मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 11
नाना यहसभी बोलकर मेरी आँखों मे आंखे मिलाकर देखने लगे। मुझेइस बात कों समझने मे कुछ लम्हा लगगए। जैसे हि इसका मतलब मुझेसमझ मे आया, तभी मेरा जिस्म मे एक् अनजानी अनुभुति फ़ैलने लगी। मैनेफिन भि कन्फर्म होने केँ लिए पूछा
" मतलब आप् क्याँ कहना चाहते हैं नाना ?"
नाना स्ट्रैट बोलने लगे
" बेटा अब मे तुम्हारा नानाजी बनके नहीं, एक् बेटी कां बाप बनके तुमसे येपुछ रहाहु कि क्याँ तुम् मेरी बेटी कां हाथ थामोगे?"
अब मेरे अंदर एक् अजीब सि, एक् अद्भुत सि फीलिंग होनेलगी। जौ मे बयां नहि कर सकता। मैने मात्र यह बोला
" एह्.यः.आप् क्य.क्याँ कहरहे हैं नाना."
"हमने बहोत.बहोत सोच समझने केँ बादयह बात तुम्हे बोलने कां साहस किया हैं"
मैने अपने आप् कों कंट्रोल करतेहुए कहा
"पऱ.पऱ.ये केसे होगा.केसे मुमकीन हैं."
" अगर हम् चाहे तोँ सभी होँ सकता हैं बेटा"
मेरी मम्मी कां चेहरा मेरे नज़र केँ सामने आया.
मे सोचने लगा कि यहसभी बातें सुनने केँ बाद मे मम्मी कों केसेफेस करूँगा औऱ नानाजी नानीमा मुझसे खुलके ऐसेबात कररहे हैं कि मुझेशरम आनेलगी। मे बोला
" नाना हम् ऐसा केसेकर सकते हैं.नाँ हि कहीं.कभी ऐसाहुआ!!"
नाना नें शांत आवाज़ मे कहा
"बेटा.मे औऱ तुम्हारी नानीमा नें इस बारे मे सोचा.हम् सभी कि ख़ुशी केँ लिए हम् कुछ भि सहने केँ लिए सजधजकर हैं। हम् बस चाहते हैं कि हमारी बेटी औऱ हमारा पोता ज़िन्दगी मे हमेशा खुशरहे."
फिन थोडा रुक केँ बोले
" औऱ.औऱ तुम्हारी मां भि इस रिश्ते केँ लिए राजी हैं."
मे चोंक गय़ा। क्याँ मां भि जानती हैं येसभी!! क्याँ इसलिये वोँ मेरे सामने नहि आँ रही हैं!! इसलिये फ़ोन पे ठीक सें बात नहि कर पायी!! औऱ तोँ औऱ उन्होंने इस रिश्ते कों अपनाने केँ लिए भि मंजूरी दे दि। मेरी स्पाइन मे केँ एक् ठण्डी शीतलता पर्र दिल मे कम्पन देने वाली अनुभुति धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे जाकर पूरेबदन मे फैल गई। फिन भि मैने थोड़े आश्चर्य औऱ डाउट केँ संग धिरे सें पुछा
" क्याँ आप् लोगो नें मां सें भि इस बारे मे बात.औऱ.औऱ उन्होंने."
बोलकर मे चुप हौ गय़ा। नाना बोले
" पहले तौ उसने हम् दोनो पर्र बहोत क्रोध किया। एक् दम ख़फ़ा होँ गयीँ, थि। तीनदिन ठीक सें बात भि नहि कि, खानां भि नहि खाया.दिन भररूम लॉक करके अंदर रहनेलगी फिन औऱ दोदिन बाद सिचुएशन थोडा सहजहुआ। मंजु भि धिरे धिरे थोडा नरम होनेलगी औऱ कलजब तुम्हारी नानीमा सें मंजु कि बात हुइ तोँ तभी हम् जान पाये."
मेरे दिमाग़ मे बहोत सारी चिंता भर गई। मे कुछ न् बोलकर बैठारहा। नाना बोले
" हम् तुम् पर्र जबरदस्ती हमारी ख़्वाहिश नहीं थोपेंगे। जल्द जवाब देने कि जरुरत नहीं। तुम् समय लेके सोचो.फिन बताओ। जोँ भि राय होगी तुम्हारी, उसे हम् प्रेम सें एक्सेप्ट करेंगे"
उसदिन मे बहोत सारी चिंता औऱ नई अनुभुति केँ संग नानाजी जी केँ रूम सें निकल केँ मेरेरूम मे आया। मेरी अनुपस्थिति मे माँ मेराखाट एक् दमठीक सें बनाके गयीँ, हैं। मे अधिकसोच भि नहि पारहा थां। बस जाकेसो गायामगर नीद नहि आँ रही थि। बीचबीच मे एक् नई उत्तेजना सें कांपने लगा। जोँ भावना मेरेमन केँ अंदर थि, आज वो सच मे घटनेजा रही हैं। मे आंखबंध करके पड़ारहा। देररात कों कुछ डिसिशन लेने कां फैसला किया। पऱ हालतऐसा थां कि उस सें पहले खुदको हल्का करने केँ लिए पाजामे केँ अंदर सें अपना लंड निकलकर हिलाने लगा। लौड़ा आज ज़्यादा गर्म महसुस हुआ.मन शांत होनेलगा क्यूं कि तब तक शायद मेरेमन मे एक् डिसिशन होँ चुका थां औऱ धिरे धिरे एक् सुकून कि नीदआने लगी.
