मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 8
१५दिन बाद २ण्ड वीकेंड मे मे अहमदाबाद गय़ा। मां बेसब्री सें मेरा इंतजार कररही थि। कलरात फ़ोन पे वो मुझेबार बारपूछ रही थि कि मे कितने बजे कां ट्रैन सें आउंगा। कब पहुँचूंगा अहमदाबाद औऱ ढेर सारे प्रश्न। तभी मुझे एह्सास हुआ कि ज़िन्दगी मे पहलीबार १५दिन तक मे मम्मी सें औऱ मम्मी मुझसे दूर हैं। नानीमा जी नें दरवाजा खोलके मुझे वहींगले लगा लिया। पीछे नानाजी जी खड़े थें। वो भि ख़ुश होकर मुझसे बात करनेलगे। मे अंदरआया। औऱ अपनाबैग कन्धे सें उतार केँ नीचेरखा। मम्मी उनसभी केँ पीछे खड़ेहोक मुझेदेख रही थि। उनकी प्रेम भरी नज़रों सें जौ अपना बेटे केँ लिए उदबेग औऱ ख़ुशी नज़रआया, वो देख केँ मेरादिल पिघल नें लगा। वो ऐसी एक् सुंदरता औऱ शान्ति कि मूर्ति हैं, जिसको मे ज़िन्दगी भर बिनापलक झपकाये देख सकताहू। मां हमेशा घऱ पे साड़ी हि पहनती हैं.
उनकी इनोसेंट फेस औऱ नाक, पीछे कां सुडौल गर्दन, एल्बो सें नीचे कां हाथ कां हिसा, दोनों हाथ मे दो सोने कां चूडि, औऱ लंबी लंबीगोल गोल उँगलियाँ, उन्होंने लेफ्ट हाथ कि उँगलियाँ मे हल्का सां लाइटकलर नेल पोलिश, पेट् नीचे जाके पतलीकमर औऱ संग मे पतला बॉडी होने केँ कारन उनका उम्रकभी पता नहि लगता थां। कोई भि देखता थां तो उनको२० - २२साल कि लड़की सोचता थां। कोई नहि बिस्वास करता थां कि वो मेरा मां हैं। उनका पांव मुझे सबसे ज़ादा आकर्षित करता थां.
ऐसा सुन्दर छोटी छोटी रसीले पांव औऱ हल्का नेल पोलिश वाली उंगलिया देखके मुझे हमेशा एक् नशा आजाता हैं। इस महिला कों मे जितना देखता हू, उतनाकम हैं.ये सबकुछ उनकेलिए मेरेदिल मे प्रेम औऱ रेस्पेक्ट बढा देता हैं। हमेशा उनकेलिए एक् अलग अनुभुति मेरेमन मे छा जाता हैं। नानाजी-नानीमा पांव पढ़ने केँ बाद मे मम्मी केँ पास गय़ा। मे भि उनसे मिलने केँ लिए बेताब थां। मे उनकेपेर छुये। मे जैसे हि खड़ाहुआ वो मुझको पकड़ केँ मेरेगले लगना चाही। पर्र उनकासर मेरे शोल्डर पे टिक गय़ा। औऱ दोनों हाथ सें वो मुझे पीछे सें बेडी लगाके कसके पकड़ली.
वो इतनेदिन कि दूरि मुझसे ऐसेगले लगा केँ पूरीकर रही हैं। नानाजी - नानीमा हास्के बोलने लगे कि "क्य मंजू.बेटे कों औऱ जाने नहि देगी क्याँ?" मां मेरे नज़्दीक रहकर, उनका हि हिस्सा, उनका हि खून, जौ आज एक् नौजवान पुरुष बन गय़ा, उस कों मेहसुस कररही हैं एक् अपने स्नेह केँ संग.
रात कों डिनर केँ समय हमेशा कि तरहसभी लोग खाने बैठे। हमारे परिवार मे सभी डिनर एकसाथ करते थें। मां जनरली सर्व करती हैं पऱ कभीकभी वो भि संग मे बैठ जाती थि औऱ सेल्फ सर्विस चलता थां। सभीहसि मज़ाक़ औऱ मस्ती केँ संग वो समय बिताते हैं। आज भि सभीलोग बैठे। मम्मी सर्वकर रही हैं। मे पिछला ५ घंटे सें आया.तब सें सभीलोग मेरे पीछेपड़ गये। मेराबदन औऱ हालत१५ दिन मे सुख सां गय़ा, ऐसालगा उन लोगों कों। उनको लगता हैं मे खानां नहि खायाइन १५दिन। बारबार पूछरहे हैं दफ़्तर मे क्याँ खताहूण। वो खानां सप्लाई करनेवाला व्यक्ति ठीक सें खानां देता हैं क्य, मे उसकोठीक सें खाताहुन याँ नहीं। एक् लौता पोता औऱ एक् लौते बेटे केँ लिये.सभी चिन्ता थि, ये मे मेहसुस कररहा थां.
