Doctor मां – New Episode
हवस कां वोँ तूफ़ान जब थमता हैं, तौ पीछे सन्नाटा औऱ कड़वी हकीकत छोड़ जाता हैं। आर्यन खाट पऱ निर्जीव सां पड़ा थां, उसका जिस्म पसीने औऱ थकान सें चूर थां। अंजलि उठी, उसके चेहरे पऱ अभि भि वो सफेद निशान थें जौ उसके'पतन' औऱ आर्यन कि 'मर्दानगी' कि गवाही देरहे थें। वो बिनाकुछ बोले बाथरूम कि ओरबढ़ गई।
बाथरूम सें पानी गिरने कि आवाज़ आँ रही थि। अंजलि अपना चेहरा साफ़कर रही थि, औऱ यहाबैड पर्र लेटे आर्यन केँ दिमाग़ मे एक् दूसरा हि मंजर शुरुआत हौ गय़ा।
जैसे-जैसे बदन कि उत्तेजना शांत हुईँ, आर्यन केँ दिमाग़ पऱ चढ़ा वो 'जानवर' आरामसे उतरने लगा। ५ मिनट केँ अंदर हि उसेउन शब्दों कि गूँज सुनाई देनेलगी जौ उसने अभि-अभि चीख-चीख करकहे थें।
आर्यन केँ कानों मे स्वयं कि आवाज़ गूँजी— "रांड। छिनाल। कुतिया." उसे यकीन नहि हौ रहा थां कि यह शब्दउसी केँ मुँह सें उसकी मां केँ लिए निकले थें। जिस मम्मी नें उसे उंगली पकड़कर चलना सिखाया, जिसने उसे दुनिया कि हर बुराई सें बचाया, आजउसी मम्मी कों उसनेखाट पर्र सबसे गंदी गालियां दि थीं।
आर्यन कां दिल तेज़ी सें धड़कने लगा। उसे अपनी परवरिश यादआने लगी। वो सोचने लगा, "क्याँ मे इतनागिर गय़ा हूं? क्याँ हवस नें मुझे इतना अंधाकर दिया कि मैंने अपनी मां कि ममता कां ज़रा भि लिहाज नहि रखा? मैंने उन्हें अपमानित किया, उनके चेहरे पर्र अपना लावा फेंका जैसे वो कोई बाज़ारू स्त्री हों। "
उसे डर लगनेलगा कि अब वो अपनी मम्मी सें नज़रें केसे मिलाएगा। उसेलगा कि अंजलि बाथरूम केँ अंदर शायदरो रही होगी। उसे अपनी मर्दानगी पर्र अब गर्व नहि, बल्कि Disgust महसूस होनेलगी। उसे वो ७इंच कां अंगअब एक् अभिशाप लगनेलगा जिसने उसे मर्यादा कि सारी हदें लांघने पर्र मजबूर कर दिया।
आर्यन नें अपनी आँखें बंदकीं, तोँ उसे अंजलि कां वो चेहरा यादआया जब वो बचपन मे उसे चूमती थि। औऱ फिनउसे अभि वाला चेहरा याद आया—सफेद रस सें सनाहुआ औऱ गालियों सें अपमानित। ये विरोधाभास आर्यन कों अंदर हि अंदर काटने लगा। उसे महसूस हुआ कि जिस्मानी सुख कि कीमत उसने अपनी 'आत्मा' बेचकर चुकाई हैं।
आर्यन नें चादर सें अपना चेहरा ढक लिया। उसकी आँखों केँ कोने गीले होनेलगे। वो स्वयं सें नफरत करनेलगा थां। उसेलगा कि कलरात जोँ हुआ वोँ शायद एक् गलती थि जिसे सुधारा जा सकता थां, मगरआज जौ उसने शब्दों औऱ बर्ताव सें किया, उसने अंजलि कों मम्मी केँ पद सें गिराकर एक् 'गुलाम' बना दिया थां।
"मैंने क्याँ कर दिया? मैंने अपनी मम्मी कां अस्तित्व हि मिटा दिया। मे कितना नीच बेटा हूं, " ये सोचकर आर्यन बैड पर्र सिकुड़ गय़ा।
बाथरूम कां दरवाजा खुला औऱ अंजलि बाहर् निकली। उसका चेहरा धुल चुका थां औऱ ताजे पानी कि बूंदें उसके गोरे गालों पर्र चमकरही थीं। मगर जैसे हि उसकीनजर खाट पर्र पड़ी, उसकादिल धक सें रह गय़ा। आर्यन चादर मे मुंह छुपाए सिसकरहा थां।
अंजलि कि ममता एक् समय मे जागउठी। वो तेजी सें बेड केँ पासआई औऱ आर्यन केँ कंधे पर्र हाथरखा। "आर्यन? क्याँ हुआ मेरे बच्चे? तुँ रो क्यूं रहा हैं?" उसने घबराकर पूछा।
आर्यन नें जैसे हि अपनी मम्मी कां साफ औऱ मासूम चेहरा देखा, उसका Guilt औऱ बढ़ गय़ा। उसने रोतेहुए अंजलि कां हाथपकड़ लिया। "मां। मुझेमाफ करदो। मे। मे जानवर बन गय़ा थां। मैंने आपको क्याँ-क्याँ नहि बोला। मैंने आपकी इज्जत मिट्टी मे मिला दि। मुझेसमझ नहि आँ रहा थां कि मे क्याँ बकरहा हूं। मे बहोत बुरा बेटा हूं मां."
अंजलि नें एक् गहरी सांसली औऱ आर्यन केँ सिर कों सहलाते हुएउसे अपने सीने सें सटा लिया। उसकी धड़कनों कि गर्माहट आर्यन केँ कानों तक पहुँच रही थि।
"पगले। तूँ इसकेलिए रोरहा हैं? देख मेरी आँखों मे। " अंजलि नें आर्यन कां चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आँखों मे कोई नाराजगी नहि, बल्कि एक् अजीब सि संतुष्टि थि। "आर्यन, तूने मेरी इज्जत मिट्टी मे नहि मिलाई, बल्कि तूने मुझे वोँ अहसास दिया जिसके लिए एक् स्त्री कां रोम-रोम तरसता हैं। "
अंजलि नें उसे समझाते हुएकहा, "आर्यन, तुँ अभि मर्द कि नजर सें देखरहा हैं, पऱ एक् स्त्री कि मानसिकता समझ। एक् स्त्री कों सबसे ज़्यादा आनंदतब आता हैं जब उसका मर्दउस पर्र पूरीतरह हक जमाए। जब तूने मुझे वोँ गंदी गालियां दीं, तौ मुझेलगा कि मे दुनिया कि सबसे हसीन औऱ Desired महिला हूं। मुझे वोँ अपमान नहि, बल्कि तेरा मेरे प्रति पागलपन लगा। "
"समाज हमें देवी बनाता हैं, पर्र पलंग पऱ हमेंकोई देवी बनकर नहि रहना। हमें वहां एक् ऐसी 'मादा' बनना होता हैं जिसे उसका मर्द अपनी उंगलियों पर्र नचाए। तूने मुझे जौ गालियां दीं, उन्होंने मेरे अंदर कि उस महिला कों जगा दिया जौ बरसों सें दफन थि। मुझेउन गालियों मे तेरी मर्दानगी कि धमक सुनाई देरही थि। "
अंजलि नें आर्यन केँ आंसू पोंछे औऱ मुस्कुराकर कहा, "एक् महिला तब सबसे अधिक सुखी होती हैं जब उसका प्रेमी उसे अपनी 'प्रॉपर्टी' समझे। तूने मुझे वोँ 'गंदगी' नहि दि, तूने मुझे वोँ अधिकार दिया हैं। इसलिये रोनाबंद कर, क्योंकि तूनेआज अपनी मां कों नहि, बल्कि अपनी 'महिला' कों तृप्त किया हैं। "
आर्यन अपनी मां कि यह बातें सुनकर दंगरह गय़ा। उसेलगा थां कि उसनेपाप किया हैं, पऱ अंजलि केँ लिए वो उसके प्रेम औऱ हवस कां सबसे शुद्ध रूप थां। अंजलि नें उसके माथे कों चूमा औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे फुसफुसाया, "तेरी वोँ गालियां। औऱ तेरेउस लावे कां मेरे चेहरे पर्र गिरना। वोँ मेरे जिंदगी कां सबसे कामुक पल थां। अब मुस्कुरा, वरना मे समझूँगी कि तुम्हारी तरफ मेरेसंग आनंद नहि आया। "
आर्यन कि आँखों मे अब आँसू तोँ नहि थें, मगर एक् गहरी हैरानी थि। उसनेकभी सोचा भि नहि थां कि शब्दों कां घाव किसी केँ लिएसुख कां मरहम भि बन सकता हैं। अंजलि नें उसे अपने औऱ लगभग खींच लिया, उसकासिर अपनीगोद मे रख लिया औऱ उसकी उंगलियों सें खेलते हुए अपने अतीत केँ उनबंद रूम केँ राज़ खोलने लगी जोँ उसने बरसों सें सीने मे दफनकर रखे थें।