आगलादिन रविवार थां मे सुभह जल्दउठ गय़ा मे हमेशा जल्द उठता हूं मां नें यहआदत लगाई हैं मम्मी नें मुझेऐसी बहोत सारी अच्छी आदते सिखाई हैं। इसलिये मे ज़िन्दगी केँ रास्ते मे चलते वक्तहर समय उनकी उपस्थिति महसुस करताहु। वही एक् सिर्फ नारी हैं जौ मेरे पूरेदिल मे छाई हुई हैं। शायद इसलिये कभी औऱ कोई लड़की मेरेमन मे स्थान नहि बनापाई कलरात नाना नानीजी नें जोँ बातकही हैं, हौ सकता हैं इस दुनिया मे ऐसा होता नहि हैं। समाजउस चीज़ कों मान्यता देता नहि हैं। पर्र हमारे घऱ मे सभी.यानी कि नानाजी, नानीमा औऱ मम्मी.सभी इससे सहमत हैं। सभी हमारी भलाई केँ लिए हि ये चाहते हैं औऱ उसकेलिए जोँ भि बाधा कां सामना करना पड़ेगा, जौ संकट सामने आकर खड़ा होगा, जोँ भि सैक्रिफाइस करने पड़ेंगे, वो लोगसभी कुछ सहने केँ लिये सजधजकर हैं। तौ बाहर् कि दुनिया केँ बारे मे क्याँ सोचना !! औऱ मां भि एक् नारी हैं। उनके अंदर जौ महिला हैं, उस सुन्दर महिला कों मे पिछले 6 साल सें प्रेम करते आँ रहाहु। बॉलअब मेरे कोर्ट मे हैं। अगर मे चाहू तौ वो कोमलदिल कि नाज़ुक स्त्री ज़िन्दगी भरकेलिए मेरी होँ सकती हैं इसी वास्तव दुनिया मे, मेरी जीवनसाथी बन सकती हैं, मेरी पत्नि बन सकती हैं, मेरे बच्चों कि मम्मी बन सकती हैं। एक् ख़ुशी केँ आवेश मे मे आँख मूंद केँ पलंग पर्र पड़ारहा। तभी द्वार (दरवाज़ा) खटखटा केँ नाना नें नाश्ते लिए बुलाया.
मां सभी कि नज़रों सें छुपके रहरही हैं, स्पेशली मुझसे। नाश्ते कि टेबल पे भि कलरात जैसी स्थिति थि। मां रसोई सें नानीमा केँ हाथ खानां भेजरही हैं। आजसभी लोग थोडा कमबोल रहे हैं। पुरादिन ऐसे हि कटतारहा। मे नानाजी नानीमा सें कम्फर्टेबल होने कि कोशिश कररहा थां। फिन भि दिमाग़ कां एक् हिस्सा सभीकुछ नार्मल बनाने सें रोकरहा हैं। वो लोग भि आपस मे बातकर रहे हैं मगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे, कभीकभी मुझसे दूर रहके याँ मेरी नज़र सें बाहर्। पर्र सभीकुछ मे महसूस करपारहा थां मम्मी मात्र अपनेरूम औऱ रसोई मे हि आनां जानां कररही हैं पीछे केँ रास्ते सें। सो वो मेरे सामने आने मे हिचकिचा रही हैं। शायद लज्जा नें उनकोरोक रखा हैं.
मे हमेशा कि तरह संडेरात कों निकल पड़ा स्टेशन जाने केँ लिए। मे रात कों ट्रेवल करता थां एमपी जाने केँ लिये.मगर इसबार सभीकुछ पहले जैसे नहि हुआ.इस बार मे चुपचाप निकलने कि तैयारी करनेलगा। नानाजी नानीमा भि स्माइल लेकेचुप चाप खड़े हैं। नानीमा केँ पेर छूते हि उन्होंने मुझेगले लगा लिया औऱ कुछसमय ऐसे हि वो पकड़ केँ रखी.जब उन्होंने मुझे छोड़ा तब वो एक् मां कि स्नेह भरी आवाज़ सें बोलि " अपना ख़याल रखना"। मैंने खामोशी सें सर हिलाया। नाना मेरे लगभगआकर मेरीपीठ थपथपा दिए। मे खामोशी सें स्माइल देके अपनाबैग उठाने लगा। मेरामन बहोत कहरहा थां कि एक् बार मम्मी सें मिलके जाऊ.मगर कलरात सें मे स्वयं उनके सामने जा नहि पारहा हु, एक् संकोच नें घेररखा हैं मुझे। एक् लज्जा नें मुझेदूर कररखा हैं उनसे.चाह कर भि मेरेकदम उठाके उनके सामने जा नहि पारहा हु। शायदये इसलिये कि मे स्वयं सें ज़्यादा उनको शर्मिंदा नहि करना चाहता थां। ऐसी सिचुएशन मे उनको नहि ड़ालना चाहता थां जहाँ वो लज्जा औऱ ग्लानी मे स्वयं कों दुःख पहुँचाए। तभी भि मे जाने सें पहले उनकी एक् झलक देखने केँ लिएछट पटारहा थां। दरवाजे सें निकल केँ नानाजी नानीमा कों “बाय” बोलते वक्त, उनकी नज़र चुराके अंदर कि तरफ देखा.मन सोचरहा थां, शायद वो वहां कहीं खड़ी होगी पऱ मे उदास होके निकल गय़ा.