ऐसेही हि ज़िन्दगी चल्ने लगा। वीकडेस मे सभी सें दूर रहकेकाम करना। अपनीदेख भाल स्वयं हि करना। मम्मी सें मोबाइल पे बात करना.ये सभी एक् रूटीन बनरहा थां। फिन वीकेंड मे घऱ जाने मे एक् ख़ुशी महलबन जाता थां। फिनसभी कां प्रेम, सनेह औऱ मेरे बारे मे उनलोगों कां चिंता केँ संगदो दिन बिताके फिन वापस आनां। दफ़्तर मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे काम कां प्रेशर बढ़ नें लगा। इस्सलिए शायदसच मुछ मेरे जिस्म पे इस कां प्रभाव पड़ने लगा.फिन सें वीकेंड आया औऱ मे घऱ वापसआया। मेरी हालत देखके सभी परेशान हौ गए। मां मात्र पूछा मे खानां खताहु क्याँ वक्त पे। उनके आँखों मे एक् चिन्ता दिखा। नानाजी नानीमा ज़ादा सोच मे पड़गये.
नानाजी नानीमा इतना परेशान थां मेरा हालत कों लेके कि उन लोगों नें मेराइस प्रॉब्लम कां सलूशन ढूँढ़ना सुरुकर दिया। वो दोनों रात मे सोटेसमय आपस मे बात करनेलगा। पहलेये तय किया कि मेरी मां मेरापास जायेगी औऱ मेरेसंग रहके मेरादेख भाल करेंगे। मम्मी कों भि प्रॉब्लम नहि होना चाहिए क्यूं कि वो हमेशा अपने बेटे केँ लियेही सभीकुछ छोड़के आजऐसा एक् ज़िन्दगी चुना। तो वो भि इस मे खुश होके मेरेपास रहना मनपसंद करेंगे। फिन वो लोग सोचे कि मे अब२०साल कां हौ गय़ा। बाकिसेम उम्र केँ लड़कों सें मे थोडा म्याचूर्ड भि दीखता हूण.संग मे नौकरी करताहूण। अच्छा सैलरी भि मिलरहा हैं। संग मे नाना कां सभीकुछ मेरा हि हैं। औऱ कोई वारिस नहि मेरी मम्मी छोडकर। सो आखिरसभी कुछ मेरेपास हि आयेगा। सोयेसभी काउंट करेंगे तो मेरेलिए आच्छे घऱ कि एक् अच्छी सुन्दर सुशिल लड़कीमिल जाएगी। नानाजी नानीमा ये सोचे कि जब ज़िन्दगी मे विवाह करवाना हैं औऱ अबइस प्रॉब्लम कां हल ढूँढ़ना हैं, तब क्यूं नाँ अभि उसकेलिए लड़की ढुंडके विवाह न् करवा दियाजाए। ये तरीका उनकोसही लगा। पऱ जब नानीमा जी थोडा समयचुप रह, कुछ बोल नहि रही थि तब नानाजी जी पूछे उनको कि क्याँ कोईगलत सोचा वो लोग? नानीमा जीतब बोलने लगी कि नहि गलतकुछ नहीं। पऱ आज हीतेश कां विवाह करवाके उसका लाइफसेट होँ तौ जाएगा। पर्र हम् औऱ कितने दिन जियेंगे? नाना ६० क्रॉस कर चुके हैं औऱ नानीजी भि दोचार साल मे ६०टचकर लेगी। वो लोग औऱ जीतना दिन हैं, तब तक ठीक हैं। पऱ वो लोग जानेके बाद उनकी बेटी मंजु बिलकुल अकेली होँ जाएगी। हीतेश हैं एक् सहारा। पर्र पत्नि आनेके बादसभी बेटा पत्नि कां हि हौ जाता हैं। पत्नि कि हि सुनता हैं। तब मम्मी कां प्यारा, मां कां ओबीडियन्ट बेटा बनके रहने मे बहोत सारा झमेला आजाता हैं। पत्नि अपने पति केँ ऊपर औऱ किसी कां अधिकार सह नहि सकती। पत्नि हमेशा अपनी फॅमिली कि लग़ाम अपनेहि हाथ मे रखना चाहती हैं। अपनी सासू, जोँ उसका पति कों पालपोश केँ आजइस लायक बनाया, उनको भि वहां घुसना पसन्द नहि करती। बेटा कितना भि चाहे, अपनी पत्नि केँ खिलाफ जानां मतलब अपनी हि पांव मे कुल्हाड़ी मारना येसमझ जाता हैं। पर्र जौ स्त्री अपने बेटे केँ लिए पूरी ज़िन्दगी विसर्जन दि, दोबारा अपनी ज़िन्दगी मे सभीकुछ पाने केँ मौके कों अपने हि हाथ सें गवाया सिर्फ अपने बेटे कां मुह देखके, जोँ अपनि पूरी जीवन कि ख़ुशी अपने बेटे मे हि ढूंडा--उस महिला केँ संगअगर ऐसा होगा तो इस दुनिया मे अकेली केसेजी पाएंगी?