अंजलि कि आवाज़ अब बहोत धीमी औऱ मखमली होँ गई थि, जैसे वो कोई बहोत हि गुप्त रहस्य साझाकर रही होँ।
"देख आर्यन, तेरे पिताजी एक् अच्छे इंसान हें, पर्र खाट पर्र वोँ हमेशा बहोत 'सभ्य'रहे। उनकेलिए शारीरिक संबंध केवल एक् ज़रूरत थि, जिसे अंधेरे मे, चुपचाप औऱ बड़ी शालीनता सें पूरा किया जाता थां। उन्होंने मुझे हमेशा एक् 'देवी' कि तरह देखा, मगर कभीउस 'महिला' कों नहि पहचाना जोँ उनके नीचेदबी होती थि। "
अंजलि नें एक् लंबीअहह भरी। "मे चाहती थि कि वोँ कभी-कभी जंगली बन जाएं। मे चाहती थि कि वोँ मेरेबाल पकड़कर मुझे अपनीओर खींचें, मुझे गंदी गालियां दें, मेरेबदन पर्र अपने दांतों केँ निशान छोड़दें। मे चाहती थि कि वोँ मुझेयह अहसास कराएं कि मे उनकी 'जागीर' हूं। मगर वोँ हमेशा डरतेरहे कि कहीं मुझे बुरा न् लगजाए, कहीं मे उन्हें गलत नं समझलूँ। "
"कईबार मेरामन करता थां कि मे खाट पऱ चीखूँ, गंदे शब्दों कां इस्तेमाल करूँ, उन्हें उकसाऊँ। पऱ भारतीय संस्कार औऱ 'मम्मी' होने कां डर मुझेरोक देता थां। मे सालों तक प्यासी रही—बदन सें नहि, बल्कि उस 'दीवानगी' केँ लिए। जौ गालियां आज तूने मुझेदीं, मे वोँ गालियां तेरे बापू केँ मुँह सें सुनने केँ लिए बरसों तरसी हूं। "
अंजलि नें आर्यन कि आँखों मे झाँका। "आजजब तूने मेरे मुँह मे अपना लावा छोड़ा औऱ मुझे वोँ सभी बोला जौ समाज केँ लिए'पाप' हैं, तोँ मुझेलगा कि आज मेरी वोँ बरसों पुरानी मुराद पूरी हौ गई। तूने मुझे वोँ 'गंदासुख' दिया हैं आर्यन, जोँ सबसे शुद्ध होता हैं। तेरे बापू मुझेकभी 'रंडी' नहि कहपाए, औऱ यही उनकी सबसे बड़ीकमी रह गई। "
आर्यन अब पूरीतरह समझ चुका थां कि क्यूं अंजलि उस५इंच केँ बेजान खिलौने केँ संग भि वोँ सुख नहि पासकी जोँ उसे आर्यन कि कड़वी बातों औऱ ७इंच केँ प्रहार मे मिला। उसे अहसास हुआ कि एक् महिला कों मात्र 'सुरक्षा' नहि, बल्कि बैड पर्र 'समर्पण' औऱ 'वहशीपन' भि चाहिए होता हैं।
अंजलि नें झुककर आर्यन केँ होंठों कों हल्के सें चूमा। "अब कभी Guilt मत करना। आज तूने मुझे वोँ सभी दिया हैं जौ दुनिया कां कोई भि मर्द अपनी पत्नि कों देने सें डरता हैं। तूँ मेरा बेटा भि हैं, औऱ अब मेरा वोँ 'मालिक' भि, जिसने मुझे मेरी असली पहचान दि हैं। "
अंजलि नें आर्यन केँ माथे सें बिखरे बालों कों बड़े प्रेम सें हटाया। माहौल कि भारी गंभीरता कों कम करने केँ लिए उसने एक् शरारती मुस्कान चेहरे पर्र ओढ़ली औऱ अपनी यादों केँ गलियारे मे पीछे मुड़कर देखने लगी।
अंजलि नें आर्यन केँ कान केँ पास झुककर अपनी रेशमी आवाज़ मे एक् पुरानां किस्सा सुनाना शुरुआत किया।
"लगभगदस साल पहले कि बात हैं, तेरे बापू औऱ मे एक् हिल स्टेशन पऱ छुट्टियां मनाने गए थें। बाहर् बहोत तेज़ बारिश हौ रही थि औऱ होटल केँ कमरे मे हम् दोनों अकेले थें। मैंने उसदिन एक् बहोत हि पारदर्शी औऱ छोटी सि नाइटी पहनी थि, जोँ मैंने खासतौर पर्र उसरात केँ लिए खरीदी थि। "
"मेरामन थां कि आज वोँ मुझे पलंग पर्र पटकदें, मेरेहाथ बेड केँ सिरहाने सें बांधदें औऱ मुझे अपनी मर्दानगी कां अहसास एक् कैदी कि तरह कराएं। मैंने उनसे धीरे-धीरे सें कहा भि थां कि 'आज मुझे ज़रा भि रहममत दिखाना, आज मुझे अपना गुलाम बनालो'। "
"मगर जानते हौ उन्होंने क्याँ किया? उन्होंने बहोत हि भोलेपन सें मुझेगले लगाया, माथे पर्र चूमा औऱ बोले— 'अंजलि, तुम् इतनी कोमल हौ, मे तुम्हें तकलीफ केसेदे सकता हूं? तुम् मेरी अर्धांगिनी होँ, कोई दासी नहि। ' उन्होंने बड़े सलीके सें लाइटबंद कि औऱ हमेशा कि तरहवही प्राचीन, सीधा-सादा तरीका अपनाया। "
अंजलि थोडा सां हंसी, पऱ उस हंसी मे एक् हल्का सां दर्द थां। "मे उसरात अंदर हि अंदररो रही थि आर्यन। मे चाहती थि कि वोँ मेरे शरीर कों झिंझोड़ दें, मुझे अपनी बाहों मे इतना कसें कि मेरी सांसें रुकने लगें। वोँ फंतासी अधूरी हि रह गई क्योंकि वोँ कभीउस 'सभ्य पति' केँ दायरे सें बाहर् हि नहि निकलपाए। "
अंजलि नें आर्यन कि नग्न छाती पर्र अपनी उंगलियों सें छोटे-छोटे घेरे बनाते हुएकहा, "कलरात औऱ आज.जब तूने मुझे अपनेवश मे किया, जब तूने मेरा हुलिया बिगाड़ा औऱ मुझे वोँ सभी बोला जिसकी मैंने उसरात कल्पना कि थि। तौ मुझेलगा जैसे मेरा वोँ प्राचीन अधूरा सपनाआज सच हौ गय़ा। "
आर्यन नें अंजलि कि कमर कों औऱ ज़ोर सें भींच लिया। उसे अब अपनी मां कि उस खामोश बेचैनी कां अंदाज़ा हौ रहा थां जोँ उसने बरसों सें छिपाई थि। "मम्मी। जोँ पिताजी नहि करपाए, वोँ मे करूँगा। आपकीहर अधूरी फंतासी अब मेरी ज़िम्मेदारी हैं। "
अंजलि नें अपनासिर उसके सीने पऱ रख दिया। "अब मुझे किसी औऱ चीज़ कि ज़रूरत नहि हैं आर्यन। तूने मुझे वोँ सभीदे दिया हैं जौ मुझे एक् पूरी स्त्री बनाता हैं। "
अंजलि कि आवाज़ अब औऱ भि धीमी हौ गई, जैसे वो अपनेमन केँ सबसे गहरे औऱ सबसे डरावने राज़ कि राख कों कुरेद रही होँ। उसने अपनी नज़रें आर्यन केँ सीने पऱ टिकादीं, क्योंकि इसबात कों कहतेहुए उसकी पलकों मे एक् स्वाभाविक हिचक औऱ लज्जा कि लालीतैर रही थि।
अंजलि नें आर्यन कि उंगलियों कों अपनेहाथ मे लेकर सहलाया औऱ रुक-रुक कर बोल्ना शुरुआत किया। "आर्यन। एक् औऱ बात हैं, एक् ऐसी फंतासी जिसे मैंने कभी अपनी ज़ुबान पऱ लाने कि हिम्मत नहि कि। यहा तक कि स्वयं सें भि डर लगता थां ये सोचते हुए। "
"कभी-कभी, जब तेरे बापूसो जाते थें औऱ मे जागती रहती थि, तौ मेरे दिमाग़ मे एक् तस्वीर उभरती थि। मे सोचती थि कि कैसा लगेगा अगरइस पलंग पऱ हम् दो नहि, बल्कि तीनलोग हों? एक् Threesome कि वोँ अनकही चाहत जिसने मेरे रातों कि नींद उड़ा दि थि। "
अंजलि नें अपनी आँखें मूंदलीं। "मैंने कभीये तय नहि किया कि वो तीसरा इंसान कौन होगा। क्याँ वो कोई दूसरी महिला होगी, जिसके संग मे तेरी साझा करूँ औऱ हम् दोनों मिलकर तेरी मर्दानगी कि पूजा करें? याँ फिनकोई दूसरा मर्द, जौ मुझेदो तरफ सें अपनी पकड़ मे रखे औऱ मे उन दोनों केँ बीच एक् खिलौने कि तरह पिसती रहूँ?"