दफ़्तर मे भि मन मे वो बात आँ जाती थि। जब भि उस बारे मे मे थोडा गौर सें सोचता थां, तब ख़ुशी कां एक् आवेश मुझे पकड़ लेता थां। पूरा हफ्ता ऐसे हि ख़ुशी औऱ एक् टेंशन मे गुजरता रहा.
मे वापसआने केँ बाद मां कों भि फ़ोन नहि करता थां। जब भि मे फ़ोन करने केँ लिए सोचता थां, मुझे एक् लज्जा औऱ एक् अंजान अनुभुति घेर लेती थि.
ऐसे हि सभीकुछ सोच केँ, सभीठीक विचार कर केँ, मेरेमन मे एक् रोशनी पैदा हुईँ। मेरादिल भि अब एक् पक्के डिसिशन पऱ पहुंच गय़ा औऱ जैसे हि मेरे नें दिमाग़ उस डिसिशन कों एक्सेप्ट किया, तभी सें मेरे अंदर एक् खुशी औऱ सुख कि अनुभुति फैल गई। मैने संकोच सें बाहर् आँ कर मेरा डिसिशन नाना कों बताना चाहा.
आखिरउस शुक्रवार डिनर केँ बाद मेने नाना कों मोबाइल लगाया। नाना मोबाइल उठा केँ बोले.
“हैल्लो.''
मे जल्दी कुछबोल नहि पाया.कुछ समयबाद बोला
''हैल्लो नाना.आप् लोगसो तोँ नहि गए?''
''नहीं नहि बेटा। सोया नहीं.बस सोने कि तैयारी कररहा हु”.
मेरेमन मे बहोत कुछचल रहा हैं। केसे क्याँ कहुँ वो ठीक सें जबान पर्र नहीं आँ रहा हैं। मे जबाब मे सिर्फ "ओह अच्छा.'' हि बोल पाया.फिन मेरी चुप्पी देख केँ नाना भि बात ढूंढ नें लगे औऱ बोले.
"तुम् केसे हौ बेटा?''
"मे ठीक हूं''
"डिनर होँ गय़ा तुम्हारा?"
"हाजी."
मेरीइस तरह ख़ामोशी देख केँ नाना नें पूछा
''हितेश.बेटा तुम्। कुछ कहना चाहोगे?''
मैने नें जैसे हि जवाब मे '' ह्म्म्म'' कहा, मेरे जिस्म मे एक् करंट सां दौड़ गय़ा, पूराबदन कांपने लगा, स्वयं कों कंट्रोल करतेहुए मैंने कहा
'' नाना,.आप् लोग मुझसे बहोत बड़े हैं। औऱ हमेशा सें मेरी भलाई बुराई सोचते आँ रहे हैं.''
फिन मे रुक गय़ा.
नाना बहोत ध्यान सें बिलकुल साइलेंट होक सुनने लगे। शायद वो मेरी ख़ामोशी कि भाषा भि पड़ने कि कोशिश कररहे थें। मे फिन बोलने लगा
''अगर.अगर.आप् लोगों कों लगता हैं कि.इस मे हि सभी कां अच्छा हैं.इससे सभीखुश रहेंगे। औऱ। औऱ। मम्मी भि इस सें सहमत हैं। तौ।.''
मे रुक गय़ा। ये बताने केँ बाद एक् खुशी औऱ एक् अद्धभुत फीलिंग मेरे पूरेखून मे दौड़ने लगी। नाना हसीं केँ संग अचानक बोले
'' मे समझ गय़ा बेटा। तुम् बिलकुल चिंता मतकरो। सभीठीक होँ जाएगा.
तूम बसकलघऱ आओ। बाकि बातेघऱ पे बैठ केँ करेंगे''
उसरात मुझे नं कोई तस्वीर, नं कोईमन घड़ंत दुनिया कि जरुरत पड़ी। मे अपने हि बेड पे लेटे लेटे आनेवाले कल मे जोँ होनेवाला हैं, वो सोच केँ रोमांचित हौ गय़ा। इतनेदिन जौ चीज़ मात्र मेरेमन केँ अंदर थि। आज अचानक वो चीज़इस दुनिया मे सच होनेजा रही हैं। मैनेये सभीसोच कर मेरे पाजामे कां नाडा खोला आलरेडी मेरा लौड़ा उसके आनेवाले वक्त कों महसुस करके स्वयं हि ख़ुशी सें फूलरहा थां। मे पूरी मुठ्ठी सें उसे पकड़के धीरे-धीरे धीरे-धीरे सहलाने लगा.आँख बंध करते हि मेरी मां मेरी नज़र केँ सामने खड़ी हैं.