नानीजी नें बोला कि जब तक हम् इस दुनिया मे हैं तब तक ठीक हैं। पर्र हमारे जाने केँ बादकौन देखेगा उसको उसके बुढ़ापे मे। वो लोग जानता हैं हीतेश ऐसा लड़का नहीं। उसका परवरिश भि उसतरह हुआ नहीं। बचपन सें वो सभीकुछ देखते आया। हमारा प्रेम, बॉन्डिंग वो अछितरह सें मेहसुस करतेआया। वो कभी अपनी मां कों दुःख देगा नहीं। बिना बाप कि ज़िन्दगी मे वो अपनी मम्मी सें जौ प्रेम उसको मिला हैं उसमेकभी बाप कि कमी शायद मेहसुस नहि किया होगा। पर्र हैं तौ वो एक् लौता.उसी सें हि इस खानदान कि अगली पीढी आयेगा। इस्सलिए उसको विवाह भि करना पडेगा। उसको अपनेलिए पत्नि भि चुननी पड़ेगी। आजकल कि लड़की होते भि सभी ऐसेही। अपना पति औऱ अपने बच्चो कों हि अपना दुनिया मानता हैं। परिवार केँ बाकिसभी कों लेके जोँ एक् फॅमिली बनता हैं, औऱ उसमे जौ सुख मिलता हैं, वो सभीआज कल कि लड़की लोगों कि मानसिकता मे नहि हैं.नानाजी नानीमा येसोच केँ मायुस हुआ कि अगर वो लोगतभी मम्मी कां नं सुनके अगर उनका विवाह फिन सें करवा देते तो आजये दुश्चिंता उनलोगो कों सताता नहि। येसभी सोच केँ उनकी बेटी अपना ज़िन्दगी कां सभी ख़ुशी अपने हि हाथ सें दूर फ़ेक दिया। औऱ आज वो घडी आगयाफिन सें वैसे एक् परिस्थिति आनेका। आज एक् लड़कीइस फॅमिली मे बहु बनके आयेगा। वो आके केसे व्यवहार करेगी अपने सासू माँ सें, अपने पति केँ नानाजी नानीमा सें, येसभी सोचते उनकोदिल पे कालामेघ छा नें लगता हैं। मगरकरे तोँ करेकया। शायदएहि दुनिया कां नियम। आप् जीस प्रॉब्लम सें दूर भागते हौ, वो प्रॉब्लम आगे आपकेलिए वेटकर रहा हैं आपसेगले लगाने केँ लिये.ये सभी चिंता मे सें वो लोग डूबे रहते थें। औऱ हररोज सोने केँ वक्तदो बूढ़ा बूढीएहि डिस्कुस करनेलगे। ऐसे हि एक् दिन उनलोगों केँ मन मे येसभी केँ अलावा औऱ एक् सोलुशन नज़रआया। पहले वो लोग स्वयं हि थोडा आचर्यचकित होँ गए थें। बाद मे बातों बातों मे सभीकुछ सहीलगा। लगा केँ, सभीठीक विचार करके, सभी कां भलाई सोचके, सभी कां फ्यूचर कां कुछ प्लानिंग ठीक करके धीरे-धीरे धीरे-धीरे एक् फैसले मे पहुच चुके। आखिर मे उस बारे मे बहोत उँछनिछ बाते होने केँ बाद नानाजी नानीमा एक् डिसिशन पे पहुचे। मगरतब भि वो लोग भि नहि जानते थें कि सच मे ये मुमकीन होगा याँ नहीं। औऱ होगा भि तोँ उस केँ लिए किसको क्याँ क्याँ करना पड़ेगा, क्याँ सैक्रिफाइस करना पड़ेगा, याँ किस तरीके सें मुमकीन होगाये वो लोग बिलकुल नहि जानते थें।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 9
आज नानाजी जी औऱ नानीमा जी ड्राइंग रूम मे बैठके टेलीविज़न देख रेहे थें। मम्मी नहा केँ फ्रेश होकर, भीगे बालों मे एक् टॉवल लपेट केँ रसोई मे कामकर रही थि। दोपहर का खाना केँ लिए सब्जिअं काटरही थि। नानाजी - नानीमा टेलीविज़न देखरहे थें, फिनदेख भि नहि रहे थें। आज उनलोगों कों देख केँ ऐसा लगनेलगा कि वो लोग टेलीविज़न केँ तरफदेख केँ औऱ कुछसोच रहे थें। एक् वक़्त नाना नानीजी कि तरफ मुड़के देखा। नानीजी उनकोदेख केँ कुछ समझि औऱ फिन सें दोनों टेलीविज़न देखने लगे। थोड़ी देरबाद नानीजी वहां सें उठ केँ रसोई केँ तरफचली गई। रसोई मे मम्मी कों काम मे हेल्प करने केँ लिए उनकेसंग हाथ बटाने लग गई,
। थोड़ी देरइधर उधर कि बात होने केँ बाद नानीमा जी मेराबात लेके वो उनका चिंता जताते रहे। मे कितना प्रॉब्लम फेसकर रहाहू अकेला रहके। मम्मी भि समझती थि मेरी प्रॉब्लम क्यूं कि वो भि कुछदिन सें परेशान थि इस कों लेके.सो नानीमा जी कि बातों मे मम्मी भि संग देणेलगी। तब नानीमा जी बोलने लगी कि अब हीतेश भि बड़ा होँ गय़ा हैं तोँ उसका विवाह करवा देते हैं। येसुन केँ मम्मी नानीमा कि तरफदेख केँ हॅसने लागी। मम्मी हस्ते हस्ते बोलीं
" अब.विवाह। हीतेश कि?"
नानीमा बोलि
" हा.कयूं नहि?"
" माँ। अब तोँ वो बच्चा हैं"
" हीतेश २०साल कां हौ चुका हैं। जॉब भि करता हैं। औऱ उसकोदेख केँ कौन सां बच्चा लगता हैं तुम्हारी तरफ?"