"सोचकर हि रोंगटे खड़े होँ जाते हें आर्यन। एक् तरफ सें तेरा७ इंच कां प्रहार औऱ दूसरी तरफ सें कोई औऱ अहसास। याँ फिन तेरी नग्नता केँ सामने एक् औऱ शरीर। ये ख्याल मुझे जितना डराता थां, उससे कहीं अधिक उत्तेजित कर देता थां। पर्र तेरे पिताजी केँ सामने ये कहना। मतलब अपनीमौत कों दावत देना जैसा थां। "
आर्यन ये सुनकर पूरीतरह सन्नरह गय़ा। उसकी मां कि सोच इतनी आधुनिक औऱ इतनी बेबाक हौ सकती हैं, ये उसकेलिए एक् औऱ बड़ा झटका थां। उसने महसूस किया कि अंजलि केँ अंदर जौ आग हैं, वो किसी एक् इंसान केँ बस कि बात नहि हैं।
अंजलि नें अपनासिर उठाकर आर्यन कि आँखों मे झाँका। "मुझे नहि पता कि येकभी मुमकिन होगा याँ नहि, औऱ नं हि मे चाहती हूं कि तुँ इसकेलिए मजबूर हौ। पऱ आजजब तूने मुझे मेरी 'औकात' दिखाई, तोँ मुझेलगा कि मे अपनीहर गंदी सें गंदी फंतासी तेरे सामने रख सकती हूं। तुँ मेरा बेटा भि हैं औऱ अब मेरा सबसे करीबी राज़दार भि। "
आर्यन नें अंजलि केँ चेहरे कों अपने हाथों मे लिया। वो समझ चुका थां कि उसकी मम्मी केवल एक् घरेलू स्त्री नहि, बल्कि इच्छाओं कां एक् ज्वलंत ज्वालामुखी हैं। "मां। आपकीहर फंतासी मेरेलिए एक् हुक्म हैं। टाइमआने पर्र हम् हरउस पर्दे कों उठाएंगे जिसे दुनिया 'गुनाह' कहती हैं। "
अंजलि नें एक् चैनभरी सांसली औऱ आर्यन केँ गलेलग गई। आजरात उसने स्वयं कों पूरीतरह खालीकर दिया थां।
आर्यन नें अंजलि कि कमर मे हाथ डालकर उसे थोडा औऱ अपनीओर खींचा। उसकी आँखों मे अब एक् शरारती चमक थि, जैसेउसे किसी पुराने राज़ कां सुराग मिल गय़ा हौ। उसने अंजलि कि आँखों मे झाँकते हुए पूछा, "मां। सभी बातें अपनी स्थान, पऱ एक् बात बताओ। उस दिनअसल मे क्याँ हुआ थां? जिसदिन मुझेलगा थां कि आपको तेज़ बुखार हैं औऱ आप् खाट पर्र तड़परही थीं। पर्र जब मैंने आपकोछुआ, तोँ आपकाबदन आग कि तरह गर्म तौ थां, मगर वोँ बुखार जैसा नहि लगरहा थां। आप् क्याँ कररही थींउस टाइम?"
अंजलि ये सुनते हि एक् समय केँ लिए ठिठक गई। उसके गालों पर्र गुलाबी लाली दौड़ गई औऱ उसने अपनी नज़रें झुकालीं। वो समझ गई कि आर्यन किसदिन कि बातकर रहा हैं।
अंजलि नें एक् गहरी औऱ लज्जा भरी सांसली। उसने आर्यन केँ सीने पऱ अपनी उंगलियां फिराते हुएदबी आवाज़ मे सच उगलना शुरुआत किया।
"आर्यन। वोँ बुखार नहि थां, वोँ मेरे अंदर कि बरसों कि दबी हुईँ हवस कां उबाल थां। मे नहाकर निकली थि औऱ आईने केँ सामने स्वयं कों देखरही थि। अचानक मुझे महसूस हुआ कि मेरायह गोरा जिस्म बेकार जारहा हैं। कोई नहि हैं जोँ इसेछुए, जोँ इसे अपनी बाहों मे भींचे। "
"मे बैड पऱ लेट गई औऱ आँखें बंद करके सोचने लगी कि काश.काश कोई जवान मर्दआए औऱ मुझे अपनी मर्दानगी सें कुचलदे। मे उससमय अपने हि हाथों सें स्वयं कों सहलारही थि। मेरी उंगलियां मेरे स्तनों औऱ जांघों केँ बीचउस स्थान खेलरही थीं जहाँआज तेरा७ इंच कां फौलाद राजकर रहा हैं। "
"जब तुँ कमरे मे आया औऱ तूने मेरे माथे पऱ हाथरखा, तौ मुझे एक् बिजली कां झटकालगा। तेरा वोँ कोमल औऱ जवानहाथ। मुझे वोँ किसी 'बेटे' कां हाथ नहि, बल्कि एक् 'मर्द' कां स्पर्श लगा। मेरा जिस्म उस टाइमसच मे तपरहा थां, पऱ वोँ बीमारी नहि, बल्कि तेरेलिए वोँ 'भूख' थि जौ उसदिन पहलीबार मेरे चेहरे पर्र साफ़दिख रही थि। "
अंजलि नें शरमाते हुएआगे कहा, "जब तुँ चला गय़ा, तोँ मेरी हालत औऱ खराब होँ गई। मे चादर कों अपने दांतों सें काटरही थि औऱ तेरानाम लेकर स्वयं कों शांत करने कि कोशिश कररही थि। तुम्हें लगा मे बीमार हूं, पर्र असल मे मे तेरेउस जवान शरीर केँ लिए बेचैनी रही थि जिसे मे आज अपनी बाहों मे लिएहुए हूं। "
आर्यन ये सुनकर दंगरह गय़ा। उसेअब समझआया कि जिसे वो ममता कि बेबसी समझरहा थां, वो असल मे एक् महिला कि कामुक पुकार थि। उसने अंजलि केँ चेहरे कों ऊपर उठाया। "मतलब.उस दिन सें हि आपकेदिल मे यहसभी चलरहा थां?"
अंजलि नें मुस्कुराकर उसके होंठों कों छुआ। "शायद उससे भि पहले सें। बसउसदिन वोँ आग बेकाबू हौ गई थि। औऱ देख.आज उसीआग नें हम् दोनों कों एक् कर दिया। "
आर्यन कि आँखों मे एक् अजीब सि चमक थि, जैसे वो उस पुराने मंज़र कों फिन सें जीना चाहता हौ। उसने अंजलि कि कमर कों थोडा औऱ लगभग खींचते हुए शरारत सें कहा, "मां। जौ आप् उसदिन अकेले मे कररही थीं, क्याँ वोँ आप् अभि मेरे सामने कर सकती हें? मे देख्ना चाहता हूं कि मेरी बेबाक मां अपनी प्यास केसे बुझाती हैं। "
अंजलि नें जैसे हि ये सुना, उसके चेहरे पर्र एक् हयाभरी मुस्कान दौड़ गई। उसने अपनी गर्दन घुमाकर दीवार पऱ टंगी घड़ी कि ओर देखा। सुइयां रात केँ १२ पर्र मिलरही थीं।
अंजलि नें एक् ठंडी सांसली औऱ आर्यन केँ गाल कों थपथपाते हुए बड़े प्रेम सें बोलि:
"मेरे पागल शहजादे। देख, रात केँ १२बज चुके हें। तुम्हारी तरफकल सुभह जल्द उठकर कॉलेज जानां हैं, तेरी पढ़ाई कां नुकसान मे कभी बर्दाश्त नहि करूँगी। औऱ मुझे भि सुभह उठकरघऱ केँ ढेरों काम निपटाने हें औऱ अपनेकाम पर्र जानां हैं। "
अंजलि नें अपनी रेशमी आवाज़ मे आगेकहा, "औऱ देख.आज रात तूने मुझे जितना निचोड़ा हैं, औऱ जिसतरह सें मैंने तेरे७ इंच केँ फौलाद कि पूजा कि हैं, उसकेबाद मेरे जिस्म मे अब एक् उंगली हिलाने कि भि ताकत नहि बची। आज रात कां यहनशा हि बहुत हैं हमेंकल तक ज़िंदा रखने केँ लिए। "
अंजलि नें आर्यन कि आँखों मे झाँका, "तूँ जौ मांगरहा हैं, वोँ मे तुम्हे अवश्य दिखाऊँगी। औऱ शायद उससे कहीं अधिक। पर्र आज नहि। आज हमें अपनी नींद पूरी करनी हैं ताकिकल हम् फिन सें दुनिया केँ सामने एक् आदर्श 'मां औऱ बेटा' बनकर खड़े हौ सकें, जबकि हमारे अंदरयह राज़दफन रहे। "
अंजलि नें आर्यन कां हाथ पकड़कर उसे अपनी छाती केँ बीचरख लिया। "अब चुपचाप आँखें बंदकर औऱ सोजा। कल सुभह तुम को एक् नई ताज़गी केँ संग उठना हैं। "
आर्यन नें थोड़ी सि मासूमियत केँ संग अपना मुंह फुलाया, पर्र वो जानता थां कि मां सहीकह रही हैं। उसने अंजलि केँ माथे कों चूमा औऱ उसे अपनी बाहों केँ घेरे मे लेँ लिया। अंजलि नें अपनी टांग आर्यन कि टांगों केँ ऊपरडाल दि, औऱ वे दोनों एक्-दूसरे कि सांसों कि गर्माहट महसूस करनेलगे।