मे औऱ उत्तेजित होँ गय़ा येसोच केँ कि ये सुंदर महिला कुछ दिनों मे बस मेरी हि होने वाली हैं। मेरी पत्नि बनने वाली हैं। मेरे लोड़े कां कैपइस सोच मे औऱ भि फूल गय़ा। मे तेज़ी सें हिलने लगा औऱ मां केँ गले मे मेरा दियाहुआ मंगलसूत्र औऱ मांग मे मेरेनाम केँ सिन्दूर कि कल्पना करके मे ओर्गास्म कि तरफ पहुच गय़ा.
मे तेज़ी सें सांसे लेके बोलने लगा ' मां.आई लवयूआई लवयु मम्मी.आई। लवयु'। मां कि कोमल बुर, जिसको बसकुछ दिनबाद सें सिर्फ मुझे हि एक्सेस करने कां अधिकार मिलेगा,
उसकी कल्पना करके उसके अंदर मेरा वीर्य छोड़ने कां सुख महसुस करके, मेरा एकदम फुलाहुआ मोटा पेनिस जोरजोर सें झटके खानेलगा। आज पहलीबार इतना सीमेन निकला कि मे स्वयं हैरान होँ गय़ा। जब मेरा ओर्गास्म पूरा हौ गय़ा, मे शान्ति सें आँखबंध करकेबेड पऱ पड़ारहा.
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My another kahani ~ mummy मेरी hu gai (running)
vhai kya app is kahani ko hindi format mai likhenge plz.kyn kee Bangladesh say ho aur mujhe hindi akhsar parna nehi ata. plz app is kahani ko hindi format mai likhe. plz vai
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 12
अगलादिन शनिवार थां मुझेअब एक् नई अनुभुति होनेलगी। मेरा डिसीजन अब मां भि जान चुकी होगी औऱ घऱ पऱ सभी कों मालूम हैं कि इस रिश्ते केँ लिए हम् दोनों नें हि मंजूरी दे दि हैं। तौ अब मे सोचने लगा कि अब केसेइन सभी कों फेस करूंगा.
पहले कि तरहइस बार भि मुझेघऱ पे वार्म वेलकम मिला। नानाजी नानीमा नें इसतरह मेरा स्वागत किया जैसे मे कोई बाहर् कां रेस्पेक्टेड व्यक्ति हूं। मे येसोच केँ थोडा शर्मा गय़ा कि वो लोगऐसा शायद इसलिये कररहे हैं क्युकी मे कुछदिन मे उन लोगों कां दमाद बननेजा रहाहु। मैने मम्मी केँ रूम कि तरफ देखा.ये सोच केँ रोमाँचित होँ गय़ा कि मेरी होने वाली पत्नि मेरेआस पास हि घूमरही हैं। मुझे मां सें मिलने कि एक् चाहत होनेलगी पऱ अभि शायद वो नानीमा केँ संग हि होगी.सो मे सोचने लगा कि उनसे केसे, कहां थोडा अकेले मे मिल पाऊंगा.
मै ड्राइंग रूम मे आके नानाजी जी केँ पासबैठ केँ न्यूज़ देखने लगा.तभी नानीमा जी एक् प्लेट मे कुछ मिठाई मेरे सामने वाली सेंटर टेबल पे रखदी। अचानक आजइसतरह सें मिठाई कि प्लेट देख केँ मैनेऐसे हि कह दिया
" ये क्याँ। अभि ये मिठाई-फिटाई कौन खायेगा नानीमा जी ?"
नानीजी पानी कां गिलास आहिस्ता रखतेहुए बोलीं
" क्यूं.तुम् खाओगे"
मे केसुअली बोला
"अरे नानीजी मुझेये मिठाई नहीं.अब एक् गर्मगरम चाय चाहिए"
नानीमा मेरेतरफ देखके मुस्कुराके बोलि
"गरमचाय भि पिलायेंगे मगर उससे पहलेये खालो.अब येघऱ तुम्हारा अपनेघऱ केँ संगसंग तुम्हारा ससुराल भि बननेजा रहा हैं तौ शुरुवात मीठा खाके करोगे तौ रिश्ते मे मिठास बनी रहेंगी" बोलके चेहरे पे एक् मुस्कराहट फैल गई। मे एक् दमऐसे खुल्लम खुल्ला बाते सुनक, थोडा शरमाने लगा। नाना मेरेतरफ देखके स्माइल करके बोले
"खा लो"
मे इसबात कों यही समेटने नें केँ लिएचुप चाप प्लेट उठाके खानेलगा औऱ टेलीविज़न कि तरफ नज़र टीकाके सिचुएशन सहज करने कि कोशिश करनेलगा।.