मम्मी मुस्कुराके सब्जी काटने लगी। उनको भि येसभी मालूम हैं। तब नानीमा बोलीं
" हर मम्मी कों उनके बेटा-बेटी हमेशा बच्चा हि लगता हैं.जब कि वो कितना भि बड़ा हौ जाए"
सब्जी काटते काटते मां बोलि
" तौ अब हीतेश कों एकबार पुछ लेते हैं."
नानीमा नमकिन कां पैकेट्स काट केँ छोटा छोटा बरनि मे भरतेहुए कहा
" उससे क्याँ पूछना हैं."
फिन मां केँ ऊपर एक् नज़रदाल केँ देखि। मां नानीमा कि तरफबैक होकखडी हैं सब्जी काटते हुए रसोई स्लैब केँ पास। फिन अपनीहाथ मे पकडे बरनि कि तरफदेख केँ नानीमा बोलीं
" घऱ पे हम् उसके बड़े हैं। क्याँ हम् उसकी भलाई बुराई नहि समझते हैं क्याँ?। औऱ वो भि ऐसा नहीं। हमेशा हमारी बात सुनता हैं"
मा कां सब्जी काटना समाप्त हौ गय़ा थां वो मुड केँ नानीमा कों देखते हुए रसोई कां दूसरा तरफ जानेलगी.
वो वहांरखा आटे कां डिब्बा खोलरहे थें औऱ बोलीं
" उसकेलिए तोँ अब एक् अच्छी लड़की ढूंढ़नी पड़ेगी माँ"
नानीमा अब बरनि कां ढक्कन बंद करतेहुए कही
" हाँ.ये एक् बड़ाकाम हैं। एक् अच्छी लड़की हि तोँ चहिये"
नानीमा ढक्कन टाइट करते करते मां कि तरफ देखि औऱ कहनेलगी
" जौ हीतेश कां ठीक सें देखभाल करसके। अकेली हाथों सें संसार बांधसके। बच्चे कां देखभाल करसके। औऱ हमारे संग मिलके हमारी एक् फॅमिली जैसी बनकेरहे."
मा थोडी चिंतित दिखरही थि। वो आटा निकालते निकालते नानीमा कों देख केँ बोलि
" सहीकहा तुमने मां."
फिन अपनेकाम कि तरफ नज़र फिराके बोलने लगि
" ऐसी हि लड़की चाहिए हमारे हीतेश केँ लिये। जोँ हम् सभी कों अपनासोच केँ हमारे तरह एक् संगरहे पर्र."
नानीमा नें नोटिस किया मां कुछसोच मे हैं। तौ उन्होंने चुप्पी तोड़ केँ बोलीं
" औऱ तौ औऱ देखने मे भि अच्छी होनी चहिये.हमारे हीतेश केँ संग
बिलकुल मैच हौ पाये"
मा उठकेएके आटे कि थाली रसोई स्लैब केँ ऊपररखि। औऱ उसमे पाणी ड़ालने लगी औऱ बोलि
" ऐसी लड़की मिलेतब नां माँ."
नानीमा कों थोडा होसला मिला। मां कि साइड प्रोफाइल नानीमा कों नज़र आँ रही हैं। उन्होंने मां सें नज़र नां हटाके बोलते रहि
" हम् भि एहिसोच रहे थें। आजकल जोँ लड़की लोगों कों देखती हू, उनसेमन हि उठ जाता हैं। तेरा पिताजी केँ संग इसको लेके बहोत बात हुइ। हम् भि परेशान होँ गए थें। कहां मिलेगी ऐसी लड़की.कौन खबर करेंगा। बहोत सारिबात चित होने केँ बाद हम् येतय किये कि हम् इतना क्यूं सोच रहे.क्यूं कि हम् सबकी भलाई केँ लिए हि चिंतित हैं। हमारे सभी कि भविष्य केँ बारे मे सोच केँ चलना पड़ेगा। सभीठीक विचार करके हम् नें सोचा कि.हाँ हैं न्। ऐसी हि लड़की हैं.जैसे हम् सभी कों चहिये"
मम्मी आटा गुंथते गुंथते रूक गई.औऱ नानीमा कि तरफ मुड़के आँखों मे एक् हैरत केँ संग औऱ होंठो पे मुस्कराहट लेके पूछि
" क्याँ माँ। आप् लोगों नें लड़की ढूंढ भि निकाली!!"
नानीमा अब एक् स्माइल केँ संगउठ केँ मम्मी जहाँखडी थि स्लैब केँ पास वहांआने लगी.तब मम्मी फिन सें पूछि
" कहां सें ढुंडके निकाली मां?"
नानीमा मां केँ पास पहुछि औऱ उनके सामने खडी होगई। नानीमा मां कां चेहरा गौर सें देखने लगी। मम्मी भि थोडा एक्साइटेड हौ रहे थि। नानीमा कि आँखों मे एक् ममता औऱ प्रेम भरी मुस्कराहट छा गई। मां फिन सें पुछी
" कौन हैं वो लड़की माँ.औऱ कहां कि हैं?"