बाहर् सन्नाटा थां, पऱ कमरे केँ अंदरदो रूहें अपनीजीत औऱ तृप्ति कां जश्नमना रहीथीं। ७इंच केँ उस शैतान कों भि अब शांति मिल गई थि, औऱ अंजलि केँ चेहरे पर्र वो चैन थां जोँ बरसों बादउसे नसीबहुआ थां।
Doctor मां – New Episode
सुभह कि पहली किरण अभि खिड़की केँ पर्दों कों ठीक सें चीर भि नहि पाई थि कि ५:००बजे आर्यन कि आँखखुल गई। कमरे मे हल्की नीली रोशनी औऱ सन्नाटा थां, जिसमें मात्र अंजलि कि धीमी औऱ लयबद्ध सांसों कि आवाज़ सुनाई देरही थि।
आर्यन नें धीरे-धीरे सें अपनी गर्दन घुमाई औऱ अपनेबगल मे सोई हुईँ अंजलि कों निहारने लगा। रात केँ उस भीषण तूफ़ान केँ बाद, अंजलि अब शांत समंदर जैसीलग रही थि।
अंजलि कां सिर आर्यन केँ एक् बाजू पर्र थां। उसके बिखरे हुए कालेबाल उसके गोरे कंधों औऱ तकिए पर्र फैलेहुए थें। बिना किसी मेकअप केँ, भोर कि उस कच्ची रोशनी मे अंजलि कां चेहरा किसी दूधिया संगमरमर जैसाचमक रहा थां। उसके होंठ थोड़े खुलेहुए थें औऱ चेहरे पर्र एक् ऐसी शांति थि जौ आर्यन नें पहलेकभी नहि देखी थि।
अंजलि केँ जिस्म पऱ अब भि कोई कपड़ा नहि थां, उसनेबस एक् पतली सफेद चादरओढ़ रखी थि जौ उसकीकमर तक खिसक गई थि। उसकी काली ब्रा फर्श पर्र बेजान पड़ी थि। आर्यन कि नज़रें अंजलि केँ उन उभरेहुए सीनों पर्र ठहरगईं जोँ चादर केँ ऊपर सें साफ़झलक रहे थें। रात केँ उस 'लावे' केँ कुछ सूखे निशान अब भि उसकी त्वचा पर्र एक् विजय-चिह्न कि तरहदिख रहे थें।
आर्यन नें बिनाउसे जगाए, बहोत धीरे-धीरे सें अपनी उंगली उसकीनाक कि नोक पर्र फिराई। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि येवही महिला हैं जिसने रात कों गालियां सुनते हुए उसके७ इंच केँ फौलाद कों अपनेकंठ तक उतार लिया थां। अभि वो मात्र एक् मासूम, थकी हुई औऱ संतुष्ट मम्मी लगरही थि।
अंजलि केँ शरीर कि उस भीनी-भीनी खुशबू औऱ उस नग्नता कों लगभग सें देखकर, आर्यन केँ ७इंच केँ सिपाही नें एक् बारफिन सिर उठाना शुरुआत कर दिया। नेकर केँ अंदर वो फिन सें अपनी स्थान बनाने लगा थां। आर्यन कां मन किया कि वो अभि अंजलि कों जगादे औऱ सुभह कि पहली पारी शुरुआत करे, मगर उसे अंजलि कि वोँ बातयाद आँ गई— "तुम्हे कॉलेज जानां हैं। "
आर्यन नें स्वयं पर्र काबू पाया औऱ झुककर अंजलि केँ माथे कों बड़े हि सम्मान औऱ प्रेम केँ संग चूमा। अंजलि नें नींद मे हि थोड़ी सि करवट बदली औऱ आर्यन केँ हाथ कों औऱ कसकर पकड़ लिया, जैसे वो ड्रीम्स मे भि उसे कहीं जाने नहि देना चाहती थि।
आर्यन कों अहसास हुआ कि ये नाता मात्र जिस्मानी नहि रह गय़ा हैं; ये एक् ऐसी 'ज़रूरत' बन गय़ा हैं जोँ अब उनकी ज़िंदगी कां ऑक्सीजन हैं।
आर्यन नें बहोत कोशिश कि कि वो दोबारा सोजाए औऱ अपनी उत्तेजना कों शांतकर लें, मगर नींदअब उसकी आँखों सें कोसों दूरजा चुकी थि। १० मिनट तक वो बसछत कों निहारता रहा, पऱ उसके जिस्म केँ निचले हिस्से मे मचरही खलबली उसे सुकून नहि लेनेदे रही थि।
सुभह केँ ५:१० होँ रहे थें। कमरे कि मद्धम रोशनी मे आर्यन नें महसूस किया कि उसका७ इंच कां मूसल नेकर केँ अंदर एक् ज़बरदस्त 'मॉर्निंग इरेक्शन' कि वजह सें पत्थर कि तरह सख्त होँ चुका थां। वो नेकर केँ कपड़े कों चीरकर बाहर् आने केँ लिए बेताब थां औऱ हर धड़कन केँ संग ऊपर-नीचे उछलरहा थां।
आर्यन नें चादर केँ अंदर अपनाहाथ डाला औऱ उस गर्म लोहे कों छुआ। वो इतनागरम औऱ तनाहुआ थां कि आर्यन कों अपनी जांघों केँ बीच एक् मीठा सां दर्द महसूस होनेलगा। रात कि थकान केँ बाद भि, सुभह कि इस ताज़गी नें उसकी मर्दानगी कों फिन सें जवानकर दिया थां।
आर्यन नें अपनी नज़रें घुमाईं औऱ अंजलि कों देखा। वो अभि भि गहरी नींद मे थि, उसका सफ़ेद जिस्म चादर केँ नीचे अधखुला सां थां। उसकी सांसों कि गर्मी आर्यन केँ चेहरे तक पहुँच रही थि। अंजलि कि भारी छाती चादर केँ ऊपर सें हि आर्यन कि बांहों कों छूरही थि, जिससे उसकेअंग कि अकड़न औऱ भि बढ़ गई।
आर्यन केँ दिमाग़ मे दो बातें चलरही थीं। एक् तरफ अंजलि कां वोँ हुक्म कि उसे कॉलेज जानां हैं औऱ अंजलि कों आराम करने देना हैं, औऱ दूसरी तरफ उसके७ इंच केँ शैतान कि वोँ पुकार जौ कहरही थि कि 'अभि नहि तौ कभी नहि'।
आर्यन नें बहोत धीरे-धीरे सें अपनी उंगलियां अंजलि कि कमर कि ढलान पर्र रखीं। उसका रेशमी जिस्म सुभह केँ समय औऱ भि रसीले लगरहा थां। उसने अपनी मज़बूत जांघ कों अंजलि कि कोमल जांघों केँ बीच धीरे-धीरे सें सरकाया, जिससे उसकाखड़ा हुआअंग अंजलि केँ कूल्हों केँ पिछले हिस्से सें जाकरसट गय़ा।
अंजलि नें नींद मे हि एक् छोटी सि कराहभरी औऱ अपनीपीठ कों थोडा सां पीछे कि ओर धकेला, जिससे वो अनजाने मे हि आर्यन केँ उस७इंच केँ खंभे पर्र औऱ भि ज्यादा रगड़ खानेलगी। आर्यन कि सांसें अब रुकने लगीथीं। वो समझ गय़ा थां कि आज कि सुभह केवल अलार्म सें नहि, बल्कि एक् नए धमाके केँ संग होने वाली हैं।
सुभह कि उस मखमली खामोशी मे आर्यन कां संयमअब पूरीतरह जवाबदे चुका थां। अंजलि करवट लेकरसोई थि औऱ उसकीपीठ आर्यन कि तरफ थि। चादर केँ नीचेउन दोनों केँ जिस्मों कि गर्माहट एक्-दूसरे मे घुलरही थि।
आर्यन नें बहोत हि सावधानी सें अपनाहाथ अंजलि कि पतलीकमर पऱ रखा। उसकी रेशमी त्वचा सुभह केँ टाइम औऱ भि रसीले औऱ ठंडी महसूस होँ रही थि। मगर नीचे कां मंजरकुछ औऱ हि थां।
आर्यन कां ७इंच कां फौलाद नेकर केँ अंदर पत्थर कि तरह सख्त हौ चुका थां। उसने धीरे-धीरे सें अपनीकमर कों आगे कि ओर धकेला। चादर केँ अंदर सें हि, उसकागरम औऱ तनाहुआ अंग अंजलि कि भारी औऱ गोल गांड़ कि दरार केँ ठीक बीचों-बीच जाकरसट गय़ा।
जैसे हि उसगरम लोहे कां दबाव अंजलि केँ मांसल कूल्हों पऱ पड़ा, आर्यन केँ पूरे जिस्म मे एक् सिहरन दौड़ गई। नेकर कां कपड़ा बीच मे होने केँ बावजूद, अंजलि केँ शरीर कि गोलाई औऱ उसकी कोमलता आर्यन कों पागलकर रही थि। उसने अपनीकमर कों हल्का सां हिलाया, जिससे उसकाअंग अंजलि कि गांड़ पर्र ऊपर-नीचे रगड़ खानेलगा।
