कों सौभाग्यशाली मानेगी। मे आज इतनेदिन बाद स्वयं कों सौभाग्यशाली महसुस कररही हुं.क्यूं कि."
"क्यूं कि?"
वो कपकपाती हुईँ मीठी स्वर मे बोलि
" मुझेतु। मुझे आप् जैसा पति मिलरहा हैं"
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 16
ये सुनके मेरादिल तेज़ी सें धड़कने लगा.अब तोँ येलगरहा हैं कि, उनसे अधिक मे भाग्यवान हुँ। माँ नें हमारे होने वालेनए रिश्ते कों अभि सें इसतरह अपना लिया हैं औऱ उनकेदिल कां दरवाजा मेरेलिए पूराखुल चुका हैं। उनके आखरी शब्द मेरेमन मे एक् घंटी कि तरहबार बार बजनेलगे। फिन मे खुश होकर एक् चीज़ जोँ मेरेकान मे खटक गई, वहीकह दिया
"तुमने मुझे ग़लती सें 'आप्' कह दिया."
तौ उन्होंने कहा
"वो ग़लती सें नहीं, जान बूझ केँ जोँ कहा हैं."
इस बारे मे उनकेसंग बातचित होनेलगी औऱ उनकीबात मुझेसमझ आई। आखिर मे मुझे एक् साफ़ तस्वीर नज़रआई। वो अंदर औऱ बाहर् पूरीतरह सें एक् भारतीय नारी हैं।
उन्होंने कहा
"माँ पिताजी नें मेरी परवरिश बहोत अच्छे सें कि हैं। मेरा पति उम्र मे बड़ा होँ याँ छोटा, मेरेलिए पति पति हैं, इसीलिए आप् रिश्ते मे मुझसे बड़े हि हैं। तौ मे आपको हमेशा आप् कहके हि बुलाना मनपसंद करूंगी."
ऐसे हम् धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनेदिल कां रास्ते एक् दूसरे केँ लिएखोल रहे थें। एक् दूसरे कों जानने लगे.उस रात बातों हि बातों मे हमेसमय कां पता हि नहि चला औऱ हम् सुभह 4 बजे तक बात करतेरहे। जब मे सोने गय़ा, तब मेरे अंदरबस वोँ हि छायी हुइ थि। अब मे उनको मेरी पत्नि केँ रूप मे हर तरीके सें पाने कि चाहत मे डुबाहुआ हुँ।
ज़िन्दगी सुंदर हैं ये मैंने सुना थां औऱ अब महसुस भि कररहा हुँ। बाप कि मौत केँ बाद, मम्मी नें अकेले मां-बाप कां किरदार निभाया। एक् सिंगल पैरेंट केँ लिए एक् कठिन चैलेंज थां औऱ उन्होंने ये चीज़ बखूबी सें निभाई। हा.मेये भि मानता हु इसमें मेरे नानाजी जी औऱ नानीमा जी कां बहोत बड़ाहाथ हैं पऱ फिन मां नें हमेशा अपने दोनों हाथों सें मुझे संभाल केँ रखा औऱ इसलिये उनकेसंग मेरा लगाव औरों सें अधिक, बहोत ज़्यादा हैं.
आजकल मे स्वयं कों एक् स्वाधीन, परिपूर्ण व्यक्ति जैसा महसुस कररहा हुँ। अपनी लाइफ स्वयं केसे बनायेंगे, उसकेलिए लगाहुँ औऱ अबहरकदम पऱ मे जोँ डिसिजन लेँ रहाहु, वो सभी मेरी होनेवाली पत्नि केँ सपोर्ट औऱ इजाज़त सें होँ रहा हैं। जब लाइफ हम् दोनों कों हि एकसाथ बितानी हैं, तब हम् अभि सें एक् संग हमारे घऱ हमारी फैमली औऱ हमारे फ्यूचर कि सारी बाते एक् हि संगसोच रहे हैं.
मम्मी मुझेअब पत्नि कि तरह प्रेम भि करती हैं, औऱ कभीकभी डाँटती भि हैं। आजनए रिश्ते मे जुड़ने केँ बाद भि उनकेहर बरताव मे वो हल्का टच महसुस करताहुँ। बस फर्कये हैं कि आजकल वोँ मेरी रेस्पेक्ट भि करती हैं। उनकाइस तरह सें मेरेसंग पेश आनां मुझे औऱ भि प्यारा लगता हैं।
आज लञ्च केँ कुछदेर पहले उनका फ़ोनआया। मे तब दफ़्तर टॉयलेट मे थां जैसे हि फोन स्क्रीन पे उनकेनाम केँ संग उनका स्माइल करताहुआ फोटोआया, मेरे अंदर एक् करंट दौड़ गय़ा औऱ उससे मेरेहाथ मे पकड़ा हुआ लंड थोडा कांपउठा। आजकल उनसेबात करते वक्त याँ उनके बारे मे सोचते वक्तये महसुस कररहा हु कि मेरा लंड पहले केँ साइज़ सें थोडा ज़्यादा फुलाहुआ रहता हैं। पहले कि तरह नॉर्मल साइज मे रहता हि नहि हैं।
मै दूसरे हाथ सें फ़ोनकान पे लगाकर बोला
" हाँ मां.कहो"
जैसे हि बोला, जल्दी मुझे महसुस हुआ औऱ मे हंसपडा। औऱ मम्मी भि उधर सें फ़ोन पे हि हंस पड़ी औऱ यह मुझे सुनाई दिया।
मे परिस्थिति सँभालने केँ लिए बोलते रहा
" एक्चुअली वोँ क्याँ हैं कि.पहले कि आदत छूटने मे समय तौ."