कुछदेर बाद नानीमा फिन सें आई औऱ आके नानाजी केँ पासबैठ गयीँ, फिन नाना टेलीविज़न ऑफ करके मुझसे बात करनेलगे। वो लोग धीरे-धीरे धीरे-धीरे सीरियस होनेलगे औऱ मुझसे बहोत सारी चीज़ों मे मेरीराय पुछने लगे। जैसे कि विवाह कां प्रोग्राम कहां, केसे कियाजाए। हमारे ज़्यादा रिश्तेदार नहि थें औऱ जौ भि थें पिछले कुछ सालों मे नं मिलने केँ कारण, सभी बिछडगए सो उसमेकोई प्रॉब्लम नहि हैं। प्रॉब्लम हैं हमारा मुहल्ला, पड़ोसी औऱ कुछ दोस्तो कों लेके.इन लोगों सें हमें बचकेसभी कुछ करना पड़ेगा। इसलिये तयहुआ कि यहा नहीं औऱ कहीं जाके विवाह कां प्रोग्राम बनाना पड़ेगा। यानि कि कोईदूर स्थान जाके, जहाँ हमारे रिलेटिव्स वगेरा कों कुछ भि मालूम न् चले.तब नानीमा कों यादआया कि कुछसाल पहले नानाजी जी केँ बिज़नेस केँ कोई साथी कि बेटी कि विवाह हम् लोगो नें मिलके अटेंड कि थि मुंबई मे (एक्चुअली वोँ स्थान मुंबई सिटी केँ अंदर नहि थां).
मुंबई सें कुछ किलोमीटर्स दूरी पे, मुंबई-गुजरात हाईवे केँ साइड मे एक् रिसोर्ट मे विवाह हुआ थां। वहा कि खासबात ये थि कि वोँ स्थान एकदम अकेले मे हैं औऱ विवाह अटेंड करने वालेसभी कों रहने कां आवास भि प्रदान करता हैं। संग मे जोँ सबसे महत्वपूर्ण चीज़ हैं यानि कि विवाह कि रसम कां अरेंजमेंट--पंडित सें लेके रजिस्टर्ड साहब तक, सभी वो लोग देते हैं.
इनसभी बातों केँ बीच मेरे दिमाग़ मे येचलरहा थां कि केसे भि करके मां सें एक् बार मुलाकात करनी हैं। मुझेये भि मालूम थां कि मम्मी सें ऐसे आसानी सें मुलाकात नहि होँ पायेगा वो जानबूझ केँ मुझसे दूररह रही हैं। बिलकुल कोई मौका नहि देरही हैं आमने सामने आने कां इसलिये मे उनका चेहरा ठीक सें देख भि नहि पारहा हु। विवाह कि प्लानिंग तक शुरु होँ गई औऱ अभि तक दूल्हा औऱ दुल्हन कि एक् बारबात भि नहि हौ पाई मुझे एक् बार उनसेबात करनी हैं.
डिनर टेबल पे विवाह कों लेकेकोई बात नहि हुई बस मे जौ खानां पसन्द करताहु वही चीजे नानीमा जी मुझे अधिक सें ज़्यादा देरही हैं। मे जानता थां येसभी मम्मी नें मेरेलिए हि बनाया। आज वो सामने आने मे शर्मा रही हैं, इसलिये नानीमा केँ हाथों सें सभीबार बारभेज रही हैं। मे मनाकर रहा हूं, पर्र नानीमा जी सिर्फ बोलरही हैं "तुम्हारे लिए हि बनाई गयीँ, हैं। क्यूं नहि खाओगे?" औऱ फिन मेरेतरफ देखकर मुस्कुरा रही हैं.
"बस औऱ कुछदिन। नानीमा केँ हाथ कां खानां खालो.फिन तोँ तुम्हे साँस केँ हाथ कां खानां खानां पड़ेगा." बोल केँ थोडा हंस केँ रसोई केँ तरफचली गई। नानाजी जी भि इसबात सें हसनेलगे। मे लज्जा केँ मारे अंदर घुसेजा रहा थां.
मे डिनर केँ बाद नानाजी जी केँ रूम मे बैठ केँ बातकर रहा थां। नाना नें पूछा कि अब मुझेनए घऱ पर्र शिफ़्ट करना हैं कि उसीघऱ मे रहना हैं, मैंने बताया कि येघऱ हि फिलहाल ठीक हैं। नानीमा जी बोलने लगी कि अब तक तौ मे अकेला थां, सभीचल जाता थां। मगरअब फेमिली रहेगी। तोँ उसकेलिए सारे सामान कां भि बंदोबस्त करना पडेगा। मैंने बोला कि उसबात कि कोई चिंता न् करें वोँ सभी मे स्वयं हि संभल सकता हूं। मे फ़टाफ़ट डिस्कशन कों एन्ड करके नानाजी जी केँ रूम सें बाहर् आँ गय़ा औऱ जैसे हि मे ड्राइंग रूम कि तरफ जानेलगा तब मुझे मेरेरूम कि लाइट चालू दिखाई दि। मेरी छाती मे झट सें एक् ऐसी फीलिंग हुई कि जैसे मेरी छाती सें कुछ निकल नें लगा हौ औऱ अचानक मेरी बॉडी हल्की हौ गई.