इस अचानक आएगरम दबाव नें अंजलि कि नींद कि गहराई कों हिला दिया। उसने नींद मे हि एक् लंबी औऱ दबी हुईँ कराहभरी— "उफ़्फ़."। उसे महसूस होँ रहा थां कि पीछे सें कोईगरम औऱ सख्त चीज़ उसकेबदन मे धंसने कि कोशिश कररही हैं।
आर्यन रुका नहि। उसने अपनेहाथ सें अंजलि केँ एक् मम्मों कों चादर केँ ऊपर सें हि कसकर भींच लिया औऱ अपनीकमर कां दबाव औऱ बढ़ा दिया। अब उसका७ इंच कां मूसल अंजलि कि गांड़ कि गहराई कों नापने लगा थां। अंजलि नें अपनी आँखें पूरीतरह नहि खोलीं, पऱ उसके चेहरे पर्र एक् मदहोश मुस्कान तैर गई। वो समझ गई कि उसका'शेर' सुभह-सुभह फिन सें शिकार पर्र निकल पड़ा हैं।
अंजलि नें नींदभरी आवाज़ मे फुसफुसाया, "आर्यन। अभि तौ ५ हि बजे हें। सोनेदे नाँ कमीने." मगरसंग हि उसने अपनी गांड़ कों थोडा औऱ पीछे कि ओर झटका दिया, जिससे वो आर्यन केँ उस उफनते हुएअंग पऱ औऱ भि ज़ोर सें दब गई।
"मम्मी। यहअब नहि सोने वाला। इसे अब आपका हि सहारा चाहिए, " आर्यन नें उसकेकान केँ पास अपनीगरम सांसें छोड़ते हुएकहा।
सुभह कि उस सुनहरी औऱ शांत बेला मे आर्यन केँ सब्र कां बांधअब पूरीतरह टूट चुका थां। कमरे मे छाई हल्की नीली रोशनी अबउस कामुक दृश्य कि गवाह बनने वाली थि, जिसकी शुरुआत रात केँ अंधेरे मे हुईँ थि।
आर्यन नें बहोत हि सावधानी सें, ताकि अंजलि कि कच्ची नींद पूरीतरह न् टूटजाए, अपने हाथों कों नीचे लें जाकर नेकर केँ इलास्टिक कों पकड़ा। उसने आहिस्ता उसे अपनी जांघों सें नीचे सरकाया औऱ पैरों सें झटककर पलंग केँ नीचे फेंक दिया। अब वो पूरीतरह निर्वस्त्र थां, औऱ उसका७ इंच कां काला फौलाद सुभह कि ताज़गी पाकर पत्थर सें भि ज्यादा सख्त औऱ गरम होँ चुका थां।
आर्यन नें करवटली औऱ धीरे-धीरे सें अंजलि कि पीठ सें पूरीतरह सट गय़ा। जैसे हि उसके नंगे औऱ गरमअंग कां सीधा स्पर्श अंजलि कि कोमल औऱ मखमली गांड़ कि दरार सें हुआ, अंजलि केँ पूरे जिस्म मे बिजली कां एक् ज़बरदस्त झटका दौड़ा। कपड़े कि वोँ मामूली सि दीवार भि अबहट चुकी थि। आर्यन कां अंग अंजलि केँ कूल्हों कि गहराई मे किसीगरम लोहे कि तरह धंसने लगा।
आर्यन नें अपना एक् हाथ अंजलि कि पतलीकमर केँ नीचे सें डाला औऱ उसके भारी औऱ नग्न mammay कों अपनी मज़बूत हथेली मे भर लिया। अंजलि नें रात कों अपनी ब्रा उतार दि थि, इसलिये आर्यन कि उंगलियों कों अबउनगरम औऱ रसीले गोलों कां सीधा अहसास मिलरहा थां। उसने अपनी उंगलियों सें अंजलि केँ सख़्त होँ चुके निप्पलों कों मरोड़ना शुरुआत किया, जिससे अंजलि केँ मुँह सें एक् लंबी हल्की चीख निकली— "आह्ह्ह। आर्यन। तूँ। तूँ नहि मानेगा?"
आर्यन कां दूसरा हाथ अंजलि कि चिकनी औऱ गोरीपीठ पर्र रेंगने लगा। वो अपनी उंगलियों केँ पोरों सें उसकी रीढ़ कि हड्डी केँ पास छोटे-छोटे घेरेबना रहा थां। अंजलि केँ जिस्म कि गंध औऱ उस रेशमी छुअन नें आर्यन कों औऱ भि पागलकर दिया। उसने अपनीकमर कों एक् हल्का सां झटका दिया, जिससे उसका७ इंच कां मूसल अंजलि कि गांड़ केँ बीचों-बीच बुरीतरह रगड़ खानेलगा।
अंजलि नें अब अपनी आँखें अधखुली करलीथीं। उसे महसूस हौ रहा थां कि पीछे सें उसका जवान बेटा उसे अपनी मर्दानगी केँ घेरे मे लें चुका हैं। आर्यन कि गरम सांसें उसकी गर्दन पर्र गिररही थीं। अंजलि नें अपनी गांड़ कों थोडा औऱ पीछे कि ओर धकेला ताकि वो आर्यन केँ उस नंगे औऱ उत्तेजित अंग कों अपनी गहराई मे औऱ साफ़ महसूस करसके।
"मम्मी। सुभह कि यह ताज़गी औऱ आपकायह जिस्म। मुझे कॉलेज जाने नहि देंगे, " आर्यन नें उसकेकान कि लौ कों अपने होंठों मे दबाते हुए फुसफुसाया।
सुभह कि उस ठंडी खामोशी मे आर्यन नें अंजलि केँ जिस्म केँ सबसे संवेदनशील 'स्विच' कों पहचान लिया थां। किसी भि स्त्री केँ लिएकान कि लौ औऱ गर्दन कां पिछला हिस्सा वोँ बिजली केँ तार होते हें, जिन्हें छूते हि बदन मे हवस कां करंट दौड़ने लगता हैं।
आर्यन नें अंजलि कि गर्दन केँ पास अपना चेहरा झुकाया। अंजलि कि त्वचा सें सुभह कि ताज़गी औऱ उसकी अपनी एक् मदहोश कर देने वाली खुशबू आँ रही थि।
आर्यन नें बहोत हि धीरे-धीरे सें अंजलि केँ दाहिने कान कि कोमललौ कों अपने होंठों केँ बीचदबा लिया। उसने अपनीगरम ज़ुबान कि नोक सें उस कोमल हिस्से कों कुरेदना शुरुआत किया। जैसे हि उसकी गीली ज़ुबान नें कान केँ उस छिद्र केँ पास हलचल मचाई, अंजलि केँ पूरे जिस्म मे बिजली कां एक् ज़बरदस्त झटकालगा। उसकी उंगलियाँ बैड कि चादर कों कसकर भींचने लगीं। "आह्ह्ह। आर्यन। मम्म.यह क्याँ कररहा हैं." अंजलि केँ मुँह सें एक् दबी हुईँ आह निकली जौ साफ़बता रही थि कि उसका आत्म-नियंत्रण अब समाप्त हौ रहा हैं।
आर्यन यहीं नहि रुका। उसने अपने दांतों सें कान कि लौ कों हल्का सां दबाया औऱ फिन अपने होंठों कों नीचे सरकाते हुए अंजलि कि सुराहीदार गर्दन पर्र लें आया। कान केँ ठीक नीचे कां वोँ हिस्सा, जहाँ नसें साफ़ धड़कती हें, आर्यन नें वहा अपनीगरम सांसें छोड़ीं। अंजलि कां जिस्म धनुष कि तरहतन गय़ा। जब आर्यन नें अपनी ज़ुबान कों उसकी गर्दन कि ढलान पर्र ऊपर सें नीचे कि ओर रगड़ा, तोँ अंजलि केँ रोंगटे खड़े होँ गए।
अंजलि कि गर्दन अब पूरीतरह सें आर्यन केँ हवाले थि। आर्यन नें अपने होंठों सें उसकी गर्दन पऱ छोटे-छोटे 'लव बाइट्स' देना शुरुआत किया। हर चुंबन केँ संग अंजलि कि हल्की चीख औऱ गहरी होतीजा रही थि। "उफ़्फ़। रुकजा। मेरा। मेरादम निकल जाएगा। आर्यन!" अंजलि कि आवाज़ अब भारी होँ गई थि। उसे महसूस होँ रहा थां कि उसकी योनि मे एक् अजीब सि हलचल औऱ गीलापन बढ़रहा हैं। गर्दन कां वोँ स्पर्श सीधे उसकी जांघों केँ बीच जाकर धमाका कररहा थां।
ऊपर सें गर्दन कां यह चमत्कार चलरहा थां औऱ नीचे आर्यन कां ७इंच कां नंगा औऱ सख्त फौलाद अंजलि कि गांड़ कि दरार मे लगातार दबावबना रहा थां। अंजलि कों ऐसालग रहा थां जैसे वो दो पाटों केँ बीचपिस रही हैं—एक् तरफ गर्दन पर्र आर्यन केँ होंठों कि आग औऱ दूसरी तरफ पीछे सें उस विशालकाय अंग कि बेताबी।