नानीमा देखा मम्मी नहाके फ्रेश होकर एक् लाइटकलर कि प्रिंटेड साड़ी मे आज बहोत सुन्दर दिखरही हैं। उनकेसर केँ बाल पे एक् टॉवल लपेटा हुआ हैं। एक् दोबाल टॉवल सें निकल केँ उनकी फोरहेड केँ ऊपर पड़ा हैं। नानीमा अपने दोनोहाथ सें मम्मी कां वो बाल प्रेम सें फोरहेड सें हटाके उनकाचिन पकड़के बोलीं
" बाहर् कहां ढूंढू ऐसी लड़की.जब हमारे हि घऱ मे एक् ऐसी सुन्दर लड़की हैं तोँ" बोलके नानीमा एक् चौड़ी स्माइल करतेरही.
माइसबात कों ठीक सें समझ नहि पाई। वो कोशिश कररही हैं समझने कि औऱ जैसे कि कुछयाद कररही हैं। उन्होंने एक् बड़ा सां पलक झपका केँ नानीमा कों पुछी
" मलताब.कोन हैं मां?"
नानीमा अपनी स्माइल बरक़रार रख केँ.आँखोँ मे औऱ प्रेम औऱ ममता लेके बोलीं
" क्यूं !!। हमारी मंजु सुन्दर नहि हैं क्याँ?"
माकुछ समय नानीमा कों देखते रही औऱ उनकोकुछ समझ केँ। उनकेफेस पे जोँ चमक थि वो ग़ायब हौ गई अचनाक। उनकीआंख स्थिर होँ गई, स्थान केँ उपर। वो बिलकुल स्तब्ध हौ गई। वो नानीमा कों एक् दृष्टि सें देख केँ बोलि
" कैसीबात कररही होँ माँ!
नानीमा अब एकदम शांत आवाज़ मे मगर प्रेम सें कहनेलगि
" देख मंजू। मे औऱ तेरे बापूइस बारे मे बहोत सोचे। हमकोये भि मालूम हैं इस केँ लिए हम् सभी कों न् जाने क्याँ क्याँ सैक्रिफाइस औऱ एडजस्टमेंट करना पड़ेगा। न् जाने क्याँ क्याँ असुबिधा झेल नाँ पड़ेगा। मगरइस मे हि सभी कां भलाई हैं। सभी कां भविष्य हम् कों हि तोँ सोचना पड़ेगा मंजू।."
नानीमा इसतरह फिन सें वहिसभी बात बताने लगी.आज वो हैं तो ठीक हैं। कलजब वो लोग नहि रहेंगे तब क्याँ मंजु अकेली जी पायेगी? हीतेश औऱ किसीसे विवाह करेगा तो क्याँ गारंटी कि वो लड़की हमारे जैसी हि होगी। मंजु कों वो केसे ट्रीट करेगी उसकी गारंटी कौन देगा.फिन वहि पुरानी चिंता
नानीजी ये भि बताई कि स्वयं कि भलाई औऱ स्वयं कि लाइफ सिक्योर्ड बनाने केँ लिएअगर समाज सें थोडा दूर जाके एक् अलग दुनिया बनाके हम् खुशरहे, तो इसमें कोई बुराई नहि हैं। मम्मी एकदम हैरत सें सभीसुन रही थि। जैसे कि उनको बिस्वास नहि हौ रहा हैं कि नानीमा जीकुछ बोलरही हैं। वो स्वयं कुछ भि बोल नहि पारही थि। असल मे उनकामुह तक कुछ आँ नहि रहा हैं बोलने केँ लिये। अन्दर हि अंदर एक् तूफ़ान मचाहुआ हैं। भला, बुरा, पाप, पुण्य, न्याय, निती, समाज, संस्कार सभी नें उनकेमन मे भीड़कर केँ उनका केहना बंध करवाया थां। वो सिर्फ नानीमा कों देखेजा रही हैं। उनकीआँख धीरे-धीरे धीरे-धीरे नम होके गिला हौ रहा हैं। बहोत समयबाद जब नानीमा कि बात धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम होनेलगा तब वो नानीमा कि आँखों मे आँखें डाल केँ, एक् स्थिर दृस्टि होकर, एक् शांत औऱ कठिन आवाज़ सें पूछि
" क्याँ येसभी हीतेश कों भि बता दिया आप् लोगों नें?"
नानीमा अब एक् मां कां प्रेम औऱ ममताभरी आवाज़ सें बोलि
" नहि बेटा। येबात तुम्हारे बूढे मां बाप, अपनी एक् लौती बेटी केँ अपने एक् केवल पोते केँ, औऱ अपनी फॅमिली कि भलाई केँ लिए हि सोचे हैं। इस मे अबसभी कुछ तुम्हारे डिसिशन केँ ऊपर डेपेंट करता हैं बेटा."
मा नानीमा कों कुछ लम्हा देखते रही औऱ जब आँखों सें आसूं गिरने कां वक्त आगयातब मुड़के वहां सें दौड़के अपनेरूम मे चलि गई,.