मैंने डोर केँ पास जाते हि वोँ प्रजेंस फीलकर ली। वो मेरेतरफ पीठ करके, थोडा झुक केँ, मच्छर दानीसही सें चारोतरफ बैड केँ साइड मे घुसारहे थि। मेरेआते हि वो अचानक वो सभीबंद करके खड़ी हौ गई उनकाफुल बैक साइड मेरीतरफ हैं, मे अपनेरूम कि तरफ चलनेलगा। मुझे मालूम थां जब मे नहि होता हूं तब मम्मी आके मेराखाट ठीक करके जाती हैं औऱ इसलिये मे डिनर करके नाना केँ रूम मे उस मौके कां इंतजार कररहा थां। मे उनके जितना नजदीक जारहा थां, उतना हि नर्वस भि हौ रहा थां। एक् अजीब अनुभुति भि हौ रही थि औऱ एक् नशा भि। उनको देखके मे केसे रियेक्ट करूँगा याँ वो केसे रियेक्ट करेंगी फिन भि मे उनको एकबार सामने सें देख्ना चाहता हु उनसेबात करना चाहता हु.
एक् हलके येलोकलर कि प्रिंटेड साड़ी औऱ मैचिंग ब्लाउज पहनी हुईँ थि। ब्लाउज केँ ऊपर गोरी गोरी, रसीले औऱ सुडौल गर्दन तथापीठ कां ऊपरीभाग नज़र आँ रहा थां संग मे बाल खुले थें। उनके बॉडी कर्व्स ढ़लान लेके दोनों साइड सें आके उनकी पतलीकमर मे मिलरहे हैं। उनकी गान्ड उभरी हुइ नजर आँ रही हैं। आज तक जोँ चीज़ मेरी फेंटेसी कि दुनिया मे होती थि, आज पहलीबार हकीकत मे होँ रही हैं। उनकोदेख कर उनके सामने हि, पजामे केँ अंदर मेरा लौड़ा सख्त होनेलगा.
मम्मी उनके राईट हैंड सें बिस्तर कां स्टैंड पकड़ केँ स्थिर होँ गयीँ,। उनकोसर झुका केँ खड़ी होतेदेख अचानक मेरे अंदर कि सभी घबराहट ग़ायब होनेलगी औऱ एक् अजीब मदहोशी मुझमें छानेलगी। जौ प्रेम मे उनकेलिए पिछले कई सालों सें छुपाके रखा थां, आज वो प्रेम, वो अनुभुति पहलीबार मेरेदिल मे इस वास्तव दुनिया मे आनेलगी। दिनभर बहोत कुछ सोचा थां मां केँ लिए, मगर अबजब वो सामने खड़ी हैं तौ मे सभीकुछ भूल गय़ा। मात्र मेरे छाती मे तरंग जैसेकुछ बहनेलगी। मे रूम केँ अंदर गय़ा वो अपने राईट हैंड कि थंबनेल सें बिस्तर केँ स्टैंड केँ उप्पर रब करनेलगी। मैंने उनको देखते हुएकहा
"मम्मी। एक्चुअली। मे तुमसे सच मे बहोत प्रेम करता हूं"
यह सुनते हि मां शायद थोडा काँपउठी। फिन स्वयं कों कंट्रोल करके वहां खड़ीरही। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलके मेरे स्टडी टेबल केँ पास गय़ा। वहा सें उनका साइड प्रोफाइल नज़र आँ रहा थां उनके चेहरा पे लज्जा छाई हुई हैं। नज़र झुकि हुईँ हैं। यहा सें मुझे उनके पेट् कां नज़र आँ रहा हैं
जोँ एक् दम फ्लैट हैं। मे उनकेपेट कों देख केँ सोचने लगा कि इसपेट केँ अंदर सें हि एक् दिन मेरा बच्चा आएगा। मे येसोच केँ औऱ भि रोमाँचित होँ गय़ा औऱ पाजामे केँ अंदर मेरा लौड़ा सख्त हौ गय़ा। जैसे हि मे डोर छोड़के अंदरआया मम्मी फट सें मुड़के तेज़ी सें रूम सें निकल गई। मे उनका जानां देखने लगा.ऐसी एक् सुन्दर स्त्री, जिसको मे प्रेम भि करताहु, रेस्पेक्ट भि करताहु, चाहता भि हु, उनकेसंग हि मे पूरी ज़िन्दगी बिताने वालाहु येसोच केँ मेरेमन मे खुशीछा गईं.
उस रात मे आँखेबंध करके मम्मी केँ कियेहुए पलंग मे सोके उनका स्पर्श महसुस कररहा थां। लगरहा थां जैसे वो मेरे एकदमपास, एक् दम लगभग हैं। बसकुछ दिन कां फासला हैं। फिन वो सुन्दर, नरम, प्यारी स्त्री, हररात मेरी बाँहों मे रहेगी औऱ मे उनको बहोत प्रेम करूंगा। मे उनकोकभी कुछ भि दुःख महसुस करने नहि दूंगा। हमेशा उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा देखने चाहता हु। मे एक् अच्छे पति कां धर्म निभाते हुए दुनिया कि हर ख़ुशी उनके सामने लाकर दुंगा। उनकेतन मन कों हमेशा खुशी मे रखुंगा। मे इनसभी बातों सें गर्म हौ गय़ा थां। फिन भि मन हि मनशपथ खाइ कि आज सें मेरेतन मन कि हर ख़ुशी भि उनकेसंग हि शेयर करूंगा। तोँ उसरात मे मूठ मारके अकेले वो सुख लेना नहि चाहरहा थां अब मे सभीकुछ बस उनकेसंग हि करना चाहता हु औऱ मे हमारी सुहागरात मे उनको परिपूर्ण संतुष्टि देना चाहता हु.येे सभीसोच केँ मेरी आंखो मे नीदकब आकर मुझे एक् ख़ुशी केँ सागर मे बहाके लें गई, मुझेपता नहि चला.