अंजलि नें अपनासिर पीछे कि ओर झुका दिया ताकि आर्यन कों उसकी गर्दन कां औऱ ज्यादा हिस्सा मिलसके। उसकी सांसें अब किसी भागते हुए घोड़े कि तरहचल रहीथीं। गर्दन पऱ होने वालीउस रगड़ नें उसकेमन कों सुन्न कर दिया थां। वो अब एक् 'मम्मी' नहि, बल्कि एक् प्यासी मादा थि जोँ अपनेनर केँ हर प्रहार कों झेलने केँ लिए बेताब थि।
उसकी आँखें उलट गई थीं औऱ उसकेहाथ अब आर्यन केँ बालों मे उलझकर उसे अपनी गर्दन कि ओर औऱ ज़ोर सें खींचरहे थें।
सुभह कि उस मद्धम रोशनी मे अंजलि कां संयमअब पूरीतरह राख हौ चुका थां। आर्यन केँ होठों नें उसकी गर्दन पऱ जोँ आग लगाई थि, उसने अंजलि केँ शरीर मे एक् ऐसी प्यास पैदाकर दि कि वो अब औऱ सीधी नहि लेटपा रही थि। उसने एक् गहरीआह भरी औऱ खाट पऱ पेट केँ बल औंधे मुँहलेट गई।
अंजलि केँ पेट केँ बल लेटते हि उसकी भारी औऱ गोल गांड़ हवा मे एक् कामुक पहाड़ कि तरहउभर आई। आर्यन नें एक् समय भि जाया नहि किया औऱ वो एक् शिकारी कि तरह अंजलि केँ ऊपर आँ गय़ा।
जैसे हि आर्यन कां पूरावजन अंजलि कि मखमली पीठ पऱ पड़ा, अंजलि केँ मुँह सें एक् मदहोश कर देने वालीअहह निकली। आर्यन कां ७इंच कां नंगा औऱ सख्त फौलाद अब अंजलि कि गांड़ कि गहरी दरार मे बिल्कुल स्लिम हौ चुका थां। बिना किसी कपड़े केँ, उसगरम लोहे कां सीधा स्पर्श अंजलि केँ कूल्हों कि कोमलता कों चीररहा थां।
आर्यन नें अंजलि कि गर्दन केँ पिछले हिस्से पऱ अपने होठों कां चमत्कार शुरुआत किया। उसने अपनीजीभ सें अंजलि केँ कान केँ पीछे वाले हिस्से कों चाटना औऱ चूसना शुरुआत किया। अंजलि कां जिस्म बैड पर्र मछली कि तरह फड़फड़ाने लगा। जब आर्यन नें उसकेकान केँ छेद मे अपनीगरम सांसें फूंकी, तौ अंजलि केँ हाथबैड कि चादर कों फाड़ने कि हद तक भिंचगए। "आह्ह्ह। आर्यन। मम्म.मार डालेगा क्याँ। उफ़्फ़ यहजलन!"
आर्यन अब उसकी गर्दन सें नीचे उतरा औऱ उसकी गोरी औऱ चिकनी पीठ पऱ अपने होठों कि छाप छोड़ने लगा। वो अपनी ठुड्डी कि हल्की रगड़ सें अंजलि कि रीढ़ कि हड्डी पऱ बिजली केँ झटकेदे रहा थां। अंजलि कि पीठ पसीने कि बारीक बूंदों सें चमकरही थि, औऱ आर्यन कां हर चुंबन उस तपिश कों औऱ बढ़ारहा थां।
ऊपर जहाँ होठों कां खेलचल रहा थां, वहीं नीचे आर्यन अपनीकमर सें अंजलि कि गांड़ पर्र लगातार दबावबना रहा थां। उसका७ इंच कां अंग अंजलि केँ कूल्हों केँ बीच किसीगरम सलाख कि तरह रगड़खा रहा थां। अंजलि कों महसूस होँ रहा थां कि वो पीछे सें किसी बहोत हि ताकतवर चीज़ सें कुचली जारही हैं। उसने अपनीकमर कों थोडा ऊपर कि ओर झटका दिया, जिससे वो आर्यन केँ उस उफनते हुएअंग पर्र औऱ भि गहराई सें दब गई।
अंजलि कां चेहरा तकिए मे धंसाहुआ थां औऱ उसकी सिसकारियां कमरे कि खामोशी कों चीररही थीं। आर्यन कां मर्दाना हाथअब अंजलि केँ बालों कों अपनी मुट्ठी मे भर चुका थां, जिससे वो उसकासिर पीछे घसीटकर उसकी गर्दन कों औऱ भि बेबाकी सें चूमरहा थां।
"मम्मी। आज कॉलेज नहि। आज मात्र आपकीयह मखमली पीठ औऱ मेरायह फौलाद बातें करेंगे, " आर्यन नें उसकीपीठ पर्र एक् गहरा'लव बाइट' देतेहुए फुसफुसाया।
सुभह कि उस मखमली रोशनी मे अबकोई खेल नहि, बल्कि एक् मुकम्मल 'शिकार' शुरुआत हौ चुका थां। आर्यन नें अपनी पकड़ कों किसी जंगली शिकारी कि तरह औऱ भि मज़बूत कर लिया। अंजलि अब पूरीतरह सें उसके भारी शरीर केँ नीचेदबी हुईँ थि, उसकी साँसें तेज़थीं औऱ बदन पसीने सें भीगने लगा थां।
आर्यन नें एक् लम्हा भि ज़ाया नहि किया औऱ अपनी ताकत कां अहसास कराते हुए अंजलि कि कलाइयों कों अपने मज़बूत हाथों मे दबोच लिया।
आर्यन नें अंजलि केँ दोनों हाथऊपर कि ओर खींचे औऱ उन्हें पलंग केँ सिरहाने कि ओर लें जाकर कसकर पकड़ लिया। अंजलि अब पूरीतरह सें बेबस थि, उसका सीनाबैड पर्र रगड़खा रहा थां औऱ उसकेहाथ आर्यन कि मुट्ठी मे कैद थें। आर्यन नें उसकेकान केँ पास अपनी भारी औऱ गरम आवाज़ मे फुसफुसाया, "मम्मी। आज आप् कहीं नहि जा सकतीं। आज आपकीइस मखमली कैद मे मेरायह ७इंच कां शैतान अपनी सल्तनत बनाएगा। "
हाथों कों काबू करने केँ बाद आर्यन नें अपना मुँह अंजलि कि सुराहीदार गर्दन पऱ टिका दिया। वो पागलों कि तरह उसकी गर्दन केँ पिछले हिस्से कों चूसरहा थां। अंजलि केँ मुँह सें सिसकारियां किसी म्यूज़िक कि तरह निकलरही थीं— "आह्ह्ह। आर्यन। मम्म। छोड़। बहोत। बहोत तेज़ होँ रहा हैं सभी!" गर्दन पऱ आर्यन केँ होठों कि तपिश अंजलि केँ दिमाग़ कि नसें हिलारही थि।
आर्यन नें अपने घुटनों औऱ पैरों कां इस्तेमाल करतेहुए अंजलि कि गोरी औऱ चिकनी जांघों कों आरामसे बाहर् कि ओर फैलाना शुरुआत किया। अंजलि नें थोड़ी सि रुकावट कि कोशिश कि, पर्र आर्यन केँ भारीबदन औऱ उसके पैरों केँ दबाव केँ सामने उसकी एक् नं चली। जैसे-जैसे उसकी जांघें फैलती गईं, उसकी बुर अब आर्यन केँ ७इंच केँ नंगे औऱ सख्त फौलाद केँ सीधे निशाने पर्र आँ गई।
अब अंजलि पूरीतरह सें 'एक्स' (X) केँ आकार मे खुली हुइ थि। आर्यन नें अपनीकमर कों थोडा औऱ नीचे धकेला। उसका गर्म औऱ नसों सें भराहुआ अंगअब अंजलि कि बुर केँ गीले औऱ रेशमी दरवाज़े पर्र दस्तक देनेलगा थां। उस नंगे स्पर्श नें अंजलि केँ जिस्म मे बिजली कि लहर दौड़ा दि। उसे महसूस हौ रहा थां कि अब उसके७ इंच केँ 'बेटे' कां ज्वालामुखी फटने केँ लिए बिल्कुल सही स्थान पऱ पहुँच चुका हैं।
अंजलि कां चेहरा तकिए मे दबाहुआ थां, उसकी आँखें चढ़ चुकीथीं औऱ वो अपनीकमर कों अनजाने मे हि ऊपर कि ओर झटकादे रही थि ताकिउस गर्म लोहे कां प्रवेश औऱ गहरा हौ सके। आर्यन नें उसकी गर्दन पर्र एक् गहरा निशान छोड़ते हुए अपनीकमर कों औऱ भि कस लिया।
"सजधजकर हौ जाओ मम्मी। आज आपकायह ७इंच कां बेटा अपनी सारी प्यास आपकीकोख मे हि बुझाएगा, " आर्यन नें दहाड़ते हुएकहा।
सुभह कि उस मखमली खामोशी मे अब वो घड़ी आँ गई थि, जहाँ मर्यादा औऱ रिश्तों कि सारी सीमाएं एक् ज़बरदस्त विस्फोट केँ संग टूटने वालीथीं। अंजलि पेट केँ बल लेटी हुइ थि, उसके दोनों हाथ आर्यन कि मज़बूत मुट्ठियों मे ऊपर कि ओर जकड़े हुए थें औऱ उसके गोरे पांव आर्यन कि जांघों केँ दबाव सें पूरीतरह फैल चुके थें।