मम्मी रसोई सें दौर केँ, अपनेरूम केँ जाकेडोर लॉककर दिया। दोपहर लञ्च करने भि बाहर् नहि आई। नानीजी जाकर बुलाई, द्वार (दरवाज़ा) खटखटायी, पऱ मां खाने केँ लिए स्ट्रैट मनाकर दि। जबरात मे नानाजी नानीमा सभी डिनर करकेसो गए थें, उसकेबाद मम्मी उठके रसोई मे गई औऱ फ्रिज सें कुछ खानां निकल केँ चुपचाप खाकेफिन सें रूम मे चले गई। नानाजी नानीमा सोच मे पड़गये। उनलोगों नें ये एक्सपेक्ट हि किया नहि कि सुरु मे हि ऐसा रिएक्शन देखने कों मिलेगा उन्को। उनलोग नें सोचा कि शायद वो लोगये एक् बिलकुल गलत स्टेप लेनेजा रहे थें। इस मे उनकी बेटी इतनी हर्ट होगी। नं जाने बेचारी कों कितना दुःख पंहुचा होगा।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 10
नेक्स्ट डे नानीजी स्वयं घऱ कां सभीकाम करनेलगी। मम्मी कों बिलकुल डिस्टर्ब करना उचित नहि समझी। उनको थोडा समय अकेले छोडना सही समझा। दोपहर का खाना मे फिन नानीजी नें मां कों बुलाया पर्र मम्मी डोरखोल केँ बाहर् नहींआई। वो लोग लञ्च करके अपनेरूम मे आराम करनेचले गए तोँ मां रसोई मे आके अकेली खानां खा लिया। आवाज़ सें नानाजी नानीमा कों मालूम पडता हैं पऱ वो लोग भि अब सामने आके मां कों अनवांटेड सिचुएशन मे डालना नहि चाहते थें। ऐसेतीन दिनकट गए अगलादिन थर्सडे थां। सुभह सुभह नानीजी ब्रेकफास्ट बनाने मे जुटी हुई थि। अचानक मां रसोई मे आके नानीमा कों कहती हैं " मे बनाती हूं " यहबोल कर मां स्वयं काम मे लग गई,। मम्मी कि आवाज़ ठण्डी औऱ तेज थि, जिससे नानीजी नें कुछ बोलने कां साहस नहि किया। वो चुप-चाप मम्मी कों देखने लगी.
मम्मी बिलकुल एक् साइलेंट औऱ फ़ीलिंगलेस फेस लेकेकाम करेजा रहे थि। नानीजी चुपचाप वहां सें निकलगईं मम्मी नें घऱ कां काम-काज करना शुरुआत कर दिया, पर्र किसी सें कोईबात नहि कररही थि। मां अपनाकाम करकेफिन सें अपनेरूम मे जाकेलॉक लगा केँ अंदर रहती थि। रात कों नानाजी नानीमा सोतेसमय बोलने लगे कि शायदउन लोगों कि बातों सें उनकी बेटी कां मन मे एक् गहरीचोट लगी हैं। अगलेदिन यानि कि फ्राइडे केँ दिन सुभह नानीमा स्वयं रसोई मे आके मां सें बात करने कि कोशिश करनेलगी। मम्मी पहले मुंह सें जवाब नं देके, नानीमा जोँ माँगती हैं याँ करने कों कहती हैं, वो सभीचुप चाप करके एक् साइलेंट जवाबदे नें लगी। नानीमा नें सोचागम थोडा हल्का होँ रहा हैं। ब्रेकफास्ट करके नानाजी नानीमा जब टेलीविज़न पे न्यूज़ देखरहे थें, तबउन लोगो नें देखा कि मम्मी पहले कि तरह डाइनिंग टेबल पे आके, मगर अकेले बैठके ब्रेकफास्ट कररही हैं। जब दोपहर का खाना बनाने मे नानीमा आके मम्मी कां हाथ बटाने लगी, तब मम्मी बेटी मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे डायरेक्टली बातचित शूरुहुआ। आज मम्मी कि आवाज़ बहुत नार्मल थि। मगरआज उन्होंने फिन सें सभी कां खानां होने केँ बाद अकेले टेबल पे बैठके खानां खाया नानाजी नानीमा दोपहर केँ वक़्त अपनेरूम मे रेस्ट कररहे थें। आजउन लोगों कों थोडीखुश हुईँ क्यूँकी जौ परिस्थिति क्रिएट हुआ थां, अब उसका कालामेघ इसघऱ सें हट गय़ा थां। साम केँ वक्त नानीजी रसोई मे गई मां अकेली चुपचाप रसोई स्लैब केँ ऊपरहाथ रख केँ खड़े खड़ेगरम चाय कां उबालदेख रही थि। नानीमा कि एंट्री सें वो हिली नहीं जैसेकुछ सोच मे हैं। नानीमा इधरउधर कुछ करके, मम्मी कों एक् टक देखती रही। औऱ फिन मम्मी केँ पासआके स्लैब केँ ऊपर एक् हाथ टीका केँ खड़ी होँ गयीँ,.
नानीमा चुप्पी तोड़के मां केँ तरफदेख केँ बोलीं
नानीजी -" मंजू.बेटा। हर मां बाप अपने बच्चों कि ख़ुशी केँ बारे मे सोचते हैं। हमने शायदकुछ ज़्यादा सोच लिया थां."
मम्मी -"आप् लोग अकेले केसे रहेंगे!!"
अचानक येसुन केँ नानीमा नें झटके सें अपना मुँह उठाके मम्मी कि तरफ देखा। मां नानीमा कां लुकफील करती हैं औऱ अपनासर थोडा झुका केँ अपनी पैरों कि तरफ देखने लगी
नानीमा कों समझने मे थोडा समयलगा। फिन उनके होठो पे एक् स्माइल खील गई,। उनकीअंख मे ख़ुशी झलकउठी, धिरे सें मां केँ औऱ नज़्दीक आई औऱ मम्मी कां चिन पकड़ केँ अपनीतरफ मोड़ नें कि कोशिस कि। मां जैसे खड़ी थि, उनकी बॉडी कि पोजीशन हिली नहि, मगर उनकाफेस नानीमा केँ तरफमूड गय़ा। उनकीआँख झुकि हि हैं। उन्होंने कोशिश करके भि उनकेफेस पे लज्जा आनी छुपा नहि पाई नानीमा पूरीबात समझ गयीँ, फिन भि प्रेम सें फुसफुसा केँ पूछी
"सच ?"