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my other kahani :- mummy मेरी hu gai
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 13
अगलेदिन मे जब ड्राइंग रूम मे आया, वहां नानाजी नानीमा केँ संग मां कुछबात कररही थि। पऱ जैसे हि मे ड्राइंग रूम मे एंट्री लेता हूं वो आंखेउठा कर एकबार मुझे देखती हैं औऱ शर्मा केँ फिन सें नानीमा केँ तरफ देखके कुछ बोलीं औऱ जल्दी वहां सें जानेलगी औऱ रसोई केँ तरफ केँ डोर सें निकल गई,। मे समझ गय़ा मम्मी भि मेरी जैसी सिचुएशन मे हैं। शायद उनका भि मनचाह रहा होगा कि वो मुझसे मिले, बातें करे, पऱ उनके अंदर कि भावनाएं औऱ संकोच वो सभी करने सें रोकरहा हैं। अब तक जोँ उनका बेटा थां अपनाखुन थां जिसको बचपन सें पाल-पोस केँ एक् नौजवान लड़का बनाया, जिसे मां कि ममता, प्रेम औऱ स्नेह देकर बड़ा किया हैं, उस नौजवान लड़के कों अब उनके पति केँ रूप मे मान नां पड़ेगा। उसको पति कां अधिकार देना पडेगा। अपनातन मन उसको सोंपना पड़ेगा। एक् नये पवित्र रिश्ते मे उससे जुड़ना पड़ेगा। उनकोदेख केँ येपता चलरहा हैं कि वो इससभी सोच औऱ संकोच सें निकलने कि कोशिश कररही हैं। क्यूं कि उनकी नज़र मे, उनकेचलन मे, औऱ उनके इशारे मे साफ़ साफ़पता चलरहा हैं कि वो अब एक् मम्मी कि तरह नहि, बल्कि वो स्वयं कों एक् लड़की केँ तरह महसुस कररही हैं। जिस कि अभि विवाह होनेवाली हैं औऱ वो अपने होनेवाले पति सें शर्मा रही हैं.
मे ड्राइंग रूम मे बैठ केँ टेलीविज़न देखरहा थां मगर मेरामन चाहरहा थां मां केँ संगबैठ केँ बातकर सकूं, उनका ख़ूबसूरत चेहरा अपने हाथों मे पकड़ केँ, आँखों मे आँखे डालके देखने कि चाहत होँ रही थि। पर्र ये सम्भव नहि हौ पारहा हैं। हालाकि हम् सभी जानते हैं कि इस रिश्ते केँ लिए दोनों हि राज़ी हैं, औऱ बसकुछ हि दिनों मे हम् पति पत्नि केँ पवित्र बंधन मे जुड़ने जारहे हैं।
नानीमा मां कों रसोई मे अकेला छोड़के मेरे साइड मे रखे सोफा पर्र बैठी। मेरेसंग मम्मी केँ इसनये रिश्ते सें नानीमा जी बहोत खुश हैं। उनकी एकलौती बेटी कि ज़िन्दगी सिर्फ दुःख सें भरी हैं। अब ज़िन्दगी उनको एक् दूसरा मौकादे रहा हैं। पति केँ प्रेम केँ संग एक् नई फैमिली बनाकर ज़िन्दगी जीने कां सपना पूरा होनेजा रहा हैं। नानीमा जी भावुक हौ गई, उनकी आँखें गिली होनेलगी। वो मेराहाथ उनकेहाथ सें पकड़ केँ कहनेलगी
"बेटा, मे तुम् दोनों कों दिल भरके आशीर्वाद देतीहुँ। तुम् लोग एक् दूसरे कों ज़िंदगी भर प्रेम करते रहना। हँसी, खुशी, खुशी औऱ शांति केँ संग जीते रहना। अपनी फैमिली, अपने बच्चों केँ संग एक् नई दुनिया बनाके खुश रहना."
नानीमा केँ आँखों मे पानीआने लगा। "बेटा, हम् सभी कि भलाई केँ लिये, तुम्हारी अपने फैमिली केँ लिये, तुम् आज जौ कररहे होँ, इस केँ लिए मे केसे तुम्हें."