कमरे कि हवा मे एक् भारी तनाव थां। अंजलि कि बुर अब पूरीतरह सें गीली औऱ गुदगुदी होँ चुकी थि, जौ अपने७ इंच केँ 'शिकारी' कां स्वागत करने केँ लिए बेताब थि। आर्यन नें अपनीकमर कों थोडा पीछे खींचा औऱ सही निशाना साधा।
आर्यन नें अपनी पूरी ताकत बटोरी औऱ एक् हि भीषण झटके केँ संग अपना पूरा७ इंच कां नसों सें भराहुआ औऱ खौलता हुआ फौलाद अंजलि कि रेशमी गुफा मे उतार दिया। वो प्रहार इतना गहरा औऱ अचानक थां कि अंजलि कां बदन पलंग सें एक् इंचऊपर उछल गय़ा। ७इंच कां वो मूसल अंजलि कि गहराई कि दीवारों कों चीरता हुआ सीधे उसकी बच्चेदानी सें जा टकराया।
अंजलि केँ मुँह सें एक् ऐसीचीख निकली जौ कमरे कि दीवारों कों चीरती हुईँ सन्नाटे मे गूंजउठी— "आह्ह्ह्ह्ह्ह। आर्यन। मां मर गई! उफ़्फ़। यह क्याँ। इतना बड़ा। आह्ह्ह!" अंजलि कि आँखों केँ आगे अंधेरा छा गय़ा औऱ उसकी गर्दन पीछे कि ओरझटक गई। वो दर्द औऱ चरमसुख कां ऐसा संगम थां जिसने अंजलि केँ रूह कों कंपा दिया। उसे महसूस हुआ कि उसके अंदरकुछ बहोत हि विशाल औऱ गर्मसमा चुका हैं जोँ उसकीकोख तक पहुँच गय़ा हैं।
आर्यन नें अपनीकमर कां दबाव ज़रा भि कम नहि किया। उसने अपने७ इंच केँ अंग कों अंजलि कि बुर मे पूरीजड़ तक धंसा दिया। अंजलि केँ गोल औऱ भारी कूल्हे अब आर्यन कि जांघों सें ज़ोर सें टकरारहे थें। 'चप-चप' कि एक् गीली आवाज़ कमरे मे गूँजने लगी, जोँ इसबात कि गवाह थि कि ७इंच कां शैतान अब अपनी सल्तनत केँ अंदर पूरीतरह सें कब्ज़ा कर चुका हैं।
अंजलि कां बदनअब थरथरा रहा थां। वो दर्द सें कराहरही थि, पर्र उस दर्द मे एक् ऐसा'नशा' थां जौ उसे औऱ गहराई कि मांग करने पऱ मजबूर कररहा थां। उसकेहाथ जौ आर्यन कि पकड़ मे थें, अब औऱ भि ज़ोर सें भिंचगए। "आर्यन। तूने। तूने मुझे फाड़ दिया। आह्ह्ह। औऱ अंदर। औऱ अंदरडाल अपनायह गर्म लोहा!
आर्यन नें अंजलि केँ बालों कों पीछे सें पकड़ा औऱ उसकी गर्दन पऱ अपने दांत गड़ादिए। ७इंच कां वो फौलाद अब अंजलि कि गहराई मे अपनी स्थान बना चुका थां। हर धड़कन केँ संग आर्यन कां अंग अंजलि कि नसों कों झकझोर रहा थां। सुभह कि पहली किरण नें देखा कि एक् बेटा अपनी हि मां कों उसकी फंतासियों केँ चरम पऱ पहुंचा चुका हैं।
"आज आप् कहीं नहि जा पाएंगी मम्मी। आजयह७ इंच आपकीरूह मे उतर चुका हैं, " आर्यन नें भारी आवाज़ मे दहाड़ते हुए अपनीकमर कों तेज़ी सें चलाना शुरुआत कर दिया।
सुभह कि उस सुनहरी रोशनी मे अबकोई मर्यादा शेष नहि बची थि। आर्यन कां ७इंच कां फौलाद अंजलि कि कोमल गुफा केँ भीतर अपनी पूरी लंबाई केँ संगसमा चुका थां। अंजलि पेट केँ बल लेटी हुई थि, उसकीकमर ऊपरउठी हुइ थि औऱ आर्यन एक् जंगली शिकारी कि तरह उसकेऊपर सवार थां।
आर्यन नें अब अपनी रफ्तार बढ़ा दि थि। कमरे मे जिस्मों केँ टकराने कि 'चप-चप-चप' कि आवाज़ें किसी युद्ध केँ नगाड़े कि तरह गूँजरही थीं। मगर इसबार आर्यन केवल अपनेबदन सें नहि, बल्कि अपनी ज़ुबान सें भि अंजलि कि रूह कों छलनीकर रहा थां।
आर्यन नें अंजलि केँ दोनों हाथों कों खाट केँ सिरहाने पर्र औऱ भि ज़ोर सें जकड़ लिया। वो पागलों कि तरह अपनीकमर कों पीछे खींचता औऱ फिन पूरे ज़ोर सें अपना७ इंच कां मूसल अंजलि कि गहराई मे दे मारता। हर धक्का इतना गहरा थां कि अंजलि कां पूरा जिस्म खाट पऱ आगे कि ओर खिसक जाता। "आह्ह्ह। आर्यन। मम्म.मर जाऊँगी। धीरे-धीरे। उफ़्फ़!" अंजलि कि सिसकारियां अब अनियंत्रित होँ चुकीथीं।
आर्यन नें अंजलि केँ कान केँ पास झुककर अपनी भारी औऱ मर्दाना आवाज़ मे उसे ज़लील करना शुरुआत किया। "बता। कैसीलग रही हैं अपने बेटे कि यह७इंच कि लाठी?रात कों बहोत शेरनी बनरही थि नाँ। अबबोल! बोल कि तुँ केवल मेरी रखैल हैं। मेरी गंदी मम्मी!"
अंजलि केँ लिएये सभी असहनीय होताजा रहा थां। एक् तरफ उसकेबदन केँ सबसे नाजुक हिस्से पर्र ७इंच केँ गरम लोहे कां भीषण प्रहार हौ रहा थां, औऱ दूसरी तरफ 'मां' केँ पवित्र रिश्ते कों सरेआम नीलाम करने वाले वोँ शब्द। "आर्यन। नहि। ऐसामत बोल। आह्ह्ह!" अंजलि रोरही थि, पऱ उसके आँसूदुख केँ नहि, बल्कि उसचरम सुख केँ थें जौ अपमान कि आग सें पैदा हौ रहा थां।
आर्यन नें अंजलि केँ कूल्हों पर्र एक् ज़ोरदार तमाचा जड़ा— 'चटाक'। गोरी गांड़ पर्र उंगलियों केँ लाल निशान उभरआए। "चुपरह रांड!आज तेरी तेरी औकात बताऊंगा। तूने हि कहा थां नाँ कि तुझेही गालियां मनपसंद हें? तोँ सुन। तूँ मेरी वोँ कुतिया हैं जिसे मे रोज़ सुभहइसी तरह अपनी मर्दानगी केँ नीचे कुचलूंगा। "
अंजलि कां चेहरा पसीने औऱ आँसुओं सें भीग चुका थां। वो थर-थर कांपरही थि। आर्यन कि गालियां उसके कानों मे पिघले हुए सीसे कि तरहउतर रहीथीं, जिससे उसकी बुर मे कामुकता कां सैलाब औऱ भि बढ़ गय़ा। वो अपनीकमर कों पागलों कि तरह गोल-गोल घुमारही थि ताकिउस ७इंच केँ प्रहार कां कोई भि कोना खाली नं रहजाए।
"हाँ.हाँ आर्यन। मे तेरी हि हूं। मुझे औऱ गालियां दे। मुझे औऱ ज़ोर सें कूट। फाड़दे अपनीइस मम्मी कों!" अंजलि अब पूरीतरह सें टूट चुकी थि औऱ उसने अपने बेटे कि उस वहशी मर्दानगी केँ आगे घुटने टेकदिए थें।
सुभह कि उस मखमली रोशनी मे अब हैवानियत औऱ हवस कां नंगानाच शुरुआत हौ चुका थां। कमरे मे केवल गोश्त सें गोश्त केँ टकराने कि 'चटाक-चटाक' औऱ अंजलि कि बेकाबू सिसकारियों कि आवाज़ गूँजरही थि। आर्यन अब पूरीतरह सें अपनी मां केँ जिस्म औऱ रूह पऱ कब्ज़ा कर चुका थां।
आर्यन नें अपनी रफ्तार कों किसी मशीन कि तरह तेज़कर दिया। उसका७ इंच कां फौलाद अंजलि कि कोमल गुफा केँ अंदर-बाहर् किसीगरम आरी कि तरहचल रहा थां।
आर्यन नें अंजलि केँ बाल पीछे सें झटके औऱ उसकेकान मे दहाड़ते हुए बोला, "देख अपनीइस हालत कों। केसे कुतिया कि तरह मेरे नीचेदबी हुईँ हैं! मनपसंद आँ रहा हैं नाँ अपने हि जवान बेटे कां यह कड़क लन्ड ? बोल.बोल कि तेरे पति कां ५इंच कां खिलौना इस७इंच केँ लोहे केँ सामने कुछ भि नहि हैं!"