मां नानीमा कि तरफ मुड़के उनके कंधो मे अपनामुह छुपाली.
औऱ उन्होंने नानीमा कों दोनों हाथों सें बेडीलगा केँ पकड़ लिया। नानीमा हसके उनकी एक् हाथ सें उनकेबाल औऱ पीठ सहलाने लगी एक् मां अपनी बेटी कों परम ममता सें प्रेम कररही हैं। नानीमा हस्ते हस्ते बोलि
" अरे पगली.इस मे शर्माने कां क्याँ हैं। हम् थोड़ी कोई अन्जान लोग हैं.औऱ नहि तूँ किसी औऱ घऱ कहां जारही हैं.सभी तौ तेरे अपने हि लोग हैं."
मा नें औऱ शर्मा केँ नानीमा कि छाती मे मुह छूपा लीया.
मै शनिवार कों अहमदाबाद पहुच गय़ा। साम हौ गइ थि। नानाजी नानीमा नें मेराहर बार कि तरह स्माइल केँ संग हि स्वागत किया.मगर इसबार मम्मी वहां दिखाइ नहि दि। मेंने अंदरआके अपनाबैग रखा। पऱ मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि येलोग इतनेखुश दिखरहे हैं तौ, गड़बड़ तोँ नहि हैं घऱ पऱ। फिन मां मेरेसंग ऐसे क्यूं कररही हैं। मेरीकौन सि ग़लती पे मां मुझ पऱ नाराज होँ गयीँ, !! क्याँ मेंने उनको अन्जाने मे दुःख पहुंचाया!!! मां जनरली घऱ पर्र हि रहती हैं। औऱ आज तौ मेराआने कां दिन हैं। आज तोँ वो रहती हि हैं। तो फिन क्यूं वो मुझसे मिलने सामने नहि आई.
नाना मेरेतरफ देख केँ बोले
" बेटा। तुमसे कुछबात करना हैं." मे शांति सें बोला
" कहिए नाना"
उनहोने एक् बार नानीजी कों देख, फिन मेरीतरफ देख केँ थोडा स्माइल केँ संग बोले
" इतना अर्जेंट भि नहि हैं। तुम् फ्रेश होँ जाओ। खानां वाना खाके धीरे-धीरे बैठ केँ बाते करेंगे."
मे मेरेरूम मे जाकर फ्रेश होनेलगा। नाना न् जाने क्याँ बात करना चाहते हैं। मगर मे मम्मी कों लेके ज़्यादा चिंतित थां। बहोत सारी चिंता सें मनभरी थां, कुछ अच्छा नहि लगरहा थां। दिलबोल रहा थां कि दौड़ केँ जाके सें मां पुछु कि क्याँ गुनाह हैं मेरा। जैसे हि बाहर् ड्राइंग रूम मे आया, तब नानीमा नें डिनर केँ लिए बुलाया.
मुझे मालूम थां कि पहले जैसेआज सभीकुछ नहि थां। नानीमा सर्व करनेलगी। मगर मे रसोई मे मां कि उपस्थिति फीलकर रहा थां औऱ एक् दोबार तौ नानीमा सें बात भि करतेहुए सुना। मुझे क्रोध आया, सभी तोँ ठीक हि हैं। तो क्याँ मे हि गुन्हेगार हूं!! औऱ नानाजी नानीमा कों भि मां कां इसतरह सें बर्ताव करना, याँ इसतरह सें मेरे सामने पेश होना, जरूर नज़र आँ रहा होगा.फिन भि कोई किसी कों कुछबोल भि नहि रहा हैं.
डिनर केँ बाद नाना मुझे टेरेस पे लेकेगये। गर्मी कां वक्त थां। सो टेरेस पे अच्छा फील होँ रहा थां। थोड़ी हवा भि आँ रही थि बीचबीच मे। आसपास केँ एरिया मे ऐसे हि सभी प्राइवेट घर-मकान हैं। नाना नें किनारे केँ तरफ जाकर, टेरेस कि फेंसिंग मे टेक लगाके एक् सिगरेट निकाली। औऱ बोलने लगे " तुम्हारी नानीमा यहा नहि हैं अब। तो ठीक हैं." बोलके हॅसने लगे औऱ माचिस निकालकर सिगरेट जलालि। मेंने बोला
" नाना। डॉक्टर नें आप् कों स्मोक करने मे मना किया हैं"
उन्होंने एक् कस लगाके धुआं छोड़के बोला
" एक् आध पिने सें कुछ नहि होता हैं."