मेराबात पूरी होने सें पहले मम्मी नें बातकाट दि औऱ हस्ते हस्ते बोलने लगी.
" बस बस.औऱ सफाई कि जरुरत नहीं। मैंने आप् कों कह दिया थां कि मेरे मां पिताजी नें मुझे एक् अच्छा नामदे रखा हैं। औऱ क्याँ साहब कों शायद मेरा वोँ नाम मनपसंद हि नहीं हैं."
बोलकर झूठा क्रोध दिखाकर मम्मी रुक गई,। मे उनको केसे समझाऊ कि मुझे उनकानाम लेके पुकारने मे अजीब लगता हैं औऱ नानाजी नानीमा केँ सामने तौ कभी वैसे बुला भि नहि पाऊंगा। मे कोशिश करके भि उनको संमझा नहि पाया। शायद मुझे हि उनकेलिए एक् नाम ढूँढ़ना पडेगा। मे टॉयलेट सें बाहर् आके दफ़्तर केँ ऊपरी फ्लोर कि पीछे कि बालकनी मे आँ गय़ा। यहाकोई आता जाता नहि हैं। मे सिचुएशन सहज करके बोला.
" मैंने कब बोला कि मनपसंद नहीं। तुम्हारे नाख़ून सें लेकेबाल तक सभीकुछ दुनिया कि सभी चीज़ों सें अधिक प्यारी हैं मुझे."
इस पर्र मम्मी थोडीखुश हुई औऱ प्रेम मे पिघलते पिघलते बोलि
" ठीक हैं ठीक हैं.औऱ झूट बोलने कि जरुरत नहीं.अब आप् ये बताइये कहां हैं आप् अभि?"
मै बोला
" दफ़्तर मे, बस अभि लञ्च करूंगा"
मम्मी जल्दी आवाज़ मे विस्मय लेके बोलीं
"आप् अभि भि दफ़्तर मे!!! औऱ लञ्च भि नहि किये!!!"
फिन गले मे थोडा फेक क्रोध लेक बोलीं
"आपनेकल भि तोँ साम कों जाके लञ्च किया!! औऱ आज अभि भि.आप् मेरीबात कभी सुनेंगे नहि क्याँ?.
अच्छा एक् बात बताइये। मे पहलेजब पूछ्ती थि तौ आप् हमेशा बोलते थें कि हाँ आप् कां खानां वक्त पऱ हौ रहा हैं."
मे मम्मी कि बातकाट केँ बोला
" नहि नहीं। मे सच बोलता हुँ.पहले टाइम पऱ हि खानां खाता थां पर्र.अभि.दफ़्तर कां काम औऱ घऱ कां काम.दोनो संभालने मे वक्त मैनेजमेंट ठीक सें नहि होँ पारहा हैं। अभि खाता हूं औऱ दफ़्तर सें निकल केँ रानी साहेबा कि सारी पसंदीदा चीज़ें खरीद केँ लाताहुँ। ओके सोना?"
मे मम्मी कों प्रेम सें अब बुलाया तौ शायद उनको अच्छा भि लगा। वो प्रेम सें हस्ते हस्ते हुए बोलीं
" ह्म्मम.ठीक हैं। जाइये। जाके पहले खानां खाइये"
फर्नीचर कि दुकान मे एक् ड्रेसिंग टेबल कां आर्डर करना हैं, लम्बी मिरर वाली, जिसमे स्लाइडिंग डोर होँ। एक् मरूनकलर कि स्टिल कि आलमारी कां भि आर्डर करना हैं। फिन सारेघऱ केँ पर्दे खरीद नें हैं। वोँ भि ब्राउन औऱ पिंकविथ फ्लोरल डिजाइन। मम्मी नें मुझे मोबाइल करके समझा दिया। एक् चीज़ मे हर लम्हा महसुस कररहा थां कि मम्मी कि सोच पहले सें कुछ बदली सि लगरही हैं। पापा कि डेथ केँ बाद उनके लाइफ मे सभीकुछ बेरंग होँ गय़ा थां सभी चीज़ें लाइट याँ वाइट रेंज मे लिमिटिड थि मगरआज कल वोँ सभीकुछ ब्राइट कलर मे पसन्द कररही हैं। अब ज़िन्दगी मे रंग लाकर जीना चाहती हैं। इसलिये अंदरतथा बाहर् भि रंगो सें सजारही हैं। इसनई ज़िन्दगी कों वो पूरीतरह हर खुशियों केँ संग जीना चाहती हैं। मे उनको वो सभीकुछ देने केँ लिएकुछ भि कर सकता हूं।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Aage kya hua? Next part padhiye
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