गालियों केँ संग-संग आर्यन कां हाथअब अंजलि कि भारी औऱ गोल गाँड़ पऱ कहर बरपारहा थां। 'चटाक। चटाक। चटाक!'हर तमाचे केँ संग अंजलि कि गोरी त्वचा पऱ लाल निशान उभररहे थें। "यह लेँ रांड!यह उन गंदी फंतासियों कि सज़ा हैं जोँ तूने बरसों सें दबारखी थि। आज तेरायह बेटा तेरी वोँ हरसुख देगा जौ तूने मम्मी बनकरखो दिया थां। "
अंजलि केँ लिएये सभी असहनीय होताजा रहा थां। एक् तरफ बुर केँ अंदर वोँ ७इंच कां फौलादी धक्का, दूसरी तरफ गाँड़ पर्र पड़ते करारे तमाचे, औऱ कानों मे पड़ते वोँ 'लन्ड' औऱ 'रांड' जैसे शब्द। इन सबने मिलकर अंजलि केँ अंदर कामुकता कां ऐसा ज्वालामुखी फोड़ दिया कि वो पागलों कि तरह थरथराने लगी।
अंजलि कि आँखों केँ आगे सितारे नाचने लगे। उसके पांव कांपने लगे औऱ उसकी योनि कि दीवारें आर्यन केँ ७इंच केँ अंग कों पागलों कि तरह भींचने लगीं। "आह्ह्ह। आर्यन। हाँ। मे। मे तेरी रांड हूं! मार मुझे। औऱ ज़ोर सें कूट। उफ़्फ़ यह तेरा गर्म लन्ड। मुझे ख़त्म कर देगा! मे। मे आँ रही हूं। आह्ह्ह्ह्ह!"
अंजलि कां बदनअब धनुष कि तरहतन गय़ा थां। वो अपनेपरम सुखके बिल्कुल लगभग थि। आर्यन कि गालियों नें उसकेमन केँ उस हिस्से कों झकझोर दिया थां जहाँ केवल आदिमहवस बसती हैं। वो बैड कि चादर कों अपने दांतों सें काटरही थि औऱ उसकी गाँड़ अनजाने मे हि पीछे कि ओर झटकेमार रही थि ताकि वो उस७इंच केँ 'मूसल' कों अपनीकोख केँ औऱ लगभग महसूस करसके।
"सजधजकर हौ जा मम्मी। अब तेरायह बेटा अपना सारा गर्म लावा तेरीइस गंदी गुफा मे भरने वाला हैं!" आर्यन नें अपनी अंतिम औऱ सबसे तेज़ पारी शुरुआत करतेहुए कहा।
सुभह कि उस सुनहरी रोशनी मे जबहवस अपने सबसे ऊँचे शिखर पर्र थि, रूम 'चप-चप' कि आवाज़ों औऱ अंजलि कि मदहोश सिसकारियों सें गूँजरहा थां। अंजलि चरमसुख कि उस दहलीज पऱ खड़ी थि जहाँ सें वापसी मुमकिन नहि थि। उसका पूराबदन कांपरहा थां, उसकी बुर कि दीवारें आर्यन केँ ७इंच केँ फौलाद कों पागलों कि तरह भींचरही थीं। उसे लगरहा थां कि अगले हि लम्हा आर्यन कां गरम लावा उसकीकोख कों जला देगा।
मगर तभी, आर्यन नें कुछऐसा किया जिसकी कल्पना अंजलि नें अपने बुरे सपनों मे भि नहि कि थि।
आर्यन नें अचानक अपनीकमर कि रफ्तार रोकी औऱ एक् झटके मे अपना नंगा औऱ कड़क लन्ड अंजलि कि गहराई सें बाहर् खींच लिया। हवा केँ संपर्क मे आते हि वो ७इंच कां मूसल औऱ भि लाल औऱ भयानक दिखने लगा। आर्यन बिनाकुछ बोले, झटके सें अंजलि केँ ऊपर सें उतरा औऱ पलंग केँ साइड मे हाथ केँ सहारे सिर टिकाकर लेट गय़ा।
जैसे हि वो गरम लोहा बाहर् निकला, अंजलि कों महसूस हुआ जैसे उसकेबदन केँ अंदर सें उसकीरूह खींचली गई होँ। वो अधखुली अवस्था मे, अपनीउठी हुईँ गाँड़ केँ संग वहींजमी रह गई। उसकी बुर कि नसेंअब भि खालीहवा मे फड़करही थीं, जौ उस७इंच केँ दबाव केँ लिएतरस रहीथीं। "आँ। आर्यन? यह.यह क्याँ किया तूने?रुक क्यूं गय़ा?" अंजलि कि आवाज़ मे एक् अजीब सि बेबसी औऱ उतावलापन थि।
आर्यन चुपचाप लेटाहुआ अपनी मां केँ उस तड़पते हुए चेहरे कों निहार रहा थां। उसके चेहरे पऱ एक् विजेता जैसी मुस्कान थि। वो देख्ना चाहता थां कि उसकी मां, जौ उसे गालियां देने पर्र उकसारही थि, अबइस 'अधूरेपन' मे केसे तिलमिलाती हैं। उसकी नज़रें अंजलि कि उन कांपती हुई जांघों पर्र थीं जोँ अब भि फैलने कि कोशिश कररही थीं।
अंजलि केँ लिएये किसीमौत कि सज़ा सें कम नहि थां। जब एक् महिला चरमसुख केँ इतने लगभग हौ औऱ उसे वहीं छोड़ दियाजाए, तौ उसका जिस्म आग केँ गोले कि तरह तपने लगता हैं। "आर्यन। बेटा। प्लीज। ऐसेमत कर। मे। मे मर जाऊँगी। डाल नाँ अपनायह गरम लन्ड वापस। मुझे समाप्त करदे!" अंजलि अब गिड़गिड़ा रही थि। उसकी सिसकारियां अब रोने जैसी आवाज़ मे बदल गई थीं।
आर्यन नें ठंडे लहजे मे कहा, "क्यूं मम्मी? अभि तौ आप् गालियां सुनरही थीं। अभि तोँ आप् मेरी 'रांड'बनी हुई थीं। अब क्याँ हुआ?अब क्यूं इस७इंच केँ लिएऐसे उतावलापन रही हौ?" आर्यन कां ये व्यवहार अंजलि कि गरिमा कों पूरीतरह कुचलरहा थां। उसे अहसास हुआ कि आर्यन अब मात्र उसका जिस्म नहि, बल्कि उसकेमन औऱ उसकी बेचैनी केँ संग भि खेलरहा हैं।
अंजलि नें पलटकर आर्यन कि ओर देखा। उसकी आँखों मे हवस कि लाली औऱ आँसुओं कि नमी एक् संग थि। उसका चेहरा पसीने सें भीगाहुआ थां औऱ उसके होंठ कांपरहे थें। वो पलंग पर्र रेंगती हुइ आर्यन केँ पासआई औऱ उसकेउस खड़ेहुए ७इंच केँ अंग कों अपने हाथों मे भर लिया।
"तूँ बहोत निर्दयी हौ गय़ा हैं आर्यन। अधिक खतरनाक, " अंजलि नें उत्तेजना मे हांफते हुएकहा, "तुम्हे मजा आँ रहा हैं नां मुझेऐसे तड़पता देखकर?"
बहोत हि गरमागरम कामुक औऱ उत्तेजना सें भरपूर उन्मादक भाग हें भइया आनंद आँ गय़ा
Doctor मां – New Episode
इसबार मुझे अच्छा सां कमेंट कां इन्तेजा रहेगा औऱ अगलेभाग मे एक् सीक्रेट रिविल होने वाला हैं
सो दोस्तों इसबार अच्छा सां कमेंट करना
इनबॉक्स भि ओपन हैं
Doctor मां - Kahani ab aur interesting hogi
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