नाना हस्ते हस्ते ऐसे बाते सुनाने लगे.कुछ वक़्त ऐसे हि बीत गय़ा। पऱ मेरामन अभि भि परेशान थां। मुझेबार बारये चिंता सतारही हैं कि नाना आखिर मुझे क्याँ बताना चाहते हैं। इससभी सोच केँ बीच नानीजी नें आवाज़ लगाई। हम् नीचेगये। मे नज़र घुमाके मां कों देख नहि पाया। रसोई मे लाइटऑफ हैं। मम्मी शायद डिनर करके अपनेरूम मे चली गई,। मुझे बहोत ग़ुस्सा आया मम्मी केँ उपर। मैंने क्याँ ग़लती कि कि वोँ मुझेऐसी सजादे रही हैं। नाना मुझे उनके कमरे मे आने कों कहे। नानीजी भि आँ गई। नाना नें आकर द्वार (दरवाज़ा) थोडा बंधकर दिया.
मे बेड केँ पासरखी कुरसी पे बैठा। नानाजी नानीमा बेड पे आहिस्ता बैठे। मेरा टेंशन बढ़रहा हैं। आखिर क्याँ कहेंगे, औऱ उससे मां कां क्याँ ताल्लुक हैं। इनसभी हज़ारों चिंताओ नें जब मेरे दिमाग़ मे भीड़ कियातब नाना नें बोल्ना शूरु किया.
"बेटा.हमने तुम्हारी परवरिश मे कोईकमी नहि रखी हैं। बचपन सें सभीकुछ देतेआए औऱ आज तक तुम्हारी सबसे ज़्यादा चिंता हम् करते हैं मगरअब तुम् बड़े होँ गये होँ। नौकरी कररहे होँ। हमे छोड़के दूर जाकर अकेले रहनेलगे हौ। मालूम हैं वहां तुमको अकेले रहने मे कुछ तकलीफ़ फेस भि करना पडती हैं। फिन भि। इससभी सें हमे बहोत ख़ुशी होती हैं। तुम् अब तुम्हारी जीवन स्वयं जीनेजा रहे हौ औऱ हम् भि औऱ कितना दिन रहेंगे। हमारे जाने केँ बाद भि तुम् कों अच्छी तरह ज़िन्दगी जीना हैं। अपनी फेमिली बनानी हैं। तोँ अब हम् सोचरहे हैं कि तुम्हारी विवाह करवा देनी चाहीये." नाना चुप होँ गए। शायद मेरा रिएक्शन परखरहे हैं। मेरेमन मे दूसरा कैलकुलेशन चलरहा हैं। अब मुझेलगा कि शायदइस बात सें मम्मी दुखी हैं औऱ मुझसे शायद नाराज भि हैं। मेनेमन मे सोचा कि अगर उनकी ख़ुशी केँ लिए मुझे विवाह नं भि करनीपडे, तौ मुझेकोई खेद नहि हैं। उनको ज़िन्दगी भरखुश रखना चाहता हुं.
नाना फिन बोले
"देखो बेटे.तुम्हारी लाइफ मे कोईआकर तुम्हारे पास खड़ी होँ जाए, तुम्हारे हर इमोशन कों समझे, हर उतार चढ़ाव मे तुम्हारे संग रहके ज़िन्दगी कि राहों मे चलना आसानकर दे। इसलिये सभी केँ लाइफ मे पत्नि कि जरूरत पड़ती हैं."
" हमनेआज तक तुमहारा सभीभला बुरासोच केँ हि काम किया.अब ये लास्ट ड्यूटी भि ठीक सें पूरी होँ जाये तौ मे सुकून सें मर सकताहु."
मे मम्मी केँ बारे मे सोच केँ बोलने लगा
" नाना.आपकी बातठीक हैं। मगर."
मैरुक गय़ा। मुझे पहले मम्मी सें जानना हैं, क्याँ इसबात कों लेके वो दुखी हैं !!। इसलिए मुझसे क्रोध होकेदूर हैं!! मगर नाना शायद मेरी द्विधा समझगए औऱ मेरीबात पकड़ केँ बोले.
" बेटा पहले मे जोँ बोलरहा हु.पुरासुन लो.फिन तुम् आहिस्ता सोचसमझ केँ मुझे बताना। अगर तुमको लगे कि ये हमारी भलाई केँ लिए हैं, तौ सोच केँ बताना, नहि तोँ जौ मन मे डिसाईड करोगे, हम् वोँ हि करेंगे
ये बोलके नाना नानीजी कों देखे। नानीजी नें भि सहमत होकर अपनासर हिलके मुझे आश्वसन दिलाया.
नाना नें फिन सें केहना शुरुआत किया
" बेटा.हमने तुम्हे सभी चीज़ दिया, जोँ हरकोई बच्चे कों मिलता हैं, मगर एक् चीज़कभी नहि दे पाये"
मे नाना केँ तरफदेख केँ सुनने लगा
" हर बच्चे कां नसीब मे किसी कों 'पिताजी' कहके बुलाने कां सुख हैं, वो हम् कभी तुम्हे प्राप्त करने कां सौभाग्य नहि देपाए। औऱ अब तुम्हारी विवाह हौ जाये तोँ तुम्हे एक् नए मां पिताजी भि मिलेंगे."
" मे सभी कां भलाईसोच कर हि येसभी कररहा हु.अगर तुम्हे बोलू.मतलब.क्याँ तुम् मुझे 'बापू'बोल कर बुलाना पसन्द करोगे?"
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) - Aage kya hua? Next part padhiye
bhay iss kahani kee apni khasiyat h. ap jis prakaar kee kahani chahte hu uske liye nayee story likh dunga tab tak ap iska majaa lo.
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