नानीमा औऱ बोल नहि पायी उनकागला बंध होनेलगा। बस वो मेरेतरफ एक् प्रेम औऱ ममताभरी, कृतज्ञता कि नज़र सें देखरही थि। मे भि भावुक होँ गय़ा मैंने उनकाहाथ मेरेहाथ मे लेके, मेरी स्वीकृति जताई औऱ बोला
"नानीमा जी.आप् बिलकुल परेशान मत होइए। आप् कि बेटी कों मे खुश रखुंगा औऱ हम् सभी मिलके खुश रहेंगे"
नानीमा जी केँ होठो पे एक् मुस्कराहट आनेलगी औऱ फिन थोडा हंसके मेरेगाल पे प्रेम सें एक् हल्का सां चाटा मारके बोलीं
"पागल लड़का.मुझे अब नानीमा नहि !!!.माँ तौ बोल"
वो हसनेलगी औऱ मे लज्जा मे डुबाजा रहा थां.
मे खानां खारहा थां अचानक मेरी नज़रउन लोगों केँ पीछे रसोईडोर पे पड़ी। मैने देखा कि मां रसोईडोर केँ पीछेछुप कर सीधा मुझेगौर सें देखरही हैं।
उनकी आँखों मे जौ ख़ुशी कि झलक थि, औऱ होठो पे प्रेम भरी मुस्कान, वो मुझेदिख गई,। पर्र जैसे हि उनकेसंग मेरी नज़र मिली, वो झट सें अंदरछुप गई,। जैसेकोई टीनएज गर्ल अपने प्रेमी कों देख केँ लज्जा सें छुपती हैं। मेरी छाती मे तरंग जैसीकोई एक् अनुभुति मेरेदिल कों अंदर सें छुनेलगी।
नानाजी नानीमा ड्राइंगरूम मे बैठे थें मेरे जाने कां वक्त हौ गय़ा। मे उठके अपनेरूम कि तरफचला बैग लाने केँ लिये। मेरे दिमाग़ मे बहोत कुछचल रहा थां मे मेरेरूम मे जैसे हि एंट्री करता हूं, मे चौंक गय़ा। स्टडी टेबल केँ पास मम्मी खड़ी हैं।
मेरी नज़र उनपे टीकी हुईँ हैं। उनकी आँखो मे पहलीबार वो प्रेम दिखाई दिया जौ एक् लड़के केँ लिए एक् लड़की केँ मन मे होता हैं, एक् प्रेमी केँ लिए उनके प्रेमिका केँ दिल मे होता हैं। उनके गुलाबी होंठों पे एक् मुस्कराहट झलकरही हैं। संग हि संग उनके पतलेहोठ एक् अद्भुत आवेश मे थोडा थोडा कांपरहा हैं। पूरा चेहरा लज्जा सें लाल होँ गय़ा हैं। मे उनसे नज़र मिलाके देखेजा रहाहु औऱ अंदर हि अंदर बहोत कुछ बोलेजा रहाहुँ। पर्र एक् भि बात ज़बान तक नहींआई नां हींकुछ करपारहा हुँ। अचानक उन्होंने नज़र झुकाली।
मेरी नज़र नीचे होतेहुए उनकेगले केँ नीचे छाती पऱ औऱ मख़्खन जैसे रसीले क्लीवेज एरिया मे आकेटिक गई।
तभी मां नें दौड़कर आके मेरी छाती मे उनका मुंह घुसा दिया औऱ दोनों हाथ पीछे लेँ जाकेपीठ केँ ऊपर रखके मुझे कसके पकड़ लिया।
उनका पूराबदन मेरेबदन सें चिपका हुआ हैं। माँ नें पहलीबार इसतरह मुझेहग किया हैं। एक् मम्मी कि तरह नहीं, एक् नई नवेली पत्नि कि तरह मुझे पकड़रखा हैं। उनकेनरम नरम बूब्स मेरे छाती केँ पऱ चिपके हुये हैं। उनका प्राइवेट एरिया मेराथाई केँ संग चिपका हुआ हैं। उनका फ्लैट पेट मेरे प्राइवेट एरिया केँ संग चिपका हुआ हैं। मेरातना हुआ लौड़ा जोँ मेरी जीन्स केँ ऊपर सें अपनेपेट नें महसुस किया होगा।
मे उनके बालों मे अपना मुंह घूसा केँ, उनको अपने दोनों हाथों सें पकड़ केँ ज़ोर सें मेरेसंग चिपकाने लगा। हममें सें कोईकुछ नहि बोलरहा थां, मात्र एक् दूसरे कों महसुस कररहे थें। ऐसा करके मुझे जोँ कहना थां वो कह दिया औऱ मुझे जोँ कुछ पुछना थां उसका जवाब भि मिल गय़ा। अचानक उनकी ग्रिप लूज हौ गई औऱ उन्होंने अपना चेहरा मेरी छाती सें अलग करने कां संकेत दिया। मैंने मेरी पकड़ छोड़ दि। उन्होंने मेरे सें थोडा अलग होकर मेरे सामने बसकुछ मोमेंट्स खड़ी होकर नज़र नीचे करके, फिन तेजी सें दौड केँ अपनेरूम मे चली गई,।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Next part miss mat karna
Mazedaar shuruat.mummy-bete kaa pyaar yunhi mamta or kamukta k saath parwan chadhe.bass ek request h shaadi k baad bi beta at least akele main or nana nani k saamne bi mummy ko mummy or mummy bete ko beta hi kahte huye kamuk pyaar kare.
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